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  • बार-बार चिड़चिड़ापन और गुस्सा आता है तो सिर्फ मूड खराब होना नहीं, थायरॉइड और ब्लड शुगर भी हो सकते हैं कारण

    बार-बार चिड़चिड़ापन और गुस्सा आता है तो सिर्फ मूड खराब होना नहीं, थायरॉइड और ब्लड शुगर भी हो सकते हैं कारण

    नई दिल्ली: किसी बात पर नाराजगी या परिस्थितियां उम्मीद के मुताबिक न होने पर गुस्सा और चिड़चिड़ापन होना स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। आम तौर पर ऐसी भावनाएं कुछ समय बाद खुद शांत हो जाती हैं और व्यक्ति सामान्य महसूस करने लगता है। लेकिन अगर बिना किसी स्पष्ट वजह के छोटी-छोटी बातों पर बार-बार गुस्सा आता है या चिड़चिड़ापन लगातार बना रहता है, तो इसके पीछे के कारणों को समझना जरूरी हो जाता है। हर बार इसका संबंध केवल खराब मूड या मानसिक तनाव से नहीं होता, शरीर में होने वाली कुछ गड़बड़ियां भी मूड और व्यवहार में बदलाव ला सकती हैं।

    तनाव और चिंता के अलावा नींद की कमी, ब्लड शुगर का ठीक से नियंत्रित न रहना, थायरॉइड की समस्या और पोषक तत्वों की कमी भी लगातार चिड़चिड़ापन पैदा कर सकती है। पर्याप्त नींद न मिलने से केवल थकान ही नहीं होती, बल्कि ध्यान, याददाश्त और भावनाओं पर नियंत्रण भी प्रभावित हो सकता है। लगातार कम या खराब नींद व्यक्ति को अधिक चिड़चिड़ा और तनावग्रस्त महसूस करा सकती है। देर रात तक मोबाइल देखना, सोने का समय लगातार बदलना और अधिक कैफीन वाली चीजों का सेवन नींद की गुणवत्ता बिगाड़ सकता है, जिससे तनाव, चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ सकता है।

    थायरॉइड की समस्या भी लगातार चिड़चिड़ापन बने रहने का एक कारण हो सकती है। थायरॉइड हार्मोन शरीर में ऊर्जा के इस्तेमाल को नियंत्रित करते हैं। जब थायरॉइड हार्मोन का स्तर अधिक हो जाता है और हाइपरथायरायडिज्म की स्थिति बनती है, तो कई लोगों में बेचैनी, घबराहट, नींद की परेशानी और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं। इसके साथ धड़कनों का तेज होना, वजन कम होना और ज्यादा पसीना आने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच और इलाज जरूरी हो जाता है।

    ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव भी मूड और व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। ब्लड शुगर कम होने पर कमजोरी, कंपकंपी, पसीना आने के साथ घबराहट और चिड़चिड़ापन हो सकता है। डायबिटीज की दवा या इंसुलिन लेने वाले लोगों में ऐसी समस्या अधिक देखी जा सकती है। यदि चिड़चिड़ापन खास समय पर बार-बार होता है और उसके साथ इस तरह के लक्षण भी दिखाई देते हैं, तो ब्लड शुगर की जांच कराना जरूरी हो सकता है। इसके अलावा पोषक तत्वों की कमी भी भावनात्मक समस्याओं को बढ़ा सकती है।

    आयरन, विटामिन बी12 और फोलेट की कमी से थकान, कमजोरी और ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है, जिसका असर मूड पर भी पड़ सकता है। लगातार चिड़चिड़ापन व्यक्ति के सामाजिक संबंधों और रोजमर्रा के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। इसलिए यदि यह समस्या बार-बार हो रही है या लंबे समय तक बनी रहती है, तो केवल इसे स्वभाव या खराब मूड मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नींद, तनाव, ब्लड शुगर, थायरॉइड और पोषण से जुड़े संभावित कारणों को समझना जरूरी है, ताकि आवश्यकता होने पर सही जांच और उपचार कराया जा सके।

  • तेजी से झड़ रहे हैं बाल तो कैल्शियम की कमी भी हो सकती है वजह, जानिए किन संकेतों पर जांच जरूरी

    तेजी से झड़ रहे हैं बाल तो कैल्शियम की कमी भी हो सकती है वजह, जानिए किन संकेतों पर जांच जरूरी

    नई दिल्ली: बाल झड़ने की समस्या आम होती जा रही है और कम उम्र में भी कई लोग बालों के पतले होने या गंजेपन की परेशानी का सामना कर रहे हैं। लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी के अलावा बढ़ते प्रदूषण को भी बालों की सेहत प्रभावित करने वाले कारणों में शामिल किया जाता है। बाल झड़ने की शुरुआत होते ही लोग अक्सर अलग-अलग शैंपू, तेल और हेयर केयर उत्पादों का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं, लेकिन बार-बार उत्पाद बदलना भी समस्या बढ़ा सकता है। कई बार बालों की दिक्कत के पीछे शरीर के अंदर चल रही स्वास्थ्य संबंधी गड़बड़ियां भी जिम्मेदार होती हैं।

    बालों के झड़ने की वजह हर व्यक्ति में एक जैसी नहीं होती। पोषक तत्वों की कमी, लगातार तनाव, नींद की कमी, थायरॉइड की समस्या और आनुवंशिक कारण बालों की ग्रोथ पर असर डाल सकते हैं। आयरन, प्रोटीन, जिंक और बायोटिन की कमी भी बालों के झड़ने को बढ़ावा दे सकती है। ऐसे में कम उम्र में अचानक या लगातार बाल झड़ने लगें तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय इसकी असली वजह समझना जरूरी है। बिना जांच किसी पोषक तत्व की कमी मानकर सप्लीमेंट लेना सही तरीका नहीं माना जाता।

    कैल्शियम को आम तौर पर हड्डियों की सेहत से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसकी कमी बालों की सेहत को भी प्रभावित कर सकती है। गंभीर या लंबे समय तक रहने वाली कैल्शियम की कमी यानी हाइपोकैल्सीमिया के कारण बालों में बदलाव अधिक देखे जा सकते हैं। कैल्शियम की कमी से बालों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं और केराटिन के उत्पादन पर असर पड़ सकता है, जिससे बाल रूखे और कमजोर होने के साथ पतले या टूटने वाले हो सकते हैं। इसके अलावा कैल्शियम की कमी के साथ नाखून भी कमजोर होने लग सकते हैं। हालांकि, केवल कैल्शियम की कमी से बाल झड़ने की समस्या होना बहुत आम नहीं माना जाता।

    पोषक तत्वों की कमी के मामले में विशेषज्ञों के अनुसार आयरन, प्रोटीन, जिंक और बायोटिन जैसे तत्वों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को इनके सप्लीमेंट लेने की जरूरत है। जरूरत से ज्यादा सप्लीमेंट लेना भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए यदि शरीर में किसी विटामिन या पोषक तत्व की कमी की आशंका हो तो डॉक्टर की सलाह पर ही दवा या सप्लीमेंट लेना चाहिए। बालों की समस्या का कारण पता किए बिना केवल किसी एक पोषक तत्व को जिम्मेदार मानकर उपचार शुरू करना उचित नहीं है।

    रोज कुछ बाल गिरना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है और आम तौर पर रोज 30 से 50 बाल गिर सकते हैं। चिंता तब होती है जब बाल लगातार अधिक मात्रा में गिरने लगें, हेयरलाइन पीछे जाने लगे या बालों की घनत्व कम होने लगे। किसी बीमारी या तनाव के बाद होने वाला अत्यधिक हेयर शेडिंग कई बार कुछ महीनों बाद शुरू हो सकता है और कारण खत्म होने के बाद धीरे-धीरे सुधार भी हो सकता है। यदि बाल अचानक गुच्छों में गिर रहे हों, गोल-गोल पैच बन रहे हों या सिर की त्वचा पर लालिमा और सूजन दिखाई दे रही हो, तो सही कारण का पता लगाने के लिए समय रहते जांच और इलाज जरूरी है।

  • स्किन केयर के लिए महंगे प्रोडक्ट नहीं ये आसान आदतें अपनाएं त्वचा लंबे समय तक रहेगी साफ निखरी और स्वस्थ

    स्किन केयर के लिए महंगे प्रोडक्ट नहीं ये आसान आदतें अपनाएं त्वचा लंबे समय तक रहेगी साफ निखरी और स्वस्थ


    नई दिल्ली। आज के समय में हर कोई साफ निखरी और स्वस्थ त्वचा चाहता है लेकिन इसके लिए केवल महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट का इस्तेमाल करना ही जरूरी नहीं है। त्वचा की सही देखभाल के लिए रोजमर्रा की कुछ आसान आदतों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना ज्यादा जरूरी है। धूल मिट्टी प्रदूषण धूप तनाव नींद की कमी और खानपान का सीधा असर हमारी त्वचा पर दिखाई दे सकता है। ऐसे में अगर स्किन केयर रूटीन को सही तरीके से अपनाया जाए तो त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

    स्किन केयर की शुरुआत चेहरे की सफाई से करनी चाहिए। दिनभर बाहर रहने के दौरान त्वचा पर धूल पसीना और गंदगी जमा हो जाती है। इसलिए त्वचा के प्रकार के अनुसार किसी हल्के क्लींजर से चेहरा साफ करना उपयोगी हो सकता है। हालांकि बहुत ज्यादा बार चेहरा धोने से त्वचा की प्राकृतिक नमी कम हो सकती है इसलिए जरूरत से ज्यादा सफाई करने से बचना चाहिए। चेहरे को साफ करने के बाद त्वचा को मॉइस्चराइज करना भी जरूरी है। तैलीय त्वचा वाले लोगों को हल्का और नॉन कॉमेडोजेनिक मॉइस्चराइजर पसंद आ सकता है जबकि रूखी त्वचा के लिए थोड़ा ज्यादा हाइड्रेटिंग मॉइस्चराइजर उपयोगी हो सकता है।

    धूप से त्वचा की सुरक्षा भी स्किन केयर का अहम हिस्सा है। लंबे समय तक तेज धूप में रहने से त्वचा पर टैनिंग और समय से पहले उम्र बढ़ने के संकेत दिखाई दे सकते हैं। इसलिए बाहर निकलते समय ब्रॉड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए और जरूरत के अनुसार इसे दोबारा लगाया जा सकता है। इसके साथ छाता टोपी और धूप से बचाने वाले कपड़ों का इस्तेमाल भी मददगार हो सकता है।

    त्वचा की खूबसूरती केवल बाहर से की जाने वाली देखभाल पर निर्भर नहीं करती। पर्याप्त पानी पीना संतुलित भोजन लेना और अच्छी नींद लेना भी जरूरी है। भोजन में फल सब्जियां दालें साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करने से शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। बहुत ज्यादा तला भुना और अत्यधिक मीठा भोजन नियमित रूप से लेने की आदत को कम करना बेहतर हो सकता है।

    इसके अलावा चेहरे को बार बार छूने और बिना जरूरत पिंपल दबाने से बचना चाहिए। मेकअप इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए रात में सोने से पहले मेकअप अच्छी तरह साफ करना जरूरी है। तकिए के कवर तौलिया और मेकअप ब्रश जैसी चीजों की नियमित सफाई भी स्वच्छता बनाए रखने में मदद करती है।

    अगर त्वचा पर लगातार मुंहासे खुजली लालिमा जलन दाग या किसी तरह का असामान्य बदलाव दिखाई दे रहा है तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। सही स्किन केयर का मतलब बहुत सारे प्रोडक्ट इस्तेमाल करना नहीं बल्कि अपनी त्वचा की जरूरत समझकर नियमित और संतुलित देखभाल करना है। छोटी छोटी अच्छी आदतें लंबे समय में त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती हैं।

  • नाक बंद गले में खराश और लगातार छींक से हैं परेशान तो जानिए सर्दी जुकाम में राहत पाने के असरदार उपाय

    नाक बंद गले में खराश और लगातार छींक से हैं परेशान तो जानिए सर्दी जुकाम में राहत पाने के असरदार उपाय


    नई दिल्ली। बदलते मौसम में सर्दी जुकाम की समस्या आम हो जाती है। मौसम में बदलाव तापमान का उतार चढ़ाव धूल धुआं और वायरल संक्रमण जैसी वजहों से नाक बहना छींक आना गले में खराश खांसी और हल्का बुखार जैसी परेशानियां हो सकती हैं। सामान्य सर्दी जुकाम अक्सर कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है लेकिन इस दौरान सही देखभाल करने से असहजता और लक्षणों से राहत मिल सकती है। इसके लिए सबसे पहले शरीर को पर्याप्त आराम और पानी देना जरूरी है।

    सर्दी जुकाम के दौरान पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना फायदेमंद हो सकता है। पानी गुनगुने तरल पदार्थ और सूप जैसे विकल्प शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते और गले को आराम पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। बहुत गर्म पेय लेने से बचना चाहिए क्योंकि इससे मुंह या गले में जलन हो सकती है। गले में खराश होने पर गुनगुने नमक वाले पानी से गरारे भी किए जा सकते हैं। छोटे बच्चों को गरारे कराते समय विशेष सावधानी जरूरी है।

    नाक बंद होने की समस्या में कमरे की हवा में पर्याप्त नमी बनाए रखना मददगार हो सकता है। गर्म पानी से भाप लेने की सलाह आमतौर पर दी जाती है लेकिन बहुत गर्म भाप से त्वचा या सांस की नली जलने का खतरा रहता है। खासकर बच्चों को सीधे गर्म पानी की भाप देने से बचना चाहिए। आरामदायक तापमान पर नम हवा या सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल किया गया ह्यूमिडिफायर बेहतर विकल्प हो सकता है।

    सर्दी जुकाम में नींद और आराम को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शरीर संक्रमण से लड़ने के दौरान अधिक आराम चाहता है इसलिए पर्याप्त नींद लेना जरूरी है। साथ ही हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकना और इस्तेमाल किए गए टिश्यू को तुरंत फेंकना संक्रमण फैलने की संभावना कम करने में मदद कर सकता है। घर में किसी अन्य व्यक्ति को संक्रमण होने से बचाने के लिए व्यक्तिगत सामान साझा करने से भी बचना बेहतर है।

    दवाओं के मामले में खुद से एंटीबायोटिक लेना उचित नहीं है। सामान्य सर्दी जुकाम अक्सर वायरस के कारण होता है और एंटीबायोटिक वायरल संक्रमण पर काम नहीं करते। बुखार या दर्द जैसी परेशानी होने पर दवा लेने से पहले उम्र स्वास्थ्य स्थिति और पहले से चल रही दवाओं को ध्यान में रखना जरूरी है। बच्चों के लिए किसी भी दवा की खुराक डॉक्टर या फार्मासिस्ट की सलाह के अनुसार ही होनी चाहिए।

    अगर सर्दी जुकाम के लक्षण लगातार बढ़ रहे हों तेज या लंबे समय तक बुखार बना रहे सांस लेने में परेशानी हो सीने में दर्द हो अत्यधिक कमजोरी महसूस हो या लक्षण कुछ समय बाद भी बेहतर न हों तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। छोटे बच्चों बुजुर्गों और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में लक्षणों को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है। सही आराम पर्याप्त तरल पदार्थ और साफ सफाई की आदतें सामान्य सर्दी जुकाम के दौरान राहत पाने और संक्रमण फैलने से रोकने में मदद कर सकती हैं।

  • नींद में भी एक्टिव रहता है दिमाग, शरीर की मरम्मत से लेकर याददाश्त और हार्मोन तक होते हैं कई जरूरी काम

    नींद में भी एक्टिव रहता है दिमाग, शरीर की मरम्मत से लेकर याददाश्त और हार्मोन तक होते हैं कई जरूरी काम


    नई दिल्ली: सोने का मतलब केवल शरीर को आराम देना नहीं है। जब हम नींद में होते हैं, तब भी शरीर के भीतर कई जरूरी प्रक्रियाएं लगातार चलती रहती हैं। दिमाग दिनभर मिली जानकारी को व्यवस्थित करने और याददाश्त से जुड़े काम करता रहता है, जबकि शरीर की कोशिकाएं खुद को दुरुस्त करने में जुटी रहती हैं। हार्मोन और इम्यून सिस्टम से जुड़ी गतिविधियां भी इस दौरान जारी रहती हैं। यही वजह है कि पर्याप्त और अच्छी नींद को शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए जरूरी माना जाता है। रात में शरीर अलग-अलग नींद के चरणों से गुजरता है और हर चरण का अपना महत्व होता है। कभी दिमाग दिनभर की जानकारी को व्यवस्थित करता है, तो कभी शरीर की मरम्मत और ऊर्जा बहाली से जुड़े काम तेज होते हैं।

    वयस्कों के लिए रात में 7 से 9 घंटे की नींद जरूरी मानी जाती है। गहरी नींद के दौरान दिमाग, हार्मोन, इम्यून सिस्टम और शरीर के कई दूसरे हिस्से अपना काम जारी रखते हैं। रात में नींद नॉन-आरईएम और आरईएम चरणों से होकर गुजरती है। ये चरण रात में कई बार आते हैं और आम तौर पर एक नींद चक्र करीब 80 से 100 मिनट का होता है। नॉन-आरईएम नींद के तीसरे चरण को गहरी नींद कहा जाता है। इस दौरान शरीर की धड़कन और सांस की गति धीमी हो जाती है और शरीर मरम्मत तथा ऊर्जा बहाली से जुड़े काम करता है। वहीं आरईएम नींद के दौरान दिमाग काफी सक्रिय रहता है और सपने अधिक स्पष्ट हो सकते हैं।

    नींद के दौरान दिमाग का काम केवल सपने देखने तक सीमित नहीं रहता। यह दिनभर हासिल की गई जानकारियों को व्यवस्थित करने और याददाश्त बनाने की प्रक्रिया में भी शामिल रहता है। नींद की कमी या खराब नींद का असर ध्यान केंद्रित करने, नई जानकारी समझने और चीजों को याद रखने की क्षमता पर पड़ सकता है। आरईएम और नॉन-आरईएम नींद के अलग-अलग चरण सीखने और याददाश्त से जुड़े विभिन्न कामों में भूमिका निभाते हैं। इस दौरान शरीर भी अपने स्तर पर जरूरी बदलावों से गुजरता रहता है, इसलिए पूरी और अच्छी नींद अगले दिन शरीर और दिमाग को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    गहरी नींद में शरीर के ऊतकों की वृद्धि और मरम्मत से जुड़े काम होते हैं। इसी दौरान कुछ हार्मोन भी रिलीज होते हैं। ग्रोथ हार्मोन शरीर के विकास के साथ मांसपेशियों और ऊतकों की मरम्मत में भूमिका निभाता है। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने ग्लिम्फैटिक सिस्टम नाम की एक व्यवस्था का भी अध्ययन किया है, जो दिमाग से कुछ मेटाबॉलिज्म संबंधी अपशिष्ट पदार्थों को हटाने का काम करती है। इस तरह रात की नींद को केवल आराम का समय समझना सही नहीं है। नींद के दौरान शरीर में मरम्मत, याददाश्त, हार्मोन और दिमागी गतिविधियों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं चलती रहती हैं। यही कारण है कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त और अच्छी नींद को जरूरी माना जाता है।

  • सेहतमंद जिंदगी के लिए जरूरी आदतें, दिनचर्या में शामिल करें ये आसान तरीके

    सेहतमंद जिंदगी के लिए जरूरी आदतें, दिनचर्या में शामिल करें ये आसान तरीके


    नई दिल्ली। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में अपनी सेहत का ध्यान रखना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। काम का दबाव अनियमित खानपान कम नींद और शारीरिक गतिविधियों की कमी धीरे धीरे शरीर पर असर डाल सकती है। ऐसे में Health Care को केवल बीमारी होने के बाद इलाज तक सीमित रखने के बजाय रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना जरूरी है। अच्छी सेहत के लिए सबसे पहले संतुलित खानपान पर ध्यान देना चाहिए। भोजन में हरी सब्जियां मौसमी फल दालें साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन अत्यधिक मीठा और जरूरत से ज्यादा नमक लेने से बचना भी जरूरी है।

    शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त पानी पीना भी महत्वपूर्ण है। पानी की जरूरत उम्र मौसम शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग अलग हो सकती है। इसलिए पूरे दिन शरीर में पानी की कमी न होने दें। इसके साथ ही रोजाना कुछ समय शारीरिक गतिविधि के लिए निकालना चाहिए। तेज चलना योग हल्की एक्सरसाइज साइकिलिंग या अपनी क्षमता के अनुसार कोई अन्य गतिविधि शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है। लंबे समय तक लगातार बैठकर काम करने वालों को बीच बीच में उठकर चलना भी चाहिए।

    अच्छी सेहत के लिए नींद को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पर्याप्त और नियमित नींद शरीर तथा दिमाग दोनों के लिए जरूरी है। सोने और जागने का समय लगभग निश्चित रखने की कोशिश करें। रात में सोने से पहले मोबाइल या अन्य स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल कम करना भी नींद की गुणवत्ता के लिए मददगार हो सकता है।

    मानसिक स्वास्थ्य भी Health Care का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लगातार तनाव महसूस होने पर अपनी दिनचर्या में आराम मनोरंजन परिवार के साथ समय और पसंदीदा गतिविधियों के लिए जगह बनाएं। जरूरत महसूस होने पर किसी भरोसेमंद व्यक्ति या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना उचित कदम हो सकता है।

    इसके अलावा समय समय पर स्वास्थ्य जांच कराना भी उपयोगी है। खासकर यदि किसी व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी है या परिवार में किसी बीमारी का इतिहास रहा है तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच करानी चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो खुद से दवा लेने के बजाय योग्य चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है।

    कुल मिलाकर अच्छी सेहत किसी एक दिन की कोशिश से नहीं बल्कि रोजाना अपनाई गई छोटी छोटी आदतों से बनती है। संतुलित भोजन पर्याप्त नींद नियमित शारीरिक गतिविधि तनाव को नियंत्रित रखने की कोशिश और समय पर स्वास्थ्य सलाह लेने जैसी आदतें स्वस्थ जीवनशैली का आधार बन सकती हैं।

  • पचमढ़ी घूमने का बना रहे हैं प्लान तो ये जगहें जरूर देखें झरनों पहाड़ों और मंदिरों के बीच यादगार होगा सफर

    पचमढ़ी घूमने का बना रहे हैं प्लान तो ये जगहें जरूर देखें झरनों पहाड़ों और मंदिरों के बीच यादगार होगा सफर


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में अगर आप ऐसी जगह घूमने का प्लान बना रहे हैं जहां पहाड़ों की खूबसूरती के साथ हरियाली झरने और शांत वातावरण का आनंद लिया जा सके तो पचमढ़ी आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है। सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच बसा पचमढ़ी प्रदेश का प्रसिद्ध हिल स्टेशन है। यहां का प्राकृतिक वातावरण शहर की भागदौड़ से दूर कुछ समय सुकून के साथ बिताने का मौका देता है। परिवार दोस्तों या पार्टनर के साथ घूमने के लिए भी पचमढ़ी की यात्रा यादगार हो सकती है।

    पचमढ़ी की सबसे खास बात यहां का प्राकृतिक सौंदर्य है। चारों तरफ फैली हरियाली ऊंची पहाड़ियां और जंगल इस जगह को अलग पहचान देते हैं। बारिश के मौसम में यहां का नजारा और भी आकर्षक हो जाता है। पहाड़ियों से गिरते झरने और बादलों से ढके रास्ते पर्यटकों को अपनी ओर खींचते हैं। सर्दियों में मौसम सुहावना रहता है और सुबह तथा शाम के समय हल्की ठंड के बीच घूमने का अलग आनंद मिलता है।

    पचमढ़ी में घूमने के लिए कई प्रसिद्ध स्थान हैं। बी फॉल यहां के लोकप्रिय झरनों में शामिल है जहां ऊंचाई से गिरता पानी और आसपास का हराभरा वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करता है। झरने तक पहुंचने का रास्ता भी यात्रा को रोमांचक बनाता है। इसके अलावा अप्सरा विहार भी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यहां पानी और चट्टानों के बीच कुछ समय बिताकर प्रकृति को करीब से महसूस किया जा सकता है।

    धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखने वाले स्थानों में पांडव गुफाएं भी पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। इन गुफाओं से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं इन्हें खास बनाती हैं। यहां आने वाले लोग प्राकृतिक वातावरण के साथ इस स्थान से जुड़ी धार्मिक परंपराओं को भी करीब से देखते हैं। चौरागढ़ और जटाशंकर जैसे स्थान भी पचमढ़ी यात्रा को खास बना सकते हैं। जटाशंकर मंदिर प्राकृतिक चट्टानों के बीच स्थित है और भगवान शिव से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

    अगर आपको सूर्योदय और सूर्यास्त के खूबसूरत नजारे पसंद हैं तो पचमढ़ी में सनसेट प्वाइंट और अन्य ऊंचे स्थानों का रुख किया जा सकता है। ऊंचाई से आसपास की पहाड़ियों और जंगलों का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है। शाम के समय आसमान के बदलते रंगों के बीच पहाड़ियों का नजारा पर्यटकों को काफी पसंद आता है।

    पचमढ़ी जाने से पहले मौसम की जानकारी लेना जरूरी है। मानसून के दौरान बारिश के कारण कुछ रास्तों और प्राकृतिक स्थानों पर सावधानी की जरूरत पड़ सकती है। आरामदायक जूते पहनना और जरूरी सामान साथ रखना बेहतर रहता है। झरनों या पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा नियमों का पालन करना भी जरूरी है। प्रकृति के बीच घूमते समय प्लास्टिक या कचरा फैलाने से बचना चाहिए ताकि इस खूबसूरत पर्यटन स्थल की प्राकृतिक सुंदरता बनी रहे।

    रुकने के लिए पचमढ़ी में अलग अलग बजट के अनुसार होटल और अन्य ठहरने के विकल्प मिल जाते हैं। स्थानीय भोजन का स्वाद लेने के साथ आसपास के बाजारों में खरीदारी भी की जा सकती है। यहां की यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए कम से कम दो दिन का समय रखा जा सकता है ताकि प्रमुख पर्यटन स्थलों को जल्दबाजी के बिना देखा जा सके।

    कुल मिलाकर पचमढ़ी उन लोगों के लिए खास जगह है जो पहाड़ों और प्रकृति के बीच कुछ समय बिताना चाहते हैं। यहां झरनों की आवाज हरियाली से घिरी पहाड़ियां धार्मिक स्थल और शांत वातावरण एक साथ देखने को मिलता है। यही वजह है कि पचमढ़ी मध्यप्रदेश में घूमने के लिए लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान रखता है।

  • चेहरे की खूबसूरती के लिए अलसी का नुस्खा, घर पर बनाएं जेल और फेस पैक, जानें आसान तरीका

    चेहरे की खूबसूरती के लिए अलसी का नुस्खा, घर पर बनाएं जेल और फेस पैक, जानें आसान तरीका


    नई दिल्ली। अलसी को आमतौर पर सेहत के लिए फायदेमंद बीज माना जाता है लेकिन इसका इस्तेमाल त्वचा की देखभाल के लिए भी किया जाता है। अलसी में ओमेगा 3 फैटी एसिड और कई पोषक तत्व पाए जाते हैं जो त्वचा को नमी देने और उसे मुलायम बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। बदलते मौसम में जब त्वचा रूखी और बेजान नजर आने लगती है तब अलसी से तैयार घरेलू स्किन केयर उपाय को आजमाया जा सकता है। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू नुस्खे को चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है।

    अलसी से स्किन केयर करने का सबसे आसान तरीका इसका जेल तैयार करना है। इसके लिए एक से दो चम्मच अलसी के बीज लें और इन्हें एक कप पानी में डालकर धीमी आंच पर कुछ मिनट तक उबालें। जब पानी थोड़ा गाढ़ा होकर जेल जैसा दिखाई देने लगे तो गैस बंद कर दें। मिश्रण को ठंडा होने के बाद छान लें। तैयार अलसी जेल को साफ चेहरे पर हल्की परत के रूप में लगाया जा सकता है। इसे कुछ समय के लिए त्वचा पर रहने दें और फिर सामान्य पानी से चेहरा धो लें।

    अलसी जेल त्वचा को नमी देने में मदद कर सकता है और ड्राई स्किन वाले लोगों के लिए यह घरेलू विकल्प उपयोगी हो सकता है। यदि त्वचा बहुत ज्यादा रूखी है तो अलसी जेल में थोड़ी मात्रा में एलोवेरा जेल मिलाकर भी लगाया जा सकता है। एलोवेरा त्वचा को ठंडक देने के लिए जाना जाता है और दोनों का मिश्रण त्वचा को हाइड्रेटेड महसूस कराने में मदद कर सकता है। हालांकि संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को किसी भी नए मिश्रण का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए।

    अलसी से फेस पैक बनाने के लिए अलसी के बीजों को हल्का पीसकर पाउडर तैयार किया जा सकता है। इसमें दही या एलोवेरा जेल की थोड़ी मात्रा मिलाकर पेस्ट बनाया जा सकता है। इस मिश्रण को चेहरे पर लगाकर कुछ देर के लिए छोड़ें और सूखने के बाद बिना ज्यादा रगड़े पानी से साफ कर लें। फेस पैक हटाते समय त्वचा को जोर से स्क्रब करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे जलन या लालिमा हो सकती है।

    अलसी का इस्तेमाल स्किन केयर में करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है। सबसे पहले तैयार जेल या फेस पैक को लगाने से पहले हाथ या कान के पीछे थोड़ी मात्रा लगाकर पैच टेस्ट करें। यदि खुजली जलन लालिमा या किसी तरह की एलर्जी दिखाई दे तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें। चेहरे पर खुले घाव या गंभीर त्वचा समस्या होने पर घरेलू नुस्खे आजमाने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

    इसके साथ ही केवल किसी एक घरेलू उपाय पर निर्भर रहने के बजाय रोजाना त्वचा की बुनियादी देखभाल करना जरूरी है। चेहरे को साफ रखना पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना और धूप में निकलते समय सनस्क्रीन का इस्तेमाल त्वचा की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अलसी से बना जेल या फेस पैक त्वचा को नमी देने में मदद कर सकता है लेकिन इससे किसी गंभीर त्वचा समस्या का इलाज होने का दावा नहीं किया जाना चाहिए।

    इस तरह अलसी को अपनी स्किन केयर रूटीन में एक सरल घरेलू विकल्प के रूप में शामिल किया जा सकता है। सही तरीके से और अपनी त्वचा के अनुसार इसका इस्तेमाल करने पर त्वचा को मुलायम और हाइड्रेटेड महसूस कराने में मदद मिल सकती है। सबसे जरूरी बात यह है कि त्वचा पर कुछ भी नया लगाने से पहले उसकी संवेदनशीलता को ध्यान में रखा जाए।

  • हाई-प्रोटीन चीला नाश्ते में करें शामिल, पनीर, सोया और दाल से बने ये विकल्प लंबे समय तक पेट भरा रखने में मददगार

    हाई-प्रोटीन चीला नाश्ते में करें शामिल, पनीर, सोया और दाल से बने ये विकल्प लंबे समय तक पेट भरा रखने में मददगार

    नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026। सुबह के नाश्ते में ऐसा भोजन लेना बेहतर विकल्प हो सकता है जो स्वादिष्ट होने के साथ लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करे। प्रोटीन से भरपूर चीला इस लिहाज से एक आसान विकल्प हो सकता है। दाल, बेसन, पनीर और सोया जैसी सामग्री से तैयार किए जाने वाले चीले कम तेल में बनाए जा सकते हैं। नाश्ते में प्रोटीन शामिल करने से लंबे समय तक पेट भरा महसूस हो सकता है और बार-बार कुछ खाने की इच्छा कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वजन कम करने या वजन मैनेज करने के लिए केवल एक भोजन पर निर्भर रहने के बजाय पूरे दिन की डाइट, कैलोरी और शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण होती है।

    पनीर और सोया से तैयार किया जाने वाला चीला नाश्ते में प्रोटीन बढ़ाने का एक विकल्प है। इसे बनाने के लिए सोया चंक्स को उबालकर पीस लें और उसमें पनीर, बेसन, प्याज, शिमला मिर्च और पसंद के मसाले मिलाएं। तैयार मिश्रण को तवे पर छोटे चीले के रूप में डालकर सेंक सकते हैं। पनीर और सोया के मिश्रण से तैयार यह चीला स्वाद के साथ नाश्ते को अधिक भरपेट बनाने का विकल्प हो सकता है। इसे तैयार करते समय तेल की मात्रा को जरूरत के अनुसार सीमित रखा जा सकता है।

    पनीर वाला मूंग दाल चीला भी नाश्ते में शामिल किया जा सकता है। इसके लिए मूंग दाल का चीला तैयार करने के बाद उसमें पनीर की स्टफिंग की जा सकती है। पनीर को कद्दूकस करके उसमें प्याज, टमाटर, धनिया और हल्के मसाले मिलाएं। इसके बाद तैयार मिश्रण को चीले के अंदर भरकर कुछ देर तवे पर सेंक लें। मूंग दाल और पनीर का यह संयोजन नाश्ते में प्रोटीन बढ़ाने का आसान तरीका हो सकता है। वहीं, बेसन से बनने वाला चीला भी सुबह के समय जल्दी तैयार किया जा सकता है। बेसन में प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, धनिया और पसंद के मसाले मिलाकर बैटर तैयार करें और इसे तवे पर सेंक लें। इसे दही के साथ लिया जा सकता है।

    मिक्स दाल चीला भी नाश्ते का एक विकल्प है। इसमें केवल एक दाल का इस्तेमाल करने के बजाय मूंग, मसूर या दूसरी दालों को मिलाकर बैटर तैयार किया जा सकता है। इस बैटर में बारीक कटी गाजर, पालक, शिमला मिर्च और प्याज जैसी सब्जियां मिलाई जा सकती हैं। इससे चीले में सब्जियों की मात्रा बढ़ाने के साथ स्वाद में भी बदलाव किया जा सकता है। इस तरह अलग-अलग दालों और सब्जियों को मिलाकर नाश्ते में विविधता लाई जा सकती है। अपनी पसंद के अनुसार इसमें हल्के मसाले भी शामिल किए जा सकते हैं।

    चीला बनाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है। अगर लक्ष्य वजन मैनेज करना है तो इसे बहुत ज्यादा तेल या घी में पकाने से बचना चाहिए। बैटर में सब्जियां शामिल की जा सकती हैं और चीले के साथ दही या हरी चटनी ली जा सकती है। केवल चीला खाने के बजाय पूरे दिन की डाइट में प्रोटीन, फाइबर, सब्जियों और अन्य जरूरी पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। इस तरह पनीर, सोया, दाल और बेसन से बने अलग-अलग चीले नाश्ते में स्वाद और प्रोटीन दोनों शामिल करने का आसान विकल्प हो सकते हैं।

  • Lauki Juice Benefits: लौकी का जूस डाइट में शामिल करने से मिल सकते हैं ये 5 फायदे, लेकिन कड़वी लौकी से रहें सावधान

    Lauki Juice Benefits: लौकी का जूस डाइट में शामिल करने से मिल सकते हैं ये 5 फायदे, लेकिन कड़वी लौकी से रहें सावधान

    Lauki Juice Benefits: लौकी को सेहत के लिए फायदेमंद सब्जियों में शामिल किया जाता है। इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है और यह कुछ जरूरी पोषक तत्वों का स्रोत भी है। इसी वजह से कई लोग लौकी की सब्जी के अलावा इसका जूस भी अपनी डाइट में शामिल करते हैं। बिना चीनी और अतिरिक्त सामग्री के तैयार किया गया ताजा लौकी का जूस हल्का पेय विकल्प हो सकता है। हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए और न ही किसी एक जूस पर निर्भर रहना सही है। इसे संतुलित खानपान के हिस्से के तौर पर लेना बेहतर है। लौकी के जूस से जुड़े फायदों की बात करें तो इसमें मौजूद पानी और कुछ पोषक तत्व शरीर को पर्याप्त तरल पदार्थ उपलब्ध कराने और डाइट की पोषण गुणवत्ता बेहतर करने में योगदान दे सकते हैं।

    लौकी का जूस शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद कर सकता है। लौकी में पानी की मात्रा काफी अधिक होती है, इसलिए इससे तैयार ताजा जूस शरीर में तरल पदार्थ की पूर्ति में योगदान दे सकता है। गर्मी या शारीरिक गतिविधि के दौरान शरीर को पर्याप्त पानी की जरूरत होती है और इस स्थिति में सादा पानी सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। इसलिए लौकी के जूस को पानी का विकल्प नहीं समझना चाहिए। इसके अलावा लौकी में मौजूद पानी और यदि जूस में कुछ गूदा शामिल रहे तो थोड़ी मात्रा में फाइबर भी मिल सकता है। संतुलित डाइट में फाइबर पाचन तंत्र के सामान्य कामकाज के लिए महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, पूरी लौकी खाने की तुलना में जूस में फाइबर की मात्रा कम हो सकती है।

    लौकी को आमतौर पर कम कैलोरी वाली सब्जियों में शामिल किया जाता है। बिना चीनी मिलाया गया लौकी का जूस भी कैलोरी के लिहाज से हल्का पेय हो सकता है। यदि इसे अधिक कैलोरी या मीठे पेय की जगह लिया जाए तो कुल कैलोरी सेवन को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, केवल लौकी का जूस पीने से वजन कम करने की उम्मीद करना सही तरीका नहीं है। वजन नियंत्रित रखने के लिए संतुलित खानपान पर ध्यान देना जरूरी है। इसी तरह लौकी को डाइट में शामिल करने से शरीर को कुछ विटामिन और मिनरल्स भी मिल सकते हैं। अलग-अलग सब्जियों और फलों को उनकी पूरी अवस्था में खाने से शरीर को विविध पोषण और पर्याप्त फाइबर मिल सकता है।

    बिना चीनी और अतिरिक्त सामग्री के तैयार किया गया ताजा लौकी का जूस उन लोगों के लिए हल्का पेय विकल्प हो सकता है, जो मीठे शीतल पेय या अधिक कैलोरी वाले ड्रिंक्स कम करना चाहते हैं। हालांकि, इसे डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह ली जा सकती है। खास तौर पर लौकी का जूस तैयार करते समय एक जरूरी सावधानी का ध्यान रखना चाहिए। यदि लौकी का स्वाद कड़वा हो तो उसका जूस बिल्कुल नहीं पीना चाहिए। कड़वी लौकी में विषैले कुकुर्बिटासिन की मात्रा अधिक हो सकती है। इसलिए जूस बनाने से पहले लौकी का स्वाद जांचना जरूरी है और कड़वी लौकी का सेवन नहीं करना चाहिए।

    कुल मिलाकर, लौकी का ताजा जूस हाइड्रेशन में योगदान देने, संतुलित डाइट में पोषक तत्व शामिल करने और मीठे या अधिक कैलोरी वाले पेय के विकल्प के रूप में उपयोगी हो सकता है। पाचन के लिए भी इसमें मौजूद पानी और कुछ गूदे के कारण थोड़ी मात्रा में फाइबर मिल सकता है। फिर भी जूस की तुलना में पूरी सब्जी खाना अधिक फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि जूस बनाने की प्रक्रिया में फाइबर कम हो जाता है। इसलिए लौकी को संतुलित आहार का हिस्सा बनाना बेहतर है और किसी बीमारी के इलाज या वजन घटाने के लिए केवल इसके जूस पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।