Category: Madhya Pradesh

  • बैंक की नौकरी छोड़ी तो गरीब बच्चों को बनाया मिशन, 12 से 500 तक पहुंचा कारवां, ग्वालियर के मैनेजर की कहानी

    बैंक की नौकरी छोड़ी तो गरीब बच्चों को बनाया मिशन, 12 से 500 तक पहुंचा कारवां, ग्वालियर के मैनेजर की कहानी


    ग्वालियर । रिटायरमेंट के बाद आमतौर पर लोग अपने परिवार और निजी जिंदगी के लिए समय निकालते हैं लेकिन ग्वालियर के रिटायर्ड बैंक मैनेजर एमएल अहिरवार ने अपनी जिंदगी का रास्ता ही बदल दिया। पत्नी के निधन के बाद जब उनके जीवन में अकेलापन और गहरा दुख आया तो उन्होंने खुद को उस दर्द में समेटने के बजाय जरूरतमंद बच्चों की जिंदगी संवारने का फैसला किया। आज करीब छह साल से वे झुग्गी बस्तियों और मजदूर परिवारों के बच्चों को पढ़ाने में जुटे हैं। उनकी यह पहल अब 400 से 500 बच्चों तक पहुंच चुकी है।

    अहिरवार के जीवन में यह बदलाव कोरोना की दूसरी लहर के दौरान आया। करीब 2 मई 2021 को उनकी पत्नी का निधन हो गया था। इस घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। जीवन में अचानक ऐसा खालीपन आया जिसे भरना आसान नहीं था। इसी दौर में उनकी मुलाकात शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त ओपी दीक्षित से हुई। दीक्षित पहले से ही झुग्गी बस्तियों के बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहे थे। पत्नी के निधन के करीब चार से पांच महीने बाद अहिरवार भी उनके साथ बच्चों को पढ़ाने लगे। शुरुआत में उनके पास सिर्फ 12 से 13 बच्चे आते थे लेकिन धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ती चली गई।

    अहिरवार का फोकस उन बच्चों पर है जिनके माता-पिता मजदूरी या दूसरे छोटे-मोटे कामों में व्यस्त रहते हैं। आर्थिक मजबूरियों के कारण कई परिवार बच्चों की पढ़ाई पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते। ऐसे बच्चे स्कूल से दूर होने के साथ गलत संगत में पड़ने के खतरे का भी सामना करते हैं। अहिरवार का प्रयास है कि इन बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखा जाए और उन्हें ऐसा माहौल दिया जाए जिसमें वे अपने भविष्य के बारे में सोच सकें।

    ग्वालियर में काम की तलाश में आने वाले प्रवासी मजदूरों के बच्चे भी उनकी कक्षा का हिस्सा हैं। टीकमगढ़ और छतरपुर जैसे इलाकों से परिवार रोजी-रोटी के लिए दूसरे शहरों में आते हैं। बार-बार जगह बदलने के कारण बच्चों की पढ़ाई टूट जाती है। ऐसे बच्चों को लगातार पढ़ाई से जोड़े रखना अहिरवार की पहल का अहम हिस्सा है।

    सिर्फ पढ़ाने तक ही उनकी जिम्मेदारी सीमित नहीं है। वे जरूरतमंद बच्चों को कॉपी किताब और स्टेशनरी जैसी पढ़ाई की सामग्री भी उपलब्ध कराते हैं। जिन बच्चों के सामने स्कूल की फीस भरने की समस्या आती है वहां वे अपनी क्षमता के अनुसार मदद करते हैं। समाजसेवी और कुछ संगठन भी समय-समय पर इस काम में सहयोग करते हैं। कई बच्चों का स्कूल में दाखिला कराने में भी उन्होंने मदद की है ताकि उनकी शिक्षा बीच में न छूटे।

    शुरुआत में परिवार को भी चिंता थी कि अहिरवार अपना इतना समय बच्चों के बीच क्यों दे रहे हैं लेकिन जब इस पहल का असर दिखाई देने लगा तो परिवार ने उनका साथ देना शुरू कर दिया। अब उनके बच्चे भी इस काम में उनका समर्थन करते हैं। अहिरवार के लिए किसी बच्चे का पढ़ाई जारी रखना और आगे बढ़ना ही सबसे बड़ी खुशी है।

    उनका मानना है कि जरूरतमंद की आर्थिक मदद करना निश्चित रूप से जरूरी है लेकिन शिक्षा का दान किसी व्यक्ति की पूरी जिंदगी बदल सकता है। इसी सोच के साथ रिटायर्ड बैंक मैनेजर ने अपने जीवन के खालीपन को बच्चों के भविष्य की रोशनी से भर दिया। 12 बच्चों से शुरू हुई उनकी छोटी सी पहल आज सैकड़ों बच्चों तक पहुंच चुकी है और यही उनके लिए पत्नी की याद को एक सार्थक दिशा देने का सबसे बड़ा जरिया बन गई है।

  • 3 साल से अधूरी घोषणाओं पर फूटा अतिथि शिक्षकों का गुस्सा, शिक्षक दिवस पर भोपाल में होगा बड़ा प्रदर्शन

    3 साल से अधूरी घोषणाओं पर फूटा अतिथि शिक्षकों का गुस्सा, शिक्षक दिवस पर भोपाल में होगा बड़ा प्रदर्शन


    भोपाल । शिक्षक दिवस के मौके पर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अतिथि शिक्षक अपनी मांगों को लेकर बड़ा प्रदर्शन करने जा रहे हैं। प्रदेशभर के हजारों अतिथि शिक्षक शनिवार 5 सितंबर को शाहजहानी पार्क में जुटेंगे और सरकार से लंबे समय से की जा रही घोषणाओं को लागू करने की मांग करेंगे। आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा अतिथि शिक्षकों को स्थायी रोजगार देने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने का है। संगठन का कहना है कि कई सालों से स्कूलों में सेवाएं देने के बावजूद अतिथि शिक्षकों के सामने हर साल रोजगार का संकट बना रहता है और सरकार की ओर से किए गए वादे अब तक जमीन पर नहीं उतर पाए हैं।

    अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार के मुताबिक 2 सितंबर 2023 को भोपाल के लाल परेड मैदान में अतिथि शिक्षक पंचायत आयोजित हुई थी। इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अतिथि शिक्षकों के हित में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की थीं। इनमें वार्षिक अनुबंध लागू करने बीच सत्र में अतिथि शिक्षकों को बेरोजगार नहीं करने गुरुजियों की तर्ज पर नीति बनाकर नियमित करने और सीधी भर्ती में बोनस अंक देकर स्थायी रोजगार देने जैसी बातें शामिल थीं। संगठन का दावा है कि इन घोषणाओं को तीन साल पूरे होने के बावजूद अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।

    अतिथि शिक्षक संगठन का कहना है कि वे लंबे समय से स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में अब केवल आश्वासन के बजाय सरकार से ठोस नीति की उम्मीद है। संगठन के मुताबिक प्रदेश में करीब 70 हजार अतिथि शिक्षकों को सरकार की घोषणाओं पर अमल होने का सीधा फायदा मिल सकता है। उनका सवाल है कि अगर सरकार ने शिक्षकों के हित में घोषणाएं की थीं तो उन्हें लागू करने में इतनी देरी क्यों हो रही है। अतिथि शिक्षक इसे अपने रोजगार और भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहे हैं।

    संगठन की ओर से यह भी कहा गया है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री मोहन यादव भी अलग-अलग मौकों पर अतिथि शिक्षकों को स्थायी करने के समर्थन में अपनी बात रख चुके हैं। ऐसे में संगठन सरकार से मांग कर रहा है कि वर्षों से काम कर रहे अतिथि शिक्षकों के लिए ऐसी नीति बनाई जाए जिससे उनका रोजगार सुरक्षित हो सके और उन्हें हर सत्र में अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।

    इसी बीच स्कूल शिक्षा विभाग में सात हजार से ज्यादा पदों पर होने वाली नई नियुक्तियों को लेकर भी अतिथि शिक्षकों के बीच चिंता है। हालांकि संगठन के प्रदेश अध्यक्ष का दावा है कि विभाग ने नई नियुक्तियों और वर्तमान व्यवस्था के बीच ऐसा तालमेल बैठाया है जिससे जिलों में पहले से काम कर रहे अतिथि शिक्षकों के रोजगार पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। इसके बावजूद संगठन चाहता है कि सरकार स्थिति को स्पष्ट करे और लंबे समय से सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

    आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए संगठन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। पुनर्गठन के तहत स्वाति श्रीवास्तव को अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। संगठन का कहना है कि महिला अतिथि शिक्षकों की आवाज को भी आंदोलन में मजबूती से उठाया जाएगा।

    अब शिक्षक दिवस के दिन होने वाला यह प्रदर्शन सरकार के लिए भी अहम माना जा रहा है। अतिथि शिक्षक लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं और इस बार तीन साल पुरानी घोषणाओं को केंद्र में रखकर आंदोलन किया जा रहा है। ऐसे में शाहजहानी पार्क में जुटने वाले अतिथि शिक्षकों की संख्या और सरकार की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया पर सभी की नजर रहेगी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि शिक्षक दिवस पर आंदोलन के बाद क्या अतिथि शिक्षकों को उनके भविष्य को लेकर कोई ठोस आश्वासन मिलता है या फिर एक बार फिर उन्हें इंतजार करना पड़ेगा।

  • MP में सियासत से लेकर नदी तक ‘आपदा में अवसर’! नरोत्तम का शक्ति प्रदर्शन, नेता जी की पिटाई की चर्चा

    MP में सियासत से लेकर नदी तक ‘आपदा में अवसर’! नरोत्तम का शक्ति प्रदर्शन, नेता जी की पिटाई की चर्चा


    भोपाल । मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों तस्वीरों और चर्चाओं का दौर फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। दतिया में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के निवास पर उमड़ी समर्थकों की भीड़ ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। जन्माष्टमी के मौके पर दिल्ली से लौटे नरोत्तम मिश्रा का समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया। नरोत्तम मिश्रा ने भी कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचकर उनका उत्साह बढ़ाया और अपने हाथों से मिठाई खिलाकर जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान कृष्ण जन्म से जुड़े भजनों और नारों से माहौल भक्तिमय नजर आया। हालांकि राजनीतिक नजरिए से देखें तो इस पूरी तस्वीर को उनके समर्थक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देख रहे हैं।

    दरअसल दतिया उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद नरोत्तम मिश्रा की सक्रियता और राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई थीं। लेकिन पिछले कुछ समय में उनकी कई राजनीतिक मुलाकातों और सार्वजनिक मौजूदगी ने इन चर्चाओं को फिर हवा दे दी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात हो या ओरछा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ उनकी मौजूदगी या फिर भोपाल में सत्ता और संगठन से जुड़े नेताओं के साथ मेल-मुलाकात इन तस्वीरों को उनके समर्थक अलग संकेत के तौर पर देख रहे हैं। अब दतिया में समर्थकों का जुटना और उनका उत्साह यह संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है कि दादा की राजनीतिक पकड़ अभी भी कमजोर नहीं हुई है।

    उधर छतरपुर से सामने आई एक तस्वीर प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। देरी रोड पर उर्मिल नदी उफान पर है और तेज बहाव के कारण पानी पुल के ऊपर से गुजर रहा है। इसके बावजूद लोगों को नदी पार करने की मजबूरी बनी हुई है। इसी मजबूरी के बीच कुछ लोगों के लिए यह स्थिति कमाई का जरिया बन गई है। दावा है कि राहगीरों से 50-50 रुपए लेकर उन्हें उफनती नदी पार कराई जा रही है। जान जोखिम में डालकर लोग तेज बहाव के बीच रास्ता पार करने को मजबूर हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऐसी खतरनाक स्थिति में प्रशासन की ओर से पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम क्यों नजर नहीं आए। लोगों की मजबूरी और खतरे के बीच चल रहा यह कथित कारोबार व्यवस्था की गंभीर तस्वीर सामने रखता है।

    वहीं मध्य प्रदेश की राजनीति से जुड़ी एक और दिलचस्प चर्चा पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह को लेकर है। कांग्रेस से निष्कासित चल रहे लक्ष्मण सिंह इन दिनों राजनीति से इतर संगीत की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। जन्माष्टमी के मौके पर उन्होंने खुद वीडियो जारी कर बताया कि वे गाना सीख रहे हैं और इस दौरान भजन भी सुनाए। राहुल गांधी पर टिप्पणी के बाद कांग्रेस से निष्कासन और उसके बाद नई पार्टी बनाने के संकेतों के बीच उनकी राजनीतिक राह को लेकर काफी चर्चा हुई थी। लेकिन फिलहाल उनके सुर राजनीति से ज्यादा संगीत में साधे जा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि छोटे राजा साहब के सुर आगे किस दिशा में जाते हैं।

    इसी बीच राजधानी भोपाल और आसपास के राजनीतिक गलियारों में एक नेता जी की कथित पिटाई की चर्चा भी गर्म है। सूत्रों के हवाले से चर्चा है कि नेता जी के साथ दो अलग-अलग मौकों पर मारपीट हुई। दावा किया जा रहा है कि पहली घटना एक बिल्डिंग में हुई जबकि दूसरी बार उन्हें रास्ते में रोककर पीटा गया। यहां तक चर्चा है कि इस कथित मारपीट में उनके कुछ दांत भी टूट गए। हालांकि नेता जी और उनके करीबियों ने ऐसी किसी घटना से इनकार किया है और मामला पुलिस थाने तक पहुंचने की भी जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में इस चर्चा की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बावजूद इसके सियासी और स्थानीय गलियारों में यह मामला फिलहाल खूब चर्चा में है।

    कुल मिलाकर दतिया में नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों की भीड़ से लेकर छतरपुर की उफनती नदी और भोपाल के सियासी गलियारों में चल रही चर्चाओं तक मध्य प्रदेश में इन दिनों घटनाएं अलग-अलग रंग दिखा रही हैं। कहीं शक्ति प्रदर्शन के मायने निकाले जा रहे हैं तो कहीं व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं और कहीं राजनीति से दूर संगीत के सुर सुनाई दे रहे हैं। मध्य प्रदेश की सियासत में इन तस्वीरों और चर्चाओं का असर आने वाले दिनों में किस रूप में दिखाई देता है यह देखना दिलचस्प होगा।

  • MP: जबलपुर के गौरीघाट में इंजन फेल होने से नर्मदा नदी में डूबी होमगार्ड की मोटरबोट, सभी सुरक्षित

    MP: जबलपुर के गौरीघाट में इंजन फेल होने से नर्मदा नदी में डूबी होमगार्ड की मोटरबोट, सभी सुरक्षित


    जबलपुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में भारी वर्षा (Heavy rainfall) से जबलपुर स्थित बरगी बांध के 13 जलद्वार खोले जाने से उफनती नर्मदा नदी (Surging Narmada River) के गौरीघाट में शुक्रवार शाम को होमगार्ड की पेट्रोलिंग मोटरबोट (Home Guard patrol motorboat) पलट गई। हादसे के समय मोटर बोट में क्षमता से अधिक बचाव दल के सदस्य सवार थे। नर्मदा में दल के सदस्य मोटरबोट से गश्त कर रहे थे, तभी तेज बहाव के कारण नाव अनियंत्रित होकर बहने लगी।

    कुछ होमगार्ड जवान तैरकर बाहर आए, जबकि बाकी को मौके पर मौजूद स्थानीय नाविकों और गोताखोरों ने अपनी नावों की मदद से सुरक्षित निकाला। पुलिस ने भी बचाव अभियान चलाकर जवानों को निकाला।

    सामने आया है कि मोटरबोट की क्षमता चार से पांच होती है, लेकिन उस पर चालक सहित 12 होमगार्ड जवान सवार थे। जो मोटरबोट पलटी, उसमें बैठने की व्यवस्था नहीं रहती है, फिर भी जवानों को उसमें बैठाकर तेज प्रवाह के बीच ले जाया गया।

    मझधार में इंजन खराब होने की बात सामने आई है। इससे गश्ती बोट की तकनीकी फिटनेस और जांच में लापरवाही माना जा रहा है। हालांकि चालक को छोड़कर बाकी सभी ने लाइफ जैकेट पहन रखी थी। बताया जा रहा है कि मोटरबोट श्रद्धालुओं की सुरक्षा और घाट पर निगरानी के लिए पेट्रोलिंग कर रही थी। इसी दौरान बोट नदी में डूब गई। चालक की लापरवाही की बात भी कही जा रही है।

    होमगार्ड कमांडेंट नीरज सिंह ने मामले की जांच कराने बात कही है। याद आया बरगी डैम हादसागौरीघाट में नाव पलटने की घटना ने जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज हादसे की याद दिला दी।

    30 अप्रैल की शाम बरगी डैम के क्रूज में सवार 32 में नौ लोगों की मौत हो गई थी। लापता लोगों की तीन दिन तक तलाश चलने के बाद मृतकों की संख्या 13 हो गई थी। शेष को बचा लिया गया था। हादसे की जांच एकल सदस्यीय आयोग कर रहा है।

  • फर्जी IAS तृप्ति का AI वाला ठगी नेटवर्क बेनकाब, भाई संग नौकरी दिलाने का झांसा, लैपटॉप से खुल सकते हैं कई और राज

    फर्जी IAS तृप्ति का AI वाला ठगी नेटवर्क बेनकाब, भाई संग नौकरी दिलाने का झांसा, लैपटॉप से खुल सकते हैं कई और राज


    भोपाल । भोपाल में फर्जी IAS अधिकारी बनकर लोगों को ठगने वाली तृप्ति सिंह के मामले में पुलिस जांच के दौरान एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच में पता चला है कि तृप्ति और उसका भाई सुधांशु नौकरी लगवाने के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे और ठगी को असली दिखाने के लिए AI की मदद से फर्जी जॉइनिंग लेटर और अन्य दस्तावेज तैयार कराए जाते थे। इस पूरे मामले में उनके साथी प्रखर की भूमिका भी सामने आई है जो कथित तौर पर डिजिटल टूल और AI की मदद से ऐसे दस्तावेज तैयार करता था। पुलिस को उम्मीद है कि जब्त किए गए लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की फोरेंसिक जांच से इस ठगी नेटवर्क के कई और राज सामने आ सकते हैं।

    चंदेरी पुलिस ने प्रखर को लखनऊ से गिरफ्तार कर उसका लैपटॉप जब्त किया था। पूछताछ के बाद उसे जेल भेज दिया गया लेकिन अब उसके डिजिटल डिवाइस की जांच पर पुलिस की खास नजर है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कितने फर्जी जॉइनिंग लेटर तैयार किए गए और इन दस्तावेजों का इस्तेमाल किन लोगों को भरोसे में लेने के लिए किया गया। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि दस्तावेज तैयार करने से लेकर उन्हें पीड़ितों तक पहुंचाने तक पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली क्या थी।

    इधर आरोपी तृप्ति और उसके भाई सुधांशु को भोपाल की बाग सेवनिया पुलिस प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आई है और दोनों से लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस के अनुसार शुरुआती पूछताछ में दोनों ने ठगी की कम से कम दो घटनाओं से जुड़े तथ्य स्वीकार किए हैं। तृप्ति ने बताया कि शुरुआत में उसने खुद को IAS अधिकारी बताकर लोगों और सरकारी अधिकारियों के बीच प्रभाव बनाने का काम केवल मजे के लिए शुरू किया था। लेकिन जब इस फर्जी पहचान के दम पर उसे सरकारी रेस्ट हाउस और पर्यटन स्थलों तक पहुंच मिलने लगी तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता गया। धीरे धीरे यही शौक लोगों को ठगने के एक सुनियोजित तरीके में बदल गया।

    पुलिस के मुताबिक तृप्ति और सुधांशु ऐसे लोगों की तलाश करते थे जिन्हें सरकारी नौकरी की जरूरत होती थी। उन्हें सरकारी विभागों में नौकरी लगवाने का भरोसा देकर रकम मांगी जाती थी और भरोसा मजबूत करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि सुधांशु रसूखदार लोगों से संपर्क बनाने और बड़े कारोबारियों को प्रभावित करने का काम करता था। कुछ लोगों को होटल और रिजॉर्ट के ठेके दिलाने का झांसा देकर भी अपने जाल में फंसाने की कोशिश की जाती थी।

    इस मामले में चंदेरी के एक टूरिस्ट गाइड से बेटी की नौकरी लगवाने के नाम पर तीन लाख रुपए लेने का मामला भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार तृप्ति की मुलाकात गाइड से किला कोठी में हुई थी जहां उसने खुद को IAS अधिकारी बताते हुए उसकी बेटी की MP Tourism में नौकरी लगवाने का भरोसा दिया। इसके बाद गाइड के मोबाइल पर जॉइनिंग लेटर भेजा गया। जांच में सामने आया कि यह दस्तावेज भेजने के करीब 37 मिनट बाद डिलीट कर दिया गया था। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह फर्जी लेटर किस डिवाइस पर तैयार किया गया और उसे भेजने के बाद हटाने का फैसला किसने लिया।

    चंदेरी SDOP महेश शर्मा के अनुसार अब तक की पूछताछ में AI की मदद से फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाने की पुष्टि हुई है। प्रखर के लैपटॉप समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए हैं और उनकी जांच के बाद फर्जी दस्तावेजों की वास्तविक संख्या सामने आ सकती है। दूसरी ओर भोपाल की बाग सेवनिया पुलिस ठगी की रकम का पूरा ट्रेल खंगाल रही है। बैंक ट्रांजेक्शन मोबाइल चैट और डिजिटल डिवाइस की जांच के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि पैसा किस माध्यम से लिया गया और आखिरकार किन खातों तक पहुंचा। पुलिस को आशंका है कि सामने आए मामलों के अलावा भी कई लोग इस फर्जी IAS और AI आधारित दस्तावेजों वाले ठगी नेटवर्क का शिकार हुए हो सकते हैं।

  • MP में बारिश का दौर जारी, आज 19 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी

    MP में बारिश का दौर जारी, आज 19 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्यप्रदेश में बारिश का दौर एक बार फिर उत्तर की ओर बढ़ गया है। पूर्वी हिस्से में लंबे समय तक सक्रिय रहे मानसूनी सिस्टम का असर अब ग्वालियर-चंबल के साथ सागर और उज्जैन संभाग में ज्यादा दिखाई देगा। मौसम विभाग ने शनिवार को 19 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। श्योपुर और शिवपुरी के लिए ऑरेंज अलर्ट है। लगातार बारिश और कई इलाकों में बने बाढ़ जैसे हालात को देखते हुए 7 जिलों में स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया गया है।

    शनिवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, सागर, गुना, अशोकनगर, विदिशा, राजगढ़, शाजापुर, आगर-मालवा और मंदसौर में भी भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा प्रदेश के कई अन्य हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की से तेज बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।

    7 जिलों में बच्चों की छुट्टी

    बारिश और जलभराव की स्थिति को देखते हुए 5 सितंबर को श्योपुर, शिवपुरी, गुना, मुरैना, भिंड, ग्वालियर और रायसेन में स्कूल बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। मुरैना में स्कूलों के साथ आंगनवाड़ी केंद्र भी बंद रहेंगे। श्योपुर और गुना में नर्सरी से 12वीं तक के विद्यार्थियों का अवकाश रहेगा, जबकि भिंड और ग्वालियर में नर्सरी से 8वीं तक की कक्षाएं नहीं लगेंगी। शिवपुरी में सभी शैक्षणिक संस्थान और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रहेंगे। रायसेन में सरकारी और निजी दोनों स्कूलों के लिए छुट्टी घोषित की गई है।

    6 सितंबर तक सिस्टम का असर

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार बारिश कराने वाला सिस्टम 6 सितंबर को भी सक्रिय रहेगा। इसके बाद 7 और 8 सितंबर को भी कुछ इलाकों में तेज बारिश की संभावना है। हालांकि, इंदौर में इस दौरान तेज बारिश की संभावना कम है।

    MP में 762.7 मिमी पानी बरसा

    मौसम केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब तक 762.7 मिमी यानी करीब 30 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक 816 मिमी यानी 32.1 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में कुल बारिश अभी भी सामान्य से 7% कम है।

    बारिश के आंकड़ों में क्षेत्रीय अंतर भी साफ नजर आ रहा है। पूर्वी मध्यप्रदेश में अब सामान्य से 3% ज्यादा पानी गिर चुका है, जबकि पश्चिमी हिस्से में बारिश का आंकड़ा औसत से 15% कम है।

    बाढ़ से सुधरे पूर्वी हिस्से के आंकड़े

    पूर्वी मध्यप्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में आंकड़ा करीब 1% तक कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 4% से 23% तक कम बारिश दर्ज हुई है।

    हालांकि पिछले एक सप्ताह की लगातार बारिश ने इस अंतर को काफी कम किया है। पूर्वी हिस्से के कई जिलों में इसी दौरान बाढ़ जैसे हालात बने हैं। इसका असर बारिश के आंकड़ों पर भी पड़ा और सीजन में पहली बार यह क्षेत्र सामान्य बारिश से आगे निकल गया।

    पश्चिमी MP के 22 जिलों में बारिश की कमी

    पश्चिमी हिस्से में स्थिति इसके उलट है। आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 5% से 54% तक कम बारिश हुई है।

    इन 24 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी

    प्रदेश के 24 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से ऊपर पहुंच चुका है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, डिंडौरी, मैहर, मंडला, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।

  • गरीब हितग्राहियों के राशन में हेराफेरी पर प्रशासन सख्त, जांच में सामने आई अनियमितता के बाद सात विक्रेताओं पर होगी कार्रवाई

    गरीब हितग्राहियों के राशन में हेराफेरी पर प्रशासन सख्त, जांच में सामने आई अनियमितता के बाद सात विक्रेताओं पर होगी कार्रवाई

    मध्य प्रदेश: के टीकमगढ़ जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीब हितग्राहियों को दिए जाने वाले राशन में कथित गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। जिला प्रशासन की जांच में सात शासकीय उचित मूल्य दुकानों पर खाद्यान्न के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच गंभीर अंतर पाया गया है। जांच के आधार पर संबंधित दुकान विक्रेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    मामला जिले की छिपरी, बिजरावन, बजीतपुर, बड़ागांव, सुरजपुर, भेलसी और अजनौर स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकानों से जुड़ा है। इन दुकानों को लेकर जिला प्रशासन को शिकायतें मिली थीं। शिकायतों में गरीब हितग्राहियों के लिए आवंटित गेहूं के वितरण में गड़बड़ी और खाद्यान्न की हेराफेरी किए जाने के आरोप लगाए गए थे।

    शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर विवेक श्रोतिय के निर्देश पर संबंधित राशन दुकानों की जांच कराई गई। जांच के दौरान दुकानों के दस्तावेजों, खाद्यान्न वितरण से जुड़े रिकॉर्ड और उपलब्ध वास्तविक स्टॉक का परीक्षण किया गया। इस प्रक्रिया में सरकारी रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद खाद्यान्न की मात्रा में बड़ा अंतर सामने आया।

    जांच रिपोर्ट के अनुसार, सातों दुकानों से जुड़े मामले में करीब 62 लाख 78 हजार रुपये मूल्य के खाद्यान्न के गबन की बात सामने आई है। इसमें गरीब हितग्राहियों के लिए आवंटित गेहूं, चावल और नमक शामिल हैं। आरोप है कि इन खाद्य सामग्री के वितरण में अनियमितता बरती गई और निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप हितग्राहियों तक राशन नहीं पहुंचाया गया।

    सरकारी राशन व्यवस्था का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। ऐसे में राशन के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर पाए जाने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। जांच में सामने आई अनियमितताओं को आधार बनाकर संबंधित दुकान संचालकों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

    प्रशासन ने जांच रिपोर्ट के आधार पर सात राशन दुकान विक्रेताओं के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद संबंधित विक्रेताओं की भूमिका की जांच पुलिस स्तर पर भी की जाएगी। मामले में आगे की कार्रवाई जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर होगी।

    जिला प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को गंभीरता से लिया जाएगा। गरीब हितग्राहियों के लिए निर्धारित राशन में अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि पात्र परिवारों के हक का खाद्यान्न किसी भी स्तर पर प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।

    इस कार्रवाई से राशन दुकानों के संचालन और खाद्यान्न वितरण की व्यवस्था पर निगरानी बढ़ाए जाने के संकेत भी मिले हैं। सात दुकानों में सामने आई कथित अनियमितताओं के बाद संबंधित रिकॉर्ड और स्टॉक की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब एफआईआर की प्रक्रिया के साथ मामले में आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।

  • राजवाड़ा स्थित अनोखे मंदिर में मां यशोदा की गोद में विराजते हैं बाल कृष्ण, देश विदेश से आती हैं श्रद्धालु महिलाएं

    राजवाड़ा स्थित अनोखे मंदिर में मां यशोदा की गोद में विराजते हैं बाल कृष्ण, देश विदेश से आती हैं श्रद्धालु महिलाएं

    मध्यप्रदेश: के इंदौर शहर में राजवाड़ा क्षेत्र की गलियों के बीच स्थित करीब 230 साल पुराना मां यशोदा मंदिर अपनी अनोखी धार्मिक परंपरा के लिए विशेष पहचान रखता है। जन्माष्टमी के अवसर पर यहां मां यशोदा की गोद भराई की रस्म निभाई जाती है। मान्यता है कि इस परंपरा में शामिल होकर महिलाएं संतान प्राप्ति की मनोकामना करती हैं।

    मंदिर की सबसे खास बात यहां स्थापित मां यशोदा की प्रतिमा है, जिनकी गोद में बाल स्वरूप में भगवान श्रीकृष्ण विराजमान हैं। इसी स्वरूप के कारण यह मंदिर श्रद्धालुओं के बीच अलग धार्मिक महत्व रखता है। मंदिर में मां और बेटे के पवित्र संबंध को केंद्र में रखते हुए पूजा और धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं।

    जन्माष्टमी के दिन मंदिर में संतान की इच्छा रखने वाली महिलाओं की विशेष उपस्थिति रहती है। महिलाएं मां यशोदा की गोद भराई की रस्म करती हैं और भगवान श्रीकृष्ण से अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करती हैं। इस दौरान पूजा सामग्री के साथ पारंपरिक तरीके से गोद भराई की रस्म पूरी की जाती है।

    मंदिर से जुड़ी मान्यता के कारण जन्माष्टमी पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इनमें इंदौर और मध्यप्रदेश के अलग अलग हिस्सों से आने वाली महिलाओं के साथ देश के दूसरे राज्यों से आने वाले श्रद्धालु भी शामिल होते हैं। मंदिर की यह परंपरा अब देश के बाहर रहने वाले श्रद्धालुओं के बीच भी आस्था का विषय बनी हुई है।

    कई महिलाएं संतान प्राप्ति की इच्छा लेकर मंदिर पहुंचती हैं, जबकि कुछ श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद दोबारा मां यशोदा और बाल कृष्ण के दर्शन करने आती हैं। श्रद्धालुओं के लिए गोद भराई की रस्म धार्मिक विश्वास और पारिवारिक सुख की कामना से जुड़ा अवसर होती है।

    मंदिर के पुजारियों के अनुसार मां यशोदा के मंदिर में जन्माष्टमी के दौरान गोद भराई की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इसी मान्यता के चलते हर वर्ष इस अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। महिलाएं मां यशोदा की पूजा कर अपनी इच्छाओं और परिवार से जुड़ी प्रार्थनाएं रखती हैं।

    मंदिर का धार्मिक महत्व केवल संतान प्राप्ति की मान्यता तक सीमित नहीं है। मां यशोदा की गोद में बाल कृष्ण की प्रतिमा भक्तों को भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप और यशोदा के वात्सल्य की याद दिलाती है। यही कारण है कि जन्माष्टमी के अवसर पर यहां पूजा का माहौल विशेष रूप से भावनात्मक और श्रद्धापूर्ण दिखाई देता है।

    राजवाड़ा क्षेत्र में स्थित यह पुराना मंदिर इंदौर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है। लंबे समय से चली आ रही परंपराओं ने इसे स्थानीय आस्था के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित किया है। जन्माष्टमी पर यहां होने वाली गोद भराई की रस्म इसकी विशिष्ट पहचान मानी जाती है।

    देश के अलग अलग हिस्सों और विदेशों से आने वाली महिलाओं के लिए यह धार्मिक यात्रा अपनी संतान की कामना और आस्था से जुड़ा अनुभव होती है। मंदिर में पहुंचकर वे मां यशोदा और बाल कृष्ण के सामने प्रार्थना करती हैं तथा परिवार में खुशियों की कामना करती हैं।

    करीब 230 वर्ष पुराने इस मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर दिखाई देने वाली श्रद्धा इंदौर की धार्मिक परंपराओं की विविधता को भी सामने लाती है। मां यशोदा की गोद में विराजमान बाल कृष्ण का स्वरूप और गोद भराई की परंपरा इस मंदिर को शहर के अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देती है।

  • शहडोल सरकारी स्कूल में बारिश के बीच बच्चों से छज्जे की सफाई, वायरल वीडियो के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    शहडोल सरकारी स्कूल में बारिश के बीच बच्चों से छज्जे की सफाई, वायरल वीडियो के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    मध्य प्रदेश: के शहडोल जिले में सरकारी प्राथमिक विद्यालय से सामने आए एक वीडियो ने बच्चों की सुरक्षा और स्कूलों में जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गोरतरा ग्राम पंचायत स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में बारिश के दौरान बच्चों से स्कूल की छत और छज्जे की सफाई कराए जाने का मामला सामने आया है। वायरल वीडियो में कुछ बच्चे ऊंचाई वाले हिस्से पर चढ़कर सफाई करते दिखाई दे रहे हैं।

    बताया जा रहा है कि स्कूल की छत की दीवार और छज्जे पर गंदगी जमा होने के बाद उसे साफ करने की जरूरत महसूस हुई थी। इसी दौरान बच्चों से सफाई का काम कराया गया। वीडियो में बच्चे ऊंचाई पर मौजूद दिखाई देते हैं, जिससे उनके फिसलने या नीचे गिरने का खतरा बना हुआ था। खास तौर पर बारिश के दौरान छत और छज्जे की सतह पर फिसलन बढ़ जाने से जोखिम और अधिक गंभीर हो जाता है।

    स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की उम्र को देखते हुए इस तरह का कार्य कराना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। जिस समय विद्यार्थियों को पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल होना चाहिए, उस समय उनसे ऊंचाई पर चढ़कर सफाई कराने की घटना सामने आई है। यदि सफाई आवश्यक थी तो इसे सुरक्षित तरीके से कराया जा सकता था, ताकि विद्यार्थियों को किसी संभावित दुर्घटना का सामना न करना पड़े।

    मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि बच्चों को छत और छज्जे जैसे जोखिम वाले स्थान पर जाने की अनुमति किस स्तर पर दी गई। स्कूल परिसर में विद्यार्थियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी शिक्षकों और संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था की होती है। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि घटना के समय बच्चों की निगरानी और सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था मौजूद थी।

    शहडोल जिले में बारिश के कारण पहले से ही कई स्थानों पर जनजीवन प्रभावित बताया जा रहा है। ऐसे मौसम में स्कूल भवनों की सुरक्षा और विद्यार्थियों की आवाजाही को लेकर अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है। बारिश के बीच ऊंचाई पर सफाई का काम बच्चों से कराया जाना इसी वजह से और अधिक चिंता का विषय बन गया है।

    वीडियो सामने आने के बाद अभिभावकों के बीच भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को किसी भी ऐसे काम में शामिल नहीं किया जाना चाहिए, जिसमें उनकी शारीरिक सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका हो। खासकर छत, छज्जे या ऊंचाई वाले स्थानों पर काम करते समय प्रशिक्षित और जिम्मेदार व्यक्ति की मौजूदगी जरूरी मानी जाती है।

    घटना के बाद यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि सरकारी स्कूलों में सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की निगरानी किस तरह की जा रही है। स्कूल भवन की नियमित सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी तय व्यवस्था के तहत पूरी की जानी चाहिए, लेकिन इसके लिए विद्यार्थियों को जोखिम में डालना उचित नहीं माना जा सकता।

    फिलहाल वायरल वीडियो के आधार पर सामने आई इस घटना ने स्कूल प्रबंधन और संबंधित शिक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। पूरे मामले में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि बच्चों से सफाई का काम क्यों कराया गया, उन्हें ऊंचाई पर जाने की अनुमति किसने दी और बारिश के दौरान उनकी सुरक्षा के लिए क्या सावधानियां बरती गई थीं। मामले की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारी तय होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

  • राशन वितरण में गड़बड़ी पड़ी भारी: बड़ोखरा में सेल्समैन का मकान ध्वस्त, जिले में 6 राशन विक्रेताओं पर कानूनी कार्रवाई

    राशन वितरण में गड़बड़ी पड़ी भारी: बड़ोखरा में सेल्समैन का मकान ध्वस्त, जिले में 6 राशन विक्रेताओं पर कानूनी कार्रवाई


    शिवपुरी। शिवपुरी जिले में राशन वितरण में गड़बड़ी के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बदरवास क्षेत्र के बड़ोखरा गांव में ग्रामीणों की शिकायत के बाद हुई जांच में लापरवाही और अनियमितता सामने आने पर प्रशासन ने कार्रवाई की। कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश के बाद टीम ने सेल्समैन के खिलाफ कदम उठाते हुए सरकारी जमीन पर बने अवैध मकान को जेसीबी की मदद से ढहा दिया। इसके साथ ही जिले में राशन वितरण से जुड़े मामलों में छह विक्रेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजने की प्रक्रिया की गई है।

    मामला बड़ोखरा गांव की उचित मूल्य दुकान से जुड़ा है। कलेक्टर अर्पित वर्मा ने अचानक दुकान का निरीक्षण किया था। इस दौरान ग्रामीणों ने सेल्समैन योगेश जाट पर राशन वितरण में मनमानी करने का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना था कि उन्होंने राशन लेने के लिए फिंगरप्रिंट भी लगाए थे लेकिन इसके बावजूद उन्हें करीब तीन महीने से खाद्यान्न नहीं मिल रहा था। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने अपनी मौजूदगी में पात्र हितग्राहियों को राशन का वितरण कराया और सेल्समैन के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।

    प्रशासन के निर्देश के बाद भी सेल्समैन लगातार दुकान से गायब रहा। इसके बाद गुरुवार को तहसीलदार सचिन भार्गव के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम उसके गांव सेमरी पहुंची। यहां जांच के दौरान सरकारी जमीन पर एक मकान बना मिला। प्रशासन ने निर्माण को अवैध मानते हुए कार्रवाई की और जेसीबी से मकान को ढहा दिया। इस कार्रवाई के बाद राशन वितरण व्यवस्था में गड़बड़ी करने वालों के बीच हड़कंप की स्थिति बन गई।

    प्रशासन ने केवल एक मामले तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में राशन दुकानों की जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कोलारस क्षेत्र की बामोरखुर्द और श्रीपुरा राशन दुकानों में पीओएस मशीन के रिकॉर्ड में खाद्यान्न दर्ज था लेकिन मौके पर राशन उपलब्ध नहीं मिला। इस मामले में विक्रेता माधौ सिंह यादव और धनपाल सिंह के खिलाफ कार्रवाई की गई और उन्हें जेल भेजा गया।

    इसी तरह रन्नौद तहसील की अकोदा राशन दुकान में भी वितरण व्यवस्था में गड़बड़ी सामने आने के बाद विक्रेता गोलू लोधी पर कार्रवाई की गई। पिछोर क्षेत्र में भी निवोदा के पुष्पेंद्र सिनावलकलां के भगवानलाल और बघावारा के सतेंद्र के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई। इन मामलों में भी आरोपित विक्रेताओं को जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई।

    कलेक्टर ने अधिकारियों को जिले की सभी उचित मूल्य दुकानों का मौके पर जाकर निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि पीओएस मशीन में दर्ज खाद्यान्न और वास्तव में हितग्राहियों को वितरित किए गए राशन में किसी तरह का अंतर नहीं होना चाहिए। पात्र लोगों को समय पर उनका राशन मिले और वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे इस पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि राशन वितरण में अनियमितता मिलने पर जांच के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।