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  • शिमला 2 दिन ट्रिप प्लान: पहाड़ों की रानी में यादगार सफर का पूरा गाइड

    शिमला 2 दिन ट्रिप प्लान: पहाड़ों की रानी में यादगार सफर का पूरा गाइड

    नई दिल्ली । हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला, जिसे ‘पहाड़ों की रानी’ कहा जाता है, भारत के सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों में से एक है। हर साल लाखों पर्यटक यहां की ठंडी हवाओं, हरे-भरे पहाड़ों और ब्रिटिश काल की ऐतिहासिक इमारतों को देखने आते हैं। शिमला की खूबसूरती हर मौसम में अलग ही अनुभव देती है, लेकिन सही प्लानिंग के साथ इसे सिर्फ 2 दिन में भी पूरी तरह एक्सप्लोर किया जा सकता है।
    पहला दिन: शहर की खूबसूरती और एडवेंचर का रोमां

    शिमला ट्रिप की शुरुआत रिज मैदान से करना सबसे बेहतर माना जाता है। यह स्थान शहर का केंद्र है और यहां से चारों ओर फैले पहाड़ों का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। पर्यटक यहां फोटोग्राफी, वॉक और लोकल कल्चर को महसूस करने के लिए आते हैं। रिज के पास ही स्थित मॉल रोड शिमला की सबसे जीवंत जगह है, जहां कैफे, रेस्तरां और शॉपिंग स्ट्रीट पर्यटकों को आकर्षित करती है।

    इसके बाद यात्रा का अगला पड़ाव क्राइस्ट चर्च होता है, जो ब्रिटिश काल की ऐतिहासिक धरोहर है। इसकी गोथिक शैली की वास्तुकला और शांत वातावरण पर्यटकों को एक अलग ही अनुभव प्रदान करता है।

    दोपहर में आप जाखू मंदिर जा सकते हैं, जो भगवान हनुमान को समर्पित है। यह शिमला की सबसे ऊंची पहाड़ी पर स्थित है और यहां से पूरे शहर का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। 108 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा इस स्थान को और भी खास बनाती है।

    शाम होते ही कुफरी का रुख करना सबसे अच्छा रहता है। शिमला से करीब 15–20 किलोमीटर दूर यह जगह एडवेंचर और नेचुरल ब्यूटी के लिए प्रसिद्ध है। यहां स्नो एक्टिविटी, हॉर्स राइडिंग और एडवेंचर स्पोर्ट्स का आनंद लिया जा सकता है। सर्दियों में यह क्षेत्र बर्फ से ढक जाता है, जो पर्यटकों को बेहद आकर्षित करता है।

    दूसरा दिन: शांति, प्रकृति और संस्कृति का संगम

    दूसरे दिन की शुरुआत दोर्जे ड्रेक मठ से करें। यह बौद्ध मठ शिमला की तिब्बती संस्कृति और आध्यात्मिक शांति का प्रतीक है। यहां का शांत वातावरण मन को सुकून देता है और यात्रा को आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ता है।

    इसके बाद मशोबरा की ओर बढ़ें, जिसे ‘शांत शिमला’ कहा जाता है। यह जगह घने जंगलों, सेब के बागानों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है। यहां शहर की भीड़ से दूर एक अलग ही सुकून मिलता है।

    अगर समय मिले तो चैल जरूर जाएं, जो शिमला से लगभग 44 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां का ऐतिहासिक चैल पैलेस और दुनिया का सबसे ऊंचा क्रिकेट ग्राउंड इस जगह को खास बनाते हैं। यह स्थान इतिहास और प्रकृति का सुंदर मेल है।

  • करियर में नहीं होता कोई दबाव: पलक तिवारी बोलीं- मां श्वेता तिवारी हमेशा दिल की सुनने की सलाह देती हैं

    करियर में नहीं होता कोई दबाव: पलक तिवारी बोलीं- मां श्वेता तिवारी हमेशा दिल की सुनने की सलाह देती हैं

    नई दिल्ली । बॉलीवुड और डिजिटल एंटरटेनमेंट की दुनिया में तेजी से अपनी पहचान बना रहीं पलक तिवारी इन दिनों अपने नए प्रोजेक्ट्स को लेकर चर्चा में हैं। हालांकि इस बार उनकी चर्चा केवल प्रोफेशनल लाइफ तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने अपनी निजी जिंदगी और खासकर अपनी मां श्वेता तिवारी के साथ रिश्ते को लेकर भी खुलकर बात की है।

    पलक ने बताया कि उनकी मां ने कभी भी उनके करियर को नियंत्रित करने की कोशिश नहीं की। उन्होंने हमेशा उन्हें अपने फैसले खुद लेने की आजादी दी है। उनके अनुसार, एक कलाकार का सफर व्यक्तिगत होता है और हर इंसान अपनी सोच और अनुभवों के आधार पर अपने लिए रास्ता चुनता है।

    उन्होंने कहा कि उनकी और उनकी मां की पीढ़ी और अनुभव पूरी तरह अलग हैं। जिस दौर में उनकी मां ने इंडस्ट्री में काम किया, वह आज के समय से काफी अलग था। इसलिए दोनों की सोच और काम को देखने का नजरिया भी अलग है। इसके बावजूद दोनों के बीच आपसी समझ और सम्मान हमेशा बना रहता है।

    पलक के मुताबिक, उनकी मां केवल एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाती हैं। वह उन्हें सुझाव जरूर देती हैं, लेकिन कभी किसी फैसले के लिए मजबूर नहीं करतीं। उन्होंने बताया कि जब भी वह किसी नए प्रोजेक्ट पर विचार करती हैं, तो उनकी मां केवल इतना पूछती हैं कि क्या वह काम उन्हें अंदर से सही महसूस हो रहा है या नहीं।

    उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मां का मानना है कि अभिनय केवल पेशा नहीं बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव है। अगर कलाकार किसी किरदार या कहानी से खुद को जोड़ नहीं पाता, तो उसका प्रदर्शन भी पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाता। यही वजह है कि उन्हें हमेशा अपने दिल की सुनने की सलाह दी जाती है।

    पलक ने स्वीकार किया कि इंडस्ट्री में कदम रखना उनके लिए आसान नहीं था, क्योंकि लोगों की उम्मीदें पहले से ही काफी ज्यादा थीं। लेकिन उन्होंने खुद की पहचान अलग तरीके से बनाने की कोशिश की और हर फैसले को अपनी समझ से लिया।

    उन्होंने कहा कि किसी भी कलाकार के लिए आत्मविश्वास और स्वतंत्र सोच बेहद जरूरी होती है। जब इंसान अपने फैसले खुद लेता है, तो वह अपनी सफलता और असफलता दोनों को बेहतर तरीके से समझ पाता है। यही सोच उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देती है।

    मां-बेटी के इस रिश्ते की सबसे खास बात यही है कि इसमें भरोसा और स्वतंत्रता दोनों मौजूद हैं। पलक मानती हैं कि परिवार का समर्थन किसी भी कलाकार के लिए बहुत जरूरी होता है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है अपनी पहचान खुद बनाना।

    आज पलक तिवारी धीरे-धीरे इंडस्ट्री में अपनी जगह मजबूत कर रही हैं और उनके विचार यह दिखाते हैं कि वह केवल स्टार किड की पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि अपने दम पर एक अलग मुकाम हासिल करना चाहती हैं।

  • सोना खरीदने और ईंधन खपत कम करने की अपील पर विवाद, व्यापारियों और विपक्ष ने उठाए सवाल

    सोना खरीदने और ईंधन खपत कम करने की अपील पर विवाद, व्यापारियों और विपक्ष ने उठाए सवाल


    नई दिल्ली । देश में हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से संसाधनों के सीमित उपयोग और सोना-चांदी की खरीदारी को लेकर की गई अपील के बाद राजनीतिक और आर्थिक हलकों में बहस तेज हो गई है। इस बयान के बाद जहां विपक्षी दलों ने सरकार की आर्थिक स्थिति और नीतियों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, वहीं सराफा व्यापार से जुड़े संगठनों ने भी इसे लेकर अपनी चिंता खुलकर जाहिर की है।

    प्रधानमंत्री द्वारा लगातार दो दिनों तक पेट्रोल-डीजल के सीमित इस्तेमाल और अनावश्यक खर्च से बचने की अपील को कई लोग एहतियाती कदम मान रहे हैं, लेकिन व्यापारिक वर्ग का कहना है कि इस तरह की सार्वजनिक अपीलों का सीधा असर बाजार की गतिविधियों और लोगों की खरीदारी की मानसिकता पर पड़ता है। खासकर ज्वेलरी उद्योग से जुड़े कारोबारियों का मानना है कि सोना-चांदी की खरीद को लेकर पैदा हुई आशंका बाजार में मंदी ला सकती है।

    राजनीतिक मोर्चे पर भी इस मुद्दे ने तेजी से तूल पकड़ लिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उनका कहना है कि जब राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हो रही हो, तो सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जनता के बीच अचानक इस तरह की अपीलें आने से असमंजस की स्थिति पैदा होती है और इसका असर आम लोगों के साथ-साथ व्यापारियों पर भी पड़ता है।

    वहीं, सराफा व्यापार से जुड़े संगठनों ने भी सरकार के रुख पर नाराज़गी जाहिर की है। व्यापारिक प्रतिनिधियों का कहना है कि देशभर में लाखों परिवार इस उद्योग पर निर्भर हैं और यदि बाजार में खरीदारी कम होती है, तो इसका असर सीधे रोजगार और छोटे कारोबारियों की आय पर पड़ेगा। उनका मानना है कि किसी भी बड़े फैसले या सार्वजनिक संदेश से पहले उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से चर्चा की जानी चाहिए थी।

    व्यापारियों का यह भी कहना है कि ज्वेलरी सेक्टर केवल व्यापार का माध्यम नहीं, बल्कि देश की पारंपरिक अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। शादी-विवाह और सामाजिक आयोजनों में सोना-चांदी की खरीदारी लंबे समय से भारतीय समाज का हिस्सा रही है, इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अनिश्चितता बाजार की गति को प्रभावित कर सकती है।

    इस मुद्दे पर विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी सरकार को घेरने की कोशिश की है। उनका कहना है कि यदि जनता से बार-बार त्याग और खर्च कम करने की अपील की जा रही है, तो यह देश की आर्थिक चुनौतियों की ओर इशारा करता है। विपक्ष ने इसे आम लोगों पर मानसिक दबाव बनाने वाला कदम बताया है।

    हालांकि, सरकार की ओर से इन तमाम आशंकाओं को खारिज किया गया है। केंद्रीय स्तर पर यह स्पष्ट किया गया कि देश में तेल और गैस का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है। सरकार का कहना है कि नागरिकों से केवल संसाधनों के जिम्मेदार और विवेकपूर्ण उपयोग की अपील की गई है, ताकि ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सके।

    फिलहाल, इस मुद्दे ने राजनीतिक बहस के साथ-साथ व्यापारिक जगत में भी नई चिंता पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस पर आगे क्या रुख अपनाती है और बाजार में इसका क्या प्रभाव देखने को मिलता है।

  • डैंड्रफ और खुजली से परेशान हैं? अपनाएं ये आसान घरेलू हर्बल शैम्पू रेसिपी

    डैंड्रफ और खुजली से परेशान हैं? अपनाएं ये आसान घरेलू हर्बल शैम्पू रेसिपी


    नई दिल्ली । गर्मी का मौसम आते ही बालों और स्कैल्प से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ जाती हैं। पसीना, धूल और उमस के कारण अक्सर डैंड्रफ, खुजली और ऑयली स्कैल्प जैसी परेशानियां लोगों को घेर लेती हैं। ऐसे में अधिकतर लोग केमिकल युक्त शैम्पू का उपयोग करते हैं, जो शुरुआती राहत तो देते हैं, लेकिन लंबे समय में बालों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी वजह से नेचुरल हर्बल उपायों की ओर रुझान बढ़ रहा है।
    आयुर्वेद में नीम को बालों और त्वचा की समस्याओं के लिए बेहद प्रभावी माना गया है। इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीसेप्टिक गुण स्कैल्प को गहराई से साफ करने और खुजली व डैंड्रफ को कम करने में मदद करते हैं। घर पर बना नीम हर्बल शैम्पू न केवल सुरक्षित है, बल्कि बालों को प्राकृतिक पोषण भी देता है।
    इस शैम्पू को बनाने के लिए ताजी नीम की पत्तियां, पानी, माइल्ड लिक्विड या कास्टाइल साबुन, एलोवेरा जेल और नारियल तेल की जरूरत होती है। सबसे पहले नीम की पत्तियों को अच्छे से धोकर पानी में उबाला जाता है, जब तक पानी आधा न रह जाए। इसके बाद इसे ठंडा कर छान लिया जाता है ताकि नीम का अर्क अलग हो जाए।
    इस अर्क में हल्का साबुन मिलाकर शैम्पू तैयार किया जाता है। चाहें तो इसमें एलोवेरा जेल और नारियल तेल भी मिलाया जा सकता है, जिससे बालों को अतिरिक्त नमी और पोषण मिलता है। यह मिश्रण बालों को साफ करने के साथ-साथ स्कैल्प को ठंडक भी प्रदान करता है।
    इस्तेमाल के लिए बालों को हल्का गीला कर तैयार शैम्पू लगाकर 2–3 मिनट तक हल्की मसाज करनी चाहिए और फिर साफ पानी से धो लेना चाहिए। बेहतर परिणाम के लिए इसका उपयोग सप्ताह में दो से तीन बार किया जा सकता है। यह घरेलू हर्बल शैम्पू खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद माना जाता है, जो डैंड्रफ, खुजली, ऑयली स्कैल्प या हल्के फंगल इंफेक्शन से परेशान रहते हैं। नियमित उपयोग से बाल साफ, मजबूत और स्वस्थ बने रहते हैं।

  • मिनी गोवा का एहसास अब उत्तर प्रदेश में, गढ़मुक्तेश्वर बना नया हॉलिडे स्पॉट

    मिनी गोवा का एहसास अब उत्तर प्रदेश में, गढ़मुक्तेश्वर बना नया हॉलिडे स्पॉट


    नई दिल्ली। अगर आप हर बार गोवा या मनाली घूमने का सपना देखते हैं, लेकिन समय और बजट की कमी आड़े आ जाती है, तो अब परेशान होने की जरूरत नहीं है। उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में स्थित गढ़मुक्तेश्वर इन दिनों लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसे अब लोग प्यार से “यूपी का मिनी गोवा” कहने लगे हैं। दिल्ली-एनसीआर से कुछ ही घंटों की दूरी पर मौजूद यह जगह वीकेंड ट्रिप के लिए परफेक्ट बनती जा रही है। यहां पहुंचते ही गंगा किनारे फैली रेत और शांत बहता पानी लोगों को किसी बीच का एहसास कराता है।

     रेत, पानी और सुकून – बीच जैसा अनुभव
    गढ़मुक्तेश्वर में गंगा नदी के किनारे फैली सफेद रेत और ठंडी हवा पर्यटकों को आकर्षित करती है। खासकर शाम के समय यहां का नजारा बेहद खूबसूरत हो जाता है। लोग घंटों बैठकर पानी को निहारते हैं, फोटो-वीडियो बनाते हैं और नाव की सवारी का आनंद लेते हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर यहां की तस्वीरें और रील्स तेजी से वायरल हो रही हैं।

     दिल्ली-एनसीआर वालों के लिए परफेक्ट वीकेंड स्पॉट
    दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद से यहां आना बेहद आसान है। कम दूरी और कम खर्च की वजह से यह जगह युवाओं और फैमिली ट्रैवलर्स दोनों की पसंद बनती जा रही है। लोग सुबह निकलकर शाम तक वापस लौट आते हैं, जिससे यह एक “क्विक गेटवे” के रूप में मशहूर हो रहा है।

     धार्मिक महत्व भी है खास
    गढ़मुक्तेश्वर सिर्फ घूमने की जगह नहीं है, बल्कि इसका धार्मिक महत्व भी गहरा है। यहां स्थित गंगा घाट और प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र हैं। रोजाना बड़ी संख्या में लोग गंगा स्नान और पूजा के लिए यहां पहुंचते हैं।
    शाम की गंगा आरती यहां का सबसे आकर्षक दृश्य होता है, जहां दीपों की रोशनी और घंटियों की आवाज माहौल को दिव्य बना देती है।

    सोशल मीडिया ने बढ़ाई लोकप्रियता
    इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर वायरल हो रहे वीडियो ने गढ़मुक्तेश्वर को नई पहचान दी है। ट्रैवल ब्लॉगर्स इसे “Hidden Beach” और “Mini Goa” जैसे नामों से प्रमोट कर रहे हैं। बारिश के मौसम में यहां का नजारा और भी ज्यादा आकर्षक हो जाता है।

     मेले और त्योहारों में लगता है विशाल मेला
    कार्तिक पूर्णिमा और गंगा मेले के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। उस समय पूरा इलाका रोशनी, भीड़ और आस्था से भर जाता है। घाटों पर अलग ही उत्सव जैसा माहौल देखने को मिलता है।

     कम बजट में बेहतरीन अनुभव
    आज के समय में जहां ट्रिप्स महंगे होते जा रहे हैं, वहीं गढ़मुक्तेश्वर कम बजट में शानदार अनुभव देता है। शांति, प्रकृति और धार्मिकता का यह मिश्रण इसे उत्तर भारत का उभरता हुआ टूरिस्ट स्पॉट बना रहा है।

    अगर आप भी गोवा जैसी बीच वाली फीलिंग चाहते हैं, तो गढ़मुक्तेश्वर आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। दिल्ली के पास ही मौजूद यह जगह अब धीरे-धीरे एक पॉपुलर वीकेंड डेस्टिनेशन बन चुकी है।

  • बच्चों के दिल तक पहुंचने का आसान तरीका, पैरेंट्स अपनाएं ये 5 खास बातें, रिश्ते में बढ़ेगा भरोसा और अपनापन

    बच्चों के दिल तक पहुंचने का आसान तरीका, पैरेंट्स अपनाएं ये 5 खास बातें, रिश्ते में बढ़ेगा भरोसा और अपनापन

    नई दिल्ली । आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में बच्चों और माता-पिता के बीच भावनात्मक दूरी बढ़ना एक आम समस्या बनती जा रही है। पढ़ाई का दबाव, मोबाइल और डिजिटल दुनिया में बढ़ता समय, साथ ही व्यस्त दिनचर्या के कारण कई बच्चे अपने मन की बातें खुलकर नहीं कह पाते। धीरे-धीरे यह दूरी रिश्तों में खामोशी और गलतफहमियां पैदा करने लगती है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि पैरेंट्स अपने बच्चों के साथ ऐसा रिश्ता बनाएं, जहां वे बिना डर और झिझक अपनी हर भावना साझा कर सकें।

    विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के साथ मजबूत रिश्ता बनाने की शुरुआत उनकी बातों को ध्यान से सुनने से होती है। अक्सर माता-पिता बच्चों की बात पूरी सुने बिना ही प्रतिक्रिया देने लगते हैं, जिससे बच्चे खुद को अनदेखा महसूस करते हैं। अगर बच्चे को यह एहसास हो कि उसकी बातों को गंभीरता से सुना जा रहा है, तो उसका भरोसा धीरे-धीरे मजबूत होने लगता है।

    इसके अलावा बच्चों के साथ व्यवहार करते समय बहुत ज्यादा सख्ती या हर बात पर आलोचना करने से बचना चाहिए। जब बच्चे को लगता है कि उसकी हर गलती पर उसे डांटा जाएगा, तब वह अपनी बातें छिपाने लगता है। ऐसे समय में जरूरत होती है समझदारी और धैर्य की, ताकि बच्चा खुलकर अपनी परेशानियां बता सके।

    पैरेंट्स और बच्चों के रिश्ते को मजबूत बनाने में साथ बिताया गया समय भी बेहद अहम माना जाता है। दिनभर की व्यस्तता के बीच अगर माता-पिता कुछ समय सिर्फ बच्चों के लिए निकालें, उनके साथ खेलें, बातचीत करें या छोटी-छोटी गतिविधियों में शामिल हों, तो इससे भावनात्मक जुड़ाव काफी बढ़ता है। बच्चे ऐसे समय को बेहद खास मानते हैं और इससे उनका आत्मविश्वास भी मजबूत होता है।

    विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बच्चों के साथ दोस्त जैसा रिश्ता बनाना जरूरी है। जब बच्चा अपने माता-पिता को केवल अनुशासन सिखाने वाला नहीं बल्कि भरोसेमंद साथी मानने लगता है, तब वह अपने मन की बातें आसानी से साझा करता है। इससे बच्चे के अंदर सुरक्षा और अपनापन दोनों की भावना विकसित होती है।

    बच्चों की भावनाओं को समझना और उन्हें महत्व देना भी एक मजबूत रिश्ते की सबसे जरूरी कड़ी है। कई बार बच्चों की छोटी-छोटी बातें बड़ों को मामूली लग सकती हैं, लेकिन वही बातें उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। ऐसे में उनकी भावनाओं को नजरअंदाज करने के बजाय उन्हें समझना और सपोर्ट करना बेहद जरूरी होता है।

  • साबुन छोड़िए, अपनाइए देसी पेस्ट: 10 मिनट में टैनिंग कम, स्किन बने मुलायम और चमकदार

    साबुन छोड़िए, अपनाइए देसी पेस्ट: 10 मिनट में टैनिंग कम, स्किन बने मुलायम और चमकदार


    नई दिल्ली। नहाने में साबुन की जगह नारियल तेल, बेसन, नींबू, दूध और ईनो से बना देसी पेस्ट स्किन की टैनिंग कम करने, डेड स्किन हटाने और ड्राइनेस दूर करने में मदद कर सकता है। लेकिन इसे सावधानी से इस्तेमाल करना जरूरी है।

     देसी नहाने वाले पेस्ट का ट्रेंड क्या है?
    आजकल सोशल मीडिया पर एक देसी स्किन केयर नुस्खा काफी चर्चा में है जिसमें साबुन की जगह प्राकृतिक और किचन में मिलने वाली चीजों से बना पेस्ट इस्तेमाल किया जाता है। दावा किया जाता है कि यह पेस्ट 10 मिनट में स्किन को साफ, चमकदार और टैनिंग-फ्री बनाने में मदद कर सकता है।

    पेस्ट में क्या-क्या चीजें मिलती हैं?
    इस घरेलू मिश्रण में आमतौर पर ये सामग्री शामिल होती है:

    बेसन
    नारियल तेल
    दूध
    नींबू
    ईनो
    इन सभी चीजों को मिलाकर एक हल्का गाढ़ा पेस्ट तैयार किया जाता है जिसे नहाने से पहले शरीर पर लगाया जाता है।

    कैसे काम करता है यह पेस्ट?
    नारियल तेल स्किन को नमी देता है और रूखापन कम करता है। बेसन हल्के स्क्रब की तरह डेड स्किन हटाने में मदद करता है। नींबू में मौजूद विटामिन सी टैनिंग और दाग-धब्बों को हल्का करने में सहायक माना जाता है। दूध स्किन को सॉफ्ट और मॉइश्चराइज रखने में मदद करता है। यह सभी मिलकर त्वचा को साफ और फ्रेश लुक देने का दावा करते हैं।

     इस्तेमाल करने का तरीका
    पेस्ट को तैयार करके हल्के हाथों से पूरे शरीर पर लगाया जाता है और लगभग 10 मिनट तक छोड़ दिया जाता है। इसके बाद हल्के पानी से धो दिया जाता है। इसे हफ्ते में 1 से 2 बार इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।

    सावधानियां जरूर रखें
    यह जरूरी है कि इसे पूरे शरीर पर लगाने से पहले पैच टेस्ट किया जाए। कुछ लोगों को नींबू या ईनो से जलन या एलर्जी हो सकती है। बहुत सेंसिटिव स्किन, बच्चों या जिनकी त्वचा पर घाव या रैशेज हों उन्हें इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अगर जलन महसूस हो तो तुरंत धो लेना चाहिए।

    यह देसी नहाने वाला पेस्ट स्किन को प्राकृतिक तरीके से साफ और सॉफ्ट बनाने में मदद कर सकता है, लेकिन यह हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं है। सही मात्रा, सावधानी और स्किन टाइप के अनुसार इस्तेमाल करने पर ही इससे फायदा मिल सकता है।

  • गर्मियों में हेल्दी रहने के लिए बदलें खानपान, हाई-प्रोटीन फूड देगा एनर्जी और फिटनेस

    गर्मियों में हेल्दी रहने के लिए बदलें खानपान, हाई-प्रोटीन फूड देगा एनर्जी और फिटनेस

    नई दिल्ली । गर्मी का मौसम शुरू होते ही शरीर को स्वस्थ और फिट बनाए रखना कई लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है। तेज धूप, पसीना और लगातार थकान के कारण शरीर जल्दी कमजोर महसूस करने लगता है। ऐसे समय में केवल व्यायाम या जिम पर ध्यान देना काफी नहीं होता, बल्कि सही डाइट सबसे अहम भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर खानपान संतुलित और पौष्टिक रखा जाए, तो गर्मियों में भी शरीर को एक्टिव, हल्का और फिट बनाए रखना आसान हो सकता है।

    दिन की शुरुआत हमेशा ऐसे भोजन से करनी चाहिए जो शरीर को पर्याप्त ऊर्जा दे और लंबे समय तक भूख महसूस न होने दे। सुबह के समय प्रोटीन और हेल्दी फैट से भरपूर चीजों का सेवन शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है। बादाम, अंडे और हल्के पौष्टिक खाद्य पदार्थ शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ-साथ पूरे दिन एनर्जी बनाए रखने में मदद करते हैं। इससे मेटाबॉलिज्म बेहतर रहता है और बार-बार कुछ खाने की इच्छा भी कम होती है।

    दोपहर के भोजन में हल्का और आसानी से पचने वाला खाना लेना बेहतर माना जाता है। गर्मियों में ज्यादा तला-भुना या भारी भोजन शरीर को सुस्त बना सकता है। इसलिए हरी सब्जियां, सलाद और प्रोटीन से भरपूर भोजन को अधिक फायदेमंद माना जाता है। खीरा, टमाटर और पत्तेदार सब्जियां शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करती हैं, जबकि प्रोटीन शरीर की ताकत बनाए रखने का काम करता है। ऐसा भोजन दिनभर शरीर को फ्रेश और हल्का महसूस कराने में मदद करता है।

    शाम के समय अक्सर शरीर में थकान महसूस होने लगती है और ऊर्जा कम होने लगती है। ऐसे समय में हेल्दी स्नैक्स लेना जरूरी माना जाता है। दही, योगर्ट, चिया सीड्स या हल्के पौष्टिक विकल्प शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के साथ-साथ पेट को भी स्वस्थ बनाए रखते हैं। गर्मियों में ऐसे खाद्य पदार्थ शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाने में मदद करते हैं और लंबे समय तक एक्टिव बनाए रखते हैं।

    रात के भोजन को हमेशा हल्का लेकिन पोषण से भरपूर रखना चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक रात में ऐसा खाना लेना चाहिए जो जल्दी पच जाए और शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी मिल सकें। प्रोटीन और फाइबर से भरपूर डिनर वजन नियंत्रण में मदद करता है और शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने में भी सहायक होता है। इसके अलावा यह शरीर की थकान कम करने और अगले दिन के लिए ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है।

    फिटनेस बनाए रखने के लिए खानपान के साथ-साथ पर्याप्त पानी पीना भी बेहद जरूरी है। गर्मियों में शरीर में पानी की कमी जल्दी हो जाती है, इसलिए नियमित रूप से पानी और तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए। हल्की एक्सरसाइज, योग और रोजाना वॉक जैसी आदतें भी शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर लोग अपने डेली रूटीन में छोटे-छोटे हेल्दी बदलाव करें, तो गर्मियों में भी आसानी से फिट और ऊर्जावान बना रह सकते हैं।

  • जिम सप्लीमेंट लेने वाले हो जाएं सावधान! लिवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं ये आदतें

    जिम सप्लीमेंट लेने वाले हो जाएं सावधान! लिवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं ये आदतें


    नई दिल्ली। आजकल फिटनेस और बॉडी बिल्डिंग का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। जिम जाने वाले कई लोग जल्दी रिजल्ट पाने के लिए प्रोटीन पाउडर, फैट बर्नर और दूसरे फिटनेस सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि गलत तरीके से लिए गए फिटनेस सप्लीमेंट्स लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।

    जरूरत से ज्यादा सप्लीमेंट लेना हो सकता है खतरनाक
    विशेषज्ञों के मुताबिक कई फिटनेस सप्लीमेंट्स में ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक या जरूरत से ज्यादा मात्रा में सप्लीमेंट्स का सेवन करता है, तो इससे लिवर डैमेज का खतरा बढ़ सकता है।

    खासतौर पर
    स्टेरॉयड बेस्ड सप्लीमेंट्स
    बिना लाइसेंस वाले प्रोडक्ट
    अनजान ब्रांड्स के सप्लीमेंट्स
    ऑनलाइन बिकने वाले नकली प्रोडक्ट
    सेहत के लिए ज्यादा नुकसानदायक माने जाते हैं।
    शरीर में दिख सकते हैं ये खतरनाक संके
    पेट दर्द
    उल्टी या मितली
    लगातार थकान
    भूख कम लगना
    आंखों या त्वचा का पीला पड़ना
    लिवर इंफेक्शन
    अगर ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी माना जाता है।

    इन गलतियों से बचने की सलाह

    डॉक्टरों और फिटनेस एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी सप्लीमेंट का सेवन शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
    इसके अलावा इन बातों का भी ध्यान रखना जरूरी है:
    जरूरत से ज्यादा डोज न लें
    कई सप्लीमेंट्स एक साथ न लें
    पर्याप्त पानी पिएं
    जरूरत से ज्यादा वर्कआउट से बचें
    केवल भरोसेमंद ब्रांड का इस्तेमाल करें

    फिट रहने का सबसे सुरक्षित तरीका क्या है?
    हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार अच्छी फिटनेस के लिए सिर्फ सप्लीमेंट्स पर निर्भर रहना सही नहीं है। संतुलित डाइट, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और सही लाइफस्टाइल ही शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने का सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।

    सावधानी जरूरी
    फिटनेस सप्लीमेंट्स सही मात्रा और सही सलाह के साथ लिए जाएं तो मददगार हो सकते हैं, लेकिन लापरवाही और गलत इस्तेमाल से यही सप्लीमेंट्स शरीर के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। इसलिए फिटनेस के साथ सेहत का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।

  • गर्मियों में सर्दी का मज़ा: भारत के 4 हिल स्टेशन जहाँ रहता है ठंडा मौसम

    गर्मियों में सर्दी का मज़ा: भारत के 4 हिल स्टेशन जहाँ रहता है ठंडा मौसम


    नई दिल्ली। मई का महीना आते ही देश के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच जाता है। ऐसे में लोग राहत की तलाश में हिल स्टेशनों की ओर रुख करते हैं। भारत में कुछ ऐसी खूबसूरत जगहें हैं जहां इस समय भी ठंडी हवाएं, कोहरा और कभी-कभी हल्की बारिश का आनंद मिलता है।

    1. कुफरी – छोटा लेकिन ठंडा हिल स्टेश
    कुफरी हिमाचल प्रदेश का एक शांत और खूबसूरत हिल स्टेशन है, जो अपनी ठंडी जलवायु और हरियाली के लिए जाना जाता है। मई के महीने में भी यहां का मौसम सर्द रहता है, जिससे यह जगह गर्मी से बचने के लिए परफेक्ट बन जाती है। यहां ट्रेकिंग, एडवेंचर एक्टिविटीज और प्राकृतिक नजारे पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

    2. नैनीताल – झीलों के बीच ठंडी हवा का एहसास
    नैनीताल अपनी खूबसूरत नैनी झील के लिए मशहूर है।
    चारों तरफ पहाड़ों से घिरी यह जगह मई में भी ठंडी और आरामदायक रहती है।
    यहां बोटिंग, मॉल रोड पर घूमना और शांत वातावरण में समय बिताना पर्यटकों को खास अनुभव देता है।

    3. मनाली – एडवेंचर और ठंड का परफेक्ट कॉम्बिनेशन
    मनाली उन लोगों के लिए बेहतरीन जगह है जो ठंड के साथ एडवेंचर का मजा लेना चाहते हैं।
    यहां ब्यास नदी, बर्फ से ढकी चोटियां और घने जंगल इसे बेहद आकर्षक बनाते हैं।
    मई में भी यहां का मौसम ठंडा रहता है, और पैराग्लाइडिंग, राफ्टिंग जैसी एक्टिविटीज इसे और खास बनाती हैं।

    4. लद्दाख – सपनों जैसी ठंडी दुनिय
    लद्दाख अपने ऊंचे पहाड़ों, नीले आसमान और बर्फीले नजारों के लिए दुनिया भर में मशहूर है।
    यहां का मौसम मई में भी काफी ठंडा रहता है, जिससे यात्रियों को जैकेट की जरूरत पड़ती है।
    बाइक राइड, रोड ट्रिप और शांत वातावरण इसे एक यादगार डेस्टिनेशन बनाते हैं।

    अगर आप गर्मी से परेशान हैं और एक सुकून भरी छुट्टी चाहते हैं, तो कुफरी, नैनीताल, मनाली और लद्दाख आपके लिए बेहतरीन विकल्प हैं। यहां का ठंडा मौसम और प्राकृतिक सुंदरता आपको गर्मी से पूरी तरह राहत देगी।