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  • आंखों की समस्या केवल थकान नहीं पित्त असंतुलन भी हो सकता है कारण, जानें देखभाल के सरल उपाय

    आंखों की समस्या केवल थकान नहीं पित्त असंतुलन भी हो सकता है कारण, जानें देखभाल के सरल उपाय

    नई दिल्ली: आज की आधुनिक जीवनशैली में आंखों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लंबे समय तक मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल स्क्रीन के उपयोग के कारण आंखों में भारीपन, जलन और पानी आने जैसी परेशानियां आम हो गई हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समस्या सुबह उठते ही अधिक महसूस हो तो इसे केवल थकान मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि यह शरीर के अंदरूनी असंतुलन का संकेत भी हो सकता है।

    आयुर्वेद के अनुसार आंखों की सेहत केवल बाहरी कारणों पर निर्भर नहीं करती बल्कि शरीर के भीतर मौजूद पित्त संतुलन से भी गहराई से जुड़ी होती है। पित्त शरीर में गर्मी और ऊर्जा का संतुलन बनाए रखने का कार्य करता है, लेकिन जब यह असंतुलित हो जाता है तो शरीर में अत्यधिक गर्मी उत्पन्न होने लगती है। इसका सीधा प्रभाव आंखों पर पड़ता है जिससे जलन, सूखापन और भारीपन जैसी समस्याएं सामने आती हैं।

    दैनिक जीवन की कई आदतें इस असंतुलन को बढ़ाने में भूमिका निभाती हैं। देर तक स्क्रीन देखना, नींद पूरी न होना, तनावपूर्ण दिनचर्या और अनियमित खानपान शरीर में पित्त को प्रभावित करते हैं। आयुर्वेद में माना गया है कि आंखें शरीर के पित्त से जुड़ी होती हैं और पित्त रक्त से जुड़ा होता है। रक्त का संबंध पाचन और लिवर से होता है, ऐसे में जब पाचन और लिवर पर दबाव बढ़ता है तो इसका असर आंखों की सेहत पर भी दिखाई देता है।

    इस समस्या से राहत पाने के लिए जीवनशैली में कुछ बदलाव करना बेहद जरूरी है। रात में हल्का और संतुलित भोजन करने से पाचन तंत्र पर दबाव कम होता है और शरीर को आराम मिलता है। सुबह उठते ही ठंडे पानी से आंखों को धोने से आंखों की थकान कम होती है और ताजगी महसूस होती है। दिन में दो बार त्रिफला जल से आंखों की सफाई करना भी आंखों के लिए फायदेमंद माना जाता है क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से आंखों को ठंडक और आराम प्रदान करता है।

    इसके अलावा खीरा या ककड़ी का उपयोग आंखों पर करने से सूजन और जलन में राहत मिलती है। लगातार स्क्रीन पर काम करने से बचना और बीच-बीच में आंखों को आराम देना भी जरूरी है। डिजिटल आदतों में संतुलन लाना आंखों की सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

    आहार का भी आंखों की सेहत पर गहरा प्रभाव पड़ता है। विटामिन ए, सी और ई से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे आंवला, गाजर, अनार, पपीता, शकरकंद, कद्दू, दूध और अंडे आंखों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। ये पोषक तत्व न केवल आंखों की रोशनी को बेहतर बनाते हैं बल्कि थकान और जलन को भी कम करते हैं।

    शरीर के भीतर होने वाले बदलावों को समझना और सही जीवनशैली अपनाना आंखों की लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।

  • थायराइड और हार्मोन असंतुलन में फायदेमंद मानी जाती है कंचनार गुग्गुलु, जानें इसके आयुर्वेदिक लाभ

    थायराइड और हार्मोन असंतुलन में फायदेमंद मानी जाती है कंचनार गुग्गुलु, जानें इसके आयुर्वेदिक लाभ

    नई दिल्ली। सदियों से भारत में जड़ी-बूटियों के माध्यम से कई बीमारियों का उपचार किया जाता रहा है। आयुर्वेद में कंचनार गुग्गुलु को एक महत्वपूर्ण औषधि माना गया है, जिसका उपयोग शरीर की गांठों, सूजन और हार्मोन असंतुलन जैसी समस्याओं में किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह औषधि थायराइड जैसी समस्याओं में भी सहायक भूमिका निभा सकती है, बशर्ते इसका सेवन चिकित्सक की सलाह से किया जाए।

    कंचनार गुग्गुलु क्या है?

    कंचनार गुग्गुलु आयुर्वेद की एक प्रसिद्ध औषधि है, जिसे मुख्य रूप से कंचनार वृक्ष की छाल और गुग्गुलु से तैयार किया जाता है। यह शरीर में कफ और मेद धातु को संतुलित करने में मदद करती है और ग्रंथियों की सूजन को कम करने में सहायक मानी जाती है।

    थायराइड और हार्मोन संतुलन में मददगार

    आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में विषैले तत्व (टॉक्सिन) जमा होने से गांठें और हार्मोन असंतुलन की समस्या बढ़ सकती है, जिससे थायराइड और पीसीओडी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। कंचनार गुग्गुलु शरीर से टॉक्सिन निकालने में मदद करता है और मेटाबॉलिज्म को सुधारकर हार्मोन संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है।

    एंटी-इंफ्लेमेटरी और डिटॉक्स गुण

    कंचनार गुग्गुलु में एंटी-इंफ्लेमेटरी और डिटॉक्सिफाइंग गुण पाए जाते हैं। यह शरीर की सूजन को कम करता है और पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है, जिससे संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार होता है।

    सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी

    विशेषज्ञों का कहना है कि कंचनार गुग्गुलु पाउडर और टैबलेट दोनों रूप में उपलब्ध है, लेकिन इसका सेवन सही मात्रा और सही स्थिति में ही करना चाहिए। इसलिए किसी भी आयुर्वेदिक उपचार को शुरू करने से पहले चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है।

    जीवनशैली में बदलाव भी जरूरी

    इसके साथ ही केवल दवा पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी जरूरी है। जंक फूड और अधिक चीनी का सेवन कम करना चाहिए, नियमित व्यायाम और सुबह की सैर को दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। आयुर्वेद में हल्दी वाला दूध और हरे धनिए का सेवन भी थायराइड संतुलन में सहायक माना गया है।

  • घर या ऑफिस कहीं भी करें ‘एंकल मूवमेंट’, टखनों के दर्द और जकड़न से मिलेगा तुरंत आराम

    घर या ऑफिस कहीं भी करें ‘एंकल मूवमेंट’, टखनों के दर्द और जकड़न से मिलेगा तुरंत आराम


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी और लंबे समय तक बैठकर काम करने वाली जीवनशैली के कारण शरीर में जकड़न और दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है। खासकर टखनों, पीठ, कंधों और कमर में अकड़न आम हो गई है। ऐसे में विशेषज्ञ छोटे लेकिन असरदार व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दे रहे हैं। इन्हीं में से एक है ‘एंकल मूवमेंट’, जो टखनों की जकड़न और दर्द में तेजी से राहत देता है।
    आयुष मंत्रालय भी मानता है प्रभावी
    भारत सरकार का आयुष मंत्रालय भी एंकल मूवमेंट को एक सरल और प्रभावी व्यायाम मानता है। इसे रोजाना सिर्फ 3 से 5 मिनट करने से पैरों में रक्त संचार बेहतर होता है, जकड़न कम होती है और शरीर का संतुलन मजबूत होता है। यह व्यायाम घर, ऑफिस या किसी भी जगह आसानी से किया जा सकता है।
    टखनों और पैरों के लिए बेहद फायदेमंद
    विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने वाले लोगों के लिए यह एक्सरसाइज बेहद लाभकारी है। नियमित अभ्यास से टखनों की लचीलापन बढ़ती है, जोड़ों की कार्यक्षमता सुधरती है और चलने-फिरने में आसानी होती है। यह खासकर बुजुर्गों के लिए गिरने के खतरे को भी कम करता है।
    आसान है करने की प्रक्रिया
    एंकल मूवमेंट करना बेहद सरल है। इसके लिए पहले सीधे खड़े होकर शरीर को संतुलित करें और एक पैर को लगभग 9 इंच तक ऊपर उठाएं। फिर उस पैर को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे, दाएं-बाएं और गोल घुमाव में चलाएं—पहले घड़ी की दिशा में और फिर उल्टी दिशा में। हर दिशा में 5 से 10 बार यह प्रक्रिया दोहराएं, फिर दूसरे पैर से भी यही करें।
    किसी भी समय किया जा सकता है अभ्यास
    यह व्यायाम दिन में किसी भी समय किया जा सकता है, जैसे सुबह उठने के बाद या काम के दौरान छोटे ब्रेक में। जरूरत पड़ने पर दीवार या कुर्सी का सहारा भी लिया जा सकता है ताकि संतुलन बना रहे।
    नियमित अभ्यास से मिलते हैं कई लाभ
    नियमित एंकल मूवमेंट करने से पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, सूजन और थकान कम होती है और जोड़ों की लचीलापन बढ़ती है। इससे घुटनों और कूल्हों पर दबाव भी कम पड़ता है और शरीर अधिक सक्रिय रहता है।
  • शरीर का तापमान संतुलित रखने वाला नेचुरल ड्रिंक: लस्सी के फायदे और सही समय

    शरीर का तापमान संतुलित रखने वाला नेचुरल ड्रिंक: लस्सी के फायदे और सही समय


    नई दिल्ली।  गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंडक और ताजगी देने वाले पेय पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में लोग अक्सर कोल्ड ड्रिंक्स और आर्टिफिशियल पेय पदार्थों का सेवन करते हैं, जो सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। इसके मुकाबले लस्सी एक पारंपरिक और प्राकृतिक ड्रिंक है, जो न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि शरीर के तापमान को संतुलित रखने में भी मदद करती है।
    दही से बनने वाली सेहतमंद ड्रिंक
    लस्सी दही से तैयार किया जाने वाला एक लोकप्रिय भारतीय पेय है, जिसे मथकर उसमें चीनी या नमक और अन्य स्वाद बढ़ाने वाली चीजें मिलाकर बनाया जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसका स्वाद और बनाने का तरीका भी अलग-अलग होता है। यह स्वाद और सेहत का बेहतरीन संयोजन मानी जाती है।
    गर्मी में शरीर को देती है ठंडक
    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लस्सी एक प्राकृतिक कूलिंग ड्रिंक है जिसकी तासीर ठंडी होती है। गर्मियों में इसका सेवन शरीर को तुरंत राहत देता है और तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ तुरंत ऊर्जा भी प्रदान करती है।
    पाचन और हड्डियों के लिए फायदेमंद
    लस्सी पाचन तंत्र को मजबूत करने में सहायक होती है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स आंतों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं। इसके अलावा इसमें पाया जाने वाला कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है।
    लस्सी पीने का सही समय
    विशेषज्ञों के अनुसार लस्सी का सेवन दिन के समय, विशेषकर दोपहर में करना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। दोपहर के भोजन के साथ लस्सी पीने से पाचन बेहतर होता है और शरीर को गर्मी से राहत मिलती है।
    रात में सेवन से बचें
    हालांकि कुछ लोग रात में भी लस्सी का सेवन करते हैं, लेकिन यह सभी के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। रात में इसका सेवन कुछ लोगों में भारीपन या पाचन संबंधी समस्या पैदा कर सकता है। इसलिए इसे दिन में ही पीना बेहतर माना जाता है।
    गर्मी में प्राकृतिक राहत
    कुल मिलाकर, लस्सी गर्मियों में शरीर के लिए एक प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है, जो बिना किसी नुकसान के शरीर को ठंडक और ऊर्जा दोनों प्रदान करती है।

  • केदारनाथ धाम: जानिए कैसे हुई इस नाम की उत्पत्ति, स्कंदपुराण में वर्णित इससे जुड़ा रहस्य

    केदारनाथ धाम: जानिए कैसे हुई इस नाम की उत्पत्ति, स्कंदपुराण में वर्णित इससे जुड़ा रहस्य

    नई दिल्ली। उत्तराखंड के चार धामों में से एक केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अक्षय तृतीया से चारधाम यात्रा की शुरुआत होती है और गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के बाद अब 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। यह पवित्र धाम भगवान शिव को समर्पित एक प्रमुख ज्योतिर्लिंग माना जाता है।

    पांडवों से जुड़ी कथा, लेकिन यह पूरी कहानी नहीं
    अक्सर केदारनाथ धाम के इतिहास को महाभारत काल से जोड़कर देखा जाता है, जिसमें पांडवों के तप और शिवजी के बैल रूप में प्रकट होने की कथा प्रचलित है। मान्यता है कि पांडवों ने शिवजी के दर्शन और आशीर्वाद के लिए तप किया था और बाद में भगवान शिव ने केदार घाटी में बैल का रूप धारण कर उन्हें दर्शन दिए थे। इसी आधार पर केदारनाथ धाम का संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है।

    स्कंदपुराण में मिलता है केदारनाथ नाम का वास्तविक स्रोत
    हालांकि, केदारनाथ नाम और इसकी उत्पत्ति को लेकर एक विस्तृत वर्णन स्कंदपुराण में मिलता है। इस कथा के अनुसार, एक बार हिरण्याक्ष नामक दैत्य ने तीनों लोकों पर अधिकार कर देवताओं को स्वर्ग से बाहर कर दिया था। पराजित होकर देवराज इंद्र अन्य देवताओं के साथ हिमालय क्षेत्र में पहुंचे और मंदाकिनी नदी के किनारे भगवान शिव की तपस्या करने लगे। इंद्र की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव महिष (भैंसे) के रूप में प्रकट हुए। उसी रूप में उन्होंने इंद्र से पूछा “के दारयामि?” यानी “किसका विनाश करूं?” यही प्रश्न आगे चलकर ‘केदार’ नाम की उत्पत्ति का आधार बना।

    देवताओं की विनती और दैत्यों का अंत
    इंद्र ने भगवान शिव को उन दैत्यों के नाम बताए जो देवताओं के लिए संकट बने हुए थे हिरण्याक्ष, सुबाहु, वक्त्रकंधर, त्रिशृंग और लोहिताक्ष। भगवान शिव ने भैंसे के रूप में ही इन दैत्यों का संहार किया, जिससे देवताओं को राहत मिली। इसके बाद भगवान शिव ने एक कुंड का निर्माण किया और इंद्र की प्रार्थना पर उसी स्थान पर केदारनाथ रूप में निवास करने का वरदान दिया। कहा जाता है कि इस स्थान पर पूजा और जल अर्पण से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उनके कुल का उद्धार होता है।

    मोक्ष और आस्था का केंद्र
    मान्यता है कि यहां किया गया पिंडदान और पूजा अत्यंत फलदायी होती है और यह स्थल मोक्ष प्राप्ति का विशेष केंद्र माना जाता है। यही कारण है कि केदारनाथ धाम को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली तीर्थों में स्थान प्राप्त है।

  • कार्बोहाइड्रेट पर बड़ा भ्रम: क्या इन्हें छोड़ना वाकई जरूरी है? एक्सपर्ट ने बताया सच

    कार्बोहाइड्रेट पर बड़ा भ्रम: क्या इन्हें छोड़ना वाकई जरूरी है? एक्सपर्ट ने बताया सच


    नई दिल्ली । आजकल वजन बढ़ने की समस्या तेजी से बढ़ती जीवनशैली से जुड़ी एक आम चुनौती बन चुकी है। इसी कारण लोग वजन घटाने के लिए तरह-तरह के डाइट प्लान अपनाते हैं, जिनमें सबसे आम तरीका कार्बोहाइड्रेट यानी कार्ब्स को पूरी तरह से छोड़ देना माना जाता है। बहुत से लोग यह मान लेते हैं कि रोटी, चावल, ब्रेड या आलू खाने से वजन बढ़ता है और इन्हें बंद कर देने से तेजी से वजन कम किया जा सकता है।

    लेकिन विशेषज्ञों और विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO की राय इस धारणा को पूरी तरह गलत बताती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार कार्बोहाइड्रेट वजन बढ़ाने के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि असली समस्या उनके प्रकार और मात्रा में होती है। शरीर को ऊर्जा देने वाले मुख्य स्रोतों में कार्बोहाइड्रेट सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इन्हें पूरी तरह बंद कर देना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक आम मिथक है कि सभी कार्बोहाइड्रेट वजन बढ़ाते हैं। वास्तव में शरीर को ऊर्जा, मस्तिष्क को सक्रिय रखने और दिनभर की गतिविधियों के लिए कार्ब्स की आवश्यकता होती है। अगर इन्हें पूरी तरह बंद कर दिया जाए तो शरीर में कमजोरी, थकान, चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

    WHO और पोषण विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रिफाइंड और प्रोसेस्ड कार्ब्स जैसे सफेद चीनी, सफेद मैदा, सफेद चावल, बिस्किट और कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन सीमित किया जाए। ये कार्ब्स तेजी से पचते हैं और शरीर में फैट बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं। इसके बजाय कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट को डाइट में शामिल करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।

    कॉम्प्लेक्स कार्ब्स में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पाचन को धीमा और स्थिर बनाता है। इससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और बार-बार भूख लगने की समस्या कम होती है। यही कारण है कि ये कार्ब्स वजन नियंत्रित करने में मदद करते हैं। साबुत अनाज जैसे गेहूं, जौ, बाजरा, रागी, ब्राउन राइस, दालें और बीन्स को हेल्दी कार्ब्स की श्रेणी में रखा जाता है।

    इसके अलावा फल जैसे सेब, केला और संतरा, साथ ही सब्जियां, नट्स और बीज भी शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ-साथ वजन संतुलन में मदद करते हैं। ये सभी खाद्य पदार्थ शरीर में धीरे-धीरे ऊर्जा छोड़ते हैं और ब्लड शुगर को स्थिर बनाए रखते हैं।

    विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल कार्बोहाइड्रेट कम करना वजन घटाने का सही तरीका नहीं है। एक संतुलित आहार जिसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और हेल्दी फैट का सही अनुपात हो, वही सबसे प्रभावी माना जाता है। इसके साथ नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद भी बेहद जरूरी है।

    लंबे समय तक पूरी तरह कार्ब-फ्री डाइट अपनाना न सिर्फ मुश्किल है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए बेहतर तरीका यह है कि प्रोसेस्ड कार्ब्स की जगह हेल्दी और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स को रोजमर्रा की डाइट में शामिल किया जाए, जिससे वजन नियंत्रण भी हो और शरीर को जरूरी ऊर्जा भी मिलती रहे।

  • गर्मियों में आंखों को दें तुरंत राहत, ठंडा कॉटन पैड है सबसे आसान और असरदार उपाय

    गर्मियों में आंखों को दें तुरंत राहत, ठंडा कॉटन पैड है सबसे आसान और असरदार उपाय


    नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम जहां शरीर को थका देता है वहीं आंखों पर भी इसका गहरा असर देखने को मिलता है। तेज धूप गर्म हवा और बढ़ता स्क्रीन टाइम आंखों में जलन सूजन और थकान जैसी समस्याओं को जन्म देता है। मोबाइल कंप्यूटर और लैपटॉप पर घंटों काम करने से आंखें ड्राई हो जाती हैं और उनमें भारीपन महसूस होने लगता है। ऐसे में एक सरल घरेलू उपाय ठंडा कॉटन पैड आंखों को तुरंत राहत देने में बेहद कारगर साबित होता है।

    आयुर्वेद और स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी आंखों की देखभाल के लिए ठंडे सेक को फायदेमंद मानते हैं। आयुष मंत्रालय द्वारा भी आंखों की थकान और जलन से राहत के लिए ठंडे कॉटन पैड के इस्तेमाल की सलाह दी गई है। यह उपाय पूरी तरह सुरक्षित है और इसे किसी भी उम्र के लोग आसानी से अपना सकते हैं।

    ठंडे कॉटन पैड का उपयोग करना बेहद आसान है। सबसे पहले चेहरे को साफ पानी से धो लें ताकि धूल और पसीना हट जाए। इसके बाद साफ और मुलायम कॉटन पैड लें और उन्हें ठंडे पानी में भिगो दें। हल्का सा निचोड़कर अतिरिक्त पानी निकाल लें ताकि पैड ज्यादा गीला न हो। फिर आराम से लेट जाएं और आंखें बंद करके दोनों आंखों पर कॉटन पैड रख लें। करीब 10 मिनट तक इसी स्थिति में आराम करें और गहरी सांस लेते रहें।

    यह ठंडा सेक आंखों की मांसपेशियों को तुरंत आराम देता है और सूजन को कम करता है। साथ ही आंखों में रक्त संचार बेहतर होता है जिससे थकान और भारीपन दूर होता है। अगर चाहें तो पानी में गुलाब जल की कुछ बूंदें मिलाकर इसका उपयोग कर सकते हैं जिससे आंखों को अतिरिक्त ताजगी और सुकून मिलता है।

    इस उपाय को दिन में एक बार या जरूरत के अनुसार किया जा सकता है। खासकर तब जब आप लंबे समय तक स्क्रीन पर काम कर चुके हों या धूप में रहने के कारण आंखों में जलन हो रही हो। शाम के समय इसे करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है क्योंकि इस समय आंखों को आराम की जरूरत होती है।

    हालांकि यह उपाय सामान्य थकान और जलन के लिए बेहद प्रभावी है लेकिन अगर आंखों में लगातार दर्द धुंधलापन या कोई गंभीर समस्या बनी रहती है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। इसके अलावा ध्यान रखें कि हमेशा साफ कॉटन पैड का इस्तेमाल करें और पानी बहुत ज्यादा ठंडा न हो।

    इस तरह ठंडा कॉटन पैड एक सरल सस्ता और प्रभावी तरीका है जो गर्मियों में आंखों को राहत देने के साथ उन्हें स्वस्थ बनाए रखने में भी मदद करता है। नियमित उपयोग से आंखें तरोताजा रहती हैं और दिनभर की थकान आसानी से दूर हो जाती है।

  • Char Dham Yatra 2026: कपाट खुलते ही उमड़ी भीड़, पहले दिन 10 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

    Char Dham Yatra 2026: कपाट खुलते ही उमड़ी भीड़, पहले दिन 10 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन


    नई दिल्ली । Chardham Yatra 2026 की शुरुआत के साथ ही श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक है। गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलते ही पहले दिन ही हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यात्रा के पहले दिन 10 हजार से ज्यादा तीर्थयात्रियों ने दोनों धामों में दर्शन किए, जिससे इस साल भी भारी भीड़ के संकेत मिल गए हैं।

    अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर 19 अप्रैल को दोनों धामों के कपाट विधि-विधान के साथ खोले गए, जिसके साथ ही चार धाम यात्रा का औपचारिक शुभारंभ हो गया। प्रशासन ने पहले से ही बड़े स्तर पर तैयारियां की थीं, क्योंकि इस बार रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद जताई जा रही है।

    Chardham Yatra के पहले दिन उमड़ी भारी भीड़
    कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए भक्त सुबह से ही मंदिरों के बाहर जुटने लगे थे। पहले ही दिन 10 हजार से ज्यादा लोगों का दर्शन करना इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में संख्या और तेजी से बढ़ सकती है।

    सरकार के मुताबिक, इस बार यात्रा के लिए पहले से ही लाखों लोगों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है, जिससे साफ है कि 2026 की चार धाम यात्रा पिछले वर्षों की तुलना में ज्यादा व्यस्त रहने वाली है।

    प्रशासन की तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था
    श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, स्वास्थ्य और ट्रैफिक व्यवस्था को मजबूत किया है। रास्तों पर मेडिकल टीम, हेल्प डेस्क और पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो।

    इसके अलावा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए हर जरूरी इंतजाम किए गए हैं।

    कुल मिलाकर, चार धाम यात्रा 2026 की शुरुआत जोरदार रही है। पहले ही दिन भारी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी यह दिखाती है कि इस साल यात्रा में रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिल सकती है।

  • किचन में कीड़े-मकोड़ों से छुटकारा पाने के लिए अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय, केमिकल स्प्रे की जरूरत नहीं

    किचन में कीड़े-मकोड़ों से छुटकारा पाने के लिए अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय, केमिकल स्प्रे की जरूरत नहीं


    नई दिल्ली: घर की रसोई यानी किचन न सिर्फ खाना बनाने की जगह होती है, बल्कि यह पूरे परिवार की सेहत से जुड़ी सबसे अहम जगह मानी जाती है। यहां जरा सी लापरवाही भी कीड़े-मकोड़ों और कॉकरोच जैसी समस्या को बढ़ा सकती है। नमी, खाने के टुकड़े और गंदगी के कारण किचन में छोटे कीड़े आसानी से पनपने लगते हैं, जो न केवल देखने में असुविधाजनक होते हैं बल्कि कई तरह की बीमारियों का कारण भी बन सकते हैं। आमतौर पर लोग इन्हें भगाने के लिए केमिकल स्प्रे का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इनमें मौजूद हानिकारक तत्व सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। ऐसे में घरेलू और प्राकृतिक उपाय एक सुरक्षित विकल्प साबित हो सकते हैं।

    किचन में कीड़ों से छुटकारा पाने के लिए प्याज एक असरदार प्राकृतिक उपाय माना जाता है। प्याज की तेज गंध कीड़ों को बिल्कुल पसंद नहीं होती और यह उन्हें दूर रखने में मदद करता है। प्याज का रस निकालकर उसमें थोड़ा बेकिंग सोडा मिलाकर पानी के साथ स्प्रे तैयार किया जा सकता है। इस घोल को किचन के कोनों, सिंक के आसपास और गैस चूल्हे के पीछे छिड़कने से कीड़ों की समस्या कम हो सकती है।

    लहसुन भी कीड़ों को भगाने में बेहद प्रभावी माना जाता है। इसकी तेज गंध कॉकरोच और अन्य कीड़ों को दूर रखती है। प्याज और लहसुन को मिलाकर तैयार किया गया घोल और उसमें काली मिर्च मिलाकर स्प्रे बनाने से इसका असर और भी बढ़ जाता है। इसे नियमित रूप से इस्तेमाल करने से किचन में कीड़ों की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।

    इसके साथ ही किचन की साफ-सफाई का ध्यान रखना सबसे जरूरी है। रात में सिंक में जूठे बर्तन छोड़ना कीड़ों को आकर्षित करता है, इसलिए बर्तन तुरंत साफ करने चाहिए। किचन की सतह पर जमा नमी भी कीड़ों के पनपने का कारण बनती है, इसलिए काम खत्म होने के बाद स्लैब और सिंक को सूखे कपड़े से साफ करना चाहिए।

    स्वच्छ और सूखा किचन न केवल कीड़ों को दूर रखता है, बल्कि परिवार की सेहत को भी सुरक्षित बनाता है। नियमित सफाई के साथ प्राकृतिक उपाय अपनाकर इस समस्या से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है।

  • पेट की हर समस्या का देसी इलाज, बेल का शरबत बनाए पाचन मजबूत और शरीर तरोताजा

    पेट की हर समस्या का देसी इलाज, बेल का शरबत बनाए पाचन मजबूत और शरीर तरोताजा


    नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम आते ही शरीर पर उसका असर साफ दिखाई देने लगता है। तेज गर्मी और पसीने के कारण जहां एक ओर डिहाइड्रेशन की समस्या बढ़ती है वहीं दूसरी ओर पेट से जुड़ी परेशानियां भी आम हो जाती हैं। अपच गैस कब्ज और पेट फूलने जैसी दिक्कतें लोगों को परेशान करने लगती हैं। ऐसे में अगर आप बाजार के ठंडे और शक्कर से भरपूर पेयों से दूरी बनाकर कोई प्राकृतिक और फायदेमंद विकल्प तलाश रहे हैं तो बेल का शरबत आपके लिए एक बेहतरीन उपाय साबित हो सकता है।

    बेल का शरबत भारतीय परंपरा में लंबे समय से गर्मियों के लिए एक असरदार पेय माना जाता रहा है। आयुष मंत्रालय भी इसे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताता है। बेल में फाइबर प्रोटीन आयरन और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं और पाचन तंत्र को बेहतर करते हैं।

    अगर आपका पाचन कमजोर है या खाने के बाद पेट में भारीपन महसूस होता है तो बेल का शरबत आपके लिए खास तौर पर फायदेमंद है। इसमें मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है और गैस कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। यह पेट को साफ रखता है और आंतों को स्वस्थ बनाए रखता है जिससे भोजन सही तरीके से पच पाता है।

    गर्मियों में दस्त और डायरिया की समस्या भी काफी देखने को मिलती है। ऐसे में बेल का शरबत एक प्राकृतिक उपचार की तरह काम करता है और शरीर को जल्दी रिकवर करने में मदद करता है। यह शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है।

    इसके अलावा यह शरीर को ठंडक देने के साथ साथ ऊर्जा भी प्रदान करता है। गर्मी में लगातार पसीना निकलने से शरीर थका हुआ महसूस करता है लेकिन बेल का शरबत पीने से ताजगी बनी रहती है और पूरे दिन एनर्जी महसूस होती है।

    बेल का शरबत रक्त शुद्धि में भी मदद करता है। यह शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालता है जिससे त्वचा पर भी अच्छा असर पड़ता है और चेहरा साफ और चमकदार दिखाई देता है। इसके नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है और हृदय स्वास्थ्य बेहतर होता है। महिलाओं के लिए भी यह शरबत काफी लाभकारी माना जाता है। विशेष रूप से प्रसव के बाद यह शरीर को पोषण देने और दूध बढ़ाने में सहायक होता है।

    बेल का शरबत बनाना बेहद आसान है। इसके लिए ताजा बेल का गूदा निकालकर उसे अच्छी तरह मैश कर लें और उसमें ठंडा पानी मिलाएं। स्वाद के लिए काला नमक जीरा पाउडर और शहद या गुड़ डाल सकते हैं। इसे अच्छी तरह मिलाकर ठंडा कर लें और सेवन करें।

    अगर आप रोजाना सुबह खाली पेट या दोपहर के बाद एक गिलास बेल का शरबत पीते हैं तो इससे पाचन बेहतर रहता है और शरीर पूरे दिन तरोताजा बना रहता है। यह एक सस्ता प्राकृतिक और बेहद असरदार उपाय है जो गर्मियों में सेहत को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।