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  • स्प्रिंग वेकेशन अलर्ट! मार्च के पहले हफ्ते में एक्सप्लोर करें ये 3 शानदार जगहें

    स्प्रिंग वेकेशन अलर्ट! मार्च के पहले हफ्ते में एक्सप्लोर करें ये 3 शानदार जगहें


    नई दिल्ली। अगर आप उत्तर भारत के हिल स्टेशन्स घूम-घूमकर थोड़ा अलग एक्सपीरियंस चाहते हैं, तो कर्नाटक का कूर्ग आपके लिए शानदार विकल्प है। घने कॉफी बागान, धुंध से ढकी वादियां, झरनों की आवाज और हरियाली-यहां पहुंचते ही मन रिलैक्स मोड में चला जाता है।

    मार्च में यहां का मौसम बेहद सुहावना रहता है, जो ट्रेकिंग और नेचर वॉक के लिए एकदम सही है। नेचर लवर्स और कपल्स दोनों के लिए यह जगह किसी ड्रीम डेस्टिनेशन से कम नहीं। शहर की भागदौड़ से दूर कुछ दिन शांति में बिताने हैं, तो कूर्ग जरूर प्लान करें।

    ऋषिकेश: सुकून भी, एडवेंचर भी

    अगर आपका दिल आध्यात्म और एडवेंचर दोनों चाहता है, तो ऋषिकेश से बेहतर जगह कम ही मिलेगी। मार्च-अप्रैल में यहां का मौसम बेहद सुहावना होता है। सुबह-सुबह गंगा किनारे बैठना या आरती का नजारा देखना-दिल को गजब की शांति देता है। वहीं एडवेंचर लवर्स के लिए रिवर राफ्टिंग और बंजी जंपिंग जैसे ऑप्शन भी मौजूद हैं। यहां आप योग और मेडिटेशन के जरिए खुद से जुड़ सकते हैं। सच कहें तो ऋषिकेश ऐसा डेस्टिनेशन है, जहां सोल और एड्रेनालिन दोनों को सुकून मिलता है।

    सिक्किम: फूलों की खुशबू और पहाड़ों का जादू
    अगर आप इस बार कुछ अलग और यादगार ट्रिप चाहते हैं, तो सिक्किम का प्लान बनाइए। मार्च में यहां वसंत ऋतु की शुरुआत होती है और घाटियां रंग-बिरंगे फूलों से सज जाती हैं।

    भारत का ‘स्कॉटलैंड’ कूर्ग,
    अगर आप उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत हिल स्टेशन्स कई बार घूम चुके हैं और कुछ नया एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो मार्च में कूर्ग (जिसे कोडगु भी कहा जाता है) का प्लान शानदार रहेगा। कर्नाटक में स्थित कूर्ग को ‘भारत का स्कॉटलैंड’ यूं ही नहीं कहा जाता-यहां के घने कॉफी बागान, धुंध से ढकी वादियां, खूबसूरत झरने और सुकून भरा माहौल किसी विदेशी हिल स्टेशन जैसा अहसास कराते हैं। अगर आप नेचर लवर हैं और भीड़-भाड़ से दूर शांति में वक्त बिताना चाहते हैं, तो यकीन मानिए कूर्ग आपको पहली ही नजर में पसंद आ जाएगा।

    बर्फ से ढके पहाड़, शांत बौद्ध मठ और साफ-सुथरा वातावरणहर चीज मन मोह लेती है। गंगटोक जैसे शहर में आप मॉडर्न कैफे कल्चर के साथ पहाड़ों का सुकून भी एंजॉय कर सकते हैं। एडवेंचर के शौकीनों के लिए यहां ट्रेकिंग और नाथुला पास की सैर खास अनुभव देती है। एक बार आए, तो बार-बार आने का मन करेगा।

  • Bridal Fashion Tips: सिर्फ लहंगा ही नहीं, ज्वेलरी की ये छोटी गलती बिगाड़ सकती है पूरा ब्राइडल लुक

    Bridal Fashion Tips: सिर्फ लहंगा ही नहीं, ज्वेलरी की ये छोटी गलती बिगाड़ सकती है पूरा ब्राइडल लुक


    नई दिल्ली । शादी का दिन हर दुल्हन के जीवन का सबसे खास दिन होता है। इस दिन हर लड़की चाहती है कि उसका ब्राइडल लुक परफेक्ट और सबसे अलग नजर आए। आमतौर पर दुल्हनें अपने लहंगे पर ज्यादा ध्यान देती हैं, लेकिन फैशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि असली ब्राइडल चार्म केवल लहंगे से नहीं बल्कि सही ज्वेलरी से आता है। कई बार ज्वेलरी के चुनाव में छोटी सी गलती भी पूरे ब्राइडल लुक को बिगाड़ सकती है।

    आजकल वेडिंग सीजन में दुल्हनों के बीच विंटेज और रॉयल स्टाइल का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर दुल्हन अपने गहनों का चुनाव सोच समझकर करे तो उसका लुक किसी राजघराने की राजकुमारी जैसा दिख सकता है। इसके लिए कुछ खास ज्वेलरी पीस ऐसे हैं जिन्हें ब्राइडल लुक में जरूर शामिल करना चाहिए।

    नथ से मिलता है रॉयल टच

    ब्राइडल लुक में नथ का सबसे अहम स्थान होता है। आजकल बड़ी गढ़वाली नथ और पारंपरिक पोलकी नथ काफी ट्रेंड में हैं। अगर दुल्हन का चेहरा छोटा है तो स्लीक डिजाइन वाली नथ बेहतर लगती है, जबकि रॉयल लुक के लिए कुंदन या मोतियों वाली भारी नथ चेहरे की खूबसूरती को और निखार देती है।

    कमरबंद से बढ़ती है ग्रेस

    कमरबंद न केवल लहंगे को सही जगह पर बनाए रखने में मदद करता है बल्कि कमर को आकर्षक शेप भी देता है। सिल्क लहंगे या भारी जरी वर्क वाले आउटफिट के साथ गोल्डन या स्टोन स्टडेड कमरबंद बेहद रॉयल दिखाई देता है। इसे नाभि से थोड़ा ऊपर बांधने पर दुल्हन की लंबाई भी अधिक नजर आती है।

    माथापट्टी और शीशपट्टी का बढ़ा क्रेज

    अब केवल सिंपल मांग टीका पहनने का ट्रेंड धीरे धीरे कम हो रहा है। रॉयल और ग्रेसफुल लुक के लिए माथापट्टी या शीशपट्टी को काफी पसंद किया जा रहा है। यह दुल्हन के सिर को मुकुट जैसा लुक देती है और भारी दुपट्टे को सेट करने में भी मदद करती है।

    बाजूबंद और हथफूल से निखरते हैं हाथ

    दुल्हन के हाथों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए बाजूबंद और हथफूल बेहद खास माने जाते हैं। बाजूबंद ब्लाउज के डिजाइन को हाईलाइट करता है, जबकि बारीक मोतियों या स्टोन वाले हथफूल हाथों को बेहद आकर्षक और शाही लुक देते हैं।

    पायल से पूरा होता है श्रृंगार

    शादी का श्रृंगार पायल की झंकार के बिना अधूरा माना जाता है। रॉयल लुक के लिए घुंघरू वाली भारी चांदी की पायल या स्टोन वर्क वाली ब्राइडल पायल चुनना बेहतर रहता है। फैशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि ज्वेलरी का चुनाव करते समय हमेशा लहंगे के रंग और उसके वर्क का ध्यान रखना चाहिए। यदि लहंगा बहुत भारी है तो ज्वेलरी में संतुलन बनाकर दुल्हन एक क्लासी और एलिगेंट ब्राइडल लुक हासिल कर सकती है। सही ज्वेलरी के साथ दुल्हन का पूरा व्यक्तित्व निखर कर सामने आता है।

  • मार्च में हैं घूमने का प्लान, तो सुकून और रिफ्रेशमेंट के लिए चुनें ये परफेक्ट डेस्टिनेशन्स

    मार्च में हैं घूमने का प्लान, तो सुकून और रिफ्रेशमेंट के लिए चुनें ये परफेक्ट डेस्टिनेशन्स


    नई दिल्ली। अगर आपको ट्रैवल करना पसंद है, तो नई जगहों को देखने और समझने की चाहत हमेशा बनी रहती होगी। हर सीजन की अपनी खासियत होती है, लेकिन कुछ डेस्टिनेशन ऐसे भी हैं जहां मार्च के महीने में जाना खास अनुभव दे सकता है। दरअसल, यह समय न तो कड़ाके की ठंड का होता है और न ही तेज गर्मी का, जिससे घूमना ज्यादा आरामदायक बन जाता है।

    अगर आप रोजमर्रा की व्यस्त जिंदगी से थोड़ा ब्रेक लेना चाहते हैं, तनाव कम करना चाहते हैं और शांति भरे माहौल में वक्त बिताने का सोच रहे हैं, तो मार्च में ट्रिप प्लान करना एक अच्छा फैसला हो सकता है। इस दौरान आप ऐसी जगहों को चुन सकते हैं, जहां प्राकृतिक खूबसूरती, सुकून और हल्का-फुल्का मौसम आपके मूड को पूरी तरह फ्रेश कर दे। आइए हम आपको कुछ ऐसे ही जगहों के बारे में बतायेंगे।

    कूर्ग (कर्नाटक
    अगर आप उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मशहूर हिल स्टेशनों की कई बार यात्रा कर चुके हैं और इस बार कुछ अलग अनुभव करना चाहते हैं, तो मार्च में कूर्ग जाने का प्लान बना सकते हैं। कर्नाटक में बसा कूर्ग अपनी प्राकृतिक खूबसूरती की वजह से “भारत का स्कॉटलैंड” कहलाता है। यहां फैले कॉफी के बागान, हरी-भरी पहाड़ियां, मनमोहक झरने और शांत वातावरण इसे खास बनाते हैं। प्रकृति के करीब समय बिताने वालों के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है। अगर आप भीड़भाड़ से दूर हरियाली और सुकून की तलाश में हैं, तो कूर्ग का सफर आपको जरूर पसंद आएगा।

    ऋषिकेश (उत्तराखंड)
    अगर आप अब तक ऋषिकेश नहीं जा पाए हैं, तो मार्च का महीना यहां घूमने के लिए बेहतरीन मौका हो सकता है। उत्तराखंड में स्थित यह खूबसूरत शहर वसंत ऋतु में और भी आकर्षक हो जाता है। खासतौर पर मार्च और अप्रैल के दौरान यहां का मौसम सुहावना रहता है, जिससे यात्रा का आनंद दोगुना हो जाता है। सुबह के समय कई श्रद्धालु पवित्र गंगा नदी में स्नान कर आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं। यहां का वातावरण मन को सुकून देता है और कुछ समय के लिए शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी को भुला देता है। सिर्फ शांति ही नहीं, रोमांच के शौकीनों के लिए भी यह जगह खास है। रिवर राफ्टिंग के लिए ऋषिकेश देशभर में प्रसिद्ध है, जहां आप एडवेंचर और प्रकृति का बेहतरीन मेल महसूस कर सकते हैं।

    सिक्किम
    क्या आप कभी सिक्किम की वादियों तक पहुंचे हैं? अगर अब तक यह जगह आपकी ट्रैवल लिस्ट में ही है, तो मार्च इसका सही समय हो सकता है। वसंत ऋतु के दौरान यहां का मौसम बेहद सुहावना हो जाता है और रंग-बिरंगे फूलों से सजी घाटियां मन मोह लेती हैं। प्राकृतिक नज़ारों के बीच बिताया गया समय आपके तनाव को कम करने में मदद कर सकता है। ऊंचे-ऊंचे पहाड़, साफ हवा और शांत वातावरण यहां की सबसे बड़ी खासियत हैं। सिक्किम अपने खूबसूरत लैंडस्केप, प्राचीन बौद्ध मठों और रोमांचक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। एक बार यहां की वादियों को करीब से देखने के बाद आपका मन बार-बार इस शांत और सुंदर राज्य की ओर खिंच सकता है।

  • गर्मियों में भी रहेगा ग्लो बरकरार! बस रूटीन में करें ये 3 आसान बदलाव

    गर्मियों में भी रहेगा ग्लो बरकरार! बस रूटीन में करें ये 3 आसान बदलाव


    नई दिल्ली। गर्मियों की दस्तक के साथ ही त्वचा की परेशानियां भी सिर उठाने लगती हैं। तेज धूप, उमस और पसीने की वजह से चेहरा काला पड़ने लगता है और ऑयली स्किन वालों की समस्या दोगुनी हो जाती है। कई लोग महंगे क्रीम और फेसवॉश पर हजारों रुपये खर्च कर देते हैं, लेकिन सही रिजल्ट नहीं मिल पाता। दरअसल, गर्मियों में स्किन को खूबसूरत रखने का राज महंगे प्रोडक्ट्स में नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आदतों में छिपा है। अगर आप अपनी डेली रूटीन में तीन छोटे लेकिन असरदार बदलाव कर लें, तो तपती धूप में भी चेहरा फ्रेश, साफ और चमकदार बना रह सकता है।

    चेहरा धोने का सही तरीका ही असली गेमचेंजर
    गर्मी में बार-बार चेहरा धोना आम आदत है, लेकिन यही सबसे बड़ी गलती भी साबित हो सकती है। जरूरत से ज्यादा फेसवॉश इस्तेमाल करने से त्वचा का प्राकृतिक तेल खत्म हो जाता है, जिससे स्किन और ज्यादा ऑयली बन जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक दिन में दो से तीन बार माइल्ड फेसवॉश से चेहरा साफ करना काफी है। बाहर से आने के बाद ठंडे पानी से चेहरा धोना या हल्के छींटे मारना धूल-मिट्टी और पसीना हटाने में मदद करता है। वहीं रात को सोने से पहले चेहरा जरूर साफ करें, ताकि त्वचा को सांस लेने का मौका मिले और पोर्स बंद न हों।

    women skin careधूप में निकलना हो या घर की खिड़की के पास बैठना-सूरज की यूवी किरणें हर जगह असर डालती हैं। यही किरणें टैनिंग, पिग्मेंटेशन और झुर्रियों का कारण बनती हैं। इसलिए सनस्क्रीन को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। कम से कम SPF 30 या उससे ज्यादा वाली सनस्क्रीन को बाहर निकलने से 20 मिनट पहले लगाएं। खास बात यह है कि हर 3 से 4 घंटे में इसे दोबारा लगाना जरूरी है, खासकर अगर आप धूप में ज्यादा समय बिता रहे हों। यह त्वचा पर एक सुरक्षात्मक परत बनाकर कालेपन और समय से पहले एजिंग से बचाती है।

    अंदर से ठंडक, बाहर से चमक
    सिर्फ बाहरी देखभाल ही नहीं, बल्कि अंदर से शरीर को हाइड्रेट रखना भी उतना ही जरूरी है। गर्मियों में 8-10 गिलास पानी पीना चाहिए, ताकि शरीर से टॉक्सिन बाहर निकल सकें। अपनी डाइट में खीरा, तरबूज, संतरा और नींबू पानी जैसी चीजें शामिल करें, जो शरीर को ठंडक देती हैं। ज्यादा तेल-मसाले वाला और तला हुआ खाना कम करें, क्योंकि इससे पिंपल्स और ऑयली स्किन की समस्या बढ़ सकती है। जितना संतुलित और हल्का खानपान होगा, उतनी ही त्वचा प्राकृतिक रूप से दमकेगी।

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  • Gudi Padwa 2026: मराठी लुक को रॉयल बनाएंगी ये खूबसूरत नथ डिजाइन्स, त्योहार पर ट्राई करें लेटेस्ट स्टाइल

    Gudi Padwa 2026: मराठी लुक को रॉयल बनाएंगी ये खूबसूरत नथ डिजाइन्स, त्योहार पर ट्राई करें लेटेस्ट स्टाइल


    नई दिल्ली । गुड़ी पड़वा महाराष्ट्र का एक प्रमुख और पारंपरिक त्योहार है जो न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है बल्कि राज्य की समृद्ध संस्कृति परंपरा और फैशन का भी प्रतीक माना जाता है। इस खास अवसर पर महिलाएं पारंपरिक मराठी वेशभूषा जैसे पैठणी साड़ी या सिल्क साड़ी पहनती हैं और अपने लुक को पूरा करने के लिए पारंपरिक आभूषणों का विशेष ध्यान रखती हैं। महाराष्ट्रियन श्रृंगार में नथ का स्थान बेहद खास माना जाता है जो पूरे लुक को आकर्षक और रॉयल बना देती है।

    गुड़ी पड़वा के मौके पर महिलाएं अलग अलग प्रकार की नथ पहनकर अपने पारंपरिक लुक में चार चांद लगा सकती हैं। फैशन एक्सपर्ट्स के अनुसार आजकल पारंपरिक डिजाइन्स के साथ मॉडर्न स्टाइल का कॉम्बिनेशन भी काफी पसंद किया जा रहा है।

    पारंपरिक पेशवाई नथ

    पेशवाई नथ को मराठी नथ का सबसे पारंपरिक और रॉयल रूप माना जाता है। इसमें लाल और हरे रंग के नगों के साथ मोतियों का खूबसूरत काम किया जाता है। यदि आप गुड़ी पड़वा पर भारी काम वाली पैठणी साड़ी पहन रही हैं तो पेशवाई नथ आपके पूरे लुक को महारानी जैसा भव्य बना सकती है।

    स्लीक ब्राह्मणी नथ
    जो महिलाएं सादगी और एलिगेंस पसंद करती हैं उनके लिए ब्राह्मणी नथ एक बेहतरीन विकल्प है। यह डिजाइन थोड़ा लंबा और पतला होता है और इसमें छोटे छोटे मोतियों का काम किया जाता है। यह खासतौर पर सिल्क साड़ियों के साथ बहुत आकर्षक लगता है।

    डायमंड और पोलकी नथ
    आजकल पारंपरिक नथ डिजाइन्स में मॉडर्न टच भी काफी लोकप्रिय हो रहा है। गोल्ड के साथ डायमंड या पोलकी वर्क वाली नथ युवतियों के बीच खासा ट्रेंड में है। यह डिजाइन हैवी मेकअप और फेस्टिव लुक के साथ बेहद स्टाइलिश दिखाई देता है।

    मोती जड़ाऊ नथ

    अगर आपकी साड़ी हल्के रंग की है तो सफेद मोतियों वाली जड़ाऊ नथ आपके लुक को और भी खूबसूरत बना सकती है। यह चेहरे पर एक फ्रेश और ब्राइट लुक देती है और पारंपरिक के साथ साथ एलिगेंट स्टाइल भी प्रदान करती है।

    क्लिप ऑन नथ
    आजकल उन लड़कियों के लिए भी कई विकल्प मौजूद हैं जिनकी नाक छिदी हुई नहीं है। क्लिप ऑन नथ को आसानी से पहना जा सकता है और यह दिखने में बिल्कुल असली नथ जैसी लगती है। इस वजह से यह युवतियों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है।

    इसके अलावा नथ चुनते समय चेहरे के आकार का भी ध्यान रखना जरूरी है। यदि आपका चेहरा गोल है तो थोड़ी लंबी नथ चुनना बेहतर माना जाता है जिससे चेहरा स्लिम दिखाई देता है। वहीं लंबे चेहरे वाली महिलाओं पर छोटी और गोल नथ ज्यादा अच्छी लगती है। गुड़ी पड़वा के इस खास अवसर पर सही नथ का चुनाव करके महिलाएं अपने पारंपरिक मराठी लुक को और भी आकर्षक और स्टाइलिश बना सकती हैं।

  • सुबह उठते ही महसूस होती है कमजोरी? शरीर में हो सकती है इन पोषक तत्वों की कमी, डाइट में तुरंत करें बदलाव

    सुबह उठते ही महसूस होती है कमजोरी? शरीर में हो सकती है इन पोषक तत्वों की कमी, डाइट में तुरंत करें बदलाव


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में कई लोग सुबह उठते ही थकान, कमजोरी और सुस्ती महसूस करते हैं। कई बार लोग इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी का संकेत भी हो सकता है। खासतौर पर आयरन की कमी यानी एनीमिया इसके प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है।

    डॉक्टरों के मुताबिक जब शरीर में आयरन की कमी हो जाती है तो खून में हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो जाता है। हीमोग्लोबिन शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। इसकी कमी होने पर शरीर के अंगों और मांसपेशियों को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती, जिससे व्यक्ति को सुबह उठते ही थकान, चक्कर और कमजोरी महसूस होने लगती है। यह समस्या विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं में तेजी से बढ़ती देखी जा रही है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सही खान पान और संतुलित डाइट के जरिए इस समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकता है। इसके लिए कुछ पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को रोजाना के आहार में शामिल करना जरूरी है।

    गुड़ और मूंगफली

    गुड़ आयरन का एक सस्ता और प्रभावी स्रोत माना जाता है। रोजाना थोड़ा सा गुड़ चने या मूंगफली के साथ खाने से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है और खून की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।

    हरी पत्तेदार सब्जियां

    पालक, मेथी और बथुआ जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां आयरन और फाइबर से भरपूर होती हैं। इन्हें नियमित रूप से खाने से शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाने में मदद मिलती है।

    दालें और चने
    काले चने, राजमा और उड़द की दाल प्रोटीन के साथ साथ आयरन का भी अच्छा स्रोत हैं। इन्हें अपनी रोजाना की डाइट में शामिल करने से शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिलती है और कमजोरी दूर होती है।

    तिल का सेवन

    काले और सफेद तिल दोनों ही आयरन से भरपूर होते हैं। तिल के लड्डू या चटनी का सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और खून की कमी को दूर करने में मदद मिलती है।

    विटामिन सी का महत्व

    विशेषज्ञों का कहना है कि केवल आयरन युक्त भोजन करना ही पर्याप्त नहीं होता। शरीर में आयरन के बेहतर अवशोषण के लिए विटामिन सी की भी जरूरत होती है। इसलिए आयरन युक्त भोजन के साथ नींबू, संतरा या आंवला जैसे विटामिन सी से भरपूर फल जरूर खाने चाहिए।

    यदि आपको लगातार सुबह उठते समय कमजोरी, चक्कर या थकान महसूस होती है तो इसे नजरअंदाज न करें। अपनी डाइट में पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेकर खून की जांच भी करवाएं। स्वस्थ शरीर ही बेहतर और सफल जीवन की नींव होता है।

  • क्या आप भी फटे होंठ से हो गई हैं परेशान? तो घर बैठे घर बैठे ही करें इसका उपाय

    क्या आप भी फटे होंठ से हो गई हैं परेशान? तो घर बैठे घर बैठे ही करें इसका उपाय


    नई दिल्ली। आज के समय में प्रदूषण, खराब खान-पान के कारण कई प्रकार की समस्या उत्पन्न होती है। कई बार हमारे स्क्रीन में भी इसका काफी ज्यादा प्रभाव देखने को मिलता है। कई सारे केमिकल के कारण हमारे सुंदर प्राकृतिक वाले होंठ के रंग भी इसमें छीन जाते हैं। और वह धीरे-धीरे कालें पड़ने लगते हैं और फटने लगते हैं। अगर आप भी इससे काफी ज्यादा परेशान रहती हैं तब आप इस ट्रिक को जरूर अपनाएं।

    इस प्रकार मिलेगा फटे होंठ से छुटकारा
    अगर आप भी महंगे लिप बाम और पार्लर के ट्रीटमेंट से थक चुकी हैं, तो प्रकृति के पास आपकी इस समस्या का सबसे सटीक समाधान है। लेकिन घबराइए नहीं! आपके किचन में रखी कुछ चीजें किसी जादुई नुस्खे से कम नहीं हैं। तो चलिए उनके बारे में आपको बताते हैं जो आप घर पर ही कर सकती हैं।

    इस प्रकार पाएं गुलाबी होंठ
    फटे होंठ को ठीक करने के लिए चुकंदर काफी कारगर साबित होता है तो चलिए इसका पेस्ट कैसे बनाना है और इसे कैसे लगाना है इन सब के बारे में आपको बताते हैं। सबसे पहले एक छोटे आकार के चुकंदर को धोकर छील लें और उसे कद्दूकस कर लें। अब एक सूती कपड़े या छलनी की मदद से उसका गहरा लाल रस निकाल लें।

    एलोवेरा भी मिलाएं
    एक साफ कांच की कटोरी में 2 चम्मच चुकंदर का रस लें और उसमें 1 चम्मच फ्रेश या मार्केट वाला एलोवेरा जेल मिलाएं। इसे तब तक फेंटें जब तक यह गाढ़ा न हो जाए।अब इसमें नारियल तेल और एक विटामिन-E कैप्सूल को पंचर करके उसका ऑयल निकाल लें और मिक्सचर में डाल दें। यह आपके होंठों को अंदर से पोषण देगा।तैयार जेल को एक छोटी साफ डिब्बी या पुराने लिप बाम कंटेनर में भर लें। इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए फ्रिज में स्टोर करना बेहतर होता है।

    इस प्रकार करें उपयोग

    जेल लगाने से पहले चीनी और शहद मिलाकर होंठों को 2 मिनट के लिए हल्के हाथों से स्क्रब करें ताकि डेड स्किन निकल जाए।रात को सोने से पहले इस होममेड जेल की एक पतली परत होंठों पर लगाएं। 1 मिनट के लिए इससे मसाज करके रात भर लगा रहने दें। और सुबह ठंडा पानी से धुलने आपको काफी अच्छा रिजल्ट देखने को मिलेगा।

  • Night Skincare Alert: सोने से पहले चेहरे पर ये चीजें न लगाएं, ज्यादातर लोग कर रहे हैं बड़ी गलती

    Night Skincare Alert: सोने से पहले चेहरे पर ये चीजें न लगाएं, ज्यादातर लोग कर रहे हैं बड़ी गलती


    नई दिल्ली। रात का समय त्वचा के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। सोते समय आपकी त्वचा खुद को रिपेयर और रिन्यू करती है। लेकिन कई लोग अनजाने में सोने से पहले ऐसे प्रोडक्ट्स या घरेलू नुस्खे चेहरे पर लगा लेते हैं, जो त्वचा के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इससे मुहांसे, एलर्जी, ऑयली स्किन और स्किन डैमेज जैसी समस्याएं हो सकती हैं। आइए जानते हैं, रात में कौन-सी चीजें चेहरे पर नहीं लगानी चाहिए।

    भारी और ऑयली क्रीम
    रात में अधिक मॉइश्चराइजर लगाने की गलती अक्सर की जाती है। लेकिन बहुत ज्यादा भारी या ऑयली क्रीम लगाने से पोर्स बंद हो सकते हैं। इसके कारण पिंपल्स, ब्लैकहेड्स और ऑयली स्किन की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए रात में हमेशा हल्का और स्किन टाइप के अनुसार मॉइश्चराइजर लगाना बेहतर होता है।

    नींबू
    नींबू को स्किन ब्राइटनिंग के लिए इस्तेमाल करना आम है, लेकिन इसे रात में सीधे चेहरे पर लगाना नुकसानदेह हो सकता है। नींबू में एसिडिक तत्व होते हैं, जिससे त्वचा में जलन, रेडनेस और एलर्जी हो सकती है। खासकर संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को इससे बचना चाहिए।

    मेकअप हटाए बिना सोना
    यह सबसे बड़ी और आम गलती है। मेकअप हटाए बिना सोने से पोर्स बंद हो जाते हैं, पिंपल्स बढ़ सकते हैं और त्वचा बेजान दिख सकती है। सोने से पहले हमेशा क्लींजर या मेकअप रिमूवर से चेहरा साफ करना जरूरी है।

    टूथपेस्ट का इस्तेमाल
    कुछ लोग पिंपल्स को जल्दी सुखाने के लिए टूथपेस्ट लगाते हैं। यह स्किन के लिए हानिकारक हो सकता है क्योंकि इससे त्वचा सूख सकती है, जलन और रेडनेस बढ़ सकती है। पिंपल्स के लिए हमेशा डर्मेटोलॉजिस्ट द्वारा सुझाए गए प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें।

    ज्यादा स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल
    रात में कई प्रोडक्ट्स जैसे सीरम, क्रीम, ऑयल और फेस पैक एक साथ लगाने से स्किन के लिए ओवरलोड हो सकता है। इससे स्किन बैरियर कमजोर हो सकता है। इसलिए कम लेकिन सही प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना हमेशा बेहतर होता है।

    सही नाइट स्किनकेयर रूटीन
    रात में त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रखने के लिए सरल और हल्का रूटीन अपनाएं:

    हल्के फेसवॉश से चेहरा साफ करें।

    मेकअप पूरी तरह हटाएं।

    जरूरत हो तो हल्का सीरम लगाएं।

    स्किन टाइप के अनुसार मॉइश्चराइजर लगाएं।

    यह रूटीन त्वचा को रातभर हाइड्रेट और रिपेयर रखने में मदद करता है, जिससे सुबह त्वचा फ्रेश, चमकदार और हेल्दी दिखती है।

  • काशी में बुढ़वा मंगल की महफिल सजी, होली के रंग के बाद विदेशी और देशी सैलानी हुए मंत्रमुग्ध

    काशी में बुढ़वा मंगल की महफिल सजी, होली के रंग के बाद विदेशी और देशी सैलानी हुए मंत्रमुग्ध


    नई दिल्ली। बुढ़वा मंगल’ होली के ठीक बाद पड़ने वाले पहले मंगलवार को मनाया जाता है। यह केवल होली का समापन नहीं, बल्कि प्रेम, सौहार्द, संगीत और बुजुर्गों के सम्मान का जश्न है। स्थानीय लोग इस दिन नए कपड़े पहनकर घाटों पर पहुंचते हैं, कुल्हड़ में ठंडई और बनारसी मिठाइयों का स्वाद लेते हैं और बुजुर्गों को फूलों और अबीर से सम्मानित करते हैं।

    प्रभुनाथ त्रिपाठी, काशी निवासी, बताते हैं, “मंगलवार को ‘बुढ़वा मंगल’ के साथ होली की खुमारी का समापन होता है। यह सालों पुरानी रीत है, जिसमें खान-पान, गुलाल और संगीत का भी आनंद लिया जाता है।”

    गंगा घाटों पर संगीत और भक्ति
    इस महफिल का मुख्य आकर्षण गंगा घाट होते हैं। दशाश्वमेध घाट से अस्सी घाट तक बजड़े (नावों) सजाए जाते हैं और लोकगायक तथा कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देते हैं। फूलों, गद्दों, मसनद और इत्र की खुशबू से महकते घाट शाम को संगीत की महफिल में बदल जाते हैं।

    बनारस घराने की होरी, चैती, ठुमरी, बिरहा और कजरी की मधुर धुनें गूंजती हैं। कभी उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहनाई, गिरिजा देवी की चैती, पंडित किशन महाराज का तबला और सितार की झंकार रातभर लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती थी। आज भी लोकगायक मां गंगा और हनुमान जी के चरणों में अपनी कला अर्पित करते हैं।

    घाटों की रंगीन छटा
    बुढ़वा मंगल के दिन दशाश्वमेध से अस्सी घाट तक संगीत, रंग और उत्सव का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है। लोकगायक और कलाकार गंगा में खड़े बजड़े पर प्रस्तुति देते हैं। बनारसी घराने की धुनें शाम को सुरम्य और सुरीली बना देती हैं।

    यह महफिल काशी के अक्खड़पन, फक्कड़पन और आध्यात्मिकता का संगम प्रस्तुत करती है। सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, बल्कि यह एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अनुभव भी है।

    देश-विदेश से सैलानी
    इस दिन काशी में देश-विदेश से सैलानी भी पहुंचते हैं। वे गंगा तट पर बिखरे रंग, संगीत और बनारसी जोश का आनंद लेते हैं। घरों में स्वादिष्ट पकवान बनते हैं, मित्र और रिश्तेदार अंतिम होली मिलन करते हैं, और परिवार के बुजुर्गों का सम्मान किया जाता है।

    ‘बुढ़वा मंगल’ केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि काशी की संस्कृति, संगीत, रंग और बुजुर्गों के प्रति सम्मान का प्रतीक है। यह महफिल गंगा घाटों को रंगीन और जीवन से भर देती है, जो हर साल देश-विदेश से आए लोगों के लिए यादगार अनुभव बन जाती है।
  • कैलोरी बर्न से मसल्स गेन तक, फिट रहने के लिए कंपाउंड मूवमेंट्स क्यों हैं जरूरी

    कैलोरी बर्न से मसल्स गेन तक, फिट रहने के लिए कंपाउंड मूवमेंट्स क्यों हैं जरूरी


    नई दिल्ली। फिट रहने और मसल्स बनाने के लिए कंपाउंड मूवमेंट्स को अपनी एक्सरसाइज रूटीन में शामिल करना बेहद फायदेमंद है। ये व्यायाम सिर्फ मांसपेशियों को मजबूत नहीं बनाते, बल्कि कैलोरी बर्न, मेटाबॉलिज्म, हार्मोन और कार्डियो फिटनेस पर भी सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

    कंपाउंड मूवमेंट्स क्या हैं?
    कंपाउंड मूवमेंट्स ऐसे व्यायाम हैं जिनमें एक साथ कई मांसपेशियां और जोड़ सक्रिय होते हैं। उदाहरण के लिए:स्क्वैट्स और डेडलिफ्ट: पैरों के साथ-साथ पीठ और कोर मसल्स को भी मजबूत बनाते हैं। बेंच प्रेस, पुल-अप, ओवरहेड प्रेस, लंज: कई मसल ग्रुप को काम में लेते हैं। इन अभ्यासों से शरीर एक समन्वित इकाई की तरह काम करता है, जिससे ताकत और सहनशीलता बढ़ती है।

    मसल्स और ताकत में तेजी
    कंपाउंड एक्सरसाइज में अक्सर अधिक वजन उठाना पड़ता है, जिससे मांसपेशियों की ताकत और आकार तेजी से बढ़ते हैं। भारी लिफ्ट्स जैसे स्क्वैट और डेडलिफ्ट टेस्टोस्टेरोन और ग्रोथ हार्मोन के स्तर को अस्थायी रूप से बढ़ाते हैं। इससे मसल ग्रोथ और रिकवरी दोनों में मदद मिलती है।

    कैलोरी बर्न और वजन नियंत्रण
    कंपाउंड मूवमेंट्स में अधिक मसल्स सक्रिय होने के कारण कैलोरी बर्न ज्यादा होती है। मेटाबॉलिज्म बढ़ता है। वजन को नियंत्रित रखना आसान होता है। हार्ट और कार्डियो फिटनेस में सुधार होता है। वहीं, आइसोलेशन एक्सरसाइज केवल एक मसल और जोड़ पर फोकस करती हैं, इसलिए इनसे कैलोरी बर्न और स्ट्रेंथ बढ़ाने की दर कम होती है।

    इंटरमस्कुलर कोऑर्डिनेशन और रियल-लाइफ एक्टिविटी
    कंपाउंड मूवमेंट्स शरीर के जोड़ों और मांसपेशियों की स्थिरता बढ़ाते हैं। उठाना, धक्का देना, खींचना जैसी रोजमर्रा की एक्टिविटी के लिए शरीर तैयार होता है। इंटरमस्कुलर कोऑर्डिनेशन बेहतर होता है।

    शुरुआती लोगों के लिए टिप्स
    शुरुआती लोग बॉडीवेट स्क्वाट, पुश-अप, लंज, असिस्टेड पुल-अप जैसी कंपाउंड एक्सरसाइज से शुरुआत कर सकते हैं।

    सही फॉर्म से व्यायाम करें।

    धीरे-धीरे वजन बढ़ाएं।

    इन्हें नियमित रूटीन में शामिल करें।