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  • गर्मियों में एलोवेरा जूस का कमाल: ठंडक, ग्लोइंग स्किन और डिटॉक्स का आसान उपाय

    गर्मियों में एलोवेरा जूस का कमाल: ठंडक, ग्लोइंग स्किन और डिटॉक्स का आसान उपाय


    नई दिल्ली गर्मी का मौसम शुरू हो गया है जिससे शरीर में थकान, थकान और त्वचा से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। ऐसे में प्राकृतिक संरचनाओं की संरचना और वृद्धि होती है। एलोवेरा समुद्र में शरीर को ठंडक देने और अंदर से रखने का एक प्रभावशाली तरीका माना जाता है।

    आयुष मंत्रालय सेवन की सलाह भी देता है

    आयुष मंत्रालय ने भी गर्मियों में एलोवेरा साबुत खाद्य पदार्थों का सेवन को महत्व दिया है। एलोवेरा, जिसे घृतकुमारी भी कहा जाता है, अपने शीतल और औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। इसके शरीर को ठंडा रखने से मदद मिलती है और गर्मी का प्रभाव कम होता है।

    शरीर को ठंडक और ऊर्जा मिलती है

    गर्मी में शरीर का तापमान बढ़ता है, जिससे चक्कर आना, मोटापा और थकान जैसी समस्याएं होती हैं। एलोवेरा का नियमित सेवन शरीर को अंदर से ठंडक देता है और ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है।

    त्वचा का निर्माण ग्लोइंग है

    गर्मियों में त्वचा रूखी, तैलीय या मुँहासों से प्रभावित हो सकती है। एलोवेरा कंपनी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को पोषण देते हैं और उसे चमकदार बनाते हैं। यह दाग-धब्बों और पिंपल्स को कम करने में भी सहायक होता है।

    पाचन तंत्र के लिए हानिकारक

    गर्मी में कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। एलोवेरा पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और पेट को साफ रखने में मदद करता है। यह शरीर से टॉक्सिन निकालने में भी सहायक होता है।

    शरीर को स्टॉक किया गया है

    पौष्टिक आहार के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है। एलोवेरा साबुत शरीर को रेफ्रिजरेटर में रखा जाता है और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।

    इम्युनिटी मजबूत होती है

    एलोवेरा में विटामिन, एंटीऑक्सिडेंट्स और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं। इससे समरलैण्ड में होने वाली बेरोजगारी से मुक्ति होती है।

    ऐसे करें सेवन

    फ्रेशलोव एलेरा के जेल में उसे पानी में पकड़ा गया। स्वाद के लिए इसमें नींबू का रस, शहद या काला नमक मिलाया जा सकता है। सुबह खाली पेट इसका सेवन सबसे ज्यादा हानिकारक माना जाता है। बाजार में मिलने वाले फलों की जगह ताजा और बिना चीनी वाला भोजन बेहतर होता है।

    आवश्यक सावधानी

    हालाँकि एलोवेरा साबूत बढ़िया है, लेकिन हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं है। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और किसी भी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को इसका सेवन डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए।

  • इम्युनिटी बढ़ाने के 5 आसान तरीके, रोज अपनाएं और रहें स्वस्थ

    इम्युनिटी बढ़ाने के 5 आसान तरीके, रोज अपनाएं और रहें स्वस्थ


    नई दिल्ली मौसमी मौसम में गर्मी और शुरुआत के साथ बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में आपके रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी को मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी है। आयुर्वेद के अनुसार हर व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता अलग-अलग होती है, इसलिए इसे बढ़ाने के लिए कुछ आसान से उपाय अपनाना चाहिए।

    भारत सरकार का आयुष मंत्रालय इम्युनिटी बढ़ाने के लिए पांच आसान और प्रभावी सलाह देता है, जिसके अनुसार प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए इन पांच इम्यूनिटी को मजबूत बनाया जा सकता है।

    पाठ्यपुस्तक के अनुसार इन पांच प्रयोगों में समानता से न सिर्फ रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है बल्कि स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। ये सुझाव कोई भी उम्र के लोग आसानी से अपना सकते हैं। विशेषज्ञ के अनुसार इन प्रयोगों को लंबे समय तक जारी रखने से बीमारियां कम होती हैं और शरीर स्वस्थ और ऊर्जावान रहता है।

    गहरी नींद लेना : अच्छी और गहरी नींद रोग प्रतिरोधक क्षमता का आधार है। रात में कम से कम 7 से 8 घंटे की मीठी नींद लेनी चाहिए। नींद पूरी न होने से शरीर का रक्षा तंत्र ख़राब हो जाता है। सोने से पहले मोबाइल और टीवी से दूर रहें और रात का खाना देखें।

    अच्छा और प्रोफेशनल: बिजनेसमैन और प्लास्टिक आहार इम्युनिटी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। साधारण फल, हरे पत्तेदार मसाला, दालें, अनाज और मेवे रोजमर्रा। आयुर्वेद में हल्दी दूध, अदरक, तुलसी, मिलावट और गिलोय जैसे घरेलू नुस्खों को इम्युनिटी बूस्टर माना जाता है। जंक फूड और अधिकांश ताला-भुना भोजन से जिम्मेदारी लें।

    व्यायाम करें : नियमित व्यायाम या योगासन से शरीर मजबूत होता है और प्रतिरक्षा प्रणाली सक्रिय रहती है। प्रतिदिन 30 से 45 मिनट व्यायाम, योग, प्राणायाम या व्यायाम करें। व्यायाम से रक्त संचार अच्छा होता है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ जाता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए फायदेमंद होता है।

    तनाव का प्रबंधन करें: तनाव लगातार प्रतिरक्षा को ख़राब करता है। ध्यान, प्राणायाम, संगीत सिद्धांत या हॉबी रखें तनाव कम करने के अच्छे तरीके। आयुर्वेद में तनाव मुक्त जीवन को स्वस्थ जीवन का आधार माना गया है।

    क्लिनिकल लाइव: शरीर में पानी की कमी से रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। समरस्लैम में एक दिन में पर्याप्त पानी सुनिश्चित करना जरूरी है। साथ ही पानी, छाछ, नारियल पानी या प्लांट टी जैसे प्राकृतिक पेय पदार्थ। साबुत पानी शरीर के टॉक्सिन को बाहर निकालने और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है।

  • परवल का कमाल: गर्मी में ठंडक और सेहत दोनों के लिए फायदेमंद

    परवल का कमाल: गर्मी में ठंडक और सेहत दोनों के लिए फायदेमंद


    नई दिल्ली। कर्मचारियों के मौसम में सही बदलाव बेहद जरूरी हो जाता है, क्योंकि इस समय पाचन से जुड़े विकार जैसे कब्ज, गैस और गैस आम हो जाते हैं। ऐसे में परवल में एक बेहतरीन विकल्प के रूप में सामने आया है। पोषक तत्वों से भरपूर यह सब्जी न केवल पेट को मापती  है, बल्कि शरीर को कई तरह के स्वास्थ्य लाभ भी देती है।

    पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है

    परवल में प्रचुर मात्रा पाई जाती है, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाती है। नियमित उपभोग से उपभोग और गैस जारीकर्ताओं से राहत मिलती है। यह पेट को साफ रखने में मदद करता है और गर्मियों में होने वाली अपच की परेशानी को दूर करता है।

    ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने वाले चिकित्सक

    परवल में मौजूद पोषक तत्व ब्लड शुगर लेवल को स्टॉक में बनाए रखने में सहायक होते हैं। यही कारण है कि अमेरिकियों के लिए इसे खतरनाक माना जाता है। इसके अलावा यह ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है, जिससे दिल की सेहत बेहतर बनी रहती है।

    शरीर को डिटॉक्स करना पड़ता है

    परवल में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। यह खून को शुद्ध करता है और शरीर को अंदर से साफ रखने में सहायक होता है।

    त्वचा और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए बढ़िया

    गर्मियों में त्वचा से जुड़ी चीजें बढ़ती रहती हैं, लेकिन परवल का सेवन त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा में नयापन लाते हैं। साथ ही, यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी को भी मजबूत करता है।

    वजन में सहायक

    कम कैलोरी और अधिक मात्रा में मोटापा कम करने वालों के लिए भी अच्छा विकल्प है। यह लंबे समय तक पेट भरने का एहसास कराता है, जिससे ज्यादातर खाने की आदतों पर नियंत्रण रहता है।

    आयुर्वेद में ये भी खास जरूरी

    आयुर्वेद में परवल को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। यह कफ और पित्त दोष को बनाए रखने में मदद करता है। प्राचीन ग्रंथों में इसका उपयोग पीलिया सहित कई दुकानदारों के इलाज के बारे में बताया गया है।

    कई प्रवेशार्थी से कर सकते हैं सेवन

    परवल को अलग-अलग सम्मिलित रूप से सम्मिलित किया जा सकता है। इसे सब्जी, भुजिया, चोखा, सूप, अचार या मिठाई के रूप में खाया जा सकता है. समरसाइल में फ्लैक्स बैकपैक या सब्जी बनी हुई परवल की सब्जी सबसे अच्छी मानी जाती है।

    ध्यान रखने योग्य बातें

    हालाँकि परवल जादुई है, लेकिन हर व्यक्ति के शरीर की प्रकृति अलग होती है। इसलिए कुछ लोगों को इसका सेवन से लेकर जिम्मेदारी निभानी चाहिए। बेहतर होगा कि इसे नियमित आहार में शामिल करने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लें।

  • भूख नहीं लगती या अपच परेशान कर रहा है? दही के साथ भूना जीरा खाएं, मिलेगा राहत

    भूख नहीं लगती या अपच परेशान कर रहा है? दही के साथ भूना जीरा खाएं, मिलेगा राहत


    नई। दिल्ली की कंपनियों में बार-बार भूख न लगना, पेट फूलना, अपच और कमजोरी जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में घरेलू नुस्खों में दही और अन्य जीरा का पाचन के लिए मिश्रण बेहद खतरनाक माना जाता है। आयुर्वेद में पाचन शक्ति बढ़ाने वाला रामबाण इलाज बताया गया है।

    दही और जीरे का अनोखा संयोजन

    दही प्राकृतिक रूप से ठंडक देने वाला और प्रोबायोटिक्स से भरपूर होता है, जबकि जीरा पाचन शक्ति को बढ़ाता है और गैस की समस्या को दूर करने में बेहद प्रभावशाली होता है। दोनों को भोजन में गर्मी होने वाली पेट एसोसिएटेड अधिकांश सहयोगियों से राहत मिलती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, दही और भुने जीरे का सेवन न केवल पेट को स्वस्थ रखता है, बल्कि पूरे दिन टैरोताजा और ऊर्जा से परिपूर्णता का अनुभव करने में भी मदद करता है। यह मिक्स कंपनी और केमिकल वाले ड्रिंक्स का प्राकृतिक विकल्प है।

    अपच और गैस की समस्या से राहत

    इसके अलावा पेट की गैस, ब्लोटिंग और अपच को दूर करने में भी मदद मिलती है। दही के साथ सेवन से यह असर करता है और बढ़ता है। नियमित सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है और भोजन आसानी से पचता है। गर्मियों में बार-बार भूख नहीं लगती, लेकिन इसके विपरीत जीरा भूख बढ़ाने में सहायक है। दही के साथ इसका सेवन भूख बढ़ाने के तरीके से बेहतर है और भोजन का स्वाद भी बेहतर है।

    मेटाबोलिज्म और इम्यूनिटी में मदद

    जीरा मेटाबोलिज्म को पुनर्प्राप्त किया जाता है, जिससे केट्री बर्निंग तेजी से होती है और वजन नियंत्रण में मदद मिलती है। इसके अलावा दही और जीरे में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन समर में सूखे से प्रभावित इमिअम सिस्टम को मजबूत बनाया गया है।

    इससे क्लॉथ-जुकाम और छाती की जिल्दनी जैसे प्रोटोटाइप से डिफ्रेंस भी होता है। दही शरीर को ठंडक देता है, जबकि जीरा पोटेशियम के साथ-साथ खनिज पदार्थों का उत्पादन करता है, जिससे मधुमेह की समस्या कम होती है।

    सेवन का उपाय

    इसे बनाने के लिए:-

    एक छोटे आकार के भुने जीरे को अच्छी तरह पीस लें।
    एक कप दही में पूरे स्वाद वाला काला नमक डाला हुआ।
    सुबह के भोजन के साथ या दोपहर के भोजन के बाद इसका सेवन करें।
    गर्मियों में एक बार का सेवन बेहद जादुई रहता है।

    विशेषज्ञ की सलाह

    विशेषज्ञ के अनुसार, यह मिश्रण न केवल पाचन सुधार करता है, बल्कि गर्मी से होने वाली थकान और कमजोरी को भी दूर करता है। हालाँकि, जिन लोगों को जीरा से एलर्जी हो या कोई गंभीर बीमारी हो, उन्हें डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका सेवन करना चाहिए। वहीं, किसी भी बच्चे के लिए दही का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

  • बाल झड़ना से हो रही हैं परेशान, बस सप्ताह में 2 बार करें ये काम

    बाल झड़ना से हो रही हैं परेशान, बस सप्ताह में 2 बार करें ये काम


    नई दिल्ली हेयर फॉल (बाल झड़ना) आजकल की आम समस्या बन गई है, देखिए उनके साथ ऐसा हो रहा है। अगर आप भी चिंतित हैं और अपने बालों को मजबूत और शानदार दिखने की चाहत रखते हैं तो ये ट्रिक अपनाएं। ताकि आप बाल झड़ने की समस्या से दूर रहें।

    बाल झड़ने का मुख्य कारण
    सबसे पहले, बालों के झड़ने के मुख्य लक्षणों की बात करें तो इसमें खान-पान, तनाव, बालों में बदलाव, प्रदूषण और गलत बालों की देखभाल की दिनचर्या शामिल हैं। शरीर में पोषक तत्वों की कमी, विशेष रूप से आयरन, प्रोटीन और विटामिन की कमी, बालों को कमज़ोर बना देती है। इसके अलावा ज्यादातर केमिकल वाले शैंपू और हेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल भी बालों को नुकसान पहुंचाता है।

    बालों के लिए तेल बनाने वाला
    क्या आप अपने बालों को लंबा, घना और मजबूत बनाना चाहते हैं? अगर हां, तो तेल लगाने की आदत को अपनाना शुरू कर दें। एक सप्ताह में 2 बार तेल जरूर लगाएं। बेहतर परिणाम पाने के लिए रात में तेल लगाएं और रात भर तेल में बने रहें।

    तेल लगाने से आपके बालों के स्वास्थ्य में काफी हद तक सुधार हो सकता है। बालों की जड़ों को मजबूत बनाने के लिए ये आदतें अपनाई जा सकती हैं। बालों में मौजूद पोषण की कमी, रूखापन, डैंड्रफ जैसे प्रश्नों से बचने के लिए तेल की सलाह दी जाती है।

    स्वस्थ स्वस्थ बालों के लिए ये जरूरी
    इसके अलावा, बालों को बहुत ज्यादा हीट (जैसे स्ट्रेटनर, स्पेशलिटी) से बचाया जाता है, क्योंकि इससे बालों को नुकसान पहुंचता है। बेकार बालों में चॉकलेट खाने से भी बचना चाहिए। तनाव को कम करने के लिए योग और ध्यान (मेडिटेशन) अपनाएं। रोजाना 7-8 घंटे की नींद लेना बहुत जरूरी है।

    इस तरह सही खान-पान, अच्छी देखभाल और स्वस्थ स्वभाव अपनाकर आप बालों के झड़ने की समस्या को काफी हद तक कम कर सकते हैं और अपने बालों को मजबूत, घना और स्वस्थ बना सकते हैं।

  • गर्मी में क्यों जरूरी है सौंफ का सेवन? जानिए इसके जबरदस्त फायदे

    गर्मी में क्यों जरूरी है सौंफ का सेवन? जानिए इसके जबरदस्त फायदे


    नई दिल्ली गर्मी के मौसम में पेट से जुड़ी चुनौतियां जैसे गैस, अपच, एसिडिटी और सूजन तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में हर छोटी परेशानी के लिए दवा लेना जरूरी नहीं है। आपके नुस्खे में मौजूद है एक ऐसा आसान और असरदार घरेलू उपाय, जो शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ-साथ पाचन को भी ठीक करता है।

    आयुर्वेद में सौंफ का खास महत्व
    आयुर्वेद के अनुसार सौंफ पित्त दोष को स्नातक करने में मदद मिलती है। गर्मियों में शरीर में गर्माहट को शांत करने के लिए रोजाना सौंफ का सेवन बेहद माना जाता है। यह शरीर को अंदर से ठंडी बना देता है और पेट से जुड़ी समस्याओं को जड़ से कम कर देता है।

    पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है
    खाने के बाद एक खाद्य पदार्थ सौंफ चबाने से पाचन क्रिया बेहतर होती है। यह पेट में बनने वाली गैस और ब्लोटिंग को कम करती है। अगर भारीपन या अपच की समस्या बनी हुई है, तो आपको तुरंत राहत का काम करना है। विशेष रूप से समरलैण्ड में जब एनीमेशन का प्रदर्शन होता है, तब सौंफ अत्यंत घटिया साबित होता है।

    सौंफ की चाय से सरकारी राहत
    सौंफ की चाय समुद्र तट में एक बेहतरीन स्वास्थ्य पेय है। यह सिर्फ पेट की गर्मी को कम नहीं करता है, बल्कि शरीर को रिलेक्स भी करता है। ऑफिस की थकान या होटल के दौरान होने वाली संकट में भी सौंफ की चाय काफी मजेदार होती है। इसका प्रभाव मीठा स्वाद और भी खास है।

    एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-एकांत गुणधर्म से परिपूर्णता
    सौंफ में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-सटीक गुण शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं। यह कोष्ठबद्धता, पेट दर्द और ज़ाहिलों की समस्याओं को दूर करने में सहायक है। साथ ही यह इंटरनेट सिस्टम को भी मजबूत बनाता है।

    सौंफ का सेवन कैसे करें?
    सौंफ़ का सेवन कई लाभार्थियों से किया जा सकता है-

    भोजन के बाद सौंफ चौबएं
    सौंफ का पानी पीएं
    सौंफ की चाय छोड़ें
    सौंफ और मिश्री के साथ लें

    की चाय बनाने के लिए एक कप पानी में एक परिमाण सौंफ वाल्व 5-10 मिनट के लिए और फिर गुडकर पी लें।

    सावधानी भी जरूरी है
    हालाँकि सौंफ स्वादिष्ट है, लेकिन इसके अधिक मात्रा में सेवन से नुकसान भी हो सकता है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।

    गर्मियों में रोजमर्रा की जिंदगी में थोड़ी-सी सौंफ का सेवन करने से आप पेट की समस्याओं से बचकर शरीर को ठंडा और स्वस्थ बना सकते हैं। यह एक सस्ता, आसान और असरदार घरेलू उपाय है, जिसे अपने में शामिल करना जरूरी है।

  • ‘मटका’ का कमाल: गर्मियों में सेहत के लिए क्यों है मिट्टी के बर्तन वरदान

    ‘मटका’ का कमाल: गर्मियों में सेहत के लिए क्यों है मिट्टी के बर्तन वरदान


    नई दिल्ली तेज गर्मी, लू और उमस के बीच ठंडा पानी हर किसी की ज़रूरत बन जाता है। ज़्यादातर लोग राहत के लिए फ्रिज का पानी पीते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि यह आदत कई बार गले और पाचन से जुड़ी समस्याएं बढ़ा सकती है। ऐसे में पारंपरिक तरीका यानी मिट्टी के मटके का पानी आज भी सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है। न सिर्फ़ यह पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है, बल्कि शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद भी साबित होता है।

    प्राकृतिक ठंडक के साथ बेहतर स्वाद
    मिट्टी के बर्तन में रखा पानी बिना किसी बिजली या केमिकल के अपने आप ठंडा हो जाता है। इसकी खासियत यह है कि यह ज़रूरत से ज़्यादा ठंडा नहीं होता, जिससे गले पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता। साथ ही, इसमें मिट्टी की हल्की खुशबू और स्वाद होता है, जो इसे और भी ताजगी भरा बनाता है।

    आयुर्वेद और विज्ञान दोनों का समर्थन
    आयुष मंत्रालय के अनुसार पारंपरिक बर्तनों में रखा पानी शरीर के लिए ज़्यादा फायदेमंद होता है। आयुर्वेद में मटके के पानी को ‘अमृत’ के समान बताया गया है, क्योंकि यह शरीर को अंदर से ठंडा रखते हुए पाचन तंत्र को संतुलित करता है। आधुनिक डॉक्टर भी मानते हैं कि यह पानी गले, पेट और आंतों के लिए सुरक्षित और लाभकारी है।

    डिटॉक्स और इम्यूनिटी में अधिकतम
    मिट्टी के घड़े की सबसे बड़ी खासियत इसकी प्राकृतिक फिल्टरिंग क्षमता है। यह पानी की विकृतियों को सोख लेता है, जिससे शरीर में विषैले तत्वों का असर कम होता है। नियमित रूप से मटके का पानी पीने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और शरीर की बीमारियों से लड़ने के लिए तैयार रहता है।

    पाचन और पीएच बैलेंस में सुधार
    मिट्टी में मौजूद फास्फोरस गुण (क्षारीय गुण) पानी के पीएच लेवल को संतुलित रखने में मदद करते हैं। इससे एसिडिटी, गैस और अपच जैसी समस्याएं कम होती हैं। यही कारण है कि गर्मियों में मटके का पानी पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

    फ्रिज के पानी से क्यों बेहतर?

    फ्रिज का बहुत ठंडा पानी अचानक शरीर के तापमान को प्रभावित करता है, जिससे गले में खराश, सर्दी-जुकाम या पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके उलट, मटके का पानी शरीर के अनुकूल तापमान पर होता है, जिससे यह बिना किसी साइड इफेक्ट के राहत देता है।

    सस्ता, सुरक्षित और असरदार उपाय
    महंगे कूलिंग सिस्टम और फिल्टर के मुकाबले मटका एक सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प है। इसमें रखा पानी पूरी तरह प्राकृतिक और केमिकल मुक्त होता है। गर्मियों में हाइड्रेट रहने के लिए यह सबसे आसान और भरोसेमंद तरीका माना जाता है।

  • गर्मियों में होंठ फट रहे हैं? जानें 5 कारण और घर बैठे सॉफ्ट लिप्स पाने के उपाय..

    गर्मियों में होंठ फट रहे हैं? जानें 5 कारण और घर बैठे सॉफ्ट लिप्स पाने के उपाय..


    नई दिल्ली: गर्मियों का मौसम शुरू होते ही कई लोगों को होंठ फटने और ड्राई होने की समस्या होने लगती है, अक्सर इसे लोग केवल ठंड से जोड़कर देखते हैं, लेकिन दरअसल ये किसी भी मौसम में हो सकती है, होंठ की स्किन बहुत सेंसिटिव होती है और इसमें ऑयल ग्लैंड्स नहीं होते, इसलिए यह मॉइश्चराइज नहीं रह पाती, तेज धूप, गर्म या शुष्क हवा में लिप्स डैमेज होने लगते हैं, अगर आपके होंठ भी गर्मी में ड्राई हो रहे हैं या फट रहे हैं, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसके कारणों को समझना और समय रहते उपाय करना बेहद जरूरी है

    सबसे आम कारण डिहाइड्रेशन है, यदि आप पर्याप्त पानी नहीं पी रहे हैं, तो लिप्स सूखने लगते हैं, इसके अलावा विटामिन की कमी भी फटे होंठों का कारण बन सकती है, खासकर विटामिन बी9, बी2, बी6 और बी12, अगर शरीर में इनका लेवल कम हो तो होंठ जल्दी फटते हैं, वहीं थायरॉइड की समस्या होने पर भी लिप्स फटने लगते हैं, लगातार ड्राई लिप्स या फटने की समस्या हो तो थायरॉइड चेकअप कराना जरूरी है, इसी तरह आयरन की कमी से भी होंठ फट सकते हैं, आमतौर पर लोग इसे थकान और कमजोरी से जोड़ देते हैं, लेकिन ध्यान दें कि फटे होंठ भी एक संकेत हो सकते हैं

    इसके अलावा एलर्जी या इंफेक्शन की वजह से भी होंठ फट सकते हैं, इस स्थिति में पपड़ी जमना, जलन या दर्द जैसी समस्याएं भी दिखाई देती हैं, ऐसे में होंठों की सही देखभाल और नेचुरल उपाय अपनाना बेहद जरूरी है, सबसे पहला और जरूरी उपाय है पर्याप्त पानी पीना, गर्मियों में पसीना और उच्च तापमान के कारण शरीर में पानी की मात्रा तेजी से घटती है, इसलिए दिनभर नियमित रूप से पानी पीते रहें

    इसके बाद लिप्स को हफ्ते में एक से दो बार एक्सफोलिएट करना चाहिए, इससे डेड स्किन निकल जाती है और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, इसके लिए एक चम्मच चीनी को शहद में मिलाकर लिप्स पर 1-2 मिनट तक हल्के हाथों से रगड़ें, इसके बाद नारियल तेल से मसाज करें, नारियल तेल में नेचुरल औषधीय गुण होते हैं, जो होंठों को मॉइश्चराइज और सॉफ्ट बनाते हैं, रोजाना मसाज करना फटे होंठों को जल्दी ठीक करता है

    अगर लिप बाम या पेट्रोलियम जेली पर्याप्त असर नहीं कर रहे हैं, तो एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करें, इसे सीधे या नारियल तेल के साथ मिलाकर होंठों पर लगा सकते हैं, खासकर रात में सोने से पहले लगाने पर यह बेहद फायदेमंद होता है, एलोवेरा होंठों को गहराई से मॉइश्चराइज करता है और उन्हें सॉफ्ट और हेल्दी बनाए रखता है

    गर्मी में फटे और ड्राई होंठ आम समस्या हैं, लेकिन सही देखभाल, पर्याप्त पानी पीना, एक्सफोलिएशन, नारियल तेल और एलोवेरा जेल जैसे प्राकृतिक उपाय अपनाकर आप होंठों को सॉफ्ट और स्वस्थ बनाए रख सकते हैं, इससे न केवल दिखने में सुधार होगा बल्कि होंठों की संवेदनशील स्किन भी सुरक्षित रहेगी

  • गले की खराश से मुंह के छाले तक, इलायची बनाएं गर्मियों का दोस्त…

    गले की खराश से मुंह के छाले तक, इलायची बनाएं गर्मियों का दोस्त…


    नई दिल्ली:  गर्मियों का मौसम शुरू होते ही पेट, गला और मुंह की कई छोटी-बड़ी समस्याएं आम हो जाती हैं ऐसे में भारतीय रसोई में मौजूद छोटी सी इलायची सेहत के लिए रामबाण साबित हो सकती है आयुर्वेद में इलायची को औषधीय गुणों का खजाना माना जाता है यह न सिर्फ खाने का स्वाद और खुशबू बढ़ाती है बल्कि गर्मी से होने वाली परेशानियों से भी राहत देती है

    गर्मियों में अपच, एसिडिटी और मुंह के छालों की समस्या बढ़ जाती है खाने के बाद एक इलायची चबाने से पेट की हाइपर एसिडिटी कंट्रोल हो जाती है खट्टी डकारें, सीने में जलन और भारीपन जैसी शिकायतें कम होती हैं। गले में खराश, खांसी या आवाज बैठ जाना आम है ऐसे में 1-2 इलायची धीरे-धीरे चबाकर उसका रस गले से नीचे जाने दें कुछ ही देर में गले को आराम महसूस होगा

    मुंह के छालों में इलायची को मिश्री के साथ चबाने से जलन और दर्द कम होता है और छाले जल्दी ठीक हो जाते हैं इलायची हिचकी रोकने में भी मददगार है एक इलायची चबाने या इसका पाउडर पानी के साथ लेने से हिचकी तुरंत बंद हो जाती है। इसके अलावा इलायची मुंह के बैक्टीरिया और संक्रमण को भी दूर करती है। रोज भोजन के बाद इलायची चबाने से मुंह से दुर्गंध नहीं आती और दांत स्वस्थ रहते हैं

    इलायची में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण मौजूद हैं जो सूजन को कम करते हैं और संक्रमण से बचाव करते हैं। इलायची का सेवन चाय में डालकर, दूध में उबालकर या सीधे चबाकर किया जा सकता है गर्मियों में इलायची वाली चाय या दूध पीने से शरीर को ठंडक मिलती है पाचन तंत्र मजबूत रहता है और तनाव भी दूर होता है

    एक्सपर्ट्स की सलाह है कि गर्मियों में रोजाना 1-2 इलायची का सेवन जरूर करें यह छोटी-सी आदत पेट, गला और मुंह की कई परेशानियों को जड़ से दूर रख सकती है हालांकि गंभीर समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है

  • हेल्दी बनने की जल्दी पड़ सकती है भारी, डॉक्टर ने बताए मॉर्निंग रूटीन के सही नियम

    हेल्दी बनने की जल्दी पड़ सकती है भारी, डॉक्टर ने बताए मॉर्निंग रूटीन के सही नियम

    भोपाल । आजकल परफेक्ट मॉर्निंग रूटीन का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, जहां लोग सुबह जल्दी उठकर वर्कआउट, ईमेल चेक करना और कॉफी पीने जैसी आदतों को अपनाते हैं। पहली नजर में ये आदतें हेल्दी और प्रोडक्टिव लगती हैं, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार इन्हें गलत तरीके से अपनाने पर ये शरीर पर उल्टा असर डाल सकती हैं। असली समस्या इन आदतों में नहीं, बल्कि उन्हें जल्दबाजी और बिना तैयारी के करने में है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इंसान का शरीर नींद से जागने के बाद तुरंत एक्टिव मोड में नहीं आता। उसे एक ट्रांजिशन समय यानी एक ब्रिज की जरूरत होती है। अगर यह समय नहीं दिया जाता, तो शरीर अचानक हाई अलर्ट स्थिति में पहुंच जाता है, जिससे तनाव बढ़ सकता है। रिसर्च के अनुसार, अचानक एक्टिव होने से शरीर में कॉर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है, जिसका असर मूड, फोकस और मानसिक स्थिति पर पड़ता है।

    सबसे आम गलती जो लगभग 99 प्रतिशत लोग करते हैं, वह है सुबह उठते ही मोबाइल फोन देखना। अलार्म बंद करते ही लोग नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया या ईमेल चेक करने लगते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक इससे दिमाग तुरंत अलर्ट मोड में चला जाता है और तनाव बढ़ने लगता है। इससे चिड़चिड़ापन, सिरदर्द और मानसिक थकान जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं।

    इसके अलावा, आजकल प्रोडक्टिव दिखने का दबाव भी लोगों पर हावी हो गया है। लोग मानते हैं कि जितना ज्यादा काम सुबह में कर लिया जाए, दिन उतना बेहतर होगा। लेकिन शरीर इस तरह काम नहीं करता। बिना तैयारी के तुरंत वर्कआउट शुरू करना या लगातार डिजिटल गतिविधियों में लग जाना शरीर के लिए तनाव का कारण बन सकता है।

    एक और बड़ी गलती है खराब नींद के बावजूद जल्दी उठना। अगर रात में पर्याप्त नींद नहीं ली गई या देर तक फोन इस्तेमाल किया गया, तो सुबह की शुरुआत खराब हो जाती है। नींद की कमी का असर याददाश्त, मूड और निर्णय लेने की क्षमता पर पड़ता है। इसलिए अच्छी सुबह की शुरुआत के लिए अच्छी नींद बेहद जरूरी है।

    कई लोग सुबह उठते ही कॉफी पीना शुरू कर देते हैं, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार 6 से 8 घंटे की नींद के बाद शरीर हल्का डिहाइड्रेट हो जाता है। ऐसे में सबसे पहले पानी पीना ज्यादा जरूरी होता है। पानी पीने से शरीर हाइड्रेट होता है, दिमाग बेहतर तरीके से काम करता है और थकान कम होती है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि सुबह उठने के बाद का पहला एक घंटा बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसी समय शरीर का सर्केडियन रिदम सेट होता है, जो पूरे दिन की ऊर्जा और मूड को प्रभावित करता है। अगर इस समय जल्दबाजी की जाए, तो दिनभर थकान और फोकस की कमी बनी रह सकती है।

    एक सही और संतुलित मॉर्निंग रूटीन के लिए डॉक्टर कुछ आसान आदतें अपनाने की सलाह देते हैं। सुबह उठकर तुरंत भागदौड़ करने के बजाय कुछ मिनट शांत बैठें, गहरी सांस लें और शरीर को धीरे-धीरे एक्टिव करें। सबसे पहले पानी पिएं, हल्की धूप लें और हल्की स्ट्रेचिंग से शुरुआत करें। इसके बाद ही वर्कआउट करें।

    साथ ही, सुबह उठते ही फोन इस्तेमाल करने से बचें और दिन की शुरुआत शांत और सकारात्मक गतिविधियों से करें। अगर इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए, तो न केवल दिन की शुरुआत बेहतर होगी बल्कि पूरे दिन की ऊर्जा, फोकस और मानसिक स्थिति भी संतुलित बनी रहेगी।