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  • स्किन केयर में चुकंदर और खीरा का कमाल: प्राकृतिक निखार से लेकर गहरी हाइड्रेशन तक त्वचा को मिलेंगे जबरदस्त फायदे

    स्किन केयर में चुकंदर और खीरा का कमाल: प्राकृतिक निखार से लेकर गहरी हाइड्रेशन तक त्वचा को मिलेंगे जबरदस्त फायदे


    नई दिल्ली । आज के समय में हर कोई साफ बेदाग और चमकदार त्वचा चाहता है। इसके लिए लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट और तरह तरह के स्किन ट्रीटमेंट का सहारा लेते हैं लेकिन कई बार प्राकृतिक चीजें अधिक प्रभावी और सुरक्षित साबित होती हैं। चुकंदर और खीरा ऐसे ही दो प्राकृतिक खाद्य पदार्थ हैं जिन्हें नियमित रूप से आहार में शामिल करने या सही तरीके से त्वचा की देखभाल में उपयोग करने से त्वचा को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं। इनमें मौजूद विटामिन मिनरल एंटीऑक्सीडेंट और पानी की प्रचुर मात्रा त्वचा को भीतर से पोषण देकर लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है।

    चुकंदर को प्राकृतिक ब्लड प्यूरीफायर माना जाता है। इसमें आयरन फोलेट विटामिन सी और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। जब शरीर अंदर से स्वस्थ रहता है तो उसका असर चेहरे पर भी साफ दिखाई देता है। चुकंदर का नियमित सेवन त्वचा की रंगत को निखारने और प्राकृतिक गुलाबी चमक बनाए रखने में सहायक माना जाता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट तत्व त्वचा को समय से पहले बूढ़ा होने से बचाने में भी मदद करते हैं और फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं।

    वहीं खीरा त्वचा के लिए प्राकृतिक हाइड्रेशन का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। इसमें लगभग 95 प्रतिशत पानी होता है जो शरीर और त्वचा दोनों को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। खीरे में विटामिन के विटामिन सी और सिलिका जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो त्वचा को मुलायम ताजा और स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होते हैं। गर्मियों और उमस भरे मौसम में खीरे का सेवन त्वचा को ठंडक देने के साथ डिहाइड्रेशन से भी बचा सकता है।

    यदि चुकंदर और खीरे का सेवन संतुलित आहार के साथ नियमित रूप से किया जाए तो त्वचा में प्राकृतिक निखार आने लगता है। इनका जूस या सलाद शरीर को आवश्यक पोषण देने के साथ त्वचा की कोशिकाओं को भी बेहतर तरीके से पोषित करता है। इसके अलावा कई लोग चुकंदर और खीरे का फेस पैक भी इस्तेमाल करते हैं। चुकंदर के रस और खीरे के रस को मिलाकर चेहरे पर कुछ मिनट लगाने से त्वचा को ताजगी और ठंडक मिल सकती है। हालांकि किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर परीक्षण करना बेहतर माना जाता है ताकि किसी प्रकार की एलर्जी की संभावना से बचा जा सके।

    स्वस्थ त्वचा के लिए केवल बाहरी देखभाल ही पर्याप्त नहीं होती बल्कि पर्याप्त पानी पीना संतुलित भोजन करना अच्छी नींद लेना और तनाव को नियंत्रित रखना भी बेहद जरूरी है। चुकंदर और खीरा इन सभी प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हो सकते हैं। यदि त्वचा संबंधी कोई गंभीर समस्या हो या लंबे समय तक परेशानी बनी रहे तो त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प होता है।

    प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर त्वचा की सुंदरता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है। चुकंदर और खीरा न केवल शरीर को पोषण देते हैं बल्कि त्वचा को भीतर से स्वस्थ रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नियमित और संतुलित उपयोग के साथ इनका लाभ अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सकता है।

  • ओमिक्रॉन का नया सब वैरिएंट RF.5 चर्चा में कितना खतरनाक है नया कोविड स्ट्रेन क्या कहते हैं विशेषज्ञ

    ओमिक्रॉन का नया सब वैरिएंट RF.5 चर्चा में कितना खतरनाक है नया कोविड स्ट्रेन क्या कहते हैं विशेषज्ञ


    नई दिल्ली। देश में एक बार फिर कोविड-19 के नए मामलों के बीच ओमिक्रॉन के सब वैरिएंट RF.5 की पहचान ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी बढ़ा दी है। आंध्र प्रदेश में चार संक्रमित नमूनों की जीनोम सीक्वेंसिंग के दौरान इस नए सब वैरिएंट की पुष्टि हुई है। इसके बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार इसकी निगरानी कर रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की आवश्यकता नहीं है लेकिन सावधानी और सतर्कता बनाए रखना बेहद जरूरी है।

    जानकारी के अनुसार आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले से कोविड-19 के चार पॉजिटिव नमूनों को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए पुणे स्थित वायरोलॉजी प्रयोगशाला भेजा गया था। जांच में इन सभी नमूनों में ओमिक्रॉन परिवार के RF.5 सब वैरिएंट की मौजूदगी पाई गई। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि संक्रमित मरीजों की निगरानी की जा रही है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक RF.5 कोई पूरी तरह नया वायरस नहीं बल्कि ओमिक्रॉन परिवार का ही एक विकसित सब वैरिएंट है। यह प्राकृतिक रूप से विकसित हुआ है और अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसकी उत्पत्ति पहले से मौजूद ओमिक्रॉन लाइनिएज के विकासक्रम से हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस वैरिएंट की निगरानी कर रहा है क्योंकि इसके मामले पहले सिंगापुर और दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ देशों में भी सामने आ चुके हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक उपलब्ध आंकड़ों से ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला है कि RF.5 व्यापक स्तर पर पहले के ओमिक्रॉन वैरिएंट की तुलना में बहुत अधिक गंभीर बीमारी फैला रहा है। हालांकि इसकी संक्रमण क्षमता और व्यवहार को लेकर लगातार अध्ययन जारी हैं। इसलिए सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां लोगों को सतर्क रहने और कोविड संबंधी सावधानियों का पालन करने की सलाह दे रही हैं।

    RF.5 के लक्षण भी काफी हद तक ओमिक्रॉन के अन्य सब वैरिएंट जैसे बताए जा रहे हैं। संक्रमित व्यक्ति में गले में खराश खांसी बुखार सिरदर्द शरीर में दर्द थकान और कुछ मामलों में नाक बंद होने जैसी शिकायतें हो सकती हैं। अधिकांश मरीजों में लक्षण हल्के रहते हैं लेकिन बुजुर्गों गर्भवती महिलाओं गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड से बचाव के लिए पहले अपनाए गए उपाय आज भी प्रभावी हैं। नियमित रूप से साबुन से हाथ धोना या अल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का उपयोग करना भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना और खांसी या बुखार जैसे लक्षण दिखाई देने पर दूसरों से दूरी बनाए रखना संक्रमण के खतरे को कम कर सकता है। यदि किसी व्यक्ति में लगातार बुखार सांस लेने में तकलीफ या गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

    स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक स्वास्थ्य एजेंसियों द्वारा जारी जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि सतर्कता जरूरी है लेकिन बिना पुष्टि वाली खबरों से घबराने की आवश्यकता नहीं है। समय पर जांच उपचार और आवश्यक सावधानियां अपनाकर कोविड संक्रमण के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • बरसात के मौसम में बढ़ा बुखार का खतरा, जानिए कब सामान्य फीवर है और कब तुरंत डेंगू की जांच कराना बन जाता है जरूरी

    बरसात के मौसम में बढ़ा बुखार का खतरा, जानिए कब सामान्य फीवर है और कब तुरंत डेंगू की जांच कराना बन जाता है जरूरी

    नई दिल्ली । मानसून के आगमन के साथ देश के कई हिस्सों में बुखार और संक्रमण से जुड़े मामलों में तेजी देखी जाती है। बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं यह मच्छरों और वायरस जनित बीमारियों के फैलने के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार करता है। ऐसे समय में अधिकांश लोगों को होने वाला बुखार सामान्य वायरल संक्रमण का परिणाम होता है, लेकिन कई मामलों में यही बुखार डेंगू जैसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। इसलिए केवल बुखार को देखकर निष्कर्ष निकालने के बजाय उसके साथ दिखाई देने वाले अन्य लक्षणों पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

    सामान्य मौसमी बुखार की शुरुआत प्रायः हल्के लक्षणों के साथ होती है। इसमें हल्का या मध्यम बुखार, शरीर में दर्द, गले में खराश, हल्की खांसी, थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। पर्याप्त आराम, पर्याप्त पानी पीने, हल्का भोजन और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दवाओं से अधिकांश लोगों की स्थिति दो से तीन दिनों में बेहतर होने लगती है। इस दौरान भूख कम लगना और सामान्य कमजोरी महसूस होना भी आम बात है, लेकिन गंभीर लक्षण आमतौर पर नहीं दिखाई देते।

    इसके विपरीत डेंगू का बुखार अक्सर अचानक और तेज तापमान के साथ शुरू होता है। मरीज को तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में अत्यधिक पीड़ा महसूस हो सकती है। कई मामलों में शरीर पर लाल रंग के छोटे-छोटे दाने दिखाई देने लगते हैं, जो डेंगू का महत्वपूर्ण संकेत माने जाते हैं। बीमारी बढ़ने पर अत्यधिक कमजोरी, उल्टी, मसूड़ों या नाक से खून आना और प्लेटलेट्स की संख्या में कमी जैसी गंभीर समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि बुखार लगातार तीन दिन से अधिक बना रहे, बार-बार तेज हो जाए, शरीर पर दाने उभर आएं या खून आने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। ऐसे मामलों में रक्त जांच और प्लेटलेट्स की निगरानी से बीमारी की समय पर पहचान संभव होती है, जिससे जटिलताओं का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    मानसून के दौरान बीमारी से बचाव के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। घर और आसपास पानी जमा न होने दें ताकि मच्छरों का प्रजनन न हो सके। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें, मच्छरदानी या रिपेलेंट का उपयोग करें और स्वच्छ भोजन व पर्याप्त पानी का सेवन करें। यदि बुखार हो जाए तो स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना अधिक सुरक्षित रहता है, क्योंकि समय पर सही उपचार ही डेंगू जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

  • माइग्रेन के दर्द में क्यों फायदेमंद मानी जाती है अजवाइन? तनाव, गैस और सूजन के असर को समझिए, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

    माइग्रेन के दर्द में क्यों फायदेमंद मानी जाती है अजवाइन? तनाव, गैस और सूजन के असर को समझिए, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

    नई दिल्ली । माइग्रेन सामान्य सिरदर्द से अलग और अधिक जटिल न्यूरोलॉजिकल समस्या मानी जाती है। इस स्थिति में सिर के एक हिस्से में तेज धड़कन जैसा दर्द महसूस हो सकता है, जो कई घंटों से लेकर तीन दिनों तक भी बना रह सकता है। कई लोगों को इसके साथ मतली, उल्टी, तेज रोशनी या तेज आवाज से परेशानी जैसी समस्याएं भी होती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि माइग्रेन के प्रभावी प्रबंधन के लिए केवल दवाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि जीवनशैली, खानपान और संभावित ट्रिगर को पहचानना भी जरूरी है।

    माइग्रेन के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। मानसिक तनाव, हार्मोनल बदलाव, पर्याप्त नींद न लेना, लंबे समय तक भूखे रहना, शरीर में पानी की कमी और कुछ विशेष खाद्य पदार्थ इसके प्रमुख ट्रिगर माने जाते हैं। इसके अलावा पाचन संबंधी समस्याएं, जैसे गैस, अपच और पेट फूलना भी कुछ लोगों में माइग्रेन की समस्या को बढ़ा सकती हैं। यही कारण है कि डॉक्टर माइग्रेन के मरीजों को संतुलित दिनचर्या अपनाने और ट्रिगर करने वाले कारणों से बचने की सलाह देते हैं।

    घरेलू उपायों की बात करें तो अजवाइन को लंबे समय से पाचन सुधारने वाले मसाले के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसमें थाइमोल नामक सक्रिय तत्व पाया जाता है, जिसे सूजन कम करने और शरीर को संक्रमण से बचाने वाले गुणों के लिए जाना जाता है। कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में यह भी संकेत मिले हैं कि थाइमोल शरीर में सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। चूंकि कई मामलों में सूजन माइग्रेन के दर्द की तीव्रता बढ़ाने में भूमिका निभा सकती है, इसलिए अजवाइन कुछ लोगों में राहत देने में सहायक हो सकती है।

    आयुर्वेद में भी अजवाइन को पाचन तंत्र के लिए लाभकारी माना गया है। विशेषज्ञ बताते हैं कि पाचन तंत्र और मस्तिष्क के बीच गहरा संबंध होता है, जिसे गट-ब्रेन कनेक्शन कहा जाता है। यदि किसी व्यक्ति में गैस, अपच या पेट की अन्य समस्याएं माइग्रेन को ट्रिगर करती हैं, तो पाचन में सुधार से सिरदर्द की आवृत्ति या तीव्रता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि इसका असर हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता क्योंकि माइग्रेन के कारण अलग-अलग हो सकते हैं।

    अजवाइन में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं, जो शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद कर सकते हैं। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कई स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए संतुलित मात्रा में अजवाइन का सेवन शरीर के लिए लाभकारी माना जाता है, हालांकि इसे किसी बीमारी के निश्चित उपचार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    कई लोग माइग्रेन के दौरान गर्म अजवाइन की पोटली या उसकी भाप का भी उपयोग करते हैं। माना जाता है कि इसकी तेज सुगंध कुछ लोगों में सिर के भारीपन और बेचैनी को कम करने में मदद कर सकती है। वहीं, अजवाइन का पानी भी पाचन बेहतर बनाने के लिए घरेलू उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यदि माइग्रेन का संबंध पाचन संबंधी गड़बड़ियों से है, तो इससे कुछ राहत मिल सकती है।

    विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि माइग्रेन एक चिकित्सकीय समस्या है और बार-बार होने वाले या गंभीर सिरदर्द की स्थिति में डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है। अजवाइन जैसे घरेलू उपाय केवल सहायक भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन इन्हें दवा या चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। सही निदान, संतुलित जीवनशैली, पर्याप्त पानी, नियमित नींद और चिकित्सकीय सलाह का पालन ही माइग्रेन को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।

  • बारिश में बाल झड़ना, डैंड्रफ और फ्रिज से हैं परेशान? मॉनसून में अपनाएं ये 8 आसान आदतें, बाल रहेंगे मजबूत और हेल्दी

    बारिश में बाल झड़ना, डैंड्रफ और फ्रिज से हैं परेशान? मॉनसून में अपनाएं ये 8 आसान आदतें, बाल रहेंगे मजबूत और हेल्दी

    नई दिल्ली ।बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं बालों की सेहत के लिए कई नई चुनौतियां भी पैदा कर देता है। वातावरण में बढ़ी नमी, प्रदूषण और बार-बार बालों के भीगने की वजह से बाल कमजोर, बेजान और रूखे दिखाई देने लगते हैं। इस दौरान हेयर फॉल, डैंड्रफ, फ्रिज और स्कैल्प से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं। ऐसे में केवल महंगे हेयर प्रोडक्ट्स पर निर्भर रहने के बजाय सही हेयर केयर रूटीन अपनाना अधिक प्रभावी माना जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार मॉनसून में सबसे पहले बालों को बारिश के पानी से बचाने की कोशिश करनी चाहिए। बारिश के पानी में धूल, प्रदूषण और अन्य अशुद्धियां हो सकती हैं, जो स्कैल्प और बालों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। यदि बाल भीग जाएं तो घर पहुंचकर माइल्ड और सल्फेट-फ्री शैंपू से उन्हें साफ करना बेहतर माना जाता है।

    बारिश के मौसम में स्कैल्प को लंबे समय तक गीला नहीं रहने देना चाहिए। नमी के कारण फंगल संक्रमण और डैंड्रफ का खतरा बढ़ सकता है। बाल धोने या भीगने के बाद उन्हें माइक्रोफाइबर तौलिये से हल्के हाथों से सुखाना या हेयर ड्रायर के कूल मोड का सीमित उपयोग करना फायदेमंद हो सकता है। गीले बालों को लंबे समय तक बांधकर रखना भी नुकसानदायक माना जाता है।

    हवा में अधिक नमी होने के कारण इस मौसम में बाल आसानी से फ्रिजी हो जाते हैं। ऐसे में बाल धोने के बाद हल्का एंटी-फ्रिज हेयर सीरम लगाने से बाल स्मूद रहते हैं और उलझने की समस्या कम हो सकती है। साथ ही गीले बालों में बहुत टाइट पोनीटेल या जूड़ा बनाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे बालों की जड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और टूटने की संभावना बढ़ जाती है।

    बालों को सुलझाने के लिए हमेशा चौड़े दांतों वाली कंघी का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। गीले बालों में बारीक कंघी या ब्रश का उपयोग करने से बाल अधिक टूट सकते हैं। इसलिए नीचे से ऊपर की ओर धीरे-धीरे कंघी करने की आदत बालों को सुरक्षित रखने में मदद करती है।

    कई लोग मॉनसून में कंडीशनर लगाना बंद कर देते हैं, जबकि इस मौसम में इसकी जरूरत और बढ़ जाती है। कंडीशनर केवल बालों की लंबाई और सिरों पर लगाना चाहिए, स्कैल्प पर नहीं। इससे बाल मुलायम रहते हैं और उनमें उलझन कम होती है। इसके अलावा लंबे समय तक तेल लगाकर रखने से भी बचना चाहिए। सप्ताह में एक बार हल्के नारियल या आर्गन ऑयल से 15 से 20 मिनट तक मसाज करने के बाद बाल धोना पर्याप्त माना जाता है।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि मॉनसून में स्ट्रेटनर, कर्लर और अत्यधिक गर्म ब्लो ड्रायर जैसी हीट स्टाइलिंग मशीनों का कम से कम उपयोग करें। लगातार गर्मी मिलने से बाल कमजोर और दोमुंहे हो सकते हैं। जहां तक संभव हो, बालों को प्राकृतिक तरीके से सूखने देना बेहतर विकल्प है।

    नियमित सफाई, संतुलित पोषण, पर्याप्त पानी का सेवन और सही हेयर केयर रूटीन अपनाकर बारिश के मौसम में बालों को स्वस्थ, मजबूत और चमकदार बनाए रखा जा सकता है। छोटी-छोटी सावधानियां अपनाने से हेयर फॉल, फ्रिज और डैंड्रफ जैसी सामान्य समस्याओं का जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • हार्ट को रखना है हमेशा हेल्दी? आज ही छोड़ दें ये 5 खराब आदतें, कम होगा दिल की बीमारियों का खतरा

    हार्ट को रखना है हमेशा हेल्दी? आज ही छोड़ दें ये 5 खराब आदतें, कम होगा दिल की बीमारियों का खतरा


    नई दिल्ली।
    स्वस्थ और लंबी जिंदगी के लिए दिल का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। आधुनिक जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के कारण हृदय संबंधी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल उम्र या आनुवंशिक कारण ही नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की कई आदतें भी हार्ट हेल्थ को प्रभावित करती हैं। यदि समय रहते इन आदतों में सुधार कर लिया जाए तो हृदय रोगों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    लंबे समय तक लगातार बैठे रहना दिल के लिए नुकसानदायक माना जाता है। ऑफिस में घंटों कुर्सी पर काम करना या घर पर लंबे समय तक मोबाइल और टीवी के सामने बैठे रहना ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित करता है। इससे वजन बढ़ने, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोग का जोखिम बढ़ सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर 45 से 60 मिनट के बाद कुछ मिनट टहलें या हल्की स्ट्रेचिंग जरूर करें।

    जरूरत से ज्यादा नमक और प्रोसेस्ड फूड का सेवन भी हार्ट हेल्थ के लिए हानिकारक हो सकता है। पैकेज्ड स्नैक्स, चिप्स, इंस्टेंट फूड और प्रोसेस्ड मीट में सोडियम की मात्रा अधिक होती है, जिससे रक्तचाप बढ़ सकता है और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसके बजाय ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और घर का संतुलित भोजन अधिक लाभकारी माना जाता है।

    पर्याप्त नींद न लेना भी दिल की सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है। लगातार कम नींद लेने से तनाव हार्मोन बढ़ सकते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर और शरीर का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है। अधिकांश वयस्कों के लिए प्रतिदिन 7 से 9 घंटे की अच्छी गुणवत्ता वाली नींद जरूरी मानी जाती है।

    लगातार तनाव में रहना भी हृदय रोगों का बड़ा कारण बन सकता है। काम का दबाव, आर्थिक समस्याएं या निजी जीवन की परेशानियां लंबे समय तक बनी रहने पर रक्तचाप बढ़ सकता है। तनाव के कारण कई लोग धूम्रपान, अधिक भोजन या अन्य अस्वस्थ आदतों की ओर भी आकर्षित हो जाते हैं। नियमित योग, ध्यान, गहरी सांस लेने के अभ्यास और व्यायाम तनाव कम करने में मदद कर सकते हैं।

    धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन भी हृदय के लिए बेहद नुकसानदायक है। धूम्रपान रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा सकता है। वहीं अधिक मात्रा में शराब का सेवन ब्लड प्रेशर बढ़ाने के साथ हृदय की कार्यक्षमता पर भी असर डाल सकता है। इन आदतों से दूरी बनाना दिल की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, रोज कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करना, संतुलित आहार लेना, वजन और ब्लड प्रेशर की नियमित जांच कराना, तनाव को नियंत्रित रखना और किसी भी असामान्य लक्षण जैसे सीने में दर्द, सांस फूलना या अत्यधिक थकान महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना हृदय को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मददगार साबित हो सकता है।

  • बारिश में नरम हो जाते हैं होममेड स्नैक्स? अपनाएं ये 5 आसान स्टोरेज टिप्स, लंबे समय तक रहेंगे कुरकुरे

    बारिश में नरम हो जाते हैं होममेड स्नैक्स? अपनाएं ये 5 आसान स्टोरेज टिप्स, लंबे समय तक रहेंगे कुरकुरे

    नई दिल्ली। बारिश का मौसम अपने साथ ठंडी हवाएं और स्वादिष्ट स्नैक्स का आनंद लेकर आता है। इस दौरान घरों में मठरी, नमकपारे, चकली, सेव, रिबन पकोड़ा और कई तरह के पारंपरिक स्नैक्स बड़ी मात्रा में बनाकर स्टोर किए जाते हैं। हालांकि, मानसून में बढ़ी हुई नमी के कारण ये स्नैक्स जल्दी अपनी कुरकुराहट खो देते हैं और कुछ ही दिनों में नरम पड़ने लगते हैं। यदि सही तरीके से इन्हें स्टोर किया जाए तो लंबे समय तक इनका स्वाद और ताजगी बरकरार रखी जा सकती है।

    स्नैक्स को स्टोर करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि वे पूरी तरह ठंडे हो चुके हों। कई बार लोग जल्दबाजी में गर्म या हल्के गुनगुने स्नैक्स को डिब्बे में बंद कर देते हैं, जिससे अंदर भाप बनती है और नमी बढ़ने के कारण स्नैक्स जल्दी नरम हो जाते हैं। इसलिए किसी भी तले हुए स्नैक को पूरी तरह ठंडा होने के बाद ही कंटेनर में रखें।

    स्टोरेज के लिए हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले एयरटाइट कंटेनर का इस्तेमाल करना चाहिए। मानसून के दौरान हवा में मौजूद नमी आसानी से खुले डिब्बों या ढीले ढक्कन वाले कंटेनरों में पहुंच जाती है। एयरटाइट कंटेनर स्नैक्स को बाहरी नमी से बचाकर लंबे समय तक कुरकुरा बनाए रखने में मदद करते हैं।

    यदि स्नैक्स को लंबे समय तक सुरक्षित रखना हो तो फूड-ग्रेड मॉइश्चर एब्जॉर्बर या सिलिका जेल पैक का उपयोग किया जा सकता है। यह अतिरिक्त नमी को सोखने में मदद करता है और स्नैक्स की गुणवत्ता बनाए रखता है। हालांकि, इस बात का ध्यान रखें कि सिलिका पैक सीधे खाद्य पदार्थ के संपर्क में न आए और केवल फूड-ग्रेड उत्पादों का ही उपयोग किया जाए।

    बार-बार कंटेनर खोलने से भी स्नैक्स की गुणवत्ता प्रभावित होती है। हर बार डिब्बा खोलने पर बाहर की नम हवा अंदर प्रवेश करती है, जिससे स्नैक्स जल्दी नरम होने लगते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि स्नैक्स को छोटे-छोटे एयरटाइट कंटेनरों में अलग-अलग स्टोर करें, ताकि एक बार में केवल जरूरत के अनुसार ही डिब्बा खोला जाए।

    स्नैक्स को हमेशा ठंडी, सूखी और साफ जगह पर रखना चाहिए। गैस स्टोव, सिंक या ऐसी जगह जहां नमी अधिक रहती हो, वहां कंटेनर रखने से बचें। यदि किचन में अधिक सीलन रहती है तो स्नैक्स को पेंट्री या बंद अलमारी में रखना अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकता है।

    यदि किसी कारण से मठरी, चकली या नमकपारे हल्के नरम हो जाएं, तो उन्हें कुछ मिनट के लिए ओवन या एयर फ्रायर में कम तापमान पर हल्का गर्म किया जा सकता है। इसके बाद ठंडा होने पर उनकी कुरकुराहट काफी हद तक वापस आ जाती है। हालांकि, अधिक देर तक गर्म करने से स्नैक्स जल भी सकते हैं, इसलिए तापमान और समय का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

  • Health Tips: गर्मी में डाइट में शामिल करें ये 5 फल और प्राकृतिक ड्रिंक्स, शरीर रहेगा ठंडा और हाइड्रेटेड

    Health Tips: गर्मी में डाइट में शामिल करें ये 5 फल और प्राकृतिक ड्रिंक्स, शरीर रहेगा ठंडा और हाइड्रेटेड


    नई दिल्ली । गर्मी का मौसम अपने साथ तेज धूप, पसीना और शरीर में पानी की कमी जैसी कई परेशानियां लेकर आता है। ऐसे समय में सिर्फ ज्यादा पानी पीना ही काफी नहीं होता, बल्कि खानपान में भी ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल करना जरूरी होता है जो शरीर को ठंडक दें और जरूरी पोषक तत्व भी पहुंचाएं। मौसमी फल और प्राकृतिक पेय पदार्थ शरीर में पानी की कमी को दूर करने के साथ-साथ ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करते हैं। अगर आप भी गर्मी में खुद को फिट और तरोताजा रखना चाहते हैं तो अपनी डाइट में कुछ खास चीजों को जरूर शामिल करें।

    तरबूज बनाए शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड
    गर्मी के मौसम में तरबूज सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले फलों में से एक है। इसमें लगभग 90 प्रतिशत से अधिक पानी होता है, जो शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेट रखने में मदद करता है। इसके अलावा तरबूज में विटामिन A, विटामिन C और लाइकोपीन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो त्वचा और दिल की सेहत के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं। दोपहर या शाम के समय ताजा तरबूज खाना शरीर को ठंडक देने का आसान और स्वादिष्ट तरीका है।

    खरबूजा देगा पोषण और ताजगी
    खरबूजा भी गर्मियों का एक बेहतरीन फल है। इसमें पानी के साथ फाइबर, पोटैशियम और कई जरूरी विटामिन मौजूद होते हैं। इसे खाने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बेहतर बना रहता है और पाचन भी ठीक रहता है। अगर आपको गर्मी में थकान या कमजोरी महसूस होती है तो नाश्ते या शाम के स्नैक में खरबूजा शामिल करना अच्छा विकल्प हो सकता है।

    खीरा रखें रोज की डाइट का हिस्सा
    खीरा गर्मी के मौसम में सबसे आसान और हेल्दी विकल्पों में से एक है। इसमें भरपूर मात्रा में पानी और फाइबर होता है, जिससे शरीर हाइड्रेट रहता है और पेट भी हल्का महसूस करता है। सलाद के रूप में या हल्के मसालों के साथ खीरा खाने से पाचन बेहतर रहता है और गर्मी की वजह से होने वाली बेचैनी भी कम महसूस होती है। नियमित रूप से खीरा खाने से त्वचा में भी प्राकृतिक निखार बना रहता है।

    आम का स्वाद लें, लेकिन सीमित मात्रा में
    गर्मी का मौसम आम के बिना अधूरा माना जाता है। आम में विटामिन A, विटामिन C और कई जरूरी एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। हालांकि इसमें प्राकृतिक शर्करा की मात्रा भी अधिक होती है, इसलिए इसका सेवन संतुलित मात्रा में करना बेहतर रहता है। दिन में एक मध्यम आकार का आम या सीमित मात्रा में आम खाना पर्याप्त माना जाता है। खासतौर पर मधुमेह या वजन नियंत्रित रखने वाले लोगों को डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार ही आम का सेवन करना चाहिए।

    नारियल पानी से मिलेगी प्राकृतिक ऊर्जा
    गर्मी में शरीर से पसीने के साथ कई जरूरी मिनरल्स भी बाहर निकल जाते हैं। ऐसे में नारियल पानी एक प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक की तरह काम करता है। इसमें पोटैशियम, मैग्नीशियम और अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं, जो शरीर में पानी और मिनरल्स का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। तेज धूप से लौटने के बाद या सुबह के समय नारियल पानी पीना शरीर को ताजगी और ऊर्जा देने का आसान तरीका है।

    गर्मी में रखें खानपान का खास ध्यान
    गर्मी के मौसम में सही खानपान अपनाने से कई मौसमी समस्याओं से बचा जा सकता है। अपनी रोज की डाइट में तरबूज, खरबूजा, खीरा, सीमित मात्रा में आम और नारियल पानी शामिल करके आप शरीर को हाइड्रेटेड, ऊर्जावान और स्वस्थ रख सकते हैं। इसके साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, बहुत ज्यादा तली-भुनी चीजों से बचें और ताजे मौसमी फलों को प्राथमिकता दें। छोटी-छोटी अच्छी आदतें गर्मियों को आरामदायक और सेहतमंद बना सकती हैं।

  • दाग धब्बों से लेकर ग्लोइंग स्किन तक रोज़मेरी बन सकती है आपकी ब्यूटी रूटीन की सबसे खास साथी

    दाग धब्बों से लेकर ग्लोइंग स्किन तक रोज़मेरी बन सकती है आपकी ब्यूटी रूटीन की सबसे खास साथी


    नई दिल्ली । स्वस्थ और चमकदार त्वचा पाने की चाहत हर किसी की होती है। इसके लिए लोग तरह तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट का इस्तेमाल करते हैं लेकिन कई बार प्राकृतिक चीजें भी त्वचा की देखभाल में प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं। ऐसी ही एक औषधीय जड़ी बूटी है रोज़मेरी जिसे लंबे समय से बालों और त्वचा की देखभाल में उपयोग किया जाता रहा है। इसमें पाए जाने वाले प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने वाले गुण त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मददगार माने जाते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार रोज़मेरी में ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं जो त्वचा को बाहरी प्रदूषण और फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में सहायता कर सकते हैं। फ्री रेडिकल्स त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर समय से पहले झुर्रियां और बेजानपन पैदा कर सकते हैं। एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर रोज़मेरी त्वचा को लंबे समय तक तरोताजा बनाए रखने में सहायक मानी जाती है।

    जिन लोगों की त्वचा तैलीय होती है उनके लिए भी रोज़मेरी लाभदायक मानी जाती है। यह त्वचा पर बनने वाले अतिरिक्त तेल को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है जिससे रोमछिद्रों के बंद होने की संभावना कम होती है। इसके कारण मुंहासों और ब्लैकहेड्स की समस्या में भी राहत मिल सकती है। हालांकि किसी भी नए उत्पाद या घरेलू नुस्खे का उपयोग करने से पहले त्वचा के एक छोटे हिस्से पर परीक्षण करना बेहतर माना जाता है।

    रोज़मेरी में मौजूद प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल गुण त्वचा को साफ रखने में भी मदद कर सकते हैं। यही वजह है कि कई स्किन केयर प्रोडक्ट में रोज़मेरी एक्सट्रैक्ट का इस्तेमाल किया जाता है। नियमित और संतुलित उपयोग से त्वचा अधिक ताजगी भरी और साफ नजर आ सकती है। हालांकि गंभीर त्वचा रोग या संक्रमण की स्थिति में केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

    रोज़मेरी का उपयोग कई तरीकों से किया जा सकता है। रोज़मेरी का पानी फेस मिस्ट के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा एलोवेरा जेल में कुछ बूंदें रोज़मेरी ऑयल की मिलाकर लगाने से त्वचा को नमी और ताजगी मिल सकती है। ध्यान रहे कि एसेंशियल ऑयल को कभी भी सीधे त्वचा पर नहीं लगाना चाहिए। इसे हमेशा किसी कैरियर ऑयल या एलोवेरा जेल के साथ मिलाकर ही इस्तेमाल करना चाहिए।

    स्वस्थ त्वचा केवल बाहरी देखभाल से नहीं बल्कि संतुलित आहार पर्याप्त पानी अच्छी नींद और तनाव मुक्त जीवनशैली से भी जुड़ी होती है। यदि रोज़मेरी के साथ पौष्टिक भोजन नियमित व्यायाम और सही स्किन केयर रूटीन अपनाया जाए तो त्वचा की प्राकृतिक चमक लंबे समय तक बरकरार रह सकती है। प्राकृतिक उपाय धीरे धीरे असर दिखाते हैं इसलिए धैर्य और नियमितता बनाए रखना भी जरूरी है।

    रोज़मेरी को अपनी स्किन केयर रूटीन का हिस्सा बनाने से पहले यदि आपकी त्वचा अत्यधिक संवेदनशील है या किसी प्रकार की एलर्जी की समस्या रहती है तो विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा। सही तरीके से और सीमित मात्रा में इस्तेमाल किया गया रोज़मेरी त्वचा की देखभाल के लिए एक उपयोगी प्राकृतिक विकल्प साबित हो सकता है।

  • बरसात में जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी, इन आसान उपायों से रखें सेहत का पूरा ख्याल और रहें बीमारियों से दूर

    बरसात में जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी, इन आसान उपायों से रखें सेहत का पूरा ख्याल और रहें बीमारियों से दूर


    नई दिल्ली । बरसात का मौसम गर्मी से राहत लेकर आता है लेकिन यही मौसम कई तरह की बीमारियों का कारण भी बन सकता है। वातावरण में बढ़ी नमी बैक्टीरिया वायरस और फंगस को तेजी से पनपने का मौका देती है जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यदि खानपान और साफ सफाई का ध्यान न रखा जाए तो वायरल बुखार डेंगू मलेरिया टाइफाइड फूड पॉइजनिंग और पेट संबंधी समस्याएं आसानी से घेर सकती हैं। इसलिए मानसून का आनंद लेने के साथ अपनी सेहत की सुरक्षा करना भी बेहद जरूरी है।

    बारिश के मौसम में सबसे पहले स्वच्छ भोजन और शुद्ध पानी का सेवन करना चाहिए। बाहर खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से जितना हो सके बचें क्योंकि इनमें संक्रमण होने की संभावना अधिक रहती है। हमेशा ताजा और गर्म भोजन ही खाएं। लंबे समय तक रखा हुआ खाना दोबारा खाने से बचें क्योंकि नमी के कारण उसमें बैक्टीरिया तेजी से विकसित हो सकते हैं। पीने के लिए हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही इस्तेमाल करें ताकि पानी से फैलने वाली बीमारियों से बचा जा सके।

    इस मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखना भी बेहद आवश्यक है। रोजाना मौसमी फल हरी सब्जियां दालें दूध दही और प्रोटीन युक्त भोजन को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। विटामिन सी से भरपूर फल जैसे संतरा आंवला नींबू और अमरूद इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें ताकि शरीर हाइड्रेट रहे और विषैले तत्व बाहर निकल सकें।

    बरसात के दौरान मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर गमले टायर और पानी रखने वाले बर्तनों की नियमित सफाई करें। सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें और जरूरत पड़ने पर मच्छर भगाने वाले उपाय अपनाएं। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना भी सुरक्षित रहता है।

    बरसात में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में नहीं रहना चाहिए। भीगने पर तुरंत सूखे कपड़े पहनें और शरीर को अच्छी तरह पोंछ लें। गीले जूते और मोजे पहनने से फंगल संक्रमण हो सकता है इसलिए पैरों की सफाई और सूखापन बनाए रखना जरूरी है। यदि त्वचा पर खुजली या लाल चकत्ते दिखाई दें तो डॉक्टर की सलाह लें।

    हाथों की स्वच्छता भी संक्रमण से बचाव का सबसे आसान तरीका है। खाना खाने से पहले और बाहर से आने के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोने की आदत डालें। बच्चों को भी यही आदत सिखाएं क्योंकि वे संक्रमण की चपेट में जल्दी आ सकते हैं।

    यदि लगातार बुखार तेज सिरदर्द शरीर में दर्द उल्टी दस्त या कमजोरी जैसी समस्या महसूस हो तो घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। समय पर जांच और इलाज गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करता है।

    बरसात का मौसम प्रकृति की खूबसूरती और ठंडक का एहसास कराता है लेकिन थोड़ी सी सावधानी आपकी सेहत को सुरक्षित रख सकती है। संतुलित आहार स्वच्छता पर्याप्त आराम और नियमित व्यायाम अपनाकर आप पूरे मानसून स्वस्थ और ऊर्जावान रह सकते हैं।