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  • Sprouts Health Tips: हर किसी को नहीं सूट करता अंकुरित आहार, ये लोग जरूर बरतें सावधानी

    Sprouts Health Tips: हर किसी को नहीं सूट करता अंकुरित आहार, ये लोग जरूर बरतें सावधानी


    नई दिल्ली:अंकुरित अनाज या स्प्राउट्स आज के समय में सेहत के प्रति जागरूक लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। प्रोटीन और फाइबर से भरपूर यह आहार शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ मांसपेशियों और कोशिकाओं के निर्माण में भी मदद करता है। लेकिन क्या यह सभी के लिए समान रूप से फायदेमंद है? आयुर्वेद के अनुसार इसका जवाब है नहीं।

    आयुर्वेद में अंकुरित आहार को संतुलित तरीके से और सही व्यक्ति के लिए ही उपयुक्त माना गया है। अंकुरित आहार पचने में थोड़ा भारी होता है और अगर इसे गलत तरीके से खाया जाए तो यह शरीर में वात दोष को बढ़ा सकता है। इससे गैस, पेट फूलना और शरीर में रूखापन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए विशेषज्ञ हमेशा इसे सीमित मात्रा में और सही तरीके से खाने की सलाह देते हैं।

    विशेष रूप से उन लोगों को अंकुरित आहार से सावधान रहना चाहिए जिनका पाचन कमजोर है। अगर किसी व्यक्ति को कब्ज, अपच या मंद पाचन की समस्या रहती है, तो उन्हें स्प्राउट्स का सेवन कम या बंद कर देना चाहिए। कमजोर पाचन तंत्र में यह आहार सही तरीके से पच नहीं पाता और इससे शरीर में टॉक्सिन्स बनने लगते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

    इसके अलावा, छोटे बच्चों और बुजुर्गों को भी अंकुरित आहार देने से बचना चाहिए। इस उम्र में पाचन तंत्र अपेक्षाकृत कमजोर होता है, जिससे स्प्राउट्स का पाचन कठिन हो सकता है। इसी तरह जिन लोगों का स्वभाव वात प्रधान होता है, उन्हें भी इसका सेवन बहुत सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि यह वात को और बढ़ा सकता है।

    अंकुरित आहार का सेवन करते समय उसकी सही विधि भी बेहद महत्वपूर्ण है। आयुर्वेद के अनुसार, स्प्राउट्स को कच्चा खाने से बचना चाहिए। बेहतर है कि उन्हें हल्का उबालकर या पकाकर, घी या तेल के साथ खाया जाए। इससे पाचन आसान होता है और शरीर को अधिकतम पोषण मिल पाता है।

    एक और जरूरी बात यह है कि अंकुरित अनाज को सही समय पर खाया जाए। अंकुरण के तुरंत बाद ही इसका सेवन करना सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि अधिक समय तक रखने पर इसके पोषक तत्वों में कमी आ सकती है। ताजे स्प्राउट्स शरीर के लिए अधिक लाभकारी होते हैं।

    अंकुरित आहार को अपनी डाइट में शामिल करते समय संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है। इसे अपनी संपूर्ण डाइट का एक हिस्सा बनाएं, न कि पूरी डाइट का विकल्प। सही मात्रा, सही तरीका और सही व्यक्ति के अनुसार इसका सेवन करने पर यह सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।
    अंकुरित आहार एक पौष्टिक विकल्प जरूर है, लेकिन यह हर किसी के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं है। अपनी शारीरिक प्रकृति और पाचन क्षमता को ध्यान में रखते हुए ही इसका सेवन करना चाहिए, ताकि इसका लाभ मिले और कोई नुकसान न हो।

  • ट्रेडिशनल लुक में लगाएं ग्लैमर का तड़का हरी चूड़ियों के ट्रेंडी डिजाइन्स से पाएं परफेक्ट फेस्टिव स्टाइल

    ट्रेडिशनल लुक में लगाएं ग्लैमर का तड़का हरी चूड़ियों के ट्रेंडी डिजाइन्स से पाएं परफेक्ट फेस्टिव स्टाइल


    नई दिल्ली । नवरात्रि का पावन पर्व शुरू होते ही हर ओर भक्ति और उत्साह का माहौल बन जाता है और इस खास मौके पर हर कोई अपने लुक को सबसे अलग और आकर्षक बनाना चाहता है पारंपरिक परिधानों के साथ सही एक्सेसरीज का चुनाव ही पूरे लुक को निखारता है और जब बात नवरात्रि की हो तो हरी चूड़ियों का महत्व और भी बढ़ जाता है हरा रंग समृद्धि सकारात्मकता और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है यही कारण है कि इस त्योहार में हरी चूड़ियां पहनना शुभ भी माना जाता है और स्टाइलिश भी

    इस साल बाजार में हरी चूड़ियों के कई नए और यूनिक डिजाइन्स देखने को मिल रहे हैं जो आपके ट्रेडिशनल लुक को एक नया ट्विस्ट दे सकते हैं अब सिर्फ सादी कांच की चूड़ियों का जमाना नहीं रहा बल्कि फैंसी और डिजाइनर चूड़ियां ट्रेंड में हैं जो हर उम्र की महिलाओं को आकर्षित कर रही हैं

    इन दिनों कश्मीरी घुंघरू डिजाइन वाली हरी चूड़ियां काफी लोकप्रिय हो रही हैं इन चूड़ियों के किनारों पर लगे छोटे छोटे घुंघरू हाथों की हर हलचल के साथ मधुर ध्वनि पैदा करते हैं जो आपके लुक में एक अलग ही आकर्षण जोड़ते हैं यह डिजाइन खासतौर पर सिल्क साड़ी और भारी लहंगे के साथ बेहद खूबसूरत लगता है और आपको एक रॉयल और एलिगेंट लुक देता है

    अगर आप कुछ मॉडर्न और स्टाइलिश ट्राई करना चाहती हैं तो पोल्का डॉट डिजाइन वाली हरी चूड़ियां आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती हैं हरे रंग के बेस पर सफेद या गोल्डन डॉट्स वाली ये चूड़ियां सिंपल सूट या इंडो वेस्टर्न आउटफिट्स के साथ बहुत ही ग्रेसफुल लगती हैं खासकर युवा लड़कियों के बीच यह स्टाइल तेजी से ट्रेंड कर रहा है क्योंकि यह ट्रेडिशनल और मॉडर्न का परफेक्ट कॉम्बिनेशन है

    इसके अलावा स्टोन और थ्रेड वर्क वाली चूड़ियां भी इस सीजन में काफी पसंद की जा रही हैं कांच की हरी चूड़ियों के बीच में स्टोन जड़े कड़े या रेशमी धागों से सजी चूड़ियां आपके हाथों की खूबसूरती को और निखार देती हैं आप इन्हें अपने आउटफिट के अनुसार मिक्स एंड मैच करके भी पहन सकती हैं जिससे आपका लुक और ज्यादा आकर्षक बनता है

    हरी चूड़ियों को स्टाइल करने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उनका चयन अगर आप सिर्फ हरी चूड़ियां पहनने के बजाय उनके बीच में सुनहरे कड़े या डिजाइनर कंगन जोड़ती हैं तो आपका लुक और ज्यादा फेस्टिव और रिच दिखाई देता है अगर आपका आउटफिट प्लेन है तो आप घुंघरू वाली भारी चूड़ियां पहन सकती हैं वहीं अगर आपने पहले से ही हैवी वर्क वाला लहंगा या साड़ी पहनी है तो पतली कांच की चूड़ियां या पोल्का डॉट डिजाइन ज्यादा बेहतर लगेगा

    इसके साथ ही हरी चूड़ियों के साथ ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी या गोल्डन झुमके पहनने से आपका पूरा लुक संतुलित और स्टाइलिश नजर आता है सही कॉम्बिनेशन और थोड़ी सी क्रिएटिविटी के साथ आप इस नवरात्रि अपने पारंपरिक अंदाज में भी एक नया और आकर्षक ट्विस्ट जोड़ सकती हैं और हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच सकती हैं

  • घी के नाम पर जहर तो नहीं खा रहे आप? ऐसे करें असली और नकली घी की पहचान

    घी के नाम पर जहर तो नहीं खा रहे आप? ऐसे करें असली और नकली घी की पहचान


    नई दिल्ली:भारतीय रसोई में Ghee का महत्व बेहद खास होता है, चाहे पूजा पाठ हो या रोजमर्रा का खाना, घी हर घर में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन आजकल बाजार में मिलावटी घी की बढ़ती समस्या लोगों की सेहत के लिए चिंता का विषय बन गई है, ऐसे में जरूरी है कि हम असली और नकली घी की पहचान करना सीखें ताकि अपने परिवार को सुरक्षित और शुद्ध भोजन दे सकें

    घी की शुद्धता जांचने का सबसे आसान तरीका हथेली टेस्ट माना जाता है, इसके लिए थोड़ा सा घी हथेली पर रखें, असली घी शरीर की गर्माहट से धीरे धीरे पिघलता है, जबकि नकली घी या तो तुरंत पिघल जाता है या फिर बिल्कुल नहीं पिघलता, यह तरीका तुरंत परिणाम देने वाला और बेहद सरल है

    खुशबू के जरिए भी घी की पहचान की जा सकती है, शुद्ध घी में हल्की मीठी और दूध जैसी सुगंध होती है, जबकि मिलावटी घी में केमिकल जैसी गंध आ सकती है या फिर उसमें कोई खास खुशबू नहीं होती, अगर घी को हल्का गर्म किया जाए तो असली घी की खुशबू और ज्यादा उभरकर सामने आती है

    स्वाद भी घी की गुणवत्ता का एक महत्वपूर्ण संकेत देता है, असली घी का स्वाद हल्का मीठा और मुंह में घुल जाने वाला होता है, वहीं नकली घी जीभ पर चिपचिपा लग सकता है या उसका स्वाद अजीब सा महसूस हो सकता है, ऐसे संकेत मिलते ही सतर्क हो जाना चाहिए

    फ्रिज टेस्ट भी काफी प्रभावी माना जाता है, इसके लिए घी को एक कटोरी में डालकर कुछ समय के लिए फ्रिज में रख दें, शुद्ध घी जमने पर एक समान और दानेदार टेक्सचर दिखाता है, जबकि मिलावटी घी अलग अलग परतों में जम सकता है या असमान दिखाई देता है

    पानी में घी डालकर भी उसकी शुद्धता जांची जा सकती है, एक गिलास गुनगुने पानी में थोड़ा सा घी डालें, असली घी नीचे बैठ जाता है, जबकि नकली घी पानी में घुल सकता है या ऊपर तैरने लगता है, यह तरीका भी घर पर आसानी से किया जा सकता है

    एक और तरीका है घी को जलाकर देखना, एक चम्मच में थोड़ा घी लेकर जलाएं, शुद्ध घी साफ लौ के साथ जलता है और उसमें अच्छी खुशबू आती है, जबकि नकली घी जलने पर धुआं देता है या बदबू पैदा करता है

    घी खरीदते समय भी कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है, बहुत सस्ता घी खरीदने से बचें, खुले में बिकने वाले घी पर भरोसा न करें और हमेशा विश्वसनीय ब्रांड या डेयरी से ही खरीदारी करें, इसके अलावा घी का रंग बहुत ज्यादा सफेद या अत्यधिक पीला होना भी संदेह का संकेत हो सकता है

     थोड़ी सी जागरूकता और ये आसान घरेलू तरीके अपनाकर आप मिलावटी घी से बच सकते हैं और अपने परिवार को शुद्ध, स्वादिष्ट और सेहतमंद भोजन दे सकते हैं

  • Travel Tips: दोस्तों के साथ घूमने का बनाएं परफेक्ट प्लान, बैग पैक करें और निकल पड़ें

    Travel Tips: दोस्तों के साथ घूमने का बनाएं परफेक्ट प्लान, बैग पैक करें और निकल पड़ें


    नई दिल्ली।मार्च और अप्रैल का महीना घूमने-फिरने के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है। अगर आपके मन में भी इस समय ऐसा ही कुछ चल रहा हैं तो ये खबर आपके काफी काम की है। मार्च का समय ऐसा है इस समय न तो ज्यादा ठंड होती है और न ही तेज गर्मी, जिससे ट्रैवल का मजा दोगुना हो जाता है। अगर आप दोस्तों के साथ कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो ये समय बिल्कुल परफेक्ट है।

    इन जगहों पर जा सकते हैं
    आप अकेले को या दोस्तों के साथ आपके लिए ये ट्रिप और ये जगह काफी खास होने वाली है। ट्रिप का असली मजा तभी आता हैअपने दोस्त साथ हो और सुहाना मौसम और अच्छा नजारा।आप पहाड़ों की ठंडी वादियों का आनंद लेना चाहते हैं, तो मनाली और ऋषिकेश जैसे डेस्टिनेशन बेस्ट हैं। यहां आप एडवेंचर एक्टिविटीज जैसे रिवर राफ्टिंग, ट्रेकिंग और कैंपिंग का भी अच्छे से आनंद उठा सकते है।

    मुन्नार और ऊटी भी अच्छा ऑप्शन है
    अगर आपको हरियाली और शांति पसंद है, तो मुन्नार और ऊटी जैसी जगहें आपके लिए परफेक्ट हैं। यहां की खूबसूरत वादियां, चाय के बागान और ठंडी हवाएं आपके ट्रिप को यादगार बना देंगी।जहां आपको काफी अच्छे नजारे देखने को मिलेंगे। आप यहां कई यादें अपने कैमरे में भी कैद कर सकते है।

    बीच और पार्टी
    अगर आपको बीच और पार्टी का मजा लेना हो तो गोवा काफी अच्छा ऑप्शन हो सकता है। यहां दोस्तों के साथ बीच पर मस्ती, वाटर स्पोर्ट्स और नाइटलाइफ का अलग ही एक्सपीरियंस मिलता है।गोवा में सबसे पहले आपको बागा बीच और कैलंगुट बीच जरूर जाना चाहिए। ये बीच अपनी साफ रेत, वाटर स्पोर्ट्स और मस्ती भरे माहौल के लिए मशहूर हैं।इसके अलावा, दूधसागर झरना भी देखने लायक है, जहां की प्राकृतिक खूबसूरती आपका मन मोह लेगी।

    इन जगहों पर जा कर आप अपने परिवार या दोस्तों के साथ काफी अच्छा समय बिता सकते हैं। तो देर किस बात की अभी टिकट बुक करें और अपने पसंद की जगहों पर जाएं।

  • मिनटों में तैयार हों फेस्टिव लुक के लिए, ये फिंगर टिप मेहंदी डिजाइन्स हैं वर्किंग वुमन की पहली पसंद

    मिनटों में तैयार हों फेस्टिव लुक के लिए, ये फिंगर टिप मेहंदी डिजाइन्स हैं वर्किंग वुमन की पहली पसंद


    नई दिल्ली:नवरात्रि के फेस्टिव सीजन में हर महिला अपने लुक को खास बनाना चाहती है और मेहंदी इस खूबसूरती को बढ़ाने का सबसे आसान और पारंपरिक तरीका है, लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर किसी के पास घंटों बैठकर मेहंदी लगवाने का समय नहीं होता, ऐसे में फिंगर टिप मेहंदी डिजाइन्स एक बेहतरीन और ट्रेंडी विकल्प बनकर उभरे हैं

    आजकल वर्किंग वुमन और कॉलेज जाने वाली लड़कियों के बीच मिनिमल मेहंदी का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें पूरे हाथ की बजाय सिर्फ उंगलियों के पोरों को सजाया जाता है, यह स्टाइल न केवल समय की बचत करता है बल्कि हाथों को एक एलिगेंट और मॉडर्न लुक भी देता है

    फिंगर टिप मेहंदी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे लगाने में बहुत कम समय लगता है, जहां पारंपरिक मेहंदी में कई घंटे लग जाते हैं वहीं ये डिजाइन्स महज 10 से 15 मिनट में तैयार हो जाते हैं, यही वजह है कि यह बिगिनर्स के लिए भी एक आसान और शानदार विकल्प बन चुका है

    इन डिजाइन्स में रिंग स्टाइल काफी लोकप्रिय है, जिसमें उंगलियों के बीच मेहंदी इस तरह लगाई जाती है कि वह अंगूठी जैसा लुक देती है, इससे बिना किसी ज्वेलरी के भी हाथ बेहद आकर्षक और सजे हुए नजर आते हैं, यह स्टाइल सोशल मीडिया पर भी काफी ट्रेंड कर रहा है

    इसके अलावा मिक्स एंड मैच पैटर्न भी युवाओं के बीच पसंद किया जा रहा है, जिसमें हर उंगली पर अलग-अलग डिजाइन बनाया जाता है, यह न केवल यूनिक लुक देता है बल्कि आपके हाथों को एक स्टाइलिश और फैशनेबल टच भी देता है

    अगर आप थोड़ा हैवी लुक चाहती हैं तो एंकलेट स्टाइल फिंगर मेहंदी ट्राई कर सकती हैं, इसमें उंगलियों के साथ कलाई तक डिजाइन बनाया जाता है जो पारंपरिक और मॉडर्न दोनों का बेहतरीन मेल होता है, यह स्टाइल आपके हाथों को रॉयल लुक देता है

    सिंपल और सोबर लुक पसंद करने वालों के लिए छोटे-छोटे फ्लोरल मोटिफ्स और बारीक बूटी वर्क वाले डिजाइन्स भी एक शानदार विकल्प हैं, ये देखने में बेहद डेलिकेट और आकर्षक लगते हैं और हर तरह के आउटफिट के साथ आसानी से मैच हो जाते हैं

    नवरात्रि के दौरान जब महिलाएं व्रत और पूजा में व्यस्त रहती हैं, तब फिंगर टिप मेहंदी और भी ज्यादा सुविधाजनक साबित होती है, क्योंकि इसमें हथेलियां खाली रहती हैं और रोजमर्रा के काम करने में कोई परेशानी नहीं होतीफिंगर टिप मेहंदी डिजाइन्स उन लोगों के लिए परफेक्ट हैं जो कम समय में स्टाइलिश और एलिगेंट लुक पाना चाहते हैं, यह ट्रेंड न केवल फैशन को आसान बना रहा है बल्कि हर महिला को अपने तरीके से खूबसूरत दिखने का मौका भी दे रहा है

  • फूलों की दुनिया के लिए अब कश्मीर ही नहीं ये 7 जगहें बना देंगी आपका दिल दीवाना

    फूलों की दुनिया के लिए अब कश्मीर ही नहीं ये 7 जगहें बना देंगी आपका दिल दीवाना


    नई दिल्ली:
    जब भी फूलों की खूबसूरती की बात होती है तो सबसे पहले कश्मीर का नाम सामने आता है लेकिन भारत में कई ऐसी जगहें हैं जहां प्रकृति अपने सबसे रंगीन और आकर्षक रूप में नजर आती है ये जगहें न सिर्फ खूबसूरत हैं बल्कि अपने अनोखे अनुभव के लिए भी जानी जाती हैं और कई बार तो उनकी तुलना यूरोप के मशहूर फ्लेवर डेस्टिनेशन से भी की जाती है

    उत्तराखंड में बसी फूलों की घाटी ऐसी ही एक जगह है जो जून से सितंबर के बीच रंगों की चादर ओढ़ लेती है यहां पहुंचें अपने आप में एक अनुभव है क्योंकि ट्रेकिंग के बाद जब यह घाटी सामने आती है तो हर कोई इसकी खूबसूरती में खो जाता है मेघालय की राजधानी शिलांग में अक्टूबर और नवंबर के दौरान चेरी ब्लॉसम का नजारा देखने लायक होता है

    यहां का चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल फूलों के साथ-साथ संगीत और खाने का शानदार मेल प्रस्तुत करता है जो इसे और खास बना देता है केरल का मुन्नार अपने चाय बागानों के लिए मशहूर है लेकिन यहां खिलने वाला नीलकुरिंजी फूल इसे और खास बना देता है यह फूल हर 12 साल में एक बार खिलता है और पूरी ऊंचाई को नीले रंग में बदल देता है है

    अगर आप शहर के अंदर ही फूलों की खूबसूरती देखना चाहते हैं तो लालबाग बॉटनिकल गार्डन एक बेहतरीन ऑप्शन है यहां होने वाले फ्लेवर शो में फूलों को इतनी खूबसूरती से परोसा जाता है कि यह किसी कला प्रदर्शनी जैसा लगता है

    सिक्किम की युमथांग वैली को पूर्व के फूलों का स्वर्ग कहा जाता है यहां अप्रैल से जून के बीच रोडोडेंड्रोन और कई दुर्लभ फूल खिलते हैं ठंडी हवा और शांत माहौल इसे और भी खास बना देता है

    महाराष्ट्र का कास पठार मानसून के दौरान रंग बिरंगे फूलों से भर जाता है इसे महाराष्ट्र की वैली ऑफ फ्लेवर्स भी कहा जाता है यहां की जैव विविधता इसे बेहद खास बनाती है

    वहीं नागालैंड और मणिपुर के बीच स्थित ज़ुकोउ वैली उन लोगों के लिए है जो भीड़ से दूर प्रकृति के बीच सुकून ढूंढते हैं मानसून में यहां छोटे छोटे फूलों से भरे हरे मैदान एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करते हैं

    इन सभी जगहों की खास बात यह है कि यहां की खूबसूरती हर मौसम के साथ बदलती है और हर बार एक नया अनुभव देती है अगर आप सच में प्रकृति और फूलों के शौकीन हैं तो अपनी अगली यात्रा के लिए इन जगहों को जरूर शामिल करें

  • नवरात्रि व्रत में हेल्दी रहना है आसान, जानें नींबू पानी पीने का सही तरीका

    नवरात्रि व्रत में हेल्दी रहना है आसान, जानें नींबू पानी पीने का सही तरीका


    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि 2026 में श्रद्धालु मां दुर्गा की भक्ति के साथ कठिन उपवास भी रखते हैं। व्रत के दौरान शरीर में ऊर्जा की कमी और पोषण का असंतुलन देखना आम है। भारी भोजन से परहेज होने की वजह से शरीर हल्का रहता है लेकिन ऐसे में ऊर्जा बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में नींबू पानी एक प्राकृतिक और सुलभ विकल्प है जो न केवल प्यास बुझाता है बल्कि व्रत के दौरान होने वाली शारीरिक समस्याओं को दूर करने में भी मदद करता है।

    नींबू पानी को सेहत का पावरहाउस कहा जाता है। इसमें भरपूर विटामिन-सी एंटीऑक्सीडेंट और साइट्रिक एसिड होता है। सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में ताजा नींबू निचोड़कर पीने से शरीर में सुरक्षा कवच बनता है। यह न सिर्फ संक्रमण से बचाता है बल्कि थकान और कमजोरी को भी दूर रखता है।

    व्रत के दौरान खान-पान में बदलाव के कारण पेट फूलना गैस अपच और कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गुनगुना नींबू पानी पीने से पाचन तंत्र सक्रिय रहता है पेट की अम्लता कम होती है और आंतों की सफाई होती है। नियमित सेवन से लिवर डिटॉक्स होता है जिससे हानिकारक टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं और आप हल्का व ऊर्जावान महसूस करते हैं।

    नींबू पानी वजन घटाने और त्वचा की चमक के लिए भी लाभकारी है। व्रत में कुट्टू के आटे या तले हुए फलाहार के कारण वजन बढ़ने की शिकायत रहती है। नींबू पानी मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है फैट बर्न करने में मदद करता है और भूख नियंत्रित करता है। साथ ही विटामिन-सी त्वचा को निखारता है मुहांसों और दाग-धब्बों को कम करता है और चेहरे पर प्राकृतिक चमक लाता है।

    नींबू पानी बनाने का सही तरीका बेहद आसान है। सबसे पहले एक गिलास पानी हल्का गुनगुना करें। इसमें आधा ताजा नींबू निचोड़ें। बेहतर स्वाद और पोषण के लिए आप थोड़ा सा शहद मिला सकते हैं। सफेद चीनी का प्रयोग न करें क्योंकि यह नींबू के डिटॉक्स गुणों को कम कर सकती है। व्रत के दौरान इसे सुबह खाली पेट या दिन में 2-3 बार फलाहार के साथ पी सकते हैं। यह छोटा सा बदलाव आपकी नवरात्रि साधना को सेहतमंद और सुखद बना देगा।

  • दिल्ली से इंदौर तक फूडी डेस्टिनेशन भारत के ये 6 शहर बनाते हैं खाने का अनुभव यादगार

    नई दिल्ली:भारत अपनी विविधता के साथ साथ अपने अनोखे स्वादों के लिए भी दुनिया भर में जाना जाता है हर शहर का अपना एक अलग फूड कल्चर है जो वहां की संस्कृति और परंपरा को दर्शाता है ऐसे कई शहर हैं जहां घूमने से ज्यादा लोग खाने के लिए जाते हैं और वहां का हर व्यंजन एक अलग अनुभव देता है

    दिल्ली इस सूची में सबसे ऊपर आती है जहां स्ट्रीट फूड से लेकर मुगलई खाने तक हर चीज का स्वाद लोगों को आकर्षित करता है चांदनी चौक की गलियों में मिलने वाले छोले भटूरे परांठे और बटर चिकन का स्वाद एक बार लेने के बाद बार बार मन करता है यहां का खाना सिर्फ पेट नहीं बल्कि दिल भी भर देता है

    लखनऊ को नवाबी स्वाद का शहर कहा जाता है जहां गलौटी कबाब अवधी बिरयानी और निहारी जैसी डिशेस बेहद लोकप्रिय हैं यहां का खाना सिर्फ स्वाद नहीं बल्कि एक नफासत और तहजीब का भी प्रतीक है लखनऊ में हर व्यंजन को बनाने और परोसने का तरीका भी खास होता है

    अमृतसर का नाम आते ही पंजाबी खाने की खुशबू मन को लुभा लेती है यहां का अमृतसरी कुलचा छोले और मक्खन से भरपूर व्यंजन हर खाने के शौकीन को पसंद आते हैं लस्सी और सरसों का साग मक्के की रोटी यहां की खास पहचान हैं जो लोगों को बार बार यहां खींच लाती हैं

    कोलकाता अपने मीठे और बंगाली व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध है यहां माछेर झोल कोषा मंगशो और रसगुल्ला जैसी मिठाइयां लोगों को बेहद पसंद आती हैं बंगाल का खाना अपने हल्के मसालों और अनोखे स्वाद के लिए जाना जाता है और यहां की मिठाइयों का कोई मुकाबला नहीं

    हैदराबाद को बिरयानी का शहर कहा जाता है यहां की हैदराबादी बिरयानी दुनियाभर में मशहूर है इसके अलावा हलीम मिर्च का सालन और डबल का मीठा भी यहां के खास व्यंजन हैं बिरयानी के शौकीन लोग खास तौर पर इस शहर का रुख करते हैं

    इंदौर को भारत का स्ट्रीट फूड हब कहा जाता है सराफा और छप्पन दुकान यहां के प्रमुख फूड डेस्टिनेशन हैं जहां पोहा जलेबी भुट्टे का कीस और दाल बाफला जैसे व्यंजन लोगों को खूब पसंद आते हैं इंदौर का खाना स्वाद के साथ साथ साफ सफाई के लिए भी जाना जाता है

    इन सभी शहरों की खास बात यह है कि यहां का खाना सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं है बल्कि यह वहां की संस्कृति और परंपरा को भी दर्शाता है अगर आप खाने के शौकीन हैं तो ये शहर आपके लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं हैं

  • राम नवमी पर अयोध्या जाने से पहले जानें भीड़ और सुरक्षा की पूरी जानकारी

    राम नवमी पर अयोध्या जाने से पहले जानें भीड़ और सुरक्षा की पूरी जानकारी


    नई दिल्ली । राम नवमी 2026 का पावन पर्व 26 मार्च को अयोध्या में मनाया जाएगा और इस बार राम लला के भव्य मंदिर के निर्माण के बाद यह उत्सव और भी खास होने वाला है। इस मौके पर देश दुनिया से लाखों भक्त अयोध्या पहुँचते हैं, जिससे यात्रा के दौरान भारी भीड़ और व्यवस्थाओं से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए यात्रा को आरामदायक और सुरक्षित बनाने के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है।

    सबसे पहले दर्शन का सही समय चुनना महत्वपूर्ण है। राम नवमी के दिन मंदिर में कतारें कई किलोमीटर लंबी हो सकती हैं। यदि आप शांति से दर्शन करना चाहते हैं तो राम नवमी से 2 3 दिन पहले या उत्सव के 2 दिन बाद मंदिर जाने की योजना बनाएं। मुख्य उत्सव के दिन सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक मंदिर परिसर में सबसे अधिक भीड़ रहती है क्योंकि इसी समय मध्याह्न की विशेष आरती और सूर्य तिलक होता है।

    ठहरने और खाने पीने का भी सही प्लान बनाना जरूरी है। भीड़ के कारण अयोध्या के होटलों और धर्मशालाओं के दाम बढ़ जाते हैं। यदि मुख्य शहर में कमरे नहीं मिल रहे हैं तो फैजाबाद (अयोध्या कैंट) या गुप्तार घाट के पास ठहरने का विकल्प देखें। यहां से मंदिर तक ई रिक्शा आसानी से उपलब्ध हैं। अयोध्या के प्रमुख मठों और मंदिरों में भंडारा और प्रसाद की व्यवस्था रहती है, और राम पथ के किनारे कई किफायती भोजनालय भी हैं।

    भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के नियमों का पालन करना जरूरी है। प्रशासन ने इस बार ई पास या क्यूआर कोड आधारित प्रवेश व्यवस्था पर जोर दिया है। मंदिर के अंदर मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, कैमरा और चमड़े के सामान ले जाना वर्जित है। भारी भीड़ को देखते हुए बुजुर्गों और छोटे बच्चों को मुख्य उत्सव के दिन मंदिर ले जाने से बचें। राम जन्मभूमि पथ पर लंबी पैदल यात्रा के लिए आरामदायक जूते पहनना न भूलें।

    अयोध्या की यात्रा केवल मुख्य मंदिर तक सीमित न रखें। यात्रा के दौरान हनुमानगढ़ी, कनक भवन, नागेश्वरनाथ मंदिर और सरयू तट की आरती का भी आनंद लें। शाम के समय सरयू घाट पर होने वाला लेजर शो भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।

    राम नवमी पर अयोध्या की यात्रा आस्था का अनूठा अनुभव है। इसके लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रहना, समय पर बुकिंग करना और धैर्य रखना जरूरी है। सही तैयारी के साथ आप राम लला के दर्शन को आराम से और सफलतापूर्वक कर पाएंगे।

  • मीठा खरबूजा चुनने के आसान ट्रिक्स: खुशबू, रंग और वजन से पहचानें

    मीठा खरबूजा चुनने के आसान ट्रिक्स: खुशबू, रंग और वजन से पहचानें


    नई दिल्ली । खरबूजा गर्मियों का एक बेहतरीन फल है, जो हाइड्रेशन और न्यूट्रिशन दोनों का पैकेज लेकर आता है। इसे अपनी डाइट में शामिल करना स्वादिष्ट और हेल्दी आदत बन सकती है। लेकिन अक्सर खरबूजा खरीदते समय यह तय करना मुश्किल होता है कि वह मीठा होगा या नहीं। आज हम आपको कुछ आसान टिप्स बताएंगे, जिन्हें अपनाकर आप हर बार मीठा और रसदार खरबूजा खरीद सकते हैं।सबसे पहले खुशबू से पहचानें। पका और मीठा खरबूजा नीचे यानी डंठल वाली साइड से मीठी खुशबू देता है। अगर कोई खुशबू नहीं है तो वह खरबूजा कच्चा हो सकता है और उसे बिल्कुल ना लें।

    दूसरी ट्रिक रंग की है। खरबूजे का छिलका हल्का पीला या सुनहरा होना चाहिए। बहुत हरा खरबूजा अभी कच्चा है और मीठा नहीं होगा। इसलिए रंग देखकर ही अनुमान लगाना आसान हो जाता है। तीसरी ट्रिक वजन की है। खरबूजे को हाथ में उठाएं और देखें कि वह अपने आकार के हिसाब से भारी लगे या नहीं। भारी होने का मतलब है कि अंदर रस और मिठास ज्यादा है। हल्का खरबूजा कम मीठा हो सकता है।

    इसके अलावा डंठल वाले हिस्से को हल्का दबाकर देखें। बहुत सख्त हिस्सा कच्चा होता है और बहुत नरम हिस्सा ज्यादा पका या खराब हो सकता है। खरबूजे को हल्की थपकी देने पर उसकी आवाज भी बता सकती है। अगर हल्की खोखली आवाज आती है तो यह अच्छा और मीठा खरबूजा है। जबकि भारी या भरी हुई आवाज वाले खरबूजे कम पके या कम मीठे होंगे।

    अंत में सतह देखें। खरबूजे के ऊपर जाल साफ और उभरा हुआ हो तो वह अच्छा माना जाता है। चिकना या फीका खरबूजा कम पका होगा और मीठा नहीं आएगा। इन आसान टिप्स को अपनाकर आप गर्मियों में हर बार मीठा, रसदार और ताजगी भरा खरबूजा खरीद सकते हैं।