जार वाली शेकिंग ट्रिक बिना छुए उतरेंगे छिलके
गर्म पानी और माइक्रोवेव का कमाल
चाकू का सही इस्तेमाल और हाथों की सुरक्षा

जार वाली शेकिंग ट्रिक बिना छुए उतरेंगे छिलके
गर्म पानी और माइक्रोवेव का कमाल
चाकू का सही इस्तेमाल और हाथों की सुरक्षा

बस से सूरजकुंड मेला कैसे पहुंचें?
मेले के दौरान प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा के लिए खास बस सेवा शुरू की है. सूरजकुंड मेले तक पहुंचने के लिए आपको बल्लभगढ़ से बस मिलेगी. 31 जनवरी से रोज सुबह 7 बजे से बसें मिलनी शुरू हो जाएंगी. सबसे अच्छी बात यह है कि बसें हर 30 मिनट के अंतराल पर उपलब्ध होंगी, शनिवार और रविवार के दिन हर 15 मिनट में मेले के लिए बस उपलब्ध रहेंगी. यानी आपको ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा.
बस का किराया भी काफी सस्ता रखा गया है.
बल्लभगढ़ से सूरजकुंड- सिर्फ 25 रुपये
बदरपुर से सूरजकुंड- मात्र 20 रुपये
बड़खल मेट्रो स्टेशन से- 10 रुपये
ऐसे में कम खर्च में आरामदायक सफर चाहने वालों के लिए बस सबसे बढ़िया विकल्प है.
मेट्रो से सूरजकुंड मेला कैसे पहुंचें?
वहीं, अगर आप मेट्रो से जाना चाहते हैं, तो बदरपुर बॉर्डर मेट्रो स्टेशन (वायलेट लाइन) सूरजकुंड मेले के सबसे नजदीक है. स्टेशन से बाहर निकलते ही आपको ऑटो, ई-रिक्शा और बस आसानी से मिल जाएगी, जो सीधे मेले तक पहुंचा देती हैं. दिल्ली और आसपास के इलाकों से आने वालों के लिए मेट्रो काफी सुविधाजनक रहती है.
अपनी गाड़ी या कैब से कैसे पहुंचें सूरजकुंड मेला?
जो लोग अपनी कार या बाइक से जाना चाहते हैं, उनके लिए सड़क मार्ग भी अच्छा है. मेले के पास पार्किंग की व्यवस्था रहती है, हालांकि भीड़ ज्यादा होने पर थोड़ा समय लग सकता है. आप चाहें तो कैब या टैक्सी भी बुक कर सकते हैं.
एयरपोर्ट से सूरजकुंड मेला कैसे जाएं?
अगर आप इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सीधे आ रहे हैं, तो पहले नई दिल्ली की ओर आना होगा. एयरपोर्ट से सूरजकुंड की दूरी करीब 30 किलोमीटर है, जिसे आप कैब या मेट्रो के जरिए आसानी से तय कर सकते हैं.

मलाई (दूध की गाढ़ी परत) में फैटी एसिड्स, विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो त्वचा को मॉइस्चराइज, नर्म और ग्लोइंग बनाते हैं। अगर इसे सही चीजों के साथ मिलाकर लगाया जाए तो यह डेड स्किन को हटाकर त्वचा में प्राकृतिक निखार लाता है।
1मलाई और हल्दी
ड्राई स्किन को सॉफ्ट बनाने और हाइपरपिग्मेंटेशन कम करने के लिए मलाई में हल्दी मिलाकर लगाएं।
तैयारी:
2 चम्मच मलाई
1 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
1 छोटा चम्मच शहद
सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर पेस्ट बनाएं। इसे चेहरे पर 15 मिनट के लिए लगाएं और फिर गुनगुने पानी से धो लें।
2मलाई और बेसन
मलाई और बेसन का पैक रूखी त्वचा को ग्लोइंग और नरम बनाता है।
तैयारी:
2 चम्मच बेसन
आवश्यकता अनुसार मलाई
साथ में मिलाकर पेस्ट तैयार करें। चेहरे पर 15 मिनट तक लगा रहने दें और फिर धो लें।
3मलाई और शहद
यह फेस पैक त्वचा को गहराई से हाइड्रेट और चमकदार बनाता है।
तैयारी:
मलाई और शहद बराबर मात्रा में मिलाएं
15–20 मिनट चेहरे पर लगाएं
फिर पानी से साफ करें
चेहरे पर मलाई लगाने के फायदे
रूखी और बेजान त्वचा से छुटकारा
त्वचा में प्राकृतिक नमी और चमक
डेड स्किन हटाकर चेहरे की रंगत निखारना
सर्दियों में स्किन को सॉफ्ट और ग्लोइंग बनाना
नोट: इन पैक्स को सप्ताह में 2–3 बार लगाना सबसे अच्छा है।

समंदर, रंगीन गलियां और सुकून वाली वाइब्स
अगर आप समंदर के शौकीन हैं और अपनी रील में वाइब्स चाहते हैं, तो गोवा की फोंटेनहास गलियां आपका इंतजार कर रही हैं. पुर्तगाली वास्तुकला से सजी ये पीली और नीली दीवारें आपको भारत में रहकर यूरोप का अहसास कराती हैं. यहां के बीच-साइड कैफे और सूर्यास्त के नजारे आपके फीड को रंगीन बना देते हैं. थोड़ा और शांति की तलाश है, तो पुदुचेरी (पॉन्डिचेरी) का व्हाइट टाउन किसी स्वप्नलोक से कम नहीं है. फ्रांसीसी विरासत को समेटे यहां के पीले घर और सुंदर बुटीक कैफे रील बनाने के लिए सबसे एस्थेटिक बैकग्राउंड देते हैं. वहीं केरल के एलेप्पी में पानी पर तैरते हाउसबोट्स और नारियल के पेड़ों के बीच से गुजरती नाव की तस्वीरें आपके इंस्टाग्राम को एक अलग ही लेवल पर ले जाती हैं.
बर्फ, बादल और एडवेंचर का इंस्टाग्राम पैकेज
पहाड़ों के शौकीनों के लिए मनाली की सोलंग वैली और अटल टनल के पास जमी बर्फ किसी जादुई कंटेंट से कम नहीं है. यहां की स्लो-मोशन रील्स सोशल मीडिया पर जबरदस्त वायरल होती हैं. अगर आप थोड़ा और एडवेंचर चाहते हैं, तो लद्दाख की पैंगोंग झील का नीला पानी और वहां का सन्नाटा आपकी तस्वीरों में जान फूंक देता है. दूसरी ओर, पूर्वोत्तर भारत का मेघालय कुदरत की अनूठी इंजीनियरिंग पेश करता है. यहां के लिविंग रूट ब्रिज और डाउकी नदी का कांच जैसा साफ पानी ऐसा बैकग्राउंड प्रदान करता है जिसे देखकर लोग यकीन नहीं कर पाएंगे कि यह जगह भारत में ही है. इसी कड़ी में ऋषिकेश का नाम भी आता है, जहां लक्ष्मण झूला और गंगा की आरती के साथ-साथ बंजी जंपिंग और राफ्टिंग के रोमांचक वीडियो आपके रील गेम को मजबूत करते हैं.
शाही किलों की भव्यता और विरासत का प्राचीन जादू
संस्कृति और विरासत को पसंद करने वाले युवाओं के लिए जयपुर यानी ‘पिंक सिटी’ सबसे बड़ा अड्डा है. यहां का पत्रिका गेट अपनी रंग-बिरंगी मेहराबों के कारण इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली जगहों में से एक बन चुका है. इसके साथ ही आमेर किले और हवा महल की वास्तुकला आपकी रील्स में शाही राजपूताना टच जोड़ती है. वहीं अगर आप कुछ रहस्यमयी और प्राचीन तलाश रहे हैं, तो हम्पी के खंडहर और वहां का पथरीला परिदृश्य एक अद्भुत सिनेमैटिक फील देता है. यूनेस्को की यह विश्व धरोहर स्थल इतिहास और फोटोग्राफी का अनोखा संगम है. अंत में, वाराणसी के घाटों पर सुबह की नाव की सवारी और शाम को होने वाली दिव्य गंगा आरती ऐसे सांस्कृतिक दृश्य पेश करती है जो न सिर्फ रील-रेडी हैं, बल्कि भारत की रूह को भी खूबसूरती से दर्शाते हैं.

1जम्मू-कश्मीर: धरती का स्वर्ग और एडवेंचर का हब
उत्तराखंड: औली से लेकर हर्सिल तक का जादू
सिक्किम: नाथांग वैली का अनछुआ सौंदर्य
कुमाऊं की ऊंची चोटियां
विंटर ट्रिप के लिए कुछ जरूरी टिप्स
थर्मल वियर: अपने साथ पर्याप्त ऊनी कपड़े और वाटरप्रूफ जैकेट जरूर रखें। जूते: बर्फ पर चलने के लिए अच्छी ग्रिप वाले गमबूट्स या स्नो शूज साथ ले जाएं। बुकिंग: हालांकि ये जगहें कम भीड़ वाली हैं, फिर भी सीजन में जाने से पहले होमस्टे या होटल की एडवांस बुकिंग कर लेना समझदारी है।

क्यों पतली होती हैं आइब्रो
अरंडी का तेल नेचुरल ग्रोथ बूस्टर
अरंडी का तेल आइब्रो को घना बनाने का सबसे पुराना और असरदार तरीका है। इसमें मौजूद रिसिनोइलिक एसिड बालों के रोम छिद्रों को उत्तेजित करता है। कैसे इस्तेमाल करें: रात को सोने से पहले अपनी उंगलियों या क्यू-टिप से तेल को भौंहों पर लगाएं और 2-3 मिनट मसाज करें। सुबह इसे गुनगुने पानी से धो लें।
नारियल तेल प्रोटीन का पोषण
नारियल तेल में फैटी एसिड और विटामिन E होता है, जो बालों के टूटने को कम करता है।फायदा यह न केवल आइब्रो को काला बनाता है, बल्कि सर्दियों में होने वाले डैंड्रफ से भी बचाता है। इसे हल्का गुनगुना करके लगाने से बेहतर परिणाम मिलते हैं।
प्याज का रस सल्फर की शक्ति
प्याज के रस में सल्फर की प्रचुर मात्रा होती है, जो कोलेजन उत्पादन को बढ़ाता है। यह नई ग्रोथ लाने में बहुत मददगार है। सावधानी इसे रुई की मदद से लगाएं और ध्यान रहे कि यह आंखों में न जाए। 30-40 मिनट बाद ठंडे पानी से धो लें।
एलोवेरा जेल जड़ों की मजबूती
एलोवेरा में एलोनिन नामक तत्व होता है जो बालों की बनावट में सुधार करता है। यह चिपचिपा नहीं होता, इसलिए आप इसे दिन में भी लगा सकते हैं। विधि ताजे एलोवेरा जेल से आइब्रो की मसाज करें। यह जड़ों को गहराई से पोषण देता है।
जैतून का तेल विटामिन का खजाना
जैतून का तेल विटामिन A और E से भरपूर होता है। विटामिन E बालों को पोषण देता है जबकि विटामिन A नेचुरल ऑयल सीबम के उत्पादन को बढ़ाता है। टिप इसे रोज रात को लगाने से आइब्रो रेशमी और घनी दिखने लगती हैं।
जरूरी टिप्स
मसाज रोजाना रात को 5 मिनट आइब्रो की मसाज करने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है जिससे बाल जल्दी उगते हैं। थ्रेडिंग से ब्रेक आइब्रो की ग्रोथ के लिए कम से कम 6-8 हफ्तों तक थ्रेडिंग न कराएं। हाइड्रेशन पर्याप्त पानी पिएं और डाइट में आयरन और प्रोटीन युक्त चीजें शामिल करें।

कौन सी हैं वो 5 चमत्कारी जड़ी-बूटियां? विशेषज्ञों के अनुसार, केसर, चंदन, मंजिष्ठा, मुलेठी और हल्दी का अर्क जब सही अनुपात में मिलाया जाता है, तो यह त्वचा के लिए एक शक्तिशाली अमृत बन जाता है। केसर त्वचा की रंगत सुधारता है, तो मंजिष्ठा रक्त शोधन कर कील-मुहासों को रोकता है। वहीं मुलेठी और हल्दी झुर्रियों को कम करने और एंटी-एजिंग गुणों के लिए प्रसिद्ध हैं।
कैसे काम करता है यह सीरम? रात के समय हमारी त्वचा खुद को ‘रिपेयर’ यानी ठीक करती है। जब हम सोने से पहले इस आयुर्वेदिक सीरम का इस्तेमाल करते हैं, तो इसमें मौजूद सक्रिय तत्व त्वचा के छिद्रों में गहराई तक समा जाते हैं। यह कोलेजन के उत्पादन को बढ़ाता है, जिससे झुर्रियां कम होती हैं और त्वचा में कसाव आता है। नियमित इस्तेमाल से यह सीरम न केवल झाइयां और दाग-धब्बों को हल्का करता है, बल्कि त्वचा को प्राकृतिक रूप से चमकदार भी बनाता है। प्राकृतिक और शुद्ध होने के कारण यह हर तरह की स्किन के लिए अनुकूल है। यदि आप इसे अपनी डेली रूटीन का हिस्सा बनाते हैं, तो कुछ ही दिनों में आपका चेहरा जवां और चमकदार नजर आने लगेगा।

दरअसल, पेपर कप पूरी तरह कागज से नहीं बने होते। इन्हें वाटरप्रूफ बनाने के लिए अंदर की परत में प्लास्टिक या वैक्स कोटिंग की जाती है। जब इनमें गर्म पेय डाला जाता है, तो यह परत पिघलने लगती है और उससे हानिकारक केमिकल्स और माइक्रोप्लास्टिक चाय-कॉफी में मिल जाते हैं, जो सीधे शरीर में पहुंचते हैं।
सेहत पर कैसे पड़ता है असर?
डॉक्टर्स के अनुसार, पेपर कप में मौजूद BPA (बिसफेनोल-A) और अन्य केमिकल्स गर्म तरल के संपर्क में आकर एक्टिव हो जाते हैं। इनका लगातार सेवन करने से हार्मोनल असंतुलन, थायरॉइड की समस्या, और लंबे समय में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
इसके अलावा, माइक्रोप्लास्टिक कण पाचन तंत्र को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इससे एसिडिटी, पेट दर्द, गैस, अपच और आंतों से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि रोजाना पेपर कप में गर्म पेय पीने से शरीर में टॉक्सिन्स धीरे-धीरे जमा होने लगते हैं।
पर्यावरण के लिए भी खतरा
पेपर कप सिर्फ सेहत ही नहीं, पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक हैं। प्लास्टिक कोटिंग के कारण इन्हें पूरी तरह रिसायकल करना मुश्किल होता है। जलाने पर ये जहरीली गैसें छोड़ते हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है।
क्या करें, क्या न करें
अगर आप खुद को और अपने परिवार को इन खतरों से बचाना चाहते हैं, तो पेपर कप का इस्तेमाल कम से कम करें। चाय-कॉफी पीने के लिए स्टील, कांच या सिरेमिक कप सबसे सुरक्षित माने जाते हैं। ये न केवल सेहत के लिए बेहतर हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मददगार हैं।

कल्पा
गोकर्ण
गोवा की भीड़ से दूर, फरवरी में कर्नाटक का गोकर्ण खासतौर पर ओम बीच के आगे का इलाका एक अलग ही अनुभव देता है. यहां समुद्र देखने से ज़्यादा सुनने जैसा लगता है. न ज्यादा नमी परेशान करती है और न पर्यटकों की भीड़. बस लहरों की आवाज़ और नमकीन हवा का हल्का सा स्पर्श मन को हल्का कर देता है.
मंडावा
राजस्थान का मंडावा फरवरी में अपने शांत रूप में दिखाई देता है. शेखावाटी की हवेलियां, खाली गलियां और धीमी दोपहरें किसी पुराने दौर में ले जाती हैं. यहां सुकून प्रकृति से नहीं बल्कि समय की धीमी रफ्तार से मिलता है, जैसे दिन खुद कह रहा हो कि जल्दी की कोई ज़रूरत नहीं है.
माजुली
असम का माजुली फरवरी में बेहद संतुलित लगता है. ब्रह्मपुत्र शांत रहती है और सत्रों में बिना किसी दिखावे के गतिविधियां चलती रहती हैं. यहां बैठकर चुप रहना भी एक तरह की आध्यात्मिकता जैसा महसूस होता है, जो पहाड़ या मंदिर से अलग लेकिन उतनी ही गहरी होती है.
इन जगहों में क्या समानता है
आध्यात्मिक यात्रिक और पिलग्रिम महादेवा ट्रैवल के चीफ जुग्ग्नु के अनुसार इन सभी जगहों में फरवरी में कुछ भी खास नहीं होता और शायद यही उन्हें खास बनाता है. न मौसम चरम पर होता है, न पर्यटक. न कुछ मिस करने का डर और न कुछ साबित करने की ज़रूरत. यही सुकून की असली परिभाषा है.

इससे न केवल एंग्जाइटी और डिप्रेशन जैसी मानसिक परेशानियां बढ़ रही हैं, बल्कि याददाश्त कमजोर हो रही है और ध्यान केंद्रित करने में समस्या हो रही है। ऐसे में योग हमारी सेहत के लिए समाधान का काम कर सकता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता और नर्वस सिस्टम को मजबूत करने का भी काम करता है। इसी कड़ी में हाकिनी योग मुद्रा एक सरल हस्त मुद्रा है, जो दिमाग को सक्रिय रखने, तनाव कम करने और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करती है।
हाकिनी योग मुद्रा, जिसे पावर जेस्चर या ब्रेन पॉवर मुद्रा भी कहा जाता है, हाथों की पांचों उंगलियों को आपस में जोड़कर की जाती है। इसे करने के लिए सबसे पहले आप पद्मासन या वज्रासन में बैठ जाएं और आंखें बंद करके गहरी और लंबी सांस लें। इसके बाद एक हाथ की सभी उंगलियों की टिप को दूसरे हाथ की उंगलियों की टिप से जोड़ दें। ध्यान रखें कि उंगलियों पर अत्यधिक दबाव न पड़े। भौहों के बीच पर ध्यान केंद्रित करते हुए मन को अनावश्यक विचारों से दूर रखें। शुरुआत में इसे दो से तीन मिनट करें और धीरे-धीरे इसे पांच मिनट तक बढ़ाएं। रोजाना सुबह खाली पेट और शाम को इसका अभ्यास करने से इसका प्रभाव और भी बढ़ जाता है।
इस मुद्रा के अनेक लाभ हैं। सबसे पहले, यह ध्यान और एकाग्रता बढ़ाती है। हाथों की उंगलियों को जोड़ने से मस्तिष्क के दोनों हिस्से सक्रिय होते हैं, जिससे याददाश्त मजबूत होती है और किसी भी काम पर ध्यान बनाए रखना आसान होता है। इसके साथ ही यह तनाव और घबराहट को कम करता है। जो लोग लगातार चिंतित रहते हैं या डिप्रेशन का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह मुद्रा मानसिक शांति और संतुलन का काम करती है।
हाकिनी मुद्रा आत्मविश्वास बढ़ाने में भी मदद करती है। इसे करने से न केवल व्यक्ति अपने कार्यों के प्रति उत्साहित और प्रेरित महसूस करता है, बल्कि मानसिक स्थिरता और ऊर्जा भी बढ़ती है।
इसके अलावा, हाकिनी मुद्रा नींद की गुणवत्ता को सुधारने में भी मदद करती है। दिनभर की थकान और तनाव के कारण कई लोगों को रात में नींद नहीं आती। इस मुद्रा का अभ्यास शरीर में रक्तसंचार बढ़ाता है और ऑक्सीजन का प्रवाह सुधारता है, जिससे नींद गहरी और संतुलित होती है। इसके नियमित अभ्यास से नर्वस सिस्टम, टिश्यू और सेल्स की कार्यक्षमता भी बेहतर होती है। इससे शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति दिनभर सक्रिय महसूस करता है।