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  • फिट दिखना नहीं है स्वस्थ दिल की गारंटी ICMR की रिपोर्ट में सामने आई भारतीयों के कोलेस्ट्रॉल की चौंकाने वाली सच्चाई

    फिट दिखना नहीं है स्वस्थ दिल की गारंटी ICMR की रिपोर्ट में सामने आई भारतीयों के कोलेस्ट्रॉल की चौंकाने वाली सच्चाई


    नई दिल्ली । भारत में हृदय रोग तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हो चुके हैं और अब इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक नई स्टडी ने इस खतरे को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। अध्ययन के अनुसार देश के लगभग 10 में से 9 वयस्क किसी न किसी प्रकार की असामान्य कोलेस्ट्रॉल समस्या से प्रभावित हैं। यह स्थिति केवल बुजुर्गों या अधिक वजन वाले लोगों तक सीमित नहीं है बल्कि कम उम्र के युवा और सामान्य दिखने वाले स्वस्थ लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ नियमित स्वास्थ्य जांच और बेहतर जीवनशैली अपनाने पर लगातार जोर दे रहे हैं।

    इस अध्ययन में देशभर के 23665 लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट में पाया गया कि लगभग 87 प्रतिशत से अधिक लोगों में रक्त में वसा का स्तर सामान्य नहीं था। किसी में खराब कोलेस्ट्रॉल अधिक मिला तो किसी में ट्राइग्लिसराइड्स बढ़े हुए पाए गए जबकि बड़ी संख्या में लोगों में अच्छे कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य से कम था। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहने पर हृदय रोग हार्ट अटैक स्ट्रोक और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा सकती है।

    अध्ययन का सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि 30 से 39 वर्ष की आयु वर्ग में यह समस्या सबसे अधिक देखने को मिली। इसका मतलब है कि जिस उम्र में लोग अपने करियर और परिवार की जिम्मेदारियों में सबसे अधिक सक्रिय होते हैं उसी समय उनके दिल की सेहत सबसे बड़े खतरे का सामना कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली फास्ट फूड शारीरिक गतिविधि की कमी तनाव और अनियमित दिनचर्या इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में असामान्य कोलेस्ट्रॉल की समस्या अधिक पाई गई लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति भी बहुत अलग नहीं रही। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह समस्या अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई बल्कि पूरे देश में तेजी से फैल रही है। महिलाओं में भी पुरुषों की तुलना में यह समस्या अधिक दर्ज की गई जिससे महिलाओं के हृदय स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत महसूस की जा रही है।

    विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि केवल मोटापा मधुमेह या उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों में ही नहीं बल्कि ऐसे लोगों में भी असामान्य कोलेस्ट्रॉल पाया गया जो देखने में पूरी तरह स्वस्थ थे और जिन्हें पहले से कोई बड़ी बीमारी नहीं थी। इससे यह धारणा भी टूटती है कि केवल अधिक वजन वाले लोगों को ही हृदय रोग का खतरा होता है।

    डॉक्टरों के अनुसार समय समय पर लिपिड प्रोफाइल जांच कराना बेहद जरूरी है। इस साधारण रक्त जांच से कुल कोलेस्ट्रॉल अच्छे कोलेस्ट्रॉल खराब कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर आसानी से पता चल जाता है। यदि शुरुआत में ही गड़बड़ी का पता चल जाए तो खानपान में सुधार नियमित व्यायाम वजन नियंत्रित रखने धूम्रपान और शराब से दूरी बनाने तथा आवश्यकता पड़ने पर दवा के जरिए इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

    दिल को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना कम से कम तीस मिनट व्यायाम करना हरी सब्जियां फल साबुत अनाज और फाइबर युक्त भोजन लेना तले भुने और अधिक वसा वाले खाद्य पदार्थों से बचना पर्याप्त नींद लेना और तनाव को नियंत्रित रखना बेहद आवश्यक माना जाता है। साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहना भी उतना ही जरूरी है ताकि किसी भी समस्या का समय रहते पता चल सके।

    स्वस्थ जीवन केवल बाहरी फिटनेस से नहीं बल्कि शरीर के भीतर संतुलित स्वास्थ्य से बनता है। इसलिए यदि आप खुद को पूरी तरह स्वस्थ मानते हैं तब भी समय समय पर कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना और संतुलित जीवनशैली अपनाना आपके दिल को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है।

  • बारिश के मौसम में चिपचिपी त्वचा से पाएं राहत, मुल्तानी मिट्टी, बेसन और खीरे से करें स्किन की नेचुरल केयर

    बारिश के मौसम में चिपचिपी त्वचा से पाएं राहत, मुल्तानी मिट्टी, बेसन और खीरे से करें स्किन की नेचुरल केयर

    नई दिल्ली ।मानसून का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन हवा में बढ़ी नमी और उमस त्वचा, खासकर ऑयली स्किन वाले लोगों के लिए कई परेशानियां लेकर आती है। इस दौरान चेहरे पर अतिरिक्त तेल जमा होने लगता है, जिससे त्वचा चिपचिपी महसूस होती है। साथ ही पिंपल्स, ब्लैकहेड्स और रोमछिद्र बंद होने जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। ऐसे में त्वचा की नियमित देखभाल और सही घरेलू उपाय अपनाकर इन समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

    ऑयली स्किन की देखभाल के लिए मुल्तानी मिट्टी और गुलाब जल का फेस पैक एक लोकप्रिय घरेलू विकल्प माना जाता है। मुल्तानी मिट्टी अतिरिक्त तेल और गंदगी को सोखने में मदद करती है, जबकि गुलाब जल त्वचा को ठंडक और ताजगी प्रदान करता है। इसे तैयार करने के लिए दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी में आवश्यकतानुसार गुलाब जल मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। इस मिश्रण को चेहरे पर लगभग 15 मिनट तक लगाकर रखें और सूखने के बाद ठंडे पानी से धो लें। सप्ताह में एक या दो बार इसका उपयोग किया जा सकता है।

    बेसन और दही का फेस पैक भी त्वचा की सफाई और देखभाल के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। बेसन त्वचा की सतह पर जमी गंदगी और अतिरिक्त तेल हटाने में मदद करता है, जबकि दही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा को मुलायम बनाए रखने में सहायक माना जाता है। इसके लिए दो चम्मच बेसन में एक चम्मच ताजा दही मिलाकर पेस्ट तैयार करें। चाहें तो इसमें एक चुटकी हल्दी भी मिलाई जा सकती है। इसे चेहरे पर 15 मिनट तक लगाने के बाद हल्के हाथों से मसाज करते हुए धो लें।

    खीरा और एलोवेरा जेल का फेस पैक भी मानसून में त्वचा को ठंडक और नमी प्रदान करने के लिए उपयोगी माना जाता है। आधे खीरे को पीसकर उसमें एक चम्मच एलोवेरा जेल मिलाएं और तैयार मिश्रण को चेहरे पर 15 से 20 मिनट तक लगाकर रखें। इसके बाद सामान्य पानी से चेहरा धो लें। यह फेस पैक त्वचा को ताजगी देने के साथ अतिरिक्त तेल कम करने में भी मदद कर सकता है।

    घरेलू फेस पैक के साथ-साथ त्वचा की नियमित देखभाल भी बेहद जरूरी है। दिन में दो बार हल्के फेसवॉश से चेहरा साफ करना, ऑयल-फ्री मॉइस्चराइजर का उपयोग करना और मौसम चाहे कोई भी हो, सनस्क्रीन लगाना त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और संतुलित आहार लेना भी त्वचा की प्राकृतिक चमक बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है, इसलिए किसी भी घरेलू नुस्खे का असर भी अलग-अलग हो सकता है। पहली बार किसी फेस पैक का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए। यदि त्वचा पर लालपन, जलन, खुजली या एलर्जी जैसी समस्या दिखाई दे तो उसका उपयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए। लगातार मुंहासे, संक्रमण या अन्य गंभीर त्वचा संबंधी समस्याओं की स्थिति में त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

  • स्किन केयर का नया सुपरफूड बना रोज़मेरी वॉटर जानिए कैसे दूर कर सकता है डलनेस ऑयली स्किन और मुंहासों की परेशानी

    स्किन केयर का नया सुपरफूड बना रोज़मेरी वॉटर जानिए कैसे दूर कर सकता है डलनेस ऑयली स्किन और मुंहासों की परेशानी


    नई दिल्ली । इन दिनों प्राकृतिक स्किन केयर का चलन तेजी से बढ़ रहा है और लोग ऐसे उपायों की तलाश में हैं जो बिना ज्यादा केमिकल के त्वचा को स्वस्थ और दमकता हुआ बनाए रखें। इसी वजह से रोज़मेरी वॉटर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। रोज़मेरी एक सुगंधित जड़ी बूटी है जिसका उपयोग लंबे समय से सौंदर्य और हर्बल देखभाल में किया जाता रहा है। इसमें पाए जाने वाले प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने वाले गुण त्वचा की देखभाल में मददगार माने जाते हैं। नियमित और सही तरीके से उपयोग करने पर यह चेहरे को ताजगी देने और त्वचा की प्राकृतिक चमक बनाए रखने में सहायक हो सकता है।

    रोज़मेरी वॉटर का सबसे बड़ा लाभ यह माना जाता है कि यह त्वचा पर जमा धूल मिट्टी और अतिरिक्त तेल को हटाने में मदद कर सकता है। दिनभर प्रदूषण और धूप के संपर्क में रहने से त्वचा अपनी चमक खोने लगती है। ऐसे में चेहरे की सफाई के बाद रोज़मेरी वॉटर का उपयोग करने से त्वचा अधिक ताजा और साफ महसूस हो सकती है। कई लोग इसे प्राकृतिक फेस मिस्ट या टोनर के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं।

    रोज़मेरी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में सहायक माने जाते हैं। इससे त्वचा की प्राकृतिक चमक बनाए रखने में मदद मिल सकती है। यदि त्वचा बेजान और थकी हुई दिखाई देती है तो नियमित स्किन केयर रूटीन में रोज़मेरी वॉटर को शामिल करना लाभदायक हो सकता है। हालांकि इसके प्रभाव व्यक्ति की त्वचा के प्रकार और देखभाल की आदतों पर भी निर्भर करते हैं।

    ऑयली स्किन वाले लोगों के लिए भी रोज़मेरी वॉटर उपयोगी माना जाता है। यह त्वचा पर अतिरिक्त तेल को संतुलित रखने में मदद कर सकता है जिससे चेहरा लंबे समय तक फ्रेश महसूस होता है। इसके साथ ही जिन लोगों को हल्की सूजन या लालिमा की समस्या रहती है उनके लिए भी यह आरामदायक महसूस हो सकता है। फिर भी यदि त्वचा बहुत संवेदनशील है या किसी प्रकार की एलर्जी की समस्या है तो उपयोग से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर परीक्षण करना बेहतर माना जाता है।

    रोज़मेरी वॉटर का इस्तेमाल करना भी आसान है। सबसे पहले चेहरे को किसी सौम्य फेस वॉश से साफ करें। इसके बाद कॉटन की मदद से या स्प्रे बोतल के जरिए रोज़मेरी वॉटर चेहरे पर लगाएं। इसे प्राकृतिक रूप से सूखने दें और फिर अपनी पसंद का मॉइस्चराइजर लगाएं। दिन में एक या दो बार इसका उपयोग किया जा सकता है। यदि इसे घर पर तैयार करना हो तो रोज़मेरी की पत्तियों को पानी में उबालकर ठंडा करें और छानकर साफ बोतल में भरकर फ्रिज में कुछ दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

    हालांकि यह याद रखना जरूरी है कि केवल किसी एक प्राकृतिक उपाय से सभी त्वचा संबंधी समस्याओं का समाधान संभव नहीं होता। संतुलित आहार पर्याप्त पानी नियमित नींद और धूप से बचाव भी स्वस्थ त्वचा के लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं। यदि लगातार मुंहासे गंभीर एलर्जी या किसी त्वचा रोग की समस्या बनी हुई है तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

    प्राकृतिक स्किन केयर अपनाने वाले लोगों के लिए रोज़मेरी वॉटर एक अच्छा विकल्प हो सकता है। सही तरीके से उपयोग और नियमित दिनचर्या के साथ यह त्वचा को ताजगी देने स्वस्थ बनाए रखने और प्राकृतिक निखार बढ़ाने में सहायक साबित हो सकता है।

  • हेयर फॉल कम करने के लिए अपनाएं घरेलू नुस्खा, नारियल तेल में बरगद की छाल मिलाकर करें इस्तेमाल; जानें सही तरीका

    हेयर फॉल कम करने के लिए अपनाएं घरेलू नुस्खा, नारियल तेल में बरगद की छाल मिलाकर करें इस्तेमाल; जानें सही तरीका

    नई दिल्ली । आज की व्यस्त जीवनशैली, बढ़ते प्रदूषण, असंतुलित खान-पान, तनाव और रासायनिक उत्पादों के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण बालों का झड़ना और टूटना एक आम समस्या बन गया है। ऐसे में कई लोग प्राकृतिक और घरेलू उपायों की ओर रुख कर रहे हैं। इन्हीं पारंपरिक उपायों में बरगद की छाल और नारियल तेल का मिश्रण भी शामिल है, जिसे लंबे समय से बालों की देखभाल के लिए उपयोग किया जाता रहा है। माना जाता है कि यह मिश्रण स्कैल्प को पोषण देने और बालों की जड़ों को मजबूत बनाने में सहायक हो सकता है।

    इस घरेलू मिश्रण को तैयार करने के लिए सबसे पहले बरगद की सूखी छाल या जटा को अच्छी तरह साफ कर धूप में पूरी तरह सुखाया जाता है। इसके बाद इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर या हल्का कूटकर लगभग 200 से 250 मिलीलीटर नारियल तेल में धीमी आंच पर 15 से 20 मिनट तक पकाया जाता है। जब छाल का अर्क तेल में अच्छी तरह मिल जाए तो गैस बंद कर दी जाती है। ठंडा होने के बाद तेल को छानकर साफ और सूखी कांच की बोतल में सुरक्षित रखा जा सकता है।

    इस तेल का उपयोग सप्ताह में एक या दो बार किया जा सकता है। हल्का गुनगुना करने के बाद इसे स्कैल्प और बालों की जड़ों में धीरे-धीरे मालिश करते हुए लगाया जाता है। तेल लगाने के बाद इसे कम से कम 30 मिनट से एक घंटे तक बालों में रहने देना चाहिए। कई लोग इसे रातभर लगाकर अगली सुबह हल्के शैम्पू से बाल धोना भी पसंद करते हैं।

    नारियल तेल को लंबे समय से बालों की देखभाल के लिए उपयोग किया जाता रहा है। यह बालों को नमी प्रदान करने, रूखापन कम करने और टूटने से बचाने में सहायक माना जाता है। वहीं, पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार बरगद की छाल में ऐसे प्राकृतिक गुण पाए जाते हैं जो स्कैल्प को स्वस्थ बनाए रखने और बालों की जड़ों को पोषण देने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इन दावों की पुष्टि के लिए व्यापक वैज्ञानिक शोध अभी सीमित हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल किसी एक घरेलू उपाय पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और नियमित बालों की देखभाल भी स्वस्थ बालों के लिए जरूरी है। यदि बाल अत्यधिक झड़ रहे हों, स्कैल्प में संक्रमण, खुजली या अन्य गंभीर समस्या हो, तो घरेलू नुस्खों के बजाय त्वचा एवं बाल विशेषज्ञ से सलाह लेना अधिक उचित रहता है।

    इस मिश्रण का पहली बार उपयोग करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए, ताकि किसी संभावित एलर्जी या त्वचा की प्रतिक्रिया का पता चल सके। यदि तेल लगाने के बाद लालपन, जलन, खुजली या किसी प्रकार की असुविधा महसूस हो तो इसका उपयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए। स्कैल्प पर घाव, संक्रमण या किसी गंभीर त्वचा रोग की स्थिति में बिना चिकित्सकीय सलाह के ऐसे घरेलू उपाय अपनाने से बचना चाहिए।

    पारंपरिक घरेलू नुस्खे कई लोगों के लिए उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन इनके परिणाम व्यक्ति की त्वचा, बालों की प्रकृति और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए इन्हें संतुलित जीवनशैली और उचित हेयर केयर रूटीन के साथ अपनाना अधिक लाभकारी माना जाता है।

  • क्या अब डेंगू से नहीं जाएगी जान भारत की पहली QDENGA वैक्सीन पर जानिए कैसे करती है काम और कितनी है प्रभावी

    क्या अब डेंगू से नहीं जाएगी जान भारत की पहली QDENGA वैक्सीन पर जानिए कैसे करती है काम और कितनी है प्रभावी


    नई दिल्ली । मानसून का मौसम अपने साथ राहत लेकर आता है लेकिन इसी दौरान डेंगू जैसी गंभीर बीमारी का खतरा भी तेजी से बढ़ जाता है। हर वर्ष लाखों लोग डेंगू की चपेट में आते हैं और कई मरीजों की जान भी चली जाती है। ऐसे समय में भारत के लिए बड़ी राहत की खबर यह है कि देश में पहली बार डेंगू से बचाव के लिए QDENGA वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है। विशेषज्ञ इसे डेंगू के खिलाफ एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं क्योंकि यह बीमारी के गंभीर रूप और अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को काफी हद तक कम करने की क्षमता रखती है।

    QDENGA जापान की दवा कंपनी टाकेडा द्वारा विकसित एक लाइव एटेन्यूएटेड वैक्सीन है। इसमें डेंगू वायरस के कमजोर स्वरूप का उपयोग किया जाता है ताकि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली वायरस को पहचानकर उसके खिलाफ सुरक्षा विकसित कर सके। बाद में यदि वास्तविक डेंगू वायरस शरीर पर हमला करता है तो प्रतिरक्षा तंत्र तेजी से सक्रिय होकर गंभीर संक्रमण की आशंका को कम करने में मदद करता है।

    इस वैक्सीन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह डेंगू वायरस के चारों प्रमुख प्रकारों से सुरक्षा देने के उद्देश्य से विकसित की गई है। पहले उपलब्ध कुछ वैक्सीन में टीकाकरण से पहले यह जांच जरूरी होती थी कि व्यक्ति को पहले डेंगू हुआ है या नहीं। लेकिन QDENGA के लिए ऐसी जांच आवश्यक नहीं है जिससे बड़े स्तर पर टीकाकरण करना अधिक आसान हो सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह वैक्सीन 6 वर्ष से 60 वर्ष तक की आयु के लोगों के लिए उपयुक्त मानी गई है। इसे दो डोज में लगाया जाता है और दोनों डोज के बीच लगभग तीन महीने का अंतर रखा जाता है। पहली डोज शरीर में प्रारंभिक प्रतिरक्षा तैयार करती है जबकि दूसरी डोज लंबे समय तक सुरक्षा को मजबूत बनाती है।

    क्लिनिकल परीक्षणों में इस वैक्सीन के उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। अध्ययनों के अनुसार इससे डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने का खतरा लगभग 84 प्रतिशत तक कम देखा गया जबकि संक्रमण का जोखिम भी काफी हद तक घटा। हालांकि यह वैक्सीन संक्रमण की पूरी तरह गारंटी नहीं देती लेकिन गंभीर बीमारी और मृत्यु के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    भारत में इसकी कीमत का आधिकारिक ऐलान अभी नहीं हुआ है लेकिन शुरुआती अनुमान के अनुसार इसकी एक डोज की कीमत लगभग चार से पांच हजार रुपये के बीच हो सकती है। शुरुआत में यह निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में उपलब्ध होने की संभावना है। भविष्य में इसे सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा या नहीं इस पर निर्णय बाद में लिया जाएगा।

    अच्छी बात यह भी है कि भारत की दवा कंपनी जायडस लाइफसाइंसेज के साथ हुए समझौते के तहत भविष्य में इस वैक्सीन का निर्माण भारत में भी किया जाएगा। इससे इसकी उपलब्धता बढ़ने और कीमत कम होने की संभावना जताई जा रही है।

    हालांकि विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि केवल वैक्सीन ही डेंगू की समस्या का पूर्ण समाधान नहीं है। मच्छरों की रोकथाम साफ सफाई घर और आसपास पानी जमा न होने देना पूरी बाजू के कपड़े पहनना मच्छरदानी और रिपेलेंट का उपयोग करना तथा बुखार आने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना आज भी उतना ही जरूरी है।

    डेंगू के खिलाफ यह वैक्सीन भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जरूर है लेकिन इसके साथ जागरूकता और बचाव के उपाय अपनाना भी आवश्यक है। यदि टीकाकरण और मच्छर नियंत्रण दोनों पर समान रूप से ध्यान दिया जाए तो आने वाले वर्षों में डेंगू से होने वाले गंभीर मामलों और मौतों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

  • एंटीलिया के मंदिर और भारतीय कला ने खींचा सबका ध्यान, वीडियो में दिखी भव्य सजावट और आध्यात्मिक विरासत की झलक

    एंटीलिया के मंदिर और भारतीय कला ने खींचा सबका ध्यान, वीडियो में दिखी भव्य सजावट और आध्यात्मिक विरासत की झलक

    नई दिल्ली ।देश के प्रमुख उद्योगपति मुकेश अंबानी का निवास एंटीलिया अपनी भव्यता, आधुनिक सुविधाओं और अनूठी वास्तुकला के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। हाल ही में सामने आए एक वीडियो में नीता अंबानी ने इस प्रतिष्ठित भवन के उस हिस्से की झलक दिखाई, जहां भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और शिल्पकला का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। वीडियो के सामने आने के बाद एंटीलिया के इस विशेष हिस्से की चर्चा सोशल मीडिया पर तेज हो गई।

    वीडियो की शुरुआत एंटीलिया के भव्य पूजा स्थल से होती है। मंदिर में चांदी की नक्काशी से सजे विशाल दरवाजे, भगवान श्रीकृष्ण की आकर्षक प्रतिमा और फूलों से सजी सजावट पूरे वातावरण को आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान करती है। सफेद संगमरमर से तैयार फर्श, विशाल झूमर और शांत वातावरण मंदिर की भव्यता को और अधिक प्रभावशाली बनाते हैं। यह स्थान केवल पूजा-अर्चना का केंद्र ही नहीं बल्कि भारतीय पारंपरिक कला का भी उत्कृष्ट उदाहरण दिखाई देता है।

    एंटीलिया के इंटीरियर में सफेद संगमरमर का व्यापक उपयोग किया गया है। दीवारों, स्तंभों और अन्य हिस्सों पर की गई बारीक नक्काशी भवन की शिल्पकला को अलग पहचान देती है। फर्श पर उकेरे गए आकर्षक डिजाइन और पारंपरिक शैली की सजावट पूरे परिसर को शाही महल जैसा स्वरूप प्रदान करती है। वास्तुकला में आधुनिकता और भारतीय परंपरा का संतुलित मेल स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

    वीडियो में एक विशाल दीवार पर बनी राधा-कृष्ण और कमल के फूलों से प्रेरित कलाकृति भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। हल्के रंगों और पारंपरिक शैली में तैयार यह पेंटिंग पूरे कक्ष को शांत और आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करती है। भारतीय संस्कृति और धार्मिक प्रतीकों को प्रमुखता देने वाली यह कलाकृति एंटीलिया की आंतरिक सजावट को विशिष्ट पहचान देती है।

    बैठक कक्ष में रखे गए क्लासिक शैली के फर्नीचर ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। सिल्वर फिनिश वाले सोफे, आकर्षक कुशन और नक्काशीदार डिजाइन आधुनिक विलासिता के साथ पारंपरिक सौंदर्य का संतुलन प्रस्तुत करते हैं। इसके अलावा दीवारों पर लगी भारतीय लोक जीवन और भगवान श्रीकृष्ण से प्रेरित पेंटिंग्स भवन के सांस्कृतिक पक्ष को और मजबूत बनाती हैं।

    वीडियो में नीता अंबानी पारंपरिक परिधान में नजर आईं। उन्होंने हल्के रंग की साड़ी पहनी थी, जिस पर श्रीकृष्ण, कमल और भारतीय संस्कृति से जुड़े कलात्मक डिजाइन बने हुए थे। साधारण मेकअप, हीरे के आभूषण और फूलों से सजा जूड़ा उनके पारंपरिक और शालीन व्यक्तित्व को और निखारता दिखाई दिया। उनका यह लुक एंटीलिया की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक थीम के अनुरूप नजर आया।

    वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर एंटीलिया के मंदिर, वास्तुकला, कलात्मक सजावट और भारतीय विरासत से प्रेरित इंटीरियर की व्यापक चर्चा हो रही है। कई लोगों ने इसकी भव्यता के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को प्रमुखता देने वाले डिजाइन की सराहना की। यह झलक बताती है कि एंटीलिया केवल आधुनिक सुविधाओं वाला आलीशान भवन ही नहीं, बल्कि भारतीय कला, संस्कृति और परंपराओं को सहेजने वाला एक विशिष्ट स्थापत्य भी है।

  • महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट छोड़िए, चुकंदर और खीरा से पाएं ग्लोइंग और हेल्दी स्किन का आसान घरेलू उपाय

    महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट छोड़िए, चुकंदर और खीरा से पाएं ग्लोइंग और हेल्दी स्किन का आसान घरेलू उपाय


    नई दिल्ली । आज के समय में हर कोई साफ बेदाग और चमकदार त्वचा चाहता है। इसके लिए लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट और तरह तरह के स्किन ट्रीटमेंट का सहारा लेते हैं लेकिन कई बार प्राकृतिक चीजें अधिक प्रभावी और सुरक्षित साबित होती हैं। चुकंदर और खीरा ऐसे ही दो प्राकृतिक खाद्य पदार्थ हैं जिन्हें नियमित रूप से आहार में शामिल करने या सही तरीके से त्वचा की देखभाल में उपयोग करने से त्वचा को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं। इनमें मौजूद विटामिन मिनरल एंटीऑक्सीडेंट और पानी की प्रचुर मात्रा त्वचा को भीतर से पोषण देकर लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है।

    चुकंदर को प्राकृतिक ब्लड प्यूरीफायर माना जाता है। इसमें आयरन फोलेट विटामिन सी और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। जब शरीर अंदर से स्वस्थ रहता है तो उसका असर चेहरे पर भी साफ दिखाई देता है। चुकंदर का नियमित सेवन त्वचा की रंगत को निखारने और प्राकृतिक गुलाबी चमक बनाए रखने में सहायक माना जाता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट तत्व त्वचा को समय से पहले बूढ़ा होने से बचाने में भी मदद करते हैं और फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं।

    वहीं खीरा त्वचा के लिए प्राकृतिक हाइड्रेशन का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। इसमें लगभग 95 प्रतिशत पानी होता है जो शरीर और त्वचा दोनों को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। खीरे में विटामिन के विटामिन सी और सिलिका जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो त्वचा को मुलायम ताजा और स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होते हैं। गर्मियों और उमस भरे मौसम में खीरे का सेवन त्वचा को ठंडक देने के साथ डिहाइड्रेशन से भी बचा सकता है।

    यदि चुकंदर और खीरे का सेवन संतुलित आहार के साथ नियमित रूप से किया जाए तो त्वचा में प्राकृतिक निखार आने लगता है। इनका जूस या सलाद शरीर को आवश्यक पोषण देने के साथ त्वचा की कोशिकाओं को भी बेहतर तरीके से पोषित करता है। इसके अलावा कई लोग चुकंदर और खीरे का फेस पैक भी इस्तेमाल करते हैं। चुकंदर के रस और खीरे के रस को मिलाकर चेहरे पर कुछ मिनट लगाने से त्वचा को ताजगी और ठंडक मिल सकती है। हालांकि किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर परीक्षण करना बेहतर माना जाता है ताकि किसी प्रकार की एलर्जी की संभावना से बचा जा सके।

    स्वस्थ त्वचा के लिए केवल बाहरी देखभाल ही पर्याप्त नहीं होती बल्कि पर्याप्त पानी पीना संतुलित भोजन करना अच्छी नींद लेना और तनाव को नियंत्रित रखना भी बेहद जरूरी है। चुकंदर और खीरा इन सभी प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हो सकते हैं। यदि त्वचा संबंधी कोई गंभीर समस्या हो या लंबे समय तक परेशानी बनी रहे तो त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प होता है।

    प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर त्वचा की सुंदरता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है। चुकंदर और खीरा न केवल शरीर को पोषण देते हैं बल्कि त्वचा को भीतर से स्वस्थ रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नियमित और संतुलित उपयोग के साथ इनका लाभ अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सकता है।
     

  • बारिश के मौसम में स्वास्थ्य को रखना है सुरक्षित तो अपनाएं ये आसान उपाय छोटी सी सावधानी बचाएगी बड़ी बीमारियों से

    बारिश के मौसम में स्वास्थ्य को रखना है सुरक्षित तो अपनाएं ये आसान उपाय छोटी सी सावधानी बचाएगी बड़ी बीमारियों से


    नई दिल्ली । मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है वहीं कई तरह की मौसमी बीमारियों का खतरा भी साथ लेकर आता है। बारिश के दौरान वातावरण में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया वायरस और मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है। ऐसे में यदि खानपान स्वच्छता और दिनचर्या पर ध्यान न दिया जाए तो वायरल बुखार डेंगू मलेरिया टाइफाइड फूड पॉइजनिंग और पेट से जुड़ी कई समस्याएं आसानी से घेर सकती हैं। इसलिए इस मौसम में स्वास्थ्य की देखभाल को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी हो जाता है।

    बारिश के दिनों में सबसे पहले स्वच्छ भोजन और साफ पानी का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हमेशा उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पीना बेहतर माना जाता है। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ और कटे हुए फल खाने से बचना चाहिए क्योंकि इनमें संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। घर का ताजा और गर्म भोजन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है।

    मानसून के दौरान रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखना बेहद आवश्यक है। इसके लिए संतुलित आहार का सेवन करें जिसमें हरी सब्जियां मौसमी फल दालें सूखे मेवे और पर्याप्त प्रोटीन शामिल हो। विटामिन सी से भरपूर फल शरीर को संक्रमण से लड़ने में सहायता करते हैं। साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है ताकि शरीर हाइड्रेटेड बना रहे।

    बारिश में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में नहीं रहना चाहिए। घर पहुंचते ही सूखे कपड़े पहनें और शरीर को अच्छी तरह पोंछ लें। गीले जूते और मोजे पहनकर रहने से फंगल संक्रमण और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पैरों की साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें और उन्हें पूरी तरह सुखाकर ही जूते पहनें।

    मच्छरों से बचाव मानसून में सबसे जरूरी सावधानियों में से एक है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें क्योंकि यही मच्छरों के पनपने का सबसे बड़ा कारण बनता है। रात में मच्छरदानी का उपयोग करें और जरूरत पड़ने पर मच्छर भगाने वाले सुरक्षित उत्पादों का इस्तेमाल करें। यदि तेज बुखार शरीर दर्द या लगातार कमजोरी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

    बारिश के मौसम में नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद भी स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि बाहर निकलना संभव न हो तो घर के अंदर हल्का व्यायाम योग या प्राणायाम किया जा सकता है। इससे शरीर सक्रिय रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। मानसिक तनाव कम करने के लिए भी नियमित दिनचर्या बनाए रखना लाभदायक होता है।

    बच्चों और बुजुर्गों को इस मौसम में विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है। उन्हें बारिश में भीगने से बचाएं और किसी भी तरह के संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर इलाज में देरी न करें। व्यक्तिगत स्वच्छता जैसे हाथ धोना साफ कपड़े पहनना और आसपास सफाई बनाए रखना संक्रमण से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
    बच्चों और बुजुर्गों को इस मौसम में विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है। उन्हें बारिश में भीगने से बचाएं और किसी भी तरह के संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर इलाज में देरी न करें। व्यक्तिगत स्वच्छता जैसे हाथ धोना साफ कपड़े पहनना और आसपास सफाई बनाए रखना संक्रमण से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

    मानसून का मौसम आनंद और ताजगी लेकर आता है लेकिन थोड़ी सी लापरवाही स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। यदि संतुलित आहार स्वच्छता नियमित व्यायाम और समय पर चिकित्सा सलाह को जीवनशैली का हिस्सा बना लिया जाए तो बारिश के पूरे मौसम का आनंद बिना किसी बीमारी के लिया जा सकता है। सावधानी ही इस मौसम में स्वस्थ रहने की सबसे बड़ी कुंजी है।

  • बारिश के मौसम में यात्रा पर निकलने से पहले जरूर अपनाएं ये जरूरी सावधानियां सही योजना बनाएगी सफर सुरक्षित और यादगार

    बारिश के मौसम में यात्रा पर निकलने से पहले जरूर अपनाएं ये जरूरी सावधानियां सही योजना बनाएगी सफर सुरक्षित और यादगार


    नई दिल्ली । मानसून का मौसम अपने साथ हरियाली ठंडी हवाएं और प्राकृतिक सुंदरता लेकर आता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग इस मौसम में घूमने का प्लान बनाते हैं। हालांकि बारिश के दौरान यात्रा करना जितना रोमांचक होता है उतना ही चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है। थोड़ी सी लापरवाही पूरे सफर का मजा खराब कर सकती है। इसलिए यदि आप बारिश के मौसम में कहीं जाने की योजना बना रहे हैं तो पहले से सही तैयारी करना बेहद जरूरी है।

    यात्रा शुरू करने से पहले सबसे पहले मौसम का ताजा अपडेट जरूर देखें। जिस स्थान पर जाने की योजना बना रहे हैं वहां भारी बारिश बाढ़ भूस्खलन या तेज हवाओं की चेतावनी तो नहीं है इसकी जानकारी पहले ही प्राप्त कर लें। यदि मौसम लगातार खराब रहने की संभावना हो तो यात्रा की तारीख बदलना ही समझदारी होगी। सुरक्षा हमेशा किसी भी यात्रा से अधिक महत्वपूर्ण होती है।

    सफर के दौरान अपने साथ जरूरी सामान व्यवस्थित तरीके से रखें। वाटरप्रूफ बैग या बैग कवर का इस्तेमाल करें ताकि मोबाइल लैपटॉप कैमरा और जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रहें। छाता रेनकोट अतिरिक्त कपड़े तौलिया और प्लास्टिक पाउच जैसी चीजें साथ रखना हमेशा लाभदायक होता है। मोबाइल फोन के लिए वाटरप्रूफ कवर भी उपयोगी साबित हो सकता है।

    यदि आप सड़क मार्ग से यात्रा कर रहे हैं तो वाहन की पूरी जांच पहले ही कर लें। ब्रेक टायर वाइपर हेडलाइट और इंडिकेटर सही स्थिति में होने चाहिए। ईंधन भी पर्याप्त मात्रा में रखें क्योंकि बारिश के दौरान कई बार लंबा जाम लग सकता है। तेज बारिश में अधिक गति से वाहन चलाने से बचें और पर्याप्त दूरी बनाकर ड्राइव करें। जलभराव वाली सड़कों पर बिना गहराई जाने वाहन उतारना खतरनाक हो सकता है।

    पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। लगातार बारिश के दौरान भूस्खलन और सड़क बंद होने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में प्रशासन की सलाह का पालन करें और जोखिम वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रुकने से बचें। यदि यात्रा के दौरान मौसम अचानक खराब हो जाए तो सुरक्षित स्थान पर रुकना ही बेहतर विकल्प है।

    यात्रा के समय स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। अपने साथ प्राथमिक उपचार किट आवश्यक दवाइयां सैनिटाइजर और पीने का साफ पानी जरूर रखें। बारिश के मौसम में संक्रमण और वायरल बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है इसलिए बाहर का अस्वच्छ भोजन खाने से बचें और गर्म ताजा भोजन को प्राथमिकता दें।

    ऑनलाइन टिकट होटल बुकिंग और जरूरी दस्तावेजों की डिजिटल तथा प्रिंट दोनों प्रतियां अपने पास रखें। परिवार या करीबी लोगों को अपनी यात्रा की जानकारी देना भी सुरक्षा की दृष्टि से अच्छा कदम माना जाता है। किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन और हेल्पलाइन नंबर अपने मोबाइल में पहले से सुरक्षित रखें।

    बारिश का मौसम प्रकृति की खूबसूरती का आनंद लेने का बेहतरीन समय होता है लेकिन सुरक्षित यात्रा के लिए सतर्कता और सही योजना सबसे जरूरी है। यदि मौसम की जानकारी समय पर ली जाए आवश्यक तैयारियां पूरी हों और यात्रा के दौरान सावधानी बरती जाए तो मानसून का सफर न केवल सुरक्षित बल्कि यादगार भी बन सकता है। थोड़ी सी समझदारी और पहले से की गई तैयारी आपको हर मुश्किल से बचाते हुए यात्रा का पूरा आनंद लेने का अवसर देती है।

  • स्किन केयर में चुकंदर और खीरा का कमाल: प्राकृतिक निखार से लेकर गहरी हाइड्रेशन तक त्वचा को मिलेंगे जबरदस्त फायदे

    स्किन केयर में चुकंदर और खीरा का कमाल: प्राकृतिक निखार से लेकर गहरी हाइड्रेशन तक त्वचा को मिलेंगे जबरदस्त फायदे


    नई दिल्ली । आज के समय में हर कोई साफ बेदाग और चमकदार त्वचा चाहता है। इसके लिए लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट और तरह तरह के स्किन ट्रीटमेंट का सहारा लेते हैं लेकिन कई बार प्राकृतिक चीजें अधिक प्रभावी और सुरक्षित साबित होती हैं। चुकंदर और खीरा ऐसे ही दो प्राकृतिक खाद्य पदार्थ हैं जिन्हें नियमित रूप से आहार में शामिल करने या सही तरीके से त्वचा की देखभाल में उपयोग करने से त्वचा को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं। इनमें मौजूद विटामिन मिनरल एंटीऑक्सीडेंट और पानी की प्रचुर मात्रा त्वचा को भीतर से पोषण देकर लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है।

    चुकंदर को प्राकृतिक ब्लड प्यूरीफायर माना जाता है। इसमें आयरन फोलेट विटामिन सी और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। जब शरीर अंदर से स्वस्थ रहता है तो उसका असर चेहरे पर भी साफ दिखाई देता है। चुकंदर का नियमित सेवन त्वचा की रंगत को निखारने और प्राकृतिक गुलाबी चमक बनाए रखने में सहायक माना जाता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट तत्व त्वचा को समय से पहले बूढ़ा होने से बचाने में भी मदद करते हैं और फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं।

    वहीं खीरा त्वचा के लिए प्राकृतिक हाइड्रेशन का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। इसमें लगभग 95 प्रतिशत पानी होता है जो शरीर और त्वचा दोनों को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। खीरे में विटामिन के विटामिन सी और सिलिका जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो त्वचा को मुलायम ताजा और स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होते हैं। गर्मियों और उमस भरे मौसम में खीरे का सेवन त्वचा को ठंडक देने के साथ डिहाइड्रेशन से भी बचा सकता है।

    यदि चुकंदर और खीरे का सेवन संतुलित आहार के साथ नियमित रूप से किया जाए तो त्वचा में प्राकृतिक निखार आने लगता है। इनका जूस या सलाद शरीर को आवश्यक पोषण देने के साथ त्वचा की कोशिकाओं को भी बेहतर तरीके से पोषित करता है। इसके अलावा कई लोग चुकंदर और खीरे का फेस पैक भी इस्तेमाल करते हैं। चुकंदर के रस और खीरे के रस को मिलाकर चेहरे पर कुछ मिनट लगाने से त्वचा को ताजगी और ठंडक मिल सकती है। हालांकि किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर परीक्षण करना बेहतर माना जाता है ताकि किसी प्रकार की एलर्जी की संभावना से बचा जा सके।

    स्वस्थ त्वचा के लिए केवल बाहरी देखभाल ही पर्याप्त नहीं होती बल्कि पर्याप्त पानी पीना संतुलित भोजन करना अच्छी नींद लेना और तनाव को नियंत्रित रखना भी बेहद जरूरी है। चुकंदर और खीरा इन सभी प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हो सकते हैं। यदि त्वचा संबंधी कोई गंभीर समस्या हो या लंबे समय तक परेशानी बनी रहे तो त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प होता है।

    प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर त्वचा की सुंदरता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है। चुकंदर और खीरा न केवल शरीर को पोषण देते हैं बल्कि त्वचा को भीतर से स्वस्थ रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नियमित और संतुलित उपयोग के साथ इनका लाभ अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सकता है।