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  • होंठों के कालेपन का कारण चाय या कुछ और? विशेषज्ञों ने बताया असली सच…

    होंठों के कालेपन का कारण चाय या कुछ और? विशेषज्ञों ने बताया असली सच…


    नई दिल्ली।भारत में चाय केवल एक पेय नहीं बल्कि रोजमर्रा की जीवनशैली का हिस्सा है सुबह की शुरुआत से लेकर ऑफिस ब्रेक और शाम की थकान तक कई लोग दिन में तीन से चार बार या उससे भी अधिक चाय पीते हैं ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या ज्यादा चाय पीने से होंठ काले हो जाते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इसका सीधा जवाब नहीं है

    चाय में मौजूद कैफीन और टैनिन हल्का दाग छोड़ सकते हैं खासकर दांतों पर लेकिन ये तत्व सीधे तौर पर होंठों को स्थायी रूप से काला नहीं करते असली समस्या तब शुरू होती है जब व्यक्ति बहुत अधिक गर्म चाय बार बार पीता है गर्म पेय का लगातार संपर्क होंठों की नाजुक त्वचा को प्रभावित करता है इससे त्वचा की ऊपरी परत सूखने लगती है और धीरे धीरे पपड़ी बनती है लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे तो होंठों का रंग गहरा दिखाई देने लगता है

    विशेषज्ञ बताते हैं कि होंठों के कालेपन के पीछे कई जीवनशैली से जुड़े कारण जिम्मेदार होते हैं शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन एक बड़ा कारण है जब शरीर में पर्याप्त पानी नहीं होता तो होंठ सूखकर बेजान हो जाते हैं और उनका प्राकृतिक गुलाबी रंग फीका पड़ने लगता है

    धूम्रपान या तंबाकू सेवन भी होंठों की रंगत बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है निकोटीन और अन्य रसायन पिगमेंटेशन को बढ़ाते हैं जिससे होंठ धीरे धीरे काले हो सकते हैं इसी तरह बिना सुरक्षा के लंबे समय तक धूप में रहना भी हानिकारक है सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणें त्वचा में मेलानिन का स्तर बढ़ा सकती हैं जिससे होंठों का रंग गहरा हो जाता है

    लिप केयर की अनदेखी भी एक बड़ी वजह है बार बार होंठ चाटना सस्ते या घटिया गुणवत्ता वाले लिप प्रोडक्ट्स का उपयोग करना या रात में मॉइस्चराइज न करना होंठों की सेहत पर असर डालता है कुछ मामलों में एलर्जी या हार्मोनल बदलाव भी रंग में परिवर्तन का कारण बन सकते हैं

    स्वास्थ्य संबंधी सामान्य मार्गदर्शन के अनुसार संतुलित जीवनशैली और नियमित देखभाल से इन समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है वैश्विक स्तर पर भी त्वचा और होंठों की सुरक्षा को दैनिक स्वास्थ्य देखभाल का हिस्सा माना गया है जैसा कि World Health Organization अपने स्वास्थ्य संरक्षण के व्यापक सिद्धांतों में त्वचा सुरक्षा पर जोर देता है

    अगर आप होंठों की प्राकृतिक रंगत बनाए रखना चाहते हैं तो कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं दिनभर पर्याप्त पानी पिएं SPF युक्त लिप बाम का उपयोग करें अत्यधिक गर्म चाय या कॉफी से बचें धूम्रपान से दूरी रखें और सोने से पहले होंठों पर अच्छा मॉइस्चराइजर लगाएं

    यदि होंठों का रंग अचानक बहुत ज्यादा गहरा हो जाए जलन सूजन या दर्द महसूस हो तो त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहतर होता है क्योंकि कभी कभी यह किसी आंतरिक स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है

  • रिश्तों से पहले खुद से रिश्ता, क्यों बढ़ रहा है सिंगल रहने और सेल्फ केयर का ट्रेंड

    रिश्तों से पहले खुद से रिश्ता, क्यों बढ़ रहा है सिंगल रहने और सेल्फ केयर का ट्रेंड


    नई दिल्ली।आज के समय में सिंगल रहना मजबूरी या अकेलेपन की पहचान नहीं बल्कि एक सचेत और आत्मविश्वासी चुनाव बनता जा रहा है खासकर युवाओं के बीच यह सोच तेजी से मजबूत हुई है कि जीवन में खुश और संतुलित रहने के लिए किसी रिश्ते में होना अनिवार्य नहीं है व्यक्ति अपने समय करियर मानसिक शांति और व्यक्तिगत विकास को प्राथमिकता देते हुए सिंगल लाइफ को अपनाने लगा है

    पहले समाज में शादी और रिश्तों को जीवन का अनिवार्य लक्ष्य माना जाता था एक निश्चित उम्र के बाद विवाह को सफलता का पैमाना समझा जाता था लेकिन बदलती जीवनशैली बढ़ती शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता ने इस सोच को नया आयाम दिया है अब युवा अपने सपनों को पूरा करने करियर बनाने और आत्मनिर्भर बनने पर अधिक ध्यान दे रहे हैं वे समझ रहे हैं कि खुशहाली का आधार केवल बाहरी रिश्ते नहीं बल्कि भीतर का संतुलन भी है

    इस बदलाव के केंद्र में सेल्फ केयर की अवधारणा है जो अब केवल एक ट्रेंड नहीं बल्कि जीवनशैली बनती जा रही है लोग मानसिक स्वास्थ्य शारीरिक फिटनेस और भावनात्मक संतुलन को प्राथमिकता दे रहे हैं योग मेडिटेशन जर्नल लिखना यात्रा करना नए शौक विकसित करना और डिजिटल डिटॉक्स जैसी आदतें तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं यह बदलाव इस बात का संकेत है कि लोग अपनी जरूरतों और भावनाओं को समझने लगे हैं

    सिंगल लाइफ व्यक्ति को निर्णय लेने की स्वतंत्रता देती है समय का बेहतर उपयोग करने का अवसर देती है और आत्मविश्वास को मजबूत बनाती है जब व्यक्ति अकेले रहते हुए अपने लक्ष्यों पर काम करता है तो वह आर्थिक रूप से भी अधिक सक्षम बन सकता है नए कौशल सीखना पेशेवर विकास पर ध्यान देना और अपने व्यक्तित्व को निखारना इस जीवनशैली के प्रमुख लाभ माने जा रहे हैं

    हालांकि सिंगल जीवन हर किसी के लिए सरल नहीं होता सामाजिक अपेक्षाएं परिवार का दबाव और कभी कभी महसूस होने वाला अकेलापन चुनौती बन सकता है ऐसे में सेल्फ केयर केवल शौक नहीं बल्कि मानसिक संतुलन बनाए रखने का माध्यम बन जाता है दोस्तों और परिवार से जुड़े रहना सामाजिक संबंधों को बनाए रखना और जरूरत पड़ने पर पेशेवर सलाह लेना भी उतना ही महत्वपूर्ण है

    विशेषज्ञ मानते हैं कि सिंगल रहना या रिश्ते में होना दोनों ही व्यक्तिगत चुनाव हैं किसी एक को सही या गलत नहीं ठहराया जा सकता महत्वपूर्ण यह है कि व्यक्ति अपने जीवन से संतुष्ट हो मानसिक रूप से स्वस्थ रहे और अपने निर्णय स्वयं ले सके खुद को समय देना अपनी जरूरतों को समझना और आत्मसम्मान के साथ जीवन जीना ही सेल्फ केयर का वास्तविक अर्थ है

    समाज में यह परिवर्तन धीरे धीरे स्वीकार किया जा रहा है अब सिंगल लाइफ को नकारात्मक नजर से देखने की प्रवृत्ति कम हो रही है इसे आत्मविकास आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता से जोड़ा जा रहा है आने वाले समय में यह सोच और मजबूत हो सकती है क्योंकि नई पीढ़ी अपने जीवन की दिशा स्वयं तय करना चाहती है

    अंततः सिंगल लाइफ का अर्थ अकेलापन नहीं बल्कि खुद के साथ मजबूत और स्वस्थ रिश्ता बनाना है जब व्यक्ति खुद को समझता है तभी वह जीवन के हर रिश्ते को संतुलन और परिपक्वता के साथ निभा पाता है

  • लीजिये आ गया घूमने के लिये परफेक्ट मौसम, जानिए दिल्ली में घूमने लायक जगहों के नाम

    लीजिये आ गया घूमने के लिये परफेक्ट मौसम, जानिए दिल्ली में घूमने लायक जगहों के नाम

    नई दिल्ली । दिल्ली की सर्दियां और हल्की बसंत की हवा घूमने का ऐसा समय है जब राजधानी की खूबसूरती अपने पूरे रंग में दिखाई देती है. ऐतिहासिक इमारतों से लेकर आधुनिक पार्कों तक, दिल्ली में घूमने के लिए जगहों की कोई कमी नहीं है. नीचे दिल्ली की कुछ चुनिंदा और सबसे लोकप्रिय जगहों की जानकारी दी गई है.
    इंडिया गेट – देशभक्ति का प्रतीक
    राजपथ अब कर्तव्यपथ पर स्थित इंडिया गेट दिल्ली का हमेशा पसंद किया जाने वाला घूमने का स्थान है. यह विशाल वार मेमोरियल प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की याद में बनाया गया था. यहां के हरे-भरे लॉन पिकनिक और शाम की सैर के लिए आदर्श हैं.
    लाल किला – इतिहास का शानदार अध्याय
    लाल किला, दिल्ली का सबसे भव्य किला और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, मुगल वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण है. शाहजहां द्वारा निर्मित इस किले में कई सुंदर महल, संग्रहालय और विशाल उद्यान हैं. यह दिल्ली की पहचान और इतिहास प्रेमियों के लिए स्वर्ग जैसा स्थान है.
    क़ुतुब मीनार – दिल्ली का आसमान छूता आकर्षण
    12वीं सदी में बनी क़ुतुब मीनार 73 मीटर ऊंची ऐतिहासिक मीनार है, जो अपनी जटिल नक्काशी और इंडो-इस्लामिक वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है. इसके आसपास का क़ुतुब परिसर भी उतना ही खूबसूरत है. यह फोटो खींचने और इतिहास जानने के शौकीनों के लिए बेस्ट जगह है.

    अक्षरधाम मंदिर – कला, संस्कृति और भव्यता
    दुनिया के सबसे बड़े सांस्कृतिक मंदिरों में से एक अक्षरधाम मंदिर दिल्ली की शान है. यहां की भव्य पत्थर नक्काशी, संगीतमय फाउंटेन शो और भारतीय संस्कृति को दर्शाने वाली प्रदर्शनियां पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं.
    लोटस टेंपल – शांत वातावरण के साथ खूबसूरत वास्तुकला
    सफेद संगमरमर से बना लोटस टेंपल अपनी कमल आकार की डिजाइन के लिए विश्वप्रसिद्ध है. यह बहाई उपासना स्थल है और यहां का शांत वातावरण मन को सुकून देता है. ध्यान और शांति पसंद करने वालों के लिए यह आदर्श स्थान है.
    हुमायूं का मकबरा – मुगल कला का उत्कृष्ट नमूना
    हुमायूं का मकबरा दिल्ली का पहला गार्डन टॉम्ब माना जाता है और यह ताजमहल का प्रेरणास्रोत भी माना जाता है. चारों तरफ फैले हरे उद्यान इसे और आकर्षक बनाते हैं. सर्दी के मौसम में यहां घूमना बेहद सुखद अनुभव होता है.
    दिल्ली में मौसम सुहाना हो तो घूमने का मज़ा दोगुना हो जाता है. ऐतिहासिक धरोहरें, आधुनिक वास्तुकला, पार्क, मंदिर, यह शहर हर तरह के यात्री के लिए कुछ खास रखता है. इसलिए इस मौसम में दिल्ली को अपनी ट्रैवल लिस्ट में ज़रूर शामिल करें.

  • गाजर जल्दी हो जाती है काली और सूखी? जानिए स्टोर करने का सही तरीका वरना होगा नुकसान

    गाजर जल्दी हो जाती है काली और सूखी? जानिए स्टोर करने का सही तरीका वरना होगा नुकसान


    नई दिल्ली।सर्दियों के मौसम में बाजार में गाजर की भरमार रहती है लोग सलाद सब्जी जूस और हलवे के लिए एक साथ ज्यादा मात्रा में गाजर खरीद लेते हैं लेकिन कुछ ही दिनों में गाजर सूखने लगती है काली पड़ जाती है या गलकर खराब हो जाती है कई बार फ्रिज में रखने के बावजूद भी इसकी ताजगी बरकरार नहीं रहती ऐसे में जरूरत है सही स्टोरेज तकनीक अपनाने की ताकि गाजर कई हफ्तों तक कड़क और लाल बनी रहे

    सबसे पहली और जरूरी बात यह है कि गाजर खरीदते ही उसके ऊपर लगे हरे पत्तों को अलग कर दें ये पत्ते गाजर की नमी को तेजी से खींचते हैं जिससे गाजर जल्दी मुरझा जाती है अगर आप चाहते हैं कि गाजर ज्यादा दिनों तक ताजा रहे तो पत्तों को काटकर अलग कर दें और केवल जड़ वाला हिस्सा ही स्टोर करें

    दूसरा तरीका है गाजर को पानी में स्टोर करना गाजर को पहले साफ पानी से धो लें फिर एक एयरटाइट कंटेनर या कांच के जार में रखें उसमें इतना पानी भरें कि गाजर पूरी तरह डूब जाए इसके बाद जार को फ्रिज में रख दें ध्यान रहे कि हर दो से तीन दिन में पानी बदलते रहें इससे गाजर अपनी नमी बनाए रखती है और कई हफ्तों तक कड़क बनी रहती है

    अगर आप गाजर को सूखे तरीके से स्टोर करना चाहते हैं तो उन्हें अच्छी तरह धोकर पूरी तरह सुखा लें फिर पेपर टॉवल या अखबार में लपेटकर जिप लॉक बैग में रखें यह तरीका अतिरिक्त नमी को सोख लेता है जिससे सड़न की संभावना कम हो जाती है ध्यान रखें कि गाजर बिल्कुल सूखी हो क्योंकि हल्की सी नमी भी फ्रिज में फफूंद और सड़न को बढ़ावा दे सकती है

    लंबे समय के लिए गाजर सुरक्षित रखना हो तो ब्लांचिंग और फ्रीजिंग का तरीका अपनाया जा सकता है गाजर को छोटे टुकड़ों में काट लें फिर उन्हें दो मिनट के लिए उबलते पानी में डालें इसके तुरंत बाद बर्फ वाले ठंडे पानी में डालकर ठंडा करें फिर अच्छी तरह सुखाकर फ्रीजर बैग में पैक कर दें इस तरीके से गाजर लंबे समय तक सुरक्षित रहती है और जरूरत पड़ने पर सीधे इस्तेमाल की जा सकती है

    एक और जरूरी बात यह है कि गाजर को सेब या केले जैसे फलों के साथ न रखें ये फल एथिलीन गैस छोड़ते हैं जिससे गाजर जल्दी पककर खराब हो सकती है इसलिए फ्रिज में अलग ड्रॉअर या अलग कंटेनर में स्टोर करना बेहतर रहता है

    अगर इन आसान और प्रभावी तरीकों को अपनाया जाए तो गाजर कई हफ्तों तक ताजी बनी रह सकती है इससे न केवल स्वाद और पोषण बरकरार रहता है बल्कि बार बार सब्जी खराब होने से होने वाला आर्थिक नुकसान भी बचाया जा सकता है

  • थायरॉइड और एंटीबायोटिक दवाओं पर सख्त अलर्ट, Central Drugs Standard Control Organization और Drug Controller General of India ने जारी किए नए निर्देश

    थायरॉइड और एंटीबायोटिक दवाओं पर सख्त अलर्ट, Central Drugs Standard Control Organization और Drug Controller General of India ने जारी किए नए निर्देश


    नई दिल्ली। देश में व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली थायरॉइड और एंटीबायोटिक दवाओं को लेकर स्वास्थ्य महकमे ने गंभीर चेतावनी जारी की है। हाइपरथायरॉइडिज्म के इलाज में दी जाने वाली कार्बिमाजोल और विभिन्न बैक्टीरियल संक्रमणों में इस्तेमाल होने वाली डॉक्सीसाइक्लिन के कुछ नए और संभावित रूप से खतरनाक दुष्प्रभाव सामने आए हैं। दवाओं की सुरक्षा की राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा के बाद नियामक संस्थाओं ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि इन दवाओं के पैकेट, लेबल और प्रिस्क्रिप्शन जानकारी में नए साइड इफेक्ट्स को स्पष्ट और प्रमुख चेतावनी के रूप में दर्ज किया जाए।

    विशेषज्ञों के अनुसार, कार्बिमाजोल का उपयोग मुख्य रूप से बढ़े हुए थायरॉइड हार्मोन को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। यह दवा लंबे समय से प्रभावी उपचार के रूप में इस्तेमाल होती रही है, लेकिन हालिया आकलन में पाया गया है कि कुछ मरीजों में इसके सेवन से सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या खतरनाक रूप से कम हो सकती है। इस स्थिति को एग्रानुलोसाइटोसिस कहा जाता है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हो जाती है। व्हाइट ब्लड सेल्स की कमी होने पर साधारण संक्रमण भी तेजी से गंभीर रूप ले सकता है। वायरस, बैक्टीरिया और फंगल संक्रमण से लड़ने की क्षमता घटने के कारण मरीज को तेज बुखार, गले में खराश, कमजोरी या बार-बार संक्रमण की शिकायत हो सकती है। गंभीर मामलों में यह स्थिति जानलेवा भी बन सकती है। इसलिए चिकित्सकों को सलाह दी गई है कि कार्बिमाजोल लेने वाले मरीजों की नियमित ब्लड जांच कराई जाए और किसी भी संदिग्ध लक्षण पर तुरंत चिकित्सा परीक्षण कराया जाए।

    वहीं, डॉक्सीसाइक्लिन को लेकर भी चिंताजनक संकेत मिले हैं। यह एंटीबायोटिक दवा त्वचा रोग, श्वसन संक्रमण, मूत्र संक्रमण और अन्य बैक्टीरियल बीमारियों के इलाज में व्यापक रूप से दी जाती है। हालांकि इसे आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन नई समीक्षा में कुछ मामलों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े दुष्प्रभाव सामने आए हैं। मरीजों में मूड में बदलाव, घबराहट, चिंता, अवसाद, भ्रम या असामान्य व्यवहार जैसे लक्षण देखे गए हैं। यद्यपि ऐसे मामले अपेक्षाकृत दुर्लभ बताए गए हैं, फिर भी एहतियात के तौर पर इन संभावित जोखिमों को दवा की आधिकारिक जानकारी में शामिल करना अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि डॉक्टर और मरीज दोनों पूरी तरह सतर्क रह सकें।

    नियामक संस्थाओं ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और दवा कंपनियों को पारदर्शिता के साथ सभी संभावित जोखिमों को सामने लाना होगा। अब इन दवाओं के पैकेट पर सख्त सुरक्षा चेतावनी छापना अनिवार्य होगा। साथ ही चिकित्सकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे दवा लिखते समय मरीज की मेडिकल हिस्ट्री और संभावित जोखिमों पर विशेष ध्यान दें।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के दवा अचानक बंद न करें, क्योंकि इससे बीमारी और गंभीर हो सकती है। लेकिन यदि बुखार, गले में संक्रमण, मानसिक अस्थिरता या कोई अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, नियमित जांच और समय पर उपचार ही इन संभावित दुष्प्रभावों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

  • महंगे प्रोडक्ट्स नहीं, सही रूटीन है जरूरी, जानिए बिगिनर्स के लिए स्किन केयर का A to Z

    महंगे प्रोडक्ट्स नहीं, सही रूटीन है जरूरी, जानिए बिगिनर्स के लिए स्किन केयर का A to Z


    नई दिल्ली। आज के समय में धूल, प्रदूषण और तनाव का सबसे पहला असर हमारी त्वचा पर दिखता है। अगर आप भी अपनी स्किन का ख्याल रखना शुरू करना चाहते हैं, तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि स्किन केयर कोई मुश्किल काम नहीं है।

    एक सही रूटीन का मतलब महंगे प्रोडक्ट्स नहीं, बल्कि अपनी त्वचा की जरूरतों को समझना है। एक बेसिक स्किन केयर रूटीन को दो हिस्सों में बांटा जाता है- मॉर्निंगऔर नाइट । आइए जानते हैं कि अगर आप बिगिनर हैं, तो आपकी मॉर्निंग और ईवनिंग स्किन केयर रूटीन कैसी होनी चाहिए।

    मॉर्निंग स्किन केयर रूटीन

    सुबह के रूटीन का मुख्य उद्देश्य आपकी त्वचा को हाइड्रेट करना और सूरज की हानिकारक किरणों से बचाना होता है। क्लींजिंग- सुबह उठने के बाद एक माइल्ड फेस वॉश से चेहरा धोएं। यह रात भर में त्वचा पर जमा हुए तेल और पसीने को साफ कर देता है। मॉइस्चराइजिंग- चेहरा धोने के बाद त्वचा को हाइड्रेटेड रखना जरूरी है। अपनी स्किन टाइप ऑयली, ड्राई या कॉम्बिनेशन के अनुसार एक हल्का मॉइस्चराइजर लगाएं। यह त्वचा में नमी को लॉक करता है। सनस्क्रीन- सबसे जरूरी स्टेप है। चाहे आप घर के अंदर हों या बाहर, सनस्क्रीन लगाना कभी न भूलें। यह त्वचा को समय से पहले बूढ़ा होने, झुर्रियों और टैनिंग से बचाता है। कम से कम SPF 30 वाला सनस्क्रीन जरूर लगाएं।
    नाइट स्किन केयर रूटीन
    रात का समय त्वचा की मरम्मत के लिए होता है। रात में आपकी स्किन सेल्स खुद को रिपेयर करती हैं, इसलिए यह रूटीन बहुत जरूरी है। डबल क्लींजिंग या डीप क्लीन- अगर आपने दिन में मेकअप या सनस्क्रीन लगाया है, तो उसे अच्छी तरह साफ करना जरूरी है। पहले क्लींजिंग मिल्क या ऑयल से चेहरा साफ करें, फिर फेस वॉश का इस्तेमाल करें। टोनिंग- अगर आपकी स्किन ऑयली है, तो आप टोनर का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह त्वचा के pH लेवल को संतुलित करता है और पोर्स को साफ रखता है।
    आई क्रीम या सीरम- अगर आपको डार्क सर्कल्स या मुहांसों जैसी समस्या है, तो रात में इनसे जुड़े ट्रीटमेंट प्रोडक्ट्स या आई क्रीम लगाएं। मॉइस्चराइजर- रात में त्वचा को गहरे पोषण की जरूरत होती है। ऐसा मॉइश्चराइजर चुनें जिसमें हयालूरोनिक एसिड या सेरामाइड्स हों, जो रात भर आपकी त्वचा को रिपेयर कर सकें। बिगिनर्स के लिए कुछ जरूरी बातें  पैच टेस्ट- कोई भी नया प्रोडक्ट पूरे चेहरे पर लगाने से पहले उसे हाथ पर लगाकर 24 घंटे तक चेक करें कि कहीं जलन तो नहीं हो रही।

    धैर्य रखें- किसी भी स्किन केयर रूटीन का असर दिखने में कम से कम 4 से 6 हफ्ते का समय लगता है। इसलिए रातों-रात चमत्कार की उम्मीद न करें। पानी पिएं- बाहर से लगाए गए प्रोडक्ट्स तभी असर करेंगे जब आपका शरीर अंदर से हाइड्रेटेड होगा। दिन भर में भरपूर पानी पिएं।अपनी स्किन टाइप पहचानें- बिना अपनी स्किन टाइप जाने कोई भी प्रोडक्ट न खरीदें। अगर आपकी स्किन बहुत ज्यादा सेंसिटिव है, तो किसी एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

  • दिल्ली से सिर्फ 5 घंटे की दूरी पर है भारत का सबसे शांत हिल स्टेशन, यहां की प्राकृतिक खूबसूरती देखते ही खो बैठेंगे अपना दिल

    दिल्ली से सिर्फ 5 घंटे की दूरी पर है भारत का सबसे शांत हिल स्टेशन, यहां की प्राकृतिक खूबसूरती देखते ही खो बैठेंगे अपना दिल


    नई दिल्ली । अगर आप दिल्ली के शोर से दुखी हो गए हैं और किसी शांत जगह पर जाना चाहते हैं तो आपको लैंसडाउन जाना चाहिए। दिल्ली से इस जगह की दूरी बहुत ज्यादा नहीं है। यहां आप सिर्फ 5 घंटे में पहुंच सकते हैं। खास बात ये है कि ये जगह काफी शांत है और यहां घूमने के लिए आपको ज्यादा तैयारी करने की भी जरूरत नहीं है। यहां की प्राकृतिक खूबसूरती आपने मन को शांत कर देगी और आपको बेहतर महसूस करवाएगी। यहां पहाड़ है, झाड़ियां हैं, जंगल हैं और उनके बीच बहती हुई नदियां हैं। ये पूरा हिल होटल के किसी कमरे से देखने पर भी सुंदर लगता है। इसके अलावा कमरे से निकलकर किसी पहाड़ की ओट में भी बैठना बेहद सुखद होता है।

    लैंसडाउन में घूम आएं ये जगहें
    ताड़केश्वर और बालेश्वर महादेव मंदिर: लैंसडाउन में ही है ताड़केश्वर और बालेश्वर महादेव मंदिर जहां आप घूमने जा सकते हैं। यह जगह बेहद खूबसूरत है और यहां जाकर घूमना आपको स्पेशल महसूस करवा सकता है। लैंसडाउन की खास बात ये है कि इन मंदिरों तक जाने का रास्ता तक बेहद खूबसूरत है जहां से गुजरना एक सुखद अहसास कराता है।

    कालागढ़ टाइगर रिजर्व: कालागढ़ टाइगर रिजर्व उत्तराखंड के कई जीवों का घर है। यहां आपको बाघ देखने को मिल जाएंगे। साथ ही यहां की जंगल सफारी आपके मन को खुश कर देगी। तो, लैंसडाउन जाकर आप इस जगह में घूम सकते हैं। ये बेहद खास है और यहां घूमना प्रकृति के बनाए वन्स जीवों को देखने और यहां की शांत वातावरण को देखने और महसूस करने का मौका है।

    टिप इन टॉप: टिप इन टॉप लैंसडाउन की एक ऐसी जगह है जहां सैंट मेरी चर्च है और आसपास के इलाकों में कई और छोटे चर्च भी हैं। यहां घूमना आपके लिए खास हो सकता है खासकर कि अगर आपके पास समय हो तो आप आस-पास के इलाकों के कई सारे चर्च में घूमकर आ सकते हैं। तो, अगर आपको समय मिले तो लैंसडाउन जरूर घूमकर आएं।

  • Hidden Peaks Of India: माउंट एवरेस्ट तो सब जानते हैं, लेकिन देखने लायक हैं भारत की इन 3 चोट‍ियों के व्‍यूज

    Hidden Peaks Of India: माउंट एवरेस्ट तो सब जानते हैं, लेकिन देखने लायक हैं भारत की इन 3 चोट‍ियों के व्‍यूज

    नई दिल्ली । घूमने फ‍िरने का शौक भला क‍िसे नहीं होता है। हर कोई जैसे ही मौका पाता है, वो बैग उठाकर न‍िकल पड़ता है। क‍िसी को पहाड़ों पर जाना पसंद होता है तो कोई बीच पर सुकून भरे पल ब‍िताने जाता है। घूमने से मन को शांत‍ि म‍िलती है। हमारे यहां भारत में ऐसी कई जगहें हैं जहां का नजारा देखने लायक होता है। वहीं ज‍िन लोगों को एडवेंचर पसंद होता है, वो ट्रेक‍िंग जरूर करते हैं।

    जब भी बात भारत की सबसे खूबसूरत चोट‍ियों की बात आती है तो लोगों के मन में केवल उत्तराखंड और ह‍िमाचल प्रदेश का ही ख्‍याल आता है। ये दोनों राज्‍य वाकई में बहुत खूबसूरत हैं, लेक‍िन हम आपको कुछ ऐसी चोटि‍यों के बारे में बता रहे हैं जहां की ट्रेक‍िंगआपको एक बार जरूर करनी चाह‍िए। ऐसा कहा जाता है क‍ि अगर जीते जी आपको स्‍वर्ग के दर्शन करने हैं तो यहां जरूर जाएं। आइए जानते हैं-

    कलसूबाई पीक, महाराष्‍ट्र

    महाराष्‍ट्र की खूबसूरती से तो हम सभी वाक‍िफ हैं। नास‍िक ज‍िले में स्‍थ‍ित कलसूबाई पीक दुन‍िया के सबसे खूबसूरत पीक में से एक है। ये लगभग 5400 फीट की ऊंचाई पर स्‍थ‍ित है। इसकी ट्रेक‍िंग बरी के बेस गांव से शुरू होती है, जहां जाने के ल‍िए लोहे की सीढ़‍ियां, एडवेंचर ट्रे‍क करके पहुंचा जा सकता है। जब आप इसकी पीक पर पहुंचेंगी तो वहां पर आपको द‍िल थाम देने वाले नजारे देखने को मि‍लेंगे। यहां जाने में आपको भले ही कठ‍िनाइयों का सामना करना पड़े, लेक‍िन यहां की खूबसूरती आपका मन मोह लेगी।

    नेत्रावती पीक, कर्नाटक

    ये पीक भी कर्नाटक राज्‍य की सबसे खूबसूरत चोटी है। चोटी तक पहुंचने के ल‍िए आपको लगभग 6 कि‍लोमीटर की ट्रेक‍िंग करनी पड़ेगी। इस दौरान आपको पहाड़ाें पर हरे भरे नजारे देखने को म‍िलेंगे। जब आप इसके टॉप पर पहुंचेंगी तो आपको खूबसूरत नजारे देखने को म‍िलेंगे।

    कुलकुमलाई पीक, तम‍िलनाडु 
    ये पीक भले ही तम‍िलनाडु में है, लेक‍िन इसकी ट्रेक‍िंग की शुरुआत इडुक्‍क‍ि ज‍िले से होती है। यहां का सानराइज देखने लायक होता है। ऐसे में अगर आप सूर्योदय का खूबसूरत नजारा देखना चाहती हैं तो सुबह 3 बजे आपको न‍िकलना पड़ेगा।

    तो अगर आप भी एडवेंचर लवर हैं, तो भारत के ये Hidden Peaks आपको जरूर एक्‍सप्‍लोर करने चाह‍िए। यहां की खूबसूरती आपका मन मोह लेगी। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

  • स्किन केयर में इन बातों का रखें ध्यान, बढ़ती उम्र में होगा एजिंग से बचाव

    स्किन केयर में इन बातों का रखें ध्यान, बढ़ती उम्र में होगा एजिंग से बचाव

    नई दिल्ली। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, चेहरे पर झुर्रियां और रिंकल्स दिखाई देने लगते हैं। लेकिन अगर तीस की उम्र में ही झुर्रियां दिखने लगें, तो इसकी सबसे बड़ी वजह स्किन केयर में लापरवाही है। सही देखभाल और कुछ आदतों को अपनाकर चेहरे की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है।

    सुबह उठकर करें स्किन क्लीनिंग
    सुबह उठते ही कॉटन पैड की मदद से चेहरे को साफ करें। इसके साथ ही बाहर से आने के बाद भी स्किन को क्लीन करना जरूरी है। यह धूल, पॉल्यूशन और अन्य मैल को दूर करता है। चेहरे को साफ करने के बाद हमेशा मॉइस्चराइज़र लगाएं, ताकि त्वचा नमी बनी रहे और ड्रायनेस से बचा जा सके।

    स्क्रबर और फेशवॉश का चयन

    सनस्क्रीन का नियमित इस्तेमाल
    बाहर जाने से पहले एसपीएफ 50 वाले सनस्क्रीन का उपयोग अनिवार्य करें। सूरज की यूवी किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं और एजिंग को तेज करती हैं।

    प्रोडक्ट्स में क्वालिटी और एंटीऑक्सीडेंट
    सस्ते और चिप स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल न करें। हमेशा एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर प्रोडक्ट्स का चयन करें। विटामिन C और E त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद करते हैं और झुर्रियों को कम करने में प्रभावी हैं।

    रात को मेकअप हटाना और घरेलू नुस्खे
    सोने से पहले हमेशा मेकअप हटा दें। अगर मेकअप नहीं किया है, तब भी चेहरे को पानी से धोकर ही सोएं। त्वचा की देखभाल के लिए घरेलू नुस्खों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। बेसन, हल्दी, दही, शहद और एलोवेरा त्वचा को पोषण देते हैं और उसे नरम व दमकदार बनाते हैं।

  • अचानक बाल झड़ने लगे? हो सकता है एलोपेशिया जानें लक्षण और इलाज

    अचानक बाल झड़ने लगे? हो सकता है एलोपेशिया जानें लक्षण और इलाज


    नई दिल्ली । क्या आपके सिर या दाढ़ी में अचानक गोल पैच बन रहे हैं और बाल झड़ रहे हैं? यह सिर्फ सामान्य हेयर फॉल नहीं बल्कि एलोपेशिया एरियाटा हो सकता है जो एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अपने ही बालों की जड़ों पर हमला करता है और बाल अचानक झड़ने लगते हैं। एलोपेशिया सिर के साथ साथ दाढ़ी आइब्रो और शरीर के अन्य हिस्सों के बालों को भी प्रभावित कर सकता है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि एलोपेशिया और सामान्य गंजापन अलग हैं। सामान्य गंजापन धीरे धीरे होता है हॉर्मोन और जेनेटिक कारणों से बाल पतले होने लगते हैं और हेयरलाइन पीछे खिसकती है। वहीं एलोपेशिया में बाल अचानक सिक्के के आकार के पैच में झड़ते हैं लेकिन जड़ें जीवित रहती हैं। इसका मतलब है कि सही समय पर पहचान और इलाज से बाल दोबारा उग सकते हैं।

    नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार पूरी दुनिया में लगभग 2% लोग जीवन में कभी न कभी एलोपेशिया का सामना कर चुके हैं। अमेरिका में करीब 68 लाख लोग इससे प्रभावित हैं। शुरुआती लक्षणों में अचानक बाल झड़ना नहाते या कंघी करते समय बाल गुच्छों में गिरना शामिल है। कुछ लोगों को स्कैल्प पर खुजली हल्की जलन या झुनझुनी महसूस हो सकती है। इसके अलावा नाखूनों पर छोटे गड्ढे या सफेद धब्बे भी दिखाई दे सकते हैं। शुरुआत में दर्द नहीं होता इसलिए लोग इसे सामान्य हेयर फॉल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

    एलोपेशिया का इलाज समय पर पहचान और चिकित्सकीय देखभाल से संभव है। स्टेरॉयड क्रीम हेयर टॉनिक और चिकित्सक द्वारा सुझाई गई दवाइयाँ बालों को फिर से उगाने में मदद कर सकती हैं। साथ ही तनाव कम करना संतुलित आहार और स्कैल्प की सही देखभाल भी लाभकारी होती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि शुरुआती पहचान और उचित उपचार से बालों की रिकवरी की संभावना अधिक रहती है।

    हालांकि यह बीमारी कॉस्मेटिक रूप से परेशान कर सकती है लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। सही समय पर डॉक्टर से संपर्क और उपचार से बाल दोबारा उग सकते हैं और एलोपेशिया को नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए अगर अचानक बाल झड़ना शुरू हो जाए तो इसे नजरअंदाज न करें।