Category: Madhya Pradesh

  • MP: उज्जैन में UCC कानून का विरोध…. बुर्का-हिजाब पहन सड़क पर उतरीं मुस्लिम महिलाएं

    MP: उज्जैन में UCC कानून का विरोध…. बुर्का-हिजाब पहन सड़क पर उतरीं मुस्लिम महिलाएं


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) में यूसीसी कानून (UCC Law) के विरोध में सैंकड़ों की संख्या में बुर्का और हिजाब पहन कर मुस्लिम महिलाएं (Muslim Women) सड़क पर उतर गई हैं। इन दौरान मुस्लिम महिलाएं हाथों में तख्तियां लेकर प्रशासन को ज्ञापन देने पहुंची। इन तख्तियों पर लिखा,काला कानून वापस लो,धर्म निरपेक्षता जिंदाबाद,शरीयत में छेड़छाड़ बर्दास्त नहीं कि जाएगी। इस दौरान महिलाओं ने सरकार को चेताया की मुस्लिम लॉ के तहत निकाह हमारा, फैसला हमारा,शरीयत में दखल मंजूर नही करेंगे। UGC को लेकर महिलाओं के समर्थन देने पर मुस्लिम महिलाओं ने कहा कि हम उनको बताना चाहते हैं कि ये स्पष्ठ नही है। कुछ बाते जानने की जरूरत है। इस दौरान तीन थानों के थाना प्रभारी सहित एसडीएम, सीएसपी ओर पुलिस के जवान तैनात रहे।

    उज्जैन के खाराकुआं स्थित जामा मस्जिद में रविवार सेकड़ों की संख्या में मुस्लिम महिलाए सड़कों पर उतरीं और मस्जिद के अंदर हिन्दुस्तान जिंदाबाद के बैनर लगाकर UGC द्वारा बनाए कानून को मानने से इंकार किया। उन्होंने आरोप लगाए की यह कानून तीन तलाक,विवाह सहित कई मामलों में स्पष्ठ नहीं है।इस प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं शामिल हुईं। मंच पर महिला प्रतिनिधि मौजूद थीं, जबकि सामने एकत्रित महिलाओं के हाथों में तख्तियां और तिरंगे झंडे देखे गए। महिलाओं ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी समुदाय या सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि विधेयक के उन प्रावधानों को लेकर है, जिन्हें वे अपने धार्मिक और व्यक्तिगत कानूनों से जुड़ा मानती हैं। डॉक्टर फौजिया अंजुम ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को केवल समानता के नाम पर विधेयक का समर्थन करने के बजाय उसके प्रावधानों को गहराई से समझना चाहिए।


    राष्ट्रपति को ज्ञापन में पुर्नविचार की मांग

    बताया जा रहा है कि 23 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम ज्ञापन सौंपकर उज्जैन की मुस्लिम नुमाइंदा कमेटी ने मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक- 2026 को लेकर विधेयक के प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग की है। कमेटी ने राष्ट्रपति से चार प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 को मौजूदा स्वरूप में वापस लेने या उस पर पुनर्विचार करना शामिल है। इसके अलावा, धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा, सभी प्रभावित समुदायों से व्यापक परामर्श और मुस्लिम या अन्य धर्म-निर्देशित समुदायों को कानून में अलग-अलग श्रेणियों में रखने के बजाय समान दृष्टिकोण अपनाने की मांग की गई है।

    प्रदर्शन में शामिल शाइस्ता परवीन शेख ने कहा कि महिलाएं संविधान और अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हुई हैं। प्रसासनिक अधिकारों ज्ञापन में संविधान के मौलिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकारों का हवाला दिया गया है। कमेटी ने अनुच्छेद 44 का उल्लेख करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता नीति-निर्देशक तत्वों में शामिल है, जबकि धार्मिक स्वतंत्रता मौलिक अधिकारों का हिस्सा है।

    पार्षद नाजिया कुरैशी ने बताया कि यह प्रदर्शन मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और शरीयत से जुड़े मामलों को लेकर है। उन्होंने उन दावों को भी खारिज किया, जिनमें बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं द्वारा UCC के समर्थन की बात कही जा रही है।

  • भोपाल में 24 अगस्त का मौसम: दिनभर छाए रह सकते हैं बादल, बारिश के दौर से तापमान में आएगी नरमी

    भोपाल में 24 अगस्त का मौसम: दिनभर छाए रह सकते हैं बादल, बारिश के दौर से तापमान में आएगी नरमी


    भोपाल राजधानी भोपाल में 24 अगस्त सोमवार को मानसून का असर एक बार फिर देखने को मिल सकता है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार शहर में बारिश के दौर बने रहने की संभावना है और आसमान में बादलों की आवाजाही जारी रह सकती है। दिन का मौसम अपेक्षाकृत ठंडा और नम रहने के आसार हैं। ताजा पूर्वानुमान में भोपाल के लिए 24 अगस्त को अधिकतम तापमान करीब 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
    रविवार को भी भोपाल में बारिश और बादलों का असर बना हुआ है। ऐसे में सोमवार को भी मौसम में अचानक बड़ा बदलाव आने के बजाय मानसूनी गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। दिन के समय बादल छाए रहने के साथ बीच बीच में बारिश या बौछारें देखने को मिल सकती हैं। बारिश होने की स्थिति में तापमान में और गिरावट आ सकती है जिससे लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।

    मौसम का यह मिजाज मध्य प्रदेश में सक्रिय मानसूनी परिस्थितियों के बीच बना हुआ है। राज्य के कई हिस्सों में पिछले दिनों बारिश का दौर जारी रहा है जबकि कुछ जिलों में भारी बारिश के कारण नदी नाले और जलस्रोत उफान पर भी रहे। भोपाल में हालांकि बारिश की तीव्रता कई अन्य जिलों की तुलना में कम रही है लेकिन मौसम विभाग के अनुसार राजधानी में आने वाले दिनों में भी बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं।

    24 अगस्त को भोपाल में सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है। दिन बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर बारिश के दौर बन सकते हैं। कहीं हल्की बारिश हो सकती है तो कुछ इलाकों में तेज बौछारें भी पड़ सकती हैं। मानसून के दौरान शहर में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहता इसलिए एक इलाके में तेज बारिश होने के दौरान दूसरे इलाके में केवल बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है।

    बारिश के कारण शहर की सड़कों पर जलभराव और यातायात की परेशानी भी बढ़ सकती है। खासकर जिन इलाकों में पहले से सड़कें खराब हैं या गड्ढे बने हुए हैं वहां बारिश का पानी जमा होने से वाहन चालकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी। दोपहिया वाहन चलाने वालों को फिसलन वाली सड़कों पर विशेष सतर्कता रखनी चाहिए। तेज बारिश के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से भी बचना बेहतर रहेगा।

    मौसम पूर्वानुमान में अगले कुछ दिनों तक भी भोपाल में बारिश का सिलसिला जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं। 25 अगस्त को बारिश की गतिविधि और बढ़ सकती है जबकि 26 और 27 अगस्त को भी बारिश के दौर बने रहने का अनुमान है। ऐसे में राजधानी में मानसून की सक्रियता अभी खत्म होती नजर नहीं आ रही है।

    कुल मिलाकर 24 अगस्त को भोपाल का मौसम बादलों और बारिश के बीच सुहावना रहने की उम्मीद है। तापमान में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होने से गर्मी से राहत मिल सकती है। हालांकि बाहर निकलने वाले लोगों को बारिश को ध्यान में रखते हुए जरूरी तैयारी के साथ घर से निकलना चाहिए। मौसम तेजी से बदल सकता है इसलिए स्थानीय स्तर पर जारी होने वाले मौसम अलर्ट पर नजर रखना भी जरूरी होगा।

  • रिसर्च अब जमीन पर उतारने की तैयारी, भोपाल में आज ‘वन इंस्टीट्यूट-वन प्रॉमिस’ कॉन्क्लेव; 2047 के लिए बनेगा रोडमैप

    रिसर्च अब जमीन पर उतारने की तैयारी, भोपाल में आज ‘वन इंस्टीट्यूट-वन प्रॉमिस’ कॉन्क्लेव; 2047 के लिए बनेगा रोडमैप


    भोपाल। मध्यप्रदेश को वर्ष 2047 तक समृद्ध और विकसित राज्य बनाने की दिशा में सरकार ने विशेषज्ञ संस्थानों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी उद्देश्य से 24 अगस्त को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 को लेकर राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में प्रदेश में मौजूद 130 से ज्यादा केंद्रीय, राज्य स्तरीय और निजी संस्थानों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। कॉन्क्लेव का सबसे खास हिस्सा वन इंस्टीट्यूट वन प्रॉमिस होगा, जिसमें प्रत्येक संस्थान मध्यप्रदेश के विकास में अपने स्तर पर एक ठोस योगदान का संकल्प देने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

    सरकार की कोशिश है कि प्रदेश में मौजूद IIT, IIM, AIIMS, ISRO, DRDO, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और दूसरे विशेषज्ञ संस्थानों की विशेषज्ञता का इस्तेमाल सिर्फ अकादमिक और शोध गतिविधियों तक सीमित न रहे, बल्कि उसे प्रदेश की वास्तविक जरूरतों से जोड़ा जाए। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, ऊर्जा, पर्यावरण, तकनीक, कौशल विकास और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों के समाधान में इन संस्थानों की विशेषज्ञता का उपयोग करने की योजना है।

    कॉन्क्लेव में सरकार के अलग-अलग विभाग अपनी प्राथमिकताएं और चुनौतियां विशेषज्ञ संस्थानों के सामने रखेंगे। इसके बाद संबंधित संस्थान अपने शोध, तकनीक, विशेषज्ञों और उपलब्ध संसाधनों के जरिए इन समस्याओं के समाधान की दिशा सुझाएंगे। इसका उद्देश्य सरकार, शिक्षा संस्थानों, शोध संगठनों, उद्योग और नवाचार क्षेत्र के बीच ऐसा तालमेल तैयार करना है, जिससे भविष्य में संयुक्त परियोजनाएं विकसित की जा सकें और उनका लाभ प्रदेश की जनता तक पहुंच सके।

    इस कार्यक्रम में 59 केंद्रीय संस्थानों के अलावा 26 राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय, 11 शासकीय इंजीनियरिंग संस्थान, 19 शासकीय मेडिकल कॉलेज, 8 राज्य स्तरीय शोध संस्थान और 9 चयनित निजी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों की भागीदारी प्रस्तावित है। इनमें IIT इंदौर, IIM इंदौर, IISER भोपाल, MANIT भोपाल, AIIMS भोपाल, IIIT, NFSU भोपाल, RRCAT इंदौर, DRDO और ISRO जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं। कृषि, चिकित्सा, प्रबंधन, रक्षा, ऊर्जा, पर्यावरण, तकनीक और कौशल विकास से जुड़े संस्थानों को भी इस पहल में शामिल किया गया है।

    कॉन्क्लेव में दोपहर 2 बजे से 3:45 बजे तक समावेशी आर्थिक विकास और सामाजिक सशक्तीकरण के लिए आगे की कार्ययोजना पर चर्चा होगी। इस दौरान कृषि, उद्यानिकी, पर्यावरण, उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, MSME, नगरीय विकास, ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, औद्योगिक विकास, जनजातीय कल्याण और महिला एवं बाल विकास विभाग अपनी प्राथमिकताएं सामने रखेंगे। इसके बाद विशेषज्ञ संस्थानों के साथ समाधान और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा होगी।

    इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान और केंद्रीय संस्थानों के बीच होने वाले एमओयू भी होंगे। इन समझौतों के जरिए संयुक्त अनुसंधान, तकनीकी समाधान, क्षमता निर्माण और भविष्य की परियोजनाओं के लिए सहयोग का रास्ता तैयार किया जाएगा। यानी इसका तत्काल असर किसी नई सरकारी योजना के रूप में दिखाई देने के बजाय आने वाले समय में नई तकनीक, बेहतर नीतियों और शोध आधारित समाधानों के रूप में सामने आ सकता है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संबोधन भी होगा। इससे पहले केंद्रीय संस्थानों के प्रमुख मुख्यमंत्री के साथ सीधे संवाद करेंगे। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 की विकास परिकल्पना पर मुख्य वक्तव्य देंगे। सरकार की कोशिश है कि 2047 के लक्ष्य को केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी न रखकर प्रदेश में मौजूद विशेषज्ञ संस्थानों को भी उसका सक्रिय साझेदार बनाया जाए। अब देखने वाली बात होगी कि वन इंस्टीट्यूट वन प्रॉमिस के तहत संस्थानों की ओर से सामने आने वाले संकल्प कितनी तेजी से जमीन पर उतरते हैं और उनका वास्तविक लाभ मध्यप्रदेश को किस रूप में मिलता है।

  • वर्ग-1 शिक्षक भर्ती में दूसरी काउंसलिंग की मांग तेज, 24 से 26 अगस्त तक अंबेडकर पार्क में धरना देंगे अभ्यर्थी

    वर्ग-1 शिक्षक भर्ती में दूसरी काउंसलिंग की मांग तेज, 24 से 26 अगस्त तक अंबेडकर पार्क में धरना देंगे अभ्यर्थी


    भोपालभोपाल में उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती 2023 के अभ्यर्थियों ने दूसरी काउंसलिंग और पदवृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। वेटिंग शिक्षक संघ वर्ग-1 भर्ती 2023 के बैनर तले अभ्यर्थी 24 से 26 अगस्त तक टीटी नगर स्थित अंबेडकर पार्क में तीन दिवसीय धरना देंगे। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू हुए करीब तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक दूसरी काउंसलिंग शुरू नहीं हो सकी है। लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों में इसे लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।

    अभ्यर्थियों के मुताबिक उन्होंने उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत परीक्षा समेत चयन से जुड़े सभी चरण पूरे किए हैं। परिणाम आने और चयन प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद उन्हें नियुक्ति की उम्मीद थी, लेकिन दूसरी काउंसलिंग नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में पात्र अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। संघ का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर शासन और प्रशासन को कई बार ज्ञापन दिए गए और अलग-अलग समय पर प्रदर्शन भी किए गए। हर बार आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक ऐसा कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है, जिससे दूसरी काउंसलिंग का रास्ता साफ हो सके।

    अभ्यर्थियों का सबसे बड़ा सवाल अमोल सोले प्रकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले से जुड़ा है। संघ का दावा है कि दूसरी काउंसलिंग को SLP डायरी नंबर 14600/2025 का हवाला देकर रोका जा रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह मामला करीब 11 अभ्यर्थियों से संबंधित है, ऐसे में इसके कारण हजारों पात्र और प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों का भविष्य अनिश्चितकाल तक रोकना उचित नहीं है। उनका सवाल है कि यदि मामला सीमित संख्या में अभ्यर्थियों से जुड़ा है तो बाकी पात्र अभ्यर्थियों के लिए भर्ती प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ाई जा रही है।

    संघ ने यह भी सवाल उठाया है कि अगर यह मामला विभाग के लिए इतना महत्वपूर्ण है तो करीब डेढ़ साल के दौरान मुख्य पीठ के समक्ष इसकी प्रभावी सुनवाई सुनिश्चित क्यों नहीं हो पाई। अभ्यर्थियों का कहना है कि कई बार सुनवाई की तारीख आने से पहले ही मामला आगे बढ़ जाता है और इस वजह से दूसरी काउंसलिंग का इंतजार और लंबा होता जा रहा है। उनका कहना है कि लगातार देरी के कारण हजारों युवाओं के रोजगार और भविष्य पर असर पड़ रहा है।

    वेटिंग शिक्षक संघ ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जरूरत का मुद्दा भी उठाया है। संघ के मुताबिक सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी की स्थिति लगातार बनी हुई है। दूसरी ओर पात्र और चयन प्रक्रिया से गुजर चुके अभ्यर्थी उपलब्ध हैं। ऐसे में वर्षों तक भर्ती प्रक्रिया को लंबित रखने से केवल अभ्यर्थियों को ही नुकसान नहीं हो रहा, बल्कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। संघ का कहना है कि रिक्त पदों पर योग्य अभ्यर्थियों को मौका देकर शिक्षकों की जरूरत को पूरा किया जा सकता है।

    अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह और डीपीआई आयुक्त अभिषेक सिंह से मामले में तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि जब सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जरूरत है, योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध हैं और दूसरी काउंसलिंग की मांग लंबे समय से की जा रही है, तो फिर फैसला लेने में इतनी देरी क्यों की जा रही है।

    वेटिंग शिक्षक संघ के अनुसार 24, 25 और 26 अगस्त को अंबेडकर पार्क, टीटी नगर में होने वाला धरना शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा। संघ ने प्रशासन से तीन दिवसीय प्रदर्शन की अनुमति भी मांगी है। संगठन का कहना है कि आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था और प्रशासन की ओर से निर्धारित सभी नियमों का पालन किया जाएगा। अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार पदवृद्धि के साथ जल्द से जल्द दूसरी काउंसलिंग शुरू करे, ताकि वर्षों से नियुक्ति की राह देख रहे पात्र शिक्षकों को रोजगार का अवसर मिल सके।

  • 4 दिन से पानी तक नहीं पिया, तबीयत बिगड़ने पर भी पीछे नहीं हटे नरेंद्र; भोपाल में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग पर धरना

    4 दिन से पानी तक नहीं पिया, तबीयत बिगड़ने पर भी पीछे नहीं हटे नरेंद्र; भोपाल में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग पर धरना


    नई दिल्ली। भोपाल में वर्ग-2 माध्यमिक और वर्ग-3 प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 में पदवृद्धि की मांग को लेकर चल रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन अब गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। नीलम पार्क में 21 अगस्त से जारी अनिश्चितकालीन धरने के बीच ब्यावरा निवासी अभ्यर्थी नरेंद्र राजपूत पिछले चार दिनों से निर्जल अनशन पर बैठे हैं। सोमवार रात करीब 3 बजे अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें चक्कर आने और कमजोरी की शिकायत हुई, जिसके बाद धरना स्थल पर मौजूद अभ्यर्थियों ने प्रशासन को इसकी सूचना दी। आंदोलनकारियों के मुताबिक पुलिस और प्रशासन की ओर से उन्हें अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन नरेंद्र ने अस्पताल जाने से इनकार कर दिया।

    नरेंद्र राजपूत का कहना है कि जब तक सरकार शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि को लेकर कोई ठोस आदेश जारी नहीं करती, तब तक वह धरना स्थल से नहीं हटेंगे। उन्होंने मांग की है कि यदि प्रशासन उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है तो धरना स्थल पर ही डॉक्टरों की टीम भेजकर स्वास्थ्य जांच कराई जाए। आंदोलनकारियों का कहना है कि लगातार चार दिन तक भोजन और पानी नहीं लेने के कारण नरेंद्र की हालत कमजोर हो रही है और ऐसे में प्रशासन को तत्काल स्वास्थ्य व्यवस्था उपलब्ध करानी चाहिए।

    शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी लंबे समय से वर्ग-2 और वर्ग-3 में पद बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में पर्याप्त पद शामिल नहीं किए गए। इसके चलते पात्रता और चयन परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने के बावजूद कई अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित रह गए हैं। आंदोलनकारी अब सरकार से पदों की संख्या बढ़ाने के साथ बढ़े हुए पदों पर दूसरी काउंसलिंग कराने की मांग कर रहे हैं।

    अभ्यर्थियों की मांग है कि वर्ग-2 में प्रत्येक विषय के 3 हजार अतिरिक्त पद बढ़ाए जाएं, जबकि वर्ग-3 में कुल 25 हजार पद किए जाएं। उनका कहना है कि रिक्त पदों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने से बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर मिल सकता है। इसी मांग को लेकर प्रदेशभर के अभ्यर्थी भोपाल में जुटे हैं और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।

    इस आंदोलन में महिला अभ्यर्थियों की भी बड़ी भागीदारी है। कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ नीलम पार्क में धरने पर बैठी हैं। इंदौर की दीप्ति सिंह ठाकुर अपनी 5 और 8 साल की बेटियों के साथ आंदोलन में शामिल हैं। वहीं सरोज कुशवाहा अपने छोटे बेटे माधव के साथ धरना स्थल पर मौजूद हैं। महिला अभ्यर्थियों का कहना है कि बच्चों के साथ पार्क में रहना बेहद मुश्किल हो रहा है। मच्छरों की समस्या, पानी और वॉशरूम की परेशानी के अलावा छोटे तालाब के पास होने के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है। इसके बावजूद वे अपनी मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रही हैं।

    पदवृद्धि की मांग को लेकर प्रदेशभर से अभ्यर्थी 21 अगस्त को भोपाल पहुंचे थे। डीपीआई के सामने प्रदर्शन और ज्ञापन देने के बाद अभ्यर्थियों ने रैली निकाली और नीलम पार्क पहुंचकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। आंदोलनकारियों का कहना है कि नवंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच भी कई चरणों में भोपाल में प्रदर्शन और धरने किए जा चुके हैं, लेकिन उनकी मांग पर अब तक ठोस निर्णय नहीं हुआ।

    अब नरेंद्र राजपूत की तबीयत बिगड़ने के बाद आंदोलन को लेकर प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ गई है। अभ्यर्थियों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर पदवृद्धि पर निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि वे किसी आश्वासन के बजाय लिखित आदेश चाहते हैं, ताकि बढ़े हुए पदों पर दूसरी काउंसलिंग शुरू हो सके और शिक्षक भर्ती में चयन से वंचित योग्य अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति का अवसर मिल सके।

  • अफसर पढ़ाएंगे, विशेषज्ञ देंगे गाइडेंस और फीस होगी जीरो, भोपाल में 50 युवाओं के लिए फ्री सिविल सर्विस कोचिंग

    अफसर पढ़ाएंगे, विशेषज्ञ देंगे गाइडेंस और फीस होगी जीरो, भोपाल में 50 युवाओं के लिए फ्री सिविल सर्विस कोचिंग


    नई दिल्ली। भोपाल में संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC और मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी MPPSC की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए अच्छी खबर है। जिला प्रशासन की पहल पर आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए एक बार फिर नि:शुल्क कोचिंग क्लासेस शुरू की जा रही हैं। इस बार नए बैच में 50 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। इसके लिए 24 अगस्त से रजिस्ट्रेशन शुरू हो गए हैं और आवेदन की प्रक्रिया 31 अगस्त तक चलेगी। विद्यार्थियों का चयन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा।

    निःशुल्क कोचिंग की शुरुआत 5 सितंबर से होगी। इस बार क्लासेस पॉलीटेक्निक चौराहा स्थित हिंदी भवन में आयोजित की जाएंगी। इस पहल का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर देना है, जो आर्थिक कारणों से महंगी निजी कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाते। प्रशासन की इस पहल से UPSC और MPPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को बिना फीस के पढ़ाई और मार्गदर्शन हासिल करने का मौका मिलेगा।

    इस फ्री कोचिंग में केवल किताबों और सामान्य अध्ययन तक सीमित तैयारी नहीं होगी, बल्कि विद्यार्थियों को अनुभवी लोगों और विषय विशेषज्ञों से मार्गदर्शन भी मिलेगा। स्वयंसेवी संस्थाओं से जुड़े लोग और कॉलेज के प्रोफेसर्स भी विद्यार्थियों को पढ़ाने में सहयोग करेंगे। इसके अलावा जिला प्रशासन से जुड़े ऐसे अधिकारी, जिनकी पढ़ाने में रुचि है, वे भी नियमित रूप से क्लास लेंगे। अधिकारियों की ओर से रोजाना करीब एक से दो घंटे की कक्षाएं लेने की योजना है।

    कोचिंग में अलग-अलग विषयों की तैयारी के लिए विषय विशेषज्ञों को भी जोड़ा जाएगा। इससे विद्यार्थियों को परीक्षा के सिलेबस को समझने, जरूरी विषयों पर फोकस करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की रणनीति बनाने में मदद मिलेगी। प्रशासन की कोशिश है कि विद्यार्थियों को ऐसा शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराया जाए, जहां वे आर्थिक दबाव के बिना अपनी तैयारी को मजबूत कर सकें।

    भोपाल जिला प्रशासन ने करीब दो साल पहले इस तरह की नि:शुल्क कोचिंग की शुरुआत की थी। इसके बाद जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए यह पहल लगातार उपयोगी साबित हो रही है। इस बार भी नए बैच के जरिए अधिक से अधिक युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर देने की कोशिश की जा रही है। खास तौर पर उन छात्रों को इससे फायदा हो सकता है, जो प्रतिभाशाली होने के बावजूद कोचिंग की महंगी फीस के कारण अच्छे संस्थानों तक नहीं पहुंच पाते।

    इस नि:शुल्क कोचिंग का संचालन जिला प्रशासन भोपाल के मार्गदर्शन में आदर्श परिवार एवं आधुनिक नालंदा की ओर से पं. रविशंकर शुक्ल न्यास के सहयोग से किया जाएगा। इच्छुक विद्यार्थी रजिस्ट्रेशन और प्रवेश से जुड़ी जानकारी के लिए 8357835433 और 9584732481 नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया और जरूरी जानकारी भी इन्हीं माध्यमों से प्राप्त की जा सकती है।

    UPSC और MPPSC की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह मौका खास है, क्योंकि सीमित सीटों के कारण केवल 50 छात्रों को ही इस बैच में जगह मिलेगी। ऐसे में इच्छुक विद्यार्थियों को रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय जल्द आवेदन करने की सलाह दी गई है। 5 सितंबर से हिंदी भवन में शुरू होने वाली यह पहल उन युवाओं के लिए उम्मीद की नई राह बन सकती है, जो प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखते हैं लेकिन संसाधनों की कमी उनके रास्ते में बाधा बन रही है।

  • MP में भारी बारिश का अलर्ट, डिंडौरी-बालाघाट में 8 इंच तक गिर सकता है पानी, 3 दिन एक्टिव रहेगा स्ट्रॉन्ग सिस्टम

    MP में भारी बारिश का अलर्ट, डिंडौरी-बालाघाट में 8 इंच तक गिर सकता है पानी, 3 दिन एक्टिव रहेगा स्ट्रॉन्ग सिस्टम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय है। मानसून ट्रफ, साइक्लोनिक सर्कुलेशन और लो प्रेशर एरिया से बने स्ट्रॉन्ग सिस्टम का सबसे ज्यादा असर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में 22 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। डिंडौरी और बालाघाट में 4 से 8 इंच तक बारिश होने का अनुमान है। दोनों जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार विदिशा, सागर, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नरसिंहपुर, दमोह, सिवनी, जबलपुर, मंडला, कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, रीवा, मऊगंज, सीधी और छतरपुर में भारी बारिश हो सकती है।

    वहीं भोपाल, सीहोर, राजगढ़, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, सतना, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, पन्ना, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    भोपाल में तेज बारिश, लटेरी में बाजार में भरा पानी

    इससे पहले रविवार रात भोपाल में तेज बारिश हुई। वहीं विदिशा जिले के लटेरी में करीब एक घंटे तक तेज बारिश हुई। इससे मेन बाजार की सड़कों पर पानी भर गया और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    27 अगस्त तक बारिश के आसार

    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर बना रहेगा। 27 अगस्त तक प्रदेश में भारी बारिश की गतिविधियां जारी रहने के आसार हैं। पूर्वी हिस्से के साथ पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी तेज बारिश हो सकती है।

    प्रदेश में अब तक 24.8 इंच बारिश

    मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 1 जून से अब तक 629.8 मिमी यानी 24.8 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 707.3 मिमी यानी 27.8 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में सामान्य से करीब 3 इंच यानी 11% कम बारिश हुई है।

    पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 8% और पश्चिमी हिस्से में 14% कम बारिश दर्ज की गई है।

    39 जिलों में सामान्य से कम बारिश

    पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में सामान्य से 19% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी, टीकमगढ़ और डिंडौरी समेत कई जिलों में सामान्य से 6% से 50% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में भी सामान्य से 1% से 48% तक कम बारिश हुई है।

    16 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी

    प्रदेश के 16 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड हुई है। इनमें अनूपपुर, डिंडौरी, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन और राजगढ़ शामिल हैं।

  • इंदौर सट्टा मामले में जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी के मोबाइल से मिले डिजिटल सबूतों ने जांच का दायरा बढ़ाया

    इंदौर सट्टा मामले में जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी के मोबाइल से मिले डिजिटल सबूतों ने जांच का दायरा बढ़ाया

    मध्य प्रदेश : के इंदौर में सामने आए सट्टा मटका मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी का नाम जांच में सामने आने के बाद पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अपनी पड़ताल का दायरा बढ़ाया है। पुलिस के अनुसार नाना पटवारी के मोबाइल फोन से मिले डेटा और ऑनलाइन सट्टे से जुड़े सुरागों ने मामले में कई नए कनेक्शन सामने लाए हैं।

    जांच के दौरान पुलिस को नाना पटवारी के मोबाइल फोन से दो ऑनलाइन सट्टा एप से संबंधित जानकारी मिली। आरोप है कि क्रिकेट बेटिंग के लिए उन्हें एक व्यक्ति के माध्यम से आईडी उपलब्ध कराई गई थी। पुलिस का कहना है कि संबंधित आईडी बाद में डिलीट कर दी गई, लेकिन तकनीकी जांच के दौरान उससे जुड़े कुछ डिजिटल सुराग सामने आए। इन्हीं सुरागों के आधार पर जांच एजेंसियां नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।

    पुलिस के मुताबिक इस मामले में सौम्य प्रीत शिंदे समेत तीन नए आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। अन्य गिरफ्तार आरोपियों में राजेंद्र नगर निवासी राहुल निंबोला और रावजी बाजार क्षेत्र का धर्मेंद्र खींची शामिल हैं। जांच में सौम्य प्रीत शिंदे की भूमिका ऑनलाइन सट्टा एप और आईडी उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति के तौर पर सामने आने की बात कही गई है।

    जांच अधिकारियों के अनुसार आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल उपकरणों की पड़ताल के जरिए सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस मनीष पमनानी, पिंकेश माहेश्वरी और बंटी असरानी जैसे नामों से जुड़े संभावित कनेक्शनों की भी जांच कर रही है। इसके अलावा धर्मेंद्र खींची और राहुल निंबोला के विदेशी सट्टेबाजों से कथित संपर्क तथा जूनी इंदौर क्षेत्र के एक अन्य संदिग्ध से संबंधों की भी पड़ताल जारी है।

    पुलिस जांच में इस सट्टा नेटवर्क के विदेशों से जुड़े होने के संकेत मिलने की बात कही गई है। अधिकारियों के अनुसार गिरोह से जुड़े कुछ लोग दुबई और अन्य देशों में मौजूद सट्टेबाजों या बुकियों के संपर्क में हो सकते हैं। विदेशी नेटवर्क के माध्यम से ऑनलाइन सट्टा एप और वेबसाइट के लिंक भारत में सक्रिय लोगों तक पहुंचाए जाने की आशंका की जांच की जा रही है।

    मामले में अब तक कुल 12 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाते हुए सामान्य जुआ संबंधी प्रावधानों के साथ भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की संबंधित धाराएं भी जोड़ी हैं। संगठित तरीके से सट्टा संचालन की आशंका को देखते हुए पुलिस डिजिटल लेनदेन, मोबाइल डेटा और आरोपियों के आपसी संपर्कों की भी जांच कर रही है।

    नाना पटवारी की भूमिका को लेकर पुलिस ने अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अधिकारियों के अनुसार उनका नाम जांच में सामने आने के बाद उनकी भूमिका और कथित संपर्कों की विस्तृत जांच की जा रही है। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का जोर इस बात का पता लगाने पर है कि स्थानीय स्तर पर संचालित नेटवर्क का विदेशी सट्टेबाजों से किस तरह संपर्क था और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए इसका संचालन कैसे किया जा रहा था।

    जांच के आगे बढ़ने के साथ पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ, मोबाइल और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच तथा संभावित आर्थिक लेनदेन के जरिए पूरे नेटवर्क की संरचना समझने में जुटी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां या नए खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।

  • सीहोर कांवड़ यात्रा के कारण भोपाल-इंदौर हाईवे पर भारी वाहनों की आवाजाही 25 अगस्त तक प्रभावित, जानें नया ट्रैफिक प्लान

    सीहोर कांवड़ यात्रा के कारण भोपाल-इंदौर हाईवे पर भारी वाहनों की आवाजाही 25 अगस्त तक प्रभावित, जानें नया ट्रैफिक प्लान

    मध्य प्रदेश: में कांवड़ यात्रा को देखते हुए भोपाल और इंदौर के बीच आवागमन करने वाले लोगों के लिए यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। सीहोर क्षेत्र में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ और यातायात को व्यवस्थित रखने के लिए भोपाल-इंदौर मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही को सीमित किया गया है। यह व्यवस्था 23 अगस्त की सुबह 9 बजे से 25 अगस्त की रात 8 बजे तक लागू रहेगी।

    इस दौरान भारी वाहनों को भोपाल-इंदौर हाईवे से सीधे गुजरने की अनुमति नहीं होगी। ऐसे वाहनों को निर्धारित वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाएगा। यातायात व्यवस्था में किए गए इस बदलाव का असर दूसरे वाहनों की आवाजाही पर भी पड़ सकता है। प्रशासन की ओर से यात्रियों को यात्रा से पहले मार्ग की स्थिति की जानकारी लेने और उसी के अनुसार अपनी योजना तैयार करने की सलाह दी गई है।

    सीहोर में 25 अगस्त को कांवड़ यात्रा का आयोजन होना है। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। यात्रा के दौरान सीहोर से होकर गुजरने वाले प्रमुख मार्गों पर भीड़ बढ़ने की आशंका को देखते हुए यातायात को नियंत्रित करने के लिए पहले से व्यवस्था की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य कांवड़ यात्रियों की आवाजाही को सुरक्षित और सुचारु बनाए रखना है।

    भारी वाहनों के लिए रूट में बदलाव किए जाने के कारण भोपाल से इंदौर और इंदौर से भोपाल जाने वाले यात्रियों को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक समय लग सकता है। यातायात पुलिस के अनुसार लोगों को अपने सफर में करीब डेढ़ से दो घंटे का अतिरिक्त समय लेकर चलना चाहिए। विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों को समय का ध्यान रखते हुए घर से निकलने की सलाह दी गई है।

    यात्रियों के लिए सीहोर और देवास की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर भी यातायात की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी होगा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि आवश्यकता नहीं होने पर भीड़ वाले मुख्य रास्तों से बचें और स्थानीय यातायात निर्देशों का पालन करें। वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को भी निर्धारित दिशा और यातायात नियमों का पालन करना होगा।

    कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यातायात प्रबंधन में अस्थायी बदलाव किए जाते हैं। ऐसे में मार्ग परिवर्तन से होने वाली असुविधा को देखते हुए यात्रियों को पहले से अतिरिक्त समय रखने की जरूरत है। खासकर बस, मालवाहक वाहन और अन्य भारी वाहनों से सफर करने वालों को निर्धारित डायवर्जन व्यवस्था की जानकारी लेकर ही यात्रा शुरू करनी चाहिए।

    भोपाल-इंदौर के बीच रोजाना बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों, बसों और अन्य परिवहन साधनों से आवागमन करते हैं। ऐसे में तीन दिनों के लिए लागू होने वाली यह व्यवस्था यात्रा के समय को प्रभावित कर सकती है। सामान्य यातायात के मुकाबले वैकल्पिक मार्गों पर दूरी और भीड़ के कारण सफर लंबा होने की संभावना है।

    यातायात संबंधी किसी परेशानी या मार्ग को लेकर जानकारी की जरूरत होने पर यातायात पुलिस के हेल्पलाइन नंबर 0755-2677340 और 2443850 पर संपर्क किया जा सकता है। यात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा के दौरान धैर्य बनाए रखें और यातायात व्यवस्था में तैनात पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करें।

    कांवड़ यात्रा समाप्त होने और निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद यातायात व्यवस्था को सामान्य किए जाने की उम्मीद है। फिलहाल 25 अगस्त की रात 8 बजे तक लागू इस बदलाव के कारण भोपाल और इंदौर के बीच यात्रा करने वालों को अपनी यात्रा का समय पहले से तय करना और संभावित देरी के लिए पर्याप्त समय रखना जरूरी होगा।

  • खेत में फसल तैयार, लेकिन बाजार तक पहुंचने से पहले बर्बाद: MP में स्टोरेज की कमी बनी किसानों की सबसे बड़ी मुसीबत

    खेत में फसल तैयार, लेकिन बाजार तक पहुंचने से पहले बर्बाद: MP में स्टोरेज की कमी बनी किसानों की सबसे बड़ी मुसीबत


    भोपाल । मध्य प्रदेश को देश के प्रमुख कृषि राज्यों में गिना जाता है और यहां बड़ी संख्या में किसान फल सब्जियों तथा अलग अलग बागवानी फसलों की खेती पर निर्भर हैं। सरकार की ओर से किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के लगातार दावे किए जाते हैं लेकिन फसल तैयार होने के बाद उसकी सही तरीके से देखभाल और भंडारण की व्यवस्था आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। स्थिति यह है कि खेतों में मेहनत से तैयार की गई उपज का एक हिस्सा मंडी तक पहुंचने से पहले ही खराब हो जाता है। मध्य प्रदेश में फलों में अमरूद और सब्जियों में लौकी की बर्बादी सबसे ज्यादा सामने आई है। उपलब्ध सर्वे आंकड़ों के मुताबिक राज्य में करीब 14.93 प्रतिशत अमरूद और 7.46 प्रतिशत लौकी उचित भंडारण और रखरखाव के अभाव में खराब हो जाती है। इसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ता है क्योंकि जिस फसल के लिए किसान महीनों मेहनत और खर्च करता है उसका एक हिस्सा बाजार तक पहुंचने से पहले ही बेकार हो जाता है।

    फसल कटने के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए वैज्ञानिक भंडारण व्यवस्था को बेहद जरूरी माना जाता है लेकिन कई इलाकों में पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज और आधुनिक सप्लाई चेन उपलब्ध नहीं है। जल्दी खराब होने वाले फल और सब्जियों के मामले में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। अमरूद की बर्बादी का आंकड़ा इस समस्या की गंभीरता को सामने रखता है। सब्जियों में लौकी के अलावा फूलगोभी भी बड़े स्तर पर खराब हो रही है। आंकड़ों के अनुसार फूलगोभी का करीब 6.46 प्रतिशत हिस्सा उचित रखरखाव नहीं मिलने के कारण नष्ट हो जाता है। वहीं नींबू वर्गीय फलों में भी करीब 7.40 प्रतिशत तक फसलोत्तर नुकसान दर्ज किया गया है।

    नकदी फसलों और मसालों पर नजर डालें तो मिर्च में करीब 6.29 प्रतिशत और हरी मटर में 6.27 प्रतिशत तक नुकसान सामने आया है। धनिया भी इससे अछूता नहीं है और करीब 6.01 प्रतिशत फसल उचित भंडारण व्यवस्था के अभाव में खराब हो जाती है। दलहन में मध्य प्रदेश की प्रमुख फसल चना भी करीब 5.85 प्रतिशत तक नुकसान का सामना करती है। इसी तरह बाजरा में भी करीब 4.53 प्रतिशत तक फसलोत्तर नुकसान दर्ज किया गया है। ये आंकड़े बताते हैं कि समस्या केवल किसी एक फल या सब्जी तक सीमित नहीं है बल्कि खेती से बाजार तक पहुंचने वाली पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करने की जरूरत है।

    दरअसल फल और सब्जियां लंबे समय तक सामान्य तापमान पर सुरक्षित नहीं रह पातीं। कटाई के बाद यदि उन्हें जल्द बाजार तक नहीं पहुंचाया जाए या उचित तापमान पर संग्रहित नहीं किया जाए तो उनकी गुणवत्ता तेजी से गिरने लगती है। कई बार किसानों को मजबूरी में कम कीमत पर उपज बेचनी पड़ती है और जहां खरीदार नहीं मिलते वहां फसल खेत या मंडी में ही खराब होने लगती है। इसका सबसे बड़ा नुकसान छोटे और सीमांत किसानों को उठाना पड़ता है।

    दूसरे राज्यों के आंकड़े भी फसलोत्तर नुकसान की तस्वीर को सामने रखते हैं। बिहार में अमरूद का करीब 15.36 प्रतिशत और टमाटर का 12.36 प्रतिशत तक नुकसान बताया गया है। उत्तर प्रदेश में खरबूजे का करीब 7.25 प्रतिशत और पोल्ट्री मीट का 7.24 प्रतिशत नुकसान दर्ज किया गया है। इससे साफ है कि देश के कई कृषि राज्यों में उत्पादन बढ़ाने के साथ साथ भंडारण और परिवहन की व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है।

    मध्य प्रदेश में यदि गांवों और प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों के आसपास छोटे कोल्ड स्टोरेज फूड प्रोसेसिंग यूनिट और बेहतर परिवहन सुविधाएं विकसित की जाएं तो किसानों की उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे किसान मजबूरी में कम दाम पर फसल बेचने के बजाय बेहतर बाजार का इंतजार कर सकेंगे। साथ ही खराब होने वाली उपज को प्रोसेसिंग के जरिए भी उपयोग में लाया जा सकता है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है बल्कि खेत से बाजार तक फसल को सुरक्षित पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है।