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  • चीज: स्वादिष्ट भी, सेहत के लिए फायदेमंद भी? डाइटीशियन से जानें न्यूट्रिशनल वैल्यू और हेल्थ बेनिफिट्स

    चीज: स्वादिष्ट भी, सेहत के लिए फायदेमंद भी? डाइटीशियन से जानें न्यूट्रिशनल वैल्यू और हेल्थ बेनिफिट्स


    नई दिल्ली । यदि आप किसी रेस्टोरेंट में गए हैं तो मेन्यू पर अक्सर एक्स्ट्रा चीज बर्गर एक्स्ट्रा चीज पिज्जा या एक्स्ट्रा चीज सैंडविच जैसे आइटम्स दिखते हैं। स्वाद में लाजवाब चीज सिर्फ खाने को मजेदार ही नहीं बनाती बल्कि प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत भी है। लेकिन क्या चीज नियमित रूप से खाना सेहत के लिए सुरक्षित है?

    डॉ. पूनम तिवारी सीनियर डाइटीशियन डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ बताती हैं कि चीज एक डेयरी उत्पाद है जो पालतू जानवरों के दूध से बनाया जाता है। इसके उत्पादन में दूध को हल्का गर्म किया जाता है फिर उसमें स्टार्टर कल्चर मिलाकर दूध को खट्टा किया जाता है। उसके बाद रेनेट या नींबू का रस डालकर दूध जमाया जाता है। जमा हुआ दूध छोटे टुकड़ों में काटा जाता है ताकि उसमें मौजूद व्हे यानी बचा हुआ पानी अलग हो सके। जो ठोस हिस्सा बचता है वही चीज कहलाता है। कुछ चीज को हफ्तों या महीनों तक एज भी किया जाता है जिससे उसका स्वाद और टेक्सचर और बेहतर होता है।

    चीज में पाए जाने वाले मुख्य पोषक तत्वों में प्रोटीन और कैल्शियम शामिल हैं। यह हड्डियों की मजबूती और मांसपेशियों के विकास के लिए उपयोगी है। इसके अलावा चीज में विटामिन A B12 और फास्फोरस भी होते हैं। वहीं इसका सेवन सीमित मात्रा में करना जरूरी है क्योंकि इसमें सैचुरेटेड फैट और सोडियम भी काफी मात्रा में होता है। ज्यादा चीज खाने से वजन बढ़ने कोलेस्ट्रॉल बढ़ने और हृदय संबंधी जोखिम भी हो सकता है।

    डॉ. तिवारी के अनुसार स्वस्थ वयस्कों के लिए रोजाना 30–40 ग्राम चीज खाना सेहत के लिए लाभकारी है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह हड्डियों और दांतों की मजबूती में मदद करता है। हालांकि उच्च ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल वाले लोग चीज का सेवन कम या डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करें।

    इस प्रकार चीज का स्वाद और न्यूट्रिशनल बेनिफिट दोनों ही इसे खास बनाते हैं। लेकिन इसे संतुलित मात्रा में खाना चाहिए। पिज्जा पास्ता या सैंडविच में एक्स्ट्रा चीज लेना स्वादिष्ट तो है लेकिन सेहत का ध्यान रखते हुए इसका सेवन संतुलित रूप से करना ही सही है।

  • हरसिंगार प्लांटेशन: सफेद फूलों और खुशबू से सजाएं अपना गार्डन

    हरसिंगार प्लांटेशन: सफेद फूलों और खुशबू से सजाएं अपना गार्डन


    नई दिल्ली। इसे पारिजात के नाम से भी जाना जाता है। रात में खिलने और सुबह जमीन पर बिखर जाने वाले ये फूल न केवल बगीचे की शोभा बढ़ाते हैं, बल्कि हल्की-सी खुशबू से माहौल को ताजगी से भर देते हैं।

    हरसिंगार का पौधा ज्यादा देखभाल नहीं मांगता, इसलिए यह घरेलू बगीचों के लिए एकदम परफेक्ट माना जाता है। सही जगह, उपयुक्त मिट्टी और थोड़ी-सी धैर्य के साथ आपका गार्डन कुछ ही महीनों में सफेद फूलों से लहलहा सकता है।

    हरसिंगार पौधा लगाने और देखभाल के टिप्स
    1. सही जगह का चुनाव
    हरसिंगार को धूप और हल्की छांव दोनों पसंद हैं। इसे ऐसी जगह लगाएं जहां रोज़ाना 4-6 घंटे की धूप मिल सके। बहुत तेज धूप में छोटे पौधे की पत्तियां झुलस सकती हैं, इसलिए शुरुआती दिनों में हल्की छाया बेहतर रहती है। अगर आप गमले में पौधा लगा रहे हैं, तो 12–16 इंच का बड़ा गमला चुनें।

    2. मिट्टी कैसी हो?
    इस पौधे के लिए अच्छी जलनिकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे बेहतर रहती है। आप 40% गार्डन सॉइल, 30% रेत और 30% गोबर की सड़ी खाद मिलाकर मिश्रण तैयार कर सकते हैं। मिट्टी ज्यादा कड़ी न हो, वरना जड़ें फैल नहीं पाएंगी। रोपण से पहले गड्ढे में थोड़ी जैविक खाद डालना लाभकारी होता है।

    3. पौधा लगाने की विधि

    नर्सरी से स्वस्थ और हरे पत्तों वाला पौधा चुनें। जमीन में लगभग 1–1.5 फुट गहरा गड्ढा खोदें। पौधे को सावधानी से रखें और मिट्टी भरकर हल्के हाथ से दबा दें। तुरंत हल्का पानी दें ताकि मिट्टी जड़ों से अच्छी तरह चिपक जाए। गमले में लगाने पर नीचे ड्रेनेज होल होना जरूरी है।

    4. सिंचाई और देखभाल
    हरसिंगार को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती। गर्मियों में 2-3 दिन में एक बार और सर्दियों में हफ्ते में एक बार पानी देना पर्याप्त है। ध्यान रखें कि पानी जमा न हो, वरना जड़ें सड़ सकती हैं। हर 2-3 महीने में जैविक खाद डालने से फूलों की संख्या बढ़ती है। सूखी और पीली टहनियों की समय-समय पर छंटाई करें।

    5. कब आएंगे फूल?
    आमतौर पर मानसून के बाद से लेकर शरद ऋतु तक इस पौधे में फूल आने लगते हैं। सुबह जमीन पर गिरे फूलों को इकट्ठा करना भी एक सुखद अनुभव है। सही देखभाल मिलने पर पौधा हर साल और ज्यादा घना और खूबसूरत होता जाता है।

    हरसिंगार लगाने के फायदे
    बगीचे की खूबसूरती बढ़ाता है

    हल्की-सी खुशबू से माहौल को ताजगी देती है

    कम देखभाल में भी लंबे समय तक फूल देती है

    पारंपरिक और धार्मिक महत्व भी रखता है

    हरसिंगार न केवल बगीचे की शोभा बढ़ाता है, बल्कि सफेद फूलों और हल्की खुशबू के जरिए घर के वातावरण को सुंदर और ताजगी से भर देता है। सही मिट्टी, पर्याप्त धूप और नियमित देखभाल के साथ आपका गार्डन सालों तक हरसिंगार के फूलों से लबालब भरा रह सकता है।

  • Skin Care Tips: डल स्किन को अलविदा कहो, बस अपनाएं ये ट्रिक, सिर्फ 6 आसान टिप्स से निखार रहेगा दिन-रात

    Skin Care Tips: डल स्किन को अलविदा कहो, बस अपनाएं ये ट्रिक, सिर्फ 6 आसान टिप्स से निखार रहेगा दिन-रात

    नई दिल्ली । बदलते मौसम में सबसे पहले असर हमारी त्वचा पर दिखने लगता है. कभी रूखापन कभी ऑयलीनेस तो कभी पिंपल्स और रैशेज स्किन कन्फ्यूज हो जाती है. उसे आखिर चाहिए क्या. ऐसे में अगर सही देखभाल न की जाए तो चेहरा बेजान लगने लगता है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है. कुछ आसान और रोजमर्रा की आदतें अपनाकर आप बिना मेकअप भी चांद सा निखार पा सकते हैं. बदलते मौसम में थोड़ी सी सावधानी और नियमित स्किन केयर रूटीन अपनाकर आप अपनी त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग रख सकते हैं.
    याद रखिए असली खूबसूरती नैचुरल होती है. सही देखभाल से वही निखार सबसे ज्यादा दमकता है. मैक्स हॉस्पिटल में प्रिंसिपल कंसल्टेंट के तौर पर तैनात डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. साक्षी श्रीवास्तव का कहना है कि जब हम अपनी डाइट को बैलेंस करते हैं और केमिकल्स और मेकअप के बजाय नेचुरल चीज़ों पर ध्यान देते हैं तो स्किन ग्लो करती है.

    क्लेंजिंग है सबसे पहला कदम

    मौसम चाहे कोई भी हो दिन में 2 बार माइल्ड फेसवॉश से चेहरा साफ करना जरूरी है. इससे धूल-मिट्टी और अतिरिक्त ऑयल हटता है और पोर्स साफ रहते हैं, लेकिन बार-बार फेसवॉश करने से बचें, वरना स्किन ड्राई हो सकती है.

    मॉइश्चराइजर कभी न छोड़ें
    अक्सर लोग सोचते हैं कि गर्मी में मॉइश्चराइजर की जरूरत नहीं होती हैं, लेकिन बदलते मौसम में स्किन का बैलेंस बिगड़ जाता है. हल्का, वॉटर-बेस्ड मॉइश्चराइजर लगाएं. ताकि त्वचा हाइड्रेटेड रहे और ग्लो बरकरार रहे.

    सनस्क्रीन है जरूरी

    धूप सर्दी-गर्मी नहीं देखती. बाहर निकलने से 15-20 मिनट पहले SPF 30 या उससे ज्यादा वाला सनस्क्रीन लगाएं. इससे टैनिंग, पिग्मेंटेशन और समय से पहले झुर्रियों से बचाव होता है.बाहर जाने से पहले सनस्क्रीन लगाना बहुत ज़रूरी है. खासकर गर्मियों में, सनस्क्रीन हमारी स्किन के लिए बहुत सारी प्रॉब्लम खड़ी कर सकता है, जिससे यह डल और इरिटेटेड दिखती है.

    हफ्ते में एक-दो बार एक्सफोलिएशन

    डेड स्किन हटाने के लिए हल्के स्क्रब या केमिकल एक्सफोलिएटर का इस्तेमाल करें. इससे त्वचा साफ और फ्रेश दिखती है, लेकिन ज्यादा स्क्रब करने से स्किन डैमेज हो सकती है. इसलिए संतुलन जरूरी है.

    पानी और डाइट पर ध्यान दें

    खूबसूरत त्वचा सिर्फ बाहर से नहीं, अंदर से भी बनती है. दिन में 7-8 गिलास पानी पिएं और अपनी डाइट में फल, हरी सब्जियां और विटामिन-सी से भरपूर चीजें शामिल करें. इससे त्वचा में नैचुरल ग्लो आता है.

    ब्यूटी स्लीप को न करें नजरअंदाज

    रात की 7-8 घंटे की नींद स्किन के लिए बेहद जरूरी है. सोते समय त्वचा खुद को रिपेयर करती है, जिससे चेहरा सुबह फ्रेश और चमकदार नजर आता है.

  • घर पर ऐसे बनाएं हर्बल फेस वॉश मुलायम और ग्लोइंग त्वचा का आसान नुस्खा

    घर पर ऐसे बनाएं हर्बल फेस वॉश मुलायम और ग्लोइंग त्वचा का आसान नुस्खा

    नई दिल्ली । हमारी त्वचा दिनभर प्रदूषण, धूल-मिट्टी, पसीना और गंदगी के संपर्क में रहती है, जिससे स्किन बेजान, रूखी या पिंपल्स जैसी समस्याएँ बढ़ जाती हैं। कई बार लोग बाजार के महंगे फेस वॉश प्रोडक्ट्स का उपयोग करते हैं, लेकिन उनमें कई रसायन केमिकल्स भी होते हैं जो त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में घर पर मौजूद सरल नेचुरल सामग्री से बनने वाला हर्बल फेस वॉश एक बेहतर, सुरक्षित और सस्ता विकल्प है। DIY फेस वॉश पाउडर को आप अपनी स्किन टाइप के हिसाब से तैयार कर सकते हैं और यह त्वचा को अंदर से साफ, पोषित और चमकदार बनाता है।

    इस हर्बल फेस वॉश में मुल्तानी मिट्टी, चंदन, बेसन और कस्तूरी हल्दी जैसी पारंपरिक सामग्री होती हैं, जिनके प्राकृतिक फायदे त्वचा साफ करने, एक्ने को रोकने और निखार लाने में मदद करते हैं। मुल्तानी मिट्टी त्वचा से अतिरिक्त तेल और गंदगी निकालती है, चंदन ठंडक और ग्लो प्रदान करता है, बेसन डेड स्किन हटाता है और कस्तूरी हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो मुंहासों के खिलाफ मदद करते हैं।

    सामग्री

    चम्मच कस्तूरी हल्दी – प्राकृतिक रंग निखारने में मदद
    चम्मच चंदन पाउडर – ठंडक और चमक के लिए
    चम्मच बेसन – त्वचा से गंदगी हटाने वाला
    चम्मच चावल का आटा – स्क्रब जैसा असर
    चम्मच मुल्तानी मिट्टी – डीप क्लींजिंग के लिए

    बनाने की विधि

    सभी सूखी सामग्री को अच्छे से मिलाएँ और एक एयर-टाइट कंटेनर में भरकर स्टोर करें। जब इस्तेमाल करना हो, तो 2 चम्मच पाउडर लें और उसमें थोड़ा गुलाब जल, दूध या शहद मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। पेस्ट को गीले चेहरे पर लगाएँ और 10-15 मिनट के लिए छोड़ दें।

    इसके बाद ठंडे पानी से चेहरा धो लें।

    इसे सुबह या शाम नियमित रूप से लगाने से त्वचा में साफ-सुथरा ग्लो और मुलायम निखार दिखाई देने लगता है। क्यों यह हर्बल फेस वॉश काम करता है गहरा क्लेंज़िंग: मुल्तानी मिट्टी और बेसन त्वचा के पोर्स से गंदगी निकालते हैं। त्वचा का निखार: चंदन और हल्दी त्वचा को टोन और ग्लो देते हैं। घरेलू और सुरक्षित: बिना रसायनों के, नेचुरल सामग्री से तैयार। नई सामग्री को चेहरे पर लगाने से पहले एक छोटे हिस्से पर पैच-टेस्ट जरूर करें ताकि कोई एलर्जी न हो। नियमित उपयोग से त्वचा में धीरे-धीरे बदलाव नजर आता है।

  • काली पड़ी चांदी? होली के लिए पायल और बिछिया तुरंत चमकाने के आसान घरेलू नुस्खे

    काली पड़ी चांदी? होली के लिए पायल और बिछिया तुरंत चमकाने के आसान घरेलू नुस्खे


    नई दिल्ली ।होली का त्योहार आते ही तैयारियों का दौर शुरू हो जाता है। रंग, परिधान और सजावट के साथ-साथ महिलाओं की सबसे बड़ी चिंता होती है उनके गहनों की चमक। खासकर पायल और बिछिया, जिन्हें महिलाएं अक्सर रोज पहनती हैं, समय के साथ काली पड़ जाती हैं। अगर आप भी चाहते हैं कि होली पर आपके गहने फिर से चमकदार दिखें, तो कुछ आसान घरेलू नुस्खों से इन्हें आप मिनटों में चमका सकते हैं।

    सबसे पहले बेकिंग सोडा और नींबू का तरीका बहुत कारगर है। एक कटोरी में थोड़ी बेकिंग सोडा लें और उसमें कुछ बूंदें नींबू का रस डालकर पेस्ट तैयार करें। इसे पायल या बिछिया पर हल्के हाथों से रगड़ें और कुछ मिनट बाद साफ पानी से धोकर सूखे कपड़े से पोंछ लें। इससे चांदी की काली परत हटकर गहने फिर से चमकने लगेंगे।

    दूसरा तरीका है टूथपेस्ट का। इसके लिए गहनों पर थोड़ा सा टूथपेस्ट लगाएं और मुलायम ब्रश से हल्के हाथों से साफ करें। इसके बाद गहनों को पानी से धोकर सुखा लें। यह तरीका जल्दी और आसान होने के साथ ही चांदी को खरोंच से भी बचाता है।

    तीसरा तरीका है सिरका और बेकिंग सोडा का मिश्रण। एक कप सफेद सिरके में एक चम्मच बेकिंग सोडा डालें और गहनों को इसमें 10–15 मिनट तक भिगो दें। भिगोने के बाद साफ पानी से धोकर कपड़े से पोंछ लें। इस तरीके से गहनों की काली परत आसानी से हट जाती है और चमक लौट आती है।

    चौथा तरीका है इमली के पानी का। इमली में प्राकृतिक एसिड होता है जो चांदी की काली परत हटाने में मदद करता है। थोड़ी सी इमली को गुनगुने पानी में भिगो दें और जब पानी गाढ़ा हो जाए, उसमें गहनों को 10 मिनट के लिए डुबोकर रखें। इसके बाद मुलायम ब्रश या कपड़े से हल्के हाथों से रगड़कर गहनों को साफ करें।

    पाँचवां और अंतिम आसान तरीका है गर्म पानी और नमक का। एक कटोरी में गर्म पानी लें और उसमें एक चम्मच नमक डालकर घोल बनाएं। इसमें गहनों को 10 मिनट तक भिगोकर, मुलायम ब्रश से साफ करें। इसके बाद पानी से धोकर सुखाएं। यह तरीका भी चांदी की चमक बढ़ाने में बेहद प्रभावी है।

    इन सरल तरीकों से आप अपने पायल और बिछिया को होली से पहले चमकदार और नए जैसे बना सकते हैं। याद रखें कि सफाई करते समय ज्यादा जोर न लगाएं, क्योंकि इससे गहनों पर खरोंच आ सकती है।

    होली पर रंगों के साथ-साथ अपने गहनों की चमक भी बनाए रखें और इन आसान टिप्स के जरिए त्योहार को और भी खास बनाएं।

  • किडनी रोग के शुरुआती संकेत: स्किन पर दिखें ये लक्षण, नज़रअंदाज़ किया तो गंभीर हो सकता है

    किडनी रोग के शुरुआती संकेत: स्किन पर दिखें ये लक्षण, नज़रअंदाज़ किया तो गंभीर हो सकता है


    नई दिल्ली । आज के समय में किडनी की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है और इसे अक्सर साइलेंट कंडीशन कहा जाता है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते। लेकिन जैसे जैसे किडनी की कार्यक्षमता घटती है शरीर की त्वचा और नाखून कई संकेत देने लगते हैं जिन्हें समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। सबसे आम संकेतों में से एक है त्वचा का अत्यधिक रूखा होना। त्वचा खुरदुरी पपड़ीदार और तनी हुई महसूस हो सकती है कई बार इसमें दरारें भी पड़ जाती हैं और यह मछली की चमड़ी जैसी दिखने लगती है।

    लगातार खुजली भी किडनी रोग का बड़ा संकेत हो सकती है। यह खुजली कभी शरीर के एक हिस्से तक सीमित रहती है और कभी पूरे शरीर में फैल जाती है। अगर यह लंबे समय तक बनी रहती है तो त्वचा पर खरोंच के निशान उभरने लगते हैं। कुछ जगहों पर त्वचा मोटी हो सकती है या सख्त गांठें बन सकती हैं जिससे इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है।

    किडनी सही से काम न करे तो खून में विषैले तत्व जमा होने लगते हैं। इसका असर त्वचा के रंग पर भी दिखाई देता है जो पीली धूसर या असामान्य रूप से फीकी नजर आ सकती है। कुछ लोगों में त्वचा पर मोटी और पीली परत भी बन जाती है। इसके अलावा नाखूनों में बदलाव भी महत्वपूर्ण संकेत हैं। नाखूनों का ऊपरी हिस्सा सफेद और निचला हिस्सा भूरा या लाल दिख सकता है। कभी कभी नाखूनों पर सफेद रेखाएं भी उभर आती हैं जिन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए।

    शरीर में सूजन यानी एडेमा भी किडनी फेलियर का संकेत हो सकता है। पैरों टखनों हाथों या चेहरे पर सूजन आ सकती है और त्वचा तनी या चमकदार दिख सकती है। खून में टॉक्सिन बढ़ने से त्वचा पर छोटे दाने या रैशेज भी उभर सकते हैं जिनमें तेज खुजली होती है और ठीक होने के बाद भी यह दोबारा उभर सकते हैं।

    कुछ गंभीर मामलों में बिना किसी स्पष्ट कारण के फफोले भी पड़ सकते हैं। ये हाथ पैर या चेहरे पर दिखाई देते हैं और सूखने के बाद निशान छोड़ जाते हैं। पेट या कमर के आसपास कोई नई गांठ या सूजन दिखे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह किडनी से जुड़ी गंभीर समस्या या कैंसर का संकेत भी हो सकता है।

    इसलिए अगर त्वचा में लगातार रूखापन खुजली दाने नाखूनों में बदलाव सूजन या किसी भी तरह की असामान्य गांठ नजर आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। शुरुआती पहचान और समय पर इलाज से गंभीर किडनी समस्याओं और फेलियर को रोका जा सकता है। अपनी किडनी की सेहत पर ध्यान देना जितना जरूरी है उतना ही अपने शरीर के छोटे छोटे संकेतों को समझना भी महत्वपूर्ण है।

  • हेल्दी लाइफ का सीक्रेट: मूंग स्प्राउट्स से बढ़ाएं ताकत और घटाएं वजन

    हेल्दी लाइफ का सीक्रेट: मूंग स्प्राउट्स से बढ़ाएं ताकत और घटाएं वजन


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर व्यक्ति फिट और हेल्दी रहने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में खानपान में पौष्टिक और प्राकृतिक चीजों को शामिल करना बेहद जरूरी हो गया है। मूंग दाल के स्प्राउट्स यानी अंकुरित मूंग एक ऐसा सुपरफूड है, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही इसे सेहत के लिए लाभकारी मानते हैं।

    जैसे ही मूंग दाल अंकुरित होती है, इसके पोषक तत्वों की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है। इसमें प्रोटीन, विटामिन सी, विटामिन ए, आयरन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये छोटे-छोटे अंकुर शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करते हैं। बदलते मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए मूंग स्प्राउट्स का सेवन बेहद फायदेमंद माना जाता है।

    पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में भी मूंग स्प्राउट्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें मौजूद फाइबर पेट को साफ रखने में मदद करता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। आयुर्वेद के अनुसार जब पाचन सही रहता है, तो शरीर का संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर होता है। अच्छे पाचन का असर त्वचा पर भी दिखाई देता है। नियमित सेवन से त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है और मुंहासों व दाग-धब्बों में कमी देखी जा सकती है।

    वजन घटाने की चाह रखने वालों के लिए भी यह एक बेहतरीन विकल्प है। मूंग स्प्राउट्स में कैलोरी कम होती है, लेकिन यह लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करते हैं। इससे बार-बार भूख नहीं लगती और अनावश्यक खाने से बचाव होता है। साथ ही इसमें मौजूद प्रोटीन मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और शरीर को टोन रखने में सहायक होता है।

    दिल की सेहत के लिए भी मूंग स्प्राउट्स लाभकारी हैं। इनमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाते हैं और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित रखने में मदद करते हैं। आयरन और फोलेट की पर्याप्त मात्रा रक्त की गुणवत्ता को सुधारती है और शरीर में ऑक्सीजन के संचार को बेहतर बनाती है, जिससे हृदय स्वस्थ रहता है।

    हड्डियों और दांतों की मजबूती के लिए भी यह फायदेमंद है। इसमें मौजूद कैल्शियम और फॉस्फोरस हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। साथ ही यह शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है और डिहाइड्रेशन से बचाव करता है।

    मूंग स्प्राउट्स को अपने आहार में शामिल करना बेहद आसान है। आप इसे सलाद में मिलाकर, सूप में डालकर, सब्जी के रूप में या हल्का भूनकर भी खा सकते हैं। नियमित रूप से इसका सेवन करने से शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है और आप खुद को ज्यादा ऊर्जावान और स्वस्थ महसूस करते हैं।

  • सुबह के नाश्ते में झटपट बनाएं सूजी का चीला आसान, स्वादिष्ट और पौष्टिक नाश्ता

    सुबह के नाश्ते में झटपट बनाएं सूजी का चीला आसान, स्वादिष्ट और पौष्टिक नाश्ता


    नई दिल्ली । सुबह की भागदौड़ में अगर आपको तेजी से बनने वाला स्वादिष्ट और हेल्दी नाश्ता चाहिए तो सूजी का चीला बढ़िया ऑप्शन है। यह नाश्ता सिर्फ जल्दी तैयार नहीं होता बल्कि सब्जियों के साथ पोषक तत्वों से भरपूर भी बनता है। सूजी चीला खासतौर पर सुबह के लिए उत्तम विकल्प है क्योंकि यह ऊर्जा देता है पेट भरा रखता है और आप इसमें अपनी पसंद की सब्जियाँ भी मिला सकते हैं जिससे इसका स्वाद और पोषण दोनों बढ़ जाता है।

    सबसे पहले एक बड़े बाउल में 1 कप सूजी और आधा कप दही डालकर अच्छी तरह मिलाएँ। इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाते हुए गाढ़ा चिपचिपा घोल तैयार करें और इसे लगभग 10-15 मिनट के लिए ढककर रख दें ताकि सूजी घूमकर थोड़ी फूल जाए। अब घोल में बारीक कटी प्याज शिमला मिर्च कद्दूकस किया हुआ गाजर हरी मिर्च हरा धनिया स्वादानुसार नमक हल्दी और लाल मिर्च पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें। यह मिश्रण स्वाद और पोषण दोनों को बेहतर बनाता है क्योंकि सब्जियाँ विटामिन और फाइबर प्रदान करती हैं।

    एक नॉन-स्टिक तवा गरम करें और उस पर थोड़ा तेल या घी लगाएँ। तैयार मिश्रण में से एक कलछी भरकर तवे पर डालें और हल्के हाथ से गोल आकार में फैलाएँ। मध्यम आंच पर इसे दोनों तरफ से सुनहरा भूरा होने तक सेकें। चीले को क्रिस्पी किनारों और सॉफ्ट अंदरूनी टेक्सचर के साथ पकाना चाहिए। जब चीला दोनों तरफ से अच्छे से हल्का ब्राउन हो जाए तो इसे गरमागरम उतार लें और अपनी पसंद की हरी चटनी टमाटर सॉस या दही के साथ परोसें। स्वादिष्ट सूजी चीला न सिर्फ सुबह की भूख शांत करेगा बल्कि पोषण और स्वाद का बेहतरीन मेल भी देगा।

    सूजी का चीला सिर्फ स्वादिष्ट नाश्ता ही नहीं है बल्कि यह पोषक तत्वों जैसे आयरन विटामिन B और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है जो सुबह की ऊर्जा और सक्रियता को बनाए रखने में मदद करता है।  इस आसान रेसिपी के साथ आप रोज़ के नाश्ते को स्वाद और हेल्थ का बेहतरीन संयोजन बना सकते हैं चाहे आप ऑफिस जाने वाले हों बच्चों का टिफिन तैयार कर रहे हों या सप्ताहांत के नाश्ते का प्लान बना रहे हों।

  • Holi 2026: जिद्दी रंगों और एलर्जी को कहें 'बाय-बाय', बस ये आसान प्री और पोस्ट स्किन केयर रूटीन बचाएंगे आपका निखार

    Holi 2026: जिद्दी रंगों और एलर्जी को कहें 'बाय-बाय', बस ये आसान प्री और पोस्ट स्किन केयर रूटीन बचाएंगे आपका निखार


    नई दिल्ली ।होली के त्योहार में रंगों की मस्ती तभी फीकी पड़ने लगती है जब स्किन एलर्जी या जिद्दी केमिकल वाले रंगों का डर सताने लगता है। अक्सर लोग अपनी त्वचा के खराब होने के खौफ से खुद को घर के अंदर कैद कर लेते हैं, लेकिन सावधानी ही सुरक्षा है। अगर आप सही Pre-Holi और Post-Holi स्किन केयर रूटीन अपनाएं, तो आप बिना किसी फिक्र के गुलाल और पानी का भरपूर आनंद ले सकते हैं। आइए जानते हैं वे प्रभावी टिप्स जो आपकी त्वचा को रंगों के दुष्प्रभाव से बचाकर उसे रेशमी और चमकदार बनाए रखेंगे।

    होली से पहले: सुरक्षा की ढाल तैयार करें

    होली के मैदान में उतरने से पहले अपनी त्वचा पर एक अभेद्य सुरक्षा कवच बनाना जरूरी है, ताकि रंग रोमछिद्रों के अंदर न समा सकें। इसके लिए सबसे पहला कदम है “त्वचा को डीप मॉइस्चराइज करना”। घर से बाहर निकलने से पहले स्किन को अच्छे से हाइड्रेट करें। आप लाइट वेट मॉइस्चराइजर या हाइलूरोनिक एसिड वाले सीरम का उपयोग कर सकते हैं। यह त्वचा और रंगों के बीच एक फिजिकल बैरियर बना देता है। यदि आपकी स्किन ड्राई है, तो तेल आधारित मॉइस्चराइजर लगाना सबसे बेहतर विकल्प है।

    दूसरा महत्वपूर्ण टिप है “एक्सफोलिएशन से दूरी”। होली से कम से कम दो दिन पहले किसी भी तरह के स्क्रब या फेस पीलिंग ट्रीटमेंट से बचें। एक्सफोलिएशन से डेड स्किन हट जाती है, जिससे नई त्वचा काफी संवेदनशील हो जाती है और रंगों के केमिकल उस पर तुरंत जलन या रैशेज पैदा कर सकते हैं। इसके साथ ही, अपने नाखूनों की सुरक्षा करना न भूलें। नाखूनों पर क्लियर नेल पॉलिश या बेस कोट की एक परत लगाएं, ताकि रंग अंदर तक न फंसे और बाद में आसानी से साफ हो जाए। अंत में एक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाना अनिवार्य है। धूप में घंटों होली खेलने से होने वाली टैनिंग और UV किरणों के नुकसान से बचने के लिए इसे चेहरे, गर्दन और बाहों पर जरूर लगाएं।

    होली के बाद: ऐसे लौटाएं अपनी खोई हुई रौनक
    रंगों से सराबोर होने के बाद बारी आती है उन्हें सही तरीके से साफ करने की। यहाँ सबसे बड़ी गलती लोग “गर्म पानी” का इस्तेमाल करके करते हैं। हमेशा याद रखें कि रंगों को ठंडे पानी से ही धोना चाहिए। गर्म पानी रंगों को त्वचा पर और अधिक पक्का कर देता है, जिससे उन्हें निकालना मुश्किल हो जाता है।

    त्वचा से रंग हटाने के लिए किसी कठोर साबुन के बजाय “जेंटल और हाइड्रेटिंग फेस क्लींजर” का चुनाव करें। इसे सर्कुलर मोशन में हल्के हाथों से रगड़ें और फिर पानी से धो लें। ध्यान रहे कि चेहरा सुखाते समय तौलिए से रगड़ें नहीं, बल्कि हल्के हाथों से थपथपाकर Pat dry सुखाएं। एक बार रंग निकल जाने के बाद, नमी को लॉक करना सबसे जरूरी है। त्वचा के नेचुरल हाइड्रेशन लेवल को बहाल करने के लिए रिपेयरिंग सीरम और एक हैवी मॉइस्चराइजर लगाएं। अंत में भले ही होली खत्म हो गई हो, लेकिन अगले कुछ दिनों तक सनस्क्रीन का उपयोग जारी रखें, क्योंकि रंगों के संपर्क में आने के बाद स्किन काफी सेंसिटिव हो जाती है और सूरज की रोशनी उसे जल्दी नुकसान पहुंचा सकती है।

  • रिटायरमेंट के बाद नियमित आमदनी का भरोसा क्या है सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम, जानें ब्याज दर और खाता खोलने की पूरी प्रक्रिया

    रिटायरमेंट के बाद नियमित आमदनी का भरोसा क्या है सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम, जानें ब्याज दर और खाता खोलने की पूरी प्रक्रिया


    नई दिल्ली । रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि नियमित वेतन बंद होने के बाद घर का खर्च कैसे चलेगा। जिन लोगों ने पहले से पेंशन या निवेश की ठोस योजना नहीं बनाई होती, उनके लिए यह चुनौती और भी गंभीर हो सकती है। ऐसे में केंद्र सरकार की एक लोकप्रिय और सुरक्षित योजना वरिष्ठ नागरिकों के लिए राहत का बड़ा जरिया बनकर सामने आती हैसीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम। यह योजना खासतौर पर 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, ताकि उन्हें रिटायरमेंट के बाद नियमित आय मिलती रहे और पूंजी भी सुरक्षित रहे।

    एक सरकारी बचत योजना है, जिसमें निवेश करने पर आकर्षक ब्याज दर के साथ हर तीन महीने में ब्याज का भुगतान किया जाता है। यही तिमाही ब्याज वरिष्ठ नागरिकों के लिए पेंशन जैसी नियमित आय का काम करता है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेश पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि यह सरकार समर्थित योजना है। साथ ही आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत इसमें निवेश पर टैक्स छूट का लाभ भी मिलता है, जिससे यह और अधिक आकर्षक बन जाती है।

    इस योजना में निवेश करने के लिए सामान्यतः 60 वर्ष या उससे अधिक आयु होना आवश्यक है। हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में 55 से 60 वर्ष के बीच के वे लोग भी निवेश कर सकते हैं, जिन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली हो, बशर्ते वे निर्धारित समयसीमा के भीतर निवेश करें। खाता व्यक्तिगत रूप से या जीवनसाथी के साथ संयुक्त रूप से खोला जा सकता है, लेकिन प्राथमिक खाताधारक की आयु पात्रता के अनुरूप होनी चाहिए।

    निवेश सीमा की बात करें तो SCSS में न्यूनतम 1,000 रुपए से निवेश शुरू किया जा सकता है और राशि 1,000 के गुणांक में ही जमा करनी होती है। अधिकतम निवेश सीमा 30 लाख रुपए है। यदि पति और पत्नी दोनों अलग-अलग खाते खोलते हैं, तो कुल मिलाकर 60 लाख रुपए तक निवेश संभव है। ध्यान रहे कि इस योजना में निवेश एकमुश्त करना होता है, किस्तों में जमा करने का विकल्प नहीं है। कई लोग रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पीएफ, ग्रेच्युटी या अन्य सेवानिवृत्ति लाभ की राशि को इसमें लगाकर सुरक्षित और नियमित आय सुनिश्चित करते हैं।

    वर्तमान में इस योजना पर 8.2% सालाना ब्याज दर मिल रही है, जो तिमाही आधार पर खाते में जमा होती है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई वरिष्ठ नागरिक 30 लाख रुपए निवेश करता है, तो उसे सालाना लगभग 2.46 लाख रुपए ब्याज मिलेगा। यानी हर तीन महीने में करीब 61,500 रुपए और औसतन लगभग 20,500 रुपए प्रतिमाह के बराबर नियमित आय प्राप्त होगी। यह राशि रिटायरमेंट के बाद घरेलू खर्च, दवाइयों और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में बड़ी मददगार साबित हो सकती है।

    खाता देश के अधिकृत बैंकों या डाकघरों में खोला जा सकता है। इसके लिए आयु प्रमाण, पहचान पत्र, पैन कार्ड और निवेश राशि के साथ आवेदन करना होता है। कुल मिलाकर, सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम उन लोगों के लिए मजबूत विकल्प है जो रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित निवेश के साथ नियमित और सुनिश्चित आय चाहते हैं।