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  • दिवाली पर घर में बनाएं बाजार जैसा कुरकुरा पोहा चिवड़ा, स्वाद बढ़ाने और लंबे समय तक क्रिस्पी रखने के आसान तरीके

    दिवाली पर घर में बनाएं बाजार जैसा कुरकुरा पोहा चिवड़ा, स्वाद बढ़ाने और लंबे समय तक क्रिस्पी रखने के आसान तरीके


    नई दिल्ली ।
    करवाचौथ का त्योहार महिलाओं के लिए सजने-संवरने और खास दिखने का अवसर होता है। इस दिन कपड़ों से लेकर गहनों और मेकअप तक हर चीज का चुनाव सोच-समझकर किया जाता है। अगर इस बार आप सामान्य मेकअप से हटकर कुछ पारंपरिक और शाही अंदाज अपनाना चाहती हैं, तो राजस्थानी राजपूती ब्राइडल लुक एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इस लुक में गहरी आंखें, सुनहरी चमक, निखरा हुआ बेस और पारंपरिक आभूषण खास आकर्षण पैदा करते हैं। सही तरीके से मेकअप करने पर यह अंदाज करवाचौथ की शाम को और भी खास बना सकता है। इसके लिए त्वचा की तैयारी से लेकर अंतिम फिनिशिंग तक कुछ जरूरी चरणों का ध्यान रखना चाहिए।

    Beautyलंबे समय तक टिकने वाले मेकअप के लिए त्वचा की तैयारी बेहद जरूरी है। सबसे पहले चेहरे को अच्छी तरह साफ करें, ताकि धूल, अतिरिक्त तेल और गंदगी हट जाए। इसके बाद त्वचा के अनुरूप टोनर लगाएं और ऐसा मॉइस्चराइजर इस्तेमाल करें, जो पर्याप्त नमी दे। इससे त्वचा रूखी दिखने और मेकअप के दौरान दरारें पड़ने की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है। होंठों पर भी लिप बाम लगाएं। त्वचा पर लगाए गए उत्पादों को अवशोषित होने के लिए लगभग पांच मिनट का समय दें। इसके बाद मेकअप शुरू करें।

    आंखों को दें राजपूती अंदाज
    राजपूती ब्राइडल लुक में आंखों का मेकअप सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है। सबसे पहले पलकों पर त्वचा के रंग से थोड़ा हल्का कंसीलर लगाकर उसे हल्के पाउडर से सेट करें। अब गहरे भूरे या काले आईशैडो की मदद से क्रीज को उभारें। कट क्रीज को स्पष्ट दिखाने के लिए फ्लैट ब्रश और कंसीलर का इस्तेमाल किया जा सकता है।

    इसके बाद आंखों के बाहरी कोने पर लाल आईशैडो लगाएं और मरून रंग की मदद से उसे स्मोकी प्रभाव दें। पलकों के बीच वाले हिस्से पर गोल्ड ग्लिटर लगाएं, जबकि आंखों के अंदरूनी कोनों पर हल्का शिमर इस्तेमाल करें। आखिर में विंग्ड आईलाइनर लगाकर आंखों को आकर्षक आकार दें। लाल, मरून और सुनहरे रंगों का यह मेल पारंपरिक दुल्हन जैसा शाही प्रभाव पैदा करने में मदद करता है।

    बेस मेकअप से पाएं निखरा चेहरा
    आंखों का मेकअप पूरा होने के बाद चेहरे के बेस पर ध्यान दें। आंखों के नीचे मौजूद काले घेरों या दाग-धब्बों को छिपाने के लिए जरूरत के अनुसार कंसीलर लगाएं। इसके बाद अपनी त्वचा के रंग से मेल खाने वाला लिक्विड फाउंडेशन चुनें। इसे हल्के नम मेकअप स्पॉन्ज की मदद से अच्छी तरह ब्लेंड करें, ताकि चेहरे पर एकसमान परत बने।

    चेहरे को उभरा हुआ आकार देने के लिए क्रीम आधारित या लिक्विड कॉन्टूर का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे गालों, जबड़े की रेखा और नाक के आसपास लगाकर अच्छी तरह ब्लेंड करें। गालों पर गहरे गुलाबी रंग का हल्का ब्लश लगाएं। अंत में ट्रांसलूसेंट लूज पाउडर की पतली परत से बेस को सेट करें। इससे मेकअप को अधिक व्यवस्थित और लंबे समय तक टिकने वाला बनाने में मदद मिल सकती है।

    फाइनल टच से पूरा करें ब्राइडल लुक
    मेकअप को अंतिम रूप देने के लिए चेहरे के उभरे हुए हिस्सों पर हाइलाइटर लगाएं। जरूरत महसूस होने पर ब्लश और कॉन्टूर की हल्की अतिरिक्त परत भी लगाई जा सकती है। आइब्रो को भरा हुआ दिखाने के लिए भूरे या काले रंग की आइब्रो पेंसिल का इस्तेमाल करें। इसके बाद ब्रश से बालों को व्यवस्थित करें, ताकि भौंहें प्राकृतिक दिखें।

    आंखों की वॉटरलाइन पर जेल आधारित काला लाइनर लगाएं और उसे आईशैडो के साथ हल्के से ब्लेंड करें। इसके बाद फॉल्स आईलैशेज और मस्कारा लगाएं। होंठों के लिए मध्यम गुलाबी रंग की लिपस्टिक चुनी जा सकती है। अंत में मेकअप फिक्सिंग स्प्रे का इस्तेमाल करें, ताकि मेकअप अधिक समय तक बना रहे।

    राजपूती अंदाज को दें पारंपरिक पहचान
    इस लुक को पूरा करने के लिए राजस्थानी आभूषण और पारंपरिक परिधान चुनें। पोशाक के रंग के अनुसार आईशैडो और लिपस्टिक का चयन करें, ताकि सभी रंग एक-दूसरे के साथ मेल खाएं। पारंपरिक गहनों, सलीके से किए गए मेकअप और शाही रंगों का संतुलन राजपूती ब्राइडल लुक को खास बनाता है। करवाचौथ पर इस अंदाज को अपनाकर आप पारंपरिक सुंदरता और आधुनिक मेकअप का आकर्षक मेल तैयार कर सकती हैं।

  • रात में नींद नहीं आती तो अपनाएं ये आसान उपाय, तनाव से लेकर मोबाइल इस्तेमाल तक जानें प्रमुख कारण

    रात में नींद नहीं आती तो अपनाएं ये आसान उपाय, तनाव से लेकर मोबाइल इस्तेमाल तक जानें प्रमुख कारण

    नई दिल्ली । रात में बिस्तर पर जाने के बाद भी देर तक नींद न आना, बार-बार आंख खुलना या सुबह उठने के बाद थकान महसूस होना कई लोगों की परेशानी है। कभी-कभी काम का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां या दिनचर्या में बदलाव इसकी वजह बन सकते हैं। वहीं, कुछ लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण भी पर्याप्त नींद नहीं मिल पाती। नींद पूरी नहीं होने का असर व्यक्ति के मूड, एकाग्रता और रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ सकता है। ऐसे में नींद की परेशानी के कारणों को समझना और सोने की आदतों में सुधार करना जरूरी है।

    नींद न आने की एक प्रमुख वजह तनाव और जरूरत से ज्यादा सोचना हो सकती है। कार्यालय के काम, आर्थिक चिंताएं, पारिवारिक जिम्मेदारियां या भविष्य को लेकर बेचैनी होने पर दिमाग शांत करना मुश्किल हो जाता है। शरीर आराम करना चाहता है, लेकिन मन में विचार चलते रहते हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को बिस्तर पर जाने के बाद भी नींद आने में समय लग सकता है।

    सोने और जागने का समय बार-बार बदलना भी नींद की प्राकृतिक लय को प्रभावित करता है। देर रात तक जागना, सुबह अलग-अलग समय पर उठना या दिन में लंबे समय तक सोना रात की नींद में बाधा बन सकता है। शरीर को नियमित समय पर सोने और जागने की आदत डालने से इस परेशानी को कम करने में मदद मिल सकती है।

    सोने से ठीक पहले मोबाइल चलाना, वीडियो देखना या लैपटॉप पर काम करना भी नींद को प्रभावित कर सकता है। स्क्रीन की रोशनी और लगातार मिलने वाली सूचनाएं दिमाग को सक्रिय बनाए रख सकती हैं। इससे शरीर को आराम की स्थिति में आने में परेशानी होती है। इसलिए सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल कम करना बेहतर माना जाता है।

    खानपान की आदतों पर ध्यान देना भी जरूरी है। शाम या रात में चाय-कॉफी पीने से कुछ लोगों की नींद प्रभावित हो सकती है, क्योंकि इनमें मौजूद कैफीन सतर्कता बढ़ाता है। इसके अलावा देर रात भारी भोजन करने से पेट में असहजता या एसिडिटी हो सकती है, जिससे सोने में परेशानी आती है। कैफीन के प्रति संवेदनशील लोगों को दोपहर के बाद इसका सेवन सीमित करने से लाभ मिल सकता है।

    कुछ मामलों में दर्द, एसिडिटी, दवाओं के दुष्प्रभाव या सोते समय सांस लेने में परेशानी जैसी स्वास्थ्य समस्याएं भी नींद बिगाड़ सकती हैं। तेज खर्राटों के साथ सांस रुकने जैसी समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि नींद की परेशानी बार-बार हो रही है, तो इसके पीछे की वजह जानने के लिए चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    बेहतर नींद के लिए सबसे पहले सोने और जागने का समय तय करें। कोशिश करें कि छुट्टी वाले दिन भी इस समय में बहुत अधिक बदलाव न हो। नियमित दिनचर्या शरीर की प्राकृतिक नींद-जागने की लय को बनाए रखने में मदद करती है। सोने से करीब 30 से 60 मिनट पहले मोबाइल और अन्य स्क्रीन से दूरी बनाएं। इस दौरान हल्की किताब पढ़ना, धीमा संगीत सुनना या शांत वातावरण में बैठना उपयोगी हो सकता है।

    यदि अगले दिन के कामों को लेकर चिंता बनी रहती है, तो सोने से पहले जरूरी कामों की सूची कागज पर लिख लें। कुछ मिनट धीरे-धीरे सांस लेने का अभ्यास भी मन को शांत करने में मदद कर सकता है। दिन के समय नियमित टहलना, हल्का व्यायाम करना और सुबह प्राकृतिक रोशनी में समय बिताना नींद की गुणवत्ता के लिए उपयोगी आदतें हैं। हालांकि, सोने के बिल्कुल पहले बहुत तेज व्यायाम करने से कुछ लोगों को परेशानी हो सकती है।

    दिन में झपकी लेने की आदत है, तो उसे छोटा रखें और देर शाम सोने से बचें। यदि बिस्तर पर काफी देर तक लेटने के बाद भी नींद नहीं आती, तो खुद पर सोने का दबाव न डालें। उठकर कुछ समय शांत गतिविधि करें और नींद महसूस होने पर वापस बिस्तर पर जाएं। बार-बार घड़ी देखने से बचना भी मददगार हो सकता है।

    अगर नींद की समस्या लगातार बनी रहती है, दिनभर थकान रहती है या कामकाज और मानसिक स्थिति प्रभावित होने लगती है, तो डॉक्टर से सलाह लें। लगातार परेशानी को केवल तनाव मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सही कारण की पहचान और समय पर मदद से नींद में सुधार की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।

  • फेस्टिव सीजन में साड़ी और लहंगे के साथ बनाएं 5 खूबसूरत बन हेयर स्टाइल, घर पर मिनटों में पाएं पार्लर जैसा लुक

    फेस्टिव सीजन में साड़ी और लहंगे के साथ बनाएं 5 खूबसूरत बन हेयर स्टाइल, घर पर मिनटों में पाएं पार्लर जैसा लुक

    नई दिल्ली । त्योहारों के मौसम में खूबसूरत दिखने के लिए कपड़ों और मेकअप के साथ हेयर स्टाइल पर ध्यान देना भी जरूरी होता है। खासकर साड़ी, सूट, अनारकली और लहंगे के साथ सही हेयर स्टाइल पूरे लुक को आकर्षक बना सकता है। अगर आप हर बार पार्लर जाने के बजाय घर पर ही बालों को स्टाइल करना चाहती हैं, तो पांच आसान बन हेयर स्टाइल आजमा सकती हैं। हेयर स्टाइलिंग क्रिएटर श्रेया अरोड़ा ने ऐसे पांच तरीके बताए हैं, जिन्हें थोड़ी प्रैक्टिस के साथ खुद तैयार किया जा सकता है। इन स्टाइल्स को दिवाली, भाई दूज, ऑफिस पार्टी और शादी के कार्यक्रमों में भी अपनाया जा सकता है।

    ब्रेडेड बन हेयर स्टाइल
    ब्रेडेड बन उन महिलाओं के लिए अच्छा विकल्प है, जो साधारण लेकिन खूबसूरत हेयर स्टाइल पसंद करती हैं। इसे बनाने के लिए सबसे पहले बालों को अच्छी तरह सुलझाकर पोनीटेल बना लें। अब पोनीटेल के बालों को तीन बराबर हिस्सों में बांटकर सामान्य चोटी गूंथें। इसके बाद चोटी को पोनीटेल के आधार के चारों ओर गोल घुमाते हुए लपेट दें। बॉबी पिन की मदद से इसे अच्छी तरह सुरक्षित कर लें, ताकि बन अपनी जगह पर बना रहे। सिल्क साड़ी या एथनिक सूट के साथ यह स्टाइल आकर्षक लगता है। इसे और पारंपरिक रूप देने के लिए बन के एक तरफ छोटा गजरा भी लगाया जा सकता है।

    डोनट बन से पाएं साफ-सुथरा लुक
    अगर बाल पतले हैं या उनमें घनापन कम दिखाई देता है, तो डोनट बन आजमाया जा सकता है। इसके लिए गोल आकार की हेयर डोनट एक्सेसरी का इस्तेमाल किया जाता है, जो ब्यूटी शॉप पर मिल सकती है। सबसे पहले पोनीटेल बनाएं और उसके आधार पर डोनट लगाएं। अब बालों को इसके चारों ओर फैलाकर पूरी एक्सेसरी को ढक दें। ऊपर से पतला रबर बैंड लगाकर बालों को जगह पर रखें। बाहर बची हुई लटों को बन के चारों ओर लपेटकर पिन से फिक्स कर दें। इससे जूड़े को गोल और व्यवस्थित आकार मिलता है। बनारसी साड़ी या कढ़ाई वाले सूट के साथ यह स्टाइल अच्छा लग सकता है।

    ट्विस्टेड बन हेयर स्टाइल
    जिन्हें चोटी गूंथने में परेशानी होती है, वे ट्विस्टेड बन बना सकती हैं। इसके लिए बालों को सुलझाकर पोनीटेल बनाएं और उसे दो हिस्सों में बांट लें। दोनों हिस्सों को अलग-अलग घुमाकर ट्विस्ट करें। इसके बाद दोनों लटों को पोनीटेल के आधार के चारों ओर लपेटकर बॉबी पिन से सुरक्षित कर दें। इस तरीके से बन में घुमावदार परतें बनती हैं, जो साधारण जूड़े को भी अलग अंदाज देती हैं। दिवाली पार्टी में शरारा या इंडो-वेस्टर्न कपड़ों के साथ यह हेयर स्टाइल अपनाया जा सकता है। सजावट के लिए छोटे पर्ल पिन भी इस्तेमाल कर सकती हैं।

    रैप्ड बन से बनाएं पार्टी लुक
    रैप्ड बन में बालों की अलग-अलग लटों को लपेटकर जूड़े को आकर्षक आकार दिया जाता है। इसे बनाने के लिए पहले पोनीटेल तैयार करें। फिर बालों की छोटी-छोटी लटें लेकर उन्हें हल्का ट्विस्ट करते हुए पोनीटेल के चारों ओर लपेटें। हर लट को बॉबी पिन से फिक्स करना जरूरी है, ताकि बन खुलने न पाए। इसी तरह बाकी बालों को भी लपेटकर जूड़े का आकार पूरा करें। इस स्टाइल में बालों की अलग-अलग परतें दिखाई देती हैं। लंबे बालों में यह विशेष रूप से अच्छा लग सकता है। फेस्टिव कुर्ता सेट, अनारकली या लहंगे के साथ इसे ट्राई किया जा सकता है।

    क्लासिक चोटी वाला गोल बन
    पारंपरिक परिधानों के साथ चोटी से बना गोल बन भी अच्छा विकल्प है। इसके लिए बालों को पीछे इकट्ठा करके पोनीटेल बनाएं और पूरी पोनीटेल की चोटी गूंथ लें। अब चोटी को गोल आकार में पोनीटेल के आधार के चारों ओर लपेटें। आखिरी सिरे को बन के भीतर छिपाकर हेयर पिन से सुरक्षित कर दें। इस स्टाइल में चोटी की बनावट जूड़े पर साफ नजर आती है। कांजीवरम या बनारसी साड़ी और पारंपरिक सिल्क सूट के साथ इसे बनाया जा सकता है। बन के चारों ओर मोगरे का गजरा लगाने से पारंपरिक लुक और निखर सकता है।

    बन बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान
    हेयर स्टाइल बनाने से पहले बालों को अच्छी तरह सुलझाना जरूरी है। बहुत ज्यादा तेल लगे बालों में बन सपाट दिखाई दे सकता है। पोनीटेल को जरूरत से ज्यादा कसकर बांधने से सिर की त्वचा पर खिंचाव और सिरदर्द हो सकता है। अगर बाल बहुत मुलायम हैं और बार-बार फिसलते हैं, तो हल्का टेक्सचराइजिंग स्प्रे इस्तेमाल किया जा सकता है। बॉबी पिन सही तरीके से लगाएं और जरूरत पड़ने पर हल्का हेयर स्प्रे इस्तेमाल करें, ताकि हेयर स्टाइल लंबे समय तक बना रहे। इन आसान तरीकों से घर पर ही त्योहारों और खास अवसरों के लिए सुंदर बन हेयर स्टाइल तैयार किए जा सकते हैं।

  • सर्दियों में AC कवर करने से पहले जरूर करें ये 3 काम, वरना हजारों रुपये की मरम्मत पड़ सकती है भारी

    सर्दियों में AC कवर करने से पहले जरूर करें ये 3 काम, वरना हजारों रुपये की मरम्मत पड़ सकती है भारी

    नई दिल्ली । सर्दियों का मौसम शुरू होते ही घरों में एयर कंडीशनर का इस्तेमाल कम हो जाता है। कई लोग एसी की इनडोर यूनिट को कवर करके रख देते हैं, लेकिन बाहर लगी आउटडोर यूनिट की सुरक्षा पर ध्यान नहीं देते। लंबे समय तक बंद रहने के दौरान आउटडोर यूनिट पर धूल, धुआं, स्मॉग और सुबह की ओस का असर पड़ सकता है। इससे उपकरण के अलग-अलग हिस्सों को नुकसान पहुंचने और अगले गर्मी के मौसम में मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च होने की आशंका रहती है। ऐसे में सर्दियों के दौरान एसी को सुरक्षित रखने के लिए सही तरीके से कवर करना जरूरी है।

    एसी की आउटडोर यूनिट आमतौर पर बालकनी, छत या घर के बाहर ऐसी जगह लगी होती है, जहां वह मौसम के सीधे संपर्क में रहती है। इस्तेमाल बंद होने के बाद इस यूनिट में जमा धूल और नमी परेशानी पैदा कर सकती है। नमी के साथ गंदगी लंबे समय तक बनी रहने से कॉपर पाइप, पंखे के ब्लेड और बाहरी बॉडी पर जंग लगने का खतरा बढ़ सकता है। कुछ परिस्थितियों में पानी या नमी विद्युत उपकरणों तक पहुंचने से भी खराबी आ सकती है।

    एसी की मरम्मत का खर्च खराबी के प्रकार पर निर्भर करता है। एक सामान्य 1.5 टन स्प्लिट एसी की कॉइल की सफाई और डीस्केलिंग पर लगभग 1,500 से 3,000 रुपये खर्च हो सकते हैं। आउटडोर फैन की मोटर बदलवाने में 1,800 से 4,500 रुपये तक लग सकते हैं। वहीं, इन्वर्टर एसी का पीसीबी खराब होने पर मरम्मत या बदलाव का खर्च 3,500 से 8,500 रुपये तक पहुंच सकता है।

    यदि कंडेंसर कॉइल बदलने की जरूरत पड़े, तो लगभग 4,500 से 9,000 रुपये खर्च हो सकते हैं। कंप्रेसर खराब होने की स्थिति में यह खर्च 10,000 से 22,000 रुपये तक जा सकता है। हालांकि, वास्तविक कीमत एसी के ब्रांड, मॉडल, खराबी और सर्विस की दरों के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए मौसम बदलने पर उपकरण की देखभाल करना उपयोगी साबित हो सकता है।

    सर्दियों में एसी कवर करने से पहले सबसे जरूरी है कि केवल इनडोर यूनिट पर ध्यान न दिया जाए। बाहर लगी आउटडोर यूनिट को भी सुरक्षित रखना चाहिए। इसके लिए एसी की क्षमता और आकार के अनुरूप कवर चुनें। छोटा या ढीला कवर ठीक से फिट नहीं होगा, जिससे धूल और गंदगी अंदर पहुंच सकती है। कवर ऐसा होना चाहिए जिसका कपड़ा पानी को रोकने में सक्षम हो और जिसे इलास्टिक या बांधने वाली डोरी से सुरक्षित किया जा सके।

    दूसरा जरूरी काम यूनिट को पूरी तरह सुखाना है। कवर लगाने से पहले एसी की बाहरी सतह को सूखे कपड़े से साफ कर लें। यदि यूनिट पर नमी मौजूद है, तो उसे सूखने का पर्याप्त समय दें। संभव हो तो सर्दियों में लंबे समय तक एसी बंद रखने से पहले उसकी सर्विस करा लें। सर्विस के बाद यूनिट को अच्छी तरह सूखने देना चाहिए, ताकि कवर के भीतर नमी फंसी न रहे।

    तीसरी सावधानी बिजली की आपूर्ति से जुड़ी है। कवर लगाने के बाद एसी का स्विच बंद करके उसका प्लग निकाल दें, यदि वह प्लग के जरिए जुड़ा है। कवर को इस तरह लगाएं कि नीचे की ओर हवा की थोड़ी आवाजाही बनी रहे। इससे यूनिट के भीतर नमी जमा होने की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है। कवर को पूरी तरह वायुरुद्ध तरीके से बंद करने से बचना चाहिए।

    बाजार में सामान्य एसी कवर लगभग 250 रुपये से मिल सकते हैं, जबकि कुछ ब्रांडेड विकल्पों की कीमत करीब 325 रुपये बताई गई है। कवर खरीदते समय केवल कीमत के बजाय उसकी फिटिंग, कपड़े की गुणवत्ता और पानी से बचाव की क्षमता पर ध्यान देना चाहिए। सही आकार का कवर और नियमित देखभाल एसी को सर्दियों के दौरान बेहतर स्थिति में रखने में मदद कर सकते हैं।

  • नवरात्रि व्रत में खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करें ये 6 मसाले, जानें किन 5 मसालों से परहेज करना चाहिए

    नवरात्रि व्रत में खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करें ये 6 मसाले, जानें किन 5 मसालों से परहेज करना चाहिए

    नई दिल्ली । नवरात्रि के दौरान व्रत रखने वाले लोग फलाहार के साथ साबूदाने की खिचड़ी, आलू के पकवान और कुट्टू से बनी चीजें खाते हैं। व्रत के भोजन को स्वादिष्ट बनाने के लिए मसालों का चुनाव भी अहम होता है। रोजाना इस्तेमाल होने वाले कई मसालों की जगह व्रत में कुछ खास विकल्प अपनाए जाते हैं। जीरा, काली मिर्च और सेंधा नमक का इस्तेमाल कई घरों में किया जाता है, जबकि कुछ मसालों से परहेज रखा जाता है। हालांकि, व्रत में किन चीजों का इस्तेमाल करना है, यह परिवार की परंपरा और अपने व्रत के नियमों पर निर्भर करता है।

    व्रत के खाने में जीरे का इस्तेमाल कई घरों में किया जाता है। इसकी सौंधी खुशबू साबूदाने की खिचड़ी और उबले आलू जैसी साधारण डिश का स्वाद बढ़ा सकती है। भुने हुए जीरे का पाउडर दही या रायते में मिलाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी तरह, काली मिर्च को तीखापन लाने के विकल्प के तौर पर चुना जाता है। जिन लोग व्रत में लाल मिर्च पाउडर नहीं खाते, वे कुटी हुई काली मिर्च से आलू, खीरे के रायते और फ्रूट चाट का स्वाद बढ़ा सकते हैं।

    सेंधा नमक भी व्रत के भोजन में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख विकल्प है। कई परिवार नवरात्रि के दौरान सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, नमक के इस्तेमाल को लेकर अपने व्रत के नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। मीठे पकवानों में हरी इलायची का इस्तेमाल किया जा सकता है। खीर, दूध से बनी मिठाइयों और मखाने के मीठे पकवानों में इसकी सुगंध स्वाद को बेहतर बनाती है। दालचीनी भी कुछ व्यंजनों में इस्तेमाल की जाती है। इसे दूध में उबालकर या मीठे पकवानों में थोड़ी मात्रा में डाला जा सकता है, लेकिन व्रत में इसका इस्तेमाल घर की परंपरा के अनुसार ही किया जाता है।

    अजवाइन भी उन मसालों में शामिल है, जिनका इस्तेमाल कुछ घरों में व्रत के नमकीन पकवानों और स्नैक्स में किया जाता है। इसकी तेज खुशबू खाने का स्वाद बढ़ा सकती है। हालांकि, हर परिवार में व्रत के दौरान अजवाइन खाने की अनुमति नहीं होती। इसलिए किसी भी मसाले को इस्तेमाल करने से पहले अपने यहां अपनाए जाने वाले नियमों को ध्यान में रखना चाहिए।

    व्रत के दौरान कुछ मसालों से परहेज भी किया जाता है। इनमें हींग शामिल है, जिसका इस्तेमाल सामान्य दिनों में सब्जियों और दालों में तड़का लगाने के लिए होता है। नवरात्रि के व्रत में कई परिवार हींग नहीं खाते। पैकेट में मिलने वाली हींग में गेहूं का आटा या दूसरी सामग्री भी हो सकती है, इसलिए सामग्री की जानकारी रखना उपयोगी है। राई भी रोजाना के भोजन में तड़के और अचार के लिए इस्तेमाल होती है, लेकिन कई घरों में व्रत के दौरान इसे नहीं खाया जाता।

    मेथी दाना भी उन मसालों में शामिल है, जिनसे व्रत में कई परिवार दूरी रखते हैं। इसका स्वाद हल्का कड़वा होता है और इसे अचार, मसालों के मिश्रण तथा सब्जियों में इस्तेमाल किया जाता है। हल्दी को लेकर भी नियम अलग-अलग हैं। रोजाना के भोजन में इस्तेमाल होने वाली हल्दी कुछ परिवार नवरात्रि के व्रत वाले पकवानों में नहीं डालते। इसी तरह, लाल मिर्च पाउडर से भी कई लोग परहेज करते हैं और तीखापन लाने के लिए काली मिर्च चुनते हैं। हरी मिर्च के इस्तेमाल को लेकर भी परिवारों की परंपराएं अलग हो सकती हैं।

    इस तरह, नवरात्रि के व्रत में मसालों का चयन करते समय केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि अपने घर में माने जाने वाले नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी है। जीरा, काली मिर्च, सेंधा नमक, हरी इलायची, दालचीनी और अजवाइन का इस्तेमाल कुछ घरों में किया जाता है, जबकि हींग, राई, मेथी दाना, हल्दी और लाल मिर्च पाउडर से परहेज रखा जा सकता है। सभी मसालों के लिए एक जैसा नियम नहीं होता, इसलिए व्रत का भोजन तैयार करते समय पारिवारिक परंपरा के अनुसार फैसला करना चाहिए।

  • अल्डाब्रा द्वीप पर 1.83 लाख पहुंचे विशाल कछुए, सेशेल्स की इंसानी आबादी से भी ज्यादा हुई इनकी संख्या

    अल्डाब्रा द्वीप पर 1.83 लाख पहुंचे विशाल कछुए, सेशेल्स की इंसानी आबादी से भी ज्यादा हुई इनकी संख्या

    नई दिल्ली: हिंद महासागर में स्थित सेशेल्स के अल्डाब्रा एटोल पर विशाल कछुओं की आबादी करीब 1.83 लाख होने का अनुमान लगाया गया है। यह संख्या पूरे सेशेल्स की लगभग 1.35 लाख की मानव आबादी से भी अधिक है। हालिया वैज्ञानिक सर्वेक्षण में सामने आया है कि अल्डाब्रा के विशाल कछुए दुनिया में प्राकृतिक वातावरण में स्वतंत्र रूप से रहने वाले विशाल कछुओं की सबसे बड़ी आबादी बनाते हैं। कभी बड़े पैमाने पर शिकार के कारण इनकी संख्या घटकर 1,000 से भी कम रह गई थी। लंबे समय तक किए गए संरक्षण प्रयासों और निगरानी से इस प्रजाति को दोबारा फलने-फूलने का अवसर मिला है।

    इस सर्वेक्षण के लिए 2018 से 2022 के बीच जुटाए गए आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में वयस्क और लगभग वयस्क कछुओं की संख्या करीब 1.83 लाख आंकी गई है। यह 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में लगाए गए लगभग एक लाख कछुओं के पुराने अनुमान से काफी अधिक है। हालांकि, वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि नए आंकड़ों का यह अर्थ नहीं है कि वर्ष 1999 के बाद कछुओं की आबादी लगभग दोगुनी हो गई है। पुराने सर्वेक्षणों में घनी झाड़ियों और पेड़ों की छाया में छिपे कछुए अक्सर गिनती में शामिल नहीं हो पाते थे। इस बार वैज्ञानिकों ने उन कछुओं की संख्या का भी सांख्यिकीय अनुमान लगाया, जो सर्वेक्षण के दौरान सीधे दिखाई नहीं दिए।

    अल्डाब्रा के विशाल कछुओं की आबादी में सुधार के पीछे उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा को महत्वपूर्ण माना गया है। 19वीं सदी में बड़े पैमाने पर शिकार और अन्य मानवीय गतिविधियों के कारण इनकी संख्या में भारी गिरावट आई थी। इसके बाद इस प्रजाति को बचाने के लिए संरक्षण के उपाय किए गए। वर्ष 1981 में अल्डाब्रा को सख्त सुरक्षा वाले प्राकृतिक आरक्षित क्षेत्र का दर्जा दिया गया। इसके अगले वर्ष, 1982 में, इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। लगातार संरक्षण और निगरानी से कछुओं को सुरक्षित वातावरण मिला। नए अध्ययन में यह भी सामने आया कि 2018 से 2022 के दौरान इनकी आबादी अपेक्षाकृत स्थिर रही।

    सर्वेक्षण के दौरान कछुओं की संख्या और उनके आवास के बीच संबंध भी सामने आया। वैज्ञानिकों ने पाया कि घास वाले क्षेत्रों में इनकी मौजूदगी सबसे अधिक है। ऐसे क्षेत्रों को टॉरटॉइज टर्फ कहा जाता है। इसके बाद खुले भूभाग और कम घनी झाड़ियों वाले इलाकों में कछुओं का घनत्व अधिक पाया गया। इसके विपरीत, घनी झाड़ियों, मैंग्रोव और कुछ विशेष प्रकार की वनस्पतियों वाले क्षेत्रों में इन्हें देखना अधिक कठिन था। अलग-अलग प्राकृतिक परिस्थितियों में कछुओं की दृश्यता के अंतर को ध्यान में रखकर वैज्ञानिकों ने उनकी कुल आबादी का अधिक विश्वसनीय अनुमान तैयार किया।

    आबादी में सुधार के बावजूद अल्डाब्रा के विशाल कछुओं के सामने कई खतरे बने हुए हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य में सूखे की अवधि लंबी और बार-बार होने की आशंका है। इससे कछुओं के लिए भोजन और छाया की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। समुद्र का बढ़ता जलस्तर एटोल के निचले हिस्सों के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है। इसके अलावा, जंगली बिल्लियां और काले चूहे कछुओं के अंडों तथा नवजात बच्चों को नुकसान पहुंचाते हैं। जंगली बकरियों को वर्ष 2012 में यहां से हटाया जा चुका है, क्योंकि वे वनस्पतियों को नुकसान पहुंचाती थीं। वैज्ञानिकों के अनुसार, भविष्य में आबादी में होने वाले बदलावों पर नजर रखने के लिए नियमित सर्वेक्षण जरूरी हैं। करीब 1.83 लाख कछुओं का नया अनुमान आगे की निगरानी के लिए आधार उपलब्ध कराएगा, जिससे पर्यावरणीय बदलावों और अन्य खतरों के प्रभाव का समय रहते आकलन किया जा सकेगा।

  • सफेद बालों को नेचुरल तरीके से काला करने के लिए अपनाएं आंवला और नारियल तेल का घरेलू उपाय

    सफेद बालों को नेचुरल तरीके से काला करने के लिए अपनाएं आंवला और नारियल तेल का घरेलू उपाय


    नई दिल्ली:
    उम्र बढ़ने के साथ बालों का सफेद होना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन कई लोगों के बाल कम उम्र में भी सफेद दिखाई देने लगते हैं। आनुवंशिक कारण, उम्र और कुछ स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां बालों के रंग में बदलाव से जुड़ी हो सकती हैं। ऐसे में सफेद बालों को छिपाने के लिए लोग बाजार में उपलब्ध हेयर कलर का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, कुछ उत्पादों में मौजूद रसायन संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में जलन या एलर्जी पैदा कर सकते हैं। वहीं, बार-बार कलर करने से बाल रूखे और बेजान भी महसूस हो सकते हैं। ऐसे में बालों की देखभाल के लिए घरेलू उपायों में रुचि रखने वाले लोग आंवला पाउडर और नारियल तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह मिश्रण बालों को कंडीशन करने में मदद कर सकता है, लेकिन इससे सफेद बालों के स्थायी रूप से काले होने की गारंटी नहीं है।

    आंवला और नारियल तेल को बालों की देखभाल के लिए इस्तेमाल किया जाता है। आंवले में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जबकि नारियल तेल बालों में नमी बनाए रखने और प्रोटीन के नुकसान को कम करने में मदद कर सकता है। नारियल तेल के इस्तेमाल से बालों का रूखापन कम हो सकता है और उनमें चमक दिखाई दे सकती है। आंवला पाउडर भी बालों की देखभाल के लिए इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक सामग्रियों में शामिल है। हालांकि, इन दोनों चीजों के मिश्रण से बालों के प्राकृतिक रंग को दोबारा काला करने के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इसे सफेद बालों का निश्चित उपचार मानने के बजाय बालों की देखभाल के एक घरेलू विकल्प के रूप में देखना चाहिए।

    इस मिश्रण को तैयार करने के लिए आंवला पाउडर और नारियल तेल की जरूरत होती है। सबसे पहले एक साफ कटोरी में आंवला पाउडर लें और उसमें धीरे-धीरे नारियल तेल मिलाएं। दोनों सामग्रियों को तब तक मिलाएं, जब तक एक समान पेस्ट तैयार न हो जाए। मिश्रण की मात्रा बालों की लंबाई और घनत्व के अनुसार रखी जा सकती है। इसे इस्तेमाल करने से पहले त्वचा के एक छोटे हिस्से पर लगाकर जांच करना बेहतर है। यदि वहां खुजली, जलन, लालिमा या सूजन दिखाई दे, तो इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। आंखों और सिर की ऐसी त्वचा पर मिश्रण लगाने से बचें, जहां पहले से घाव या जलन हो।

    इस्तेमाल के लिए मिश्रण को बालों और सिर की त्वचा पर सावधानी से लगाया जा सकता है। इसे लगाने के बाद बालों में बहुत अधिक मात्रा में तेल जमा न होने दें। घरेलू नुस्खे के तौर पर इसे कुछ समय तक बालों में रखने के बाद हल्के शैम्पू से धोया जा सकता है। इसे एक से दो घंटे तक छोड़ना या सप्ताह में दो बार लगाना सफेद बालों को काला करने के लिए प्रमाणित तरीका नहीं है। इस्तेमाल की अवधि और आवृत्ति अपने बालों की प्रकृति तथा त्वचा की प्रतिक्रिया के अनुसार तय करनी चाहिए। यदि बालों में चिपचिपापन बढ़ता है या सिर की त्वचा में परेशानी होती है, तो इसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।

    बालों की सेहत बनाए रखने के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, जरूरी पोषक तत्व और नियमित देखभाल भी महत्वपूर्ण हैं। यदि कम उम्र में अचानक बहुत अधिक बाल सफेद होने लगें या इसके साथ बाल झड़ने जैसी समस्या हो, तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है। कुछ मामलों में पोषक तत्वों की कमी या अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारणों की जांच की जरूरत हो सकती है। आंवला और नारियल तेल बालों को मुलायम बनाने तथा रूखेपन को कम करने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन पहले से सफेद हो चुके बालों को प्राकृतिक रूप से फिर काला करने के लिए इन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

  • नवरात्रि में बनाएं हेल्दी और कुरकुरी शकरकंदी चाट, मखाने से मूंगफली तक मिलेंगी स्वाद और क्रंच की खूबियां

    नवरात्रि में बनाएं हेल्दी और कुरकुरी शकरकंदी चाट, मखाने से मूंगफली तक मिलेंगी स्वाद और क्रंच की खूबियां

    नई दिल्ली: नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा की पूजा के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत भी रखते हैं। उपवास के दौरान अक्सर कुछ चटपटा और स्वादिष्ट खाने का मन करता है लेकिन फलाहार में इस्तेमाल होने वाली चीजों के विकल्प सीमित लगने लगते हैं। ऐसे में शकरकंदी से बनी चटपटी चाट एक अच्छा विकल्प हो सकती है।
    इसे शकरकंदी के साथ पनीर और ताजी सब्जियों का इस्तेमाल करके तैयार किया जा सकता है। इसमें मखाने और भुनी हुई मूंगफली डालने से स्वाद के साथ कुरकुरापन भी बढ़ जाता है। खास बात यह है कि इसे डीप फ्राई करने की जरूरत नहीं है। शकरकंदी और पनीर को एयर फ्रायर में तैयार करके यह चाट आसानी से बनाई जा सकती है।

    व्रत वाली शकरकंदी चाट बनाने के लिए सामग्री
    इस चाट को बनाने के लिए दो मध्यम आकार की शकरकंद और करीब 150 ग्राम पनीर लें। इसके अलावा एक खीरा छोटे टुकड़ों में कटा हुआ एक छोटी कटोरी भुने हुए मखाने एक मुट्ठी भुनी हुई मूंगफली और आधा कप अनार के दाने चाहिए। शकरकंदी के लिए दो चम्मच घी और पनीर के लिए एक चम्मच घी रखें। स्वाद के अनुसार सेंधा नमक और काली मिर्च मिलाएं। चटनी बनाने के लिए एक मुट्ठी ताजा हरा धनिया चार हरी मिर्च दो नींबू का रस और जरूरत के अनुसार पानी लें। व्रत में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और मसालों के नियम अलग-अलग परिवारों में अलग हो सकते हैं इसलिए अपनी परंपरा के अनुसार सामग्री चुनें।

    शकरकंदी को ऐसे करें तैयार

    सबसे पहले शकरकंदी को अच्छी तरह धोकर छील लें। इसके बाद इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटें और करीब सात से आठ मिनट तक उबालें। उबलने के बाद पानी निकाल दें। अब शकरकंदी में घी सेंधा नमक और काली मिर्च डालकर अच्छी तरह मिलाएं। एयर फ्रायर को 180 डिग्री सेल्सियस पर सेट करें और शकरकंदी को लगभग 20 मिनट तक एयर फ्राई करें। बीच में एक बार टुकड़ों को देखकर जरूरत के अनुसार पलट दें ताकि वे अच्छी तरह पक सकें। एयर फ्रायर का समय टुकड़ों के आकार और मशीन के हिसाब से थोड़ा बदल सकता है।

    पनीर और हरी चटनी से बढ़ेगा स्वाद

    अब पनीर को छोटे क्यूब्स में काट लें। इसमें एक चम्मच घी सेंधा नमक और थोड़ी काली मिर्च डालकर मिलाएं। पनीर को 180 डिग्री सेल्सियस पर करीब पांच से छह मिनट तक एयर फ्राई करें। इसके बाद हरी चटनी तैयार करें। इसके लिए मिक्सर में हरा धनिया हरी मिर्च नींबू का रस सेंधा नमक और थोड़ा पानी डालकर पीस लें। चटनी को अपनी पसंद के अनुसार गाढ़ा या थोड़ा पतला रखा जा सकता है।

    इस तरह तैयार होगी चटपटी व्रत वाली चाट
    अब एक बड़े बाउल में एयर फ्राई की हुई शकरकंदी और पनीर डालें। इसमें कटा हुआ खीरा भुने मखाने मूंगफली और अनार के दाने मिलाएं। ऊपर से तैयार हरी चटनी डालकर सभी चीजों को हल्के हाथ से मिलाएं। आपकी स्वादिष्ट शकरकंदी चाट तैयार है। इसे तुरंत परोसें ताकि मखाने और मूंगफली का कुरकुरापन बना रहे।

    चाट को और स्वादिष्ट बनाने के आसान टिप्स
    चाट को अधिक चटपटा बनाने के लिए इसमें उबले हुए आलू के छोटे टुकड़े भी मिला सकते हैं। यदि आपके व्रत में अनुमति हो तो थोड़ी इमली की चटनी या अतिरिक्त नींबू का रस डालकर खट्टा स्वाद बढ़ाया जा सकता है।

    दही पसंद करने वाले लोग ताजा फेंटा हुआ दही भी मिला सकते हैं। ऊपर से अनार के दाने और भुना जीरा डालने से स्वाद और आकर्षक हो जाता है। हालांकि दही और मसालों का इस्तेमाल अपनी व्रत परंपरा के अनुसार ही करें।
    नवरात्रि के दौरान यह चाट फलाहार में स्वाद का नया विकल्प दे सकती है। शकरकंदी और पनीर के साथ मखाने तथा मूंगफली इसे अलग-अलग बनावट और स्वाद देते हैं। इसे बनाने में ज्यादा मेहनत नहीं लगती और डीप फ्राई किए बिना भी स्वादिष्ट चाट का आनंद लिया जा सकता है।
  • नवरात्रि में माता रानी के स्वागत के लिए प्लेलिस्ट में शामिल करें ये 12 भजन, पूजा से लेकर माता की चौकी तक छाएगा भक्तिमय माहौल

    नवरात्रि में माता रानी के स्वागत के लिए प्लेलिस्ट में शामिल करें ये 12 भजन, पूजा से लेकर माता की चौकी तक छाएगा भक्तिमय माहौल


    नई दिल्ली । नवरात्रि का पर्व आते ही घरों और मंदिरों में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। भक्त माता की चौकी सजाते हैं, कलश स्थापना की तैयारी करते हैं और अखंड ज्योत जलाकर मां का स्वागत करते हैं। इस दौरान भक्ति संगीत का भी विशेष महत्व होता है। माता रानी के भजन पूजा के माहौल को भक्तिमय बनाने के साथ श्रद्धालुओं को अपनी आस्था व्यक्त करने का अवसर देते हैं। सुबह की पूजा से लेकर शाम की आरती और भजन संध्या तक, मां के गीत उत्सव की रौनक बढ़ा सकते हैं।

    नवरात्रि के लिए भजनों की प्लेलिस्ट तैयार करते समय ऐसे गीत चुने जा सकते हैं, जिनमें मां की ममता, भक्तों के प्रति विश्वास, देवी की महिमा और उनके दरबार की सुंदरता का वर्णन हो। कुछ भजन भक्त और माता के रिश्ते को भावनात्मक रूप से व्यक्त करते हैं, जबकि कुछ गीत नवरात्रि के आगमन और उत्सव की उमंग से जुड़े हैं। इस अवसर पर पुराने और नए भक्ति गीतों को एक साथ सुनने का विकल्प भी रखा जा सकता है।

    इस सूची में पहला भजन ‘माई है ना’ है। मां को अपना सहारा मानने वाले भक्तों के लिए यह गीत खास भाव रखता है। इसे सुबह की पूजा या दिन की शुरुआत के समय सुना जा सकता है। दूसरा भजन ‘मेरी मां के बराबर कोई नहीं’ है, जिसे पायल देव ने गाया है। यह गीत मां की ममता और उनके प्रति श्रद्धा की भावना को व्यक्त करता है। तीसरा भजन ‘मैं बालक तू माता’ है। इसके बोल भक्त और माता के बीच अटूट संबंध को दर्शाते हैं। इस गीत का आधुनिक संस्करण भी श्रोताओं के बीच लोकप्रिय है।

    चौथा गीत ‘मेरी माई जगदम्बा भवानी’ मां जगदम्बा की स्तुति से जुड़ा है। इसे प्लेलिस्ट में शामिल करके देवी के प्रति आस्था और श्रद्धा के भाव को स्थान दिया जा सकता है। पांचवां भजन ‘शेरावाली मां’ माता की स्तुति और उनके दरबार से जुड़ी भक्ति भावना को सामने लाता है। मां की सजावट, चुनरी और जयकारों के बीच इस तरह के गीत नवरात्रि के उत्सव के अनुकूल रहते हैं। छठा गीत ‘आई है नवरात्रि’ पर्व के आगमन की खुशी और उत्साह से जुड़ा है। इसे सुनकर पूजा की तैयारियों के दौरान उत्सवी माहौल बनाया जा सकता है।

    सातवां भजन ‘माई’ मां के दरबार में हाजिरी लगाने और उनके प्रति समर्पण व्यक्त करने की भावना से जुड़ा है। आठवां गीत ‘तेरे मंदिरों की शान निराली, री शेरावाली मां’ देवी के मंदिरों की सुंदरता, दरबार की रौनक और भक्तों की आस्था को केंद्र में रखता है। नौवां भजन ‘माता मेरी माता’ देवी के विभिन्न रूपों की महिमा का स्मरण कराने वाला गीत है। इन तीनों भजनों को माता की पूजा, भजन संध्या या घर में धार्मिक आयोजन के दौरान सुना जा सकता है।

    दसवां गीत ‘मैया का चोला है रंगला’ मां के श्रृंगार और रंग-बिरंगी चुनरी से जुड़े भावों को प्रस्तुत करता है। माता की चौकी सजाते समय या भजन संध्या में इसे शामिल किया जा सकता है। ग्यारहवां भजन ‘बिगड़ी मेरी बना दे’ मां के सामने अपनी परेशानियां रखने और उनसे सुख, शांति तथा साहस की कामना करने की भावना से जुड़ा है। बारहवां गीत ‘प्यारा सजा है तेरा द्वार’ माता के दरबार को सजाने और उनके स्वागत में भजन गाने की परंपरा से मेल खाता है। इसे कलश स्थापना, शाम की आरती या माता की चौकी से पहले सुना जा सकता है।

    नवरात्रि के नौ दिनों में इन 12 भजनों को अपनी पसंद के अनुसार प्लेलिस्ट में शामिल किया जा सकता है। सुबह की आरती, पूजा की तैयारी, माता की चौकी और शाम के धार्मिक आयोजन के लिए अलग-अलग गीत चुने जा सकते हैं। मां दुर्गा की स्तुति से जुड़े इन भजनों के माध्यम से परिवार के लोग एक साथ भक्ति के पल बिता सकते हैं और पर्व के दौरान श्रद्धा तथा उत्साह से भरा माहौल बना सकते हैं।

  • महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स से पहले आजमाएं हल्दी वाला स्किन केयर, चेहरे पर लगाने से पहले जान लें ये जरूरी बातें

    महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स से पहले आजमाएं हल्दी वाला स्किन केयर, चेहरे पर लगाने से पहले जान लें ये जरूरी बातें


    नई दिल्ली। खूबसूरत और स्वस्थ त्वचा पाने के लिए लोग कई तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट्स और घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करते हैं। इन्हीं में हल्दी को भी खास जगह दी जाती है। भारतीय घरों में हल्दी का इस्तेमाल लंबे समय से भोजन और पारंपरिक सौंदर्य देखभाल में होता आया है। हल्दी में करक्यूमिन नामक एक प्राकृतिक तत्व पाया जाता है जिस पर इसके एंटीऑक्सिडेंट और सूजन कम करने वाले गुणों को लेकर अध्ययन किए गए हैं। हालांकि चेहरे पर हल्दी लगाने से हर किसी को एक जैसा फायदा हो यह जरूरी नहीं है। त्वचा की प्रकृति को समझकर इसका इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण है।

    हल्दी को पारंपरिक रूप से त्वचा की देखभाल के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कुछ लोग इसे बेसन या दही के साथ मिलाकर फेस पैक तैयार करते हैं। माना जाता है कि इससे त्वचा साफ और मुलायम महसूस हो सकती है। लेकिन हल्दी से चेहरे के दाग धब्बे पूरी तरह मिटने या रंग गोरा होने का दावा करना सही नहीं है। मुंहासों और त्वचा की अन्य समस्याओं पर हल्दी के घरेलू इस्तेमाल को लेकर पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इसे किसी त्वचा रोग के इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए।

    अगर आप हल्दी का फेस पैक आजमाना चाहते हैं तो बहुत कम मात्रा से शुरुआत करें। एक चुटकी हल्दी में थोड़ा सादा दही या पानी मिलाकर पतला मिश्रण तैयार किया जा सकता है। इसे चेहरे पर लगाने से पहले हाथ के अंदरूनी हिस्से पर थोड़ी मात्रा लगाकर जांच करें। अगर खुजली जलन लालिमा या सूजन दिखाई दे तो इसका इस्तेमाल न करें। चेहरे पर लगाने के बाद इसे थोड़े समय में पानी से अच्छी तरह धो लें। पहली बार इस्तेमाल करते समय लंबे समय तक पैक लगाकर रखने से बचें।

    हल्दी के साथ इस्तेमाल की जाने वाली दूसरी सामग्री भी त्वचा को प्रभावित कर सकती है। नींबू का रस चेहरे पर लगाने से जलन और धूप के प्रति संवेदनशीलता बढ़ सकती है इसलिए इसे घरेलू फेस पैक में मिलाने से बचना बेहतर है। इसी तरह बेकिंग सोडा और खुरदरे स्क्रब त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को नए घरेलू नुस्खे आजमाने से पहले विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। हल्दी का रंग त्वचा या कपड़ों पर पीले निशान भी छोड़ सकता है।

    अच्छी त्वचा के लिए केवल फेस पैक पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। रोजाना त्वचा के प्रकार के अनुसार सौम्य क्लींजर से चेहरा साफ करें और जरूरत के अनुसार मॉइस्चराइजर लगाएं। दिन में बाहर निकलते समय ब्रॉड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें। धूप से बचाव त्वचा पर समय से पहले उम्र बढ़ने के संकेत और पिगमेंटेशन को कम करने में मदद कर सकता है। पर्याप्त पानी पीना संतुलित भोजन लेना और पूरी नींद लेना भी समग्र स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।

    अगर चेहरे पर लगातार मुंहासे निकल रहे हों या दाग धब्बे बढ़ रहे हों तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें। खुजली लालिमा और जलन जैसी समस्या होने पर घरेलू प्रयोग बंद कर दें। गर्भावस्था या किसी विशेष त्वचा समस्या के दौरान भी नए उत्पादों और नुस्खों के इस्तेमाल को लेकर डॉक्टर से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।

    हल्दी को पारंपरिक स्किन केयर में जगह जरूर मिली है लेकिन प्राकृतिक होने का मतलब यह नहीं कि हर सामग्री हर त्वचा के लिए सुरक्षित होगी। कम मात्रा में इस्तेमाल करें त्वचा की प्रतिक्रिया पर ध्यान दें और नियमित देखभाल को प्राथमिकता दें। स्वस्थ त्वचा के लिए सही सफाई मॉइस्चराइजिंग और धूप से बचाव सबसे महत्वपूर्ण आदतों में शामिल हैं।