Category: Madhya Pradesh

  • भोपाल में डेला ग्रुप का 2250 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव, 930 विला और पांच सितारा रिसॉर्ट बनाने की योजना

    भोपाल में डेला ग्रुप का 2250 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव, 930 विला और पांच सितारा रिसॉर्ट बनाने की योजना

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल में पर्यटन और रियल एस्टेट विकास को बढ़ावा देने के लिए डेला ग्रुप ने 2250 करोड़ रुपये की परियोजना का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित योजना के तहत 220 एकड़ क्षेत्र में विला, ब्रांडेड आवास और पांच सितारा वन्यजीव पर्यटन रिसॉर्ट विकसित करने की तैयारी है। इस परियोजना को लेकर भोपाल में निवेश और रोजगार की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई है। ‘कमाल का भोपाल’ अभियान के संस्थापक और क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है।

    डेला ग्रुप के संस्थापक जिमी मिस्त्री ने मध्यप्रदेश अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की थी। इस बैठक में राज्य में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसी दौरान प्रस्तावित ‘डेला रेसकोर्स भोपाल’ परियोजना की जानकारी सामने आई। इसका विकास मूल्य 2250 करोड़ रुपये बताया गया है। हालांकि, प्रस्तावित परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन से जुड़ी विस्तृत समय-सीमा की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

    योजना के अनुसार, 220 एकड़ में विकसित होने वाली इस परियोजना में 930 विला बनाए जाने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त 128 ब्रांडेड आवास और 300 से अधिक कमरों वाला पांच सितारा वन्यजीव पर्यटन रिसॉर्ट भी विकसित करने की योजना है। परियोजना में घुड़सवारी और पोलो जैसी गतिविधियों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने की परिकल्पना भी शामिल है। इन सुविधाओं के जरिए पर्यटन, आवास और मनोरंजन को एक ही परिसर में जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

    भोपाल के आसपास पर्यटन सुविधाओं का विस्तार करने के लिए ‘डेला रातापानी रिजर्व टाउनशिप’ विकसित करने की योजना भी प्रस्ताव का हिस्सा है। इसे आधुनिक जीवनशैली, स्वास्थ्य और वेलनेस सुविधाओं के साथ जोड़ने की तैयारी है। इसके लिए मास्टर प्लानिंग, आवागमन और पर्यटकों को विशेष अनुभव देने वाली सुविधाओं पर ध्यान देने की परिकल्पना की गई है। परियोजना की योजना में भोपाल के आसपास के प्राकृतिक परिवेश और पर्यटन क्षमता को उपयोग में लाने पर जोर दिया गया है।

    क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वस्तरीय पर्यटन और आवास सुविधाएं विकसित होने से पर्यटकों के भोपाल तथा आसपास के क्षेत्रों में अधिक समय तक रुकने की संभावना बढ़ सकती है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा मिलने की उम्मीद है। उनके अनुसार, पर्यटकों के ठहरने की अवधि बढ़ने से होटल, परिवहन, खानपान, हस्तशिल्प और छोटे कारोबार से जुड़े लोगों के लिए भी अवसर पैदा हो सकते हैं।

    मीक ने यह भी कहा कि भोपाल की खूबियों को निवेश, रोजगार और स्थानीय लोगों की समृद्धि से जोड़ना जरूरी है। ‘कमाल का भोपाल’ अभियान का उद्देश्य राजधानी की पहचान और संभावनाओं को सामने लाना तथा उन्हें आर्थिक विकास से जोड़ना है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नगरीय विकास विभाग और जिमी मिस्त्री की पहल की सराहना की।

    हालांकि, पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देना भी महत्वपूर्ण होगा। मनोज मीक ने प्राकृतिक संसाधनों और जल-संपदा को सुरक्षित रखने के साथ स्थानीय लोगों की आर्थिक भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया। प्रस्तावित परियोजना में निवेश, आवास और पर्यटन से जुड़ी कई सुविधाओं की योजना सामने आई है, लेकिन इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन निर्माण की प्रगति, पर्यावरणीय व्यवस्थाओं और स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाले अवसरों के आधार पर किया जा सकेगा।

    भोपाल में प्रस्तावित यह परियोजना पर्यटन और रियल एस्टेट क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावना सामने लाती है। यदि योजना आगे बढ़ती है, तो इससे राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार तथा विभिन्न स्थानीय कारोबारों को नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

  • शिवपुरी में बालाजी बस ने बाइक को पीछे से मारी टक्कर, युवक घायल, गुस्साए लोगों ने फोड़ा शीशा

    शिवपुरी में बालाजी बस ने बाइक को पीछे से मारी टक्कर, युवक घायल, गुस्साए लोगों ने फोड़ा शीशा

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी जिले में बुधवार रात सड़क हादसे में बाइक सवार 28 वर्षीय युवक घायल हो गया। पोहरी थाना क्षेत्र में शिवपुरी की ओर से आ रही बालाजी बस ने उसकी पल्सर बाइक को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि युवक उछलकर सड़क पर दूर जा गिरा, जबकि उसकी बाइक बस के नीचे फंस गई। हादसे के बाद घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। इसी दौरान गुस्साए लोगों ने बस का शीशा फोड़ दिया।

    घायल युवक की पहचान परिच्छा निवासी शिवराज जाटव के रूप में हुई है। वह सरवन जाटव का पुत्र है। जानकारी के अनुसार, 28 अक्टूबर की रात करीब 8:45 बजे शिवराज अपनी पल्सर बाइक से परिच्छा बस स्टैंड से सब्जी लेकर घर लौट रहा था। इसी दौरान पीछे से आ रही बालाजी बस ने उसकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे के समय बस शिवपुरी की ओर से आ रही थी।

    दुर्घटना में शिवराज बाइक से उछलकर सड़क पर जा गिरा। उसकी बाइक बस के नीचे फंस गई। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने स्थिति देखी और बस के आसपास भीड़ एकत्रित हो गई। हादसे से नाराज कुछ लोगों ने बस का शीशा तोड़ दिया। इस घटना के कारण मौके पर कुछ समय तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

    परिजनों के अनुसार, बस चालक वाहन तेज गति और लापरवाही से चला रहा था। उनका आरोप है कि इसी वजह से बाइक को पीछे से टक्कर लगी। हालांकि, दुर्घटना के कारणों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस की जांच के बाद ही हो सकेगी। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के बाद चालक बस को मौके पर छोड़कर भाग गया।

    टक्कर में शिवराज को शरीर के कई हिस्सों में चोटें आई हैं। उसके सिर और चेहरे के अलावा दोनों हाथों, बाएं पैर के टखने और कमर में भी चोट लगी है। हादसे के बाद उसके शरीर से खून निकल रहा था। घायल की हालत देखकर परिजनों ने उसे जल्द अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की।

    घटना की जानकारी मिलने पर शिवराज के पिता सरवन जाटव और परिवार के अन्य सदस्य मौके पर पहुंचे। उन्होंने घायल युवक को निजी वाहन से जिला अस्पताल शिवपुरी पहुंचाया। वहां उसे भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है। परिजन घटना के बाद से घायल के इलाज पर ध्यान दे रहे हैं।

    मामले में शिवराज के पिता सरवन जाटव ने पोहरी थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने उनकी रिपोर्ट के आधार पर बालाजी बस के चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। अब पुलिस दुर्घटना से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। जांच में हादसे की परिस्थितियों और चालक की भूमिका से संबंधित जानकारी जुटाई जाएगी।

    हादसे के बाद बस का शीशा तोड़े जाने की घटना भी सामने आई है। पुलिस की जांच में दुर्घटना से जुड़े घटनाक्रम और उसके बाद हुई गतिविधियों की जानकारी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल घायल शिवराज का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है और पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है।

  • शिवपुरी की अमोला घाटी में गहरी खाई में गिरा ट्रॉला, ड्राइवर की मौत और हेल्पर गंभीर घायल..

    शिवपुरी की अमोला घाटी में गहरी खाई में गिरा ट्रॉला, ड्राइवर की मौत और हेल्पर गंभीर घायल..

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी जिले में अमोला घाटी के पास गुरुवार देर रात एक सड़क हादसे में ट्रॉला चालक की मौत हो गई, जबकि हेल्पर गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा सुरवाया थाना क्षेत्र में वन देवी मैया मंदिर के नजदीक हुआ। ट्रॉला अनियंत्रित होकर सड़क किनारे स्थित गहरी खाई में जा गिरा। वाहन कानपुर से गुजरात के सूरत शहर की ओर जा रहा था। दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद घायल को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज शिवपुरी पहुंचाया गया।

    जानकारी के अनुसार, हादसा गुरुवार रात करीब 2:30 बजे हुआ। ट्रॉला अमोला घाटी में वन देवी मैया मंदिर के पास से गुजर रहा था। इसी दौरान वाहन का संतुलन बिगड़ गया और वह सड़क से नीचे गहरी खाई में गिर गया। दुर्घटना इतनी गंभीर थी कि ट्रॉला चला रहे राम अनुज चौधरी की मौके पर ही मौत हो गई। उनके साथ वाहन में मौजूद हेल्पर उमेश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए।

    हादसे की जानकारी मिलने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई की एंबुलेंस मौके पर पहुंची। राहत सहायता के बाद घायल हेल्पर को मेडिकल कॉलेज शिवपुरी ले जाया गया। वहां उन्हें भर्ती कर इलाज दिया जा रहा है। हादसे में चालक की मौत और हेल्पर के गंभीर रूप से घायल होने के बाद पुलिस ने मामले में आगे की कार्रवाई शुरू की।

    मृतक चालक की पहचान राम अनुज चौधरी के रूप में हुई है। उनके पिता का नाम केशव चौधरी बताया गया है। वह उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले के ग्राम कैथवालिया, पोस्ट कैथवालिया, छपिया वसई के निवासी थे। दुर्घटना के बाद उनके शव का गुरुवार को पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद पुलिस नियमानुसार आगे की प्रक्रिया में जुटी है।

    वहीं, हादसे में घायल हेल्पर उमेश कुमार उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के निवासी हैं। उनके पिता का नाम राम असीह है। उनका पता इटौरा (मुझैली), अरदौना बताया गया है। दुर्घटना के बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

    ट्रॉला कानपुर से सूरत जा रहा था। इस दौरान शिवपुरी जिले की अमोला घाटी में हुए हादसे ने वाहन चालक की जान ले ली। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दुर्घटना के समय ट्रॉला का संतुलन बिगड़ने के बाद वह खाई में गिरा था। वाहन अनियंत्रित होने की वजह और हादसे से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी पुलिस की आगे की कार्रवाई से सामने आ सकती है।

    अमोला घाटी का यह हादसा रात के समय हुआ, जब ट्रॉला वन देवी मैया मंदिर के पास से गुजर रहा था। दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की पुष्टि हुई है। घायल हेल्पर का इलाज मेडिकल कॉलेज शिवपुरी में किया जा रहा है, जबकि मृतक चालक के शव का पोस्टमार्टम कराया जा चुका है। पुलिस मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई में जुटी है।

  • इंदौर के बेटमा में स्कूल की जमीन पर बाउंड्रीवॉल को लेकर बवाल, छात्राओं ने तोड़ी दीवार, करणी सेना ने उठाए सवाल

    इंदौर के बेटमा में स्कूल की जमीन पर बाउंड्रीवॉल को लेकर बवाल, छात्राओं ने तोड़ी दीवार, करणी सेना ने उठाए सवाल

    मध्य प्रदेश । के इंदौर जिले के बेटमा में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की जमीन पर बाउंड्रीवॉल निर्माण को लेकर विवाद सामने आया है। निर्माण कार्य का विरोध करते हुए बड़ी संख्या में छात्राएं सड़क पर उतर आईं और प्रदर्शन किया। इसी दौरान आक्रोशित विद्यार्थियों ने मौके पर बनाई जा रही दीवार को तोड़ दिया। घटना के बाद स्थानीय प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ गई। विवाद का मुख्य मुद्दा विद्यालय की जमीन का स्वामित्व, भूमि से संबंधित दस्तावेज और बाउंड्रीवॉल निर्माण की वैधता है।

    जानकारी के अनुसार, विद्यालय की जमीन पर बाउंड्रीवॉल बनाए जाने को लेकर छात्राओं ने आपत्ति जताई। विरोध प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने निर्माण कार्य के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया। इसी बीच मौके पर बनाई जा रही दीवार को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस बात का स्पष्ट विवरण नहीं है कि निर्माण कार्य किस विभाग या व्यक्ति की ओर से कराया जा रहा था और विवादित भूमि का आधिकारिक स्वामित्व किसके नाम दर्ज है।

    मामले में करणी सेना परिवार ने भी हस्तक्षेप किया है। संगठन ने देपालपुर के तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर स्कूल की जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और निर्माण कार्य की जांच कराने की मांग की है। संगठन ने भूमि के स्वामित्व, नामांतरण की प्रक्रिया और बाउंड्रीवॉल निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति को लेकर सवाल उठाए हैं। उसका कहना है कि मामले में दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    करणी सेना परिवार का आरोप है कि विद्यालय के आसपास पहले से मौजूद बाउंड्रीवॉल की जमीन पर कथित रूप से कब्जा किए जाने के बाद अब नया निर्माण कराया जा रहा है। संगठन ने इस आरोप की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। हालांकि, जमीन पर कब्जे से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। ऐसे में भूमि के वास्तविक स्वामित्व और निर्माण की वैधता का निर्धारण संबंधित राजस्व रिकॉर्ड तथा प्रशासनिक जांच के आधार पर ही हो सकेगा।

    संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से विवादित जमीन का सर्वे क्रमांक स्पष्ट करने की मांग की है। इसके साथ ही यह पता लगाने की बात कही गई है कि संबंधित भूमि का नामांतरण किसके पक्ष में किया गया और इसके लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ। करणी सेना परिवार ने नामांतरण की प्रक्रिया और उससे जुड़े अभिलेखों की जांच कराने पर जोर दिया है, ताकि भूमि के अधिकारों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।

    निर्माण कार्य की आधिकारिक अनुमति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। संगठन चाहता है कि प्रशासन यह स्पष्ट करे कि बाउंड्रीवॉल बनाने की अनुमति किस प्राधिकरण ने दी और निर्माण के लिए कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे। अनुमति और जमीन के स्वामित्व से संबंधित रिकॉर्ड सामने आने पर विवाद के अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल की जा सकेगी।

    इस मामले में विद्यालय की संपत्ति और छात्राओं की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण विषय हैं। करणी सेना परिवार ने मांग की है कि स्कूल की जमीन से जुड़े विवाद का समाधान दस्तावेजों की जांच के आधार पर किया जाए। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में प्रशासन की जांच के निष्कर्ष, भूमि के स्वामित्व पर अंतिम निर्णय या निर्माण कार्य को लेकर किसी आधिकारिक आदेश का विवरण सामने नहीं आया है।

    बेटमा में बाउंड्रीवॉल निर्माण के विरोध में हुआ प्रदर्शन और दीवार तोड़े जाने की घटना ने विद्यालय की जमीन से जुड़े विवाद को सामने ला दिया है। अब मामले में भूमि के रिकॉर्ड, नामांतरण और निर्माण की अनुमति की जांच की मांग उठी है। प्रशासनिक स्तर पर दस्तावेजों की पड़ताल और तथ्यों की पुष्टि से ही विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • मध्य प्रदेश में 12 IPS अधिकारियों के तबादले, पांच जिलों को मिले नए SP, पुलिस मुख्यालय और विशेष सशस्त्र बल में भी बदलाव

    मध्य प्रदेश में 12 IPS अधिकारियों के तबादले, पांच जिलों को मिले नए SP, पुलिस मुख्यालय और विशेष सशस्त्र बल में भी बदलाव

    मध्य प्रदेश : में पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। राज्य सरकार ने 28 अक्टूबर की देर रात भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 12 अधिकारियों के तबादला आदेश जारी किए। इस बदलाव में पांच जिलों के पुलिस अधीक्षकों की जिम्मेदारी बदली गई है। नर्मदापुरम, बैतूल, पन्ना, हरदा और अलीराजपुर को नए पुलिस अधीक्षक मिले हैं। इसके अलावा भोपाल पुलिस मुख्यालय, नगरीय पुलिस और विशेष सशस्त्र बल की विभिन्न इकाइयों में भी अधिकारियों की नई पदस्थापना की गई है।

    नर्मदापुरम जिले में दीपक कुमार शुक्ला को नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है। वह इससे पहले उज्जैन में विशेष सशस्त्र बल की 32वीं वाहिनी के सेनापति के रूप में कार्यरत थे। नर्मदापुरम के पूर्व पुलिस अधीक्षक साईंकृष्ण एस. थोठा को भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। इस बदलाव के तहत जिले की पुलिस व्यवस्था की कमान नए अधिकारी को सौंपी गई है।

    बैतूल जिले में भी पुलिस अधीक्षक बदल दिया गया है। यहां अमित सक्सेना को नया एसपी नियुक्त किया गया है। वह इससे पहले भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक के पद पर तैनात थे। बैतूल के पूर्व एसपी वीरेंद्र जैन को भोपाल नगरीय पुलिस में यातायात से संबंधित जिम्मेदारी दी गई है। उनकी नई नियुक्ति के तहत वह भोपाल में पुलिस उपायुक्त के रूप में यातायात व्यवस्था संभालेंगे।

    पन्ना जिले में सव्यसाची सराफ को नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। वह इससे पहले इंदौर में साइबर पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत थे। पन्ना की पूर्व एसपी निवेदिता नायडू को सागर स्थित विशेष सशस्त्र बल की 10वीं वाहिनी का सेनापति नियुक्त किया गया है। इस बदलाव से पन्ना में जिला पुलिस का नेतृत्व नए अधिकारी के हाथों में आ गया है।

    हरदा जिले में अंकित जायसवाल को पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह इससे पहले भोपाल रेल पुलिस में एसपी के पद पर तैनात थे। हरदा के पूर्व एसपी शशांक को पुलिस मुख्यालय भोपाल में सहायक पुलिस महानिरीक्षक नियुक्त किया गया है। वहीं, अलीराजपुर जिले में समर वर्मा को नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। वह उज्जैन में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) के पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यरत थे। अलीराजपुर के पूर्व एसपी रघुवंश कुमार सिंह को भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय में उप पुलिस महानिरीक्षक (DIG) की जिम्मेदारी दी गई है।

    जिला पुलिस में बदलाव के साथ विशेष सशस्त्र बल की वाहिनियों में भी नई तैनाती की गई है। इंदौर में प्रथम वाहिनी के सेनापति अभिषेक आनंद को 15वीं वाहिनी का सेनापति बनाया गया है। उन्हें पुलिस प्रशिक्षण केंद्र (PTC), इंदौर के पुलिस अधीक्षक का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। इसी तरह श्रुतकीर्ति सोमवंशी को ग्वालियर में विशेष सशस्त्र बल की दूसरी वाहिनी का सेनापति नियुक्त किया गया है। उन्हें 14वीं वाहिनी की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई है।

    इस प्रशासनिक बदलाव के तहत जिला पुलिस, पुलिस मुख्यालय और विशेष सशस्त्र बल में अधिकारियों की जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया है। पांच जिलों में नए पुलिस अधीक्षकों की नियुक्ति के साथ कई अधिकारियों को मुख्यालय और अन्य इकाइयों में नई भूमिका मिली है। इन आदेशों के बाद संबंधित अधिकारियों को अपनी नई पदस्थापना के अनुसार जिम्मेदारी संभालनी होगी।

  • MP के बालाघाट में 100 गांवों के विकास का अभियान शुरू, सड़क, पानी, शिक्षा और रोजगार पर रहेगा खास जोर..

    MP के बालाघाट में 100 गांवों के विकास का अभियान शुरू, सड़क, पानी, शिक्षा और रोजगार पर रहेगा खास जोर..

    मध्य प्रदेश: के बालाघाट जिले में लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहे 100 गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। राज्य सरकार की इस पहल के तहत गांवों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का आकलन किया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य ग्रामीणों की जरूरतों को समझकर ऐसे विकास कार्यों की योजना बनाना है, जिनसे स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं और रोजगार के अवसर मिल सकें।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर शुरू किए गए इस अभियान में विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन अधिकारियों को अपने निर्धारित गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से सीधे बातचीत करने, समस्याओं की जानकारी जुटाने और उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। यह पूरी प्रक्रिया 14 दिनों के भीतर पूरी की जानी है। इसके बाद गांवों की जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे।

    अभियान के लिए बालाघाट जिले के 100 गांवों को चार क्लस्टर में विभाजित किया गया है। इनमें बैहर, बिरसा, लांजी और किरनापुर विकासखंड के गांव शामिल हैं। अलग-अलग विभागों की टीमें अपने निर्धारित क्षेत्रों में पहुंचकर स्थानीय परिस्थितियों और विकास की संभावनाओं का आकलन कर रही हैं। ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर यह तय करने की कोशिश की जा रही है कि किन सुविधाओं की सबसे अधिक जरूरत है और किन कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

    26 अक्टूबर को अधिकारियों की टीमों ने विभिन्न गांवों का दौरा कर लोगों से चर्चा की। लांजी क्षेत्र में कट्टीपार, सतोना, बरगुड़ और देवरबेली गांवों में ग्रामीणों की समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी ली गई। बैहर क्षेत्र की टीम दड़ेकसा, बिलालकसा, सोनगुड्डा, लूद, हिर्री, भर्री, सोनपुरी और बिठरी सहित कई गांवों में पहुंची। वहीं, किरनापुर क्षेत्र के सीतापार और बोरवन गांवों में भी स्थानीय लोगों से बातचीत कर विकास की जरूरतों का पता लगाया गया।

    28 अक्टूबर को कलेक्टर आदित्य सिंह ने लांजी विकासखंड की देवरबेली ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले बरगुड़-सतोना, केराडीह, सायर और संदूका गांवों का भ्रमण किया। जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी और अन्य विभागों की टीमों ने भी अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद किया। इसके अतिरिक्त जनजातीय कार्य, पशु चिकित्सा, मत्स्यपालन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी अपने क्षेत्रों में सुविधाओं की स्थिति की जानकारी जुटाई।

    अभियान में सड़क, पुल-पुलिया, पेयजल, सिंचाई और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही सरकारी स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, छात्रावासों और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता का भी आकलन किया जा रहा है। जहां सुविधाओं की कमी सामने आएगी, वहां जरूरत के अनुसार विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। पात्र ग्रामीणों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    ग्रामीणों की आजीविका मजबूत करना भी इस पहल का अहम हिस्सा है। इसके लिए कृषि, उद्यानिकी, डेयरी, पशुपालन और मत्स्यपालन जैसी गतिविधियों में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। प्रशासन स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ऐसे अवसरों की पहचान करना चाहता है, जिनसे ग्रामीण अपने क्षेत्र में ही आर्थिक गतिविधियों से जुड़ सकें।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इससे पहले बालाघाट जिले के 100 पिछड़े गांवों में विकास कार्यों के लिए लगभग 225 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की थी। अब जारी सर्वेक्षण और ग्रामीणों से प्राप्त सुझावों के आधार पर योजनाओं की प्राथमिकताएं तय की जाएंगी। अधिकारियों को 14 दिनों के भीतर भ्रमण और रिपोर्ट तैयार करने का काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इस अभियान का लक्ष्य गांवों में जरूरी सुविधाओं का विस्तार करना और स्थानीय लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य तथा आजीविका के बेहतर अवसर विकसित करना है।

  • माधव टाइगर रिजर्व में शिकारियों का खतरा बढ़ा, एक साल से लापता बाघिन एमटी-1 का सुराग नहीं, 11 बाघों की सुरक्षा चुनौती

    माधव टाइगर रिजर्व में शिकारियों का खतरा बढ़ा, एक साल से लापता बाघिन एमटी-1 का सुराग नहीं, 11 बाघों की सुरक्षा चुनौती


    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी स्थित माधव टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की संख्या बढ़ने के साथ उनकी सुरक्षा को लेकर चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। जंगल में बाघ, तेंदुए और अन्य वन्यजीव शिकारियों के निशाने पर होने की आशंका है। खास चिंता बाघिन एमटी-1 को लेकर है, जो करीब एक साल से लापता है। उसका कॉलर आईडी सिग्नल नहीं मिल रहा है और पार्क प्रबंधन भी अब तक उसकी लोकेशन का पता नहीं लगा पाया है। वन विभाग उसकी तलाश जारी रखे हुए है।

    माधव टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा बढ़कर 11 हो चुका है। इनमें चार शावक भी शामिल हैं। वहीं, शिवपुरी के जंगलों में तेंदुओं की संख्या 95 से अधिक बताई गई है। वन्यजीवों की बढ़ती संख्या क्षेत्र के लिए अहम है, लेकिन इतने बड़े कुनबे की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रबंधन के लिए बड़ी जिम्मेदारी भी है। हाल ही में कूनो नेशनल पार्क क्षेत्र में 19 महीने के एक चीता शावक की गोली लगने से मौत की घटना के बाद माधव टाइगर रिजर्व में भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। कूनो की सीमा के नजदीक स्थित इस रिजर्व में बाघों और दूसरे वन्यजीवों को लेकर सतर्कता बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

    बाघिन एमटी-1 की गुमशुदगी इस चिंता को और गंभीर बनाती है। करीब एक साल से उसकी गतिविधियों का पता नहीं चल पाया है। न तो उसके कॉलर आईडी से कोई सिग्नल मिल रहा है और न ही पार्क प्रबंधन उसे अपने निगरानी तंत्र के जरिए ट्रेस कर पा रहा है। हालांकि, बाघिन के लापता होने की वजह को लेकर अभी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। उसकी स्थिति का पता लगाने के लिए तलाश जारी है।

    वन्यजीवों के शिकार से जुड़ी घटनाएं भी चिंता का कारण हैं। जुलाई में आगरा वन प्रबंधन टीम ने 10 तेंदुओं की खाल के साथ चार शिकारियों को पकड़ा था। इस मामले में पकड़े गए एक व्यक्ति भोगीराम आदिवासी का संबंध शिवपुरी से होने की बात सामने आई थी। हालांकि, शिवपुरी के वन विभाग के अधिकारियों ने जिले से किसी तरह का संबंध होने से इनकार किया था। इस प्रकरण ने वन्यजीवों के अवैध शिकार और उनकी खाल के कारोबार को लेकर सवाल खड़े किए थे।

    वन विभाग ने माधव टाइगर रिजर्व में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने की तैयारी की है। पार्क प्रबंधन पैदल गश्त बढ़ाने के साथ जंगल में प्रवेश के प्रमुख रास्तों पर निगरानी और खुफिया तंत्र को मजबूत करेगा। इसका उद्देश्य बाहरी लोगों की आवाजाही की जानकारी समय पर हासिल करना है, ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। रिजर्व क्षेत्र में लगाए गए कैमरों के जरिए भी वन्यजीवों और जंगल की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

    बाघों की मौजूदगी केवल जंगल के अंदरूनी हिस्सों तक सीमित नहीं रहती। कई बार वे सड़क किनारे और पहाड़ी इलाकों में भी दिखाई देते हैं, जबकि तेंदुए आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में वन्यजीवों की गतिविधियों पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था का महत्व बढ़ जाता है। शिकारियों द्वारा जाल बिछाने या विस्फोटक का इस्तेमाल किए जाने की आशंका भी वन विभाग के लिए चुनौती है।

    माधव टाइगर रिजर्व के बाघों से जुड़े मानव-संघर्ष के मामले भी सामने आ चुके हैं। अप्रैल 2026 में शिवपुरी के ऐरावन गांव के पास बाघिन एमटी-6 के हमले में 50 वर्षीय आदिवासी सरवन की मौत हो गई थी। डोगरपुर गांव में भी बाघों के हमले से कुछ लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। इन घटनाओं के बीच वन्यजीवों की निगरानी और लोगों की सुरक्षा, दोनों पर ध्यान देना जरूरी है।

    टाइगर रिजर्व के उप संचालक हरिओम के अनुसार, वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पैदल गश्त को और मजबूत किया जाएगा। विभाग की टीमें जंगल के अलग-अलग हिस्सों में तैनात हैं और निगरानी लगातार की जा रही है। अब चुनौती बाघिन एमटी-1 का पता लगाने के साथ बढ़ते वन्यजीव कुनबे को शिकारियों से सुरक्षित रखने की है।

  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जमानत अर्जियों के लिए गठित कीं सात विशेष पीठें, 6 नवंबर तक चलेगी सुनवाई

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जमानत अर्जियों के लिए गठित कीं सात विशेष पीठें, 6 नवंबर तक चलेगी सुनवाई


    मध्य प्रदेश:
    हाईकोर्ट की जबलपुर स्थित मुख्य पीठ ने जमानत अर्जियों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए सात विशेष पीठों का गठन किया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य लंबित जमानत मामलों पर सुनवाई करना और उनके जल्द निराकरण की प्रक्रिया को गति देना है। हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, ये विशेष पीठें 29 अक्टूबर से 6 नवंबर 2026 तक नियमित न्यायिक कार्यवाही पूरी होने के बाद दोपहर 2:30 बजे से सुनवाई करेंगी।

    नई व्यवस्था उन वकीलों और पक्षकारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनकी जमानत अर्जियां निर्धारित अवधि के दौरान सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। संबंधित मामलों में अब विशेष पीठों के तय कार्यक्रम के अनुसार कार्यवाही होगी। इस पहल से लंबित अर्जियों को सुनवाई के लिए अतिरिक्त अवसर मिलने की उम्मीद है। हालांकि, किसी मामले में जमानत मिलने या उसके अंतिम निराकरण का निर्णय संबंधित पीठ सुनवाई के दौरान उपलब्ध तथ्यों, दलीलों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर करेगी।

    जमानत अर्जियों की सुनवाई के लिए गठित सात एकल पीठों में न्यायमूर्ति विवेक रूसिया, न्यायमूर्ति आनंद पाठक, न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा, न्यायमूर्ति दीपक खोट, न्यायमूर्ति रामकुमार चौबे और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा के नाम शामिल हैं। जारी जानकारी में इन विशेष सुनवाई सत्रों के लिए न्यायाधीशों को जिम्मेदारी सौंपे जाने का उल्लेख है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में सातों पीठों के गठन के बावजूद छह न्यायाधीशों के नाम ही स्पष्ट रूप से दर्ज हैं।

    विशेष पीठों के गठन के पीछे लंबित जमानत अर्जियों पर समयबद्ध सुनवाई की आवश्यकता प्रमुख मानी जा रही है। अदालतों में विभिन्न प्रकार के मामलों के बीच जमानत अर्जियों के लिए अलग समय निर्धारित होने से संबंधित प्रकरणों को सुनने की प्रक्रिया व्यवस्थित हो सकती है। इस व्यवस्था के तहत निर्धारित अवधि में सूचीबद्ध अर्जियों पर सुनवाई की जाएगी। पक्षकारों और उनके अधिवक्ताओं को अपने मामले की सूची और निर्धारित समय के संबंध में हाईकोर्ट की आधिकारिक सूचना पर ध्यान देना होगा।

    जमानत अर्जियों के अलावा विविध अपीलों की सुनवाई के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है। इसके तहत न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की एकल पीठ गठित की गई है, जो निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विविध अपीलों से जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी। इस तरह हाईकोर्ट प्रशासन ने जमानत मामलों के साथ विविध अपीलों की सुनवाई के लिए भी न्यायिक कार्यवाही को व्यवस्थित करने का कदम उठाया है।

    विशेष पीठों की यह व्यवस्था 6 नवंबर तक निर्धारित है। इस दौरान नियमित न्यायिक कार्यवाही समाप्त होने के बाद दोपहर 2:30 बजे से संबंधित मामलों की सुनवाई की जाएगी। जिन पक्षकारों की अर्जियां इस अवधि में सूचीबद्ध हैं, उनके लिए सुनवाई की तारीख और पीठ की जानकारी महत्वपूर्ण होगी। वकीलों को भी निर्धारित सूची के अनुसार तैयारी करनी होगी, ताकि अदालत के सामने आवश्यक दस्तावेज और दलीलें प्रस्तुत की जा सकें।

    हाईकोर्ट प्रशासन की इस पहल से लंबित जमानत अर्जियों के निपटारे की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, वास्तविक प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्धारित अवधि में कितने मामलों की सुनवाई पूरी होती है और उनमें क्या आदेश पारित किए जाते हैं। फिलहाल, जबलपुर मुख्य पीठ में 29 अक्टूबर से 6 नवंबर तक चलने वाले विशेष सुनवाई कार्यक्रम पर संबंधित पक्षकारों और अधिवक्ताओं की नजर रहेगी।

  • शिवपुरी में दो बहनों और चार बच्चों की कुएं में डूबने से मौत, परिवारों में पसरा मातम..

    शिवपुरी में दो बहनों और चार बच्चों की कुएं में डूबने से मौत, परिवारों में पसरा मातम..


    शिवपुरी जिले:
    में बुधवार को हुई दो अलग-अलग घटनाओं में दो बहनों और चार बच्चों की मौत हो गई। पहली घटना बैराड़ थाना क्षेत्र के गूंगरगांव में हुई, जहां आठ माह की गर्भवती अंजलि रावत ने अपने छह वर्षीय बेटे के साथ कुएं में छलांग लगा दी। दूसरी घटना कोलारस थाना क्षेत्र के सेसई गांव से जुड़ी है, जहां अंजलि की बड़ी बहन सीता रावत अपने तीन बच्चों के साथ कुएं में मृत पाई गई। दोनों घटनाओं में कुल छह लोगों की जान चली गई। पुलिस ने दोनों मामलों की अलग-अलग जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, अंजलि रावत की उम्र 35 वर्ष थी और वह आठ माह की गर्भवती थी। उसके पति धर्मवीर सिंह रावत की करीब डेढ़ महीने पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी। पति की मृत्यु के बाद से अंजलि मानसिक तनाव में बताई जा रही थी। बुधवार दोपहर करीब एक बजे उसने अपने छह वर्षीय बेटे प्रशांत के साथ कुएं में छलांग लगा दी। इस घटना में मां और बेटे की मौत हो गई।

    घटना के समय अंजलि की तीन बेटियां भी उसके साथ मौजूद थीं। उसकी बड़ी बेटी मोनिका ने अपनी और अपनी दोनों छोटी बहनों की जान बचा ली। इसके बाद वह घर पहुंची और परिजनों को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलने के बाद परिवार में चिंता और शोक का माहौल बन गया। अंजलि की मौत के बाद उसके परिवार के सामने पहले से मौजूद दुख और गहरा गया।

    इसी दिन कुछ घंटे बाद अंजलि की बड़ी बहन सीता रावत से जुड़ी दूसरी घटना सामने आई। 40 वर्षीय सीता कोलारस थाना क्षेत्र के सेसई गांव की निवासी थी। बुधवार को वह अपनी बेटी राखी, उम्र 14 वर्ष, बेटी प्रियंका, उम्र 11 वर्ष और बेटे श्लोक, उम्र छह वर्ष के साथ खोंकर गांव स्थित खेत पर गई थी। शाम करीब छह बजे तक जब वे घर नहीं लौटे, तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू कर दी।

    खेत पर पहुंचने के बाद परिजनों को कुएं के पास चप्पलें दिखाई दीं। कुएं में देखने पर एक बच्चे का शव नजर आया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। कोलारस पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को बाहर निकालने की कार्रवाई शुरू की। बुधवार रात करीब 11 बजे तक सीता और उसके तीनों बच्चों के शव कुएं से बाहर निकाल लिए गए। इस घटना में सीता, राखी, प्रियंका और श्लोक की मौत हुई।

    परिवार के सदस्य हाकम सिंह के मुताबिक, दोनों बहनों के बीच गहरा लगाव था और वे अक्सर फोन पर बातचीत करती थीं। परिजनों ने सीता की मौत को छोटी बहन अंजलि की मृत्यु से जुड़े सदमे से जोड़कर देखा है। हालांकि, सीता ने यह कदम क्यों उठाया, इसकी वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है। इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस की जांच महत्वपूर्ण होगी।

    बैराड़ थाना प्रभारी रवि चौहान के अनुसार, अंजलि और उसके बेटे के शव शिवपुरी जिला अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाए गए थे। वहीं, कोलारस थाना प्रभारी जितेंद्र चंदेलिया ने बताया कि सीता और उसके तीनों बच्चों के शव बुधवार रात तक कुएं से निकाल लिए गए थे। दोनों घटनाओं में पोस्टमार्टम की कार्रवाई की जानी थी। पुलिस अलग-अलग प्रकरणों की जांच कर रही है, ताकि घटनाओं से जुड़े हालात और कारणों का पता लगाया जा सके।

  • धीरेंद्र शास्त्री ने करवा चौथ पर ली चुटकी, बोले- एक दिन व्रत रखती हैं पत्नियां और 364 दिन सुनाती हैं ताने

    धीरेंद्र शास्त्री ने करवा चौथ पर ली चुटकी, बोले- एक दिन व्रत रखती हैं पत्नियां और 364 दिन सुनाती हैं ताने

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी जिले के करैरा में चल रही रामकथा के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की एक टिप्पणी चर्चा का विषय बन गई है। कथा के बीच उन्होंने करवा चौथ के व्रत को लेकर अपने चुटीले अंदाज में ऐसी बात कही, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। इस दौरान उन्होंने करवा चौथ को मजाकिया लहजे में ‘खसम पूजन दिवस’ कहा और पति-पत्नी के रिश्ते को लेकर हास्यपूर्ण टिप्पणी की।

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने प्रवचनों के दौरान धार्मिक विषयों के साथ-साथ अपनी खास बोलने की शैली के लिए भी जाने जाते हैं। करैरा में आयोजित रामकथा के दौरान भी उनका यही अंदाज देखने को मिला। कथा के बीच करवा चौथ का जिक्र करते हुए उन्होंने विवाहित महिलाओं के व्रत और पति-पत्नी के बीच होने वाली नोकझोंक पर चुटकी ली। उनकी इस टिप्पणी का वीडियो सामने आने के बाद यह प्रसंग लोगों के बीच चर्चा में आ गया।

    धीरेंद्र शास्त्री ने करवा चौथ को ‘खसम पूजन दिवस’ बताते हुए कहा कि पत्नियां साल में एक दिन अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, जबकि बाकी 364 दिन उन्हें ताने मारती रहती हैं। उनकी यह बात हास्यपूर्ण अंदाज में कही गई थी। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने वैवाहिक जीवन में होने वाली सामान्य नोकझोंक को अपने प्रवचन की शैली में पेश किया।

    करवा चौथ विवाहित महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन कई महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार, व्रत रखने वाली महिलाएं चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद अपना उपवास खोलती हैं। कई परिवारों में इस अवसर पर पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक रस्में भी निभाई जाती हैं। ऐसे में इस पर्व का उल्लेख करते हुए की गई धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी ने लोगों का ध्यान खींचा है।

    करैरा में चल रही रामकथा के दौरान दिया गया यह बयान अब सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है। वीडियो में उनकी टिप्पणी को लेकर लोगों की दिलचस्पी दिखाई दे रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस बयान पर किसी औपचारिक विवाद या विरोध की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल इस प्रसंग को उनके हास्यपूर्ण संबोधन और वायरल वीडियो के संदर्भ में देखा जा रहा है।

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के प्रवचनों में धार्मिक कथाओं के साथ स्थानीय संदर्भों और रोजमर्रा के जीवन से जुड़े उदाहरणों का इस्तेमाल भी देखने को मिलता है। करवा चौथ पर उनकी यह टिप्पणी भी उसी शैली का हिस्सा रही। उनके कथन में पति-पत्नी के रिश्ते की नोकझोंक को हास्य के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसने कथा के इस हिस्से को चर्चा में ला दिया।

    शिवपुरी जिले के करैरा में जारी रामकथा के बीच सामने आए इस वीडियो ने एक बार फिर धीरेंद्र शास्त्री के बोलने के अंदाज को सुर्खियों में ला दिया है। उनकी टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा जारी है। हालांकि, इस बयान पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं, लेकिन उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इतना स्पष्ट है कि करवा चौथ को लेकर कही गई उनकी चुटीली बात ही इस वीडियो के चर्चा में आने की प्रमुख वजह बनी है।