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  • दक्षिण अफ्रीका के खास पौधे रूइबोस की दुनिया भर में बढ़ी मांग, कैफीन-फ्री चाय बनी पहली पसंद।

    दक्षिण अफ्रीका के खास पौधे रूइबोस की दुनिया भर में बढ़ी मांग, कैफीन-फ्री चाय बनी पहली पसंद।

    नई दिल्ली ।दक्षिण अफ्रीका की सेडरबर्ग पहाड़ियों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला विशेष पौधा रूइबोस इन दिनों अपनी विशिष्टताओं के कारण वैश्विक स्तर पर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ‘लाल झाड़ी’ के नाम से मशहूर यह पौधा केवल दक्षिण अफ्रीका के लगभग साठ हजार हेक्टेयर के सीमित भौगोलिक क्षेत्र में ही पैदा होता है। इसकी पत्तियों से तैयार की जाने वाली लाल चाय की मांग दुनिया के पचास से अधिक देशों में तेजी से बढ़ रही है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, इसके अंतरराष्ट्रीय निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह हर्बल पेय पदार्थों के बाजार में एक प्रमुख स्थान हासिल कर रहा है।

    इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत इसका पूरी तरह से कैफीन-मुक्त होना है। इसके अलावा इसमें एंटीऑक्सीडेंट और पॉलीफेनॉल जैसे प्राकृतिक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। जो लोग सामान्य चाय या कॉफी में मौजूद कैफीन के सेवन से बचना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प बनकर उभरा है। अब इस पौधे का उपयोग केवल पारंपरिक चाय बनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के हर्बल पेय पदार्थों और स्किन केयर उत्पादों में भी बड़े पैमाने पर किया जाने लगा है।

    भौगोलिक दृष्टि से यह पौधा अत्यंत संवेदनशील है और इसे पनपने के लिए विशिष्ट प्रकार की मिट्टी, कम बारिश और शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है। इन्हीं कठोर प्राकृतिक शर्तों के कारण दुनिया के अन्य हिस्सों में इसकी व्यावसायिक खेती कर पाना लगभग असंभव रहा है। एशियाई और यूरोपीय बाजारों में इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले जापान इसके कुल वैश्विक निर्यात का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसके अतिरिक्त अमरीका और यूरोपीय देशों में भी इसकी खपत में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है।

    हालांकि, वैश्विक बाजार में बढ़ती मांग के बावजूद जलवायु परिवर्तन और अनिश्चित मौसम इस अनोखे पौधे की खेती के लिए गंभीर खतरे पैदा कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों के दौरान क्षेत्र में हुई कम बारिश और बढ़ते तापमान के कारण इसके कुल वार्षिक उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम का यही रुख बना रहा, तो आने वाले समय में इस सीमित प्राकृतिक संसाधन की आपूर्ति को बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

  • महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स छोड़िए एवोकाडो से पाएं निखरी और मुलायम त्वचा जानें इस्तेमाल का सही तरीका

    महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स छोड़िए एवोकाडो से पाएं निखरी और मुलायम त्वचा जानें इस्तेमाल का सही तरीका


    नई दिल्ली। आजकल त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने के लिए लोग तरह तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं लेकिन कई बार साधारण और प्राकृतिक चीजें भी स्किन केयर रूटीन में उपयोगी साबित हो सकती हैं। एवोकाडो ऐसा ही एक फल है जो अपने पोषक तत्वों के कारण डाइट के साथ साथ त्वचा की देखभाल के लिए भी लोकप्रिय है। इसमें हेल्दी फैट्स विटामिन ई विटामिन सी और कई एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो त्वचा को मॉइस्चराइज रखने और रूखेपन को कम करने में मदद कर सकते हैं।

    अगर आपकी त्वचा रूखी और बेजान नजर आती है तो एवोकाडो से बना फेस मास्क एक आसान घरेलू विकल्प हो सकता है। इसके लिए पके हुए एवोकाडो को अच्छी तरह मैश करके उसका मुलायम पेस्ट तैयार करें। इसे साफ चेहरे पर हल्के हाथों से लगाएं और करीब 10 से 15 मिनट के बाद सामान्य पानी से चेहरा धो लें। इसके बाद त्वचा पर हल्का मॉइस्चराइजर लगाया जा सकता है। एवोकाडो में मौजूद फैट्स त्वचा को नमी देने में मदद कर सकते हैं जिससे चेहरा अधिक मुलायम महसूस हो सकता है।

    एवोकाडो में मौजूद विटामिन ई को त्वचा के लिए उपयोगी एंटीऑक्सीडेंट माना जाता है। यह त्वचा को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है। वहीं विटामिन सी त्वचा की सामान्य कोलेजन निर्माण प्रक्रिया में भूमिका निभाता है। यही वजह है कि संतुलित डाइट में एवोकाडो को शामिल करना त्वचा की सेहत के लिए भी फायदेमंद हो सकता है।

    एवोकाडो का इस्तेमाल केवल फेस मास्क के तौर पर ही नहीं बल्कि स्किन केयर रूटीन में मॉइस्चराइजिंग सामग्री के रूप में भी किया जाता है। कुछ लोग एवोकाडो पल्प को एलोवेरा जेल के साथ मिलाकर फेस पैक बनाते हैं। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू नुस्खे को पूरे चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर रहता है। अगर त्वचा पर जलन खुजली या लालिमा दिखाई दे तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए।

    अगर आपकी त्वचा बहुत ऑयली या मुहांसों वाली है तो एवोकाडो आधारित हेवी मास्क का इस्तेमाल सावधानी से करें। किसी भी प्राकृतिक सामग्री का मतलब यह नहीं है कि वह हर व्यक्ति की त्वचा के लिए सुरक्षित या उपयुक्त होगी। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को नए उत्पाद या घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर हो सकता है।

    स्किन केयर के साथ खानपान का भी त्वचा की सेहत पर असर पड़ता है। एवोकाडो को डाइट में शामिल करने से शरीर को हेल्दी फैट्स फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्व मिल सकते हैं। इसे सलाद स्मूदी या टोस्ट के साथ लिया जा सकता है। हालांकि किसी एक फल को त्वचा की सभी समस्याओं का समाधान नहीं माना जा सकता। पर्याप्त पानी संतुलित आहार अच्छी नींद और नियमित स्किन केयर भी उतने ही जरूरी हैं।

    इस तरह एवोकाडो को अपनी स्किन केयर और डाइट का हिस्सा बनाकर त्वचा को नमी और पोषण देने में मदद मिल सकती है। लेकिन बेहतर परिणाम के लिए अपनी त्वचा के प्रकार को समझना और किसी भी नए घरेलू प्रयोग को सावधानी से शुरू करना जरूरी है।

  • एंटी एजिंग के लिए महंगे प्रोडक्ट्स नहीं, ये हेल्दी फूड्स बनाए रखेंगे त्वचा की चमक और खूबसूरती

    एंटी एजिंग के लिए महंगे प्रोडक्ट्स नहीं, ये हेल्दी फूड्स बनाए रखेंगे त्वचा की चमक और खूबसूरती

    नई दिल्ली । बढ़ती उम्र के साथ त्वचा पर झुर्रियां, रूखापन और चमक कम होने जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। हालांकि सही खान-पान और संतुलित डाइट के जरिए उम्र बढ़ने के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। एंटी-एजिंग डाइट में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन, मिनरल्स और जरूरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। ये तत्व शरीर में बनने वाले फ्री रेडिकल्स से लड़ने में मदद करते हैं और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में भूमिका निभाते हैं।

    फ्री रेडिकल्स शरीर में बनने वाले ऐसे हानिकारक तत्व होते हैं, जो प्रदूषण, तनाव और खराब जीवनशैली के कारण बढ़ सकते हैं। इनकी वजह से कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है और चेहरे पर उम्र के निशान दिखाई देने लगते हैं। ऐसे में डाइट में कुछ खास सुपरफूड्स को शामिल करके त्वचा की प्राकृतिक चमक और सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

    टमाटर एंटी-एजिंग डाइट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसमें लाइकोपीन नामक तत्व पाया जाता है, जो त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा गाजर और कद्दू में मौजूद बीटा-कैरोटीन शरीर में जाकर विटामिन ए में बदलता है, जो त्वचा की मरम्मत प्रक्रिया के लिए जरूरी माना जाता है।

    हरी पत्तेदार सब्जियां भी त्वचा की सेहत के लिए फायदेमंद होती हैं। पालक, मेथी, ब्रोकली और अन्य हरी सब्जियों में विटामिन सी और विटामिन ई जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। वहीं संतरा, नींबू, आंवला और कीवी जैसे खट्टे फल विटामिन सी के अच्छे स्रोत होते हैं। विटामिन सी शरीर में कोलेजन बनाने में मदद करता है, जिससे त्वचा की लचक बनी रह सकती है।

    ड्राई फ्रूट्स और सीड्स जैसे बादाम, अखरोट, अलसी और चिया सीड्स भी एंटी-एजिंग डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। इनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन ई, जिंक और अन्य पोषक तत्व होते हैं, जो त्वचा की नमी बनाए रखने और उसे स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। नियमित रूप से सीमित मात्रा में इनका सेवन त्वचा के लिए लाभकारी माना जाता है।

    ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद कर सकते हैं। इसमें मौजूद पॉलीफेनॉल त्वचा पर प्रदूषण और पर्यावरणीय प्रभावों के कारण होने वाले नुकसान को कम करने में सहायक हो सकते हैं। इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी त्वचा के लिए बेहद जरूरी है। शरीर में पानी की कमी होने पर त्वचा बेजान और रूखी दिखाई दे सकती है।

    एवोकाडो में मौजूद हेल्दी फैट्स, विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को पोषण देने में मदद करते हैं। ब्लूबेरी में पाए जाने वाले एंथोसायनिन और विटामिन सी त्वचा को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में सहायक हो सकते हैं। वहीं हल्दी में मौजूद करक्यूमिन अपने एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जानी जाती है, जो त्वचा की सूजन और दाग-धब्बों को कम करने में मदद कर सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, केवल किसी एक फूड को खाने से उम्र का असर पूरी तरह नहीं रुकता, बल्कि संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, अच्छी नींद और स्वस्थ जीवनशैली के साथ इन सुपरफूड्स को डाइट में शामिल करने से त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

  • कम खर्च में रोमांस का पूरा मजा भारत की ये 5 बजट फ्रेंडली हनीमून डेस्टिनेशन जीत लेंगी आपका दिल

    कम खर्च में रोमांस का पूरा मजा भारत की ये 5 बजट फ्रेंडली हनीमून डेस्टिनेशन जीत लेंगी आपका दिल


    नई दिल्ली। शादी के बाद हर नवविवाहित जोड़ा चाहता है कि वह कुछ खास और यादगार पल एक दूसरे के साथ बिताए। हनीमून केवल घूमने का सफर नहीं बल्कि नई जिंदगी की खूबसूरत शुरुआत का अहम हिस्सा होता है। हालांकि शादी के भारी खर्च के बाद अक्सर बजट सीमित रह जाता है और कई कपल्स अपनी पसंदीदा जगहों पर जाने का सपना टाल देते हैं। लेकिन अगर आप भी कम खर्च में शानदार हनीमून की योजना बना रहे हैं तो भारत में ऐसी कई खूबसूरत जगहें मौजूद हैं जहां प्राकृतिक सौंदर्य रोमांच और सुकून का बेहतरीन संगम मिलता है और जेब पर भी ज्यादा बोझ नहीं पड़ता।

    मनाली लंबे समय से नवविवाहित जोड़ों की पहली पसंद रही है। बर्फ से ढकी चोटियां हरियाली ठंडी हवाएं और ब्यास नदी का मनमोहक नजारा इस जगह को बेहद रोमांटिक बनाते हैं। यहां सोलंग वैली रोहतांग पास और हिडिंबा मंदिर जैसी जगहों पर घूमने के साथ एडवेंचर गतिविधियों का भी आनंद लिया जा सकता है। सबसे अच्छी बात यह है कि यहां बजट होटल और स्थानीय भोजन आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।

    नैनीताल भी कम बजट में हनीमून के लिए शानदार विकल्प माना जाता है। नैनी झील में बोटिंग मॉल रोड पर शाम की सैर और आसपास की पहाड़ियों का मनमोहक दृश्य कपल्स को बेहद पसंद आता है। शांत वातावरण और ठंडी जलवायु इस जगह को रोमांस के लिए खास बनाते हैं। यहां कम खर्च में आरामदायक होटल और स्थानीय स्वादिष्ट भोजन आसानी से मिल जाता है।

    यदि आप पहाड़ों की रानी कहलाने वाली मसूरी जाना चाहते हैं तो यह भी बेहतरीन विकल्प है। गन हिल केबल कार कंपनी गार्डन केम्प्टी फॉल और माल रोड जैसी जगहें आपकी यात्रा को यादगार बना देंगी। बादलों से घिरी वादियां और ठंडी हवा नवविवाहित जोड़ों को एक अलग ही सुकून का एहसास कराती हैं। यहां भी बजट के अनुसार ठहरने के कई विकल्प मौजूद हैं।

    अगर आप कुछ अलग अनुभव चाहते हैं तो सिक्किम की राजधानी गंगटोक का रुख कर सकते हैं। यहां की स्वच्छ वादियां त्सोमगो झील कंचनजंगा के मनमोहक दृश्य और स्थानीय संस्कृति इस यात्रा को खास बना देते हैं। गंगटोक का शांत वातावरण उन कपल्स के लिए आदर्श है जो भीड़भाड़ से दूर सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं। यहां का छह दिन का ट्रिप भी सीमित बजट में आसानी से पूरा किया जा सकता है।

    प्राकृतिक खूबसूरती के साथ अनोखे अनुभव की तलाश है तो गुजरात का रण ऑफ कच्छ भी बेहतरीन विकल्प है। दूर तक फैला सफेद रेगिस्तान सूर्यास्त का अद्भुत नजारा और रण उत्सव की सांस्कृतिक झलकियां इस जगह को बेहद खास बनाती हैं। यहां लोक संगीत पारंपरिक नृत्य और स्थानीय व्यंजन आपकी यात्रा में यादगार रंग भर देते हैं। सीमित बजट में यह एक शानदार और अलग तरह का हनीमून अनुभव दे सकता है।

    यदि समुद्र तट पसंद हैं तो लक्षद्वीप भी आकर्षक विकल्प है। नीला समुद्र साफ पानी कोरल रीफ और शांत बीच कपल्स को एक अनोखा अनुभव देते हैं। यहां स्नॉर्कलिंग स्कूबा डाइविंग और बीच वॉक जैसी गतिविधियां रोमांच को और बढ़ा देती हैं। वहीं ऊटी और माउंट आबू भी हरियाली शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता के कारण बजट हनीमून के लिए बेहतरीन जगहों में शामिल हैं।

    यात्रा की योजना बनाते समय पहले से होटल और टिकट बुक करने से खर्च काफी कम हो सकता है। ऑफ सीजन में यात्रा करने पर बेहतर होटल भी कम कीमत में मिल जाते हैं। सही प्लानिंग और सीमित बजट के साथ भारत की ये खूबसूरत जगहें आपके हनीमून को यादगार बना सकती हैं और जिंदगी की नई शुरुआत को हमेशा के लिए खास बना देंगी।

  • डार्क सर्कल हटाने के लिए अपनाएं सही स्किन केयर रूटीन जानिए किन आदतों से मिलेगा तेजी से फायदा

    डार्क सर्कल हटाने के लिए अपनाएं सही स्किन केयर रूटीन जानिए किन आदतों से मिलेगा तेजी से फायदा


    नई दिल्ली। आंखों के नीचे डार्क सर्कल आज के समय की सबसे आम ब्यूटी समस्याओं में से एक बन चुके हैं। लंबे समय तक मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल कम नींद तनाव गलत खानपान पानी की कमी और बढ़ती उम्र इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। कई लोग इन्हें छिपाने के लिए मेकअप का सहारा लेते हैं लेकिन यदि सही स्किन केयर और स्वस्थ जीवनशैली अपनाई जाए तो इनकी समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    डार्क सर्कल कम करने का सबसे पहला नियम है पर्याप्त नींद लेना। हर दिन सात से आठ घंटे की अच्छी नींद शरीर और त्वचा दोनों के लिए जरूरी मानी जाती है। जब शरीर को पूरा आराम मिलता है तो आंखों के आसपास की त्वचा भी स्वस्थ रहती है और काले घेरे धीरे धीरे कम होने लगते हैं। लगातार देर रात तक जागने की आदत डार्क सर्कल को और गहरा बना सकती है।

    शरीर में पानी की कमी भी डार्क सर्कल की एक बड़ी वजह हो सकती है। इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। पानी त्वचा को हाइड्रेट रखता है और चेहरे की ताजगी बनाए रखने में मदद करता है। इसके साथ ही मौसमी फल हरी सब्जियां और विटामिन सी आयरन तथा एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर भोजन को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। संतुलित आहार त्वचा को अंदर से पोषण देता है।

    घरेलू उपायों में ठंडी ग्रीन टी बैग्स का इस्तेमाल काफी लोकप्रिय है। इस्तेमाल के बाद ठंडे किए गए टी बैग्स को दस से पंद्रह मिनट तक आंखों पर रखने से सूजन कम हो सकती है और आंखों को ठंडक मिलती है। खीरे के पतले टुकड़े या आलू का रस भी कई लोग आंखों के आसपास लगाते हैं। इनमें मौजूद प्राकृतिक तत्व त्वचा को ताजगी देने में मदद कर सकते हैं।

    एलोवेरा जेल भी आंखों के आसपास की नाजुक त्वचा के लिए लाभकारी माना जाता है। रात में सोने से पहले थोड़ी मात्रा में एलोवेरा जेल लगाकर हल्के हाथों से मालिश करने से त्वचा को नमी मिलती है। बादाम के तेल से हल्की मसाज भी रक्त संचार को बेहतर बनाने में सहायक मानी जाती है। हालांकि किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले त्वचा पर पैच टेस्ट करना जरूरी है।

    आंखों के आसपास की त्वचा बहुत पतली और संवेदनशील होती है इसलिए उसे जोर से रगड़ने से बचना चाहिए। मेकअप हटाने के लिए हमेशा हल्के और त्वचा के अनुकूल प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें। बाहर निकलते समय सनस्क्रीन और धूप का चश्मा पहनना भी जरूरी है क्योंकि तेज धूप त्वचा में पिगमेंटेशन बढ़ा सकती है जिससे डार्क सर्कल अधिक गहरे दिखाई दे सकते हैं।

    अगर लंबे समय तक डार्क सर्कल बने रहें या इनके साथ सूजन दर्द या अन्य परेशानी भी हो तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है। कई बार यह समस्या केवल थकान नहीं बल्कि एनीमिया एलर्जी हार्मोनल बदलाव या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकती है। ऐसे मामलों में केवल घरेलू उपाय पर्याप्त नहीं होते।

    डार्क सर्कल रातोंरात खत्म नहीं होते लेकिन नियमित स्किन केयर संतुलित आहार पर्याप्त नींद तनाव से दूरी और सही घरेलू उपाय अपनाकर आंखों के नीचे की त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाया जा सकता है। धैर्य और नियमित देखभाल ही इस समस्या से राहत पाने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।

  • प्रेग्नेंसी के दौरान हाई बीपी से बचना है तो आज से शुरू करें ये 6 हेल्दी फूड्स स्वस्थ मां और स्वस्थ शिशु की मजबूत नींव

    प्रेग्नेंसी के दौरान हाई बीपी से बचना है तो आज से शुरू करें ये 6 हेल्दी फूड्स स्वस्थ मां और स्वस्थ शिशु की मजबूत नींव


    नई दिल्ली। गर्भावस्था हर महिला के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील दौर होता है। इस दौरान शरीर में कई हार्मोनल और शारीरिक बदलाव होते हैं जिनका असर स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। इन्हीं बदलावों के बीच हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तचाप एक ऐसी समस्या है जिसे हल्के में लेना मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। यदि समय रहते इसे नियंत्रित न किया जाए तो प्री-एक्लेम्पसिया समय से पहले प्रसव और अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। अच्छी बात यह है कि संतुलित और पौष्टिक आहार अपनाकर ब्लड प्रेशर को काफी हद तक नियंत्रित रखा जा सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान ऐसी चीजों का सेवन करना चाहिए जो शरीर को जरूरी पोषक तत्व देने के साथ रक्तचाप को भी संतुलित रखने में मदद करें। पोटैशियम से भरपूर फल जैसे केला संतरा और तरबूज इस दौरान बेहद लाभकारी माने जाते हैं। पोटैशियम शरीर में सोडियम के प्रभाव को कम करता है जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है। इन फलों का नियमित सेवन शरीर को ऊर्जा देने के साथ हाइड्रेट भी रखता है।

    हरी पत्तेदार सब्जियां भी गर्भवती महिलाओं की डाइट का महत्वपूर्ण हिस्सा होनी चाहिए। पालक मेथी सरसों और अन्य हरी सब्जियों में मैग्नीशियम आयरन और फोलेट जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। ये रक्त संचार को बेहतर बनाते हैं और हाई ब्लड प्रेशर के खतरे को कम करने में मदद करते हैं। साथ ही शिशु के विकास के लिए भी ये पोषक तत्व बेहद जरूरी होते हैं।

    दूध दही और पनीर जैसे कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ भी गर्भावस्था में बहुत फायदेमंद माने जाते हैं। पर्याप्त कैल्शियम शरीर की हड्डियों को मजबूत रखने के साथ रक्तचाप को संतुलित रखने में भी मदद करता है। यदि डॉक्टर की सलाह हो तो कैल्शियम सप्लीमेंट भी लिया जा सकता है लेकिन बिना सलाह के किसी भी सप्लीमेंट का सेवन नहीं करना चाहिए।

    प्रोटीन से भरपूर आहार भी इस समय बेहद जरूरी है। दालें राजमा चना सोयाबीन अंडा और यदि डॉक्टर अनुमति दें तो मछली जैसे प्रोटीन स्रोत शरीर को ताकत देने के साथ ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद करते हैं। प्रोटीन शिशु के स्वस्थ विकास के लिए भी आवश्यक पोषक तत्वों में शामिल है।

    साबुत अनाज जैसे ओट्स ब्राउन राइस जौ और मल्टीग्रेन आटा भी गर्भवती महिलाओं के लिए अच्छे विकल्प हैं। इनमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं और रक्त शर्करा तथा रक्तचाप दोनों को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। इससे शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा भी मिलती है।

    नट्स और बीज जैसे बादाम अखरोट अलसी और चिया सीड्स में हेल्दी फैट्स ओमेगा थ्री फैटी एसिड और मैग्नीशियम पाया जाता है। इनका सीमित मात्रा में सेवन हृदय को स्वस्थ रखने और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है। हालांकि इनका सेवन भी संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए।

    इसके अलावा गर्भावस्था में ज्यादा नमक तली हुई चीजें पैकेज्ड फूड और अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए। पर्याप्त पानी पीना नियमित हल्की शारीरिक गतिविधि करना और समय-समय पर डॉक्टर से ब्लड प्रेशर की जांच कराना भी बेहद जरूरी है।

    ध्यान रखें कि केवल खानपान के भरोसे हाई ब्लड प्रेशर का इलाज नहीं किया जा सकता। यदि डॉक्टर दवा लेने की सलाह दें तो उसे नियमित रूप से लेना चाहिए। सही डाइट स्वस्थ जीवनशैली और चिकित्सकीय निगरानी के साथ गर्भावस्था को सुरक्षित और स्वस्थ बनाया जा सकता है।

  • स्किन केयर में चुकंदर का जादू जानिए कैसे यह सुपरफूड दूर करेगा दाग धब्बे और बढ़ाएगा चेहरे की प्राकृतिक सुंदरता

    स्किन केयर में चुकंदर का जादू जानिए कैसे यह सुपरफूड दूर करेगा दाग धब्बे और बढ़ाएगा चेहरे की प्राकृतिक सुंदरता


    नई दिल्ली। आज के समय में हर कोई स्वस्थ और चमकदार त्वचा चाहता है। इसके लिए लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स और कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट का सहारा लेते हैं लेकिन कई बार घरेलू और प्राकृतिक उपाय अधिक प्रभावी साबित होते हैं। चुकंदर ऐसा ही एक सुपरफूड है जो केवल सेहत ही नहीं बल्कि त्वचा की सुंदरता बढ़ाने में भी बेहद लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद विटामिन सी आयरन फोलेट पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को अंदर से पोषण देकर प्राकृतिक चमक बनाए रखने में मदद करते हैं।

    चुकंदर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है। जब शरीर में रक्त का प्रवाह सही रहता है तब त्वचा तक पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचते हैं जिससे चेहरा अधिक ताजा और दमकता हुआ दिखाई देता है। नियमित रूप से चुकंदर का सेवन करने से त्वचा की प्राकृतिक रंगत में भी सुधार देखा जा सकता है।

    अगर चेहरे पर दाग धब्बे या पिगमेंटेशन की समस्या है तो चुकंदर का उपयोग फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद विटामिन सी त्वचा की रंगत को समान बनाने में मदद करता है और धीरे धीरे दाग धब्बों की तीव्रता कम हो सकती है। इसके लिए चुकंदर का रस निकालकर उसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर चेहरे पर लगाया जा सकता है। लगभग पंद्रह मिनट बाद साफ पानी से चेहरा धो लेने से त्वचा को ताजगी महसूस होती है।

    रूखी और बेजान त्वचा वाले लोगों के लिए भी चुकंदर लाभकारी माना जाता है। चुकंदर के रस में दही या एलोवेरा जेल मिलाकर फेस पैक तैयार किया जा सकता है। यह मिश्रण त्वचा को नमी देने के साथ उसे मुलायम बनाने में मदद करता है। सप्ताह में एक या दो बार इसका उपयोग करने से त्वचा अधिक स्वस्थ और कोमल महसूस हो सकती है।

    चुकंदर का एक और लोकप्रिय उपयोग होंठों के लिए किया जाता है। कई लोग प्राकृतिक गुलाबी होंठ पाने के लिए चुकंदर के रस का इस्तेमाल करते हैं। रात में सोने से पहले होंठों पर हल्का चुकंदर का रस लगाने से होंठों की रंगत में धीरे धीरे प्राकृतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। यह तरीका रासायनिक लिप प्रोडक्ट्स की तुलना में अधिक सुरक्षित माना जाता है।

    मुंहासों से परेशान लोगों के लिए भी चुकंदर उपयोगी हो सकता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। हालांकि यदि त्वचा बहुत संवेदनशील है तो किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है ताकि किसी प्रकार की एलर्जी या जलन से बचा जा सके।

    केवल बाहरी उपयोग ही नहीं बल्कि चुकंदर का नियमित सेवन भी त्वचा के लिए फायदेमंद माना जाता है। सलाद जूस या सूप के रूप में इसे अपनी डाइट में शामिल करने से शरीर को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं जो त्वचा की सेहत को बेहतर बनाने में सहायता करते हैं। पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना और अच्छी नींद लेना भी उतना ही जरूरी है क्योंकि स्वस्थ त्वचा केवल बाहरी देखभाल से नहीं बल्कि अच्छी जीवनशैली से भी मिलती है।

    ध्यान रखें कि चुकंदर कोई चमत्कारी इलाज नहीं है लेकिन संतुलित आहार और सही स्किन केयर रूटीन के साथ इसका नियमित उपयोग त्वचा की प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखने में मदद कर सकता है। यदि किसी को गंभीर त्वचा संबंधी समस्या है तो घरेलू उपायों के साथ त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे उचित विकल्प माना जाता है।

  • ADHD vs Anxiety: ध्यान नहीं लगता या हर समय रहती है चिंता, जानिए दोनों मानसिक स्थितियों में क्या है बड़ा अंतर

    ADHD vs Anxiety: ध्यान नहीं लगता या हर समय रहती है चिंता, जानिए दोनों मानसिक स्थितियों में क्या है बड़ा अंतर


    नई दिल्ली ।
    आज की तेज रफ्तार जीवनशैली में ध्यान न लगना, बार-बार बेचैनी महसूस होना, किसी काम पर फोकस न कर पाना और लगातार चिंता में रहना जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। कई लोग इन लक्षणों को सामान्य तनाव या एंग्जायटी समझ लेते हैं, जबकि कई मामलों में यह अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर यानी ADHD का संकेत भी हो सकता है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों स्थितियों के कई लक्षण एक जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन इनके कारण, पहचान और इलाज पूरी तरह अलग होते हैं। इसलिए सही समय पर सही निदान कराना बेहद जरूरी है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि ADHD एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जिसमें मस्तिष्क का वह हिस्सा प्रभावित होता है जो ध्यान, व्यवहार नियंत्रण और कार्यों की योजना बनाने से जुड़ा होता है। इसके लक्षण अक्सर बचपन में शुरू होते हैं और कई लोगों में वयस्क होने तक बने रह सकते हैं। दूसरी ओर एंग्जायटी एक मानसिक स्वास्थ्य विकार है, जिसमें व्यक्ति लगातार चिंता, डर और तनाव महसूस करता है। यही अत्यधिक चिंता उसकी एकाग्रता और दैनिक जीवन को प्रभावित करती है।

    दोनों स्थितियों में ध्यान भटकना, काम अधूरा छोड़ देना, बेचैनी महसूस होना और रोजमर्रा के कार्यों में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यही समानता लोगों को भ्रमित कर देती है। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति का ध्यान मीटिंग के दौरान बार-बार भटकता है, तो ADHD में इसका कारण मस्तिष्क की कार्यप्रणाली से जुड़ी समस्या हो सकती है, जबकि एंग्जायटी में व्यक्ति का ध्यान लगातार चल रही चिंताओं और नकारात्मक विचारों के कारण भटकता है।

    ADHD के प्रमुख लक्षणों में बार-बार चीजें भूल जाना, एक जगह लंबे समय तक बैठने में कठिनाई, हाथ-पैर लगातार हिलाना, बिना सोचे तुरंत प्रतिक्रिया देना, दूसरों की बात बीच में काट देना और समय प्रबंधन में परेशानी शामिल हो सकती है। इसके विपरीत एंग्जायटी डिसऑर्डर में हर समय किसी अनहोनी का डर बना रहना, दिल की धड़कन तेज होना, पसीना आना, सांस लेने में कठिनाई, मांसपेशियों में तनाव और अत्यधिक चिंता प्रमुख संकेत माने जाते हैं।

    मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ADHD और एंग्जायटी में सबसे बड़ा अंतर उनके मूल कारण में होता है। ADHD में ध्यान स्वाभाविक रूप से भटकता है और व्यक्ति आवेगपूर्ण व्यवहार कर सकता है, जबकि एंग्जायटी में चिंता और भय के कारण निर्णय लेने में देरी होती है तथा व्यक्ति हर स्थिति को लेकर जरूरत से ज्यादा सोचता है। इसके अलावा ADHD की शुरुआत सामान्यतः बचपन में होती है, जबकि एंग्जायटी किसी भी उम्र में विकसित हो सकती है।

    विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि कई लोगों में ADHD और एंग्जायटी दोनों एक साथ मौजूद हो सकते हैं। ऐसी स्थिति को कॉमॉर्बिडिटी कहा जाता है। इसलिए केवल इंटरनेट पर लक्षण पढ़कर स्वयं बीमारी का अनुमान लगाना उचित नहीं है। सही पहचान के लिए विस्तृत मेडिकल हिस्ट्री, व्यवहार का मूल्यांकन और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ द्वारा जांच आवश्यक होती है।

    डॉक्टरों का कहना है कि यदि ध्यान की कमी, अत्यधिक चिंता, बेचैनी या आवेगपूर्ण व्यवहार लंबे समय तक बना रहे और पढ़ाई, नौकरी या पारिवारिक जीवन को प्रभावित करने लगे, तो बिना देर किए मनोचिकित्सक या क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। समय पर सही निदान और उचित उपचार से दोनों स्थितियों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है और व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है।

  • पहाड़ों की खूबसूरती का ट्रिप अब और आसान, IRCTC लाया गंगटोक-कालिम्पोंग-दार्जिलिंग का किफायती पैकेज

    पहाड़ों की खूबसूरती का ट्रिप अब और आसान, IRCTC लाया गंगटोक-कालिम्पोंग-दार्जिलिंग का किफायती पैकेज


    नई दिल्ली। अगर आप इस साल पहाड़ों की खूबसूरती के बीच सुकून भरी छुट्टियां बिताने का सपना देख रहे हैं तो इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन यानी IRCTC आपके लिए शानदार अवसर लेकर आया है। कंपनी का हिमालयन ट्रैंक्विलिटी रेल टूर पैकेज कम बजट में पूर्वोत्तर भारत के तीन बेहद खूबसूरत हिल स्टेशनों गंगटोक कालिम्पोंग और दार्जिलिंग की यादगार यात्रा कराने का मौका दे रहा है। इस पैकेज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यात्रियों को ट्रेन टिकट होटल स्थानीय परिवहन और कई अन्य सुविधाएं एक ही बुकिंग में मिल जाती हैं जिससे पूरी यात्रा आसान और आरामदायक बन जाती है।

    यह टूर हर रविवार को हावड़ा रेलवे स्टेशन से शुरू होता है। यात्री शाम को ट्रेन से रवाना होते हैं और अगले दिन सुबह न्यू जलपाईगुड़ी पहुंचते हैं जहां से सड़क मार्ग से आगे की यात्रा शुरू होती है। पूरे कार्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया है कि पर्यटक बिना किसी भागदौड़ के हर स्थान का भरपूर आनंद ले सकें। वापसी शनिवार को होती है और अगले दिन यात्री हावड़ा पहुंच जाते हैं।

    यात्रा का पहला पड़ाव कालिम्पोंग होता है जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता शांत वातावरण रंग बिरंगे फूलों की नर्सरी और बौद्ध मठों के लिए प्रसिद्ध है। यहां का शांत माहौल शहर की भीड़भाड़ से दूर कुछ यादगार पल बिताने का अवसर देता है। इसके बाद पर्यटक सिक्किम की राजधानी गंगटोक पहुंचते हैं जहां हिमालय की बर्फीली चोटियां आकर्षण का केंद्र रहती हैं। एमजी मार्ग बौद्ध मठ और शानदार व्यू प्वाइंट इस शहर की पहचान हैं और यहां का साफ सुथरा वातावरण हर पर्यटक को प्रभावित करता है।

    यात्रा का अंतिम पड़ाव दार्जिलिंग होता है जिसे पहाड़ों की रानी भी कहा जाता है। विश्व प्रसिद्ध चाय बागान कंचनजंघा का अद्भुत दृश्य दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे और ब्रिटिश काल की विरासत इस शहर को खास बनाती है। यहां की ठंडी हवाएं और प्राकृतिक नजारे हर पर्यटक के सफर को यादगार बना देते हैं।

    इस पैकेज की शुरुआती कीमत लीन सीजन में ट्रिपल शेयरिंग के आधार पर 29150 रुपए प्रति व्यक्ति रखी गई है जबकि पीक सीजन में यही कीमत 31450 रुपए प्रति व्यक्ति होगी। डबल और सिंगल शेयरिंग के लिए अलग अलग किराया निर्धारित किया गया है। बच्चों के लिए भी अलग शुल्क तय किया गया है ताकि परिवार अपनी सुविधा के अनुसार विकल्प चुन सके।

    पैकेज में यात्रियों को थर्ड एसी श्रेणी का कन्फर्म ट्रेन टिकट होटल में ठहरने की सुविधा स्थानीय पर्यटन स्थलों की यात्रा के लिए एसी वाहन प्रतिदिन नाश्ता और डिनर ट्रैवल इंश्योरेंस तथा लागू करों का लाभ मिलेगा। इससे यात्रियों को बार बार अलग अलग बुकिंग करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और पूरा सफर अधिक सुविधाजनक रहेगा।

    हालांकि दोपहर का भोजन ट्रेन में मिलने वाला भोजन एंट्री टिकट बोटिंग पैराग्लाइडिंग राफ्टिंग कैमरा शुल्क लॉन्ड्री मिनरल वाटर और अन्य व्यक्तिगत खर्च पैकेज में शामिल नहीं हैं। यदि मौसम खराब होने भूस्खलन सड़क बंद होने या किसी अन्य अप्रत्याशित कारण से अतिरिक्त खर्च आता है तो उसका भुगतान यात्रियों को स्वयं करना होगा।

    अगर आप बिना किसी योजना की परेशानी के हिमालय की खूबसूरत वादियों में यादगार छुट्टियां बिताना चाहते हैं तो IRCTC का यह टूर पैकेज बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। परिवार दोस्तों या जीवनसाथी के साथ प्रकृति की गोद में बिताए गए ये पल लंबे समय तक आपकी यादों का हिस्सा बने रहेंगे।

  • हेयर केयर में एलोवेरा का जादू डैंड्रफ से छुटकारा और बालों में आएगी शानदार चमक

    हेयर केयर में एलोवेरा का जादू डैंड्रफ से छुटकारा और बालों में आएगी शानदार चमक


    नई दिल्ली। स्वस्थ घने और चमकदार बाल हर किसी की पहली पसंद होते हैं। बदलती जीवनशैली बढ़ता प्रदूषण खराब खानपान और तनाव का सबसे ज्यादा असर बालों पर दिखाई देता है। बाल झड़ना रूसी होना दोमुंहे बाल और समय से पहले सफेद होने जैसी समस्याएं आज आम हो चुकी हैं। ऐसे में अगर आप प्राकृतिक तरीके से अपने बालों की देखभाल करना चाहते हैं तो एलोवेरा एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। सदियों से आयुर्वेद में एलोवेरा का उपयोग त्वचा और बालों की देखभाल के लिए किया जाता रहा है। इसमें मौजूद विटामिन ए विटामिन सी विटामिन ई विटामिन बी 12 फोलिक एसिड और कई प्रकार के एंजाइम बालों को पोषण देने में मदद करते हैं।

    एलोवेरा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह स्कैल्प को गहराई से मॉइस्चराइज करता है। सूखी और बेजान स्कैल्प अक्सर रूसी और खुजली का कारण बनती है। एलोवेरा जेल लगाने से स्कैल्प को ठंडक मिलती है और उसकी प्राकृतिक नमी बनी रहती है। इससे बालों की जड़ें मजबूत होती हैं और बाल टूटने की समस्या कम हो सकती है।

    अगर बाल तेजी से झड़ रहे हैं तो एलोवेरा जेल का नियमित इस्तेमाल फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद प्रोटियोलिटिक एंजाइम स्कैल्प की मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद करते हैं जिससे नए बालों की ग्रोथ के लिए बेहतर वातावरण बनता है। स्वस्थ स्कैल्प का सीधा असर बालों की मजबूती और लंबाई पर दिखाई देता है।

    एलोवेरा बालों में प्राकृतिक चमक लाने का भी काम करता है। अगर बाल लगातार ड्राई और बेजान दिखते हैं तो सप्ताह में दो से तीन बार ताजा एलोवेरा जेल बालों और स्कैल्प पर लगाएं। लगभग तीस मिनट बाद किसी हल्के शैंपू से बाल धो लें। इससे बाल मुलायम चमकदार और आसानी से मैनेज होने लगते हैं।

    एलोवेरा का हेयर मास्क भी बेहद असरदार माना जाता है। इसके लिए एलोवेरा जेल में नारियल तेल या दही मिलाकर पेस्ट तैयार करें और इसे बालों की जड़ों से लेकर सिरों तक लगाएं। कुछ देर बाद बाल धो लें। यह मिश्रण बालों को गहराई से पोषण देता है और रूखेपन को कम करने में मदद करता है। अगर डैंड्रफ की समस्या है तो एलोवेरा में थोड़ा सा नींबू का रस मिलाकर भी लगाया जा सकता है लेकिन संवेदनशील स्कैल्प वाले लोग पहले पैच टेस्ट जरूर करें।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बाहरी देखभाल से ही बाल स्वस्थ नहीं बनते। संतुलित आहार पर्याप्त पानी अच्छी नींद और तनाव से दूरी भी बालों की सेहत के लिए जरूरी है। प्रोटीन आयरन बायोटिन और विटामिन से भरपूर भोजन बालों की ग्रोथ को बेहतर बनाने में मदद करता है। एलोवेरा इन सभी प्रयासों को और प्रभावी बना सकता है।

    अगर आपकी स्कैल्प पर किसी तरह का संक्रमण एलर्जी या गंभीर समस्या है तो एलोवेरा का इस्तेमाल करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा। सही तरीके से और नियमित उपयोग करने पर एलोवेरा बालों को प्राकृतिक रूप से मजबूत घना मुलायम और चमकदार बनाने में मदद कर सकता है। यही वजह है कि आज भी एलोवेरा को प्राकृतिक हेयर केयर का सबसे भरोसेमंद उपाय माना जाता है।