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  • घर पर ही पार्लर जैसा Pedicure, पैर होंगे मुलायम और चमकदार

    घर पर ही पार्लर जैसा Pedicure, पैर होंगे मुलायम और चमकदार


    नई दिल्ली  आज के समय में पार्लर जाना सबसे बड़ा खर्च समझ में आता है। पार्लर जाने का मतलब आप घर से बाहर निकलो फिर धूप हो या ठंड। फिर पार्लर में बैठकर काफी टाइम बिताओ और ऊपर से पार्लर के इतने सारे खर्चे होते हैं कि आपको काफी ज्यादा सेविंग करना पड़ता है तब जाकर वह सारी चीजें हो पाती है। लेकिन अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। अगर आप अपने पैरों को खूबसूरत बनाना चाहती हैं और टैनिंग को दूर करना चाहती हैं। तो किसी भी वीकेंड पर आप घर पर पार्लर जैसा पेडिक्योर कर सकती हैं।

    बस करें ये काम
    महिलाएं अपने पैरों को खूबसूरत बनाने के लिए पार्लर में जाकर पेडिक्योर करवाती हैं। इसका जेब खर्च पर भी असर दिखने लगता है। अगर आप भी घर पर पेडिक्योर करने की सोच रही हैं। तो चलिए इसके बारे में सारी जानकारी आपको देते हैं।

    इस प्रकार पैरों को बनाए खूबसूरत
    घर पर पेडिक्योर करने के लिए एक टब में हल्का गर्म पानी लें।जब तक पानी गर्म हो, तब तक अगर आपके पैरों में नेलपेंट लगी है, तो इसको रिमूव कर दें।फिर हल्के गुनगुने पानी में थोड़ा बेकिंग सोडा, शैंपू, आधा चम्मच नमक और थोड़ा सा नींबू का रस मिक्स करें।इसमें एप्पल साइडर विनेगर भी मिला लें।फिर पैरों को 30 मिनट तक पानी में रखें।अब हल्के हाथों से पैरों की मसाज करें।स्क्रब का इस्तेमाल करके पैरों की मसाज कर सकती हैं। मसाज के दौरान नाखून, एड़ी और तलवों की सफाई करें।अच्छे से सफाई के बाद अपने पैरों को दूसरे टब में रखें औऱ साफ पानी से पैरों को धो लें।

    पैरों को साफ पानी से धो लें और इनको साफ कपड़े से पोंछकर सुखा लें।आप चाहें तो किसी खास तेल की मदद से पैरों की मसाज भी कर सकती हैं।इसके बाद नाखूनों को शेप में काटकर नेलपेंट लगाएं।नेलपेंट लगने के बाद आप पैरों पर अच्छी फुट क्रीम या लोशन लगा सकती हैं।

  • समर सुपरफूड करेला: शुगर कंट्रोल से लेकर डाइजेशन तक फायदेमंद

    समर सुपरफूड करेला: शुगर कंट्रोल से लेकर डाइजेशन तक फायदेमंद


    नई दिल्ली गर्मी के मौसम में ही शरीर में कई तरह की समस्याएं बढ़ती हैं जैसे पाचन खराब होना, ब्लड शुगर की कमी, थकान और कमजोरी। ऐसे में करेला (करेला) एक प्राकृतिक औषधि की तरह काम करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, करेले का नियमित सेवन न केवल गर्मी से राहत देता है, बल्कि शरीर को अंदर से मजबूत भी बनाता है।

    पोषक तत्व सेपूर्ती

    आयुष मंत्रालय के अनुसार, करेला विटामिन ए, बी और सी, बीटा कैरोटीन, आयरन, ड्रैगन, पोटेशियम, मैग्नीशियम और मैग्नीज जैसे कई आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर है। ये तत्व शरीर को ऊर्जा प्रदान के साथ-साथ इमामत सिस्टम को भी मजबूत बनाते हैं।

    शराब में मिलावट

    डायबिटीज के इलाज के लिए करेला को बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। गर्मियों में जब शुगर लेवल बढ़ने का खतरा सबसे ज्यादा होता है, तब करेले का सब्जी या सब्जी नियमित रूप से लेना आश्चर्यजनक साबित होता है।

    पाचन तंत्र को बनाए रखें

    गर्मी में अपच, गैस, कब्ज और पेट दर्द जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में करेला पाचन क्रिया को सुधारने और पेट को साफ रखने में मदद मिलती है। यह पेट दर्द से तुरंत राहत पाने के लिए जाना जाता है।

    शरीर को ठंडा और ठंडा रखा जाता है

    करेला प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है, जो शरीर की अतिरिक्त गर्मी को बाहर निकालने में मदद करता है। यह डिहाइड्रेशन से प्रमाणित है और समुद्र तट पर शरीर को ठंडक प्रदान करता है।

    प्रतिरक्षा और वजन नियंत्रण

    करेले में मौजूद विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। साथ ही यह खून को साफ करता है और मेटाबॉलिज्म को तेज गति से वजन को नियंत्रित में रखने में भी मदद करता है।

    सेवन का सही तरीका

    गर्मियों में सुबह खाली पेट करेले का प्लांट सबसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है। इसके अलावा आप करेले की सब्जी, सूखा या अन्य प्रकार के करेले भी अपने आहार में शामिल कर सकते हैं. हालाँकि, अगर आपको किसी तरह की एलर्जी या अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो इसका सेवन पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

  • गर्मी में खाली पेट बाहर निकलना पड़ सकता है भारी, जानें जरूरी सावधानियां

    गर्मी में खाली पेट बाहर निकलना पड़ सकता है भारी, जानें जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली घर में नवजात शिशु का जन्म खुशियों की सौगात लेकर आता है, लेकिन इस खुशी के पीछे कई बार ऐसी बुद्धिमान छिपी होती हैं, जिन पर अक्सर ध्यान नहीं जाता। आमतौर पर ‘पोस्टपार्टम डिप्रेशन’ को सिर्फ मां से जुड़कर देखा जाता है, लेकिन अब एक नई स्टडी ने इस धारणा को बदल दिया है। JAMA Network Open में प्रकाशित शोध के अनुसार, बच्चे के जन्म के बाद पिता भी मानसिक तनाव और डिप्रेशन का सामना करते हैं। यह समस्या जन्म के तुरंत बाद नहीं, बल्कि 9 से 12 महीने के भीतर ज्यादा गंभीर रूप ले सकती है, जब गर्भधारण का दबाव बढ़ जाता है।

    स्वीडन में किए गए इस बड़े अध्ययन में करीब 10 लाख पिताओं के डेटा का विश्लेषण किया गया। शोध में सामने आया कि शुरुआती महीनों में पिता लगातार सामान्य नजर आते हैं, क्योंकि उनका पूरा ध्यान मां और बच्चे की देखभाल पर होता है। वे अपनी थकान, मानसिक दबाव और भावनात्मक उतार-चढ़ाव को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, काम और परिवार के बीच संतुलन बनाना कठिन हो जाता है। नींद की कमी, आर्थिक जिम्मेदारियां और बदलावों का दबाव धीरे-धीरे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। यही कारण है कि बच्चे के जन्म के लगभग एक साल के भीतर डिप्रेशन और तनाव का खतरा 30 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ जाता है।

    शोध में यह भी सामने आया कि पुरुष अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त नहीं कर समझता। सामाजिक दबाव और ‘मजबूत बने रहने’ की सोच के कारण वे अपनी मानसिक स्थिति के बारे में बात करने से बचते हैं। यही कारण है कि समस्या गंभीर होने तक पहचान में नहीं आती। दिव्यांगों का मानना ​​है कि यदि समय रहते इस स्थिति को समझा जाए और सही समर्थन दिया जाए, तो पिता भी इस दौर से आसानी से निकल सकते हैं। परिवार और समाज को चाहिए कि वे पिता की भावनाओं को समझें और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने में सहयोग करें।

    दिव्यांगों के अनुसार, पिता को अपनी दिनचर्या में संतुलन बनाए रखना चाहिए, पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करनी चाहिए और ज़रूरत पड़ने पर सहकर्मियों या प्रोफेशनल मदद लेने से बढ़ना नहीं चाहिए। साथ ही, पार्टनर के साथ खुलकर बातचीत करना और दिव्यांगों को साझा करना भी इस समस्या को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। यह अध्ययन इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि नवजात के जन्म के बाद मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल सिर्फ मां ही नहीं, बल्कि पिता के लिए भी उतनी ही जरूरी है।

  • नवजात के बाद पिता भी होते हैं डिप्रेशन का शिकार, स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

    नवजात के बाद पिता भी होते हैं डिप्रेशन का शिकार, स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा


    नई दिल्ली नए बच्चे का जन्म आमतौर पर खुशी का मौका माना जाता है, लेकिन अब एक नई स्टडी ने इस धारणा के पीछे छिपी एक अहम सच्चाई उजागर की है। JAMA Network Open में प्रकाशित शोध के अनुसार, पिता भी बच्चे के जन्म के बाद डिप्रेशन और मानसिक तनाव का सामना करते हैं, खासकर कुछ महीनों बाद।

    क्या कहती है स्टडी?
    स्वीडन में करीब 10 लाख पिताओं पर रिसर्च की गई बच्चे के जन्म के तुरंत बाद नहीं, बल्कि 9–12 महीने बाद जोखिम बढ़ता हैइस दौरान डिप्रेशन और तनाव का खतरा 30% से ज्यादा बढ़ जाता है

    क्यों बढ़ता है पिता में डिप्रेशन?

    शोध के मुताबिक, शुरुआती समय में पिता अपनी भावनाओं को दबाकर परिवार की जिम्मेदारियों में लग जाते हैं। लेकिन समय के साथ:

    नींद की कमी बनी रहती है
    काम और परिवार का संतुलन मुश्किल हो जाता है
    आर्थिक दबाव बढ़ता है
    रिश्तों में बदलाव आता है

    इन सबका असर धीरे-धीरे मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है और डिप्रेशन या स्ट्रेस डिसऑर्डर के रूप में सामने आता है।  बड़ी समस्या: पुरुष मदद नहीं मांगते स्टडी में यह भी सामने आया कि: पिता अक्सर अपनी भावनाओं को छिपाते हैं सामाजिक दबाव के कारण खुलकर बात नहीं करते इसी वजह से समस्या गंभीर होने तक पहचान में नहीं आती

    क्या करना चाहिए?
    पिता भी अपनी मानसिक स्थिति को सीरियस लें
    पार्टनर और परिवार से खुलकर बात करें
    जरूरत पड़े तो काउंसलिंग या प्रोफेशनल मदद लें
    परिवार को भी चाहिए कि वे पिता की भावनाओं को समझें और सपोर्ट करें

  • गर्मी में ठंडक का रामबाण: बेल का शर्बत और इसका आसान तरीका

    गर्मी में ठंडक का रामबाण: बेल का शर्बत और इसका आसान तरीका


    नई दिल्ली  गर्मियों का मौसम आते ही शरीर में थकान, डिहाइड्रेशन और पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। ऐसे में प्राकृतिक और पारंपरिक पेय बेल का शर्बत न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद साबित होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार के केमिकल युक्त ड्रिंक्स की जगह बेल का शर्बत एक सस्ता, पौष्टिक और पूरी तरह सुरक्षित विकल्प है।

    क्यों खास है बेल का शर्बत?
    आयुर्वेद में बेल को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। इसमें फाइबर, आयरन, प्रोटीन और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो गर्मी में शरीर को अंदर से ठंडा रखते हैं। तेज गर्मी में बार-बार पसीना आने से शरीर कमजोर पड़ जाता है, लेकिन बेल का शर्बत ऊर्जा बनाए रखने और शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है।

    पाचन के लिए रामबाण उपाय
    बेल का शर्बत पेट के लिए बेहद फायदेमंद है। यह कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं को दूर करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। खास बात यह है कि यह दस्त और डायरिया जैसी समस्याओं में भी काफी असरदार माना जाता है। पेट की सूजन कम करने और आंतों को स्वस्थ रखने में भी यह मददगार है।

    दिल और खून के लिए भी लाभकारी
    इस शर्बत का नियमित सेवन कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में सहायक होता है, जिससे हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। साथ ही, यह शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालकर खून को साफ करने में भी मदद करता है, जिससे त्वचा में प्राकृतिक निखार आता है।

    महिलाओं के लिए खास फायदे
    प्रसव के बाद महिलाओं के लिए भी बेल का शर्बत बेहद लाभकारी माना जाता है। यह शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ-साथ दूध बढ़ाने में भी सहायक हो सकता है।

    घर पर ऐसे बनाएं बेल का शर्बत
    बेल का शर्बत बनाना बेहद आसान है। इसके लिए पके हुए बेल का गूदा निकालकर अच्छी तरह मसल लें। इसमें ठंडा पानी मिलाएं और स्वाद के अनुसार काला नमक, भुना जीरा पाउडर और शहद या गुड़ डालें। इसे छानकर ठंडा-ठंडा परोसें। रोजाना एक गिलास सेवन करने से शरीर दिनभर तरोताजा रहता है।

    क्यों बेहतर है यह देसी पेय?
    जहां एक ओर बाजार के ठंडे पेय शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं, वहीं बेल का शर्बत प्राकृतिक रूप से शरीर को ठंडा रखने, पाचन सुधारने और ऊर्जा देने का काम करता है। यह न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि सेहत के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं।

  • लगातार आंखों की सूजन का इग्नोर करना खतरनाक, किडनी समस्या का शुरुआती संकेत हो सकता है

    लगातार आंखों की सूजन का इग्नोर करना खतरनाक, किडनी समस्या का शुरुआती संकेत हो सकता है


    नई दिल्ली। सुबह उठते ही अगर आंखों के आसपास हल्की सूजन नजर आए, तो इसे हल्के में लेना खतरे की घंटी हो सकती है। खासकर जब यह सूजन बार-बार दिखे या लंबे समय तक बनी रहे, तो यह शरीर में चल रही किसी बड़ी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।

    आंखों की त्वचा और तरल पदार्थ का संतुलन

    विज्ञान के अनुसार, आंखों के आसपास की त्वचा बहुत पतली होती है। शरीर में तरल पदार्थ के संतुलन में मामूली बदलाव भी यहां जल्दी दिखाई देता है। यही वजह है कि किडनी से जुड़ी समस्याओं का असर सबसे पहले आंखों के पास सूजन के रूप में दिख सकता है।

    गुर्दे का मुख्य कार्य खून को साफ करना और शरीर में तरल पदार्थ का संतुलन बनाए रखना होता है। जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो खून में मौजूद जरूरी प्रोटीन पेशाब के रास्ते बाहर निकलने लगते हैं। यह प्रोटीन शरीर में पानी संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाता है। उनकी कमी से शरीर में पानी टिशूज में जमा होने लगता है और आंखों के नीचे सूजन दिखाई देती है।

    सुबह सूजन क्यों ज्यादा दिखती है

    रात भर नींद समय शरीर एक ही स्थिति में रहता है। इस दौरान तरल पदार्थ चेहरे और आंखों के आसपास जमा हो सकता है। सुबह उठते ही यही जमा हुआ तरल सूजन के रूप में दिखाई देता है। जैसे-जैसे हम चलते-फिरते हैं, यह तरल शरीर के अन्य हिस्सों, खासकर पैरों की ओर खिसक जाता है और आंखों की सूजन कम होने लगती है।

    सामान्य कारण भी हो सकते हैं

    हर बार आंखों की सूजन का मतलब किडनी की बीमारी नहीं होता। इसके पीछे कई सामान्य कारण भी हो सकते हैं, जैसे:

    पर्याप्त नींद न लेना
    एलर्जी होना
    ज्यादा नमक का सेवन
    शरीर में पानी की कमी

    ये कारण अस्थायी होते हैं और थोड़े समय में ठीक हो जाते हैं। लेकिन अगर सूजन रोजाना बनी रहे या इसके साथ अन्य लक्षण दिखाई दें, तो सतर्क हो जाना चाहिए।

    किडनी से जुड़ी समस्या के अन्य संकेत

    अगर सूजन किडनी से जुड़ी समस्या की वजह से है, तो इसके साथ कुछ और लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं:

    पेशाब में झाग आना
    टखनों या पैरों में सूजन
    बार-बार थकान या कमजोरी महसूस होना
    ब्लड शुगर या ब्लड प्रेशर का असंतुलित होना
    ऐसे लक्षण अगर आंखों की सूजन के साथ दिखें, तो डॉक्टर से तुरंत जांच करवाना जरूरी है।

    सावधानी और सही कदम

    आँखों की सूजन को धुंधला करना जोखिम भरा हो सकता है। स्वस्थ रहने के लिए:

    पर्याप्त नींद लें
    नमक का सेवन नियंत्रित करें
    पर्याप्त पानी पिएं
    नियमित जांच कराएं, खासकर जब सूजन लगातार बनी रहे

  • क्या आप सच में निरोगी हैं? जानें स्वस्थ शरीर के 7 जरूरी संकेत

    क्या आप सच में निरोगी हैं? जानें स्वस्थ शरीर के 7 जरूरी संकेत


    नई दिल्ली। शरीर अपने स्वास्थ्य और बीमारियों का संकेत खुद देता है। अक्सर हम इनएक्टिव को अनदेखा कर देते हैं और तब पता चलता है कि कहीं न कहीं स्वास्थ्य में समस्या है। लेकिन पूरी तरह स्वस्थ शरीर भी कुछ संकेत देता है, जो बताता है कि आपका शरीर निरोगी और तंदरुस्त है। अगर आप इनएक्टिव में से सबसे ज़्यादा महसूस कर रहे हैं, तो समझ लीजिए कि आप स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।

    1. आराम से और गहरी नींद

    स्वस्थ शरीर का पहला और सबसे अहम संकेत है बिस्तर पर लेटने के 15 मिनट के अंदर नींद आना। अगर आप बिना किसी परेशानी के जल्दी सो जाते हैं और सुबह बिना अलार्म के समय पर जाग जाते हैं, तो यह आपके शरीर और दिमाग की तंदरुस्ती का संकेत है। अच्छी नींद शरीर को रिकवर करती है, मानसिक तनाव कम करती है और ऊर्जा बनाए रखती है।

    2. पूरे दिन ऊर्जा से भरा रहना

    दूसरा संकेत है पूरे दिन ऊर्जा से भरा रहना। अगर दिनभर थकान, सुस्ती या आलस महसूस नहीं होता और काम आसानी से निस्तारित होता है, तो यह शारीरिक स्वास्थ्य का एक मजबूत संकेत है। निरंतर ऊर्जा शरीर की मेटाबॉलिज्म और हृदय स्वास्थ्य का भी द्योतक है।

    3. पाचन तंत्र का सही काम करना

    तीसरा संकेत है पाचन क्रिया का सही होना। अगर भोजन के बाद पेट भारी नहीं होता, गैस या अपच जैसी समस्या नहीं रहती और दिनभर खाने के बाद थकान नहीं लगती, तो इसका मतलब है कि आपका पाचन तंत्र स्वस्थ है। अच्छे पाचन से पोषण सही तरह से पोषण होता है और शरीर मजबूत बनता है।

    4. साफ चेहरा और गुलाबी जीभ

    स्वस्थ शरीर का चौथा संकेत है चेहरे की त्वचा और जीभ का स्वास्थ्य। स्वस्थ लोग चेहरे पर एक प्राकृतिक चमक और साफ त्वचा रखते हैं। वहीं जीभ गुलाबी और साफ रहती है। यदि पाचन में समस्या हो, तो चेहरे पर मुंहासे या एक्ने हो सकते हैं और जीभ पर छाले बन सकते हैं।

    5. मन की शांति और एकाग्रता

    पांचवां संकेत है मन की शांति और एकाग्रता। स्वस्थ शरीर का मतलब है कि मन भी संतुलित और खुश रहता है। आप अपने काम पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं और मानसिक तनाव कम होता है। बीमार शरीर वाले लोग अक्सर मन की शांति खो देते हैं और काम में मन नहीं लगता।

    6. बीमारी से जल्दी उबरना

    छठा संकेत है रोग प्रतिरोधक क्षमता का मजबूत होना। स्वस्थ शरीर मौसमी बदलाव या छोटे संक्रमणों से जल्दी ठीक हो जाता है। बुखार, खांसी या जुकाम जैसी समस्याएं लंबे समय तक परेशान नहीं करती। यह शरीर की इम्यूनिटी मजबूत होने का स्पष्ट संकेत है।

    7. समय पर भूख लगना

    सातवां और आखिरी संकेत है समय पर भूख लगना और संतुलित भोजन करना। अगर आपके पाचन तंत्र सही हैं, तो पेट समय पर भूख महसूस करता है। हल्का या समय से पहले भोजन करना स्वास्थ्य की कमजोरी का संकेत हो सकता है।

  • Travel Tips: पार्टनर के साथ घूमने की बेस्ट जगहें, आज ही बनाएं रोमांटिक प्लान

    Travel Tips: पार्टनर के साथ घूमने की बेस्ट जगहें, आज ही बनाएं रोमांटिक प्लान


    नई दिल्ली। अगर आप अपने राजभवन के साथ सार्वभौम के साथ कुछ पल का मौका ढूंढ रहे हैं तो आपके लिए ये खास समय है। अपने तेलंगाना के साथ कहीं भी घूमने जाना न सिर्फ मूड को तरोताजा करता है, बल्कि दूसरे में फिर से प्यार की नई शिंगरी भी जगा देता है। इसके लिए आपको इन जगहों पर एक बार जरूर जाना चाहिए।

    मनाली
    रोमांटिक ट्रिप की बात हो और मनाली का नाम ना आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। घने चीड़ों के जंगल, नदियाँ, हरे-भरे मैदान और घने जंगल यहाँ के घने जंगलों को बेहद खास बनाते हैं। इस समय भी यहां पर काफी लेयर्ड हो रही है। इसके लिए इस बार भी यहां जाने के लिए फ़ार्फैक्ट है। यहां कपल्स को ऐसा लगता है जैसे वे किसी खूबसूरत कहानी का हिस्सा हों। तिब्बती मठों की सैर, नदी किनारे कैंपिंग और भृगु झील तक ट्रेक करना ये सब काफी अच्छा अनुभव कराती है।

    लैंडौर 

    हिमालय के विकाश में बसा लैंडौर एक छोटा लेकिन बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है। कोहरे से बूढ़ी पहाड़ियाँ जैसे, देवदार के जंगल और बुरेंश के लाल फूल यहाँ के स्मारक को किसी पुराने ब्रिटिश गाँव में बनाए जाते हैं। मसूरी के ऊपर स्थित इस शांत जगह पर लाल टिब्बा, सेंट पॉल चर्च, फोर शॉप और केलॉग मेमोरियल चर्च जैसे कई आकर्षण हैं। यहां का भी मौसम इस समय काफी अच्छा है। तो आप यहां बिना देरी किए जाने का बी प्लान बनवा सकते हैं।

    शिमला
    इस समय पद पर नियुक्ति हो सकती है। अद्वितीय-ठंडी हवाएं, हरे-भरे जंगल, खूबसूरत और पहाड़ियां आपको सर्वोच्च और साहसिक दोनों का अनुभव। मॉल रोड पर स्वादिष्ट और स्वादिष्ट व्यंजन का मजा भी अलग है। रिज, कुफरी और चैल जैसी जगहों पर आप एडवेंचर और कॉमेडी का आनंद ले सकते हैं। इस सीजन में स्वाद का मौसम सुहाना और नज़ारे अद्भुत होते हैं।

  • देर रात खाना: सबसे बड़ी गलती? आयुर्वेद के अनुसार सही समय पर खाना क्यों जरूरी

    देर रात खाना: सबसे बड़ी गलती? आयुर्वेद के अनुसार सही समय पर खाना क्यों जरूरी


    नई दिल्ली। आज की आधुनिक जीवनशैली में सही समय पर भोजन करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। काम का दबाव, सोशल एक्टिविटी और व्यस्त दिनचर्या के कारण कई लोग रात के समय भोजन करने पर मजबूर हो जाते हैं। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार देर रात खाना स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। आयुर्वेद में बताया गया है कि भोजन का समय सूर्य की स्थिति के अनुसार होना चाहिए। दिन में सूर्य की रोशनी के समय हमारी पाचन अग्नि सबसे सक्रिय होती है, जिससे भोजन आसानी से पचता है और शरीर को पोषण मिलता है। वहीं रात में पाचन अग्नि कमजोर हो जाती है और देर रात खाना पचने के बजाय शरीर में कई समस्याएं पैदा करता है।

    पाचन और नींद पर असर

    रात के समय खाना खाने से पेट में भारीपन, सुस्ती, आलस, गैस और अपच जैसी समस्याएं होती हैं। शरीर अपने रिपेयर और रिस्टोर मोड में होता है, लेकिन भोजन खाने के बाद ऊर्जा का बड़ा हिस्सा खाने को पचाने में लग जाता है। इसका असर नींद की गुणवत्ता पर भी पड़ता है। देर रात भोजन करने वालों को अक्सर नींद ठीक से नहीं आती और सुबह शरीर सुस्त महसूस करता है। आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर में टॉक्सिन बनने का मुख्य कारण बनता है, जिससे पूरे दिन एनर्जी की कमी और कमजोरी महसूस होती है।

    शरीर में टॉक्सिन और स्वास्थ्य पर प्रभाव

    रात में भोजन पचाने के बजाय शरीर में जमकर टॉक्सिन (अम) बनने लगते हैं। ये टॉक्सिन आंतों में जमा होकर पेट की सफाई और सामान्य पाचन प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। लंबे समय तक देर रात खाना खाने से पाचन तंत्र कमजोर, कब्ज और गैस की समस्या बढ़ जाती है। इसके अलावा शरीर की प्राकृतिक ऊर्जा का चक्र भी बिगड़ता है, जिससे दिनभर सुस्ती और थकान बनी रहती है।

    सही समय और भोजन का तरीका

    अगर आप अपने शरीर और पाचन को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो आयुर्वेद के अनुसार सूर्यास्त के बाद रात का भोजन 7–8 बजे तक कर लेना चाहिए। भोजन हल्का और कम चिपचिपा होना चाहिए ताकि पेट पर दबाव न पड़े। खाने के तुरंत बाद लेटने से बचें, सुबह सैर करें या वज्रासन जैसी मुद्रा में कुछ देर बैठें। इससे भोजन सही तरीके से पचेगा और शरीर को आराम भी मिलेगा।

    आयुर्वेद की सलाह: संतुलित और प्राकृतिक

    आयुर्वेद में यह भी कहा गया है कि दिन का भोजन सूर्य की रोशनी में करना सबसे उचित है। इससे शरीर की पाचन अग्नि सक्रिय रहती है और पोषण सही तरीके से होता है। देर रात भोजन करने से ना सिर्फ पाचन प्रभावित होता है, बल्कि ऊर्जा, मानसिक स्थिति और नींद भी बिगड़ती है। सही समय पर हल्का और संतुलित भोजन ही स्वस्थ जीवन का आधार है।

    देर रात खाना न केवल पाचन को प्रभावित करता है, बल्कि शरीर में टॉक्सिन बनता है, नींद बिगड़ती है और सुबह की ऊर्जा कम महसूस होती है। आयुर्वेद के अनुसार सूर्यास्त से पहले हल्का भोजन, खाने के बाद टहलना या वज्रासन करना और तैलीय भोजन से परहेज करना स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती की कुंजी है।

  • सिर्फ कॉफी के इस्तेमाल से आपके बाल बनेंगे सिल्की और डैंड्रफ फ्री

    सिर्फ कॉफी के इस्तेमाल से आपके बाल बनेंगे सिल्की और डैंड्रफ फ्री


    नई दिल्ली  आज के समय में बालों का झड़ना और काफी मात्रा में डैंड्रफ होना आम बात हो गई है। आज कल के प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से बालों का झड़ना, डैंड्रफ और रूखापन एक आम समस्या बन गई है। हम बार-बार तीन बार थ्री-थ्रेल प्लांट पर हजारों रुपए खर्च कर देते हैं, लेकिन नतीजा हमेशा अच्छा नहीं आता, इसलिए हम आपके लिए ऐसी ट्रिक लेकर आए हैं, जिससे आपके बाल काफी सुंदर और डैंड्रफ फ्री हो सकते हैं।

    फुलवाली का कमाल
    हमारे द्वारा बनाए गए किचन में हम पीने के लिए काफी अच्छे लगे हैं लेकिन हमें इसके बारे में बिल्कुल नहीं पता है कि हमारे बाल भी काफी अच्छे हो सकते हैं। बता दें, आप 2 सप्ताह में बालों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बालों में रेशमी, चमकीला और डैंड्रफ मुक्त बाल पा सकते हैं।

    फूलो के बड़े फायदे
    कैफीन मौजूद बालों को मजबूत बनाने में मदद करता है, जिससे बाल घने हो जाते हैं। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स स्कैल्प को डिटॉक्स करते हैं और ब्लड सर्कोलेशन में सुधार लाते हैं। चॉकलेट बाल के क्यूटिकल्स का स्मूथ फॉर्मेशन होता है, जिससे बाल क्लिप देखने को मिलते हैं।

    सीरमी बालों के लिए लगे काफी दही और शहद
    हाय लाइब्रेरी को लॉक करता है और दही बालों को गहराई से कंडीशन करता है। आप 2 ऑर्गेनिक फिलोडी पाउडर, 1 मेट्रिक्स शहद, 2 मेट्रिक्स ताज़ा दही लें। तीनों को एक-एक करके एक-एक करके पेस्ट बनाएं। इसके बाद इसे आप अपने बालों पर पेस्ट की तरह लगाएं, थोड़ी देर बाद इसे हटा दें, इसके बाद इसे धूल दे दें, आपके बालों पर काफी शोभा हो जाएगी और साइन करने का प्रभाव पड़ेगा।

    डैंड्रफ के लिए नींबू कॉफी और तेल
    लेमोनियम डैंड्रफ ख़त्म हो जाता है और नारियल तेल स्कैल्प को पोषण देता है। आप 2 औषधीय पाउडर, 1 नारियल का तेल, कुछ बूँदें नींबू का रस लें। आप इसका विस्तृत चित्र गुनगुना कर लें ताकि यह स्कैल्प में अच्छे से समा जाए। मास्क लगाने से पहले बालों को अच्छा से गाढ़ा कर लें ताकि कोई पेट न रहे। ब्रश या सीरम की मदद से मास्क को स्कैल्प से लेकर बाल की पूरी लंबाई तक लंबाई तक। हल्के हाथों से 5 मिनट तक स्कैल्प की मसाज करें। इससे कैफीन प्रोटीन के अंदर तक मास्क को 30 से 45 मिनट तक रखा गया। अगर आप ऐसे दो स्थापत्य में तीन-चार बार के निशान हैं तो आपके बाल काफी अच्छे और घने बन जायेंगे