Category: Madhya Pradesh

  • सरकारी फाइलों पर नहीं चलेगी लेटलतीफी, MP में नए कानून से अफसरों की जवाबदेही होगी तय

    सरकारी फाइलों पर नहीं चलेगी लेटलतीफी, MP में नए कानून से अफसरों की जवाबदेही होगी तय


    भोपाल । मध्य प्रदेश में उद्योग और व्यापार से जुड़े कामों को आसान और तेज बनाने के लिए सरकार ने ऐसी व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है जिसमें सरकारी अधिकारी किसी फाइल को तय समय से ज्यादा देर तक अपने पास रोककर नहीं रख सकेंगे। मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम 2026 के तहत डिजिटल सिस्टम और समय सीमा के जरिए अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की व्यवस्था की गई है। इस व्यवस्था की सबसे खास बात ऑटो एस्कलेशन सिस्टम है। यदि किसी अधिकारी के पास आई फाइल तय समय सीमा में निपटाई नहीं जाती है तो वह स्वतः अगले वरिष्ठ अधिकारी के पास पहुंच जाएगी। यानी जिस अधिकारी ने फाइल को रोककर रखा था उसके पास आगे उस मामले पर फैसला लेने का अधिकार नहीं रहेगा।

    अब तक कारोबार या उद्योग शुरू करने के लिए अलग अलग विभागों से एनओसी और मंजूरियां लेने में लोगों को काफी समय लग जाता था। कई बार फाइल एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय और एक टेबल से दूसरी टेबल तक घूमती रहती थी। नए कानून के तहत इस प्रक्रिया को डिजिटल सिंगल विंडो सिस्टम से जोड़ने की कोशिश की गई है ताकि आवेदन और मंजूरी की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन तरीके से आगे बढ़े और आवेदक को बार बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।

    इस व्यवस्था में समय सीमा को सबसे महत्वपूर्ण बनाया गया है। उदाहरण के लिए यदि किसी अधिकारी को किसी आवेदन पर 15 दिन के भीतर निर्णय लेना है और वह तय अवधि में कोई कार्रवाई नहीं करता है तो अगले दिन यानी 16वें दिन आवेदन स्वतः उसके वरिष्ठ अधिकारी के डिजिटल डेस्क पर पहुंच सकता है। इससे फाइल रोकने वाले अधिकारी के हाथ से उस आवेदन पर निर्णय लेने का अधिकार हट जाएगा और मामला उच्च स्तर पर चला जाएगा। साथ ही देरी का रिकॉर्ड भी डिजिटल सिस्टम में दर्ज रहेगा।

    नए कानून की धारा 13 में ऑटो एस्कलेशन का प्रावधान किया गया है। इसके तहत निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन का निपटारा नहीं होने पर मामला विभाग के अगले उच्चतर प्राधिकारी के पास स्वतः भेजे जाने की व्यवस्था है। इसका सीधा उद्देश्य सरकारी कामकाज में देरी को कम करना और अधिकारियों को समय पर फैसला लेने के लिए जवाबदेह बनाना है।

    नए प्रावधानों में आवेदक को बार बार आपत्ति या नई जानकारी के नाम पर परेशान करने पर भी रोक लगाने की कोशिश की गई है। धारा 12 के अनुसार अधिकारी आवेदन मिलने के बाद निर्धारित अवधि में अतिरिक्त जानकारी मांग सकता है और प्रक्रिया में बार बार नए सवाल खड़े करने की गुंजाइश सीमित की गई है। इसका मकसद यह है कि यदि किसी आवेदन में कमी है तो उसे स्पष्ट रूप से बताया जाए और आवेदक के कमी दूर करने के बाद फाइल अनावश्यक रूप से दोबारा न रोकी जाए।

    इस व्यवस्था का सबसे बड़ा असर अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही पर पड़ सकता है। कानून के तहत यदि कोई सक्षम अधिकारी या कर्मचारी निर्धारित समय सीमा में मंजूरी या आवेदन का निपटारा करने में विफल रहता है तो उस पर मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम 2010 के प्रावधानों के अनुसार जुर्माना लगाया जा सकता है। खास बात यह है कि जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की व्यक्तिगत होगी। यानी देरी के लिए विभाग को जिम्मेदार मानकर मामला खत्म नहीं होगा बल्कि संबंधित अधिकारी पर भी कार्रवाई हो सकती है।

    लोक सेवा गारंटी व्यवस्था में तय समय सीमा में सेवा नहीं देने पर अधिकारी या कर्मचारी पर प्रतिदिन के आधार पर जुर्माने का प्रावधान है। इससे सरकारी कामकाज में लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर आर्थिक जवाबदेही भी तय हो सकती है। हालांकि किसी मामले में जुर्माना लगेगा या नहीं और उसकी प्रक्रिया क्या होगी यह संबंधित कानून और निर्धारित नियमों के अनुसार तय किया जाएगा।

    अधिनियम में सरकारी विभागों से मिलने वाली मंजूरियों को अधिक व्यवस्थित तरीके से एकीकृत करने की दिशा में भी प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत राज्य स्तर पर नोडल एजेंसी के माध्यम से मंजूरी प्रक्रिया को संचालित करने की व्यवस्था बनाई जा रही है। इसका उद्देश्य उद्योग और व्यापार से जुड़े आवेदनों को अलग अलग विभागों की जटिल प्रक्रिया में उलझने से बचाना है।

    कुल मिलाकर सरकार की नई व्यवस्था का मकसद यही है कि कारोबारियों और निवेशकों की फाइलें अनिश्चित समय तक सरकारी टेबल पर न पड़ी रहें। डिजिटल ट्रैकिंग ऑटो एस्कलेशन और व्यक्तिगत जवाबदेही के जरिए अधिकारियों पर समय पर निर्णय लेने का दबाव बढ़ेगा। यदि व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है तो उद्योग और व्यापार से जुड़े लोगों के लिए मंजूरी की प्रक्रिया तेज हो सकती है और सरकारी दफ्तरों में फाइल रोककर रखने की पुरानी शिकायतों पर भी काफी हद तक अंकुश लग सकता है।

  • सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने का मौका, MP में 5 हजार अतिथि शिक्षकों की भर्ती; मेरिट से होगा चयन

    सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने का मौका, MP में 5 हजार अतिथि शिक्षकों की भर्ती; मेरिट से होगा चयन


    भोपाल । मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में रिक्त शिक्षक पदों के कारण पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए करीब 5 हजार अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की तैयारी शुरू कर दी गई है। रिक्त पदों के लिए संबंधित विषय के पात्र उम्मीदवार मंगलवार से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 1 सितंबर से अतिथि शिक्षकों की ऑनलाइन जॉइनिंग कराई जा सकेगी। अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति विकासखंड और जिला स्तर पर तैयार मेरिट पैनल के आधार पर की जाएगी।

    लोक शिक्षण संचालनालय ने इस संबंध में सोमवार को सभी संभागीय संयुक्त संचालकों जिला शिक्षा अधिकारियों विकासखंड शिक्षा अधिकारियों तथा हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्यों को दिशा निर्देश जारी किए हैं। विभाग का उद्देश्य नियमित शिक्षकों की कमी के कारण सरकारी स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होने से रोकना है। पूरी भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है और इसके लिए एजुकेशन पोर्टल 3.0 के तहत गेस्ट फैकल्टी मैनेजमेंट सिस्टम यानी GFMS मॉड्यूल का इस्तेमाल किया जाएगा।

    विभाग के निर्देश के मुताबिक जिन स्कूलों में शिक्षकों के पद रिक्त हैं वहां संबंधित विषय के लिए GFMS पोर्टल पर उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर अतिथि शिक्षक बुलाए जाएंगे। इसके लिए विकासखंड स्तर पर उपलब्ध मेरिट सूची का इस्तेमाल किया जाएगा। उम्मीदवारों को उनकी मेरिट के क्रम के अनुसार संपर्क कर स्कूल में शिक्षण कार्य के लिए आमंत्रित किया जाएगा। उम्मीदवार की सहमति या असहमति की जानकारी भी GFMS पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा।

    इस प्रक्रिया में उन उम्मीदवारों को प्राथमिकता मिल सकती है जिन्होंने वर्ष 2025-26 में उसी विद्यालय में रिक्त पद के विरुद्ध अतिथि शिक्षक के रूप में काम किया था। यदि ऐसे पात्र आवेदक उपलब्ध हैं तो उन्हें उसी स्कूल में दोबारा शिक्षण कार्य के लिए बुलाया जा सकेगा। इससे पहले काम कर चुके अतिथि शिक्षकों को अपने अनुभव और संबंधित मेरिट के आधार पर लाभ मिलने की संभावना है।

    यदि किसी विषय के लिए विकासखंड की मेरिट सूची में कोई पात्र आवेदक उपलब्ध नहीं है तो स्कूल प्रभारी जिला स्तर पर उपलब्ध पैनल का सहारा ले सकेंगे। जिला मेरिट सूची में उपलब्ध उम्मीदवारों को भी मेरिट क्रम के अनुसार बुलाया जाएगा। जिस उम्मीदवार को अतिथि शिक्षक के रूप में शिक्षण कार्य के लिए आमंत्रित किया जाएगा उसकी जॉइनिंग की जानकारी उसी दिन GFMS मॉड्यूल में दर्ज करनी होगी। यानी नियुक्ति प्रक्रिया को ऑनलाइन सिस्टम के जरिए ही पूरा किया जाएगा।

    उम्मीदवारों के दस्तावेजों का सत्यापन भी इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। स्कूल प्रभारी अतिथि शिक्षक के स्कोर कार्ड में दर्ज दस्तावेजों की जांच करेंगे। यदि सत्यापन के दौरान वास्तविक दस्तावेजों और स्कोर कार्ड में दर्ज जानकारी में अंतर पाया जाता है तो उम्मीदवार की अतिथि शिक्षक पद के लिए पात्रता समाप्त की जा सकती है। इसलिए उम्मीदवारों को आवेदन से लेकर दस्तावेज सत्यापन तक सभी जानकारी सही और प्रमाणित रखना जरूरी होगा।

    विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अतिथि शिक्षकों को बुलाने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। किसी भी स्थिति में ऑफलाइन तरीके से उम्मीदवारों को आमंत्रित नहीं किया जाएगा। इससे नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और मेरिट के आधार पर उम्मीदवारों को अवसर देने की कोशिश की गई है।

    वर्ग-3 प्राथमिक शिक्षक के रिक्त पदों के लिए भी वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। यदि विकासखंड या जिला स्तर की मेरिट सूची में वर्ग-3 प्राथमिक पद के लिए कोई पात्र उम्मीदवार उपलब्ध नहीं है तो वर्ग-3 जनरल के पैनल से उम्मीदवार को प्राथमिक शिक्षक के रिक्त पद के विरुद्ध अतिथि शिक्षक के रूप में बुलाया जा सकेगा।

    स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों और स्कूल प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में मेरिट सूची दस्तावेज सत्यापन ऑनलाइन जॉइनिंग और ई-अटेंडेंस से जुड़े नियमों का अनिवार्य रूप से पालन किया जाए। करीब 5 हजार अतिथि शिक्षकों की तैनाती से सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने और विद्यार्थियों की पढ़ाई को नियमित बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

  • विजय शाह की मुश्किलें बढ़ेंगी या मिलेगी राहत? आज कैबिनेट में अभियोजन मंजूरी पर फैसला, 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई

    विजय शाह की मुश्किलें बढ़ेंगी या मिलेगी राहत? आज कैबिनेट में अभियोजन मंजूरी पर फैसला, 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में मंत्री विजय शाह से जुड़े विवादित बयान के मामले में मंगलवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए आपत्तिजनक बयान के मामले में विजय शाह के खिलाफ अभियोजन चलाने की मंजूरी पर आज सरकार कैबिनेट बैठक में फैसला कर सकती है। अभियोजन स्वीकृति का प्रस्ताव कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो इसे राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद गृह विभाग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में शपथपत्र पेश किया जा सकता है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 31 अगस्त को निर्धारित है और उससे पहले सरकार के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं।

    विजय शाह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति का मामला लंबे समय से लंबित है। मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल यानी एसआईटी ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1)(a) के तहत अभियोजन चलाने की अनुमति मांगी है। सरकारी सेवक के खिलाफ अभियोजन की अनुमति से जुड़े प्रावधानों के तहत सरकार की मंजूरी जरूरी मानी जा रही है। इसी वजह से एसआईटी की मांग के बाद भी कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिए सरकार के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।

    इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले भी राज्य सरकार को समय सीमा में निर्णय लेने का निर्देश दे चुका है। 19 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार को मामले में फैसला लेने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था। हालांकि तय अवधि में निर्णय नहीं हो सका और अभियोजन स्वीकृति का मामला लंबित रहा। अब सरकार कैबिनेट के जरिए इस पर निर्णय लेने की तैयारी में है। ऐसे में आज होने वाली बैठक का फैसला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    यदि कैबिनेट अभियोजन स्वीकृति को मंजूरी दे देती है तो प्रस्ताव राज्यपाल के पास जाएगा। राज्यपाल की मंजूरी के बाद गृह विभाग सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से शपथपत्र दाखिल करेगा। इसके बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तेज हो सकती है। हालांकि यदि सरकार अभियोजन की अनुमति नहीं देती है तो इसका अर्थ यह नहीं होगा कि पूरा मामला खत्म हो जाएगा। ऐसी स्थिति में कानूनी प्रक्रिया लंबित रह सकती है और आगे परिस्थितियों के अनुसार कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा।

    मामले की जांच कर रही एसआईटी ने BNS की धारा 196(1)(a) के तहत कार्रवाई की सिफारिश की है। इस प्रावधान के तहत विभिन्न नस्लीय धार्मिक क्षेत्रीय और जातीय समूहों के बीच वैमनस्य या नफरत बढ़ाने वाले कृत्यों से जुड़े मामलों में दंड का प्रावधान है। खबर के अनुसार इस धारा में तीन साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।

    पूरा विवाद 11 मई 2025 को महू के रायकुंडा गांव में आयोजित हलमा कार्यक्रम के दौरान दिए गए विजय शाह के बयान से शुरू हुआ था। उन्होंने भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। बयान सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। विवाद बढ़ने के बाद विजय शाह ने कई बार माफी भी मांगी थी लेकिन मामला कानूनी प्रक्रिया में आगे बढ़ता रहा।

    अब करीब एक साल से लंबित अभियोजन स्वीकृति पर सरकार के फैसले का इंतजार खत्म होने की उम्मीद है। 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से पहले कैबिनेट का निर्णय इस मामले की आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। यही वजह है कि आज होने वाली कैबिनेट बैठक पर राजनीतिक गलियारों के साथ कानूनी जानकारों की भी नजर बनी हुई है।

  • भगवा रोबोट का VIP स्वागत और मंत्री की सुरीली तान, CM मोहन यादव बोले- मोदी ने देश को उसकी ताकत का एहसास कराया

    भगवा रोबोट का VIP स्वागत और मंत्री की सुरीली तान, CM मोहन यादव बोले- मोदी ने देश को उसकी ताकत का एहसास कराया

    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में मंगलवार को ऐसे कई रंग देखने को मिले जो आम सियासी गतिविधियों से बिल्कुल अलग रहे। कहीं भगवा गमछा पहने रोबोट ने नेता की तरह एंट्री लेकर लोगों का मनोरंजन किया तो कहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मशहूर गायिका अनुराधा पौडवाल के मंच पर अपनी गायकी का हुनर दिखाया। इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना रामायण के जामवंत से कर दी। इन घटनाओं ने प्रदेश की सियासत और सार्वजनिक कार्यक्रमों में एक अलग ही रंग भर दिया।

    उज्जैन में एक रेस्टोरेंट के उद्घाटन के दौरान रोबोट को मुख्य अतिथि की तरह पेश किया गया। रोबोट की एंट्री भी बेहद खास अंदाज में हुई। उसके आसपास हथियार लिए कमांडो नजर आए और कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते ही उसे भगवा दुपट्टा पहनाया गया। तिलक लगाकर उसका स्वागत किया गया। इसके बाद रोबोट को नाश्ता और पानी भी ऑफर किया गया। उद्घाटन के इस पूरे कार्यक्रम में रोबोट आकर्षण का केंद्र बना रहा। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए सबसे दिलचस्प पल तब आया जब भगवा दुपट्टा पहने रोबोट ने डांस करना शुरू कर दिया। उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई और वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

    रोबोट की इस अंदाज में मेहमाननवाजी को लेकर लोग तरह-तरह के मजाकिया कमेंट भी कर रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि मशीन बनाने वालों ने शायद कल्पना भी नहीं की होगी कि उनका रोबोट एक दिन किसी नेता की तरह VIP स्वागत पाएगा और उद्घाटन के साथ डांस भी करेगा। अब तो मजाक में यह तक कहा जा रहा है कि अगर यही सिलसिला चलता रहा तो आने वाले समय में फीता काटने से लेकर भाषण देने तक की जिम्मेदारी भी रोबोट को मिल सकती है।

    इधर भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना जामवंत से करते हुए कहा कि जिस तरह रामायण में जामवंत ने हनुमान जी को उनकी शक्ति का अहसास कराया था उसी तरह प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को उसकी क्षमता और सामर्थ्य का एहसास कराया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश लगातार मजबूत हो रहा है और भारत अपने सामर्थ्य के दम पर हर तरह की चुनौती का सामना करने में सक्षम है। मुख्यमंत्री की इस तुलना के बाद राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा शुरू हो गई है।

    उधर बड़वानी जिले के खेतिया में आयोजित कानबाई उत्सव में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी अपनी अलग छाप छोड़ी। मशहूर गायिका अनुराधा पौडवाल के मंच पर पहुंचकर उन्होंने गाना गाया। उन्होंने हमें तुमसे प्यार कितना गीत की पंक्तियां गाकर अपनी आवाज का हुनर दिखाया। इतना ही नहीं उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से भी अपने साथ गाने की अपील की। अनुराधा पौडवाल के सामने उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें बताना है कि वे भी सुरीले हैं। मंत्री का यह अंदाज देखकर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने जमकर तालियां बजाईं।

    इन घटनाओं के बीच एक और मामला चर्चा में है जिसमें एक फूड प्रोडक्ट को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हुआ था। जांच के बाद कंपनी के उत्पाद सही पाए गए और सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले व्यक्ति को कानूनी नोटिस दिए जाने की बात सामने आई। हालांकि अब वह अपनी बात से पीछे हटता नजर आ रहा है। इस पूरे मामले में कंपनी के भोपाल स्थित मुख्यालय के बाहर लगी नेमप्लेट हटाए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

    कुल मिलाकर मंगलवार को मध्य प्रदेश की सियासत में बयानबाजी के साथ मनोरंजन और दिलचस्प घटनाओं का भी तड़का देखने को मिला। भगवा रोबोट की नेता जैसी एंट्री से लेकर मंत्री की गायकी और मुख्यमंत्री की जामवंत वाली तुलना तक कई घटनाएं दिनभर चर्चा में बनी रहीं।

  • मध्य प्रदेश में मौसम का बड़ा अलर्ट, 5 जिलों में अति भारी बारिश का खतरा; 25 जिलों में ढाई इंच से ज्यादा पानी गिरने के आसार MP में आज बारिश का बड़ा अलर्ट

    मध्य प्रदेश में मौसम का बड़ा अलर्ट, 5 जिलों में अति भारी बारिश का खतरा; 25 जिलों में ढाई इंच से ज्यादा पानी गिरने के आसार MP में आज बारिश का बड़ा अलर्ट


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। मंगलवार को प्रदेश के बड़े हिस्से में तेज बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार टीकमगढ़ दमोह नरसिंहपुर बैतूल और राजगढ़ में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर बहुत तेज बारिश होने की आशंका है। इसके अलावा गुना आगर मालवा शाजापुर सीहोर हरदा सागर रायसेन नर्मदापुरम छिंदवाड़ा पांढुर्णा सिवनी बालाघाट मंडला जबलपुर कटनी शहडोल छतरपुर पन्ना सीधी और सिंगरौली में भी भारी बारिश की चेतावनी है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक इन 25 जिलों में ढाई इंच से ज्यादा बारिश हो सकती है।

    प्रदेश के बाकी हिस्सों में भी बारिश का दौर थमता नजर नहीं आ रहा है। भोपाल विदिशा इंदौर धार आलीराजपुर बुरहानपुर बड़वानी खंडवा खरगोन झाबुआ उज्जैन नीमच मंदसौर देवास रतलाम ग्वालियर शिवपुरी दतिया अशोकनगर मुरैना भिंड श्योपुर डिंडौरी रीवा सतना मऊगंज मैहर उमरिया अनूपपुर और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। यानी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बादल सक्रिय रहेंगे और लोगों को बारिश से राहत मिलने के बजाय अगले कुछ दिनों तक मौसम का असर देखने को मिल सकता है।

    इससे पहले सोमवार को भी भोपाल समेत कई जिलों में तेज बारिश हुई। भोपाल में सुबह से ही बादल छाए रहे और दोपहर बाद बारिश का सिलसिला शुरू हो गया जो रात तक चलता रहा। शहर के कई इलाकों में बारिश के कारण यातायात प्रभावित हुआ। भोपाल रेलवे स्टेशन पर भी भारी बारिश का असर दिखाई दिया और प्लेटफॉर्म के शेड से पानी तेज धार के रूप में गिरता नजर आया। वहीं विदिशा में तेज बारिश के बाद बाजार की सड़कों पर पानी भर गया जिससे दुकानदारों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। रायसेन और शाजापुर समेत अन्य जिलों में भी बारिश का असर देखने को मिला।

    बीते 24 घंटे के आंकड़ों पर नजर डालें तो नर्मदापुरम में औसतन 3.7 इंच बारिश दर्ज की गई। शिवपुरी के करेरा में 5.4 इंच बारिश हुई जबकि निवाड़ी के ओरछा में 3.3 इंच और सागर के रहली में करीब 3 इंच पानी गिरा। भोपाल के कोलार इलाके में 3.2 इंच नवीबाग में 3.1 इंच और भोपाल शहर में करीब 3 इंच बारिश दर्ज की गई।

    शहडोल में भी बारिश के बाद बाणसागर डैम के तीन गेट आधा आधा मीटर खोले गए हैं। लगातार बारिश और बांधों में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। नदी नालों और जलभराव वाले रास्तों से दूरी बनाए रखना भी जरूरी होगा।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश में लो प्रेशर एरिया यानी निम्न दाब क्षेत्र और ट्रफ की सक्रियता बनी हुई है। यही सिस्टम बारिश को लगातार मजबूती दे रहा है। इसके चलते अगले तीन दिनों तक कई जिलों में भारी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।

    हालांकि प्रदेश में बारिश का वितरण समान नहीं है। पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर रीवा सागर और शहडोल संभाग में कई जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। करीब 40 जिलों में बारिश सामान्य से 6 से 51 प्रतिशत तक कम बताई गई है। दूसरी ओर अनूपपुर डिंडौरी निवाड़ी सतना शहडोल सीधी सिंगरौली उमरिया भिंड भोपाल बुरहानपुर गुना ग्वालियर खरगोन और राजगढ़ में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    ऐसे में मंगलवार की बारिश कई जिलों के लिए राहत लेकर आ सकती है लेकिन जिन इलाकों में पहले से जलभराव है वहां परेशानी बढ़ने की आशंका भी है। प्रशासन और स्थानीय लोगों को मौसम विभाग के अलर्ट पर नजर रखते हुए जरूरी सावधानी बरतनी होगी।

  • आरसी में सिर्फ गणेश और आधार में पूरा नाम तो ट्रांसफर अटक सकता है, भोपाल RTO में नाम मिसमैच से परेशान वाहन मालिक

    आरसी में सिर्फ गणेश और आधार में पूरा नाम तो ट्रांसफर अटक सकता है, भोपाल RTO में नाम मिसमैच से परेशान वाहन मालिक


    भोपाल ।
    भोपाल में वाहन मालिकों के लिए आरसी और आधार कार्ड में दर्ज नाम का मामूली अंतर भी बड़ी परेशानी का कारण बनता जा रहा है। खासकर ऐसे लोगों की दिक्कत बढ़ गई है जो अपनी पुरानी गाड़ी बेचने या किसी दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया में हैं। भोपाल आरटीओ में आधार आधारित प्रक्रिया के दौरान नाम का मिलान नहीं होने से वाहन ट्रांसफर के आवेदन अटकने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई वाहन मालिकों का कहना है कि वर्षों पहले वाहन खरीदते समय जिन दस्तावेजों के आधार पर आरसी तैयार हुई थी उनमें नाम अलग तरीके से दर्ज था। बाद में आधार कार्ड बनवाते समय पूरा नाम और सरनेम जुड़ गया। अब दोनों दस्तावेजों में यही अंतर वाहन ट्रांसफर के समय समस्या खड़ी कर रहा है।

    होशंगाबाद रोड निवासी गणेश बडाले का मामला इसका उदाहरण है। उनकी स्कूटी की आरसी में केवल गणेश नाम दर्ज है जबकि आधार कार्ड में पूरा नाम गणेश बडाले लिखा हुआ है। जब उन्होंने स्कूटी ट्रांसफर कराने के लिए आवेदन किया तो आधार और आरसी में नाम का मिलान नहीं होने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। गणेश के मुताबिक वह करीब पांच दिन से आरटीओ के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन अभी तक उन्हें यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि समस्या का समाधान किस दस्तावेज में सुधार कराने से होगा। उनका कहना है कि उन्होंने सामान्य तरीके से वाहन ट्रांसफर के लिए आवेदन किया था लेकिन नाम में अंतर सामने आने के बाद पूरी प्रक्रिया रुक गई।

    ऐसी समस्या केवल एक वाहन मालिक तक सीमित नहीं है। आरटीओ में पहुंच रहे लोगों के मुताबिक पुराने वाहनों के दस्तावेजों में दर्ज नाम और आधार कार्ड के नाम में अंतर होने के कारण कई मामलों में आवेदन अटक रहे हैं। किसी आरसी में सिर्फ पहला नाम दर्ज है तो कहीं सरनेम जुड़ा हुआ है जबकि आधार कार्ड में नाम का प्रारूप अलग है। उदाहरण के तौर पर किसी वाहन की आरसी में केवल यासिर दर्ज है जबकि आधार कार्ड में यासिर खान लिखा है। इसी तरह किसी आरसी में सतेंद्र मिश्रा दर्ज है जबकि दूसरे दस्तावेज में केवल सतेंद्र नाम हो सकता है। ऐसे मामलों में दस्तावेज वास्तविक रूप से एक ही व्यक्ति के होने के बावजूद सिस्टम में नाम का मिलान नहीं होने से परेशानी पैदा हो सकती है।

    यह समस्या खास तौर पर 10 से 15 साल पुरानी गाड़ियों के मालिकों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है। उस समय वाहन रजिस्ट्रेशन के लिए अलग-अलग दस्तावेजों का इस्तेमाल होता था और नाम दर्ज करने का तरीका भी आज की डिजिटल प्रक्रिया से अलग था। बाद में आधार कार्ड में पूरा नाम दर्ज होने के कारण पुराने आरसी रिकॉर्ड और मौजूदा पहचान दस्तावेज के बीच अंतर पैदा हो गया। वाहन मालिकों को अक्सर तब तक इस अंतर का पता नहीं चलता जब तक उन्हें गाड़ी ट्रांसफर कराने की जरूरत नहीं पड़ती।

    ऐसे में यदि आपके पास पुराना वाहन है तो उसे बेचने या ट्रांसफर कराने से पहले आरसी में दर्ज नाम और आधार कार्ड के नाम की जांच कर लेना बेहतर होगा। नाम के साथ सरनेम जुड़ा है या नहीं और दोनों दस्तावेजों में नाम की स्पेलिंग एक जैसी है या नहीं यह भी देखना जरूरी है। छोटी सी गलती समय रहते पकड़ में आ जाए तो आगे की प्रक्रिया में होने वाली परेशानी से बचा जा सकता है। खासकर पुरानी गाड़ियों के मालिकों को अपने दस्तावेजों की जानकारी पहले से दुरुस्त रखनी चाहिए ताकि वाहन बेचते या ट्रांसफर करते समय फाइल नाम मिसमैच के कारण अटक न जाए।

  • दुकानों पर सीलिंग के बीच व्यापारियों का अनोखा विरोध, मिंटो हॉल में प्रार्थना सभा कर मांगेंगे रहवासी इलाकों के कारोबार का स्थायी समाधान

    दुकानों पर सीलिंग के बीच व्यापारियों का अनोखा विरोध, मिंटो हॉल में प्रार्थना सभा कर मांगेंगे रहवासी इलाकों के कारोबार का स्थायी समाधान

    भोपाल । भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई के बाद व्यापारियों और रहवासी संगठनों के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कार्रवाई और सर्वे से परेशान व्यापारियों ने अब विरोध का अलग रास्ता अपनाने का फैसला किया है। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के नेतृत्व में व्यापारी बुधवार सुबह कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर यानी मिंटो हॉल परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने प्रार्थना सभा करेंगे। इस दौरान व्यापारी सामूहिक रूप से रामधुन का गायन करेंगे और कारोबारियों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रार्थना करेंगे। चैंबर के अध्यक्ष गोविंद गोयल के नेतृत्व में होने वाली इस सभा को व्यापारियों की ओर से शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी विरोध के तौर पर देखा जा रहा है।

    दरअसल राजधानी में रहवासी क्षेत्रों में संचालित दुकानों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नगर निगम ने कार्रवाई तेज कर दी है। कई इलाकों में सर्वे के साथ भवनों में किए गए अन्य निर्माण संबंधी उल्लंघनों की भी जांच की जा रही है। निगम की सख्ती के बाद ऐसे व्यापारियों में चिंता बढ़ गई है जो लंबे समय से रहवासी भवनों में दुकान या अन्य कारोबार संचालित कर रहे हैं। अवधपुरी अयोध्या बायपास गौतम नगर अशोका गार्डन और लालघाटी समेत कई क्षेत्रों में दुकानदारों के बीच नोटिस मिलने के बाद वैकल्पिक कमर्शियल स्थान तलाशने की चर्चा तेज हो गई है।

    व्यापारियों का कहना है कि अचानक सख्ती से उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है। उनका तर्क है कि यदि शहर का मास्टर प्लान समय पर स्पष्ट तरीके से लागू होता और रहवासी तथा व्यावसायिक क्षेत्रों का पहले से व्यवस्थित निर्धारण किया जाता तो आज ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। वहीं दूसरी ओर रहवासी संगठनों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों से स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है और किसी भी स्थिति में रहवासी इलाकों का व्यावसायीकरण नहीं होना चाहिए।

    इसी मुद्दे को लेकर पिछले दिनों विरोध प्रदर्शन भी तेज हुए हैं। रोशनपुरा चौराहे पर व्यापारियों ने चक्काजाम किया था। इसके बाद बाग सेवनिया अवधपुरी 10 नंबर और आनंद नगर में भी प्रदर्शन हुए। दूसरी ओर रहवासी संघ की ओर से गुलमोहर कॉलोनी में टॉर्च लाइट रैली निकाली गई थी। इससे पहले सात नंबर मार्केट में भी रहवासी संगठनों ने रैली के जरिए अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।

    नगर निगम ने अब मुख्य मार्गों के दोनों ओर के क्षेत्रों के साथ उनसे जुड़ी गलियों में भी सर्वे शुरू कर दिया है। नदी और तालाब के किनारे बने भवनों के अलावा ग्रीन बेल्ट बफर जोन और कैचमेंट एरिया में निर्माण की भी प्राथमिकता से जांच की जा रही है। अवैध मैरिज गार्डन को भी नोटिस दिए जाने की तैयारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह कार्रवाई और तेज होने के संकेत हैं।

    व्यापारियों की प्रार्थना सभा के जरिए अब इस पूरे विवाद का स्थायी समाधान निकालने की मांग सामने रखी जाएगी। सवाल यह है कि प्रशासन व्यापारियों की चिंता और रहवासियों की आपत्तियों के बीच ऐसा रास्ता कैसे निकालेगा जिससे नियमों का पालन भी हो और वर्षों से कारोबार कर रहे लोगों की रोजी-रोटी पर भी अचानक संकट न आए। भोपाल में कमर्शियल एक्टिविटी को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब शहर की बड़ी प्रशासनिक और कारोबारी चुनौती बनता जा रहा है।

  • MP में आज 25 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, टीकमगढ़-दमोह समेत 5 जिलों में अति भारी बारिश के आसार

    MP में आज 25 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, टीकमगढ़-दमोह समेत 5 जिलों में अति भारी बारिश के आसार


    भोपाल। मध्यप्रदेश में बारिश का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। मंगलवार को प्रदेश के करीब आधे हिस्से में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक टीकमगढ़, दमोह, नरसिंहपुर, बैतूल और राजगढ़ में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। इन जिलों में ढाई इंच से ज्यादा बारिश होने की संभावना है।

    इसके अलावा गुना, आगर-मालवा, शाजापुर, सीहोर, हरदा, सागर, रायसेन, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, जबलपुर, कटनी, शहडोल, छतरपुर, पन्ना, सीधी और सिंगरौली में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    30 जिलों में भी बारिश का दौर
    मौसम विभाग के अनुसार भोपाल, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, देवास, रतलाम, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, डिंडौरी, रीवा, सतना, मऊगंज, मैहर, उमरिया, अनूपपुर और निवाड़ी में भी कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    भोपाल में तेज बारिश, विदिशा के बाजार में भरा पानी
    सोमवार को भोपाल समेत कई जिलों में जोरदार बारिश हुई। भोपाल के कई इलाकों में तेज बारिश के चलते यातायात प्रभावित हुआ। वहीं विदिशा के बाजार में पानी भरने से दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा। रायसेन और शाजापुर में भी बारिश का असर देखने को मिला।

    पिछले 24 घंटे में नर्मदापुरम में औसतन 3.7 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा शिवपुरी के करैरा में 5.4 इंच, निवाड़ी के ओरछा में 3.3 इंच, सागर के रहली में 3 इंच, भोपाल के कोलार में 3.2 इंच, नवीबाग में 3.1 इंच और भोपाल शहर में करीब 3 इंच बारिश हुई।

    लो प्रेशर और ट्रफ से बदला मौसम
    मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में लो प्रेशर एरिया और ट्रफ सक्रिय हैं। इन मौसमी सिस्टम की वजह से कई हिस्सों में लगातार बारिश हो रही है। अगले तीन दिनों तक भी प्रदेश के अलग-अलग जिलों में तेज बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    40 जिलों में सामान्य से कम बारिश
    प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में अब तक 19% तक कम बारिश दर्ज की गई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी, टीकमगढ़ और डिंडौरी समेत कई जिलों में सामान्य से 6% से 51% तक कम बारिश हुई है।

    पश्चिमी मध्यप्रदेश के भी कई जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे है। आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, खंडवा, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 1% से 49% तक कम पानी गिरा है।

    15 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    IMD के अनुसार अनूपपुर, डिंडौरी, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, गुना, ग्वालियर, खरगोन और राजगढ़ में अब तक सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • महाकाल की नगरी में कुर्सी की रस्साकशी और प्रशासनिक किस्से

    महाकाल की नगरी में कुर्सी की रस्साकशी और प्रशासनिक किस्से


    उज्जैन  महाकाल की नगरी उज्जैन में इन दिनों राजनीति और प्रशासनिक गलियारों की चर्चाएं लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं। खास तौर पर एक नियुक्ति को लेकर सामने आए घटनाक्रम ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। चर्चा है कि पिछड़े वर्ग से जुड़े एक पद पर नियुक्ति का पत्र जारी होने के बाद ही विरोध के स्वर उठने लगे। इसके बाद महज 48 घंटे के भीतर नई सूची सामने आई और उसमें संबंधित नाम दिखाई नहीं दिया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं और इसे प्रभावशाली नेताओं की आपत्ति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि पूरे मामले को लेकर आधिकारिक स्तर पर अलग अलग दावे सामने आने की चर्चा है।

    उधर हिम्मतगढ़ की पहाड़ी से जुड़ा एक मामला भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि हाल में हुई लाखों रुपये की लूट के बाद पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने में तेजी दिखाई। चर्चा तो यहां तक है कि वारदात के बाद आरोपी कथित तौर पर उसी इलाके में फिर एकत्र हो गए जहां पुलिस को उनकी मौजूदगी का सुराग मिल गया। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मामले की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की। इस घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली और आरोपियों की कथित लापरवाही दोनों पर तरह तरह की बातें कही जा रही हैं।

    नागपंचमी के दौरान शिवाजी भवन से जुड़ा एक प्रसंग भी चर्चा में रहा। धार्मिक आयोजन के बीच एक श्रद्धालु को रोके जाने की बात सामने आने के बाद मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। आस्था और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर भी सवाल उठे। हालांकि ऐसे मामलों में वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान को ही आधार माना जाना चाहिए।

    प्रशासनिक गलियारों में नामांतरण से जुड़े कथित लेनदेन की चर्चाओं ने भी माहौल गर्म किया हुआ है। एक अधिकारी पर प्रति बीघा रकम मांगने के आरोपों की चर्चा है। यदि इस तरह के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय हो सकता है। दूसरी ओर एक अधिकारी द्वारा कथित सिफारिश पर सख्त प्रतिक्रिया दिए जाने की चर्चा भी सामने आई है। बताया जाता है कि सिफारिश के जवाब में नोटिस जारी करने तक की बात कही गई। इससे यह संदेश गया कि प्रशासनिक कामकाज में दबाव और सिफारिश को लेकर अब सख्ती बरती जा रही है।

    नागपंचमी की भीड़ और आगामी सिंहस्थ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी प्रशासन की प्राथमिकता बनी हुई है। इसी क्रम में बड़ी संख्या में बैरिकेडिंग और भीड़ प्रबंधन की तैयारियों को लेकर अधिकारियों की सक्रियता चर्चा में रही। रात तक व्यवस्थाओं की निगरानी किए जाने और संभावित भीड़ वाले क्षेत्रों में पहले से इंतजाम करने की कोशिश को प्रशासनिक तैयारी के तौर पर देखा गया।

    इसी बीच एक बड़े राजनीतिक चेहरे के अचानक उज्जैन दौरे और वीआईपी गेस्ट हाउस में बैठकों की खबर ने भी सियासी चर्चाओं को हवा दे दी। कार्यक्रम की सूचना को लेकर कुछ नेताओं के नाराज होने की बात कही गई लेकिन बाद में दौरा अचानक तय होने की जानकारी सामने आने के बाद स्थिति सामान्य होने की चर्चा है। हेलीपैड से लेकर बैठकों तक नेताओं के बीच हल्के फुल्के तंज और राजनीतिक बातचीत का दौर भी चलता रहा।

    सिंहस्थ की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण और शहर के विकास से जुड़े मुद्दे भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बने हुए हैं। ऐसे में उज्जैन का सियासी माहौल आने वाले दिनों में और गर्म रहने की संभावना है। बाबा की नगरी में फिलहाल राजनीति प्रशासन और सिंहस्थ की तैयारियां एक साथ चर्चा के केंद्र में हैं और यही वजह है कि यहां हर छोटा बड़ा घटनाक्रम राजनीतिक गलियारों में नई कहानी को जन्म दे रहा है।

  • इंदौर होटल कांड में नया मोड़, युवक ने बदली पहचान; मोबाइल और कमरे की तलाशी में मिला संदिग्ध सामान, पुलिस जांच में जुटी

    इंदौर होटल कांड में नया मोड़, युवक ने बदली पहचान; मोबाइल और कमरे की तलाशी में मिला संदिग्ध सामान, पुलिस जांच में जुटी


    इंदौर । इंदौर के लसूड़िया थाना क्षेत्र में स्थित एक होटल में युवती के साथ दो युवकों के मिलने के बाद रविवार रात हंगामा हो गया। स्कीम नंबर 114 पार्ट-1 स्थित होटल सिल्वर पैलेस में कुछ लोगों ने युवती के साथ गलत गतिविधि होने का आरोप लगाते हुए पुलिस को सूचना दी। इसके बाद राजपूत करणी सेना के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और होटल के कमरे से एक युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। दूसरा युवक मौके से फरार हो गया। पुलिस ने फिलहाल पकड़े गए युवक के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

    मिली जानकारी के मुताबिक करणी सेना के कार्यकर्ताओं को होटल में एक हिंदू युवती के साथ दो युवकों के मौजूद होने की सूचना मिली थी। संगठन के पदाधिकारी होटल पहुंचे और कमरे में मौजूद युवकों से पूछताछ की। आरोप है कि दोनों युवक युवती को नशा करा रहे थे। पूछताछ के दौरान पकड़े गए युवक ने पहले अपनी पहचान छिपाते हुए अपना नाम लक्की बताया। बाद में पूछताछ में उसकी पहचान खजराना निवासी फैजान खान के रूप में हुई। उसके साथ मौजूद अमन खान मौके से निकल गया।

    मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने अमन पर फर्जी पुलिसकर्मी बनकर लोगों को डराने और ब्लैकमेल करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। संगठन का दावा है कि दोनों युवक खजराना और आसपास के क्षेत्रों में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़े हुए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस जांच के बाद ही इन दावों की वास्तविकता स्पष्ट होगी।

    घटना के दौरान फैजान के मोबाइल फोन की जांच किए जाने का भी दावा किया गया। संगठन के मुताबिक मोबाइल में कई युवतियों के साथ आपत्तिजनक फोटो वीडियो और चैट मिले। इसके अलावा गांजा एमडी और चाकू की तस्वीरें भी मोबाइल में होने की बात सामने आई। होटल के कमरे की तलाशी के दौरान शराब की बोतलें कंडोम और कथित तौर पर सेक्स वर्धक गोलियां मिलने का भी दावा किया गया है। पुलिस इन सभी बरामद वस्तुओं और डिजिटल सामग्री की जांच कर रही है।

    मामले में सबसे अहम पहलू युवती की स्थिति और उसके बयान को माना जा रहा है। लसूड़िया थाना प्रभारी राजकुमार यादव के मुताबिक पुलिस के पास करणी सेना के कार्यकर्ता फैजान नाम के युवक को लेकर आए थे। पुलिस का कहना है कि युवक काफी नशे की हालत में था। उसके मोबाइल में आपत्तिजनक वीडियो चाकू और गांजे से संबंधित तस्वीरें मिलने की बात भी सामने आई है। पुलिस अधिकारी के अनुसार युवक का नशा उतरने के बाद उससे विस्तार से पूछताछ की जाएगी और युवती से भी घटना के संबंध में जानकारी ली जाएगी।

    फिलहाल पुलिस ने युवक को हिरासत में लेकर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है। फरार बताए जा रहे अमन खान की तलाश और मामले में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। करणी सेना के पदाधिकारियों ने फरार युवक की गिरफ्तारी और पूरे मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

    पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि होटल के कमरे में वास्तव में क्या हुआ था और युवती के साथ किसी तरह की जबरदस्ती या नशीला पदार्थ देने की बात सही है या नहीं। फिलहाल मामले में लगाए गए सभी गंभीर आरोप जांच के अधीन हैं।