Category: Madhya Pradesh

  • महाकाल की नगरी में योग का महाकुंभ, उज्जैन ने दिया स्वास्थ्य और अनुशासन का संदेश

    महाकाल की नगरी में योग का महाकुंभ, उज्जैन ने दिया स्वास्थ्य और अनुशासन का संदेश


    मध्यप्रदेश । उज्जैन में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन उत्साह और श्रद्धा के साथ किया गया। जिला स्तरीय मुख्य कार्यक्रम राजाभाऊ महाकाल स्टेडियम (दशहरा मैदान) में आयोजित हुआ, जहां बड़ी संख्या में नागरिकों, विद्यार्थियों, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

    कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री Narendra Modi और मुख्यमंत्री Mohan Yadav के संबोधन के सीधा प्रसारण से हुई। इसके बाद योगाचार्यों के मार्गदर्शन में सामान्य योग प्रोटोकॉल के अनुसार विभिन्न योगासन और प्राणायाम कराए गए। प्रतिभागियों ने नियमित योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।

    बारिश के बावजूद नहीं टूटा उत्साह
    योग दिवस से एक दिन पहले हुई बारिश के कारण दशहरा मैदान के कई हिस्सों में कीचड़ हो गया था। इसके बावजूद जिला प्रशासन ने व्यवस्थाओं को दुरुस्त करते हुए मैदान में पत्थर की चूरी डलवाई और बड़े कपड़े व मैट बिछाकर प्रतिभागियों के लिए बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की। मौसम की चुनौती के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ और बड़ी संख्या में नागरिक कार्यक्रम में शामिल हुए।

    महाकाल की नगरी में योग और अध्यात्म का संगम
    उज्जैन स्थित प्रसिद्ध Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple परिसर में भी योग कार्यक्रम आयोजित किया गया। योगाभ्यास के माध्यम से लोगों ने स्वास्थ्य, अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश दिया। धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण में योग का यह आयोजन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

    भैरवगढ़ केंद्रीय जेल में 1000 बंदियों ने किया योग
    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर उज्जैन की भैरवगढ़ केंद्रीय जेल में भी विशेष योग सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक चिंतक कृष्णा गुरुजी के मार्गदर्शन में लगभग 1000 पुरुष और महिला बंदियों ने योगाभ्यास किया। इस दौरान ग्रीवा संचालन, स्कंध संचालन, ताड़ासन, वृक्षासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन, कपालभाति और अनुलोम-विलोम जैसे योग अभ्यास कराए गए। इसके बाद ध्यान सत्र आयोजित किया गया, जिसमें बंदियों ने एकाग्रचित्त होकर भाग लिया।

    गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए भेजा गया दावा
    जेल प्रशासन के अनुसार कार्यक्रम से जुड़े दस्तावेज और प्रमाण Guinness World Records तथा International Yoga Book of Records को भेजे गए हैं। दावा किया गया है कि यह “Largest Yoga Session of Prisoners” श्रेणी में रिकॉर्ड बन सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय संबंधित संस्थाओं द्वारा जांच के बाद लिया जाएगा।

    योग गुरु कृष्णा गुरुजी ने कहा कि योग केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन जीने की कला है। योग शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित कर जीवन को नई दिशा देता है।

  • आज साल का सबसे लंबा दिन, 13 घंटे 50 मिनट तक चमका सूरज; भिंड में सबसे ज्यादा दिन का उजाला

    आज साल का सबसे लंबा दिन, 13 घंटे 50 मिनट तक चमका सूरज; भिंड में सबसे ज्यादा दिन का उजाला



    मध्यप्रदेश । 21 जून खगोल विज्ञान और प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात होती है। इसे वैज्ञानिक भाषा में ग्रीष्म संक्रांति (Summer Solstice) कहा जाता है। इस अवसर पर नेशनल अवॉर्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने लोगों को इस खगोलीय घटना की वैज्ञानिक जानकारी दी और इससे जुड़े भ्रमों को दूर किया।

    उन्होंने बताया कि ग्रीष्म संक्रांति के दिन पृथ्वी का उत्तरी ध्रुव सूर्य की ओर लगभग 23.5 डिग्री झुका रहता है। इसी कारण सूर्य की सीधी किरणें कर्क रेखा पर पड़ती हैं और दिन की अवधि वर्ष में सबसे अधिक हो जाती है। यही वजह है कि 21 जून को सूरज सबसे अधिक समय तक आकाश में दिखाई देता है और रात सबसे छोटी होती है।

    अब शुरू होगा दक्षिणायन
    विशेषज्ञों के अनुसार 21 जून के बाद सूर्य की स्थिति धीरे-धीरे दक्षिण की ओर खिसकने लगती है, जिसे दक्षिणायन कहा जाता है। इसके साथ ही दिन छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं। यह प्रक्रिया आगामी छह महीनों तक जारी रहती है और मौसम में भी धीरे-धीरे बदलाव दिखाई देने लगता है।

    जीरो शैडो डे को लेकर भ्रम
    कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि “जीरो शैडो डे” केवल उन क्षेत्रों में संभव होता है जो कर्क रेखा या उसके आसपास स्थित हैं। मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में यह घटना अप्रैल और मई के दौरान देखी जा चुकी है। वहीं दिल्ली और जम्मू जैसे कर्क रेखा के उत्तर में स्थित शहरों में जीरो शैडो डे की घटना नहीं होती।

    मध्य प्रदेश में कहां रहा सबसे लंबा दिन?
    मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में भौगोलिक स्थिति के कारण अंतर देखने को मिला। प्रदेश में सबसे पहले सूर्योदय सिंगरौली में सुबह 5:12 बजे हुआ, जबकि सबसे देर से सूर्यास्त नीमच में शाम 7:22 बजे दर्ज किया गया।

    सबसे लंबे दिन का रिकॉर्ड भिंड के नाम रहा, जहां दिन की अवधि 13 घंटे 50 मिनट रही। वहीं भोपाल में 13 घंटे 34 मिनट, ग्वालियर में 13 घंटे 47 मिनट और मुरैना में 13 घंटे 48 मिनट का दिन दर्ज किया गया।

    प्रमुख शहरों में दिन की अवधि
    भोपाल – 13 घंटे 34 मिनट
    इंदौर – 13 घंटे 32 मिनट
    जबलपुर – 13 घंटे 33 मिनट
    ग्वालियर – 13 घंटे 47 मिनट
    मुरैना – 13 घंटे 48 मिनट
    भिंड – 13 घंटे 50 मिनट (सबसे लंबा दिन)
    रीवा – 13 घंटे 40 मिनट
    सिंगरौली – 13 घंटे 38 मिनट
    नीमच – 13 घंटे 38 मिनट (सबसे देर से सूर्यास्त)
    प्रकृति और विज्ञान का अद्भुत संगम

    ग्रीष्म संक्रांति केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि पृथ्वी और सूर्य के बीच संतुलन का अद्भुत उदाहरण भी है। यह दिन हमें ब्रह्मांड की जटिल लेकिन आकर्षक व्यवस्थाओं को समझने का अवसर देता है। 21 जून के बाद दिन धीरे-धीरे छोटे होने लगेंगे और दिसंबर में वर्ष की सबसे लंबी रात का दौर आएगा।

  • आवासीय भवनों में चल रहे कारोबार पर सख्ती: भोपाल में निगम का अभियान शुरू, अरेरा कॉलोनी-रोहित नगर से कार्रवाई

    आवासीय भवनों में चल रहे कारोबार पर सख्ती: भोपाल में निगम का अभियान शुरू, अरेरा कॉलोनी-रोहित नगर से कार्रवाई


    मध्यप्रदेश । भोपाल में अब आवासीय भवनों को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ नगर निगम ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। शहर के प्रमुख पॉश इलाकों अरेरा कॉलोनी और रोहित नगर से इस अभियान की शुरुआत की गई है, जहां निगम के सर्वे दलों ने ऐसे भवनों की पहचान कर कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में कोलार, बावड़िया कला, शाहपुरा, गुलमोहर और अन्य इलाकों में भी इसी तरह का अभियान चलाया जाएगा।

    नगर निगम की यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट में 4 अगस्त को प्रस्तावित सुनवाई से पहले शुरू की गई है। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने अनधिकृत निर्माण, भूमि उपयोग परिवर्तन और स्वीकृत उपयोग के विपरीत भवनों के इस्तेमाल पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्यों से विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट मांगी थी। इसी के बाद नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने स्थानीय निकायों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

    भोपाल नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा ने सभी जोनों में विशेष सर्वे टीमों का गठन किया है। ये टीमें मौके पर जाकर यह जांच कर रही हैं कि जिन भवनों को आवासीय उपयोग के लिए अनुमति दी गई थी, उनमें कहीं अस्पताल, बैंक, होटल, शोरूम, दुकान, कार्यालय या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां तो संचालित नहीं हो रहीं। जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जा रहा है, वहां संबंधित संपत्ति मालिकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जा रहा है।

    नोटिस में मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम 2012 और नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 का उल्लेख करते हुए भवन स्वामी से संबंधित दस्तावेज और स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा गया है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है तो निगम एकपक्षीय कार्रवाई कर सकता है। इसमें जुर्माना, उपयोग परिवर्तन शुल्क या अन्य कानूनी कदम भी शामिल हो सकते हैं।

    नगर निगम के रिकॉर्ड बताते हैं कि चार वर्ष पहले किए गए सर्वे में केवल अरेरा कॉलोनी में 83 और रोहित नगर में 67 मामलों सहित 150 से अधिक ऐसे भवन चिन्हित हुए थे, जहां आवासीय अनुमति के बावजूद व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। अधिकारियों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामलों की संख्या और बढ़ी है। इसलिए इस बार केवल पुराने रिकॉर्ड पर निर्भर रहने के बजाय नए सिरे से भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार भोपाल में करीब 25 हजार संपत्तियां ऐसी हैं जो रिकॉर्ड में अब भी आवासीय श्रेणी में दर्ज हैं, लेकिन उनसे व्यावसायिक दर पर संपत्ति कर वसूला जा रहा है। ऐसे मामलों में भूमि उपयोग और भवन अनुमति की स्थिति की भी समीक्षा की जाएगी।

    नगर निगम का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य शहर में नियोजित विकास सुनिश्चित करना, यातायात और पार्किंग संबंधी समस्याओं को नियंत्रित करना तथा भवन उपयोग से जुड़े नियमों का पालन कराना है। आने वाले दिनों में यह कार्रवाई पूरे शहर में व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकती है।

  • NEET-UG 2026: भोपाल में ट्रैफिक एडवायजरी जारी, परीक्षार्थियों को समय से निकलने की सलाह

    NEET-UG 2026: भोपाल में ट्रैफिक एडवायजरी जारी, परीक्षार्थियों को समय से निकलने की सलाह


    मध्यप्रदेश । भोपाल में रविवार को आयोजित होने वाली NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर नगरीय यातायात पुलिस ने व्यापक ट्रैफिक एडवायजरी जारी की है। शहर के 32 परीक्षा केंद्रों पर दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा में शामिल होने वाले हजारों अभ्यर्थियों की सुविधा और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। मेट्रो निर्माण कार्य के कारण शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित होने की संभावना है, इसलिए परीक्षार्थियों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

    यातायात पुलिस के अनुसार आनंद नगर स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल तक पहुंचने वाले मार्ग प्रभात चौराहा से पिपलानी क्षेत्र के बीच मेट्रो निर्माण के कारण संकरे हो गए हैं। ऐसे में टीटी नगर, एमपी नगर, कोलार रोड और पुराने शहर से आने वाले विद्यार्थियों को चेतक ब्रिज, गोविंदपुरा, भेल, महात्मा गांधी चौराहा और पिपलानी पेट्रोल पंप होते हुए परीक्षा केंद्र पहुंचने की सलाह दी गई है।

    इसी प्रकार गौतम नगर स्थित शासकीय गीतांजलि कन्या पीजी कॉलेज के आसपास भी मेट्रो निर्माण कार्य जारी है। डीआईजी बंगला चौराहा से सिंधी कॉलोनी और काजी कैंप तक का मार्ग प्रभावित है। इस केंद्र पर जाने वाले अभ्यर्थियों को नादरा बस स्टैंड, अग्रवाल धर्मशाला, छोला गणेश मंदिर, जेपी ब्रिज तिराहा और डीआईजी बंगला चौराहा मार्ग का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

    पुलिस प्रशासन ने परीक्षा केंद्रों के आसपास विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार के ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा ताकि विद्यार्थियों को शांत वातावरण मिल सके। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों के आसपास वाहन पार्किंग की अनुमति भी नहीं होगी। यातायात पुलिस ने अभिभावकों और आम नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि वे अनावश्यक रूप से परीक्षा केंद्रों के आसपास भीड़ न लगाएं।

    अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा के दिन किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए अपने केंद्र का पहले से निरीक्षण कर लें और निर्धारित समय से कम से कम 30 मिनट पहले घर से निकलें। इससे ट्रैफिक जाम या मार्ग परिवर्तन की स्थिति में भी वे समय पर परीक्षा केंद्र पहुंच सकेंगे।

    यातायात पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि परीक्षा के दौरान किसी भी आपात स्थिति या मार्ग संबंधी जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 7049104825, 7049104640 तथा व्हाट्सएप नंबर 7587602055 पर संपर्क किया जा सकता है। प्रशासन ने नागरिकों से नियमों का पालन कर परीक्षा व्यवस्था को सफल बनाने में सहयोग की अपील की है।

  • 23 से 25 जून तक भोपाल एयरपोर्ट पर टैक्सी संकट: एग्रीगेटर कंपनियों के खिलाफ हड़ताल पर ड्राइवर, यात्रियों की बढ़ेगी मुश्किल

    23 से 25 जून तक भोपाल एयरपोर्ट पर टैक्सी संकट: एग्रीगेटर कंपनियों के खिलाफ हड़ताल पर ड्राइवर, यात्रियों की बढ़ेगी मुश्किल


    मध्यप्रदेश । भोपाल से हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए अगले सप्ताह मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 23 जून से 25 जून तक भोपाल एयरपोर्ट पर टैक्सी सेवाएं प्रभावित रहेंगी, क्योंकि टैक्सी चालकों ने एग्रीगेटर कंपनियों के खिलाफ तीन दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया है। इस दौरान चालक ऑनलाइन टैक्सी बुकिंग एप्स के जरिए आने वाली राइड्स स्वीकार नहीं करेंगे, जिससे एयरपोर्ट आने-जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है।

    भोपाल टैक्सी चालक संघ का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है। संघ के महामंत्री राजेश कुमार नागले के अनुसार, इससे पहले 7 फरवरी और 12 जून को बोर्ड ऑफिस चौराहे पर सांकेतिक धरना प्रदर्शन कर शासन और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण संगठन ने आंदोलन को तेज करने का निर्णय लिया है।

    संघ का आरोप है कि ऐप आधारित टैक्सी कंपनियां राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किराया दरों का पालन नहीं कर रही हैं। ड्राइवरों का कहना है कि उन्हें तय मानकों से कम भुगतान किया जा रहा है, जिससे उनकी आय लगातार प्रभावित हो रही है। संगठन का दावा है कि वर्तमान परिस्थितियों में ड्राइवरों के लिए परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल होता जा रहा है।

    हड़ताल के चलते सबसे अधिक प्रभाव भोपाल एयरपोर्ट पर देखने को मिल सकता है। रोजाना सैकड़ों यात्री एयरपोर्ट तक पहुंचने और वहां से शहर के विभिन्न हिस्सों में जाने के लिए टैक्सी सेवाओं पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में यात्रियों को निजी वाहन, ऑटो रिक्शा, पारिवारिक सहायता या अन्य वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ सकता है। संघ ने आम लोगों से भी अपील की है कि आंदोलन के समर्थन में इन तीन दिनों के दौरान एग्रीगेटर कंपनियों के मोबाइल एप का उपयोग न करें।

    टैक्सी चालक संघ ने अपनी मांगों में राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किराए को लागू करने, बेस फेयर 40 रुपये और प्रति किलोमीटर 20 से 25 रुपये किराया तय करने, राइड टाइम का अलग भुगतान, गूगल मैप के आधार पर दूरी की सटीक गणना, ड्राइवरों का बीमा, रात के समय अतिरिक्त शुल्क और भोपाल में कंपनियों के स्थानीय कार्यालय स्थापित करने जैसी मांगें शामिल की हैं। इसके अलावा ड्राइवरों ने बंद की गई आईडी को दोबारा सक्रिय करने और वन-वे बुकिंग व्यवस्था समाप्त कर दोनों तरफ का किराया देने की भी मांग की है।

    गौरतलब है कि हाल ही में राजधानी भोपाल में टैक्सी चालकों ने अपनी मांगों को लेकर अनोखा विरोध प्रदर्शन भी किया था। बोर्ड ऑफिस चौराहे पर बड़ी संख्या में चालक फटे कपड़े पहनकर और हाथों में कटोरा लेकर प्रतीकात्मक रूप से भीख मांगते नजर आए थे। इस प्रदर्शन का उद्देश्य यह बताना था कि मौजूदा व्यवस्था में उनकी आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।

    अब सभी की निगाहें प्रशासन और एग्रीगेटर कंपनियों पर टिकी हैं। यदि जल्द कोई समाधान नहीं निकला तो टैक्सी चालक संघ ने आंदोलन को और तेज करने तथा शहर में टैक्सी और ऑटो सेवाओं को पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दी है। ऐसे में यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे 23 से 25 जून के बीच अपनी यात्रा की योजना पहले से बनाकर रखें और वैकल्पिक परिवहन साधनों की व्यवस्था कर लें।

  • ई-अटेंडेंस विवाद के बीच महिला शिक्षकों को राहत: संतान पालन अवकाश को माना जाएगा उपस्थिति

    ई-अटेंडेंस विवाद के बीच महिला शिक्षकों को राहत: संतान पालन अवकाश को माना जाएगा उपस्थिति


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में शिक्षकों के तबादलों को लेकर चल रहे विवाद के बीच स्कूल शिक्षा विभाग ने महिला शिक्षकों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन महिला शिक्षकों को सक्षम प्राधिकारी द्वारा संतान पालन अवकाश (चाइल्ड केयर लीव) स्वीकृत किया गया है, उनकी अवकाश अवधि को ई-अटेंडेंस प्रणाली में उपस्थिति के रूप में मान्यता दी जाएगी। इस निर्णय से उन महिला शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता के कारण स्वैच्छिक तबादलों के लिए आवेदन करने में कठिनाइयों का सामना कर रही थीं।

    प्रदेश में स्वैच्छिक तबादलों के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस को अनिवार्य शर्त बनाया है। इस फैसले का प्रदेश के करीब सवा चार लाख शिक्षकों द्वारा विरोध किया जा रहा था। विशेष रूप से महिला शिक्षकों का कहना था कि संतान पालन अवकाश के दौरान उनकी अनुपस्थिति को ई-अटेंडेंस में गैरहाजिरी माना जा रहा है, जिससे वे तबादला प्रक्रिया में पात्रता खो सकती हैं।

    इसी स्थिति को देखते हुए लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर स्पष्ट किया है कि स्वीकृत संतान पालन अवकाश की अवधि को कार्य दिवसों में उपस्थिति के रूप में जोड़ा जाएगा। इससे महिला शिक्षकों की ई-अटेंडेंस प्रतिशतता प्रभावित नहीं होगी और वे तबादले के लिए निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा कर सकेंगी।

    लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिन महिला शिक्षकों को संतान पालन अवकाश स्वीकृत है, वे अपने प्रकरण से संबंधित आवेदन राज्य स्तरीय अभ्यावेदन निराकरण समिति को भेज सकती हैं। विभाग ने इसके लिए विशेष ई-मेल व्यवस्था भी उपलब्ध कराई है। समिति प्रत्येक मामले की जांच करेगी और पात्र पाए जाने पर अवकाश अवधि को ई-अटेंडेंस में उपस्थिति के रूप में दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी।

    स्कूल शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने जिलों में ऐसे सभी मामलों का संकलन कर उन्हें शीघ्र राज्य स्तरीय समिति को भेजें। इस आदेश की प्रतियां मंत्रालय, कलेक्टरों, संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को भी भेज दी गई हैं, ताकि निर्णय का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

    शिक्षा विभाग का यह कदम ऐसे समय आया है जब ई-अटेंडेंस की शर्त को लेकर शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा था। कई शिक्षक संगठनों ने इसे अव्यावहारिक बताते हुए सरकार से नियमों में संशोधन की मांग की थी। महिला शिक्षकों को मिली यह राहत विभाग की ओर से संतुलित समाधान की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से न केवल महिला शिक्षकों की समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि तबादला प्रक्रिया को अधिक संवेदनशील और न्यायसंगत बनाने में भी मदद मिलेगी। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि राज्य स्तरीय समिति इन मामलों का निराकरण कितनी तेजी से करती है और अन्य वर्गों के शिक्षकों की मांगों पर विभाग क्या रुख अपनाता है।

  • श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्म का संगम, ध्वजारोहण के साथ शुरू हुआ सिद्धचक्र महामंडल विधान

    श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्म का संगम, ध्वजारोहण के साथ शुरू हुआ सिद्धचक्र महामंडल विधान


    मध्यप्रदेश । राजधानी भोपाल के वर्धमान नगर स्थित दाता कॉलोनी में रविवार को धार्मिक आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्री महावीर जैन मंदिर परिसर में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ विधिवत रूप से किया गया। आयोजन के पहले दिन मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की उपस्थिति से गुलजार रहा और पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया।

    कार्यक्रम की शुरुआत जिनालय से निकाली गई भव्य कलश यात्रा के साथ हुई। गाजे-बाजे, धार्मिक जयघोष और भजनों के बीच निकली इस यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश धारण किए और हाथों में अष्ट द्रव्य लेकर भगवान की भक्ति में भावपूर्ण भजन गाते हुए यात्रा को भव्य स्वरूप प्रदान किया। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं के जयकारों से वातावरण धर्ममय हो उठा।

    धार्मिक अनुष्ठानों से गूंजा मंदिर परिसर
    प्रवक्ता अंशुल जैन के अनुसार इस पुण्य आयोजन में मालती (स्व.) अनोखी लाल जैन कठनेरा परिवार ने पुण्यार्जक परिवार के रूप में प्रमुख भूमिका निभाई। धर्म इंद्र सविता नवीन एवं दिगंबर दीक्षा चंदना द्वारा विभिन्न धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराई गईं। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ अनुष्ठानों में भाग लिया। कलश यात्रा के पश्चात देव आज्ञा, गुरु आज्ञा, मंडप शुद्धि, पात्र शुद्धि तथा अन्य पारंपरिक विधि-विधानों का आयोजन किया गया। वैदिक और जैन परंपराओं के अनुरूप संपन्न हुई इन धार्मिक क्रियाओं ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया।

    28 जून को होगी पूर्णाहुति
    आठ दिनों तक चलने वाला यह पावन श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान 28 जून को पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा। इस दौरान प्रतिदिन विशेष पूजन, अभिषेक, धार्मिक प्रवचन और विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजन समिति के अनुसार श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि अधिक से अधिक लोग धर्म लाभ प्राप्त कर सकें।

    कार्यक्रम में मनोज बांगा, विनोद (एमपीटी), विजय जैन, विनोद जैन, प्रमोद, विकास, निखिलेश, वीरेंद्र जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन और श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन की सफलता और समाज की सुख-समृद्धि के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त कीं।

    यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में आध्यात्मिक चेतना, संस्कार और सामूहिक सहभागिता को भी मजबूत करने का संदेश देता है।

  • खर्च पर लगाम! अब दिल्ली जाने से पहले लेनी होगी परमिशन, MP सरकार का बड़ा फैसला

    खर्च पर लगाम! अब दिल्ली जाने से पहले लेनी होगी परमिशन, MP सरकार का बड़ा फैसला


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी खर्चों पर नियंत्रण लगाने और संसाधनों के अधिक प्रभावी उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी आदेशों के अनुसार अब प्रदेश के आईएएस, आईपीएस और सचिव स्तर के अधिकारियों को सरकारी खर्च पर दिल्ली, गुजरात, अन्य राज्यों या विदेश यात्रा करने से पहले मुख्य सचिव की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। वहीं अन्य अधिकारियों को राज्य से बाहर की शासकीय यात्रा के लिए अपने विभागीय सचिव से मंजूरी लेनी होगी।

    सरकार का मानना है कि अनावश्यक यात्राओं और प्रशासनिक खर्चों में कटौती कर राज्य के वित्तीय संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से सभी विभागों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों और विभागाध्यक्षों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

    ऑनलाइन बैठकों को मिलेगा बढ़ावा
    सरकार ने स्पष्ट किया है कि विभागीय बैठकों, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सेमिनारों को अधिकतम डिजिटल माध्यमों के जरिए आयोजित किया जाए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं ताकि अधिकारियों की अनावश्यक यात्रा कम हो और समय व धन दोनों की बचत हो सके। इसके अलावा अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यालय आने-जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन, बस सेवा और इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे ईंधन की बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

    ऊर्जा बचत पर सरकार का विशेष फोकस
    राज्य सरकार ने सभी सरकारी कार्यालयों में ऊर्जा संरक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। कार्यालयों में ऊर्जा ऑडिट कराने, बिजली खपत की निगरानी करने तथा शाम 7 बजे के बाद अनावश्यक रूप से चल रहे पंखे, लाइट, कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य उपकरण बंद रखने को कहा गया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर सिस्टम को बढ़ावा देने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में काम करने पर जोर दिया गया है।

    प्राकृतिक खेती और हरित विकास को प्रोत्साहन
    कृषि विभाग को प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं निर्माण एजेंसियों को फ्लाई ऐश, प्लास्टिक वेस्ट बिटुमिन और अन्य पर्यावरण अनुकूल सामग्री का अधिक उपयोग करने के लिए कहा गया है। सरकार का लक्ष्य विकास कार्यों को पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़ना है।

    PNG और LPG कनेक्शनों की होगी जांच
    सरकार ने पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क के विस्तार में सहयोग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उज्ज्वला योजना और सामान्य एलपीजी कनेक्शनों में डुप्लीकेट तथा अपात्र लाभार्थियों की पहचान कर कार्रवाई करने का अभियान भी चलाया जाएगा।

    फूड ऑयल के कम उपयोग पर चलेगा अभियान
    लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को खाद्य तेल के अत्यधिक उपयोग से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान के प्रति लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए व्यवहार परिवर्तन आधारित अभियान चलाए जाएंगे, जिससे लोगों में स्वस्थ खानपान की आदत विकसित हो सके।

    90 दिन का जन-जागरूकता अभियान
    जनसंपर्क विभाग को ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर 90 दिनों का व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं पर्यटन विभाग को “देखो अपना देश” और “सबसे पहले मध्यप्रदेश” जैसे अभियानों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं।

    सरकार ने सभी विभागों को इन निर्देशों के पालन की मासिक रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग को भेजने के लिए भी कहा है। सरकार का दावा है कि इन कदमों से न केवल सरकारी खर्च में कमी आएगी बल्कि ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी।

  • योग दिवस पर MP में दिखा उत्साह: राष्ट्रपति ने किया योग, इंदौर ने बनाया रिकॉर्ड, राजगढ़ में मंत्री की तबीयत बिगड़ी

    योग दिवस पर MP में दिखा उत्साह: राष्ट्रपति ने किया योग, इंदौर ने बनाया रिकॉर्ड, राजगढ़ में मंत्री की तबीयत बिगड़ी


    मध्यप्रदेश । अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को मध्य प्रदेश के शहरों, कस्बों और गांवों में योग का उत्साह देखने को मिला। राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम जबलपुर के सदर स्थित गैरिसन ग्राउंड में आयोजित किया गया, जहां देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने सामूहिक योगाभ्यास किया। इस दौरान बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, सामाजिक संगठन और आम नागरिक उपस्थित रहे। योग कार्यक्रम ने स्वास्थ्य, अनुशासन और भारतीय संस्कृति के प्रति लोगों की आस्था को एक बार फिर मजबूती से सामने रखा।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने योगाभ्यास से पहले सभी प्रतिभागियों का अभिवादन किया और योग को स्वस्थ जीवन का आधार बताया। उनके साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने भी विभिन्न योगासन और प्राणायाम किए। गैरिसन ग्राउंड में सैकड़ों लोगों ने एक साथ योग कर सामूहिक स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश दिया।

    वहीं, इंदौर ने इस बार योग दिवस पर एक अनूठा रिकॉर्ड अपने नाम किया। शहर में आयोजित विशाल सामूहिक योग कार्यक्रम में हजारों लोगों ने तीन मिनट से अधिक समय तक लगातार भ्रामरी प्राणायाम किया। आयोजकों के अनुसार यह योग के प्रति लोगों की बढ़ती जागरूकता और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक है। प्रशिक्षकों के निर्देशन में हुए इस आयोजन ने लोगों को नियमित योग को जीवनशैली का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।

    राजधानी भोपाल में भी योग दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। टीटी नगर स्टेडियम और बड़े तालाब क्षेत्र में हजारों लोगों ने योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया। प्रशासन की ओर से पेयजल, चिकित्सा सुविधा, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए गए थे, जिससे प्रतिभागियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

    प्रदेश के अन्य जिलों में भी योग दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। नर्मदापुरम के सेठानी घाट, महेश्वर के माहिष्मती घाट, सांची स्तूप परिसर और कई ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों पर सामूहिक योगाभ्यास हुआ। महिलाओं ने भारतीय परंपरा और संस्कृति पर आधारित विशेष योग प्रस्तुतियां भी दीं, जिन्हें लोगों ने खूब सराहा।

    हालांकि राजगढ़ में आयोजित योग दिवस कार्यक्रम के दौरान एक अप्रत्याशित घटना भी सामने आई। टाइफाइड से पीड़ित मंत्री नारायण सिंह पंवार की योग कार्यक्रम के दौरान तबीयत बिगड़ गई। कमजोरी महसूस होने पर स्टाफ ने उन्हें सहारा देकर मंच के पीछे बैठाया। राहत की बात यह रही कि प्राथमिक देखभाल के बाद उनकी स्थिति सामान्य बताई गई। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद तेज हवा चलने से आयोजन स्थल का आधा टेंट भी गिर गया, हालांकि किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पूरे मध्य प्रदेश में आयोजित कार्यक्रमों ने यह संदेश दिया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन की कुंजी है। बड़ी संख्या में युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों की भागीदारी ने साबित कर दिया कि योग अब केवल परंपरा नहीं, बल्कि आधुनिक जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

  • MP Weather Update: 37 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, 6 दिन लेट मानसून 25 जून तक देगा दस्तक

    MP Weather Update: 37 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, 6 दिन लेट मानसून 25 जून तक देगा दस्तक


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की देरी अब चिंता का कारण बनती जा रही है। सामान्य तौर पर 15 जून तक प्रदेश में दस्तक देने वाला मानसून इस बार 6 दिन पीछे चल रहा है और मौसम विभाग ने इसके 25 जून तक पहुंचने की संभावना जताई है। मानसून के इंतजार के बीच प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां जारी हैं, जिसके चलते कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर बना हुआ है। रविवार को इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, शिवपुरी, रीवा, शहडोल, सतना, मुरैना, धार, झाबुआ और अलीराजपुर समेत 37 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    शनिवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम ने करवट ली। उज्जैन में 2.4 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि भोपाल में 1.3 इंच पानी बरसा। इंदौर, ग्वालियर, श्योपुर, सीहोर और धार के पीथमपुर सहित कई इलाकों में तेज बारिश हुई। बारिश और बादलों की वजह से तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। धार में अधिकतम तापमान 32.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि भोपाल में 33.4 और इंदौर में 35.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    मौसम विभाग के अनुसार मानसून फिलहाल तेलंगाना क्षेत्र में धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। यदि इसकी रफ्तार बनी रही तो 23 जून तक छत्तीसगढ़ पहुंच सकता है और इसके बाद 25 जून के आसपास मध्य प्रदेश में प्रवेश करेगा। पिछले वर्ष मानसून 16 जून को ही प्रदेश में पहुंच गया था, लेकिन इस बार इसकी गति काफी धीमी है।

    मानसून की देरी का असर जून महीने की बारिश पर भी दिखाई दे रहा है। प्रदेश में अब तक सामान्य से 46 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा असर पूर्वी मध्य प्रदेश पर पड़ा है, जहां जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के 24 जिलों में सामान्य से करीब 65 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग में भी वर्षा का आंकड़ा सामान्य से लगभग 30 प्रतिशत कम है।

    कम बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें जैसे सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर की बुवाई प्रभावित हो रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बुवाई के लिए कम से कम चार इंच बारिश आवश्यक है ताकि मिट्टी में पर्याप्त नमी बन सके। कई किसानों ने मानसून आने की उम्मीद में पहले ही सोयाबीन की बुवाई कर दी थी, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से बीज खराब होने का खतरा बढ़ गया है। ऐसी स्थिति में किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है, जिससे उनकी लागत बढ़ेगी।

    फिलहाल प्रदेशभर के किसानों और आम लोगों की नजरें आसमान पर टिकी हुई हैं। मौसम विभाग को उम्मीद है कि अगले चार दिनों में मानसून सक्रिय होकर मध्य प्रदेश में प्रवेश करेगा, जिससे गर्मी और बारिश की अनिश्चितता के बीच राहत मिलने की संभावना बनेगी।