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  • गणतंत्र दिवस 2026: तिरंगे के रंगों में निखारें अपना व्यक्तित्व, इन स्टाइलिंग टिप्स के साथ पाएं परफेक्ट लुक

    गणतंत्र दिवस 2026: तिरंगे के रंगों में निखारें अपना व्यक्तित्व, इन स्टाइलिंग टिप्स के साथ पाएं परफेक्ट लुक


    नई दिल्ली । 26 जनवरी का दिन केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि हर भारतीय के लिए गर्व, सम्मान और अटूट देशभक्ति का प्रतीक है। गणतंत्र दिवस के इस राष्ट्रीय पर्व पर स्कूल कॉलेज से लेकर ऑफिस तक के आयोजनों में हर कोई अपनी उपस्थिति को खास बनाना चाहता है। यदि आप भी इस खास मौके पर अपनी वेशभूषा के जरिए देशभक्ति का संदेश देना चाहती हैं और साथ ही सबसे ग्रेसफुल व शालीन दिखना चाहती हैं तो तिरंगे के रंगों का सही तालमेल आपकी सुंदरता में चार चांद लगा सकता है।

    इस विशेष अवसर के लिए ‘तिरंगा थीम’ अपनाते समय सबसे महत्वपूर्ण है रंगों का सही संतुलन। फैशन विशेषज्ञों का मानना है कि केसरिया सफेद और हरे रंग का उपयोग इस तरह होना चाहिए कि वह भड़काऊ न लगे। उदाहरण के तौर पर यदि आप शांति और शुद्धता के प्रतीक सफेद रंग का कुर्ता या अनारकली सूट पहन रही हैं तो उसके साथ लहरिया स्टाइल का तिरंगा दुपट्टा कैरी करें। आप चाहें तो केसरिया रंग का कुर्ता और सफेद बॉटम के साथ हरा स्टोल भी ले सकती हैं। चूंकि जनवरी में ठंड का असर रहता है, इसलिए अपने आउटफिट के साथ एक स्टाइलिश नेहरू जैकेट या कंट्रास्ट रंग की ऊनी शॉल को शामिल करना एक स्मार्ट और गरिमामय विकल्प होगा।

    स्टाइलिंग की बात हो तो मेकअप और हेयरस्टाइल पर ध्यान देना अनिवार्य है। इस दिन के लिए लेस इज मोर कम ही ज्यादा है का मंत्र सबसे सटीक बैठता है। भारी-भरकम मेकअप के बजाय एक लाइट बेस या बीबी क्रीम का उपयोग करें। अपनी आंखों को थोड़ा पॉप-अप लुक देने के लिए आप तिरंगे के रंगों वाला आईलाइनर लगा सकती हैं या नाखूनों पर सूक्ष्म ‘ट्राई-कलर नेल आर्ट’ करवाकर अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित कर सकती हैं। बालों को बहुत ज्यादा उलझाने के बजाय एक साफ-सुथरी नीट पोनीटेल, सलीके से बना लो-बन या पारंपरिक चोटी आपके व्यक्तित्व को एक परिपक्व और गंभीर लुक देगी।

    गणतंत्र दिवस पर आपका पहनावा न केवल आपकी स्टाइल को दर्शाता है, बल्कि राष्ट्र के प्रति आपके सम्मान को भी प्रकट करता है। याद रखें, सादगी और शालीनता ही वह कुंजी है जो आपको भीड़ में सबसे अलग और आकर्षक बनाएगी। तो इस 26 जनवरी, आत्मविश्वास के साथ तिरंगे के रंगों को ओढ़ें और गणतंत्र का उत्सव मनाएं।

  • Republic Day Long Weekend 2026: दिल्ली के पास 6 बेस्ट वीकेंड गेटवे, कम दूरी में भरपूर ट्रैवल मज़ा

    Republic Day Long Weekend 2026: दिल्ली के पास 6 बेस्ट वीकेंड गेटवे, कम दूरी में भरपूर ट्रैवल मज़ा



    नई दिल्ली। रिपब्लिक डे 2026 के लम्बे वीकेंड में अगर आप दिल्ली से ज्यादा दूर नहीं जाना चाहते और कम समय में अधिक अनुभव चाहते हैं, तो ये 6 जगहें आपके लिए परफेक्ट हैं। इन डेस्टिनेशनों में इतिहास, संस्कृति, एडवेंचर, शांति और नेचर सभी का मजा मिलता है, साथ ही यात्रा की दूरी भी कम है।
    1) आगरा (लगभग 3.5 घंटे)
    इतिहास और विरासत प्रेमियों के लिए आगरा सबसे बेहतर विकल्प है। दिल्ली से लगभग 3 घंटे 30 मिनट की ड्राइव पर स्थित आगरा में ताजमहल सबसे बड़ा आकर्षण है, खासकर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का नजारा बेहद खास होता है।
    इसके अलावा आगरा किला (UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट) और सिकंदरा में अकबर का मकबरा भी देखने लायक हैं। आगरा का प्रसिद्ध पेठा और बेडई-आलू सब्जी भी ट्रिप को और स्वादिष्ट बना देते हैं।

    2) ऋषिकेश (लगभग 5 घंटे)
    शांति और सुकून के साथ एडवेंचर भी चाहिए तो उत्तराखंड का ऋषिकेश बेहतरीन विकल्प है। यहां गंगा किनारे योग, ध्यान और मेडिटेशन के साथ रिवर राफ्टिंग और बंजी जंपिंग जैसे एडवेंचर एक्टिविटीज़ का आनंद लिया जा सकता है। लक्ष्मण झूला, राम झूला, परमार्थ निकेतन और बीटल्स आश्रम जैसे स्थलों की यात्रा भी खास रहती है। अगर आप पूरी तरह आध्यात्मिक अनुभव चाहते हैं तो पास ही हरिद्वार भी जा सकते हैं, जहां हर की पौड़ी की गंगा आरती मुख्य आकर्षण है।

    3) नीमराना (लगभग 3 घंटे)
    राजस्थान का नीमराना दिल्ली से लगभग 3 घंटे की दूरी पर है और यह वीकेंड गेटवे के लिए लोकप्रिय विकल्प है। यहां 15वीं सदी का ऐतिहासिक नीमराना फोर्ट पैलेस मुख्य आकर्षण है, जिसे अब एक लग्जरी हेरिटेज होटल में बदल दिया गया है। इसके अलावा यहां की प्राचीन बावड़ी भी देखने लायक है। कम ट्रैवल में ऐतिहासिक अनुभव के लिए नीमराना एक अच्छा विकल्प है।
    4) जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क (लगभग 5 घंटे)
    वाइल्डलाइफ प्रेमियों के लिए जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क एक शानदार डेस्टिनेशन है। यहां टाइगर, तेंदुआ, हाथी और कई अन्य जंगली जानवरों को देखने का मौका मिलता है। जीप सफारी मुख्य आकर्षण है, वहीं नेचर वॉक और रिजॉर्ट स्टे के जरिए प्रकृति के करीब समय बिताया जा सकता है।

    5) मसूरी (लगभग 6 घंटे)
    अगर आप पहाड़ों में छुट्टियां बिताना चाहते हैं तो “क्वीन ऑफ हिल्स” मसूरी एक परफेक्ट ऑप्शन है। यहां के खूबसूरत पहाड़ी नजारे, माल रोड, केम्पटी फॉल्स और लोकल स्ट्रीट फूड का मजा लिया जा सकता है। शांति पसंद करने वालों के लिए पास ही स्थित लैंडोर भी एक अच्छा विकल्प है।

    6) जयपुर (लगभग 5 घंटे)
    राजस्थान की राजधानी जयपुर इतिहास और संस्कृति का बेहतरीन मिश्रण पेश करती है। दिल्ली से करीब 5 घंटे की ड्राइव पर स्थित जयपुर में हवा महल, सिटी पैलेस और आमेर किला जैसे ऐतिहासिक स्थल देखे जा सकते हैं। इसके अलावा जोहरी बाजार में शॉपिंग का मजा भी लिया जा सकता है। रिपब्लिक डे वीकेंड में जयपुर घूमना एक शानदार विकल्प साबित होता है।
  • महंगे ट्रीटमेंट छोड़िए! किचन में मौजूद इन 5 देसी नुस्खों से बाल बनेंगे घने और मजबूत

    महंगे ट्रीटमेंट छोड़िए! किचन में मौजूद इन 5 देसी नुस्खों से बाल बनेंगे घने और मजबूत


    नई दिल्ली।आज के दौर में प्रदूषण तनाव और गलत लाइफस्टाइल का सबसे पहला असर हमारे बालों पर पड़ता है। बालों का झड़ना रूखापन दोमुंहे बाल और कमजोर जड़ें अब आम समस्या बन चुकी हैं। ऐसे में लोग अक्सर महंगे सैलून ट्रीटमेंट और केमिकल प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं जो कुछ समय के लिए फायदा तो देते हैं लेकिन लंबे समय में बालों को और नुकसान पहुंचा सकते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार स्वस्थ बालों के लिए महंगे प्रोडक्ट्स नहीं बल्कि प्राकृतिक देखभाल ज्यादा जरूरी है। अच्छी बात यह है कि आपकी रसोई में ही ऐसी कई चीजें मौजूद हैं जो बालों की जड़ों को पोषण देकर उन्हें घना मजबूत और चमकदार बना सकती हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही 5 देसी और असरदार हेयर मास्क के बारे में।

    एलोवेरा और नारियल तेल
    एलोवेरा में मौजूद प्रोटीयोलाइटिक एंजाइम स्कैल्प की डेड स्किन हटाकर उसे स्वस्थ बनाते हैं। नारियल तेल बालों की जड़ों में नमी पहुंचाकर टूटने से बचाता है।कैसे लगाएं: एलोवेरा जेल और नारियल तेल मिलाकर स्कैल्प की मसाज करें और 30 मिनट बाद धो लें।

    अंडा और दही
    बाल केराटिन से बने होते हैं और अंडा प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है। दही बालों को कंडीशन करता है और उन्हें सॉफ्ट बनाता है।विधि: एक अंडा और आधा कप दही फेंटकर जड़ों से लेकर बालों की लंबाई तक लगाएं।
    सावधानी: इसे धोने के लिए ठंडे पानी का ही इस्तेमाल करें।

    प्याज का रस और शहद
    प्याज में मौजूद सल्फर ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है और नए बालों के उगने में मदद करता है। शहद बालों की नमी को लॉक करता है।
    टिप: रुई की मदद से सिर्फ स्कैल्प पर लगाएं और 20–30 मिनट बाद माइल्ड शैम्पू से धो लें।

    मेथी दाना और सरसों तेल
    मेथी बालों के फॉलिकल्स को मजबूत करती है जबकि सरसों का तेल स्कैल्प को पोषण और गर्माहट देता है।
    प्रयोग: रातभर भीगी मेथी पीसकर उसमें सरसों तेल मिलाएं और 1 घंटे तक लगाकर रखें।

    केला और जैतून का तेल

    दोमुंहे और बेजान बालों के लिए यह मास्क बेहद फायदेमंद है। यह बालों की इलास्टिसिटी बढ़ाता है और टूटने से बचाता है।
    कैसे लगाएं: पका केला मैश कर उसमें जैतून का तेल मिलाएं और 20–25 मिनट बाद धो लें।

    जरूरी सलाह
    किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। बेहतर परिणाम के लिए इनमें से किसी एक मास्क का इस्तेमाल हफ्ते में एक बार नियमित रूप से करें।याद रखें सुंदर और मजबूत बालों के लिए धैर्य और प्राकृतिक देखभाल सबसे बड़ा इलाज है।

  • फरवरी में घूमने की परफेक्ट लिस्ट: न ठंड की मार, न गर्मी की तपिश, ये 6 जगहें बना देंगी ट्रिप यादगार

    फरवरी में घूमने की परफेक्ट लिस्ट: न ठंड की मार, न गर्मी की तपिश, ये 6 जगहें बना देंगी ट्रिप यादगार



    नई दिल्ली। अगर भारत में घूमने का सबसे परफेक्ट महीना कोई है, तो वह फरवरी है। इस दौरान सर्दी धीरे-धीरे विदा लेने लगती है, गर्मी आने में अभी समय होता है और मौसम एकदम सुहावना रहता है। यही वजह है कि फरवरी में नॉर्थ से साउथ तक भारत की कई जगहें घूमने के लिए बेस्ट बन जाती हैं। साथ ही इस महीने देशभर में कला, साहित्य, संगीत और संस्कृति से जुड़े बड़े आयोजन भी होते हैं, जो यात्रा को और खास बना देते हैं।
    1. जयपुर – इतिहास और रंगों की रॉयल झलक
    फरवरी में जयपुर की सुबहें हल्की ठंडक लिए होती हैं और दिन धूप से भरे रहते हैं। आमेर किला, सिटी पैलेस, हवा महल और जंतर-मंतर घूमने का यही सबसे अच्छा वक्त है।
    इसी महीने होने वाला जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल और जयपुर आर्ट वीक शहर को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाते हैं। हेरिटेज वॉक, लोक संगीत और हस्तशिल्प जयपुर को एक यादगार अनुभव बना देते हैं।

    2. दिल्ली – इतिहास, संस्कृति और आधुनिकता का संगम
    फरवरी की हल्की ठंड दिल्ली को एक्सप्लोर करने के लिए परफेक्ट बना देती है। लाल किला, कुतुब मीनार, इंडिया गेट और लोधी गार्डन इस मौसम में बेहद खूबसूरत लगते हैं।
    इंडिया आर्ट फेयर, म्यूजियम्स और कैफे कल्चर दिल्ली को सांस्कृतिक रूप से जीवंत बना देते हैं। पुरानी दिल्ली की गलियों में घूमना और स्ट्रीट फूड का मजा लेना फरवरी की खास पहचान है।

    3. अहमदाबाद – विरासत और स्वाद का शहर
    गुजरात का अहमदाबाद फरवरी में घूमने के लिए शानदार है। साबरमती रिवरफ्रंट, ऐतिहासिक पोल्स, बावड़ियां और साबरमती आश्रम शहर की ऐतिहासिक पहचान को दर्शाते हैं।
    उत्तरायण के बाद भी उत्सव का माहौल बना रहता है और उंधियू जैसे पारंपरिक गुजराती व्यंजन स्वाद को यादगार बना देते हैं।

    4. मुंबई – समुद्र, कला और संगीत
    फरवरी में मुंबई की समुद्री हवा मौसम को बेहद खुशनुमा बना देती है। कला घोड़ा आर्ट्स फेस्टिवल और महिंद्रा ब्लूज़ फेस्टिवल शहर को रचनात्मक ऊर्जा से भर देते हैं।
    आर्ट डेको इमारतें, गैलरी, ईरानी कैफे और मरीन ड्राइव की शामें मुंबई को घूमने के लिए खास बनाती हैं।

    5. ओडिशा – संस्कृति और प्रकृति का अनोखा मेल
    फरवरी में ओडिशा का मौसम बेहद सुखद रहता है। कोणार्क डांस एंड म्यूजिक फेस्टिवल सूर्य मंदिर की पृष्ठभूमि में शास्त्रीय नृत्य और संगीत का अद्भुत अनुभव देता है।
    चिलिका झील में हजारों प्रवासी पक्षी दिखाई देते हैं, जो नेचर और फोटोग्राफी लवर्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं।

    6. काजीरंगा – वाइल्डलाइफ का रोमांच
    असम का काजीरंगा नेशनल पार्क फरवरी में घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। यहां सफारी के दौरान एक-सींग वाला गैंडा, हाथी, हिरण और कभी-कभी बाघ भी देखने को मिल जाते हैं।ठंड कम होने के कारण जंगल सफारी आरामदायक और रोमांचक दोनों होती है।
    फरवरी यात्रा के लिए ऐसा महीना है, जहां मौसम, संस्कृति और प्रकृति का परफेक्ट बैलेंस मिलता है। अगर आप सुकून, रोमांस या एडवेंचर की तलाश में हैं, तो ये 6 जगहें आपकी ट्रैवल बकेट लिस्ट में जरूर होनी चाहिए।

  • सर्दियों का ग्लो: त्वचा की डलनेस और झाइयों से छुटकारा, 2-3 हजार खर्च किए बिना पाएं विंटर ग्लो

    सर्दियों का ग्लो: त्वचा की डलनेस और झाइयों से छुटकारा, 2-3 हजार खर्च किए बिना पाएं विंटर ग्लो

    नई दिल्ली। सर्दियां शुरू होने के साथ ही तापमान गिरने लगा है, ऐसे में आपको अपनी त्वचा की देखभाल पर खास ध्यान देने की जरूरत है। ठंडी और शुष्क हवा के कारण सर्दियों में त्वचा का रंग अक्सर डार्क होने लगता है।

    डॉ चांदनी जैन गुप्ता, त्वचा विशेषज्ञ और सौंदर्य चिकित्सक, एलांटिस हेल्थकेयर, लाजपत नगर, नई दिल्ली,के अनुसार, कम तापमान के कारण त्वचा की ऊपरी परत कमजोर हो जाती है और उसमें सूजन आ सकती है, जिसे ‘पोस्ट-इन्फ्लेमेटरी हाइपरपिग्मेंटेशन’ कहते हैं।

    अगर इसे वक्त रहते ठीक ना किया जाए, तो ये जिद्दी झाइयों का भी रूप ले सकते हैं। अगर आप नहीं चाहते कि इस मौसम में आपकी त्वचा का रंग काला हो, तो इस ठंडे सीजन में अपनी त्वचा की देखभाल खास तरीके से करें।
    सर्दियों में त्वचा काली क्यों हो जाती है?
    1. ठंडी और सूखी हवा आपकी त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत को कमजोर कर देती है, जिससे त्वचा को नुकसान पहुंचने और जलन होने की संभावना बढ़ जाती है। इससे स्किन काली भी पड़ सकती है।

    2. ठंडी हवा से त्वचा में जलन होती है और सूजन आ जाती है। इस सूजन से बचने के लिए त्वचा ज्यादा मेलेनिन बनाना शुरू कर देती है, जिसके परिणामस्वरूप काले धब्बे बन जाते हैं। इसी को ‘पोस्ट-इन्फ्लेमेटरी हाइपरपिग्मेंटेशन’ भी कहते हैं।

    3. सर्दियों में स्किन डेड सेल्स को धीरे-धीरे हटाती है। जब ये डेड सेल्स त्वचा की सतह पर जमा हो जाते हैं, तो त्वचा बेजान, रूखी, अनइवेन और डार्क दिखने लगती है।

    4. रूखेपन और जलन के कारण त्वचा में खुजली हो सकती है। खुजलाने की आदत से जलन और बढ़ जाती है, जिससे हाइपरपिग्मेंटेशन की पुरानी समस्याएं और बिगड़ सकती हैं या नई समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं
    त्वचा को रखें मॉइस्चराइज
    अगर सर्दियां शुरू होते ही आपकी भी त्वचा काली दिखने लगी है, तो आपको मॉइस्चराइजिंग का खास ख्याल रखना चाहिए। नियमित रूप से मॉइस्चराइजर लगाएं। अपनी त्वचा को ड्राईनेस से बचाने के लिए, एक अच्छे मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करते रहें। यह आपकी त्वचा को नमी से भरपूर रखेगा और उसकी सेफ्टी लेयर को मजबूत बनाएगा।
    धूप से करें त्वचा की देखभाल
    भले ही सर्दियों में धूप कमजोर लगती हो, फिर भी यूवी किरणें आपकी त्वचा को टैन कर सकती हैं। ये किरणें बादलों वाले दिनों में भी त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं। ये बर्फीले मौसम में भी आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ऐसे में जरूर है कि आप रोजाना स्किन पर एक अच्छी क्वालिटी की सन
    चेहरे को हमेशा ढककर रखें
    सर्दियों के मौसम में चेहरे को शुष्क हवा से बचाकर रखना बहुत ही जरूरी है। यही त्वचा को डार्क बनाती हैं। ऐसे में बाहर निकलने से पहले अपनी त्वचा को ढकें। ठंडी और शुष्क हवा के साथ-साथ धूप से अपने चेहरे की सुरक्षा के लिए टोपी और स्कार्फ का इस्तेमाल करें।

    चेहरे पर ना लगाएं बार-बार हाथ
    अगर आपको अक्सर हाइपरपिग्मेंटेशन की दिक्कत रहती है, तो आपको सर्दियों के मौसम में इससे बचने के लिए चेहरे को खुजलाने से बचना चाहिए। चेहरे पर बार-बार हाथ ना लगाएं। इससे स्किन की डार्कनेस और भी बढ़ सकती है और हाइपरपिग्मेंटेशन की समस्या गंभीर हो सकती है।

    चेहरे पर लगाएं ग्लिसरीन नाइट क्रीम
    सर्दियों में त्वचा के निखार को बनाए रखने के लिए ग्लिसरीन, विटामिन-ई, नारियल तेल और गुलाबजल को मिक्स करके एक मिश्रण तैयार करें। इस मिश्रण को नाइट क्रीम की तरह रोजाना रात को सोने से पहले चेहरे पर लगाएं। इससे चेहरे पर निखार आएगा और कालापन भी दूर होगा।

  • स्वस्थ भोजन और फिर भी मोटापा: इन आदतों को बदलकर रखें फिट और तंदुरुस्त

    स्वस्थ भोजन और फिर भी मोटापा: इन आदतों को बदलकर रखें फिट और तंदुरुस्त

    नई दिल्ली। आज के दौर में युवाएं फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल की तरफ तेजी से बढ़ रही हैं। सोशल मीडिया से लेकर घरों की रसोई तक, हर जगह हेल्दी खाने और व्यायाम की चर्चा होने लगी है। लेकिन इसके बावजूद कई महिलाएं हेल्दी डायट लेने के बावजूद वजन घटने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ता देख रही हैं।

    मेटाबॉलिज्म और पाचन शक्ति का महत्व

    आयुर्वेद के अनुसार शरीर केवल भोजन से नहीं बल्कि ‘अग्नि’ यानी पाचन शक्ति से चलता है। विज्ञान इसे मेटाबॉलिज्म कहता है। अगर यह सिस्टम धीमा या गड़बड़ हो जाए, तो सबसे पौष्टिक खाना भी शरीर में जाकर फैट का रूप ले सकता है। यही कारण है कि हेल्दी खाना और वजन घटाना हमेशा साथ नहीं चलते।

    हेल्दी फूड्स की मात्रा का असर

    एक आम गलतफहमी यह है कि हेल्दी चीजें जितनी चाहें उतनी खाई जा सकती हैं। ड्राई फ्रूट्स, घी, शहद, मूंगफली का मक्खन या एवोकाडो जैसी चीजें पौष्टिक होते हुए भी भारी होती हैं और शरीर को इन्हें पचाने में ज्यादा समय लगता है। कैलोरी की अधिकता होने पर शरीर अतिरिक्त ऊर्जा फैट के रूप में जमा कर देता है।

    छिपी चीनी और प्रोसेस्ड हेल्दी फूड

    आज बाजार में मिलने वाले कई ‘हेल्दी’ प्रोडक्ट भी वजन बढ़ाने में योगदान करते हैं। लो-फैट दही, मल्टीग्रेन बिस्कुट और एनर्जी बार में छिपी शुगर इंसुलिन बढ़ाती है, जिससे शरीर फैट स्टोर करने लगता है। आयुर्वेद में अत्यधिक मीठा कफ दोष बढ़ाने वाला माना गया है।

    हार्मोन और शारीरिक असंतुलन

    कई बार वजन बढ़ने की वजह खाना नहीं बल्कि हार्मोन असंतुलन होता है। थायरॉइड, पीसीओएस या लंबे समय तक तनाव में रहने से मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ता है। आयुर्वेद में इसे दोषों का असंतुलन कहा गया है, खासकर कफ दोष का बढ़ना। ऐसे में शरीर ऊर्जा जलाने के बजाय जमा करने लगता है।

    नींद, मानसिक स्थिति और मांसपेशियों का योगदान

    अधूरी नींद पाचन शक्ति को कमजोर करती है। विज्ञान के अनुसार, कम सोने से भूख बढ़ाने वाला हार्मोन ‘घ्रेलिन’ बढ़ता और पेट भरने वाला हार्मोन ‘लेप्टिन’ घट जाता है। साथ ही उम्र बढ़ने या शारीरिक गतिविधि कम होने से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है क्योंकि मांसपेशियों की कमी से कैलोरी बर्न कम होती है।

    हेल्दी खाने के बावजूद वजन बढ़ना मेटाबॉलिज्म, हार्मोन असंतुलन, नींद और शारीरिक सक्रियता पर निर्भर करता है, इसलिए सिर्फ डायट से परिणाम नहीं मिलते।

  • सोशल मीडिया पर लिया वजन घटाने का उपाय, खाते ही तड़प-तड़प कर हो गई छात्रा की मौत

    सोशल मीडिया पर लिया वजन घटाने का उपाय, खाते ही तड़प-तड़प कर हो गई छात्रा की मौत


    मदुरै । लोग इंटरनेट या सोशल मीडिया पर अक्सर वजन घटाने के लिए उपायों की तलाश करते रहते हैं। हाल ही में यह एक छात्रा की दर्दनाक मौत का कारण बन गया। जानकारी के मुताबिक वजन घटाने के लिए सोशल मीडिया पर एक वीडियो में बताए गए तरीके के अनुसार ‘वेंकारम’ यानी बोरेक्स का सेवन करने के बाद स्नातक की प्रथम वर्ष की एक कॉलेज छात्रा की मौत हो गई है।

    पुलिस ने मंगलवार बताया कि 19 वर्षीय कलैयारसी दिहाड़ी मजदूर वेल मुरुगन (51) और विजयलक्ष्मी की पुत्री थी और नरिमेडु स्थित एक निजी महिला कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी। वह सेलूर के मीनाम्बलपुरम इलाके की कामराज क्रॉस स्ट्रीट में रहती थी।

    पुलिस ने बताया कि वजन कुछ ज्यादा होने के कारण कलैयारसी अक्सर वजन घटाने से जुड़े उपाय तलाशती रहती थी।

    पिछले सप्ताह उसने ‘वजन घटाने और छरहरी काया के लिए वेंकारम’ शीर्षक वाला एक यूट्यूब वीडियो देखा था और 16 जनवरी को कीझामासी स्ट्रीट के थर्मुट्टी इलाके के पास स्थित दवा की एक दुकान से यह पदार्थ खरीदा।

    पुलिस ने बताया कि कलैयारसी ने 17 जनवरी को वीडियो में बताए गए तरीके से इसका सेवन किया, जिसके बाद उसे उल्टी और दस्त होने लगे। उसकी मां उसे मुनिसलाई स्थित एक निजी अस्पताल ले गई, जहां उपचार के बाद उसे घर भेज दिया गया। हालांकि उसी शाम लक्षण दोबारा उभरे और पास के एक अन्य अस्पताल में इलाज के बाद घर लौटने पर उसने तेज पेट दर्द और मल में खून आने की शिकायत की।

    पुलिस के अनुसार रात करीब 11 बजे उल्टी और दस्त की स्थिति गंभीर हो गई जिसके बाद पड़ोसियों की मदद से उसे सरकारी राजाजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। फिलहाल शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया है। सेलूर पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

  • लगातार खांसी बनी जान की दुश्मन? इन आयुर्वेदिक नुस्खों से मिलेगी राहत

    लगातार खांसी बनी जान की दुश्मन? इन आयुर्वेदिक नुस्खों से मिलेगी राहत


    नई दिल्ली। ठंड और सर्द हवाओं के मौसम में खांसी की समस्या सामान्य हो जाती है। हल्की खांसी को अक्सर लोग अनदेखा कर देते हैंलेकिन जब यह लगातार बनी रहती है और छाती में बेचैनीगले में जलन या बलगम का निर्माण होने लगता हैतो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसारसमय रहते इन संकेतों को पहचानकर आयुर्वेदिक और घरेलू उपाय अपनाने से खांसी को नियंत्रित किया जा सकता है और सांस की सेहत मजबूत बनी रहती है।

    खांसी के प्रकार
    भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसारखांसी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है – सूखी खांसी और बलगम वाली खांसी। सूखी खांसी में गले में खुजलीजलन और लगातार खांसी होती है। वहींबलगम वाली खांसी में छाती भारी महसूस होती हैबलगम निकलता है और सीने में दबाव या तकलीफ होती है। दोनों ही प्रकार की खांसी में गले में जलन और सीने की बेचैनी आम संकेत हैं। यदि खांसी कई दिनों तक कम न हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है।

    आयुर्वेदिक नुस्खे और घरेलू उपाय
    आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि सूखी खांसी में मुलेठी या लौंग का एक छोटा टुकड़ा चूसने से गले को तुरंत आराम मिलता है। इसके अलावावासा के पत्तों का काढ़ा पीना या इसका पाउडर लेना कफ को कम करने में मदद करता है। सोने से पहले हल्दी मिलाकर गर्म दूध पीना गले की जलन और खांसी में राहत देता है।बलगम वाली खांसी या सामान्य खांसी के लिए गुनगुने अदरक का काढ़ाअदरक-तुलसी का काढ़ा शहद के साथ लेने से कफ पतला होकर बाहर निकलता है। इसके अलावागर्म पानी में नमक डालकर गरारा करना और भाप लेना भी गले और छाती की जलन को कम करता है। लौंगअदरक और इलायची को मिलाकर पाउडर या काढ़ा के रूप में इस्तेमाल करना भी खांसी में आराम देता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि ये आयुर्वेदिक नुस्खे प्राकृतिक और सुरक्षित हैं। इन उपायों को संतुलित आहारपर्याप्त पानी और पर्याप्त आराम के साथ अपनाने से खांसी में तेजी से सुधार होता है। नियमित रूप से इन नुस्खों का पालन करने से न केवल खांसी नियंत्रित रहती हैबल्कि सांस की सेहत भी मजबूत बनती है।हालांकियदि खांसी के साथ सांस फूलनाबुखारलगातार कमजोरी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देंतो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। शुरुआती चरण में अपनाए गए आयुर्वेदिक नुस्खे समय पर राहत देने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं।

  • रोज़ाना करें पूर्ण भुजंगासन, मजबूत होगी रीढ़ और बदन दर्द से मिलेगी स्थायी राहत

    रोज़ाना करें पूर्ण भुजंगासन, मजबूत होगी रीढ़ और बदन दर्द से मिलेगी स्थायी राहत

    नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली लंबे समय तक बैठकर काम करना और शारीरिक गतिविधियों की कमी आज बदन दर्द और रीढ़ से जुड़ी समस्याओं का बड़ा कारण बन चुकी है। ऐसे समय में योग न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी संतुलित रखने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। योग विशेषज्ञ रोज़ाना कुछ खास आसनों को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देते हैं जिनमें पूर्ण भुजंगासन का विशेष स्थान है।मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार पूर्ण भुजंगासन भुजंगासन का उन्नत और गहन रूप है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूती और लचीलापन देने के साथ-साथ पीठ कंधों और गर्दन की जकड़न को दूर करने में सहायक होता है। इसके नियमित अभ्यास से छाती खुलती है जिससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और सांस लेने में आसानी होती है।

    पूर्ण भुजंगासन कैसे करें
    योग विशेषज्ञों के अनुसार इस आसन का अभ्यास बेहद सावधानी और सही तकनीक के साथ करना चाहिए। इसे करने के लिए सबसे पहले पेट के बल ज़मीन पर लेट जाएं। दोनों हथेलियों को कंधों के पास रखें और पैर सीधे रखें। अब गहरी सांस लेते हुए धीरे-धीरे छाती गर्दन और सिर को ऊपर उठाएं। कोहनियों को थोड़ा मोड़ें और कंधों को पीछे की ओर खींचें। इसके बाद घुटनों को मोड़ते हुए पैरों के पंजे ऊपर उठाएं और सिर-गर्दन को पीछे की ओर तानें। कोशिश करें कि पैरों के पंजे सिर को छू सकें।इस मुद्रा में बिना किसी दबाव के जितनी देर आराम से रह सकें उतनी देर रुकें। फिर सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे वापस नीचे आएं और शवासन की स्थिति में लेटकर शरीर को पूरी तरह शिथिल करें। गहरी सांस लें और हृदय गति को सामान्य होने दें।

    पूर्ण भुजंगासन के प्रमुख फायदे

    नियमित रूप से पूर्ण भुजंगासन करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत और लचीली बनती है। यह आसन पाचन तंत्र को बेहतर करता है और थायरॉइड ग्रंथि को सक्रिय करने में मदद करता है। इसके अलावा यह तनाव और चिंता को कम करने में सहायक माना जाता है। खासतौर पर जो लोग लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं या जिन्हें कमर और पीठ दर्द की शिकायत रहती है उनके लिए यह आसन बेहद लाभकारी हो सकता है।

    कब न करें यह आसन

    हालांकि पूर्ण भुजंगासन बेहद लाभकारी है लेकिन कुछ स्थितियों में इससे बचना चाहिए। गर्भवती महिलाएं गंभीर पीठ दर्द से पीड़ित लोग उच्च रक्तचाप हर्निया या हाल ही में सर्जरी कराने वाले व्यक्तियों को यह आसन नहीं करना चाहिए।

    शुरुआत में रखें ये सावधानियां

    शुरुआती दिनों में इस आसन को धीरे-धीरे सीखना चाहिए और किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में अभ्यास करना सबसे बेहतर रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि योग में धैर्य और नियमितता सबसे अहम होती है। पूर्ण भुजंगासन जैसे उन्नत आसन शरीर की क्षमता बढ़ाते हैं लेकिन गलत तरीके से करने पर चोट का खतरा भी हो सकता है।नियमित अभ्यास सही तकनीक और सावधानी के साथ किया गया पूर्ण भुजंगासन न सिर्फ रीढ़ को मजबूत बनाता है बल्कि बदन दर्द से राहत दिलाकर जीवन को अधिक सक्रिय और ऊर्जावान बना सकता है।

  • Basant Panchami 2026: वसंत पंचमी पर क्यों पहनते हैं पीले कपड़े? जानिए इस रंग से जुड़े धार्मिक और प्राकृतिक रहस्य

    Basant Panchami 2026: वसंत पंचमी पर क्यों पहनते हैं पीले कपड़े? जानिए इस रंग से जुड़े धार्मिक और प्राकृतिक रहस्य


    नई दिल्ली । भारत में ज्ञान, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती की आराधना का पावन पर्व वसंत पंचमी वर्ष 2026 में 23 जनवरी को मनाया जाएगा। यह दिन न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से विशेष होता है, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और रंगों से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। वसंत पंचमी आते ही चारों ओर एक ही रंग की छटा दिखाई देती है—पीला। मंदिरों से लेकर घरों तक, वस्त्रों से लेकर भोग तक, हर जगह पीले रंग का विशेष महत्व नजर आता है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर वसंत पंचमी के दिन पीले रंग को ही इतना खास क्यों माना जाता है? इसके पीछे कई धार्मिक, प्राकृतिक और वैज्ञानिक कारण छिपे हुए हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीला रंग मां सरस्वती को अत्यंत प्रिय है। मां सरस्वती को विद्या, बुद्धि, विवेक और सृजनात्मकता की देवी माना जाता है। हिंदू धर्म में पीला रंग सात्विकता, पवित्रता और ज्ञान का प्रतीक है। यही कारण है कि वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती को पीले वस्त्र अर्पित किए जाते हैं, पीले फूलों से पूजा की जाती है और केसरिया भात, बूंदी या पीली मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन पीले वस्त्र धारण कर पूजा करने से ज्ञान, बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

    वसंत पंचमी का संबंध केवल धार्मिक आस्था से ही नहीं, बल्कि प्रकृति के बदलाव से भी है। यह पर्व शीत ऋतु के अंत और वसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है। कड़ाके की ठंड के बाद जब सूर्य की किरणें तेज और सुनहरी होने लगती हैं, तब धरती पर नई ऊर्जा का संचार होता है। इसी समय खेतों में सरसों की फसल लहलहाने लगती है और चारों ओर पीले फूलों की बहार दिखाई देती है। प्रकृति स्वयं पीले रंग की चादर ओढ़ लेती है, जो समृद्धि, उर्वरता और नई शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है।

    पीला रंग मनोवैज्ञानिक रूप से भी बेहद सकारात्मक माना जाता है। यह रंग मन में प्रसन्नता, आशा और उत्साह का संचार करता है। वसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र पहनने से मानसिक ऊर्जा बढ़ती है और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है। यही कारण है कि इस दिन बच्चों की शिक्षा की शुरुआत, विद्यारंभ संस्कार और कला-संगीत से जुड़े कार्यों को शुभ माना जाता है।

    इसके अलावा, ज्योतिष शास्त्र में पीले रंग का संबंध बृहस्पति ग्रह से भी माना गया है, जो ज्ञान, धर्म और शुभ फल प्रदान करने वाला ग्रह है। वसंत पंचमी पर पीला रंग धारण करना बृहस्पति की कृपा पाने का भी एक माध्यम माना जाता है। इस तरह वसंत पंचमी पर पीले रंग का महत्व केवल परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धर्म, प्रकृति, मनोविज्ञान और ज्योतिष चारों का सुंदर संगम है। यही कारण है कि इस दिन पीले रंग में रंगकर लोग ज्ञान, समृद्धि और सकारात्मकता का स्वागत करते हैं।