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  • सिर्फ 5 मिनट में तैयार करें चटपटा महाराष्ट्रीयन ठेचा, बढ़ाए खाने का मज़ा

    सिर्फ 5 मिनट में तैयार करें चटपटा महाराष्ट्रीयन ठेचा, बढ़ाए खाने का मज़ा


    नई दिल्ली । भारतीय खाने में चटनी का खास महत्व होता है जो साधारण भोजन का स्वाद भी कई गुना बढ़ा देती है। महाराष्ट्रीयन ठेचा ऐसी ही तीखी और चटपटी चटनी है जो दाल-चावल या साधारण रोटियों के साथ खाने के मज़े को दोगुना कर देती है। अगर सब्जी बनाने का मन न हो तो यह रेसिपी आपकी रसोई की रेस्क्यू साबित हो सकती है।

    महाराष्ट्रीयन ठेचा क्या है?
    ठेचा महाराष्ट्र की पारंपरिक चटनी है जिसे मुख्य रूप से हरी मिर्च लहसुन और मूंगफली से बनाया जाता है। इसे ज्वार या बाजरे की भाकरी के साथ बड़े चाव से खाया जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसे ओखली या सिलबट्टे पर दरदरा कुचला जाता है जिससे इसका टेक्सचर और स्वाद देसी और अनोखा होता है।

    सिर्फ 5 मिनट में तैयार

    ठेचा बनाने के लिए किसी लंबी तैयारी की जरूरत नहीं है। केवल हरी मिर्च लहसुन की कलियां मूंगफली थोड़ा जीरा और नमक का इस्तेमाल करके मिनटों में इसे तैयार किया जा सकता है। यह रेसिपी खासकर हॉस्टल स्टूडेंट्स या व्यस्त लोगों के लिए परफेक्ट है।

    बनाने की आसान विधि

    एक पैन में थोड़ा तेल गर्म करें।हरी मिर्च डंठल हटाकर लहसुन की कलियां और मूंगफली डालें।इन्हें तब तक भूनें जब तक मिर्च पर हल्के भूरे धब्बे न आएं और मूंगफली कुरकुरी न हो जाए। थोड़ा जीरा भी डालें। भुनी हुई सामग्री को ओखली में निकालें और स्वादानुसार नमक मिलाएं। इसे दरदरा कूट लें बारीक पेस्ट नहीं बनाना है। इच्छानुसार नींबू का रस या बारीक कटा हरा धनिया डाल सकते हैं।

    सेवन और स्टोरेज टिप्स

    ठेचा पराठे पूरी दाल-चावल या सादी रोटी के साथ खाया जा सकता है। इसे एयरटाइट कंटेनर में भरकर फ्रिज में 5-7 दिन तक फ्रेश रखा जा सकता है। सफर में यह त्वरित और स्वादिष्ट विकल्प साबित होता है।

    स्वाद और सेहत

    मिर्च और लहसुन का यह मेल सिर्फ खाने का मज़ा नहीं बढ़ाता बल्कि मेटाबॉलिज्म को भी बूस्ट करता है। अगली बार जब सब्जी बनाने का मन न हो तो इस चटपटी महाराष्ट्रीयन ठेचा को ट्राई जरूर करें।

  • तेज धूप में स्किन जल रही है? बाहर निकलने से पहले अपनाएं ये 4 असरदार टिप्स

    तेज धूप में स्किन जल रही है? बाहर निकलने से पहले अपनाएं ये 4 असरदार टिप्स


    नई दिल्ली । जैसे ही मार्च का महीना आता है उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में गर्मी का असर दिखना शुरू हो जाता है। पारा बढ़ने के साथ ही तेज धूप उमस और पसीना लोगों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं। इस मौसम में सबसे अधिक प्रभावित हमारी त्वचा होती है। सूरज की हानिकारक किरणें त्वचा को टैन करती हैं सनबर्न और समय से पहले झुर्रियों का कारण भी बनती हैं।अगर आपको गर्मी में बाहर निकलना पड़ता है तो अपनी त्वचा का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ आसान और असरदार उपाय अपनाकर आप त्वचा को तेज धूप से बचा सकते हैं।

    सनस्क्रीन धूप से सबसे मजबूत सुरक्षा
    धूप में निकलने से कम से कम 20 मिनट पहले चेहरे गर्दन हाथ और पैरों पर SPF 30+ वाला सनस्क्रीन जरूर लगाएं। याद रखें कि एक बार सनस्क्रीन लगाने से काम नहीं चलता। अगर आप लंबे समय तक बाहर हैं तो हर 3-4 घंटे में इसे दोबारा लगाना जरूरी है। सनस्क्रीन त्वचा को सीधे यूवी किरणों से बचाता है और टैनिंग को रोकता है।

    हाइड्रेशन अंदर से रखे त्वचा को नमी से भरपूर

    त्वचा की चमक सिर्फ क्रीम या लोशन पर निर्भर नहीं करती बल्कि शरीर के अंदर मौजूद नमी भी महत्वपूर्ण होती है। गर्मियों में पसीने के जरिए शरीर का पानी बाहर निकल जाता है। इसे पूरा करने के लिए दिन भर में कम से कम 3-4 लीटर पानी पीना चाहिए। इसके अलावा तरबूज खरबूजा खीरा और संतरे जैसे पानी से भरपूर मौसमी फलों को आहार में शामिल करें। इससे त्वचा प्राकृतिक रूप से हाइड्रेटेड और कोमल बनी रहती है।

    पहनावा और समय का ध्यान

    तेज धूप सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक सबसे अधिक हानिकारक होती है। इस दौरान अगर संभव हो तो घर के अंदर रहें। यदि बाहर निकलना जरूरी है तो हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें। सूती कपड़े पसीने को सोखते हैं और त्वचा को सांस लेने में मदद करते हैं। साथ ही स्कार्फ चौड़े किनारे वाली टोपी धूप का चश्मा और छाता का उपयोग करना न भूलें।

    सनबर्न और टैनिंग के घरेलू उपाय

    अगर धूप के कारण त्वचा झुलस गई या टैनिंग हो गई है तो घबराने की जरूरत नहीं है। किचन में मौजूद कुछ प्राकृतिक चीजें राहत देती हैं। प्रभावित हिस्से पर ठंडा एलोवेरा जेल लगाएं। इसके अलावा दही खीरे का रस या टमाटर का रस लगाने से भी टैनिंग कम होती है और त्वचा को ठंडक मिलती है। गर्मियों में त्वचा का ख्याल रखना न सिर्फ आपकी सुंदरता बढ़ाता है बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी जरूरी है। इन आसान टिप्स को अपनाकर आप धूप के नुकसान से अपनी त्वचा को बचा सकते हैं और प्राकृतिक रूप से कोमल और चमकदार बनाए रख सकते हैं।

  • Chaitra Navratri 2026: सेलेब्रिटी जैसा फेस्टिव लुक पाने के लिए ट्राई करें ये 7 ट्रेंडी कॉटन कुर्ता सेट्स

    Chaitra Navratri 2026: सेलेब्रिटी जैसा फेस्टिव लुक पाने के लिए ट्राई करें ये 7 ट्रेंडी कॉटन कुर्ता सेट्स

    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि का त्योहार आस्था भक्ति और उत्साह का प्रतीक माना जाता है। इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में लोग मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं और घरों व मंदिरों में विशेष आयोजन किए जाते हैं। ऐसे में हर कोई चाहता है कि पूजा या त्योहार के मौके पर उसका लुक भी खास और आकर्षक लगे। खासतौर पर महिलाएं पारंपरिक परिधानों को प्राथमिकता देती हैं। मार्च के महीने में गर्मी भी बढ़ने लगती है इसलिए इस समय कॉटन कपड़े सबसे आरामदायक और स्टाइलिश विकल्प माने जाते हैं। कॉटन अनारकली कुर्ता सेट्स ऐसे ही आउटफिट्स में शामिल हैं जो स्टाइल और कंफर्ट दोनों का बेहतरीन संतुलन देते हैं।

    फेस्टिव सीजन में फ्लोरल प्रिंट वाले कुर्ता सेट्स काफी ट्रेंड में रहते हैं। पेस्टल रंगों पर बड़े-बड़े फूलों वाले प्रिंट न सिर्फ खूबसूरत लगते हैं बल्कि बहुत ही फ्रेश और एलिगेंट लुक भी देते हैं। इस तरह के कुर्ता सेट आप सुबह की अष्टमी या नवमी पूजा के दौरान आसानी से कैरी कर सकती हैं। इसके अलावा घर के किसी छोटे-मोटे फंक्शन में भी यह आउटफिट बहुत आकर्षक लगता है।

    अगर आप पारंपरिक लुक में थोड़ा फेस्टिव टच चाहती हैं तो जयपुरी गोटा पत्ती वर्क वाले कुर्ता सेट्स बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। जयपुरी प्रिंट के साथ हल्का गोटा पत्ती का काम सूट को और ज्यादा आकर्षक बना देता है। यह ट्रेडिशनल और मॉडर्न स्टाइल का बेहतरीन कॉम्बिनेशन माना जाता है और किसी भी उम्र की महिलाओं पर खूब जंचता है।

    नवरात्रि के मौके पर व्हाइट चिकनकारी कुर्ता सेट भी बेहद खास लुक देता है। सफेद रंग को शांति और सादगी का प्रतीक माना जाता है। सफेद कॉटन अनारकली कुर्ते के साथ अगर आप कलरफुल दुपट्टा कैरी करती हैं तो यह लुक और भी ज्यादा एलिगेंट और ग्रेसफुल नजर आता है। पूजा या पारिवारिक समारोह में यह स्टाइल बेहद आकर्षक लगता है।

    इन दिनों अंगरखा स्टाइल कुर्ता सेट्स भी काफी ट्रेंड में हैं। अनारकली कुर्ते में अंगरखा डिजाइन पारंपरिक लुक को और ज्यादा खास बना देता है। कई सेलेब्रिटीज भी इस स्टाइल को पसंद कर रहे हैं। यह आउटफिट आपको यूनिक और एथनिक लुक देता है जिससे आपका फेस्टिव लुक और भी अलग नजर आता है।

    इसके अलावा मोनोक्रोम कुर्ता सेट भी आजकल काफी पसंद किए जा रहे हैं। एक ही रंग का कुर्ता और प्लाजो सेट पहनने से लुक स्लीक और क्लासी दिखाई देता है। साथ ही यह स्टाइल हाइट को थोड़ा लंबा भी दिखाता है जिससे पूरा आउटफिट बेहद आकर्षक लगता है।

    नवरात्रि के दौरान बांधनी प्रिंट वाले कुर्ता सेट भी काफी लोकप्रिय रहते हैं। खासतौर पर लाल और पीले रंग के बांधनी अनारकली सूट पूजा के लिए शुभ माने जाते हैं। इसके साथ अगर आप हल्की ज्वेलरी कैरी करें तो आपका पूरा फेस्टिव लुक और भी निखर कर सामने आता है।

    वहीं टियर डिजाइन यानी लेयर्स या स्टेप्स वाले अनारकली कुर्ता सेट भी इन दिनों खूब पसंद किए जा रहे हैं। इनका घेर बड़ा होता है जिससे यह डांडिया या गरबा जैसे आयोजनों के लिए परफेक्ट माने जाते हैं। डांस करते समय इनकी फ्लेयर बहुत खूबसूरत दिखाई देती है और यह तुरंत लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं। कुल मिलाकर अगर आप इस नवरात्रि में पारंपरिक के साथ स्टाइलिश और आरामदायक लुक चाहती हैं तो कॉटन अनारकली कुर्ता सेट्स आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं।

  • मोटापा बन रहा बीमारियों का बड़ा कारण, रोजमर्रा की आदतों में बदलाव से करें नियंत्रण

    मोटापा बन रहा बीमारियों का बड़ा कारण, रोजमर्रा की आदतों में बदलाव से करें नियंत्रण


    नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग सुविधाओं के पीछे इतने व्यस्त हो गए हैं कि अपने स्वास्थ्य की ओर ध्यान देना लगभग भूलते जा रहे हैं। यही कारण है कि मोटापा अब केवल दिखने या शरीर की बनावट से जुड़ी समस्या नहीं रह गया है बल्कि यह एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। बदलती जीवनशैली असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण मोटापे के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि जब शरीर का वजन सामान्य सीमा से अधिक हो जाता है तो यह केवल शरीर में अतिरिक्त चर्बी ही नहीं बढ़ाता बल्कि शरीर के अंदरूनी तंत्र को भी प्रभावित करता है। मोटापे के कारण शरीर में आंतरिक सूजन बढ़ने लगती है जो धीरे धीरे इंसुलिन प्रतिरोध को जन्म देती है। यही स्थिति आगे चलकर कई गंभीर बीमारियों का कारण बनती है जिनमें Type 2 Diabetes High Blood Pressure Thyroid Disease और धमनियों में ब्लॉकेज जैसी समस्याएं शामिल हैं। इसलिए विशेषज्ञ मोटापे को कई बीमारियों का प्रवेश द्वार भी मानते हैं।

    मोटापा बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण आज का बदलता खानपान है। फास्ट फूड जंक फूड और कोल्ड ड्रिंक्स का अत्यधिक सेवन शरीर में अनावश्यक कैलोरी जमा कर देता है। इन खाद्य पदार्थों में पोषक तत्व कम और वसा व चीनी की मात्रा अधिक होती है जो वजन तेजी से बढ़ाने का काम करते हैं। इसके अलावा लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत भी मोटापे को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। ऑफिस में घंटों कंप्यूटर के सामने बैठना और बच्चों का खेल के मैदान के बजाय मोबाइल या टीवी पर समय बिताना शारीरिक सक्रियता को कम कर देता है जिससे शरीर की कैलोरी खर्च नहीं हो पाती।

    इसके साथ ही मानसिक तनाव और अनियमित नींद भी वजन बढ़ने का बड़ा कारण बनते जा रहे हैं। जब व्यक्ति पर्याप्त नींद नहीं लेता या लगातार तनाव में रहता है तो शरीर का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है और वजन बढ़ने लगता है। ऐसे में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मोटापे को नियंत्रित करने के लिए दवाइयों से अधिक जरूरी है कि लोग अपनी जीवनशैली और आदतों में बदलाव करें।

    मोटापा नियंत्रित करने के लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट तक तेज चलना साइकिल चलाना या योग करना बेहद फायदेमंद माना जाता है। नियमित व्यायाम से शरीर की अतिरिक्त कैलोरी बर्न होती है और वजन नियंत्रित रहता है। इसके साथ ही आहार में भी बदलाव जरूरी है। घर का बना संतुलित और पौष्टिक भोजन हरी सब्जियां फल और साबुत अनाज को प्राथमिकता देनी चाहिए जबकि चीनी और तेल का सेवन कम करना चाहिए।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि स्क्रीन टाइम को सीमित किया जाए खासकर बच्चों के लिए। उन्हें अधिक समय तक मोबाइल या कंप्यूटर पर बैठने के बजाय शारीरिक खेलों के लिए प्रेरित करना चाहिए। इसके अलावा रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लेना भी वजन नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। छोटे छोटे बदलाव जैसे लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का उपयोग करना हर एक घंटे के बाद कुछ मिनट टहलना और दैनिक काम खुद करना भी शरीर को सक्रिय बनाए रखने में मदद करते हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लोग समय रहते अपनी आदतों में सुधार कर लें तो मोटापे से बचना संभव है और इसके कारण होने वाली कई गंभीर बीमारियों के खतरे को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • Travel Tips: मार्च में घूमने के लिए बेस्ट हैं ये 5 डेस्टिनेशन्स, ना ठंड की चिंता ना गर्मी का झंझट

    Travel Tips: मार्च में घूमने के लिए बेस्ट हैं ये 5 डेस्टिनेशन्स, ना ठंड की चिंता ना गर्मी का झंझट


    नई दिल्ली। मार्च ऐसा महीना होता है जब सीज़ बिल्कुल चलता रहता है। ना कोई परेशानी होती है और ना ही गर्मी का असर होता है। विशाल धूप, साना आकाश और कम भीड़ के कारण इस समय की यात्रा का अनुभव और भी बेहतर हो जाता है। अगर आप भी इस महीने कहीं भी घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो भारत की कुछ ऐसी खूबसूरत जगहें हैं जहां आपको प्रकृति, संस्कृति और सबसे शानदार संगम देखने को मिलेगा।

    वाराणसी: अध्यात्म और शांति का अनुभव
    वाराणसी में मार्च महीने में घूमने के लिए बेहद शानदार जगह मणि मिलती है। इस समय यहां की सुबह बेहद सुहावनी होती है और धूप के बीच घाटों का दृश्य मन मोह लेता है। यहां आप प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन कर सकते हैं और शहर की पुरानी कहानियों में डूबे हुए दार्शनिक दार्शनिक को महसूस कर सकते हैं। सुबह-सुबह गंगा नदी में नाव की सवारी और शाम को घाटों पर वाली गंगा आरती का अनुभव करने के लिए हर यात्री स्मारक पर जाता है।

    यूके: झीलों की नगरी का रोमांटिक दृश्य
    राजस्थान की गर्मी मार्च से पहले शुरू होने पर उदयपुर घूमने का सबसे सही समय माना जाता है। साफ नीले आकाश की परछाई जब पिछोला झील में खूबसूरत माला है, तो पूरे शहर में किसी भी तरह की पेंटिंग नजर आती है।

    यहां का ग्रैंड सिटी पैलेस, उदयपुर और जग मंदिर की भूमिका को प्रमुखता से तैयार किया गया है। वहीं सहेलियों-की-बारी में टहलना और झील किनारे शाम की चढ़ाई बेहद सच्चा अनुभव देती है।

    वायनाड: प्रकृति प्रेमियों की पसंद
    अगर आप हरियाली और प्रकृति के करीब घूमना चाहते हैं, तो वायनाड मार्च में घूमने के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। यह इस समय बेहद खूबसूरत दिखती है। यहां आप प्राचीन एडक्कल गुफाएं देख सकते हैं और बाणासुर सागर बांध के शानदार नज़ारों का आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा चेम्बरा पीक तक ट्रैकिंग करते हुए दिल के आकार वाली लेक तक का आनंददायक अनुभव भी देखने को मिलता है।

    उटी: फूल और चाय बागानों की सुंदरता
    दक्षिण भारत का प्रसिद्ध हिल स्टेशन ऊटी मार्च में अपनी असली सुंदरता का प्रतीक है। इस समय यहां के सजावटी रंग-बिरंगे फूलों से भरपूर रहते हैं और चारों ओर चाय के हरे-भरे बाग देखने को मिलते हैं। यहां की ऊटी झील में बोटिंग करना और प्रसिद्ध नीलगिरि माउंटेन रेलवे की टेरी ट्रेन की सवारी करना बेहद यादगार अनुभव होता है। अगर आप पेपैल से शानदार दृश्य देखना चाहते हैं, तो डोड्डाबेट्टा पीक जरूर जाएं।

    गैंगटोक: पहाड़ों में वसंत का जादू
    गंगटोक में मार्च महीने में वसंत का मौसम शुरू हो जाता है। इस समय यहां का मौसम बेहद सुहावना रहता है और आसपास के दृश्यों में साक्षात् दृश्य दिखाई देते हैं। यहां आप खूबसूरत त्सोम्गो झील का नजारा देख सकते हैं और शांत वातावरण वाले रमटेक मठ में समय सामात्यकर मनोवैज्ञानिक पवित्र पा सकते हैं। शाम के समय एमजी मार्ग, गंगटोक पर घूमना और स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लेना और भी खास बनाना है।

  • चेहरे में जमी Tanning की हो जाएगी छुट्टी, बस अपनाएं यह ट्रिक

    चेहरे में जमी Tanning की हो जाएगी छुट्टी, बस अपनाएं यह ट्रिक


    नई दिल्ली। आज के समय में देखा जाता है कि महिलाएं अपने चेहरे को सुंदर और ग्लोइंग बनाने के लिए मार्केट से कई सारे प्रोडक्ट लाती हैं, जबकि उसका उतना अच्छा रिस्पांस उन्हें नहीं मिल पाता है। कई बार बार-बार धूप में जाना काम करना इसके साथ ही घर पर भी स्किन केयर को ज्यादा अच्छे से फॉलो ना कर पाने की वजह से आपके चेहरे काफी डैमेज हो जाते हैं कई प्रकार की स्किन प्रॉब्लम आपको होने लगती है। सबसे छुटकारा पाने के लिए आपके घर में ही एक खास स्क्रब तैयार करना चाहिए तो चलिए उसके बारे में बताते हैं।

    घर में ही बना सकती हैं होममेड स्क्रब
    अगर आप भी अपने फेस की खूबसूरती को बढ़ाना चाहती हैं, तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। आप घर में आसानी से डी टैन स्क्रब का इस्तेमाल कर सकती हैं। हालांकि इसको बनाने के लिए कुछ सामग्री की जरूरत पड़ेगी।

    बनाने के लिए उसकी सामग्री
    शहद
    चावल का आटा
    ग्लिसरीन
    नारियल तेल

    स्क्रब बनाने का तरीका
    इसको बनाने के लिए एक कटोरी में थोड़ा सा चावल का आटा लें।फिर इसमें थोड़ा सा शहद और ग्लिसरीन मिला लें।अब सभी को अच्छे से मिक्स कर लें और नारियल तेल मिक्स करें।इन सभी चीजों को तब तक फेंटे, जब तक यह गाढ़ा न हो जाए।अब इसको स्क्रब को मिक्स कर लें, और इसको एयर टाइट डिब्बे में भरकर रख दें।इस स्क्रब को आप रात में सोने से पहले फेस पर 30-40 मिनट के लिए लगाएं।अब कच्चा दूध हाथ में लेकर हल्के हाथों से फेस की मसाज करें।

    इन बातों का रखें ध्यान
    अगर आप इसको पहली बार इस्तेमाल कर रही हैं, तो पहले स्क्रब टेस्ट जरूर करें। इस स्क्रब को लगाने के बाद आपके चेहरे में कई प्रकार के बदलाव आए ना शुरू हो जाएंगे हफ्ते में दो-तीन बार अगर आप इस स्क्रब को लगती हैं तब धीरे-धीरे आपका चेहरा साफ होने लगेगा और काफी निखार आने लगेगा हालांकि इसके साथ-साथ आपको अपने खान-पान पर भी पूरा ध्यान रखना चाहिए ताकि आपका चेहरा हमेशा अच्छा और ताजगी भरा रहे ताकि आपको मार्केट के बड़े प्रोडक्ट की जरूरत ना पड़े।

  • छुपा हुआ खजाना! दिल्ली के पास एक ऐसी जगहें जहां शोर नहीं सिर्फ सुकून, आज ही बना लें ट्रिप का प्लान

    छुपा हुआ खजाना! दिल्ली के पास एक ऐसी जगहें जहां शोर नहीं सिर्फ सुकून, आज ही बना लें ट्रिप का प्लान


    नई दिल्ली। अगर आप दिल्ली की भीड़-भाड़ और शोर से दूर कुछ समय बिताना चाहते हैं, तो उत्तराखंड का लैंसडाउन आपके लिए आदर्श जगह है। दिल्ली से बस 4-5 घंटे की दूरी पर स्थित यह हिल स्टेशन बेहद शांत और सुकून भरा अनुभव देता है। यहाँ पहुंचने के लिए ज्यादा प्लानिंग की जरूरत नहीं है।

    बस थोड़ा समय निकालकर इस प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद लेना होता है। पहाड़, झाड़ियां, घने जंगल और उनके बीच बहती नदियां इस जगह को और भी आकर्षक बनाती हैं। चाहे आप होटल के कमरे से प्राकृतिक नजारों को देखें या पहाड़ की ओट में बैठकर शांति का आनंद लें, लैंसडाउन हर पल आपको तरोताजा कर देगा।

    ताड़केश्वर और बालेश्वर महादेव मंदिर

    लैंसडाउन में ही ताड़केश्वर और बालेश्वर महादेव मंदिर हैं। यह जगह न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी मशहूर है। मंदिर तक पहुँचने का रास्ता घने जंगल और हरियाली से भरा हुआ है, जो यात्रा को एक सुखद अनुभव में बदल देता है।

    कालागढ़ टाइगर रिजर्व

    जंगल और वन्य जीवों के प्रेमियों के लिए कालागढ़ टाइगर रिजर्व सबसे आकर्षक स्थल है। यहाँ बाघों सहित कई जीवों को देखना संभव है। जंगल सफारी के दौरान आप प्राकृतिक नजारों और वन्य जीवों के बीच समय बिताकर मानसिक शांति और उत्साह का अनुभव कर सकते हैं।

    टिप इन टॉप और सैंट मेरी चर्च

    लैंसडाउन की खूबसूरती सिर्फ प्राकृतिक दृश्य तक सीमित नहीं है। यहाँ “टिप इन टॉप” नामक हिल स्टेशन क्षेत्र है, जहाँ सैंट मेरी चर्च सहित कई छोटे चर्च भी हैं। यदि आपके पास समय है तो आसपास के चर्चों का भ्रमण आपको सांस्कृतिक और ऐतिहासिक अनुभव भी देगा।

    लैंसडाउन में घूमना केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि यह आपके मन और शरीर दोनों को ताजगी देने का अवसर है। शांत वातावरण, प्राकृतिक नजारों और विविध सांस्कृतिक स्थल इसे दिल्ली से दूर सफर करने वालों के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन बनाते हैं।

  • Muscle Loss से बचना है तो 35 के बाद बदलें डाइट और टाइमिंग, न्यूट्रिशनिस्ट ने बताए असरदार नियम

    Muscle Loss से बचना है तो 35 के बाद बदलें डाइट और टाइमिंग, न्यूट्रिशनिस्ट ने बताए असरदार नियम


     नई दिल्ली।  उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव आने लगते हैं और अक्सर 30 से 35 साल के बाद लोग महसूस करने लगते हैं कि पहले जैसी ताकत और ऊर्जा नहीं रही। मांसपेशियां धीरे धीरे ढीली होने लगती हैं और शरीर की फिटनेस कम होने लगती है। मेडिकल भाषा में इस स्थिति को सार्कोपेनिया कहा जाता है। इसमें उम्र बढ़ने के साथ मसल्स मास कम होने लगता है।

    मशहूर न्यूट्रिशनिस्ट लवनीत बत्रा के अनुसार यदि सही डाइट और सही समय पर भोजन की आदत अपनाई जाए तो उम्र बढ़ने के बावजूद शरीर को लंबे समय तक मजबूत और फिट रखा जा सकता है। उनका कहना है कि मसल्स बनाने के लिए केवल अच्छा खाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि भोजन का समय भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

    उनके अनुसार जब भी कोई व्यक्ति वर्कआउट करता है तो उसके बाद मांसपेशियों को रिपेयर और मजबूत होने के लिए प्रोटीन की आवश्यकता होती है। इसलिए एक्सरसाइज के एक से दो घंटे के भीतर 20 से 30 ग्राम हाई क्वालिटी प्रोटीन लेना जरूरी माना जाता है। इससे मसल्स की रिकवरी बेहतर होती है और शरीर की ताकत भी बढ़ती है।

    प्रोटीन के लिए कई अच्छे विकल्प उपलब्ध हैं। अंडे और डेयरी प्रोडक्ट जैसे दूध पनीर और दही शरीर को अच्छा प्रोटीन देते हैं। इसके अलावा चिकन और मछली जैसे लीन मीट भी मसल्स के लिए लाभदायक होते हैं। शाकाहारी लोगों के लिए टोफू और दालें प्रोटीन के अच्छे स्रोत माने जाते हैं।न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार वर्कआउट से पहले भी शरीर को थोड़ी ऊर्जा देना जरूरी होता है। एक्सरसाइज से 30 से 60 मिनट पहले हल्का स्नैक लेना फायदेमंद माना जाता है। इसके लिए ग्रीक योगर्ट या एक मुट्ठी ड्राई फ्रूट जैसे बादाम और अखरोट अच्छे विकल्प हो सकते हैं। इससे वर्कआउट के दौरान मसल्स को नुकसान कम होता है और शरीर बेहतर प्रदर्शन कर पाता है।

    अक्सर लोग वजन कम करने के लिए कार्बोहाइड्रेट और फैट को पूरी तरह छोड़ देते हैं लेकिन ऐसा करना सही नहीं माना जाता। कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा देने का काम करते हैं। फल सब्जियां और साबुत अनाज शरीर में ग्लाइकोजन स्टोर को भरते हैं जिससे शरीर जल्दी थकता नहीं है।इसी तरह हेल्दी फैट भी शरीर के लिए जरूरी होते हैं। एवोकाडो जैतून का तेल और बादाम जैसे हेल्दी फैट्स हार्मोन को संतुलित रखने में मदद करते हैं और मांसपेशियों को सुरक्षित रखते हैं।स्वस्थ शरीर के लिए पानी का सही मात्रा में सेवन भी बेहद जरूरी है। पर्याप्त पानी पीने से शरीर की परफॉर्मेंस बेहतर होती है और वर्कआउट के बाद रिकवरी भी तेजी से होती है।

    न्यूट्रिशनिस्ट का सुझाव है कि दिन भर में तीन से पांच छोटे मील्स लेना चाहिए और हर मील में प्रोटीन जरूर शामिल होना चाहिए। इससे शरीर को लगातार अमीनो एसिड मिलते रहते हैं और मांसपेशियों की मरम्मत और विकास बेहतर तरीके से होता है।लवनीत बत्रा ने पनीर से जुड़ी एक आसान और स्वादिष्ट रेसिपी भी साझा की है। उन्होंने बताया कि घर में मौजूद पनीर की मदद से बिना किसी प्रोटीन पाउडर के लगभग 25 ग्राम प्रोटीन वाला पौष्टिक मील आसानी से तैयार किया जा सकता है।यदि सही डाइट सही समय और नियमित एक्सरसाइज को जीवनशैली का हिस्सा बना लिया जाए तो 35 साल की उम्र के बाद भी शरीर को मजबूत स्वस्थ और फिट बनाए रखना संभव है।

  • Vata Dosha वालों के लिए औषधि समान है यह आहार, दूर होगा सूखापन और कमजोरी

    Vata Dosha वालों के लिए औषधि समान है यह आहार, दूर होगा सूखापन और कमजोरी


    नई दिल्ली। आयुर्वेद के अनुसार मानव शरीर तीन मुख्य दोषों से मिलकर बना होता है-Vata Dosha, Pitta Dosha और Kapha Dosha। इन तीनों दोषों का संतुलन ही स्वस्थ शरीर और बेहतर जीवन का आधार माना जाता है। यदि इनमें से किसी एक दोष का असंतुलन हो जाए तो शरीर में कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं।
    आयुर्वेद के अनुसार वात दोष मुख्य रूप से वायु और आकाश तत्वों से मिलकर बना होता है। जिन लोगों में यह प्रवृत्ति अधिक होती है, वे अक्सर दुबले-पतले, कमजोर और त्वचा में रूखेपन की समस्या से ग्रस्त दिखाई देते हैं। ऐसे लोगों को अक्सर थकान, सूखापन और ऊर्जा की कमी महसूस होती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका मुख्य कारण गलत खान-पान और शरीर की प्रकृति के अनुसार आहार न लेना होता है।

    साबुत अनाज से मिलती है ताकत और संतुलन
    वात दोष वाले लोगों को अपने भोजन में साबुत अनाज को विशेष रूप से शामिल करना चाहिए। साबुत अनाज शरीर को पर्याप्त ऊर्जा देने के साथ-साथ उसमें चिकनाई भी प्रदान करते हैं, जिससे शरीर का सूखापन कम होता है। आयुर्वेद के अनुसार ऐसे लोगों को भारी और पोषण देने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए, जिससे शरीर में ताकत बनी रहे और वात दोष संतुलित रहे। नियमित रूप से साबुत अनाज का सेवन करने से शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा मिलती है और कमजोरी दूर होती है।

    घी और दूध से मिलता है गहरा पोषण
    वात प्रवृत्ति वाले लोगों के लिए Ghee और Milk बेहद लाभकारी माने जाते हैं। ये दोनों खाद्य पदार्थ शरीर को पोषण देने के साथ-साथ आवश्यक चिकनाई भी प्रदान करते हैं।
    घी त्वचा और शरीर के ऊतकों को गहराई से पोषण देता है और सूखेपन को कम करने में मदद करता है। वहीं दूध शरीर को ताकत देने के साथ-साथ वात और पित्त दोष को नियंत्रित करने में भी सहायक माना जाता है।

    सूखे मेवे और बीज से मिलती है ऊर्जा
    वात दोष वाले लोगों को अपने आहार में सूखे मेवे और मगज के बीज भी शामिल करने चाहिए। इनमें प्राकृतिक तेल, गर्माहट और भरपूर पोषण मौजूद होता है।
    बादाम, काजू, अखरोट जैसे सूखे मेवे शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं और ओज यानी शरीर की प्राकृतिक शक्ति को बढ़ाते हैं। इनका नियमित सेवन शरीर की कमजोरी को दूर करने और वात संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है।

    बासी भोजन से करें परहेज
    आयुर्वेद के अनुसार वात प्रवृत्ति वाले लोगों को बासी भोजन से बचना चाहिए। लंबे समय तक रखा हुआ भोजन शरीर में वात और कफ दोष को असंतुलित कर सकता है।
    इसलिए हमेशा ताजा और गर्म भोजन का सेवन करना बेहतर माना जाता है। ताजा भोजन शरीर को अधिक पोषण देता है और पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाए रखता है।

    मीठे और रसीले फलों का सेवन है फायदेमंद
    वात दोष को संतुलित रखने के लिए मीठे और रसीले फलों का सेवन भी बेहद लाभकारी माना जाता है। आहार में Mango, Banana, Papaya, Grapes और Apple जैसे फलों को शामिल किया जा सकता है। ये फल शरीर को आवश्यक विटामिन और खनिज प्रदान करते हैं, जिससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और सूखेपन की समस्या भी कम होती है।

    आयुर्वेद के अनुसार यदि व्यक्ति अपनी शरीर प्रकृति को समझकर भोजन का चयन करता है, तो वह कई बीमारियों से बच सकता है और लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकता है। सही आहार और संतुलित जीवनशैली ही वात दोष को नियंत्रित रखने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।

  • बेहतर नींद के लिए योग, World Sleep Day पर जानें अनिद्रा दूर करने वाले आसान आसन

    बेहतर नींद के लिए योग, World Sleep Day पर जानें अनिद्रा दूर करने वाले आसान आसन


    नई दिल्ली।आज की तेज़ रफ्तार जीवनशैली में अनिद्रा यानी नींद न आने की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल, तनावपूर्ण दिनचर्या और अनियमित खान-पान के कारण बहुत से लोग रात भर करवटें बदलते रहते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि रात में एक बार नींद टूट जाए तो दोबारा सो पाना मुश्किल हो जाता है। इस स्थिति को Insomnia कहा जाता है, जो लंबे समय तक बनी रहे तो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है।

    क्यों मनाया जाता है विश्व निद्रा दिवस
    नींद के महत्व और नींद से जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल World Sleep Day मनाया जाता है। यह दिन लोगों को यह याद दिलाता है कि अच्छी नींद स्वस्थ जीवन के लिए उतनी ही जरूरी है जितना संतुलित आहार और नियमित व्यायाम। पर्याप्त नींद न मिलने से शरीर में थकान, ऊर्जा की कमी, मांसपेशियों में दर्द, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार मानसिक तनाव, कैफीन का अत्यधिक सेवन, अनियमित दिनचर्या और शारीरिक गतिविधियों की कमी अनिद्रा के प्रमुख कारण हैं। ऐसे में योग और ध्यान जैसे प्राकृतिक उपाय इस समस्या से राहत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    हस्तोत्तानासन से कम होता है तनाव
    Hastottanasana को नींद सुधारने वाले प्रभावी योगासनों में माना जाता है। इसके अभ्यास के लिए पैरों में थोड़ा अंतर रखकर सीधे खड़े हों और सांस भरते हुए दोनों हाथ ऊपर उठाएं। इसके बाद गर्दन को हल्का पीछे झुकाते हुए शरीर को पीछे की ओर खींचें। कुछ सेकंड इस स्थिति में रहने के बाद धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट आएं।
    यह आसन कंधों और पीठ की मांसपेशियों को खोलता है, शरीर में तनाव कम करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।

    पादहस्तासन से मन होता है शांत
    Padahastasana भी अनिद्रा में लाभकारी माना जाता है। इस आसन में सीधे खड़े होकर सांस भरते हुए हाथ ऊपर उठाए जाते हैं और फिर सांस छोड़ते हुए शरीर को कमर से आगे झुकाया जाता है। हथेलियों को जमीन पर रखते हुए सिर को नीचे की ओर झुका दिया जाता है। यह आसन सिर की ओर रक्त संचार बढ़ाता है, मानसिक तनाव को कम करता है और मन को शांत करने में मदद करता है।

    नियमित योग, संतुलित आहार और स्वस्थ दिनचर्या अपनाकर अनिद्रा की समस्या से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है और बेहतर, गहरी तथा सुकून भरी नींद हासिल की जा सकती है।