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  • तेंदुखेड़ा में नाबालिग से दुष्कर्म का मामला: बच्ची के मां बनने पर खुली पोल, आरोपी गिरफ्तार; पुलिस कराएगी DNA जांच

    तेंदुखेड़ा में नाबालिग से दुष्कर्म का मामला: बच्ची के मां बनने पर खुली पोल, आरोपी गिरफ्तार; पुलिस कराएगी DNA जांच

    मध्य प्रदेश: के नरसिंहपुर जिले के तेंदुखेड़ा क्षेत्र से नाबालिग से दुष्कर्म का एक गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार एक नाबालिग लड़की को लंबे समय तक डरा-धमकाकर उसका शारीरिक शोषण किया गया। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब किशोरी ने एक बच्चे को जन्म दिया। घटना सामने आने के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है और पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

    तेंदुखेड़ा थाना पुलिस के मुताबिक आरोपी राजा लोधी लंबे समय से पीड़ित किशोरी को धमकाता था और उसकी मजबूरी का फायदा उठाकर उसके साथ बार-बार शारीरिक संबंध बनाता रहा। नाबालिग होने के कारण पीड़िता भय के माहौल में रही और किसी को कुछ नहीं बता सकी। परिवार को तब संदेह हुआ जब बच्ची गर्भवती पाई गई और बाद में उसने एक नवजात को जन्म दिया।

    परिजनों द्वारा पूछताछ किए जाने पर किशोरी ने रोते हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। इसके बाद परिवार ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू की और आरोपी के खिलाफ विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया।

    पुलिस ने आरोपी राजा लोधी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वैज्ञानिक साक्ष्यों को मजबूत करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से नवजात बच्चे और आरोपी का DNA परीक्षण कराया जाएगा। इसके लिए दोनों के नमूने एकत्र कर संबंधित प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं।

    जांच अधिकारियों के अनुसार DNA रिपोर्ट आने के बाद मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य मिल सकेंगे, जो न्यायिक प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाएंगे। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना कितने समय से चल रही थी और क्या आरोपी ने किसी प्रकार का दबाव या धमकी देकर पीड़िता को चुप रहने के लिए मजबूर किया था।

    प्रशासन ने पीड़ित किशोरी और उसके परिवार को आवश्यक कानूनी तथा मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है। बाल संरक्षण से जुड़े विभागों को भी मामले की जानकारी दे दी गई है ताकि पीड़िता को उचित परामर्श और सहायता मिल सके।

    तेंदुखेड़ा पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए कानून के तहत सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

  • महिला कर्मचारियों वाले विभागीय ग्रुप में कथित अशोभनीय चैट से मचा विवाद, स्वास्थ्य विभाग के सुपरवाइजर को कारण बताओ नोटिस, जांच के बाद होगी कार्रवाई

    महिला कर्मचारियों वाले विभागीय ग्रुप में कथित अशोभनीय चैट से मचा विवाद, स्वास्थ्य विभाग के सुपरवाइजर को कारण बताओ नोटिस, जांच के बाद होगी कार्रवाई

    मध्य प्रदेश: के सिंगरौली जिले के चितरंगी स्वास्थ्य विभाग में विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप में कथित अशोभनीय चैट भेजे जाने के आरोपों ने प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। महिला कर्मचारियों की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित सुपरवाइजर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रारंभिक स्तर पर कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्णय लिया गया है, जिसके बाद प्राप्त जवाब और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    मामला चितरंगी विकासखंड के सेक्टर लमसरई से जुड़ा है, जहां सुपरवाइजर का दायित्व संभाल रहे दुर्गा वैश्य पर विभागीय ग्रुप में कथित रूप से अशोभनीय संदेश साझा करने का आरोप लगाया गया है। बताया गया है कि जिस ग्रुप में यह संदेश भेजे गए, उसमें विभाग के अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में महिला कर्मचारी भी शामिल हैं। आरोप सामने आने के बाद विभागीय माहौल प्रभावित हुआ और कर्मचारियों के बीच इस मुद्दे को लेकर असंतोष बढ़ गया।

    महिला कर्मचारियों का कहना है कि विभागीय संचार के लिए बनाए गए ग्रुप का उपयोग केवल प्रशासनिक कार्यों और आधिकारिक सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए होना चाहिए। ऐसे मंच पर कथित आपत्तिजनक संदेश साझा किए जाने से न केवल उन्हें असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, बल्कि कार्यस्थल का वातावरण भी प्रभावित हुआ। कर्मचारियों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाएं सरकारी कार्यालयों की गरिमा और अनुशासन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं।

    शिकायत मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों ने पूरे मामले की प्रारंभिक जानकारी एकत्र करना शुरू कर दिया है। विभाग का कहना है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ अंतिम कार्रवाई जांच पूरी होने और उसका पक्ष सुनने के बाद ही की जाएगी।

    खंड चिकित्सा अधिकारी हरिशंकर वैश्य ने बताया कि शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा कि संबंधित सुपरवाइजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है। नोटिस का जवाब प्राप्त होने के बाद विभागीय नियमों के अनुरूप आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यदि जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाते हैं तो सेवा नियमों के तहत आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    इस घटना के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में कार्यस्थल पर आचरण और डिजिटल माध्यमों के जिम्मेदार उपयोग को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि आधिकारिक संचार मंचों का उपयोग केवल कार्यालयीन कार्यों तक सीमित रहना चाहिए और किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि को स्वीकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और विभाग अब संबंधित पक्षों के बयान तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा।

  • निलंबन और इस्तीफे के बाद भी नहीं थमा सड़क सुरक्षा अभियान, पूर्व ट्रैफिक कर्मी के वायरल वीडियो ने यातायात व्यवस्था पर उठाए सवाल

    निलंबन और इस्तीफे के बाद भी नहीं थमा सड़क सुरक्षा अभियान, पूर्व ट्रैफिक कर्मी के वायरल वीडियो ने यातायात व्यवस्था पर उठाए सवाल

    मध्य प्रदेश: के शहडोल में पूर्व ट्रैफिक हेड कांस्टेबल विवेकानंद तिवारी एक बार फिर चर्चा में हैं। पुलिस विभाग से निलंबन और बाद में स्वैच्छिक इस्तीफा देने के बावजूद उन्होंने सड़क सुरक्षा को लेकर अपना अभियान जारी रखा है। सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स रखने वाले विवेकानंद तिवारी का नया वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने यातायात नियमों के उल्लंघन की कई घटनाओं को कैमरे में रिकॉर्ड कर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया है।

    हाल ही में साझा किए गए वीडियो में उन्होंने शहर के एक प्रमुख चौराहे पर यातायात व्यवस्था का वास्तविक दृश्य दिखाया। वीडियो में मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना, बिना हेलमेट दोपहिया चलाना, रॉन्ग साइड ड्राइविंग, एक बाइक पर तीन लोगों का सफर करना और नाबालिग के वाहन चलाने जैसी कई लापरवाहियां दिखाई गई हैं। उनका कहना है कि ऐसी छोटी दिखने वाली गलतियां ही अधिकांश सड़क दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बनती हैं।

    वीडियो के माध्यम से उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी समान जिम्मेदारी है। उनका मानना है कि यातायात नियमों का पालन करके अनेक दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। इसी उद्देश्य से वह लगातार लोगों को जागरूक करने वाले वीडियो तैयार कर रहे हैं।

    विवेकानंद तिवारी पहले ट्रैफिक पुलिस में कार्यरत थे और ड्यूटी के दौरान भी सड़क सुरक्षा से जुड़े उनके वीडियो सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुए थे। उनके जागरूकता अभियान को व्यापक समर्थन मिला और बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें डिजिटल माध्यमों पर फॉलो करना शुरू किया। समय के साथ उनके वीडियो सड़क सुरक्षा से जुड़े जनजागरूकता अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए।

    हालांकि कुछ समय पहले विभाग ने उन्हें लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और सेवा नियमों के उल्लंघन के आरोप में निलंबित कर दिया था। विभागीय जांच में यह भी उल्लेख किया गया कि अनुपस्थिति के दौरान वह सोशल मीडिया पर सक्रिय थे। इसके बाद उन्होंने अपनी ओर से स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए और बताया कि उन्होंने अपनी बीमारी की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई थी।

    बाद में उन्होंने स्वेच्छा से पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया। उनका कहना था कि निलंबन की कार्रवाई से उनकी सार्वजनिक छवि प्रभावित हुई है, इसलिए उन्होंने सेवा छोड़ने का निर्णय लिया। विभाग से अलग होने के बाद भी उन्होंने सड़क सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी और स्वतंत्र रूप से जागरूकता अभियान चलाना जारी रखा।

    वर्तमान में वह हेलमेट उपयोग, सुरक्षित वाहन संचालन और यातायात नियमों के पालन को लेकर लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से वह सड़क पर दिखाई देने वाली लापरवाहियों को सामने लाते हैं और लोगों से जिम्मेदार नागरिक बनने की अपील करते हैं। उनके हालिया वीडियो को भी बड़ी संख्या में लोग देख रहे हैं और इस पर सड़क सुरक्षा तथा यातायात व्यवस्था को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए कानून के साथ-साथ जनजागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है। ऐसे अभियानों से लोगों में यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। शहडोल से सामने आया यह मामला भी इस बात की ओर संकेत करता है कि सड़क सुरक्षा का संदेश किसी पद या वर्दी का मोहताज नहीं होता, बल्कि सामाजिक सहभागिता और व्यक्तिगत पहल के माध्यम से भी प्रभावी बदलाव लाया जा सकता है।

  • खंडवा में बारिश बनी जानलेवा आफत, आकाशीय बिजली से दो किसानों की मौत, उफनती नदी में बहीं कृषि मशीनें और पंधाना मार्ग का संपर्क टूटा

    खंडवा में बारिश बनी जानलेवा आफत, आकाशीय बिजली से दो किसानों की मौत, उफनती नदी में बहीं कृषि मशीनें और पंधाना मार्ग का संपर्क टूटा


    मध्य प्रदेश:
    के खंडवा जिले में लगातार हो रही तेज बारिश ने जनजीवन पर व्यापक असर डाला है। जिले के कई हिस्सों में जलभराव, उफनती नदियों और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस बीच आकाशीय बिजली गिरने की दो अलग-अलग घटनाओं में दो किसानों की मौत हो गई, जबकि कई स्थानों पर बाढ़ के तेज बहाव में कृषि उपकरण बह जाने और सड़क संपर्क टूटने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। प्रशासन ने हालात पर लगातार नजर रखते हुए लोगों से अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की है।

    खंडवा जिले के देवला माफी गांव में 42 वर्षीय किसान अपने खेत में कृषि कार्य कर रहे थे। इसी दौरान अचानक मौसम बदला और तेज बारिश के बीच आकाशीय बिजली गिरने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। इस घटना से पूरे गांव में शोक का माहौल है और परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

    इसी तरह भगवानपुरा गांव में 45 वर्षीय एक व्यक्ति अपने घर के बाहर खड़े थे, तभी अचानक गिरी बिजली की चपेट में आ गए। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें भी अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार शुरू होने से पहले ही डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। लगातार हो रही बारिश के बीच आकाशीय बिजली की इन घटनाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।

    भारी बारिश का असर जिले की सड़क व्यवस्था पर भी स्पष्ट दिखाई दिया। खंडवा-पंधाना-बुरहानपुर मार्ग पर निर्माणाधीन पुलिया के लिए बनाई गई अस्थायी सर्विस रोड तेज बहाव के कारण पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इसके चलते इस महत्वपूर्ण मार्ग पर आवागमन लंबे समय तक बाधित रहा और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। कई यात्रियों को घंटों तक रास्ता खुलने का इंतजार करना पड़ा।

    हालांकि प्रशासन की चेतावनी के बावजूद कुछ लोग उफनते पानी को पार करने का जोखिम उठाते हुए दिखाई दिए। तेज बहाव के बीच लोगों का इस तरह आवागमन करना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा माना जा रहा है। स्थानीय प्रशासन लगातार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की सलाह दे रहा है।

    जिले के जसवाड़ी क्षेत्र में भी तेज बारिश के कारण नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। तेज बहाव में एक कृषि मशीन और दो कल्टीवेटर पानी में बह गए, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। वहीं मौके पर मौजूद लोगों ने सूझबूझ दिखाते हुए एक गिट्टी-सीमेंट मिक्सर मशीन को मजबूत रस्सियों से बांध दिया, जिससे उसे बहने से बचा लिया गया। इस घटना ने क्षेत्र में बारिश के बढ़ते खतरे को और स्पष्ट कर दिया।

    जिले में मौसम अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है। आसमान में घने बादल छाए हुए हैं और रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है तथा आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। लोगों से अपील की गई है कि पुल-पुलिया के ऊपर पानी बहने की स्थिति में किसी भी हाल में उसे पार करने का प्रयास न करें और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करते हुए सुरक्षित स्थानों पर ही रहें। लगातार हो रही बारिश को देखते हुए आगामी दिनों में भी सतर्कता बनाए रखना आवश्यक माना जा रहा है।

  • दिग्विजय सिंह पर कांग्रेस महासचिव का बड़ा हमला, संगठन को कमजोर करने का लगाया आरोप, हाईकमान से कड़ी कार्रवाई की मांग तेज

    दिग्विजय सिंह पर कांग्रेस महासचिव का बड़ा हमला, संगठन को कमजोर करने का लगाया आरोप, हाईकमान से कड़ी कार्रवाई की मांग तेज


    मध्य प्रदेश:
    कांग्रेस में लंबे समय से जारी अंदरूनी मतभेद एक बार फिर सार्वजनिक रूप से सामने आ गए हैं। इस बार पार्टी की प्रदेश महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए उनके व्यवहार को संगठन के हितों के विपरीत बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के बावजूद दिग्विजय सिंह ने संगठनात्मक मर्यादाओं का पालन नहीं किया और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ सार्वजनिक मंच से बयान देकर पार्टी की एकजुटता को नुकसान पहुंचाया।

    निधि चतुर्वेदी ने कहा कि उज्जैन भूमि विवाद और वीर भारत न्यास से जुड़े मामलों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है, लेकिन किसी भी स्थिति में पार्टी के वरिष्ठ नेता द्वारा मीडिया के सामने प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ खुलकर बयान देना उचित नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि यदि किसी मुद्दे पर मतभेद थे तो उन्हें पार्टी के आंतरिक मंचों पर रखा जाना चाहिए था, न कि सार्वजनिक रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर संगठन की छवि प्रभावित की जाती।

    उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के भीतर संवाद और अनुशासन की परंपरा रही है तथा वरिष्ठ नेताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे संगठनात्मक प्रक्रिया का सम्मान करें। उनके अनुसार सार्वजनिक बयानबाजी से पार्टी कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा होती है और विपक्ष को राजनीतिक हमला करने का अवसर मिल जाता है। उन्होंने इसे संगठनात्मक अनुशासन के विपरीत बताते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की।

    प्रदेश महासचिव ने दिग्विजय सिंह पर व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को संगठन से ऊपर रखने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि प्रदेश नेतृत्व को लेकर सार्वजनिक विवाद खड़ा करना पार्टी की मजबूती के बजाय कमजोरी का कारण बन रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रकार की गतिविधियां कार्यकर्ताओं के मनोबल को प्रभावित करती हैं और संगठन की सामूहिक लड़ाई को कमजोर करती हैं।

    निधि चतुर्वेदी ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में कांग्रेस कार्यकर्ता विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय रूप से संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे समय में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा सार्वजनिक स्तर पर एक-दूसरे के खिलाफ बयान देना कार्यकर्ताओं के विश्वास को प्रभावित करता है। उनके अनुसार संगठन के भीतर असहमति होना स्वाभाविक है, लेकिन उसका समाधान पार्टी की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए।

    उन्होंने वर्ष 2020 में मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार के गिरने, उसके बाद हुए विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन तथा हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि लगातार सामने आने वाले आंतरिक विवादों ने संगठन को नुकसान पहुंचाया है। उनका मानना है कि यदि समय रहते संगठनात्मक अनुशासन को मजबूत नहीं किया गया तो भविष्य में भी ऐसी परिस्थितियां पार्टी के लिए चुनौती बन सकती हैं।

    अपने बयान के अंत में निधि चतुर्वेदी ने कांग्रेस नेतृत्व से आग्रह किया कि संगठन की विश्वसनीयता और कार्यकर्ताओं के मनोबल को बनाए रखने के लिए इस पूरे मामले का गंभीरता से संज्ञान लिया जाए। उन्होंने मांग की कि पार्टी अनुशासन का उल्लंघन करने वाले किसी भी नेता के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि संगठन में स्पष्ट संदेश जाए कि व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर पार्टी का सामूहिक हित सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मजबूती संगठनात्मक एकजुटता, अनुशासन और सामूहिक नेतृत्व से ही संभव है तथा सभी नेताओं को इसी भावना के साथ कार्य करना चाहिए।

  • ऋषिकेश-इंदौर स्लीपर बस में भीषण आग, 7 यात्रियों की दर्दनाक मौत; मध्य प्रदेश के 5 लोग जिंदा जले, 13 की हालत गंभीर, 4 अब भी लापता

    ऋषिकेश-इंदौर स्लीपर बस में भीषण आग, 7 यात्रियों की दर्दनाक मौत; मध्य प्रदेश के 5 लोग जिंदा जले, 13 की हालत गंभीर, 4 अब भी लापता

    मध्य प्रदेश:  राजस्थान के दौसा जिले के पास ऋषिकेश से इंदौर आ रही एक निजी स्लीपर बस में लगी भीषण आग ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस दर्दनाक हादसे में अब तक सात यात्रियों की मौत की पुष्टि हुई है। मृतकों में मध्य प्रदेश के पांच यात्री शामिल हैं, जो बस के भीतर ही आग की चपेट में आने से बाहर नहीं निकल सके। इसके अलावा दो अन्य यात्रियों ने गंभीर चोटों के कारण दम तोड़ दिया। हादसे में दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें 13 की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। वहीं चार यात्रियों का अब तक कोई पता नहीं चल सका है, जिससे परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

    बताया जा रहा है कि बस उत्तराखंड के ऋषिकेश से यात्रियों को लेकर इंदौर के लिए रवाना हुई थी। देर रात जब बस राजस्थान के दौसा क्षेत्र से गुजर रही थी, तभी उसमें अचानक आग लग गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग तेजी से पूरी बस में फैल गई और कुछ ही मिनटों में वाहन आग की लपटों से घिर गया। अचानक हुई इस घटना से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोगों ने जान बचाने के लिए खिड़कियों के शीशे तोड़कर बाहर छलांग लगा दी। हालांकि कई यात्री समय रहते बाहर नहीं निकल सके और आग की चपेट में आ गए।

    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग और राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचे। आग पर काबू पाने के बाद बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला गया और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों के अनुसार अस्पताल पहुंचने से पहले ही सात यात्रियों की मृत्यु हो चुकी थी। मृतकों में पांच शव इतने अधिक झुलस चुके थे कि उनकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

    अस्पताल में भर्ती घायलों में कई की हालत गंभीर बनी हुई है। इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। चिकित्सकीय टीम लगातार उनका उपचार कर रही है और गंभीर रूप से घायल यात्रियों की स्थिति पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने जरूरत पड़ने पर बेहतर उपचार के लिए उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्रों में स्थानांतरित करने की भी तैयारी की है।

    हादसे के बाद मध्य प्रदेश के इंदौर, बड़वाह, डबरा और अन्य क्षेत्रों के परिवारों में शोक और चिंता का माहौल है। कई परिजन अपने रिश्तेदारों की जानकारी लेने और उनकी पहचान के लिए राजस्थान रवाना हो चुके हैं। प्रशासन लगातार घायलों और मृतकों की पहचान संबंधी जानकारी परिजनों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है ताकि राहत कार्य में किसी प्रकार की देरी न हो।

    इस बीच चार यात्रियों के लापता होने की सूचना ने राहत एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस और प्रशासन बस के आसपास के क्षेत्र में उनकी तलाश कर रहे हैं। साथ ही अस्पतालों और अन्य संभावित स्थानों पर भी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि सभी यात्रियों का पता लगाया जा सके।

    घटना के कारणों का अभी स्पष्ट रूप से पता नहीं चल सका है। पुलिस और संबंधित एजेंसियों ने आग लगने की वजह की जांच शुरू कर दी है। तकनीकी विशेषज्ञ बस की स्थिति, इंजन, विद्युत प्रणाली और अन्य संभावित कारणों की जांच कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा तकनीकी खराबी, शॉर्ट सर्किट या किसी अन्य कारण से हुआ। प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने के साथ घायलों को हर संभव चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।

  • संपत्ति कुर्की के आदेश पड़ते ही बदले हालात, छह महीने से फरार GST अधीक्षक मुकेश बर्मन ने किया आत्मसमर्पण, CBI अब करेगी गहन पूछताछ

    संपत्ति कुर्की के आदेश पड़ते ही बदले हालात, छह महीने से फरार GST अधीक्षक मुकेश बर्मन ने किया आत्मसमर्पण, CBI अब करेगी गहन पूछताछ

    मध्य प्रदेश: के जबलपुर में सामने आए चर्चित सेंट्रल जीएसटी रिश्वतकांड में छह महीने से फरार चल रहे जीएसटी अधीक्षक मुकेश बर्मन ने आखिरकार अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। लंबे समय से गिरफ्तारी से बच रहे आरोपी के खिलाफ संपत्ति कुर्की की प्रक्रिया शुरू होने के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और उसने न्यायालय का रुख किया। अदालत ने उसे 2 जुलाई तक CBI रिमांड पर भेजते हुए जांच एजेंसी को पूछताछ की अनुमति दे दी है। माना जा रहा है कि रिमांड के दौरान मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा हो सकता है।

    यह मामला पिछले वर्ष दिसंबर में सामने आया था, जब केंद्रीय जांच एजेंसी ने जबलपुर स्थित सेंट्रल जीएसटी डिविजन कार्यालय में छापेमारी कर कथित रिश्वतखोरी के नेटवर्क का खुलासा किया था। ट्रैप कार्रवाई के दौरान विभाग के एक सहायक आयुक्त और एक निरीक्षक को चार लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था। इसी कार्रवाई के दौरान जीएसटी अधीक्षक मुकेश बर्मन फरार हो गया था और तब से उसकी तलाश लगातार जारी थी।

    जांच एजेंसी ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न संभावित ठिकानों पर कई बार दबिश दी, लेकिन वह लगातार जांच से बचता रहा। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत उसकी संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई शुरू की गई। इसी बीच आरोपी ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। इस घटनाक्रम को जांच की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अब एजेंसी सीधे आरोपी से पूछताछ कर पूरे प्रकरण की कड़ियां जोड़ने का प्रयास करेगी।

    पूरे मामले की शुरुआत एक होटल व्यवसायी की शिकायत से हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कर संबंधी मामले में बड़ी राशि की रिकवरी दर्शाने के बाद उसे राहत देने के नाम पर दस लाख रुपये की रिश्वत की मांग की गई। शिकायत मिलने के बाद जांच एजेंसी ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की, जिसमें चार लाख रुपये की रिश्वत स्वीकार किए जाने के दौरान अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद मामले ने व्यापक चर्चा बटोरी और विभागीय कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खड़े हुए।

    अब मुकेश बर्मन के आत्मसमर्पण के बाद जांच का दायरा और व्यापक होने की संभावना है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि कथित रिश्वत मांगने और वसूली के इस पूरे प्रकरण में किन-किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि क्या यह मामला किसी संगठित भ्रष्टाचार तंत्र का हिस्सा था या फिर सीमित स्तर पर संचालित किया जा रहा था।

    जांच के दौरान आरोपी से विभागीय प्रक्रियाओं, कथित रिश्वत मांगने के तरीके, वित्तीय लेनदेन और अन्य संभावित सहयोगियों के बारे में विस्तार से पूछताछ की जाएगी। यदि पूछताछ में नए तथ्य सामने आते हैं तो मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। फिलहाल अदालत द्वारा दिए गए रिमांड के दौरान CBI पूरे घटनाक्रम की परतें खोलने और उपलब्ध साक्ष्यों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। मामले की आगामी सुनवाई और जांच के निष्कर्षों पर अब सभी की नजर बनी हुई है।

  • इंस्टाग्राम पर नाबालिग छात्राओं को जाल में फंसाने का आरोप, अश्लील चैट और वीडियो भेजकर बनाता था दबाव, POCSO के तहत मामला दर्ज

    इंस्टाग्राम पर नाबालिग छात्राओं को जाल में फंसाने का आरोप, अश्लील चैट और वीडियो भेजकर बनाता था दबाव, POCSO के तहत मामला दर्ज

    मध्य प्रदेश: के इंदौर में सोशल मीडिया के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। इंस्टाग्राम के माध्यम से दो नाबालिग छात्राओं से कथित रूप से दोस्ती कर उन्हें अश्लील संदेश और वीडियो भेजने तथा मिलने के लिए दबाव बनाने के आरोप में एक 25 वर्षीय युवक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध POCSO एक्ट सहित विभिन्न प्रासंगिक धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए दोनों छात्राओं से संपर्क स्थापित किया। पहले सामान्य बातचीत के माध्यम से विश्वास जीतने का प्रयास किया गया और बाद में कथित रूप से आपत्तिजनक चैट, अश्लील वीडियो और अनुचित संदेश भेजे जाने लगे। आरोप है कि इसके बाद आरोपी ने छात्राओं पर व्यक्तिगत रूप से मिलने और शारीरिक संबंध बनाने का दबाव भी बनाया।

    मामले का खुलासा तब हुआ जब छात्राओं के परिजनों ने उनके सोशल मीडिया अकाउंट की चैट देखी। बातचीत की सामग्री संदिग्ध लगने पर परिजनों ने तत्काल पुलिस से संपर्क किया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया और आरोपी के डिजिटल रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी।

    पुलिस के अनुसार आरोपी पिछले कुछ वर्षों से इंदौर में रह रहा था और पढ़ाई के सिलसिले में अलग-अलग स्थानों पर किराये के मकानों में रह चुका है। जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन की प्राथमिक पड़ताल में अन्य युवतियों से जुड़ी वीडियो चैट और तस्वीरें भी मिलने की जानकारी सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं इसी तरह की गतिविधियों का दायरा अन्य लोगों तक भी तो नहीं फैला हुआ था।

    जांच एजेंसियां आरोपी के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल संचार के अन्य माध्यमों की फॉरेंसिक जांच कराने की तैयारी कर रही हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपी ने कितने लोगों से संपर्क किया था और क्या उसने किसी अन्य नाबालिग को भी इसी प्रकार निशाना बनाने की कोशिश की थी। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    इस घटना ने एक बार फिर बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अनजान लोगों से संपर्क करते समय विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है। नाबालिगों को डिजिटल सुरक्षा के बारे में जागरूक करना और अभिभावकों द्वारा उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर संतुलित निगरानी रखना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गई है।

    साइबर अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी के बीच पुलिस भी लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रही है। किसी भी संदिग्ध प्रोफाइल, आपत्तिजनक संदेश, ब्लैकमेल या दबाव बनाने जैसी स्थिति सामने आने पर तत्काल पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है। समय रहते शिकायत दर्ज कराने से ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई संभव हो सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए केवल कानूनी कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि परिवार, विद्यालय और समाज को भी मिलकर बच्चों को ऑनलाइन जोखिमों के प्रति जागरूक करना होगा। तकनीक का जिम्मेदारी के साथ उपयोग और समय पर सतर्कता ही इस प्रकार के साइबर अपराधों को रोकने में सबसे प्रभावी उपाय साबित हो सकती है।

  • MP: उज्जैन में शिप्रा रामघाट पर महाआरती के दौरान भिड़े पुजारी-वेंडर…. जमकर चले लात-घूसे

    MP: उज्जैन में शिप्रा रामघाट पर महाआरती के दौरान भिड़े पुजारी-वेंडर…. जमकर चले लात-घूसे


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) में शिप्रा के रामघाट (Ramghat) पर एक शर्मनाक घटना सामने आई है। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल (Video Viral) हुआ। यहां शाम को महाआरती (Maha Aarti) के बीच अचानक मंत्रोच्चार की जगह अपशब्द और लात-घूंसे चलने लगे। फूल-प्रसाद बेचने वाले वेंडरों और घाट के पुजारियों के बीच विवाद हुआ। घटना 28 जून की शाम की है, जिसने घाटों की सुरक्षा और वहां चल रही अवैध दुकानदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    मामले में थाना महाकाल पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर क्रॉस कायमी की है। मारपीट में दोनों ओर से 4 लोगों को गंभीर चोटें आई हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शाम को जब शिप्रा घाट पर आरती शुरू हुई, तो फूल-प्रसाद विक्रेता हमेशा की तरह आरती के बीच में ही श्रद्धालुओं को सामान बेचने की जिद करने लगे। इससे आरती की मर्यादा भंग हो रही थी।


    महिलाओं ने मारपीट शुरू की

    विकास पिता शशिकांत शर्मा 38 साल निवासी बिलोटीपुरा के पक्ष से गणेश पिता शशिकांत शर्मा को चोट आई। पुलिस ने रिपोर्ट पर ममता परमार, क्षिप्रा मराठा के खिलाफ केस दर्ज किया। फरियादी ने पुलिस को बताया रामघाट पर भाई के साथ पंडिताई करता हूं। 28 जून की शाम की आरती के दौरान उक्त महिलाएं फूल-प्रसाद बेच रही थी, जिन्हें मना किया तो उत्तेजित होकर अपशब्द कहते हुए मारपीट पर उतारू हो गई। मेरे हाथ व आंख में चोट आई, भाई बीचबचाव को आया तो उससे भी मारपीट की।

  • MP: राजा रघुवंशी हत्याकांड…. सोनम की जमानत रद्द कराने के लिए SC जाएगा परिवार

    MP: राजा रघुवंशी हत्याकांड…. सोनम की जमानत रद्द कराने के लिए SC जाएगा परिवार


    इंदौर।
    मेघालय हाई कोर्ट (Meghalaya High Court) द्वारा सोनम रघुवंशी (Sonam Raghuvanshi) की जमानत बरकरार रखने के एक दिन बाद राजा रघुवंशी (Raja Raghuvanshi) के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख करने का फैसला किया है. राजा के बड़े भाई विपिन रघुवंशी ने मंगलवार को कहा कि परिवार जल्द ही सोनम की जमानत रद्द कराने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करेगा।

    विपिन रघुवंशी ने कहा कि उन्हें अभियोजन पक्ष की पैरवी से संतुष्टि नहीं है. इसलिए अब उनका परिवार न्याय की लड़ाई अपने दम पर लड़ेगा और इसके लिए निजी वकील नियुक्त करेगा. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मेघालय पुलिस ने गिरफ्तारी के समय सोनम को गिरफ्तारी के आधारों की जानकारी क्यों नहीं दी. उनके मुताबिक, इसी कानूनी चूक का फायदा सोनम को जमानत मिलने में मिला।

    दरअसल, सोमवार को मेघालय हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें निचली अदालत द्वारा 27 अप्रैल को दी गई सोनम की जमानत रद्द करने की मांग की गई थी. हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया का सही ढंग से पालन नहीं किया और सोनम को प्रभावी तरीके से गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए. अदालत ने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22(1) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 47(1) का उल्लंघन माना।


    क्या है पूरा मामला?

    गौरतलब है कि राजा रघुवंशी और सोनम की शादी 11 मई 2025 को इंदौर में हुई थी. दोनों 20 मई को हनीमून मनाने मेघालय गए थे. 23 मई को सोनम के लापता होने की खबर सामने आई, जबकि 2 जून को राजा का शव पूर्वी खासी हिल्स जिले के सोहरा (चेरापूंजी) स्थित एक झरने के पास गहरी खाई में मिला था.


    किसे हई थी सजा?

    इस मामले में पुलिस ने सोनम रघुवंशी, उसके कथित प्रेमी राज कुशवाहा और उसके तीन दोस्तों को हत्या की साजिश और हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था. सोनम करीब 10 महीने न्यायिक हिरासत में रहने के बाद जमानत पर रिहा हुई है।