Category: Lifestyle

  • गर्मी और उमस से चाहिए छुटकारा, मनाली की ठंडी वादियों में बिताएं यादगार छुट्टियां, घूमने से पहले जान लें ये जरूरी बातें

    गर्मी और उमस से चाहिए छुटकारा, मनाली की ठंडी वादियों में बिताएं यादगार छुट्टियां, घूमने से पहले जान लें ये जरूरी बातें

    नई दिल्ली। गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए पहाड़ों की सैर किसी सुकून भरे अनुभव से कम नहीं होती। अगर मैदानी इलाकों की तपिश से राहत पाने के लिए आप भी छुट्टियों की योजना बना रहे हैं तो हिमाचल प्रदेश का मनाली एक शानदार विकल्प हो सकता है। यहां ऊंचे पहाड़ देवदार के घने जंगल बहती ब्यास नदी और खूबसूरत घाटियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। मनाली की प्राकृतिक सुंदरता के साथ यहां धार्मिक स्थलों पर दर्शन करने और रोमांचक गतिविधियों का आनंद लेने का अवसर भी मिलता है। हालांकि पहाड़ों का मौसम तेजी से बदल सकता है इसलिए यात्रा से पहले मौसम की जानकारी लेना जरूरी है।

    मनाली की यात्रा शुरू करने के बाद सबसे पहले यहां के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों को अपनी सूची में शामिल कर सकते हैं। सोलंग वैली अपनी खूबसूरत वादियों और एडवेंचर गतिविधियों के लिए मशहूर है। मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार यहां पैराग्लाइडिंग और अन्य मनोरंजक गतिविधियों का आनंद लिया जा सकता है। सर्दियों में बर्फबारी होने पर इस क्षेत्र का नजारा बेहद आकर्षक हो जाता है। अगर आप परिवार के साथ जा रहे हैं तो गतिविधियों की सुरक्षा व्यवस्था और उम्र से संबंधित नियमों की जानकारी पहले ले लें।

    प्राकृतिक सुंदरता के साथ धार्मिक आस्था का अनुभव करना चाहते हैं तो हिडिंबा देवी मंदिर जरूर जा सकते हैं। देवदार के पेड़ों से घिरा यह प्राचीन मंदिर अपनी अनोखी वास्तुकला और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। इसके बाद ओल्ड मनाली की गलियों में घूमना स्थानीय कैफे में समय बिताना और बाजारों में खरीदारी करना आपकी यात्रा को खास बना सकता है। ब्यास नदी के आसपास भी सुंदर नजारे देखने को मिलते हैं लेकिन नदी के तेज बहाव से दूरी बनाए रखना जरूरी है।

    मनाली घूमने आने वाले कई पर्यटक रोहतांग पास जाने की योजना भी बनाते हैं। यह ऊंचाई पर स्थित प्रसिद्ध पर्वतीय दर्रा बर्फीले नजारों और हिमालय की खूबसूरत चोटियों के लिए जाना जाता है। हालांकि यहां पहुंचना मौसम सड़क की स्थिति और प्रशासनिक अनुमति पर निर्भर करता है। यात्रा से पहले परमिट की जरूरत और मार्ग खुला होने की जानकारी जरूर जांच लें। खराब मौसम के दौरान अपनी योजना बदलने के लिए भी तैयार रहें।

    मनाली पहुंचने के लिए सड़क मार्ग सबसे लोकप्रिय विकल्पों में से एक है। दिल्ली और चंडीगढ़ से बसों के जरिए यहां पहुंचा जा सकता है। हवाई यात्रा करने वाले पर्यटक भुंतर हवाई अड्डे तक पहुंचकर आगे टैक्सी या अन्य उपलब्ध परिवहन का सहारा ले सकते हैं। यात्रा का खर्च आपके शहर से दूरी होटल की श्रेणी और घूमने के साधनों पर निर्भर करेगा। कम बजट में यात्रा करना चाहते हैं तो बस से सफर करें होटल की बुकिंग पहले कर लें और स्थानीय परिवहन के विकल्पों की तुलना करें। छुट्टियों और व्यस्त पर्यटन सीजन में होटल तथा टैक्सी का किराया बढ़ सकता है।

    मनाली की यात्रा पर जाते समय गर्म कपड़े हल्की जैकेट आरामदायक जूते और जरूरी दवाएं साथ रखें। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान कम हो सकता है और मौसम अचानक बदल सकता है। बारिश के दौरान भूस्खलन या सड़क बंद होने की आशंका भी रहती है इसलिए स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें। यात्रा की योजना बनाते समय केवल तस्वीरों और सोशल मीडिया के नजारों पर भरोसा न करें बल्कि वास्तविक मौसम और सड़क की स्थिति को प्राथमिकता दें। सही तैयारी के साथ मनाली की यात्रा गर्मी से राहत पाने और प्रकृति के करीब कुछ यादगार पल बिताने का अच्छा अवसर बन सकती है।

  • बालों का झड़ना नहीं हो रहा बंद, महंगे प्रोडक्ट्स से पहले अपनाएं ये 5 तरीके, सही तेल और डाइट से ऐसे करें बालों की देखभाल

    बालों का झड़ना नहीं हो रहा बंद, महंगे प्रोडक्ट्स से पहले अपनाएं ये 5 तरीके, सही तेल और डाइट से ऐसे करें बालों की देखभाल


    नई दिल्ली। बालों का झड़ना आजकल एक आम समस्या बन गई है। महिला हो या पुरुष कई लोग बालों के पतले होने और लगातार गिरने से परेशान रहते हैं। मौसम में बदलाव तनाव खराब खानपान नींद की कमी और बालों की सही देखभाल न करने जैसी वजहों से बालों पर असर पड़ सकता है। सामान्य रूप से रोजाना कुछ बालों का झड़ना स्वाभाविक है लेकिन जब बाल असामान्य रूप से गिरने लगें या सिर में खाली जगह दिखाई देने लगे तो इस पर ध्यान देना जरूरी है। कुछ आसान आदतों को अपनाकर बालों को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है।

    बालों की देखभाल के लिए सबसे पहले संतुलित खानपान पर ध्यान दें। बालों की मजबूती के लिए शरीर को पर्याप्त प्रोटीन आयरन जिंक और अन्य जरूरी पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इसके लिए भोजन में दालें दूध दही अंडे पनीर हरी पत्तेदार सब्जियां फल और मेवे शामिल किए जा सकते हैं। यदि शरीर में आयरन या किसी अन्य पोषक तत्व की कमी है तो बालों का झड़ना बढ़ सकता है। इसलिए लगातार बाल गिरने पर बिना जांच के सप्लीमेंट लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह से कमी का पता लगाना बेहतर होता है।

    बालों को धोने और सुखाने का तरीका भी महत्वपूर्ण है। बालों को साफ रखने के लिए अपनी त्वचा और बालों के प्रकार के अनुसार हल्के शैंपू का इस्तेमाल करें। शैंपू करते समय सिर की त्वचा को नाखूनों से जोर से रगड़ने से बचें। गीले बाल अपेक्षाकृत नाजुक होते हैं इसलिए उन्हें जोर से तौलिए से रगड़ना या खींचकर कंघी करना नुकसान पहुंचा सकता है। बालों को धीरे से सुखाएं और उलझन दूर करने के लिए चौड़े दांतों वाली कंघी का इस्तेमाल करें।

    बालों पर बार बार हीट स्टाइलिंग करने से भी नुकसान हो सकता है। हेयर ड्रायर स्ट्रेटनर और कर्लर का अधिक इस्तेमाल बालों को कमजोर और टूटने वाला बना सकता है। इसी तरह बार बार केमिकल ट्रीटमेंट हेयर कलर और बहुत कसकर बांधे गए हेयरस्टाइल से भी बाल टूट सकते हैं। जहां तक संभव हो बालों को आराम दें और गर्म उपकरणों का इस्तेमाल सीमित रखें। बालों में तेल लगाने से सिर की त्वचा को नमी मिल सकती है और मालिश से आराम महसूस हो सकता है लेकिन तेल लगाना हर प्रकार के हेयर फॉल का इलाज नहीं है। तेल से बाल झड़ना निश्चित रूप से बंद हो जाएगा ऐसा मानना सही नहीं है।

    तनाव और नींद की कमी भी बालों की सेहत को प्रभावित कर सकती है। रोजाना पर्याप्त नींद लेने नियमित शारीरिक गतिविधि करने और तनाव कम करने के लिए योग या ध्यान अपनाने से समग्र स्वास्थ्य को फायदा मिल सकता है। हालांकि यदि बाल झड़ने की वजह हार्मोन संबंधी समस्या आनुवंशिक कारण या कोई बीमारी है तो केवल घरेलू उपाय पर्याप्त नहीं होंगे।

    यदि बाल अचानक बहुत ज्यादा झड़ने लगें सिर में गोल खाली पैच बनें खुजली या पपड़ी के साथ समस्या हो या कई सप्ताह तक लगातार बाल गिरते रहें तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। तेज बुखार बीमारी प्रसव या अत्यधिक तनाव के कुछ समय बाद भी बाल झड़ सकते हैं। सही कारण की पहचान होने पर उचित उपचार चुना जा सकता है। बिना सलाह के दवाएं या महंगे हेयर प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से बचें।

    बालों को स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा तरीका नियमित देखभाल पौष्टिक भोजन पर्याप्त नींद और सही उपचार है। घरेलू उपाय सहायक हो सकते हैं लेकिन हर व्यक्ति में उनका असर अलग हो सकता है। लगातार या असामान्य हेयर फॉल को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहता है।

  • सर्दियों में बढ़ती डैंड्रफ से हैं परेशान, दही, एलोवेरा और मेथी समेत ये 5 घरेलू हेयर मास्क आजमाएं

    सर्दियों में बढ़ती डैंड्रफ से हैं परेशान, दही, एलोवेरा और मेथी समेत ये 5 घरेलू हेयर मास्क आजमाएं

    नई दिल्ली ।सर्दियों में बालों में रूसी और सिर की त्वचा यानी स्कैल्प में खुजली की समस्या बढ़ सकती है। काले या गहरे रंग के कपड़े पहनने पर कंधों पर सफेद परत दिखाई देने से कई लोग असहज महसूस करते हैं। डैंड्रफ की समस्या बालों की खूबसूरती और रोजमर्रा की देखभाल को प्रभावित कर सकती है। ठंड के मौसम में स्कैल्प का रूखापन और हेयर केयर रूटीन में बदलाव परेशानी को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में बालों को साफ रखने के साथ स्कैल्प की उचित देखभाल करना भी जरूरी है। कुछ घरेलू हेयर मास्क बालों को मुलायम बनाने और उनकी कंडीशनिंग में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इन नुस्खों को डैंड्रफ का पक्का इलाज नहीं मानना चाहिए। लगातार रूसी या खुजली रहने पर उचित उपचार की जरूरत हो सकती है।

    दही और एलोवेरा से बना हेयर मास्क बालों की देखभाल के लिए एक विकल्प है। एलोवेरा त्वचा को ठंडक देने में मदद कर सकता है, जबकि दही बालों को कंडीशन करने में सहायक हो सकता है। इसे बनाने के लिए दो चम्मच सादे दही में एक चम्मच शुद्ध एलोवेरा जेल मिलाएं। तैयार मिश्रण को थोड़ी देर बालों और स्कैल्प पर लगाकर रखें। इसके बाद हल्के शैंपू से अच्छी तरह धो लें। अगर इस मिश्रण को लगाने के बाद खुजली या जलन बढ़ती है, तो इसे तुरंत धो देना चाहिए। दूसरा विकल्प मेथी और दही का हेयर पैक है। इसके लिए एक से दो चम्मच मेथी दानों को रातभर पानी में भिगो दें। सुबह दानों को पीसकर पेस्ट बना लें और उसमें थोड़ा दही मिलाएं। इस मिश्रण को कुछ देर बालों पर लगाकर रखें और फिर अच्छी तरह धो लें। यह पैक बालों को कंडीशन करने में मदद कर सकता है, लेकिन इसे डैंड्रफ का निश्चित उपचार नहीं माना जाना चाहिए।

    तीसरा विकल्प शुद्ध एलोवेरा जेल का इस्तेमाल है। स्कैल्प में रूखापन या हल्की खुजली महसूस होने पर कुछ लोग इसे आजमा सकते हैं, लेकिन इसका असर हर व्यक्ति और हर तरह की रूसी में समान नहीं होता। इस्तेमाल से पहले थोड़ी मात्रा में जेल स्कैल्प के छोटे हिस्से पर लगाकर जांच करना जरूरी है। अगर कोई परेशानी नहीं होती, तो इसे थोड़ी देर लगाकर बाद में धो सकते हैं। खुशबू या अल्कोहल वाले जेल से संवेदनशील त्वचा में जलन हो सकती है, इसलिए उत्पाद का चुनाव सावधानी से करना चाहिए। चौथा विकल्प केला और नारियल तेल का हेयर मास्क है। यह खास तौर पर बालों के रूखेपन को कम करने और उन्हें मुलायम बनाने के लिए उपयोगी हो सकता है। इसे तैयार करने के लिए आधे पके केले को अच्छी तरह मैश करें और उसमें एक छोटा चम्मच नारियल तेल मिलाएं। इस मिश्रण को बालों की लंबाई पर लगाएं और लगभग 15 से 20 मिनट बाद शैंपू से धो लें। इसे डैंड्रफ खत्म करने का प्रमाणित तरीका नहीं समझना चाहिए।

    पांचवां विकल्प अंडे और ऑलिव ऑयल से बना हेयर मास्क है। इस मिश्रण का इस्तेमाल बालों की लंबाई को मुलायम बनाने के लिए किया जाता है। इसे बनाने के लिए एक अंडे में एक चम्मच ऑलिव ऑयल मिलाकर मिश्रण तैयार करें। इसे बालों की लंबाई पर लगाएं और फिर ठंडे या हल्के गुनगुने पानी से अच्छी तरह धो लें। गर्म पानी का इस्तेमाल करने से अंडा बालों में जम सकता है और उसे निकालना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, इस मास्क से डैंड्रफ खत्म होने के मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इसे मुख्य रूप से बालों की कंडीशनिंग के लिए ही देखना चाहिए। किसी भी नए घरेलू मिश्रण को इस्तेमाल करने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर जांच करना बेहतर है। नींबू का रस, एसेंशियल ऑयल या अन्य घरेलू सामग्री सीधे स्कैल्प पर लगाने से जलन हो सकती है।

    डैंड्रफ बार-बार लौटता है, तो केवल घरेलू हेयर मास्क पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं हो सकता। ऐसे में स्कैल्प की स्थिति के अनुसार विशेष रूप से तैयार एंटी-डैंड्रफ शैंपू का इस्तेमाल अधिक उपयोगी हो सकता है। शैंपू चुनते समय उसके लेबल पर दिए निर्देशों का पालन करना चाहिए। अगर रूसी के साथ तेज खुजली, लालिमा, घाव या बाल झड़ने की समस्या हो, अथवा नियमित देखभाल के बावजूद डैंड्रफ ठीक न हो, तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। घरेलू मास्क बालों को मुलायम बनाने और उनकी देखभाल में मदद कर सकते हैं, लेकिन लगातार बनी रहने वाली रूसी के लिए सही उपचार को प्राथमिकता देना जरूरी है।

  • बेजान त्वचा और पिंपल्स से हैं परेशान, अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय और रखें चेहरे की प्राकृतिक चमक बरकरार

    बेजान त्वचा और पिंपल्स से हैं परेशान, अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय और रखें चेहरे की प्राकृतिक चमक बरकरार


    नई दिल्ली। आज के समय में हर कोई साफ निखरी और स्वस्थ त्वचा चाहता है लेकिन धूल प्रदूषण धूप तनाव खराब खानपान और अनियमित दिनचर्या का असर चेहरे पर साफ दिखाई देने लगता है। कई बार त्वचा बेजान नजर आने लगती है और पिंपल्स रूखापन ऑयली स्किन या टैनिंग जैसी समस्याएं भी परेशान करने लगती हैं। ऐसे में जरूरी नहीं कि हर बार महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स का सहारा लिया जाए। रोज की कुछ आसान आदतों और घर में मौजूद सामान्य चीजों की मदद से त्वचा की बेहतर देखभाल की जा सकती है। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को चेहरे पर लगाने से पहले छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना बेहतर रहता है।

    रूखी त्वचा के लिए एलोवेरा जेल एक आसान विकल्प हो सकता है। एलोवेरा त्वचा को नमी देने और उसे मुलायम बनाए रखने में मदद कर सकता है। इसे साफ चेहरे पर थोड़ी मात्रा में लगाया जा सकता है। अगर त्वचा बहुत ज्यादा रूखी है तो नियमित मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल भी जरूरी है। नहाने के बाद या रात में सोने से पहले त्वचा को मॉइश्चराइज करने की आदत त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद कर सकती है। घरेलू मॉइश्चराइजर के तौर पर एलोवेरा जेल और नारियल तेल जैसे मिश्रण भी इस्तेमाल किए जाते हैं लेकिन संवेदनशील या मुंहासे वाली त्वचा पर तेल लगाने से पहले सावधानी जरूरी है।

    चेहरे की प्राकृतिक चमक बनाए रखने के लिए खानपान पर भी ध्यान देना जरूरी है। पर्याप्त पानी पीने के साथ फल सब्जियां दालें नट्स और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन को डाइट में शामिल करना त्वचा की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है। विटामिन ए विटामिन ई ओमेगा 3 फैटी एसिड और जिंक जैसे पोषक तत्व त्वचा की सामान्य सेहत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पर्याप्त नींद और तनाव कम रखना भी स्किन केयर का अहम हिस्सा है।

    अगर त्वचा पर पिंपल्स हैं तो बार बार चेहरा छूने या दाने दबाने से बचना चाहिए। चेहरे को जरूरत से ज्यादा धोना भी त्वचा की प्राकृतिक नमी को नुकसान पहुंचा सकता है। बहुत गर्म पानी और हार्श स्क्रब के इस्तेमाल से भी बचना बेहतर है। इसी तरह नींबू जैसे अम्लीय पदार्थों को सीधे चेहरे पर लगाने से जलन हो सकती है इसलिए ऐसे नुस्खों से सावधानी रखना जरूरी है।

    सबसे जरूरी बात यह है कि स्किन केयर को किसी एक घरेलू नुस्खे तक सीमित नहीं रखना चाहिए। चेहरे की नियमित सफाई मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल धूप से बचाव संतुलित खानपान पर्याप्त नींद और पानी पीने की अच्छी आदतें लंबे समय में त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती हैं। अगर पिंपल्स दाग खुजली लालिमा या किसी अन्य त्वचा संबंधी समस्या लगातार बनी रहती है तो घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होगा।

  • बच्चों को मोटापा घटाने की दवाएं देने से पहले सावधान, WHO ने 10 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए किया मना

    बच्चों को मोटापा घटाने की दवाएं देने से पहले सावधान, WHO ने 10 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए किया मना

    नई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बच्चों और किशोरों में मोटापे के इलाज को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए वजन घटाने वाली दवाओं और सर्जरी के इस्तेमाल पर सावधानी बरतने को कहा है। संगठन के अनुसार अधिक वजन वाले बच्चों के लिए दवाएं और सर्जरी सीधे समाधान नहीं हैं। इसके बजाय संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधियों पर जोर दिया जाना चाहिए। WHO ने स्पष्ट किया है कि 0 से 9 वर्ष तक के बच्चों के लिए वजन घटाने वाली दवाओं, पेट या पाचन तंत्र से जुड़ी सर्जरी और वजन कम करने वाले उपकरणों के इस्तेमाल की सिफारिश नहीं की जाती है।

    WHO के अनुसार 10 से 19 वर्ष के किशोरों के लिए वजन घटाने वाली दवाओं पर विचार किया जा सकता है, लेकिन यह विकल्प तभी अपनाया जाना चाहिए जब विशेषज्ञों की निगरानी में किए गए दूसरे उपाय प्रभावी साबित न हों। वहीं, अत्यधिक मोटापे से जूझ रहे किशोरों के लिए सर्जरी पर भी कुछ विशेष परिस्थितियों में विचार किया जा सकता है। इसके लिए कड़ी शर्तों का पालन जरूरी होगा। संगठन ने बच्चों और किशोरों में मोटापे से निपटने के लिए उपचार के साथ स्वस्थ जीवनशैली और शारीरिक गतिविधियों को महत्वपूर्ण बताया है।

    आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024 में दुनियाभर में 5 से 9 वर्ष की आयु के लगभग 7 करोड़ बच्चे मोटापे से प्रभावित थे। इसी अवधि में 10 से 19 वर्ष की आयु के करीब 10 करोड़ किशोर भी मोटापे से जूझ रहे थे। 5 से 19 वर्ष की आयु के लोगों में मोटापे की दर 1990 में करीब 2 प्रतिशत थी, जो बढ़कर 2024 में 8 प्रतिशत हो गई। इन आंकड़ों से बच्चों और किशोरों में बढ़ते मोटापे की स्थिति का पता चलता है। ऐसे में वजन कम करने के लिए अपनाए जाने वाले तरीकों को लेकर सावधानी जरूरी मानी जा रही है।

    वजन घटाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कैलोरी कम करने वाली डाइट भी लोकप्रिय हुई है। इस तरह की डाइट में व्यक्ति भोजन से मिलने वाली ऊर्जा यानी कैलोरी की मात्रा कम करता है। इसमें इंटरमिटेंट फास्टिंग, अल्टरनेट डे फास्टिंग और फास्ट 800 जैसी डाइट शामिल हैं। इन तरीकों में भोजन के समय या मात्रा को सीमित करके कैलोरी का सेवन काफी कम किया जाता है। इसका आधार यह है कि जब शरीर को खर्च होने वाली ऊर्जा की तुलना में कम कैलोरी मिलती है, तो वह जमा वसा का इस्तेमाल करता है और समय के साथ वजन कम हो सकता है।

    विभिन्न शोधों में पाया गया है कि कैलोरी कम करने वाली डाइट से वजन और कमर का घेरा घट सकता है। इससे रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रण में भी सुधार देखा गया है, जिससे हृदय रोग के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। खासकर अधिक वजन, मोटापे या टाइप-2 मधुमेह से जूझ रहे लोगों में इसके कुछ लाभ सामने आए हैं। हालांकि, उपलब्ध अध्ययनों में से अधिकांश केवल 2 से 12 सप्ताह की छोटी अवधि पर आधारित हैं। वजन कम करने के बाद उसे लंबे समय तक बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है और कई लोगों में डाइट खत्म होने के बाद कम हुआ कुछ या उससे अधिक वजन दोबारा बढ़ सकता है।

  • गुलाब का पौधा घर पर तैयार करने का आसान तरीका, एक कटिंग से जड़ें बनने तक रखें इन बातों का खास ध्यान

    गुलाब का पौधा घर पर तैयार करने का आसान तरीका, एक कटिंग से जड़ें बनने तक रखें इन बातों का खास ध्यान

    नई दिल्ली ।घर में गुलाब का पौधा लगाने के लिए हर बार नर्सरी से नया पौधा खरीदना जरूरी नहीं है। पहले से मौजूद स्वस्थ गुलाब के पौधे की एक अच्छी कटिंग से भी नया पौधा तैयार किया जा सकता है। हालांकि, कटिंग से जड़ें बनने की प्रक्रिया कई बातों पर निर्भर करती है। तने की सेहत, मौसम, मिट्टी, नमी और रोशनी का इस प्रक्रिया पर असर पड़ता है। खास तौर पर कटिंग को जरूरत से ज्यादा पानी और शुरुआती दौर में तेज धूप से बचाना जरूरी होता है।

    गुलाब की कटिंग तैयार करने के लिए सबसे पहले स्वस्थ टहनी का चुनाव करना चाहिए। करीब 10 से 15 सेंटीमीटर लंबी ऐसी शाखा लें जो न तो बहुत कोमल हो और न ही पूरी तरह पुरानी और लकड़ी जैसी हो। तने पर किसी तरह के कीड़े, काले धब्बे, सड़न या बीमारी के निशान नहीं होने चाहिए। कटिंग काटने के लिए साफ कैंची या चाकू का इस्तेमाल करना बेहतर रहता है, ताकि तने को अनावश्यक नुकसान न पहुंचे।

    कटिंग तैयार करने के बाद उसके निचले हिस्से की पत्तियां हटा दें और ऊपर केवल दो या तीन पत्तियां रहने दें। इसके बाद कटिंग के निचले सिरे को हल्का तिरछा काटा जा सकता है। इससे उसे मिट्टी में लगाने में आसानी होती है। कटिंग को तैयार करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि तना स्वस्थ और मजबूत हो, क्योंकि कमजोर या संक्रमित टहनी से पौधा तैयार होने की संभावना प्रभावित हो सकती है।

    अब कटिंग लगाने के लिए ऐसे गमले और मिट्टी की जरूरत होगी, जिसमें अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके। सामान्य मिट्टी में कोकोपीट और रेत मिलाकर ऐसा पॉटिंग मिक्स तैयार किया जा सकता है, जिसमें नमी बनी रहे और पानी जमा न हो। गमले के नीचे ड्रेनेज होल होना जरूरी है। मिट्टी भरने के बाद बीच में कटिंग के निचले हिस्से को लगाने के लिए छोटा गड्ढा बनाएं। कटिंग रखने के बाद उसके आसपास की मिट्टी को हल्के हाथ से दबाएं और थोड़ी मात्रा में पानी दें।

    कटिंग लगाने के बाद सबसे ज्यादा ध्यान नमी पर देना होता है। मिट्टी पूरी तरह सूखने नहीं देनी चाहिए, लेकिन उसे लगातार पानी से भरा रखना भी ठीक नहीं है। अत्यधिक नमी के कारण कटिंग के सड़ने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए मिट्टी की स्थिति देखकर जरूरत के अनुसार पानी देना चाहिए। गमले में जल निकासी अच्छी होने से अतिरिक्त पानी बाहर निकल जाता है और कटिंग के आसपास उचित नमी बनाए रखने में मदद मिलती है।

    शुरुआती समय में कटिंग को तेज सीधी धूप में रखने से बचना चाहिए। ऐसी जगह रखना बेहतर है जहां पर्याप्त रोशनी मिले, लेकिन सीधे तेज धूप का असर न हो। आसपास की नमी बनाए रखने के लिए पारदर्शी प्लास्टिक कवर का इस्तेमाल किया जा सकता है, हालांकि उसे पूरी तरह बंद नहीं करना चाहिए। हवा का आवागमन बना रहना जरूरी है। जड़ें बनने का समय निश्चित नहीं होता और मौसम, गुलाब की किस्म, कटिंग की स्थिति, मिट्टी तथा नमी के आधार पर इसमें अंतर हो सकता है। कुछ मामलों में कुछ हफ्तों में जड़ों की शुरुआत हो सकती है।

    कटिंग पर नई पत्तियां या नई बढ़त दिखाई देने लगे तो इसे सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, लेकिन इससे यह निश्चित नहीं होता कि जड़ें पूरी तरह विकसित हो चुकी हैं। इसलिए नई पत्तियां निकलते ही कटिंग को गमले से निकालकर जांचने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। जब जड़ें अच्छी तरह विकसित हो जाएं, तभी पौधे को सावधानी से बड़े गमले में स्थानांतरित किया जाना चाहिए। शुरुआती दौर में बहुत ज्यादा खाद या पानी देने के बजाय उचित नमी, जल निकासी और रोशनी का ध्यान रखना जरूरी है।

  • रसोई के नमक को सिर्फ खाने तक न रखें सीमित, सिंक से कटिंग बोर्ड तक इन कामों में आएगा उपयोग

    रसोई के नमक को सिर्फ खाने तक न रखें सीमित, सिंक से कटिंग बोर्ड तक इन कामों में आएगा उपयोग

    नई दिल्ली । रसोई में इस्तेमाल होने वाला नमक केवल खाने का स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं है। घर की सफाई से जुड़ी कुछ सामान्य परेशानियों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। सिंक से आने वाली बदबू, कप या मग पर लगे हल्के दाग और लकड़ी के कटिंग बोर्ड पर रह जाने वाली गंध जैसी स्थितियों में नमक घरेलू सफाई के काम आ सकता है। हालांकि, इसका इस्तेमाल हर सतह या हर समस्या के लिए सही नहीं माना जाता।

    नमक में हल्का घर्षण होता है, इसलिए कुछ बर्तनों की सतह से सामान्य गंदगी हटाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। कप या मग के अंदर चाय-कॉफी के हल्के दाग होने पर थोड़ी मात्रा में नमक पानी के साथ लगाकर नरम स्पंज से हल्के हाथ से रगड़ा जा सकता है। इसके बाद बर्तन को साफ पानी से अच्छी तरह धोना जरूरी है। ज्यादा जोर लगाने से सतह को नुकसान पहुंच सकता है।

    किचन सिंक में खाने के छोटे टुकड़े या गंदगी फंसने से कई बार दुर्गंध आने लगती है। ऐसी स्थिति में थोड़े नमक को गर्म पानी के साथ सिंक में डालकर बहाया जा सकता है। यह सामान्य सफाई में मदद कर सकता है और सिंक की बदबू कम करने में उपयोगी हो सकता है। हालांकि, अगर नाली जाम है या बदबू लगातार बनी हुई है तो केवल नमक पर निर्भर रहना उचित नहीं है।

    लकड़ी के कटिंग बोर्ड पर प्याज, लहसुन और मसाले काटने के बाद उनकी गंध रह सकती है। ऐसे में बोर्ड पर थोड़ा नमक छिड़ककर नींबू के कटे हुए हिस्से से हल्के हाथ से रगड़ने का घरेलू तरीका अपनाया जा सकता है। सफाई के बाद बोर्ड को पानी से धोकर अच्छी तरह सुखाना चाहिए। लकड़ी के कटिंग बोर्ड को बहुत ज्यादा पानी में भिगोना उचित नहीं माना जाता।

    कांच या स्टील की कुछ चीजों पर हल्की जमी गंदगी की सफाई में भी नमक का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इसे नाजुक सतह पर सीधे और जोर से रगड़ने से बचना चाहिए। पानी या उपयुक्त सफाई सामग्री के साथ सावधानी से इस्तेमाल करना बेहतर है। कांच, पॉलिश वाली सतह और आसानी से खरोंच आने वाली चीजों पर विशेष सावधानी जरूरी है।

    कपड़ों के दाग हटाने के लिए भी कई घरेलू नुस्खों में नमक का इस्तेमाल बताया जाता है, लेकिन हर तरह के कपड़े और दाग पर इसका असर एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है। किसी कपड़े पर इसे आजमाने से पहले उसके देखभाल संबंधी निर्देश देखना चाहिए। जरूरत हो तो पहले कपड़े के किसी छिपे हिस्से पर थोड़ी मात्रा से परीक्षण किया जा सकता है।

    घर की सफाई में नमक का इस्तेमाल करते समय सतह की प्रकृति को ध्यान में रखना जरूरी है। मार्बल, प्राकृतिक पत्थर, नाजुक पॉलिश, कोटेड सतह या ऐसी चीजों पर नमक रगड़ने से बचना चाहिए जिन पर आसानी से खरोंच पड़ सकती है। सफाई पूरी होने के बाद संबंधित सतह को अच्छी तरह पोंछना भी जरूरी है।

    बागवानी में नमक का इस्तेमाल करते समय खास सावधानी रखनी चाहिए। पौधों की मिट्टी में ज्यादा नमक जमा होने से जड़ों और पौधों की बढ़त को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए पौधों को हरा-भरा रखने के लिए मिट्टी में नमक डालना सामान्य घरेलू उपाय नहीं माना जाना चाहिए। यदि किसी खास पौधे के लिए नमक के इस्तेमाल की सलाह दी गई हो तो उसकी किस्म और उचित मात्रा की जानकारी लेना जरूरी है।

  • एनर्जी ड्रिंक से मिलती है फुर्ती या बढ़ता है खतरा, रोज पीने से पहले जान लें शरीर पर होने वाले असर और जरूरी सावधानियां

    एनर्जी ड्रिंक से मिलती है फुर्ती या बढ़ता है खतरा, रोज पीने से पहले जान लें शरीर पर होने वाले असर और जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली। एनर्जी ड्रिंक आज युवाओं और कामकाजी लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। थकान महसूस होने पर तुरंत ऊर्जा पाने और लंबे समय तक एक्टिव रहने के लिए कई लोग इनका सेवन करते हैं। पढ़ाई के दौरान जागने से लेकर जिम और खेल गतिविधियों तक एनर्जी ड्रिंक का इस्तेमाल बढ़ गया है। इन पेय पदार्थों में आमतौर पर कैफीन के साथ चीनी और दूसरे उत्तेजक पदार्थ शामिल हो सकते हैं। इनकी वजह से कुछ समय के लिए व्यक्ति को अधिक सतर्क और ऊर्जावान महसूस हो सकता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि एनर्जी ड्रिंक शरीर की थकान का स्थायी समाधान है।

    एनर्जी ड्रिंक में मौजूद कैफीन दिमाग और नर्वस सिस्टम को उत्तेजित करता है। इससे नींद कम महसूस हो सकती है और व्यक्ति कुछ समय के लिए ज्यादा एक्टिव नजर आ सकता है। इसी कारण लंबे समय तक काम करने या रात में पढ़ाई करने वाले लोग इनका सेवन करते हैं। हालांकि ज्यादा कैफीन लेने से बेचैनी घबराहट दिल की धड़कन तेज होना और नींद में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कैफीन का असर हर व्यक्ति पर अलग हो सकता है इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति को जितनी मात्रा आसानी से सहन हो जाती है जरूरी नहीं कि उतनी मात्रा सभी के लिए सुरक्षित हो।

    एनर्जी ड्रिंक में चीनी की मात्रा भी कई बार काफी अधिक हो सकती है। नियमित रूप से ज्यादा चीनी वाले पेय पदार्थों का सेवन वजन बढ़ने और दांतों से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है। यदि कोई व्यक्ति पहले से ही अधिक मीठे खाद्य पदार्थ और पेय ले रहा है तो एनर्जी ड्रिंक उसके कुल चीनी सेवन को और बढ़ा सकता है। इसलिए केवल पेय के नाम में एनर्जी शब्द देखकर इसे स्वास्थ्यवर्धक समझना सही नहीं है।

    खास सावधानी बच्चों और किशोरों को लेकर बरतनी चाहिए। कम उम्र में कैफीन का अधिक सेवन नींद और व्यवहार से जुड़ी परेशानियां पैदा कर सकता है। गर्भवती महिलाओं और कैफीन के प्रति संवेदनशील लोगों को भी ऐसे पेय पदार्थों का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर माना जाता है। इसी तरह जिन लोगों को दिल से जुड़ी समस्या है या जो किसी विशेष बीमारी की दवा ले रहे हैं उन्हें बिना चिकित्सकीय सलाह के अधिक कैफीन वाले पेय से बचना चाहिए।

    एनर्जी ड्रिंक और शराब को मिलाकर पीना भी जोखिम बढ़ा सकता है। कैफीन व्यक्ति को कुछ समय के लिए कम नशे में महसूस करा सकता है जबकि शराब का असर शरीर पर बना रहता है। इससे व्यक्ति अपनी वास्तविक स्थिति को कम आंक सकता है और जोखिम भरे फैसले ले सकता है। इसलिए दोनों को मिलाकर सेवन करना उचित नहीं माना जाता।

    अगर थकान दूर करनी है तो पर्याप्त नींद संतुलित भोजन पानी और नियमित शारीरिक गतिविधि ज्यादा बेहतर आधार हैं। एनर्जी ड्रिंक को रोजाना की आदत बनाने के बजाय कभी कभार भी सेवन करना हो तो लेबल पर कैफीन और चीनी की मात्रा जरूर देखनी चाहिए। किसी भी पेय को लेकर सबसे जरूरी बात उसकी मात्रा और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति है। यदि एनर्जी ड्रिंक लेने के बाद लगातार दिल की धड़कन तेज होना चक्कर घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण महसूस हों तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

  • बदलते मौसम में सर्दी-खांसी और बुखार से बढ़ी परेशानी, बच्चों से बुजुर्गों तक इन बातों का रखें विशेष ध्यान

    बदलते मौसम में सर्दी-खांसी और बुखार से बढ़ी परेशानी, बच्चों से बुजुर्गों तक इन बातों का रखें विशेष ध्यान

    नई दिल्ली ।मौसम में बदलाव के साथ कई लोगों को सर्दी, खांसी, गले में दर्द, बुखार और वायरल संक्रमण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जब दिन और रात के तापमान में तेजी से अंतर आता है, तो शरीर को बदलते मौसम के अनुसार ढलने में समय लग सकता है। इसी दौरान वायरस और बैक्टीरिया तेजी से फैल सकते हैं, जिससे अचानक बीमार पड़ने का खतरा बढ़ सकता है।

    बदलते मौसम में हर व्यक्ति को समान स्तर की परेशानी नहीं होती। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को इस दौरान अधिक सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है। इसके अलावा जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर है, उन्हें भी अपने स्वास्थ्य को लेकर विशेष सतर्क रहना चाहिए। पहले से अस्थमा, एलर्जी या किसी अन्य बीमारी से जूझ रहे लोगों को मौसम में बदलाव के दौरान अतिरिक्त सावधानी रखने की जरूरत हो सकती है।

    दिनभर अलग-अलग तापमान वाले वातावरण में रहने वाले लोगों को भी परेशानी हो सकती है। बाहर आने-जाने वाले लोगों, ऑफिस जाने वालों और नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोगों को अचानक तापमान में बदलाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे में शरीर को बदलते वातावरण के अनुसार समायोजित होने में समय लग सकता है और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें सामने आ सकती हैं।

    बदलते मौसम में खुद को सुरक्षित रखने के लिए कपड़ों का चयन मौसम के अनुसार करना जरूरी है। बहुत अधिक ठंडे या गर्म वातावरण में अचानक जाने से बचने की सलाह दी गई है। शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना भी जरूरी है। इसके लिए पर्याप्त पानी पीना चाहिए और भोजन में ताजे तथा पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए।

    पर्याप्त नींद लेना भी इस दौरान महत्वपूर्ण माना गया है। रोजाना हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। मौसम बदलने के दौरान साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना भी जरूरी है। बाहर से घर लौटने के बाद हाथ अच्छी तरह धोने की आदत संक्रमण से बचाव में मदद कर सकती है। व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ आसपास की साफ-सफाई का भी ध्यान रखना चाहिए।

    स्वास्थ्य से जुड़े लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि कई दिनों तक बुखार बना रहता है, लगातार खांसी बढ़ती जाती है, सांस लेने में परेशानी होती है या बहुत अधिक कमजोरी महसूस होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। यदि दवा लेने के बाद भी राहत नहीं मिलती है, तब भी चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    बदलते मौसम में बार-बार खुद से दवा लेना उचित नहीं माना गया है। खासकर जब लक्षण लगातार बने रहें या उनकी गंभीरता बढ़ती जाए, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। मौसम के अनुसार कपड़े पहनना, पर्याप्त पानी पीना, पौष्टिक भोजन लेना, पूरी नींद लेना, हल्की शारीरिक गतिविधि करना और स्वच्छता का ध्यान रखना इस दौरान स्वास्थ्य संबंधी सावधानी के प्रमुख उपाय हैं।

  • रूखी और बेजान त्वचा से परेशान हैं तो आजमाएं एलोवेरा, चेहरे पर लगाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां जानिए

    रूखी और बेजान त्वचा से परेशान हैं तो आजमाएं एलोवेरा, चेहरे पर लगाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां जानिए


    नई दिल्ली। एलोवेरा को लंबे समय से त्वचा की देखभाल के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसकी पत्तियों के अंदर मौजूद जेल त्वचा को ठंडक देने और नमी बनाए रखने में मदद कर सकता है। बदलते मौसम धूप और प्रदूषण की वजह से अक्सर चेहरा रूखा और बेजान नजर आने लगता है। ऐसे में एलोवेरा को अपने स्किन केयर रूटीन में शामिल करना एक आसान घरेलू विकल्प हो सकता है। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले अपनी स्किन टाइप को समझना जरूरी है।

    एलोवेरा जेल का सबसे सामान्य इस्तेमाल चेहरे पर मॉइस्चराइजिंग के लिए किया जाता है। साफ चेहरे पर थोड़ी मात्रा में एलोवेरा जेल लगाकर हल्के हाथों से मसाज की जा सकती है। कुछ समय बाद चेहरे को सामान्य पानी से धो लें। अगर त्वचा को एलोवेरा सूट करता है तो नियमित स्किन केयर रूटीन में इसे शामिल किया जा सकता है। एलोवेरा त्वचा को हाइड्रेट रखने में मदद कर सकता है जिससे चेहरा मुलायम महसूस हो सकता है।

    धूप के संपर्क में आने के बाद त्वचा पर गर्माहट या हल्की जलन महसूस हो तो एलोवेरा जेल ठंडक देने में मदद कर सकता है। इसे त्वचा पर रगड़ने के बजाय हल्के हाथों से लगाया जाना चाहिए। बहुत ज्यादा धूप से हुई जलन या त्वचा पर गंभीर परेशानी होने पर केवल घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।

    अगर आपकी त्वचा बहुत रूखी है तो एलोवेरा जेल के साथ उपयुक्त मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं तैलीय त्वचा वाले लोग हल्की मात्रा में जेल का प्रयोग कर सकते हैं। एलोवेरा को चेहरे पर लगाने से पहले त्वचा को अच्छी तरह साफ करना जरूरी है। गंदगी और पसीने के ऊपर जेल लगाने से स्किन केयर का फायदा कम हो सकता है।

    एलोवेरा को नींबू या बेकिंग सोडा जैसी चीजों के साथ मिलाकर लगाने से बचना चाहिए। ऐसी चीजें कुछ लोगों की त्वचा में जलन या संवेदनशीलता बढ़ा सकती हैं। इसी तरह बाजार से खरीदे गए एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करते समय उसके ingredients को देखना उपयोगी रहता है। खुशबू या अन्य मिलाए गए पदार्थों से संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को परेशानी हो सकती है।

    सबसे जरूरी बात यह है कि एलोवेरा हर तरह की त्वचा की समस्या का इलाज नहीं है। पिंपल्स दाग धब्बे या किसी अन्य समस्या में इसका असर व्यक्ति की त्वचा के अनुसार अलग हो सकता है। किसी नए प्रोडक्ट या जेल को पूरे चेहरे पर लगाने से पहले हाथ या त्वचा के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना बेहतर माना जाता है। अगर लालिमा खुजली या जलन महसूस हो तो इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।

    स्किन केयर में एलोवेरा के साथ पर्याप्त पानी पीना संतुलित भोजन लेना नींद पूरी करना और रोजाना सनस्क्रीन का इस्तेमाल भी महत्वपूर्ण है। केवल किसी एक घरेलू नुस्खे से त्वचा में स्थायी बदलाव की उम्मीद करने के बजाय नियमित और संतुलित स्किन केयर रूटीन अपनाना ज्यादा उपयोगी हो सकता है। सही तरीके और सावधानी के साथ एलोवेरा त्वचा को मुलायम और हाइड्रेटेड बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता है।