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  • LPG vs Induction: कौन सा तरीका है हेल्दी और सुरक्षित खाना बनाने के लिए?

    LPG vs Induction: कौन सा तरीका है हेल्दी और सुरक्षित खाना बनाने के लिए?


    नई दिल्ली । आज के समय में रसोई में खाना बनाने के लिए LPG गैस और इंडक्शन कुकटॉप दोनों ही आम विकल्प बन गए हैं। लेकिन कई लोगों के मन में सवाल है कि इन दोनों में से कौन ज्यादा सुरक्षित और सेहतमंद है।

    LPG गैस कुकिंग
    LPG पर खाना बनाना दशकों से हमारी आदत रही है। गैस की आंच को कंट्रोल करना आसान होता है जिससे खाने का स्वाद और टेक्सचर बरकरार रहता है। आयुर्वेद के अनुसार अग्नि पर पका खाना सुपाच्य होता है क्योंकि यह धीरे-धीरे पकता है और पोषक तत्वों को बनाए रखता है। हालांकि बंद कमरे या छोटे किचन में गैस जलाने से नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें निकलती हैं जो लंबे समय में श्वसन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती हैं।

    इंडक्शन कुकिंग

    इंडक्शन कुकटॉप इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड के जरिए काम करता है और केवल बर्तन को गर्म करता है न कि आसपास की हवा को। इसका रेडिएशन बहुत कम होता है और केवल बर्तन तक सीमित रहता है। पेसमेकर यूज़ करने वाले मरीजों को इंडक्शन से थोड़ी दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

    पोषक तत्वों की सुरक्षा

    एक बड़ा मिथक यह है कि इंडक्शन खाना पोषक तत्व खो देता है। वास्तव में पोषक तत्वों का नुकसान तापमान और कुकिंग टाइम पर निर्भर करता है। इंडक्शन पर खाना जल्दी पकता है जिससे विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स सुरक्षित रहते हैं। वहीं गैस पर धीमी आंच पर पकने वाला खाना दालों और कड़े खाद्य पदार्थों के लिए बेहतर माना जाता है।

    सुरक्षा और सुविधा

    इंडक्शन गैस की तुलना में अधिक सुरक्षित है क्योंकि इसमें खुली लौ नहीं होती जिससे आग लगने का खतरा कम होता है। यह किचन के तापमान को भी सामान्य रखता है। गैस की पहुंच हर जगह है और यह बिजली पर निर्भर नहीं करती लेकिन अगर किचन में वेंटिलेशन सही नहीं है तो इंडक्शन एक बेहतर और क्लीनर विकल्प साबित हो सकता है। अगर आप जल्दी और क्लीनर कुकिंग चाहते हैं तो इंडक्शन बेहतर है।अगर आप धीमी आंच और पारंपरिक स्वाद पसंद करते हैं तो LPG गैस उपयुक्त है।स्वास्थ्य और वेंटिलेशन को ध्यान में रखते हुए दोनों विकल्प सुरक्षित हैं बस इस्तेमाल और देखभाल सही हो।

  • शादी और त्योहार के लिए 5 शानदार बैंगल डिज़ाइन, साधारण सूट को बनाएं रॉयल

    शादी और त्योहार के लिए 5 शानदार बैंगल डिज़ाइन, साधारण सूट को बनाएं रॉयल


    नई दिल्ली । पारंपरिक लुक को खास बनाने में ज्वेलरी का हमेशा अहम रोल रहा है और खासकर बैंगल्स यानी चूड़ियां। ये न केवल हाथों की खूबसूरती बढ़ाती हैं बल्कि साधारण सूट या कुर्ती को भी एक डिजाइनर टच देती हैं। फैशन की दुनिया में नए ट्रेंड्स आते रहते हैं लेकिन पारंपरिक एथनिक स्टाइल का क्रेज कभी कम नहीं होता। आइए जानते हैं 5 लेटेस्ट बैंगल डिज़ाइन जो आपके लुक को रॉयल बना देंगे।

    ऑक्सीडाइज्ड सिल्वर बैंगल्स

    ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी आजकल काफी ट्रेंड में है। अगर आप कॉटन कुर्ती या इंडो वेस्टर्न सूट पहन रही हैं तो चांदी जैसी दिखने वाली ऑक्सीडाइज्ड चूड़ियां बेस्ट ऑप्शन हैं। इन्हें आप जींस कुर्ती के साथ भी पहन सकती हैं। ये स्टाइलिश होने के साथ साथ आपको बोहेमियन और एथनिक लुक भी देती हैं।

    सिल्क थ्रेड बैंगल्स

    रेशमी धागों से बनी सिल्क थ्रेड बैंगल्स इन दिनों खासा ट्रेंड में हैं। इन्हें सूट के रंग के अनुसार कस्टमाइज कराना आसान है। मोती स्टोन और मिरर वर्क इन्हें हैवी सूट या छोटे फंक्शन के लिए परफेक्ट बनाता है। ये त्योहारों और हल्के समारोहों के लिए एक बेहतरीन चॉइस हैं।

    कश्मीरी बैंगल्स

    अगर आप कुछ यूनिक और कलात्मक पहनना पसंद करती हैं तो कश्मीरी बैंगल्स आपके लिए परफेक्ट हैं। इन पर की गई हैंड पेंटिंग और फ्लोरल डिज़ाइन इन्हें बाकी चूड़ियों से अलग बनाती हैं। अक्सर इन्हें स्टेटमेंट ज्वेलरी के तौर पर ही पहना जाता है।

    वेलवेट बैंगल्स

    सर्दियों और रात की शादियों के लिए वेलवेट बैंगल्स बेस्ट हैं। मखमली टेक्सचर और गहरा रंग साधारण सूट को भी रॉयल और महंगा लुक देता है। आजकल इन्हें पूरी कलाई भरकर पहनने के बजाय गोल्ड या कुंदन के कड़ों के बीच में सेट करके पहनना ट्रेंड में है।

    कुंदन और स्टोन वर्क वाले कड़े

    शादी या बड़ी पार्टी के लिए कुंदन और स्टोन वर्क वाले कड़े सबसे शानदार विकल्प हैं। इन्हें पूरी चूड़ियों के सेट के बजाय एक एक चौड़ा कड़ा दोनों हाथों में पहनना आजकल पसंद किया जाता है। अगर आपकी कुर्ती पर हैवी एम्ब्रॉयडरी है तो ये कड़े आपको रॉयल और क्लासी लुक देंगे।बैंगल्स सही डिजाइन और सेटिंग के साथ किसी भी लुक को हाई फैशन और रॉयल बना सकते हैं। चाहे त्योहार हो या शादी इन 5 बैंगल डिज़ाइनों से आपका सूट भी एथनिक और स्टाइलिश लगेगा।

  • कीवी का जूस पीना बेहतर या फल खाना? जानिए सेहत के लिए कौन सा तरीका है ज्यादा फायदेमंद

    कीवी का जूस पीना बेहतर या फल खाना? जानिए सेहत के लिए कौन सा तरीका है ज्यादा फायदेमंद


    नई दिल्ली । आज के समय में लोग अपनी सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर फलों को डाइट में शामिल कर रहे हैं। इन्हीं फलों में से एक है कीवी, जिसे औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। हल्का खट्टा-मीठा स्वाद रखने वाला यह फल न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होता है बल्कि शरीर को कई तरह के स्वास्थ्य लाभ भी देता है। अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि कीवी को जूस के रूप में पीना ज्यादा फायदेमंद है या इसे सीधे फल के रूप में खाना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार दोनों ही तरीके लाभकारी हैं, लेकिन साबुत फल खाने से शरीर को ज्यादा फाइबर मिलता है, जबकि जूस जल्दी ऊर्जा देने में मदद करता है।

    कीवी पोषक तत्वों का खजाना माना जाता है। इसमें विटामिन-सी, विटामिन-के, विटामिन-ई, पोटैशियम, फोलेट, फाइबर, कॉपर और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं। यही कारण है कि इसका सेवन शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है। खासतौर पर गर्मियों के मौसम में कीवी का जूस पीना शरीर को तरोताजा रखने में सहायक होता है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सुबह के समय इसका सेवन करना ज्यादा फायदेमंद मानते हैं।

    कीवी या उसके जूस का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को मजबूत बनाता है। इसमें मौजूद विटामिन-सी शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे कब्ज और अपच से राहत दिलाने में मदद करता है। कई बार डॉक्टर डेंगू बुखार के दौरान भी कीवी या कीवी के जूस का सेवन करने की सलाह देते हैं, क्योंकि यह शरीर की ताकत बनाए रखने में सहायक होता है।

    कीवी का सेवन दिल की सेहत के लिए भी काफी लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। साथ ही यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित रखने में भी सहायक हो सकता है, जिससे दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। यही नहीं, इसमें मौजूद पोषक तत्व जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में भी मददगार माने जाते हैं। कीवी आंखों की सेहत के लिए भी फायदेमंद है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन-सी आंखों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं और उम्र के साथ होने वाली समस्याओं के जोखिम को कम कर सकते हैं।

    अगर आप कीवी का जूस बनाना चाहते हैं तो इसे अच्छी तरह धोकर छील लें और छोटे टुकड़ों में काट लें। इसके बाद इसे मिक्सर में डालकर थोड़ा पानी, स्वादानुसार काला नमक और चाहें तो थोड़ी चीनी मिलाकर ब्लेंड कर लें। अंत में इसमें थोड़ा नींबू का रस मिलाकर ताजगी से भरपूर जूस तैयार किया जा सकता है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संभव हो तो कीवी को जूस के बजाय साबुत फल के रूप में खाना ज्यादा फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे शरीर को फाइबर भी पर्याप्त मात्रा में मिलता है।

  • मसल्स मजबूत करने से लेकर हार्ट हेल्थ तक लोबिया दाल के फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान

    मसल्स मजबूत करने से लेकर हार्ट हेल्थ तक लोबिया दाल के फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान


    नई दिल्ली:आजकल फिटनेस को लेकर लोगों में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। मसल्स बनाने और शरीर को मजबूत रखने के लिए लोग जिम में घंटों मेहनत करते हैं और कई बार महंगे सप्लीमेंट का भी सहारा लेते हैं। हालांकि शरीर को मजबूत बनाने के लिए सबसे जरूरी चीज संतुलित आहार और पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन का सेवन है। कई लोग नॉनवेज फूड्स से प्रोटीन की कमी पूरी कर लेते हैं लेकिन शाकाहारी लोगों के लिए यह थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में लोबिया दाल एक बेहतरीन विकल्प के रूप में सामने आती है जो स्वाद के साथ साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है।

    लोबिया दाल को प्लांट बेस्ड प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार प्रोटीन शरीर की मांसपेशियों की मरम्मत और उनके विकास के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है। अगर आप नियमित रूप से लोबिया दाल का सेवन करते हैं तो इससे मसल्स मजबूत बनने में मदद मिल सकती है। लगभग सौ ग्राम उबले हुए लोबिया में करीब आठ से दस ग्राम प्रोटीन पाया जाता है जो शरीर को ऊर्जा देने और मांसपेशियों को ताकत देने में सहायक होता है। यही वजह है कि जिम जाने वाले युवाओं और बढ़ते बच्चों के लिए यह दाल काफी फायदेमंद मानी जाती है।

    लोबिया दाल वजन कम करने में भी मददगार हो सकती है। इसमें डाइटरी फाइबर की मात्रा अधिक होती है जो पाचन प्रक्रिया को धीरे चलने में मदद करती है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराती है। इससे बार बार भूख लगने की समस्या कम हो जाती है और व्यक्ति अतिरिक्त कैलोरी लेने से बच जाता है। इसके साथ ही लोबिया में कैलोरी की मात्रा कम होती है और पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद रहते हैं जिससे यह वजन घटाने वाले लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प बन जाती है।

    पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में भी लोबिया दाल का महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसमें मौजूद घुलनशील और अघुलनशील फाइबर पेट से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं। इसका नियमित सेवन कब्ज की समस्या को कम करने और आंतों की सफाई करने में सहायक माना जाता है। फाइबर शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है जिससे शरीर हल्का और ऊर्जावान महसूस करता है।

    लोबिया दाल केवल मसल्स और पाचन के लिए ही नहीं बल्कि दिल की सेहत के लिए भी लाभकारी मानी जाती है। इसमें पोटैशियम मैग्नीशियम और फ्लेवोनोइड्स जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा लोबिया बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक होती है जिससे हार्ट डिजीज का खतरा भी कम हो सकता है।

    भारत में महिलाओं और बच्चों में आयरन की कमी एक आम समस्या है। लोबिया दाल आयरन और फोलेट का अच्छा स्रोत मानी जाती है जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करती है। इसके नियमित सेवन से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बेहतर हो सकता है और थकान तथा कमजोरी की समस्या कम हो सकती है।

    इसके अलावा लोबिया में मौजूद जिंक और विटामिन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाते हैं। इससे शरीर संक्रमण और बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनता है। इसलिए अगर आप अपनी डाइट में पौष्टिक और संतुलित भोजन शामिल करना चाहते हैं तो लोबिया दाल को नियमित रूप से खाना एक अच्छा और फायदेमंद विकल्प साबित हो सकता है।

  • Summer Skin Care Tips: गर्मियों में त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये 5 असरदार टिप्स

    Summer Skin Care Tips: गर्मियों में त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये 5 असरदार टिप्स


    नई दिल्ली:गर्मी का मौसम शुरू हो गया है और लगातार बढ़ते तापमान के साथ लोगों को तेज धूप और पसीने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस मौसम में केवल सेहत ही नहीं बल्कि त्वचा का ख्याल रखना भी बेहद जरूरी हो जाता है। चिलचिलाती धूप में बाहर निकलते ही त्वचा टैनिंग, सनबर्न और रूखी हो सकती है। अगर आप चाहते हैं कि आपकी त्वचा गर्मियों में भी हेल्दी और चमकदार बनी रहे तो कुछ आसान और असरदार उपाय अपनाना जरूरी है।

    1. सनस्क्रीन का नियमित इस्तेमाल

    यदि आप छात्र हैं या काम के सिलसिले में घर से बाहर निकलते हैं, तो एसपीएफ 30+ वाला सनस्क्रीन चेहरे और हाथ-पांव पर रोजाना लगाना बेहद जरूरी है। इसे दिन में 3 से 4 बार दोहराना चाहिए। इससे त्वचा टैन होने, सनबर्न और रूखेपन से बची रहती है।

    2. पर्याप्त पानी पिएं

    गर्मियों में शरीर में पानी की कमी होने का खतरा अधिक होता है। इसलिए दिन भर में कम से कम 3 से 4 लीटर पानी पीना चाहिए। यह न केवल त्वचा को हाइड्रेट रखता है बल्कि पूरे शरीर को भी ठंडक और ऊर्जा देता है।


    3. मौसमी फल शामिल करें

    फलों में पानी की मात्रा अधिक होती है और ये विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं। गर्मियों में तरबूज, खरबूजा, खीरा और संतरा जैसे मौसमी फल न सिर्फ ताजगी देते हैं बल्कि त्वचा को भी स्वस्थ बनाए रखते हैं।

    4. हल्के और सूती कपड़े पहनें

    भीषण गर्मी में हल्के रंग और सूती कपड़े पहनें। इससे शरीर में गर्मी कम लगेगी और पसीने की समस्या भी कम होगी। घर से बाहर निकलते समय स्कार्फ, टोपी, धूप का चश्मा या छाता का इस्तेमाल करें ताकि त्वचा तेज धूप से सुरक्षित रहे।

    5. तेज धूप में बाहर निकलने से बचें

    सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक धूप सबसे तेज होती है। इस समय बाहर निकलने से त्वचा टैन और सनबर्न होने का खतरा बढ़ जाता है। कोशिश करें कि इस समय बाहर जाना जरूरी न हो।

    टैनिंग को दूर करने के घरेलू उपाय

    अगर धूप में त्वचा टैन हो जाती है, तो घर पर कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं। एलोवेरा जेल, दही, खीरे या टमाटर का रस टैनिंग हटाने में मदद करते हैं। इन्हें त्वचा पर हल्के हाथों से लगाएं और 15-20 मिनट बाद धो लें। ये उपाय त्वचा को ठंडक देने के साथ-साथ उसका नमी स्तर भी बनाए रखते हैं।

    गर्मी में थोड़ी सावधानी और सही दिनचर्या से आपकी त्वचा लंबे समय तक स्वस्थ, चमकदार और हाइड्रेटेड बनी रहेगी।
  • Healthy Breakfast Tips: दिन की शुरुआत के लिए ओट्स और मूसली में कौन सा नाश्ता चुनें

    Healthy Breakfast Tips: दिन की शुरुआत के लिए ओट्स और मूसली में कौन सा नाश्ता चुनें


    नई दिल्ली:
    दिन की शुरुआत के लिए हेल्दी और पौष्टिक ब्रेकफास्ट बेहद जरूरी है। यह न सिर्फ शरीर को आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है बल्कि पूरे दिन की सक्रियता, मानसिक फिटनेस और स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर डालता है। इस संदर्भ में ओट्स और मूसली (Oats Vs Muesli) दोनों ही हेल्दी नाश्ते के लोकप्रिय विकल्प माने जाते हैं। हालांकि, इनके पोषण और फायदे अलग-अलग हैं, जिन्हें समझकर सही विकल्प चुनना फायदेमंद होता है।

    ओट्स: फिटनेस के लिए बेहतरीन
    ओट्स फाइबर से भरपूर होते हैं और पाचन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इनमें कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं, जो धीरे-धीरे ऊर्जा प्रदान करते हैं और लंबे समय तक पेट को भरा रखते हैं। इसलिए यह वजन नियंत्रित करने और फिटनेस को बढ़ाने के लिए बेहतर विकल्प हैं। ओट्स में प्रोटीन की मात्रा भी अच्छी होती है, साथ ही इसमें विटामिन और मिनरल्स भी होते हैं। अगर आप सुबह जल्दी उठकर लंबे समय तक सक्रिय रहना चाहते हैं, तो ओट्स को दूध, दही या फ्रूट्स के साथ मिलाकर नाश्ते में शामिल करना लाभदायक रहेगा।

    मूसली: स्वाद और पोषण का कॉम्बिनेशन
    मूसली भी हेल्दी विकल्प है, जिसमें ओट्स के अलावा ड्राय फ्रूट्स, नट्स और सूखे मेवे शामिल होते हैं। यह नाश्ते को स्वादिष्ट बनाने के साथ-साथ शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी प्रदान करता है। मूसली में फाइबर की मात्रा अच्छी होती है और इसमें एनर्जी देने वाले घटक मौजूद होते हैं। यदि आप हल्का और पौष्टिक नाश्ता चाहते हैं जो मीठा स्वाद भी दे, तो मूसली आपके लिए उपयुक्त हो सकती है।

    ओट्स और मूसली में अंतर

    फाइबर कंटेंट: ओट्स और मूसली दोनों में फाइबर होता है, लेकिन ओट्स में सॉल्यूबल फाइबर अधिक होता है जो कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है।

    प्रोटीन: ओट्स में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है, जो मांसपेशियों के निर्माण और फिटनेस के लिए जरूरी है।

    शुगर लेवल: मूसली में अक्सर ड्राय फ्रूट्स और शुगर मिलाई जाती है, इसलिए डायबिटीज़ या वजन घटाने वालों को इसके सेवन में सावधानी रखनी चाहिए।

    सुविधा और तैयारी: ओट्स जल्दी पच जाते हैं और गर्म या ठंडे दोनों तरीके से खाए जा सकते हैं, जबकि मूसली को अक्सर दूध या योगर्ट के साथ मिलाकर खाने की जरूरत होती है।

    कैसे करें चुनाव?

    अगर आपका लक्ष्य वजन कम करना, फिटर रहना और लंबे समय तक एनर्जी बनाए रखना है, तो ओट्स नाश्ते में सबसे बेहतर विकल्प हैं।

    अगर आप स्वाद के साथ हल्का और पौष्टिक नाश्ता चाहते हैं, जिसमें ड्राय फ्रूट्स और मिनरल्स की भी अच्छी मात्रा हो, तो मूसली चुन सकते हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि ब्रेकफास्ट में ओट्स या मूसली के साथ ताजे फल, दही या नट्स मिलाकर खाने से पोषण और स्वाद दोनों मिलते हैं।

     हेल्दी ब्रेकफास्ट के लिए ओट्स और मूसली दोनों फायदेमंद हैं, लेकिन फिटनेस और वजन नियंत्रण के लिहाज से ओट्स को वरीयता दी जाती है। मूसली स्वाद और पोषण का अच्छा विकल्प है, खासकर उन लोगों के लिए जो हल्का और एनर्जी देने वाला नाश्ता पसंद करते हैं।

  • सिर्फ 5 मिनट में तैयार करें चटपटा महाराष्ट्रीयन ठेचा, बढ़ाए खाने का मज़ा

    सिर्फ 5 मिनट में तैयार करें चटपटा महाराष्ट्रीयन ठेचा, बढ़ाए खाने का मज़ा


    नई दिल्ली । भारतीय खाने में चटनी का खास महत्व होता है जो साधारण भोजन का स्वाद भी कई गुना बढ़ा देती है। महाराष्ट्रीयन ठेचा ऐसी ही तीखी और चटपटी चटनी है जो दाल-चावल या साधारण रोटियों के साथ खाने के मज़े को दोगुना कर देती है। अगर सब्जी बनाने का मन न हो तो यह रेसिपी आपकी रसोई की रेस्क्यू साबित हो सकती है।

    महाराष्ट्रीयन ठेचा क्या है?
    ठेचा महाराष्ट्र की पारंपरिक चटनी है जिसे मुख्य रूप से हरी मिर्च लहसुन और मूंगफली से बनाया जाता है। इसे ज्वार या बाजरे की भाकरी के साथ बड़े चाव से खाया जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसे ओखली या सिलबट्टे पर दरदरा कुचला जाता है जिससे इसका टेक्सचर और स्वाद देसी और अनोखा होता है।

    सिर्फ 5 मिनट में तैयार

    ठेचा बनाने के लिए किसी लंबी तैयारी की जरूरत नहीं है। केवल हरी मिर्च लहसुन की कलियां मूंगफली थोड़ा जीरा और नमक का इस्तेमाल करके मिनटों में इसे तैयार किया जा सकता है। यह रेसिपी खासकर हॉस्टल स्टूडेंट्स या व्यस्त लोगों के लिए परफेक्ट है।

    बनाने की आसान विधि

    एक पैन में थोड़ा तेल गर्म करें।हरी मिर्च डंठल हटाकर लहसुन की कलियां और मूंगफली डालें।इन्हें तब तक भूनें जब तक मिर्च पर हल्के भूरे धब्बे न आएं और मूंगफली कुरकुरी न हो जाए। थोड़ा जीरा भी डालें। भुनी हुई सामग्री को ओखली में निकालें और स्वादानुसार नमक मिलाएं। इसे दरदरा कूट लें बारीक पेस्ट नहीं बनाना है। इच्छानुसार नींबू का रस या बारीक कटा हरा धनिया डाल सकते हैं।

    सेवन और स्टोरेज टिप्स

    ठेचा पराठे पूरी दाल-चावल या सादी रोटी के साथ खाया जा सकता है। इसे एयरटाइट कंटेनर में भरकर फ्रिज में 5-7 दिन तक फ्रेश रखा जा सकता है। सफर में यह त्वरित और स्वादिष्ट विकल्प साबित होता है।

    स्वाद और सेहत

    मिर्च और लहसुन का यह मेल सिर्फ खाने का मज़ा नहीं बढ़ाता बल्कि मेटाबॉलिज्म को भी बूस्ट करता है। अगली बार जब सब्जी बनाने का मन न हो तो इस चटपटी महाराष्ट्रीयन ठेचा को ट्राई जरूर करें।

  • तेज धूप में स्किन जल रही है? बाहर निकलने से पहले अपनाएं ये 4 असरदार टिप्स

    तेज धूप में स्किन जल रही है? बाहर निकलने से पहले अपनाएं ये 4 असरदार टिप्स


    नई दिल्ली । जैसे ही मार्च का महीना आता है उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में गर्मी का असर दिखना शुरू हो जाता है। पारा बढ़ने के साथ ही तेज धूप उमस और पसीना लोगों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं। इस मौसम में सबसे अधिक प्रभावित हमारी त्वचा होती है। सूरज की हानिकारक किरणें त्वचा को टैन करती हैं सनबर्न और समय से पहले झुर्रियों का कारण भी बनती हैं।अगर आपको गर्मी में बाहर निकलना पड़ता है तो अपनी त्वचा का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ आसान और असरदार उपाय अपनाकर आप त्वचा को तेज धूप से बचा सकते हैं।

    सनस्क्रीन धूप से सबसे मजबूत सुरक्षा
    धूप में निकलने से कम से कम 20 मिनट पहले चेहरे गर्दन हाथ और पैरों पर SPF 30+ वाला सनस्क्रीन जरूर लगाएं। याद रखें कि एक बार सनस्क्रीन लगाने से काम नहीं चलता। अगर आप लंबे समय तक बाहर हैं तो हर 3-4 घंटे में इसे दोबारा लगाना जरूरी है। सनस्क्रीन त्वचा को सीधे यूवी किरणों से बचाता है और टैनिंग को रोकता है।

    हाइड्रेशन अंदर से रखे त्वचा को नमी से भरपूर

    त्वचा की चमक सिर्फ क्रीम या लोशन पर निर्भर नहीं करती बल्कि शरीर के अंदर मौजूद नमी भी महत्वपूर्ण होती है। गर्मियों में पसीने के जरिए शरीर का पानी बाहर निकल जाता है। इसे पूरा करने के लिए दिन भर में कम से कम 3-4 लीटर पानी पीना चाहिए। इसके अलावा तरबूज खरबूजा खीरा और संतरे जैसे पानी से भरपूर मौसमी फलों को आहार में शामिल करें। इससे त्वचा प्राकृतिक रूप से हाइड्रेटेड और कोमल बनी रहती है।

    पहनावा और समय का ध्यान

    तेज धूप सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक सबसे अधिक हानिकारक होती है। इस दौरान अगर संभव हो तो घर के अंदर रहें। यदि बाहर निकलना जरूरी है तो हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें। सूती कपड़े पसीने को सोखते हैं और त्वचा को सांस लेने में मदद करते हैं। साथ ही स्कार्फ चौड़े किनारे वाली टोपी धूप का चश्मा और छाता का उपयोग करना न भूलें।

    सनबर्न और टैनिंग के घरेलू उपाय

    अगर धूप के कारण त्वचा झुलस गई या टैनिंग हो गई है तो घबराने की जरूरत नहीं है। किचन में मौजूद कुछ प्राकृतिक चीजें राहत देती हैं। प्रभावित हिस्से पर ठंडा एलोवेरा जेल लगाएं। इसके अलावा दही खीरे का रस या टमाटर का रस लगाने से भी टैनिंग कम होती है और त्वचा को ठंडक मिलती है। गर्मियों में त्वचा का ख्याल रखना न सिर्फ आपकी सुंदरता बढ़ाता है बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी जरूरी है। इन आसान टिप्स को अपनाकर आप धूप के नुकसान से अपनी त्वचा को बचा सकते हैं और प्राकृतिक रूप से कोमल और चमकदार बनाए रख सकते हैं।

  • Chaitra Navratri 2026: सेलेब्रिटी जैसा फेस्टिव लुक पाने के लिए ट्राई करें ये 7 ट्रेंडी कॉटन कुर्ता सेट्स

    Chaitra Navratri 2026: सेलेब्रिटी जैसा फेस्टिव लुक पाने के लिए ट्राई करें ये 7 ट्रेंडी कॉटन कुर्ता सेट्स

    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि का त्योहार आस्था भक्ति और उत्साह का प्रतीक माना जाता है। इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में लोग मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं और घरों व मंदिरों में विशेष आयोजन किए जाते हैं। ऐसे में हर कोई चाहता है कि पूजा या त्योहार के मौके पर उसका लुक भी खास और आकर्षक लगे। खासतौर पर महिलाएं पारंपरिक परिधानों को प्राथमिकता देती हैं। मार्च के महीने में गर्मी भी बढ़ने लगती है इसलिए इस समय कॉटन कपड़े सबसे आरामदायक और स्टाइलिश विकल्प माने जाते हैं। कॉटन अनारकली कुर्ता सेट्स ऐसे ही आउटफिट्स में शामिल हैं जो स्टाइल और कंफर्ट दोनों का बेहतरीन संतुलन देते हैं।

    फेस्टिव सीजन में फ्लोरल प्रिंट वाले कुर्ता सेट्स काफी ट्रेंड में रहते हैं। पेस्टल रंगों पर बड़े-बड़े फूलों वाले प्रिंट न सिर्फ खूबसूरत लगते हैं बल्कि बहुत ही फ्रेश और एलिगेंट लुक भी देते हैं। इस तरह के कुर्ता सेट आप सुबह की अष्टमी या नवमी पूजा के दौरान आसानी से कैरी कर सकती हैं। इसके अलावा घर के किसी छोटे-मोटे फंक्शन में भी यह आउटफिट बहुत आकर्षक लगता है।

    अगर आप पारंपरिक लुक में थोड़ा फेस्टिव टच चाहती हैं तो जयपुरी गोटा पत्ती वर्क वाले कुर्ता सेट्स बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। जयपुरी प्रिंट के साथ हल्का गोटा पत्ती का काम सूट को और ज्यादा आकर्षक बना देता है। यह ट्रेडिशनल और मॉडर्न स्टाइल का बेहतरीन कॉम्बिनेशन माना जाता है और किसी भी उम्र की महिलाओं पर खूब जंचता है।

    नवरात्रि के मौके पर व्हाइट चिकनकारी कुर्ता सेट भी बेहद खास लुक देता है। सफेद रंग को शांति और सादगी का प्रतीक माना जाता है। सफेद कॉटन अनारकली कुर्ते के साथ अगर आप कलरफुल दुपट्टा कैरी करती हैं तो यह लुक और भी ज्यादा एलिगेंट और ग्रेसफुल नजर आता है। पूजा या पारिवारिक समारोह में यह स्टाइल बेहद आकर्षक लगता है।

    इन दिनों अंगरखा स्टाइल कुर्ता सेट्स भी काफी ट्रेंड में हैं। अनारकली कुर्ते में अंगरखा डिजाइन पारंपरिक लुक को और ज्यादा खास बना देता है। कई सेलेब्रिटीज भी इस स्टाइल को पसंद कर रहे हैं। यह आउटफिट आपको यूनिक और एथनिक लुक देता है जिससे आपका फेस्टिव लुक और भी अलग नजर आता है।

    इसके अलावा मोनोक्रोम कुर्ता सेट भी आजकल काफी पसंद किए जा रहे हैं। एक ही रंग का कुर्ता और प्लाजो सेट पहनने से लुक स्लीक और क्लासी दिखाई देता है। साथ ही यह स्टाइल हाइट को थोड़ा लंबा भी दिखाता है जिससे पूरा आउटफिट बेहद आकर्षक लगता है।

    नवरात्रि के दौरान बांधनी प्रिंट वाले कुर्ता सेट भी काफी लोकप्रिय रहते हैं। खासतौर पर लाल और पीले रंग के बांधनी अनारकली सूट पूजा के लिए शुभ माने जाते हैं। इसके साथ अगर आप हल्की ज्वेलरी कैरी करें तो आपका पूरा फेस्टिव लुक और भी निखर कर सामने आता है।

    वहीं टियर डिजाइन यानी लेयर्स या स्टेप्स वाले अनारकली कुर्ता सेट भी इन दिनों खूब पसंद किए जा रहे हैं। इनका घेर बड़ा होता है जिससे यह डांडिया या गरबा जैसे आयोजनों के लिए परफेक्ट माने जाते हैं। डांस करते समय इनकी फ्लेयर बहुत खूबसूरत दिखाई देती है और यह तुरंत लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं। कुल मिलाकर अगर आप इस नवरात्रि में पारंपरिक के साथ स्टाइलिश और आरामदायक लुक चाहती हैं तो कॉटन अनारकली कुर्ता सेट्स आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं।

  • मोटापा बन रहा बीमारियों का बड़ा कारण, रोजमर्रा की आदतों में बदलाव से करें नियंत्रण

    मोटापा बन रहा बीमारियों का बड़ा कारण, रोजमर्रा की आदतों में बदलाव से करें नियंत्रण


    नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग सुविधाओं के पीछे इतने व्यस्त हो गए हैं कि अपने स्वास्थ्य की ओर ध्यान देना लगभग भूलते जा रहे हैं। यही कारण है कि मोटापा अब केवल दिखने या शरीर की बनावट से जुड़ी समस्या नहीं रह गया है बल्कि यह एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। बदलती जीवनशैली असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण मोटापे के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि जब शरीर का वजन सामान्य सीमा से अधिक हो जाता है तो यह केवल शरीर में अतिरिक्त चर्बी ही नहीं बढ़ाता बल्कि शरीर के अंदरूनी तंत्र को भी प्रभावित करता है। मोटापे के कारण शरीर में आंतरिक सूजन बढ़ने लगती है जो धीरे धीरे इंसुलिन प्रतिरोध को जन्म देती है। यही स्थिति आगे चलकर कई गंभीर बीमारियों का कारण बनती है जिनमें Type 2 Diabetes High Blood Pressure Thyroid Disease और धमनियों में ब्लॉकेज जैसी समस्याएं शामिल हैं। इसलिए विशेषज्ञ मोटापे को कई बीमारियों का प्रवेश द्वार भी मानते हैं।

    मोटापा बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण आज का बदलता खानपान है। फास्ट फूड जंक फूड और कोल्ड ड्रिंक्स का अत्यधिक सेवन शरीर में अनावश्यक कैलोरी जमा कर देता है। इन खाद्य पदार्थों में पोषक तत्व कम और वसा व चीनी की मात्रा अधिक होती है जो वजन तेजी से बढ़ाने का काम करते हैं। इसके अलावा लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत भी मोटापे को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। ऑफिस में घंटों कंप्यूटर के सामने बैठना और बच्चों का खेल के मैदान के बजाय मोबाइल या टीवी पर समय बिताना शारीरिक सक्रियता को कम कर देता है जिससे शरीर की कैलोरी खर्च नहीं हो पाती।

    इसके साथ ही मानसिक तनाव और अनियमित नींद भी वजन बढ़ने का बड़ा कारण बनते जा रहे हैं। जब व्यक्ति पर्याप्त नींद नहीं लेता या लगातार तनाव में रहता है तो शरीर का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है और वजन बढ़ने लगता है। ऐसे में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मोटापे को नियंत्रित करने के लिए दवाइयों से अधिक जरूरी है कि लोग अपनी जीवनशैली और आदतों में बदलाव करें।

    मोटापा नियंत्रित करने के लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट तक तेज चलना साइकिल चलाना या योग करना बेहद फायदेमंद माना जाता है। नियमित व्यायाम से शरीर की अतिरिक्त कैलोरी बर्न होती है और वजन नियंत्रित रहता है। इसके साथ ही आहार में भी बदलाव जरूरी है। घर का बना संतुलित और पौष्टिक भोजन हरी सब्जियां फल और साबुत अनाज को प्राथमिकता देनी चाहिए जबकि चीनी और तेल का सेवन कम करना चाहिए।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि स्क्रीन टाइम को सीमित किया जाए खासकर बच्चों के लिए। उन्हें अधिक समय तक मोबाइल या कंप्यूटर पर बैठने के बजाय शारीरिक खेलों के लिए प्रेरित करना चाहिए। इसके अलावा रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लेना भी वजन नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। छोटे छोटे बदलाव जैसे लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का उपयोग करना हर एक घंटे के बाद कुछ मिनट टहलना और दैनिक काम खुद करना भी शरीर को सक्रिय बनाए रखने में मदद करते हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लोग समय रहते अपनी आदतों में सुधार कर लें तो मोटापे से बचना संभव है और इसके कारण होने वाली कई गंभीर बीमारियों के खतरे को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।