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  • हाई BP को हल्के में न लें! शरीर में बढ़ता दबाव इन वजहों से हो सकता है खतरनाक, जानें बचाव के आसान तरीके

    हाई BP को हल्के में न लें! शरीर में बढ़ता दबाव इन वजहों से हो सकता है खतरनाक, जानें बचाव के आसान तरीके


    नई दिल्ली । ब्लड प्रेशर यानी रक्तचाप का बढ़ना आज के समय में एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। कई बार लोगों को पता भी नहीं चलता कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं होते। इसी वजह से हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर भी कहा जाता है। सामान्य स्थिति में रक्तचाप शरीर में खून के प्रवाह को बनाए रखने के लिए जरूरी होता है लेकिन जब यह लंबे समय तक सामान्य स्तर से अधिक बना रहे तो हृदय और रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ सकता है।

    ब्लड प्रेशर बढ़ने की एक बड़ी वजह खराब लाइफस्टाइल हो सकती है। आजकल लोगों की दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि कम हो गई है और लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत बढ़ गई है। नियमित व्यायाम की कमी से वजन बढ़ सकता है और मोटापे के कारण हाई BP का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा खाने में ज्यादा नमक का सेवन भी कुछ लोगों में रक्तचाप बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है। पैकेज्ड फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन में सोडियम की मात्रा अधिक हो सकती है इसलिए ऐसे खाद्य पदार्थों का ज्यादा सेवन सीमित रखना बेहतर माना जाता है।

    तनाव भी ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकता है। जब व्यक्ति लंबे समय तक तनाव में रहता है तो शरीर में ऐसे हार्मोन सक्रिय होते हैं जो कुछ समय के लिए हृदय की धड़कन और रक्तचाप बढ़ा सकते हैं। लगातार तनाव बना रहने पर यह समस्या और गंभीर हो सकती है। इसके साथ ही नींद पूरी न होना भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। नियमित रूप से कम नींद लेने वाले लोगों में हाई BP का खतरा बढ़ सकता है।

    धूम्रपान और तंबाकू का सेवन भी रक्त वाहिकाओं पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इसी तरह अत्यधिक शराब का सेवन कुछ लोगों में रक्तचाप बढ़ने से जुड़ा हो सकता है। इसलिए BP को नियंत्रित रखने के लिए इन आदतों से दूरी बनाना महत्वपूर्ण है।

    कई बार हाई ब्लड प्रेशर के पीछे दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं या कुछ दवाएं भी कारण हो सकती हैं। किडनी से जुड़ी समस्याएं हार्मोन संबंधी परेशानियां और कुछ अन्य स्थितियां रक्तचाप को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए अगर किसी व्यक्ति का BP बार बार बढ़ रहा है तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

    ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए संतुलित भोजन नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद और तनाव को कम करने वाली स्वस्थ आदतें अपनाना फायदेमंद हो सकता है। खाने में नमक की मात्रा सीमित रखना फल सब्जियां और साबुत अनाज जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करना भी मददगार हो सकता है। साथ ही डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से BP की जांच करवानी चाहिए।

    अगर BP बहुत ज्यादा बढ़ जाए और इसके साथ तेज सिरदर्द सीने में दर्द सांस लेने में परेशानी कमजोरी बोलने में दिक्कत या दिखाई देने में परेशानी जैसे गंभीर लक्षण हों तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। हाई BP का सही कारण जानने और उचित उपचार के लिए चिकित्सकीय सलाह सबसे जरूरी है। यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है और किसी डॉक्टर की व्यक्तिगत सलाह का विकल्प नहीं है।

  • MP में मानसून ट्रिप का है प्लान तो इन जगहों पर जरूर जाएं! झरनों से लेकर जंगल और किलों तक मिलेगा शानदार नजारा

    MP में मानसून ट्रिप का है प्लान तो इन जगहों पर जरूर जाएं! झरनों से लेकर जंगल और किलों तक मिलेगा शानदार नजारा

    नई दिल्ली । मानसून का मौसम आते ही मध्य प्रदेश की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। बारिश की बूंदों के साथ पहाड़ों पर छाई हरियाली बहते झरने जंगलों की ताजगी और बादलों से घिरे खूबसूरत नजारे लोगों को घूमने के लिए आकर्षित करते हैं। अगर आप भी बारिश के मौसम में परिवार दोस्तों या पार्टनर के साथ घूमने का प्लान बना रहे हैं तो मध्य प्रदेश आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है। प्रदेश में ऐसी कई जगहें हैं जहां मानसून के दौरान प्रकृति अपने सबसे खूबसूरत रूप में नजर आती है।

    मानसून ट्रैवल के लिए सबसे लोकप्रिय जगहों में पचमढ़ी का नाम सबसे ऊपर आता है। सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच बसा पचमढ़ी बारिश के मौसम में हरियाली से ढक जाता है। यहां पहाड़ों के बीच बादलों का नजारा और झरनों का बहता पानी पर्यटकों को खास अनुभव देता है। बी फॉल्स रजत प्रपात और जटाशंकर जैसी जगहों पर बारिश के दौरान प्राकृतिक सुंदरता और भी बढ़ जाती है। हालांकि झरनों के पास जाते समय स्थानीय प्रशासन की सुरक्षा गाइडलाइन का पालन करना जरूरी है।

    इंदौर के आसपास रहने वाले लोगों के लिए पातालपानी मानसून में घूमने की अच्छी जगह हो सकती है। बारिश के दौरान यहां का झरना और आसपास की हरियाली मन मोह लेती है। दोस्तों और परिवार के साथ एक दिन की ट्रिप के लिए यह जगह आकर्षक विकल्प बन सकती है। तेज बारिश के समय पानी का बहाव अचानक बढ़ सकता है इसलिए झरने के बेहद करीब जाने से बचना चाहिए।

    जबलपुर की बात करें तो भेड़ाघाट मानसून में अलग ही रूप में नजर आता है। नर्मदा नदी के किनारे संगमरमर की ऊंची चट्टानें और आसपास का प्राकृतिक वातावरण बारिश के बाद बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। धुआंधार जलप्रपात भी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। पानी का प्रवाह बढ़ने पर इसका नजारा और ज्यादा प्रभावशाली हो सकता है लेकिन यहां भी सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय निर्देशों का ध्यान रखना जरूरी है।

    मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले का तामिया भी मानसून ट्रैवल के लिए बेहतरीन विकल्प माना जाता है। पहाड़ियों घाटियों और घने जंगलों से घिरा यह इलाका बारिश के मौसम में बेहद हरा भरा नजर आता है। यहां से दिखाई देने वाले प्राकृतिक दृश्य और शांत वातावरण उन लोगों को खास पसंद आ सकते हैं जो भीड़भाड़ से दूर कुछ समय बिताना चाहते हैं।

    इसके अलावा मांडू भी बारिश के मौसम में घूमने के लिए आकर्षक जगह है। ऐतिहासिक इमारतों के साथ हरियाली और बादलों का मेल यहां के नजारों को खास बना देता है। भोपाल के आसपास भोजपुर और केरवा जैसे स्थान भी बारिश के दौरान प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करते हैं।

    हालांकि मानसून में यात्रा करते समय खूबसूरत नजारों के साथ सुरक्षा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। नदी झरने और जलप्रपात के पास सेल्फी लेने के लिए जोखिम उठाने से बचें। मौसम का पूर्वानुमान देखकर यात्रा की योजना बनाएं और रास्तों की स्थिति की जानकारी पहले हासिल करें। इस तरह थोड़ी सावधानी के साथ मध्य प्रदेश का मानसून ट्रिप खूबसूरत यादों से भरपूर बनाया जा सकता है।

  • रक्षाबंधन पर गिफ्ट खरीदना रह गया तो घबराएं नहीं, क्विक कॉमर्स ऐप्स से मिनटों में चॉकलेट, फूल और मिठाई मंगाएं

    रक्षाबंधन पर गिफ्ट खरीदना रह गया तो घबराएं नहीं, क्विक कॉमर्स ऐप्स से मिनटों में चॉकलेट, फूल और मिठाई मंगाएं

    नई दिल्ली ।रक्षाबंधन के मौके पर भाई या बहन के लिए उपहार खरीदना अगर आखिरी समय तक टल गया है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्विक कॉमर्स सेवाओं के जरिए घर बैठे कुछ ही समय में कई तरह के गिफ्टिंग विकल्प तलाशे जा सकते हैं। चॉकलेट, मिठाई, फूल और केक से लेकर ब्यूटी, ग्रूमिंग और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले सामान तक कई विकल्प अलग-अलग इलाकों में उपलब्ध हो सकते हैं।

    आखिरी समय में गिफ्ट ऑर्डर करने से पहले सबसे जरूरी बात अपने इलाके में उपलब्धता देखना है। संबंधित ऐप खोलकर लोकेशन दर्ज करने के बाद यह जांचना चाहिए कि चुना हुआ सामान आसपास के स्टोर में मौजूद है या नहीं। इसके साथ ही ऐप पर दिखाई जा रही अनुमानित डिलीवरी अवधि को भी देखना जरूरी है।

    Blinkit जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर रक्षाबंधन के लिए कई तरह के छोटे और तुरंत दिए जा सकने वाले उपहार मिल सकते हैं। चॉकलेट, मिठाई, फूल और केक के अलावा स्नैक्स, ब्यूटी तथा पर्सनल केयर से जुड़े उत्पाद भी विकल्प हो सकते हैं। भाई या बहन की पसंद को ध्यान में रखते हुए उपयोगी सामान चुनना आखिरी समय में भी बेहतर गिफ्ट तैयार करने का आसान तरीका हो सकता है।

    Zepto पर भी अलग-अलग क्षेत्रों में गिफ्टिंग से जुड़े कई उत्पाद उपलब्ध हो सकते हैं। चॉकलेट और दूसरे खाद्य उत्पादों के अलावा परफ्यूम, ब्यूटी तथा ग्रूमिंग से जुड़े सामान और रोजाना काम आने वाले उत्पादों को भी उपहार के तौर पर चुना जा सकता है। हालांकि हर इलाके में हर उत्पाद उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं है।

    Swiggy Instamart भी आखिरी समय में गिफ्ट तलाशने वालों के लिए एक विकल्प हो सकता है। यहां उपलब्धता के आधार पर चॉकलेट, मिठाई, फूल, स्नैक्स और अन्य छोटे गिफ्टिंग आइटम देखे जा सकते हैं। भाई या बहन की पसंद की अलग-अलग चीजें एक साथ मंगाकर छोटा सा गिफ्ट कॉम्बिनेशन भी तैयार किया जा सकता है।

    हालांकि क्विक डिलीवरी का मतलब यह नहीं है कि हर ऑर्डर निश्चित रूप से 15 मिनट में पहुंच जाएगा। डिलीवरी का समय ग्राहक की लोकेशन, आसपास उपलब्ध स्टॉक, ऑर्डर की संख्या और उस समय की स्थानीय मांग पर निर्भर करता है। रक्षाबंधन जैसे त्योहारों पर ऑर्डर की संख्या बढ़ने के कारण कुछ क्षेत्रों में सामान्य समय से अधिक देरी भी हो सकती है।

    इसीलिए ऑर्डर करने से पहले अनुमानित डिलीवरी समय जरूर जांचना चाहिए। यदि राखी बांधने या परिवार के साथ मिलने का समय बेहद करीब है, तो ऐसा सामान चुनना बेहतर हो सकता है जिसकी उपलब्धता स्पष्ट हो और जिसकी अनुमानित डिलीवरी निर्धारित समय से पहले दिखाई दे रही हो।

    गिफ्ट चुनने में ज्यादा समय नहीं है तो चॉकलेट, मिठाई, फूल और केक आसान विकल्प हो सकते हैं। इनके अलावा परफ्यूम, स्किन केयर, ग्रूमिंग उत्पाद, कॉफी और स्नैक कॉम्बो या भाई-बहन की पसंद का कोई छोटा उपयोगी सामान भी चुना जा सकता है। बजट के अनुसार एक से अधिक छोटी चीजों को मिलाकर व्यक्तिगत गिफ्ट तैयार किया जा सकता है।

    रक्षाबंधन पर आखिरी समय में खरीदारी करने वालों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात जल्दबाजी में केवल डिलीवरी स्पीड देखकर ऑर्डर करना नहीं, बल्कि उपलब्धता, कीमत और अनुमानित डिलीवरी समय की जांच करना है। सही विकल्प चुनकर कम समय में भी भाई या बहन के लिए उपयोगी और पसंद आने वाला उपहार मंगाया जा सकता है।

  • चूहों को बिना मारे घर से भगाने के आसान उपाय, खाने की चीजें सुरक्षित रखने और प्रवेश के रास्ते बंद करने से घटेगा खतरा

    चूहों को बिना मारे घर से भगाने के आसान उपाय, खाने की चीजें सुरक्षित रखने और प्रवेश के रास्ते बंद करने से घटेगा खतरा

    नई दिल्ली । घर में चूहों की मौजूदगी छोटी परेशानी से शुरू होकर धीरे धीरे बड़ी समस्या बन सकती है। चूहे खाने की चीजों को दूषित करने के अलावा कपड़ों, फर्नीचर और बिजली के तारों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में कई लोग उन्हें मारने के बजाय घर से दूर रखने के घरेलू उपाय तलाशते हैं। हालांकि, हर इंटरनेट आधारित नुस्खा सुरक्षित नहीं होता और किसी भी जहरीले या रासायनिक पदार्थ को खाने वाली चीज में मिलाकर चूहों को खिलाना नुकसानदायक हो सकता है।

    चूहों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका उनके लिए घर में भोजन और सुरक्षित ठिकाने की उपलब्धता कम करना है। रसोई में खुले में रखे अनाज, बिस्किट, सूखे मेवे और अन्य खाद्य पदार्थों को ढक्कन वाले मजबूत डिब्बों में रखना चाहिए। खाने के बाद बचे टुकड़ों को तुरंत साफ करना और रात में रसोई को अच्छी तरह साफ करके रखना भी जरूरी है।

    चूहे अक्सर सिंक के नीचे, रसोई की अलमारियों के पीछे, स्टोर रूम, पाइप के आसपास और दरवाजों के नीचे मौजूद छोटे रास्तों से घर में प्रवेश कर सकते हैं। इसलिए इन स्थानों की नियमित जांच करनी चाहिए। दीवार में दिखाई देने वाले छोटे छेद, दरार या पाइप के आसपास की खाली जगह को उपयुक्त सामग्री से बंद करना घर में उनकी आवाजाही रोकने का महत्वपूर्ण उपाय है।

    घर में बेकार सामान, पुराने डिब्बे, कागज और कबाड़ लंबे समय तक जमा रहने पर चूहों को छिपने की जगह मिल सकती है। स्टोर रूम और रसोई के आसपास अनावश्यक सामान को व्यवस्थित रखना चाहिए। सफाई के दौरान उन कोनों और जगहों पर भी ध्यान देना जरूरी है, जहां आमतौर पर पहुंचना मुश्किल होता है।

    कुछ घरेलू उपायों में तेज गंध वाली चीजों का इस्तेमाल चूहों को किसी स्थान से दूर रखने के लिए किया जाता है, लेकिन इनकी प्रभावशीलता हर स्थिति में समान नहीं होती। खासकर फिनाइल, डिटर्जेंट या अन्य रासायनिक पदार्थों को आटे, चीनी या घी जैसी खाने की चीजों में मिलाकर चूहों के लिए रखना सुरक्षित तरीका नहीं माना जाना चाहिए। ऐसे मिश्रण बच्चों और पालतू जानवरों के लिए भी जोखिम पैदा कर सकते हैं।

    यदि चूहे पहले से घर में मौजूद हैं, तो उन्हें पकड़कर सुरक्षित तरीके से बाहर छोड़ने वाले उपयुक्त मानवीय ट्रैप का इस्तेमाल किया जा सकता है। ट्रैप को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां बच्चे या पालतू जानवर आसानी से न पहुंच सकें। समस्या ज्यादा होने पर प्रशिक्षित कीट नियंत्रण विशेषज्ञ की सहायता लेना बेहतर विकल्प हो सकता है।

    घर में चूहों की संख्या कम करने के लिए केवल उन्हें भगाने पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। यदि भोजन आसानी से उपलब्ध रहेगा और प्रवेश के रास्ते खुले रहेंगे, तो चूहे दोबारा घर में आ सकते हैं। इसलिए सफाई, भोजन का सुरक्षित भंडारण और प्रवेश मार्गों को बंद करना एक साथ जरूरी है।

    रसोई की नियमित सफाई के अलावा कूड़ेदान को खुला नहीं छोड़ना चाहिए। रातभर सिंक में गंदे बर्तन और खाने के अवशेष पड़े रहने से भी चूहों को आकर्षण मिल सकता है। घर के बाहर भी कचरा और भोजन के अवशेष जमा नहीं होने देने चाहिए।

    इस तरह चूहों को बिना मारे दूर रखने के लिए सबसे सुरक्षित रणनीति उनके भोजन, पानी और छिपने की जगहों को सीमित करना है। साथ ही घर में मौजूद संभावित प्रवेश मार्गों को बंद करके समस्या की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती है। रासायनिक पदार्थों वाले ऐसे घरेलू नुस्खों से बचना बेहतर है जिनसे चूहों, बच्चों या पालतू जानवरों को नुकसान पहुंचने का खतरा हो।

  • रक्षाबंधन पर बदल रहा गिफ्ट का अंदाज, Gen-Z चॉकलेट और गैजेट्स की जगह भाई-बहन को हेल्थ इंश्योरेंस दे रहा

    रक्षाबंधन पर बदल रहा गिफ्ट का अंदाज, Gen-Z चॉकलेट और गैजेट्स की जगह भाई-बहन को हेल्थ इंश्योरेंस दे रहा

    नई दिल्ली । रक्षाबंधन भाई और बहन के बीच प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के रिश्ते का पर्व माना जाता है। समय के साथ इस त्योहार पर उपहार देने का तरीका भी बदल रहा है। युवा पीढ़ी खासकर Gen-Z अब केवल चॉकलेट, मिठाई, कपड़े या गैजेट देने के बजाय ऐसे उपहारों पर विचार कर रही है, जिनका लंबे समय तक आर्थिक लाभ मिल सके। इसी बदलाव के बीच हेल्थ इंश्योरेंस को रक्षाबंधन के एक नए और उपयोगी उपहार के रूप में देखा जा रहा है।

    बीमा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक उपहारों पर त्योहार के दौरान कुछ हजार रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल सीमित समय तक ही रहता है। इसके विपरीत स्वास्थ्य बीमा ऐसा वित्तीय सुरक्षा साधन हो सकता है, जो बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने जैसी परिस्थितियों में आर्थिक बोझ कम करने में मदद करता है। यही वजह है कि युवा वर्ग त्योहार के उपहार को भविष्य की सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है।

    इस बदलाव को समझाने के लिए एक उदाहरण दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति रक्षाबंधन पर करीब 7,000 रुपये चॉकलेट, मिठाई या किसी अन्य उपहार पर खर्च करता है, तो यह राशि कुछ समय बाद पूरी तरह खर्च हो जाती है। वहीं इसी स्तर के खर्च को उपयुक्त स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के प्रीमियम के तौर पर इस्तेमाल करने पर भाई या बहन के लिए स्वास्थ्य संबंधी वित्तीय सुरक्षा तैयार की जा सकती है।

    बताया गया है कि लगभग 7,000 रुपये के वार्षिक प्रीमियम में परिस्थितियों और पॉलिसी की शर्तों के अनुसार 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर उपलब्ध हो सकता है। हालांकि वास्तविक प्रीमियम उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, शहर, बीमा कंपनी, कवरेज, पॉलिसी की शर्तों और अन्य कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इसलिए किसी भी पॉलिसी को लेने से पहले उसके लाभ, सीमाएं, प्रतीक्षा अवधि और बहिष्करण को समझना जरूरी है।

    मासिक हिसाब से देखें तो 7,000 रुपये का सालाना खर्च 600 रुपये से भी कम बैठता है। युवा उपभोक्ताओं के लिए यह राशि नियमित छोटे खर्चों के मुकाबले कम या समान हो सकती है। इसी सोच के कारण हेल्थ इंश्योरेंस को केवल बीमा उत्पाद नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य के लिए जिम्मेदारी और आर्थिक सुरक्षा के तौर पर पेश किया जा रहा है।

    स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत भी इस बदलाव के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण मानी जा रही है। अस्पताल में भर्ती होने, जांच, दवाओं और उपचार पर होने वाला खर्च परिवार के बजट पर अचानक दबाव डाल सकता है। ऐसे समय में पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध होने पर पॉलिसी की शर्तों के अनुसार पात्र चिकित्सा खर्चों का भुगतान बीमा के माध्यम से किया जा सकता है।

    हालांकि हेल्थ इंश्योरेंस को रक्षाबंधन के उपहार के रूप में चुनते समय केवल प्रीमियम की रकम पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। बीमा राशि, नेटवर्क अस्पताल, कमरे के किराये की सीमा, सह-भुगतान, प्रतीक्षा अवधि, पहले से मौजूद बीमारियों से जुड़े नियम और क्लेम प्रक्रिया जैसी बातों की जानकारी लेना जरूरी है। कम प्रीमियम वाली पॉलिसी हमेशा सबसे बेहतर विकल्प हो, यह जरूरी नहीं है।

    रक्षाबंधन के अवसर पर उपहारों का यह बदलता स्वरूप बताता है कि युवा पीढ़ी भावनात्मक रिश्तों के साथ वित्तीय योजना को भी महत्व दे रही है। चॉकलेट या मिठाई जैसे पारंपरिक उपहार अपनी जगह कायम हैं, लेकिन स्वास्थ्य बीमा जैसा विकल्प लंबे समय की जरूरतों को ध्यान में रखने वाला उपहार बन सकता है। सही पॉलिसी और पर्याप्त कवरेज का चुनाव भाई-बहन के रिश्ते में सुरक्षा की भावना को आर्थिक रूप भी दे सकता है।

  • चेहरे की डलनेस और टैनिंग से परेशान हैं तो पपीता आजमाएं, स्किन केयर में ऐसे करें इस्तेमाल

    चेहरे की डलनेस और टैनिंग से परेशान हैं तो पपीता आजमाएं, स्किन केयर में ऐसे करें इस्तेमाल


    नई दिल्ली ।
    पपीता सिर्फ स्वादिष्ट फल ही नहीं बल्कि स्किन केयर के लिए भी एक आसान घरेलू विकल्प माना जाता है। अगर चेहरा बेजान नजर आने लगा है त्वचा पर टैनिंग दिखाई दे रही है या स्किन की चमक कम हो गई है तो पपीते का इस्तेमाल किया जा सकता है। पपीते में पपेन नामक एंजाइम पाया जाता है जो त्वचा की सतह पर जमा मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा इसमें विटामिन ए और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं जो त्वचा की देखभाल में उपयोगी माने जाते हैं। यही वजह है कि पपीते को कई घरेलू स्किन केयर उपायों में शामिल किया जाता है।

    पपीते को चेहरे पर लगाने का सबसे आसान तरीका इसका फेस पैक बनाना है। इसके लिए पके हुए पपीते का थोड़ा सा गूदा लेकर अच्छी तरह मैश कर लें। इसे साफ चेहरे पर हल्की परत के रूप में लगाएं और करीब 10 से 15 मिनट तक लगा रहने दें। इसके बाद सामान्य पानी से चेहरा धो लें। पपीते का यह इस्तेमाल त्वचा को मुलायम महसूस कराने और चेहरे की डलनेस कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को इसे पूरे चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए।

    अगर त्वचा बहुत ज्यादा रूखी रहती है तो पपीते में थोड़ा शहद मिलाकर फेस पैक तैयार किया जा सकता है। शहद त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद करता है जबकि पपीते में मौजूद एंजाइम त्वचा की सतह से मृत कोशिकाओं को हटाने में सहायक हो सकते हैं। इस मिश्रण को चेहरे पर लगाने के बाद ज्यादा देर तक न रखें और कुछ समय बाद पानी से धो लें। वहीं तैलीय त्वचा वाले लोग पपीते के साथ थोड़ी मात्रा में दही का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे त्वचा को ठंडक और नमी मिल सकती है।

    पपीते का इस्तेमाल त्वचा को एक्सफोलिएट करने के लिए भी किया जाता है लेकिन इसे चेहरे पर जोर से रगड़ना सही नहीं है। खासकर अगर त्वचा पर मुंहासे हैं लालिमा है कट लगा है या जलन हो रही है तो पपीते का इस्तेमाल करने से बचना बेहतर है। प्राकृतिक चीज होने का मतलब यह नहीं है कि वह हर व्यक्ति की त्वचा के लिए सुरक्षित ही होगी। इसलिए पहली बार इस्तेमाल करने से पहले हाथ के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना जरूरी है।

    स्किन केयर में केवल फेस पैक लगाना ही पर्याप्त नहीं है। त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना अच्छी नींद लेना और धूप से त्वचा को बचाना भी जरूरी है। दिन में बाहर निकलते समय सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि लगातार धूप में रहने से टैनिंग और त्वचा संबंधी दूसरी परेशानियां बढ़ सकती हैं।

    यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि पपीते से तुरंत किसी चमत्कारी नतीजे की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। इसका असर व्यक्ति की त्वचा के प्रकार और इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर कर सकता है। अगर त्वचा पर लगातार दाने खुजली लालिमा या जलन जैसी समस्या बनी हुई है तो घरेलू उपायों के बजाय त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। कुल मिलाकर सही तरीके और सावधानी के साथ पपीता आपके सामान्य स्किन केयर रूटीन का एक आसान घरेलू हिस्सा बन सकता है।

  • दिल की सेहत के लिए कौन सा तेल बेहतर, सरसों, जैतून और तिल के तेल समेत जानिए विशेषज्ञ की सलाह

    दिल की सेहत के लिए कौन सा तेल बेहतर, सरसों, जैतून और तिल के तेल समेत जानिए विशेषज्ञ की सलाह

    नई दिल्ली ।खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाला तेल हमारी रोजमर्रा की डाइट का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में किस तरह के तेल का इस्तेमाल किया जाए और उसकी कितनी मात्रा ली जाए, यह सवाल लगातार चर्चा में रहता है। रिफाइंड तेल को लेकर भी कई तरह के दावे किए जाते हैं, लेकिन किसी एक तेल को सीधे तौर पर दिल के लिए जहर कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं माना जा सकता। तेल का असर उसके प्रकार, फैटी एसिड की संरचना, इस्तेमाल की मात्रा और पूरी डाइट पर निर्भर करता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक मात्रा में वसा का सेवन, खासकर संतृप्त और ट्रांस फैट की अधिकता, लंबे समय में कोलेस्ट्रॉल और हृदय संबंधी जोखिम को प्रभावित कर सकती है। इसलिए केवल तेल बदलना ही पर्याप्त नहीं है। भोजन में तेल की कुल मात्रा, तली हुई चीजों का सेवन और व्यक्ति की पूरी जीवनशैली भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    घी भारतीय रसोई में लंबे समय से इस्तेमाल होता आया है। इसमें वसा के साथ कुछ वसा में घुलने वाले विटामिन भी पाए जाते हैं। हालांकि घी में संतृप्त वसा की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में लेना बेहतर माना जाता है। स्वस्थ व्यक्ति भी इसे जरूरत से ज्यादा लेने के बजाय संतुलित डाइट का हिस्सा बना सकता है।

    मक्खन भी वसा का स्रोत है और इसे भोजन में स्वाद के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन मक्खन में भी संतृप्त वसा पर्याप्त मात्रा में होती है। इसलिए इसे रिफाइंड तेल का असीमित विकल्प मानना उचित नहीं होगा। विशेष रूप से हृदय रोग, उच्च कोलेस्ट्रॉल या अन्य जोखिम वाले लोगों को अपने आहार में मक्खन और घी की मात्रा तय करने के लिए चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

    सरसों का तेल भारतीय भोजन में लंबे समय से लोकप्रिय रहा है। इसमें मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड पाए जाते हैं। इसमें अल्फा लिनोलेनिक एसिड भी मौजूद होता है। संतुलित मात्रा में इसका इस्तेमाल कई भारतीय व्यंजनों में किया जा सकता है। तेल खरीदते समय गुणवत्ता, शुद्धता और खाद्य सुरक्षा मानकों पर ध्यान देना भी जरूरी है।

    ऑलिव ऑयल को भी हृदय के अनुकूल वसा के विकल्पों में शामिल किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से मोनोअनसैचुरेटेड फैट पाया जाता है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट यौगिक मौजूद होते हैं। खासकर एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल को बिना अत्यधिक गर्म किए इस्तेमाल करने से इसके प्राकृतिक घटकों का लाभ मिल सकता है।

    तिल का तेल भी एक विकल्प है। इसमें असंतृप्त वसा के साथ कुछ प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं। इसका स्वाद भारतीय व्यंजनों के साथ अच्छी तरह मेल खाता है और सीमित मात्रा में इसे खाना पकाने में इस्तेमाल किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों की सलाह का मूल संदेश यह है कि किसी एक तेल को पूरी तरह चमत्कारी या नुकसानदेह मानने के बजाय अलग-अलग स्वस्थ वसा स्रोतों को संतुलित तरीके से डाइट में शामिल किया जाए। तेल को बार-बार गर्म करने, अत्यधिक तला भोजन खाने और जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेने से बचना भी जरूरी है।

    जिन लोगों को पहले से हृदय रोग, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, उनके लिए तेल का चुनाव व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार होना चाहिए। ऐसे मामलों में डॉक्टर या पंजीकृत आहार विशेषज्ञ की सलाह अधिक उपयुक्त रहती है। दिल को स्वस्थ रखने के लिए केवल खाना पकाने का तेल बदलना पर्याप्त नहीं, बल्कि संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और धूम्रपान से दूरी भी महत्वपूर्ण है।

  • मानसून में बरतें ये जरूरी सावधानियां बारिश के पानी से लेकर बिजली गिरने तक हर खतरे से बचाव

    मानसून में बरतें ये जरूरी सावधानियां बारिश के पानी से लेकर बिजली गिरने तक हर खतरे से बचाव


    नई दिल्ली। बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है वहीं तेज बारिश के दौरान कई तरह की परेशानियां और खतरे भी बढ़ जाते हैं। लगातार बारिश होने पर सड़कों पर जलभराव बिजली के तारों में करंट घरों में पानी घुसने और फिसलन जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में बारिश के दौरान थोड़ी सी सावधानी बरतकर खुद को और परिवार के दूसरे सदस्यों को कई बड़े हादसों से बचाया जा सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि तेज बारिश के दौरान बिना जरूरत घर से बाहर निकलने से बचें और अगर मौसम बहुत खराब हो तो सुरक्षित स्थान पर ही रहें।

    अगर बाहर निकलना जरूरी हो तो रास्ते की स्थिति की जानकारी जरूर लें। पानी भरी सड़क पर वाहन चलाते समय खास सावधानी बरतें क्योंकि पानी के नीचे गड्ढे खुले मैनहोल या क्षतिग्रस्त सड़क दिखाई नहीं देती। तेज बहाव वाले पानी को पार करने की कोशिश बिल्कुल न करें। थोड़ी सी लापरवाही वाहन सहित व्यक्ति के बह जाने का कारण बन सकती है। पैदल चलते समय भी पानी में पैर रखने से पहले आसपास की स्थिति देख लें और बिजली के खंभों तारों या खुले विद्युत उपकरणों से दूरी बनाए रखें।

    बारिश के दौरान बिजली गिरने का खतरा भी बढ़ जाता है। गरज चमक के समय खुले मैदान पेड़ के नीचे या किसी ऊंची अकेली जगह पर खड़े होने से बचना चाहिए। यदि आप घर के अंदर हैं तो खिड़की बालकनी और खुले दरवाजे से कुछ दूरी बनाए रखें। बिजली के उपकरणों को अनावश्यक रूप से न छुएं और संभव हो तो संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का प्लग निकाल दें। गीले हाथों से स्विच या बिजली के उपकरण चलाना भी खतरनाक हो सकता है।

    घर में बारिश का पानी घुसने की आशंका हो तो जरूरी सामान और बिजली से जुड़े उपकरणों को ऊंची जगह पर रखें। छत और नालियों की सफाई पहले से करवा लें ताकि पानी जमा न हो। घर के आसपास गड्ढों और खुले नालों को लेकर विशेष सावधानी बरतें। बच्चों को बारिश के पानी में खेलने या जलभराव वाले स्थानों पर जाने से रोकें क्योंकि गंदे पानी में संक्रमण फैलाने वाले जीवाणु हो सकते हैं और गहराई का अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता।

    बारिश के दौरान मोबाइल फोन में मौसम और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों पर नजर रखना भी उपयोगी है। अगर प्रशासन की ओर से किसी इलाके को खाली करने या सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी जाती है तो उसे नजरअंदाज न करें। घर में टॉर्च पावर बैंक जरूरी दवाएं पीने का साफ पानी प्राथमिक उपचार का सामान और जरूरी दस्तावेज सुरक्षित स्थान पर रखना भी आपात स्थिति में मददगार हो सकता है। बारिश के मौसम में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है इसलिए मौसम बिगड़ने पर घबराने के बजाय सतर्क रहें और सुरक्षित रहने के लिए जरूरी कदम समय रहते उठाएं।

  • बारिश और बदलते मौसम में तेजी से झड़ रहे हैं बाल तो आज से करें ये काम बाल बनेंगे मजबूत और घने

    बारिश और बदलते मौसम में तेजी से झड़ रहे हैं बाल तो आज से करें ये काम बाल बनेंगे मजबूत और घने


    नई दिल्ली। बालों को खूबसूरत और मजबूत बनाए रखने के लिए सिर्फ महंगे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना ही जरूरी नहीं है। बालों की सही देखभाल के लिए रोजमर्रा की कुछ छोटी आदतों पर ध्यान देना भी काफी महत्वपूर्ण है। बदलते मौसम खासकर बारिश के दिनों में बालों से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं। नमी और पसीने के कारण स्कैल्प चिपचिपा हो सकता है और डैंड्रफ जैसी समस्या परेशान कर सकती है। इसके अलावा तनाव खराब खानपान नींद की कमी और बालों पर ज्यादा केमिकल इस्तेमाल करने से भी बाल कमजोर होकर टूटने लग सकते हैं। ऐसे में बालों की जड़ों से लेकर उनकी लंबाई तक सही देखभाल करना जरूरी है।

    बालों को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहले स्कैल्प की सफाई पर ध्यान देना चाहिए। पसीना और गंदगी लंबे समय तक स्कैल्प पर जमा रहने से बालों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए अपनी स्कैल्प की जरूरत के अनुसार किसी हल्के शैंपू से बालों को साफ करें। बहुत ज्यादा शैंपू करने से भी बचना चाहिए क्योंकि इससे बालों की प्राकृतिक नमी कम हो सकती है। अगर स्कैल्प बहुत तैलीय है या डैंड्रफ की समस्या लगातार बनी हुई है तो विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहता है।

    बालों में तेल लगाने की परंपरा काफी पुरानी है और सही तरीके से किया जाए तो इससे स्कैल्प की मालिश करने में मदद मिल सकती है। नारियल या अन्य उपयुक्त हेयर ऑयल से हल्के हाथों से स्कैल्प की मालिश की जा सकती है। हालांकि तेल लगाने के बाद उसे बहुत लंबे समय तक छोड़ना जरूरी नहीं है। अपनी स्कैल्प और बालों के प्रकार के अनुसार तेल लगाने की आदत बनाना बेहतर है। बहुत ज्यादा तेल लगाने या जोर से मसाज करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे बालों की जड़ों पर अनावश्यक खिंचाव पड़ सकता है।

    बाल धोने के बाद उन्हें सुखाने के तरीके पर भी ध्यान देना चाहिए। गीले बाल अपेक्षाकृत कमजोर होते हैं और उन्हें जोर से रगड़ने या खींचने से टूटने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए बालों को मुलायम तौलिए से धीरे से सुखाना चाहिए। गीले बालों में बहुत जोर से कंघी करने के बजाय उन्हें थोड़ा सूखने देना बेहतर माना जाता है। बाल सुलझाने के लिए चौड़े दांत वाली कंघी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

    बालों की मजबूती के लिए खानपान भी बेहद महत्वपूर्ण है। भोजन में पर्याप्त प्रोटीन विटामिन और मिनरल्स शामिल होने चाहिए। दालें अंडे दूध दही हरी सब्जियां फल और मेवे जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं। पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है। अगर अचानक बहुत ज्यादा बाल झड़ने लगें तो केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय इसके कारण को समझना जरूरी है।

    हेयर ड्रायर स्ट्रेटनर कर्लर और बहुत ज्यादा गर्मी वाले उपकरणों का लगातार इस्तेमाल बालों को रूखा और कमजोर कर सकता है। इसी तरह बार बार हेयर कलर या केमिकल ट्रीटमेंट कराने से भी बालों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए जहां तक संभव हो बालों को अत्यधिक गर्मी और अनावश्यक केमिकल ट्रीटमेंट से बचाना चाहिए।

    अगर बाल लगातार झड़ रहे हों स्कैल्प में खुजली या घाव हो डैंड्रफ बहुत ज्यादा हो या बालों में अचानक असामान्य बदलाव दिखाई दे तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है। सही खानपान नियमित सफाई पर्याप्त नींद और बालों के प्रति थोड़ी सावधानी अपनाकर उन्हें लंबे समय तक स्वस्थ और मजबूत रखने में मदद मिल सकती है।

  • पायल और बिछिया का कालापन हटाने के आसान घरेलू उपाय, गर्म पानी और बेकिंग सोडा से करें चांदी की सफाई

    पायल और बिछिया का कालापन हटाने के आसान घरेलू उपाय, गर्म पानी और बेकिंग सोडा से करें चांदी की सफाई

    नई दिल्ली ।चांदी के गहने जैसे पायल, बिछिया, अंगूठी और अन्य आभूषण लंबे समय तक इस्तेमाल करने के बाद अक्सर काले या फीके दिखाई देने लगते हैं। कई बार गहनों की चमक इतनी कम हो जाती है कि वे पुराने नजर आने लगते हैं। खासकर रोजाना पहने जाने वाले चांदी के आभूषणों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। हालांकि, चांदी का काला होना हमेशा गंदगी की वजह से नहीं होता।

    चांदी के काले पड़ने की मुख्य वजह एक प्राकृतिक रासायनिक प्रक्रिया है, जिसे टार्निशिंग कहा जाता है। हवा में मौजूद सल्फर या हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी गैसों के संपर्क में आने पर चांदी की सतह पर सिल्वर सल्फाइड की परत बन सकती है। यही परत गहनों को काला या मटमैला दिखाती है। नमी, पसीना और रोजमर्रा के इस्तेमाल से भी इस प्रक्रिया को बढ़ावा मिल सकता है।

    चांदी के गहनों को साफ करने के लिए बेकिंग सोडा का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए थोड़े गुनगुने पानी में करीब एक चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार करें। इस पेस्ट को मुलायम कपड़े या बहुत नरम ब्रश की मदद से गहने की सतह पर हल्के हाथों से लगाएं। कुछ देर बाद इसे बिना ज्यादा दबाव के साफ करें और पानी से धोकर मुलायम कपड़े से सुखा लें।

    अगर गहने पर ज्यादा कालापन जमा है तो एल्युमिनियम फॉयल वाला तरीका भी अपनाया जा सकता है। एक बर्तन में गर्म पानी लें और उसमें एल्युमिनियम फॉयल का टुकड़ा रखें। इसमें थोड़ी मात्रा में बेकिंग सोडा और नमक डालकर घोल तैयार किया जा सकता है। इसके बाद चांदी के गहनों को कुछ मिनट के लिए इसमें रखें और फिर साफ पानी से अच्छी तरह धो लें।

    इस तरीके में एल्युमिनियम और चांदी के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया के जरिए टार्निश की परत को हटाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, हर तरह के चांदी के गहने इस प्रक्रिया के लिए उपयुक्त हों, यह जरूरी नहीं है। खासतौर पर नाजुक डिजाइन, ऑक्सीडाइज्ड चांदी, मोती, कीमती पत्थरों या चिपकाए गए सजावटी हिस्सों वाले गहनों पर यह तरीका सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए।

    हल्के दाग और सामान्य गंदगी के लिए साबुन और गुनगुना पानी अपेक्षाकृत सरल तरीका है। गहने को कुछ समय के लिए गुनगुने पानी में रखने के बाद हल्के साबुन से धीरे-धीरे साफ किया जा सकता है। इसके बाद साफ पानी से धोकर सूती या मुलायम कपड़े से पूरी तरह सुखाना जरूरी है।

    चांदी की सफाई करते समय बहुत कठोर ब्रश या ज्यादा रगड़ने से बचना चाहिए। इससे गहने की सतह पर खरोंच आ सकती है। इसी तरह तेज रसायनों या ऐसे क्लीनर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जिनके बारे में यह स्पष्ट न हो कि वे चांदी के लिए सुरक्षित हैं।

    सफाई के बाद चांदी के गहनों को नमी से दूर, सूखी और बंद जगह पर रखना बेहतर होता है। उन्हें परफ्यूम, कॉस्मेटिक, पसीने और घरेलू रसायनों के सीधे संपर्क से बचाने पर कालापन अपेक्षाकृत देर से आ सकता है। यदि गहना बहुत महंगा, बेहद नाजुक या कीमती पत्थरों से जड़ा हुआ है, तो घरेलू प्रयोग करने के बजाय विशेषज्ञ से सफाई कराना अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकता है।