Category: Lifestyle

  • DIY पैर की देखभाल: घर बैठे करें Pedicure और दें पैरों को नई जान

    DIY पैर की देखभाल: घर बैठे करें Pedicure और दें पैरों को नई जान


    नई दिल्ली। आज के समय में पार्लर जाना सबसे बड़ा खर्च समझ में आता है। पार्लर जाने का मतलब आप घर से बाहर निकलो फिर धूप हो या ठंड। फिर पार्लर में बैठकर काफी टाइम बिताओ और ऊपर से पार्लर के इतने सारे खर्चे होते हैं कि आपको काफी ज्यादा सेविंग करना पड़ता है तब जाकर वह सारी चीजें हो पाती है। लेकिन अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। अगर आप अपने पैरों को खूबसूरत बनाना चाहती हैं और टैनिंग को दूर करना चाहती हैं। तो किसी भी वीकेंड पर आप घर पर पार्लर जैसा पेडिक्योर कर सकती हैं।

    बस करें ये काम
    महिलाएं अपने पैरों को खूबसूरत बनाने के लिए पार्लर में जाकर पेडिक्योर करवाती हैं। इसका जेब खर्च पर भी असर दिखने लगता है। अगर आप भी घर पर पेडिक्योर करने की सोच रही हैं। तो चलिए इसके बारे में सारी जानकारी आपको देते हैं।

    इस प्रकार पैरों को बनाए खूबसूरत
    घर पर पेडिक्योर करने के लिए एक टब में हल्का गर्म पानी लें।जब तक पानी गर्म हो, तब तक अगर आपके पैरों में नेलपेंट लगी है, तो इसको रिमूव कर दें।फिर हल्के गुनगुने पानी में थोड़ा बेकिंग सोडा, शैंपू, आधा चम्मच नमक और थोड़ा सा नींबू का रस मिक्स करें।इसमें एप्पल साइडर विनेगर भी मिला लें।फिर पैरों को 30 मिनट तक पानी में रखें।अब हल्के हाथों से पैरों की मसाज करें।स्क्रब का इस्तेमाल करके पैरों की मसाज कर सकती हैं। मसाज के दौरान नाखून, एड़ी और तलवों की सफाई करें।अच्छे से सफाई के बाद अपने पैरों को दूसरे टब में रखें औऱ साफ पानी से पैरों को धो लें।

    पैरों को साफ पानी से धो लें और इनको साफ कपड़े से पोंछकर सुखा लें।आप चाहें तो किसी खास तेल की मदद से पैरों की मसाज भी कर सकती हैं।इसके बाद नाखूनों को शेप में काटकर नेलपेंट लगाएं।नेलपेंट लगने के बाद आप पैरों पर अच्छी फुट क्रीम या लोशन लगा सकती हैं।

  • भीषण गर्मी में राहत का दूसरा नाम सूती कपड़े, हल्के रंगों का चुनाव भी जरूरी

    भीषण गर्मी में राहत का दूसरा नाम सूती कपड़े, हल्के रंगों का चुनाव भी जरूरी


    नई दिल्ली। देशभर में तापमान तेजी से बढ़ रहा है और कई जगहों पर पारा 45 डिग्री के पार पहुंच रहा है। ऐसे में चिलचिलाती धूप, उमस और लू से बचाव के लिए सही कपड़ों का चुनाव बेहद जरूरी हो जाता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस मौसम में अगर आप राहत चाहते हैं, तो सूती कपड़े यानी Cotton Fabric सबसे बेहतर विकल्प हैं। ये न केवल शरीर को ठंडा रखते हैं, बल्कि पूरे दिन आपको आरामदायक महसूस कराते हैं।

    क्यों खास है सूती कपड़ा? जानिए इसके फायदे

    सूती कपड़ा पूरी तरह प्राकृतिक होता है और इसमें किसी तरह के सिंथेटिक फाइबर नहीं होते। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ‘सांस लेने योग्य’ यानी ब्रीदेबल फैब्रिक होता है। इससे हवा आसानी से आर-पार हो सकती है, जिससे त्वचा ठंडी बनी रहती है। साथ ही, यह पसीने को जल्दी सोख लेता है और उसे हवा के संपर्क में लाकर जल्दी सुखा देता है। इससे शरीर में चिपचिपाहट नहीं होती और आप तरोताजा महसूस करते हैं।

    इसके विपरीत, Polyester और नायलॉन जैसे सिंथेटिक कपड़े पसीना सोख नहीं पाते। इससे पसीना त्वचा पर जमा रहता है, जिससे घमौरियां, खुजली और बदबू जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए गर्मियों में प्राकृतिक फैब्रिक का चुनाव ही समझदारी है।

    आराम के साथ स्टाइल भी, हर मौके के लिए परफेक्ट

    सूती कपड़े न सिर्फ आरामदायक होते हैं, बल्कि स्टाइलिश भी होते हैं। आजकल कॉटन में कई तरह के डिजाइन जैसे स्ट्राइप्स, चेक्स और सॉलिड पैटर्न मिलते हैं, जिन्हें आप कैजुअल और फॉर्मल दोनों लुक में आसानी से कैरी कर सकते हैं। यह फैब्रिक हल्का, मुलायम और त्वचा के अनुकूल होता है, जिससे दिनभर पहनने पर भी कोई परेशानी नहीं होती।

    रंगों का चुनाव भी है उतना ही जरूरी

    गर्मी में सिर्फ कपड़ा ही नहीं, बल्कि उसके रंग का चुनाव भी अहम भूमिका निभाता है। हल्के रंग जैसे सफेद, क्रीम, हल्का गुलाबी, आसमानी और पीला सूरज की किरणों को परावर्तित (रिफ्लेक्ट) करते हैं, जिससे शरीर कम गर्म होता है। वहीं, काला, नेवी ब्लू या गहरा लाल जैसे रंग गर्मी को ज्यादा सोखते हैं, जिससे शरीर का तापमान बढ़ जाता है। इसलिए इस मौसम में हल्के रंगों के सूती कपड़े पहनना सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है।

    मन और शरीर दोनों को दे सुकून

    सही कपड़े न सिर्फ शरीर को ठंडा रखते हैं, बल्कि मानसिक रूप से भी सुकून देते हैं। जब शरीर ठंडा और सूखा रहता है, तो चिड़चिड़ापन कम होता है और मन शांत रहता है। यही कारण है कि पुराने समय से दादी-नानी गर्मियों में सूती कपड़े पहनने की सलाह देती आई हैं।

    गर्मी से बचाव का आसान फॉर्मूला

    अगर आप भीषण गर्मी में खुद को कूल और कंफर्टेबल रखना चाहते हैं, तो सूती कपड़े और हल्के रंगों का चुनाव जरूर करें। यह न केवल आपको गर्मी से राहत देंगे, बल्कि आपकी सेहत और स्टाइल दोनों को बेहतर बनाएंगे।

  • ‘ॐ’ के उच्चारण का असर: आध्यात्म के साथ जानें इसके पीछे छिपा साइंस

    ‘ॐ’ के उच्चारण का असर: आध्यात्म के साथ जानें इसके पीछे छिपा साइंस


    नई दिल्ली। सनातन परंपरा में ‘ओम’ को केवल एक ध्वनि नहीं, बल्कि सृष्टि की मूल ऊर्जा माना गया है। हर मंत्र और ध्यान की शुरुआत इसी से होती है, लेकिन अब यह केवल आध्यात्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा। आधुनिक विज्ञान भी मानने लगा है कि ‘ओम’ का उच्चारण शरीर और मन दोनों पर गहरा सकारात्मक प्रभाव डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह ध्वनि कंपन (वाइब्रेशन) शरीर के सातों चक्रों को सक्रिय करने के साथ-साथ मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को भी जागृत करता है, जिससे मानसिक शांति और संतुलन बढ़ता है।

    ‘ओम’ की ध्वनि में छिपा है कंपन का विज्ञान

    ‘ओम’ दरअसल ‘अ+उ+म’ का संयोग है, जिसे Om (mantra) या प्रणव भी कहा जाता है। जब इसका लंबा और गहरा उच्चारण किया जाता है, तो शरीर में सूक्ष्म कंपन उत्पन्न होते हैं। ये कंपन सीधे Nervous System पर असर डालते हैं। इससे दिमाग शांत होता है, तनाव कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है। यही कारण है कि ध्यान और योग में ‘ओम’ को विशेष महत्व दिया गया है।

    सात चक्रों पर पड़ता है गहरा प्रभाव

    मानव शरीर में सात प्रमुख ऊर्जा केंद्र यानी चक्र माने जाते हैं—मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्ध, आज्ञा और सहस्रार। ‘ओम’ के उच्चारण से उत्पन्न कंपन इन चक्रों को सक्रिय करने में मदद करते हैं। इससे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह संतुलित होता है और व्यक्ति मानसिक व शारीरिक रूप से स्थिर महसूस करता है। नियमित अभ्यास से यह संतुलन लंबे समय तक बना रहता है।

    वैज्ञानिक शोध भी करते हैं पुष्टि

    National Library of Medicine में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, ‘ओम’ का जाप ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इस शोध में पाया गया कि सिर्फ 5 मिनट के जाप से ही हार्ट रेट वेरिएबिलिटी में सुधार हुआ और तनाव के स्तर में कमी आई। यह तंत्र शरीर की अनैच्छिक क्रियाओं जैसे दिल की धड़कन और सांस को नियंत्रित करता है, इसलिए इसका संतुलन बेहद जरूरी है।

    वेगस नर्व को करता है मजबूत

    विशेषज्ञों के अनुसार, ‘ओम’ का उच्चारण Vagus Nerve को सक्रिय करता है। यह नर्व दिल, फेफड़ों और पाचन तंत्र को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। जब ‘ओम’ का जाप गहरी सांस के साथ किया जाता है, तो यह नर्व उत्तेजित होती है, जिससे तनाव कम होता है, सांस लेने की क्षमता बेहतर होती है और शरीर में शांति का अनुभव होता है।

    मानसिक स्वास्थ्य और याददाश्त में सुधार

    ‘ओम’ की ध्वनि न केवल चक्रों को सक्रिय करती है, बल्कि मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को भी उत्तेजित करती है। इससे एकाग्रता, याददाश्त और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है। नियमित अभ्यास से चिंता, तनाव और नींद से जुड़ी समस्याएं भी कम हो सकती हैं। यही वजह है कि आजकल मानसिक स्वास्थ्य सुधारने के लिए भी इसे एक आसान और प्रभावी तकनीक माना जा रहा है।

    कैसे करें सही तरीके से ‘ओम’ का जाप?

    ‘ओम’ का सही लाभ पाने के लिए इसे सुबह खाली पेट या ध्यान के समय करना सबसे अच्छा माना जाता है। इसके लिए आराम से बैठकर गहरी सांस लें और धीरे-धीरे लंबा ‘ओम’ उच्चारित करें। फिर सांस को धीरे-धीरे छोड़ें। ध्यान रखें कि उच्चारण जितना लंबा और गहरा होगा, उतना ही अधिक कंपन पैदा होगा और लाभ भी बढ़ेगा।

    आध्यात्म और विज्ञान का अनोखा संगम

    ‘ओम’ केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी शरीर और मन को संतुलित करने का प्रभावी माध्यम है। नियमित अभ्यास से न केवल चक्र सक्रिय होते हैं, बल्कि न्यूरॉन्स भी जागृत होते हैं, जिससे जीवन में शांति, स्थिरता और सकारात्मकता आती है।

  • वात प्रकृति में चावल खाना सही या गलत? एक्सपर्ट्स की मानें तो जान लें ये जरूरी बातें

    वात प्रकृति में चावल खाना सही या गलत? एक्सपर्ट्स की मानें तो जान लें ये जरूरी बातें


    नई दिल्ली। आयुर्वेद के अनुसार हर व्यक्ति का शरीर उसकी प्रकृति यानी वात, पित्त और कफ पर आधारित होता है। अगर आहार और जीवनशैली इसी प्रकृति के अनुसार अपनाई जाए, तो कई बीमारियों से बचा जा सकता है। आज के समय में अनियमित खान-पान और लाइफस्टाइल के कारण खासकर Vata Dosha असंतुलन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वात प्रकृति वाले लोगों को चावल खाना चाहिए या इससे परहेज करना चाहिए?

    वात प्रकृति और चावल का संबंध समझें

    आयुर्वेद बताता है कि वात दोष का स्वभाव ठंडा, हल्का और रूखा होता है। वहीं चावल का स्वाद मीठा, प्रकृति ठंडी और पचने में हल्का होता है। ऐसे में सही तरीके से चावल का सेवन किया जाए तो यह वात को बढ़ाने की बजाय संतुलित करने में मदद कर सकता है। यानी चावल पूरी तरह नुकसानदायक नहीं है, बल्कि सही नियमों के साथ यह वात प्रकृति वालों के लिए फायदेमंद भी बन सकता है।

    कैसे करें चावल का सही सेवन?

    वात प्रकृति वाले लोगों को चावल खाते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले, हमेशा पुराना यानी कम से कम एक साल पुराना चावल ही खाएं। आयुर्वेद के अनुसार पुराना चावल ज्यादा सुपाच्य और गुणकारी होता है। इसके अलावा चावल हमेशा ताजा और गर्म ही खाना चाहिए। फ्रिज में रखा ठंडा या बासी चावल वात को बढ़ा सकता है और गैस, अपच जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।

    घी के साथ चावल बढ़ेगा फायदा

    चावल के साथ घी का सेवन करना बेहद जरूरी माना गया है। घी में चिकनाई होती है, जो शरीर के रूखेपन को कम करती है और वात दोष को शांत करने में मदद करती है। खासतौर पर Ghee के साथ चावल खाने से पाचन बेहतर होता है और शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है।

    दोपहर में ही करें सेवन, रात में करें परहेज

    आयुर्वेद के मुताबिक चावल खाने का सबसे सही समय दोपहर का होता है, जब पाचन अग्नि सबसे मजबूत होती है। इस समय चावल आसानी से पच जाता है और शरीर को ऊर्जा देता है। वहीं रात के समय चावल खाने से कफ और वात दोनों असंतुलित हो सकते हैं, जिससे गैस, भारीपन और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

    इन चीजों के साथ खाने से मिलेगा ज्यादा लाभ

    वात प्रकृति वाले लोगों को चावल के साथ दही खाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह वात को बढ़ा सकता है। इसके बजाय चावल को मूंग दाल और घी के साथ खाना बेहतर विकल्प है। यह संयोजन पाचन को आसान बनाता है और शरीर में संतुलन बनाए रखता है।

    सही तरीके से खाएं, तभी मिलेगा लाभ

    कुल मिलाकर, चावल वात प्रकृति वालों के लिए न तो पूरी तरह नुकसानदायक है और न ही हमेशा फायदेमंद। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे, कब और किसके साथ खाते हैं। सही नियमों का पालन कर चावल को अपनी डाइट में शामिल किया जाए तो यह सेहत के लिए वरदान साबित हो सकता है।

  • अनार के छिलके के चमत्कारी फायदे! दस्त से लेकर कब्ज तक देगा राहत

    अनार के छिलके के चमत्कारी फायदे! दस्त से लेकर कब्ज तक देगा राहत


    नई दिल्ली। अनार एक ऐसा फल है जिसे सेहत का खजाना कहा जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसका छिलका भी औषधीय गुणों से भरपूर होता है। आयुर्वेद में अनार को ‘दाडिम’ कहा गया है और इसे वात, पित्त और कफ को संतुलित करने वाला माना जाता है। आधुनिक समय में भले ही अनार सालभर उपलब्ध हो, लेकिन इसके पारंपरिक उपयोग आज भी उतने ही प्रभावी हैं। यह न केवल शरीर में रक्त बढ़ाता है, बल्कि पाचन तंत्र को मजबूत कर शरीर को अंदर से ऊर्जा भी प्रदान करता है। खास बात यह है कि अनार का छिलका, जिसे अक्सर फेंक दिया जाता है, कई बीमारियों में घरेलू उपचार के रूप में बेहद कारगर साबित हो सकता है।

    त्वचा समस्याओं में असरदार, मुहांसों से दिलाए राहत

    अगर आप मुहांसे, दाग-धब्बों या एक्ने से परेशान हैं, तो अनार के छिलके का उपयोग एक नेचुरल फेसपैक के रूप में किया जा सकता है। इसके लिए सूखे छिलकों का चूर्ण बनाकर उसमें गुलाबजल मिलाएं और पेस्ट तैयार करें। इस पेस्ट को हफ्ते में दो बार चेहरे पर लगाने से त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया कम होते हैं और स्किन साफ व निखरी नजर आती है। यह उपाय केमिकल प्रोडक्ट्स के मुकाबले सुरक्षित और किफायती भी है।

    अतिसार और पाचन समस्याओं में रामबाण

    गर्मियों में अक्सर खानपान की गड़बड़ी से अतिसार (डायरिया) की समस्या हो जाती है। ऐसे में अनार के छिलके का पाउडर बेहद लाभकारी माना गया है। इसे छाछ में मिलाकर थोड़ा जीरा डालकर सेवन करने से आंतों में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया कम होते हैं और सूजन से राहत मिलती है। यही नहीं, यह मिश्रण पाचन शक्ति को भी बेहतर बनाता है, जिससे बार-बार होने वाली पेट की समस्याओं से बचाव होता है।

    कब्ज और बवासीर में भी फायदेमंद

    अनार का छिलका सिर्फ अतिसार ही नहीं, बल्कि कब्ज और बवासीर जैसी समस्याओं में भी राहत देता है। आयुर्वेद के अनुसार, इसके पाउडर को छाछ के साथ लेने से पाचन तंत्र संतुलित रहता है और मल त्याग सुचारु होता है। इससे बवासीर में होने वाली तकलीफ भी कम हो सकती है। नियमित और सही मात्रा में इसका सेवन करने से पेट से जुड़ी कई समस्याएं धीरे-धीरे नियंत्रित हो सकती हैं।

    बच्चों के पेट के कीड़े और कमजोरी में उपयोगी

    बच्चों में पेट के कीड़े होना एक आम समस्या है, खासकर जब वे बिना हाथ धोए खाना खाते हैं। ऐसे में रोजाना खाली पेट अनार के दाने खिलाना फायदेमंद होता है। इससे आंतों में मौजूद कीड़ों का नाश होता है और पेट दर्द में राहत मिलती है। इसके अलावा, अगर शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो, तो रोज एक अनार खाना फायदेमंद माना जाता है। ध्यान रखें कि जूस की बजाय सीधे दाने खाना बेहतर होता है, क्योंकि इसमें फाइबर भरपूर मात्रा में मौजूद रहता है।

  • Perimenopause में राहत पाने के लिए सोहा अली का खास नुस्खा, घर पर बनाएं हेल्दी ड्रिंक

    Perimenopause में राहत पाने के लिए सोहा अली का खास नुस्खा, घर पर बनाएं हेल्दी ड्रिंक


    नई दिल्ली। अभिनेत्री सोहा अली खान एक बार फिर अपने हेल्थ टिप्स को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने महिलाओं के लिए बेहद अहम विषय पेरिमेनोपॉज पर खुलकर बात की है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने अनुभव में सोहा ने बताया कि मेनोपॉज से पहले का यह दौर शरीर में कई बदलाव लेकर आता है, जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकते हैं। खासतौर पर हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण एसिडिटी, पेट फूलना और कैफीन के प्रति संवेदनशीलता जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। सोहा ने बताया कि पहले उनकी सुबह कॉफी के बिना अधूरी रहती थी, लेकिन पेरिमेनोपॉज के बाद खाली पेट कॉफी पीना उनके लिए परेशानी का कारण बनने लगा। ऐसे में उन्होंने अपनी दिनचर्या में एक हेल्दी और नेचुरल ड्रिंक को शामिल किया, जिसने उन्हें काफी राहत दी।

    कॉफी की जगह अपनाया हेल्दी ड्रिंक, मिल रहे शानदार फायदे

    सोहा के मुताबिक, उन्होंने अपनी सुबह की शुरुआत अब एक साधारण लेकिन असरदार ड्रिंक से करनी शुरू कर दी है। यह ड्रिंक शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ पाचन को बेहतर बनाती है और पेट फूलने की समस्या को कम करने में मदद करती है। इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर को धीरे-धीरे एनर्जी देते हैं, जिससे पूरे दिन एक्टिव महसूस होता है। खास बात यह है कि यह ड्रिंक कैफीन की तरह अचानक असर नहीं करती, बल्कि शरीर को संतुलित तरीके से ऊर्जा प्रदान करती है। सोहा का कहना है कि इस छोटे से बदलाव ने उनकी सेहत पर बड़ा सकारात्मक असर डाला है और वह अब खुद को ज्यादा हल्का और संतुलित महसूस करती हैं।

    क्या है इस ड्रिंक की खासियत? जानिए इसके फायदे

    इस हेल्दी ड्रिंक में इस्तेमाल होने वाली चीजें न सिर्फ आसानी से उपलब्ध हैं, बल्कि आयुर्वेदिक दृष्टि से भी बेहद फायदेमंद मानी जाती हैं। गर्म पानी के साथ नींबू शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है, वहीं अदरक पाचन को मजबूत करता है। चिया सीड्स फाइबर और ओमेगा-3 से भरपूर होते हैं, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखते हैं और ब्लोटिंग कम करते हैं। इसके अलावा हल्दी, जिसमें करक्यूमिन पाया जाता है, सूजन कम करने और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जानी जाती है। जब हल्दी को काली मिर्च के साथ लिया जाता है, तो शरीर में इसका अवशोषण बेहतर हो जाता है, जिससे जोड़ों की अकड़न और सूजन में भी राहत मिलती है ये समस्याएं पेरिमेनोपॉज के दौरान आम होती हैं।

    ऐसे बनाएं यह आसान हेल्दी ड्रिंक

    सोहा ने इस ड्रिंक की रेसिपी भी बेहद सरल तरीके से साझा की है। इसके लिए आधा गिलास गुनगुना पानी लें और उसमें आधा नींबू निचोड़ें। फिर इसमें एक चुटकी सेंधा नमक, हल्दी और काली मिर्च मिलाएं। इसके बाद रातभर भिगोए हुए चिया सीड्स और ताजा कसा हुआ अदरक डालें। इस मिश्रण को अच्छी तरह मिलाकर एक मिनट तक छोड़ दें, फिर धीरे-धीरे घूंट-घूंट करके पिएं। सोहा के अनुसार, वह रोज सुबह सबसे पहले यह ड्रिंक लेती हैं और करीब 20–30 मिनट बाद नाश्ता करती हैं।

    जरूरी सावधानियां और सलाह

    सोहा ने यह भी स्पष्ट किया कि चिया सीड्स को हमेशा भिगोकर ही इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि सूखे चिया सीड्स निगलने में परेशानी पैदा कर सकते हैं। जिन लोगों को पेट या निगलने से जुड़ी समस्या है, उन्हें यह ड्रिंक लेने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि पेरिमेनोपॉज और हार्मोनल बदलाव जैसे विषयों पर उन्होंने Mini Mathur और Dr. Sukhpreet Patel के साथ एक विस्तृत चर्चा भी की है, जो उनके यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध है।

  • स्किन के जिद्दी दाग हटाना हुआ आसान! चेचक के निशानों के लिए ट्राय करें ये टिप्स

    स्किन के जिद्दी दाग हटाना हुआ आसान! चेचक के निशानों के लिए ट्राय करें ये टिप्स


    नई दिल्ली। आज के समय में हर कोई चाहता है कि उसका चेहरा काफी अच्छा रहे। लेकिन जब चेहरे में दाग धब्बे और चेचक के दाग काफी ज्यादा होते हैं तो हम काफी अनकंफर्टेबल महसूस करते हैं जहां भी जाते हैं हम अपने चेहरे को छुपाने की कोशिश करते हैं। ज्यादा लोगों से बात नहीं करते हैं कि वह हमारे और हमारे चेहरे के बारे में क्या सोचेंगे और अगर आप भी चेचक के दाग से काफी परेशान रहती हैं तो अब आप उन्हें घर पर ही ठीक कर सकते हैं।

    क्या सच में चेचक का दाग है सकता है
    चेचक के दाग त्वचा के ‘कोलेजन’ (Collagen) को नुकसान पहुंचाने के कारण बनते हैं। हालांकि बहुत गहरे गड्ढों को भरने में समय लगता है, लेकिन सही देखभाल और प्राकृतिक उपचारों के नियमित इस्तेमाल से इन निशानों को 70% से 90% तक हल्का किया जा सकता है।

    नारियल तेल
    नारियल तेल में ‘लौरिक एसिड’ और विटामिन-E होता है जो नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है। हर रात सोने से पहले प्रभावित हिस्से पर गुनगुने नारियल तेल से मसाज करें। ऐसा करने से आपके चेहरे में निखार आता है और दाग धब्बे भी धीरे-धीरे दूर होने रखते हैं।

    एलोवेरा जेल
    आपके चेहरे के लिए काफी अच्छा है। ताजा एलोवेरा जेल न केवल त्वचा को ठंडक देता है, बल्कि इसमें मौजूद ‘एलोइसिन’ निशानों को हल्का करने और त्वचा को समतल बनाने में सहायक है। चेचक के निशान हटाने के लिए रोजाना चेहरे पर ताजे एलोवेरा का जेल लगाएं। एलोवेरा वैसे भी आपके चेहरे पर निखार लाता है। इसे अगर आप सही ढंग से उपयोग करेंगी तो जल्द ही आपके चेहरे से सारे दाग धब्बे दूर हो जाएंगे और आपका चेहरा खिला-खिला और अच्छा बन जाएगा।

    नींबू और शहद
    नींबू एक प्राकृतिक ब्लीचिंग एजेंट है जो दागों को हल्का करता है, जबकि शहद त्वचा को हाइड्रेटेड रखता है ताकि वह जल्दी रिकवर हो सके। आप हफ्ते में तीन दिन दोनों को मिलाकर चेहरे पर लगा सकते हैं। इसे लगाने से आपके चेहरे में रंगत आएगी। और दाग धब्बे भी धीरे-धीरे दूर होने लगेंगे।

  • जामुन में सेहत का खजाना, डायबिटीज में फायदेमंद और करता है इम्युनिटी बूस्ट

    जामुन में सेहत का खजाना, डायबिटीज में फायदेमंद और करता है इम्युनिटी बूस्ट


    नई दिल्ली। गर्मी का मौसम शुरू होते ही बाजार में खट्टे-मीठे जामुन दिखने लगते हैं। यह स्वादिष्ट फल न सिर्फ गर्मियों में प्राकृतिक शीतलता देता है, बल्कि सेहत के लिए भी वरदान साबित होता है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही जामुन को गर्मियों का सुपरफूड मानते हैं।

    आयुर्वेद में जामुन को डायबिटीज और पेट की बीमारी का शत्रु भी कहा जाता है। इसके फल हों या पत्तियां दोनों का उपयोग औषधि बनाने में किया जाता है। साथ ही जामुन की डाली बेहतरीन दातून है, जो मुंह के रोगों का खात्मा कर उन्हें सेहतमंद रखता है।

    आयुर्वेद में जामुन को ठंडा और पित्त शामक माना गया है। गर्मी में यह शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करता है और पेट को ठंडक पहुंचाता है। इसे ताजा खाकर, जूस बनाकर या सलाद में शामिल करके रोजाना सेवन किया जा सकता है। आयुर्वेद के अनुसार, गर्मियों में जामुन का सेवन न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह सस्ता और आसानी से उपलब्ध फल भी है, जो शरीर को स्वस्थ और हाइड्रेटेड, एनर्जी से भरपूर रखने में कारगर होता है।

    जामुन के सेवन से एक-दो नहीं कई फायदे मिलते हैं। यह ब्लड शुगर कंट्रोल करता है। जामुन डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद है। इसमें कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है, जो ब्लड शुगर को स्थिर रखने में मदद करता है। गर्मी में जब ब्लड शुगर बढ़ने की संभावना ज्यादा होती है, तब जामुन का सेवन इसे नियंत्रित रखता है। जामुन में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है। यह पाचन क्रिया को सुधारता है, कब्ज दूर करता है और पेट को स्वस्थ रखता है। गर्मी में भारी खाने से जो पाचन बिगड़ता है, जामुन उसे ठीक करने में सहायक और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है।

    विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर जामुन रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। इससे गर्मियों में होने वाली बीमारियों से बचाव होता है। साथ ही कम कैलोरी वाला यह फल वजन नियंत्रित रखने में सहायक है। फाइबर से भरा होने के कारण भूख कम लगती है और बार-बार खाने की आदत पर लगाम लगती है। दिल की सेहत के लिए यह फल बहुत अच्छा माना जाता है। जामुन में पोटैशियम होता है जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है। यह कोलेस्ट्रॉल कम करने में भी मदद करता है और हृदय को स्वस्थ रखता है।

    कम ही लोग जानते हैं कि जामुन त्वचा की चमक भी बढ़ाने में कारगर है। एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाते हैं। गर्मी में धूप और पसीने से जो त्वचा प्रभावित होती है, जामुन उसे निखारने में मदद करता है।

  • Eye Care Tips: तेज धूप में आंखों को रखें सुरक्षित, दूर करें ड्रायनेस और जलन

    Eye Care Tips: तेज धूप में आंखों को रखें सुरक्षित, दूर करें ड्रायनेस और जलन


    नई दिल्ली। मौसम में बदलाव के साथ आंखों की देखभाल करना भी जरूरी हो जाता है। बदलते मौसम की वजह से आंखों में चिपचिपापन हमेशा बना रहता है और आंखों में पानी आने की समस्या भी परेशान करने लगती है।

    इसके साथ ही आज के डिजिटल दौर में आंखों की कमजोरी एक आम समस्या बन गई है, लेकिन हम आपके लिए कुछ आसान और प्राकृतिक तरीके लेकर आए हैं, जिनके उपयोग से आंखों की देखभाल और घटते नंबर को भी नियंत्रित किया जा सकता है।

    आज के डिजिटल दौर में आंखें स्क्रीन की वजह से बहुत थक जाती हैं। ऐसे में आंखों के व्यायाम और सनगैजिंग जरूरी हो जाता है। इसके लिए रोजाना 10 मिनट आंखों को चारों दिशाओं में घुमाएं और कुछ देर के लिए बंद कर आराम दें। इस व्यायाम को 5 बार दोहराएं। इसके साथ ही सनगैजिंग यानी सूरज को निहारे। इसके लिए सूर्योदय और सूर्यास्त से 1 घंटे पहले नंगी आंखों से सूरज की तरह देखने की कोशिश करें। इसके बाद दोनों हथेलियों को रगड़कर आंखों पर लगाएं। इससे आंखों को आराम मिलेगा।

    दूसरा, गर्मियों में आंखों का रुखापन बढ़ जाता है। ऐसे में रोजाना आंखों पर खीरा या ककड़ी का आईपैक लगाएं। इसके लिए खीरे या ककड़ी की दो स्लाइस को आंखों पर रखें और कुछ देर खुद को शांत करने की कोशिश करें। इससे आंखों की थकावट दूर होती है और रक्त संचार भी बढ़ता है।

    स्क्रीन टाइमिंग को कम करें। नियम बना लें कि रात को 9 बजे के बाद फोन का इस्तेमाल नहीं करेंगे और टीवी भी नहीं देखेंगे। इससे आंखों की मांसपेशियां मजबूत होंगी और स्क्रीन की वजह से पड़ने वाला दबाव भी कम होगा। इससे सिर दर्द में भी राहत मिलेगी। इसके अलावा, त्राटक क्रिया को रोजाना करें। इसके लिए अंधेरे कमरे में एक मोमबत्ती या दीया जला लें और फिर उसे लगातार देखते रहें। इससे आंखों की सफाई होती है और आंखों से खूब सारा पानी भी बहता है।

    यह प्रक्रिया एकाग्रता को बढ़ाने में भी मदद करती है। इन अभ्यासों को रोज करने से कुछ ही महीनों में आंखों की स्थिति में खुद-ब-खुद सुधार देखने को मिलेगा और आंखों का तेजी से घटता नंबर भी स्थिर हो जाएगा।

  • गर्मियों का सुपरफूड पुदीना! ऊर्जा बढ़ाए और पाचन दुरुस्त रखे, जानें फायदे

    गर्मियों का सुपरफूड पुदीना! ऊर्जा बढ़ाए और पाचन दुरुस्त रखे, जानें फायदे


    नई दिल्ली।  देश के कई हिस्सों में गर्मी तेजी से बढ़ रही है। चिलचिलाती धूप और तपती गर्मी में ठंडक का अहसास देने के लिए पुदीना सबसे अच्छा और आसान प्राकृतिक उपाय है। हरी और सुगंधित पुदीना की छोटी-छोटी पत्तियां न सिर्फ ताजगी भरी खुशबू देती हैं, बल्कि तन और मन दोनों को शीतलता प्रदान करती हैं।
     
    गर्मियों में पुदीना का सेवन कई बीमारियों से बचाव में भी बेहद कारगर साबित होता है। पुदीना पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें मौजूद मेंथॉल शरीर को प्राकृतिक ठंडक देता है। गर्मी के दिनों में पुदीना चटनी, रायता, जूस, पन्ना, सलाद या पानी में मिलाकर पीने से गर्मी का असर काफी कम हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पुदीना गर्मियों में शरीर का तापमान नियंत्रित रखने का सबसे सरल तरीका है।

    आयुर्वेद में पुदीना का खासा स्थान है और इसके सेवन से शरीर को कई लाभ मिलते हैं। पुदीना पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। यह अपच, गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है, पेट को हल्का रखता है और भूख बढ़ाने में भी मदद करता है। पुदीना डिहाइड्रेशन से बचाव में भी कारगर है। गर्मियों में पसीना ज्यादा आने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। पुदीने का पानी पीने से डिहाइड्रेशन की समस्या नहीं होती और दिनभर ताजगी बनी रहती है। सिरदर्द और तनाव कम करता है,

    पुदीने की चाय सिरदर्द और मानसिक तनाव को दूर करने में बहुत फायदेमंद है। सुबह खाली पेट पुदीने वाला पानी पीने से पूरे दिन एनर्जी और ताजगी बनी रहती है।

    पुदीना एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और मौसमी बीमारियों से बचाव में मदद करता है। इसके सेवन से पसीने की दुर्गंध कम या खत्म होती है। मोटापा घटाने में सहायक है। सूजन कम करने और रोगाणुरोधी गुण रखता है। साथ ही हृदय स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है।

    आयुर्वेद में पुदीने को गर्मियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना गया है। अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अध्ययनों में भी पुदीने के कई स्वास्थ्य लाभ बताए गए हैं, जिनमें सूजन-रोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण शामिल हैं।

    गर्मियों में पुदीने की मांग काफी बढ़ जाती है। पुदीना सस्ता, आसानी से उपलब्ध और बिना किसी साइड इफेक्ट वाला प्राकृतिक उपाय है। एक्सपर्ट इसे रोजाना अपने आहार में दही का रायता, पुदीने की चटनी, निंबू-पुदीना पानी या सलाद के रूप में शामिल करने की सलाह देते हैं।