Category: International

  • विजय के तमिलनाडु CM बनने पर श्रीलंका राष्ट्रपति का बयान: रिश्तों में नई उम्मीदें और पुरानी चिंताएँ

    विजय के तमिलनाडु CM बनने पर श्रीलंका राष्ट्रपति का बयान: रिश्तों में नई उम्मीदें और पुरानी चिंताएँ



    नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में सी. जोसेफ विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के नेतृत्व में बनी नई सरकार को न केवल भारत में, बल्कि पड़ोसी देश श्रीलंका में भी गंभीरता से देखा जा रहा है। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने विजय को बधाई देते हुए दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने की बात कही है।

    श्रीलंका राष्ट्रपति का बयान: सहयोग और भविष्य की उम्मीद
    कोलंबो से जारी बयान में राष्ट्रपति दिसानायके ने कहा कि श्रीलंका और तमिलनाडु का रिश्ता केवल राजनीतिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से गहराई से जुड़ा हुआ है।

    उन्होंने कहा,भारत और श्रीलंका की साझेदारी भविष्य में आर्थिक विकास और क्षेत्रीय स्थिरता के नए अवसर पैदा कर सकती है। हम तमिलनाडु के साथ मिलकर समृद्धि और प्रगति की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।
    राष्ट्रपति ने विजय और तमिलनाडु की जनता को शुभकामनाएं देते हुए सहयोग की इच्छा भी जताई।

    तमिलनाडु की राजनीति का श्रीलंका से गहरा संबंध
    तमिलनाडु और श्रीलंका के बीच राजनीतिक और सामाजिक संबंध हमेशा संवेदनशील रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण श्रीलंका में रहने वाली तमिल आबादी है, जिनके मुद्दे दशकों से दोनों देशों के बीच चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।

    श्रीलंका के उत्तरी प्रांत में तमिल समुदाय की बड़ी आबादी है, जहां विजय के मुख्यमंत्री बनने की खबर के बाद उत्साह और जश्न का माहौल देखा गया। स्थानीय नेताओं ने भी उन्हें बधाई दी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि तमिलनाडु की राजनीति का प्रभाव सीमा पार तक महसूस किया जाता है।

    प्रमुख चिंता के मुद्दे
    हालांकि रिश्तों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन कुछ पुरानी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं
    श्रीलंका में तमिल समुदाय के अधिकार और पुनर्वास का मुद्दा
    मछुआरों को लेकर भारत-श्रीलंका विवाद
    गृहयुद्ध के बाद के राजनीतिक और सामाजिक घाव
    ये सभी मुद्दे दोनों देशों के संबंधों को समय-समय पर प्रभावित करते रहे हैं।

    राजनीतिक बदलाव से बढ़ी उम्मीदें
    विजय के नेतृत्व में बनी नई सरकार को एक “नई राजनीतिक ताकत” के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कांग्रेस, CPI, CPI(M), VCK और IUML जैसे दलों के समर्थन से बहुमत हासिल किया है, जिससे यह सरकार और भी मजबूत मानी जा रही है।
    श्रीलंका को उम्मीद है कि तमिलनाडु की यह नई राजनीतिक दिशा क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करेगी और पुरानी कटुता को कम करने में मदद करेगी।

    तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन सिर्फ एक राज्य की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पड़ोसी देशों तक महसूस किया जाता है। श्रीलंका के राष्ट्रपति का बयान इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में भारत-श्रीलंका संबंधों में सहयोग और संवाद बढ़ सकता है, हालांकि पुराने विवाद अभी भी ध्यान देने योग्य रहेंगे। यह स्थिति उम्मीद और सतर्कतादोनों का मिश्रण प्रस्तुत करती है, जहाँ भविष्य की राह सहयोग से होकर गुजर सकती है।
  • ईरान-यूएस टकराव चरम पर: IRGC की सीधी चेतावनी, अमेरिकी ठिकाने और जहाज निशाने पर 14-पॉइंट प्रस्ताव पर तनाव जारी

    ईरान-यूएस टकराव चरम पर: IRGC की सीधी चेतावनी, अमेरिकी ठिकाने और जहाज निशाने पर 14-पॉइंट प्रस्ताव पर तनाव जारी


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, जहां ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने खुली चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि फारस की खाड़ी या होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया, तो जवाब में सीधे अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों पर हमला किया जाएगा।

    IRGC नौसेना कमांड ने सोशल मीडिया पोस्ट में साफ कहा है कि क्षेत्र में किसी भी तरह की “आक्रामक कार्रवाई” को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं एयरोस्पेस फोर्स ने दावा किया है कि उसके मिसाइल और ड्रोन पहले से ही अमेरिकी ठिकानों और संभावित लक्ष्यों पर लॉक हैं और केवल आदेश का इंतजार है।

    इस बीच, अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वॉशिंगटन ने ईरान के सामने 14 सूत्रीय प्रस्ताव रखा है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने, यूरेनियम संवर्धन पर रोक और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को लेकर कई सख्त शर्तें शामिल हैं। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि इस प्रस्ताव पर जल्द जवाब की उम्मीद है, लेकिन ईरान ने किसी समयसीमा को मानने से इनकार कर दिया है।

    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि अमेरिकी प्रस्ताव अभी समीक्षा में है और इसका जवाब “उचित समय पर और राष्ट्रीय हितों को देखते हुए” दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि ईरान किसी बाहरी दबाव में निर्णय नहीं करेगा।

    तनाव के बीच खाड़ी क्षेत्र में स्थिति और भी संवेदनशील हो गई है। कतर के पास एक मालवाहक जहाज पर संदिग्ध प्रोजेक्टाइल से हमला और ईरान के खार्ग द्वीप के पास बड़े तेल रिसाव ने समुद्री सुरक्षा और पर्यावरणीय चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेल रिसाव 20 वर्ग मील तक फैल चुका है, जिससे क्षेत्रीय पारिस्थितिकी पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

    इसी बीच अमेरिका के प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि समझौते की स्थिति में ईरान पर लगे प्रतिबंध धीरे-धीरे हटाए जा सकते हैं और उसकी जमी हुई संपत्ति भी जारी की जा सकती है, लेकिन इसके बदले परमाणु गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण जरूरी होगा।

    क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए ब्रिटेन और फ्रांस ने भी अपनी नौसैनिक तैनाती बढ़ा दी है, जबकि रूस ने प्रस्ताव दिया है कि वह ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम को सुरक्षित रखने के लिए तैयार है।

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट अब वैश्विक ऊर्जा और व्यापार का सबसे संवेदनशील क्षेत्र बन गया है, जहां किसी भी टकराव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

  • रेड स्क्वायर से पुतिन का शक्ति प्रदर्शन, NATO को ललकारा; यूक्रेन युद्ध पर बोले- यह रूस की न्याय की लड़ाई

    रेड स्क्वायर से पुतिन का शक्ति प्रदर्शन, NATO को ललकारा; यूक्रेन युद्ध पर बोले- यह रूस की न्याय की लड़ाई


    नई दिल्ली। मॉस्को के ऐतिहासिक रेड स्क्वायर पर शनिवार को रूस ने पूरे सैन्य शक्ति प्रदर्शन के साथ विक्ट्री डे मनाया। इस मौके पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर पश्चिमी देशों और NATO पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में पुतिन ने यूक्रेन युद्ध को रूस की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के लिए जरूरी बताते हुए इसे “न्यायसंगत लड़ाई” करार दिया।

    दरअसल, रूस हर साल 9 मई को द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर सोवियत संघ की जीत की याद में विक्ट्री डे परेड आयोजित करता है। इस बार भी रेड स्क्वायर पर हजारों सैनिकों ने मार्च किया, हालांकि पिछले वर्षों की तुलना में परेड में भारी हथियारों और बैलिस्टिक मिसाइलों की मौजूदगी काफी कम रही। कई वर्षों में पहली बार परेड में बड़े पैमाने पर टैंक और मिसाइल सिस्टम नजर नहीं आए।

    अपने भाषण में पुतिन ने कहा कि रूस आज ऐसे आक्रामक गठबंधन का सामना कर रहा है, जिसे NATO का पूरा समर्थन हासिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिमी देश लगातार यूक्रेन को हथियार और सैन्य सहायता देकर संघर्ष को बढ़ावा दे रहे हैं। पुतिन ने कहा कि रूस अपने सैनिकों और नागरिकों की ताकत के दम पर हर चुनौती का सामना करेगा।

    रूसी राष्ट्रपति ने दूसरे विश्व युद्ध में सोवियत सैनिकों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि वही जज्बा आज यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों को प्रेरित कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और भविष्य के लिए रूस हर मोर्चे पर मजबूती से खड़ा रहेगा।

    इस बार की परेड इसलिए भी खास रही क्योंकि रूस और यूक्रेन के बीच तीन दिन के अस्थायी सीजफायर की घोषणा की गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि 9 से 11 मई तक दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम रहेगा और इस दौरान कैदियों की अदला-बदली भी की जाएगी। हालांकि युद्ध को लेकर तनाव अब भी बरकरार है।

    विक्ट्री डे समारोह में बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको समेत कई देशों के नेता मौजूद रहे। सैन्य बैंड, तोपों की सलामी और सैनिकों की परेड के जरिए रूस ने दुनिया को साफ संदेश देने की कोशिश की कि यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी दबाव के बावजूद उसकी सैन्य शक्ति और रणनीतिक आक्रामकता कमजोर नहीं हुई है

  • ढाका में पाकिस्तान की बड़ी एंट्री! बांग्लादेशी सुरक्षाबलों को देगा ट्रेनिंग, CCTV ‘तीसरी आंख’ लगाने की तैयारी

    ढाका में पाकिस्तान की बड़ी एंट्री! बांग्लादेशी सुरक्षाबलों को देगा ट्रेनिंग, CCTV ‘तीसरी आंख’ लगाने की तैयारी


    नई दिल्ली। पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच तेजी से बढ़ती नजदीकियों ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी के ढाका दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग, साइबर निगरानी और सुरक्षाबलों की ट्रेनिंग को लेकर अहम समझौते हुए हैं। इस पूरे घटनाक्रम को क्षेत्रीय रणनीति और प्रभाव बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    शुक्रवार को ढाका पहुंचे मोहसिन नकवी ने बांग्लादेश के गृह मामलों के सलाहकार सलाहुद्दीन अहमद समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। बातचीत के बाद दोनों देशों ने ड्रग तस्करी, साइबर अपराध और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

    समझौते के तहत पाकिस्तान और बांग्लादेश की एजेंसियां नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने, अवैध नेटवर्क पर कार्रवाई करने और खुफिया जानकारियों के आदान-प्रदान में मिलकर काम करेंगी। इसके अलावा सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों को आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर भी सहमति बनी है।

    इस दौरे का सबसे चर्चित हिस्सा ‘सेफ सिटी प्रोजेक्ट’ रहा। पाकिस्तान ने ढाका में बड़े पैमाने पर CCTV कैमरे लगाने और निगरानी सिस्टम विकसित करने का प्रस्ताव दिया है। इसे शहर की सुरक्षा बढ़ाने और अपराध पर नजर रखने के लिए अहम कदम बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह मॉडल उसी तरह का होगा, जैसा चीन ने पाकिस्तान के कई शहरों में तैयार किया है।

    पाकिस्तानी गृह मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच पुलिस अकादमियों में ट्रेनिंग सहयोग, साइबर फ्रॉड की जांच और डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए संयुक्त कार्यक्रम चलाने पर भी चर्चा हुई। इसके लिए सचिव स्तर का एक संयुक्त कार्य समूह बनाने पर भी सहमति बनी है, जो दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाएगा।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन और शेख हसीना सरकार के कमजोर पड़ने के बाद पाकिस्तान लगातार अपने प्रभाव को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच राजनयिक और रणनीतिक संपर्क तेजी से बढ़े हैं।

    इससे पहले फरवरी में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार और बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ. खलीलुर्रहमान के बीच भी संबंध मजबूत करने को लेकर अहम बातचीत हुई थी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की यह सक्रियता केवल सुरक्षा सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि वह दक्षिण एशिया में अपनी कूटनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश में भी जुटा है। वहीं, क्षेत्रीय राजनीति पर नजर रखने वाले देशों के लिए पाकिस्तान-बांग्लादेश की बढ़ती नजदीकियां आने वाले समय में अहम रणनीतिक संकेत मानी जा रही हैं।

  • नेपाल यात्रा अचानक टली: लिपुलेख विवाद या बालेन शाह की नई रणनीति, भारत-नेपाल रिश्तों में बढ़ी हलचल!

    नेपाल यात्रा अचानक टली: लिपुलेख विवाद या बालेन शाह की नई रणनीति, भारत-नेपाल रिश्तों में बढ़ी हलचल!



    नई दिल्ली। भारत और नेपाल के रिश्तों के बीच एक बार फिर सियासी और कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री की प्रस्तावित नेपाल यात्रा अचानक टाल दिए जाने के बाद दोनों देशों के संबंधों को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। माना जा रहा है कि इस फैसले के पीछे लिपुलेख विवाद और नेपाल की नई राजनीतिक नेतृत्व शैली बड़ी वजह हो सकती है।

    जानकारी के मुताबिक, विक्रम मिस्री को 11 मई से दो दिवसीय नेपाल दौरे पर जाना था। इस यात्रा का उद्देश्य नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को भारत आने का औपचारिक निमंत्रण देना और दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता की जमीन तैयार करना था। हालांकि अंतिम समय में यह दौरा स्थगित कर दिया गया। नेपाल सरकार ने भी इसकी पुष्टि की है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के दिनों में भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख क्षेत्र को लेकर तनाव बढ़ा है। भारत ने कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए लिपुलेख मार्ग को सक्रिय किया है, जबकि नेपाल इस इलाके पर अपना दावा जताता रहा है। काठमांडू का कहना है कि यह क्षेत्र उसकी सीमा का हिस्सा है। इसी मुद्दे को लेकर नेपाल के भीतर राजनीतिक माहौल भी गर्म बना हुआ है।

    सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री बालेन शाह ने विक्रम मिस्री से मुलाकात को लेकर सकारात्मक संकेत नहीं दिए थे। इसके बाद यात्रा को टालने का फैसला लिया गया। हालांकि आधिकारिक स्तर पर किसी टकराव की पुष्टि नहीं की गई है।

    बताया जा रहा है कि इस दौरे की रूपरेखा मॉरीशस में नेपाल के विदेश मंत्री और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच हुई बातचीत के दौरान तैयार की गई थी। भारत की कोशिश थी कि नई नेपाली सरकार के साथ रिश्तों को मजबूत किया जाए और दोनों देशों के बीच रुकी हुई द्विपक्षीय वार्ताओं को फिर से गति दी जाए।

    राजनयिक सूत्रों का मानना है कि नेपाल की नई सरकार फिलहाल संतुलित विदेश नीति अपनाने की कोशिश कर रही है। यही वजह है कि वह भारत, चीन और अमेरिका जैसे देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मुलाकातों में सावधानी बरत रही है। हालांकि भारत की ओर से साफ किया गया है कि नेपाल के साथ संबंध सामान्य और सकारात्मक बने हुए हैं।

    भारत फिलहाल नेपाल में चल रही अपनी विकास परियोजनाओं और निवेश कार्यक्रमों पर भी नजर बनाए हुए है। दोनों देशों के बीच व्यापार, जल संसाधन, सुरक्षा सहयोग और सीमा प्रबंधन जैसे कई अहम मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिश जारी है।

    कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत-नेपाल संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक रूप से बेहद अहम हैं। ऐसे में किसी एक यात्रा के टलने को रिश्तों में बड़ी दरार के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, लेकिन यह जरूर संकेत देता है कि नेपाल की नई राजनीतिक दिशा और क्षेत्रीय मुद्दे आने वाले समय में दोनों देशों की कूटनीति को प्रभावित कर सकते हैं।

  • भारत के ‘रहस्यमयी’ मिसाइल टेस्ट से चीन-पाकिस्तान में खलबली, अग्नि-6 की ताकत ने बढ़ाई टेंशन

    भारत के ‘रहस्यमयी’ मिसाइल टेस्ट से चीन-पाकिस्तान में खलबली, अग्नि-6 की ताकत ने बढ़ाई टेंशन



    नई दिल्ली। भारत ने ओडिशा तट से एक बेहद शक्तिशाली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का गुप्त परीक्षण कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। माना जा रहा है कि यह परीक्षण अग्नि-6 या उससे जुड़ी किसी एडवांस हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी का हिस्सा हो सकता है। हालांकि DRDO ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ इसे भारत की सामरिक ताकत में बड़ा कदम मान रहे हैं।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है और इसकी रेंज हजारों किलोमीटर तक हो सकती है। परीक्षण के बाद चीन और पाकिस्तान में बेचैनी बढ़ गई है। खासतौर पर पाकिस्तान की चिंता इस बात को लेकर बताई जा रही है कि भारत अब ऐसी मिसाइल तकनीक की तरफ बढ़ रहा है, जिसे रोक पाना लगभग नामुमकिन माना जाता है।

    रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की बैलिस्टिक मिसाइलें इतनी तेज और एडवांस हैं कि मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम के लिए उन्हें इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल है। यही वजह है कि भारत की रणनीतिक क्षमता को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बड़ा गेमचेंजर माना जा रहा है।

    बताया जा रहा है कि मिसाइल ने हाइपरसोनिक री-एंट्री प्रोफाइल के साथ उड़ान भरी और इसकी गति मैक-5 से ज्यादा हो सकती है। सोशल मीडिया पर बांग्लादेश और पूर्वी भारत के कई इलाकों से आसमान में तेज रफ्तार रोशनी जैसी वस्तु के वीडियो भी सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मिसाइल की पैंतरेबाजी क्षमता इसे और खतरनाक बनाती है।

    विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान के खिलाफ इतनी लंबी दूरी की मिसाइल की जरूरत नहीं है, इसलिए इस परीक्षण का मुख्य संदेश चीन को माना जा रहा है। भारत अब ऐसी क्षमता विकसित कर रहा है, जिससे चीन के भीतर मौजूद सामरिक और सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सके।

    रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि अगर यह वास्तव में MIRV तकनीक या अग्नि-6 से जुड़ा परीक्षण है, तो यह चीन की मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। इससे भारत की ‘सटीक और तेज जवाब’ वाली सैन्य रणनीति को नई ताकत मिलेगी।

  • बंगाल की सत्ता बदलते ही बांग्लादेश से आया बड़ा संदेश, शेख हसीना की पार्टी ने शुभेंदु अधिकारी को दी बधाई

    बंगाल की सत्ता बदलते ही बांग्लादेश से आया बड़ा संदेश, शेख हसीना की पार्टी ने शुभेंदु अधिकारी को दी बधाई



    नई दिल्ली। कोलकाता में नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद शुभेंदु अधिकारी को बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने बधाई दी है। पार्टी ने कहा कि शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के रिश्तों का नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद है। अवामी लीग ने अपने संदेश में भारत-बांग्लादेश की ऐतिहासिक दोस्ती, साझा संस्कृति और आपसी सहयोग को और मजबूत करने की बात कही।

    अवामी लीग की केंद्रीय कार्यसमिति की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पश्चिम बंगाल की जनता ने शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व पर भरोसा जताया है और यह जनादेश उनके मजबूत नेतृत्व की पहचान है। पार्टी ने उम्मीद जताई कि नई सरकार के कार्यकाल में दोनों देशों के बीच व्यापार, सांस्कृतिक सहयोग और विकास की रफ्तार और तेज होगी।

    बयान में कहा गया कि भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से दोस्ताना संबंध रहे हैं और पश्चिम बंगाल इन रिश्तों की सबसे अहम कड़ी है। ऐसे में नई सरकार दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा दे सकती है। अवामी लीग ने शुभेंदु अधिकारी और उनके मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों के बेहतर स्वास्थ्य और सफल कार्यकाल की कामना भी की।

    दरअसल, कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शनिवार को भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया था। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, कई केंद्रीय मंत्री और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। समारोह के दौरान भाजपा समर्थकों में भारी उत्साह देखने को मिला।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बांग्लादेश की तरफ से आया यह संदेश सिर्फ औपचारिक बधाई नहीं, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति और भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिहाज से भी अहम संकेत माना जा रहा है। खासतौर पर ऐसे समय में जब दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में हैं।
  • भारत के सीक्रेट हाइपरसोनिक मिसाइल टेस्ट से कांपा चीन-पाकिस्तान, अग्नि शक्ति ने बढ़ाई ड्रैगन की टेंशन

    भारत के सीक्रेट हाइपरसोनिक मिसाइल टेस्ट से कांपा चीन-पाकिस्तान, अग्नि शक्ति ने बढ़ाई ड्रैगन की टेंशन



    नई दिल्ली। ओडिशा तट से भारत द्वारा किए गए रहस्यमयी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) परीक्षण ने चीन और पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक DRDO ने शुक्रवार शाम एक परमाणु-सक्षम लंबी दूरी की मिसाइल का परीक्षण किया, जिसे अग्नि-6 या उसके एडवांस वर्जन से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इस परीक्षण ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक हलचल तेज कर दी है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत ने इस परीक्षण के लिए 3500 किलोमीटर का NOTAM जारी किया था, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह कोई हाई-एंड स्ट्रैटेजिक मिसाइल सिस्टम हो सकता है। कई रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल हाइपरसोनिक री-एंट्री क्षमता और MIRV तकनीक से लैस हो सकती है, जिससे दुश्मन की मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देना आसान हो जाता है।

    पाकिस्तानी और चीनी मीडिया में इस टेस्ट को लेकर भारी चर्चा है। मलेशियाई डिफेंस पोर्टल ‘डिफेंस सिक्योरिटी एशिया’ ने दावा किया कि भारत की यह क्षमता चीन-पाकिस्तान के सामरिक समीकरणों को बदल सकती है। रिपोर्ट में कहा गया कि अगर भारत ICBM तकनीक में पूरी तरह सफल हो जाता है, तो वह अमेरिका तक मार करने वाली क्षमता वाले देशों की सूची में शामिल हो जाएगा। फिलहाल ऐसी तकनीक अमेरिका, रूस, चीन और उत्तर कोरिया जैसे देशों के पास ही है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की बैलिस्टिक मिसाइलें इतनी एडवांस हैं कि उन्हें इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल माना जाता है। यही वजह है कि जहां ईरान को एक साथ कई मिसाइलें दागनी पड़ती हैं, वहीं भारत की एक सटीक मिसाइल ही लक्ष्य को तबाह करने के लिए काफी मानी जाती है।

    सोशल मीडिया पर बांग्लादेश से सामने आए कुछ वीडियो में आसमान में तेज गति से उड़ती रोशनी दिखाई दी, जिसे इस परीक्षण से जोड़कर देखा जा रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मिसाइल की गति मैक-5 से अधिक हो सकती है, जो इसे हाइपरसोनिक श्रेणी में ला सकती है।

    रक्षा विश्लेषकों के मुताबिक इस परीक्षण का असली संदेश पाकिस्तान नहीं, बल्कि चीन के लिए है। भारत अब ऐसी मिसाइल क्षमता विकसित कर रहा है, जो चीन के अंदर गहराई तक मौजूद सैन्य ठिकानों, परमाणु केंद्रों और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बना सके। चीन हिंद महासागर क्षेत्र में लगातार अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है, ऐसे में भारत की यह रणनीतिक तैयारी क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को नया मोड़ दे सकती है।

  • उत्तर कोरिया का बड़ा दावा: किम जोंग उन पर हमला हुआ तो स्वतः परमाणु हमला, संविधान में जोड़ा गया नया प्रावधान

    उत्तर कोरिया का बड़ा दावा: किम जोंग उन पर हमला हुआ तो स्वतः परमाणु हमला, संविधान में जोड़ा गया नया प्रावधान


    नई दिल्ली। उत्तर कोरिया ने अपने संविधान में एक बड़ा और विवादास्पद बदलाव करते हुए परमाणु नीति को और सख्त कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक नए प्रावधान में कहा गया है कि अगर देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन या परमाणु कमांड सिस्टम पर हमला होता है, तो उत्तर कोरिया तुरंत और स्वचालित रूप से परमाणु हमला करेगा। इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ा दी है।

    सरकारी मीडिया के हवाले से सामने आई जानकारी में बताया गया है कि यह संशोधन 22 मार्च को किया गया था, लेकिन इसे हाल ही में सार्वजनिक किया गया है। संविधान के परमाणु नीति वाले आर्टिकल में स्पष्ट किया गया है कि अगर देश की परमाणु कमांड और नियंत्रण व्यवस्था को खतरा पहुंचता है, तो जवाबी कार्रवाई बिना किसी देरी के की जाएगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उत्तर कोरिया की “डिटरेंस स्ट्रैटेजी” का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य संभावित हमलों को रोकना है। हालांकि, इस बयान ने वैश्विक स्तर पर तनाव को और बढ़ा दिया है, क्योंकि यह परमाणु हमले की स्वचालित प्रतिक्रिया की बात करता है।

    रिपोर्टों में यह भी दावा किया जा रहा है कि हाल ही में ईरान पर हुए हमलों और वैश्विक घटनाओं को देखते हुए उत्तर कोरिया ने अपनी सुरक्षा नीति को और कठोर बनाया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    इसी बीच उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया सीमा के पास नई 155 मिमी स्वचालित तोपों की तैनाती की है। बताया जा रहा है कि इन हथियारों की रेंज लगभग 60 किलोमीटर तक है, जिससे दक्षिण कोरिया की राजधानी के आसपास का क्षेत्र भी खतरे की जद में आ सकता है। किम जोंग उन ने खुद इन हथियारों के परीक्षण का निरीक्षण किया और इसे सेना की क्षमता में बड़ा बदलाव बताया।

    उत्तर कोरिया लंबे समय से दक्षिण कोरिया और अमेरिका को अपना मुख्य सुरक्षा खतरा मानता रहा है। इसी वजह से वह लगातार अपनी मिसाइल और परमाणु क्षमताओं को मजबूत करने में जुटा है।

    आंकड़ों के अनुसार, उत्तर कोरिया के पास वर्तमान में दर्जनों परमाणु हथियार मौजूद हैं, जबकि उसके पास इतना रेडियोधर्मी पदार्थ है जिससे वह भविष्य में और भी हथियार बना सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि कुछ हथियार पहले से तैनात स्थिति में हैं।

    हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय बार-बार उत्तर कोरिया से तनाव कम करने और बातचीत के रास्ते अपनाने की अपील करता रहा है, लेकिन किम जोंग उन की नीतियां लगातार सैन्य ताकत बढ़ाने पर केंद्रित रही हैं।

  • हंता वायरस का बढ़ता खतरा: कैसे फैलता है संक्रमण, किन देशों में पहुंचा और कितना जानलेवा है यह वायरस

    हंता वायरस का बढ़ता खतरा: कैसे फैलता है संक्रमण, किन देशों में पहुंचा और कितना जानलेवा है यह वायरस



    नई दिल्ली। दुनिया एक बार फिर एक नए स्वास्थ्य संकट की आशंका से जूझ रही है। हंता वायरस के ताज़ा मामलों ने वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में अटलांटिक महासागर में यात्रा कर रहे एक क्रूज शिप में संक्रमण और मौतों की पुष्टि के बाद यह वायरस फिर सुर्खियों में आ गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

    WHO की विशेषज्ञ डॉ. मारिया वान केरकोव ने स्पष्ट किया है कि हंता वायरस न तो कोविड-19 जैसा है और न ही सामान्य इन्फ्लूएंजा। यह वायरस अलग तरीके से फैलता है और इसकी प्रकृति भी अलग है। अच्छी बात यह है कि यह व्यक्ति से व्यक्ति में आसानी से नहीं फैलता, जिससे इसका व्यापक प्रसार सीमित रहता है।

    कैसे शुरू हुआ संक्रमण
    ताजा मामला एक डच झंडे वाले क्रूज शिप MV Hondius से जुड़ा है, जो अटलांटिक और दक्षिणी महासागर के मार्ग से गुजर रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यात्रा के दौरान 70 वर्षीय एक यात्री में शुरुआती लक्षण दिखे, जिनमें बुखार, सिरदर्द और कमजोरी शामिल थे। बाद में उनकी मौत हो गई। इसके बाद दो और मौतों की पुष्टि हुई, जिनमें एक दक्षिण अफ्रीका और दूसरी जर्मनी की महिला यात्री शामिल थी।

    जहाज पर लगभग 150 लोग सवार थे, जो अर्जेंटीना से यात्रा पर निकले थे। यात्रा के दौरान सेंट हेलेना और अन्य द्वीपों पर कुछ यात्रियों ने उतरकर संपर्क किया, जिससे संक्रमण के फैलाव की आशंका और जांच तेज कर दी गई।

    किन देशों तक पहुंचा मामला
    WHO और संबंधित स्वास्थ्य एजेंसियों ने कई देशों को अलर्ट किया है, जिनमें शामिल हैं:

    अर्जेंटीना (जहां से यात्रा शुरू हुई)

    सेंट हेलेना

    दक्षिण अफ्रीका

    नीदरलैंड

    ब्रिटेन

    केप वर्डे

    इसके अलावा कनाडा, अमेरिका, जर्मनी, डेनमार्क, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, तुर्की, सिंगापुर और न्यूजीलैंड जैसे देशों को भी जानकारी दी गई है क्योंकि इनके नागरिक इस यात्रा से जुड़े हुए थे या संपर्क में आए थे।

    हंता वायरस कितना खतरनाक है
    हंता वायरस को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा जाता है।
    पहला “ओल्ड वर्ल्ड हंता वायरस” जो यूरोप और एशिया में पाया जाता है और मुख्य रूप से किडनी पर असर डालता है। इसकी मृत्यु दर अपेक्षाकृत कम होती है, लगभग 1% से 15% के बीच।

    दूसरा और अधिक खतरनाक “न्यू वर्ल्ड हंता वायरस” है, जो अमेरिका में पाया जाता है। यह हंता वायरस कार्डियोपल्मोनरी सिंड्रोम का कारण बनता है, जिसमें फेफड़ों में तेजी से तरल भर जाता है और सांस लेने में गंभीर दिक्कत होती है। इसकी मृत्यु दर 35% से 50% तक हो सकती है, जिससे यह बेहद घातक संक्रमणों में शामिल है।

    कैसे फैलता है वायरस
    यह वायरस मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृंतकों के मूत्र, मल या लार के संपर्क से फैलता है। संक्रमित धूल या सतहों को सांस के जरिए शरीर में लेने से संक्रमण हो सकता है। हालांकि, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में इसका संक्रमण दुर्लभ माना जाता है।

    क्या कहती हैं स्वास्थ्य एजेंसियां
    WHO का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्कता बेहद जरूरी है। प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है और यात्रियों की ट्रैकिंग की जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि समय पर पहचान और सावधानी से इसके फैलाव को नियंत्रित किया जा सकता है।