Category: Lifestyle

  • रिश्ते में 'स्पेस' जरूरी: घंटों बातें करने से बढ़ती है बोरियत, थोड़ी दूरी लाती है ताजगी

    रिश्ते में 'स्पेस' जरूरी: घंटों बातें करने से बढ़ती है बोरियत, थोड़ी दूरी लाती है ताजगी


    नई दिल्ली । रिश्तों में प्यार और नजदीकी की शुरुआत अक्सर रोमांचक होती है। नए प्यार में लोग सुबह की गुड मॉर्निंगसे लेकर रात की गुड नाइटतक हर पल एक-दूसरे के साथ साझा करना चाहते हैं। घंटों फोन पर बातें करनाहर छोटी-छोटी बात साझा करना शुरू में सुखद अनुभव लगता है। लेकिन समय के साथ यही आदत रिश्ते में बोझ बन सकती है। लगातार संपर्क में रहने से बातचीत की गुणवत्ता गिरती हैरोमांच खत्म होता है और रिश्ते में बोरियत और चिड़चिड़ापन आने लगता है। सोचिए अगर आपको गुलाब जामुन बेहद पसंद हैलेकिन दिन में बार-बार वही परोसा जाएतो कुछ ही दिनों में उसका स्वाद फीका लगने लगेगा। रिश्तों का गणित भी कुछ ऐसा ही है। जरूरत से ज्यादा जुड़े रहने से रिश्ते में भावनात्मक दूरी बन सकती है। जब बातचीत केवल और बताओ या तुम बताओ? जैसे सवालों तक सीमित रह जाएतो समझ लेना चाहिए कि अब रिश्ते में रोमांच नहींबल्कि आदत रह गई है।

    घंटों बात करने के कई नुकसान हैं। लगातार हर छोटी बात साझा करने से मिलने पर कुछ खास बचता ही नहीं। हर समय रिप्लाई देने का दबाव मानसिक थकान और झुंझलाहट पैदा करता है। साथ ही अगर आप अपने शौकदोस्तों और परिवार को छोड़कर पूरी तरह पार्टनर में खो जाएंतो यह स्वस्थ रिश्ते का संकेत नहीं है। रिश्ते में स्पेस देना जरूरी है। स्पेस का मतलब यह नहीं कि प्यार कम हैबल्कि इसका अर्थ है कि दोनों को अपने लिए थोड़ा समय चाहिए। अपनी हॉबीरुचियों और दोस्तों के लिए समय निकालने से व्यक्ति बेहतर बनता है और रिश्ते में लौटने पर बातचीत और मिलन और खास महसूस होता है।

    थोड़ी दूरी पार्टनर की कमी का एहसास कराती है। यही दूरी रिश्ते में ताजगी और गहराई बनाए रखती है। कहावत है दूरी से चाहत बढ़ती है। जब आप अपने लिए समय लेते हैंतो पार्टनर भी आपकी कमी महसूस करता है और मिलने पर बातचीत अधिक रोमांचक और दिलचस्प होती है। रिश्तों में संतुलन बनाए रखना इसलिए जरूरी है। प्यार और नजदीकी होनी चाहिएलेकिन लगातार संपर्क में रहने से बचना चाहिए। थोड़ी दूरी रिश्ते को नया उत्साह देती हैबोरियत कम करती है और मानसिक तनाव से राहत दिलाती है। रिश्ते की लंबी उम्र और खुशी के लिए स्पेसएक आवश्यक तत्व है। कुल मिलाकररिश्ते में ताजगी बनाए रखने के लिए जरूरत से ज्यादा बात करने से बचें। पार्टनर को थोड़ा स्पेस देंअपने लिए समय निकालें और बातचीत को खास बनाकर लौटें। यही तरीका रिश्ते को मजबूतस्वस्थ और रोमांचक बनाता है।

  • फेंकने की भूल न करें! अनार के छिलके हैं औषधियों का खजाना; इसकी 'मैजिकल टी' से दूर होंगी ये 5 बड़ी बीमारियाँ

    फेंकने की भूल न करें! अनार के छिलके हैं औषधियों का खजाना; इसकी 'मैजिकल टी' से दूर होंगी ये 5 बड़ी बीमारियाँ


    नई दिल्ली । आयुर्वेद में अनार को ‘एक फल सौ बीमार’ की दवा कहा गया है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि फल के साथ-साथ इसके छिलके भी समान रूप से गुणकारी होते हैं। आधुनिक विज्ञान और प्राचीन चिकित्सा पद्धति दोनों ही मानते हैं कि अनार के छिलकों में दानों की तुलना में अधिक एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। इन छिलकों से तैयार की गई चाय न केवल आपके शरीर को भीतर से साफ डिटॉक्स करती है, बल्कि कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में रामबाण का काम करती है।

    अनार के छिलकों की चाय के 5 अद्भुत फायदे

    पाचन तंत्र के लिए वरदान अगर आप गैस, अपच या डायरिया जैसी समस्याओं से परेशान हैं, तो अनार के छिलकों की चाय आपके लिए सबसे सरल उपाय है। इसमें मौजूद टैनिन्स और पॉलीफेनॉल्स आंतों की सूजन को कम करते हैं और पाचन तंत्र की कार्यप्रणाली को सुचारू बनाते हैं। यह पेट की अंदरूनी परत को राहत पहुँचाकर पुरानी से पुरानी कब्ज में भी फायदा देती है। इम्युनिटी का ‘कवच’ बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम और संक्रमण से बचने के लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का मजबूत होना जरूरी है। विटामिन-C और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर यह चाय इम्युनिटी को तेजी से बूस्ट करती है, जिससे आपका शरीर वायरस और बैक्टीरिया से लड़ने के लिए तैयार रहता है। दिल की सेहत का रखवाला अनार के छिलकों में पाए जाने वाले फ्लेवोनॉयड्स बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में सहायक होते हैं।
    इस चाय के नियमित सेवन से ब्लड सर्कुलेशन रक्त संचार में सुधार होता है और धमनियों में रुकावट आने का खतरा कम हो जाता है, जिससे दिल की बीमारियाँ कोसों दूर रहती हैं।वेट लॉस और मेटाबॉलिज्म मोटापे से परेशान लोगों के लिए यह चाय एक बेहतरीन ‘वेट लॉस ड्रिंक’ साबित हो सकती है। यह मेटाबॉलिज्म को तेज करती है, जिससे शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी फैट बर्न होने लगती है। साथ ही, यह भूख को नियंत्रित कर बेवजह की क्रेविंग को कम करती है। निखरेगी त्वचा और मजबूत होंगे बाल अनार के छिलकों के एंटी-बैक्टीरियल गुण मुंहासों, झुर्रियों और बढ़ती उम्र के निशानों को रोकने में मदद करते हैं। यह चाय पीने से शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं, जिसका सीधा असर चेहरे की चमक पर दिखता है। इसके अलावा, यह बालों की जड़ों को मजबूती देकर उन्हें असमय सफेद होने से भी बचाती है।

    कैसे बनाएं अनार के छिलकों की चाय

    इसे बनाना बेहद आसान है। अनार के छिलकों को धोकर धूप में सुखा लें और उनका पाउडर बना लें। एक कप पानी उबालें और उसमें आधा चम्मच यह पाउडर मिलाएं। थोड़ी देर उबलने के बाद इसे छान लें और स्वादानुसार शहद या नींबू मिलाकर इसका आनंद लें।

  • महंगी ड्राई क्लीनिंग को कहें बाय-बाय! इन 5 आसान ट्रिक्स से घर पर धोएं पफर जैकेट; नहीं खराब होगी रूई

    महंगी ड्राई क्लीनिंग को कहें बाय-बाय! इन 5 आसान ट्रिक्स से घर पर धोएं पफर जैकेट; नहीं खराब होगी रूई


    नई दिल्ली । पफर जैकेट की बनावट अन्य कपड़ों से अलग होती है, इसलिए इसे धोने के लिए विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है। अगर आप इसे सामान्य कपड़ों की तरह धो देंगे, तो इसकी रूई के गुच्छे बन सकते हैं और जैकेट अपनी गर्माहट और शेप खो सकती है। नीचे दिए गए तरीकों को अपनाकर आप इस जोखिम को कम कर सकते हैं।

    सफाई से पहले ‘केयर लेबल’ जरूर देखे

    किसी भी पफर जैकेट को पानी में डालने से पहले उसके अंदर की तरफ लगे केयर लेबल को ध्यान से पढ़ें। अगर उस पर ‘Dry Clean Only’ लिखा है, तो घर पर रिस्क न लें। यदि उस पर मशीन या हैंड वॉश का विकल्प है, तभी आगे बढ़ें। धोने से पहले सभी जिप बंद कर दें और पॉकेट खाली कर लें।

    जिद्दी दागों का ‘स्पॉट ट्रीटमेंट

    पूरी जैकेट को गीला करने से पहले कॉलर, कफ और दाग-धब्बों वाली जगहों पर ध्यान दें। एक पुराने टूथब्रश और माइल्ड डिटर्जेंट की मदद से दाग वाली जगह को हल्के हाथों से रगड़ें। इससे जैकेट को मशीन में ज्यादा देर तक नहीं घुमाना पड़ेगा और गंदगी भी साफ हो जाएगी।

    लिक्विड डिटर्जेंट और ठंडे पानी का प्रयोग

    पफर जैकेट के लिए कभी भी पाउडर डिटर्जेंट का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इसके कण जैकेट की रूई में फंस सकते हैं। हमेशा माइल्ड लिक्विड डिटर्जेंट और ठंडे पानी का चुनाव करें। गर्म पानी जैकेट के बाहरी फैब्रिक को नुकसान पहुँचा सकता है और उसकी चमक फीकी कर सकता है।

    टेनिस बॉल’ ट्रिक सबसे कारगर तरीका

    यदि आप जैकेट को मशीन में सुखा रहेतो ड्रायर में जैकेट के साथ 2-3 साफ टेनिस बॉल डाल दें। जैसे-जैसे मशीन घूमेगी, ये बॉल जैकेट से टकराएंगी और अंदर जमी हुई रूई को फेंटकर उसे फिर से फुला देंगी। इससे रूई के गुच्छे नहीं बनेंगे और जैकेट पिचकने से बच जाएगी।

    सुखाने का सही तरीका

    अगर आप ड्रायर का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, तो जैकेट को कभी भी निचोड़ें नहीं। इसे एक तौलिये पर सपाट बिछाकर सुखाएं। धूप में सीधे टांगने के बजाय इसे छांव में सुखाना बेहतर है। सूखने के दौरान हर 1-2 घंटे में जैकेट को हाथों से थपथपाएं ताकि अंदर की रूई अपनी सही जगह पर वापस आ जाए। पफर जैकेट पर कभी भी फैब्रिक सॉफ्टनर या ब्लीच का उपयोग न करें, क्योंकि ये जैकेट के वाटर-रेसिस्टेंट कोटिंग और अंदर के फाइबर को नष्ट कर सकते हैं।

  • डिजिटल डिस्ट्रैक्शन का साइलेंट अटैक: नोटिफिकेशन और मल्टीटास्किंग ने छीना फोकस, छात्र और कर्मचारी मानसिक थकान के शिकार

    डिजिटल डिस्ट्रैक्शन का साइलेंट अटैक: नोटिफिकेशन और मल्टीटास्किंग ने छीना फोकस, छात्र और कर्मचारी मानसिक थकान के शिकार


    नई दिल्ली/भोपाल। वर्तमान दौर में तकनीक ने जहाँ जीवन को आसान बनाया है, वहीं इसने मानवीय क्षमताओं, विशेषकर ‘एकाग्रता पर एक गहरा प्रहार किया है। देशभर के शिक्षण संस्थानों और कॉर्पोरेट जगत से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, छात्र और कामकाजी पेशेवर एक नई तरह की चुनौती का सामना कर रहे हैंफोकस की कमी’। मोबाइल नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया की लत और एक साथ कई काम करनेकी होड़ ने उत्पादकता को निचले स्तर पर पहुँचा दिया है, जिससे अब मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है।

    20 मिनट भी नहीं टिक रहा छात्रों का ध्यान विभिन्न शिक्षण संस्थानों द्वारा किए गए आंतरिक सर्वेक्षणों में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। यह पाया गया है कि आज का औसत छात्र किसी एक विषय पर लगातार 20 से 25 मिनट से अधिक समय तक ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहा है। पढ़ाई के दौरान हर कुछ मिनटों में मोबाइल स्क्रीन चेक करने की आदत ने उनकी सीखने की क्षमता को बाधित किया है। शिक्षाविदों का मानना है कि यदि यही स्थिति रही, तो आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक परिणामों में बड़ी गिरावट देखी जा सकती है।

    मल्टीटास्किंग का बोझ और घटती कार्यक्षमता यही स्थिति कॉर्पोरेट कार्यालयों की भी है। दफ्तरों में कर्मचारियों पर एक साथ कई प्रोजेक्ट्स संभालने का दबाव होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ‘मल्टीटास्किंग’ दरअसल एक भ्रम है। जब मस्तिष्क बार-बार एक काम से दूसरे काम पर स्विच करता है, तो वह कॉग्निटिव लोड मानसिक भार बढ़ा देता है, जिससे काम की गुणवत्ता गिर जाती है और कर्मचारी जल्दी मानसिक थकान महसूस करने लगते हैं।

    क्या हैं इस समस्या के मुख्य कारण? मनोवैज्ञानिकों ने फोकस खोने के पीछे तीन प्रमुख कारणों को रेखांकित किया है अनियंत्रित स्क्रीन टाइम: सोशल मीडिया और ऐप्स के नोटिफिकेशन डोपामाइन रिलिज़ करते हैं, जो हमें बार-बार फोन देखने को मजबूर करते हैं। अनियमित दिनचर्या नींद की कमी और शारीरिक गतिविधि का अभाव मानसिक स्पष्टता को खत्म कर देता है। डिजिटल शोर: हर वक्त सूचनाओं के अंबार के बीच मस्तिष्क को ‘विश्राम’ नहीं मिल पा रहा है।

    समाधान की ओर बढ़ते कदम डिजिटल डिटॉक्स और वर्कशॉप इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए अब संस्थानों ने सक्रिय कदम उठाना शुरू कर दिया है। कई स्कूल और कॉलेज अब ‘डिजिटल डिटॉक्स’ सत्र आयोजित कर रहे हैं, जहाँ छात्रों को बिना गैजेट्स के समय बिताने और एकाग्रता बढ़ाने के गुर सिखाए जा रहे हैं। वहीं, सरकारी स्तर पर भी छात्रों के लिए काउंसलिंग और मानसिक सहायता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों की सलाह कैसे बढ़ाएं अपना फोकस करियर काउंसलरों ने इस समस्या से निपटने के लिए कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए हैं मोनोटास्किंग’ अपनाएं: एक समय में केवल एक ही काम पर पूरा ध्यान दें।

    फोन को रखें दूर काम या पढ़ाई के समय मोबाइल को न केवल साइलेंट करें, बल्कि उसे अपनी नजरों से दूर रखें। ब्रेक का नियम काम को छोटे हिस्सों में बांटें और हर एक घंटे बाद 5-10 मिनट का ‘स्क्रीन-फ्री’ ब्रेक लें। समय रहते यदि इस ‘डिजिटल डिस्ट्रैक्शन’ पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह न केवल व्यक्तिगत करियर बल्कि देश की समग्र कार्यक्षमता के लिए भी बड़ी चुनौती बन जाएगा।

  • हाई बीपी का नया विलेन: ऑकलैंड यूनिवर्सिटी की रिसर्च में खुलासा, नमक ही नहीं दिमाग के खास सिग्नल भी हैं जिम्मेदार

    हाई बीपी का नया विलेन: ऑकलैंड यूनिवर्सिटी की रिसर्च में खुलासा, नमक ही नहीं दिमाग के खास सिग्नल भी हैं जिम्मेदार


    नई दिल्ली । हाई ब्लड प्रेशर को अब तक हम केवल ज्यादा नमक खाने, तला-भुना भोजन मोटापा और मानसिक तनाव के साथ जोड़कर देखते आए हैं। लेकिन ऑकलैंड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की एक ताज़ा स्टडी ने चिकित्सा जगत में खलबली मचा दी है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि हाई बीपी के पीछे केवल हमारा खानपान ही नहीं, बल्कि हमारे दिमाग की वायरिंग और उससे निकलने वाले सिग्नल भी एक बड़ी भूमिका निभाते हैं।

    क्या है दिमाग का वह हिस्सा जो बढ़ाता है बीपी

    वैज्ञानिकों के अनुसार दिमाग के निचले हिस्से में एक विशेष क्षेत्र होता है जिसे लैटरल पैराफेशियल रीजन कहा जाता है। आमतौर पर यह हिस्सा शरीर की उन प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है जो अपने आप होती हैं, जैसे सांस लेना, दिल का धड़कना और पाचन क्रिया। स्टडी में खुलासा हुआ है कि इसी क्षेत्र में मौजूद कुछ विशेष नसें ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार होती हैं। जब ये नसें जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं, तो वे रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ने के संकेत भेजती हैं। वाहिकाओं के सिकुड़ने से रक्त का प्रवाह बाधित होता है और दबाव बढ़ जाता है, जिसे हम मेडिकल भाषा में हाई ब्लड प्रेशर कहते हैं।

    अब तक की थ्योरी से कैसे अलग है यह रिसर्च

    अब तक डॉक्टरों का मानना था कि बीपी बढ़ने का मुख्य कारण किडनी की कार्यक्षमता में कमी या आर्टरीज में फैट का जमना है। लेकिन यह नई रिसर्च बताती है कि दिमागी नियंत्रण यदि दिमाग का लैटरल पैराफेशियल रीजन गलत सिग्नल भेज रहा है, तो स्वस्थ खानपान के बावजूद व्यक्ति का बीपी बढ़ सकता है। ऑटोमैटिक रिस्पॉन्स: कई बार शरीर बिना किसी बाहरी कारण जैसे नमक या गुस्सा के भी आंतरिक दिमागी संकेतों की वजह से हाइपरटेंशन का शिकार हो जाता है।

    एक्सपर्ट की सलाह: खुद को कैसे रखें सुरक्षित

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस नई रिसर्च के बाद अब बीपी के इलाज के तरीकों में बदलाव आ सकता है। केवल दवाएं ही नहीं बल्कि ‘न्यूरोलॉजिकल कंट्रोल पर भी ध्यान देना होगा। वर्तमान में खुद को सुरक्षित रखने के लिए आप ये कदम उठा सकते हैं ब्रीदिंग एक्सरसाइज: चूंकि यह हिस्सा सांस लेने को भी नियंत्रित करता है, इसलिए गहरी सांस लेने वाले व्यायाम दिमाग को शांत कर बीपी कम करने में मदद कर सकते हैं। माइंडफुलनेस योग और ध्यान के जरिए दिमाग के निचले हिस्से को रिलैक्स रखा जा सकता है। नियमित चेकअप: यदि खानपान सही होने के बाद भी बीपी बढ़ा हुआ है, तो डॉक्टर से न्यूरोलॉजिकल कारणों पर चर्चा करें।

  • रोज़ खाएं सिर्फ एक कटोरी ओट्स, दिल को रखें मजबूत और हार्ट अटैक-स्ट्रोक के खतरों से दूर!

    रोज़ खाएं सिर्फ एक कटोरी ओट्स, दिल को रखें मजबूत और हार्ट अटैक-स्ट्रोक के खतरों से दूर!

    नई दिल्ली।  दिल की सेहत आज के समय में सबसे बड़ी चिंता बन चुकी है। बदलती जीवनशैली, गलत खानपान, लगातार तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी ने लोगों के दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा दिया है। हाई कोलेस्ट्रॉल, जिसे कभी केवल बुजुर्गों की समस्या माना जाता था, अब हर उम्र में देखने को मिल रहा है। यही हाई कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे दिल की नसों में जमता है और हार्ट अटैक, स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का रास्ता साफ करता है।

    आजकल लोग अक्सर दवाइयों पर निर्भर हो जाते हैं, लेकिन आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही यह मानते हैं कि सही भोजन से कई बीमारियों को जड़ से रोका जा सकता है। इनमें से एक सुपरफूड है ओट्स। यह आसानी से पचता है, शरीर में संतुलन बनाए रखता है और दिल की सेहत के लिए वरदान साबित होता है।

    रोजाना सिर्फ एक कटोरी ओट्स खाने से शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी और हानिकारक तत्व बाहर निकलते हैं। यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है और शरीर में दोषों का संतुलन बनाए रखता है। आयुर्वेद के अनुसार जब पाचन ठीक रहता है, तो खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) अपने आप नियंत्रित होने लगता है।

    विज्ञान भी ओट्स के फायदे मानता है। इसमें मौजूद बीटा-ग्लूकान फाइबर पेट में जाकर एक जेल जैसी परत बना देता है, जो आंतों में कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को कम कर देता है। इसका सीधा फायदा यह होता है कि बैड कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे कम होता है और दिल की धमनियां बेहतर तरीके से काम करती हैं। यही कारण है कि नियमित ओट्स खाने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है।

    ओट्स सिर्फ कोलेस्ट्रॉल के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर के लिए फायदेमंद है। इसमें प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है, जो मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और शरीर को ऊर्जा देता है। इसके साथ ही इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट धीरे-धीरे ऊर्जा प्रदान करते हैं, जिससे लंबे समय तक पेट भरा रहता है और बार-बार भूख नहीं लगती। यही वजह है कि वजन घटाने वाले लोगों के लिए भी ओट्स बहुत अच्छा विकल्प माना जाता है।

    ओट्स में कई जरूरी विटामिन और मिनरल्स भी होते हैं। इसमें आयरन खून की कमी को दूर करता है, मैग्नीशियम और पोटेशियम दिल की धड़कन को संतुलित रखते हैं, और जिंक व एंटीऑक्सीडेंट्स रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। यही नहीं, ओट्स ब्लड शुगर को भी संतुलित रखता है। यह धीरे पचता है, जिससे खून में शुगर अचानक नहीं बढ़ती। इसलिए यह डायबिटीज के मरीजों के लिए भी सुरक्षित है।

    आयुर्वेद कहता है कि ओट्स शरीर को अंदर से साफ करता है। यह आंतों में जमा गंदगी और टॉक्सिन को बाहर निकालता है और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है। जब शरीर का मेटाबॉलिज्म सही रहता है, तो फैट जमा नहीं होता और कोलेस्ट्रॉल का स्तर संतुलित बना रहता है। नियमित रूप से ओट्स खाने वाले लोगों में दिल की समस्याएं काफी कम देखी जाती हैं।

    ओट्स को रोज़ाना अपनी डाइट में शामिल करना न सिर्फ दिल की बीमारियों से बचाने में मदद करता है, बल्कि शरीर को ऊर्जा, ताकत और संतुलन भी देता है। यह सुपरफूड हर उम्र के लिए फायदेमंद है और स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए सबसे आसान उपायों में से एक है।

  • ठंड में स्किन ड्राई हो रही है? ये फेस पैक हटाएंगे कालापन और देंगे जवां लुक

    ठंड में स्किन ड्राई हो रही है? ये फेस पैक हटाएंगे कालापन और देंगे जवां लुक


    नई दिल्ली। सर्दियों में ठंडी हवा और ड्राई स्किन की वजह से चेहरे पर रूखापन, कालापन और उम्र के असर जल्दी दिखने लगते हैं। साथ ही लोग धूप में बैठकर गर्माहट लेते हैं, जिससे त्वचा पर टैनिंग और काला पन बढ़ जाता है। अगर इस मौसम में स्किन केयर छोड़ दिया जाए तो निखार भी गायब होने लगता है। ऐसे में घर पर बने नेचुरल फेस पैक से आप अपनी त्वचा को ग्लो, नमी और जवांपन दे सकते हैं।
    1) ओट्स-दूध फेस पैक (डेड स्किन हटाए, स्किन को हाइड्रेट करे)
    सर्दियों में ग्लो और नरमी बनाए रखने के लिए ओट्स और दूध का फेस पैक बहुत फायदेमंद है।
    बनाने का तरीका:2 बड़े चम्मच ओट्स लें और उसमें 3 बड़े चम्मच दूध मिलाकर पेस्ट बना लें।
    चेहरे पर 15-20 मिनट लगाकर फिर धो लें।

    फायदा:ओट्स स्किन की डेड सेल्स हटाकर एक्सफोलिएट करता है, वहीं दूध स्किन को हाइड्रेट करके नरम बनाता है।

    2) शहद-नींबू फेस पैक (ग्लो और ब्राइटनिंग)
    शहद में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं और यह स्किन को नर्म बनाता है। नींबू त्वचा की रंगत को हल्का कर ब्राइटनेस देता है।
    बनाने का तरीका:1 चम्मच शहद में 2-3 बूंद नींबू का रस मिलाएं, जरूरत अनुसार गुलाबजल डालकर पेस्ट तैयार करें।
    चेहरे को हल्का गीला करके 10-15 मिनट लगाएं और फिर धो लें।
    सावधानियां:अगर आपकी स्किन संवेदनशील है, तो नींबू की मात्रा कम रखें और धूप में बाहर जाने से पहले यह पैक न लगाएं।

    3) कॉफी फेस पैक (टैनिंग हटाने के लिए बेस्ट)
    धूप से हुए कालेपन और टैनिंग को हटाने के लिए कॉफी फेस पैक असरदार है।
    बनाने का तरीका:2 चम्मच कॉफी पाउडर + 1 चम्मच शहद + जरूरत अनुसार दूध मिलाकर पेस्ट बनाएं।
    15-20 मिनट बाद धो लें।
    फायदा:कॉफी स्किन को एक्सफोलिएट कर टैनिंग कम करती है, शहद से त्वचा नरम होती है और दूध से हाइड्रेशन मिलता है।
    4) पपीते का फेस पैक (स्किन में ग्लो और ब्राइटनेस)
    पपीता विटामिन-सी और एंजाइम से भरपूर होता है, जो स्किन को ग्लो देता है।
    बनाने का तरीका:
    एक पका पपीता मैश करके उसमें थोड़ा कच्चा दूध मिलाएं।
    पेस्ट को चेहरे पर 10-15 मिनट लगाकर धो लें।
    फायदा:पपीता त्वचा की डेड सेल्स हटाकर ग्लो बढ़ाता है और दूध त्वचा को नरम बनाए रखता है।
  • पानी में ज्यादा देर रहते ही क्यों सिकुड़ने लगती हैं उंगलियां? जानें इसके पीछे का साइंस

    पानी में ज्यादा देर रहते ही क्यों सिकुड़ने लगती हैं उंगलियां? जानें इसके पीछे का साइंस

    नई दिल्ली।  पानी में उंगलियों का सिकुड़ना स्किन नहीं, दिमाग का कमाल है. यह शरीर की एक स्मार्ट ट्रिक है, जो गीली चीजें पकड़ने में हमारी मदद करती है. आइए जान लेते हैं कि ऐसा क्यों होता है?
    पानी में उंगलियां सिकुड़ना
    आपने भी गौर किया होगा कि नहाते समय या ज्यादा देर तक पानी में रहने के बाद अचानक आपकी उंगलियां सिकुड़ जाती हैं और उन पर झुर्रियां सी बन जाती हैं. पहली नजर में लगता है जैसे त्वचा ने पानी सोख लिया हो, लेकिन असली कहानी इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है. यह बदलाव सिर्फ त्वचा का नहीं, बल्कि हमारे दिमाग और नसों का कमाल है. यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे शरीर की एक स्मार्ट ट्रिक मानते हैं.

    पानी में जाते ही उंगलियां क्यों बदल जाती हैं?

    जब हम लंबे समय तक पानी में रहते हैं, तो हाथों और पैरों की उंगलियों की त्वचा धीरे-धीरे सिकुड़ने लगती है. आमतौर पर लोग मान लेते हैं कि स्किन ने पानी सोख लिया है, लेकिन वैज्ञानिक रिसर्च बताती है कि इसका कारण पानी नहीं, बल्कि हमारा नर्वस सिस्टम है. यह पूरी प्रक्रिया दिमाग के कंट्रोल में होती है और इसे एक न्यूरोलॉजिकल रिएक्शन माना जाता है.

    दिमाग कैसे देता है सिकुड़ने का सिग्नल?

    जैसे ही उंगलियां पानी में ज्यादा देर तक रहती हैं, वहां मौजूद नसें एक्टिव हो जाती हैं. ये नसें दिमाग को संकेत भेजती हैं, जिसके बाद ब्लड वेसल्स यानी खून की नलिकाएं सिकुड़ने लगती हैं. जब उंगलियों में खून की मात्रा कम हो जाती है, तो ऊपर की त्वचा अंदर की ओर खिंच जाती है. इसी खिंचाव की वजह से स्किन पर झुर्रियां दिखाई देने लगती हैं.

    क्या यह कोई बीमारी है?

    नहीं, बिल्कुल नहीं. पानी में उंगलियों का सिकुड़ना पूरी तरह से सामान्य प्रक्रिया है. बल्कि डॉक्टर इसे इस बात का संकेत मानते हैं कि आपकी नसें सही तरीके से काम कर रही हैं. दिलचस्प बात यह है कि जिन लोगों की नसों में गंभीर नुकसान होता है, उनकी उंगलियां पानी में भी नहीं सिकुड़तीं हैं. यानी यह झुर्रियां दिखना शरीर के हेल्दी होने का एक इशारा भी है.

    सिकुड़ने से हमें क्या फायदा मिलता है?

    यह बदलाव सिर्फ देखने के लिए नहीं होता, बल्कि इसके पीछे एक फायदा भी छिपा है. सिकुड़ी हुई उंगलियों से गीली चीजों को पकड़ना आसान हो जाता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि झुर्रियों की वजह से स्किन पर ग्रूव्स बन जाते हैं, जिससे पानी बाहर निकल जाता है और पकड़ मजबूत हो जाती है. ठीक वैसे ही जैसे गाड़ी के टायरों में बनी ग्रिप गीली सड़क पर मदद करती है.

    शरीर की स्मार्ट डिजाइन

    इंसान का शरीर हालात के हिसाब से खुद को ढालने में माहिर है. पानी में उंगलियों का सिकुड़ना उसी का एक उदाहरण है. यह प्रक्रिया अपने आप शुरू होती है और पानी से बाहर आते ही धीरे-धीरे खत्म भी हो जाती है. इसमें किसी तरह की दवा या इलाज की जरूरत नहीं होती.

    कब हो सकता है चिंता का विषय?

    अगर लंबे समय तक पानी में रहने के बाद भी उंगलियां बिल्कुल नहीं सिकुड़तीं, तो डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है. यह नसों से जुड़ी किसी समस्या का संकेत हो सकता है. हालांकि ज्यादातर मामलों में यह पूरी तरह नॉर्मल होता है और चिंता की कोई बात नहीं होती है.

  • 2026 की सबसे प्रतीक्षित फिल्म में 60 साल के ‘किंग’ का एक्शन धमाका, बेटी सुहाना संग पहली बार बड़े पर्दे पर दिखेगा जादू

    2026 की सबसे प्रतीक्षित फिल्म में 60 साल के ‘किंग’ का एक्शन धमाका, बेटी सुहाना संग पहली बार बड़े पर्दे पर दिखेगा जादू

    नई दिल्ली।  साल 2026 सिनेमा प्रेमियों के लिए बेहद खास होने वाला है। एक तरफ जहां कई बड़ी फिल्मों की रिलीज का इंतजार किया जा रहा है, वहीं IMDb ने मोस्ट एंटीसिपेटेड इंडियन फिल्मों की लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में पांच अलग-अलग भाषाओं की 20 फिल्में शामिल हैं, लेकिन जो फिल्म सबसे ऊपर रही, उसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यह फिल्म है बॉलीवुड के असली ‘किंग’ शाहरुख खान की अपकमिंग मूवी ‘किंग’।

    60 साल की उम्र में भी शाहरुख खान एक बार फिर धमाकेदार एक्शन अवतार में बड़े पर्दे पर लौटने जा रहे हैं। खास बात यह है कि इस फिल्म में वे पहली बार अपनी बेटी सुहाना खान के साथ स्क्रीन शेयर करते नजर आएंगे, जिसने फैंस की एक्साइटमेंट को कई गुना बढ़ा दिया है।

    सिद्धार्थ आनंद के निर्देशन में बनेगी मेगा एक्शन फिल्म

    फिल्म ‘किंग’ का निर्देशन कर रहे हैं सिद्धार्थ आनंद, जो इससे पहले ‘पठान’ और ‘वॉर’ जैसी ब्लॉकबस्टर एक्शन फिल्में दे चुके हैं। ऐसे में दर्शकों को शाहरुख के स्टाइलिश एक्शन और हाई-ऑक्टेन ड्रामा की पूरी उम्मीद है। फिल्म में दीपिका पादुकोण, रानी मुखर्जी, अभिषेक बच्चन, अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ और जयदीप अहलावत जैसे बड़े सितारे भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे।

    ‘रामायण पार्ट 1’ को पछाड़कर टॉप पर पहुंची ‘किंग’

    IMDb की इस लिस्ट में शाहरुख खान की ‘किंग’ ने नितेश तिवारी की ‘रामायण: पार्ट 1’ को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है। ‘रामायण पार्ट 1’ इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर है, जबकि थलपति विजय की ‘जन नायकन’ ने टॉप-3 में जगह बनाई है। भले ही ‘जन नायकन’ इस वक्त CBFC सर्टिफिकेट विवाद में फंसी हो, लेकिन दर्शकों की उत्सुकता कम नहीं हुई है।

    साउथ फिल्मों का दबदबा

    IMDb की मोस्ट एंटीसिपेटेड लिस्ट में इस बार साउथ फिल्मों का जबरदस्त दबदबा देखने को मिला है। प्रभास की फिल्म ‘स्पिरिट’ चौथे नंबर पर है, जबकि यश की ‘टॉक्सिक’ पांचवें स्थान पर रही। सलमान खान की वॉर ड्रामा फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ छठे नंबर पर है, वहीं सनी देओल की ‘बॉर्डर 2’ ने टॉप-10 में जगह बना ली है। आलिया भट्ट की फिल्म ‘अल्फा’ भी इस लिस्ट में शामिल है।

    25 करोड़ दर्शकों की पसंद से बनी लिस्ट

    IMDb इंडिया के मुताबिक, यह लिस्ट किसी सर्वे पर आधारित नहीं है, बल्कि दुनियाभर के 25 करोड़ से ज्यादा मासिक विजिटर्स द्वारा देखे गए पेज व्यूज के आधार पर तैयार की गई है। इस लिस्ट में 10 हिंदी, 5 तेलुगु, 3 तमिल, 1 मलयालम और 1 कन्नड़ फिल्म शामिल हैं।

    स्टार्स का डबल धमाका

    इस लिस्ट में कई सितारों की दो-दो फिल्में शामिल हैं। यश, प्रभास, सनी देओल, रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और नयनतारा जैसे सितारों का डबल धमाका साफ दिखता है, जो बताता है कि दर्शकों का भरोसा इन स्टार्स और उनकी फिल्मों पर कितना मजबूत है।

  • Honeymoon Place in Winter: सर्दियों में हनीमून के लिए भारत की सबसे रोमांटिक जगहें

    Honeymoon Place in Winter: सर्दियों में हनीमून के लिए भारत की सबसे रोमांटिक जगहें

    नई दिल्ली।  शादी के बाद हर कपल के लिए हनीमून जिंदगी का सबसे खूबसूरत दौर होता है। यही वह समय होता है जब दो लोग एक-दूसरे को बेहतर समझते हैं और साथ में यादगार पल बिताते हैं। अक्सर लोग हनीमून के लिए यूरोप का सपना देखते हैं, जहां बर्फीली वादियां, झीलें और पहाड़ हों। लेकिन अगर आप सर्दियों में भारत में ही हनीमून प्लान कर रहे हैं, तो यहां ऐसी कई जगहें हैं जो किसी विदेशी डेस्टिनेशन से कम नहीं हैं।

    गुलमर्ग, जम्मू और कश्मीर

    गुलमर्ग को भारत का विंटर वंडरलैंड कहा जाता है। सर्दियों में यहां बर्फ की चादर बिछ जाती है और पूरा इलाका किसी रोमांटिक फिल्म के सीन जैसा लगने लगता है। यहां आप दुनिया की सबसे ऊंची गोंडोला केबल कार की सवारी कर सकते हैं, बर्फबारी का आनंद ले सकते हैं और बर्फीली वादियों में अपने पार्टनर के साथ हाथ थामकर घूम सकते हैं। रोमांस और एडवेंचर का परफेक्ट कॉम्बिनेशन गुलमर्ग में मिलता है।

    औली, उत्तराखंड

    औली को मिनी स्विट्जरलैंड ऑफ इंडिया कहा जाता है। बर्फ से ढकी पहाड़ियां, शांत माहौल और स्कीइंग का रोमांच—ये सब औली को हनीमून कपल्स के लिए खास बनाते हैं। दिसंबर से मार्च के बीच औली का नजारा बेहद रोमांटिक होता है। अगर आप शांति, प्रकृति और रोमांस चाहते हैं, तो औली एक बेहतरीन विकल्प है।

    मनाली, हिमाचल प्रदेश

    मनाली नए शादीशुदा जोड़ों के बीच सबसे लोकप्रिय हनीमून डेस्टिनेशन में से एक है। यहां सोलांग वैली में पैराग्लाइडिंग, रोहतांग पास में बर्फ, और कैफे कल्चर कपल्स को खूब आकर्षित करता है। सर्दियों में मनाली की ठंड, बर्फ और पहाड़ों के बीच बिताया गया समय हनीमून को यादगार बना देता है।

    सिक्किम

    सिक्किम उन कपल्स के लिए है जो भीड़ से दूर शांति और प्राकृतिक सुंदरता चाहते हैं। गंगटोक से कंचनजंगा के नजारे किसी सिनेमाई दृश्य से कम नहीं लगते। वहीं लाचुंग और युमथांग घाटी किसी स्विस पोस्टकार्ड जैसी दिखाई देती हैं। यहां का शांत वातावरण और ठंडी हवा हनीमून के लिए परफेक्ट है।

    अंडमान और निकोबार

    अगर आप बर्फ नहीं, बल्कि समुद्र और बीच के दीवाने हैं, तो अंडमान और निकोबार आपके लिए बेस्ट है। यहां के साफ-सुथरे समुद्र तट, स्कूबा डाइविंग, स्नॉर्कलिंग और रोमांटिक सनसेट हनीमून को खास बना देते हैं। यह जगह सर्दियों में कपल्स के बीच बेहद लोकप्रिय रहती है।