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  • कितना खतरनाक है नोरो वायरस? जानें इसके लक्षण, फैलने का तरीका और बचाव

    कितना खतरनाक है नोरो वायरस? जानें इसके लक्षण, फैलने का तरीका और बचाव

    नई दिल्ली। दुनिया अभी कोरोना वायरस और दूसरे संक्रमणों के असर से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि अब एक और तेजी से फैलने वाला संक्रमण लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। इस वायरस का नाम है Norovirus, जिसे दुनिया के सबसे संक्रामक पेट संबंधी संक्रमणों में गिना जाता है। यह वायरस अचानक उल्टी, दस्त, पेट दर्द और कमजोरी जैसी गंभीर समस्याएं पैदा करता है। हाल ही में कैरेबियन प्रिंसेस क्रूज शिप पर इसके फैलने से 100 से ज्यादा यात्री और क्रू मेंबर बीमार पड़ गए, जिसके बाद यह संक्रमण फिर चर्चा में आ गया है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक Norovirus पेट और आंतों में संक्रमण फैलाने वाला बेहद संक्रामक वायरस है। यह खासतौर पर भीड़भाड़ और बंद जगहों में तेजी से फैलता है। स्कूल, अस्पताल, हॉस्टल, नर्सिंग होम और क्रूज शिप जैसी जगहों पर इसके मामले अचानक बढ़ जाते हैं। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने, दूषित खाना खाने या गंदा पानी पीने से यह वायरस आसानी से फैल सकता है।

    इस संक्रमण के लक्षण अचानक दिखाई देते हैं। मरीज को तेज उल्टी, बार-बार दस्त, मतली और पेट में मरोड़ की शिकायत होती है। कई लोगों में बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और ठंड लगने जैसे लक्षण भी देखने को मिलते हैं। डॉक्टरों के अनुसार संक्रमण के 12 से 48 घंटे के भीतर इसके लक्षण नजर आने लगते हैं। आमतौर पर मरीज 1 से 3 दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन इस दौरान शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का खतरा तेजी से बढ़ जाता है।

    लगातार उल्टी और दस्त के कारण शरीर तेजी से पानी खोने लगता है, जिससे कमजोरी, चक्कर आना, मुंह सूखना और पेशाब कम होना जैसे संकेत दिखाई देते हैं। छोटे बच्चों में रोते समय आंसू कम आना और अत्यधिक नींद आना भी डिहाइड्रेशन के संकेत माने जाते हैं। यही वजह है कि यह संक्रमण बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक माना जाता है।

    अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी Centers for Disease Control and Prevention यानी CDC के मुताबिक हर साल दुनियाभर में करीब 68 करोड़ से ज्यादा लोग इस संक्रमण की चपेट में आते हैं। इनमें बड़ी संख्या पांच साल से कम उम्र के बच्चों की होती है। रिपोर्ट्स के अनुसार हर साल हजारों बच्चों की मौत डिहाइड्रेशन और इलाज की कमी के कारण हो जाती है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि Norovirus के कई प्रकार होते हैं, इसलिए एक बार संक्रमित होने के बाद भी व्यक्ति दोबारा इसकी चपेट में आ सकता है। फिलहाल इस वायरस की कोई खास वैक्सीन या दवा उपलब्ध नहीं है। एंटीबायोटिक दवाएं भी इस पर असर नहीं करतीं, क्योंकि यह बैक्टीरिया नहीं बल्कि वायरस से होने वाला संक्रमण है।

    इससे बचाव के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है। बाहर का दूषित खाना खाने से बचें, हाथों को बार-बार साबुन से धोएं और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से दूरी बनाए रखें। डॉक्टर मरीजों को ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ लेने और पर्याप्त आराम करने की सलाह देते हैं। अगर उल्टी-दस्त लंबे समय तक जारी रहें या शरीर में पानी की कमी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

  • स्किन केयर में बेसन का कमाल: इन 3 तरीकों से इस्तेमाल कर बढ़ाएं चेहरे की चमक

    स्किन केयर में बेसन का कमाल: इन 3 तरीकों से इस्तेमाल कर बढ़ाएं चेहरे की चमक


    नई दिल्ली। रसोई में आसानी से मिलने वाला बेसन सिर्फ खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाता, बल्कि त्वचा की खूबसूरती निखारने में भी बेहद असरदार माना जाता है। बेसन में मौजूद एंटीबैक्टीरियल, एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण त्वचा को साफ, चमकदार और हेल्दी बनाने में मदद करते हैं। अगर चेहरे पर दाग-धब्बे, टैनिंग, मुंहासे या रूखापन परेशान कर रहा है, तो बेसन के ये घरेलू फेस पैक आपकी स्किन को नेचुरल ग्लो दे सकते हैं।

    1. बेसन और हल्दी फेस पैक
    अगर चेहरे पर मुंहासे, पिंपल्स और दाग-धब्बों की समस्या है, तो बेसन और हल्दी का फेस पैक काफी फायदेमंद हो सकता है।

    कैसे बनाएं
    2 चम्मच बेसन लें
    इसमें चुटकीभर हल्दी मिलाएं
    कुछ बूंदें नींबू का रस डालें
    सभी चीजों को अच्छी तरह मिक्स कर लें
    लगाने का तरीका
    इस पेस्ट को चेहरे पर 15 मिनट तक लगाकर रखें। फिर साफ पानी से चेहरा धो लें।

    फायदे
    चेहरे की रंगत निखारता है
    एक्ने और पिंपल्स कम करने में मदद करता है
    दाग-धब्बों को हल्का करता है
    स्किन को नेचुरल चमक देता है

    हफ्ते में 2 से 3 बार इस्तेमाल करें।

    2. बेसन और शहद फेस पैक

    ड्राई और बेजान त्वचा के लिए बेसन और शहद का फेस पैक बेहद असरदार माना जाता है।
    कैसे बनाएं
    2 चम्मच बेसन
    1 चम्मच शहद
    दोनों को अच्छी तरह मिलाकर स्मूद पेस्ट तैयार करें।
    लगाने का तरीका
    इस फेस पैक को चेहरे पर 15-20 मिनट तक लगाएं और फिर पानी से धो लें।

    फायदे
    त्वचा को मॉइश्चराइज करता है
    टैनिंग कम करने में मदद करता है
    स्किन को मुलायम और ग्लोइंग बनाता है
    चेहरे की डलनेस दूर करता है

    बेहतर रिजल्ट के लिए इसे हफ्ते में 2-3 बार लगाएं।

    3. बेसन और मलाई फेस पैक

    अगर त्वचा रूखी और बेजान नजर आती है, तो बेसन और मलाई का फेस पैक स्किन को पोषण देने में मदद कर सकता है।

    कैसे बनाएं
    2 चम्मच बेसन
    1 चम्मच मलाई
    आधा चम्मच अखरोट पाउडर
    कुछ बूंदें गुलाब जल
    इन सभी चीजों को मिलाकर पेस्ट तैयार करें।

    लगाने का तरीका
    चेहरे पर लगाकर हल्के हाथों से स्क्रब करें और 10-15 मिनट बाद गुनगुने पानी से धो लें।

    फायदे
    स्किन ड्राईनेस दूर करता है
    डेड स्किन हटाने में मदद करता है
    चेहरे की रंगत निखारता है
    त्वचा को सॉफ्ट और स्मूद बनाता है
    इस फेस पैक का इस्तेमाल सप्ताह में 2 बार किया जा सकता है।

    ध्यान रखें
    किसी भी फेस पैक को लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें।
    अगर त्वचा बहुत संवेदनशील है, तो नींबू का इस्तेमाल कम करें।
    फेस पैक लगाने के बाद मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं।

  • स्क्रीन की लत बिगाड़ सकती है आपकी सेहत, आज ही सुधारें स्लीप साइकिल वरना होगा नुकसान

    स्क्रीन की लत बिगाड़ सकती है आपकी सेहत, आज ही सुधारें स्लीप साइकिल वरना होगा नुकसान


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऑफिस में घंटों कंप्यूटर स्क्रीन पर काम करने के बाद भी लोग घर पहुंचकर सोशल मीडिया, वीडियो और चैटिंग में व्यस्त हो जाते हैं। धीरे-धीरे यह आदत शरीर और दिमाग दोनों पर असर डालने लगती है। लगातार बढ़ता स्क्रीन टाइम न सिर्फ आंखों को थकाता है, बल्कि इंसान की स्लीप साइकिल भी खराब कर देता है। यही वजह है कि आजकल बड़ी संख्या में लोग अनिद्रा, थकान और चिड़चिड़ेपन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल और लैपटॉप से निकलने वाली ब्लू लाइट नींद की सबसे बड़ी दुश्मन बनती जा रही है। यह रोशनी दिमाग को यह संकेत देती है कि अभी दिन का समय है, जिससे शरीर सही तरीके से “स्लीप मोड” में नहीं जा पाता। आमतौर पर रात के समय शरीर मेलाटोनिन नाम का हार्मोन बनाता है, जो नींद लाने में मदद करता है, लेकिन देर रात तक स्क्रीन देखने से इस हार्मोन का स्तर कम होने लगता है। इसका नतीजा यह होता है कि इंसान बिस्तर पर जाने के बाद भी लंबे समय तक सो नहीं पाता और करवटें बदलता रहता है।

    लगातार खराब नींद का असर धीरे-धीरे पूरे शरीर पर दिखाई देने लगता है। सुबह उठने पर शरीर थका हुआ महसूस होता है, आंखों में जलन और सिर भारी रहने जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। इतना ही नहीं, नींद पूरी न होने से दिनभर सुस्ती बनी रहती है और काम में ध्यान लगाना मुश्किल हो जाता है। कई लोग ऑफिस में बैठे-बैठे जम्हाई लेते नजर आते हैं, क्योंकि उनका दिमाग पूरी तरह आराम नहीं कर पाता। लंबे समय तक खराब स्लीप साइकिल रहने से मानसिक तनाव, कमजोरी और याददाश्त पर भी असर पड़ सकता है।

    विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि लगातार नींद की कमी दिल और दिमाग से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती है। देर रात तक मोबाइल इस्तेमाल करने वाले लोगों का पूरा रूटीन बिगड़ने लगता है। वे सुबह समय पर उठ नहीं पाते, जिससे दिनभर थकान और चिड़चिड़ापन बना रहता है। यही कारण है कि डॉक्टर हमेशा सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करने की सलाह देते हैं।

    अगर आप भी देर रात तक फोन चलाने की आदत से परेशान हैं, तो कुछ आसान बदलाव आपकी मदद कर सकते हैं। कोशिश करें कि सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल और लैपटॉप से दूरी बना लें। रात में हल्की रोशनी रखें और बेवजह सोशल मीडिया स्क्रॉल करने से बचें। अगर काम की वजह से लंबे समय तक स्क्रीन देखना जरूरी हो, तो हर 20 से 30 मिनट बाद आंखों को कुछ सेकंड का आराम जरूर दें।

    इसके अलावा सोने से पहले किताब पढ़ना, हल्का संगीत सुनना या परिवार के साथ समय बिताना दिमाग को शांत करने में मदद करता है। डॉक्टरों के मुताबिक हर व्यक्ति को रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए, क्योंकि अच्छी नींद ही शरीर को नई ऊर्जा देती है। इसलिए आज से ही अपनी स्लीप साइकिल सुधारने की कोशिश शुरू करें, वरना छोटी सी लापरवाही आगे चलकर बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन सकती है।

  • साफ़ और चमकदार त्वचा के लिए रोज़ाना करें सब्जा सीड्स का सेवन

    साफ़ और चमकदार त्वचा के लिए रोज़ाना करें सब्जा सीड्स का सेवन


    नई दिल्ली। सब्जा सीड्स आजकल नेचुरल स्किनकेयर का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ये छोटे काले बीज सिर्फ शरीर को ठंडक ही नहीं देते, बल्कि त्वचा की कई समस्याओं को भी कम करने में मदद करते हैं। नियमित सेवन से स्किन अंदर से हेल्दी और चमकदार बन सकती है।

    त्वचा के लिए क्यों फायदेमंद हैं सब्जा सीड्स?
    सब्जा सीड्स में फाइबर, ओमेगा-3 फैटी एसिड, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। ये पोषक तत्व त्वचा को पोषण देने के साथ सेल रिपेयर में मदद करते हैं।

    मुंहासों और पिंपल्स में राहत
    सब्जा सीड्स में मौजूद डिटॉक्सिफाइंग गुण शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में मदद करते हैं। इससे बार-बार होने वाले पिंपल्स और ब्रेकआउट्स की समस्या कम हो सकती है। इनके एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण त्वचा की लालिमा और सूजन भी घटाते हैं।

    स्किन को रखते हैं हाइड्रेट
    पानी में भिगोने पर सब्जा सीड्स जेल जैसी परत बना लेते हैं, जो शरीर में नमी बनाए रखने में मदद करती है। बेहतर हाइड्रेशन का असर त्वचा पर भी दिखता है और स्किन मुलायम व फ्रेश नजर आती है।

    बढ़ाते हैं नैचुरल ग्ल
    इन बीजों में मौजूद फ्लेवोनॉइड्स और एंटीऑक्सीडेंट फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं। इससे त्वचा की डलनेस कम होती है और स्किन ज्यादा ब्राइट व स्मूद दिखाई देती है।

    एंटी-एजिंग में मददगार
    सब्जा सीड्स में पाए जाने वाले पॉलीफेनॉल्स त्वचा को समय से पहले बूढ़ा होने से बचाने में मदद करते हैं। नियमित सेवन से फाइन लाइन्स और झुर्रियों की समस्या कम हो सकती है।

    सूजन और जलन में राहत
    इनकी ठंडी तासीर त्वचा की जलन, रैशेज और सनबर्न जैसी समस्याओं में राहत पहुंचा सकती है। यह स्किन को शांत और रिलैक्स महसूस कराने में सहायक माने जाते हैं।

    कैसे करें सेवन?
    रातभर पानी में भिगोकर सुबह सेवन करें
    नींबू पानी, दूध या स्मूदी में मिलाकर पी सकते हैं
    फालूदा, शरबत और दही में भी उपयोग किया जाता है

    ध्यान रखने वाली बातें
    सीमित मात्रा में ही सेवन करें
    किसी एलर्जी या गंभीर बीमारी की स्थिति में डॉक्टर की सलाह लें
    छोटे बच्चों को देने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श करें
  • हल्दी असली या नकली? घर बैठे इन आसान तरीकों से मिनटों में करें शुद्धता की पहचान

    हल्दी असली या नकली? घर बैठे इन आसान तरीकों से मिनटों में करें शुद्धता की पहचान

    नई दिल्ली । भारतीय रसोई में हल्दी केवल एक मसाला नहीं बल्कि सेहत और परंपरा का अहम हिस्सा मानी जाती है। दाल, सब्जी और कई घरेलू नुस्खों में इसका नियमित उपयोग किया जाता है। आयुर्वेद में भी हल्दी को इसके औषधीय गुणों के लिए विशेष स्थान दिया गया है। लेकिन बदलते समय के साथ बाजार में मिलने वाली हर हल्दी की शुद्धता पर भरोसा करना अब आसान नहीं रहा है। मिलावट के बढ़ते मामलों ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है।

    आजकल कई बार हल्दी में चमकदार रंग और बेहतर दिखावट देने के लिए कृत्रिम रंगों और रसायनों का उपयोग किया जाता है। कुछ मामलों में सस्ते और निम्न गुणवत्ता वाले पदार्थ भी मिलाए जाते हैं, जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि घर में इस्तेमाल होने वाली हल्दी की शुद्धता की जांच की जाए।

    हल्दी की शुद्धता जांचने का सबसे आसान तरीका पानी का परीक्षण माना जाता है। इसके लिए एक गिलास गुनगुने पानी में थोड़ी मात्रा में हल्दी डालकर कुछ देर के लिए छोड़ दिया जाता है। यदि हल्दी नीचे बैठ जाती है और पानी हल्का पीला रहता है, तो इसे अपेक्षाकृत शुद्ध माना जाता है। लेकिन यदि हल्दी तेजी से घुलने लगे और पानी का रंग गहरा पीला हो जाए, तो यह मिलावट का संकेत हो सकता है।

    इसके अलावा एक और सरल तरीका हथेली परीक्षण है, जिसे घर पर आसानी से किया जा सकता है। इसमें हल्दी की थोड़ी मात्रा हथेली पर रखकर उंगलियों से हल्के से रगड़ा जाता है। यदि हल्दी असली होती है, तो यह हथेली पर हल्का पीला रंग छोड़ती है और उसकी प्राकृतिक खुशबू महसूस होती है। जबकि मिलावटी हल्दी का रंग अक्सर असमान होता है या जल्दी फीका पड़ जाता है।

    कुछ मामलों में हल्दी में खतरनाक रसायनों की मिलावट की भी आशंका होती है। ऐसी स्थिति में वैज्ञानिक परीक्षणों की आवश्यकता पड़ती है, जिनमें रासायनिक प्रतिक्रिया के आधार पर मिलावट की पहचान की जाती है। यह बताया जाता है कि कुछ विशेष रसायनों की मौजूदगी से हल्दी का रंग बदल सकता है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मिलावटी हल्दी लंबे समय में पेट संबंधी समस्याएं, एलर्जी, मतली और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। इसलिए केवल हल्दी ही नहीं बल्कि सभी रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।

    बाजार से हल्दी खरीदते समय उपभोक्ताओं को विश्वसनीय स्रोत और ब्रांड का चयन करना चाहिए। पैक्ड और प्रमाणित उत्पादों को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है। इसके साथ ही समय-समय पर घर में हल्दी की शुद्धता की जांच करना भी एक अच्छी आदत हो सकती है।

    कुल मिलाकर कहा जाए तो हल्दी जैसी साधारण दिखने वाली चीज भी अगर मिलावटी हो, तो यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसलिए थोड़ी सावधानी और जागरूकता अपनाकर हम अपने परिवार की सेहत को सुरक्षित रख सकते हैं।

  • सावधान! इन गलतियों की वजह से खराब होजाता जाता है अचार, ऐसे रखें सुरक्षित

    सावधान! इन गलतियों की वजह से खराब होजाता जाता है अचार, ऐसे रखें सुरक्षित


    नई दिल्ली। भारतीय रसोई में अचार सिर्फ एक साइड डिश नहीं बल्कि स्वाद और परंपरा का हिस्सा होता है। आम, नींबू, मिर्च या आंवले का अचार हर घर में खास जगह रखता है। लेकिन कई बार मेहनत से तैयार किया गया अचार कुछ ही दिनों या महीनों में खराब होने लगता है और उसके ऊपर सफेद या हरे रंग की फफूंदी दिखाई देने लगती है। यह समस्या किसी एक मौसम तक सीमित नहीं है, बल्कि साल के किसी भी समय हो सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार अचार में फफूंदी लगने का सबसे बड़ा कारण नमी और हवा का संपर्क है। जब भी जार के अंदर नमी पहुंचती है या अचार खुले वातावरण के संपर्क में आता है, तो उसमें फफूंदी बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। कई बार छोटी-छोटी गलतियां जैसे गीला चम्मच इस्तेमाल करना या जार को खुला छोड़ देना भी इसके लिए जिम्मेदार होती हैं।

    गंध और स्वाद से मिलते हैं शुरुआती संकेत
    अचार खराब होने का पहला संकेत उसकी गंध से मिलता है। ताजा अचार की खुशबू तीखी और खट्टी होती है, लेकिन अगर उसमें सड़ी हुई या अजीब सी बदबू आने लगे, तो यह खराब होने का संकेत है। कई बार स्वाद में भी बदलाव आने लगता है, जिससे अचार कड़वा, फीका या अजीब सा लगने लगता है। ऐसे अचार का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

    बनावट और रंग में बदलाव भी खतरे का संकेत
    जब अचार खराब होने लगता है, तो उसकी बनावट में भी बदलाव दिखाई देता है। अगर अचार चिपचिपा, बहुत नरम या रंग बदलने लगे, तो इसे खाने से बचना चाहिए। उदाहरण के लिए आम का अचार भूरा और मुलायम हो जाए या लहसुन का अचार लिसलिसा महसूस हो, तो यह संकेत है कि उसमें खराबी शुरू हो चुकी है।

    तेल की स्थिति भी काफी अहम होती है। अगर अचार का तेल धुंधला दिखे, अलग-अलग परतों में बंट जाए या उसमें झाग बनने लगे, तो यह भी खराबी की निशानी है।

    अचार में फफूंदी क्यों लगती है?
    Pickle में फफूंदी तब लगती है जब उसमें नमी, हवा या गंदगी पहुंच जाती है। कई बार अचार को स्टोर करते समय सावधानी नहीं बरती जाती, जिससे बैक्टीरिया और फंगस तेजी से बढ़ने लगते हैं।

    अचार को लंबे समय तक सुरक्षित कैसे रखें?
    Pickle को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए कुछ आसान लेकिन जरूरी सावधानियां अपनानी चाहिए। हमेशा सूखे और साफ चम्मच का इस्तेमाल करें, क्योंकि एक बूंद पानी भी फफूंदी का कारण बन सकती है। जार को हर बार अच्छी तरह बंद करें ताकि हवा अंदर न जा सके।

    अचार को हमेशा ठंडी और सूखी जगह पर रखें। सीधी धूप और ज्यादा गर्मी मसालों और तेल को खराब कर सकती है। इसके अलावा ध्यान रखें कि अचार पूरी तरह तेल की परत में ढका रहे। अगर तेल कम हो जाए, तो ऊपर से साफ तेल डालकर उसे सुरक्षित रखा जा सकता है।

    इन छोटी-छोटी सावधानियों को अपनाकर अचार को लंबे समय तक ताजा और स्वादिष्ट रखा जा सकता है, जिससे उसका असली स्वाद बरकरार रहता है और वह फफूंदी से सुरक्षित रहता है।

  • Newborn Baby Bath Tips: नवजात को नहलाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां

    Newborn Baby Bath Tips: नवजात को नहलाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली। नवजात शिशु की देखभाल जितनी खुशी देती है, उतनी ही जिम्मेदारी भी मांगती है। खासतौर पर जब बात बच्चे को नहलाने की हो, तो माता-पिता को बेहद सतर्क रहने की जरूरत होती है। जन्म के बाद शुरुआती महीनों में शिशु की त्वचा बहुत कोमल होती है और उसका शरीर बाहरी वातावरण के अनुसार खुद को पूरी तरह ढाल नहीं पाता। ऐसे में नहलाते समय की गई छोटी-सी गलती भी बच्चे के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
    विशेषज्ञों के अनुसार, नवजात या प्रीमैच्योर बच्चे को नहलाते समय पानी का तापमान सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। पानी हमेशा हल्का गुनगुना होना चाहिए। ज्यादा गर्म पानी बच्चे की त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है, जबकि ठंडा पानी सर्दी-जुकाम या शरीर का तापमान गिरने का कारण बन सकता है। नहलाने से पहले हाथ से पानी का तापमान जरूर जांच लेना चाहिए।
    बच्चे को लंबे समय तक पानी में रखना भी सही नहीं माना जाता। नवजात शिशु जल्दी ठंड पकड़ लेते हैं, इसलिए उनका स्नान बहुत कम समय में और आरामदायक तरीके से होना चाहिए। कई लोग बच्चे को तेजी से रगड़कर साफ करने लगते हैं, लेकिन ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है। शिशु की त्वचा बेहद संवेदनशील होती है, इसलिए उसे हमेशा मुलायम कपड़े और हल्के हाथों से साफ करना चाहिए।
    डॉक्टरों का मानना है कि तेज खुशबू वाले साबुन, बॉडी वॉश या केमिकल युक्त प्रोडक्ट नवजात की त्वचा पर बुरा असर डाल सकते हैं। इसलिए बच्चे के लिए केवल माइल्ड और डॉक्टर द्वारा सुझाए गए प्रोडक्ट का ही इस्तेमाल करना चाहिए। कई मामलों में सिर्फ साफ गुनगुने पानी और मुलायम कपड़े से सफाई करना ही पर्याप्त होता है।
    नहलाते समय कमरे का तापमान भी सामान्य और आरामदायक होना चाहिए। ठंडी हवा, तेज पंखा या एसी वाले कमरे में बच्चे को नहलाने से वह जल्दी बीमार पड़ सकता है। स्नान के तुरंत बाद बच्चे को मुलायम तौलिए से अच्छी तरह सुखाकर गर्म कपड़े पहनाना जरूरी है।
    विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि हर दिन नवजात को पानी से नहलाना जरूरी नहीं होता। खासकर प्रीमैच्योर बच्चों के लिए स्पंज बाथ यानी गीले मुलायम कपड़े से शरीर साफ करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। इससे बच्चा साफ भी रहता है और ठंड लगने का खतरा भी कम होता है।
    अगर बच्चे को नहलाने के बाद त्वचा लाल हो जाए, ज्यादा रोना आए, सांस लेने में दिक्कत हो या शरीर ठंडा महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। सही देखभाल और सावधानी के साथ ही नवजात शिशु स्वस्थ और सुरक्षित रह सकता है।
  • Makeup Tips: गलत मेकअप से बिगड़ सकता है चेहरा, जानें सही करने का तरीका

    Makeup Tips: गलत मेकअप से बिगड़ सकता है चेहरा, जानें सही करने का तरीका


    नई दिल्ली। आज के समय में मेकअप सिर्फ एक जरूरत ही नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा बन चुका है। शादी, पार्टी या रोजमर्रा की जिंदगी में लोग अक्सर मेकअप का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अगर मेकअप सही तरीके से न किया जाए, तो यह आपकी स्किन को नुकसान भी पहुंचा सकता है और प्राकृतिक निखार धीरे-धीरे कम हो सकता है।
    विशेषज्ञों के अनुसार, मेकअप से जुड़ी सबसे बड़ी गलती उसे बिना हटाए सो जाना है। दिनभर की थकान के बाद अगर मेकअप चेहरे पर ही छोड़ दिया जाए, तो यह स्किन के पोर्स को बंद कर देता है। रात के समय त्वचा खुद को रिपेयर करती है, लेकिन मेकअप की परत के कारण यह प्रक्रिया रुक जाती है, जिससे पिंपल्स, ब्लैकहेड्स और डल स्किन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
    एक और आम गलती जल्दबाजी में सीधे फाउंडेशन या बेस लगाना है। ऐसा करने से केमिकल्स सीधे त्वचा पर असर डालते हैं। स्किन एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि मेकअप से पहले हमेशा मॉइस्चराइजर और प्राइमर का इस्तेमाल करें। इससे त्वचा और मेकअप के बीच एक प्रोटेक्टिव लेयर बनती है और स्किन को नुकसान कम होता है।
    इसके अलावा, मेकअप ब्रश और ब्यूटी ब्लेंडर की सफाई न करना भी एक बड़ी गलती मानी जाती है। गंदे ब्रश में बैक्टीरिया और डेड स्किन सेल्स जमा हो जाते हैं, जो चेहरे पर इस्तेमाल करने से पिंपल्स और स्किन इंफेक्शन का कारण बन सकते हैं। इसलिए इनकी नियमित सफाई बेहद जरूरी है।
    मेकअप हटाने के लिए सिर्फ फेस वॉश पर निर्भर रहना भी सही नहीं है। पहले किसी अच्छे मेकअप रिमूवर, क्लींजिंग बाम या नारियल तेल जैसे प्राकृतिक विकल्प से मेकअप को अच्छी तरह साफ करना चाहिए। इसके बाद ही स्किन टाइप के अनुसार फेस वॉश का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि चेहरा पूरी तरह साफ हो सके। अगर इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए, तो मेकअप आपकी खूबसूरती बढ़ाने का काम करेगा, न कि स्किन को नुकसान पहुंचाने का।

  • Weekend Getaway: दिल्ली के आसपास ये खास जगहें जरूर घूमें, यादगार बन जाएगा ट्रिप

    Weekend Getaway: दिल्ली के आसपास ये खास जगहें जरूर घूमें, यादगार बन जाएगा ट्रिप


    नई दिल्ली। गर्मियों के मौसम में अगर आप दिल्ली के पास किसी ठंडी और खूबसूरत जगह की तलाश में हैं, तो उत्तर भारत में कई ऐसे हिल स्टेशन मौजूद हैं जो कम दूरी में शानदार अनुभव देते हैं। यहां आप भीड़भाड़ से दूर प्रकृति की गोद में कुछ सुकून भरे पल बिता सकते हैं।
    चकराता (उत्तराखंड)
    दिल्ली से करीब 300 किलोमीटर दूर स्थित चकराता एक शांत और कम भीड़ वाला हिल स्टेशन है। यह जगह अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और शांत वातावरण के लिए जानी जाती है। यहां का प्रसिद्ध टाइगर फॉल्स पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। गर्मियों में यहां का मौसम बेहद सुहावना रहता है, जहां तापमान सामान्यतः 15 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। भीड़भाड़ से दूर शांति पसंद करने वालों के लिए यह एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है।
    कसौल (हिमाचल प्रदेश)
    हिमाचल प्रदेश का कसौल युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय है। पार्वती नदी के किनारे स्थित यह जगह अपने शांत और खूबसूरत वातावरण के लिए जानी जाती है। यहां बैठकर नदी की आवाज और ठंडी हवाओं का आनंद लेना एक अलग ही अनुभव देता है। एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए खीरगंगा ट्रेक भी एक बेहतरीन विकल्प है। यहां का मौसम ठंडा रहता है, इसलिए हल्की जैकेट साथ रखना बेहतर होता है।
    औली (उत्तराखंड)
    औली भारत के सबसे खूबसूरत हिल स्टेशनों में से एक माना जाता है, जो स्कीइंग के लिए प्रसिद्ध है। हालांकि गर्मियों में यहां की हरी-भरी घास और बर्फ से ढकी पहाड़ियां बेहद आकर्षक लगती हैं। चारों तरफ फैला प्राकृतिक नजारा और ठंडी हवा यहां आने वालों को सुकून देती है। औली में केबल कार की सवारी भी एक खास अनुभव देती है। मई-जून में यहां का मौसम लगभग 15 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है, जो घूमने के लिए आदर्श है। अगर आप इस गर्मी में दिल्ली के आसपास कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो ये तीनों जगहें आपकी ट्रिप को यादगार बना सकती हैं।
  • खाने में नखरे करने वाले बच्चों के लिए 7 असरदार टिप्स, माता-पिता की टेंशन होगी कम

    खाने में नखरे करने वाले बच्चों के लिए 7 असरदार टिप्स, माता-पिता की टेंशन होगी कम

    नई दिल्ली । बच्चों का खाने के समय नखरे करना आजकल बहुत आम समस्या बन गई है। कई माता-पिता इस बात से परेशान रहते हैं कि उनका बच्चा ठीक से खाना नहीं खाता और जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सही तरीका अपनाकर और धैर्य रखकर इस आदत को आसानी से बदला जा सकता है।

    छोटे बच्चों का स्वाद समय-समय पर बदलता रहता है, इसलिए किसी भी नए खाने को तुरंत पसंद कर लेना उनके लिए जरूरी नहीं होता। ऐसे में माता-पिता को लगातार प्रयास करते रहना चाहिए और छोटे-छोटे बदलावों के साथ उन्हें नए स्वाद से परिचित कराना चाहिए।

    सबसे पहले जरूरी है कि बच्चे को बार-बार नए खाने का स्वाद चखने का मौका दिया जाए। कई बार किसी चीज को स्वीकार करने में समय लगता है, इसलिए एक ही बार में हार मान लेना सही नहीं है। नए खाने को उनकी पसंदीदा चीजों के साथ मिलाकर देना भी एक अच्छा तरीका हो सकता है।

    इसके साथ ही बच्चों को अलग-अलग तरह का पौष्टिक भोजन देने पर ध्यान देना चाहिए। फल, सब्जियां, अनाज, दालें और डेयरी उत्पाद जैसे खाद्य पदार्थ उनके रोज के आहार का हिस्सा बनने चाहिए। खाने में रंग, स्वाद और बनावट की विविधता बच्चों को आकर्षित करती है और उनकी रुचि बढ़ाती है।

    बच्चों को खाने की प्रक्रिया में शामिल करना भी बेहद प्रभावी तरीका माना जाता है। जब बच्चे खुद सब्जियां चुनते हैं या खाना बनाने में मदद करते हैं तो उनका खाने के प्रति उत्साह बढ़ जाता है। इससे वे खाने को एक जिम्मेदारी और मजेदार गतिविधि के रूप में देखने लगते हैं।

    एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों पर खाने का दबाव नहीं डालना चाहिए। जब तक बच्चा स्वस्थ है और उसका विकास सामान्य है, तब तक उसे उसकी भूख के अनुसार खाने देना बेहतर होता है। जबरदस्ती करने से अक्सर खाने के प्रति नकारात्मक सोच विकसित हो सकती है।

    खाने की मात्रा भी उम्र के अनुसार संतुलित होनी चाहिए। छोटे हिस्सों में भोजन देना बच्चों के लिए अधिक आसान और स्वीकार्य होता है। साथ ही, अच्छे खाने की आदतों के लिए तारीफ करना भी उन्हें प्रोत्साहित करता है।

    खाने को इनाम या सजा से जोड़ना भी सही नहीं माना जाता, क्योंकि इससे बच्चे भोजन को गलत तरीके से समझने लगते हैं। इसके बजाय स्वस्थ खाने को रोजमर्रा की सामान्य आदत बनाना जरूरी है।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने माता-पिता को करते हुए देखते हैं। अगर घर में सभी लोग मिलकर संतुलित और पौष्टिक भोजन करते हैं, तो बच्चे भी धीरे-धीरे उसी आदत को अपनाने लगते हैं।