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  • प्राकृतिक सुंदरता, शांत झीलें और ऐतिहासिक धरोहरें, फैमिली वेकेशन के लिए माउंट आबू की ये जगहें हैं बेहतरीन विकल्प

    प्राकृतिक सुंदरता, शांत झीलें और ऐतिहासिक धरोहरें, फैमिली वेकेशन के लिए माउंट आबू की ये जगहें हैं बेहतरीन विकल्प

    नई दिल्ली । यदि आप परिवार के साथ शांत, प्राकृतिक और यादगार छुट्टियां बिताने की योजना बना रहे हैं तो राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू बेहतरीन विकल्प हो सकता है। अरावली पर्वतमाला की गोद में बसा यह पर्यटन स्थल अपनी हरियाली, ठंडी जलवायु, ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां हर उम्र के पर्यटकों के लिए कुछ न कुछ खास मौजूद है, जिससे पारिवारिक यात्रा सुखद और यादगार बन जाती है।

    माउंट आबू की सबसे लोकप्रिय जगहों में नक्की झील का नाम सबसे पहले आता है। चारों ओर पहाड़ियों से घिरी यह झील शांत वातावरण और मनमोहक दृश्यों के लिए जानी जाती है। यहां बोटिंग का आनंद लेने के साथ-साथ झील के किनारे शाम की सैर भी पर्यटकों को आकर्षित करती है। आसपास मौजूद स्थानीय बाजार और पारंपरिक व्यंजनों की दुकानें भी यात्रा का अनुभव और बेहतर बना देती हैं।

    इतिहास और स्थापत्य कला में रुचि रखने वालों के लिए दिलवाड़ा जैन मंदिर विशेष आकर्षण का केंद्र है। संगमरमर पर की गई बारीक नक्काशी और उत्कृष्ट वास्तुकला इस मंदिर को देश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों में शामिल करती है। यहां की कलात्मक सुंदरता पर्यटकों को लंबे समय तक प्रभावित करती है।

    प्रकृति प्रेमियों के लिए गुरु शिखर एक ऐसा स्थान है, जहां से अरावली पर्वतमाला का विस्तृत और मनमोहक दृश्य दिखाई देता है। यह अरावली की सबसे ऊंची चोटी है और यहां पहुंचकर बादलों के बीच फैले प्राकृतिक नजारों का आनंद लिया जा सकता है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी यह स्थान बेहद लोकप्रिय माना जाता है।

    माउंट आबू का सनसेट पॉइंट भी पर्यटकों की पसंदीदा जगहों में शामिल है। यहां शाम के समय डूबते सूरज का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है। परिवार के साथ बैठकर सूर्यास्त का आनंद लेना और यादगार तस्वीरें लेना इस यात्रा को और खास बना देता है। इसी तरह टॉड रॉक अपनी अनोखी प्राकृतिक आकृति के कारण पर्यटकों के बीच विशेष पहचान रखता है। यहां तक पहुंचने के लिए हल्की पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है, लेकिन ऊपर से दिखाई देने वाला नक्की झील का दृश्य पूरे सफर की थकान दूर कर देता है।

    यदि आप भीड़भाड़ से दूर कुछ समय शांति के बीच बिताना चाहते हैं तो पीस पार्क एक आदर्श स्थान है। हरियाली से घिरा यह पार्क ध्यान, विश्राम और परिवार के साथ सुकून भरे पल बिताने के लिए उपयुक्त माना जाता है। साफ-सुथरा वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य यहां आने वाले पर्यटकों को अलग अनुभव प्रदान करता है।

    माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य भी इस पर्यटन स्थल का प्रमुख आकर्षण है। यहां विभिन्न प्रकार के वन्यजीव, पक्षी और दुर्लभ वनस्पतियां देखने को मिलती हैं। प्रकृति और वन्यजीवों में रुचि रखने वाले लोगों के साथ-साथ बच्चों के लिए भी यह स्थान ज्ञान और रोमांच से भरपूर अनुभव देता है।

    माउंट आबू की यात्रा प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और शांत वातावरण का अनूठा संगम प्रस्तुत करती है। यदि यात्रा की सही योजना बनाकर इन प्रमुख स्थानों को अपने कार्यक्रम में शामिल किया जाए तो परिवार के साथ बिताया गया हर पल यादगार बन सकता है और छुट्टियों का आनंद कई गुना बढ़ जाता है।

  • महंगी क्रीम नहीं सही कारण पहचानिए तभी दूर होगा अंडरआर्म्स का जिद्दी कालापन

    महंगी क्रीम नहीं सही कारण पहचानिए तभी दूर होगा अंडरआर्म्स का जिद्दी कालापन


    नई दिल्ली । अंडरआर्म्स का काला पड़ना आज के समय में महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए एक आम समस्या बन गया है। कई लोग इसे केवल साफ सफाई की कमी मान लेते हैं जबकि वास्तविकता इससे कहीं अलग है। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार अंडरआर्म्स की त्वचा शरीर के अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक पतली और संवेदनशील होती है। यही कारण है कि इस हिस्से पर होने वाली हल्की जलन लगातार घर्षण या गलत स्किन केयर का असर जल्दी दिखाई देता है। यदि समय रहते सही कारण की पहचान कर ली जाए तो इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    अंडरआर्म्स के काले होने की सबसे आम वजह बार बार शेविंग करना मानी जाती है। रेजर से बाल हटाने पर बाल केवल ऊपर से कटते हैं जबकि उनकी जड़ त्वचा के भीतर बनी रहती है। इससे त्वचा गहरी दिखाई देने लगती है। लगातार शेविंग करने से त्वचा में सूक्ष्म जलन और रगड़ भी होती है जो समय के साथ पिग्मेंटेशन बढ़ा सकती है। ऐसे में यदि संभव हो तो त्वचा के अनुसार सुरक्षित हेयर रिमूवल तरीका अपनाना बेहतर माना जाता है।

    बहुत अधिक टाइट कपड़े पहनना भी अंडरआर्म्स के कालेपन की बड़ी वजह बन सकता है। लगातार घर्षण के कारण शरीर उस हिस्से में अधिक मेलानिन बनाना शुरू कर देता है जिससे त्वचा का रंग धीरे धीरे गहरा होने लगता है। अधिक वजन वाले लोगों में यह समस्या और अधिक देखने को मिलती है। इसलिए हल्के और सूती कपड़े पहनना त्वचा के लिए बेहतर माना जाता है।

    आजकल अधिकांश लोग रोजाना डिओडरेंट या एंटीपर्सपिरेंट का उपयोग करते हैं। कई उत्पादों में मौजूद अल्कोहल खुशबू वाले रसायन और अन्य केमिकल संवेदनशील त्वचा में एलर्जी या जलन पैदा कर सकते हैं। यदि लंबे समय तक ऐसा होता रहे तो त्वचा पर दाग और कालापन बढ़ सकता है। इसलिए हमेशा अपनी त्वचा के अनुसार उत्पाद चुनें और किसी भी तरह की जलन महसूस होने पर उसका उपयोग बंद कर दें।

    डेड स्किन यानी मृत त्वचा कोशिकाओं का जमा होना भी अंडरआर्म्स को काला दिखा सकता है। जिस तरह चेहरे की नियमित सफाई जरूरी होती है उसी तरह इस हिस्से की भी हल्के तरीके से सफाई और एक्सफोलिएशन करना जरूरी है। हालांकि बहुत ज्यादा स्क्रब करने से त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है इसलिए संतुलित देखभाल ही सबसे बेहतर उपाय है।

    कुछ मामलों में अंडरआर्म्स का कालापन केवल बाहरी कारणों से नहीं बल्कि शरीर के अंदर होने वाले बदलावों से भी जुड़ा हो सकता है। हार्मोनल असंतुलन इंसुलिन रेजिस्टेंस या एकैंथोसिस नाइग्रिकन्स जैसी त्वचा संबंधी स्थिति में अंडरआर्म्स और गर्दन की त्वचा मोटी और गहरे रंग की हो सकती है। यदि कालापन अचानक बढ़ जाए या इसके साथ खुजली मोटापन या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

    स्वस्थ और साफ अंडरआर्म्स के लिए रोजाना सफाई करें त्वचा को बेवजह रगड़ने से बचें शेविंग के बाद मॉइस्चराइजर लगाएं और अपनी त्वचा के अनुरूप स्किन केयर उत्पादों का ही इस्तेमाल करें। सही आदतें अपनाकर और समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेकर इस समस्या से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है।

  • कम उम्र में बंद हो रहे पीरियड्स कहीं समय से पहले मेनोपॉज का संकेत तो नहीं जानिए पूरी सच्चाई

    कम उम्र में बंद हो रहे पीरियड्स कहीं समय से पहले मेनोपॉज का संकेत तो नहीं जानिए पूरी सच्चाई


    नई दिल्ली । मेनोपॉज को लंबे समय तक केवल 45 से 50 वर्ष की उम्र के बाद होने वाली सामान्य जैविक प्रक्रिया माना जाता रहा है लेकिन अब चिकित्सा विशेषज्ञों के सामने एक नई और चिंताजनक तस्वीर उभर रही है। हाल के अध्ययनों में यह संकेत मिले हैं कि समय से पहले मेनोपॉज यानी प्रीमैच्योर ओवेरियन फेल्योर के मामले अब किशोरियों में भी सामने आने लगे हैं। कुछ मामलों में 13 वर्ष तक की लड़कियों में भी अंडाशय के समय से पहले काम करना बंद करने की समस्या दर्ज की गई है। विशेषज्ञ इसे दुर्लभ जरूर मानते हैं लेकिन चेतावनी देते हैं कि यदि समय रहते इसकी पहचान और उपचार न किया जाए तो भविष्य में प्रजनन क्षमता के साथ हड्डियों और हृदय स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी किशोरी के पीरियड्स लगातार अनियमित रहें या चार महीने अथवा उससे अधिक समय तक माहवारी बंद रहे तो इसे केवल हार्मोनल बदलाव या बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में स्त्री रोग विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श लेना जरूरी है। आवश्यकता पड़ने पर हार्मोन जांच के साथ जेनेटिक ऑटोइम्यून और अन्य चिकित्सकीय परीक्षण भी कराए जा सकते हैं ताकि बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सके।

    यूनान की नेशनल एंड कपोडिस्ट्रियन यूनिवर्सिटी ऑफ एथेंस के विशेषज्ञों द्वारा किए गए रिव्यू अध्ययन में बताया गया है कि यदि अंडाशय समय से पहले काम करना बंद कर दें तो महिला की प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और भविष्य में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम भी सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक हो सकता है।

    अमेरिका के कई प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में किए गए शोध में 13 से 21 वर्ष की आयु की लड़कियों में ऐसे मामलों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि कई मरीजों में बीमारी की पहचान इसलिए देर से हुई क्योंकि शुरुआती लक्षणों को सामान्य हार्मोनल असंतुलन समझ लिया गया। यही कारण है कि विशेषज्ञ अब माता पिता और किशोरियों दोनों को मासिक धर्म में होने वाले असामान्य बदलावों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

    अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि जिन महिलाओं में 40 वर्ष की आयु से पहले मेनोपॉज हो जाता है उनमें भविष्य में हार्ट अटैक स्ट्रोक और अन्य हृदय रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है। शोध के अनुसार 40 वर्ष से पहले मेनोपॉज होने पर पहली बार हृदय रोग होने का जोखिम सामान्य महिलाओं की तुलना में लगभग 55 प्रतिशत अधिक पाया गया। वहीं 40 से 44 वर्ष की उम्र के बीच मेनोपॉज होने पर यह खतरा 30 प्रतिशत और 45 से 49 वर्ष के बीच होने पर 12 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया।

    विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि महिलाओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का भी मेनोपॉज से गहरा संबंध है। हिंसा मानसिक तनाव और लंबे समय तक चलने वाली भावनात्मक परेशानियां भी समय से पहले मेनोपॉज का जोखिम बढ़ा सकती हैं। इसलिए संतुलित आहार नियमित व्यायाम पर्याप्त नींद तनाव नियंत्रण और समय पर चिकित्सकीय जांच महिलाओं के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी हैं। यदि पीरियड्स लंबे समय तक बंद रहें या लगातार अनियमित हों तो बिना देरी किए विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित और प्रभावी कदम माना जाता है।

  • चलते समय घुटनों से आती है कट-कट की आवाज? जानिए कहीं जोड़ों की चिकनाई तो नहीं हो रही कम

    चलते समय घुटनों से आती है कट-कट की आवाज? जानिए कहीं जोड़ों की चिकनाई तो नहीं हो रही कम


    नई दिल्ली । घुटनों में दर्द चलने में तकलीफ सुबह उठते समय अकड़न या चलते समय कट कट की आवाज आना आजकल केवल बढ़ती उम्र की समस्या नहीं रह गई है। बदलती जीवनशैली बढ़ता वजन लंबे समय तक बैठे रहने की आदत और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कम उम्र के लोग भी जोड़ों की परेशानियों का सामना कर रहे हैं। यदि आपको भी लंबे समय से घुटनों में दर्द या जकड़न महसूस हो रही है तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें क्योंकि यह जोड़ों की चिकनाई कम होने का संकेत हो सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार हमारे शरीर के प्रत्येक जोड़ के बीच एक विशेष प्रकार का द्रव मौजूद होता है जिसे सिनोवियल फ्लूइड कहा जाता है। यह द्रव जोड़ों को आसानी से हिलने डुलने में मदद करता है और हड्डियों को आपस में रगड़ खाने से बचाता है। जब किसी कारण से इस द्रव की मात्रा कम होने लगती है या जोड़ों की कार्टिलेज घिसने लगती है तब घुटनों में दर्द अकड़न और सूजन जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। यही स्थिति आम भाषा में घुटनों की ग्रीस कम होना कहलाती है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि बढ़ती उम्र मोटापा ऑस्टियोआर्थराइटिस पुरानी चोट शारीरिक निष्क्रियता और लंबे समय तक भारी वजन उठाने की आदत इस समस्या के प्रमुख कारण हो सकते हैं। इसके अलावा महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद हार्मोनल बदलाव के कारण भी जोड़ों की समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज विटामिन डी की कमी और गठिया जैसी बीमारियां भी घुटनों की सेहत को प्रभावित कर सकती हैं।

    यदि सुबह उठते समय घुटनों में जकड़न महसूस हो बैठने के बाद उठने में दर्द हो सीढ़ियां चढ़ने उतरने में कठिनाई आए या चलते समय घुटनों से आवाज आने लगे तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने से समस्या बढ़ सकती है और चलने फिरने में भी परेशानी होने लगती है।

    जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी है। ओमेगा थ्री फैटी एसिड से भरपूर अखरोट अलसी के बीज और फैटी फिश का सेवन लाभदायक माना जाता है। हरी पत्तेदार सब्जियां दूध दही और पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन लेने से हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत रहती हैं। विटामिन डी और कैल्शियम भी जोड़ों और हड्डियों की मजबूती के लिए आवश्यक पोषक तत्व हैं। ऑलिव ऑयल का सीमित उपयोग शरीर में सूजन कम करने में मदद कर सकता है।

    इसके साथ ही कुछ आदतों में बदलाव भी जरूरी है। तला भुना भोजन जंक फूड और अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थ शरीर में सूजन बढ़ा सकते हैं इसलिए इनका सेवन कम करना चाहिए। यदि वजन अधिक है तो उसे नियंत्रित करना जरूरी है क्योंकि अतिरिक्त वजन का सीधा दबाव घुटनों पर पड़ता है। रोजाना तेज चाल से चलना तैराकी साइकिल चलाना और योग जैसी लो इम्पैक्ट एक्सरसाइज जोड़ों को सक्रिय और मजबूत बनाए रखने में मदद करती हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि घुटनों की ग्रीस कम होने की समस्या का समय रहते पता चल जाए तो दवाओं फिजियोथेरेपी सही खानपान और नियमित व्यायाम की मदद से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए यदि लंबे समय से घुटनों में दर्द या अकड़न बनी हुई है तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर सही जांच और उपचार जरूर कराएं।

  • डायबिटीज चुपचाप छीन सकती है आंखों की रोशनी जानिए किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से मिलना है जरूरी

    डायबिटीज चुपचाप छीन सकती है आंखों की रोशनी जानिए किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से मिलना है जरूरी


    नई दिल्ली । डायबिटीज आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली गंभीर बीमारियों में शामिल है। अधिकांश लोग इसे केवल ब्लड शुगर बढ़ने तक सीमित मानते हैं लेकिन इसका असर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ता है। इनमें आंखें सबसे अधिक संवेदनशील होती हैं। लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर अनियंत्रित रहने पर आंखों की बेहद महीन रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं जिससे धीरे धीरे नजर कमजोर होने लगती है और समय पर इलाज न मिलने पर अंधेपन तक का खतरा पैदा हो सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार डायबिटीज के कारण होने वाली आंखों की बीमारी को डायबिटिक रेटिनोपैथी कहा जाता है। यह स्थिति तब विकसित होती है जब लगातार बढ़ा हुआ ब्लड शुगर रेटिना की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। शुरुआत में इस बीमारी के कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते इसलिए अधिकांश मरीज तब तक अनजान रहते हैं जब तक आंखों की रोशनी प्रभावित नहीं होने लगती। यही वजह है कि डायबिटीज के मरीजों के लिए नियमित आंखों की जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।

    यदि आपको धुंधला दिखाई देने लगा है आंखों के सामने काले धब्बे या फ्लोटर्स नजर आते हैं रात में देखने में परेशानी होती है या रंगों की पहचान करने में दिक्कत महसूस होती है तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण डायबिटिक रेटिनोपैथी या आंखों से जुड़ी किसी अन्य गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं। समय रहते नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराने पर इन समस्याओं का उपचार संभव है और आंखों की रोशनी को बचाया जा सकता है।

    डॉक्टरों का कहना है कि डायबिटीज केवल रेटिना तक ही सीमित नहीं रहती बल्कि इससे मोतियाबिंद और ग्लूकोमा जैसी आंखों की बीमारियों का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए केवल ब्लड शुगर की दवा लेना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी जरूरी है। ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना आंखों की रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव को कम करता है और जटिलताओं का जोखिम घटाता है।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि टाइप टू डायबिटीज से पीड़ित हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार आंखों की विस्तृत जांच जरूर करानी चाहिए। साथ ही नियमित रूप से HbA1c जांच कराकर ब्लड शुगर की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए। संतुलित आहार नियमित व्यायाम पर्याप्त नींद और तनाव से दूरी भी आंखों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    धूम्रपान करने वाले लोगों में डायबिटीज के कारण आंखों की जटिलताओं का खतरा और अधिक बढ़ जाता है इसलिए धूम्रपान छोड़ना भी बेहद जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं का नियमित सेवन करना और किसी भी तरह की दृष्टि संबंधी समस्या होने पर तुरंत जांच कराना भविष्य में गंभीर नुकसान से बचा सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डायबिटिक रेटिनोपैथी का समय रहते पता चल जाए और सही उपचार शुरू कर दिया जाए तो अधिकांश मामलों में आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखा जा सकता है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को अपनी आंखों की नियमित जांच को उतनी ही प्राथमिकता देनी चाहिए जितनी वे ब्लड शुगर की जांच को देते हैं।

  • Hair Fall Control Diet: बाल झड़ने से हैं परेशान तो डाइट में शामिल करें ये 7 सुपरफूड्स जड़ों से होंगे मजबूत

    Hair Fall Control Diet: बाल झड़ने से हैं परेशान तो डाइट में शामिल करें ये 7 सुपरफूड्स जड़ों से होंगे मजबूत


    नई दिल्ली । आज के समय में बाल झड़ने की समस्या केवल बढ़ती उम्र तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि युवा भी बड़ी संख्या में इससे परेशान हैं। बदलती जीवनशैली बढ़ता तनाव प्रदूषण अनियमित खानपान हार्मोनल बदलाव और शरीर में पोषक तत्वों की कमी बालों को कमजोर बनाकर उनके झड़ने का कारण बन रही है। ऐसे में अधिकांश लोग महंगे शैंपू सीरम और हेयर ट्रीटमेंट का सहारा लेते हैं लेकिन यदि शरीर को अंदर से पर्याप्त पोषण नहीं मिलेगा तो बाहरी उपाय भी लंबे समय तक असरदार साबित नहीं होते। स्वस्थ और मजबूत बालों के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बाल मुख्य रूप से प्रोटीन से बने होते हैं इसलिए शरीर में पर्याप्त प्रोटीन का होना जरूरी है। अंडा प्रोटीन और बायोटिन का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। नियमित रूप से अंडे का सेवन बालों की जड़ों को मजबूती देने और उनकी ग्रोथ को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। वहीं शाकाहारी लोगों के लिए दालें और बीन्स भी प्रोटीन आयरन और जिंक का अच्छा विकल्प हैं जो बालों को आवश्यक पोषण प्रदान करते हैं।

    हरी पत्तेदार सब्जियों में शामिल पालक भी बालों की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है। इसमें आयरन फोलेट विटामिन ए और विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। आयरन की कमी कई लोगों में हेयर फॉल की प्रमुख वजह होती है इसलिए नियमित रूप से पालक और अन्य हरी सब्जियों को भोजन में शामिल करना लाभदायक हो सकता है।

    मेवे और बीज भी बालों के लिए किसी सुपरफूड से कम नहीं हैं। बादाम अखरोट अलसी के बीज चिया सीड्स और कद्दू के बीज में ओमेगा थ्री फैटी एसिड विटामिन ई जिंक और सेलेनियम जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। ये स्कैल्प को स्वस्थ रखने के साथ बालों की जड़ों को मजबूत बनाने में भी मदद करते हैं। रोजाना सीमित मात्रा में इनका सेवन करने से बालों की गुणवत्ता में सुधार देखा जा सकता है।

    दही भी हेयर हेल्थ के लिए एक अच्छा विकल्प माना जाता है। इसमें प्रोटीन कैल्शियम और प्रोबायोटिक्स होते हैं जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाते हैं। जब शरीर पोषक तत्वों को सही तरीके से अवशोषित करता है तो उसका सकारात्मक असर बालों और त्वचा दोनों पर दिखाई देता है।

    इसके अलावा संतरा मौसंबी अमरूद और कीवी जैसे विटामिन सी से भरपूर फल शरीर में आयरन के अवशोषण को बढ़ाते हैं और कोलेजन बनाने में मदद करते हैं। कोलेजन बालों की मजबूती बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि आप मांसाहारी हैं तो सैल्मन सार्डिन जैसी फैटी मछलियों का सेवन भी लाभदायक हो सकता है क्योंकि इनमें प्रोटीन और ओमेगा थ्री फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो स्कैल्प को पोषण देकर बालों की गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद करता है।

    ध्यान रखें कि केवल अच्छी डाइट ही नहीं बल्कि पर्याप्त नींद नियमित व्यायाम तनाव से दूरी और पर्याप्त पानी पीना भी बालों की सेहत के लिए उतना ही जरूरी है। यदि लंबे समय तक अत्यधिक बाल झड़ रहे हों या अचानक हेयर फॉल बढ़ जाए तो किसी त्वचा रोग विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह जरूर लें ताकि सही कारण का पता लगाकर समय पर उपचार किया जा सके।

  • बारिश के मौसम में सर्दी जुकाम से कैसे बचें जानिए मजबूत इम्यूनिटी और स्वस्थ रहने के आसान उपाय

    बारिश के मौसम में सर्दी जुकाम से कैसे बचें जानिए मजबूत इम्यूनिटी और स्वस्थ रहने के आसान उपाय


    नई दिल्ली । बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है वहीं अपने साथ कई तरह की मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। इस मौसम में सर्दी जुकाम वायरल संक्रमण गले में खराश और बुखार जैसी समस्याएं तेजी से फैलती हैं। तापमान में अचानक बदलाव हवा में बढ़ी नमी और गंदे पानी के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ सकती है। ऐसे में यदि कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखा जाए तो मानसून का आनंद भी लिया जा सकता है और स्वास्थ्य भी बेहतर रखा जा सकता है।

    बरसात के दिनों में सबसे जरूरी है कि शरीर को भीगने से बचाया जाए। यदि किसी कारण बारिश में भीग जाएं तो घर पहुंचते ही सूखे कपड़े पहनें और शरीर को अच्छी तरह सुखाएं। लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहने से शरीर का तापमान कम हो जाता है जिससे सर्दी जुकाम का खतरा बढ़ जाता है।

    इस मौसम में गर्म और ताजा भोजन करना सबसे अच्छा माना जाता है। बासी या खुले में रखा भोजन खाने से बचें क्योंकि नमी के कारण भोजन जल्दी खराब हो सकता है। अपने भोजन में हरी सब्जियां मौसमी फल दाल और प्रोटीन से भरपूर चीजें शामिल करें ताकि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे।

    पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी बेहद जरूरी है। कई लोग बारिश के मौसम में प्यास कम लगने के कारण पानी कम पीते हैं लेकिन शरीर को हाइड्रेट रखना संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक है। हमेशा साफ और उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं।

    अदरक तुलसी काली मिर्च और हल्दी जैसे प्राकृतिक तत्वों का सेवन भी फायदेमंद माना जाता है। इनसे बनी गर्म चाय या काढ़ा गले को राहत देने और शरीर को गर्म रखने में मदद कर सकता है। हालांकि यदि किसी को पहले से कोई बीमारी है तो ऐसे घरेलू उपाय अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर होता है।

    भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए। बिना हाथ धोए आंख नाक या मुंह को छूने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना सर्दी जुकाम से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

    पर्याप्त नींद लेना और नियमित व्यायाम करना भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। रोजाना हल्की एक्सरसाइज योग या प्राणायाम करने से शरीर सक्रिय रहता है और संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।

    यदि लगातार तेज बुखार सांस लेने में तकलीफ तीन से चार दिन तक जुकाम बना रहे या शरीर में अत्यधिक कमजोरी महसूस हो तो घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर उपचार लेने से बीमारी गंभीर होने से बच सकती है।

    बरसात का मौसम आनंद और ताजगी का मौसम है लेकिन थोड़ी सी लापरवाही स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। संतुलित भोजन साफ सफाई पर्याप्त आराम और सही जीवनशैली अपनाकर आप इस मौसम में सर्दी जुकाम और वायरल संक्रमण से काफी हद तक बच सकते हैं और पूरे परिवार को स्वस्थ रख सकते हैं।

  • बारिश के मौसम में घूमने का बना रहे हैं प्लान तो भारत की इन खूबसूरत जगहों को करें एक्सप्लोर

    बारिश के मौसम में घूमने का बना रहे हैं प्लान तो भारत की इन खूबसूरत जगहों को करें एक्सप्लोर


    नई दिल्ली । बारिश का मौसम आते ही पहाड़ हरियाली की चादर ओढ़ लेते हैं झरने पूरे वेग से बहने लगते हैं और नदियों का सौंदर्य कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि मानसून को घूमने फिरने का सबसे खूबसूरत मौसम माना जाता है। अगर आप भी इस बारिश में परिवार दोस्तों या जीवनसाथी के साथ कहीं घूमने जाने का प्लान बना रहे हैं तो भारत में कई ऐसी शानदार जगहें हैं जहां प्राकृतिक सुंदरता आपका मन मोह लेगी।

    मध्य प्रदेश का पचमढ़ी मानसून के दौरान सबसे खूबसूरत दिखाई देता है। सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच बसा यह हिल स्टेशन हरियाली झरनों और बादलों से घिरा रहता है। बी फॉल्स अप्सरा विहार और धूपगढ़ का नजारा इस मौसम में बेहद आकर्षक होता है।

    अगर आप मध्य प्रदेश के बाहर जाना चाहते हैं तो राजस्थान का माउंट आबू भी शानदार विकल्प है। यहां की ठंडी हवा हरी पहाड़ियां और नक्की झील का मनमोहक दृश्य मानसून में और भी सुंदर हो जाता है।

    महाराष्ट्र का लोनावला और खंडाला बारिश के मौसम में पर्यटकों की पहली पसंद बन जाते हैं। बादलों से ढकी घाटियां ऊंचे झरने और हरियाली से भरे पहाड़ यहां आने वाले हर पर्यटक को यादगार अनुभव देते हैं। सप्ताहांत की छोटी यात्रा के लिए यह बेहतरीन स्थान माना जाता है।

    केरल का मुन्नार भी मानसून में किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता। चाय के बागान बादलों से ढकी पहाड़ियां और हल्की बारिश यहां के वातावरण को बेहद रोमांटिक बना देती है। प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह जगह खास मानी जाती है।

    हिमाचल प्रदेश का शिमला और उत्तराखंड का नैनीताल भी बारिश में अलग ही आकर्षण बिखेरते हैं। हालांकि इन इलाकों में यात्रा से पहले मौसम की जानकारी जरूर लेनी चाहिए क्योंकि लगातार बारिश के दौरान भूस्खलन जैसी स्थितियां भी बन सकती हैं।

    यदि आप झरनों का आनंद लेना चाहते हैं तो छत्तीसगढ़ का चित्रकोट जलप्रपात और मध्य प्रदेश का भेड़ाघाट भी मानसून में बेहद आकर्षक दिखाई देते हैं। पानी का बढ़ा हुआ बहाव इन जगहों की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देता है।

    बारिश के मौसम में यात्रा करते समय कुछ सावधानियां जरूर अपनाएं। मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही यात्रा की योजना बनाएं। रेनकोट छाता वाटरप्रूफ बैग और जरूरी दवाइयां साथ रखें। फिसलन वाली जगहों पर सावधानी से चलें और तेज बहाव वाले नदी नालों के पास जाने से बचें। स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें और किसी भी जोखिम वाली जगह पर सेल्फी लेने से बचें।

    मानसून प्रकृति को सबसे सुंदर रूप में देखने का मौसम है। यदि सही योजना और जरूरी सावधानियों के साथ यात्रा की जाए तो बारिश की हर बूंद आपकी यात्रा को यादगार बना सकती है। हरियाली झरनों और ठंडी हवाओं के बीच बिताया गया समय लंबे समय तक आपकी खूबसूरत यादों का हिस्सा बन जाएगा।

  • Beetroot For Skin: चुकंदर से पाएं गुलाबी निखार, जानें त्वचा की देखभाल के आसान और असरदार तरीके

    Beetroot For Skin: चुकंदर से पाएं गुलाबी निखार, जानें त्वचा की देखभाल के आसान और असरदार तरीके

    नई दिल्ली । अगर आप बिना महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स के अपनी त्वचा को प्राकृतिक निखार देना चाहते हैं तो चुकंदर आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। विटामिन सी फोलेट आयरन पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर चुकंदर शरीर के साथ साथ त्वचा के लिए भी बेहद लाभकारी माना जाता है। नियमित रूप से इसका सेवन और सही तरीके से त्वचा पर उपयोग करने से चेहरे की चमक बढ़ सकती है और त्वचा लंबे समय तक स्वस्थ बनी रह सकती है।

    चुकंदर में मौजूद विटामिन सी त्वचा में कोलेजन बनने में मदद करता है जिससे त्वचा की कसावट बनी रहती है और समय से पहले झुर्रियां आने का खतरा कम हो सकता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट्स फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद करते हैं जिससे त्वचा अधिक स्वस्थ और चमकदार दिखाई देती है।

    यदि त्वचा बेजान और रूखी हो गई है तो चुकंदर का रस उपयोगी हो सकता है। चुकंदर के ताजे रस में थोड़ा शहद मिलाकर चेहरे पर 15 से 20 मिनट तक लगाएं और फिर साफ पानी से धो लें। इससे त्वचा को नमी मिल सकती है और चेहरा ताजा महसूस होता है।

    दाग धब्बों और टैनिंग को कम करने के लिए चुकंदर के रस में दही या एलोवेरा जेल मिलाकर फेस पैक तैयार किया जा सकता है। इसे सप्ताह में एक या दो बार लगाने से त्वचा की रंगत में सुधार आने में मदद मिल सकती है। हालांकि इसका असर हर व्यक्ति की त्वचा के अनुसार अलग हो सकता है।

    फटे और रूखे होंठों के लिए भी चुकंदर एक लोकप्रिय घरेलू उपाय माना जाता है। रात में चुकंदर का थोड़ा सा रस होंठों पर लगाने से होंठ मुलायम दिखाई दे सकते हैं और उनमें हल्का प्राकृतिक गुलाबीपन भी आ सकता है।

    त्वचा की खूबसूरती केवल बाहरी देखभाल से नहीं बल्कि अंदरूनी पोषण से भी जुड़ी होती है। चुकंदर का जूस या सलाद नियमित रूप से संतुलित मात्रा में लेने से शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं जिससे त्वचा की प्राकृतिक चमक बनाए रखने में मदद मिल सकती है। पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना और अच्छी नींद लेना भी उतना ही जरूरी है।

    ध्यान रखें कि किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले त्वचा के एक छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट जरूर करें। यदि जलन खुजली या एलर्जी जैसी समस्या महसूस हो तो उसका उपयोग बंद कर दें। किसी गंभीर त्वचा समस्या में त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प होता है।

    सही खानपान नियमित देखभाल और चुकंदर जैसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को दिनचर्या में शामिल करके आप त्वचा को स्वस्थ चमकदार और तरोताजा बनाए रखने की दिशा में अच्छा कदम उठा सकते हैं।

  • मानसून हेल्थ गाइड बरसात में संक्रमण और वायरल बीमारियों से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां

    मानसून हेल्थ गाइड बरसात में संक्रमण और वायरल बीमारियों से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली । बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है लेकिन अपने साथ कई तरह की बीमारियों का खतरा भी लेकर आता है। इस दौरान हवा में नमी बढ़ने गंदा पानी जमा होने और मच्छरों के तेजी से पनपने के कारण डेंगू मलेरिया चिकनगुनिया टाइफाइड वायरल बुखार और पेट से जुड़ी बीमारियों के मामले बढ़ने लगते हैं। ऐसे में थोड़ी सी सावधानी आपकी और पूरे परिवार की सेहत को सुरक्षित रखने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार मानसून में सबसे पहले साफ और सुरक्षित पानी पीने पर ध्यान देना चाहिए। हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं क्योंकि दूषित पानी से टाइफाइड हेपेटाइटिस ए और डायरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बाहर खुले में मिलने वाले पेय पदार्थों और बर्फ का सेवन करने से भी बचना चाहिए।

    बारिश के मौसम में ताजा और गर्म भोजन खाना सबसे सुरक्षित माना जाता है। लंबे समय तक रखा हुआ भोजन या खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ संक्रमण का कारण बन सकते हैं। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें तथा भोजन बनाने और खाने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह साफ करें।

    मच्छरों से बचाव भी मानसून में बेहद जरूरी है। घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें क्योंकि यही डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों का सबसे बड़ा प्रजनन स्थल होता है। रात में मच्छरदानी का उपयोग करें और जरूरत पड़ने पर मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना भी फायदेमंद रहता है।

    बारिश में भीगने के बाद देर तक गीले कपड़े पहनकर नहीं रहना चाहिए। घर पहुंचते ही सूखे कपड़े पहनें और शरीर को अच्छी तरह पोंछ लें। लंबे समय तक नमी रहने से सर्दी जुकाम फंगल संक्रमण और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पैरों को भी साफ और सूखा रखना जरूरी है क्योंकि गीले जूते और मोजे संक्रमण का कारण बन सकते हैं।

    रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखने के लिए संतुलित आहार लेना जरूरी है। मौसमी फल हरी सब्जियां दालें और विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और नियमित व्यायाम या योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। पर्याप्त नींद भी शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देती है।

    यदि तेज बुखार लगातार सिरदर्द शरीर में दर्द उल्टी दस्त या त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दें तो इन्हें नजरअंदाज न करें। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने से बचें और समय रहते चिकित्सकीय जांच कराएं। डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों में शुरुआती इलाज गंभीर स्थिति से बचा सकता है।

    बरसात का मौसम आनंद और राहत लेकर आता है लेकिन थोड़ी सी लापरवाही स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। स्वच्छता संतुलित खानपान और समय पर सावधानी अपनाकर आप मानसून का भरपूर आनंद ले सकते हैं और खुद को कई मौसमी बीमारियों से सुरक्षित रख सकते हैं।