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  • सर्दियों की बड़ी गलती! इन 5 चीजों का सेवन सेहत के लिए हो सकता है खतरनाक

    सर्दियों की बड़ी गलती! इन 5 चीजों का सेवन सेहत के लिए हो सकता है खतरनाक

    नई दिल्ली। सर्दियों का मौसम जहां ठंड से राहत और गर्माहट भरे पकवानों का आनंद देता है, वहीं यह सर्दी-जुकाम, खांसी, गले में खराश और कमजोर इम्युनिटी जैसी समस्याएं भी साथ लाता है। इस मौसम में सही खान-पान न अपनाया जाए, तो छोटी-सी लापरवाही भी बीमारी को बढ़ा सकती है। इसलिए जरूरी है कि आप जानें किन चीजों से सर्दियों में परहेज करना चाहिए—खासकर तब, जब सर्दी-जुकाम ने घेर रखा हो।

    सर्दियों में इन 5 चीजों से बनाएं दूरी

    1. दूध और ज्यादा डेयरी प्रोडक्ट्स
    दूध आमतौर पर सेहतमंद माना जाता है, लेकिन जुकाम-खांसी के दौरान इसका सेवन नुकसानदायक हो सकता है। डेयरी से शरीर में बलगम (म्यूकस) बढ़ता है, जिससे खांसी और नाक बहने की समस्या तेज हो सकती है। ऐसे समय में दूध, पनीर, आइसक्रीम से दूरी रखें।

    2. ज्यादा शुगर (मीठा)
    सर्दियों में मीठा खाने की चाह बढ़ जाती है, लेकिन ज्यादा शुगर सूजन बढ़ाने और इम्युनिटी कमजोर करने का काम करती है। इससे संक्रमण से लड़ने की शरीर की क्षमता घट सकती है।

    3. कैफीन युक्त चीजें
    कॉफी, चाय और सॉफ्ट ड्रिंक्स में मौजूद कैफीन गाढ़ा बलगम बना सकता है। सर्दी-जुकाम में इनके सेवन से खांसी और गले की परेशानी बढ़ सकती है।

    4. जंक फूड
    केक, बिस्कुट, बर्गर, पिज़्ज़ा, फ्राइड स्नैक्स जैसे जंक फूड सर्दियों में शरीर को पोषण नहीं देते, बल्कि पाचन कमजोर कर देते हैं। सर्दी-खांसी में ये चीजें समस्या को और गंभीर बना सकती हैं।

    5. ज्यादा तीखा और मसालेदार खाना
    तेल-मसाले से भरपूर भोजन सर्दियों में भले ही स्वादिष्ट लगे, लेकिन जुकाम के दौरान यह पेट में जलन, नाक से पानी और गले में खराश बढ़ा सकता है।

    क्या करें?

    सर्दियों में गुनगुना पानी, सूप, हल्दी-अदरक, शहद, मौसमी फल और हल्का-संतुलित भोजन अपनाएं। इससे इम्युनिटी मजबूत रहेगी और सर्दी-जुकाम से जल्दी राहत मिलेगी।

  • क्या सेक्सुअली एक्टिव लोगों के लिए HPV Vaccine सुरक्षित है? जानें हर महिला के लिए जरूरी बातें

    क्या सेक्सुअली एक्टिव लोगों के लिए HPV Vaccine सुरक्षित है? जानें हर महिला के लिए जरूरी बातें


    नई दिल्ली । HPV ह्यूमन पैपिलोमावायरस एक वायरस है, जो बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में छुपकर रहता है और बाद में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। यह वायरस दुनियाभर में आम है, और लगभग सभी सेक्शुअली एक्टिव लोग जीवन में कभी न कभी इस वायरस के संपर्क में आते हैं। हालांकि, सही जानकारी और समय पर HPV वैक्सीनेशन से इस वायरस से बचाव किया जा सकता है।

    HPV क्या है और यह कितना आम है

    HPV 200 से अधिक वायरसों का समूह है, जिसमें कुछ वायरस सामान्य होते हैं, जबकि कुछ हाई रिस्क खतरनाक होते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, लगभग हर सेक्शुअली एक्टिव व्यक्ति जीवन में कभी न कभी HPV से संक्रमित हो सकता है।

    HPV कैसे फैलता है और यह क्यों खतरनाक है

    HPV मुख्य रूप से स्किन-टू-स्किन सेक्शुअल कॉन्टैक्ट से फैलता है। इसमें वेजाइनल, एनल और ओरल सेक्स शामिल होते हैं। यह वायरस अक्सर बिना लक्षण के शरीर में रहता है और कैंसर जैसे गंभीर रोगों का कारण बन सकता है। विशेष रूप से हाई-रिस्क HPV सर्वाइकल, एनल, गले ओरोफैरिंजियल और पेनाइल कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। HPV से कौन-कौन सी बीमारियां होती हैं HPV का संबंध कई प्रकार के कैंसर से है, जैसे:

    सर्वाइकल गर्भाशय के गले का कैंसरएनल कैंसर

    गले का कैंसर ओरोफैरिंजियल कैंसर, पेनाइल लिंग का कैंसर, वल्वर महिलाओं के प्रजनन अंग का कैंसर, वेजाइनल कैंस इसके अलावा, HPV जेनिटल वॉर्ट्स यौनांगों पर मस्से और कुछ दुर्लभ श्वसन संबंधी बीमारियों का कारण भी बन सकता है।

    HPV वैक्सीन लगवाने की सही उम्र क्या है

    विशेषज्ञों के अनुसार, HPV वैक्सीनेशन की सही उम्र 9 से 12 साल के बीच है, क्योंकि इस उम्र में टीका वायरस के संपर्क में आने से पहले लगाया जाता है और सबसे प्रभावी होता है। HPV वैक्सीनेशन के लिए कितनी डोज जरूरी हैं 9 से 14 साल की उम्र में दो डोज काफी होती हैं। 15 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को तीन डोज की सलाह दी जाती है।

    क्या सेक्शुअली एक्टिव वयस्कों को भी वैक्सीनेशन से फायदा होता है

    हां, सेक्शुअली एक्टिव वयस्कों को भी HPV वैक्सीन से फायदा हो सकता है। हालांकि, यह वैक्सीन पहले से मौजूद संक्रमण का इलाज नहीं करती, लेकिन यह भविष्य में होने वाले संक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करती है। ऐसे वयस्क जिन्हें HPV के सभी खतरनाक प्रकारों से संपर्क नहीं हुआ, उनके लिए यह वैक्सीनेशन बेहद फायदेमंद हो सकती है।

    क्या HPV वैक्सीन सुरक्षित है

    विशेषज्ञों के अनुसार, HPV वैक्सीनेशन पूरी तरह सुरक्षित है। इसके साइड इफेक्ट्स आमतौर पर हल्के होते हैं, जैसे कि इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द या हल्का बुखार। गंभीर एलर्जी प्रतिक्रियाएं बहुत कम होती हैं, लेकिन यदि आप गर्भवती हैं या किसी अन्य गंभीर स्वास्थ्य स्थिति से गुजर रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

    क्या सिर्फ अच्छी हाइजीन से HPV से बचा जा सकता है

    नहीं, HPV मुख्य रूप से स्किन-टू-स्किन सेक्शुअल कॉन्टैक्ट से फैलता है, और इसे केवल अच्छी हाइजीन से नहीं रोका जा सकता। हालांकि, कंडोम के इस्तेमाल से जोखिम कम हो सकता है, लेकिन यह 100% सुरक्षा नहीं प्रदान करता।

    अगर बचपन में वैक्सीन नहीं लगवाई हो तो क्या करें

    अगर किसी ने बचपन में HPV वैक्सीन नहीं लगवाई है, तो 26 साल तक कैच-अप वैक्सीनेशन की सलाह दी जाती है। कुछ मामलों में डॉक्टर के परामर्श से 45 साल तक भी वैक्सीनेशन कराया जा सकता है। क्या HPV वैक्सीन से फर्टिलिटी पर असर पड़ता है HPV वैक्सीन का फर्टिलिटी या हार्मोनल स्तर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। इसके विपरीत, यह वैक्सीनेशन कैंसर और प्रजनन स्वास्थ्य को सुरक्षित रखती है, जिससे भविष्य में प्रजनन क्षमता पर सकारात्मक असर पड़ता है। HPV वैक्सीन HPV वायरस से सुरक्षा का सबसे प्रभावी तरीका है। समय पर टीकाकरण और जागरूकता, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव की सबसे मजबूत कड़ी है। यदि आपने पहले वैक्सीनेशन नहीं कराया है, तो डॉक्टर से संपर्क कर इसे प्राप्त करें, क्योंकि यह भविष्य में आपकी सेहत और जीवन को सुरक्षित रखने में मदद करेगा।

  • ठंड में खांसी से राहत पाने के लिए घर पर बनाएं देसी कफ सिरप शॉट, मिनटों में मिलेगा आराम

    ठंड में खांसी से राहत पाने के लिए घर पर बनाएं देसी कफ सिरप शॉट, मिनटों में मिलेगा आराम


    नई दिल्ली । सर्दियों का मौसम आते ही खांसी, बलगम और गले की खराश जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। बदलते मौसम के साथ शरीर में होने वाले संक्रमण और ठंड की हवा इन समस्याओं को बढ़ा देती है, जिससे न सिर्फ दिन की सक्रियता पर असर पड़ता है, बल्कि रात की नींद भी खराब हो जाती है। अक्सर लोग बाजार में मिलने वाले सिरप और दवाइयों का सहारा लेते हैं, लेकिन कई बार इनका असर धीरे-धीरे होता है। इसके अलावा, लंबे समय तक इन दवाइयों का सेवन भी सेहत के लिए ठीक नहीं होता। ऐसे में एक प्राकृतिक और घरेलू उपाय सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है।

    देसी कफ सिरप शॉट: राहत का खजाना

    देसी कफ सिरप शॉट पूरी तरह से नेचुरल होता है और इसमें मौजूद अदरक, शहद, हल्दी, काली मिर्च और तुलसी जैसे तत्व आपके गले को राहत देने में मदद करते हैं। ये सभी चीजें मिलकर न केवल खांसी को दूर करती हैं, बल्कि आपकी इम्यूनिटी को भी मजबूत बनाती हैं।

    इन तत्वों के फायदे

    अदरक: अदरक का तीखापन गले की जलन को शांत करता है और बलगम को बाहर निकालने में मदद करता है। शहद: शहद गले की सूजन कम करता है और इसके एंटी-बैक्टीरियल गुण संक्रमण से बचाते हैं। हल्दी: हल्दी में मौजूद करक्यूमिन सूजन को कम करता है और सांस की नलियों को राहत देता है। काली मिर्च: काली मिर्च बलगम को ढीला करके बाहर निकालने में मदद करती है। तुलसी: तुलसी में मौजूद वायरस-लड़ने वाले गुण इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं।

    देसी कफ सिरप शॉट बनाने की विधि:

    सबसे पहले अदरक को हल्की आंच पर थोड़ा भून लें। अब अदरक और तुलसी की पत्तियों को एक साथ पीस लें। इस मिश्रण का रस छानकर निकाल लें। फिर इस रस में सितोपलादि पाउडर, काली मिर्च पाउडर, हल्दी और शहद डालकर अच्छे से मिला लें।
       

    आपका देसी कफ सिरप शॉट तैयार है। ,सेवन का तरीका
    इस सिरप शॉट को दिन में 2 से 3 बार लिया जा सकता है। यदि आपको ज्यादा मात्रा में चाहिए तो इसे फ्रिज में स्टोर कर सकते हैं। नियमित सेवन से खांसी, बलगम और गले की खराश में तुरंत आराम मिल सकता है।यह देसी कफ सिरप शॉट न केवल खांसी से राहत दिलाता है, बल्कि यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। सर्दियों में इस प्राकृतिक उपचार का सेवन करने से आप बिना किसी दवा के खांसी और गले की समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं। तो अगली बार जब सर्दियों में खांसी परेशान करे, तो इस घर पर बने देसी कफ सिरप शॉट का इस्तेमाल करें और तुरंत आराम पाएं।

  • दिल्ली की भागदौड़ भूल जाइए! ये 5 पिकनिक स्पॉट्स देंगे असली सुकून, नेचर लवर्स का है स्वर्ग

    दिल्ली की भागदौड़ भूल जाइए! ये 5 पिकनिक स्पॉट्स देंगे असली सुकून, नेचर लवर्स का है स्वर्ग

    नई दिल्ली। भागदौड़ भरी जिंदगी और ट्रैफिक के शोर के बीच दिल्ली में रहने वालों को जब सुकून के कुछ पल चाहिए होता है, तो पिकनिक एक बेहतर विकल्प बन जाता है. सबसे अच्छी बात यह है कि दिल्ली में सिर्फ वही मशहूर जगहें ही नहीं, बल्कि कई ऐसे अलग-अलग और कम भीड़ वाले पिकनिक स्पॉट्स भी हैं. जहां परिवार और दोस्तों के साथ क्वालिटी टाइम बिताया जा सकता है. अगर आप भी वीकेंड को खास बनाना चाहते हैं, तो इन जगहों पर एक दिन जरूर बिताइए. आइए जानते हैं
    दिल्ली के कुछ बेहतरीन और थोड़े अलग पिकनिक स्पॉट्स के बारे में.
    साउथ दिल्ली में स्थित संजय वन उन लोगों के लिए परफेक्ट है जो शहर की भागदौड़ से दूर प्राकृतिक माहौल में समय बिताना चाहते हैं। यहां ऊंचे पेड़, कच्चे रास्ते और खुली हवा का आनंद लिया जा सकता है। सुबह-सुबह या दोपहर के समय चटाई बिछाकर हल्का-फुल्का खाना और शांति के साथ वक्त बिताना सुकून देता है। नेचर लवर्स के लिए यह जगह किसी तोहफे से कम नहीं है।

    2. सुंदर नर्सरी – साफ-सुथरे लॉन और तालाब

    हुमायूं के मकबरे के पास स्थित सुंदर नर्सरी दिल्ली के सबसे खूबसूरत पिकनिक स्पॉट्स में गिना जाता है। यहां साफ-सुथरे लॉन, छोटे-छोटे तालाब और पैदल घूमने के लिए रास्ते हैं। परिवार के साथ शांति और प्राकृतिक वातावरण में समय बिताने के लिए यह जगह बेहद पसंद की जाती है।

    3. तुगलकाबाद बायोडायवर्सिटी पार्क – भीड़ से दूर, नेचर के करीब

    अगर आप भीड़-भाड़ से दूर कुछ अलग अनुभव करना चाहते हैं, तो तुगलकाबाद बायोडायवर्सिटी पार्क बेहतरीन विकल्प है। यहां प्राकृतिक पौधे, छोटी पहाड़ियां और खुला वातावरण मिलता है। बच्चों को प्रकृति के बारे में सिखाने और परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताने के लिए यह जगह बहुत उपयुक्त है।

    4. यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क – उत्तर दिल्ली का शांत कोना

    उत्तर दिल्ली में स्थित यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क भी पिकनिक के लिए एक शांत और साफ जगह है। यमुना के आसपास की प्राकृतिक वनस्पतियां देखने को मिलती हैं और कम भीड़ होने के कारण यह पार्क सुकून पसंद लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

    5. मेजर ध्यानचंद स्टेडियम और नीला हौज पार्क – शांति और खुला माहौल

    मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम के आसपास का एरिया आम पिकनिक लिस्ट में नहीं आता, लेकिन यहां शांत लॉन और खुला माहौल मिलता है। शाम के समय हल्की ठंडी हवा पिकनिक का मज़ा दोगुना कर देती है।
    इसके अलावा नीला हौज बायोडायवर्सिटी पार्क, महरौली में स्थित, भीड़-भाड़ से दूर नेचर का अनुभव कराने के लिए खास है। यह जगह अभी भी कई दिल्लीवालों के लिए अनजानी है, लेकिन पिकनिक के लिहाज से यह किसी खजाने से कम नहीं है।

    अगर आप दिल्ली की भागदौड़ और ट्रैफिक से दूर शांत और नेचर से भरपूर पिकनिक मनाना चाहते हैं, तो ये पांच जगहें आपके लिए बिल्कुल सही हैं। यहां खुला वातावरण, हरियाली और साफ-सुथरी सुविधाएं आपको सुकून और आनंद दोनों देंगी।
  • आप भी खड़े होकर पीते हैं पानी? तो जाएं सावधान; जानिए इसके बड़े नुकसान

    आप भी खड़े होकर पीते हैं पानी? तो जाएं सावधान; जानिए इसके बड़े नुकसान


    नई दिल्ली । स्वस्थ रहने के लिए पानी पीना उतना ही जरूरी है जितना कि उसका सही तरीका अपनाना। आजकल हम अक्सर जल्दबाजी में खड़े होकर पानी पी लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आदत आपके शरीर के लिए कितनी हानिकारक हो सकती है? हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, खड़े होकर पानी पीने से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें किडनी, पाचन तंत्र और फेफड़ों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आइए जानते हैं कि खड़े होकर पानी पीने के क्या नुकसान हो सकते हैं और इसे ठीक से पीने का तरीका क्या है।

    खड़े होकर पानी पीने के नुकसान

    मांसपेशियों और जोड़ों पर असर खड़े होकर पानी पीने से शरीर में टॉक्सिन्स जमा हो सकते हैं क्योंकि इस स्थिति में पानी पेट के निचले हिस्से में दबाव डालते हुए पहुंचता है। इससे शरीर की नसों पर भी दबाव पड़ता है जिससे कमर और रीढ़ की हड्डी में दर्द और जकड़न की समस्या हो सकती है। लंबे समय तक इस आदत को अपनाने से मांसपेशियों और जोड़ों में ऐंठन और समस्या हो सकती है।

    किडनी से जुड़ी परेशानियां

    जब आप खड़े होकर पानी पीते हैं तो पानी जल्दी से पेट के निचले हिस्से में पहुंचता है और किडनी के ऊपर अधिक दबाव डालता है। इस दबाव के कारण किडनी का कार्य प्रभावित हो सकता है, जिससे शरीर में पानी का फिल्टरेशन सही तरीके से नहीं हो पाता। दूसरी ओर बैठकर पानी पीने से शरीर धीरे-धीरे पानी अवशोषित करता है, जिससे किडनी का कार्य संतुलित रहता है और किडनी पर दबाव कम पड़ता है।

    फेफड़ों और हृदय को नुकसान

    खड़े होकर पानी पीने से विटामिन्स और पोषक तत्व सही तरीके से पाचन तंत्र और लिवर तक नहीं पहुंच पाते। इससे हृदय और फेफड़ों की सेहत पर भी असर पड़ सकता है। इसके अलावा यह शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को भी प्रभावित कर सकता है जिससे सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।

    पाचन प्रक्रिया होती है प्रभावित

    खड़े होकर पानी पीने से पानी तेजी से पेट में पहुंचता है, जो पाचन तंत्र को सही तरीके से काम करने का समय नहीं देता। इससे गैस, अपच पेट भारी रहने और पेट की अन्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। पानी का सही तरीके से पाचन में शामिल होना बेहद जरूरी है और बैठकर पानी पीने से यह प्रक्रिया बेहतर तरीके से होती है।

    पानी पीने का सही तरीका

    स्वस्थ शरीर और बेहतर पाचन के लिए पानी पीने का तरीका बहुत महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार बैठकर पानी पीना सबसे अच्छा होता है। इसे धीरे-धीरे और शांतिपूर्वक पीना चाहिए, जिससे पानी अच्छे से शरीर में अवशोषित हो सके। पीठ सीधी रखकर पानी पिएं ताकि शरीर में कोई अतिरिक्त दबाव न पड़े और रक्त संचार सही से हो। 7-8 गिलास पानी हर दिन पीना चाहिए, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे और विषाक्त तत्व बाहर निकल सकें। पानी पीना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी उसका सही तरीका अपनाना भी है। खड़े होकर पानी पीने से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, खासकर किडनी पाचन तंत्र और हृदय पर। इसलिए, स्वस्थ रहने के लिए हमेशा बैठकर और धीरे-धीरे पानी पिएं ताकि शरीर को बेहतर तरीके से हाइड्रेट किया जा सके और आपकी सेहत पर कोई बुरा असर न पड़े।

  • गर्भावस्था में एंटीबायोटिक्स का उपयोग और नवजातों में GBS रोग का खतरा

    गर्भावस्था में एंटीबायोटिक्स का उपयोग और नवजातों में GBS रोग का खतरा

    ई दिल्ली एक अध्ययन के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक्स का उपयोग नवजात शिशुओं में ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस (GBS) रोग के विकास के जोखिम को बढ़ा सकता है।

    हालांकि ये बैक्टीरिया आमतौर पर आंत या जननांगों में हानिरहित रहते हैं, लेकिन ये नवजातों, बुजुर्गों और इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड व्यक्तियों में गंभीर संक्रमण का कारण बन सकते हैं, जिससे सेप्सिस, मेनिनजाइटिस और निमोनिया हो सकता है।

    स्वीडन के करोलिंस्का इंस्टीट्यूट और बेल्जियम के एंटवर्प विश्वविद्यालय के एक अंतरराष्ट्रीय दल द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक संपर्क नवजात GBS रोग के बढ़ते जोखिम से जुड़ा था, जो जन्म के चार सप्ताह के भीतर होता है। तीसरे तिमाही में प्रारंभिक संपर्क का सबसे मजबूत संबंध देखा गया।

    शोधकर्ताओं ने कहा, “गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक संपर्क नवजातों में GBS के जोखिम को चार सप्ताह के भीतर बढ़ा सकता है, विशेष रूप से उन नवजातों में जिन्हें जोखिम-आधारित अंतःप्रसूति प्रोफिलैक्सिस से कवर नहीं किया गया है।”

    इस अध्ययन में 2006 से 2016 के बीच स्वीडन में सभी एकल जीवित जन्मों का जनसंख्या-आधारित अध्ययन किया गया।

    1,095,644 जीवित जन्मों में से 24.5 प्रतिशत नवजातों को एंटीबायोटिक्स का संपर्क हुआ।

    GBS की घटनाएं संपर्क में आए नवजातों में बिना संपर्क वाले नवजातों की तुलना में अधिक पाई गईं (0.86 बनाम 0.66 प्रति 1,000 जीवित जन्म)।

    शोधकर्ताओं के अनुसार, यह अध्ययन नवजात GBS रोग के जोखिम से संबंधित गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक संपर्क की जांच करने वाला पहला अध्ययन है। हालांकि, यह पिछले नॉर्डिक अध्ययनों के साथ मेल खाता है, जिन्होंने गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक संपर्क के बाद प्रारंभिक बचपन (1-5 वर्ष) में संक्रमण के 16-34 प्रतिशत बढ़ते जोखिम की रिपोर्ट की थी।

    अध्ययन में यह भी पाया गया कि जन्म के करीब (चार सप्ताह के भीतर) दिए गए GBS-गतिशील एंटीबायोटिक्स कोई सुरक्षा प्रदान नहीं करते।

    गर्भावस्था के दौरान किसी भी एंटीबायोटिक के संपर्क का नवजात GBS रोग के साथ संबंध केवल उन गर्भधारणाओं में देखा गया जिनमें GBS जोखिम कारक नहीं थे।

    इससे यह संकेत मिलता है कि बिना स्थापित GBS जोखिम कारकों वाले नवजातों को गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक संपर्क को सीमित करने से अधिक लाभ हो सकता है।

    अधिक शोध की आवश्यकता पर जोर देते हुए, टीम ने उन नवजातों की निगरानी में बढ़ती सतर्कता की आवश्यकता को भी रेखांकित किया जो मौजूदा GBS रोकथाम दिशानिर्देशों के बाहर आते हैं, विशेष रूप से उन नवजातों के लिए जो प्रारंभिक तीसरी तिमाही में गर्भ में एंटीबायोटिक्स के संपर्क में आए।

  • Winter Hair Care Tips: नारियल तेल में ऐसे मिलाएं आंवला, फिर बालों पर करें अप्लाई, झड़ने की समस्या होगी खत्म

    Winter Hair Care Tips: नारियल तेल में ऐसे मिलाएं आंवला, फिर बालों पर करें अप्लाई, झड़ने की समस्या होगी खत्म

    नई दिल्‍ली । ठंड के मौसम में हवा में नमी कम हो जाती है, जिससे सिर की त्वचा रूखी होने लगती है. स्कैल्प ड्राई होने से बालों की जड़ें कमजोर पड़ती हैं और बाल झड़ने लगते हैं. इसके अलावा ठंड में पानी कम पीना और धूप की कमी भी बालों के झड़ने का बड़ा कारण बनती है.

    सर्दियों में खानपान में लापरवाही से शरीर में आयरन, प्रोटीन और विटामिन्स की कमी हो जाती है. खासकर विटामिन-सी, विटामिन-ई और बायोटिन की कमी बालों की ग्रोथ को प्रभावित करती है, जिससे हेयर फॉल की समस्या बढ़ जाती है.
    ठंड में अक्सर लोग गर्म पानी से सिर धोते हैं, जिससे स्कैल्प का नैचुरल ऑयल खत्म हो जाता है. बार-बार शैंपू करना, गीले बालों में कंघी करना और हेयर ड्रायर का ज्यादा इस्तेमाल भी बाल झड़ने का कारण बनता है.
    ब्यूटी एक्सपर्ट रिजवाना परवीन बताती है कि सर्दियों में हल्के गुनगुने पानी से ही बाल धोएं और हफ्ते में दो बार से ज्यादा शैंपू न करें. नारियल, सरसों या तिल के तेल से नियमित मालिश करें. साथ ही हरी सब्जियां, फल, सूखे मेवे और पर्याप्त पानी को डाइट में शामिल करें.
    उन्होंने कहा कि आंवले का तेल बालों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो बालों की जड़ों को मजबूत करते हैं, समय से पहले सफेद होने से रोकते हैं और बालों में प्राकृतिक चमक लाते हैं.
    उन्होंने कहा कि घर पर आंवला तेल बनाने के लिए 5–6 ताजे आंवले, 250 मिली नारियल या तिल का तेल और एक साफ कांच की बोतल लें. आंवले को अच्छे से धोकर छोटे टुकड़ों में काट लें या कद्दूकस कर लें.
    कढ़ाही में तेल डालकर धीमी आंच पर गरम करें और उसमें आंवला डाल दें. जब आंवला काला पड़ जाए और तेल से खुशबू आने लगे तो गैस बंद कर दें. ठंडा होने पर तेल को छानकर कांच की बोतल में भर लें. यह तेल 2–3 महीने तक सुरक्षित रहता है.
    उन्होंने कहा कि हफ्ते में 2–3 बार आंवला तेल से हल्के हाथों से सिर की मालिश करें और 1–2 घंटे बाद बाल धो लें. नियमित इस्तेमाल से बाल झड़ना कम होता है, डैंड्रफ दूर होता है और बाल घने, मजबूत और चमकदार बनते हैं.
  • Republic Day Long Weekend 2026: इन छुट्टियों में घूम आएं भारत की 5 खूबसूरत जगहें, ट्रिप रहेगा यादगार

    Republic Day Long Weekend 2026: इन छुट्टियों में घूम आएं भारत की 5 खूबसूरत जगहें, ट्रिप रहेगा यादगार


    नई दिल्‍ली ।  Republic Day 2026 : रोजाना की भागदौड़ और काम के प्रेशर के बीच ब्रेक मिलना किसी बोनस से कम नहीं होता, खासकर उन युवाओं के लिए जिन्होंने नए साल पर अपने लिए Travel Goals सेट किए हैं. इस लॉन्ग वीकेंड में आप आसानी से बजट ट्रिप(Budget Trip) प्लान कर सकते हैं, जिसमें ज्यादा छुट्टियां भी नहीं लगतीं और जेब पर अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ता.
    राजस्थान- कम दिनों में ज्यादा कुछ देखने का प्लान हो तो राजस्थान बेहतरीन जगह है. जयपुर, उदयपुर और जैसलमेर जैसे शहर न केवल अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए मशहूर हैं बल्कि यहां का फूड, लोकसंस्कृति और हैंडलूम भी लोगों को बेहद आकर्षित करता है. जनवरी में यहां का मौसम सुहावना रहता है, इसलिए किले, हवेलियां, लेक और डेजर्ट सफारी आराम से एक्सप्लोर की जा सकती हैं.
    शिमला- सर्दियों में हिल स्टेशन का मजा लेना हो तो शिमला की ओर रुख किया जा सकता है. दिल्ली-एनसीआर से यह डेस्टिनेशन रोड ट्रिप के लिए भी फेमसहै. इस मौसम में यहां बर्फबारी देखने का मौका मिल सकता है, जो ट्रिप का अनुभव और यादगार बना देता है. मॉल रोड, रिज, आसपास के व्यू पॉइंट्स और कैफे, कम दिनों में भी आसानी से घूमे जा सकते हैं.
    ऋषिकेश- एडवेंचर और शांति दोनों साथ चाहिए हों तो ऋषिकेश एक परफेक्ट जगह है. यहां रिवर राफ्टिंग, बंजी जंपिंग, कैंपिंग और ट्रेकिंग जैसी गतिविधियां युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं. इसके साथ ही गंगा तट पर होने वाली आरती और पहाड़ों के बीच शांत वातावरण मानसिक सुकून भी देता है.
    पचमढ़ी- मध्य प्रदेश का पचमढ़ी नेचर लवर्स के लिए खास आकर्षण रखता है. यह हिल स्टेशन अपनी हरी-भरी वादियों, झरनों और ऐतिहासिक गुफाओं के लिए जाना जाता है. जनवरी का मौसम घूमने के लिए अनुकूल रहता है, इसलिए कम दिनों में भी यहां की खूबसूरती आराम से देखी जा सकती है.
    लैंसडाउन- जो लोग भीड़-भाड़ से दूर शांत जगह तलाश रहे हैं, उनके लिए उत्तराखंड का लैंसडाउन बढ़िया विकल्प है. यहां का सुकून भरा माहौल, ऊंचे देवदार के पेड़ और साफ-सुथरी घाटियां इसे एक रिलैक्सिंग वीकेंड डेस्टिनेशन बनाते हैं.
    रिपब्लिक डे 2026 का यह लॉन्ग वीकेंड उन लोगों के लिए खास मौका है जो नए साल में खुद के लिए “मी-टाइम” या “ट्रैवल गोल्स” सेट कर चुके हैं. सही बजट, पहले से बुकिंग और थोड़ा-सा प्लानिंग करके यह छोटा ब्रेक आपकी यादों में लंबे समय तक जगह बना सकता है. तो अगर आप भी छुट्टियों को सिर्फ कैलेंडर पर देखकर छोड़ देने वालों में नहीं हैं, तो इस बार कहीं निकल पड़ें, नई जगहें देखिए, नए अनुभव जुटाइए और साल की शुरुआत पॉजिटिव एनर्जी के साथ कीजिए
  • जिम जाने से डर लगता है? इन 5 टिप्स के साथ शुरू करें अपना वेट लॉस सफर

    जिम जाने से डर लगता है? इन 5 टिप्स के साथ शुरू करें अपना वेट लॉस सफर


    नई दिल्ली । वजन कम करने की प्रक्रिया अक्सर कठिन और उबाऊ लगती है। कई बार हम सोचते हैं कि हमें जिम में घंटों पसीना बहाना होगा और अपनी पसंदीदा चीज़ों को छोड़ना पड़ेगा। लेकिन असल में वजन घटाने की सफलता का सबसे बड़ा राज आपकी मानसिक सोच और मोटिवेशन में छिपा है। सही आदतें और सकारात्मक नजरिया ही इस सफर को आसान और मजेदार बना सकते हैं।अगर आप भी वजन घटाने के सफर की शुरुआत करना चाहते हैं तो इन 5 टिप्स को अपनाकर आप इसे सिर्फ प्रभावी नहीं बल्कि मजेदार भी बना सकते हैं।

    छोटे टारगेट से शुरुआत करें

    अगर आपने एक साथ 10 किलो वजन घटाने का सोच लिया तो यह आपको जल्दी ही हतोत्साहित कर सकता है। इसके बजाय छोटे और साप्ताहिक लक्ष्य तय करें जैसे कि हर हफ्ते 500 ग्राम वजन घटाना। शुरुआत में केवल 15-20 मिनट की एक्सरसाइज से शुरू करें। छोटे टारगेट पूरे होने पर मिलने वाली संतुष्टि आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी।

    फिजिकल एक्टिविटी को मजेदार बनाएं

    कभी-कभी वर्कआउट को बोझ जैसा महसूस करना स्वाभाविक है लेकिन इसे मजेदार बनाने की कोशिश करें। अपने पसंदीदा गानों की प्लेलिस्ट सुनते हुए वर्कआउट करें। म्यूजिक न केवल आपको ऊर्जा देगा बल्कि यह आपके मूड को भी बेहतर बनाएगा। इससे वर्कआउट की समय सीमा का पता भी नहीं चलेगा और आप आसानी से लंबे समय तक एक्टिव रहेंगे।

    वर्कआउट पार्टनर ढूंढें

    अकेले जिम जाने की सोच ही आलस को जन्म देती है। ऐसे में एक वर्कआउट पार्टनर का होना बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को अपने साथ वर्कआउट करने के लिए प्रेरित करें। इससे न केवल आपको प्रेरणा मिलेगी बल्कि आप एक-दूसरे को उत्साहित और प्रोत्साहित भी करेंगे। इसके अलावा वर्कआउट पार्टनर के साथ करने से यह और भी मजेदार हो सकता है।

    आहार में बदलाव करें पर प्रतिबंध नहीं

    वजन घटाने के सफर में आहार को भी बदलना महत्वपूर्ण है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपको अपनी पसंदीदा चीजें छोड़नी पड़ें। अगर आप बहुत सख्त आहार योजना का पालन करेंगे तो जल्दी ही वह आपके लिए बोरिंग और मुश्किल हो जाएगा। इसके बजाय छोटे-छोटे बदलाव करें जैसे कि अधिक प्रोटीन और फाइबर का सेवन शक्कर और जंक फूड की मात्रा कम करना।

    अपने छोटे-छोटे प्रगति को सेलिब्रेट करें

    वजन घटाने का सफर लंबा हो सकता है और इसके दौरान किसी छोटे बदलाव को नजरअंदाज करना आसान होता है। लेकिन छोटी-छोटी प्रगति को सेलिब्रेट करना आपके मोटिवेशन को बढ़ा सकता है। जैसे ही आप कोई छोटा लक्ष्य हासिल करें अपने आप को सराहें या खुद को कोई छोटा इनाम दें। इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और आप और भी बेहतर करने के लिए प्रेरित होंगे। वजन घटाने का सफर मानसिक दृष्टिकोण से कहीं अधिक जुड़ा हुआ है। अगर आप इसे एक सकारात्मक और मजेदार अनुभव के रूप में देखेंगे तो यह सफर बेहद सफल और प्रेरणादायक बन सकता है। शुरुआत में छोटी शुरुआत करें इसे मजेदार बनाएं और साथ ही अपने आहार और आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करें। जब आप इसे एक आदत के रूप में अपनाएंगे तो यह आसानी से आपका जीवन का हिस्सा बन जाएगा।

  • मटर छिलने की 'मैजिक ट्रिक': 5 मिनट में 2 किलो मटर छीलें बिना थके और बिना दर्द के

    मटर छिलने की 'मैजिक ट्रिक': 5 मिनट में 2 किलो मटर छीलें बिना थके और बिना दर्द के


    नई दिल्ली ।सर्दियों के मौसम में ताजी हरी मटर की बहार आना किसी खुशखबरी से कम नहीं होता। चाहे मटर का निमोना हो गरमागरम मटर पनीर या मटर पराठे सर्दियों का स्वाद इनसे ही पूरा होता है। लेकिन मटर छीलना खासकर जब ज्यादा मात्रा में हो एक थकाऊ काम बन जाता है। नाखूनों से छिलके निकालते वक्त उंगलियों में दर्द और मटर की फलियों से एक-एक दाना निकालने में लगने वाला समय अक्सर हमें इस काम से बचने का कारण बन जाता है।
    लेकिन अब सोशल मीडिया पर एक ऐसी स्मार्ट ट्रिक’ वायरल हो रही है जिससे आप मात्र 5 से 10 मिनट में 2 किलो तक मटर आसानी से छील सकते हैं। जी हां यह तरीका न सिर्फ आपके समय की बचत करेगा बल्कि मटर छीलने का वह थका देने वाला काम भी अब बिना दर्द और आलस्य के खत्म हो जाएगा।

    मटर छीलने में क्यों आती है नानी याद

    मटर के छिलके काफी सख्त होते हैं और नाखूनों से इन्हें छीलते वक्त उंगलियों में दर्द हो सकता है। खासकर जब घर में मेहमान हों या बड़े आयोजन की तैयारी हो तो मटर छीलने का काम एक पहाड़ जैसा लगता है। लेकिन अब यह नई मैजिक ट्रिक’ इस समस्या का हल लेकर आई है।

    क्या है वह मैजिक ट्रिक स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

    यह तरीका बहुत आसान है और इसके लिए आपको केवल गर्म पानी का सही इस्तेमाल करना है। आइए जानते हैं कैसे गर्म पानी तैयार करें सबसे पहले एक बड़े भगौने में पर्याप्त पानी गर्म करें। ध्यान रखें कि पानी उबालने तक न जाए बस उसे अच्छे से गर्म करें। मटर डालें जब पानी अच्छे से गर्म हो जाए तो गैस बंद कर दें और इसमें साबुत मटर की फलियों को डालें। दो से तीन मिनट के लिए ढकें बर्तन को ढक्कन से ढक कर 2 से 3 मिनट के लिए छोड़ दें।

    गर्म पानी और भाप के संपर्क में आने से मटर के छिलके मुलायम हो जाएंगे। ठंडे पानी में डालें अब मटर को गर्म पानी से निकाल कर तुरंत ठंडे पानी में डालें। इससे मटर के दाने का हरा रंग बरकरार रहेगा और मटर ज्यादा पकेंगे नहीं।मटर छीलना अब जैसे ही आप मटर की फली को हल्का सा दबाएंगे सारे दाने एक झटके में बाहर आ जाएंगे। इस ट्रिक से न केवल आपको नाखूनों में दर्द नहीं होगा बल्कि आपका समय भी बच जाएगा।

    फायदे

    मटर छीलने में लगने वाला समय अब मात्र 5-10 मिनट में खत्म हो जाएगा।इस ट्रिक से मटर के दाने पूरी तरह से intact रहते हैं और उनका हरा रंग भी बरकरार रहता है।मटर छीलने का काम अब बिना दर्द और आलस्य के आसानी से किया जा सकता है। आप मटर छीलने के बाद उन्हें सुखाकर जिप-लॉक बैग में स्टोर भी कर सकते हैं जिससे भविष्य में जल्दी कुकिंग हो सके। मटर छीलना अब पहले से कहीं आसान और तेज़ हो गया है। तो अगली बार जब आपको मटर छीलने का मन हो इस स्मार्ट ट्रिक को अपनाकर आप इस थकाऊ काम को मिनटों में कर सकते हैं। अब से मटर की हर रेसिपी को बनाना और उसका स्वाद लेना और भी मजेदार होगा!