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  • बदलते मौसम में बार-बार बीमार पड़ रहे हैं तो न करें इग्नोर… भारी पड़ सकती है ये गलतियां

    बदलते मौसम में बार-बार बीमार पड़ रहे हैं तो न करें इग्नोर… भारी पड़ सकती है ये गलतियां


    नई दिल्ली।
    क्या हर बार मौसम बदलते (Weather Changes) ही आप भी बीमार (Sick) हो जाते हैं? पहले गला खराब, दो दिन बाद सर्दी-जुकाम (Cold and cough) और फिर बुखार। बीमारी ठीक हुई तो कुछ दिन बाद दोबारा वही परेशानी। अगर आपके साथ ऐसा बार-बार हो रहा है तो इसे सिर्फ बदलते मौसम का असर मानकर इग्नोर करने की गलती न करें।

    जब बात बार-बार होने वाली बीमारियों की आती है तो हम अक्सर मान लेते हैं कि ये इम्युनिटी (Immunity) कमजोर होने की वजह से हो रहा है। ये सच भी है लेकिन हर बार बीमार पड़ने की वजह कमजोर इम्युनिटी ही हो, ऐसा भी जरूरी नहीं है।

    हमारी रोज की कुछ आदतें भी बीमारी का रास्ता खोल सकती हैं। मसलन रात में देर तक जागना, अच्छी नींद न लेना, खाना समय पर न खाना, डाइट में जरूरी पोषक तत्वों की कमी शरीर के सामान्य स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। ये सभी आपके बार-बार बीमार होने के पीछे के साइलेंट कारण हो सकते हैं।

    डॉक्टर कहते हैं, जिस तरह से दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई राज्यों में स्वाइन फ्लू का दौर चल रहा है, ऐसे में लोगों को बुखार, सर्दी-जुकाम होना सामान्य है। पर अगर आप हर एक-दो महीने में इन समस्याओं का शिकार हो रहे हैं, तो थोड़ा सावधान हो जाने की जरूरत है। एक बार मुड़कर अपनी आदतों की तरफ भी देखिए, कहीं गलती यहां तो नहीं हो रही है?


    कहीं आपकी नींद तो खराब नहीं रहती?

    अगर आप लगातार कम सो रहे हैं तो सबसे पहले इसी आदत को सुधारने की जरूरत है। नींद सिर्फ थकान दूर नहीं करती है, ये शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा प्रक्रिया में भी भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी और पर्याप्त नींद शरीर को स्वस्थ रखने और बीमारियों से बचाव में मदद करती है।

    रोज देर रात तक मोबाइल चलाना या ऑफिस का काम करना और अलग-अलग समय पर सोना आपकी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए रोज लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें। वयस्कों के लिए आम तौर पर कम से कम 8-9 घंटे की नींद की सलाह दी जाती है।


    डाइट में जरूरी पोषक तत्व हैं या नहीं?

    शरीर को स्वस्थ रखने के लिए डाइट का संतुलित होना जरूरी है। फल-सब्जियां, साबुत अनाज और पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन-फाइबर जैसे पोषक तत्वों को अपने आहार का हिस्सा जरूर बनाएं। इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने के लिए पोषण से भरपूर संतुलित भोजन बहुत जरूरी है। अगर आपकी डाइट ज्यादातर पैकेज्ड फूड, तला-भुना खाना या बहुत ज्यादा मीठे पेय पर निर्भर है तो इसमें बदलाव जरूरी है। घर का बना खाना और रोजाना मौसमी फल खाना आपको कई बीमारियों से बचाए रखने में मदद कर सकता है।


    हाथों की साफ-सफाई का रखते हैं ध्यान?

    ऑफिस (Office), स्कूल, भीड़भाड़ वाली जगहों या घर में किसी बीमार व्यक्ति (Sick person) के संपर्क में रहने पर भी संक्रमण (Infection) का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए बार-बार बीमार पड़ने का कारण हमेशा शरीर की कमजोरी नहीं होती। आप कितनी बार संक्रमण के संपर्क में आते हैं, यह भी मायने रखता है।

    हाथों (Hand hygiene) को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोना संक्रमण फैलने से रोकने के सबसे आसान तरीकों में से एक है। हाथ धोने से कई तरह के वायरस और बैक्टीरिया का संक्रमण कम किया जा सकता है।


    क्या कहते हैं डॉक्टर?

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आपको बार-बार संक्रमण हो रहा है या मौसम बदलते ही बीमार हो जाते हैं तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। कुछ स्वास्थ्य स्थितियां संक्रमण के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। हाई ब्लड शुगर के शिकार लोगों में शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता को प्रभावित हो जाती है, ये आपमें बीमारियों का खतरा बढ़ा देती है।

    डायबिटीज के शुरुआती स्थिति में अक्सर कोई खास लक्षण नहीं होते हैं इसलिए इसका देर से पता चल पाता है। इसलिए समय रहते जांच से शरीर की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। समय पर डॉक्टरी सलाह आपमें बीमारी का कारण पता लगाने और बार-बार होने वाली समस्याओं को रोकने में मददगार हो सकती है।

  • ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों से बचना है तो डाइट में इन चीजों को करें शामिल

    ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों से बचना है तो डाइट में इन चीजों को करें शामिल


    नई दिल्ली।
    हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) और दिल की बीमारियां (Heart diseases) अब बहुत आम हो गई हैं। कम उम्र वाले भी इनका शिकार हो रहे हैं। हम अक्सर ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) और दिल की सेहत की बात करते समय सबसे ज्यादा ध्यान नमक-तेल के कम सेवन, वजन कंट्रोल करने और एक्सरसाइज पर देते हैं। ये निश्चित ही दिल की सेहत के लिए जरूरी है, पर क्या आप जानते हैं कि एक मिनरल यानी खनिज तत्व ऐसा है जिस ब्लड प्रेशर और हार्ट की सेहत का सबसे अच्छा दोस्त कहा जाता है?

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पोटैशियम हमारे हेल्थ के लिए बहुत जरूरी मिनरल है। शरीर को इसकी जरूरत सिर्फ मांसपेशियों के कामकाज के लिए नहीं होती, बल्कि यह ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने और हृदय सहित पूरे कार्डियोवस्कुलर सिस्टम के सामान्य कामकाज में भूमिका निभाता है।

    पोटैशियम शरीर में सोडियम के स्तर को कंट्रोल रखने में भी मदद करता है जिससे बीपी अचानक बढ़ने का जोखिम कम होता है और हृदय स्वस्थ बना रहता है।


    शरीर के लिए जरूरी है पोटैशियम

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के विशेषज्ञ कहते हैं, सभी वयस्कों के लिए रोजाना कम से कम 3400 मिलीग्राम पोटैशियम लेना जरूरी माना जाता है। पोटैशियम शरीर से सोडियम को पेशाब के जरिए बाहर निकालने में मदद करता है। इसके अलावा यह रक्त वाहिकाओं की दीवारों के तनाव को कम करने में मदद कर सकता है, जिससे ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है। यही कारण है कि हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने वाली डैश डाइट में फल-सब्जियां, दालें, साबुत अनाज के साथ पोटैशियम वाले खाद्य पदार्थों को भी शामिल किया जाता है।


    पोटैशियम शरीर में करता क्या है?

    पोटैशियम शरीर के लिए जरूरी इलेक्ट्रोलाइट और मिनरल है। यह कोशिकाओं, मांसपेशियों और नसों के सामान्य कामकाज में भूमिका निभाता है। खासतौर पर हृदय सहित अन्य मांसपेशियों के सामान्य काम के लिए शरीर में पोटैशियम का संतुलन जरूरी होता है। पोटैशियम का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह अतिरिक्त सोडियम को पेशाब के जरिए बाहर निकालने में मदद करता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, भोजन में पर्याप्त मात्रा में पोटैशियम वाली चीजें शामिल करने से ब्लड प्रेशर तथा हृदय रोग, स्ट्रोक और कोरोनरी हार्ट डिजीज के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।


    क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

    अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार पोटैशियम रक्त वाहिकाओं की दीवारों के तनाव को कम करने में भी मदद करता है, जिससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखने में सहायता मिल सकती है। पोटैशियम की जरूरत उम्र के अनुसार अलग हो सकती है। अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार वयस्क पुरुषों के लिए पर्याप्त सेवन 3,400 मिलीग्राम और महिलाओं के लिए 2,600 मिलीग्राम प्रतिदिन है।

    पोटैशियम का सबसे अच्छा तरीका भोजन से इसे लेना है। केला इसका सबसे अच्छा स्रोत है। इसके अलावा बीन्स- मटर, नट्स, पालक-पत्तागोभी जैसे खाद्य पदार्थ भी पोटैशियम के स्रोत हैं।
    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, भोजन से पोटैशियम की जरूरत पूरी करें। कुछ लोगों को डॉक्टर पोटैशियम सप्लीमेंट्स दे सकते हैं, हालांकि बिना डॉक्टरी सलाह के इसे लेना नुकसानदायक हो सकता है।

  • बरसात में डेंगू का खतरा बढ़ा, प्लेटलेट्स ही नहीं, ये संकेत भी बताते हैं बीमारी हो रही गंभीर

    बरसात में डेंगू का खतरा बढ़ा, प्लेटलेट्स ही नहीं, ये संकेत भी बताते हैं बीमारी हो रही गंभीर


    नई दिल्ली।
    बरसात (Rain) के दिनों में मच्छरों (Mosquitoes) के कारण होने वाली डेंगू (Dengue) जैसी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते दिनों हुई बारिश और जगह-जगह जल जमाव के कारण राजधानी दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में डेंगू के मामले बढ़ने लगे हैं।

    दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में इस साल अब तक डेंगू के 272 मामले सामने आए हैं। इसके अलावा मलेरिया के 95 और चिकनगुनिया के 21 मामले दर्ज हो चुके हैं। इतना ही नहीं पिछले एक सप्ताह में डेंगू के 26, मलेरिया के 15 और चिकनगुनिया के दो नए मामले सामने आए हैं।

    राजधानी दिल्ली पहले से ही स्वाइन फ्लू का प्रकोप झेल रही है ऐसे में डेंगू के मामलों ने डबल अटैक कर दिया है। एडीज एजिप्टी मच्छरों के कारण होने वाली ये बीमारी कुछ लोगों में गंभीर और जानलेवा भी हो सकती है। इन्हीं खतरों को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को मच्छरों से बचाव को लेकर अलर्ट रहने की सलाह दे रहे हैं।


    गंभीर हो सकती है डेंगू की बीमारी

    डेंगू का नाम आते ही सबसे पहले दिमाग में प्लेटलेट्स काउंट घूमने लगता है। डेंगू के टेस्ट में इसका कम होना चिंता बढ़ाने लगता है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि डेंगू की गंभीरता सिर्फ प्लेटलेट्स काउंट से तय नहीं होती।

    कई बार मरीज की हालत बिगड़ने लगती है। शरीर प्लेटलेट्स की रिपोर्ट से पहले ही खतरे के संकेत देता है। डॉक्टर कहते हैं, अगर आपको तेज बुखार के साथ लगातार पेट में तेज दर्द, उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आने, बहुत ज्यादा सुस्ती जैसी परेशानी हो रही है तो इसे बिल्कुल इग्नोर न करें। ये भी इशारा करते हैं कि बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।


    डेंगू में पेट की दिक्कतों पर भी दें ध्यान

    बुखार के साथ या बुखार कम होने के बाद भी अगर अचानक तेज पेट दर्द शुरू हो जाए तो इसे बिल्कुल हल्के में न लें। पेट में दर्द गंभीर डेंगू का संकेत हो सकता है। डेंगू के मरीजों को उल्टी होने की भी दिक्कत रहती है। बार-बार उल्टी होने की स्थिति में अगर मरीज पानी और दूसरे तरल पदार्थ ठीक से नहीं ले रहा है तो इससे शरीर में डिहाइड्रेशन की दिक्कत बढ़ सकती है।


    नाक या मसूड़ों से खून आना

    नाक या मसूड़ों से खून आना डेंगू का गंभीर संकेत हो सकता है। कुछ लोगों में उल्टी या मल में भी खून दिखाई दे सकता है। डॉक्टर कहते हैं, गंभीर स्थिति में डेंगू अत्यधिक रक्तस्राव का कारण बनता है। इसलिए डेंगू के मरीज में किसी भी तरह का असामान्य रक्तस्राव दिखाई दे तो इसे सिर्फ प्लेटलेट्स कम होने का सामान्य असर मानकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षणों में तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।


    थकान-कमजोरी की दिक्कत

    गंभीर डेंगू में शरीर से तरल पदार्थ निकलने के कारण खून का संचार प्रभावित हो सकता है। इससे लो ब्लड प्रेशर और शॉक जैसी समस्याओं का भी जोखिम हो सकता है। इस स्थिति में मरीज को अचानक बहुत ज्यादा कमजोरी, चक्कर, बेहोशी जैसा महसूस होती है। लगातार बढ़ती कमजोरी को सिर्फ बुखार के बाद की थकान मानना सही नहीं है। अगर डेंगू के मरीज की अचानक सांस फूलने लगे या सांस लेने में दिक्कत हो तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।


    क्या कहते हैं डॉक्टर?

    डॉक्टर कहते हैं, डेंगू को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि बुखार उतर जाने पर अक्सर लोग मान लेते हैं कि बीमारी ठीक हो गई। हालांकि कई बार डेंगू के गंभीर संकेत अक्सर बुखार कम होने के 24 से 48 घंटे बाद दिखाई दे सकते हैं। इसलिए बुखार उतरने के बाद भी मरीज की सेहत पर लगातार ध्यान देते रहें। पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, खून आने, बहुत ज्यादा सुस्ती, बेचैनी या सांस लेने में परेशानी जैसे संकेत दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डेंगू में प्लेटलेट्स की जांच महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल प्लेटलेट्स काउंट से ही बीमारी की गंभीरता तय नहीं की जा सकती।

  • Amazon और Flipkart ने ऑर्डर कैंसलेशन नियम बदले, सेलर्स पर नए शुल्क और पेनल्टी का कितना पड़ेगा असर जानिए

    Amazon और Flipkart ने ऑर्डर कैंसलेशन नियम बदले, सेलर्स पर नए शुल्क और पेनल्टी का कितना पड़ेगा असर जानिए

    नई दिल्ली ।फेस्टिव सीजन से पहले Amazon और Flipkart ने अपने सेलर्स के लिए ऑर्डर पूरा करने और कैंसलेशन से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। इन बदलावों का उद्देश्य ग्राहकों के ऑर्डर समय पर पूरा कराने और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर डिलीवरी प्रक्रिया को अधिक भरोसेमंद बनाना है। हालांकि, छोटे और मध्यम कारोबारियों ने नए शुल्क और पेनल्टी से लागत बढ़ने की चिंता जताई है।

    Amazon ने Easy Ship और Self Ship मॉडल के तहत काम करने वाले सेलर्स के लिए कैंसलेशन फीस की गणना का तरीका बदला है। नया ढांचा 17 अगस्त से लागू किया गया है। Self Ship व्यवस्था में विक्रेता अपने स्तर पर उत्पाद की पैकिंग और डिलीवरी कराता है तथा अपनी कूरियर सेवा का इस्तेमाल करता है। इसमें Amazon की लॉजिस्टिक्स सेवा शामिल नहीं होती।

    नए नियम के तहत कैंसलेशन फीस अब ऑर्डर की कीमत के प्रतिशत के आधार पर निर्धारित होगी। 10 हजार रुपये से कम मूल्य वाले ऑर्डर पर सेलर से ऑर्डर वैल्यू का 10 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। 10,001 से 50 हजार रुपये तक के ऑर्डर पर यह शुल्क 8 प्रतिशत होगा।

    इसी तरह 50,001 रुपये से एक लाख रुपये तक के ऑर्डर पर कैंसलेशन फीस 5 प्रतिशत और एक लाख रुपये से अधिक मूल्य वाले ऑर्डर पर 2 प्रतिशत निर्धारित की गई है। इन शुल्कों के अतिरिक्त 18 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर भी लागू होगा।

    हालांकि, यह शुल्क प्रत्येक कैंसलेशन पर लागू नहीं होगा। ग्राहक की मांग पर किए गए कैंसलेशन को इससे अलग रखा गया है। शुल्क तब लागू होगा जब सेलर अपनी तरफ से किसी कारण से ऑर्डर कैंसिल करता है। इसके अलावा अनुमानित शिपिंग तारीख के 24 घंटे के भीतर सेलर द्वारा शिपमेंट भेजकर उसकी पुष्टि नहीं करने पर ऑर्डर अपने आप कैंसिल होने की स्थिति में भी शुल्क लगाया जा सकता है।

    Amazon की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि सेलर के नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों में होने वाले कैंसलेशन के लिए अलग व्यवस्था मौजूद है। कंपनी का कहना है कि उसका उद्देश्य सेलर्स को ग्राहकों के ऑर्डर भरोसेमंद तरीके से पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस तरह के सेलर-initiated कैंसलेशन प्लेटफॉर्म पर कुल ऑर्डर का एक प्रतिशत से भी कम हैं।

    दूसरी ओर Flipkart ने भी सेलर्स के लिए तीन स्तर वाली पेनल्टी व्यवस्था लागू की है। यह नया सिस्टम 23 अगस्त से प्रभावी हुआ है और इसका संबंध ऑर्डर को तय समयसीमा में डिस्पैच के लिए तैयार नहीं करने तथा बाद में कैंसिल होने जैसी स्थितियों से है।

    नए नियम के तहत यदि कोई ऑर्डर तय Dispatch By Date तक पिकअप के लिए तैयार नहीं होता है तो प्रति शिपमेंट 30 रुपये की पेनल्टी लग सकती है। यदि सेलर खुद ऑर्डर कैंसिल करता है या तीन बार डिस्पैच की समयसीमा चूकने के बाद ऑर्डर अपने आप कैंसिल होता है, तो प्रति शिपमेंट 60 रुपये का शुल्क लगाया जाएगा।

    यदि ऑर्डर में देरी होने के बाद वह कैंसिल हो जाता है तो पेनल्टी 90 रुपये प्रति शिपमेंट तक पहुंच सकती है। इससे पहले समयसीमा चूकने पर सेलर का अकाउंट कुछ अवधि के लिए लॉक होने जैसी कार्रवाई भी हो सकती थी।

    Flipkart ने नए सेलर्स को इस व्यवस्था से शुरुआती तीन महीनों तक बाहर रखा है। इसका उद्देश्य नए कारोबारियों को प्लेटफॉर्म की प्रक्रिया समझने और अपनी लॉजिस्टिक्स व्यवस्था तैयार करने के लिए समय देना है।

    दोनों कंपनियों के बदलाव ऐसे समय में आए हैं जब त्योहारी खरीदारी का सीजन शुरू होने वाला है और ऑनलाइन ऑर्डर में तेजी आने की संभावना रहती है। ग्राहकों के लिए इसका सीधा उद्देश्य समय पर ऑर्डर और बेहतर सेवा सुनिश्चित करना है, जबकि सेलर्स को अब स्टॉक, डिस्पैच और डिलीवरी समयसीमा की योजना पहले से अधिक सावधानी से बनानी होगी।

  • Oppo A7 Pro 5G में 8,000mAh बैटरी और 8GB RAM मिलने की संभावना, सर्टिफिकेशन लिस्टिंग से स्पेसिफिकेशन सामने आए

    Oppo A7 Pro 5G में 8,000mAh बैटरी और 8GB RAM मिलने की संभावना, सर्टिफिकेशन लिस्टिंग से स्पेसिफिकेशन सामने आए

    नई दिल्ली ।स्मार्टफोन बाजार में Oppo की A7 Pro सीरीज का विस्तार जल्द देखने को मिल सकता है। हाल ही में Oppo A7 Pro Max पेश किए जाने के बाद अब Oppo A7 Pro 5G को लेकर जानकारी सामने आई है। यह स्मार्टफोन कई सर्टिफिकेशन प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे चुका है, जिससे इसके संभावित डिजाइन और कुछ प्रमुख स्पेसिफिकेशन की जानकारी मिली है।

    Oppo A7 Pro 5G को मॉडल नंबर CPH2931 के साथ ब्राजील की राष्ट्रीय दूरसंचार एजेंसी ANATEL की लिस्टिंग में देखा गया है। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी इस मॉडल को कुछ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पेश करने की तैयारी कर रही है। हालांकि स्मार्टफोन के आधिकारिक लॉन्च की तारीख और कीमत को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

    सर्टिफिकेशन से जुड़ी जानकारी के अनुसार, Oppo A7 Pro 5G में 8,000mAh की बड़ी बैटरी दी जा सकती है। यदि यह क्षमता अंतिम मॉडल में मिलती है, तो फोन को लंबे बैटरी बैकअप की जरूरत वाले उपयोगकर्ताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जा सकता है। बड़ी बैटरी इस फोन की प्रमुख खासियतों में शामिल हो सकती है।

    स्मार्टफोन में 8GB RAM मिलने की संभावना जताई गई है। स्टोरेज के मामले में इसे 128GB और 256GB के दो विकल्पों में उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे उपयोगकर्ताओं को अपनी जरूरत के अनुसार स्टोरेज क्षमता चुनने का विकल्प मिल सकता है।

    डिस्प्ले को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक Oppo A7 Pro 5G में 6.57 इंच की स्क्रीन दी जा सकती है। हालांकि इसके पैनल का प्रकार, रिजॉल्यूशन और रिफ्रेश रेट जैसे विस्तृत स्पेसिफिकेशन अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। कंपनी की ओर से आधिकारिक पुष्टि होने के बाद इन जानकारियों की तस्वीर साफ होगी।

    फोन के डिजाइन में भी Oppo A7 Pro Max से अलग बदलाव देखने को मिल सकता है। सामने आई जानकारी के अनुसार A7 Pro 5G में कैप्सूल आकार का रियर कैमरा मॉड्यूल दिया जा सकता है। इस मॉड्यूल में दो कैमरा सेंसर के साथ रिंग जैसी फ्लैश यूनिट दिखाई देने की बात सामने आई है। संभावित ब्राउन कलर विकल्प का भी उल्लेख किया गया है।

    Oppo A7 Pro 5G इससे पहले थाईलैंड की NBTC और मलेशिया की SIRIM सर्टिफिकेशन वेबसाइट पर भी दिखाई दे चुका है। अलग-अलग देशों में सर्टिफिकेशन लिस्टिंग से यह संकेत मिलता है कि फोन की तैयारियां आगे बढ़ रही हैं, हालांकि इससे लॉन्च की निश्चित तारीख की पुष्टि नहीं होती।

    इस सीरीज के Oppo A7 Pro Max को हाल ही में चीन में पेश किया गया है। उसमें 6.78 इंच का Full-HD+ AMOLED डिस्प्ले, 120Hz रिफ्रेश रेट और 1,800 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस दी गई है। इसमें Snapdragon 4 Gen 5 प्रोसेसर और 50 मेगापिक्सल का मुख्य रियर कैमरा मौजूद है।

    A7 Pro Max में 2 मेगापिक्सल का मोनोक्रोम कैमरा और 50 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा भी दिया गया है। इसकी 10,000mAh बैटरी 80W वायर्ड फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है। हालांकि Oppo A7 Pro 5G के फीचर्स को A7 Pro Max के आधार पर तय नहीं किया जा सकता।

    Oppo A7 Pro 5G से जुड़ी मौजूदा जानकारी अभी संभावित स्पेसिफिकेशन तक सीमित है। कंपनी की आधिकारिक घोषणा के बाद इसके कैमरा, प्रोसेसर, चार्जिंग, डिस्प्ले और कीमत से संबंधित अंतिम जानकारी सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल 8,000mAh बैटरी, 8GB RAM और 128GB तथा 256GB स्टोरेज विकल्प इस आगामी स्मार्टफोन की प्रमुख चर्चित खूबियां हैं।

  • रक्षाबंधन पर घर में बनाएं खस्ता मावा गुजिया, मावे और ड्राई फ्रूट्स की भरावन से बढ़ेगा त्योहार का स्वाद

    रक्षाबंधन पर घर में बनाएं खस्ता मावा गुजिया, मावे और ड्राई फ्रूट्स की भरावन से बढ़ेगा त्योहार का स्वाद

    नई दिल्ली ।रक्षाबंधन का त्योहार भाई और बहन के रिश्ते में मिठास और अपनापन बढ़ाने वाला अवसर है। इस खास दिन पर घर में बनी मिठाई का स्वाद अलग ही होता है। अगर इस बार बाजार से मिठाई खरीदने के बजाय कुछ खास तैयार करना चाहती हैं तो मावा गुजिया एक अच्छा विकल्प हो सकती है।

    मावा गुजिया बाहर से कुरकुरी और अंदर से मुलायम तथा स्वादिष्ट होती है। इसकी भरावन में मावा, पिसी चीनी, काजू, बादाम, किशमिश और इलायची का इस्तेमाल किया जाता है। इन चीजों का मिश्रण गुजिया को पारंपरिक स्वाद के साथ खुशबूदार भी बनाता है।

    गुजिया बनाने के लिए सबसे पहले मैदा तैयार किया जाता है। दो कप मैदा में करीब दो बड़े चम्मच घी डालकर अच्छी तरह मिलाएं। घी और मैदा को हथेलियों के बीच रगड़कर देखें। अगर मिश्रण दबाने पर आसानी से बंधने लगे तो मोयन सही माना जा सकता है।

    इसके बाद थोड़ा थोड़ा पानी डालते हुए सख्त आटा गूंथ लें। गुजिया का आटा बहुत नरम नहीं होना चाहिए। आटा तैयार होने के बाद उसे ढककर करीब 15 से 20 मिनट के लिए रख दें। इससे आटा बेलने के लिए अच्छी तरह तैयार हो जाता है।

    अब गुजिया की भरावन तैयार करें। कड़ाही को धीमी आंच पर गर्म करके उसमें मावा डालें। मावे को लगातार चलाते हुए हल्का भूनें। इसका उद्देश्य मावे की अतिरिक्त नमी कम करना और उसकी खुशबू को उभारना है। मावा भुन जाने के बाद गैस बंद कर दें और उसे पूरी तरह ठंडा होने दें।

    मावा ठंडा होने के बाद इसमें पिसी चीनी, बारीक कटे काजू और बादाम, किशमिश तथा इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें। मावा गर्म रहते हुए चीनी डालने से भरावन अधिक गीली हो सकती है, इसलिए ठंडा होने के बाद ही चीनी मिलाना बेहतर रहता है।

    इसके बाद तैयार आटे को बराबर हिस्सों में बांटकर छोटी छोटी लोइयां बना लें। प्रत्येक लोई को बेलकर छोटी पूरी जैसा आकार दें। पूरी को बहुत ज्यादा पतला न रखें, क्योंकि पतली परत भरावन डालते समय आसानी से फट सकती है।

    अब पूरी के बीच में तैयार मावे की उचित मात्रा रखें। किनारे पर हल्का पानी लगाकर पूरी को मोड़ दें और अर्धचंद्राकार आकार में बंद करें। किनारों को उंगलियों से अच्छी तरह दबाएं, ताकि तलते समय भरावन बाहर न निकले।

    कड़ाही में तेल या घी गर्म करें और गुजिया को मध्यम से धीमी आंच पर तलें। तेज आंच पर तलने से बाहरी हिस्सा जल्दी भूरा हो सकता है, जबकि अंदर की परत ठीक से नहीं सिकती। धीमी आंच पर तलने से गुजिया अच्छी तरह कुरकुरी और सुनहरी बनती है।

    गुजिया सुनहरी होने के बाद उसे निकालकर अतिरिक्त तेल या घी निकलने दें। कुछ देर ठंडा होने के बाद इसे परिवार के साथ परोसा जा सकता है। ऊपर से बारीक कटे पिस्ते या बादाम डालने से इसका स्वाद और प्रस्तुति दोनों बेहतर हो सकते हैं।

    खस्ता मावा गुजिया के लिए सबसे जरूरी बात आटे की सही consistency, मावे को ठंडा करना और तलते समय उचित तापमान बनाए रखना है। इन बातों का ध्यान रखकर रक्षाबंधन पर घर में स्वादिष्ट और कुरकुरी मिठाई तैयार की जा सकती है।

  • खाना खाते ही सीने में जलन और गले में खट्टापन तो न करें नजरअंदाज डॉक्टर की सलाह से जानें क्या खाएं क्या नहीं

    खाना खाते ही सीने में जलन और गले में खट्टापन तो न करें नजरअंदाज डॉक्टर की सलाह से जानें क्या खाएं क्या नहीं


    नई दिल्ली। सीने या गले में जलन खट्टी डकार और मुंह में खट्टा स्वाद महसूस होना कई लोगों के लिए रोजमर्रा की परेशानी बन चुका है। आमतौर पर इसे एसिडिटी या एसिड रिफ्लक्स कहा जाता है। इसमें पेट का एसिड ऊपर की ओर खाने की नली में पहुंच जाता है जिससे सीने और गले में जलन महसूस हो सकती है। कई बार लोग इससे राहत पाने के लिए तुरंत दवा ले लेते हैं लेकिन अगर समस्या बार बार हो रही है तो केवल दवा पर निर्भर रहने के बजाय अपनी खानपान की आदतों और दिनचर्या पर ध्यान देना भी जरूरी है।

    एसिडिटी बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। बहुत ज्यादा खाना जल्दी जल्दी खाना तला भुना और अधिक तेल वाला भोजन ज्यादा चाय कॉफी या कैफीन वाले पेय पीना कार्बोनेटेड ड्रिंक लेना और भोजन के तुरंत बाद लेट जाना इसके लक्षणों को बढ़ा सकता है। लंबे समय तक खाली पेट रहने और भोजन का समय लगातार बदलने से भी कुछ लोगों को परेशानी हो सकती है। इसलिए सबसे पहले यह पहचानना जरूरी है कि कौन सी चीजें आपके लक्षणों को बढ़ाती हैं।

    अगर आपको बार बार एसिडिटी होती है तो बहुत ज्यादा मसालेदार भोजन से दूरी बनाना फायदेमंद हो सकता है। लाल मिर्च काली मिर्च हरी मिर्च और बहुत तीखी चटनी कुछ लोगों में सीने की जलन और एसिड रिफ्लक्स को बढ़ा सकती हैं। इसी तरह पकौड़े समोसे पूरी कचौरी फ्रेंच फ्राइज और दूसरी डीप फ्राइड चीजें भी परेशानी बढ़ा सकती हैं। अधिक फैट वाला भोजन पेट को लंबे समय तक भरा रख सकता है और कुछ लोगों में एसिड रिफ्लक्स के लक्षण बढ़ सकते हैं।

    चाय कॉफी एनर्जी ड्रिंक कोला और दूसरे कैफीन वाले पेय भी कुछ लोगों में एसिडिटी को ट्रिगर कर सकते हैं। संतरे या दूसरे बहुत खट्टे फलों का जूस और शराब भी कुछ लोगों में जलन बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा चॉकलेट पेपरमिंट टी मिंट कैंडी और मिंट वाली च्युइंग गम से भी कुछ लोगों में एसिड रिफ्लक्स की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे खाद्य पदार्थों को पूरी तरह छोड़ना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं होता लेकिन अगर किसी खास चीज को खाने के बाद लगातार लक्षण बढ़ते हैं तो उससे दूरी बनाना बेहतर है।

    एसिडिटी के दौरान डाइट में हल्के और कम एसिड वाले फल शामिल किए जा सकते हैं। केला पपीता तरबूज खरबूजा और नाशपाती जैसे फल कई लोगों के लिए अपेक्षाकृत हल्के विकल्प हो सकते हैं। इनमें पानी और फाइबर भी पाया जाता है जो संतुलित डाइट का हिस्सा बन सकते हैं। बहुत खट्टे फलों के बजाय ऐसे विकल्प चुनना कुछ लोगों के लिए अधिक आरामदायक हो सकता है।

    अनाज में ओट्स दलिया पोहा उबले या हल्के पके चावल और साबुत गेहूं जैसे विकल्प लिए जा सकते हैं। इन्हें कम तेल और हल्के मसालों के साथ खाना बेहतर रहता है। प्रोटीन के लिए मूंग दाल टोफू सोयाबीन और सीमित मात्रा में पनीर जैसे विकल्प लिए जा सकते हैं। भोजन को कम तेल में तैयार करना और एक बार में बहुत ज्यादा खाने के बजाय संतुलित मात्रा में भोजन करना भी मददगार हो सकता है।

    पानी की पर्याप्त मात्रा लेना भी जरूरी है। सादा पानी प्राथमिक विकल्प है जबकि कुछ लोगों को नारियल पानी छाछ या सौंफ का पानी भी आरामदायक लग सकता है। साथ ही भोजन के तुरंत बाद लेटने से बचना और नियमित समय पर भोजन करने की कोशिश करना जरूरी है। अगर सीने में जलन लगातार बनी रहती है बार बार होती है या निगलने में परेशानी उल्टी वजन कम होना अथवा सीने में तेज दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे सामान्य एसिडिटी समझकर नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से सलाह लें। खानपान में बदलाव व्यक्ति की समस्या और ट्रिगर के अनुसार अलग हो सकते हैं इसलिए लंबे समय से परेशानी होने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।

  • सिर्फ भाई की कलाई नहीं भाभी की चूड़ियों पर भी सजती है राखी जानिए लुंबा राखी की खास परंपरा और महत्व

    सिर्फ भाई की कलाई नहीं भाभी की चूड़ियों पर भी सजती है राखी जानिए लुंबा राखी की खास परंपरा और महत्व


    नई दिल्ली। रक्षाबंधन का त्योहार भाई और बहन के बीच प्रेम स्नेह और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी सुख समृद्धि तथा लंबी उम्र की कामना करती है। लेकिन भारत के अलग अलग हिस्सों में रक्षाबंधन से जुड़ी कई ऐसी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराएं भी हैं जो इस त्योहार को और खास बनाती हैं। इन्हीं में से एक है भाभी के लिए लुंबा राखी बांधने की परंपरा। सामान्य राखी से अलग दिखाई देने वाली लुंबा राखी खास तौर पर भाभी के लिए तैयार की जाती है और इसे कलाई के बजाय चूड़ियों या कंगन के साथ सजाया जाता है।

    लुंबा राखी का डिजाइन इसकी सबसे खास पहचान होता है। इसमें मोतियों लटकन कुंदन सजावटी धागों और अन्य खूबसूरत चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। सामान्य राखी की तरह इसे सीधे कलाई पर बांधने के बजाय भाभी की चूड़ियों या कंगन के साथ लटकाया जाता है। यही वजह है कि यह देखने में राखी और पारंपरिक आभूषण का खूबसूरत मेल लगती है। अलग अलग परिवारों और क्षेत्रों में इसके डिजाइन और इसे पहनने का तरीका अलग हो सकता है।

    अब सवाल उठता है कि आखिर भाभी को लुंबा राखी क्यों बांधी जाती है। दरअसल कुछ पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराओं में भाभी को परिवार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। शादी के बाद भाई के जीवन में उसकी पत्नी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और इसी रिश्ते को सम्मान देने के लिए कई परिवारों में बहन भाई के साथ भाभी को भी रक्षाबंधन के उत्सव में शामिल करती है। ननद द्वारा भाभी को लुंबा राखी देना उनके बीच स्नेह अपनापन और पारिवारिक जुड़ाव को दर्शाने वाली परंपरा के रूप में देखा जाता है।

    इस परंपरा का एक भावनात्मक पक्ष यह भी है कि भाई और उसकी पत्नी को परिवार में एक साथ सम्मान और अपनापन दिया जाए। रक्षाबंधन केवल भाई बहन के रिश्ते तक सीमित न रहकर परिवार के दूसरे रिश्तों को भी प्रेम के धागे से जोड़ने का अवसर बन जाता है। लुंबा राखी इसी भावना का प्रतीक मानी जाती है। इसके जरिए ननद अपनी भाभी के प्रति स्नेह और सम्मान व्यक्त करती है और दोनों के रिश्ते में अपनापन बढ़ाने का अवसर मिलता है।

    हालांकि यह समझना जरूरी है कि लुंबा राखी बांधने की परंपरा पूरे भारत में एक समान नहीं है। यह विशेष रूप से कुछ समुदायों क्षेत्रों और परिवारों में अधिक प्रचलित है। इसलिए इसे रक्षाबंधन की अनिवार्य रस्म नहीं माना जाता बल्कि क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपरा के तौर पर समझना बेहतर है। जिन परिवारों में यह परंपरा निभाई जाती है वहां लुंबा राखी त्योहार की खुशियों को और बढ़ा देती है।

    इस तरह रक्षाबंधन पर लुंबा राखी केवल एक खूबसूरत सजावटी राखी नहीं है बल्कि यह रिश्तों को सम्मान देने और परिवार में प्रेम तथा अपनापन बढ़ाने का माध्यम भी बनती है। भाई की कलाई पर बंधी राखी जहां भाई बहन के रिश्ते की मजबूती का प्रतीक है वहीं भाभी की चूड़ियों पर सजी लुंबा राखी ननद भाभी के रिश्ते में स्नेह और सम्मान की खूबसूरत कड़ी जोड़ती है।

  • डाइट कम करने के बाद भी नहीं रुक रहा वजन कहीं आप रोजाना ये गलतियां तो नहीं कर रहे

    डाइट कम करने के बाद भी नहीं रुक रहा वजन कहीं आप रोजाना ये गलतियां तो नहीं कर रहे


    नई दिल्ली। वजन कम करने की कोशिश करने वाले कई लोगों की शिकायत होती है कि वे पहले की तुलना में काफी कम खाना खा रहे हैं फिर भी वजन घटने के बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में अक्सर लोग सिर्फ अपनी प्लेट में मौजूद रोटी चावल या खाने की मात्रा को देखते हैं जबकि वजन बढ़ने की पूरी कहानी इससे कहीं ज्यादा बड़ी होती है। पूरे दिन में खाई जाने वाली छोटी छोटी चीजें शारीरिक गतिविधि नींद तनाव और कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी वजन पर असर डाल सकती हैं। इसलिए अगर कम खाने के बावजूद वजन बढ़ रहा है तो अपनी पूरी दिनचर्या पर नजर डालना जरूरी है।

    सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि केवल दो रोटी खाना कम भोजन करने का प्रमाण नहीं है। रोटी के साथ सब्जी में इस्तेमाल होने वाला तेल दाल में घी दही अचार मिठाई और दूसरी चीजें भी दिनभर की कुल कैलोरी बढ़ा सकती हैं। इसी तरह भोजन की मात्रा कम करने के बावजूद अगर चाय में ज्यादा चीनी बिस्किट नमकीन जूस सॉफ्ट ड्रिंक या दूसरे छोटे स्नैक्स बार बार लिए जा रहे हैं तो इनकी कुल कैलोरी वजन बढ़ने का कारण बन सकती है। इसलिए कुछ दिनों तक अपनी पूरी डाइट को नोट करना उपयोगी हो सकता है। इससे यह पता चल सकता है कि वास्तव में पूरे दिन में क्या और कितना खाया जा रहा है।

    दूसरी बड़ी वजह शारीरिक गतिविधि की कमी हो सकती है। अगर व्यक्ति कम खाना खाता है लेकिन दिनभर ऑफिस की कुर्सी पर बैठा रहता है मोबाइल या टीवी देखता है और पैदल चलना या व्यायाम बहुत कम करता है तो शरीर की कैलोरी खर्च करने की मात्रा भी कम हो सकती है। वजन को नियंत्रित रखने के लिए संतुलित भोजन के साथ रोजाना पर्याप्त शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है। छोटी दूरी पर पैदल चलना सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और नियमित व्यायाम जैसी आदतें दिनचर्या में शामिल की जा सकती हैं।

    नींद की कमी को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार कम सोने से भूख और पेट भरे होने से जुड़े संकेत प्रभावित हो सकते हैं। इसके कारण कुछ लोगों में ज्यादा खाने की इच्छा और मीठे या अधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों की क्रेविंग बढ़ सकती है। इसलिए वजन नियंत्रित करने की कोशिश में केवल डाइट पर ध्यान देने के बजाय पर्याप्त और नियमित नींद लेना भी जरूरी है।

    लगातार तनाव भी वजन बढ़ने की वजह बन सकता है। तनाव की स्थिति में कई लोगों को मीठा तला हुआ या जंक फूड खाने की इच्छा अधिक होती है। अगर तनाव के दौरान बार बार कुछ खाने की आदत बन जाए तो इसका असर धीरे धीरे वजन पर दिखाई दे सकता है। ऐसे में तनाव को नियंत्रित करने के लिए नियमित दिनचर्या पर्याप्त नींद शारीरिक गतिविधि और अपनी पसंद की आरामदायक गतिविधियों को समय देना मददगार हो सकता है।

    इसके अलावा कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी वजन बढ़ने से जुड़ी हो सकती हैं। अगर वजन बिना किसी स्पष्ट कारण के बढ़ रहा है और साथ में लगातार थकान ठंड ज्यादा लगना कब्ज त्वचा का रूखा होना या बाल झड़ने जैसी समस्याएं भी हैं तो थायरॉयड की जांच के लिए डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है। इसी तरह अगर वजन लगातार बढ़ रहा है या इसके साथ सूजन सांस फूलना अथवा दूसरे असामान्य लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है। वजन कम करने के लिए भोजन बहुत कम कर देना हमेशा सही तरीका नहीं होता। संतुलित डाइट पर्याप्त नींद नियमित शारीरिक गतिविधि और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी तरीका हो सकता है।

  • बच्चे का वजन उम्र के हिसाब से तेजी से बढ़ रहा है तो सावधान माता-पिता की ये 5 गलतियां पड़ सकती हैं भारी

    बच्चे का वजन उम्र के हिसाब से तेजी से बढ़ रहा है तो सावधान माता-पिता की ये 5 गलतियां पड़ सकती हैं भारी


    नई दिल्ली। बच्चों में बढ़ता मोटापा आज कई माता-पिता के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। अक्सर बच्चे का वजन बढ़ने पर परिवार इसे अच्छी सेहत या ज्यादा खाने का संकेत मान लेता है लेकिन अगर वजन उम्र और लंबाई के अनुपात में तेजी से बढ़ रहा है तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। बचपन का मोटापा आगे चलकर डायबिटीज हाई ब्लड प्रेशर नींद से जुड़ी परेशानियों और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। बच्चों की खानपान और दिनचर्या की आदतें बनाने में माता-पिता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में कुछ ऐसी गलतियां हैं जिन्हें अनजाने में माता-पिता रोजाना दोहराते हैं और उनका असर बच्चे के वजन पर पड़ सकता है।

    सबसे पहली गलती है बच्चे को मोबाइल टीवी टैबलेट या वीडियो गेम में लंबे समय तक व्यस्त रखना। स्क्रीन के सामने ज्यादा समय बिताने से बच्चों की शारीरिक गतिविधि कम हो सकती है। खेलना दौड़ना चलना और बाहर की गतिविधियों में समय देने के बजाय अगर बच्चा ज्यादातर समय स्क्रीन पर बिताता है तो उसकी रोजाना की सक्रियता प्रभावित होती है। माता-पिता को बच्चों की उम्र के अनुसार खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों के लिए पर्याप्त समय तय करना चाहिए।

    दूसरी बड़ी समस्या बार बार पैकेज्ड और जंक फूड देना है। चिप्स बिस्किट पिज्जा बर्गर इंस्टेंट नूडल्स मिठाइयां और मीठे पेय बच्चों को स्वादिष्ट लगते हैं लेकिन इनका लगातार सेवन उनकी कुल कैलोरी बढ़ा सकता है। घर में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ फल सब्जियां दालें साबुत अनाज और अन्य संतुलित विकल्पों को बच्चों की नियमित डाइट का हिस्सा बनाना जरूरी है। जंक फूड को रोजाना की आदत बनाने के बजाय कभी कभी सीमित मात्रा में देना बेहतर तरीका हो सकता है।

    तीसरी गलती बच्चे को उसकी इच्छा से ज्यादा खाने के लिए मजबूर करना है। कई माता-पिता प्लेट पूरी कराने के लिए बच्चे पर दबाव डालते हैं। इससे बच्चा अपनी भूख और पेट भरने के प्राकृतिक संकेतों को समझने में कठिनाई महसूस कर सकता है। खाने को इनाम या सजा के तौर पर इस्तेमाल करने से भी बचना चाहिए। बच्चों को संतुलित भोजन उपलब्ध कराने के साथ उनकी भूख के संकेतों का सम्मान करना जरूरी है।

    चौथी गलती नींद की अनदेखी करना है। देर रात तक मोबाइल चलाना टीवी देखना या रोज अलग समय पर सोने की आदत बच्चों की नींद को प्रभावित कर सकती है। पर्याप्त और नियमित नींद बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए जरूरी है और कम या अनियमित नींद वजन बढ़ने समेत कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी हो सकती है। इसलिए बच्चों के लिए उम्र के अनुसार नियमित सोने और जागने का समय तय करना चाहिए।

    पांचवीं और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चे वही आदतें जल्दी सीखते हैं जो उन्हें अपने घर में दिखाई देती हैं। अगर माता-पिता खुद लगातार जंक फूड खाते हैं कम सक्रिय रहते हैं या देर रात तक जागते हैं तो बच्चे भी ऐसी दिनचर्या अपना सकते हैं। इसलिए बच्चे का वजन नियंत्रित करने के लिए केवल उसे नियम बताना पर्याप्त नहीं है बल्कि पूरे परिवार को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की कोशिश करनी चाहिए। यदि बच्चे का वजन लगातार तेजी से बढ़ रहा है तो डॉक्टर या बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना भी उचित रहेगा।