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  • पानी पीने के बाद भी बार-बार लगती है प्यास तो इन स्वास्थ्य समस्याओं का हो सकता है संकेत, जानें कब सावधान हों

    पानी पीने के बाद भी बार-बार लगती है प्यास तो इन स्वास्थ्य समस्याओं का हो सकता है संकेत, जानें कब सावधान हों

    नई दिल्ली । गर्मी, ज्यादा पसीना आने, शारीरिक मेहनत करने या पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीने पर बार-बार प्यास लगना सामान्य स्थिति हो सकती है। हालांकि, अगर पानी पीने के बाद भी प्यास जल्दी बुझती नहीं है और यह समस्या लगातार बनी रहती है, तो इसे केवल सामान्य प्यास मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार और असामान्य प्यास शरीर में पानी या इलेक्ट्रोलाइट संतुलन से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकती है।

    बार-बार प्यास लगने की सबसे आम वजह डिहाइड्रेशन हो सकती है। तेज गर्मी में रहने, व्यायाम करने या अधिक पसीना निकलने से शरीर में पानी की मात्रा कम हो जाती है। अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ खाने से भी प्यास बढ़ सकती है। कैफीन युक्त पेय पदार्थों का अत्यधिक सेवन कुछ लोगों में पेशाब बढ़ाकर शरीर के तरल संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

    लगातार अत्यधिक प्यास डायबिटीज से जुड़ा एक महत्वपूर्ण लक्षण भी हो सकती है। जब रक्त में ग्लूकोज का स्तर अधिक बढ़ जाता है, तो शरीर अतिरिक्त ग्लूकोज को पेशाब के रास्ते बाहर निकालने की कोशिश करता है। इस प्रक्रिया में शरीर से अधिक मात्रा में पानी निकल सकता है और व्यक्ति को बार-बार पेशाब आने के साथ ज्यादा प्यास महसूस हो सकती है। इसके साथ थकान, वजन में बदलाव या धुंधला दिखाई देने जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।

    किडनी शरीर में पानी, नमक और दूसरे इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किडनी के कामकाज में समस्या होने पर शरीर के तरल संतुलन में बदलाव आ सकता है। हालांकि केवल ज्यादा प्यास लगने के आधार पर किडनी की बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। यदि इसके साथ पैरों या चेहरे पर सूजन, पेशाब में बदलाव या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

    बार-बार प्यास लगने की एक अपेक्षाकृत कम सामान्य वजह डायबिटीज इन्सिपिडस भी हो सकती है। यह डायबिटीज मेलिटस से अलग स्थिति है और इसमें शरीर के पानी के संतुलन को नियंत्रित करने वाली हार्मोनल व्यवस्था प्रभावित होती है। इसके कारण बहुत अधिक मात्रा में पतला पेशाब आ सकता है और उसके बाद अत्यधिक प्यास महसूस हो सकती है।

    कई बार व्यक्ति को वास्तविक रूप से शरीर में पानी की कमी न होने के बावजूद मुंह सूखने के कारण प्यास जैसा महसूस होता है। इसे ड्राई माउथ कहा जाता है। इसमें मुंह और जीभ में सूखापन, चिपचिपापन या होंठों के सूखने जैसी शिकायत हो सकती है। कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव, तनाव और कुछ अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी मुंह सूखने की वजह बन सकती हैं।

    इसलिए केवल प्यास लगने के आधार पर किसी बीमारी की पहचान करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। समस्या लगातार बनी रहे, बहुत ज्यादा पेशाब आए, रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना पड़े, असामान्य कमजोरी महसूस हो या वजन में बिना वजह बदलाव आए तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। आवश्यकता के अनुसार डॉक्टर रक्त शर्करा, किडनी की कार्यक्षमता, इलेक्ट्रोलाइट्स और अन्य जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।

    बच्चों और बुजुर्गों में शरीर में पानी की कमी तेजी से गंभीर हो सकती है। अत्यधिक कमजोरी, चक्कर, भ्रम, बेहोशी या पानी न पी पाने जैसी स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सहायता जरूरी हो सकती है। लगातार प्यास को समझने का सबसे सही तरीका इसके साथ मौजूद दूसरे लक्षणों और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति को देखना है।

  • स्किन केयर रूटीन में शामिल करें एलोवेरा जेल! जानें चेहरे पर लगाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां

    स्किन केयर रूटीन में शामिल करें एलोवेरा जेल! जानें चेहरे पर लगाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली । स्किन केयर की बात आती है तो एलोवेरा को लंबे समय से त्वचा के लिए उपयोगी माना जाता है। एलोवेरा जेल अपनी ठंडी और soothing प्रकृति के कारण त्वचा को शांत महसूस कराने में मदद कर सकता है। खासतौर पर गर्मी और धूप के कारण त्वचा में होने वाली जलन या रूखेपन के समय एलोवेरा का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को चेहरे पर इस्तेमाल करने से पहले सावधानी रखना जरूरी है।

    चेहरे की देखभाल के लिए सबसे पहले साफ और ताजा एलोवेरा जेल लिया जा सकता है। यदि पौधे से जेल निकाल रहे हैं तो पत्ते को अच्छी तरह धोकर उसमें मौजूद पीले रंग का लेटेक्स अलग कर दें। इसके बाद पारदर्शी जेल को निकालकर चेहरे पर हल्के हाथों से लगाया जा सकता है। इसे कुछ देर त्वचा पर रहने देने के बाद साफ पानी से चेहरा धो लें। पहली बार इस्तेमाल करने वालों को पूरे चेहरे पर लगाने के बजाय त्वचा के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना बेहतर माना जाता है।

    एलोवेरा जेल त्वचा को नमी देने में मदद कर सकता है। जिन लोगों की त्वचा रूखी रहती है वे अपने स्किन केयर रूटीन में एलोवेरा को शामिल कर सकते हैं। इसे अकेले इस्तेमाल करने के अलावा अपनी त्वचा के अनुसार किसी उपयुक्त moisturizer के साथ भी रूटीन में शामिल किया जा सकता है। हालांकि एलोवेरा को किसी भी सामग्री के साथ मिलाकर लगाने से पहले यह समझना जरूरी है कि वह आपकी त्वचा के लिए सुरक्षित है या नहीं।

    धूप में ज्यादा समय बिताने के बाद त्वचा गर्म और संवेदनशील महसूस हो सकती है। ऐसे समय एलोवेरा जेल त्वचा को ठंडक देने वाला एहसास दे सकता है। लेकिन अगर त्वचा पर गंभीर जलन छाले या तेज दर्द हो तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।

    ऑयली स्किन वाले लोग भी एलोवेरा का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि एलोवेरा को मुंहासों का निश्चित इलाज नहीं माना जाना चाहिए। अगर चेहरे पर लगातार पिंपल्स निकल रहे हैं तो समस्या के कारण को समझना जरूरी है। बिना सलाह के नींबू बेकिंग सोडा या अन्य तेज सामग्री के साथ एलोवेरा मिलाकर लगाने से बचना चाहिए क्योंकि इससे त्वचा में जलन या irritation बढ़ सकती है।

    एलोवेरा इस्तेमाल करते समय एक और जरूरी बात इसकी शुद्धता है। बाजार में मिलने वाले हर एलोवेरा जेल की गुणवत्ता एक जैसी नहीं होती। इसलिए उत्पाद खरीदते समय उसके ingredients और इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी जरूर पढ़ें। खुशबू या अन्य additives वाले उत्पाद संवेदनशील त्वचा पर परेशानी पैदा कर सकते हैं।

    स्किन केयर में एलोवेरा को किसी जादुई उपाय की तरह देखने के बजाय एक सामान्य soothing और moisturizing ingredient के रूप में इस्तेमाल करना बेहतर है। त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना अच्छी नींद लेना और रोजाना उपयुक्त sunscreen का इस्तेमाल करना भी जरूरी है। अगर एलोवेरा लगाने के बाद लालिमा खुजली या जलन महसूस हो तो तुरंत इस्तेमाल बंद कर दें।

  • अतिरिक्त चीनी से सेहत को नुकसान का खतरा, पैक्ड जूस और सॉस में छिपी शुगर के प्रति विशेषज्ञों ने किया आगाह

    अतिरिक्त चीनी से सेहत को नुकसान का खतरा, पैक्ड जूस और सॉस में छिपी शुगर के प्रति विशेषज्ञों ने किया आगाह

    नई दिल्ली ।उत्तम स्वास्थ्य और बेहतर जीवन शैली बनाए रखने के लिए सही खानपान को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ रहने के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि किन चीजों के सेवन से बचा जाना चाहिए। जिन खाद्य पदार्थों को सेहत के लिए सबसे अधिक हानिकारक माना जाता है, उनमें अतिरिक्त चीनी प्रमुख है। अत्यधिक मात्रा में चीनी का सेवन मोटापे, मधुमेह और शरीर में अंदरूनी सूजन जैसी कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है।

    आमतौर पर लोग चीनी छोड़ने का अर्थ केवल चाय, कॉफी या मिठाइयों का त्याग करना समझते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल इन चीजों को बंद कर देना ही पर्याप्त नहीं है। रसोई में उपयोग होने वाली और बाजार में मिलने वाली कई अन्य सामान्य चीजों में भी चीनी की भारी मात्रा छिपी हो सकती है। सॉस, टोमैटो केचप, डिब्बाबंद ड्रिंक्स और फ्लेवर्ड दही जैसे पदार्थों में शर्करा की अदृश्य मौजूदगी होती है, जो रोजमर्रा के खानपान में मिठास बढ़ा देती है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हर मीठी वस्तु का स्वाद मिठाई जैसा तेज होना आवश्यक नहीं है। कई ऐसे प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ हैं जिनका स्वाद नमकीन या सामान्य लगता है, लेकिन उनमें एडेड शुगर मिलाई जाती है। इसलिए, यदि कोई व्यक्ति प्रत्यक्ष रूप से चीनी का सेवन बंद भी कर देता है, तब भी इन प्रसंस्कृत पदार्थों के माध्यम से चीनी शरीर में पहुंचती रहती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि दैनिक कुल कैलोरी में एडेड शुगर का हिस्सा 10 प्रतिशत से कम होना चाहिए।

    आहार विशेषज्ञों के मुताबिक एक सामान्य वयस्क के लिए प्रतिदिन 2,000 कैलोरी की डाइट में चीनी की मात्रा लगभग 50 ग्राम यानी 6 से 9 चम्मच से अधिक नहीं होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, महज एक टेबलस्पून टोमैटो केचप में लगभग 4 ग्राम एडेड शुगर हो सकती है। सैंडविच, बर्गर या नाश्ते के साथ नियमित रूप से सॉस का उपयोग करने की आदत कुल चीनी की खपत को चुपचाप बढ़ा देती है। इसी तरह, पैकेज्ड फ्रूट जूस को भी पूरी तरह से स्वास्थ्यवर्धक मानना एक भूल हो सकती है।

    पैकेज्ड जूस में प्राकृतिक फाइबर की कमी होती है और उन्हें संरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त चीनी मिलाई जाती है। मध्य प्रदेश सहित देश भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि बाजार से कोई भी पैकेज्ड खाद्य पदार्थ खरीदते समय केवल कैलोरी ही नहीं, बल्कि उसमें मौजूद एडेड शुगर की मात्रा की जांच अवश्य करनी चाहिए। स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने के लिए प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के बजाय प्राकृतिक और ताजा आहार को प्राथमिकता देना ही सबसे बेहतर विकल्प है।

  • मानसून में छोटी सी लापरवाही पड़ सकती है भारी, बारिश के दौरान सुरक्षित रहने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय

    मानसून में छोटी सी लापरवाही पड़ सकती है भारी, बारिश के दौरान सुरक्षित रहने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय


    नई दिल्ली । बरसात का मौसम गर्मी से राहत लेकर आता है लेकिन इसके साथ कई तरह की परेशानियां भी बढ़ जाती हैं। तेज बारिश के दौरान जलभराव सड़कों पर फिसलन बिजली का खतरा और संक्रमण जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में बारिश का आनंद लेने के साथ अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर बरसात के मौसम में खुद को और परिवार को कई परेशानियों से बचाया जा सकता है।

    बारिश के दौरान घर से बाहर निकलते समय सबसे पहले मौसम की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। अगर तेज बारिश या आंधी की संभावना हो तो गैर जरूरी यात्रा को टालना बेहतर रहता है। बाहर जाना जरूरी हो तो छाता रेनकोट और पानी से बचाने वाले जूते साथ रखें। लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहने से असहजता बढ़ सकती है इसलिए घर पहुंचने के बाद कपड़े बदल लेना चाहिए और शरीर को अच्छी तरह सुखाना चाहिए।

    बरसात में सड़कों पर पानी जमा होने की समस्या आम है। ऐसे रास्तों से पैदल गुजरते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि पानी के नीचे गड्ढे खुले मैनहोल या टूटे हुए हिस्से दिखाई नहीं देते। जलभराव वाले रास्ते में उतरने से बचना सबसे सुरक्षित विकल्प है। अगर वाहन से सफर कर रहे हैं तो पानी की गहराई का अंदाजा लगाए बिना वाहन आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। बाइक और स्कूटर चलाने वालों को फिसलन वाली सड़कों पर गति कम रखनी चाहिए।

    बारिश के दौरान बिजली से जुड़े खतरे को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तेज आंधी और बिजली चमकने के समय खुले मैदान पेड़ के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचना चाहिए। घर में भी गीले हाथों से बिजली के स्विच और उपकरणों को छूने से बचें। अगर किसी जगह बिजली के तार टूटकर पानी में गिरे दिखाई दें तो उसके आसपास जाने के बजाय संबंधित विभाग को सूचना देना चाहिए।

    मानसून के दौरान साफ पानी और भोजन का ध्यान रखना भी जरूरी है। बारिश के मौसम में दूषित पानी और खुले में रखे भोजन से पेट से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं। इसलिए साफ और सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करें। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें। सड़क किनारे खुले में रखे भोजन को खाने से बचना बेहतर है। घर में भी खाने की चीजों को ढककर रखना चाहिए।

    मच्छरों से बचाव भी बरसात में जरूरी हो जाता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें क्योंकि रुका हुआ पानी मच्छरों के पनपने का कारण बन सकता है। कूलर गमले छत और अन्य जगहों पर जमा पानी को नियमित रूप से साफ करना चाहिए। सोते समय जरूरत के अनुसार मच्छरदानी या सुरक्षित मच्छर नियंत्रण उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

    बरसात में बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्हें जलभराव वाले इलाकों और तेज बारिश के दौरान बाहर जाने से रोकना बेहतर है। अगर बारिश के दौरान घर में पानी भरने लगे तो बिजली के उपकरणों से दूरी बनाएं और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थान पर जाएं।

    कुल मिलाकर मानसून का मौसम खुशनुमा जरूर है लेकिन सुरक्षा में लापरवाही नुकसान पहुंचा सकती है। मौसम की जानकारी रखना साफ पानी और भोजन का इस्तेमाल करना जलभराव से बचना और बिजली से जुड़े खतरों के प्रति सतर्क रहना बारिश के मौसम में सुरक्षित रहने के सबसे जरूरी उपायों में शामिल हैं।

  • एक्सरसाइज के बावजूद क्यों नहीं घट रहा फैट, विशेषज्ञों ने ओवरट्रेनिंग और हार्मोनल असंतुलन पर जताई चिंता

    एक्सरसाइज के बावजूद क्यों नहीं घट रहा फैट, विशेषज्ञों ने ओवरट्रेनिंग और हार्मोनल असंतुलन पर जताई चिंता

    नई दिल्ली ।नियमित रूप से कड़ा व्यायाम करने और खानपान पर ध्यान देने के बावजूद वजन नियंत्रित न होना एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, वजन घटाने के प्रयास में अक्सर लोग अत्यधिक पसीना बहाते हैं, लेकिन परिणाम उम्मीद के विपरीत मिलते हैं। इस स्थिति के पीछे केवल आहार ही मुख्य वजह नहीं होती, बल्कि शरीर को पर्याप्त आराम न देना, खराब नींद और जरूरत से ज्यादा वर्कआउट करना भी एक बड़ा कारण हो सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि व्यायाम के बाद मांसपेशियों की रिकवरी के लिए शरीर को पर्याप्त समय मिलना अत्यंत आवश्यक है। जब कोई व्यक्ति लगातार भारी वर्कआउट करता है और रात में गहरी नींद नहीं ले पाता, तो शरीर में अंदरूनी तनाव बढ़ने लगता है। यह स्थिति ऊर्जा स्तर, पाचन क्रिया और दैनिक कार्यक्षमता को प्रभावित करती है। अत्यधिक शारीरिक परिश्रम के कारण शरीर का मेटाबॉलिज्म सुस्त हो सकता है और हार्मोनल संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे फैट घटने के बजाय जमा होने लगता है।

    क्रॉनिक डिजीज विशेषज्ञों के मुताबिक, बिना किसी विश्राम दिवस के रोज कड़ा व्यायाम करने से शरीर में क्रॉनिक लो-ग्रेड इंफ्लेमेशन यानी अंदरूनी सूजन और तनाव उत्पन्न होता है। यह अंदरूनी तनाव हार्मोनल बैलेंस को प्रभावित करता है, जिससे विशेष रूप से पेट के आसपास फैट जमा होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। इसके अलावा, ओवरट्रेनिंग के कारण महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमतिता जैसी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं, जो कि शरीर द्वारा अत्यधिक थकान का स्पष्ट संकेत है।

    व्यायाम से शरीर पूरी तरह थक जाने के बाद भी यदि रात में नींद न आने की समस्या हो रही है, तो यह ओवरट्रेनिंग और एड्रिनल ग्लैंड पर पड़ रहे अत्यधिक दबाव को दर्शाता है। ऐसी स्थिति में शरीर थायरॉइड और चयापचय दर को धीमा कर देता है, जिससे वजन घटाने की प्रक्रिया पूरी तरह रुक जाती है। मध्य प्रदेश सहित देश भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि फिटनेस के लिए हमेशा अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही कसरत करनी चाहिए।

    एक स्वस्थ जीवन शैली और प्रभावी वजन नियंत्रण के लिए केवल कठिन वर्कआउट ही पर्याप्त नहीं है। इसके साथ संतुलित आहार, समय पर पर्याप्त आराम और प्रतिदिन कम से कम सात से आठ घंटे की नींद लेना अनिवार्य है। शरीर को अत्यधिक थका देने के बजाय संयमित दिनचर्या अपनाकर ही टिकाऊ फिटनेस और सही वजन प्राप्त किया जा सकता है।

  • ब्यूटी रूटीन में शामिल करें चावल का आटा, त्वचा की देखभाल में कैसे करें इस्तेमाल और किन गलतियों से बचें

    ब्यूटी रूटीन में शामिल करें चावल का आटा, त्वचा की देखभाल में कैसे करें इस्तेमाल और किन गलतियों से बचें


    नई दिल्ली ।आजकल स्किन केयर के लिए लोग महंगे प्रोडक्ट्स के साथ घरेलू नुस्खों की तरफ भी तेजी से रुख कर रहे हैं। इन्हीं घरेलू उपायों में चावल का आटा यानी Rice Flour भी काफी लोकप्रिय है। इसे कई लोग चेहरे पर फेस पैक या हल्के क्लेंजर की तरह इस्तेमाल करते हैं। चावल का आटा त्वचा को मुलायम महसूस कराने और चेहरे से अतिरिक्त गंदगी हटाने में मदद कर सकता है। हालांकि इसे किसी चमत्कारी उपचार की तरह नहीं देखना चाहिए। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी घरेलू फेस मास्क का इस्तेमाल व्यक्ति की त्वचा के प्रकार और संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर करना चाहिए। गलत तरीके से या बहुत ज्यादा इस्तेमाल करने पर जलन और रूखापन भी हो सकता है।

    चावल के आटे से फेस पैक बनाने का तरीका बेहद आसान है। इसके लिए एक से दो चम्मच बारीक चावल का आटा लें और इसमें जरूरत के अनुसार सादा पानी या एलोवेरा जेल मिलाकर हल्का पेस्ट तैयार कर सकते हैं। अगर त्वचा रूखी है तो इसमें एक साधारण मॉइस्चराइजिंग बेस मिलाने का विकल्प रखा जा सकता है। पेस्ट को चेहरे पर बहुत हल्के हाथों से लगाएं और आंखों तथा होंठों के आसपास के हिस्से से बचाएं। इसे कुछ मिनट तक लगा रहने दें और फिर सामान्य पानी से धीरे से धो लें। चेहरे को साफ करने के बाद त्वचा पर उपयुक्त मॉइस्चराइजर लगाना जरूरी है।

    चावल के आटे का इस्तेमाल करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे चेहरे पर जोर से रगड़ना नहीं चाहिए। कई लोग इसे स्क्रब की तरह इस्तेमाल करते हुए त्वचा को तेजी से घिसते हैं लेकिन इससे त्वचा की ऊपरी परत में जलन हो सकती है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी भी चेहरे पर इस्तेमाल होने वाले मास्क और एक्सफोलिएटिंग प्रोडक्ट्स को बहुत ज्यादा या बार बार इस्तेमाल करने से सावधान करती है क्योंकि इससे त्वचा में रूखापन और जलन बढ़ सकती है।

    अगर आपकी त्वचा संवेदनशील है या पहले से लालिमा खुजली जलन या किसी तरह की एलर्जी की समस्या रहती है तो घरेलू फेस पैक को सीधे पूरे चेहरे पर लगाने से पहले छोटे हिस्से पर परीक्षण करना बेहतर है। किसी नए स्किन केयर प्रोडक्ट या मास्क को पहले छोटे क्षेत्र पर टेस्ट करने की सलाह त्वचा विशेषज्ञ भी देते हैं। अगर लगाने के बाद खुजली जलन या चुभन महसूस हो तो इसे तुरंत धो देना चाहिए।

    मुंहासे वाली त्वचा पर भी चावल के आटे को इलाज समझकर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। फेस मास्क सामान्य स्किन केयर रूटीन का हिस्सा हो सकता है लेकिन यह मुंहासे एक्जिमा या दूसरी त्वचा संबंधी बीमारी का उपचार नहीं है। ऐसी समस्या लगातार बनी रहती है तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है। सही स्किन केयर में चेहरे की नियमित सफाई मॉइस्चराइजिंग और धूप से बचाव भी महत्वपूर्ण है।

    चावल के आटे से बने फेस पैक का इस्तेमाल करते समय खुशबू वाले या ऐसे अतिरिक्त पदार्थ मिलाने से बचना चाहिए जो आपकी त्वचा को पहले से परेशान करते हों। खासकर संवेदनशील त्वचा में कम सामग्री वाला सरल फेस पैक बेहतर विकल्प हो सकता है। किसी भी घरेलू नुस्खे का इस्तेमाल रोजाना करने की जरूरत नहीं है। त्वचा की प्रतिक्रिया देखकर सीमित इस्तेमाल करना अधिक समझदारी है।

    इस तरह Rice Flour Skin Care को एक आसान घरेलू विकल्प के तौर पर देखा जा सकता है लेकिन इससे तुरंत गोरी या बेदाग त्वचा मिलने का दावा सही नहीं माना जाना चाहिए। चेहरे की अच्छी सेहत के लिए नियमित देखभाल संतुलित दिनचर्या पर्याप्त नींद पानी और रोजाना सन प्रोटेक्शन ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। अगर चावल के आटे का फेस पैक आपकी त्वचा को सूट करता है तो इसे अपनी सामान्य स्किन केयर रूटीन के साथ सीमित रूप में शामिल किया जा सकता है।

  • बार-बार थकान बाल झड़ना और घाव देर से भरना नहीं है सामान्य, शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी का हो सकता है संकेत

    बार-बार थकान बाल झड़ना और घाव देर से भरना नहीं है सामान्य, शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी का हो सकता है संकेत

    नई दिल्ली । शरीर को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन और मिनरल्स की जरूरत होती है। इन पोषक तत्वों की मात्रा भले ही कम चाहिए होती है लेकिन शरीर के कई जरूरी काम इन्हीं पर निर्भर करते हैं। खून बनाने से लेकर नसों की कार्यप्रणाली प्रतिरोधक क्षमता त्वचा बालों और ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने में इनका महत्वपूर्ण योगदान होता है। यही वजह है कि जब शरीर में आयरन जिंक या विटामिन B12 जैसे पोषक तत्वों की कमी होने लगती है तो कुछ बदलाव दिखाई दे सकते हैं। कई बार लोग इन संकेतों को सामान्य कमजोरी तनाव या नींद की कमी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

    लगातार थकान और कमजोरी पोषण की कमी से जुड़ा एक आम संकेत हो सकता है। अगर पर्याप्त नींद लेने और सामान्य दिनचर्या के बावजूद शरीर में हर समय ऊर्जा की कमी महसूस हो रही है तो इसकी वजह जानना जरूरी है। आयरन की कमी से एनीमिया हो सकता है जिसमें थकान कमजोरी और एकाग्रता में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विटामिन B12 की कमी में भी कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है। हालांकि केवल थकान के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि शरीर में किस पोषक तत्व की कमी है क्योंकि इसके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।

    आयरन की कमी बढ़ने पर कुछ लोगों में त्वचा का रंग सामान्य से फीका दिखाई दे सकता है। चक्कर आना या थोड़ा काम करने पर सांस फूलना भी एनीमिया से जुड़ा हो सकता है। ऐसी स्थिति में बिना सलाह के आयरन की दवा शुरू करने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना बेहतर होता है। जरूरत पड़ने पर रक्त जांच के माध्यम से हीमोग्लोबिन और आयरन की स्थिति का पता लगाया जा सकता है।

    बालों का लगातार झड़ना भी कई कारणों से हो सकता है। तनाव हार्मोन में बदलाव भोजन की कमी और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं बालों के झड़ने की वजह बन सकती हैं। आयरन की कमी या एनीमिया भी कुछ मामलों में बालों की सेहत को प्रभावित कर सकता है। इसलिए केवल बाल झड़ने को देखकर किसी एक विटामिन या मिनरल की कमी मान लेना सही नहीं है।

    जिंक शरीर के लिए जरूरी मिनरल्स में शामिल है। यह प्रतिरोधक क्षमता और घाव भरने जैसी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। जिंक की कमी होने पर घाव सामान्य से देर से भरने की समस्या दिखाई दे सकती है। बार बार संक्रमण होना या बालों से जुड़ी परेशानियां भी कुछ मामलों में जिंक की कमी से संबंधित हो सकती हैं। हालांकि इन लक्षणों के पीछे अन्य स्वास्थ्य कारण भी हो सकते हैं।

    विटामिन B12 शरीर की नसों और लाल रक्त कोशिकाओं के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी कमी लंबे समय तक रहने पर कमजोरी के साथ हाथ पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। कुछ लोगों में एकाग्रता और याददाश्त से जुड़ी परेशानियां भी देखी जा सकती हैं। इसलिए ऐसे लक्षण लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    पोषक तत्वों की कमी से बचने के लिए संतुलित और विविध आहार लेना महत्वपूर्ण है। भोजन में दालें हरी सब्जियां साबुत अनाज दूध और उससे बने खाद्य पदार्थ अंडे मांस या अन्य उपलब्ध पोषक स्रोतों को शामिल किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से कमजोरी बाल झड़ने घाव देर से भरने चक्कर या हाथ पैरों में झनझनाहट जैसी समस्या हो रही है तो खुद से सप्लीमेंट लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर जरूरी जांच कराना बेहतर है। सही कारण की पहचान के बाद ही उचित उपचार और पोषण की योजना बनाई जानी चाहिए।

  • बार-बार थकान बाल झड़ना और घाव देर से भरना नहीं है सामान्य, शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी का हो सकता है संकेत

    बार-बार थकान बाल झड़ना और घाव देर से भरना नहीं है सामान्य, शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी का हो सकता है संकेत

    नई दिल्ली । शरीर को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन और मिनरल्स की जरूरत होती है। इन पोषक तत्वों की मात्रा भले ही कम चाहिए होती है लेकिन शरीर के कई जरूरी काम इन्हीं पर निर्भर करते हैं। खून बनाने से लेकर नसों की कार्यप्रणाली प्रतिरोधक क्षमता त्वचा बालों और ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने में इनका महत्वपूर्ण योगदान होता है। यही वजह है कि जब शरीर में आयरन जिंक या विटामिन B12 जैसे पोषक तत्वों की कमी होने लगती है तो कुछ बदलाव दिखाई दे सकते हैं। कई बार लोग इन संकेतों को सामान्य कमजोरी तनाव या नींद की कमी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

    लगातार थकान और कमजोरी पोषण की कमी से जुड़ा एक आम संकेत हो सकता है। अगर पर्याप्त नींद लेने और सामान्य दिनचर्या के बावजूद शरीर में हर समय ऊर्जा की कमी महसूस हो रही है तो इसकी वजह जानना जरूरी है। आयरन की कमी से एनीमिया हो सकता है जिसमें थकान कमजोरी और एकाग्रता में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विटामिन B12 की कमी में भी कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है। हालांकि केवल थकान के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि शरीर में किस पोषक तत्व की कमी है क्योंकि इसके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।

    आयरन की कमी बढ़ने पर कुछ लोगों में त्वचा का रंग सामान्य से फीका दिखाई दे सकता है। चक्कर आना या थोड़ा काम करने पर सांस फूलना भी एनीमिया से जुड़ा हो सकता है। ऐसी स्थिति में बिना सलाह के आयरन की दवा शुरू करने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना बेहतर होता है। जरूरत पड़ने पर रक्त जांच के माध्यम से हीमोग्लोबिन और आयरन की स्थिति का पता लगाया जा सकता है।

    बालों का लगातार झड़ना भी कई कारणों से हो सकता है। तनाव हार्मोन में बदलाव भोजन की कमी और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं बालों के झड़ने की वजह बन सकती हैं। आयरन की कमी या एनीमिया भी कुछ मामलों में बालों की सेहत को प्रभावित कर सकता है। इसलिए केवल बाल झड़ने को देखकर किसी एक विटामिन या मिनरल की कमी मान लेना सही नहीं है।

    जिंक शरीर के लिए जरूरी मिनरल्स में शामिल है। यह प्रतिरोधक क्षमता और घाव भरने जैसी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। जिंक की कमी होने पर घाव सामान्य से देर से भरने की समस्या दिखाई दे सकती है। बार बार संक्रमण होना या बालों से जुड़ी परेशानियां भी कुछ मामलों में जिंक की कमी से संबंधित हो सकती हैं। हालांकि इन लक्षणों के पीछे अन्य स्वास्थ्य कारण भी हो सकते हैं।

    विटामिन B12 शरीर की नसों और लाल रक्त कोशिकाओं के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी कमी लंबे समय तक रहने पर कमजोरी के साथ हाथ पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। कुछ लोगों में एकाग्रता और याददाश्त से जुड़ी परेशानियां भी देखी जा सकती हैं। इसलिए ऐसे लक्षण लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    पोषक तत्वों की कमी से बचने के लिए संतुलित और विविध आहार लेना महत्वपूर्ण है। भोजन में दालें हरी सब्जियां साबुत अनाज दूध और उससे बने खाद्य पदार्थ अंडे मांस या अन्य उपलब्ध पोषक स्रोतों को शामिल किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से कमजोरी बाल झड़ने घाव देर से भरने चक्कर या हाथ पैरों में झनझनाहट जैसी समस्या हो रही है तो खुद से सप्लीमेंट लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर जरूरी जांच कराना बेहतर है। सही कारण की पहचान के बाद ही उचित उपचार और पोषण की योजना बनाई जानी चाहिए।

  • बालों की देखभाल के लिए घर पर बनाएं चावल, मेथी और लौंग का हेयर रिंस, जानें बनाने और लगाने का आसान तरीका

    बालों की देखभाल के लिए घर पर बनाएं चावल, मेथी और लौंग का हेयर रिंस, जानें बनाने और लगाने का आसान तरीका

    नई दिल्ली । बालों की देखभाल के लिए बाजार में कई तरह के प्रोडक्ट उपलब्ध हैं, लेकिन कुछ लोग घर में मौजूद सामान्य सामग्री से तैयार किए गए नुस्खों को भी अपने हेयर केयर रूटीन में शामिल करते हैं। चावल, मेथी और लौंग से तैयार किया जाने वाला हेयर रिंस भी ऐसा ही एक घरेलू विकल्प है, जिसे बनाना आसान है और इसके लिए ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती।

    इस होममेड हेयर रिंस को तैयार करने के लिए चावल, मेथी दाना, लौंग और पानी की जरूरत होती है। इसे बनाने से पहले सभी सामग्रियों को अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करते समय यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि किसी भी मिश्रण को बाल झड़ने या स्कैल्प की समस्या का निश्चित इलाज नहीं माना जा सकता।

    रिंस बनाने के लिए सबसे पहले एक कप पानी में करीब चार बड़े चम्मच चावल, एक से दो चम्मच मेथी दाना और कुछ लौंग डालें। इन सभी चीजों को साफ पानी से धोने के बाद एक बर्तन में डालकर करीब छह से आठ घंटे के लिए भिगोकर रखा जा सकता है। इसे रातभर भिगोकर रखने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है।

    अगले चरण में इसी मिश्रण को धीमी आंच पर करीब 10 से 15 मिनट तक उबालना होता है। उबालने के बाद गैस बंद कर दें और मिश्रण को सामान्य तापमान पर पूरी तरह ठंडा होने दें। इसके बाद इसे साफ कपड़े या छन्नी की सहायता से अच्छी तरह छान लें, ताकि पानी में किसी सामग्री के टुकड़े न रह जाएं।

    तैयार किए गए रिंस को साफ स्प्रे बोतल में भरकर रखा जा सकता है। हालांकि इसे तैयार करने और स्टोर करने के दौरान साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है। घर पर बनाए गए किसी भी मिश्रण को लंबे समय तक रखने के बजाय कम मात्रा में तैयार करके ताजा इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है।

    बाल धोने के बाद इस रिंस को स्कैल्प और बालों की लंबाई पर हल्के हाथों से लगाया जा सकता है। इसे कुछ समय बालों पर रहने देने के बाद साफ पानी से धो लें। पहली बार इस्तेमाल करने वाले लोगों को सीधे ज्यादा मात्रा लगाने के बजाय थोड़ी मात्रा से शुरुआत करनी चाहिए।

    मेथी, चावल और लौंग जैसे घरेलू ingredients को लेकर अलग-अलग पारंपरिक हेयर केयर तरीके प्रचलित हैं, लेकिन इनके प्रभाव व्यक्ति के बालों और स्कैल्प की स्थिति के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसलिए इसे बालों की सामान्य देखभाल के विकल्प के तौर पर ही देखना चाहिए।

    अगर इस रिंस के इस्तेमाल के बाद स्कैल्प में खुजली, जलन, लालिमा या किसी अन्य तरह की परेशानी महसूस होती है, तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए। किसी भी घरेलू मिश्रण को लगाने से पहले संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

    बालों का लगातार या सामान्य से काफी अधिक झड़ना किसी अन्य कारण से भी जुड़ा हो सकता है। ऐसी स्थिति में केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय समस्या के कारण का पता लगाना जरूरी है। स्कैल्प से जुड़ी परेशानी लंबे समय तक बनी रहे तो विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।

  • बालों की देखभाल के लिए घर पर बनाएं चावल, मेथी और लौंग का हेयर रिंस, जानें बनाने और लगाने का आसान तरीका

    बालों की देखभाल के लिए घर पर बनाएं चावल, मेथी और लौंग का हेयर रिंस, जानें बनाने और लगाने का आसान तरीका

    नई दिल्ली । बालों की देखभाल के लिए बाजार में कई तरह के प्रोडक्ट उपलब्ध हैं, लेकिन कुछ लोग घर में मौजूद सामान्य सामग्री से तैयार किए गए नुस्खों को भी अपने हेयर केयर रूटीन में शामिल करते हैं। चावल, मेथी और लौंग से तैयार किया जाने वाला हेयर रिंस भी ऐसा ही एक घरेलू विकल्प है, जिसे बनाना आसान है और इसके लिए ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती।

    इस होममेड हेयर रिंस को तैयार करने के लिए चावल, मेथी दाना, लौंग और पानी की जरूरत होती है। इसे बनाने से पहले सभी सामग्रियों को अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करते समय यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि किसी भी मिश्रण को बाल झड़ने या स्कैल्प की समस्या का निश्चित इलाज नहीं माना जा सकता।

    रिंस बनाने के लिए सबसे पहले एक कप पानी में करीब चार बड़े चम्मच चावल, एक से दो चम्मच मेथी दाना और कुछ लौंग डालें। इन सभी चीजों को साफ पानी से धोने के बाद एक बर्तन में डालकर करीब छह से आठ घंटे के लिए भिगोकर रखा जा सकता है। इसे रातभर भिगोकर रखने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है।

    अगले चरण में इसी मिश्रण को धीमी आंच पर करीब 10 से 15 मिनट तक उबालना होता है। उबालने के बाद गैस बंद कर दें और मिश्रण को सामान्य तापमान पर पूरी तरह ठंडा होने दें। इसके बाद इसे साफ कपड़े या छन्नी की सहायता से अच्छी तरह छान लें, ताकि पानी में किसी सामग्री के टुकड़े न रह जाएं।

    तैयार किए गए रिंस को साफ स्प्रे बोतल में भरकर रखा जा सकता है। हालांकि इसे तैयार करने और स्टोर करने के दौरान साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है। घर पर बनाए गए किसी भी मिश्रण को लंबे समय तक रखने के बजाय कम मात्रा में तैयार करके ताजा इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है।

    बाल धोने के बाद इस रिंस को स्कैल्प और बालों की लंबाई पर हल्के हाथों से लगाया जा सकता है। इसे कुछ समय बालों पर रहने देने के बाद साफ पानी से धो लें। पहली बार इस्तेमाल करने वाले लोगों को सीधे ज्यादा मात्रा लगाने के बजाय थोड़ी मात्रा से शुरुआत करनी चाहिए।

    मेथी, चावल और लौंग जैसे घरेलू ingredients को लेकर अलग-अलग पारंपरिक हेयर केयर तरीके प्रचलित हैं, लेकिन इनके प्रभाव व्यक्ति के बालों और स्कैल्प की स्थिति के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसलिए इसे बालों की सामान्य देखभाल के विकल्प के तौर पर ही देखना चाहिए।

    अगर इस रिंस के इस्तेमाल के बाद स्कैल्प में खुजली, जलन, लालिमा या किसी अन्य तरह की परेशानी महसूस होती है, तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए। किसी भी घरेलू मिश्रण को लगाने से पहले संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

    बालों का लगातार या सामान्य से काफी अधिक झड़ना किसी अन्य कारण से भी जुड़ा हो सकता है। ऐसी स्थिति में केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय समस्या के कारण का पता लगाना जरूरी है। स्कैल्प से जुड़ी परेशानी लंबे समय तक बनी रहे तो विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।