Category: Lifestyle

  • Travel Tips: मार्च में घूमने के लिए बेस्ट हैं ये 5 डेस्टिनेशन्स, ना ठंड की चिंता ना गर्मी का झंझट

    Travel Tips: मार्च में घूमने के लिए बेस्ट हैं ये 5 डेस्टिनेशन्स, ना ठंड की चिंता ना गर्मी का झंझट


    नई दिल्ली। मार्च ऐसा महीना होता है जब सीज़ बिल्कुल चलता रहता है। ना कोई परेशानी होती है और ना ही गर्मी का असर होता है। विशाल धूप, साना आकाश और कम भीड़ के कारण इस समय की यात्रा का अनुभव और भी बेहतर हो जाता है। अगर आप भी इस महीने कहीं भी घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो भारत की कुछ ऐसी खूबसूरत जगहें हैं जहां आपको प्रकृति, संस्कृति और सबसे शानदार संगम देखने को मिलेगा।

    वाराणसी: अध्यात्म और शांति का अनुभव
    वाराणसी में मार्च महीने में घूमने के लिए बेहद शानदार जगह मणि मिलती है। इस समय यहां की सुबह बेहद सुहावनी होती है और धूप के बीच घाटों का दृश्य मन मोह लेता है। यहां आप प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन कर सकते हैं और शहर की पुरानी कहानियों में डूबे हुए दार्शनिक दार्शनिक को महसूस कर सकते हैं। सुबह-सुबह गंगा नदी में नाव की सवारी और शाम को घाटों पर वाली गंगा आरती का अनुभव करने के लिए हर यात्री स्मारक पर जाता है।

    यूके: झीलों की नगरी का रोमांटिक दृश्य
    राजस्थान की गर्मी मार्च से पहले शुरू होने पर उदयपुर घूमने का सबसे सही समय माना जाता है। साफ नीले आकाश की परछाई जब पिछोला झील में खूबसूरत माला है, तो पूरे शहर में किसी भी तरह की पेंटिंग नजर आती है।

    यहां का ग्रैंड सिटी पैलेस, उदयपुर और जग मंदिर की भूमिका को प्रमुखता से तैयार किया गया है। वहीं सहेलियों-की-बारी में टहलना और झील किनारे शाम की चढ़ाई बेहद सच्चा अनुभव देती है।

    वायनाड: प्रकृति प्रेमियों की पसंद
    अगर आप हरियाली और प्रकृति के करीब घूमना चाहते हैं, तो वायनाड मार्च में घूमने के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। यह इस समय बेहद खूबसूरत दिखती है। यहां आप प्राचीन एडक्कल गुफाएं देख सकते हैं और बाणासुर सागर बांध के शानदार नज़ारों का आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा चेम्बरा पीक तक ट्रैकिंग करते हुए दिल के आकार वाली लेक तक का आनंददायक अनुभव भी देखने को मिलता है।

    उटी: फूल और चाय बागानों की सुंदरता
    दक्षिण भारत का प्रसिद्ध हिल स्टेशन ऊटी मार्च में अपनी असली सुंदरता का प्रतीक है। इस समय यहां के सजावटी रंग-बिरंगे फूलों से भरपूर रहते हैं और चारों ओर चाय के हरे-भरे बाग देखने को मिलते हैं। यहां की ऊटी झील में बोटिंग करना और प्रसिद्ध नीलगिरि माउंटेन रेलवे की टेरी ट्रेन की सवारी करना बेहद यादगार अनुभव होता है। अगर आप पेपैल से शानदार दृश्य देखना चाहते हैं, तो डोड्डाबेट्टा पीक जरूर जाएं।

    गैंगटोक: पहाड़ों में वसंत का जादू
    गंगटोक में मार्च महीने में वसंत का मौसम शुरू हो जाता है। इस समय यहां का मौसम बेहद सुहावना रहता है और आसपास के दृश्यों में साक्षात् दृश्य दिखाई देते हैं। यहां आप खूबसूरत त्सोम्गो झील का नजारा देख सकते हैं और शांत वातावरण वाले रमटेक मठ में समय सामात्यकर मनोवैज्ञानिक पवित्र पा सकते हैं। शाम के समय एमजी मार्ग, गंगटोक पर घूमना और स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लेना और भी खास बनाना है।

  • चेहरे में जमी Tanning की हो जाएगी छुट्टी, बस अपनाएं यह ट्रिक

    चेहरे में जमी Tanning की हो जाएगी छुट्टी, बस अपनाएं यह ट्रिक


    नई दिल्ली। आज के समय में देखा जाता है कि महिलाएं अपने चेहरे को सुंदर और ग्लोइंग बनाने के लिए मार्केट से कई सारे प्रोडक्ट लाती हैं, जबकि उसका उतना अच्छा रिस्पांस उन्हें नहीं मिल पाता है। कई बार बार-बार धूप में जाना काम करना इसके साथ ही घर पर भी स्किन केयर को ज्यादा अच्छे से फॉलो ना कर पाने की वजह से आपके चेहरे काफी डैमेज हो जाते हैं कई प्रकार की स्किन प्रॉब्लम आपको होने लगती है। सबसे छुटकारा पाने के लिए आपके घर में ही एक खास स्क्रब तैयार करना चाहिए तो चलिए उसके बारे में बताते हैं।

    घर में ही बना सकती हैं होममेड स्क्रब
    अगर आप भी अपने फेस की खूबसूरती को बढ़ाना चाहती हैं, तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। आप घर में आसानी से डी टैन स्क्रब का इस्तेमाल कर सकती हैं। हालांकि इसको बनाने के लिए कुछ सामग्री की जरूरत पड़ेगी।

    बनाने के लिए उसकी सामग्री
    शहद
    चावल का आटा
    ग्लिसरीन
    नारियल तेल

    स्क्रब बनाने का तरीका
    इसको बनाने के लिए एक कटोरी में थोड़ा सा चावल का आटा लें।फिर इसमें थोड़ा सा शहद और ग्लिसरीन मिला लें।अब सभी को अच्छे से मिक्स कर लें और नारियल तेल मिक्स करें।इन सभी चीजों को तब तक फेंटे, जब तक यह गाढ़ा न हो जाए।अब इसको स्क्रब को मिक्स कर लें, और इसको एयर टाइट डिब्बे में भरकर रख दें।इस स्क्रब को आप रात में सोने से पहले फेस पर 30-40 मिनट के लिए लगाएं।अब कच्चा दूध हाथ में लेकर हल्के हाथों से फेस की मसाज करें।

    इन बातों का रखें ध्यान
    अगर आप इसको पहली बार इस्तेमाल कर रही हैं, तो पहले स्क्रब टेस्ट जरूर करें। इस स्क्रब को लगाने के बाद आपके चेहरे में कई प्रकार के बदलाव आए ना शुरू हो जाएंगे हफ्ते में दो-तीन बार अगर आप इस स्क्रब को लगती हैं तब धीरे-धीरे आपका चेहरा साफ होने लगेगा और काफी निखार आने लगेगा हालांकि इसके साथ-साथ आपको अपने खान-पान पर भी पूरा ध्यान रखना चाहिए ताकि आपका चेहरा हमेशा अच्छा और ताजगी भरा रहे ताकि आपको मार्केट के बड़े प्रोडक्ट की जरूरत ना पड़े।

  • छुपा हुआ खजाना! दिल्ली के पास एक ऐसी जगहें जहां शोर नहीं सिर्फ सुकून, आज ही बना लें ट्रिप का प्लान

    छुपा हुआ खजाना! दिल्ली के पास एक ऐसी जगहें जहां शोर नहीं सिर्फ सुकून, आज ही बना लें ट्रिप का प्लान


    नई दिल्ली। अगर आप दिल्ली की भीड़-भाड़ और शोर से दूर कुछ समय बिताना चाहते हैं, तो उत्तराखंड का लैंसडाउन आपके लिए आदर्श जगह है। दिल्ली से बस 4-5 घंटे की दूरी पर स्थित यह हिल स्टेशन बेहद शांत और सुकून भरा अनुभव देता है। यहाँ पहुंचने के लिए ज्यादा प्लानिंग की जरूरत नहीं है।

    बस थोड़ा समय निकालकर इस प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद लेना होता है। पहाड़, झाड़ियां, घने जंगल और उनके बीच बहती नदियां इस जगह को और भी आकर्षक बनाती हैं। चाहे आप होटल के कमरे से प्राकृतिक नजारों को देखें या पहाड़ की ओट में बैठकर शांति का आनंद लें, लैंसडाउन हर पल आपको तरोताजा कर देगा।

    ताड़केश्वर और बालेश्वर महादेव मंदिर

    लैंसडाउन में ही ताड़केश्वर और बालेश्वर महादेव मंदिर हैं। यह जगह न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी मशहूर है। मंदिर तक पहुँचने का रास्ता घने जंगल और हरियाली से भरा हुआ है, जो यात्रा को एक सुखद अनुभव में बदल देता है।

    कालागढ़ टाइगर रिजर्व

    जंगल और वन्य जीवों के प्रेमियों के लिए कालागढ़ टाइगर रिजर्व सबसे आकर्षक स्थल है। यहाँ बाघों सहित कई जीवों को देखना संभव है। जंगल सफारी के दौरान आप प्राकृतिक नजारों और वन्य जीवों के बीच समय बिताकर मानसिक शांति और उत्साह का अनुभव कर सकते हैं।

    टिप इन टॉप और सैंट मेरी चर्च

    लैंसडाउन की खूबसूरती सिर्फ प्राकृतिक दृश्य तक सीमित नहीं है। यहाँ “टिप इन टॉप” नामक हिल स्टेशन क्षेत्र है, जहाँ सैंट मेरी चर्च सहित कई छोटे चर्च भी हैं। यदि आपके पास समय है तो आसपास के चर्चों का भ्रमण आपको सांस्कृतिक और ऐतिहासिक अनुभव भी देगा।

    लैंसडाउन में घूमना केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि यह आपके मन और शरीर दोनों को ताजगी देने का अवसर है। शांत वातावरण, प्राकृतिक नजारों और विविध सांस्कृतिक स्थल इसे दिल्ली से दूर सफर करने वालों के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन बनाते हैं।

  • Muscle Loss से बचना है तो 35 के बाद बदलें डाइट और टाइमिंग, न्यूट्रिशनिस्ट ने बताए असरदार नियम

    Muscle Loss से बचना है तो 35 के बाद बदलें डाइट और टाइमिंग, न्यूट्रिशनिस्ट ने बताए असरदार नियम


     नई दिल्ली।  उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव आने लगते हैं और अक्सर 30 से 35 साल के बाद लोग महसूस करने लगते हैं कि पहले जैसी ताकत और ऊर्जा नहीं रही। मांसपेशियां धीरे धीरे ढीली होने लगती हैं और शरीर की फिटनेस कम होने लगती है। मेडिकल भाषा में इस स्थिति को सार्कोपेनिया कहा जाता है। इसमें उम्र बढ़ने के साथ मसल्स मास कम होने लगता है।

    मशहूर न्यूट्रिशनिस्ट लवनीत बत्रा के अनुसार यदि सही डाइट और सही समय पर भोजन की आदत अपनाई जाए तो उम्र बढ़ने के बावजूद शरीर को लंबे समय तक मजबूत और फिट रखा जा सकता है। उनका कहना है कि मसल्स बनाने के लिए केवल अच्छा खाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि भोजन का समय भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

    उनके अनुसार जब भी कोई व्यक्ति वर्कआउट करता है तो उसके बाद मांसपेशियों को रिपेयर और मजबूत होने के लिए प्रोटीन की आवश्यकता होती है। इसलिए एक्सरसाइज के एक से दो घंटे के भीतर 20 से 30 ग्राम हाई क्वालिटी प्रोटीन लेना जरूरी माना जाता है। इससे मसल्स की रिकवरी बेहतर होती है और शरीर की ताकत भी बढ़ती है।

    प्रोटीन के लिए कई अच्छे विकल्प उपलब्ध हैं। अंडे और डेयरी प्रोडक्ट जैसे दूध पनीर और दही शरीर को अच्छा प्रोटीन देते हैं। इसके अलावा चिकन और मछली जैसे लीन मीट भी मसल्स के लिए लाभदायक होते हैं। शाकाहारी लोगों के लिए टोफू और दालें प्रोटीन के अच्छे स्रोत माने जाते हैं।न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार वर्कआउट से पहले भी शरीर को थोड़ी ऊर्जा देना जरूरी होता है। एक्सरसाइज से 30 से 60 मिनट पहले हल्का स्नैक लेना फायदेमंद माना जाता है। इसके लिए ग्रीक योगर्ट या एक मुट्ठी ड्राई फ्रूट जैसे बादाम और अखरोट अच्छे विकल्प हो सकते हैं। इससे वर्कआउट के दौरान मसल्स को नुकसान कम होता है और शरीर बेहतर प्रदर्शन कर पाता है।

    अक्सर लोग वजन कम करने के लिए कार्बोहाइड्रेट और फैट को पूरी तरह छोड़ देते हैं लेकिन ऐसा करना सही नहीं माना जाता। कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा देने का काम करते हैं। फल सब्जियां और साबुत अनाज शरीर में ग्लाइकोजन स्टोर को भरते हैं जिससे शरीर जल्दी थकता नहीं है।इसी तरह हेल्दी फैट भी शरीर के लिए जरूरी होते हैं। एवोकाडो जैतून का तेल और बादाम जैसे हेल्दी फैट्स हार्मोन को संतुलित रखने में मदद करते हैं और मांसपेशियों को सुरक्षित रखते हैं।स्वस्थ शरीर के लिए पानी का सही मात्रा में सेवन भी बेहद जरूरी है। पर्याप्त पानी पीने से शरीर की परफॉर्मेंस बेहतर होती है और वर्कआउट के बाद रिकवरी भी तेजी से होती है।

    न्यूट्रिशनिस्ट का सुझाव है कि दिन भर में तीन से पांच छोटे मील्स लेना चाहिए और हर मील में प्रोटीन जरूर शामिल होना चाहिए। इससे शरीर को लगातार अमीनो एसिड मिलते रहते हैं और मांसपेशियों की मरम्मत और विकास बेहतर तरीके से होता है।लवनीत बत्रा ने पनीर से जुड़ी एक आसान और स्वादिष्ट रेसिपी भी साझा की है। उन्होंने बताया कि घर में मौजूद पनीर की मदद से बिना किसी प्रोटीन पाउडर के लगभग 25 ग्राम प्रोटीन वाला पौष्टिक मील आसानी से तैयार किया जा सकता है।यदि सही डाइट सही समय और नियमित एक्सरसाइज को जीवनशैली का हिस्सा बना लिया जाए तो 35 साल की उम्र के बाद भी शरीर को मजबूत स्वस्थ और फिट बनाए रखना संभव है।

  • Vata Dosha वालों के लिए औषधि समान है यह आहार, दूर होगा सूखापन और कमजोरी

    Vata Dosha वालों के लिए औषधि समान है यह आहार, दूर होगा सूखापन और कमजोरी


    नई दिल्ली। आयुर्वेद के अनुसार मानव शरीर तीन मुख्य दोषों से मिलकर बना होता है-Vata Dosha, Pitta Dosha और Kapha Dosha। इन तीनों दोषों का संतुलन ही स्वस्थ शरीर और बेहतर जीवन का आधार माना जाता है। यदि इनमें से किसी एक दोष का असंतुलन हो जाए तो शरीर में कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं।
    आयुर्वेद के अनुसार वात दोष मुख्य रूप से वायु और आकाश तत्वों से मिलकर बना होता है। जिन लोगों में यह प्रवृत्ति अधिक होती है, वे अक्सर दुबले-पतले, कमजोर और त्वचा में रूखेपन की समस्या से ग्रस्त दिखाई देते हैं। ऐसे लोगों को अक्सर थकान, सूखापन और ऊर्जा की कमी महसूस होती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका मुख्य कारण गलत खान-पान और शरीर की प्रकृति के अनुसार आहार न लेना होता है।

    साबुत अनाज से मिलती है ताकत और संतुलन
    वात दोष वाले लोगों को अपने भोजन में साबुत अनाज को विशेष रूप से शामिल करना चाहिए। साबुत अनाज शरीर को पर्याप्त ऊर्जा देने के साथ-साथ उसमें चिकनाई भी प्रदान करते हैं, जिससे शरीर का सूखापन कम होता है। आयुर्वेद के अनुसार ऐसे लोगों को भारी और पोषण देने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए, जिससे शरीर में ताकत बनी रहे और वात दोष संतुलित रहे। नियमित रूप से साबुत अनाज का सेवन करने से शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा मिलती है और कमजोरी दूर होती है।

    घी और दूध से मिलता है गहरा पोषण
    वात प्रवृत्ति वाले लोगों के लिए Ghee और Milk बेहद लाभकारी माने जाते हैं। ये दोनों खाद्य पदार्थ शरीर को पोषण देने के साथ-साथ आवश्यक चिकनाई भी प्रदान करते हैं।
    घी त्वचा और शरीर के ऊतकों को गहराई से पोषण देता है और सूखेपन को कम करने में मदद करता है। वहीं दूध शरीर को ताकत देने के साथ-साथ वात और पित्त दोष को नियंत्रित करने में भी सहायक माना जाता है।

    सूखे मेवे और बीज से मिलती है ऊर्जा
    वात दोष वाले लोगों को अपने आहार में सूखे मेवे और मगज के बीज भी शामिल करने चाहिए। इनमें प्राकृतिक तेल, गर्माहट और भरपूर पोषण मौजूद होता है।
    बादाम, काजू, अखरोट जैसे सूखे मेवे शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं और ओज यानी शरीर की प्राकृतिक शक्ति को बढ़ाते हैं। इनका नियमित सेवन शरीर की कमजोरी को दूर करने और वात संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है।

    बासी भोजन से करें परहेज
    आयुर्वेद के अनुसार वात प्रवृत्ति वाले लोगों को बासी भोजन से बचना चाहिए। लंबे समय तक रखा हुआ भोजन शरीर में वात और कफ दोष को असंतुलित कर सकता है।
    इसलिए हमेशा ताजा और गर्म भोजन का सेवन करना बेहतर माना जाता है। ताजा भोजन शरीर को अधिक पोषण देता है और पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाए रखता है।

    मीठे और रसीले फलों का सेवन है फायदेमंद
    वात दोष को संतुलित रखने के लिए मीठे और रसीले फलों का सेवन भी बेहद लाभकारी माना जाता है। आहार में Mango, Banana, Papaya, Grapes और Apple जैसे फलों को शामिल किया जा सकता है। ये फल शरीर को आवश्यक विटामिन और खनिज प्रदान करते हैं, जिससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और सूखेपन की समस्या भी कम होती है।

    आयुर्वेद के अनुसार यदि व्यक्ति अपनी शरीर प्रकृति को समझकर भोजन का चयन करता है, तो वह कई बीमारियों से बच सकता है और लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकता है। सही आहार और संतुलित जीवनशैली ही वात दोष को नियंत्रित रखने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।

  • बेहतर नींद के लिए योग, World Sleep Day पर जानें अनिद्रा दूर करने वाले आसान आसन

    बेहतर नींद के लिए योग, World Sleep Day पर जानें अनिद्रा दूर करने वाले आसान आसन


    नई दिल्ली।आज की तेज़ रफ्तार जीवनशैली में अनिद्रा यानी नींद न आने की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल, तनावपूर्ण दिनचर्या और अनियमित खान-पान के कारण बहुत से लोग रात भर करवटें बदलते रहते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि रात में एक बार नींद टूट जाए तो दोबारा सो पाना मुश्किल हो जाता है। इस स्थिति को Insomnia कहा जाता है, जो लंबे समय तक बनी रहे तो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है।

    क्यों मनाया जाता है विश्व निद्रा दिवस
    नींद के महत्व और नींद से जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल World Sleep Day मनाया जाता है। यह दिन लोगों को यह याद दिलाता है कि अच्छी नींद स्वस्थ जीवन के लिए उतनी ही जरूरी है जितना संतुलित आहार और नियमित व्यायाम। पर्याप्त नींद न मिलने से शरीर में थकान, ऊर्जा की कमी, मांसपेशियों में दर्द, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार मानसिक तनाव, कैफीन का अत्यधिक सेवन, अनियमित दिनचर्या और शारीरिक गतिविधियों की कमी अनिद्रा के प्रमुख कारण हैं। ऐसे में योग और ध्यान जैसे प्राकृतिक उपाय इस समस्या से राहत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    हस्तोत्तानासन से कम होता है तनाव
    Hastottanasana को नींद सुधारने वाले प्रभावी योगासनों में माना जाता है। इसके अभ्यास के लिए पैरों में थोड़ा अंतर रखकर सीधे खड़े हों और सांस भरते हुए दोनों हाथ ऊपर उठाएं। इसके बाद गर्दन को हल्का पीछे झुकाते हुए शरीर को पीछे की ओर खींचें। कुछ सेकंड इस स्थिति में रहने के बाद धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट आएं।
    यह आसन कंधों और पीठ की मांसपेशियों को खोलता है, शरीर में तनाव कम करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।

    पादहस्तासन से मन होता है शांत
    Padahastasana भी अनिद्रा में लाभकारी माना जाता है। इस आसन में सीधे खड़े होकर सांस भरते हुए हाथ ऊपर उठाए जाते हैं और फिर सांस छोड़ते हुए शरीर को कमर से आगे झुकाया जाता है। हथेलियों को जमीन पर रखते हुए सिर को नीचे की ओर झुका दिया जाता है। यह आसन सिर की ओर रक्त संचार बढ़ाता है, मानसिक तनाव को कम करता है और मन को शांत करने में मदद करता है।

    नियमित योग, संतुलित आहार और स्वस्थ दिनचर्या अपनाकर अनिद्रा की समस्या से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है और बेहतर, गहरी तथा सुकून भरी नींद हासिल की जा सकती है।

  • झुर्रियों से पहले संभल जाएं! हेल्दी और यंग स्किन के लिए रखें इन बातों का ध्यान

    झुर्रियों से पहले संभल जाएं! हेल्दी और यंग स्किन के लिए रखें इन बातों का ध्यान


    नई दिल्ली।आजकल 30 की उम्र पार करते ही चेहरे पर झुर्रियां और फाइन लाइन्स दिखने लगती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय से पहले एजिंग की सबसे बड़ी वजह अनियमित जीवनशैली और स्किन केयर में लापरवाही है। प्रदूषण, धूप, तनाव और गलत प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल त्वचा को समय से पहले बूढ़ा बना सकता है। ऐसे में जरूरी है कि रोजमर्रा की दिनचर्या में कुछ बुनियादी बातों को शामिल किया जाए, ताकि त्वचा लंबे समय तक स्वस्थ और दमकती रहे।

    सुबह की शुरुआत सही सफाई से’
    त्वचा की देखभाल की पहली शर्त है नियमित और सही क्लीनिंग। सुबह उठकर कॉटन पैड या माइल्ड क्लींजर से चेहरे की सफाई करें, ताकि रातभर जमा ऑयल और गंदगी हट सके। बाहर से लौटने के बाद भी चेहरा जरूर धोएं। ध्यान रखें कि हार्श साबुन या बार-बार स्क्रब करने से त्वचा की प्राकृतिक नमी खत्म हो सकती है। किसी भी स्क्रबर या फेसवॉश का इस्तेमाल करने से पहले त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। सफाई के बाद मॉइस्चराइज़र लगाना न भूलें। बढ़ती उम्र में त्वचा रूखी होने लगती है, जिससे रिंकल्स जल्दी उभरते हैं। ऐसे में हाइड्रेशन बेहद जरूरी है।

    सनस्क्रीन है सबसे बड़ा कवच
    धूप में मौजूद यूवी किरणें एजिंग की प्रक्रिया को तेज करती हैं। इसलिए घर से बाहर निकलते समय कम से कम SPF 50 वाला सनस्क्रीन लगाना जरूरी है। इसे हर 2-3 घंटे में दोबारा लगाना भी उतना ही अहम है, खासकर अगर आप लंबे समय तक बाहर रहते हैं। सनस्क्रीन सिर्फ गर्मियों में ही नहीं, बल्कि हर मौसम में लगाना चाहिए।

    सस्ते प्रोडक्ट्स से बचें, एंटीऑक्सीडेंट को अपनाएं
    त्वचा पर सस्ते और अनजाने ब्रांड के उत्पाद इस्तेमाल करना नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे प्रोडक्ट्स में मौजूद केमिकल्स त्वचा को डैमेज कर सकते हैं। इसके बजाय एंटीऑक्सीडेंट युक्त प्रोडक्ट्स चुनें, जिनमें विटामिन C और विटामिन E जैसे तत्व हों। ये फ्री रैडिकल्स से लड़ने में मदद करते हैं और त्वचा को लंबे समय तक युवा बनाए रखने में सहायक होते हैं।

    रात की देखभाल भी उतनी ही जरूरी
    सोने से पहले मेकअप हटाना अनिवार्य है। मेकअप के साथ सोने से पोर्स बंद हो जाते हैं, जिससे त्वचा बेजान दिखने लगती है। भले ही मेकअप न किया हो, फिर भी चेहरा धोकर ही सोएं।

    घरेलू नुस्खों की बात करें तो बेसन, हल्दी, दही, शहद और एलोवेरा जैसे प्राकृतिक तत्व त्वचा को पोषण देने में मददगार हो सकते हैं। हालांकि, किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले त्वचा के प्रकार को ध्यान में रखना जरूरी है। नियमित देखभाल, संतुलित आहार और पर्याप्त पानी पीना-ये तीनों मिलकर त्वचा को उम्र के असर से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

  • भारत के इन अद्भुत पर्यटन स्थलों पर जरूर जाएं, मन और आत्मा को मिलेगी शांति

    भारत के इन अद्भुत पर्यटन स्थलों पर जरूर जाएं, मन और आत्मा को मिलेगी शांति


    नई दिल्ली।  यात्रा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि मन और आत्मा को ताजगी देने का भी एक तरीका है। भारत अपनी विविधता, प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। अगर आप इस वर्ष यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो ये 14 जगहें आपके लिए जरूर हैं। कुछ स्थल तो यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं, तो कुछ प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध हैं। आइए जानते हैं उन अद्भुत स्थलों के बारे में जहाँ जाकर आपको सुकून और रोमांच दोनों का अनुभव मिलेगा।

    1. कश्मीर
    कश्मीर को अक्सर धरती का स्वर्ग कहा जाता है। यहां की हर घाटी, बर्फ से ढके पहाड़, हरे-भरे मैदान और शांत जलधाराएँ मन को मोह लेने वाली हैं। झीलों की नीली छटा और पहाड़ों पर पड़ता कोहरा किसी पेंटिंग से कम नहीं लगता। यदि आप प्रकृति प्रेमी हैं, तो कश्मीर की यात्रा आपकी आत्मा को सुकून देगी।

    2. आगर
    उत्तर प्रदेश का आगरा शहर ताजमहल के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। यह सफेद संगमरमर का स्मारक प्रेम की अमर कहानी कहता है। इसके अलावा आगरा किला और फतेहपुर सिकरी जैसी ऐतिहासिक धरोहरें भी देखने योग्य हैं। यहां के स्थानीय व्यंजन जैसे पेठा और पारंपरिक मिठाइयाँ इस शहर की यात्रा को और भी यादगार बनाती हैं।

    3. चंडीगढ़
    चंडीगढ़, जो भारत के सबसे सुव्यवस्थित शहरों में से एक है, पारंपरिक पंजाबी संस्कृति और आधुनिकता का अनोखा मिश्रण प्रस्तुत करता है। यहाँ के सुंदर बोटैनिकल गार्डन, रॉक गार्डन और संग्रहालय शहर के हर कोने को खास बनाते हैं।

    4. कूर्ग
    कर्नाटक का कूर्ग, जिसे भारत का स्कॉटलैंड कहा जाता है, अपनी हरियाली और चाय के बागानों के लिए प्रसिद्ध है। यहां का मौसम हमेशा ठंडा और ताजगी भरा रहता है। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह आदर्श स्थल है, जहां हरे-भरे पहाड़ और खुशबूदार कॉफी बागान यात्रा को अविस्मरणीय बना देते हैं।

    5. धनौल्टी
    धनौल्टी उत्तराखंड की पहाड़ियों में बसा एक छोटा सा स्वर्ग है। यह जगह शांति, सुकून और प्रकृति की सुंदरता का अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करती है। यदि आप शहर की भागदौड़ और शोर-शराबे से दूर रहना चाहते हैं, तो धनौल्टी एक आदर्श विकल्प है।

    6. गोवा
    गोवा का नाम आते ही सुंदर समुद्र तट, शानदार सूर्यास्त और जीवंत नाइटलाइफ़ का ख्याल आता है। गोवा में समुद्र के किनारे समय बिताना, स्थानीय व्यंजन चखना और सांस्कृतिक उत्सवों का अनुभव करना, हर यात्री के लिए एक अद्भुत अनुभव है

    7. जयपुर
    राजस्थान की राजधानी जयपुर, ‘गुलाबी शहर’ के नाम से प्रसिद्ध है। पुराने किले, राजमहल और आधुनिक बाजारों के साथ यहां के सांस्कृतिक उत्सव और पारंपरिक व्यंजन यात्रा को और रोमांचक बनाते हैं। जयपुर की यात्रा हर पर्यटक की बकेट लिस्ट में जरूर होनी चाहिए।

    8. कच्छ का रण
    गुजरात का कच्छ का रण विशाल नमक के मैदान के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ हर साल आयोजित होने वाला रण उत्सव स्थानीय संगीत, नृत्य और हस्तशिल्प का जादुई प्रदर्शन करता है। सफेद मैदान की विशालता और सांस्कृतिक उत्सव इसे एक अनूठा पर्यटन स्थल बनाते हैं।

    9. ऋषिकेश
    ऋषिकेश गंगा के किनारे बसा एक ऐसा स्थान है, जहाँ आध्यात्मिक शांति और साहसिक गतिविधियाँ दोनों का आनंद लिया जा सकता है। यहाँ राफ्टिंग, योग और ध्यान का अनुभव जीवन बदल देने वाला होता है।

    10. मुन्नार
    केरल का मुन्नार हिल स्टेशन अपनी चाय बागानों और पहाड़ियों के लिए प्रसिद्ध है। यह सप्ताहांत बिताने के लिए आदर्श है, जहाँ आप प्रकृति की गोद में शांति और ताजगी महसूस कर सकते हैं।

    11. मसूरी
    गढ़वाल हिमालय की तलहटी में स्थित मसूरी को पहाड़ों की रानी कहा जाता है। हरियाली, बर्फ से ढके पहाड़ और शांति से भरपूर वातावरण इसे परिवार और हनीमून के लिए आदर्श बनाते हैं।

    12. ऊटी
    ऊटी, जो कभी ईस्ट इंडिया कंपनी का मुख्यालय था, अब तमिलनाडु का एक प्रमुख हिल स्टेशन है। यहाँ का सुहावना मौसम, झीलें और हरियाली इसे यात्रियों के बीच खास बनाती हैं।

    13. शिमला
    शिमला का औपनिवेशिक इतिहास, मशहूर मॉल रोड और रोमांचक गतिविधियाँ इसे पर्यटन की दृष्टि से आकर्षक बनाती हैं। गर्मी और सर्दियों दोनों में यह हिल स्टेशन पर्यटकों के लिए परिपूर्ण विकल्प है

    14. उदयपुर
    राजस्थान का उदयपुर, ‘पूर्व का वेनिस’ कहा जाता है। यहाँ की झीलें, महल और खूबसूरत पहाड़ प्राकृतिक और मानव निर्मित सुंदरता का अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत करते है।

  • Skin Care Tips: ऑयली और डल स्किन से छुटकारा, समर में ऐसे रखें चेहरा फ्रेश और जवान

    Skin Care Tips: ऑयली और डल स्किन से छुटकारा, समर में ऐसे रखें चेहरा फ्रेश और जवान


    नई दिल्ली।  जैसे ही तापमान चढ़ता है, त्वचा की परेशानी भी बढ़ने लगती है। तेज धूप, पसीना और उमस मिलकर स्किन को बेजान, चिपचिपी और थकी हुई बना देते हैं। ऑयली स्किन और ज्यादा ऑयली हो जाती है, जबकि ड्राई स्किन रूखी और खिंची-खिंची महसूस होने लगती है। अगर आप चाहते हैं कि गर्मियों में भी आपकी त्वचा दमकती और जवां दिखे, तो अब समय है अपना स्किनकेयर रूटीन बदलने का। सही देखभाल से न सिर्फ टैन और पिंपल्स से बचाव होगा, बल्कि नेचुरल ग्लो भी बरकरार रहेगा।

    क्लींजिंग है सबसे पहला और जरूरी कदम

    गर्मियों में चेहरे पर धूल, पसीना और एक्स्ट्रा ऑयल जल्दी जमा हो जाता है। इसलिए दिन में दो बार माइल्ड, पीएच-बैलेंस्ड और अल्कोहल-फ्री फेस वॉश से चेहरा साफ करें। ऑयली स्किन वालों के लिए जेल-बेस्ड क्लींजर बेहतर रहते हैं, जबकि ड्राई स्किन वालों को नॉन-फोमिंग क्लींजर चुनना चाहिए। इससे पोर्स साफ रहते हैं और मुंहासों का खतरा कम होता है।

    क्रीम नहीं, जेल और वॉटर-बेस्ड प्रोडक्ट्स चुनें

    गर्मियों में भारी क्रीम त्वचा को और चिपचिपा बना सकती हैं। ऐसे में हल्के, जेल-बेस्ड या वॉटर-बेस्ड मॉइश्चराइज़र का इस्तेमाल करें। दिन में दो बार क्लींजिंग, टोनिंग और मॉइश्चराइजिंग (CTM रूटीन) फॉलो करने से स्किन फ्रेश और हेल्दी बनी रहती है।

    एंटीऑक्सिडेंट सीरम से बढ़ाएं नैचुरल ग्लो

    अपने समर रूटीन में एंटीऑक्सिडेंट सीरम जरूर शामिल करें। विटामिन C जैसे एंटीऑक्सिडेंट्स फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं, कोलेजन को बढ़ावा देते हैं और स्किन को ब्राइट बनाते हैं। साथ ही डाइट में खट्टे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां और ग्रीन टी शामिल करना भी फायदेमंद रहेगा।

    हाइड्रेशन है सबसे बड़ी कुंजी

    गर्मी में शरीर और त्वचा दोनों को ज्यादा पानी की जरूरत होती है। दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और जरूरत हो तो हाइड्रेटिंग फेस मिस्ट या एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करें। रात में सोने से पहले हाइड्रेटिंग फेस मास्क लगाने से स्किन को एक्स्ट्रा नमी मिलती है और सुबह चेहरा फ्रेश दिखता है।

    हफ्ते में दो बार करें एक्सफोलिएशन

    स्किन से डेड सेल्स हटाने के लिए हफ्ते में एक या दो बार हल्के स्क्रब से एक्सफोलिएट करें। इससे पोर्स साफ रहते हैं और चेहरा साफ-सुथरा दिखता है। ध्यान रखें, ज्यादा स्क्रबिंग से स्किन को नुकसान भी हो सकता है।

    सनस्क्रीन कभी न भूलें

    गर्मियों में यूवी-ए और यूवी-बी किरणें स्किन को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। घर से बाहर निकलते समय SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन जरूर लगाएं। घर के अंदर रहते हुए भी सनस्क्रीन लगाना फायदेमंद होता है, क्योंकि धूप की किरणें खिड़कियों से भी अंदर आ सकती हैं।

    हल्का मेकअप और सही टोनर का इस्तेमाल

    भारी मेकअप से बचें, क्योंकि यह पोर्स को बंद कर सकता है और पिंपल्स बढ़ा सकता है। एलोवेरा या खीरा-बेस्ड टोनर का उपयोग करें, जो त्वचा को ठंडक और ताजगी देता है।

  • वजन घटाने के चक्कर में इंटरमिटेंट फास्टिंग से सावधान! जानें इसके खतरनाक असर

    वजन घटाने के चक्कर में इंटरमिटेंट फास्टिंग से सावधान! जानें इसके खतरनाक असर


    नई दिल्ली । आजकल तेजी से वजन कम करने और फिट दिखने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग का चलन बहुत बढ़ गया है। इसमें लोग 14 से 16 घंटे तक भूखे रहते हैं और केवल एक सीमित समय में भोजन करते हैं। सोशल मीडिया और फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स इसे ‘जादुई वजन घटाने का तरीका’ बता रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसे गलत तरीके से अपनाने पर शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

    महिलाओं के हॉर्मोन्स पर असर
    महिलाओं का हॉर्मोनल सिस्टम पुरुषों की तुलना में ज्यादा संवेदनशील होता है। लंबे समय तक भूखा रहने से शरीर तनाव की स्थिति में चला जाता है और कोर्टिसोल स्ट्रेस हॉर्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इसका सीधा असर पीरियड्स, थायरॉयड फंक्शन और फर्टिलिटी पर पड़ सकता है। कई शोध बताते हैं कि अनियमित उपवास से प्रजनन क्षमता से जुड़े हॉर्मोन्स का संतुलन बिगड़ सकता है।

    पाचन और ब्लड शुगर पर असर

    पाचन तंत्र को समय पर ईंधन की जरूरत होती है। भोजन में देरी से वात दोष बढ़ जाता है, जिससे गैस, सिरदर्द, चक्कर और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बार-बार शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव होने से बेहोशी, चक्कर और घबराहट की शिकायत भी हो सकती है।

    मांसपेशियों में कमजोरी

    इंटरमिटेंट फास्टिंग का एक बड़ा नुकसान मसल लॉस है। जब शरीर को समय पर कैलोरी नहीं मिलती तो यह ऊर्जा के लिए मांसपेशियों को गलाने लगता है। परिणामस्वरूप वजन तो कम दिखता है लेकिन शरीर अंदर से कमजोर और खोखला हो जाता है। 6-8 घंटे की ईटिंग विंडो में प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा लेना मुश्किल हो जाता है।

    कौन रहें सावधान

    डायबिटीज, लो ब्लड प्रेशर, गर्भवती महिलाएं और ईटिंग डिसऑर्डर से जूझ रहे लोग इंटरमिटेंट फास्टिंग से बचें। विशेषज्ञों का सुझाव है कि वजन घटाने के लिए क्रैश डाइट के बजाय संतुलित आहार, पोषक तत्वों से भरपूर भोजन और नियमित व्यायाम को अपनाएं। किसी भी ट्रेंड या डाइट को अपनाने से पहले हेल्थ रिपोर्ट और डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है।