Category: Madhya Pradesh

  • एमवाय अस्पताल में भर्ती मरीजों ने तोड़ा दम, पटाखा फैक्ट्री हादसे से बढ़ा शोक

    एमवाय अस्पताल में भर्ती मरीजों ने तोड़ा दम, पटाखा फैक्ट्री हादसे से बढ़ा शोक

    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के देवास जिले के टोंककला में 14 मई को हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री हादसे में घायल दो और मजदूरों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया है। इंदौर के महाराजा यशवंतराव (MYH) अस्पताल में भर्ती अजय और निरंजन की शुक्रवार रात मौत हो गई। दोनों मजदूर बिहार के रहने वाले थे और हादसे के बाद से बर्न यूनिट में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे थे।

    इस दर्दनाक हादसे में अब तक कुल 8 मजदूरों की मौत हो चुकी है। इससे पहले भी कई घायलों ने अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के दौरान दम तोड़ा था। गुरुवार देर रात और सोमवार को भी कुछ मरीजों की मौत की पुष्टि हुई थी, जिससे मृतकों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।

    अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, कई मरीजों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। कुछ मजदूरों के शरीर 90 से 99 प्रतिशत तक झुलस चुके थे, जिससे उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई थी। गंभीर घायलों का इलाज MYH की बर्न यूनिट में किया जा रहा है, जहां संक्रमण से बचाव के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

    वहीं एक अन्य घायल विशाल (25) को सिर में गंभीर चोट लगने के बाद न्यूरो सर्जरी वार्ड में भर्ती किया गया था। धमाके के दौरान वह दूर जाकर गिरा था, जिससे उसके सिर में खून का थक्का जम गया था। डॉक्टरों के अनुसार उसकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

    अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि बर्न यूनिट में संक्रमण के खतरे को देखते हुए विशेष सावधानियां बरती जा रही हैं। 24 घंटे निगरानी के लिए नर्सिंग स्टाफ की शिफ्टवार ड्यूटी लगाई गई है ताकि मरीजों की देखभाल में कोई कमी न रहे।

    हादसे के बाद चोइथराम हॉस्पिटल में भर्ती कई मरीजों में से अधिकांश को डिस्चार्ज कर दिया गया है, जबकि एक मरीज अभी भी उपचाराधीन है। उसकी स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है और उसे जल्द ही छुट्टी दिए जाने की संभावना है।

    यह हादसा 14 मई की सुबह करीब 11:30 बजे हुआ था, जब टोंककला स्थित पटाखा फैक्ट्री में अचानक जोरदार विस्फोट हो गया था। विस्फोट इतना भयानक था कि फैक्ट्री की दीवारें ढह गईं और शवों के टुकड़े 20 से 25 फीट दूर तक जा गिरे थे। आसपास के घरों तक कंपन महसूस किया गया था, जिससे इलाके में दहशत फैल गई थी।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, धमाके के बाद कई मजदूर झुलसी हालत में बाहर भागते नजर आए थे। कई लोगों के कपड़े शरीर से चिपक गए थे और फैक्ट्री परिसर में चारों ओर जले हुए अवशेष बिखरे पड़े थे।

    इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार बढ़ रही मौतों ने प्रशासन और फैक्ट्री संचालन पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। फिलहाल जांच जारी है और घायलों के इलाज पर नजर रखी जा रही है।

  • इंदौर में पानी संकट पर लोगों का गुस्सा, नेताओं के खिलाफ नाराजगी

    इंदौर में पानी संकट पर लोगों का गुस्सा, नेताओं के खिलाफ नाराजगी


    मध्यप्रदेश । इंदौर, जो लगातार देश के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब हासिल करता रहा है, आज गंभीर जल संकट की चपेट में है। भीषण गर्मी और लगातार गिरते भूजल स्तर ने शहर की पानी व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। हालत यह है कि कई इलाकों में बोरिंग सूख चुके हैं, और नल-जल आपूर्ति भी अनियमित हो गई है। नतीजतन, हजारों परिवार अब पूरी तरह टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं।

    शहर के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है, जहां कई कॉलोनियों में दो-दो दिन बाद पानी पहुंच रहा है। लोगों को घंटों टैंकर का इंतजार करना पड़ रहा है। कई जगहों पर पानी भरने को लेकर विवाद और झड़पें तक सामने आ रही हैं। महिलाएं खाली बर्तन लेकर दूर-दराज तक पानी ढोने को मजबूर हैं, जबकि बुजुर्ग और बच्चे भी इस संकट से परेशान हैं।

    स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि कई इलाकों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। चक्काजाम, मटका फोड़ प्रदर्शन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नारेबाजी आम हो गई है। कई जगह लोगों ने खुले तौर पर कहा है कि “ऐसे नेताओं को वोट नहीं देंगे।” विकास नगर और वीणा नगर जैसे क्षेत्रों में लोगों ने पार्षदों के साथ सड़क जाम कर पानी की मांग की। वहीं कुछ इलाकों में गुस्साई भीड़ ने पानी सप्लाई सिस्टम तक को नुकसान पहुंचाया।

    नगर निगम का कहना है कि भूजल स्तर में भारी गिरावट और आधे से ज्यादा बोरिंग के सूखने से यह संकट पैदा हुआ है। स्थिति से निपटने के लिए नर्मदा परियोजना की टंकियों से सप्लाई के साथ-साथ सैकड़ों टैंकरों के जरिए पानी वितरण किया जा रहा है। निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि पानी के बदले पैसे मांगने या अवैध वसूली की शिकायत पर कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में कई बिना स्टीकर वाले टैंकर पकड़े गए और उन पर जुर्माना भी लगाया गया।

    इंदौर में पानी की किल्लत अब सिर्फ प्रशासनिक समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा भी बन चुकी है। कांग्रेस ने कई इलाकों में मटका फोड़ प्रदर्शन किया, जबकि नागरिक लगातार जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। कई वार्डों में लोगों का आरोप है कि न तो नियमित सप्लाई हो रही है और न ही टैंकर समय पर पहुंच रहे हैं।

    महिलाओं का कहना है कि उन्हें बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होती। कई जगह लोगों ने साफ कहा है कि “पानी नहीं मिलेगा तो वोट भी नहीं देंगे।”

    वार्ड-वार स्थिति भी चिंताजनक है। वार्ड 20, 41, 47, 60 और 64 सहित कई क्षेत्रों में लोग टैंकरों पर निर्भर हैं। कहीं पानी गंदा आ रहा है तो कहीं प्रेशर बेहद कम है। कई इलाकों में लोग आधा किलोमीटर दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं।

    इंदौर का जल संकट अब एक बड़े शहरी संकट का रूप ले चुका है, जहां स्वच्छता की पहचान रखने वाला शहर आज बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहा है। प्रशासनिक प्रयासों के बावजूद हालात जल्दी सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में संकट और गहरा सकता है।

  • महंगाई का झटका जारी, पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे हुआ महंगा

    महंगाई का झटका जारी, पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे हुआ महंगा


    मध्यप्रदेश । देशभर में आम जनता को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है, क्योंकि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार तीसरी बार बढ़ोतरी की गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने शनिवार को पेट्रोल के दाम में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल के दाम में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इस नई बढ़ोतरी के बाद मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों में ईंधन की कीमतों पर सीधा असर पड़ा है।

    राजधानी भोपाल में पेट्रोल की कीमत अब बढ़कर ₹111.71 प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जिससे आम लोगों के बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। बीते 9 दिनों में यह तीसरी बार है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं, जिससे कुल मिलाकर मई महीने में पेट्रोल-डीजल लगभग ₹5 प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं।

    इससे पहले 15 मई को पहली बार करीब ₹3 प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की गई थी, जबकि 19 मई को दूसरी बार लगभग 90 पैसे प्रति लीटर का इजाफा हुआ था। अब लगातार हो रही इस बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है।

    तेल कीमतों में इस उछाल की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की बढ़ती कीमतें बताई जा रही हैं। वैश्विक तनाव और ईरान-अमेरिका जैसे हालात के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जबकि कुछ समय पहले यह लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं।

    कच्चे तेल की कीमतों में इस बढ़ोतरी का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ता है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 90% तेल आयात करता है। इसी वजह से तेल कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ता है और वे कीमतों में बढ़ोतरी करने को मजबूर हो जाती हैं।

    भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें प्रतिदिन सुबह 6 बजे संशोधित की जाती हैं, जिसे ‘डेली प्राइस रिवीजन’ प्रणाली कहा जाता है। इस प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और टैक्स संरचना को ध्यान में रखा जाता है।

    ईंधन की अंतिम कीमत में कई घटक शामिल होते हैं—कच्चे तेल की मूल कीमत, रिफाइनिंग खर्च, केंद्र सरकार का एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और राज्य सरकार का वैट (VAT)। इन्हीं कारणों से अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग-अलग होती हैं।

    सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते दबाव के कारण उन्हें भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनियों को हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ तक का घाटा हो रहा था, जिसे कम करने के लिए कीमतों में समायोजन जरूरी हो गया।

    गौरतलब है कि 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की कटौती की गई थी, जिसके बाद लंबे समय तक दरें स्थिर रहीं। लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय हालात बदलने के साथ एक बार फिर ईंधन महंगा होने लगा है।

    कुल मिलाकर, लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतें आम जनता के लिए एक और आर्थिक चुनौती बनकर सामने आई हैं, जिसका असर आने वाले दिनों में परिवहन और रोजमर्रा की लागत पर भी दिखाई दे सकता है।

  • दहेज हत्या पर बड़ा खुलासा: MP में बढ़ते मामले, भोपाल से ग्वालियर तक चिंता

    दहेज हत्या पर बड़ा खुलासा: MP में बढ़ते मामले, भोपाल से ग्वालियर तक चिंता

    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में दहेज प्रताड़ना और महिलाओं की संदिग्ध मौतों की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनती जा रही हैं। हालात ऐसे हैं कि हर दिन किसी न किसी घर से एक ‘ट्विशा’ जैसी कहानी सामने आ रही है, जहां शादी के बाद उम्मीदों के साथ गई बेटी या तो वापस नहीं लौटती या फिर उसकी मौत एक रहस्य बनकर रह जाती है।

    हाल ही में भोपाल की ट्विशा शर्मा की मौत ने एक बार फिर इस गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है। शादी के मात्र छह महीने बाद हुई इस संदिग्ध मौत के बाद परिवार और ससुराल पक्ष के अलग-अलग आरोपों ने मामले को और उलझा दिया है। परिजन न्याय की मांग पर अड़े हैं और अंतिम संस्कार तक रोक दिया गया है, जबकि जांच अभी कोर्ट में विचाराधीन है।

    इसी तरह ग्वालियर की पलक रजक का मामला भी सामने आया, जिसकी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। मायके पक्ष ने हत्या का आरोप लगाया है, जबकि ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया है। पलक की आखिरी कॉल और सोशल मीडिया पोस्ट्स ने उसके मानसिक तनाव की ओर इशारा किया, जिसने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया।

    गुना और राजगढ़ जिलों से भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां नवविवाहित महिलाओं को दहेज के लिए प्रताड़ित करने और मानसिक दबाव डालने के आरोप लगे हैं। कहीं जहरीला पदार्थ खाने से मौत हुई तो कहीं आत्महत्या के लिए उकसाने की घटनाएं दर्ज हुईं।

    राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau) की ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में दहेज हत्या के 450 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 232 मामले IPC और 218 मामले नए BNS कानून के तहत दर्ज हुए हैं। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य देश में दहेज हत्या के मामलों में तीसरे स्थान पर है।

    इस सूची में उत्तर प्रदेश और बिहार के बाद मध्यप्रदेश का नाम आता है, जहां लगातार ऐसे मामलों में बढ़ोतरी चिंता का विषय बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में पति या ससुराल पक्ष द्वारा क्रूरता के 7514 मामले दर्ज हुए हैं, जबकि आत्महत्या के लिए उकसाने के 210 मामले सामने आए हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि दहेज प्रताड़ना अब केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं रही, बल्कि मानसिक उत्पीड़न और सामाजिक दबाव के रूप में भी सामने आ रही है। कई मामलों में लव मैरिज के बाद भी दहेज के कारण विवाद और उत्पीड़न की घटनाएं दर्ज की जा रही हैं।

    राज्य महिला आयोग ने भी इन बढ़ते मामलों पर चिंता जताई है और कहा है कि कई मामलों में पुलिस की जांच में देरी और लापरवाही सामने आ रही है। आयोग अब ऐसे मामलों की निगरानी और जांच प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए विशेष कमेटी बनाने पर विचार कर रहा है।

    कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर हालात गंभीर संकेत दे रहे हैं। लगातार सामने आ रहे दहेज प्रताड़ना और संदिग्ध मौतों के मामले इस बात की ओर इशारा करते हैं कि समाज और व्यवस्था दोनों स्तरों पर गहन सुधार की जरूरत है, ताकि हर ‘ट्विशा’ को न्याय और सुरक्षा मिल सके।

  • एमपी के इस गांव में पानी का बड़ा संकट, राजस्थान का कुआं बुझा रहा प्यास

    एमपी के इस गांव में पानी का बड़ा संकट, राजस्थान का कुआं बुझा रहा प्यास

    राजगढ़। मध्यप्रदेश में हर घर जल पहुंचाने के दावों के बीच राजगढ़ जिले के खिलचीपुर जनपद का फतेहपुर गांव आज भी गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि गांव के लोगों को पीने का पानी लेने के लिए रोजाना राजस्थान की सीमा तक जाना पड़ रहा है। भीषण गर्मी में ग्रामीण करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर राजस्थान के एक कुएं से पानी लाने को मजबूर हैं।

    45 डिग्री तक पहुंच चुके तापमान के बीच महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सिर पर पानी के बर्तन रखकर रोज पानी ढो रहे हैं। गांव की महिलाएं पानी लाते समय लोकगीत गाते हुए लौटती हैं, जो इस संघर्ष की दर्दभरी तस्वीर बयां करता है।

    वर्षों पुरानी है पानी की समस्या
    खिलचीपुर जनपद की बावड़ीखेड़ा पंचायत के अंतर्गत आने वाले फतेहपुर गांव की आबादी करीब 200 बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में पानी की समस्या नई नहीं, बल्कि वर्षों से बनी हुई है। गर्मी बढ़ते ही हालात और बिगड़ जाते हैं।

    ग्रामीण गजराजसिंह गुर्जर का कहना है कि बचपन से गांव में पानी की परेशानी देख रहे हैं। कई बार जनप्रतिनिधियों और पंचायत से शिकायत की गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला।

    सरपंच के जवाब से ग्रामीण नाराज
    ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या बताने पर सरपंच ने कहा, “क्या मैं तुम्हारे लिए अपनी जमीन बेच दूं? जब सरकार व्यवस्था करेगी तब टैंकर लगवाएंगे।” इस बयान के बाद गांव में नाराजगी और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और पंचायत दोनों उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे।

    बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित
    ग्रामीण निकिता गुर्जर ने बताया कि गर्मी के दिनों में पानी लाने में काफी समय और मेहनत लगती है। स्कूल खुलने के बाद बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है, क्योंकि पानी भरने के बाद वे बेहद थक जाते हैं। ग्रामीणों ने गांव में डेम और ट्यूबवेल बनाने की मांग की है, ताकि लोगों को पानी के लिए दूसरे राज्य पर निर्भर न रहना पड़े।

    महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा परेशान
    रेखाबाई ने बताया कि पूरा परिवार पानी लाने जाता है और तेज गर्मी में यह काम बेहद मुश्किल हो जाता है। वहीं मांगीबाई का कहना है कि छोटे-छोटे बच्चे भी पानी ढोने को मजबूर हैं, लेकिन जिम्मेदारों का ध्यान इस ओर नहीं है।

    प्रशासन ने दिया जल्द समाधान का भरोसा
    खिलचीपुर जनपद के सीईओ गोविंदसिंह सोलंकी ने माना कि गांव में पानी की समस्या है। उन्होंने बताया कि गांव में नल-जल योजना पर काम चल रहा है, लेकिन अभी योजना पंचायत को हैंडओवर नहीं हुई है। उनका कहना है कि जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा।

    वहीं एसडीएम अंकिता जैन ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है और जल निगम से चर्चा कर तत्काल समाधान के निर्देश दिए जा रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि भविष्य में ग्रामीणों को पानी के लिए गांव से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

  • नौतपा से पहले झुलसता मध्यप्रदेश, तापमान और बढ़ने की चेतावनी

    नौतपा से पहले झुलसता मध्यप्रदेश, तापमान और बढ़ने की चेतावनी


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में गर्मी ने एक बार फिर अपना तीखा असर दिखाना शुरू कर दिया है। प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और हालात बेहद चुनौतीपूर्ण होते जा रहे हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए राज्य के 4 जिलों में रेड अलर्ट घोषित किया है, जहां अगले कुछ दिनों तक भीषण लू और अत्यधिक गर्मी का खतरा बना रहेगा।

     नौतपा में और बढ़ेगी तपिश
    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय चल रहे नौतपा के दौरान प्रदेश में तापमान और ऊपर जा सकता है। नौतपा को गर्मी का सबसे कठिन दौर माना जाता है, जिसमें सूर्य की सीधी किरणें धरती को सबसे ज्यादा गर्म करती हैं। इस दौरान दिन के साथ-साथ रातें भी गर्म रहने की संभावना है, जिससे राहत मिलने के आसार कम हैं।

    किन जिलों में रेड अलर्ट
    रेड अलर्ट वाले जिलों में प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इन इलाकों में दिन के समय बाहर निकलना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। खासतौर पर बुजुर्ग, बच्चे और बीमार लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि इन जिलों में तापमान सामान्य से कई डिग्री अधिक दर्ज किया जा सकता है और लू का असर तेज रहेगा।

     स्वास्थ्य पर बढ़ रहा असर
    भीषण गर्मी के कारण अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और कमजोरी के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में शरीर में पानी की कमी सबसे बड़ा खतरा बन जाती है।

     विशेषज्ञों की सलाह
    मौसम और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह दी है-
    दिन में 11 बजे से 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें
    पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ लें
    हल्के और ढीले कपड़े पहनें
    धूप में निकलते समय सिर ढककर रखें
    बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें

    प्रशासन अलर्ट मोड प
    प्रशासन ने भी गर्मी के बढ़ते असर को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा है। कई जगहों पर पेयजल व्यवस्था और हीटवेव से बचाव के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।

    मध्य प्रदेश में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद कम है। नौतपा के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है, ऐसे में सतर्कता और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

  • एमपी में भीषण गर्मी का दौर जारी, आज 42 जिलों में लू की चेतावनी, नौगांव सबसे गर्म

    एमपी में भीषण गर्मी का दौर जारी, आज 42 जिलों में लू की चेतावनी, नौगांव सबसे गर्म

     
    भोपाल। मध्य प्रदेश में नौतपा शुरू होने से पहले ही भीषण गर्मी का दौर जारी है। प्रदेश के कई हिस्सों में तेज धूप और गर्म हवाओं का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। खासकर ग्वालियर-चंबल, सागर, रीवा और उज्जैन संभाग इस समय हीटवेव की चपेट में हैं। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में गर्मी और अधिक तीखी हो सकती है।

    मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को प्रदेश के 42 जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना जिलों में रेड अलर्ट घोषित किया गया है, जबकि ग्वालियर समेत 21 जिलों में तीव्र लू को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी हुआ है।

    नौगांव और खजुराहो सबसे गर्म
    शुक्रवार को प्रदेश के 10 शहरों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। छतरपुर जिले का नौगांव प्रदेश में सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 46.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं खजुराहो में पारा 46.4 डिग्री तक पहुंच गया। इसके अलावा टीकमगढ़ और सतना में 44.5 डिग्री, दतिया में 44.4 डिग्री, नरसिंहपुर और दमोह में 44.2 डिग्री तथा सागर और राजगढ़ में तापमान 44 डिग्री दर्ज किया गया।

    बड़े शहरों में भी बढ़ी गर्मी
    प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों में जबलपुर सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। ग्वालियर में 43.7 डिग्री, भोपाल में 42.2 डिग्री, उज्जैन में 42 डिग्री और इंदौर में 41.4 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    इन जिलों में अलर्ट जारी

    रेड अलर्ट
    टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना।

    ऑरेंज अलर्ट
    ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, गुना, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, विदिशा, सागर, दमोह, निवाड़ी, कटनी, उमरिया, मैहर, सतना, मऊगंज और रीवा।

    येलो अलर्ट
    भोपाल, रतलाम, उज्जैन, शाजापुर, सीहोर, रायसेन, नरसिंहपुर, जबलपुर, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, खरगोन, बड़वानी, खंडवा और बुरहानपुर।

    इन जिलों में उमस और तेज गर्मी
    इंदौर, देवास, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी और बालाघाट समेत कई जिलों में तेज गर्मी और उमस लोगों को परेशान कर सकती है।

    31 मई तक जारी रहेगा गर्मी का प्रकोप
    मौसम विभाग के अनुसार 25 मई से नौतपा की शुरुआत हो रही है और 31 मई तक प्रदेश में गर्मी अपने चरम पर बनी रह सकती है। अगले चार दिनों तक लोगों को राहत मिलने की संभावना नहीं है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर समेत अधिकांश शहरों में तापमान लगातार ऊंचा बना रहेगा।

  • खंडवा SP से गुहार: मारपीट केस में CCTV और कॉल डिटेल जांच की मांग

    खंडवा SP से गुहार: मारपीट केस में CCTV और कॉल डिटेल जांच की मांग


    मध्य प्रदेश । खंडवा जिले के बोरगांव चौकी क्षेत्र में दर्ज मारपीट के एक मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। खिराला गांव निवासी कलीम उर्फ कल्लू ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर खुद को निर्दोष बताते हुए मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

    कलीम का आरोप है कि उसे व्यक्तिगत रंजिश और पुलिस की कथित मिलीभगत के चलते झूठे मामले में फंसाया गया है। उसने दावा किया कि 16 मई की रात जब घटना हुई, उस समय वह मौके पर मौजूद नहीं था, बल्कि खिराला से करीब 5 किलोमीटर दूर एक होटल में था। कलीम ने कहा कि उसके पास होटल के CCTV फुटेज और मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) मौजूद हैं, जो उसकी बेगुनाही साबित कर सकते हैं।

    शिकायत में तत्कालीन बोरगांव चौकी प्रभारी और वर्तमान देशगांव चौकी प्रभारी रामप्रकाश यादव पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कलीम ने आरोप लगाया कि घटना के बाद रामप्रकाश यादव आरोपी पक्ष के व्यक्ति रईस से अस्पताल में मिलने पहुंचे थे, जिससे मामले की निष्पक्ष जांच पर सवाल खड़े होते हैं।

    वहीं इस पूरे मामले पर पूर्व चौकी प्रभारी रामप्रकाश यादव ने सफाई देते हुए कहा कि रईस उनका परिचित है, इसलिए वह सिर्फ मिलने के लिए अस्पताल गए थे। दूसरी ओर बोरगांव चौकी प्रभारी अविनाश भोपले ने बताया कि एफआईआर फरियादी के बयान के आधार पर दर्ज की गई है और मामले की जांच प्रक्रिया जारी है। अब पूरा मामला जांच के दायरे में है और दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच सच्चाई सामने आने का इंतजार किया जा रहा है।

  • खरगोन में अवैध शराब पर सख्ती, करोड़ों की जब्ती नष्ट कराई गई

    खरगोन में अवैध शराब पर सख्ती, करोड़ों की जब्ती नष्ट कराई गई


    मध्य प्रदेश । मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में पुलिस ने अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 25 लाख रुपये मूल्य की लगभग 9 हजार लीटर देशी और विदेशी शराब को नष्ट कर दिया। यह कार्रवाई शुक्रवार सुबह ट्रेचिंग ग्राउंड क्षेत्र में जेसीबी मशीन और रोलर की मदद से की गई।

    यह पूरी प्रक्रिया पुलिस अधीक्षक रविन्द्र वर्मा की मौजूदगी में संपन्न हुई। कार्रवाई के दौरान आबकारी विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारी भी मौके पर उपस्थित रहे। पुलिस ने कोर्ट के आदेशों के बाद गठित विशेष समिति की निगरानी में शराब नष्ट करने की यह प्रक्रिया पूरी की।

    जानकारी के अनुसार, यह शराब जिले के 14 अलग-अलग पुलिस थानों में दर्ज कुल 64 मामलों में जब्त की गई थी। यह माल लंबे समय से थानों में सुरक्षित रखा गया था, जिसे अब विधिवत प्रक्रिया के तहत नष्ट किया गया।

    एसपी रविन्द्र वर्मा ने बताया कि अवैध शराब के मामलों में जब्त की गई सामग्री को न्यायालय की अनुमति और समिति की देखरेख में नष्ट किया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी ताकि अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाई जा सके। बड़ी मात्रा में शराब पर की गई इस कार्रवाई से जिले में अवैध शराब कारोबारियों में हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है।

  • खेत विवाद में कुल्हाड़ी से वार कर बेटे की हत्या, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

    खेत विवाद में कुल्हाड़ी से वार कर बेटे की हत्या, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा


    मध्य प्रदेश । मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में एक दिल दहला देने वाले हत्याकांड में अदालत ने आरोपी पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला 6 दिसंबर 2024 का है, जिसमें खेत के विवाद के चलते एक पिता ने अपने ही बेटे की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी थी।

    अतिरिक्त लोक अभियोजक राजकुमार अत्रे ने जानकारी देते हुए बताया कि तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश राजकुमार यादव की अदालत ने आरोपी रुमसिंग पिता गुमानसिंह भिलाला (55), निवासी उपड़ी को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103 के तहत दोषी करार दिया है। अदालत ने आरोपी को उम्रकैद के साथ 5000 रुपये के अर्थदंड की सजा भी सुनाई।

    अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना के दिन सुबह पिता और पुत्र के बीच खेत में हल चलाने को लेकर विवाद हुआ था। विवाद इतना बढ़ गया कि शाम करीब 5 बजे जब पुत्र हिरालाल घर के बाहर खटिया पर सो रहा था, तभी आरोपी पिता ने उस पर कुल्हाड़ी से गर्दन पर तीन-चार वार कर दिए। गंभीर चोटों के कारण हिरालाल की मौके पर ही मौत हो गई।

    इस पूरे मामले में सबसे अहम भूमिका मृतक की बहू शर्मिला की गवाही की रही। शर्मिला ने अदालत में बताया कि उसने अपने ससुर को अपने जेठ हिरालाल पर हमला करते हुए देखा था, जिससे मामले की सच्चाई स्पष्ट हो गई।

    अदालत ने बहू की प्रत्यक्षदर्शी गवाही और जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को दोषी मानते हुए कठोर सजा सुनाई। इस मामले की जांच तत्कालीन ऊन थाना प्रभारी गणपत कनेल द्वारा की गई थी।

    इस फैसले के बाद इलाके में इस जघन्य अपराध को लेकर चर्चा तेज हो गई है और ग्रामीणों ने भी इसे एक गंभीर पारिवारिक विवाद का दुखद परिणाम बताया।