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  • बाहर का खाना खाने से फूड पॉइज़निंग का खतरा, लापरवाही पड़ सकती है भारी

    बाहर का खाना खाने से फूड पॉइज़निंग का खतरा, लापरवाही पड़ सकती है भारी


    नई दिल्ली । आज के समय में बाहर का खाना लोगों की लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा बन चुका है। ऑफिस जाने वाले कर्मचारी हों या छात्र, ज्यादातर लोग स्ट्रीट फूड, ढाबे या रेस्टोरेंट का खाना पसंद करते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यही आदत कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बन सकती है। सबसे बड़ा खतरा फूड पॉइज़निंग का होता है, जो दूषित भोजन या गंदे पानी से फैलने वाले बैक्टीरिया के कारण होता है।

    कैसे होता है फूड पॉइज़निंग का खतरा

    फूड पॉइज़निंग तब होती है जब खाना बैक्टीरिया, वायरस या टॉक्सिन से संक्रमित हो जाता है। बाहर के खाने में कई बार साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता। कच्चे या अधपके भोजन, लंबे समय तक खुले में रखे गए पकवान, गंदे तेल का बार-बार उपयोग और दूषित पानी इस समस्या को और बढ़ा देते हैं। स्ट्रीट फूड में हाथों की स्वच्छता की कमी भी संक्रमण फैलने का बड़ा कारण बनती है।

    फूड पॉइज़निंग के शुरुआती लक्षण

    फूड पॉइज़निंग होने पर शरीर तुरंत संकेत देने लगता है। मरीज को पेट दर्द, मरोड़, उल्टी, दस्त और कमजोरी महसूस होती है। कई मामलों में हल्का बुखार और डिहाइड्रेशन भी हो सकता है। गंभीर स्थिति में मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत भी आ सकती है।

    किन लोगों के लिए ज्यादा खतरा

    विशेषज्ञों के अनुसार छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग फूड पॉइज़निंग के अधिक शिकार हो सकते हैं। इन लोगों में संक्रमण तेजी से फैलता है और शरीर पर इसका असर ज्यादा गंभीर हो सकता है।

    स्ट्रीट फूड और बाहर का खाना कितना सुरक्षित

    स्ट्रीट फूड भले ही स्वाद में लाजवाब हो, लेकिन सुरक्षा के मामले में हमेशा भरोसेमंद नहीं होता। कई जगहों पर साफ पानी, स्वच्छ बर्तन और सही तरीके से खाना स्टोर करने की व्यवस्था नहीं होती। इसी कारण कई बार लोग एक ही समय में बड़ी संख्या में बीमार हो जाते हैं।

    कैसे रखें खुद को सुरक्षित

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाहर खाना खाते समय कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए। हमेशा साफ-सुथरी जगह से ही खाना लें, ताजा और गर्म भोजन का ही सेवन करें, कटे हुए फल या खुले में रखे खाद्य पदार्थों से बचें। खाने से पहले हाथ धोना या सैनिटाइज़र का उपयोग करना भी संक्रमण के खतरे को कम करता है।

    कब लें डॉक्टर की सलाह

    अगर किसी व्यक्ति को लगातार उल्टी, दस्त, तेज पेट दर्द या कमजोरी महसूस हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी होता है, क्योंकि समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।

  • Summer Special Recipe: ठंडक देने वाला खीरे का रायता, घर पर बनाएं स्वादिष्ट और हेल्दी डिश

    Summer Special Recipe: ठंडक देने वाला खीरे का रायता, घर पर बनाएं स्वादिष्ट और हेल्दी डिश



    नई दिल्ली  गर्मी का मौसम आते है शरीर में पानी की कमी होने लगती है इसलिए हमें ज्यादातर पानी वाले फल ही खाने चाहिए, जिससे हाइड्रेटेड रहे। इसके साथ ही आप खीरे का रायता (Cucumber Raita) भी खा सकते हैं ये काफी स्वादिष्ट ऑप्शन है। खीरा प्राकृतिक रूप से ठंडक देने वाला होता है और दही पाचन को बेहतर बनाता है, इसलिए इन दोनों का संयोजन गर्मियों के लिए एक परफेक्ट डिश माना जाता है। लेकिन अब सवाल उठता हैं अगर इसे बनाना नहीं आता तो क्या करें। तब परेशान होने की बात नहीं हैं हम आपके लिए इसकी खास रेसिपी लेकर आए हैं।

    खीरे का रायता बनाने की सामग्री
    2 मध्यम आकार के खीरे
    1 कप ताजा दही
    1/2 छोटा चम्मच भुना जीरा पाउडर
    स्वादानुसार नमक
    1/4 छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर
    थोड़ी सी हरी धनिया पत्ती (बारीक कटी हुई)
    वैकल्पिक: 1 हरी मिर्च (बारीक कटी हुई)

    बनाने की विधि
    सबसे पहले खीरे को अच्छे से धो लें और छील लें। इसके बाद खीरे को कद्दूकस कर लें। यदि खीरे में ज्यादा पानी हो, तो हल्का सा निचोड़ लें ताकि रायता ज्यादा पतला न हो। अब एक बाउल में दही लें और उसे अच्छे से फेंट लें ताकि वह स्मूद हो जाए।

    फेंटे हुए दही में कद्दूकस किया हुआ खीरा डालें और अच्छी तरह मिला लें। इसके बाद इसमें नमक, काली मिर्च और भुना जीरा पाउडर डालकर मिक्स करें। यदि आप थोड़ा तीखा पसंद करते हैं, तो इसमें बारीक कटी हरी मिर्च भी डाल सकते हैं।

    अंत में ऊपर से हरी धनिया डालकर सजाएं। चाहें तो थोड़ा सा भुना जीरा पाउडर ऊपर से छिड़क दें, इससे स्वाद और भी बढ़ जाएगा। अब आपका ठंडा-ठंडा खीरे का रायता तैयार है। इसे आपक रोटी चावल या फिर ऐसे ही खा सकते हैं।

    इसको खाने का फायदा
    खीरा शरीर में पानी की कमी को दूर करता है और दही पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। यह रायता गर्मी में लू से बचाने में भी मदद करता है और पेट को हल्का रखता है। इस तरह खीरे का रायता न केवल स्वादिष्ट है बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है। गर्मियों में इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।

  • Heatwave Alert: बढ़ते तापमान और लू से बढ़ रही परेशानी, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की सावधानी

    Heatwave Alert: बढ़ते तापमान और लू से बढ़ रही परेशानी, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की सावधानी


    नई दिल्ली । इन दिनों लगातार बढ़ती गर्मी और लू (हीटवेव) ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। दोपहर के समय चल रही गर्म हवाएं लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं। मौसम विभाग के अनुसार तापमान में लगातार बढ़ोतरी से आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

    लू क्या है और क्यों खतरनाक होती है
    लू यानी हीटवेव तब होती है जब किसी क्षेत्र में सामान्य से बहुत अधिक तापमान दर्ज किया जाता है और गर्म हवाएं चलती हैं। यह स्थिति शरीर के तापमान को तेजी से बढ़ा देती है, जिससे शरीर का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है। लंबे समय तक लू के संपर्क में रहने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

    शरीर पर लू का असर
    लू का असर सबसे पहले शरीर की ऊर्जा पर पड़ता है। व्यक्ति को कमजोरी, सिरदर्द, चक्कर और अत्यधिक थकान महसूस होने लगती है। गंभीर मामलों में उल्टी, बेहोशी और हीट स्ट्रोक जैसी स्थिति भी बन सकती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है।

    किन लोगों पर ज्यादा खतरा
    विशेषज्ञों के अनुसार बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और बाहर काम करने वाले मजदूर लू के अधिक शिकार होते हैं। इसके अलावा जिन लोगों को पहले से हृदय, किडनी या डायबिटीज जैसी बीमारियां हैं, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

    लू लगने के शुरुआती लक्षण
    लू लगने पर शरीर में तेज सिरदर्द, बेचैनी, तेज प्यास, त्वचा का सूखना, चक्कर आना और तेज धड़कन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कई बार शरीर का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

    बचाव के जरूरी उपाय
    डॉक्टर सलाह देते हैं कि दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें। हल्के और ढीले कपड़े पहनें, सिर को ढककर रखें और पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस और तरल पदार्थ का सेवन करें। धूप में ज्यादा देर तक खड़े रहने से बचना चाहिए।

    कब लें तुरंत डॉक्टर की सलाह
    अगर किसी व्यक्ति को लगातार चक्कर, बेहोशी, अत्यधिक कमजोरी या शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता हुआ महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।

  • अपान वायु मुद्रा से मिलेगा पीरियड्स दर्द में आराम, ऐंठन और थकान होगी कम

    अपान वायु मुद्रा से मिलेगा पीरियड्स दर्द में आराम, ऐंठन और थकान होगी कम


    नई दिल्ली । महिलाओं के लिए मासिक धर्म का समय अक्सर असहजता से भरा होता है। पेट दर्द, ऐंठन, कमर में भारीपन और थकान जैसी समस्याएं कई बार इतनी बढ़ जाती हैं कि रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में हर बार दवा लेना जरूरी या सही नहीं होता। यही वजह है कि आजकल प्राकृतिक तरीकों जैसे योग और हस्त मुद्राओं की ओर रुझान बढ़ रहा है।

    क्या है अपान वायु मुद्रा?

    अपान वायु मुद्रा एक विशेष हस्त मुद्रा है, जिसे योग में शरीर की ऊर्जा संतुलित करने के लिए किया जाता है। यह मुद्रा खासतौर पर पेट के निचले हिस्से में होने वाले दर्द और ऐंठन को कम करने में मददगार मानी जाती है।

    कैसे मिलती है पीरियड्स में राहत?

    पीरियड्स के दौरान जब इस मुद्रा का अभ्यास किया जाता है, तो शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और मांसपेशियों का तनाव धीरे-धीरे कम होने लगता है। इससे पेट दर्द, ऐंठन और खिंचाव में राहत मिल सकती है। साथ ही यह शरीर को अंदर से शांत करने का काम करती है, जिससे थकान भी कम महसूस होती है।

    करने का सही तरीका

    इस मुद्रा को करना बेहद आसान है-

    आराम से सुखासन में बैठ जाएं
    हाथों को घुटनों पर रखें, हथेलियां ऊपर की ओर रहें
    तर्जनी उंगली को मोड़कर अंगूठे की जड़ से लगाएं
    मध्यमा और अनामिका उंगली को मोड़कर अंगूठे से स्पर्श कराएं
    छोटी उंगली सीधी रखें
    आंखें बंद कर शांत मन से कुछ मिनट तक अभ्यास करें
    मानसिक तनाव में भी फायदेमंद

    पीरियड्स के दौरान कई महिलाओं को चिड़चिड़ापन, बेचैनी और तनाव महसूस होता है। यह मुद्रा मन को शांत करने में मदद करती है, जिससे मूड बेहतर हो सकता है और मानसिक संतुलन बना रहता है।

    पाचन और ऊर्जा पर भी असर

    अपान वायु मुद्रा पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे गैस, अपच और भारीपन में भी राहत दे सकती है। इसके नियमित अभ्यास से शरीर में ऊर्जा का स्तर संतुलित रहता है और दिनभर एक्टिव महसूस होता है।

    ध्यान रखने वाली जरूरी बातें
    खाना खाने के तुरंत बाद इस मुद्रा का अभ्यास न करें
    शुरुआत में कम समय के लिए करें, धीरे-धीरे अवधि बढ़ाएं
    अगर कोई गंभीर समस्या या दर्द हो तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें

  • काली कोहनी से हैं परेशान? इन घरेलू उपायों से पाएं साफ और चमकदार त्वचा

    काली कोहनी से हैं परेशान? इन घरेलू उपायों से पाएं साफ और चमकदार त्वचा


    नई दिल्ली । अक्सर देखने को मिलता है लोग अपने चेहरे का काफी ध्यान रख लेते हैं। लेकिन कोहनी और घुटनों को नजर अंदाज कर देते हैं। यही वजह है कि समय के साथ इन हिस्सों की स्किन काली और रूखी दिखने लगती है। और धीरे-धीरे हम इतने काफी परेशान हो जाते हैं इसको साफ करने के लिए तरह-तरह के प्रोडक्ट उसे करने की सोचते हैं लेकिन आप अपने घर में ही इसे आसानी से साफ कर सकते हैं तो चलिए इसके बारे में आपको सारी जानकारी बताते हैं।

    घर पर ही करें साफ
    आपको बता दें कि ये समस्या बेहद आम है यह अक्सर हर किसी को हो जाता है।धूप, गंदगी, फ्रिक्शन और मॉइस्चर की कमी के कारण होती है। अच्छी बात यह है कि कुछ आसान घरेलू उपायों की मदद से इस डार्कनेस को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    नींबू और शहद
    चेहरे के साथ साथ स्क्रीन के लिए भी नींबू और शहद काफी काटकर साबित होते हैं। नींबू में मौजूद नेचुरल ब्लीचिंग गुण स्किन के रंग को हल्का करने में मदद करते हैं। जबकि शहद स्किन को गहराई से मॉइस्चराइज कर उसे सॉफ्ट बनाता है। इसके लिए एक चम्मच नींबू के रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर कोहनी और घुटनों पर लगाएं और करीब 20 मिनट बाद धो लें। कुछ दिनों में ही इसका इस्तेमाल करने से साफ असर नजर आने लगता है।

    एलोवेरा जेल
    एलोवेरा जेल काफी अच्छा होता है आपको इस गर्मी में जरूर लगाना चाहिए अपने आपके चेहरे को ठंडक भी पहुंचना है साथ ही आपकी स्किन ब्राइट बनता है। ये स्किन को ठंडक देने के साथ-साथ डार्कनेस कम करने में भी मदद करता है। रोज रात को सोने से पहले ताजा एलोवेरा जेल को कोहनी और घुटनों पर लगाकर हल्के हाथों से मसाज करें। कुछ ही दिनों में स्किन मुलायम और साफ नजर आने लगेगी।

    स्क्रबिंग
    डेड स्किन सेल्स जमा होने से भी कोहनी और घुटने काले पड़ने लगते हैं। इसलिए हफ्ते में कम से कम दो बार स्क्रब करना जरूरी है। इसके लिए चीनी और तेल को मिलाकर नेचुरल स्क्रब तैयार करें और हल्के हाथों से रगड़ें। इससे भी जल्दी ठीक हो जाएगा और आप की समस्या दूर हो जाएगी।

  • गर्मियों में डायबिटीज को लेकर लापरवाही पड़ सकती है भारी, संतुलित आहार है सबसे जरूरी

    गर्मियों में डायबिटीज को लेकर लापरवाही पड़ सकती है भारी, संतुलित आहार है सबसे जरूरी


    नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम शुरू होते ही तापमान के साथ-साथ डायबिटीज की समस्या भी बढ़ जाती है। देश में डायबिटीज के मरीज बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। ऐसे में गर्मी में लापरवाही से यह और खतरनाक हो सकती है। अच्छी खबर यह है कि सही खान-पान और सही कैलोरी काउंट से इसे बेहतरीन तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।

    नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, गर्मियों में सही खान-पान और कैलोरी काउंट पर ध्यान देकर डायबिटीज को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। संतुलित आहार और उचित मात्रा में कैलोरी का सेवन डायबिटीज प्रबंधन का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है। सही कैलोरी काउंट ब्लड शुगर को स्थिर रखता है और दवाओं की जरूरत को भी कम कर सकता है।

    डायबिटीज में ब्लड शुगर बढ़ने से आंखों की समस्या, किडनी खराब होना, नसों में दिक्कत और दिल की बीमारी जैसी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। गर्मियों में पसीना ज्यादा आने और डिहाइड्रेशन की वजह से यह समस्या और बढ़ जाती है। इसलिए लापरवाही बिल्कुल न करें।

    हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, अपने भोजन की थाली का आधा हिस्सा सब्जियों से भरें। एक चौथाई हिस्सा दाल या प्रोटीन से भरें बाकी हिस्सा साबुत अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, ओट्स, ब्राउन राइस से भरें। ज्यादा चावल, आलू, मैदा और मीठे पदार्थों से परहेज करें। फाइबर युक्त आहार, पालक, ब्रोकली, भिंडी, लौकी, करेला और दालें रोजाना खाएं।

    वहीं, चीनी, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक, जूस और प्रोसेस्ड फूड को पूरी तरह से ना कहें। फल का सेवन सीमित मात्रा में करें। इसके लिए सेब, अमरूद, पपीता, जामुन व मौसमी फल अच्छे विकल्प हैं। हालांकि, मिठास वाले फलों के सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

    खाने का समय भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए चार्ट बनाएं नाश्ता सुबह 8-9 बजे के बीच, दोपहर का भोजन 1 से 2 बजे के बीच लें, व रात का भोजन 7 से 8 बजे के बीच करें। बीच में भूख लगे तो कुछ हल्का स्नैक ले सकते हैं, जैसे मुट्ठी भर मखाना या दही। नियमित 30 मिनट की सैर, हल्का व्यायाम और तनाव कम करना भी डायबिटीज नियंत्रण में मदद करता है। अगर ब्लड शुगर बढ़ जाए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

  • प्याज और आंवला रस का मिश्रण: बालों की मजबूती और ग्रोथ के लिए असरदार घरेलू उपाय

    प्याज और आंवला रस का मिश्रण: बालों की मजबूती और ग्रोथ के लिए असरदार घरेलू उपाय


    नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम सिर्फ शरीर को ही नहीं, बल्कि बालों को भी सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। तेज धूप, पसीना और धूल-मिट्टी मिलकर स्कैल्प को कमजोर कर देते हैं, जिससे बाल झड़ने, रूखापन और डैंड्रफ जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। ऐसे में प्राकृतिक उपायों की ओर लौटना सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प माना जाता है। आयुर्वेद और घरेलू नुस्खों में प्याज और आंवला का मिश्रण बालों के लिए बेहद फायदेमंद बताया गया है।

    प्याज का रस कैसे करता है काम
    प्याज का रस स्कैल्प में रक्त संचार (ब्लड सर्कुलेशन) को तेज करता है। इससे बालों की जड़ों को अधिक पोषण मिलता है और नई बालों की ग्रोथ को बढ़ावा मिलता है। इसमें मौजूद सल्फर बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है और हेयर फॉल को कम करने में मदद करता है। नियमित उपयोग से बाल घने और मजबूत हो सकते हैं।

     आंवला क्यों है बालों के लिए वरदान
    आंवला को आयुर्वेद में बालों के लिए सबसे उपयोगी औषधि माना गया है। इसमें विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं, जो बालों को अंदर से पोषण देते हैं। यह समय से पहले बालों के सफेद होने की समस्या को भी कम करता है और स्कैल्प को स्वस्थ बनाए रखता है।

     प्याज और आंवला रस का मिश्रण कैसे करें तैयार
    इस उपाय को अपनाने के लिए समान मात्रा में प्याज का रस और आंवला का रस मिलाएं। इसे अच्छी तरह मिक्स करके स्कैल्प और बालों की जड़ों पर हल्के हाथों से लगाएं। लगाने के बाद कम से कम 30 मिनट तक छोड़ दें, ताकि यह स्कैल्प में अच्छी तरह अवशोषित हो सके।
    इसके बाद हल्के गुनगुने पानी और माइल्ड शैम्पू से बाल धो लें।

     उपयोग करते समय सावधानी जरूरी
    कुछ लोगों की त्वचा संवेदनशील होती है, ऐसे में प्याज का रस लगाने से हल्की जलन या चुभन महसूस हो सकती है। यदि ऐसा हो तो तुरंत बाल धो लें। इस मिश्रण को लगाने के बाद सीधे धूप में जाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे स्कैल्प में जलन बढ़ सकती है।

     कितनी बार करें इस्तेमाल
    बेहतर परिणाम के लिए इस मिश्रण को सप्ताह में 2 बार इस्तेमाल करना उचित माना जाता है। इससे बालों की जड़ें मजबूत होती हैं और बालों का झड़ना धीरे-धीरे कम होने लगता है।

     अतिरिक्त देखभाल के उपाय
    बाल धोने के बाद हल्का हेयर सीरम लगाने से नमी बनी रहती है। यदि सीरम उपलब्ध न हो तो दही और एलोवेरा का मिश्रण भी सप्ताह में एक बार लगाया जा सकता है। इससे बालों में चमक आती है और रूखापन कम होता है।

    प्याज और आंवला का मिश्रण एक सरल, सस्ता और प्राकृतिक उपाय है, जो गर्मियों में बालों को झड़ने से रोकने और उन्हें मजबूत बनाने में मदद कर सकता है। सही तरीके से और नियमित उपयोग करने पर यह बालों की सेहत में स्पष्ट सुधार ला सकता है।

  • गर्मियों में चिड़चिड़ापन और गुस्सा क्यों बढ़ता है? इन उपायों से पाएं मन की शांति

    गर्मियों में चिड़चिड़ापन और गुस्सा क्यों बढ़ता है? इन उपायों से पाएं मन की शांति


    नई दिल्ली। गर्मी का मौसम शुरू होते ही सिर्फ तापमान ही नहीं बढ़ता, बल्कि इसका असर हमारे शरीर और मन पर भी साफ दिखाई देने लगता है। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण शरीर में पित्त दोष बढ़ जाता है, जिससे चिड़चिड़ापन, गुस्सा, बेचैनी और मानसिक अस्थिरता जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। आयुर्वेद के अनुसार जब शरीर का आंतरिक ताप असंतुलित हो जाता है, तो व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर भी जल्दी प्रतिक्रिया देने लगता है और मानसिक शांति भंग हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मौसम में शरीर को ठंडक और संतुलन देने वाली दिनचर्या अपनाना बेहद जरूरी है, जिससे मन और तन दोनों स्वस्थ रह सकें।

    पित्त बढ़ने से क्यों आता है गुस्सा?
    आयुर्वेद में पित्त को अग्नि तत्व माना गया है, जो शरीर के पाचन, ऊर्जा और तापमान को नियंत्रित करता है। गर्मियों में बाहरी तापमान बढ़ने से यह पित्त और अधिक सक्रिय हो जाता है, जिससे शरीर में गर्मी बढ़ती है। इसका सीधा असर मन पर पड़ता है और व्यक्ति जल्दी गुस्से में आ जाता है। इसके अलावा सिर में भारीपन, जलन, अनिद्रा और तनाव भी इसी असंतुलन के लक्षण हैं। ऐसे में शरीर को ठंडक देने वाले उपाय अपनाना आवश्यक हो जाता है।

    हर्बल टी से मिलेगा मानसिक सुकून
    गर्मियों में चाय और कॉफी का अत्यधिक सेवन शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है, इसलिए विशेषज्ञ इसकी जगह हर्बल टी लेने की सलाह देते हैं। तुलसी, गुलाब की पंखुड़ियां, कैमोमाइल और पैशनफ्लावर जैसी जड़ी-बूटियों से बनी हर्बल टी तनाव को कम करने में मदद करती है। इसे दिन में एक या दो बार लेने से हार्मोन संतुलित रहते हैं और मानसिक शांति बनी रहती है। यह शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडक भी प्रदान करती है।

     मानसिक तनाव का प्राकृतिक उपचार
    आयुर्वेद में नस्य क्रिया को बेहद प्रभावी माना गया है। इसमें रात के समय नाक में शुद्ध घी की कुछ बूंदें डाली जाती हैं। यह प्रक्रिया मस्तिष्क को ठंडक देती है और तंत्रिका तंत्र को शांत करती है। इससे मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन और अनिद्रा जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। नियमित रूप से करने पर यह पित्त दोष को संतुलित करने में सहायक होती है।

    चंदन का लेप: शरीर को देता है ठंडक
    चंदन की तासीर स्वभाव से ही ठंडी होती है। इसे माथे पर लगाने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और मानसिक अशांति कम होती है। गर्मियों में इसका प्रयोग विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। यह सिर में होने वाली जलन और तनाव को भी दूर करता है।

    तेल मालिश से मिलेगा आराम
    नारियल तेल या भृंगराज तेल से सिर और पैरों के तलवों की मालिश करना भी बेहद फायदेमंद होता है। इससे शरीर की थकान दूर होती है और रक्त संचार बेहतर होता है। विशेषकर तलवों की मालिश करने से तुरंत शीतलता का अनुभव होता है और गहरी नींद आने में मदद मिलती है।

    दिनचर्या में बदलाव जरूरी
    गर्मियों में हल्का और सुपाच्य भोजन करना चाहिए। अधिक मसालेदार और तले-भुने भोजन से बचना चाहिए। पर्याप्त पानी पीना, समय पर आराम करना और धूप में कम निकलना भी जरूरी है। दिन में थोड़ी देर आराम करने से शरीर की ऊर्जा संतुलित रहती है और मानसिक तनाव कम होता है।

    गर्मियों में बढ़ता गुस्सा और चिड़चिड़ापन केवल स्वभाव नहीं बल्कि शरीर के पित्त असंतुलन का संकेत है। यदि सही समय पर हर्बल उपाय, आयुर्वेदिक दिनचर्या और ठंडक देने वाले उपाय अपनाए जाएं, तो मन और शरीर दोनों को संतुलित रखा जा सकता है।

  • Summer Skincare Tips: रूखी त्वचा से छुटकारा पाने के लिए अपनाएं ये आसान और असरदार नुस्खे

    Summer Skincare Tips: रूखी त्वचा से छुटकारा पाने के लिए अपनाएं ये आसान और असरदार नुस्खे


    नई दिल्ली।  गर्मियां आते ही कई तरह की स्किन संबंधी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। जहां एक तरफ धूल-मिट्टी और पसीने के कारण कई लोगों की त्वचा ऑयली और चिपचिपी हो जाती है। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें गर्मियों में भी ड्राई स्किन से परेशान होना पड़ता है। दरअसल, त्वचा में नमी की कमी के कारण स्किन रूखी हो जाती है। इसकी वजह से चेहरा बेजान और डल नजर आने लगता है। ऐसे में लोग ऑयल बेस्ड क्रीम और मॉइश्चराइजर यूज करना शुरू कर देते हैं। लेकिन इनसे त्वचा पर दाने और रैशेज की समस्या हो सकती है। गर्मी में रूखी त्वचा की देखभाल करना बहुत जरूरी है। ऐसे में आप चाहें तो गर्मी में स्किन की ड्राईनेस दूर करने के लिए कुछ प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे आपकी त्वचा में नमी बनी रहेगी। साथ ही, त्वचा काफी सॉफ्ट और ग्लोइंग भी बनेगी। तो आइए, जानते हैं गर्मियों में रूखी त्वचा पर क्या लगाना चाहिए?

    एलोवेरा जेल
    गर्मियों में ड्राई स्किन से छुटकारा पाने के लिए आप एलोवेरा जेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें मॉइश्चराइजिंग गुण होता है, जो त्वचा को अंदर से नमी प्रदान करता है। इसके अलावा, इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी पाए जाते हैं। यह पिंपल्स, रैशेज, खुजली और जलन की समस्या को दूर करने में काफी प्रभावी होता है। इसके लिए आप ताजे एलोवेरा जेल को चेहरे पर लगाकर मसाज करें। 10-15 मिनट बाद पानी से चेहरा धो लें। इसके रेगुलर इस्तेमाल से आपकी स्किन मुलायम और चमकदार बनेगी।

    शहद
    शहद एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है। यह त्वचा की गहराई से सफाई करने के साथ ही स्किन को मॉइश्चराइज भी करता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो पिंपल्स, रैशेज और त्वचा के संक्रमण से छुटकारा दिलाने में मदद करते हैं। इसके लिए आप एक से दो चम्मच शहद लेकर चेहरे पर लगाएं। हल्के हाथों से सर्कुलर मोशन में 10 मिनट तक मसाज करें। उसके बाद पानी से चेहरा धो लें। इसके नियमित इस्तेमाल से स्किन की ड्राइनेस से छुटकारा मिलेगा।

    चंदन
    चंदन को त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। यह न सिर्फ स्किन को ठंडक पहुंचाता है, बल्कि मुलायम भी बनाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं, जो त्वचा को ड्राई होने से बचाने में मदद करते हैं। चेहर पर चंदन पाउडर लगाने से दाग-धब्बे दूर होते हैं और त्वचा में निखार आता है। इसके लिए आप 2 चम्मच चंदन पाउडर लें। इसमें 2 चम्मच दूध डालकर अच्छी तरह मिक्स कर लें। इस पेस्ट को अपने पूरे चेहरे पर लगाएं। 10-15 मिनट बाद पानी से धो लें। आप हफ्ते में 2 से 3 बार इसका प्रयोग कर सकते हैं।

    दही
    गर्मियों में ड्राई स्किन से राहत पाने के लिए आप चेहरे पर दही लगा सकते हैं। इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा में नमी को बरकरार रखने में मदद करते हैं। दही का इस्तेमाल करने से चेहरे का कालापन दूर होता है और त्वचा का निखार भी बढ़ता है। इसके लिए आप 2 चम्मच गाढ़ा दही लेकर अपने चेहरे पर लगाएं। इससे कम से कम 5 मिनट तक मसाज करें। उसके बाद पानी से चेहरा धो लें। बेहतर रिजल्ट के लिए सप्ताह में 2-3 बार इसका इस्तेमाल करें।

  • कड़वाहट में छुपा सेहत का राज: बीमारियों का काल है नीम, लिवर के लिए बनता है सुरक्षा कवच

    कड़वाहट में छुपा सेहत का राज: बीमारियों का काल है नीम, लिवर के लिए बनता है सुरक्षा कवच


    नई दिल्ली। नीम को आयुर्वेद में “कड़वा जरूर, लेकिन गुणों से भरपूर” पौधा माना गया है, जो खासकर लिवर की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद बताया जाता है। आज की अनियमित जीवनशैली, तला-भुना खाना, तनाव और कम शारीरिक गतिविधि के कारण लिवर पर लगातार दबाव बढ़ रहा है, ऐसे में नीम को एक प्राकृतिक सहायक उपाय के रूप में देखा जाता है।
    आयुर्वेद के अनुसार नीम की पत्तियों में डिटॉक्स करने वाले गुण होते हैं, जो शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। रोज सुबह खाली पेट 5 से 7 नीम की पत्तियां चबाना या उनका हल्का रस लेना लिवर को साफ रखने में सहायक माना जाता है। इससे पाचन तंत्र बेहतर होता है और शरीर में हल्कापन महसूस होता है।
    नीम सिर्फ लिवर ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर के लिए उपयोगी माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर में सूजन कम करने और इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। यह खराब कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में भी सहायक बताया जाता है, जिससे हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा कम हो सकता है।
    त्वचा के लिए भी नीम काफी उपयोगी माना जाता है। मुंहासे, दाग-धब्बे और त्वचा संक्रमण जैसी समस्याओं में नीम की पत्तियों का पेस्ट या नीम के पानी से चेहरा धोना लाभकारी हो सकता है। इसके जीवाणुरोधी गुण त्वचा को साफ और स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
    नीम को कई रूपों में दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है, जैसे पत्तियों का काढ़ा, नीम के फूलों का शर्बत या हल्का उबालकर सेवन। यह शरीर को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स करने में मदद करता है और लंबे समय तक स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक माना जाता है।
    विशेषज्ञों का मानना है कि नीम जैसी प्राकृतिक जड़ी-बूटियां लिवर को मजबूत करने में सहायक हो सकती हैं, लेकिन किसी भी औषधीय पौधे का नियमित सेवन शुरू करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है।