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  • नैचुरल ऑर्गेनिक और हेल्दी के दावों की खुल रही पोल, FSSAI ने कंपनियों को भेजे नोटिस उपभोक्ताओं को किया सतर्क

    नैचुरल ऑर्गेनिक और हेल्दी के दावों की खुल रही पोल, FSSAI ने कंपनियों को भेजे नोटिस उपभोक्ताओं को किया सतर्क


    नई दिल्ली । आज के समय में पैकेज्ड फूड हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सुपरमार्केट की शेल्फ से लेकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक हर जगह ऐसे उत्पाद दिखाई देते हैं जिन पर बड़े अक्षरों में नैचुरल हेल्दी ऑर्गेनिक प्योर फ्रेश हार्ट हेल्दी और जीरो मैदा जैसे आकर्षक दावे लिखे होते हैं। इन शब्दों को देखकर ज्यादातर लोग बिना ज्यादा जांच पड़ताल किए ही उत्पाद खरीद लेते हैं। लेकिन अब भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने ऐसे दावों को लेकर सख्त रुख अपनाया है और कई बड़ी कंपनियों से जवाब मांगा है कि क्या उनके पैकेट पर लिखे दावे वास्तव में सही हैं।

    FSSAI का कहना है कि किसी भी खाद्य उत्पाद पर किया गया दावा वैज्ञानिक तथ्यों और निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिए। केवल ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए हेल्दी या नैचुरल जैसे शब्द लिखना स्वीकार्य नहीं है। यदि कोई कंपनी ऐसा करती है तो उसे अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण भी देने होंगे।

    हाल के दिनों में FSSAI ने ब्रेड नूडल्स चॉकलेट जूस कुकिंग ऑयल सप्लीमेंट्स पैकेज्ड पानी और कैफीन युक्त पेय पदार्थ बनाने वाली कई कंपनियों को नोटिस जारी किए हैं। इनमें खास तौर पर 100 प्रतिशत नैचुरल प्योर फ्रेश ऑर्गेनिक हेल्दी हार्ट हेल्दी डिटॉक्स एंटी कैंसर और जीरो मैदा जैसे दावों पर सवाल उठाए गए हैं। नियामक संस्था यह जानना चाहती है कि क्या इन उत्पादों की सामग्री और निर्माण प्रक्रिया वास्तव में इन दावों के अनुरूप है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश उपभोक्ता पैकेट के सामने लिखी बातों पर भरोसा कर लेते हैं लेकिन पीछे दिए गए पोषण संबंधी विवरण और सामग्री सूची को पढ़ने की जहमत नहीं उठाते। इसी का फायदा कई कंपनियां उठाती हैं। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट इसे हेल्थ हेलो इफेक्ट कहते हैं जिसमें किसी एक आकर्षक शब्द के कारण पूरा उत्पाद स्वास्थ्यवर्धक दिखाई देने लगता है जबकि वास्तविकता अलग हो सकती है।

    डाइट विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी पैकेज्ड फूड को खरीदने से पहले उसकी सामग्री सूची अवश्य पढ़नी चाहिए। पैकेट पर सबसे पहले जिस सामग्री का नाम लिखा होता है उसकी मात्रा सबसे अधिक होती है। इसके अलावा शुगर नमक सैचुरेटेड फैट ट्रांस फैट प्रोटीन और कैलोरी की जानकारी भी ध्यान से देखनी चाहिए। यदि किसी उत्पाद के सामने बड़े बड़े दावे लिखे हों लेकिन पीछे उनका कोई वैज्ञानिक आधार या प्रमाण न दिया गया हो तो ऐसे उत्पाद से सावधान रहना चाहिए।

    अगर किसी उत्पाद पर ऑर्गेनिक लिखा है तो उसके पास मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र होना जरूरी है। इसी तरह हेल्दी या हार्ट हेल्दी जैसे दावे भी तभी किए जा सकते हैं जब उत्पाद निर्धारित पोषण मानकों पर खरा उतरता हो। इसलिए केवल विज्ञापन या पैकेजिंग देखकर निर्णय लेना समझदारी नहीं है।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि उपभोक्ता खरीदारी करते समय केवल कीमत या ऑफर पर ध्यान न दें बल्कि लेबल को पढ़ने की आदत भी विकसित करें। इससे न केवल सही उत्पाद चुनने में मदद मिलेगी बल्कि भ्रामक दावों से भी बचा जा सकेगा। बच्चों बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह और भी जरूरी हो जाता है क्योंकि गलत जानकारी के आधार पर चुना गया खाद्य पदार्थ उनकी सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

    FSSAI की यह कार्रवाई केवल कंपनियों पर निगरानी रखने के लिए नहीं बल्कि उपभोक्ताओं को जागरूक बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। अब समय आ गया है कि खरीदारी करते समय चमकदार पैकेजिंग और बड़े बड़े दावों से प्रभावित होने के बजाय उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता और पोषण संबंधी जानकारी को प्राथमिकता दी जाए। जागरूक ग्राहक ही सही और सुरक्षित भोजन का चुनाव कर सकता है।

  • हेल्दी कुकिंग का सीक्रेट कौन सा तेल है सबसे फायदेमंद, जानिए नारियल एवोकाडो और सामान्य तेलों का पूरा सच

    हेल्दी कुकिंग का सीक्रेट कौन सा तेल है सबसे फायदेमंद, जानिए नारियल एवोकाडो और सामान्य तेलों का पूरा सच


    नई दिल्ली । आजकल हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने की चाहत रखने वाले लोग सिर्फ खाने पर ही नहीं बल्कि खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाले तेल पर भी खास ध्यान देने लगे हैं। सोशल मीडिया और फिटनेस ट्रेंड्स के कारण नारियल ऑयल और एवोकाडो ऑयल को सुपर हेल्दी विकल्प के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या ये तेल वास्तव में सामान्य कुकिंग ऑयल से बेहतर हैं या फिर यह केवल एक नया ट्रेंड है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक तेल को हर व्यक्ति के लिए सबसे अच्छा नहीं कहा जा सकता क्योंकि हर तेल की अपनी अलग पोषण संरचना और उपयोगिता होती है।

    नारियल तेल लंबे समय से भारतीय रसोई का हिस्सा रहा है। इसमें सैचुरेटेड फैट की मात्रा अधिक होती है जिससे यह तेज आंच पर भी स्थिर रहता है और जल्दी खराब नहीं होता। कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि नारियल तेल अच्छे कोलेस्ट्रॉल यानी एचडीएल को बढ़ाने में मदद कर सकता है। हालांकि जिन लोगों का खराब कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल पहले से अधिक है या जिन्हें हृदय रोग का खतरा है उन्हें इसका सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है। इसलिए इसे पूरी तरह स्वास्थ्यवर्धक मानकर अधिक मात्रा में उपयोग करना सही नहीं होगा।

    दूसरी ओर एवोकाडो ऑयल को दिल की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है क्योंकि इसमें मोनोअनसैचुरेटेड फैट भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा इसमें विटामिन ई और कई शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं जो शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। यह सलाद ड्रेसिंग हल्की कुकिंग और मध्यम से तेज आंच पर खाना बनाने के लिए भी उपयुक्त माना जाता है। हालांकि भारतीय बाजार में इसकी कीमत सामान्य तेलों की तुलना में काफी अधिक होती है इसलिए हर परिवार के लिए इसका नियमित उपयोग आसान नहीं है।

    विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि सरसों मूंगफली तिल सूरजमुखी सोयाबीन और राइस ब्रान जैसे पारंपरिक कुकिंग ऑयल भी किसी तरह से कम नहीं हैं। यदि इनका संतुलित मात्रा में उपयोग किया जाए तो ये शरीर को आवश्यक फैटी एसिड और पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं। कई पोषण विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लंबे समय तक केवल एक ही प्रकार का तेल इस्तेमाल करने के बजाय समय समय पर अलग अलग हेल्दी तेलों का संतुलित उपयोग करना बेहतर रहता है। इससे शरीर को विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व मिलते हैं।

    तेल का चुनाव जितना महत्वपूर्ण है उससे कहीं ज्यादा जरूरी उसकी मात्रा पर नियंत्रण रखना है। चाहे नारियल तेल हो एवोकाडो ऑयल हो या कोई भी सामान्य कुकिंग ऑयल जरूरत से ज्यादा सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसके साथ ही एक ही तेल को बार बार गर्म करके इस्तेमाल करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे हानिकारक तत्व बनने लगते हैं जो स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकते हैं।

    यदि आप पूरी तरह स्वस्थ हैं तो अपनी जरूरत बजट और खानपान के अनुसार अलग अलग हेल्दी तेलों का संतुलित उपयोग कर सकते हैं। वहीं यदि आपको हृदय रोग हाई कोलेस्ट्रॉल डायबिटीज या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं तो तेल बदलने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह जरूर लें। आखिरकार सबसे अच्छा तेल वही है जो आपकी सेहत जीवनशैली और भोजन की जरूरतों के अनुसार सही मात्रा में इस्तेमाल किया जाए।

  • दिल्ली ट्रैवल टिप्स: पहली बार राजधानी जा रहे हैं तो इन जगहों और जरूरी बातों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

    दिल्ली ट्रैवल टिप्स: पहली बार राजधानी जा रहे हैं तो इन जगहों और जरूरी बातों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज


    नई दिल्ली । दिल्ली भारत की राजधानी होने के साथ साथ इतिहास संस्कृति आधुनिकता और खानपान का अनोखा संगम है। हर साल देश और विदेश से लाखों पर्यटक यहां घूमने आते हैं। अगर आप भी दिल्ली यात्रा की योजना बना रहे हैं तो कुछ जरूरी बातों की जानकारी पहले से होना आपके सफर को आसान और यादगार बना सकता है। सही प्लानिंग के साथ आप कम बजट में भी दिल्ली की बेहतरीन जगहों का आनंद ले सकते हैं।

    दिल्ली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां आपको ऐतिहासिक धरोहरों से लेकर आधुनिक इमारतों तक सब कुछ देखने को मिलता है। लाल किला कुतुब मीनार इंडिया गेट हुमायूं का मकबरा राष्ट्रपति भवन लोटस टेंपल अक्षरधाम मंदिर और जामा मस्जिद जैसी जगहें हर पर्यटक की पहली पसंद होती हैं। अगर आपको इतिहास और संस्कृति में रुचि है तो राष्ट्रीय संग्रहालय राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और गांधी स्मृति भी जरूर देखें।

    दिल्ली में घूमने का सबसे आसान और किफायती साधन दिल्ली मेट्रो है। यह शहर के लगभग हर हिस्से को जोड़ती है और ट्रैफिक की परेशानी से भी बचाती है। मेट्रो कार्ड बनवाकर आप आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच सकते हैं। इसके अलावा ई रिक्शा ऑटो कैब और बस की सुविधा भी पूरे शहर में उपलब्ध रहती है।

    दिल्ली आएं और यहां का मशहूर स्ट्रीट फूड न खाएं तो यात्रा अधूरी मानी जाती है। चांदनी चौक के पराठे चाट दही भल्ले जलेबी और नानखटाई लोगों को खूब पसंद आते हैं। वहीं कनॉट प्लेस खान मार्केट और सरोजिनी नगर जैसे इलाके शॉपिंग और खाने पीने के लिए बेहतरीन माने जाते हैं। अगर आपको पारंपरिक भारतीय भोजन पसंद है तो पुरानी दिल्ली की गलियों का स्वाद जरूर लें।

    खरीदारी के शौकीनों के लिए दिल्ली किसी स्वर्ग से कम नहीं है। सरोजिनी नगर जनपथ करोल बाग लाजपत नगर और चांदनी चौक में कपड़े जूते इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू सामान उचित कीमत पर मिल जाते हैं। मोलभाव करना यहां की खरीदारी का एक अहम हिस्सा माना जाता है इसलिए खरीदारी करते समय कीमत जरूर तय करें।

    यात्रा के दौरान सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। भीड़भाड़ वाले इलाकों में अपने मोबाइल पर्स और अन्य जरूरी सामान को सुरक्षित रखें। रात में सुनसान जगहों पर अकेले जाने से बचें और केवल अधिकृत टैक्सी या कैब सेवा का ही उपयोग करें। किसी भी आपात स्थिति में पुलिस हेल्पलाइन और महिला सुरक्षा हेल्पलाइन की जानकारी अपने पास रखें।

    दिल्ली घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और अधिकांश पर्यटन स्थलों का आराम से आनंद लिया जा सकता है। गर्मियों में तापमान काफी अधिक रहता है जबकि मानसून में कई बार बारिश यात्रा की योजना प्रभावित कर सकती है।

    अगर आप पहले से होटल की बुकिंग कर लें यात्रा का बजट तय कर लें और घूमने की जगहों की सूची बना लें तो आपका समय और पैसा दोनों बच सकते हैं। दिल्ली केवल एक शहर नहीं बल्कि इतिहास संस्कृति आधुनिक जीवनशैली और स्वाद का ऐसा संगम है जो हर यात्री को एक नया अनुभव देता है। सही योजना और थोड़ी सी तैयारी के साथ आपकी दिल्ली यात्रा जीवनभर की यादगार बन सकती है।

  • स्किन केयर का नेचुरल सुपरफूड है खीरा दाग धब्बों से लेकर ग्लो तक हर समस्या का आसान उपाय

    स्किन केयर का नेचुरल सुपरफूड है खीरा दाग धब्बों से लेकर ग्लो तक हर समस्या का आसान उपाय


    नई दिल्ली । अगर आप बिना ज्यादा पैसे खर्च किए अपनी त्वचा को स्वस्थ चमकदार और ताजगी से भरपूर बनाना चाहते हैं तो खीरा आपके लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक विकल्प साबित हो सकता है। खीरे में लगभग 95 प्रतिशत पानी होता है जो त्वचा को अंदर से हाइड्रेट रखने में मदद करता है। इसके साथ ही इसमें विटामिन सी विटामिन के पोटैशियम और कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो त्वचा को पोषण देने के साथ उसे लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होते हैं। यही कारण है कि खीरे का इस्तेमाल वर्षों से घरेलू स्किन केयर का अहम हिस्सा माना जाता है।

    गर्मी के मौसम में धूप धूल और प्रदूषण के कारण त्वचा अपनी नमी खोने लगती है। ऐसे में खीरा त्वचा को ठंडक पहुंचाने के साथ उसकी प्राकृतिक नमी बनाए रखने का काम करता है। यदि चेहरा बार बार रूखा महसूस होता है तो खीरे का रस लगाना काफी फायदेमंद माना जाता है। यह त्वचा को तरोताजा बनाता है और चेहरे पर प्राकृतिक चमक लाने में मदद करता है।

    आंखों के नीचे सूजन या डार्क सर्कल की समस्या से परेशान लोगों के लिए भी खीरा बेहद लाभकारी माना जाता है। ठंडे खीरे के पतले स्लाइस कुछ मिनट तक आंखों पर रखने से आंखों को आराम मिलता है और सूजन कम होने में मदद मिल सकती है। लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करने वाले लोगों के लिए यह आसान घरेलू उपाय काफी राहत देने वाला साबित होता है।

    अगर चेहरे पर धूप की वजह से टैनिंग हो गई है तो खीरा त्वचा को ठंडक देकर उसे आराम पहुंचाने में मदद करता है। खीरे का रस गुलाब जल या एलोवेरा जेल के साथ मिलाकर लगाने से त्वचा को ताजगी मिलती है और सनबर्न से होने वाली जलन भी कम हो सकती है। नियमित उपयोग से त्वचा अधिक साफ और मुलायम महसूस होने लगती है।

    तैलीय त्वचा वाले लोगों के लिए भी खीरा किसी वरदान से कम नहीं है। यह अतिरिक्त तेल को संतुलित करने में मदद करता है जिससे मुंहासों की संभावना कम हो सकती है। खीरे के रस में थोड़ा सा मुल्तानी मिट्टी मिलाकर फेस पैक तैयार किया जा सकता है। इसे चेहरे पर लगाने के बाद सूखने पर सामान्य पानी से धो लें। इससे त्वचा साफ और फ्रेश महसूस होती है।

    खीरे का उपयोग फेस टोनर के रूप में भी किया जा सकता है। ताजा खीरे का रस निकालकर फ्रिज में रख लें और कॉटन की मदद से चेहरे पर लगाएं। इससे त्वचा को ताजगी मिलती है और रोमछिद्र साफ रखने में मदद मिलती है। यदि त्वचा संवेदनशील है तो किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें ताकि किसी प्रकार की एलर्जी की संभावना से बचा जा सके।

    स्वस्थ त्वचा के लिए केवल बाहरी देखभाल ही नहीं बल्कि सही खानपान भी जरूरी है। खीरे को सलाद के रूप में अपनी डाइट में शामिल करने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और इसका सकारात्मक असर त्वचा पर भी दिखाई देता है। पर्याप्त पानी पीना अच्छी नींद लेना और संतुलित आहार अपनाना भी स्किन केयर का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    प्राकृतिक उपायों का असर धीरे धीरे दिखाई देता है लेकिन नियमित देखभाल और सही दिनचर्या अपनाकर लंबे समय तक त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखा जा सकता है। खीरा एक आसान सस्ता और सुरक्षित विकल्प है जिसे अपनी रोजमर्रा की स्किन केयर रूटीन में शामिल करके त्वचा की खूबसूरती को प्राकृतिक रूप से निखारा जा सकता है।

  • सर्दियों में बच्चों की सुरक्षा है सबसे जरूरी सही खानपान गर्म कपड़े और देखभाल से रहें फिट और हेल्दी

    सर्दियों में बच्चों की सुरक्षा है सबसे जरूरी सही खानपान गर्म कपड़े और देखभाल से रहें फिट और हेल्दी


    नई दिल्ली। सर्दियों का मौसम जहां एक ओर सुकून और खुशियां लेकर आता है वहीं छोटे बच्चों के लिए यह मौसम कई स्वास्थ्य चुनौतियां भी साथ लाता है। ठंडी हवा तापमान में गिरावट और संक्रमण का खतरा बच्चों को जल्दी बीमार बना सकता है। इस मौसम में सर्दी जुकाम खांसी बुखार निमोनिया और वायरल संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए माता पिता को बच्चों की देखभाल में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत होती है ताकि उनका स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।

    सर्दियों में सबसे पहले बच्चों को मौसम के अनुसार गर्म कपड़े पहनाना जरूरी है। बच्चों को कई हल्की परतों वाले कपड़े पहनाना एक मोटे कपड़े से ज्यादा प्रभावी माना जाता है। सिर कान हाथ और पैरों को अच्छी तरह ढककर रखें क्योंकि शरीर की सबसे ज्यादा गर्मी इन्हीं हिस्सों से बाहर निकलती है। अगर बच्चा बाहर खेलने जा रहा है तो उसे टोपी मोजे और गर्म जूते जरूर पहनाएं।

    ठंड के मौसम में बच्चों का खानपान भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। उन्हें ताजा और पौष्टिक भोजन दें जिसमें हरी सब्जियां मौसमी फल दाल दूध अंडा और सूखे मेवे शामिल हों। विटामिन सी और प्रोटीन से भरपूर आहार रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करता है। बच्चों को पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पिलाते रहें क्योंकि सर्दियों में प्यास कम लगने के कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है।

    बच्चों को साफ सफाई की आदत भी जरूर सिखाएं। बाहर से आने के बाद हाथ साबुन से धोने की आदत संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर देती है। यदि घर में किसी सदस्य को सर्दी या खांसी है तो बच्चे को उसके सीधे संपर्क से बचाने की कोशिश करें। कमरे में पर्याप्त धूप और ताजी हवा आने दें ताकि वातावरण स्वच्छ बना रहे।

    सर्दियों में धूप बच्चों के लिए प्राकृतिक विटामिन डी का अच्छा स्रोत होती है। सुबह की हल्की धूप में कुछ समय बच्चों को खेलने या बैठने दें। इससे उनकी हड्डियां मजबूत होती हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर होती है। हालांकि बहुत ज्यादा ठंडी हवा या कोहरे में बच्चों को लंबे समय तक बाहर न रखें।

    रात में बच्चों को पर्याप्त और आरामदायक नींद दिलाना भी जरूरी है। अच्छी नींद शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करती है। सोते समय कमरे का तापमान संतुलित रखें और बच्चे को जरूरत के अनुसार गर्म कंबल ओढ़ाएं लेकिन अत्यधिक गर्म कपड़ों से भी बचें ताकि उन्हें असहजता न हो।

    यदि बच्चे को लगातार तेज बुखार सांस लेने में तकलीफ लगातार खांसी या कमजोरी महसूस हो रही हो तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज गंभीर बीमारियों से बचाव का सबसे सुरक्षित तरीका है।

    सर्दियों में थोड़ी सी सावधानी और नियमित देखभाल बच्चों को स्वस्थ रखने में बड़ी भूमिका निभाती है। सही खानपान पर्याप्त गर्माहट साफ सफाई और समय पर चिकित्सकीय सलाह अपनाकर माता पिता अपने बच्चों को ठंड के मौसम में भी सुरक्षित और ऊर्जावान रख सकते हैं।

  • महंगे प्रोडक्ट नहीं रोज की सही स्किन केयर दिलाएगी नैचुरल ग्लो जानिए त्वचा को स्वस्थ रखने के जरूरी नियम

    महंगे प्रोडक्ट नहीं रोज की सही स्किन केयर दिलाएगी नैचुरल ग्लो जानिए त्वचा को स्वस्थ रखने के जरूरी नियम


    नई दिल्ली। खूबसूरत और स्वस्थ त्वचा केवल महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स से नहीं बल्कि सही और नियमित स्किन केयर रूटीन से मिलती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में धूल मिट्टी प्रदूषण तेज धूप और तनाव का सबसे ज्यादा असर हमारी त्वचा पर दिखाई देता है। यदि रोजाना कुछ आसान आदतों को अपनाया जाए तो त्वचा लंबे समय तक साफ चमकदार और जवां बनी रह सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित स्किन केयर केवल सुंदरता ही नहीं बल्कि त्वचा के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद जरूरी है।

    दिन की शुरुआत चेहरे की अच्छी सफाई से करें। सुबह उठने के बाद अपने स्किन टाइप के अनुसार हल्के फेसवॉश से चेहरा धोएं ताकि रातभर जमा अतिरिक्त तेल और गंदगी साफ हो जाए। इसके बाद त्वचा पर हल्का मॉइस्चराइजर लगाएं जिससे त्वचा में नमी बनी रहे। यदि आप घर से बाहर निकल रहे हैं तो सनस्क्रीन लगाना बिल्कुल न भूलें। तेज धूप की अल्ट्रावायलेट किरणें समय से पहले झुर्रियां दाग धब्बे और टैनिंग का कारण बन सकती हैं।

    दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी स्वस्थ त्वचा के लिए जरूरी है। शरीर में पानी की कमी होने पर त्वचा बेजान और रूखी दिखाई देने लगती है। रोजाना पर्याप्त पानी पीने से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलते हैं और त्वचा प्राकृतिक रूप से चमकदार बनी रहती है। इसके साथ ही मौसमी फल हरी सब्जियां सूखे मेवे और विटामिन सी से भरपूर आहार त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं।

    रात की स्किन केयर भी उतनी ही जरूरी होती है। सोने से पहले चेहरा अच्छी तरह साफ करें ताकि दिनभर की धूल मिट्टी मेकअप और प्रदूषण त्वचा से हट जाए। इसके बाद नाइट क्रीम या हल्का मॉइस्चराइजर लगाएं जिससे त्वचा रातभर रिपेयर हो सके। यदि त्वचा पर मुंहासे या पिगमेंटेशन जैसी समस्या है तो त्वचा विशेषज्ञ की सलाह से ही कोई उपचार अपनाएं।

    सप्ताह में एक या दो बार चेहरे को हल्के स्क्रब से एक्सफोलिएट करना भी फायदेमंद माना जाता है। इससे त्वचा की मृत कोशिकाएं हटती हैं और नई कोशिकाओं का निर्माण बेहतर होता है। हालांकि जरूरत से ज्यादा स्क्रब करने से त्वचा को नुकसान भी हो सकता है इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

    तनाव और नींद की कमी भी त्वचा की चमक को प्रभावित करती है। रोजाना सात से आठ घंटे की अच्छी नींद लेने से त्वचा को आराम मिलता है और चेहरे पर प्राकृतिक निखार दिखाई देता है। योग ध्यान और हल्की एक्सरसाइज करने से रक्त संचार बेहतर होता है जिससे त्वचा स्वस्थ रहती है।

    धूम्रपान और अत्यधिक जंक फूड का सेवन त्वचा को समय से पहले बूढ़ा बना सकता है। इसलिए संतुलित जीवनशैली अपनाना भी स्किन केयर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। याद रखें कि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी नए प्रोडक्ट का उपयोग करने से पहले उसकी गुणवत्ता और अपनी त्वचा की जरूरत को समझना जरूरी है।

    यदि रोजाना कुछ मिनट अपनी त्वचा की देखभाल के लिए निकाले जाएं तो बिना महंगे उपचार के भी लंबे समय तक स्वस्थ मुलायम और चमकदार त्वचा पाई जा सकती है। नियमित स्किन केयर और संतुलित खानपान ही प्राकृतिक सुंदरता का सबसे बड़ा राज माना जाता है।

  • बिना चिकित्सीय परामर्श के फिश ऑयल कैप्सूल का सेवन दे सकता है बीमारियों को न्योता, जानें इसके सही फायदे और नुकसान

    बिना चिकित्सीय परामर्श के फिश ऑयल कैप्सूल का सेवन दे सकता है बीमारियों को न्योता, जानें इसके सही फायदे और नुकसान


    नई दिल्ली ।
    आधुनिक जीवनशैली और बदलती खानपान की आदतों के बीच शारीरिक फिटनेस बनाए रखने के लिए सप्लीमेंट्स का चलन तेजी से बढ़ा है। विशेषकर जिम जाने वाले युवाओं और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच ओमेगा-3 युक्त फिश ऑयल कैप्सूल का उपयोग काफी लोकप्रिय हो रहा है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बिना डॉक्टरी परामर्श और सही खुराक की जानकारी के इसका नियमित सेवन फायदे के बजाय शरीर को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।

    फिश ऑयल में मुख्य रूप से ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन ए, विटामिन डी और कई आवश्यक तत्व पाए जाते हैं, जिन्हें हमारा शरीर प्राकृतिक रूप से निर्मित नहीं कर पाता। संतुलित मात्रा में इसका सेवन करने से हृदय स्वास्थ्य में सुधार होता है और रक्त में हानिकारक वसा का स्तर कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा, यह यकृत में जमा अतिरिक्त वसा को नियंत्रित करने और जोड़ों की अकड़न व सूजन से राहत दिलाने में भी मददगार साबित होता है।

    दूसरी ओर, विशेषज्ञ इसके अत्यधिक या अनियंत्रित सेवन को लेकर आगाह करते हैं। आवश्यकता से अधिक खुराक लेने पर शरीर में ओमेगा-3 का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं जैसे गैस, अपच और पेट दर्द हो सकता है। इसके अलावा, जो लोग पहले से रक्त को पतला करने वाली दवाइयों का सेवन कर रहे हैं, उनके लिए बिना सलाह के इसे लेना घातक हो सकता है, क्योंकि इसमें मौजूद गुण रक्त के थक्के जमने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।

    स्वास्थ्य सलाहकारों के अनुसार, जिन लोगों की दैनिक खुराक में पहले से ही प्राकृतिक रूप से ये पोषक तत्व मौजूद हैं, उन्हें अतिरिक्त सप्लीमेंट की आवश्यकता नहीं होती। अत्यधिक मात्रा में सेवन से शरीर में अन्य आवश्यक विटामिनों की कमी होने का जोखिम भी बना रहता है। जिन व्यक्तियों को समुद्री खाद्य पदार्थों से एलर्जी की शिकायत है, उन्हें ऐसे कैप्सूल के प्रयोग से पूरी तरह बचना चाहिए।

    मध्य प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को सप्लीमेंट्स के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक किया जा रहा है। चिकित्सकों का सुझाव है कि किसी भी प्रकार के आहार पूरक को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने से पहले योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य लेना चाहिए और इसे हमेशा भोजन के बाद ही निर्धारित मात्रा में ग्रहण करना चाहिए।

  • आम सिर्फ स्वाद ही नहीं, त्वचा की देखभाल में भी हो सकता है उपयोगी, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल

    आम सिर्फ स्वाद ही नहीं, त्वचा की देखभाल में भी हो सकता है उपयोगी, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल

    नई दिल्ली ।आम को फलों का राजा कहा जाता है और इसकी लोकप्रियता केवल स्वाद तक सीमित नहीं है। पोषक तत्वों से भरपूर यह फल शरीर के साथ-साथ त्वचा के स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी माना जाता है। इसमें मौजूद विटामिन, मिनरल और प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट त्वचा की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यही कारण है कि कई लोग इसे अपने दैनिक आहार के साथ-साथ प्राकृतिक स्किनकेयर रूटीन का भी हिस्सा बनाते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार आम में पर्याप्त मात्रा में विटामिन-सी पाया जाता है, जो शरीर में कोलेजन बनने की प्रक्रिया को समर्थन देता है। कोलेजन त्वचा को मजबूती, लचीलापन और स्वस्थ बनावट बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कोलेजन का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है, जिससे त्वचा पर महीन रेखाएं और ढीलापन दिखाई देने लगता है। ऐसे में विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थ त्वचा की प्राकृतिक चमक बनाए रखने में सहायक माने जाते हैं।

    आम में मौजूद बीटा-कैरोटीन शरीर में जाकर विटामिन-ए में परिवर्तित हो सकता है। यह पोषक तत्व त्वचा की नई कोशिकाओं के निर्माण और क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत की प्रक्रिया में मदद करता है। नियमित और संतुलित मात्रा में आम का सेवन त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में योगदान दे सकता है। विशेष रूप से रूखी और बेजान त्वचा वाले लोगों के लिए यह पोषण का एक अच्छा प्राकृतिक स्रोत माना जाता है।

    इस फल में विटामिन-ई भी पाया जाता है, जो त्वचा की नमी बनाए रखने में सहायक माना जाता है। यह त्वचा की बाहरी परत को पोषण देकर उसे मुलायम और कोमल बनाए रखने में मदद कर सकता है। जिन लोगों की त्वचा जल्दी रूखी हो जाती है, उनके लिए विटामिन-ई युक्त खाद्य पदार्थ लाभदायक माने जाते हैं। इसके अलावा आम में मौजूद कॉपर, पॉलीफेनोल्स और अन्य एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में भूमिका निभा सकते हैं। फ्री रेडिकल्स को समय से पहले उम्र बढ़ने के संकेतों का एक प्रमुख कारण माना जाता है।

    आम का उपयोग केवल भोजन के रूप में ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक स्किनकेयर में भी किया जाता है। इसके गूदे को दही या शहद के साथ मिलाकर फेस पैक तैयार किया जाता है, जिसे त्वचा को नमी और ताजगी देने के लिए उपयोग किया जाता है। वहीं, आम के गूदे में ओट्स जैसी प्राकृतिक सामग्री मिलाकर हल्का स्क्रब भी बनाया जाता है, जो त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने और त्वचा को साफ महसूस कराने में मदद कर सकता है।

    आम की गुठली से प्राप्त मैंगो बटर भी त्वचा की देखभाल में महत्वपूर्ण माना जाता है। इसमें मौजूद फैटी एसिड त्वचा को गहराई से नमी प्रदान करने में सहायक होते हैं। इसी वजह से मैंगो बटर का उपयोग कई मॉइस्चराइजर, बॉडी लोशन और अन्य त्वचा देखभाल उत्पादों में किया जाता है। यह त्वचा को मुलायम बनाए रखने और उसकी प्राकृतिक नमी बनाए रखने में मदद कर सकता है।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि आम का सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए। इसमें प्राकृतिक शर्करा की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है और अत्यधिक सेवन कुछ लोगों में त्वचा पर तेलीयपन या मुंहासों की समस्या बढ़ा सकता है। जिन लोगों की त्वचा पहले से ऑयली है या जिन्हें एक्ने की समस्या रहती है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इसके अलावा कुछ लोगों को आम के रस, गूदे या छिलके से एलर्जी भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में किसी भी प्रकार के प्रयोग से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित माना जाता है।

  • बारिश में ऑयली स्किन से बढ़ सकती हैं त्वचा की समस्याएं, सही फेस वॉश का चुनाव बन सकता है असरदार उपाय

    बारिश में ऑयली स्किन से बढ़ सकती हैं त्वचा की समस्याएं, सही फेस वॉश का चुनाव बन सकता है असरदार उपाय

    नई दिल्ली । बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन बढ़ी हुई नमी और उमस त्वचा से जुड़ी कई परेशानियों को भी बढ़ा सकती है। विशेष रूप से ऑयली और कॉम्बिनेशन स्किन वाले लोगों को इस मौसम में अतिरिक्त सीबम, पसीना और धूल-मिट्टी के कारण चेहरे पर चिपचिपाहट महसूस होती है। यदि त्वचा की नियमित सफाई पर ध्यान न दिया जाए, तो मुंहासे, ब्लैकहेड्स, खुले रोमछिद्र और त्वचा की चमक कम होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में त्वचा के प्रकार के अनुसार सही फेस वॉश का चयन करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

    त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार मानसून के दौरान ऐसा फेस वॉश चुनना चाहिए जो त्वचा की गहराई से सफाई करे, अतिरिक्त तेल को नियंत्रित रखे और साथ ही त्वचा की प्राकृतिक नमी को भी बनाए रखे। अत्यधिक कठोर उत्पादों का इस्तेमाल करने से त्वचा रूखी हो सकती है, जबकि हल्के और संतुलित फॉर्मूले वाले फेस वॉश त्वचा को साफ रखने के साथ उसे ताजगी भी प्रदान करते हैं।

    ऑयली और मुंहासों की समस्या से परेशान लोगों के लिए सैलिसिलिक एसिड युक्त फेस वॉश उपयोगी विकल्प माना जाता है। यह रोमछिद्रों के भीतर जमा अतिरिक्त तेल और गंदगी को साफ करने में मदद करता है तथा ब्लैकहेड्स और पिंपल्स बनने की संभावना को कम करने में सहायक हो सकता है। विशेषज्ञ इसकी सलाह त्वचा की आवश्यकता के अनुसार दिन में एक या दो बार तक उपयोग करने की देते हैं।

    नीम और टी ट्री ऑयल वाले फेस वॉश भी मानसून में काफी लोकप्रिय माने जाते हैं। इन प्राकृतिक तत्वों में एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया को कम करने और मुंहासों की समस्या को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। ऑयली और एक्ने-प्रोन स्किन वाले लोगों के लिए यह संयोजन लाभदायक माना जाता है।

    यदि त्वचा पर धूल, प्रदूषण और अतिरिक्त तेल अधिक जमा होता है, तो एक्टिवेटेड चारकोल युक्त फेस वॉश भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह त्वचा की गहराई से सफाई करने में मदद करता है और चेहरे को ताजगी का एहसास देता है। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इसका अत्यधिक उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि बार-बार इस्तेमाल करने से कुछ लोगों की त्वचा रूखी महसूस हो सकती है।

    जेल बेस्ड फेस वॉश भी मानसून के मौसम में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं। इनमें एलोवेरा, खीरा या हायल्यूरोनिक एसिड जैसे तत्व शामिल हो सकते हैं, जो त्वचा को बिना अधिक रूखा किए साफ करने में मदद करते हैं। यह फेस वॉश अतिरिक्त तेल हटाने के साथ त्वचा की हल्की नमी बनाए रखते हैं, जिससे चेहरा लंबे समय तक फ्रेश महसूस होता है। ऑयली और कॉम्बिनेशन स्किन वाले लोगों के लिए इन्हें उपयुक्त माना जाता है।

    विटामिन सी युक्त फेस वॉश भी त्वचा की देखभाल में उपयोगी माने जाते हैं। यह चेहरे की डलनेस कम करने, त्वचा को ताजगी देने और पर्यावरणीय प्रभावों से होने वाले नुकसान से बचाने में सहायक हो सकते हैं। नियमित स्किनकेयर रूटीन के साथ इनका उपयोग त्वचा की प्राकृतिक चमक बनाए रखने में मदद कर सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल फेस वॉश बदलना ही पर्याप्त नहीं है। मानसून में दिन में दो बार चेहरे की सफाई करना, पर्याप्त पानी पीना, हल्का मॉइश्चराइजर लगाना और त्वचा के अनुसार उपयुक्त स्किनकेयर उत्पादों का इस्तेमाल करना भी जरूरी है। सही देखभाल और संतुलित दिनचर्या अपनाकर बारिश के मौसम में भी त्वचा को साफ, ताजा और स्वस्थ बनाए रखा जा सकता है।

  • मोबाइल का लगातार बढ़ता इस्तेमाल बन रहा टेक्स्ट नेक सिंड्रोम की वजह, समय से पहले कमजोर हो सकती है गर्दन

    मोबाइल का लगातार बढ़ता इस्तेमाल बन रहा टेक्स्ट नेक सिंड्रोम की वजह, समय से पहले कमजोर हो सकती है गर्दन

    नई दिल्ली ।डिजिटल तकनीक ने लोगों की जिंदगी को पहले की तुलना में अधिक आसान बनाया है, लेकिन इसके लगातार और गलत तरीके से इस्तेमाल के कारण कई नई स्वास्थ्य समस्याएं भी सामने आ रही हैं। इनमें टेक्स्ट नेक सिंड्रोम तेजी से बढ़ने वाली ऐसी समस्या है, जो लंबे समय तक मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप की स्क्रीन पर झुककर देखने की आदत से जुड़ी मानी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते सही सावधानी नहीं बरती गई, तो यह समस्या गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती है।

    टेक्स्ट नेक सिंड्रोम मुख्य रूप से गर्दन और सर्वाइकल स्पाइन से संबंधित समस्या है। जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक सिर को आगे झुकाकर मोबाइल या अन्य डिजिटल स्क्रीन देखता है, तो गर्दन की मांसपेशियों और रीढ़ पर सामान्य से कई गुना अधिक दबाव पड़ने लगता है। सामान्य स्थिति में सिर का भार सीमित रहता है, लेकिन जैसे-जैसे सिर आगे की ओर झुकता है, गर्दन को अधिक वजन संभालना पड़ता है। यही अतिरिक्त दबाव धीरे-धीरे मांसपेशियों में थकान, दर्द और संरचनात्मक बदलाव का कारण बन सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार मोबाइल देखने की आदत गर्दन की मांसपेशियों को तनावग्रस्त बनाए रखती है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और रीढ़ की प्राकृतिक बनावट भी प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि इसे डिजिटल युग से जुड़ी ऐसी समस्या माना जा रहा है, जो समय से पहले गर्दन को कमजोर और कम लचीला बना सकती है।

    इस समस्या के कई शुरुआती संकेत दिखाई दे सकते हैं। गर्दन में लगातार दर्द या अकड़न, कंधों में जकड़न, पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द, बार-बार सिरदर्द, गर्दन घुमाने में कठिनाई, मांसपेशियों में खिंचाव तथा हाथों या उंगलियों में सुन्नपन जैसे लक्षण इसके प्रमुख संकेत माने जाते हैं। कुछ लोगों में लंबे समय तक गलत पोश्चर बनाए रखने के कारण कंधे झुकने और गर्दन आगे की ओर निकलने जैसी शारीरिक स्थिति भी विकसित हो सकती है। ऐसे लक्षण लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक माना जाता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि टेक्स्ट नेक सिंड्रोम का सबसे बड़ा कारण आधुनिक जीवनशैली और स्क्रीन के सामने बिताया जाने वाला लंबा समय है। बिना ब्रेक लिए लगातार मोबाइल चलाना, लैपटॉप पर गलत मुद्रा में काम करना, लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना और कार्यस्थल पर उचित एर्गोनॉमिक व्यवस्था का अभाव इस समस्या के जोखिम को बढ़ा सकता है। बच्चों और युवाओं में बढ़ता स्क्रीन टाइम भी चिंता का विषय माना जा रहा है।

    इस समस्या से बचाव के लिए कुछ सरल आदतों को अपनाना प्रभावी हो सकता है। मोबाइल या टैबलेट का उपयोग करते समय स्क्रीन को आंखों के स्तर के करीब रखने का प्रयास करना चाहिए, ताकि गर्दन को बार-बार नीचे न झुकाना पड़े। बैठते समय रीढ़ को सीधा रखना और कंधों को संतुलित स्थिति में रखना भी जरूरी है। लगातार स्क्रीन देखने के बजाय नियमित अंतराल पर छोटे-छोटे ब्रेक लेना, गर्दन और ऊपरी पीठ की हल्की स्ट्रेचिंग करना तथा शारीरिक गतिविधि को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाना भी लाभदायक माना जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल उपकरणों का संतुलित और सही तरीके से उपयोग करने के साथ-साथ सही पोश्चर अपनाकर टेक्स्ट नेक सिंड्रोम के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते सुधारात्मक कदम उठाना लंबे समय तक गर्दन और रीढ़ के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।