Category: International

  • 24 घंटे में दूसरी बार अमेरिका की ईरान पर एयर स्ट्राइक, सैन्य ठिकानों और ड्रोन केंद्रों को बनाया निशाना

    24 घंटे में दूसरी बार अमेरिका की ईरान पर एयर स्ट्राइक, सैन्य ठिकानों और ड्रोन केंद्रों को बनाया निशाना


    वॉशिंगटन। अमेरिका ने 24 घंटे के भीतर दूसरी बार ईरान में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित कई अहम ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई में ईरान के सैन्य निगरानी तंत्र, संचार प्रणाली, एयर डिफेंस साइट्स, ड्रोन भंडारण केंद्रों और समुद्री बारूदी सुरंग (माइन) बिछाने की क्षमताओं को निशाना बनाया गया।

    सिरिक के पास सुने गए धमाके

    ईरान के सरकारी मीडिया IRIB ने सैन्य सूत्रों के हवाले से बताया कि दक्षिणी शहर सिरिक के नजदीक विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। रिपोर्ट के मुताबिक कई प्रोजेक्टाइल एक दूरसंचार टावर से टकराए, हालांकि घटना से जुड़ी विस्तृत जानकारी तत्काल साझा नहीं की गई।

    युद्धविराम के बाद फिर बढ़ा तनाव

    अमेरिका ने शुक्रवार को भी ईरान के भीतर कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया था। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब हाल ही में वॉशिंगटन और तेहरान के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी थी। लगातार दूसरे दिन हुई अमेरिकी एयर स्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है।

    तेल टैंकर पर ड्रोन हमले का दिया जवाब

    अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने शनिवार तड़के वन-वे अटैक ड्रोन से पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर M/T Kiku को निशाना बनाया, जिससे युद्धविराम का उल्लंघन हुआ। CENTCOM के मुताबिक, यह टैंकर 20 लाख से अधिक बैरल कच्चा तेल लेकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहा था, तभी उस पर हमला किया गया।

    अमेरिकी सेना का कहना है कि शुक्रवार की कार्रवाई के बाद ईरान को युद्धविराम का पालन करने और तनाव कम करने का अवसर दिया गया था, लेकिन ताजा ड्रोन हमले के बाद जवाबी कार्रवाई करना आवश्यक हो गया।

    अमेरिका ने दी सतर्क रहने की चेतावनी

    CENTCOM ने अपने बयान में कहा कि होर्मुज से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है और अमेरिकी सेना क्षेत्र में पूरी तरह सतर्क तथा किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

    इससे पहले शुक्रवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों के साथ रडार ठिकानों को भी निशाना बनाया था। वॉशिंगटन का कहना है कि वह कार्रवाई 25 जून को सिंगापुर के झंडे वाले मालवाहक जहाज M/V Ever Lovely पर हुए कथित ईरानी ड्रोन हमले के जवाब में की गई थी।

    उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की चेतावनी

    बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान को आगे किसी भी सैन्य कार्रवाई से बचने की चेतावनी दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ईरान ने युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और अमेरिका ने उसका पालन किया। यदि समझौते को लेकर कोई मतभेद है तो उसे बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है, लेकिन हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा।

  • सेशेल्स में दिखी 'कार डिप्लोमेसी', राष्ट्रपति हर्मिनी संग पीएम मोदी की शानदार केमिस्ट्री

    सेशेल्स में दिखी 'कार डिप्लोमेसी', राष्ट्रपति हर्मिनी संग पीएम मोदी की शानदार केमिस्ट्री


    नई दिल्ली/विक्टोरिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर सेशेल्स पहुंचे, जहां उनका भव्य और आत्मीय स्वागत किया गया। सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी स्वयं एयरपोर्ट पहुंचे और प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच दिखाई दी सहज आत्मीयता और साथ की गई ‘कार यात्रा’ ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दौरे के अहम पलों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया। राष्ट्रपति हर्मिनी के साथ कार में सफर करते हुए दोनों नेता मुस्कुराते हुए बातचीत करते नजर आए। प्रधानमंत्री ने बताया कि वे राष्ट्रपति के साथ सेशेल्स नेशनल बोटैनिकल गार्डन की ओर जा रहे थे। दोनों नेताओं की यह सहज मुलाकात भारत और सेशेल्स के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक मानी जा रही है।

    एयरपोर्ट पर दिखा भारतीय संस्कृति का रंग

    सेशेल्स एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत के दौरान भारतीय संस्कृति की भी शानदार झलक देखने को मिली। गुजराती पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने कच्छ का लोकनृत्य प्रस्तुत कर माहौल को रंगारंग बना दिया। इस सांस्कृतिक प्रस्तुति की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रवासी भारतीय जिस तरह भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को विदेशों में भी जीवंत बनाए हुए हैं, वह अत्यंत प्रेरणादायक है।

    उन्होंने कलाकारों के साथ तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि विदेश में भारतीय संस्कृति का ऐसा जीवंत प्रदर्शन दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करता है।


    भारतीय समुदाय से भी मिले प्रधानमंत्री
    दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की। उन्होंने लोगों का अभिवादन स्वीकार किया और उनसे आत्मीय बातचीत की। प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय के सदस्य एयरपोर्ट पहुंचे थे और उनमें खासा उत्साह देखने को मिला।

    साझेदारी को नई ऊंचाई देने पर रहेगा फोकस

    प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति हर्मिनी को गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि सेशेल्स हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का एक महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार और करीबी मित्र है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच सहयोग, समुद्री सुरक्षा, विकास साझेदारी और लोगों के बीच संबंधों को और अधिक मजबूत बनाएगी।

    प्रधानमंत्री मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स की यात्रा पर हैं। वह राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर सेशेल्स की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ के समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस दौरे को हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक साझेदारी और ‘नेबरहुड फर्स्ट’ तथा ‘सागर’ नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • सेशेल्स में पीएम मोदी के स्वागत को लेकर भारतीय समुदाय उत्साहित, बोले- ऐतिहासिक होगा यह दौरा

    सेशेल्स में पीएम मोदी के स्वागत को लेकर भारतीय समुदाय उत्साहित, बोले- ऐतिहासिक होगा यह दौरा


    नई दिल्ली/विक्टोरिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो दिवसीय सेशेल्स दौरे को लेकर वहां रह रहे भारतीय समुदाय में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री के आगमन से पहले ही प्रवासी भारतीयों ने भव्य स्वागत की तैयारियां पूरी कर ली हैं। भारतीय समुदाय का मानना है कि यह दौरा केवल कूटनीतिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि भारत और सेशेल्स के बीच सांस्कृतिक तथा सामाजिक रिश्तों को भी नई ऊंचाई देने वाला साबित होगा।

    आईएएनएस से बातचीत में सेशेल्स में पिछले 15 वर्षों से रह रहे प्रवासी भारतीय भरत ईरानी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए भारतीय समुदाय ने विशेष तैयारियां की हैं। उन्होंने कहा कि कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि भारतीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत की जा सके। उनके अनुसार पूरे भारतीय समुदाय में उत्साह का माहौल है और इस खुशी को शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं है।

    एक अन्य प्रवासी भारतीय ने बताया कि वह वर्ष 2019 से सेशेल्स में रह रहे हैं और पहली बार उन्हें किसी भारतीय प्रधानमंत्री के स्वागत का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए बेहद गौरव और सम्मान का क्षण है। उनका विश्वास है कि प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के बाद भारत और सेशेल्स के संबंध पहले से अधिक मजबूत होंगे और दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर खुलेंगे।

    भारतीय मूल के एक अन्य नागरिक ने भी अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि उन्हें विदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने और उनका स्वागत करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने इसे अपने जीवन का यादगार पल बताया और कहा कि यह दौरा भारतीय समुदाय के लिए गर्व का विषय है।

    उन्होंने बताया कि वह वर्ष 2016 से सेशेल्स में रह रहे हैं और यहां के लोग भारतीय समुदाय का पूरा सम्मान करते हैं। स्थानीय समाज भारतीय संस्कृति और परंपराओं को अपनाने का भी प्रयास करता है, जिससे दोनों देशों के लोगों के बीच आत्मीयता और विश्वास लगातार बढ़ रहा है।

    प्रवासी भारतीयों ने भारत और सेशेल्स के बीच सीधी हवाई सेवा शुरू करने की भी मांग उठाई। उनका कहना है कि डायरेक्ट फ्लाइट शुरू होने से पर्यटन, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क को नई गति मिलेगी। इससे दोनों देशों के आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध और अधिक मजबूत होंगे।

    भारतीय समुदाय का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी और सेशेल्स के नेतृत्व के बीच पहले से ही मजबूत संबंध हैं। सेशेल्स के राष्ट्रपति भी भारत का दौरा कर चुके हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा द्विपक्षीय रिश्तों को नई दिशा देने के साथ-साथ हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को भी और मजबूत करेगी।

    प्रवासी भारतीयों ने उम्मीद जताई कि यह दौरा भारत और सेशेल्स के बीच व्यापार, निवेश, समुद्री सुरक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। उनका कहना है कि दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंध इस यात्रा के बाद और अधिक प्रगाढ़ होंगे तथा भारतीय समुदाय को भी इससे नई पहचान और सम्मान मिलेगा।

  • भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव से प्रभावित अमेरिका, मार्को रुबियो बोले- पीएम मोदी के नेतृत्व में नई ऊंचाइयों पर देश

    भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव से प्रभावित अमेरिका, मार्को रुबियो बोले- पीएम मोदी के नेतृत्व में नई ऊंचाइयों पर देश


    नई दिल्ली /वाशिंगटन। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की खुलकर सराहना करते हुए कहा है कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से उभरती वैश्विक शक्तियों में शामिल हो चुका है और इस बदलाव के पीछे पीएम मोदी का नेतृत्व महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन भारत को अमेरिका के सबसे करीबी और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारों में गिनता है तथा दोनों देशों के संबंध लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहे हैं।

    व्हाइट हाउस में दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में रुबियो ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आर्थिक विकास की नई गति हासिल की है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी भूमिका पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है। उनके अनुसार आज वैश्विक स्तर पर होने वाले बड़े फैसलों में भारत की राय को गंभीरता से सुना और महत्व दिया जाता है। यह बदलाव केवल आर्थिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि कूटनीति सुरक्षा तकनीक और वैश्विक रणनीति के स्तर पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

    रुबियो ने कहा कि अमेरिका भारत को केवल एक सहयोगी देश नहीं बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मजबूत व्यक्तिगत संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों नेताओं के बीच विश्वास और संवाद ने द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती दी है। उनके मुताबिक दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बेहतर तालमेल भविष्य में भी साझेदारी को नई दिशा देगा।

    अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा करते हैं और यही समानता दोनों देशों के रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है जबकि अमेरिका सबसे पुराना लोकतंत्र है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं और कई अहम क्षेत्रों में मिलकर काम किया जा रहा है।

    रुबियो ने बताया कि दोनों देश अर्थव्यवस्था आपूर्ति श्रृंखला महत्वपूर्ण खनिज ऊर्जा सुरक्षा रक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा जैसे विषयों पर लगातार साझेदारी मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी क्षेत्रों में साझा हित मौजूद हैं और दोनों सरकारें मिलकर भविष्य की चुनौतियों का समाधान तलाश रही हैं।

    उन्होंने भारतीय मूल के अमेरिकी समुदाय की भी सराहना करते हुए कहा कि यह समुदाय दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। उनके अनुसार भारतीय अमेरिकी समाज ने अमेरिका के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक तथा आर्थिक संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान की है।

    रुबियो ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत और अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि रक्षा व्यापार अत्याधुनिक तकनीक ऊर्जा सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा रणनीति जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग लगातार विस्तार पा रहा है। यही वजह है कि वाशिंगटन भारत को 21वीं सदी का सबसे महत्वपूर्ण साझेदार मानता है और दोनों देशों के संबंध भविष्य में वैश्विक स्थिरता तथा आर्थिक विकास के लिए अहम भूमिका निभाएंगे।

  • पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप अच्छे मित्र, दोनों की सोच और कार्यशैली में समानता: अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर

    पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप अच्छे मित्र, दोनों की सोच और कार्यशैली में समानता: अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर


    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच लगातार मजबूत होते रणनीतिक संबंधों के बीच भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मित्रता को दोनों देशों की साझेदारी की सबसे मजबूत आधारशिला बताया है। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच वर्षों पुराना भरोसा और व्यक्तिगत तालमेल ही द्विपक्षीय रिश्तों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    व्हाइट हाउस में दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर चल रही किसी भी तरह की नकारात्मक अटकलों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध बेहद मजबूत स्थिति में हैं और इस मजबूती का सबसे बड़ा कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच गहरी मित्रता है। उनके अनुसार दोनों नेता लंबे समय से एक-दूसरे के अच्छे मित्र हैं और यह रिश्ता आने वाले समय में भी इसी तरह मजबूत बना रहेगा।

    गोर ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच नियमित संवाद और सीधे संपर्क ने व्यापार, रक्षा, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सकारात्मक प्रगति सुनिश्चित की है। उन्होंने बताया कि भारत आने के बाद से उनका उद्देश्य भी दोनों देशों के बीच लगातार संवाद बनाए रखना और ऐसे अवसर तलाशना रहा है जो दोनों पक्षों के लिए समान रूप से लाभदायक हों।

    उन्होंने हाल ही में फ्रांस में हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात का भी उल्लेख किया। गोर स्वयं उस बैठक में मौजूद थे। उनके अनुसार यह बैठक एक घंटे से अधिक समय तक चली और बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी तथा कई अन्य द्विपक्षीय विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने इसे अत्यंत सार्थक और सकारात्मक बैठक बताया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली की सराहना करते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि वे अत्यंत ऊर्जावान, सक्रिय और परिणाम देने वाले नेता हैं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की कार्यशैली काफी मिलती-जुलती है। दोनों स्वयं हर महत्वपूर्ण विषय पर सक्रिय रहते हैं, तेज निर्णय लेने में विश्वास रखते हैं और काम को परिणाम तक पहुंचाने पर विशेष जोर देते हैं।

    गोर के अनुसार यदि प्रधानमंत्री मोदी किसी कार्य को पूरा करना चाहते हैं तो वे तुरंत उस दिशा में आगे बढ़ते हैं और राष्ट्रपति ट्रंप भी इसी तरह काम करना पसंद करते हैं। उनका मानना है कि यही समान सोच दोनों नेताओं के बीच मजबूत विश्वास और मित्रता का आधार बनी हुई है।

    राष्ट्रपति ट्रंप के भारत के प्रति दृष्टिकोण पर बोलते हुए गोर ने कहा कि ट्रंप आज भी भारत और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति बेहद सकारात्मक सोच रखते हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप अक्सर अपनी पहली भारत यात्रा को याद करते हैं और भारत की ऊर्जा, संस्कृति तथा यहां के लोगों की गर्मजोशी की चर्चा करते हैं। उनके अनुसार भारत यात्रा का अनुभव ट्रंप के लिए बेहद खास रहा है।

    सर्जियो गोर ने यह भी खुलासा किया कि हाल ही में ओवल ऑफिस में हुई मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने उनसे स्वयं पूछा कि वे भारत कब जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से निमंत्रण मिलने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप भारत आने को लेकर बेहद उत्साहित हैं और भविष्य में इस यात्रा को लेकर सकारात्मक माहौल बना हुआ है।

    भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापार, रक्षा, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, हिंद-प्रशांत क्षेत्र, आर्थिक सहयोग, सुरक्षा और उभरती तकनीकों जैसे क्षेत्रों में साझेदारी लगातार मजबूत हुई है। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच नियमित संवाद और आपसी विश्वास को ही इस रणनीतिक रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है।

  • भारत-अमेरिका रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, अगले साल ट्रंप के भारत दौरे की तैयारी शुरू

    भारत-अमेरिका रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, अगले साल ट्रंप के भारत दौरे की तैयारी शुरू


    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच लगातार मजबूत होते रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों के बीच एक बड़ी कूटनीतिक खबर सामने आई है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वर्ष 2027 की शुरुआत में भारत का दौरा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि ट्रंप प्रशासन इस संभावित यात्रा की तैयारियों पर काम कर रहा है और इसे दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

    व्हाइट हाउस में दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में मार्को रुबियो ने कहा कि वह स्वयं भी इस वर्ष के अंत से पहले भारत आने की योजना बना रहे हैं। उनका उद्देश्य राष्ट्रपति ट्रंप के प्रस्तावित दौरे की तैयारियों की समीक्षा करना और दोनों देशों के बीच जारी रणनीतिक एवं आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि सभी तैयारियां तय समय पर पूरी होती हैं तो अगले वर्ष की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप भारत की यात्रा कर सकते हैं।

    रुबियो ने कहा कि अमेरिका इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है और दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद लगातार जारी है। उनके अनुसार भारत और अमेरिका के रिश्ते पहले से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में हैं तथा हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    उन्होंने हाल ही में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई मुलाकात का भी उल्लेख किया। रुबियो के अनुसार दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत बेहद सकारात्मक रही और इससे द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा मिली है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच व्यक्तिगत स्तर पर भी मजबूत संबंध हैं जो दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती प्रदान करते हैं।

    अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत और अमेरिका के बीच जारी व्यापार वार्ता पर भी सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने बताया कि दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। बातचीत अंतिम चरण में है और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। उनका मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा तथा निवेश और व्यापार के नए अवसर खोलेगा।

    रुबियो ने क्वाड देशों के सहयोग को भी भविष्य की वैश्विक रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ता सहयोग हिंद प्रशांत क्षेत्र में शांति स्थिरता और सुरक्षित समुद्री व्यवस्था सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रहा है। इसके अलावा उभरती प्रौद्योगिकी मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और रक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी चारों देश मिलकर काम कर रहे हैं।

    राष्ट्रपति ट्रंप का पिछला भारत दौरा फरवरी 2020 में हुआ था जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अहमदाबाद में आयोजित नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम में भाग लिया था। इसके बाद नई दिल्ली में दोनों नेताओं के बीच कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ताएं हुई थीं। उस यात्रा के बाद भी दोनों नेताओं के बीच नियमित संवाद जारी रहा और रक्षा तकनीक ऊर्जा व्यापार तथा हिंद प्रशांत क्षेत्र में सहयोग लगातार मजबूत होता गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राष्ट्रपति ट्रंप का प्रस्तावित भारत दौरा तय समय पर होता है तो यह केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं होगी बल्कि भारत अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक अवसर साबित हो सकता है। व्यापार समझौते से लेकर रक्षा सहयोग और वैश्विक भू-राजनीतिक मुद्दों तक कई महत्वपूर्ण विषय इस यात्रा के केंद्र में रहने की संभावना है।

  • भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई उड़ान, ट्रेड एग्रीमेंट पर अंतिम चरण की बातचीत जारी

    भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई उड़ान, ट्रेड एग्रीमेंट पर अंतिम चरण की बातचीत जारी


    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौता अब अपने अंतिम चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच अधिकांश महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अब केवल कुछ बिंदुओं को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। उनका कहना है कि कानूनी मसौदे की भाषा तय होते ही यह समझौता अगले कुछ सप्ताह या महीनों में औपचारिक रूप से पूरा हो सकता है।

    व्हाइट हाउस में दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में सर्जियो गोर ने कहा कि हाल ही में नई दिल्ली में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के साथ हुई बैठकों में उन्होंने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने इन वार्ताओं को बेहद सकारात्मक और सार्थक बताते हुए कहा कि अब बातचीत अंतिम चरण में है और दोनों पक्ष समझौते की भाषा तथा शेष तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

    गोर ने इस प्रक्रिया की तुलना अन्य वैश्विक व्यापार समझौतों से करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच यह वार्ता अपेक्षाकृत बहुत तेजी से आगे बढ़ी है। उन्होंने बताया कि इस समझौते पर करीब डेढ़ वर्ष से काम चल रहा है जबकि दुनिया के कई बड़े व्यापार समझौतों को पूरा होने में दो दशक तक का समय लग चुका है। उनके अनुसार दोनों देशों ने कम समय में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है और यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

    हालांकि उन्होंने समझौते के संभावित प्रावधानों या संवेदनशील विषयों पर विस्तार से टिप्पणी करने से परहेज किया लेकिन इतना जरूर कहा कि दोनों सरकारें ऐसे समाधान की दिशा में काम कर रही हैं जिससे भारत और अमेरिका दोनों को समान रूप से लाभ मिले। उन्होंने कहा कि जब साझा हितों पर सहमति बन जाती है तभी एक सफल व्यापार समझौता संभव हो पाता है।

    सर्जियो गोर ने दोनों देशों के राजनीतिक संबंधों पर भी विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच वर्षों से मजबूत व्यक्तिगत संबंध रहे हैं और यही रिश्ते भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी की सबसे मजबूत नींव हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत आने के लिए उत्सुक हैं और प्रधानमंत्री मोदी का निमंत्रण स्वीकार करने की इच्छा भी जता चुके हैं। हालांकि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के व्यस्त कार्यक्रम के कारण यात्रा की तारीख अभी तय नहीं हुई है लेकिन भारत उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर बना हुआ है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते आर्थिक संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं बल्कि रक्षा, उन्नत प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, शिक्षा, निवेश और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। दोनों देश आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई देने के साथ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और निवेश के अवसरों को भी विस्तार देने की दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं।

    भारत और अमेरिका फिलहाल व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच बाजार तक पहुंच आसान बनाना, शुल्क संबंधी बाधाओं को कम करना, निवेश को प्रोत्साहित करना और द्विपक्षीय व्यापार को नई गति देना है। माना जा रहा है कि इस शुरुआती समझौते के बाद दोनों देश भविष्य में एक व्यापक व्यापार ढांचे की दिशा में भी आगे बढ़ेंगे, जिससे दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक साझेदारी और मजबूत होगी।

  • हिंद महासागर से दक्षिण-पूर्व एशिया तक भारत का बढ़ा रणनीतिक प्रभाव, थाईलैंड पहुंचा भारतीय नौसैनिक बेड़ा

    हिंद महासागर से दक्षिण-पूर्व एशिया तक भारत का बढ़ा रणनीतिक प्रभाव, थाईलैंड पहुंचा भारतीय नौसैनिक बेड़ा


    नई दिल्ली । भारतीय नौसेना ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति को और मजबूत करते हुए पूर्वी बेड़े के तीन प्रमुख युद्धपोत आईएनएस उदयगिरी, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति को ऑपरेशनल तैनाती के तहत थाईलैंड के सत्ताहिप बंदरगाह भेजा है। इस महत्वपूर्ण पोर्ट कॉल का उद्देश्य भारत और थाईलैंड के बीच समुद्री सहयोग को नई गति देना, रक्षा संबंधों को मजबूत बनाना और दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी तालमेल को और बेहतर करना है।

    पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल आलोक आनंद के नेतृत्व में पहुंचे भारतीय नौसैनिक दल का रॉयल थाई नेवी ने गर्मजोशी से स्वागत किया। यह यात्रा भारत की एक्ट ईस्ट नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मित्र देशों के साथ बढ़ते रणनीतिक सहयोग का अहम हिस्सा मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच वर्षों से चले आ रहे समुद्री संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए इस दौरे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    थाईलैंड प्रवास के दौरान भारतीय और थाई नौसेना के बीच कई पेशेवर गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें क्रॉस डेक विजिट, ऑपरेशनल चर्चा, सामरिक अनुभवों का आदान-प्रदान, खेल प्रतियोगिताएं और सामुदायिक कार्यक्रम शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना, संयुक्त अभियानों की क्षमता मजबूत करना और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को और प्रभावी बनाना है।

    यह पोर्ट कॉल भारतीय नौसेना की स्वदेशी क्षमता को भी दुनिया के सामने प्रदर्शित करता है। आईएनएस उदयगिरी, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति अत्याधुनिक तकनीक, स्वदेशी डिजाइन और आधुनिक निर्माण प्रणाली का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इनके जरिए भारत यह संदेश भी दे रहा है कि वह रक्षा उत्पादन और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक विश्वसनीय तथा सक्षम साझेदार के रूप में तेजी से उभर रहा है।

    इससे पहले भारतीय नौसेना के यही युद्धपोत वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी की तीन दिवसीय सफल यात्रा पूरी कर चुके हैं। 22 से 24 जून 2026 के बीच हुए इस दौरे में भारतीय और वियतनाम पीपुल्स नेवी के बीच कई महत्वपूर्ण पेशेवर संवाद, सामरिक अभ्यास और उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की गई थीं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और रक्षा सहयोग को लेकर अपने साझा दृष्टिकोण को और मजबूत किया।

    वियतनाम यात्रा के दौरान दोनों नौसेनाओं ने ऑपरेशनल अनुभव साझा किए और समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर समन्वय पर चर्चा की। वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई बैठकों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षित समुद्री मार्ग और साझा रणनीतिक हितों को लेकर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

    भारतीय नौसेना की लगातार बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत क्षेत्रीय सुरक्षा, मुक्त और सुरक्षित समुद्री मार्गों तथा मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। थाईलैंड और वियतनाम जैसे रणनीतिक साझेदारों के साथ बढ़ता नौसैनिक सहयोग न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देगा बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सामूहिक सुरक्षा को भी नई दिशा प्रदान करेगा।

  • पाकिस्तान में 500 किलो मानव प्लेसेंटा बरामद, भेड़ की नाल बताकर विदेश भेजने की थी तैयारी

    पाकिस्तान में 500 किलो मानव प्लेसेंटा बरामद, भेड़ की नाल बताकर विदेश भेजने की थी तैयारी


    नई दिल्ली । पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से मानव अंगों की कथित तस्करी से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी एफआईए ने दावा किया है कि उसने छापेमारी के दौरान करीब 500 किलोग्राम मानव प्लेसेंटा यानी गर्भनाल बरामद की है। जांच एजेंसियों के अनुसार इस प्लेसेंटा को भेड़ की गर्भनाल बताकर विदेश भेजने की तैयारी की जा रही थी। मामले में तीन चीनी नागरिकों और दो पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें हिरासत में लिया गया है।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी अस्पतालों से मानव प्लेसेंटा एकत्र कर उसे पशु उत्पाद के रूप में घोषित करते थे ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी तस्करी की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए सभी नमूनों को वैज्ञानिक जांच के लिए अस्पताल भेजा गया है ताकि यह पुष्टि की जा सके कि बरामद सामग्री वास्तव में मानव प्लेसेंटा ही है।

    जांच एजेंसियों के मुताबिक यह पाकिस्तान में अपनी तरह का पहला बड़ा मामला माना जा रहा है। आरोप है कि इस नेटवर्क के सदस्य इस्लामाबाद और रावलपिंडी के अस्पतालों से प्रत्येक प्लेसेंटा बेहद कम कीमत पर खरीदते थे और बाद में उसे विदेश भेजकर भारी मुनाफा कमाने की योजना बनाते थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें पूछताछ के लिए रिमांड पर भेज दिया गया।

    क्या होता है प्लेसेंटा

    प्लेसेंटा गर्भावस्था के दौरान बनने वाला एक अस्थायी अंग होता है जो मां और गर्भ में पल रहे शिशु के बीच पोषण और ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। यह गर्भनाल के माध्यम से भ्रूण से जुड़ा रहता है और बच्चे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रसव के बाद इसकी आवश्यकता समाप्त हो जाती है और यह शरीर से बाहर निकल जाता है।

    किस काम आता है प्लेसेंटा

    दुनिया के कई देशों में प्लेसेंटा का उपयोग चिकित्सा अनुसंधान और कुछ विशेष उपचारों में किया जाता है। इससे प्राप्त ऊतकों का इस्तेमाल गंभीर जलन, गहरे घाव, अल्सर और आंखों से जुड़ी कुछ सर्जरी में किया जाता है। कुछ शोधों में प्लेसेंटा से प्राप्त जैविक तत्वों के संभावित चिकित्सीय उपयोगों पर भी अध्ययन जारी हैं। हालांकि इसके संग्रह, संरक्षण और उपयोग के लिए अधिकांश देशों में सख्त कानूनी और नैतिक नियम लागू हैं।

    कुछ देशों में पारंपरिक मान्यताओं के आधार पर प्लेसेंटा का उपयोग अन्य उद्देश्यों के लिए भी किया जाता है, लेकिन ऐसे उपयोग वैज्ञानिक रूप से सार्वभौमिक रूप से स्वीकार नहीं किए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मानव जैविक ऊतकों का किसी भी प्रकार का व्यापार या निर्यात केवल संबंधित कानूनों और चिकित्सा मानकों के तहत ही किया जाना चाहिए।

    फिलहाल पाकिस्तान की जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित तस्करी का अंतिम गंतव्य कौन सा देश था और इसमें किन लोगों या संस्थाओं की भूमिका हो सकती है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो यह मामला मानव जैविक सामग्री की अवैध तस्करी के सबसे बड़े मामलों में शामिल हो सकता है।

  • शोएब अख्तर के भाई के जनाजे में दिखे लश्कर ए तैयबा से जुड़े आतंकी, सवालों में घिरे पूर्व क्रिकेटर

    शोएब अख्तर के भाई के जनाजे में दिखे लश्कर ए तैयबा से जुड़े आतंकी, सवालों में घिरे पूर्व क्रिकेटर


    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान में आतंकवाद का दंश इतनी गहराई तक समाज में घुस चुका है कि वहां आप पता नहीं लगा सकते कि कौन सामान्य आदमी है और कौन आतंक परस्त. अब नामी क्रिकेटर रहे शोएब अख्तर के बारे में भी बड़ी खबर सामने आ रही है. पता चला है कि शोएब अख्तर के भाई शाहिद अख्तर के जनाजे में लश्कर ए तैयबा (LeT) से जुड़े आतंकी भी शामिल हुए. शाहिद अख्तर का हाल ही में निधन हो गया. खुद शोएब अख्तर ने अपने एक्स और इंस्टाग्राम अकाउंट पर यह खबर शेयर की थी.

    इस्लामाबाद में 24 जून को हुआ सुपुर्दे खाक
    रावलपिंडी एक्सप्रेस के नाम से मशहूर शोएब अख्तर के भाई शाहिद की मौत हार्ट फेलियर या लंग फेलियर से हुई मानी जा रही है. वे उनके पब्लिक रिलेशंस मैनेजर के रूप में भी काम करते थे. उनकी मौत पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया. इस्लेमाबाद के कब्रिस्तान में 24 जून को उनकी नमाज-ए-जनाजा पढ़ी गई. उस जनाजे में परिवार, खेल जगत की हस्तियां और स्थानीय लोग शामिल हुए.

    नमाजे जनाजा में दिखाई दिए लश्कर के आतंकी
    जब इस जनाजे की तस्वीरें और वीडियो सामने आया तो हंगामा मच गया. वीडियो में साफ दिखा कि आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उसके राजनीतिक विंग पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (PMML) के आतंकी भी सुपुर्दे खाक के कार्यक्रम में शामिल हुए थे. खासतौर पर PMML इस्लामाबाद का अध्यक्ष इनाम उर रहमान कंबोह भी वीडियो में दिखा.

    शोएब अख्तर ने अभी तक साध रखी है चुप्पी
    विवाद तब ज्यादा बढ़ गया, जब लश्कर से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने खुद इन वीडियो को शेयर किया. यह घटना ऐसे वक्त में सामने आई है, जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव पहले से ही तेज है. सोशल मीडिया पर सवाल उठे कि पाकिस्तानी समाज में आतंकी नेटवर्क किस कदर समाज में अपनी जड़ जमा चुका है. शोएब अख्तर ने इस विवाद पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है.

    संयुक्त राष्ट्र की ओर से घोषित आतंकी संगठन है LeT
    बताते चलें कि लश्कर ए तैयबा संयुक्त राष्ट्र की ओर से घोषित प्रतिबंधित आतंकी संगठन है, जिस पर 26/11 मुंबई हमलों समेत कई बड़े आतंकी हमलों का आरोप है. वहीं PMML को इसका राजनीतिक मुखौटा माना जाता है. इसके जरिए वह पाकिस्तान के राजनीतिक तंत्र में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रहा है. साथ ही दुनिया में दुष्प्रचार भी कर रहा है कि वह आतंकी नहीं बल्कि राजनीतिक संगठन है.