Category: Lifestyle

  • डॉक्टरों पर बढ़ते हमलों ने बढ़ाई चिंता WHO ने कहा हेल्थकेयर वर्कर्स की सुरक्षा के बिना मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था संभव नहीं

    डॉक्टरों पर बढ़ते हमलों ने बढ़ाई चिंता WHO ने कहा हेल्थकेयर वर्कर्स की सुरक्षा के बिना मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था संभव नहीं


    नई दिल्ली । दुनिया भर में मरीजों की जान बचाने के लिए दिन रात काम करने वाले डॉक्टर नर्स और अन्य हेल्थकेयर वर्कर्स अब खुद असुरक्षा के माहौल में काम करने को मजबूर हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी ताजा रिपोर्ट में इस स्थिति को गंभीर वैश्विक चिंता का विषय बताते हुए कहा है कि स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा केवल व्यक्तिगत सुरक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार हर 10 में से लगभग 4 हेल्थकेयर वर्कर्स अपने पेशेवर जीवन में कम से कम एक बार शारीरिक हिंसा का शिकार होते हैं जबकि गाली गलौज धमकी और अभद्र व्यवहार जैसी घटनाओं को शामिल किया जाए तो यह आंकड़ा 60 प्रतिशत से भी अधिक पहुंच जाता है।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों को कई बार मरीजों और उनके परिजनों के गुस्से का सामना करना पड़ता है। इलाज में देरी भीड़ अधिक होने संसाधनों की कमी और अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने जैसी परिस्थितियां कई बार तनाव को हिंसा में बदल देती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति केवल विकासशील देशों तक सीमित नहीं है बल्कि विकसित देशों में भी तेजी से बढ़ रही है।

    एक अंतरराष्ट्रीय मेडिकल अध्ययन के अनुसार डॉक्टरों और हेल्थकेयर वर्कर्स के खिलाफ हिंसा के सबसे अधिक मामले जर्मनी में दर्ज किए गए हैं जहां लगभग 91 प्रतिशत स्वास्थ्यकर्मियों ने किसी न किसी प्रकार की हिंसा का अनुभव बताया। इसके बाद चीन पेरू तुर्की और भारत का स्थान आता है। भारत में भी डॉक्टरों और अस्पताल कर्मियों पर हमलों की घटनाएं समय समय पर सामने आती रही हैं जिससे स्वास्थ्य क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डॉक्टरों पर बढ़ते हमलों के पीछे कई कारण हैं। अस्पतालों में मरीजों की अत्यधिक संख्या स्वास्थ्यकर्मियों की कमी लंबा इंतजार संवाद की कमी और इलाज से जुड़ी अवास्तविक अपेक्षाएं अक्सर विवाद की वजह बनती हैं। कई बार मरीज के परिजन भावनात्मक दबाव में आकर स्वास्थ्यकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार या हिंसा कर बैठते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि समाज में धैर्य की कमी भी इस समस्या को बढ़ा रही है।

    भारत में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए कई राज्यों ने अलग अलग कानून बनाए हैं लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि पूरे देश में एक समान और सख्त राष्ट्रीय कानून की आवश्यकता है। उनका कहना है कि केवल कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं होगा बल्कि उसका प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही जरूरी है ताकि डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी बिना भय के अपना कर्तव्य निभा सकें।

    दुनिया के कई देशों ने इस समस्या से निपटने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। स्पेन ने डॉक्टरों पर हमले को राज्य के खिलाफ अपराध की श्रेणी में रखा जिसके बाद हिंसा की घटनाओं में कमी दर्ज की गई। सिंगापुर में स्वास्थ्यकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करने पर भारी जुर्माने और जेल का प्रावधान है जबकि यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका के कई हिस्सों में भी ऐसे मामलों में कड़े कानूनी प्रावधान लागू किए गए हैं।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि सुरक्षित स्वास्थ्यकर्मी ही सुरक्षित स्वास्थ्य व्यवस्था की नींव होते हैं। यदि डॉक्टर नर्स और अन्य चिकित्सा कर्मी भय और असुरक्षा के माहौल में काम करेंगे तो इसका सीधा असर मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ेगा। इसलिए सरकारों समाज और स्वास्थ्य संस्थानों को मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करना होगा जहां स्वास्थ्यकर्मियों का सम्मान और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हो सकें।

  • हर सुबह पेट रहेगा पूरी तरह साफ डाइट में शामिल करें ये सुपरफूड पाचन होगा मजबूत और दिनभर रहेंगे ऊर्जावान

    हर सुबह पेट रहेगा पूरी तरह साफ डाइट में शामिल करें ये सुपरफूड पाचन होगा मजबूत और दिनभर रहेंगे ऊर्जावान


    नई दिल्ली । सुबह पेट साफ न होना आज के समय में बड़ी संख्या में लोगों की आम समस्या बन गई है। इसके कारण दिनभर भारीपन गैस पेट फूलना और थकान जैसी परेशानियां बनी रहती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हर बार दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय यदि खानपान और जीवनशैली में सही बदलाव किए जाएं तो इस समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है। संतुलित आहार पर्याप्त पानी और नियमित दिनचर्या पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार कब्ज या सुबह पेट साफ न होने का सबसे बड़ा कारण भोजन में फाइबर की कमी है। फाइबर आंतों की गति को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है और मल को आसानी से बाहर निकालने में सहायक होता है। इसके अलावा पर्याप्त पानी न पीना लंबे समय तक बैठे रहना शारीरिक गतिविधियों की कमी और अनियमित खानपान भी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं। इसलिए सबसे पहले इन कारणों को समझना और उन्हें सुधारना जरूरी है।

    सुबह उठने के बाद एक से दो गिलास गुनगुना पानी पीना पाचन तंत्र को सक्रिय करने का आसान तरीका माना जाता है। इससे आंतों की गतिविधि बढ़ सकती है और मल त्याग में सहायता मिल सकती है। कई विशेषज्ञ रात में मुनक्का या सूखे अंजीर को पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाने की सलाह भी देते हैं। इनमें मौजूद फाइबर पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

    पपीता भी पाचन के लिए लाभकारी फलों में माना जाता है। इसमें फाइबर के साथ पपेन नामक एंजाइम पाया जाता है जो भोजन को पचाने में सहायता करता है। इसके अलावा नाश्ते में ओट्स या गेहूं का दलिया शामिल करना भी अच्छा विकल्प हो सकता है क्योंकि इनमें घुलनशील फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।

    हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक मेथी और बथुआ को नियमित भोजन का हिस्सा बनाना भी फायदेमंद माना जाता है। इनमें फाइबर के साथ पानी की मात्रा भी अच्छी होती है जिससे कब्ज की समस्या कम हो सकती है। दोपहर के भोजन के साथ दही या छाछ का सेवन भी लाभकारी माना जाता है क्योंकि इनमें मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया आंतों के संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं और पाचन प्रक्रिया को मजबूत बनाते हैं।

    सिर्फ खानपान ही नहीं बल्कि नियमित शारीरिक गतिविधि भी बेहद जरूरी है। रोजाना कम से कम तीस मिनट पैदल चलना हल्का व्यायाम करना या योग का अभ्यास करना आंतों की प्राकृतिक गति को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। साथ ही समय पर भोजन करना और पर्याप्त नींद लेना भी पाचन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

    हालांकि यदि कब्ज की समस्या लंबे समय तक बनी रहे लगातार पेट दर्द हो मल में खून आए अचानक वजन कम होने लगे या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही खानपान पर्याप्त पानी नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर अधिकांश लोग पाचन संबंधी समस्याओं से राहत पा सकते हैं और हर सुबह बेहतर महसूस कर सकते हैं।

  • चावल के आटे का फेस पैक बदल सकता है आपकी त्वचा की रंगत जानिए इस्तेमाल का सही तरीका और जबरदस्त फायदे

    चावल के आटे का फेस पैक बदल सकता है आपकी त्वचा की रंगत जानिए इस्तेमाल का सही तरीका और जबरदस्त फायदे


    नई दिल्ली । आजकल हर कोई बिना महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट के प्राकृतिक और स्वस्थ त्वचा पाना चाहता है। ऐसे में रसोई में आसानी से मिलने वाला चावल का आटा स्किन केयर के लिए एक बेहतरीन घरेलू विकल्प माना जाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व त्वचा को साफ करने डेड स्किन हटाने और चेहरे की चमक बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं। नियमित और सही तरीके से इसका इस्तेमाल करने पर त्वचा अधिक मुलायम ताजा और निखरी हुई दिखाई दे सकती है।

    चावल के आटे में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो त्वचा की ऊपरी परत पर जमी गंदगी और अतिरिक्त तेल को हटाने में मदद कर सकते हैं। यह एक प्राकृतिक एक्सफोलिएटर की तरह काम करता है जिससे डेड स्किन धीरे धीरे हटती है और नई त्वचा उभरकर सामने आती है। इसके नियमित उपयोग से त्वचा की बनावट में सुधार महसूस किया जा सकता है और चेहरा पहले से अधिक साफ और चमकदार दिखाई दे सकता है।

    अगर चेहरे पर टैनिंग या धूप का असर दिखाई दे रहा है तो चावल के आटे का फेस पैक लाभदायक माना जाता है। इसके लिए चावल के आटे में दही या कच्चा दूध मिलाकर पेस्ट तैयार करें और इसे चेहरे पर लगभग पंद्रह से बीस मिनट तक लगाएं। सूखने के बाद हल्के हाथों से मसाज करते हुए साफ पानी से धो लें। इससे त्वचा को ताजगी मिलने के साथ उसका प्राकृतिक निखार भी बढ़ सकता है।

    ऑयली स्किन वाले लोग चावल के आटे में गुलाब जल मिलाकर फेस पैक तैयार कर सकते हैं। यह त्वचा पर मौजूद अतिरिक्त तेल को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है और चेहरे को फ्रेश महसूस कराता है। वहीं ड्राई स्किन वाले लोग इसमें शहद या एलोवेरा जेल मिलाकर इस्तेमाल करें तो त्वचा को नमी बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

    चावल के आटे का उपयोग फेस स्क्रब के रूप में भी किया जाता है। इसमें थोड़ा सा शहद और दूध मिलाकर हल्के हाथों से चेहरे पर गोलाकार गति में मसाज करें। इससे त्वचा पर जमा धूल मिट्टी और मृत कोशिकाएं हट सकती हैं और त्वचा अधिक मुलायम महसूस होती है। हालांकि स्क्रब करते समय बहुत ज्यादा रगड़ने से बचना चाहिए क्योंकि इससे त्वचा में जलन हो सकती है।

    विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले त्वचा के एक छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट जरूर कर लेना चाहिए। यदि किसी प्रकार की एलर्जी खुजली या जलन महसूस हो तो इसका उपयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए। जिन लोगों की त्वचा बहुत संवेदनशील है या कोई त्वचा संबंधी बीमारी है उन्हें त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेने के बाद ही घरेलू उपाय अपनाने चाहिए।

    संतुलित आहार पर्याप्त पानी और नियमित स्किन केयर के साथ यदि चावल के आटे का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यह त्वचा की प्राकृतिक चमक बनाए रखने में सहायक हो सकता है। हालांकि यह कोई चिकित्सीय उपचार नहीं है और इसके परिणाम हर व्यक्ति की त्वचा के अनुसार अलग अलग हो सकते हैं। इसलिए धैर्य और नियमित देखभाल के साथ इसका उपयोग करना अधिक लाभदायक माना जाता है।

  • पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए दुबई का बड़ा दांव, रेफरल कार्यक्रम के तहत होटल, भोजन और पर्यटन सुविधाओं पर मिलेगा आकर्षक डिस्काउंट

    पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए दुबई का बड़ा दांव, रेफरल कार्यक्रम के तहत होटल, भोजन और पर्यटन सुविधाओं पर मिलेगा आकर्षक डिस्काउंट


    नई दिल्ली ।
    संयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख शहर दुबई ने पर्यटन गतिविधियों को गति देने और अधिक अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से एक नई प्रोत्साहन योजना शुरू की है। इस पहल के तहत दुबई में रहने वाले लोग यदि अपने दोस्तों या परिवार के सदस्यों को शहर घूमने के लिए आमंत्रित करते हैं, तो उन्हें 3,000 दिरहम से अधिक मूल्य के विशेष लाभ और छूट उपलब्ध कराई जाएगी। भारतीय मुद्रा में इन लाभों का मूल्य लगभग 80 हजार रुपये के बराबर माना जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र में फिर से तेजी लाना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है।

    नई योजना के तहत दुबई के निवासी ऑनलाइन पंजीकरण के माध्यम से अपने परिचितों को आमंत्रित कर सकेंगे। आमंत्रित मेहमानों को होटल में ठहरने, रेस्तरां में भोजन, प्रमुख पर्यटन स्थलों के प्रवेश टिकट तथा अन्य मनोरंजन सेवाओं पर विशेष लाभ प्रदान किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि स्थानीय निवासियों की भागीदारी से अधिक संख्या में पर्यटक दुबई पहुंचेंगे और पर्यटन उद्योग को नई गति मिलेगी।

    यह कार्यक्रम 20 जुलाई से शुरू होकर 31 अक्टूबर तक लागू रहेगा। यह अवधि ऐसे समय को ध्यान में रखकर तय की गई है जब दुबई में भीषण गर्मी के कारण सामान्य रूप से पर्यटकों की संख्या अपेक्षाकृत कम रहती है। गर्मियों के दौरान तापमान कई बार 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जिससे पर्यटन गतिविधियां प्रभावित होती हैं। ऐसे में यह योजना ऑफ-सीजन के दौरान पर्यटकों की संख्या बढ़ाने का प्रयास मानी जा रही है।

    पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े क्षेत्रीय तनाव और संघर्षों का प्रभाव पर्यटन उद्योग पर भी पड़ा है। खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर बनी चिंताओं के कारण कई पर्यटकों ने अपनी यात्राएं स्थगित कर दीं या अन्य गंतव्यों का रुख किया। इसका असर होटल, रेस्तरां, परिवहन और मनोरंजन उद्योग सहित पर्यटन से जुड़े अनेक क्षेत्रों पर देखने को मिला। नई योजना के जरिए प्रशासन इस गिरावट की भरपाई करने का प्रयास कर रहा है।

    दुबई लंबे समय से दुनिया के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल रहा है। आधुनिक बुनियादी ढांचा, ऊंची इमारतें, लक्जरी होटल, समुद्री तट, रेगिस्तानी पर्यटन और विश्वस्तरीय मनोरंजन सुविधाएं इसे अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के बीच विशेष पहचान दिलाती हैं। हर वर्ष करोड़ों पर्यटक यहां पहुंचते हैं, जिससे पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। यही कारण है कि पर्यटकों की संख्या बनाए रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि रेफरल आधारित यह मॉडल पर्यटन उद्योग के लिए प्रभावी साबित हो सकता है। जब स्थानीय निवासी अपने परिचितों को व्यक्तिगत रूप से किसी स्थान पर आने के लिए प्रेरित करते हैं, तो यात्रियों का विश्वास बढ़ता है और यात्रा का निर्णय लेना आसान हो जाता है। साथ ही आकर्षक लाभ और विशेष छूट इस योजना को और अधिक उपयोगी बनाते हैं।

    दुबई प्रशासन को उम्मीद है कि यह अभियान आने वाले महीनों में होटल अधिभोग, स्थानीय व्यापार, रेस्तरां, मनोरंजन उद्योग और अन्य पर्यटन सेवाओं को सकारात्मक बढ़ावा देगा। यदि योजना को अपेक्षित सफलता मिलती है, तो भविष्य में ऐसे प्रोत्साहन कार्यक्रमों का विस्तार भी किया जा सकता है। फिलहाल यह पहल पर्यटन क्षेत्र में नई ऊर्जा लाने और वैश्विक यात्रियों को फिर से दुबई की ओर आकर्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • आईसीएमआर के अध्ययन में खुलासा, आदतों में समय रहते सुधार से टल सकता है हार्ट अटैक का खतरा

    आईसीएमआर के अध्ययन में खुलासा, आदतों में समय रहते सुधार से टल सकता है हार्ट अटैक का खतरा

    नई दिल्ली । भारत सहित वैश्विक स्तर पर कम उम्र के युवाओं में हृदय संबंधी बीमारियों और अचानक कार्डियक अरेस्ट के मामलों में हो रही अप्रत्याशित वृद्धि ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को गहरी चिंता में डाल दिया है। बीस वर्ष से कम आयु के युवाओं में हाई ब्लड प्रेशर, धमनियों में ब्लॉकेज और दिल के दौरों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि यह समस्या केवल आनुवंशिक कारणों तक सीमित नहीं रह गई है। चिकित्सा विज्ञानियों के अनुसार, दैनिक दिनचर्या में शामिल गलत आदतें और अस्वस्थ जीवनशैली इस गंभीर स्वास्थ्य संकट का सबसे मुख्य कारण बनकर सामने आई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्टों में भी यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि गैर-संक्रामक रोगों में हृदय रोग दुनिया भर में होने वाली सर्वाधिक मौतों के लिए जिम्मेदार हैं।

    भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा किए गए हालिया शोध में एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। इस अध्ययन के अनुसार, देश के लगभग नब्बे प्रतिशत वयस्कों के रक्त नमूनों में कोलेस्ट्रॉल या वसा का कम से कम एक स्तर सामान्य मापदंडों से असंतुलित पाया गया है। शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का बढ़ना धमनियों में रुकावट पैदा करता है, जिससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। कई बार ये स्वास्थ्य समस्याएं बिना किसी स्पष्ट शारीरिक लक्षण के लंबे समय तक शरीर के भीतर विकसित होती रहती हैं, जिससे स्थिति अचानक गंभीर रूप ले लेती है और व्यक्ति को संभलने का अवसर नहीं मिलता।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी कई आदतें दिल की सेहत को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचा रही हैं। लगातार कई घंटों तक एक ही स्थान पर बैठकर काम करना, शारीरिक व्यायाम की कमी, जंक फूड और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन धमनियों को सख्त और संकीर्ण बना देता है। इसके अलावा, धूम्रपान और तंबाकू के सेवन से रक्त में ऑक्सीजन का स्तर घटता है तथा रक्त धमनियों की अंदरूनी दीवारों को क्षति पहुंचती है। अत्यधिक मानसिक तनाव, अनिद्रा और खानपान में अत्यधिक नमक व शर्करा की मात्रा भी उच्च रक्तचाप को बढ़ावा देकर हृदय के कार्यकलापों पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है।

    चिकित्सकों का स्पष्ट कहना है कि यदि शुरुआती दौर में ही दैनिक आदतों में सकारात्मक परिवर्तन किए जाएं, तो हृदय रोगों, स्ट्रोक और अकाल मृत्यु के जोखिम को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए संतुलित आहार का सेवन, नियमित रूप से योग या व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन जैसी स्वास्थवर्धक आदतों को अपनाना अनिवार्य है। साथ ही, पारिवारिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए नियमित अंतराल पर ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की निवारक जांच कराना आवश्यक है। समय पर की गई यह सतर्कता बेजुबान दिल को सुरक्षित रखने और गंभीर चिकित्सा आपात्काल से बचाने में अत्यंत कारगर सिद्ध हो सकती है।

  • डिनर में बनाएं जीरा राइस और कढ़ी पकोड़ा, पारंपरिक स्वाद के साथ मिलेगा घर जैसा लाजवाब जायका

    डिनर में बनाएं जीरा राइस और कढ़ी पकोड़ा, पारंपरिक स्वाद के साथ मिलेगा घर जैसा लाजवाब जायका

    नई दिल्ली । अगर रोज़ाना एक जैसा भोजन खाकर ऊब महसूस होने लगी है, तो डिनर में जीरा राइस और कढ़ी पकोड़ा का पारंपरिक संयोजन स्वाद में नया बदलाव ला सकता है। हल्के मसालों की खुशबू से भरपूर जीरा राइस और खट्टे-तीखे स्वाद वाली क्रीमी कढ़ी के साथ नरम पकोड़े भारतीय भोजन की सबसे पसंदीदा डिशों में शामिल हैं। यह व्यंजन न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि घर में उपलब्ध सामान्य सामग्री से आसानी से तैयार भी किया जा सकता है।

    कढ़ी बनाने के लिए सबसे पहले एक कप खट्टे दही में तीन बड़े चम्मच बेसन, हल्दी, नमक और लगभग तीन कप पानी मिलाकर अच्छी तरह फेंट लें। ध्यान रखें कि मिश्रण में किसी प्रकार की गांठ न रहे। इसके बाद एक कड़ाही में तेल या घी गर्म करें और उसमें जीरा, राई, मेथी दाना, हींग, करी पत्ता तथा साबुत लाल मिर्च डालकर सुगंधित तड़का तैयार करें। अब दही और बेसन का मिश्रण इसमें डालें और धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए लगभग 20 से 25 मिनट तक पकाएं, ताकि कढ़ी अच्छी तरह गाढ़ी और स्वादिष्ट बन सके।

    इस बीच पकोड़े तैयार किए जा सकते हैं। इसके लिए एक बर्तन में बेसन, बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया और स्वादानुसार नमक मिलाकर गाढ़ा घोल तैयार करें। चाहें तो हल्के और मुलायम पकोड़ों के लिए इसमें एक चुटकी बेकिंग सोडा भी मिला सकते हैं। गर्म तेल में छोटे-छोटे पकोड़े सुनहरे होने तक तल लें। जब कढ़ी अच्छी तरह पक जाए, तब इन पकोड़ों को उसमें डालकर लगभग आठ से दस मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं, ताकि उनमें कढ़ी का स्वाद पूरी तरह समा जाए।

    जीरा राइस इस डिश का स्वाद और बढ़ा देते हैं। इसके लिए पके हुए चावल में घी या तेल गर्म कर जीरा भूनें और फिर उसमें चावल डालकर हल्का सा मिला लें। चाहें तो इसमें थोड़ा हरा धनिया भी डाल सकते हैं। जीरे की खुशबू चावल को अलग स्वाद देती है और कढ़ी के साथ इसका मेल बेहद संतुलित लगता है।

    बेहतरीन कढ़ी बनाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। हमेशा हल्का खट्टा दही इस्तेमाल करें, क्योंकि इससे कढ़ी का स्वाद अधिक संतुलित और पारंपरिक बनता है। कढ़ी को तेज आंच पर पकाने के बजाय धीमी आंच पर पकाएं, ताकि बेसन अच्छी तरह पक जाए और स्वाद में कच्चापन न रहे। वहीं पकोड़ों को बहुत ज्यादा सख्त न तलें, ताकि वे कढ़ी में डालने के बाद मुलायम बने रहें।

    करी पत्ता, मेथी दाना और हींग का तड़का कढ़ी की खुशबू और स्वाद को और बेहतर बना देता है। यदि चाहें तो ऊपर से थोड़ा लाल मिर्च पाउडर घी में भूनकर डाल सकते हैं, जिससे डिश का रंग और स्वाद दोनों आकर्षक हो जाते हैं। गर्मागर्म कढ़ी पकोड़ा को जीरा राइस, पापड़, अचार और सलाद के साथ परोसकर परिवार के साथ पारंपरिक भारतीय भोजन का आनंद लिया जा सकता है।

  • डिनर में बनाएं जीरा राइस और कढ़ी पकोड़ा, पारंपरिक स्वाद के साथ मिलेगा घर जैसा लाजवाब जायका

    डिनर में बनाएं जीरा राइस और कढ़ी पकोड़ा, पारंपरिक स्वाद के साथ मिलेगा घर जैसा लाजवाब जायका

    नई दिल्ली । अगर रोज़ाना एक जैसा भोजन खाकर ऊब महसूस होने लगी है, तो डिनर में जीरा राइस और कढ़ी पकोड़ा का पारंपरिक संयोजन स्वाद में नया बदलाव ला सकता है। हल्के मसालों की खुशबू से भरपूर जीरा राइस और खट्टे-तीखे स्वाद वाली क्रीमी कढ़ी के साथ नरम पकोड़े भारतीय भोजन की सबसे पसंदीदा डिशों में शामिल हैं। यह व्यंजन न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि घर में उपलब्ध सामान्य सामग्री से आसानी से तैयार भी किया जा सकता है।

    कढ़ी बनाने के लिए सबसे पहले एक कप खट्टे दही में तीन बड़े चम्मच बेसन, हल्दी, नमक और लगभग तीन कप पानी मिलाकर अच्छी तरह फेंट लें। ध्यान रखें कि मिश्रण में किसी प्रकार की गांठ न रहे। इसके बाद एक कड़ाही में तेल या घी गर्म करें और उसमें जीरा, राई, मेथी दाना, हींग, करी पत्ता तथा साबुत लाल मिर्च डालकर सुगंधित तड़का तैयार करें। अब दही और बेसन का मिश्रण इसमें डालें और धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए लगभग 20 से 25 मिनट तक पकाएं, ताकि कढ़ी अच्छी तरह गाढ़ी और स्वादिष्ट बन सके।

    इस बीच पकोड़े तैयार किए जा सकते हैं। इसके लिए एक बर्तन में बेसन, बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया और स्वादानुसार नमक मिलाकर गाढ़ा घोल तैयार करें। चाहें तो हल्के और मुलायम पकोड़ों के लिए इसमें एक चुटकी बेकिंग सोडा भी मिला सकते हैं। गर्म तेल में छोटे-छोटे पकोड़े सुनहरे होने तक तल लें। जब कढ़ी अच्छी तरह पक जाए, तब इन पकोड़ों को उसमें डालकर लगभग आठ से दस मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं, ताकि उनमें कढ़ी का स्वाद पूरी तरह समा जाए।

    जीरा राइस इस डिश का स्वाद और बढ़ा देते हैं। इसके लिए पके हुए चावल में घी या तेल गर्म कर जीरा भूनें और फिर उसमें चावल डालकर हल्का सा मिला लें। चाहें तो इसमें थोड़ा हरा धनिया भी डाल सकते हैं। जीरे की खुशबू चावल को अलग स्वाद देती है और कढ़ी के साथ इसका मेल बेहद संतुलित लगता है।

    बेहतरीन कढ़ी बनाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। हमेशा हल्का खट्टा दही इस्तेमाल करें, क्योंकि इससे कढ़ी का स्वाद अधिक संतुलित और पारंपरिक बनता है। कढ़ी को तेज आंच पर पकाने के बजाय धीमी आंच पर पकाएं, ताकि बेसन अच्छी तरह पक जाए और स्वाद में कच्चापन न रहे। वहीं पकोड़ों को बहुत ज्यादा सख्त न तलें, ताकि वे कढ़ी में डालने के बाद मुलायम बने रहें।

    करी पत्ता, मेथी दाना और हींग का तड़का कढ़ी की खुशबू और स्वाद को और बेहतर बना देता है। यदि चाहें तो ऊपर से थोड़ा लाल मिर्च पाउडर घी में भूनकर डाल सकते हैं, जिससे डिश का रंग और स्वाद दोनों आकर्षक हो जाते हैं। गर्मागर्म कढ़ी पकोड़ा को जीरा राइस, पापड़, अचार और सलाद के साथ परोसकर परिवार के साथ पारंपरिक भारतीय भोजन का आनंद लिया जा सकता है।

  • गोवा की सुनहरी बीच या मनाली के बर्फीले पहाड़ किस जगह का सफर देगा सबसे यादगार अनुभव पढ़िए पूरी ट्रैवल गाइड

    गोवा की सुनहरी बीच या मनाली के बर्फीले पहाड़ किस जगह का सफर देगा सबसे यादगार अनुभव पढ़िए पूरी ट्रैवल गाइड


    नई दिल्ली । छुट्टियां आते ही सबसे पहले मन में घूमने फिरने का ख्याल आता है और जब भारत की सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों की बात होती है तो गोवा और मनाली का नाम सबसे पहले लिया जाता है। एक ओर गोवा अपने सुनहरे समुद्री तट रंगीन नाइट लाइफ और पुर्तगाली संस्कृति के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है तो दूसरी ओर मनाली बर्फ से ढके पहाड़ों हरियाली ठंडी वादियों और रोमांचक एडवेंचर गतिविधियों के कारण यात्रियों की पहली पसंद बना हुआ है। यदि आप भी इन दोनों जगहों में से किसी एक का चुनाव करने की सोच रहे हैं तो पहले अपनी पसंद बजट और यात्रा के उद्देश्य को समझना जरूरी है।

    अगर आपको समुद्र की लहरें बीच पर सुकून भरे पल और वाटर स्पोर्ट्स पसंद हैं तो गोवा आपके लिए शानदार विकल्प साबित हो सकता है। यहां बागा बीच कलंगुट बीच पालोलेम बीच और अंजुना बीच जैसे खूबसूरत समुद्री तट पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। गोवा में पैरासेलिंग जेट स्की बनाना राइड और स्कूबा डाइविंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का आनंद लिया जा सकता है। शाम के समय बीच किनारे सूर्यास्त का नजारा और स्थानीय सी फूड का स्वाद यात्रा को और भी खास बना देता है।

    यदि आप प्रकृति की गोद में कुछ सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं और बर्फीले पहाड़ों के बीच रोमांच का अनुभव लेना चाहते हैं तो मनाली एक बेहतरीन विकल्प है। यहां सोलंग वैली रोहतांग दर्रा हिडिंबा देवी मंदिर मनु मंदिर और वशिष्ठ के गर्म पानी के कुंड प्रमुख आकर्षण हैं। सर्दियों के मौसम में मनाली बर्फ की सफेद चादर से ढक जाता है जहां स्कीइंग स्नो बाइकिंग स्नोबोर्डिंग और पैराग्लाइडिंग जैसी गतिविधियां पर्यटकों को रोमांच से भर देती हैं। गर्मियों में भी यहां का सुहावना मौसम यात्रियों को राहत और सुकून देता है।

    यात्रा की योजना बनाते समय बजट का ध्यान रखना भी जरूरी है। यदि पहले से होटल और फ्लाइट या ट्रेन की बुकिंग कर ली जाए तो खर्च काफी कम हो सकता है। ऑफ सीजन में यात्रा करने पर होटल और पर्यटन गतिविधियों में बेहतर छूट मिल जाती है। स्थानीय परिवहन का उपयोग करने और पहले से यात्रा कार्यक्रम तैयार करने से समय और पैसे दोनों की बचत होती है।

    सफर के दौरान मौसम के अनुसार कपड़े साथ रखना बेहद जरूरी है। गोवा जाने वाले यात्रियों को हल्के सूती कपड़े सनस्क्रीन टोपी और धूप का चश्मा साथ रखना चाहिए। वहीं मनाली जाने वालों को गर्म जैकेट ऊनी कपड़े दस्ताने और आरामदायक जूते जरूर रखने चाहिए ताकि मौसम का पूरा आनंद लिया जा सके।

    यात्रा के दौरान स्थानीय संस्कृति और नियमों का सम्मान करना भी हर पर्यटक की जिम्मेदारी है। सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखें प्लास्टिक का कम उपयोग करें और प्राकृतिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने से बचें। इससे पर्यटन स्थलों की सुंदरता लंबे समय तक बनी रहती है।

    चाहे आप गोवा की समुद्री लहरों के बीच छुट्टियां बिताना चाहते हों या मनाली की ठंडी वादियों में सुकून तलाश रहे हों दोनों ही जगहें अपने अलग अनुभव और यादगार पलों के लिए मशहूर हैं। सही योजना और थोड़ी तैयारी के साथ आपका सफर न केवल आरामदायक होगा बल्कि जीवन भर याद रहने वाला अनुभव भी बन जाएगा।

  • गोवा की सुनहरी बीच या मनाली के बर्फीले पहाड़ किस जगह का सफर देगा सबसे यादगार अनुभव पढ़िए पूरी ट्रैवल गाइड

    गोवा की सुनहरी बीच या मनाली के बर्फीले पहाड़ किस जगह का सफर देगा सबसे यादगार अनुभव पढ़िए पूरी ट्रैवल गाइड


    नई दिल्ली । छुट्टियां आते ही सबसे पहले मन में घूमने फिरने का ख्याल आता है और जब भारत की सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों की बात होती है तो गोवा और मनाली का नाम सबसे पहले लिया जाता है। एक ओर गोवा अपने सुनहरे समुद्री तट रंगीन नाइट लाइफ और पुर्तगाली संस्कृति के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है तो दूसरी ओर मनाली बर्फ से ढके पहाड़ों हरियाली ठंडी वादियों और रोमांचक एडवेंचर गतिविधियों के कारण यात्रियों की पहली पसंद बना हुआ है। यदि आप भी इन दोनों जगहों में से किसी एक का चुनाव करने की सोच रहे हैं तो पहले अपनी पसंद बजट और यात्रा के उद्देश्य को समझना जरूरी है।

    अगर आपको समुद्र की लहरें बीच पर सुकून भरे पल और वाटर स्पोर्ट्स पसंद हैं तो गोवा आपके लिए शानदार विकल्प साबित हो सकता है। यहां बागा बीच कलंगुट बीच पालोलेम बीच और अंजुना बीच जैसे खूबसूरत समुद्री तट पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। गोवा में पैरासेलिंग जेट स्की बनाना राइड और स्कूबा डाइविंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का आनंद लिया जा सकता है। शाम के समय बीच किनारे सूर्यास्त का नजारा और स्थानीय सी फूड का स्वाद यात्रा को और भी खास बना देता है।

    यदि आप प्रकृति की गोद में कुछ सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं और बर्फीले पहाड़ों के बीच रोमांच का अनुभव लेना चाहते हैं तो मनाली एक बेहतरीन विकल्प है। यहां सोलंग वैली रोहतांग दर्रा हिडिंबा देवी मंदिर मनु मंदिर और वशिष्ठ के गर्म पानी के कुंड प्रमुख आकर्षण हैं। सर्दियों के मौसम में मनाली बर्फ की सफेद चादर से ढक जाता है जहां स्कीइंग स्नो बाइकिंग स्नोबोर्डिंग और पैराग्लाइडिंग जैसी गतिविधियां पर्यटकों को रोमांच से भर देती हैं। गर्मियों में भी यहां का सुहावना मौसम यात्रियों को राहत और सुकून देता है।

    यात्रा की योजना बनाते समय बजट का ध्यान रखना भी जरूरी है। यदि पहले से होटल और फ्लाइट या ट्रेन की बुकिंग कर ली जाए तो खर्च काफी कम हो सकता है। ऑफ सीजन में यात्रा करने पर होटल और पर्यटन गतिविधियों में बेहतर छूट मिल जाती है। स्थानीय परिवहन का उपयोग करने और पहले से यात्रा कार्यक्रम तैयार करने से समय और पैसे दोनों की बचत होती है।

    सफर के दौरान मौसम के अनुसार कपड़े साथ रखना बेहद जरूरी है। गोवा जाने वाले यात्रियों को हल्के सूती कपड़े सनस्क्रीन टोपी और धूप का चश्मा साथ रखना चाहिए। वहीं मनाली जाने वालों को गर्म जैकेट ऊनी कपड़े दस्ताने और आरामदायक जूते जरूर रखने चाहिए ताकि मौसम का पूरा आनंद लिया जा सके।

    यात्रा के दौरान स्थानीय संस्कृति और नियमों का सम्मान करना भी हर पर्यटक की जिम्मेदारी है। सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखें प्लास्टिक का कम उपयोग करें और प्राकृतिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने से बचें। इससे पर्यटन स्थलों की सुंदरता लंबे समय तक बनी रहती है।

    चाहे आप गोवा की समुद्री लहरों के बीच छुट्टियां बिताना चाहते हों या मनाली की ठंडी वादियों में सुकून तलाश रहे हों दोनों ही जगहें अपने अलग अनुभव और यादगार पलों के लिए मशहूर हैं। सही योजना और थोड़ी तैयारी के साथ आपका सफर न केवल आरामदायक होगा बल्कि जीवन भर याद रहने वाला अनुभव भी बन जाएगा।

  • फिट दिखना नहीं है स्वस्थ दिल की गारंटी ICMR की रिपोर्ट में सामने आई भारतीयों के कोलेस्ट्रॉल की चौंकाने वाली सच्चाई

    फिट दिखना नहीं है स्वस्थ दिल की गारंटी ICMR की रिपोर्ट में सामने आई भारतीयों के कोलेस्ट्रॉल की चौंकाने वाली सच्चाई


    नई दिल्ली । भारत में हृदय रोग तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हो चुके हैं और अब इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक नई स्टडी ने इस खतरे को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। अध्ययन के अनुसार देश के लगभग 10 में से 9 वयस्क किसी न किसी प्रकार की असामान्य कोलेस्ट्रॉल समस्या से प्रभावित हैं। यह स्थिति केवल बुजुर्गों या अधिक वजन वाले लोगों तक सीमित नहीं है बल्कि कम उम्र के युवा और सामान्य दिखने वाले स्वस्थ लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ नियमित स्वास्थ्य जांच और बेहतर जीवनशैली अपनाने पर लगातार जोर दे रहे हैं।

    इस अध्ययन में देशभर के 23665 लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट में पाया गया कि लगभग 87 प्रतिशत से अधिक लोगों में रक्त में वसा का स्तर सामान्य नहीं था। किसी में खराब कोलेस्ट्रॉल अधिक मिला तो किसी में ट्राइग्लिसराइड्स बढ़े हुए पाए गए जबकि बड़ी संख्या में लोगों में अच्छे कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य से कम था। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहने पर हृदय रोग हार्ट अटैक स्ट्रोक और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा सकती है।

    अध्ययन का सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि 30 से 39 वर्ष की आयु वर्ग में यह समस्या सबसे अधिक देखने को मिली। इसका मतलब है कि जिस उम्र में लोग अपने करियर और परिवार की जिम्मेदारियों में सबसे अधिक सक्रिय होते हैं उसी समय उनके दिल की सेहत सबसे बड़े खतरे का सामना कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली फास्ट फूड शारीरिक गतिविधि की कमी तनाव और अनियमित दिनचर्या इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में असामान्य कोलेस्ट्रॉल की समस्या अधिक पाई गई लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति भी बहुत अलग नहीं रही। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह समस्या अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई बल्कि पूरे देश में तेजी से फैल रही है। महिलाओं में भी पुरुषों की तुलना में यह समस्या अधिक दर्ज की गई जिससे महिलाओं के हृदय स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत महसूस की जा रही है।

    विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि केवल मोटापा मधुमेह या उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों में ही नहीं बल्कि ऐसे लोगों में भी असामान्य कोलेस्ट्रॉल पाया गया जो देखने में पूरी तरह स्वस्थ थे और जिन्हें पहले से कोई बड़ी बीमारी नहीं थी। इससे यह धारणा भी टूटती है कि केवल अधिक वजन वाले लोगों को ही हृदय रोग का खतरा होता है।

    डॉक्टरों के अनुसार समय समय पर लिपिड प्रोफाइल जांच कराना बेहद जरूरी है। इस साधारण रक्त जांच से कुल कोलेस्ट्रॉल अच्छे कोलेस्ट्रॉल खराब कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर आसानी से पता चल जाता है। यदि शुरुआत में ही गड़बड़ी का पता चल जाए तो खानपान में सुधार नियमित व्यायाम वजन नियंत्रित रखने धूम्रपान और शराब से दूरी बनाने तथा आवश्यकता पड़ने पर दवा के जरिए इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

    दिल को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना कम से कम तीस मिनट व्यायाम करना हरी सब्जियां फल साबुत अनाज और फाइबर युक्त भोजन लेना तले भुने और अधिक वसा वाले खाद्य पदार्थों से बचना पर्याप्त नींद लेना और तनाव को नियंत्रित रखना बेहद आवश्यक माना जाता है। साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहना भी उतना ही जरूरी है ताकि किसी भी समस्या का समय रहते पता चल सके।

    स्वस्थ जीवन केवल बाहरी फिटनेस से नहीं बल्कि शरीर के भीतर संतुलित स्वास्थ्य से बनता है। इसलिए यदि आप खुद को पूरी तरह स्वस्थ मानते हैं तब भी समय समय पर कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना और संतुलित जीवनशैली अपनाना आपके दिल को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है।