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  • आलू उबालने का नया अंदाज़: अब नहीं होंगे गीले और चिपचिपे, आ गई जीरो वॉटर जादुई ट्रिक

    आलू उबालने का नया अंदाज़: अब नहीं होंगे गीले और चिपचिपे, आ गई जीरो वॉटर जादुई ट्रिक


    नई दिल्ली । आलू के पराठे हों या क्रिस्पी कटलेट, सबसे बड़ी समस्या तब आती है जब कुकर में उबालने के बाद आलू पानी सोख लेते हैं। वह गीलापन न तो स्वाद रहने देता है और न ही पराठों की स्टफिंग सही बनती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बिना एक बूंद पानी के भी आलू उबाले जा सकते हैं जी हां, सोशल मीडिया पर वायरल यह जीरो वॉटर ट्रिक न केवल आपका समय बचाएगी, बल्कि आपको मिलेंगे एकदम सूखे और सोंधे स्वाद वाले आलू।

    कैसे काम करती है यह जीरो वॉटर ट्रिक

    इस तरीके में हम आलू को पानी में डुबाने के बजाय कुकर के अंदर ‘प्रेशर और स्टीम’ का इस्तेमाल करते हैं। इसे फॉलो करना बेहद आसान है तैयारी: सबसे पहले आलू को अच्छी तरह धो लें और उन्हें पोंछकर सुखा लें। ध्यान रहे, आलू के ऊपर अतिरिक्त पानी न हो।कुकर को करें तैयार कुकर की तली में एक छोटा चम्मच तेल या घी लगाकर उसे ग्रीस चिकना कर लें। इससे आलू चिपकेंगे नहीं। सूती कपड़े का जादू: अब एक सूती कपड़ा लें और उसे पानी में भिगोकर अच्छी तरह निचोड़ लें।
    कपड़ा सिर्फ गीला होना चाहिए, उससे पानी टपकना नहीं चाहिए। आलू की सेटिंग अब गीले कपड़े के अंदर आलू को लपेटकर कुकर में रख दें। अगर आलू ज्यादा हैं, तो नीचे गीला कपड़ा बिछाएं, ऊपर आलू रखें और फिर ऊपर से एक और गीला कपड़ा ढक दें।सीटी का इंतज़ार: कुकर का ढक्कन बंद करें और बिल्कुल धीमी आंच पर 10 से 12 मिनट तक पकने दें। इस दौरान कुकर में जो भाप बनेगी, वह गीले कपड़े की नमी से आएगी। परफेक्ट आलू तैयार: गैस बंद करें और प्रेशर अपने आप निकलने दें। जब आप कुकर खोलेंगे, तो आलू पूरी तरह उबले हुए और एकदम सूखे निकलेंगे।

    इस ट्रिक के जबरदस्त फायदे

    सोंधा स्वाद: पानी में उबलने से आलू का स्वाद फीका पड़ जाता है, जबकि इस तरीके से आलू का असली स्वाद बरकरार रहता है। परफेक्ट स्टफिंग: ये आलू चिपचिपे नहीं होते, इसलिए समोसे या पराठे बनाते समय स्टफिंग फटती नहीं है। विटामिन्स की बचत: पानी के साथ आलू के कई पोषक तत्व बह जाते हैं, जो भाप में पकाने से सुरक्षित रहते हैं छिलका उतारना आसान: इस विधि से उबले आलू के छिलके बहुत आसानी से और सफाई से उतर जाते हैं।

    कुछ जरूरी बातें

    इस ट्रिक के लिए हमेशा भारी तले वाले कुकर का इस्तेमाल करें। आंच हमेशा धीमी रखें, वरना कुकर जल सकता है। अगर आपके पास एल्युमीनियम फाइल है, तो आप कपड़े की जगह उसमें भी आलू लपेटकर यही प्रक्रिया दोहरा सकते हैं। याद रखें: यह ट्रिक छोटे और मध्यम आकार के आलू के लिए बेहतरीन काम करती है। अगर आलू बहुत बड़े हैं, तो उन्हें दो टुकड़ों में काटकर रखें।

  • स्लीप-एपनिया की पहली दवा जल्द हो सकती है उपलब्ध: खर्राटों और सांस रुकने की समस्या से मिलेगा आराम

    स्लीप-एपनिया की पहली दवा जल्द हो सकती है उपलब्ध: खर्राटों और सांस रुकने की समस्या से मिलेगा आराम


    नई दिल्ली।ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज AIIMS के अनुसार भारत में करीब 10.4 करोड़ लोग ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया OSA से पीड़ित हैं। यह गंभीर स्लीप डिसऑर्डर धीरे-धीरे हार्ट, ब्रेन और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है।फिलहाल स्लीप एपनिया का इलाज मुख्य रूप से लाइफस्टाइल बदलाव और CPAP मशीन के जरिए किया जाता रहा है। लेकिन अमेरिका में विकसित नई ओरल पिल, थर्ड फेज क्लिनिकल ट्रायल पूरी कर चुकी है और FDA अप्रूवल का इंतजार कर रही है।

    दवा का काम करने का तरीका रात को सोने से पहले ली जाएगी गले की मांसपेशियों को एक्टिव रखेगी, जिससे नींद में सांस की नली बंद नहीं होगी ऑक्सीजन सप्लाई बेहतर होगी और स्लीप एपनिया की गंभीरता घटेगी CPAP मशीन पर निर्भर मरीजों के लिए आसान विकल्प

    ट्रायल और असर
    फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल में दवा ने स्लीप एपनिया की गंभीरता में लगभग 47% तक कमी दिखाई। हल्के साइड इफेक्ट में मुंह सूखना और नींद आने में थोड़ी कठिनाई देखने को मिली।

    भारत में उपलब्धता
    अभी यह दवा भारत में उपलब्ध नहीं होगी। अमेरिका या अन्य देशों में मंजूरी मिलने के बाद ही भारत में उपलब्ध हो सकेगी। संभावित समय 2027 की शुरुआत तक बताया जा रहा है।

    हेल्थ रिस्क अगर समय पर इलाज न हो
    हार्ट डिजीज

    हाई ब्लड प्रेशर

    स्ट्रोक

    डायबिटीज

    ब्रेन से जुड़ी समस्याएं

    इस नई दवा से स्लीप एपनिया के मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो CPAP मशीन का नियमित इस्तेमाल नहीं कर पाते।

  • पीरियड्स के दर्द सूजन और ऐंठन से दिलाएंगे राहत ये आसान योगासन

    पीरियड्स के दर्द सूजन और ऐंठन से दिलाएंगे राहत ये आसान योगासन


    नई दिल्ली।नेशनल गर्ल चाइल्ड डे बेटियों की ताकत हिम्मत और आत्मविश्वास का प्रतीक है यह दिन लड़कियों के महत्व को रेखांकित करता है जीवन के अलग अलग पड़ावों पर लड़कियों को कई शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है इन्हीं में से एक है पीरियड्स के दौरान होने वाला दर्द ऐंठन और सूजन जो अक्सर उनके रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करता है

    विशेषज्ञों के अनुसार पीरियड्स के समय शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं जिनकी वजह से दर्द मूड स्विंग्स और थकान महसूस होती है ऐसे में योगासन एक प्रभावी और प्राकृतिक उपाय के रूप में सामने आते हैं योग से शरीर में एंडोर्फिन हार्मोन का स्राव बढ़ता है जो प्राकृतिक पेन किलर की तरह काम करता है इससे दर्द कम होता है और मन को भी शांति मिलती हैयोग एक्सपर्ट मानते हैं कि पीरियड्स के दौरान भारी एक्सरसाइज करने से बचना चाहिए और केवल हल्के और आरामदायक योगासन करने चाहिए इससे पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार बेहतर होता है मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं और ऐंठन में कमी आती है नियमित योगाभ्यास से पीरियड्स की समस्याएं धीरे धीरे कम हो सकती हैं

    बालासन या चाइल्ड पोज पीरियड्स के दौरान बेहद लाभकारी माना जाता है इस आसन में घुटनों के बल बैठकर आगे झुकना होता है जिससे कमर और पेट की मांसपेशियों को आराम मिलता है यह दर्द सूजन और तनाव को कम करने में मदद करता हैसुप्त बद्ध कोणासन या रिलाइनिंग बटरफ्लाई पोज में पीठ के बल लेटकर पैरों के तलवे जोड़कर घुटनों को बाहर की ओर छोड़ा जाता है यह आसन पेल्विक क्षेत्र में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है और ऐंठन के साथ सूजन में भी राहत देता है

    अपानासन पेट की ऐंठन और गैस की समस्या को शांत करने में सहायक है पीठ के बल लेटकर घुटनों को छाती से लगाने से पेट और कमर का दर्द कम होता हैमार्जरीआसन और बितिलासन यानी कैट काउ पोज रीढ़ को लचीला बनाता है इससे कमर का दर्द घटता है और शरीर में ऊर्जा का संचार होता है यह आसन पीरियड्स के दौरान मूड स्विंग्स को भी नियंत्रित करता है

    सुप्त मत्स्येंद्रासन पेट की मरोड़ और सूजन को कम करता है यह आसन शरीर को रिलैक्स करता है और दर्द से राहत दिलाता हैयोगासन को दिनचर्या में शामिल कर पीरियड्स से जुड़ी परेशानियों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है हालांकि इस दौरान शरीर पर अधिक दबाव न डालें और अगर दर्द या सूजन ज्यादा हो तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें

  • सुबह उठते ही मुंह का खट्टा या कड़वा स्वाद पेट की बीमारी का संकेत हो सकता है जानिए कारण और उपाय

    सुबह उठते ही मुंह का खट्टा या कड़वा स्वाद पेट की बीमारी का संकेत हो सकता है जानिए कारण और उपाय


    नई दिल्ली।सुबह की शुरुआत आमतौर पर ताजगी और ऊर्जा से भरी होती है क्योंकि रात के समय शरीर खुद को संतुलित करता है लेकिन यदि सुबह उठते ही मुंह में खट्टा या कड़वा स्वाद महसूस हो तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए यह स्वाद पेट से जुड़ी किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता हैविशेषज्ञों के अनुसार मुंह से जुड़ी अधिकतर परेशानियों का सीधा संबंध पेट से होता है यदि पाचन तंत्र ठीक है तो मुंह में दुर्गंध या कड़वापन जैसी समस्याएं अपने आप कम हो जाती हैं लेकिन यदि यह परेशानी रोजाना हो रही है तो यह पेट में एसिड बढ़ने का संकेत हो सकता है

    आधुनिक चिकित्सा में इस स्थिति को एसिड रिफ्लक्स कहा जाता है जबकि आयुर्वेद इसे पित्त दोष की वृद्धि से जोड़कर देखता है आयुर्वेद के अनुसार जब शरीर में पित्त असंतुलित होता है तो अम्ल की मात्रा बढ़ जाती है जिससे पेट की समस्याओं के साथ साथ हड्डियों और जोड़ों में भी कमजोरी आने लगती है मुंह के खट्टे या कड़वे स्वाद के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे देर रात भोजन करना शराब और तंबाकू का सेवन लिवर का सही तरीके से काम न करना पाचन अग्नि का कमजोर पड़ जाना और लंबे समय तक भूखा रहना गलत खान पान की आदतें भी पेट में एसिड बढ़ाने का बड़ा कारण बनती हैं

    आयुर्वेद में इस समस्या के प्रभावी समाधान बताए गए हैं पेट से जुड़ी गड़बड़ियों को दूर करने के लिए त्रिफला चूर्ण को बेहद लाभकारी माना गया है रात को गुनगुने पानी के साथ आधा चम्मच त्रिफला चूर्ण लेने से सुबह पेट साफ रहता है और पित्त शांत होता हैखान पान की समय सारिणी में बदलाव करना भी जरूरी है देर रात भोजन करने से बचें और सूर्यास्त के आसपास खाना खा लें भोजन के तुरंत बाद लेटने से बचें कुछ देर टहलें और सोते समय बाईं करवट लें विज्ञान भी मानता है कि बाईं करवट सोने से पेट का एसिड ऊपर की नली में नहीं चढ़ता और हृदय तक रक्त प्रवाह बेहतर रहता है

    तांबे के बर्तन में रखा पानी पेट के अम्ल को शांत करने में मदद करता है इसकी तासीर ठंडी होती है और यह शरीर को डिटॉक्स भी करता है इसके अलावा सौंफ और मिश्री का सेवन या उनका पानी पीने से पाचन सुधरता है और मुंह की दुर्गंध भी कम होती हैविशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अत्यधिक तनाव और चिंता से पेट में एसिड का उत्पादन सामान्य से कई गुना बढ़ जाता है इसलिए मानसिक शांति बनाए रखना भी पेट की सेहत के लिए बेहद जरूरी है

  • आज ही बदलें जीवनशैली, स्वास्थ्य और इम्यूनिटी के लिए जरूरी कदम

    आज ही बदलें जीवनशैली, स्वास्थ्य और इम्यूनिटी के लिए जरूरी कदम


    नई दिल्ली।सर्दियों में ठंड और आलस के कारण लोग अक्सर लंबे समय तक बिस्तर या कुर्सी पर रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आज की जीवनशैली में मस्तिष्क का इस्तेमाल तो बढ़ गया है लेकिन शारीरिक गतिविधियां कम हो गई हैं। यह असंतुलन धीरे-धीरे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।आयुर्वेद में भी कम शारीरिक गतिविधि को स्वास्थ्य के लिए चेतावनी माना गया है। चरक संहिता में कहा गया है व्यायामात लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखम्। यानी व्यायाम से लंबी उम्र ताकत और खुशहाली मिलती है।

    कम गतिविधि से होने वाले प्रमुख स्वास्थ्य खतरे
    मोटापा और मधुमेहलंबे समय तक बैठे रहने से वसा का जमाव बढ़ता है और मेटाबॉलिज्म कमजोर होता है जिससे मोटापा और डायबिटीज़ की संभावना बढ़ जाती है।

    गठिया और जोड़ों में दर्द
    लगातार एक ही पोज़चर में रहने से हड्डियों और मांसपेशियों में जकड़न होती है जो जोड़ों के दर्द का कारण बनती है।

    हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग
    चलने और व्यायाम से रक्त संचार और ऑक्सीजन वितरण बेहतर होता है। कम गतिविधि से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है जिससे दिल से जुड़े रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है।

    मानसिक स्वास्थ्य पर असर
    डिप्रेशन चिंता और पाचन विकार की समस्या बढ़ सकती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो जाती है।विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोज़ाना थोड़ी शारीरिक गतिविधि जैसे सुबह की वॉक हल्का व्यायाम या स्ट्रेचिंग को जीवनशैली में शामिल किया जाए। इससे न केवल बीमारियों का जोखिम कम होता है बल्कि मानसिक और शारीरिक संतुलन भी बना रहता है।

  • पानी में हाथ रखते ही क्यों सिकुड़ जाती हैं उंगलियां? जानें इसके पीछे का विज्ञान और सेहत से जुड़े संकेत

    पानी में हाथ रखते ही क्यों सिकुड़ जाती हैं उंगलियां? जानें इसके पीछे का विज्ञान और सेहत से जुड़े संकेत


    नई दिल्ली । अक्सर नहाते समय कपड़े धोते समय या स्विमिंग पूल में घंटों बिताने के बाद हम देखते हैं कि हमारे हाथ और पैरों की उंगलियों की त्वचा अजीब तरह से सिकुड़ गई है। इसे देखकर मन में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर पानी के संपर्क में आते ही शरीर ऐसा व्यवहार क्यों करता है मेडिकल भाषा में फिंगर्स प्रून कही जाने वाली यह स्थिति ज्यादातर सामान्य होती है, लेकिन कभी-कभी यह आपके शरीर के भीतर पनप रही किसी बीमारी का अलार्म भी हो सकती है।

    क्यों आती हैं उंगलियों पर झुर्रियां

    वैज्ञानिकों का मानना है कि पानी में उंगलियों का सिकुड़ना केवल एक भौतिक क्रिया नहीं बल्कि हमारे स्वायत्त तंत्रिका तंत्र की एक सोची-समझी प्रतिक्रिया है। जब हम लंबे समय तक पानी में रहते हैं तो मस्तिष्क नसों को संकेत भेजता है जिससे त्वचा के नीचे की रक्त कोशिकाएं सिकुड़ जाती हैं। ऐसा होने से उंगलियों की सतह पर झुर्रियां बन जाती हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह झुर्रियां पानी के भीतर गीली चीजों पर बेहतर पकड़ बनाने में मदद करती हैं ठीक उसी तरह जैसे टायरों की ग्रिप सड़क पर फिसलने से बचाती है।

    कब यह चिंता का विषय है

    हालांकि पानी से बाहर आने के कुछ देर बाद उंगलियां सामान्य हो जाती हैं लेकिन अगर यह समस्या बिना पानी के भी हो रही है या लंबे समय तक बनी रहती है तो यह नीचे दी गई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकती है डायबिटीज हाई ब्लड शुगर के कारण शरीर की पसीने की ग्रंथियां और तंत्रिकाएं प्रभावित होती हैं। इससे त्वचा की प्राकृतिक नमी खत्म हो जाती है और उंगलियों में समय से पहले या बार-बार सिकुड़न दिखने लगती है। यदि इसके साथ आपको अधिक प्यास लगना, धुंधली नजर या बार-बार पेशाब आने जैसी शिकायत है, तो शुगर की जांच जरूर कराएं।

    विटामिन B12 की कमी: शरीर में विटामिन B12 की कमी नसों के कामकाज को प्रभावित करती है। इसकी कमी से उंगलियों में बेवजह सिकुड़न हाथों-पैरों में झुनझुनी, थकान और एनीमिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं। शाकाहारी लोग इसकी पूर्ति के लिए दूध दही और पनीर का सेवन बढ़ा सकते हैं। डिहाइड्रेशन और थायराइड शरीर में पानी की भारी कमी होने पर त्वचा अपनी लोच खो देती है, जिससे वह झुर्रीदार दिखने लगती है। वहीं थायराइड विकार भी त्वचा के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर उसे ड्राई और सिकुड़ा हुआ बना सकते हैं।

    सावधानी कब बरतें

    यदि उंगलियों के सिकुड़ने के साथ आपको निम्नलिखित लक्षण महसूस हों तो डॉक्टर से परामर्श लेना अनिवार्य है हाथों-पैरों में तेज दर्द या जकड़न। त्वचा का असामान्य रूप से मोटा होना। बिना पानी के संपर्क में आए ही उंगलियों का बार-बार सिकुड़ना। घाव भरने में देरी या बार-बार त्वचा संक्रमण।

  • सर्दियों में बिना खर्च चेहरे पर आएगा 'गोल्डन ग्लो', बस रसोई में रखी इन 3 चीजों का ऐसे करें इस्तेमाल

    सर्दियों में बिना खर्च चेहरे पर आएगा 'गोल्डन ग्लो', बस रसोई में रखी इन 3 चीजों का ऐसे करें इस्तेमाल


    नई दिल्ली।सर्दियों का मौसम आते ही स्किन का रूखा होना और निखार खो जाना एक आम समस्या है. अगर आप भी अपनी त्वचा को लेकर चिंतित हैं और महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर पैसा खर्च नहीं करना चाहते, तो यह खबर आपके लिए है. अमेठी के जानकारों और आयुर्वेद विशेषज्ञों ने कुछ ऐसे आसान घरेलू उपाय साझा किए हैं, जो आपकी रसोई में मौजूद चीजों से ही आपकी स्किन को गुड लुकिंग और हैंडसम बना देंगे. ये नुस्खे न केवल त्वचा की समस्या दूर करते हैं, बल्कि उसे भरपूर पोषण भी देते हैं.
    नारियल का दूध: रूखेपन और एलर्जी का काल
    सर्दियों की ठंडी हवाएं त्वचा की नमी छीन लेती हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नारियल का दूध स्किन के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. यह प्राकृतिक मॉइस्चराइजर की तरह काम करता है और चेहरे का रूखापन दूर भगाता है. इसके नियमित इस्तेमाल से अनावश्यक स्किन एलर्जी खत्म होती है और चेहरे पर एक नेचुरल ग्लो निखार आता है. यह आसानी से उपलब्ध है और पूरी तरह सुरक्षित है.
    मलाई और बादाम पेस्ट: दाग-धब्बों की छुट्टी
    चेहरे पर दाने, मस्से या आंखों के नीचे काले घेरे  डार्क सर्कल्स व्यक्तित्व को फीका कर देते हैं. इनसे निपटने के लिए दूध की मलाई और बादाम का पेस्ट सबसे कारगर है. मलाई त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करती है, वहीं बादाम का पेस्ट दाग-धब्बों को हल्का करने में मदद करता है. इस पेस्ट के इस्तेमाल से त्वचा बेदाग और साफ नजर आने लगती है.

    पपीता और हरी सब्जियां: भीतर से आएगा निखार
    खूबसूरत त्वचा के लिए केवल बाहरी लेप ही नहीं, बल्कि खान-पान भी जरूरी है. पपीता और हरी पत्तेदार सब्जियां विटामिन का खजाना होती हैं. ये शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति करती हैं और औषधि की तरह काम करती हैं. इनके सेवन से खून साफ होता है और त्वचा में अंदरूनी निखार आता है, जिससे चेहरा आकर्षक दिखने लगता है.

    एक्सपर्ट की राय: केमिकल फ्री और नो साइड इफेक्ट
    आयुर्वेद के वरिष्ठ डॉक्टर मनोज तिवारी ने लोकल 18 को बताया कि इन घरेलू औषधियों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इनका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता. चूंकि ये नुस्खे आप खुद घर पर तैयार करते हैं, इसलिए इनमें किसी भी तरह के हानिकारक केमिकल या मिलावट की गुंजाइश नहीं रहती. उन्होंने कहा कि आप अपनी जरूरत के अनुसार इन्हें तैयार कर सकते हैं और बिना किसी डर के दाग-धब्बों से छुटकारा पा सकते हैं.

  • गणतंत्र दिवस 2026: तिरंगे के रंगों में निखारें अपना व्यक्तित्व, इन स्टाइलिंग टिप्स के साथ पाएं परफेक्ट लुक

    गणतंत्र दिवस 2026: तिरंगे के रंगों में निखारें अपना व्यक्तित्व, इन स्टाइलिंग टिप्स के साथ पाएं परफेक्ट लुक


    नई दिल्ली । 26 जनवरी का दिन केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि हर भारतीय के लिए गर्व, सम्मान और अटूट देशभक्ति का प्रतीक है। गणतंत्र दिवस के इस राष्ट्रीय पर्व पर स्कूल कॉलेज से लेकर ऑफिस तक के आयोजनों में हर कोई अपनी उपस्थिति को खास बनाना चाहता है। यदि आप भी इस खास मौके पर अपनी वेशभूषा के जरिए देशभक्ति का संदेश देना चाहती हैं और साथ ही सबसे ग्रेसफुल व शालीन दिखना चाहती हैं तो तिरंगे के रंगों का सही तालमेल आपकी सुंदरता में चार चांद लगा सकता है।

    इस विशेष अवसर के लिए ‘तिरंगा थीम’ अपनाते समय सबसे महत्वपूर्ण है रंगों का सही संतुलन। फैशन विशेषज्ञों का मानना है कि केसरिया सफेद और हरे रंग का उपयोग इस तरह होना चाहिए कि वह भड़काऊ न लगे। उदाहरण के तौर पर यदि आप शांति और शुद्धता के प्रतीक सफेद रंग का कुर्ता या अनारकली सूट पहन रही हैं तो उसके साथ लहरिया स्टाइल का तिरंगा दुपट्टा कैरी करें। आप चाहें तो केसरिया रंग का कुर्ता और सफेद बॉटम के साथ हरा स्टोल भी ले सकती हैं। चूंकि जनवरी में ठंड का असर रहता है, इसलिए अपने आउटफिट के साथ एक स्टाइलिश नेहरू जैकेट या कंट्रास्ट रंग की ऊनी शॉल को शामिल करना एक स्मार्ट और गरिमामय विकल्प होगा।

    स्टाइलिंग की बात हो तो मेकअप और हेयरस्टाइल पर ध्यान देना अनिवार्य है। इस दिन के लिए लेस इज मोर कम ही ज्यादा है का मंत्र सबसे सटीक बैठता है। भारी-भरकम मेकअप के बजाय एक लाइट बेस या बीबी क्रीम का उपयोग करें। अपनी आंखों को थोड़ा पॉप-अप लुक देने के लिए आप तिरंगे के रंगों वाला आईलाइनर लगा सकती हैं या नाखूनों पर सूक्ष्म ‘ट्राई-कलर नेल आर्ट’ करवाकर अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित कर सकती हैं। बालों को बहुत ज्यादा उलझाने के बजाय एक साफ-सुथरी नीट पोनीटेल, सलीके से बना लो-बन या पारंपरिक चोटी आपके व्यक्तित्व को एक परिपक्व और गंभीर लुक देगी।

    गणतंत्र दिवस पर आपका पहनावा न केवल आपकी स्टाइल को दर्शाता है, बल्कि राष्ट्र के प्रति आपके सम्मान को भी प्रकट करता है। याद रखें, सादगी और शालीनता ही वह कुंजी है जो आपको भीड़ में सबसे अलग और आकर्षक बनाएगी। तो इस 26 जनवरी, आत्मविश्वास के साथ तिरंगे के रंगों को ओढ़ें और गणतंत्र का उत्सव मनाएं।

  • Republic Day Long Weekend 2026: दिल्ली के पास 6 बेस्ट वीकेंड गेटवे, कम दूरी में भरपूर ट्रैवल मज़ा

    Republic Day Long Weekend 2026: दिल्ली के पास 6 बेस्ट वीकेंड गेटवे, कम दूरी में भरपूर ट्रैवल मज़ा



    नई दिल्ली। रिपब्लिक डे 2026 के लम्बे वीकेंड में अगर आप दिल्ली से ज्यादा दूर नहीं जाना चाहते और कम समय में अधिक अनुभव चाहते हैं, तो ये 6 जगहें आपके लिए परफेक्ट हैं। इन डेस्टिनेशनों में इतिहास, संस्कृति, एडवेंचर, शांति और नेचर सभी का मजा मिलता है, साथ ही यात्रा की दूरी भी कम है।
    1) आगरा (लगभग 3.5 घंटे)
    इतिहास और विरासत प्रेमियों के लिए आगरा सबसे बेहतर विकल्प है। दिल्ली से लगभग 3 घंटे 30 मिनट की ड्राइव पर स्थित आगरा में ताजमहल सबसे बड़ा आकर्षण है, खासकर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का नजारा बेहद खास होता है।
    इसके अलावा आगरा किला (UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट) और सिकंदरा में अकबर का मकबरा भी देखने लायक हैं। आगरा का प्रसिद्ध पेठा और बेडई-आलू सब्जी भी ट्रिप को और स्वादिष्ट बना देते हैं।

    2) ऋषिकेश (लगभग 5 घंटे)
    शांति और सुकून के साथ एडवेंचर भी चाहिए तो उत्तराखंड का ऋषिकेश बेहतरीन विकल्प है। यहां गंगा किनारे योग, ध्यान और मेडिटेशन के साथ रिवर राफ्टिंग और बंजी जंपिंग जैसे एडवेंचर एक्टिविटीज़ का आनंद लिया जा सकता है। लक्ष्मण झूला, राम झूला, परमार्थ निकेतन और बीटल्स आश्रम जैसे स्थलों की यात्रा भी खास रहती है। अगर आप पूरी तरह आध्यात्मिक अनुभव चाहते हैं तो पास ही हरिद्वार भी जा सकते हैं, जहां हर की पौड़ी की गंगा आरती मुख्य आकर्षण है।

    3) नीमराना (लगभग 3 घंटे)
    राजस्थान का नीमराना दिल्ली से लगभग 3 घंटे की दूरी पर है और यह वीकेंड गेटवे के लिए लोकप्रिय विकल्प है। यहां 15वीं सदी का ऐतिहासिक नीमराना फोर्ट पैलेस मुख्य आकर्षण है, जिसे अब एक लग्जरी हेरिटेज होटल में बदल दिया गया है। इसके अलावा यहां की प्राचीन बावड़ी भी देखने लायक है। कम ट्रैवल में ऐतिहासिक अनुभव के लिए नीमराना एक अच्छा विकल्प है।
    4) जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क (लगभग 5 घंटे)
    वाइल्डलाइफ प्रेमियों के लिए जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क एक शानदार डेस्टिनेशन है। यहां टाइगर, तेंदुआ, हाथी और कई अन्य जंगली जानवरों को देखने का मौका मिलता है। जीप सफारी मुख्य आकर्षण है, वहीं नेचर वॉक और रिजॉर्ट स्टे के जरिए प्रकृति के करीब समय बिताया जा सकता है।

    5) मसूरी (लगभग 6 घंटे)
    अगर आप पहाड़ों में छुट्टियां बिताना चाहते हैं तो “क्वीन ऑफ हिल्स” मसूरी एक परफेक्ट ऑप्शन है। यहां के खूबसूरत पहाड़ी नजारे, माल रोड, केम्पटी फॉल्स और लोकल स्ट्रीट फूड का मजा लिया जा सकता है। शांति पसंद करने वालों के लिए पास ही स्थित लैंडोर भी एक अच्छा विकल्प है।

    6) जयपुर (लगभग 5 घंटे)
    राजस्थान की राजधानी जयपुर इतिहास और संस्कृति का बेहतरीन मिश्रण पेश करती है। दिल्ली से करीब 5 घंटे की ड्राइव पर स्थित जयपुर में हवा महल, सिटी पैलेस और आमेर किला जैसे ऐतिहासिक स्थल देखे जा सकते हैं। इसके अलावा जोहरी बाजार में शॉपिंग का मजा भी लिया जा सकता है। रिपब्लिक डे वीकेंड में जयपुर घूमना एक शानदार विकल्प साबित होता है।
  • महंगे ट्रीटमेंट छोड़िए! किचन में मौजूद इन 5 देसी नुस्खों से बाल बनेंगे घने और मजबूत

    महंगे ट्रीटमेंट छोड़िए! किचन में मौजूद इन 5 देसी नुस्खों से बाल बनेंगे घने और मजबूत


    नई दिल्ली।आज के दौर में प्रदूषण तनाव और गलत लाइफस्टाइल का सबसे पहला असर हमारे बालों पर पड़ता है। बालों का झड़ना रूखापन दोमुंहे बाल और कमजोर जड़ें अब आम समस्या बन चुकी हैं। ऐसे में लोग अक्सर महंगे सैलून ट्रीटमेंट और केमिकल प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं जो कुछ समय के लिए फायदा तो देते हैं लेकिन लंबे समय में बालों को और नुकसान पहुंचा सकते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार स्वस्थ बालों के लिए महंगे प्रोडक्ट्स नहीं बल्कि प्राकृतिक देखभाल ज्यादा जरूरी है। अच्छी बात यह है कि आपकी रसोई में ही ऐसी कई चीजें मौजूद हैं जो बालों की जड़ों को पोषण देकर उन्हें घना मजबूत और चमकदार बना सकती हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही 5 देसी और असरदार हेयर मास्क के बारे में।

    एलोवेरा और नारियल तेल
    एलोवेरा में मौजूद प्रोटीयोलाइटिक एंजाइम स्कैल्प की डेड स्किन हटाकर उसे स्वस्थ बनाते हैं। नारियल तेल बालों की जड़ों में नमी पहुंचाकर टूटने से बचाता है।कैसे लगाएं: एलोवेरा जेल और नारियल तेल मिलाकर स्कैल्प की मसाज करें और 30 मिनट बाद धो लें।

    अंडा और दही
    बाल केराटिन से बने होते हैं और अंडा प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है। दही बालों को कंडीशन करता है और उन्हें सॉफ्ट बनाता है।विधि: एक अंडा और आधा कप दही फेंटकर जड़ों से लेकर बालों की लंबाई तक लगाएं।
    सावधानी: इसे धोने के लिए ठंडे पानी का ही इस्तेमाल करें।

    प्याज का रस और शहद
    प्याज में मौजूद सल्फर ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है और नए बालों के उगने में मदद करता है। शहद बालों की नमी को लॉक करता है।
    टिप: रुई की मदद से सिर्फ स्कैल्प पर लगाएं और 20–30 मिनट बाद माइल्ड शैम्पू से धो लें।

    मेथी दाना और सरसों तेल
    मेथी बालों के फॉलिकल्स को मजबूत करती है जबकि सरसों का तेल स्कैल्प को पोषण और गर्माहट देता है।
    प्रयोग: रातभर भीगी मेथी पीसकर उसमें सरसों तेल मिलाएं और 1 घंटे तक लगाकर रखें।

    केला और जैतून का तेल

    दोमुंहे और बेजान बालों के लिए यह मास्क बेहद फायदेमंद है। यह बालों की इलास्टिसिटी बढ़ाता है और टूटने से बचाता है।
    कैसे लगाएं: पका केला मैश कर उसमें जैतून का तेल मिलाएं और 20–25 मिनट बाद धो लें।

    जरूरी सलाह
    किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। बेहतर परिणाम के लिए इनमें से किसी एक मास्क का इस्तेमाल हफ्ते में एक बार नियमित रूप से करें।याद रखें सुंदर और मजबूत बालों के लिए धैर्य और प्राकृतिक देखभाल सबसे बड़ा इलाज है।