Category: Madhya Pradesh

  • MP: शाजापुर में बड़ा हादसा… NH-52 पर दुर्घटनाग्रस्त हुई यात्रियों से भरी बस, 29 घायल

    MP: शाजापुर में बड़ा हादसा… NH-52 पर दुर्घटनाग्रस्त हुई यात्रियों से भरी बस, 29 घायल


    शाजापुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के शाजापुर जिले (Shajapur district) में रविवार तड़के हुए एक भीषण बस हादसे में 29 यात्री घायल हो गए। नेशनल हाईवे-52 ( नेशनल हाईवे-52 ) पर रविवार सुबह टूकराना जोड़ के पास यात्रियों से भरी एक बस (Bus) अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में बस में सवार 29 यात्री घायल हो गए।

    ​प्राप्त जानकारी के अनुसार, यात्रियों से भी यह बस सारंगपुर की तरफ से आ रही थी और इंदौर की ओर जा रही थी। जैसे ही बस शाजापुर के टूकराना जोड़ के पास पहुंची, वह हादसे का शिकार हो गई। दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और चीख-पुकार शुरू हो गई।

    ​प्रशासनिक मदद और अस्पताल में भर्ती
    घटना की सूचना मिलते ही आपातकालीन सेवा 112 और 108 की टीम तुरंत हरकत में आई और मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। सभी 29 घायलों को एम्बुलेंस की मदद से तुरंत जिला अस्पताल भेजा गया। अस्पताल में सभी घायलों का इलाज जारी है, जिनमें से 2 यात्रियों की हालत गंभीर बनी हुई है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए निगरानी में रखा गया है।

    ​घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस ने भी मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हादसे के असल कारणों की जांच में जुटी है कि यह दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई।

  • MP में कंप्यूटर खरीदी घोटाला…. टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल, EOW ने FIR दर्ज कर शुरू की जांच

    MP में कंप्यूटर खरीदी घोटाला…. टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल, EOW ने FIR दर्ज कर शुरू की जांच


    भोपाल।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में सरकारी खरीद (Public Procurement) की ऑनलाइन प्रक्रिया GeM (Government e-Marketplace) पर सवाल खड़े उठाने वाला मामला सामने आया है. EOW को करीब 10.99 करोड़ रुपए की कंप्यूटर खरीदी की जांच में ऐसी जानकारियां मिली हैं, जिनसे टेंडर प्रक्रिया में कथित तौर पर मिलीभगत की आशंका जताई गई है. जांच में टेंडर में शामिल चार कंपनियों के बीच कई ऐसी समानताएं सामने आईं, जो सामान्य तौर पर अलग-अलग प्रतिस्पर्धी कंपनियों के बीच नहीं दिखतीं. EOW के मुताबिक, इन कंपनियों का संबंध एक ही व्यक्ति से पाया गया है।

    EOW DG उपेंद्र जैन के अनुसार, जांच में चारों कंपनियों के मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते में समानता मिली. इसके अलावा एक ही GST अकाउंट के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है।

    जैन का मानना है कि अलग-अलग कंपनियों के नाम से टेंडर में भाग लेकर वास्तविक प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाया गया हो सकता है. कंपनियों ने पात्रता साबित करने के लिए कंप्यूटर निर्माताओं के ऑथराइजेशन लेटर भी प्रस्तुत किए थे।

    मामले की जांच में कंप्यूटरों की सप्लाई को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं. EOW का दावा है कि कुछ पुराने कंप्यूटरों को नया बताकर सप्लाई किए जाने के साक्ष्य मिले हैं. जांच में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें 22 जुलाई 2024 को लगाए गए कंप्यूटरों को 23 सितंबर 2024 के टेंडर में नया उपकरण बताया गया. यानी जिस कंप्यूटर की स्थापना पहले ही हो चुकी थी, उसे करीब दो महीने बाद हुए टेंडर में नए उपकरण के तौर पर पेश किए जाने का आरोप है।

    स्पेसिफिकेशन भी बदले जाने का आरोप
    जांच के दौरान सप्लाई किए गए कंप्यूटरों के तकनीकी मानकों की भी पड़ताल की गई. इसमें निर्धारित स्पेसिफिकेशन और वास्तविक उपकरणों के बीच अंतर मिलने की बात सामने आई है. आरोप है कि कुछ कंप्यूटरों में स्थानीय स्तर पर खरीदे गए SSD और RAM लगाए गए, जो टेंडर में निर्धारित तकनीकी मानकों से मेल नहीं खाते थे।


    मल्टीनेशनल कंपनी के नाम पर फर्जी ऑथराइजेशन

    EOW जांच में एक और अहम बिंदु सामने आया. एक कंपनी ने टेंडर की पात्रता पूरी करने के लिए एक मल्टीनेशनल कंप्यूटर निर्माता कंपनी के नाम से कथित तौर पर ऑथराइजेशन लेटर जमा किया था. EOW के मुताबिक, इस दस्तावेज की सत्यता को लेकर भी जांच में गंभीर सवाल सामने आए हैं।


    UPS की कीमत ने भी चौंकाया

    कंप्यूटरों के अलावा UPS की खरीद में भी कीमत को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है. EOW के अनुसार, जिस UPS की प्रिंटेड कीमत 6,086 रुपए थी, उसे 11,247 रुपए में खरीदा गया। वहीं GeM पर उसी UPS की कीमत करीब 3,754 रुपए बताई गई थी. इतना ही नहीं, एक निर्माता ने EOW को बताया कि टेंडर में जिस मॉडल के UPS का उल्लेख था, उसकी सप्लाई ही नहीं की गई।


    चार लोगों पर FIR, कंपनियों पर कार्रवाई की सिफारिश

    जांच के आधार पर EOW ने मामले में चार लोगों के खिलाफ BNS की संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की है. साथ ही कथित अनियमितताओं से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश भी की गई है। अब जांच का बड़ा सवाल यही है कि 10.99 करोड़ रुपए की इस सरकारी खरीद में टेंडर प्रक्रिया किस तरह संचालित हुई, चार कंपनियों के बीच इतना गहरा कनेक्शन कैसे रहा और कथित तौर पर पुराने या अलग स्पेसिफिकेशन वाले उपकरणों की सप्लाई कैसे स्वीकार की गई?

  • भोपाल में रविवार को बरसेंगे बादल! 6 सितंबर को बारिश के साथ गरज चमक के आसार जानिए पूरे दिन कैसा रहेगा मौसम

    भोपाल में रविवार को बरसेंगे बादल! 6 सितंबर को बारिश के साथ गरज चमक के आसार जानिए पूरे दिन कैसा रहेगा मौसम


    भोपाल । भोपाल में 6 सितंबर को मौसम एक बार फिर करवट ले सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक रविवार को राजधानी में बादल छाए रहने के साथ बारिश और गरज चमक की स्थिति बन सकती है। भोपाल एयरपोर्ट के मौसम पूर्वानुमान में 6 सितंबर को न्यूनतम तापमान करीब 23 डिग्री और अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान जताया गया है। दिन के दौरान आसमान आंशिक रूप से बादलों से घिरा रह सकता है और बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना बनी रहेगी। साथ ही आकाशीय बिजली चमकने को लेकर भी सावधानी बरतने की जरूरत है।

    राजधानी में पिछले दिनों से मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। कभी तेज बारिश तो कभी बादलों के बीच हल्की फुहारों का दौर देखने को मिल रहा है। बारिश के कारण तापमान में भी राहत बनी हुई है और उमस से परेशान लोगों को कुछ राहत मिली है। 6 सितंबर को भी मौसम के इसी तरह बने रहने के आसार हैं। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार सुबह से ही आसमान में बादल छाए रह सकते हैं और कुछ समय के अंतराल पर हल्की बारिश या गरज के साथ बौछारें देखने को मिल सकती हैं।

    रविवार को भोपाल में बारिश का असर खासतौर पर सुबह और दोपहर के आसपास देखने को मिल सकता है। अलग अलग पूर्वानुमानों में बारिश की संभावना के स्तर में अंतर है लेकिन सभी संकेत राजधानी में बादल और बारिश की संभावित गतिविधि की ओर इशारा कर रहे हैं। एक घंटेवार पूर्वानुमान में भी दिन के कई घंटों के दौरान बारिश की संभावना दर्ज की गई है। ऐसे में घर से बाहर निकलने वाले लोगों को मौसम देखकर ही अपनी यात्रा की योजना बनाने की सलाह दी जा सकती है।

    मौसम विभाग ने भोपाल के लिए गरज चमक और आकाशीय बिजली की संभावना भी बताई है। ऐसे मौसम में खुले मैदानों पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचना जरूरी है। तेज बारिश होने की स्थिति में शहर के निचले इलाकों में पानी जमा होने और सड़कों पर यातायात प्रभावित होने की संभावना भी बनी रहती है। वाहन चालकों को बारिश के दौरान रफ्तार नियंत्रित रखने और पर्याप्त दूरी बनाकर चलने की जरूरत होगी।

    भोपाल के साथ ही मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है। राज्य के कई जिलों में भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की गई है और पूर्वी मध्यप्रदेश में लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में स्थिति प्रभावित हुई है। ऐसे में राजधानी में भी मौसम की गतिविधियों पर नजर बनी हुई है।

    कुल मिलाकर 6 सितंबर को भोपाल में मौसम सुहाना लेकिन अस्थिर रहने की संभावना है। दिनभर बादलों की आवाजाही के बीच बारिश और गरज चमक का दौर देखने को मिल सकता है। तापमान सामान्य से कम रहने के कारण लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी लेकिन आकाशीय बिजली और अचानक बारिश को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी होगा। खासकर सुबह से शाम तक बाहर निकलने वाले लोगों को मौसम का ताजा अपडेट लेते रहना चाहिए।

  • मध्यप्रदेश में बदले अफसरों के विभाग और पद, 16 IAS का ट्रांसफर, सागर से मंत्रालय तक हुआ बड़ा बदलाव

    मध्यप्रदेश में बदले अफसरों के विभाग और पद, 16 IAS का ट्रांसफर, सागर से मंत्रालय तक हुआ बड़ा बदलाव


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने 5 सितंबर 2026 को 16 IAS अफसरों की जिम्मेदारियों में बदलाव करते हुए तबादला आदेश जारी किया है। जारी आदेश के मुताबिक 11 अधिकारियों को नई पदस्थापना दी गई है जबकि 5 IAS अधिकारियों को उनके मौजूदा पद पर बनाए रखते हुए अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इस फेरबदल में सबसे अहम बदलाव सागर संभाग के आयुक्त पद पर हुआ है जहां दिलीप कुमार को नया संभागायुक्त बनाया गया है। इससे पहले यह जिम्मेदारी अनिल सुचारी संभाल रहे थे जिन्हें अब मध्यप्रदेश भण्डार गृह निगम का प्रबंध संचालक बनाया गया है।

    दिलीप कुमार वर्ष 2008 बैच के IAS अधिकारी हैं और इससे पहले आयुक्त उद्योग तथा प्रबंध संचालक लघु उद्योग निगम भोपाल की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब उन्हें सागर संभाग का आयुक्त बनाया गया है। उनके सामने संभाग में प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के साथ विकास कार्यों और शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी होगी। वहीं वर्ष 2006 बैच के IAS अधिकारी अनिल सुचारी को मध्यप्रदेश भण्डार गृह निगम भोपाल का प्रबंध संचालक बनाया गया है। उनके पद को सचिव मध्यप्रदेश शासन के समकक्ष घोषित किया गया है।

    तबादला सूची में अनुभा श्रीवास्तव की जिम्मेदारी भी बदली गई है। वर्ष 2009 बैच की IAS अधिकारी अनुभा श्रीवास्तव को प्रमुख राजस्व आयुक्त तथा आयुक्त भू अभिलेख एवं बंदोबस्त ग्वालियर की जिम्मेदारी से हटाकर राजस्व विभाग मंत्रालय भोपाल में सचिव बनाया गया है। इसी बैच के सतेन्द्र सिंह को भी सचिव पद की जिम्मेदारी दी गई है। वे पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में सचिव के रूप में काम करेंगे। इसके साथ ही उन्हें अनुसूचित जाति कल्याण और अनुसूचित जाति विकास से जुड़े कई अतिरिक्त प्रभार भी सौंपे गए हैं।

    नेहा मारव्या सिंह को अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम भोपाल का प्रबंध संचालक बनाया गया है जबकि निधि निवेदिता को प्रमुख राजस्व आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें आयुक्त भू अभिलेख एवं बंदोबस्त ग्वालियर का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। अनुराग वर्मा को राज्य नागरिक आपूर्ति निगम भोपाल का प्रबंध संचालक बनाया गया है। वहीं मयंक अग्रवाल को विकसित भारत रोजगार गारंटी आजीविका मिशन का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। उन्हें समग्र नर्मदा मिशन के मिशन संचालक का अतिरिक्त प्रभार भी मिला है।

    महिला एवं बाल विकास विभाग में भी बदलाव किया गया है। संदीप जीआर को विभाग में विकास आयुक्त सह आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है। अवि प्रसाद को मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कॉर्पोरेशन का प्रबंध संचालक बनाया गया है। वहीं नेहा जैन को स्मार्ट सिटी उज्जैन का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है और उन्हें नगर निगम उज्जैन के अपर आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।

    इसके अलावा रघुराज एमआर तरुण राठी कुमार पुरुषोत्तम शीतला पटले और अनिशा श्रीवास्तव को उनके मौजूदा पदों पर बरकरार रखते हुए अलग अलग विभागों का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इस व्यापक प्रशासनिक फेरबदल से प्रदेश के राजस्व महिला एवं बाल विकास उद्योग श्रम आदिवासी कल्याण स्वास्थ्य और नगरीय प्रशासन से जुड़े विभागों में कामकाज की जिम्मेदारियां नए सिरे से तय हुई हैं।

  • इंदौर पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव, मेट्रो का विस्तार 17 किलोमीटर तक, कांग्रेस पर युवाओं के मुद्दे को लेकर साधा निशाना

    इंदौर पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव, मेट्रो का विस्तार 17 किलोमीटर तक, कांग्रेस पर युवाओं के मुद्दे को लेकर साधा निशाना

    इंदौर:  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को इंदौर पहुंचे, जहां वे विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने के साथ शहर में मेट्रो सेवा के विस्तारित चरण की शुरुआत करेंगे। इंदौर मेट्रो का संचालन अब तक करीब छह किलोमीटर के दायरे में किया जा रहा था, लेकिन विस्तार के बाद यह सेवा लगभग 17 किलोमीटर के क्षेत्र तक पहुंच जाएगी। मुख्यमंत्री इस विस्तारित सेवा का विधिवत शुभारंभ करेंगे।

    इंदौर पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर को मेट्रो के विस्तार के रूप में एक महत्वपूर्ण सौगात मिल रही है। उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में मेट्रो संचालन के बाद अब इसके दायरे को बढ़ाकर करीब 17 किलोमीटर किया जा रहा है। उनके मुताबिक, आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से इंदौर मध्य प्रदेश का महत्वपूर्ण शहर है और यहां बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की जरूरत लगातार बढ़ रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मेट्रो सेवा के विस्तार से इंदौर के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूसरे शहरों और क्षेत्रों से आने वाले लोगों को भी आवागमन में सुविधा मिलेगी। बढ़ते यातायात दबाव के बीच सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना शहर के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने इंदौर के लोगों को मेट्रो के विस्तारित चरण की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं।

    इंदौर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने राजनीतिक मुद्दों पर भी कांग्रेस को घेरा। शहर में कांग्रेस के प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम और इसमें राहुल गांधी के शामिल होने की चर्चा के बीच उन्होंने विपक्षी दल पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी मध्य प्रदेश आ रहे हैं तो उनका स्वागत है, लेकिन कांग्रेस को अपने शासनकाल में युवाओं के साथ हुए कथित अन्याय के लिए माफी मांगनी चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के लंबे शासनकाल का उल्लेख करते हुए किसान, महिला और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपने पुराने शासन के दौरान प्रदेश की स्थिति को लेकर जवाब देना चाहिए। मुख्यमंत्री ने बिजली उत्पादन और प्रति व्यक्ति आय के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए वर्तमान स्थिति की तुलना कांग्रेस के पुराने शासनकाल से की।

    मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश में वर्ष 1955 से 2003 तक कांग्रेस की सरकारें रहीं और उस दौरान बिजली उत्पादन क्षमता करीब पांच हजार मेगावाट के स्तर पर थी। उन्होंने कहा कि बाद के वर्षों में यह क्षमता बढ़ी और वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भी इसमें वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता अब करीब 31 हजार मेगावाट तक पहुंच चुकी है।

    उन्होंने प्रति व्यक्ति आय का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, लंबे कांग्रेस शासन के दौरान प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय करीब 11,700 रुपये थी, जबकि अब यह बढ़कर लगभग एक लाख 67 हजार रुपये हो गई है। उन्होंने इन आंकड़ों के आधार पर कांग्रेस से अपने शासनकाल के प्रदर्शन पर स्पष्टीकरण और माफी की मांग की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक दलों को वर्तमान मुद्दों के साथ अपने पुराने कार्यकाल का भी मूल्यांकन करना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरे का स्वागत करते हुए कांग्रेस से युवाओं से जुड़े पुराने सवालों का जवाब देने को कहा। उनके बयान से इंदौर में होने वाले कांग्रेस के कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत मिले हैं।

    इसी बीच शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उनके योगदान का सम्मान किया। इंदौर में मेट्रो विस्तार और राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच मुख्यमंत्री का दौरा प्रशासनिक तथा राजनीतिक, दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा।

  • मध्य प्रदेश में बारिश के बीच मुख्यमंत्री ने लिया आपदा प्रबंधन का जायजा, एसडीआरएफ एनडीआरएफ की मुस्तैदी पर जताया संतोष

    मध्य प्रदेश में बारिश के बीच मुख्यमंत्री ने लिया आपदा प्रबंधन का जायजा, एसडीआरएफ एनडीआरएफ की मुस्तैदी पर जताया संतोष

    मध्य प्रदेश: में लगातार हो रही बारिश और कई क्षेत्रों में अतिवृष्टि की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को भोपाल स्थित होमगार्ड कार्यालय के एसडीआरएफ स्टेट कमांड सेंटर का दौरा किया। मुख्यमंत्री ने यहां प्रदेश में बारिश से उत्पन्न परिस्थितियों, संभावित बाढ़ और राहत एवं बचाव अभियानों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन और बचाव दलों की ओर से किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने कमांड सेंटर से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आपदा प्रबंधन की स्थिति का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों और संबंधित टीमों से प्रभावित इलाकों की जानकारी ली तथा राहत कार्यों की लगातार निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने बचाव एवं राहत अभियान में जुटे personnel से संवाद भी किया और उनके कार्यों की जानकारी प्राप्त की।

    डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में फिलहाल बारिश का दौर जारी है। पश्चिमी मध्य प्रदेश को छोड़कर राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश की आवश्यकता पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि लगातार वर्षा के कारण निचले इलाकों में पानी भरने जैसी परिस्थितियां सामने आती हैं, जिससे नागरिकों के साथ-साथ पशुधन के लिए भी चुनौती उत्पन्न हो सकती है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले एक महीने के दौरान एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने मिलकर 2783 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है। अचानक आई बाढ़ और जलभराव जैसी परिस्थितियों में इन टीमों की तत्परता से कई लोगों और मवेशियों को बचाने में मदद मिली है।

    उन्होंने कहा कि पिछले दो से चार दिनों में प्रदेश में ऐसी कोई गंभीर आपात स्थिति सामने नहीं आई है, लेकिन बचाव दलों को लगातार सतर्क रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की स्थिति में कुछ ही समय के भीतर पानी का स्तर बढ़ने से निचले इलाकों में परेशानी पैदा हो सकती है। ऐसे में प्रशासन, पुलिस और बचाव दलों की त्वरित कार्रवाई महत्वपूर्ण हो जाती है।

    डॉ. यादव ने आपदा प्रबंधन में पुलिस और बचाव दलों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जवानों ने अचानक आई बाढ़ जैसी परिस्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना करते हुए नागरिकों और पशुधन की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य सरकार का प्रयास है कि संकट की स्थिति में प्रभावित लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाई जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बारिश का मौसम अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और आने वाले कुछ दिनों में भी वर्षा की संभावना बनी हुई है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश दिए।

    इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से सीधा संवाद भी किया और वहां की परिस्थितियों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं पर तत्काल प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाए। सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा तथा किसी भी संभावित आपदा में जान-माल के नुकसान को न्यूनतम रखना है।

  • मध्य प्रदेश में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा, एडीबी सहयोग से ओंकारेश्वर में 600 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर परियोजना की तैयारी

    मध्य प्रदेश में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा, एडीबी सहयोग से ओंकारेश्वर में 600 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर परियोजना की तैयारी

    मध्य प्रदेश: सरकार नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने के साथ ग्रीन एनर्जी को राज्य के आर्थिक और औद्योगिक विकास से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार का जोर सौर ऊर्जा समेत स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के विस्तार पर है। इसके साथ ही निवेश आकर्षित करने और रोजगार के नए अवसर तैयार करने को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

    इसी क्रम में रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड और एशियन डेवलपमेंट बैंक के बीच महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इसके तहत नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की तीन प्रमुख परियोजनाओं के लिए ट्रांजेक्शन एडवाइजरी सर्विसेज उपलब्ध कराई जा रही हैं। खास बात यह है कि इन सलाहकारी सेवाओं के लिए एडीबी की ओर से कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है।

    सरकार की योजना ऐसे व्यावसायिक मॉडल और लेनदेन ढांचे तैयार करने की है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश करना आसान हो और उनका संचालन लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बना रहे। इससे निजी और संस्थागत निवेशकों के लिए परियोजनाओं में भागीदारी की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद है।

    ओंकारेश्वर में प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर परियोजना इस योजना का प्रमुख हिस्सा है। जलाशय की सतह पर सौर पैनल स्थापित कर बिजली उत्पादन करने वाली इस तकनीक के जरिए उपलब्ध जल क्षेत्र का उपयोग किया जाएगा। ओंकारेश्वर में 278 मेगावाट क्षमता के एक चरण के लिए परियोजना संबंधी समझौता किया गया है।

    इसके अलावा ओंकारेश्वर में लगभग 300 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता विकसित करने के लिए जरूरी जलाशय क्षेत्र और आधारभूत ढांचा उपलब्ध बताया गया है। इस तरह कुल मिलाकर करीब 600 मेगावाट क्षमता वाले फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट की दिशा में तैयारी की जा रही है। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए सर्वेक्षण, प्री फिजिबिलिटी और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट से संबंधित अध्ययन भी किए जा चुके हैं।

    नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की प्रकृति को देखते हुए सरकार अब बिजली भंडारण को भी परियोजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रही है। सौर ऊर्जा दिन के समय उपलब्ध रहती है, जबकि बिजली की मांग कई बार अलग-अलग समय पर बढ़ती है। ऐसे में ऊर्जा भंडारण प्रणाली उत्पादन और मांग के बीच संतुलन बनाने में उपयोगी हो सकती है।

    ओंकारेश्वर की प्रस्तावित परियोजना में दो घंटे की को-लोकेटेड एनर्जी स्टोरेज सिस्टम व्यवस्था का प्रावधान रखा गया है। इससे सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली को जरूरत के समय इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ाने की योजना है। पीएम सूर्य सरोवर योजना के तहत ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता का प्रावधान भी बताया गया है।

    राज्य सरकार का लक्ष्य केवल सौर बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाना नहीं है। सरकार नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को औद्योगिक निवेश, ग्रीन इन्वेस्टमेंट, रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से जोड़ना चाहती है। इसके लिए परियोजनाओं को वित्तीय और तकनीकी रूप से व्यवहारिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

    मध्य प्रदेश में सौर ऊर्जा की उपलब्ध संभावनाओं, जलाशयों और विकसित हो रहे ऊर्जा ढांचे को देखते हुए सरकार आने वाले समय में इस क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावना तलाश रही है। एडीबी के साथ सहयोग और ओंकारेश्वर जैसी परियोजनाओं को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ऊर्जा उत्पादन, भंडारण और निवेश को एक साथ आगे बढ़ाकर राज्य को ग्रीन और क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाने की कोशिश की जा रही है।

  • शिक्षक दिवस पर सीएम मोहन यादव की बड़ी घोषणा, मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा अब ऑफलाइन मोड में आयोजित होगी

    शिक्षक दिवस पर सीएम मोहन यादव की बड़ी घोषणा, मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा अब ऑफलाइन मोड में आयोजित होगी

    मध्यप्रदेश: शिक्षक दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी को ऑफलाइन मोड में आयोजित करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों के हित में जरूरी निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर लगातार काम किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने यह घोषणा भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में की। समारोह का शुभारंभ राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम से पहले एनसीसी कैडेट्स ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

    समारोह में प्रदेश के 33 उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक केवल कक्षाओं में विद्यार्थियों को पढ़ाने का काम नहीं करते, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को आकार देते हैं। उनके अनुसार देश का नक्शा कागज पर तैयार होता है, लेकिन देश की किस्मत कक्षाओं में बनती है।

    डॉ. यादव ने कहा कि भारत की गुरु-शिष्य परंपरा प्राचीन और गौरवशाली रही है। तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला जैसे शिक्षा केंद्रों ने दुनिया के विद्यार्थियों को ज्ञान दिया। उन्होंने मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और शैक्षणिक परंपरा का उल्लेख करते हुए उज्जैन के सांदीपनि आश्रम का भी जिक्र किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षकों की मेहनत और योगदान का सम्मान करती है। उन्होंने दावा किया कि बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में मेरिट सूची में बड़ी संख्या सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की होती है। इसके पीछे शिक्षकों का मार्गदर्शन, परिश्रम और विद्यार्थियों के प्रति उनकी जिम्मेदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि मध्यप्रदेश के शासकीय स्कूल गुणवत्ता के मामले में निजी स्कूलों से बेहतर बनें। शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक सुधारों पर काम किया जा रहा है। इसी क्रम में शिक्षक पात्रता परीक्षा को ऑफलाइन कराने का निर्णय शिक्षकों और अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने शिक्षक सम्मान समारोह में प्रदेश के सभी शिक्षकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि शिक्षक ज्ञान के साथ संस्कार देकर बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षा को बदलती वैश्विक जरूरतों और रोजगार के अवसरों के अनुरूप लगातार विकसित करने की आवश्यकता है।

    राज्यपाल ने शिक्षकों से विद्यार्थियों की प्रतिभा पहचानने और उनकी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने में सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने बच्चों में सहनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

    स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश का प्रत्येक शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की अहम कड़ी है। उन्होंने शिक्षकों के समर्पण और ग्रामीण तथा चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में उनके योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों से जुड़ी कानूनी और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के लिए प्रयास कर रही है।

    समारोह में सम्मानित शिक्षकों में शिवलाल दांगी, धन्नालाल बिसेन, रितेश कुमार पथाड़े, सुखनंदन साहू, नरेंद्र कुमार भारद्वाज, शिखा शर्मा, ज्योति पाठक, सीमा परमार, पूनम मिश्रा, मनीष तिवारी, अजय कुमार मिश्रा, पूजा पांडे और अन्य चयनित शिक्षक शामिल रहे। शिक्षक दिवस पर टीईटी को ऑफलाइन कराने की घोषणा और उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार के रुख को सामने लाता है।

  • मुरैना में जन्माष्टमी पर मातम: मंदिर से लौट रही तीन महिलाओं को कंटेनर ने रौंदा, सास-बहू सहित एक अन्य की मौत

    मुरैना में जन्माष्टमी पर मातम: मंदिर से लौट रही तीन महिलाओं को कंटेनर ने रौंदा, सास-बहू सहित एक अन्य की मौत


    मुरैना। जन्माष्टमी की खुशी मातम में बदल गई। राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर शनिवार तडक़े तेज रफ्तार कंटेनर ने तीन महिलाओं को कुचल दिया। तीनों महिलाएं घिरोना हनुमान मंदिर में श्रीकृष्ण जन्म के दर्शन कर घर लौट रही थीं। हादसे में तीनों की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार हादसा तडक़े करीब 4 बजे का है। हरफूल का पुरा गांव की रहने वाली महिलाएं रात में घिरोना हनुमान मंदिर में आयोजित जन्मोत्सव कार्यक्रम में शामिल होने गई थीं। दर्शन के बाद तीनों पैदल ही हाईवे किनारे से अपने घर लौट रही थीं। तभी दिल्ली की ओर जा रहे तेज रफ्तार कंटेनर ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सास-बहू गंभीर रूप से घायल हो गईं। चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी।
    सिविल लाइन थाना पुलिस ने घायलों को तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उपचार के दौरान दोनों ने दम तोड़ दिया।
    इन महिलाओं की हुई मौत –
    मृतकों की पहचान कमला कुशवाहा पत्नी फूल सिंह (50), कमला कुशवाहा पत्नी बालकिशन (50) और पूनम कुशवाहा पत्नी धर्मवीर (28) के रूप में हुई है। तीनों हरफूल का पुरा, थाना सिविल लाइन की निवासी थीं।
    बताया जा रहा है कि पूनम अपनी दो सास के साथ मंदिर गई थी। हादसे के बाद कंटेनर चालक नियंत्रण खो बैठा और सडक़ किनारे बनी कुछ दुकानों में जा घुसा। इससे दुकानों को भी नुकसान पहुंचा है।
    ग्रामीणों ने कंटेनर को घेर लिया और चालक को पकडक़र पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने कंटेनर को जब्त कर चालक को हिरासत में ले लिया है।
    तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। गांव में एक साथ तीन अर्थियां उठने से पूरे इलाके में शोक का माहौल है।
    सरपंच राजपाल सिंह कुशवाहा ने बताया कि तेज रफ्तार ट्रक की टक्कर से 3 महिलाओं की मौत हुई है। जिसमें सास-बहु है। यह बहुत ही दर्दनाक हादसा है। ग्रामीणों ने चालक को पकड़ लिया है। पुलिस को चाहिए कि वाहनों की रफ्तार को कंट्रोल मे करवाएं।
    नगर पुलिस अधीक्षक दीपाल चंदोरिया ने बताया कि थाना सिविल लाइन मे ट्रक की चपेट मे आने से तीन महिलाओं की मौत हो गई है। एक की मौके पर मौत हो गई थी। पुलिस ने ट्रक को जब्त कर लिया है और चालक को भी पकड़ लिया है। मामला दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
  • एमपी में बारिश के बीच NDRF-SDRF तैनात, अचानक बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

    एमपी में बारिश के बीच NDRF-SDRF तैनात, अचानक बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

    मध्य प्रदेश: में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन और राहत व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में इन दिनों बारिश दर्ज की जा रही है। पश्चिमी मध्य प्रदेश को छोड़कर कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई है। मौसम की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और राज्य आपदा मोचन बल की टीमों को अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति को देखते हुए अधिकारियों के साथ तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में संभावित जलभराव, अचानक बाढ़ और अन्य आपदा जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए राहत एवं बचाव व्यवस्था पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी आकस्मिक स्थिति में प्रभावित लोगों तक राहत और सहायता तेजी से पहुंचाई जा सके।

    सरकार के अनुसार, पिछले एक महीने के दौरान आपदा प्रबंधन से जुड़ी राहत और बचाव टीमों ने 2,783 से अधिक लोगों को विभिन्न परिस्थितियों में सुरक्षित बाहर निकाला है। लगातार बारिश के कारण प्रदेश के कई इलाकों में जलस्तर बढ़ने और आवागमन प्रभावित होने जैसी स्थितियां बनी हैं। ऐसे में राहत दलों को जरूरत के अनुसार तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रखा गया है।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि अब तक बारिश के कारण प्रदेश में जान-माल का कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्य में पुलिस और संबंधित टीमों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा। उनका जोर इस बात पर रहा कि मौसम की स्थिति अचानक बदलने पर प्रशासन के पास तत्काल प्रतिक्रिया देने की क्षमता बनी रहे।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले दो से चार दिनों के दौरान किसी बड़ी परेशानी की आशंका नहीं बताई गई है। इसके बावजूद सरकार ने एहतियाती स्तर पर तैयारियों को मजबूत रखने का फैसला किया है। खासतौर पर निचले इलाकों, जलभराव वाले क्षेत्रों और ऐसे स्थानों पर निगरानी बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है, जहां अचानक पानी बढ़ने की संभावना रहती है।

    NDRF और SDRF की टीमें जरूरत के अनुसार राहत और बचाव अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात रखने का उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है। प्रशासन की ओर से स्थानीय स्तर पर भी संसाधनों और राहत व्यवस्थाओं को तैयार रखने पर जोर दिया गया है।

    बारिश के दौरान नदी-नालों और जलाशयों के आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण विषय है। जलस्तर में अचानक वृद्धि होने की स्थिति में लोगों को समय पर चेतावनी देने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    सरकार का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन बारिश के दौरान उत्पन्न होने वाली आकस्मिक परिस्थितियों को देखते हुए राहत दलों को सक्रिय रखा गया है। मुख्यमंत्री की समीक्षा के बाद प्रशासनिक मशीनरी को मौसम से जुड़े बदलावों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तेजी से कार्रवाई करने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

    राज्य में मानसून के दौरान हर वर्ष अलग-अलग क्षेत्रों में अतिवृष्टि, जलभराव और अचानक बाढ़ जैसी परिस्थितियां सामने आती हैं। ऐसे में पहले से की गई तैयारी नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभाती है। इसी उद्देश्य से सरकार ने राहत एवं बचाव दलों की तैनाती, अधिकारियों के समन्वय और स्थानीय स्तर पर संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता बारिश के दौरान लोगों की सुरक्षा बनाए रखना और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत पहुंचाना है।