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  • दही के साथ ये चीजें खाना पड़ सकता है भारी, पेट की गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है

    दही के साथ ये चीजें खाना पड़ सकता है भारी, पेट की गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है


    नई दिल्ली। दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन तंत्र के लिए बेहद लाभकारी होते हैं। यह शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ आंतों के स्वास्थ्य को भी सुधारता है। लेकिन इसका लाभ तभी मिलता है जब इसे सही तरीके से और सही खाद्य पदार्थों के साथ खाया जाए।

    दूध और दही साथ में खाने से बचें
    दूध और दही दोनों ही डेयरी उत्पाद हैं, लेकिन इन्हें एक साथ या एक ही समय पर खाने से पाचन पर असर पड़ सकता है। इससे गैस, एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं क्योंकि दोनों अलग-अलग तरीके से पचते हैं।

    मछली और दही का कॉम्बिनेशन भी नुकसानदायक
    आयुर्वेद और एक्सपर्ट्स के अनुसार मछली और दही को साथ में नहीं खाना चाहिए। दोनों ही प्रोटीन से भरपूर होते हैं और इन्हें एक साथ लेने पर पाचन तंत्र पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे अपच और त्वचा संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।

    तला-भुना और ऑयली खाना बढ़ा सकता है परेशानी
    दही के साथ ज्यादा तला-भुना या ऑयली फूड लेने से पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इससे पेट में भारीपन, सुस्ती और अपच जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

    अचार और फर्मेंटेड फूड्स से दूरी रखें
    दही को अचार या अन्य फर्मेंटेड फूड्स के साथ खाना भी सही नहीं माना जाता। दोनों में बैक्टीरिया की मात्रा अधिक होती है, जिससे आंतों का संतुलन बिगड़ सकता है और पेट खराब हो सकता है।

    कुछ फलों के साथ भी न खाएं दही
    तरबूज, खरबूजा जैसे अधिक पानी वाले फलों के साथ दही का सेवन भी नुकसान पहुंचा सकता है। इससे डाइजेस्टिव सिस्टम प्रभावित होता है और गैस या फर्मेंटेशन की समस्या हो सकती है।

    एक्सपर्ट्स की सलाह
    विशेषज्ञों का कहना है कि दही को हमेशा हल्के और संतुलित भोजन जैसे रोटी, खिचड़ी या सब्जियों के साथ ही खाना चाहिए। सही फूड कॉम्बिनेशन अपनाकर ही दही के पूरे स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं और पाचन संबंधी समस्याओं से बचा जा सकता है।

  • आंगन की सही दिशा में पौधे लगाने से मिल सकती है सांपों से राहत..

    आंगन की सही दिशा में पौधे लगाने से मिल सकती है सांपों से राहत..

    नई दिल्ली।
    बरसात और गर्मी के मौसम में कई इलाकों में सांपों के घरों की ओर आने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। मौसम में बदलाव के कारण जब उनके प्राकृतिक ठिकाने प्रभावित होते हैं, तो वे सूखी और सुरक्षित जगह की तलाश में मानव बस्तियों की ओर बढ़ सकते हैं। ऐसे समय में लोग अक्सर चिंता में आ जाते हैं और सुरक्षा के उपाय ढूंढने लगते हैं।

    वास्तु शास्त्र में ऐसे कुछ पौधों का उल्लेख मिलता है जिन्हें घर के आसपास लगाने से वातावरण संतुलित रहता है और कई प्रकार के जीवों से दूरी बनाए रखने में मदद मिलती है। इन्हें सही दिशा में लगाने पर घर के चारों ओर एक तरह का प्राकृतिक सुरक्षा घेरा बनने की बात कही जाती है।

    इनमें एक प्रमुख पौधा स्नेक प्लांट माना जाता है, जो अपने लंबे और नुकीले पत्तों के कारण अलग पहचान रखता है। इसे घर के दक्षिण या दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार यह पौधा न केवल वातावरण को शुद्ध करने में मदद करता है, बल्कि घर के आसपास नमी को नियंत्रित रखने में भी सहायक होता है, जिससे अनचाहे जीवों के आने की संभावना कम मानी जाती है।

    दूसरा महत्वपूर्ण पौधा गेंदा है, जिसे आमतौर पर सजावट और धार्मिक कार्यों में उपयोग किया जाता है। इसकी तेज सुगंध और रंग-बिरंगे फूल इसे खास बनाते हैं। वास्तु के अनुसार इसे घर की उत्तर या पूर्व दिशा में लगाना बेहतर माना जाता है। कई लोग इसे घर की सीमा या बाउंड्री पर भी लगाते हैं ताकि इसका प्रभाव पूरे क्षेत्र में बना रहे।

    मान्यता है कि इन पौधों की गंध और बनावट कुछ जीवों के लिए असहज वातावरण पैदा करती है, जिससे वे उस स्थान से दूर रहना पसंद करते हैं। हालांकि यह पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है, फिर भी पारंपरिक रूप से इसे एक सरल और प्राकृतिक उपाय के रूप में अपनाया जाता रहा है।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल भी जरूरी होती है। पौधों को सही मात्रा में पानी देना, उन्हें साफ-सुथरी और धूप वाली जगह पर रखना आवश्यक माना गया है। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि पौधों के आसपास गंदगी, लकड़ियां या कबाड़ जमा नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे उनका प्रभाव कम हो सकता है और अनचाहे जीव वहां छिप सकते हैं।

    यह भी माना जाता है कि सूखे या मुरझाए पौधे घर के वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं, इसलिए उन्हें समय पर बदल देना चाहिए।

    कुल मिलाकर, सही दिशा में लगाए गए ये सामान्य पौधे घर की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ एक सुरक्षित और संतुलित वातावरण बनाने में भी सहायक माने जाते हैं। हालांकि किसी भी गंभीर स्थिति में विशेषज्ञ सलाह लेना हमेशा जरूरी होता है।

  • सुबह की ये ड्रिंक्स कंट्रोल कर सकती हैं हाई BP, दिल की सेहत को मिल सकता है सपोर्ट

    सुबह की ये ड्रिंक्स कंट्रोल कर सकती हैं हाई BP, दिल की सेहत को मिल सकता है सपोर्ट

    नई दिल्ली।
    हाई ब्लड प्रेशर आज के समय में एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, जो जीवनशैली और खानपान से सीधे जुड़ी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार इस स्थिति को नियंत्रित रखने में दवाओं के साथ-साथ रोजमर्रा की आदतों का भी बड़ा योगदान होता है। खासकर सुबह की दिनचर्या इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    सुबह की शुरुआत अगर सही और संतुलित ड्रिंक के साथ की जाए तो शरीर का मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। ऐसे में कुछ प्राकृतिक पेय पदार्थों को नियमित रूप से सेवन करने की सलाह दी जाती है, जो शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ दिल की सेहत के लिए भी लाभकारी माने जाते हैं।

    सुबह हल्का गर्म नींबू पानी एक सरल और उपयोगी विकल्प माना जाता है। इसमें मौजूद विटामिन सी और प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में सहायक हो सकते हैं। यह शरीर को ताजगी देने के साथ दिन की अच्छी शुरुआत करने में मदद करता है।

    इसके अलावा नारियल पानी को भी एक अच्छा विकल्प माना जाता है। इसमें पोटैशियम की अच्छी मात्रा होती है, जो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। संतुलित इलेक्ट्रोलाइट्स रक्तचाप को स्थिर रखने में सहायक माने जाते हैं।

    चुकंदर का जूस भी उन ड्रिंक्स में शामिल है, जिन्हें अक्सर हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना जाता है। इसमें प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं जो रक्त वाहिकाओं को रिलैक्स करने में मदद कर सकते हैं। इसे बिना अतिरिक्त चीनी के सेवन करने की सलाह दी जाती है ताकि इसका प्राकृतिक लाभ बना रहे।

    ग्रीन टी भी एक लोकप्रिय विकल्प है, जिसे हल्के रूप में सेवन करने पर शरीर को कई तरह के फायदे मिल सकते हैं। इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर के मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखने और तनाव को कम करने में मदद कर सकते हैं।

    आंवला जूस को भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ हृदय पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

    इन ड्रिंक्स के साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि कुछ आदतों से बचा जाए। विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक कैफीन वाले पेय, शुगर युक्त ड्रिंक्स और पैकेज्ड जूस का अधिक सेवन ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकता है।

    कुल मिलाकर, सुबह की सही आदतें और प्राकृतिक पेय पदार्थों का संतुलित सेवन जीवनशैली को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक माना जाता है।

  • भुजंगासन से पाएं स्ट्रेस और पीठ दर्द से राहत, शरीर बनेगा लचीला

    भुजंगासन से पाएं स्ट्रेस और पीठ दर्द से राहत, शरीर बनेगा लचीला


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, गलत बैठने की आदत और अनियमित दिनचर्या के कारण लोग कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में योग एक प्राकृतिक और प्रभावी समाधान के रूप में सामने आता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, भुजंगासन यानी कोबरा पोज एक ऐसा सरल योगासन है जो शरीर और मन दोनों को संतुलित करने में मदद करता है।
    यह आसन विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद माना जाता है जो स्ट्रेस, कब्ज, पेट की चर्बी, पीठ दर्द या सांस संबंधी समस्याओं से परेशान रहते हैं। नियमित अभ्यास से शरीर में ऊर्जा का संचार बढ़ता है और थकान कम महसूस होती है।
    भुजंगासन रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाता है। यह पीठ की जकड़न को दूर करने में मदद करता है, जिससे लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों को काफी राहत मिलती है। साथ ही यह मुद्रा संबंधी दर्द को भी कम करता है।
    इस योगासन का पाचन तंत्र पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह आंतों की गतिविधि को सुधारकर कब्ज जैसी समस्या को दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा यह पेट की चर्बी घटाने में भी सहायक माना जाता है, जिससे शरीर फिट और संतुलित रहता है।
    मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी भुजंगासन काफी लाभकारी है। यह तनाव और मानसिक थकान को कम करता है क्योंकि यह श्वास प्रक्रिया को बेहतर बनाता है और शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाता है। इससे मन शांत होता है और एकाग्रता बढ़ती है।
    सांस संबंधी समस्याओं जैसे ब्रोंकाइटिस में भी यह आसन राहत पहुंचाने में मदद कर सकता है। छाती खुलने से सांस लेने की क्षमता बेहतर होती है और फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है।
    भुजंगासन करने की प्रक्रिया भी बेहद सरल है। इसके लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं। फिर हथेलियों को कंधों के नीचे रखें और धीरे-धीरे सांस लेते हुए छाती और सिर को ऊपर उठाएं। ध्यान रखें कि कमर पर ज्यादा दबाव न पड़े। इस स्थिति में 15 से 30 सेकंड तक रहें और फिर धीरे-धीरे वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं। शुरुआत में इसे 3 से 5 बार करना पर्याप्त होता है।
    आयुष मंत्रालय का कहना है कि भुजंगासन न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक संतुलन भी बनाए रखता है। यह शरीर की जकड़न को दूर कर उसे अधिक सक्रिय और ऊर्जावान बनाता है।
    हालांकि, जिन लोगों को गंभीर पीठ दर्द, हाल ही में सर्जरी या कोई पुरानी बीमारी है, उन्हें इस आसन का अभ्यास करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
  • पाचन से लेकर इम्यूनिटी तक, पपीता है हर समस्या का प्राकृतिक समाधान

    पाचन से लेकर इम्यूनिटी तक, पपीता है हर समस्या का प्राकृतिक समाधान


    नई दिल्ली। पपीता एक ऐसा फल है जिसे सेहत के लिए प्राकृतिक औषधि माना जाता है। स्वाद में मीठा और रसीला यह फल न सिर्फ खाने में आसान है, बल्कि इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर को कई तरह से लाभ पहुंचाते हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार पपीता विटामिन ए, सी, ई, फोलेट, पोटैशियम और फाइबर का बेहतरीन स्रोत है, जो शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने में मदद करता है।
    पपीते में मौजूद पेपेन एंजाइम पाचन तंत्र के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। यह भोजन को आसानी से पचाने में मदद करता है और कब्ज, गैस व अपच जैसी समस्याओं को कम करता है। नियमित सेवन से पेट स्वस्थ रहता है और पाचन क्रिया मजबूत होती है।
    इसमें मौजूद विटामिन सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इससे सर्दी-जुकाम, वायरल संक्रमण और अन्य मौसमी बीमारियों से लड़ने की शक्ति मिलती है। यही कारण है कि बदलते मौसम में पपीता को बेहद फायदेमंद माना जाता है।
    पपीता त्वचा के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है। इसके एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को चमकदार बनाने, दाग-धब्बों को कम करने और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद करते हैं। नियमित सेवन से त्वचा स्वस्थ और साफ बनी रहती है।
    हड्डियों की मजबूती के लिए भी पपीता बहुत उपयोगी है। इसमें मौजूद विटामिन K और कैल्शियम हड्डियों की घनत्व (bone density) को बढ़ाने में मदद करते हैं। इससे हड्डियां मजबूत बनती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा कम होता है। विशेष रूप से बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह फल बेहद लाभकारी माना जाता है।
    इसके अलावा पपीता बालों के लिए भी फायदेमंद है। इसमें मौजूद विटामिन A और E बालों की जड़ों को पोषण देते हैं, जिससे बाल मजबूत और चमकदार बनते हैं। यह बालों के झड़ने को कम करने और डैंड्रफ जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में भी मदद करता है।
    विशेषज्ञों के अनुसार पपीता केवल पका हुआ ही नहीं, बल्कि कच्चा भी सब्जी के रूप में खाया जा सकता है। दोनों ही रूपों में यह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। हालांकि किसी गंभीर बीमारी या विशेष स्वास्थ्य स्थिति में इसके सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
  • बार-बार हो रहे हैं बीमार? अपनाएं ये आसान इम्यूनिटी बूस्टर टिप्स

    बार-बार हो रहे हैं बीमार? अपनाएं ये आसान इम्यूनिटी बूस्टर टिप्स


    नई दिल्ली। मौसम में बदलाव के साथ ही सर्दी-जुकाम, वायरल संक्रमण और अन्य बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ने लगता है। कभी तेज गर्मी तो कभी अचानक बारिश और ठंडी हवाएं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर डालती हैं। ऐसे समय में मजबूत इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरक्षा तंत्र ही शरीर की सबसे बड़ी सुरक्षा बनता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि रोजमर्रा की कुछ अच्छी आदतों को अपनाया जाए तो इम्यूनिटी को प्राकृतिक तरीके से मजबूत बनाया जा सकता है।

    आयुष विभाग, छत्तीसगढ़ के अनुसार, इम्यून सिस्टम शरीर को संक्रमण और बीमारियों से लड़ने की ताकत देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं पर निर्भर रहने से बेहतर है कि अपनी दिनचर्या और खानपान को संतुलित बनाया जाए। छोटी-छोटी हेल्दी आदतें लंबे समय तक शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं।

    इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए सबसे जरूरी है पर्याप्त और गहरी नींद लेना। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद शरीर की रिकवरी और इम्यून सेल्स को सक्रिय रखने के लिए बेहद आवश्यक है। अनियमित नींद या देर रात तक जागना शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर सकता है।

    दूसरा महत्वपूर्ण उपाय है संतुलित और पौष्टिक आहार। फल, हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, मेवे और दही जैसी चीजें शरीर को जरूरी पोषक तत्व देती हैं। खासकर विटामिन-सी, विटामिन-डी, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर भोजन इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है। वहीं अधिक चीनी, तला-भुना और जंक फूड शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है।

    विशेषज्ञ नियमित व्यायाम को भी बेहद जरूरी मानते हैं। रोजाना 30 से 45 मिनट तक टहलना, योग, प्राणायाम या हल्की एक्सरसाइज करने से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और इम्यून सेल्स अधिक सक्रिय रहती हैं। इससे शरीर में सूजन कम होती है और फिटनेस बनी रहती है।

    तनाव को नियंत्रित रखना भी मजबूत इम्यून सिस्टम के लिए जरूरी है। लगातार तनाव और चिंता शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर सकते हैं। ध्यान, मेडिटेशन, संगीत सुनना या पसंदीदा हॉबी अपनाने से मानसिक तनाव कम होता है और शरीर स्वस्थ रहता है।

    इसके अलावा शरीर को हाइड्रेटेड रखना बेहद आवश्यक है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलते हैं और शरीर की कोशिकाएं सक्रिय रहती हैं। नींबू पानी, छाछ और हर्बल टी जैसे हेल्दी ड्रिंक्स भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि किसी व्यक्ति को पहले से कोई गंभीर बीमारी है, तो इन उपायों को अपनाने से पहले डॉक्टर या आयुष विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

  • 90 दिन जंक फूड से दूरी ने बदली जिंदगी, शरीर ने खुद संभाला हेल्थ का बैलेंस..

    90 दिन जंक फूड से दूरी ने बदली जिंदगी, शरीर ने खुद संभाला हेल्थ का बैलेंस..

    नई दिल्ली।25 साल की पूजा की जिंदगी शहर में आने के बाद काफी बदल चुकी थी। पढ़ाई और नौकरी के बीच बाहर का खाना उसकी रोजमर्रा की आदत बन गया था। पिज्जा, बर्गर और फ्राइड फूड उसके लिए सामान्य विकल्प थे, क्योंकि तेज रफ्तार जिंदगी में यही सबसे आसान रास्ता लगता था। शुरुआत में उसे इस पर कोई खास ध्यान नहीं था, लेकिन धीरे-धीरे शरीर ने संकेत देने शुरू कर दिए। लगातार एसिडिटी, पेट में भारीपन, थकान और चेहरे की चमक कम होने जैसी समस्याएं उसे परेशान करने लगीं।

    इन बदलावों को महसूस करने के बाद उसने अपने खाने की आदतों पर ध्यान देना शुरू किया और एक दिन खुद को चुनौती दी कि वह 90 दिनों तक पूरी तरह जंक फूड से दूरी बनाए रखेगी। यह फैसला उसके लिए आसान नहीं था, क्योंकि यह उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका था। शुरुआत के दिन काफी कठिन रहे, जब बार-बार बाहर का स्वादिष्ट खाना खाने की इच्छा होती थी और पुरानी आदतें उसे बार-बार आकर्षित करती थीं।

    पहले हफ्ते में सबसे बड़ी चुनौती क्रेविंग्स थीं। शाम के समय खासकर तला-भुना या मसालेदार खाना खाने की इच्छा इतनी बढ़ जाती थी कि वह कई बार अपने निर्णय पर दोबारा सोचने लगती थी। लेकिन उसने खुद को व्यस्त रखने और घर के खाने पर ध्यान देने का तरीका अपनाया। धीरे-धीरे उसने घर पर ही हेल्दी और स्वादिष्ट विकल्प तैयार करने शुरू किए, जिससे उसका मन भी संतुष्ट रहने लगा और शरीर को भी बेहतर पोषण मिलने लगा।

    तीसरे हफ्ते तक पहुंचते-पहुंचते उसके शरीर में बदलाव दिखने लगे। पाचन पहले से बेहतर हो गया और पेट की समस्याएं काफी हद तक कम हो गईं। जो असहजता और भारीपन पहले रोज महसूस होता था, वह धीरे-धीरे खत्म होने लगा। इसके साथ ही उसकी ऊर्जा में भी सुधार आने लगा और वह पहले से ज्यादा हल्का महसूस करने लगी।

    एक महीने के बाद सबसे बड़ा बदलाव उसकी खाने की इच्छा में देखा गया। जो फूड पहले उसे बहुत आकर्षित करता था, अब उसकी क्रेविंग्स काफी कम हो चुकी थीं। उसे खुद भी आश्चर्य हुआ कि बिना जंक फूड के भी वह पूरी तरह संतुलित और सामान्य महसूस कर रही थी। धीरे-धीरे उसका शरीर नए पैटर्न के अनुसार ढल गया और पुरानी आदतें कमजोर पड़ने लगीं।

    90 दिनों का यह अनुभव उसके लिए सिर्फ एक डाइट चैलेंज नहीं रहा, बल्कि पूरी जीवनशैली बदलने वाली प्रक्रिया बन गया। इस दौरान उसने समझा कि शरीर को अगर सही पोषण और संतुलन मिले तो वह खुद ही अपने आप को बेहतर तरीके से संभाल सकता है। अब उसकी आदतें पहले से ज्यादा स्वस्थ हो चुकी थीं और वह अपनी दिनचर्या में अधिक ऊर्जा और संतुलन महसूस कर रही थी।

  • गर्मी का कहर: हीट स्ट्रोक से बचना है तो अपनाएं ये जरूरी उपाय

    गर्मी का कहर: हीट स्ट्रोक से बचना है तो अपनाएं ये जरूरी उपाय


    नई दिल्ली। गर्मी का मौसम अपने चरम पर पहुंचते ही सेहत पर गंभीर असर डालने लगता है। तेज धूप, लू और बढ़ता तापमान शरीर को कमजोर कर देता है, जिससे Heat Stroke यानी लू लगने का खतरा काफी बढ़ जाता है। अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए, तो यह स्थिति गंभीर भी हो सकती है।
    जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, शरीर का संतुलन बिगड़ने लगता है। मौसम विभाग भी आने वाले दिनों में और भीषण गर्मी की चेतावनी दे रहा है, ऐसे में खुद को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। सबसे पहली बात—गर्मी में अपनी सेहत को नजरअंदाज बिल्कुल न करें। यदि आप असहज महसूस करते हैं, तो तुरंत ठंडी जगह पर जाएं और पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
    हीट स्ट्रोक के लक्षण पहचानें
    हीट स्ट्रोक के शुरुआती संकेतों को समझना बहुत जरूरी है। अचानक चक्कर आना, तेज सिरदर्द, मांसपेशियों में ऐंठन, अत्यधिक पसीना आना या पसीना बंद हो जाना, शरीर का तापमान बढ़ जाना ये सभी गंभीर संकेत हो सकते हैं। कई मामलों में व्यक्ति को कमजोरी, उलझन या बेहोशी भी महसूस हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
    हीट स्ट्रोक में तुरंत क्या करें?
    अगर किसी को लू लगने का शक हो, तो उसे तुरंत ठंडी और हवादार जगह पर ले जाएं। शरीर को ठंडा करने के लिए गीले कपड़े का इस्तेमाल करें और लगातार तापमान पर नजर रखें। इस दौरान शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए Oral Rehydration Solution (ओआरएस), नींबू पानी, छाछ या नमक-शक्कर का घोल देना फायदेमंद होता है।
    यदि हालत में सुधार न हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि गंभीर स्थिति में यह जानलेवा भी हो सकता है।
    बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
    हीट स्ट्रोक से बचने के लिए दिन के समय, खासकर दोपहर में धूप में निकलने से बचें। हल्के और ढीले कपड़े पहनें, सिर को ढककर रखें और समय-समय पर पानी पीते रहें। खानपान में तरल पदार्थ और फल शामिल करें, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।
    कुल मिलाकर, गर्मी के इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। इसलिए सतर्क रहें, लक्षणों को पहचानें और समय रहते सही कदम उठाकर खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखें।
  • सिर्फ 5 मिनट में घर पर पाएं पार्लर जैसे सॉफ्ट और चमकदार हाथ, आसान DIY ट्रिक से बदल जाएगी स्किन

    सिर्फ 5 मिनट में घर पर पाएं पार्लर जैसे सॉफ्ट और चमकदार हाथ, आसान DIY ट्रिक से बदल जाएगी स्किन

    नई दिल्ली।रोजमर्रा की जिंदगी में हमारे हाथ सबसे ज्यादा काम करते हैं और इसका असर धीरे-धीरे उनकी त्वचा पर साफ दिखाई देने लगता है। धूल, धूप, पानी और लगातार काम करने की वजह से हाथों की स्किन अपनी नमी खो देती है और रूखी व बेजान नजर आने लगती है। कई लोग इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए पार्लर में महंगे ट्रीटमेंट करवाते हैं, लेकिन हर बार ऐसा करना आसान नहीं होता। ऐसे में घर में मौजूद एक साधारण चीज, चीनी, हाथों की देखभाल के लिए बेहद आसान और असरदार उपाय साबित हो सकती है।
    चीनी को प्राकृतिक स्क्रब के रूप में इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि इसके छोटे-छोटे दाने त्वचा की ऊपरी परत पर जमी डेड स्किन को धीरे-धीरे हटाने में मदद करते हैं। इससे त्वचा साफ होती है और उसकी प्राकृतिक चमक वापस आने लगती है। जब चीनी को शहद, नींबू और तेल के साथ मिलाया जाता है, तो यह एक ऐसा मिश्रण बन जाता है जो स्किन को साफ करने के साथ-साथ उसे गहराई से मॉइस्चराइज भी करता है।
    इस होममेड मैनीक्योर को तैयार करना बहुत ही आसान है और इसमें ज्यादा समय भी नहीं लगता। इसके लिए एक चम्मच चीनी, आधा चम्मच शहद, कुछ बूंदें नींबू का रस और एक चम्मच नारियल तेल या ऑलिव ऑयल की जरूरत होती है। इन सभी चीजों को एक छोटी कटोरी में मिलाकर एक गाढ़ा स्क्रब तैयार किया जाता है। अगर हाथ ज्यादा रूखे हों, तो तेल की मात्रा थोड़ी बढ़ाई जा सकती है ताकि स्किन को अतिरिक्त नमी मिल सके।
    मैनीक्योर शुरू करने से पहले हाथों को हल्के गुनगुने पानी में कुछ मिनट के लिए भिगोना चाहिए, जिससे त्वचा नरम हो जाए और स्क्रब का असर बेहतर हो सके। इसके बाद तैयार स्क्रब को हाथों पर हल्के हाथों से धीरे-धीरे मसाज करते हुए लगाना चाहिए। लगभग 3 से 5 मिनट तक मसाज करने से डेड स्किन हटने लगती है और हाथों की सतह स्मूद महसूस होने लगती है।
    इसके बाद हाथों को साफ पानी से धो लेना चाहिए और तुरंत मॉइस्चराइजर या हैंड क्रीम लगानी चाहिए ताकि त्वचा में नमी लॉक हो जाए। यह पूरी प्रक्रिया बहुत ही आसान है और इसे सप्ताह में एक या दो बार किया जाए तो हाथों की स्किन में साफ बदलाव देखा जा सकता है।
    इस घरेलू मैनीक्योर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं होता, जिससे यह पूरी तरह सुरक्षित और प्राकृतिक तरीका बन जाता है। यह उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी है जो अपने हाथों की देखभाल कम समय और कम खर्च में करना चाहते हैं। नियमित रूप से इस उपाय को अपनाने से हाथ धीरे-धीरे ज्यादा सॉफ्ट, साफ और चमकदार नजर आने लगते हैं, जैसे किसी प्रोफेशनल ट्रीटमेंट के बाद होते हैं।
  • इस समर ट्राई करें ठंडा-ठंडा Grapes Mojito, मिनटों में मिलेगा कूलिंग इफेक्ट

    इस समर ट्राई करें ठंडा-ठंडा Grapes Mojito, मिनटों में मिलेगा कूलिंग इफेक्ट


    नई दिल्ली। गर्मी का मौसम आते ही ठंडी और रिफ्रेशिंग ड्रिंक्स की डिमांड बढ़ जाती है। तेज धूप और गर्म हवाओं से राहत पाने के लिए लोग अक्सर कोल्ड ड्रिंक या अन्य पेय पदार्थों का सहारा लेते हैं, लेकिन अगर आप कुछ हेल्दी और टेस्टी ट्राई करना चाहते हैं, तो Grapes Mojito आपके लिए परफेक्ट ऑप्शन हो सकता है। यह ड्रिंक न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है, बल्कि तुरंत एनर्जी भी प्रदान करता है।
    Grapes Mojito खासतौर पर गर्मियों में इसलिए फायदेमंद माना जाता है क्योंकि इसमें अंगूर, पुदीना और नींबू जैसे तत्व होते हैं। अंगूर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को हाइड्रेट रखते हैं और डिहाइड्रेशन से बचाते हैं। वहीं पुदीना पेट को ठंडा रखता है और पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है, जबकि नींबू शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है।
    जरूरी सामग्री
    इस स्वादिष्ट ड्रिंक को बनाने के लिए आपको 1 कप हरे या काले अंगूर, 8-10 पुदीने की पत्तियां, 1 नींबू (टुकड़ों में कटा हुआ), 1-2 चम्मच चीनी या शहद, एक चुटकी काला नमक (वैकल्पिक), बर्फ के टुकड़े, 1 कप सोडा या स्पार्कलिंग वॉटर और आधा कप ठंडा पानी चाहिए।
    बनाने की आसान विधि
    सबसे पहले अंगूर को अच्छी तरह धोकर साफ कर लें। इसके बाद मिक्सर में अंगूर, पुदीना, नींबू का रस, चीनी और काला नमक डालकर स्मूद पेस्ट बना लें। इस मिश्रण को छानकर एक गिलास में डालें। अब इसमें बर्फ के टुकड़े डालें और ऊपर से सोडा या स्पार्कलिंग वॉटर मिलाएं। धीरे-धीरे इसे मिक्स करें ताकि इसका स्वाद बरकरार रहे।
    अब तैयार Mojito को अंगूर और पुदीने की पत्तियों से सजाकर ठंडा-ठंडा सर्व करें। यह ड्रिंक न सिर्फ दिखने में आकर्षक लगता है, बल्कि स्वाद में भी बेहद लाजवाब होता है।
    क्यों है खास ये ड्रिंक?
    घर पर बना Grapes Mojito पूरी तरह नेचुरल होता है, जिसमें किसी तरह का आर्टिफिशियल फ्लेवर या प्रिजर्वेटिव नहीं होता। यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए एक हेल्दी ऑप्शन है। साथ ही, इसे आप पार्टी, गेट-टुगेदर या रोजमर्रा की गर्मी से राहत पाने के लिए कभी भी बना सकते हैं।
    इस गर्मी में खुद को कूल और एनर्जेटिक रखने के लिए इस आसान और स्वादिष्ट Grapes Mojito को जरूर ट्राई करें।