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  • सोशल मीडिया पर लिया वजन घटाने का उपाय, खाते ही तड़प-तड़प कर हो गई छात्रा की मौत

    सोशल मीडिया पर लिया वजन घटाने का उपाय, खाते ही तड़प-तड़प कर हो गई छात्रा की मौत


    मदुरै । लोग इंटरनेट या सोशल मीडिया पर अक्सर वजन घटाने के लिए उपायों की तलाश करते रहते हैं। हाल ही में यह एक छात्रा की दर्दनाक मौत का कारण बन गया। जानकारी के मुताबिक वजन घटाने के लिए सोशल मीडिया पर एक वीडियो में बताए गए तरीके के अनुसार ‘वेंकारम’ यानी बोरेक्स का सेवन करने के बाद स्नातक की प्रथम वर्ष की एक कॉलेज छात्रा की मौत हो गई है।

    पुलिस ने मंगलवार बताया कि 19 वर्षीय कलैयारसी दिहाड़ी मजदूर वेल मुरुगन (51) और विजयलक्ष्मी की पुत्री थी और नरिमेडु स्थित एक निजी महिला कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी। वह सेलूर के मीनाम्बलपुरम इलाके की कामराज क्रॉस स्ट्रीट में रहती थी।

    पुलिस ने बताया कि वजन कुछ ज्यादा होने के कारण कलैयारसी अक्सर वजन घटाने से जुड़े उपाय तलाशती रहती थी।

    पिछले सप्ताह उसने ‘वजन घटाने और छरहरी काया के लिए वेंकारम’ शीर्षक वाला एक यूट्यूब वीडियो देखा था और 16 जनवरी को कीझामासी स्ट्रीट के थर्मुट्टी इलाके के पास स्थित दवा की एक दुकान से यह पदार्थ खरीदा।

    पुलिस ने बताया कि कलैयारसी ने 17 जनवरी को वीडियो में बताए गए तरीके से इसका सेवन किया, जिसके बाद उसे उल्टी और दस्त होने लगे। उसकी मां उसे मुनिसलाई स्थित एक निजी अस्पताल ले गई, जहां उपचार के बाद उसे घर भेज दिया गया। हालांकि उसी शाम लक्षण दोबारा उभरे और पास के एक अन्य अस्पताल में इलाज के बाद घर लौटने पर उसने तेज पेट दर्द और मल में खून आने की शिकायत की।

    पुलिस के अनुसार रात करीब 11 बजे उल्टी और दस्त की स्थिति गंभीर हो गई जिसके बाद पड़ोसियों की मदद से उसे सरकारी राजाजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। फिलहाल शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया है। सेलूर पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

  • लगातार खांसी बनी जान की दुश्मन? इन आयुर्वेदिक नुस्खों से मिलेगी राहत

    लगातार खांसी बनी जान की दुश्मन? इन आयुर्वेदिक नुस्खों से मिलेगी राहत


    नई दिल्ली। ठंड और सर्द हवाओं के मौसम में खांसी की समस्या सामान्य हो जाती है। हल्की खांसी को अक्सर लोग अनदेखा कर देते हैंलेकिन जब यह लगातार बनी रहती है और छाती में बेचैनीगले में जलन या बलगम का निर्माण होने लगता हैतो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसारसमय रहते इन संकेतों को पहचानकर आयुर्वेदिक और घरेलू उपाय अपनाने से खांसी को नियंत्रित किया जा सकता है और सांस की सेहत मजबूत बनी रहती है।

    खांसी के प्रकार
    भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसारखांसी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है – सूखी खांसी और बलगम वाली खांसी। सूखी खांसी में गले में खुजलीजलन और लगातार खांसी होती है। वहींबलगम वाली खांसी में छाती भारी महसूस होती हैबलगम निकलता है और सीने में दबाव या तकलीफ होती है। दोनों ही प्रकार की खांसी में गले में जलन और सीने की बेचैनी आम संकेत हैं। यदि खांसी कई दिनों तक कम न हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है।

    आयुर्वेदिक नुस्खे और घरेलू उपाय
    आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि सूखी खांसी में मुलेठी या लौंग का एक छोटा टुकड़ा चूसने से गले को तुरंत आराम मिलता है। इसके अलावावासा के पत्तों का काढ़ा पीना या इसका पाउडर लेना कफ को कम करने में मदद करता है। सोने से पहले हल्दी मिलाकर गर्म दूध पीना गले की जलन और खांसी में राहत देता है।बलगम वाली खांसी या सामान्य खांसी के लिए गुनगुने अदरक का काढ़ाअदरक-तुलसी का काढ़ा शहद के साथ लेने से कफ पतला होकर बाहर निकलता है। इसके अलावागर्म पानी में नमक डालकर गरारा करना और भाप लेना भी गले और छाती की जलन को कम करता है। लौंगअदरक और इलायची को मिलाकर पाउडर या काढ़ा के रूप में इस्तेमाल करना भी खांसी में आराम देता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि ये आयुर्वेदिक नुस्खे प्राकृतिक और सुरक्षित हैं। इन उपायों को संतुलित आहारपर्याप्त पानी और पर्याप्त आराम के साथ अपनाने से खांसी में तेजी से सुधार होता है। नियमित रूप से इन नुस्खों का पालन करने से न केवल खांसी नियंत्रित रहती हैबल्कि सांस की सेहत भी मजबूत बनती है।हालांकियदि खांसी के साथ सांस फूलनाबुखारलगातार कमजोरी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देंतो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। शुरुआती चरण में अपनाए गए आयुर्वेदिक नुस्खे समय पर राहत देने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं।

  • रोज़ाना करें पूर्ण भुजंगासन, मजबूत होगी रीढ़ और बदन दर्द से मिलेगी स्थायी राहत

    रोज़ाना करें पूर्ण भुजंगासन, मजबूत होगी रीढ़ और बदन दर्द से मिलेगी स्थायी राहत

    नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली लंबे समय तक बैठकर काम करना और शारीरिक गतिविधियों की कमी आज बदन दर्द और रीढ़ से जुड़ी समस्याओं का बड़ा कारण बन चुकी है। ऐसे समय में योग न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी संतुलित रखने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। योग विशेषज्ञ रोज़ाना कुछ खास आसनों को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देते हैं जिनमें पूर्ण भुजंगासन का विशेष स्थान है।मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार पूर्ण भुजंगासन भुजंगासन का उन्नत और गहन रूप है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूती और लचीलापन देने के साथ-साथ पीठ कंधों और गर्दन की जकड़न को दूर करने में सहायक होता है। इसके नियमित अभ्यास से छाती खुलती है जिससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और सांस लेने में आसानी होती है।

    पूर्ण भुजंगासन कैसे करें
    योग विशेषज्ञों के अनुसार इस आसन का अभ्यास बेहद सावधानी और सही तकनीक के साथ करना चाहिए। इसे करने के लिए सबसे पहले पेट के बल ज़मीन पर लेट जाएं। दोनों हथेलियों को कंधों के पास रखें और पैर सीधे रखें। अब गहरी सांस लेते हुए धीरे-धीरे छाती गर्दन और सिर को ऊपर उठाएं। कोहनियों को थोड़ा मोड़ें और कंधों को पीछे की ओर खींचें। इसके बाद घुटनों को मोड़ते हुए पैरों के पंजे ऊपर उठाएं और सिर-गर्दन को पीछे की ओर तानें। कोशिश करें कि पैरों के पंजे सिर को छू सकें।इस मुद्रा में बिना किसी दबाव के जितनी देर आराम से रह सकें उतनी देर रुकें। फिर सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे वापस नीचे आएं और शवासन की स्थिति में लेटकर शरीर को पूरी तरह शिथिल करें। गहरी सांस लें और हृदय गति को सामान्य होने दें।

    पूर्ण भुजंगासन के प्रमुख फायदे

    नियमित रूप से पूर्ण भुजंगासन करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत और लचीली बनती है। यह आसन पाचन तंत्र को बेहतर करता है और थायरॉइड ग्रंथि को सक्रिय करने में मदद करता है। इसके अलावा यह तनाव और चिंता को कम करने में सहायक माना जाता है। खासतौर पर जो लोग लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं या जिन्हें कमर और पीठ दर्द की शिकायत रहती है उनके लिए यह आसन बेहद लाभकारी हो सकता है।

    कब न करें यह आसन

    हालांकि पूर्ण भुजंगासन बेहद लाभकारी है लेकिन कुछ स्थितियों में इससे बचना चाहिए। गर्भवती महिलाएं गंभीर पीठ दर्द से पीड़ित लोग उच्च रक्तचाप हर्निया या हाल ही में सर्जरी कराने वाले व्यक्तियों को यह आसन नहीं करना चाहिए।

    शुरुआत में रखें ये सावधानियां

    शुरुआती दिनों में इस आसन को धीरे-धीरे सीखना चाहिए और किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में अभ्यास करना सबसे बेहतर रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि योग में धैर्य और नियमितता सबसे अहम होती है। पूर्ण भुजंगासन जैसे उन्नत आसन शरीर की क्षमता बढ़ाते हैं लेकिन गलत तरीके से करने पर चोट का खतरा भी हो सकता है।नियमित अभ्यास सही तकनीक और सावधानी के साथ किया गया पूर्ण भुजंगासन न सिर्फ रीढ़ को मजबूत बनाता है बल्कि बदन दर्द से राहत दिलाकर जीवन को अधिक सक्रिय और ऊर्जावान बना सकता है।

  • Basant Panchami 2026: वसंत पंचमी पर क्यों पहनते हैं पीले कपड़े? जानिए इस रंग से जुड़े धार्मिक और प्राकृतिक रहस्य

    Basant Panchami 2026: वसंत पंचमी पर क्यों पहनते हैं पीले कपड़े? जानिए इस रंग से जुड़े धार्मिक और प्राकृतिक रहस्य


    नई दिल्ली । भारत में ज्ञान, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती की आराधना का पावन पर्व वसंत पंचमी वर्ष 2026 में 23 जनवरी को मनाया जाएगा। यह दिन न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से विशेष होता है, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और रंगों से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। वसंत पंचमी आते ही चारों ओर एक ही रंग की छटा दिखाई देती है—पीला। मंदिरों से लेकर घरों तक, वस्त्रों से लेकर भोग तक, हर जगह पीले रंग का विशेष महत्व नजर आता है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर वसंत पंचमी के दिन पीले रंग को ही इतना खास क्यों माना जाता है? इसके पीछे कई धार्मिक, प्राकृतिक और वैज्ञानिक कारण छिपे हुए हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीला रंग मां सरस्वती को अत्यंत प्रिय है। मां सरस्वती को विद्या, बुद्धि, विवेक और सृजनात्मकता की देवी माना जाता है। हिंदू धर्म में पीला रंग सात्विकता, पवित्रता और ज्ञान का प्रतीक है। यही कारण है कि वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती को पीले वस्त्र अर्पित किए जाते हैं, पीले फूलों से पूजा की जाती है और केसरिया भात, बूंदी या पीली मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन पीले वस्त्र धारण कर पूजा करने से ज्ञान, बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

    वसंत पंचमी का संबंध केवल धार्मिक आस्था से ही नहीं, बल्कि प्रकृति के बदलाव से भी है। यह पर्व शीत ऋतु के अंत और वसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है। कड़ाके की ठंड के बाद जब सूर्य की किरणें तेज और सुनहरी होने लगती हैं, तब धरती पर नई ऊर्जा का संचार होता है। इसी समय खेतों में सरसों की फसल लहलहाने लगती है और चारों ओर पीले फूलों की बहार दिखाई देती है। प्रकृति स्वयं पीले रंग की चादर ओढ़ लेती है, जो समृद्धि, उर्वरता और नई शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है।

    पीला रंग मनोवैज्ञानिक रूप से भी बेहद सकारात्मक माना जाता है। यह रंग मन में प्रसन्नता, आशा और उत्साह का संचार करता है। वसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र पहनने से मानसिक ऊर्जा बढ़ती है और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है। यही कारण है कि इस दिन बच्चों की शिक्षा की शुरुआत, विद्यारंभ संस्कार और कला-संगीत से जुड़े कार्यों को शुभ माना जाता है।

    इसके अलावा, ज्योतिष शास्त्र में पीले रंग का संबंध बृहस्पति ग्रह से भी माना गया है, जो ज्ञान, धर्म और शुभ फल प्रदान करने वाला ग्रह है। वसंत पंचमी पर पीला रंग धारण करना बृहस्पति की कृपा पाने का भी एक माध्यम माना जाता है। इस तरह वसंत पंचमी पर पीले रंग का महत्व केवल परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धर्म, प्रकृति, मनोविज्ञान और ज्योतिष चारों का सुंदर संगम है। यही कारण है कि इस दिन पीले रंग में रंगकर लोग ज्ञान, समृद्धि और सकारात्मकता का स्वागत करते हैं।

  • Ayurvedic Bathing Tips: सफाई के साथ स्वास्थ्य और ताजगी के लिए ये तीन स्टेप्स अपनाएं

    Ayurvedic Bathing Tips: सफाई के साथ स्वास्थ्य और ताजगी के लिए ये तीन स्टेप्स अपनाएं

    नई दिल्ली। भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग हर काम तेजी से करते हैं, लेकिन खुद के लिए समय निकालना मुश्किल हो गया है। ऐसे में रोज़मर्रा की जरूरतों के बीच स्नान का महत्व अक्सर अनदेखा हो जाता है। आम धारणा यह है कि नहाना केवल शरीर की बाहरी सफाई के लिए होता है, लेकिन आयुर्वेद में इसे ‘संस्कार’ और ‘चिकित्सा’ माना गया है, जो तन के साथ-साथ मन को भी शुद्ध करता है।

    स्नान से शारीरिक और मानसिक लाभ

    स्नान केवल शरीर की गंदगी हटाने तक सीमित नहीं है। इसके नियमित अभ्यास से:

    पाचन शक्ति मजबूत होती है और मेटाबॉलिज्म में सुधार आता है।

    सुस्ती और थकान कम होती है, जिससे दिनभर ऊर्जा बनी रहती है।

    रक्त संचार बेहतर होता है, और शरीर की अग्नि संतुलित रहती है।

    तनाव और कोर्टिसोल का स्तर कम होता है, जबकि एंडोर्फिन हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जिससे मन प्रसन्न रहता है।

    अच्छी नींद आती है, क्योंकि स्नान से नर्वस सिस्टम शांत होता है।

    यदि रोज़ाना पूरा स्नान संभव न हो, तो कम से कम गुनगुने पानी में पैरों को डुबोकर रखना भी लाभकारी माना गया है।

    आयुर्वेदिक तरीके से स्नान करने के तीन नियम

    आयुर्वेद में स्नान को स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा के लिए तीन मुख्य क्रियाओं में बांटा गया है:

    अभ्यंग (तेल मालिश)
    नहाने से लगभग 15 मिनट पहले पूरे शरीर की तेल से मालिश करें। नवजात शिशु की तरह हल्के हाथों से अभ्यंग करने से रक्त संचार बढ़ता है, शरीर पोषित होता है और त्वचा की नमी बरकरार रहती है।

    उबटन का प्रयोग
    अभ्यंग के बाद उबटन लगाना त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद है। यह मृत त्वचा की कोशिकाओं को हटाकर नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है। प्राकृतिक उबटन रसायनों से मुक्त होते हैं और त्वचा को मुलायम, चमकदार और स्वस्थ बनाते हैं।

    मंत्रोच्चार
    स्नान के समय सकारात्मक मंत्रोच्चार करना मन और मस्तिष्क दोनों के लिए लाभकारी है। यह मानसिक तनाव कम करता है और शरीर और मन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करता है।

    स्नान के नियमित अभ्यास से जीवनशैली में सुधार

    नियमित स्नान सिर्फ स्वच्छता का साधन नहीं, बल्कि तन, मन और आत्मा की ताजगी का माध्यम है। आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर पर पानी पड़ता है, तो:

    पूरे शरीर में रक्त का संचार तेज़ होता है।

    पाचन अग्नि सक्रिय रहती है।

    थकान दूर होती है और मन प्रसन्न रहता है।

    स्नान के दौरान तेल, उबटन और मंत्रोच्चार का संयोजन शरीर और मन दोनों के लिए सशक्त ऊर्जा प्रदान करता है, जिससे जीवनशैली में सुधार आता है।

    स्नान को केवल नित्यकर्म मानना बड़ी भूल है। यह तन, मन और मस्तिष्क की शुद्धि का आयुर्वेदिक तरीका है। सही विधि से स्नान करने से न केवल शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि मानसिक तनाव भी कम होता है और दिनभर ऊर्जा बनी रहती है। इसलिए, भागदौड़ भरी जिंदगी में भी स्नान को सिर्फ स्वच्छता नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा का संस्कार समझकर अपनाना चाहिए।

  • मांस नहीं, पौधों से बनेगी ताकत: जानिए प्लांट-बेस्ड प्रोटीन के फायदे और इसे डाइट में शामिल करने के आसान तरीके

    मांस नहीं, पौधों से बनेगी ताकत: जानिए प्लांट-बेस्ड प्रोटीन के फायदे और इसे डाइट में शामिल करने के आसान तरीके

    नई दिल्ली। शरीर को सुचारू रूप से चलाने मांसपेशियों को मजबूत रखने और ऊर्जा बनाए रखने के लिए प्रोटीन बेहद जरूरी पोषक तत्व है। खासतौर पर जिम में कसरत करने वाले लोगों के लिए प्रोटीन मसल रिकवरी और ग्रोथ का आधार माना जाता है। आम धारणा यह है कि पर्याप्त प्रोटीन सिर्फ अंडा चिकन या मांसाहारी भोजन से ही मिल सकता है लेकिन यह सोच पूरी तरह सही नहीं है।आज के समय में प्लांट-बेस्ड प्रोटीन न सिर्फ शाकाहारी लोगों के लिए बल्कि हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वालों की पहली पसंद बनता जा रहा है। भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में लोग मांसाहारी प्रोटीन छोड़कर पौधों से मिलने वाले प्रोटीन की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं।

    क्यों बेहतर है प्लांट-बेस्ड प्रोटीन?
    पौधों से मिलने वाला प्रोटीन शरीर के लिए ज्यादा सुरक्षित और पचने में आसान माना जाता है। जहां मांसाहारी प्रोटीन के साथ कोलेस्ट्रॉल और सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्यादा होती है वहीं प्लांट-बेस्ड प्रोटीन में कोलेस्ट्रॉल बिल्कुल नहीं होता। यही वजह है कि यह दिल की सेहत के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है।दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स से जहां कैल्शियम मिलता है वहीं बहुत से लोगों को लैक्टोज इन्टॉलरेंस की समस्या भी होती है जिससे गैस पेट दर्द और अपच जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इसके विपरीत बादाम तिल और हरी सब्जियां कैल्शियम के बेहतरीन प्लांट-बेस्ड स्रोत हैं।

    फाइबर और एनर्जी का डबल फायदा
    प्लांट-बेस्ड प्रोटीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके साथ शरीर को भरपूर फाइबर भी मिलता है। फाइबर पाचन को दुरुस्त रखता है शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है। यही कारण है कि ऐसे लोग जो पौधों से प्रोटीन लेते हैं उनमें मोटापा और हृदय रोग का खतरा कम देखा जाता है।

    किन चीजों से लें प्लांट-बेस्ड प्रोटीन?
    आप अपनी रोज़मर्रा की डाइट में इन चीजों को शामिल कर सकते हैं-

    दालें मूंग मसूर अरहर
    सोया टोफू और सोया चंक्स

    राजमा चना और लोबिया

    सूखे मेवे और सीड्स बादाम कद्दू के बीज सूरजमुखी के बीज

    अंकुरित अनाज और साबुत अनाज

    हरी पत्तेदार सब्जियां

    कितना प्रोटीन है जरूरी?
    आम तौर पर शरीर के वजन के हिसाब से प्रोटीन की जरूरत तय की जाती है। यदि आपका वजन 50 किलोग्राम है तो रोजाना लगभग 50 ग्राम प्रोटीन लेना पर्याप्त माना जाता है। यह मात्रा आसानी से प्लांट-बेस्ड डाइट से पूरी की जा सकती है।

    डाइट में शामिल करने के आसान तरीके
    आप मूंग दाल को अंकुरित कर सलाद बना सकते हैं मूंग दाल या बेसन का चीला खा सकते हैं सब्जियों के साथ टोफू मिलाकर स्वादिष्ट भोजन बना सकते हैं या राजमा-बीन्स की टिक्की और कबाब ट्राय कर सकते हैं।कुल मिलाकर अगर आप बिना मांसाहार के भी मजबूत फिट और एनर्जेटिक रहना चाहते हैं तो प्लांट-बेस्ड प्रोटीन एक स्मार्ट और हेल्दी विकल्प है।

  • Hair Care Tips: सर्दियों में ड्राई और बेजान बाल नहीं होंगे परेशानी, अपनाएं ये 6 असरदार उपाय

    Hair Care Tips: सर्दियों में ड्राई और बेजान बाल नहीं होंगे परेशानी, अपनाएं ये 6 असरदार उपाय

    नई दिल्ली। सर्दियों के मौसम में स्किन के साथ-साथ बाल भी रूखे और बेजान होने लगते हैं। ऐसे में बालों को ज्यादा देखभाल की जरुरत होती है। दरअसल, सर्दियों के समय हवा में नमी नहीं होती है, जिससे बालों में ड्राईनेस जल्दी हो जाती है। ऐसे में सही हेयर केयर न करने पर लोगों को डैंड्रफ, हेयर फॉल और ड्राई स्कैल्प जैसी समस्याएं हो जाती हैं।
    बालों को सॉफ्ट, स्मूद और हेल्दी बनाए रखने के लिए आपको रेगुलर हेयर केयर रूटीन को फॉलो करना जरुरी होता है। तो चलिए जानते हैं कि सर्दियों में अपने स्कैल्प और बालों को कैसे हेल्दी रख सकते हैं। इस लेख में बताए गए Hair Care Tips से आप बिना सैलून गए, अपने बालों को सॉफ्ट और शाइनी बना सकती हैं।
    सर्दियों में ऐसे करें हेयर केयर
    1. हेयर ऑयलिंग करें
    सर्दियों के मौसम में बालों को धोने से 2 घंटे पहले तेल से अच्छी तरह से मालिश जरुर करें। इससे स्कैल्प और और बाल, दोनों को पोषण मिलता है, साथ ही इससे बालों की जड़े भी मजबूत बनती हैं और डैंड्रफ और हेयर फॉल जैसी समस्याओं से निजात मिलता है।
    2. शैंपू करने का सही तरीका
    कई लोग बाल धोते समय शैंपू को डायरेक्टली अपने स्कैल्प पर अप्लाई करते हैं, लेकिन यह बिल्कुल गलत है। शैंपू में मौजूद हानिकारक केमिकल्स हेयर हेल्थ को खराब कर बालों को डैमेज कर सकते हैं। ऐसे में शैंपू और पानी को बराबर की मात्रा में लेकर उन्हें मिलाएं और फिर हाथों से लेकर सिर पर लगाएं। कोशिश करें कि जो शैंपू आप इस्तेमाल कर रहे हैं वो माइल्ड हो, इससे बाल ज्यादा डैमेज नहीं होते हैं।
    3. डीप कंडीशनिंग है जरुरी
    सर्दियों के मौसम में बालों के लिए डीप कंडीशनिंग बेहद जरुरी होती है। इसके लिए सबसे पहले शैंपू से हेयर वॉश करें, फिर माइल्ड कंडीशनर या हेयर मास्क अप्लाई करें। इसके लिए आप होममेड हेयर मास्क भी तैयार कर सकते हैं, जैसे अंडा, केला या शहद आदि। इससे बाल सॉफ्ट और चमकदार बनते हैं।
    4. गर्म पानी से न धोएं बाल
    ठंड के मौसम में कई लोग बाल धोने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल करते हैं। गर्म पानी से स्कैल्प और बालों की नमी छिन जाती है और बाल रूखे हो जाते हैं। ड्राईनेस के कारण बालों में डैंडरफ की समस्या भी हो सकती है। ऐसे में नहाते समय हल्के गुनगुने पानी या फिर नॉर्मल पानी का इस्तेमाल करें। इससे बाल स्वस्थ्य बने रहते हैं।
    5. हीट स्टाइलिंग से बचें
    कुछ लोग गीले बालों को सूखाने के लिए हेयर ड्रायर का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन, ड्रायर बालों की नमी सोख लेता है, जिससे बाल रूखे और बेजान से हो जाते हैं। साथ ही, ज्यादा हीट स्ट्रेटनिंग करने से भी बचना चाहिए, इससे भी बाल डैमेज होने का खतरा रहता है।
    6. अंडे और दही का हेयर मास्क
    रूखे स्कैल्प से राहत पाने के लिए दही और अंडे का हेयर मास्क आज़माएं। यह बालों को सॉफ्ट करने के साथ-साथ स्कैल्प को पोषण भी देता है। अंडे में मौजूद प्रोटीन और फैट्स स्कैल्प को गहराई से पोषण देकर रूखेपन को दूर करते हैं, जबकि दही बालों को सॉफ्ट और स्कैल्प को एक्सफोलिएट करने में मदद करती है। आधा कप दही में एक अंडा मिलाकर पेस्ट तैयार करें। इसे बाल धोने से 10 मिनट पहले स्कैल्प पर लगाएं और सूखने के बाद धो लें।
  • द स्पिरिट हंटर्स: मन, ऊर्जा और चेतना को जोड़कर हीलिंग की एक नई समग्र पहल

    द स्पिरिट हंटर्स: मन, ऊर्जा और चेतना को जोड़कर हीलिंग की एक नई समग्र पहल


    नई दिल्ली । उपचार की प्रक्रिया हमेशा केवल दवाओं, मशीनों या तय तकनीकों तक सीमित नहीं रही है। समय के साथ यह समझ गहरी होती गई है कि कई मानसिक और भावनात्मक समस्याओं की जड़ व्यक्ति के मन, भावनाओं और ऊर्जा के स्तर पर छिपी होती है। इसी सोच से जन्मी है द स्पिरिट हंटर्स नामक पहल, जो उपचार को एक समग्र और संवेदनशील दृष्टिकोण से देखने का प्रयास करती है।द स्पिरिट हंटर्स उन लोगों के लिए एक सुरक्षित और सहज स्पेस उपलब्ध कराता है, जो मानसिक तनाव, भावनात्मक उलझन, भीतर के भय या ऐसे अनुभवों से गुजर रहे होते हैं, जिन्हें वे स्वयं भी स्पष्ट शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते। यहाँ उद्देश्य किसी निष्कर्ष पर तुरंत पहुँचना नहीं, बल्कि व्यक्ति की स्थिति को गहराई, धैर्य और समझ के साथ सुनना और समझना है। यह मंच जजमेंट-फ्री माहौल में व्यक्ति को खुलकर अपनी बात रखने का अवसर देता है।

    इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता उपचार को देखने का उसका अलग नजरिया है। द स्पिरिट हंटर्स का मानना है कि हर व्यक्ति की समस्या अलग होती है इसलिए उसका समाधान भी एक जैसा नहीं हो सकता। यहाँ किसी तय ढाँचे या फॉर्मूले के बजाय व्यक्ति के अनुभव, मानसिक स्थिति और ऊर्जा संतुलन को ध्यान में रखकर मार्गदर्शन दिया जाता है। उपचार प्रक्रिया में मानसिक और भावनात्मक बातचीत ऊर्जा संतुलन से जुड़े सेशन्स, अवचेतन मन को समझने की तकनीकें और असहज या नकारात्मक प्रभावों की पहचान जैसे पहलू शामिल होते हैं। यह तरीका व्यक्ति को केवल तात्कालिक राहत नहीं देता, बल्कि आत्म-समझ और आंतरिक स्पष्टता की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करता है।

    द स्पिरिट हंटर्स में ऊर्जा और आध्यात्मिक संवेदनशीलता से जुड़ा मार्गदर्शन अंकिता के. द्वारा संभाला जाता है। उनका फोकस लोगों को उनकी आंतरिक ऊर्जा से दोबारा जोड़ने पर रहता है, ताकि वे अपने भीतर चल रहे असंतुलन को पहचान सकें। उनका दृष्टिकोण डर अंधविश्वास या रहस्य पर आधारित नहीं, बल्कि शांति संतुलन और आत्मिक स्थिरता पर केंद्रित है। कई मामलों में यह मार्गदर्शन व्यक्ति को भावनात्मक रूप से हल्का महसूस कराने और उलझे हुए विचारों को स्पष्ट करने में सहायक साबित होता है।वहीं मानसिक स्वास्थ्य के वैज्ञानिक पक्ष को संतुलित करने का कार्य डॉ. अक्षय के. वी. करते हैं। मनोविज्ञान और काउंसलिंग की पृष्ठभूमि के साथ उनका दृष्टिकोण व्यक्ति के मन में चल रही प्रक्रियाओं को समझने और उन्हें व्यावहारिक तरीके से सुलझाने पर केंद्रित रहता है। इससे उपचार की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित स्थिर और ज़मीनी बनती है।

    द स्पिरिट हंटर्स की खास बात यह है कि यहाँ विज्ञान और अध्यात्म को एक-दूसरे से अलग नहीं बल्कि पूरक के रूप में देखा जाता है। मानसिक समझ ऊर्जा और चेतना की संवेदनशीलता, व्यवहारिक मार्गदर्शन और गहराई से सुनने की प्रक्रिया ये सभी पहलू मिलकर व्यक्ति को संतुलित सहयोग प्रदान करते हैं। आज के तेज़ और दबाव भरे जीवन में जहाँ लोग अपनी समस्याओं को समझने और व्यक्त करने में भी कठिनाई महसूस करते हैं द स्पिरिट हंटर्स एक ऐसे हीलिंग स्पेस के रूप में उभरता है जहाँ बिना जल्दबाज़ी के सुना जाए और बिना जजमेंट के समझा जाए। यह पहल इस विचार को आगे बढ़ाती है कि उपचार केवल समस्या को ठीक करना नहीं बल्कि व्यक्ति को अपने भीतर संतुलन स्पष्टता और शांति की ओर ले जाना है।

  • छत्तीसगढ़ का बेस्ट टूरिस्ट विलेज: सरोधा-दादर की हरियाली और ठंडी हवाओं में मिलेगा हिमालय जैसी ठंडक

    छत्तीसगढ़ का बेस्ट टूरिस्ट विलेज: सरोधा-दादर की हरियाली और ठंडी हवाओं में मिलेगा हिमालय जैसी ठंडक



    नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में स्थित ‘सिल्वर विलेज’ सरोधा-दादर अपनी हरियाली, ठंडी हवाओं और शांत माहौल से मसूरी-शिमला जैसी अनुभूति कराता है। मैकल पर्वत की तलहटी में बसे इस गांव को 2023 में भारत के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव का पुरस्कार मिला है और यह प्रकृति प्रेमियों के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन है।

    छत्तीसगढ़ को अक्सर घने जंगलों और आदिवासी संस्कृति के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां छिपे कुछ गांव अपनी खूबसूरती में पहाड़ी हिल स्टेशनों को भी मात देते हैं। ऐसा ही एक अनोखा और बेहद सुंदर गांव है सरोधा-दादर, जिसे छत्तीसगढ़ का ‘सिल्वर विलेज’ कहा जाता है। यह गांव न सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर है, बल्कि अपनी सादगी, शांति और मेहमाननवाजी से हर आने वाले का दिल जीत लेता है।

    छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में स्थित यह गांव मैकल पर्वत की तलहटी में बसा हुआ है। चारों ओर फैली हरी-भरी पहाड़ियां, ठंडी हवाएं, साफ-सुथरा वातावरण और शांत घाटियां इसे किसी जन्नत से कम नहीं बनातीं।

    यहां पहुंचते ही लोगों को शिमला और मसूरी जैसी ठंडक और सुकून का अहसास होने लगता है, यही वजह है कि देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी पर्यटक इस गांव को देखने आते हैं।

    सरोधा-दादर की खूबसूरती और टिकाऊ पर्यटन मॉडल को देखते हुए साल 2023 में इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव का पुरस्कार भी मिल चुका है। यहां की पारंपरिक जीवनशैली, आदिवासी संस्कृति और प्रकृति के साथ तालमेल इसे बाकी पर्यटन स्थलों से अलग बनाता है। गांव के लोग पर्यटकों का दिल से स्वागत करते हैं, जिससे यहां आने वालों का अनुभव और भी खास बन जाता है।

    प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफी के शौकीनों और शांति की तलाश में निकले यात्रियों के लिए सरोधा-दादर एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है। अगर आप भी भीड़-भाड़ से दूर किसी शांत, हरे-भरे और खूबसूरत स्थान पर समय बिताना चाहते हैं, तो अगली ट्रिप में मसूरी-शिमला की जगह छत्तीसगढ़ के इस ‘सिल्वर विलेज’ को जरूर शामिल करें।
    प्रकृति के करीब समय बिताने वालों, फोटोग्राफी के शौकीनों और शांति की तलाश में रहने वालों के लिए सरोधा-दादर किसी जन्नत से कम नहीं है। यहां न तो शहरों की भागदौड़ है और न ही भीड़-भाड़ का शोर। अगर आप भीड़ से दूर, शुद्ध हवा और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच कुछ सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं, तो छत्तीसगढ़ का यह ‘सिल्वर विलेज’ आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होना चाहिए।