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  • वजन घटाना हुआ आसान: तमन्ना भाटिया और फिटनेस ट्रेनर सिद्धार्थ सिंह की टिप्स

    वजन घटाना हुआ आसान: तमन्ना भाटिया और फिटनेस ट्रेनर सिद्धार्थ सिंह की टिप्स


    नई दिल्ली।बॉलीवुड एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया की फिटनेस का राज उनके ट्रेनर सिद्धार्थ सिंह ने अब सबके सामने साझा किया है। वजन घटाने की चाहत रखने वाले अक्सर भारी एक्सरसाइज और महंगी डाइट प्लान की ओर रुख करते हैं, लेकिन सिद्धार्थ सिंह का कहना है कि वजन कम करने के लिए सबसे आसान तरीका रोज़मर्रा की थाली में संतुलन बनाए रखना है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर वीडियो में बताया कि नई डाइट लेने की बजाय अपनी प्लेट स्ट्रक्चर को सही करना ज्यादा प्रभावी साबित होता है।

    सिद्धार्थ के अनुसार हर खाने की थाली में तीन मुख्य घटक होने चाहिए। पहला और सबसे अहम हिस्सा है पाम प्रोटीन। इसमें आप चिकन, पनीर, टोफू, दाल या अंडे शामिल कर सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि दिन के हर खाने में प्रोटीन का होना जरूरी है। बिना प्रोटीन के वजन घटाना मुश्किल है क्योंकि यह मसल्स को बनाए रखने और शरीर की चर्बी कम करने में मदद करता है।

    दूसरा हिस्सा है स्मार्ट कार्ब्स। आम धारणा है कि कार्ब्स खाने से वजन बढ़ता है, लेकिन सिद्धार्थ इसे गलत मानते हैं। यदि कार्ब्स सही मात्रा और सही समय पर शामिल किए जाएं, तो यह वजन घटाने में सहायक हो सकते हैं। इसके लिए आप अपनी प्लेट में एक मुट्ठी रोटी, चावल या शकरकंद जैसी चीजें ले सकते हैं। इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है और आप दिनभर एक्टिव रहते हैं।

    तीसरा और महत्वपूर्ण हिस्सा है सब्जियां। हर प्लेट में कम से कम दो मुट्ठी हरी सब्जियों का होना जरूरी है। इनमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखती है और बार-बार खाने की इच्छा को कम करती है। फाइबर का सेवन मेटाबॉलिज्म को भी बेहतर बनाता है और वजन घटाने की प्रक्रिया को तेज करता है।

    सिद्धार्थ सिंह बताते हैं कि कई बिजी प्रोफेशनल्स जो केवल 5 से 7 किलो वजन कम करना चाहते हैं, उन्हें कार्ब्स पूरी तरह से हटाने की जरूरत नहीं है। असली फर्क संतुलित प्लेट स्ट्रक्चर से आता है। प्रोटीन, स्मार्ट कार्ब्स और हरी सब्जियों का सही अनुपात रखने से वजन घटाना सरल और स्वस्थ दोनों होता है।

    इसके अलावा सिद्धार्थ ने कहा कि छोटी-छोटी आदतें भी असर डालती हैं। खाने से पहले पानी पीना, धीमी गति से खाना, और रात के समय हल्का खाना शरीर को डिटॉक्स करने और वजन नियंत्रित करने में मदद करता है। इस तरीके को अपनाकर किसी भी व्यक्ति को अतिरिक्त मेहनत किए बिना फिटनेस और वजन में सुधार महसूस हो सकता है।

    वास्तव में, फिट रहने के लिए जरूरी नहीं कि आप महंगी डाइट प्लान या जिम में घंटों समय बिताएं। सही प्लेट स्ट्रक्चर, संतुलित भोजन और थोड़ी जागरूकता से वजन कम करना हर किसी के लिए संभव है। यदि आप भी वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं, तो आज ही अपनी प्लेट को संतुलित करने की शुरुआत करें और छोटे-छोटे बदलाव को जीवनशैली में शामिल करें।

  • आचार्य बालकृष्ण के हेल्थ टिप्स: रोजाना पपीता खाने से घटे कोलेस्ट्रॉल और दिल स्वस्थ

    आचार्य बालकृष्ण के हेल्थ टिप्स: रोजाना पपीता खाने से घटे कोलेस्ट्रॉल और दिल स्वस्थ


    नई दिल्ली । आचार्य बालकृष्ण ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कोलेस्ट्रॉल कम करने और दिल को स्वस्थ रखने का आसान उपाय बताया है। उनका सुझाव है कि प्रतिदिन पपीता खाने से शरीर में जमा बुरा कोलेस्ट्रॉल LDL नियंत्रित होता है और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है।

    पपीता क्यों खाएं?

    पपीता एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिनों का प्राकृतिक स्रोत है। इसमें विटामिन C फाइबर और कई पोषक तत्व होते हैं। आचार्य बालकृष्ण के अनुसार नियमित रूप से पपीता खाने से कोलेस्ट्रॉल स्तर नियंत्रित रहता है और दिल से जुड़े रोगों का खतरा भी कम होता है। पपीता आयुर्वेद में पाचन सुधारने वाला फल माना जाता है। यह शरीर में जमा गंदा कोलेस्ट्रॉल बाहर निकालने में मदद करता है और कब्ज एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत देता है। इसके अलावा पपीते में मौजूद फाइबर गुड कोलेस्ट्रॉल HDL बढ़ाने में मदद करता है और ब्लड सर्कुलेशन को सुधारता है।

    प्रतिदिन कितना पपीता खाएं?

    आचार्य बालकृष्ण के अनुसार: रोजाना 1 कटोरी पपीता सुबह या शाम खाया जा सकता है। इसे बिना नमक के खाना चाहिए। सर्दी-जुकाम में पपीते पर थोड़ा काली मिर्च पाउडर छिड़ककर खाया जा सकता है। पपीता तले-भुने भोजन के साथ न मिलाएं।

    आसान और किफायती उपाय

    पपीता घर में आसानी से उपलब्ध होता है और इसका सेवन सरल प्राकृतिक और किफायती तरीका है कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने का। यह न केवल दिल की सेहत के लिए फायदेमंद है बल्कि पाचन तंत्र और कब्ज जैसी सामान्य समस्याओं में भी राहत देता है।

  • पूरे शरीर के लिए योग का वरदान: सर्वांगपुष्टि आसन के फायदे और अभ्यास

    पूरे शरीर के लिए योग का वरदान: सर्वांगपुष्टि आसन के फायदे और अभ्यास


    नई दिल्ली ।आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां अनियमित दिनचर्या, तनाव और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत आम हो गई है, वहीं शरीर कमजोर और सुस्त महसूस करना भी आम बात हो गई है। ऐसे समय में रोजाना 10 से 15 मिनट का योगाभ्यास न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक ऊर्जा बढ़ाने में भी कारगर साबित होता है ।

    मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, सर्वांगपुष्टि आसन एक सरल लेकिन प्रभावी योगासान है। यह पूरे शरीर को सक्रिय कर मांसपेशियों की ताकत, रक्त संचार और स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है, जिससे कमर और पीठ दर्द में राहत मिलती है।

    सर्वांगपुष्टि आसन पूरे शरीर की मांसपेशियों को टोन करता है, खासकर पेट, कमर और पैरों की चर्बी घटाने में मदद करता है। बेहतर रक्त संचार के कारण शरीर में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति बढ़ती है, जिससे त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है और इम्यूनिटी मजबूत होती है। इसके अलावा, मोटापा, कब्ज और शारीरिक दुर्बलता जैसी समस्याओं में सुधार आता है।

    बच्चों और युवाओं में हाइट और शारीरिक विकास को बढ़ावा देने में भी यह आसन सहायक है। जोड़ों की जकड़न दूर होती है, लचीलापन बढ़ता है और थकान एवं तनाव कम होकर ऊर्जा का स्तर बनाए रहता है।

    हालांकि, इसे करते समय सावधानी बरतना जरूरी है। गर्दन, पीठ या कंधे में चोट, उच्च रक्तचाप, सिरदर्द, गंभीर हृदय रोग या हाल ही में सर्जरी हुई हो तो यह आसन न करें। गर्भवती महिलाएं और पीरियड्स के दौरान भी इसे टालें। शुरुआत में अभ्यास को ज्यादा लंबा न रखें, सांस पर ध्यान दें और खाली पेट या हल्के व्यायाम के बाद ही करें। असुविधा या चक्कर आने पर तुरंत रुक जाएं।

    सर्वांगपुष्टि आसन शरीर को मजबूत बनाता है, सुस्ती दूर करता है और मानसिक ऊर्जा बढ़ाता है। रोजाना 10 मिनट का नियमित अभ्यास आधुनिक जीवन की चुनौतियों से निपटने और स्वास्थ्य को संतुलित रखने का सरल और प्रभावी तरीका है।

  • हार्ट हेल्थ और उम्र कम करने के लिए जरूरी एंटीऑक्सिडेंट रिच डाइट: कैसे लें रोजाना

    हार्ट हेल्थ और उम्र कम करने के लिए जरूरी एंटीऑक्सिडेंट रिच डाइट: कैसे लें रोजाना


    नई दिल्ली एक मशहूर कहावत है ‘ईट द रेनबो’। इसका मतलब है अपनी थाली में अलग-अलग रंगों वाले नेचुरल फूड शामिल करें। यह सिर्फ कहावत नहीं बल्कि साइंस-बेस्ड सलाह भी है। रेड स्ट्रॉबेरी, बैंगनी प्लम, हरी पत्तेदार सब्जियां और नीली ब्लूबेरी जैसे रंगीन फूड्स में पॉलीफेनॉल्स जैसे पावरफुल एंटीऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं। लंदन के किंग्स कॉलेज की हालिया स्टडी के मुताबिक लंबे समय तक पॉलीफेनॉल रिच डाइट लेने से हार्ट हेल्थ बेहतर रहती है।

    डॉ. पूनम तिवारी, सीनियर डाइटीशियन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के अनुसार, एंटीऑक्सिडेंट्स शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। फ्री रेडिकल्स अनस्टेबल मॉलिक्यूल होते हैं जो सेल्स को डैमेज करते हैं और ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस पैदा करते हैं। एंटीऑक्सिडेंट्स इन्हें न्यूट्रलाइज कर शरीर को सुरक्षा प्रदान करते हैं। विटामिन A, C, E, बीटा-कैरोटीन, लाइकोपीन, ल्यूटिन, सेलेनियम और पॉलीफेनॉल जैसे तत्व इन फूड्स में होते हैं।

    एंटीऑक्सिडेंट्स सेल्स को डैमेज होने से बचाते हैं, ब्लड वेसल्स को हेल्दी रखते हैं और इंफ्लेमेशन कम करते हैं। जब शरीर में स्तर बैलेंस्ड रहता है, तो इम्यून सिस्टम भी प्रभावी ढंग से काम करता है।

    हार्ट हेल्थ के लिए यह बेहद जरूरी है क्योंकि हार्ट डिजीज की शुरुआत अक्सर आर्टरीज में इंफ्लेमेशन और अंदरूनी डैमेज से होती है। LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल जब ऑक्सिडाइज्ड होता है तो आर्टरीज की वॉल्स पर जमाव बनता है और ब्लड फ्लो प्रभावित होता है। एंटीऑक्सिडेंट्स इस प्रोसेस को कंट्रोल करते हैं, ब्लड फ्लो बेहतर रखते हैं और दिल पर दबाव कम करते हैं।

    एंटीऑक्सिडेंट्स इम्यूनिटी बढ़ाने में भी मदद करते हैं। विटामिन C, E और बीटा-कैरोटीन संक्रमण से लड़ने वाली इम्यून सेल्स को मजबूत बनाते हैं। इसके अलावा, एजिंग स्पीड कम करने में भी यह सहायक होते हैं। ऑक्सिडेटिव डैमेज की वजह से सेल्स, डीएनए, प्रोटीन और बॉडी फैट डैमेज होते हैं जिससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेज होती है। एंटीऑक्सिडेंट रिच फूड यह डैमेज कम कर सेल्स की उम्र बढ़ाते हैं।

    सप्लीमेंट की जरूरत आमतौर पर तब होती है जब डाइट संतुलित न हो, या व्यक्ति प्रदूषण, स्मोकिंग, क्रॉनिक स्ट्रेस या कमजोर इम्यून सिस्टम से प्रभावित हो। रोजाना पर्याप्त एंटीऑक्सिडेंट्स के लिए 4-5 सर्विंग फल और सब्जियां लेना पर्याप्त माना जाता है। हाई-डोज सप्लीमेंट्स लेने से नेचुरल बैलेंस बिगड़ सकता है, जिससे मेटाबॉलिक प्रोसेस और इम्यून सिस्टम पर असर पड़ सकता है।

    एंटीऑक्सिडेंट फूड को डाइट में शामिल करने के लिए किसी महंगे प्लान की जरूरत नहीं। कोशिश करें कि थाली में अलग-अलग रंग के फल और सब्जियां हों और प्रोसेस्ड स्नैक्स की जगह नेचुरल ऑप्शन चुनें।एंटीऑक्सिडेंट्स रिच फूड कोई ट्रेंड नहीं बल्कि हेल्थ स्ट्रैटेजी है। यह हार्ट हेल्थ बेहतर रखता है, इम्यूनिटी मजबूत करता है और उम्र बढ़ने की रफ्तार को संतुलित करता है। रंगीन और नेचुरल डाइट लंबे समय तक सेहतमंद रहने में अहम भूमिका निभाती है।

  • Holi 2026: रंगों से पहले स्किन को करें प्रोटेक्ट, अपनाएं ये आसान Pre-Holi स्किन केयर रूटीन

    Holi 2026: रंगों से पहले स्किन को करें प्रोटेक्ट, अपनाएं ये आसान Pre-Holi स्किन केयर रूटीन


    नई दिल्ली । Holi का त्योहार खुशियों उमंग और रंगों से भरा होता है लेकिन बाजार में मिलने वाले केमिकल युक्त रंग त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। साल 2026 में होली 4 मार्च को मनाई जाएगी जबकि मथुरा-वृंदावन में उत्सव की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में जरूरी है कि आप त्योहार से 5-7 दिन पहले अपनी स्किन को तैयार करें ताकि रंगों का असर कम से कम हो और त्वचा हेल्दी बनी रहेनई दिल्ली

    होली से 5-7 दिन पहले क्या करें?

    डर्मेटोलॉजिस्ट के अनुसार होली से एक हफ्ता पहले से ही स्किन को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है।
    रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। माइल्ड क्लींजर का इस्तेमाल करें। फेस और बॉडी पर नियमित मॉइश्चराइजर लगाएं। किसी नए ब्यूटी प्रोडक्ट केमिकल पील या हार्श ट्रीटमेंट को ट्राई न करें।अगर पहले से एक्ने एलर्जी या रैश की समस्या है तो पहले उसका इलाज कराएं क्योंकि सेंसिटिव स्किन पर रंग ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं।

    रंग खेलने से पहले ये 3 चीजें जरूर लगाएं

    तेल की पतली परत: होली खेलने से 20-30 मिनट पहले चेहरे गर्दन हाथ-पैरों पर नारियल या बादाम का तेल लगाएं। इससे स्किन पर एक प्रोटेक्टिव लेयर बनती है और रंग सीधे त्वचा में नहीं चिपकते।

    मॉइश्चराइजर: तेल के बाद वॉटर-बेस्ड मॉइश्चराइजर लगाएं।

    सनस्क्रीन: धूप में खेलने से पहले कम से कम SPF 30 या उससे ज्यादा का सनस्क्रीन 15-20 मिनट पहले अप्लाई करें। जरूरत हो तो दोबारा लगाएं।अलग-अलग स्किन टाइप के लिए खास टिप्स 

    ड्राई स्किन
    हेवी मॉइश्चराइजर और क्रीम-बेस्ड प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें। रात में स्किन रिपेयर क्रीम लगाएं ताकि नमी बरकरार रहे।

    ऑयली स्किन

    हल्का नॉन-कॉमेडोजेनिक मॉइश्चराइजर चुनें। ज्यादा ऑयलिंग से बचें लेकिन एक पतली प्रोटेक्टिव लेयर जरूर रखें।

    सेंसिटिव स्किन
    खुशबूदार या केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स से बचें। पहले पैच टेस्ट करें और जहां तक संभव हो हर्बल या ऑर्गेनिक रंगों का ही उपयोग करें।

    केमिकल रंगों से बचाव क्यों जरूरी?

    विशेषज्ञों के अनुसार कई रंगों में लेड मरकरी और अन्य हानिकारक केमिकल मिलाए जाते हैं जो स्किन एलर्जी रैश और पिगमेंटेशन का कारण बन सकते हैं। अगर रंग लगाने के बाद जलन या खुजली हो तो त्वचा को जोर से रगड़ने के बजाय सादे पानी से धोएं और जरूरत पड़ने पर स्किन स्पेशलिस्ट से सलाह लें।

    क्या बिल्कुल न करें?

    रंग छुड़ाने के लिए स्किन को जोर से न रगड़ें।हार्श स्क्रब या केरोसिन जैसे घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल न करें।बहुत गर्म पानी से चेहरा न धोएं।सही तैयारी के साथ आप होली के रंगों का आनंद भी ले सकते हैं और अपनी त्वचा को सुरक्षित भी रख सकते हैं।

  • पालक खाने से पथरी और जोड़ों में दर्द? इन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी..

    पालक खाने से पथरी और जोड़ों में दर्द? इन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी..


    नई दिल्ली ।पालक को अक्सर सुपरफूड कहा जाता है क्योंकि यह रक्त बढ़ाने, हड्डियों को मजबूत करने और पेट की सेहत सुधारने में मदद करता है। लेकिन हर किसी के लिए यह सुरक्षित नहीं है। कुछ लोगों के लिए पालक का सेवन परेशानी का कारण बन सकता है।

    आयुर्वेद में पालक के गुण और शरीर के दोषों वात, पित्त, कफ पर इसके प्रभाव को ध्यान में रखा जाता है। जहां यह रक्तवर्धक और पोषण से भरपूर है, वहीं इसके अत्यधिक सेवन से पथरी का खतरा बढ़ सकता है। खासकर उन लोगों को, जिन्हें पहले से यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन UTI या किडनी की समस्याएं हैं, पालक से बचना चाहिए। यह मूत्र मार्ग में रुकावट पैदा कर सकता है और आगे जाकर पथरी का कारण बन सकता है।

    यदि आपकी पाचन शक्ति कमजोर है, तो पालक से परहेज करना बेहतर है। पाचन अग्नि मंद होने पर पालक पेट में सही तरीके से पचता नहीं और टॉक्सिन पैदा कर सकता है। इससे पेट भारी, गैस या खराब बैक्टीरिया का विकास हो सकता है।

    इसके अलावा, शरीर में वात और कफ की अधिकता वाले लोग भी पालक का सेवन सीमित करें। पालक की भारी प्रकृति कफ को बढ़ाकर श्वसन समस्याएं और वात को बढ़ाकर जोड़ों में जकड़न या गैस की समस्या पैदा कर सकती है।

    पालक फायदेमंद होने के बावजूद कुछ परिस्थितियों में नुकसानदेह भी हो सकता है। खासकर यूटीआई, पथरी, कमजोर पाचन शक्ति और वात-कफ अधिक होने वाले लोगों को पालक का सेवन सीमित करना चाहिए। संतुलित मात्रा और सही तैयारी के साथ पालक का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, लेकिन साव

  • कार, बस या फ्लाइट में मोशन सिकनेस? इन आसान टिप्स से राहत पाएं

    कार, बस या फ्लाइट में मोशन सिकनेस? इन आसान टिप्स से राहत पाएं


    नई दिल्ली। सफर का मज़ा तब ही बढ़ता है जब रास्ता आरामदायक और परेशानी-मुक्त हो। लेकिन कई लोगों के लिए बस, कार या फ्लाइट में सफर करना मोशन सिकनेस के कारण मुश्किल भरा हो जाता है। चक्कर, उलझन, मतली और कभी-कभी उल्टी की समस्या ऐसे यात्रियों के लिए ट्रिप का मज़ा ही खराब कर देती है। खासकर बच्चों और महिलाओं में मोशन सिकनेस अधिक देखने को मिलती है।

    मोशन सिकनेस तब होती है जब आंखों, कानों और शरीर से मिलने वाले संकेत दिमाग तक अलग-अलग तरीके से पहुंचते हैं। यानी शरीर को स्थिर महसूस होता है, लेकिन आंखें चलती हुई चीजें देखती हैं। यही असंतुलन दिमाग को भ्रमित करता है और मतली, चक्कर या उल्टी जैसी समस्याएं पैदा करता है।

    मोशन सिकनेस क्यों होती है?
    हमारे कान के अंदर मौजूद बैलेंस सिस्टम, जिसे वेस्टिब्युलर सिस्टम कहते हैं, शरीर की गति को महसूस करता है। जब यह सिस्टम और आंखों से मिलने वाली जानकारी मेल नहीं खाती, तो दिमाग कन्फ्यूज हो जाता है। इसका असर मतली, उल्टी, पसीना और सिरदर्द के रूप में दिखता है। लंबी यात्रा, घुमावदार सड़कें और बंद वाहन इस समस्या को और बढ़ा सकते हैं।

    मोशन सिकनेस से बचने के आसान उपाय
    1. सही सीट का चुनाव करें

    कार में आगे की सीट, बस में खिड़की के पास और फ्लाइट में विंग के पास वाली सीट अपेक्षाकृत स्थिर मानी जाती है। यहां बैठने से झटके कम महसूस होते हैं और चक्कर आने की संभावना घटती है।

    2. हल्का और संतुलित भोजन करें
    सफर से पहले तला-भुना या भारी भोजन करने से बचें। हल्का और सुपाच्य भोजन करें और बहुत ज्यादा खाली पेट भी न रहें। अदरक की चाय, नींबू पानी या हल्का स्नैक मोशन सिकनेस को कम करने में मदद कर सकते हैं।

    3. नजरें स्थिर रखें

    चलती गाड़ी में मोबाइल या किताब पढ़ना मोशन सिकनेस को बढ़ा सकता है। कोशिश करें कि दूर किसी स्थिर बिंदु को देखें या आंखें बंद करके आराम करें।

    4. ताजी हवा और हाइड्रेशन
    वाहन में ताजी हवा का इंतजाम रखें। खिड़की खोलें या एयर वेंट को अपनी ओर रखें। साथ ही पानी की छोटी-छोटी घूंट लेते रहें। यह शरीर को डिहाइड्रेट होने से बचाएगा और उलझन कम करेगा।

    5. दवाइयों का सहारा
    अगर समस्या गंभीर है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर एंटी-नॉशिया या एंटीहिस्टामिन दवाएं ली जा सकती हैं। इन्हें सफर शुरू होने से पहले लेना ज्यादा असरदार होता है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं को दवा लेने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है।

    मोशन सिकनेस को पूरी तरह रोकना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन सही तैयारी और सावधानी अपनाकर इसके असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। छोटे-छोटे बदलाव, जैसे सही सीट पर बैठना, हल्का भोजन करना, नजरें स्थिर रखना और पर्याप्त हाइड्रेशन, सफर को आरामदायक और मज़ेदार बना सकते हैं।

  • घर पर बनाएं नींबू का चटपटा-चटकारेदार अचार: आसान और फटाफट रेसिपी

    घर पर बनाएं नींबू का चटपटा-चटकारेदार अचार: आसान और फटाफट रेसिपी


    नई दिल्ली । नींबू का अचार सिर्फ खाने का स्वाद ही बढ़ाता है बल्कि यह पाचन के लिए भी बेहद लाभकारी होता है। भारतीय खाने में अचार की खास जगह है चाहे पराठे हों या चावल दी दा अचार खाने का मज़ा दुगना कर देता है। गर्मियों में नींबू का अचार बनाना एक परंपरा जैसी हो गई है। खट्टा मीठा और मसालेदार यह अचार खाने में चटपटा और पाचन के लिए हितकारी होता है। अगर आप भी घर पर नींबू का अचार बनाना चाहते हैं तो यहां आसान रेसिपी नोट कर लें।

    सामग्री

    नींबू 500 ग्राम पतले छिलके वाले और रसीले ,नमक 50 ग्राम लगभग 4 बड़े चम्मच ,काला नमक 1 बड़ा चम्मच,लाल मिर्च पाउडर 2 बड़े चम्मच तीखापन स्वाद अनुसार ,हल्दी पाउडर 1 छोटा चम्मच,अजवाइन 1 बड़ा चम्मच हथेलियों से रगड़कर ,भुना हुआ जीरा पाउडर 1 बड़ा चम्मच,हींग आधा छोटा चम्मच

    बनाने की विधि
    नींबू की तैयारी: नींबू को अच्छी तरह धोकर पूरी तरह सुखा लें। ध्यान रहे कि नींबू पर कोई नमी न रहे नहीं तो अचार जल्दी खराब हो सकता है। काटना: प्रत्येक नींबू को 4 या 8 टुकड़ों में काट लें। आप चाहें तो नींबू का रस अंदर ही रहने दें या थोड़ा रस अलग से निचोड़कर ऊपर डाल सकते हैं। मसाले मिलाना: एक बड़े सूखे बर्तन में नींबू के टुकड़े डालें। अब इसमें नमक काला नमक हल्दी लाल मिर्च पाउडर अजवाइन जीरा पाउडर और हींग डालें।

    मिक्स करना: चम्मच या हाथों से नींबू और मसालों को अच्छे से मिलाएं ताकि हर टुकड़े पर मसाला लग जाए। अगर आप खट्टा मीठा स्वाद चाहते हैं तो इस समय थोड़ा गुड़ या चीनी भी मिला सकते हैं। धूप दिखाना: तैयार अचार को एक कांच के सूखे जार में भरें। इसे 4 5 दिनों तक धूप में रखें। दिन में एक बार जार को हल्का हिलाएं ताकि मसाले और रस अच्छी तरह मिल जाए। इस तरह आपका चटपटा और चटकारेदार नींबू का अचार तैयार हो जाएगा। इसे पराठे चावल या स्नैक्स के साथ परोसें और खाने का स्वाद दोगुना करें।

  • बढ़ती उम्र में मांसपेशियां कमजोर? दही-इडली से रखें मसल्स मजबूत, 60 के बाद भी फिट रहें

    बढ़ती उम्र में मांसपेशियां कमजोर? दही-इडली से रखें मसल्स मजबूत, 60 के बाद भी फिट रहें


    नई दिल्ली । बुढ़ापे में थकान चलने में दिक्कत और गिरने का डर आम बात लगती है लेकिन यह केवल उम्र का खेल नहीं है। इसका मुख्य कारण है सार्कोपेनिया यानी मांसपेशियों का कमजोर होना। 60 की उम्र के बाद शरीर प्रोटीन का सही उपयोग नहीं कर पाता जिससे मसल्स धीरे-धीरे गलने लगती हैं।

    डॉ. शैलेंद्र भदौरिया एमडी-जेरियाट्रिक मेडिसिन एम्स नई दिल्ली बताते हैं कि इस उम्र में मसल्स मजबूत रखने के लिए डाइट और हल्की कसरत दोनों जरूरी हैं। आईसीएमआर और WHO के अनुसार 60+ उम्र में प्रतिदिन प्रति किलो शरीर वजन के हिसाब से 1 ग्राम प्रोटीन लेना चाहिए। उदाहरण के लिए यदि आपका वजन 65 किलो है तो रोजाना 65 ग्राम प्रोटीन शामिल करें।

    मसल स्ट्रेंथ बढ़ाने में फर्मेंटेड फूड्स जैसे दही इडली ढोकला और खमीर वाले अन्य पदार्थ बहुत मददगार हैं। ये प्रोबायोटिक्स से पेट की सेहत सुधारते हैं जिससे प्रोटीन आसानी से पचता और अवशोषित होता है। लेकिन अकेले फर्मेंटेड फूड पर्याप्त नहीं हैं। प्रोटीन की सही मात्रा और हल्की वजन वाली कसरत मिलाकर ही मसल्स मजबूत रह सकती हैं।

    WHO की सलाह के अनुसार 65 साल से ऊपर के लोगों को हफ्ते में कम से कम 2 दिन मसल स्ट्रेंथ बढ़ाने वाली कसरत करनी चाहिए। इसके लिए आसान एक्सरसाइज जैसे कुर्सी से 10 बार उठना-बैठना दीवार के सहारे पुश-अप या पानी की बोतल से वेट लिफ्टिंग करना पर्याप्त है।

    डॉ. भदौरिया बताते हैं कि एक संतुलित दिनचर्या अपनाने से मसल्स कमजोर होने की प्रक्रिया धीमी पड़ती है। उदाहरण के तौर पर:

    सुबह: हल्की एक्सरसाइज + प्रोटीन युक्त नाश्ता

    दोपहर: दाल पनीर और सलाद

    शाम: 20 मिनट वॉक

    रात: हल्की खिचड़ी या पौष्टिक डिनर

    इस तरह नियमित प्रोटीन फर्मेंटेड फूड और हल्की कसरत से 60 पार भी मसल्स मजबूत बनी रह सकती हैं और थकान या गिरने का डर कम होता है। बुढ़ापे में फिट रहने के लिए यह आसान और प्रभावी तरीका माना जाता है।

  • रंगों का त्योहार, ठंडाई के साथ: जानें खसखस ठंडाई बनाने का तरीका..

    रंगों का त्योहार, ठंडाई के साथ: जानें खसखस ठंडाई बनाने का तरीका..


    नई दिल्ली।होली केवल रंगों और गुलाल का त्योहार नहीं है। यह त्योहार स्वाद और ताजगी के लिए भी जाना जाता है। और जब बात हो ठंडक और ऊर्जा की, तो ठंडाई का नाम सबसे पहले आता है। खासकर खसखस ठंडाई, जो स्वाद और स्वास्थ्य दोनों में अद्भुत संतुलन देती है। इस होली, आप अपने परिवार और दोस्तों के लिए घर पर खसखस ठंडाई बनाकर त्योहार को और यादगार बना सकते हैं।

    ठंडाई क्यों खास है?
    ठंडाई केवल ठंडी ड्रिंक नहीं है। इसमें खसखस, बादाम, काजू, किशमिश और गुलाब जल जैसे तत्व शामिल होते हैं, जो न केवल शरीर को ठंडक देते हैं, बल्कि ऊर्जा भी प्रदान करते हैं। भारतीय पारंपरिक स्वास्थ्य विज्ञान के अनुसार, ठंडाई में मौजूद सूखे मेवे और मसाले शरीर को गर्मियों की उमस से बचाने में मदद करते हैं।

    खसखस ठंडाई बनाने की सामग्री:
    खसखस – 2 बड़े चम्मच

    काजू – 10-12 पीसेस

    बादाम – 10-12 पीसेस

    काली मिर्च – 1/4 चम्मच

    गुलाब जल – 1 छोटा चम्मच

    ठंडा दूध – 500 ml

    शक्कर – 4-5 बड़े चम्मच (स्वाद अनुसार)

    साबुत किशमिश – 8-10 पीसेस

    खसखस ठंडाई बनाने की स्टेप-बाय-स्टेप रेसिपी:
    1. खसखस और मेवे भिगोएँ: खसखस, काजू और बादाम को 4–5 घंटे या रात भर पानी में भिगोकर नरम कर लें।

    2. पीसना: भिगोए हुए खसखस और मेवे को ब्लेंडर में डालकर थोड़ा पानी डालकर महीन पेस्ट तैयार करें।

    3. मिलाना: पेस्ट में ठंडा दूध डालें और अच्छी तरह मिलाएँ।

    4. मसाले डालें: अब इसमें काली मिर्च, गुलाब जल और शक्कर डालकर फिर से मिक्स करें।

    5. छानना: मिश्रण को छलनी से छानकर गाढ़ा दूध निकाल लें।

    6. ठंडा परोसें: ठंडाई को फ्रिज में 1–2 घंटे ठंडा करें और साबुत किशमिश से गार्निश करके सर्व करें।

    खसखस ठंडाई क्यों चुनें?
    खसखस ठंडाई न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि इसमें ऊर्जा बढ़ाने वाले तत्व और एंटीऑक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं। यह पारंपरिक ठंडाई की तुलना में हल्की और आसानी से पचने वाली होती है।

    होली पर ठंडाई पीने के फायदे:
    शरीर को ठंडक देती है

    प्यास बुझाने के साथ ऊर्जा भी देती है

    रंगों और गुलाल खेलने के बाद डिहाइड्रेशन से बचाती है

    स्वाद में बच्चों और बड़ों दोनों को समान रूप से पसंद आती है

    परंपरा और त्योहार का संगम:
    होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है। यह परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने, खास पकवान और ड्रिंक के माध्यम से जुड़ने का अवसर भी है। ठंडाई इस त्योहार में सिर्फ पेय नहीं, बल्कि खुशियों और यादों की मिठास जोड़ती है। इस होली, खसखस ठंडाई बनाकर आप रंगों की मिठास के साथ स्वाद और ठंडक का मज़ा भी बढ़ा सकते हैं।