Category: Madhya Pradesh

  • 120 करोड़ के बेशकीमती गहनों से होगा राधा-कृष्ण का श्रृंगार लॉकर से निकलेंगे अनमोल मोती पन्ने और हीरे

    120 करोड़ के बेशकीमती गहनों से होगा राधा-कृष्ण का श्रृंगार लॉकर से निकलेंगे अनमोल मोती पन्ने और हीरे


    ग्वालियर । ग्वालियर के ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में इस बार जन्माष्टमी का उत्सव बेहद खास होने जा रहा है। 4 सितंबर को भगवान राधा-कृष्ण का राजसी श्रृंगार बेशकीमती सोने चांदी हीरे मोती और पन्नों से जड़े आभूषणों से किया जाएगा। इन आभूषणों की कुल कीमत 120 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है। साल में चुनिंदा विशेष अवसरों पर ही बैंक लॉकर से बाहर निकाले जाने वाले इन गहनों के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इस बार करीब डेढ़ लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया जा रहा है।

    जन्माष्टमी के दिन सुबह करीब 10 बजे आभूषणों को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के लॉकर से निकालने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए नगर निगम आयुक्त की ओर से गठित विशेष समिति बैंक पहुंचेगी। सुरक्षा व्यवस्था के बीच आभूषणों को मंदिर तक लाया जाएगा। मंदिर पहुंचने के बाद सभी गहनों की सफाई की जाएगी और इसके बाद इन्हें भगवान राधा-कृष्ण के श्रृंगार में शामिल किया जाएगा।

    गोपाल मंदिर में रखे इन आभूषणों की खासियत सिर्फ उनकी कीमत नहीं बल्कि उनका ऐतिहासिक और कलात्मक महत्व भी है। भगवान श्रीकृष्ण के श्रृंगार में सोने का मुकुट शामिल किया जाता है जिसमें पुखराज माणिक और पन्ने जैसे कीमती रत्न जड़े हैं। वहीं राधारानी का करीब तीन तोला वजन का रत्नजड़ित मुकुट भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहता है।

    इन आभूषणों में सबसे ज्यादा चर्चा सात लड़ियों वाले उस हार की होती है जिसमें 62 असली मोती और 55 पन्ने जड़े हुए हैं। इस हार की कीमत करीब 35 करोड़ रुपए आंकी गई है। इसके अलावा रत्नजड़ित मुकुट की कीमत करीब 25 करोड़ रुपए बताई जाती है। भगवान के श्रृंगार में शामिल सोने के मुकुट की कीमत भी करीब 1.25 करोड़ रुपए बताई गई है। अलग अलग आभूषणों में जड़े कीमती रत्न इस पूरे श्रृंगार को और भव्य बना देते हैं।

    जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर की सजावट भी खास अंदाज में की जाएगी। गोपाल मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी से सजाने के साथ फूल बंगला और रंगोली तैयार की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए परिसर में एलईडी स्क्रीन भी लगाई जाएंगी। इन स्क्रीन के जरिए भगवान के दर्शन का लाइव प्रसारण किया जाएगा ताकि भीड़ के कारण सभी श्रद्धालुओं को गर्भगृह तक पहुंचने में परेशानी न हो।

    श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। मंदिर में पुलिसकर्मियों की तैनाती रहेगी और सीसीटीवी कैमरों से पूरे परिसर पर नजर रखी जाएगी। श्रद्धालुओं के आने और जाने के लिए अलग अलग व्यवस्था रखने की तैयारी है ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और दर्शन व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

    गोपाल मंदिर का इतिहास भी बेहद खास है। इस मंदिर का निर्माण सिंधिया राजवंश की महारानी बैजाबाई ने वर्ष 1843 में कराया था। सफेद संगमरमर से बने इस मंदिर की वास्तुकला में मराठा शैली के साथ यूरोपीय प्रभाव भी नजर आता है। मंदिर के गर्भगृह में चांदी से मढ़े दरवाजे इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं।

    जन्माष्टमी पर जब इन दुर्लभ आभूषणों से राधा-कृष्ण का श्रृंगार होगा तो गोपाल मंदिर में राजसी परंपरा और धार्मिक आस्था का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। यही वजह है कि इस विशेष दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह है।

  • NHAI सड़क की खुलेगी पोल! हाईकोर्ट के निर्देश पर JCB से लिए गए सैंपलों की होगी जांच

    NHAI सड़क की खुलेगी पोल! हाईकोर्ट के निर्देश पर JCB से लिए गए सैंपलों की होगी जांच


    ग्वालियर । ग्वालियर में लगातार खराब हो रही सड़कों को लेकर उठ रहे सवाल अब नेशनल हाईवे तक पहुंच गए हैं। शहर में एक साल के भीतर 12 से ज्यादा सड़कें धंसने और कई मार्गों की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम ने आगरा मुंबई हाईवे के एक हिस्से की गहन जांच शुरू की। गुरुवार को टीम की मौजूदगी में मेहरा टोल प्लाजा और सिकरौदा चौराहे के बीच सड़क को जेसीबी की मदद से खुदवाया गया। सड़क की ऊपरी सतह हटाने के बाद अलग अलग परतों से डामर गिट्टी और बेस मटेरियल के नमूने लिए गए हैं।

    इन नमूनों को अब प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि सड़क निर्माण में निर्धारित मानकों के मुताबिक सामग्री का इस्तेमाल हुआ था या नहीं। इसके साथ ही डामर की मात्रा गिट्टी की गुणवत्ता सड़क की अलग अलग परतों की मजबूती और कॉम्पैक्शन जैसे तकनीकी पहलुओं की भी जांच की जाएगी। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क निर्माण में कहीं गुणवत्ता से समझौता तो नहीं किया गया।

    हाईकोर्ट के निर्देश पर नेशनल हाईवे की सड़क को मौके पर खुदवाकर उसकी वास्तविक स्थिति जांचने की यह कार्रवाई इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे सरकारी दस्तावेजों में दर्ज तकनीकी जानकारी का जमीन पर हुए निर्माण से मिलान किया जा सकेगा। जांच टीम की निगरानी में सड़क की परतें हटाई गईं और जरूरी स्थानों से सैंपल लिए गए। इससे केवल कागजी रिकॉर्ड के आधार पर गुणवत्ता का आकलन करने के बजाय वास्तविक निर्माण की स्थिति सामने आने की उम्मीद है।

    मामला शहर की खराब सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। वरिष्ठ अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर ने सड़कों के बार बार धंसने गड्ढों और निर्माण गुणवत्ता को लेकर याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विभागीय रिपोर्टों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय स्वतंत्र जांच कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद वकीलों और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करते हुए चार सदस्यीय विशेष टीम बनाई गई।

    यह टीम इससे पहले ग्वालियर की कई प्रमुख सड़कों का निरीक्षण कर चुकी है। विक्की फैक्ट्री से झांसी रोड चेतकपुरी से सिंधिया महल गेट और चेतकपुरी से एजी ऑफिस पुल मार्ग समेत कई हिस्सों में सड़क की स्थिति डामर की मोटाई और क्षति का परीक्षण किया गया। 19 अगस्त को गुढ़ी गुढ़ा का नाका और बेटी बचाओ चौराहे के आसपास से भी कोर सैंपल लिए गए थे।

    जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सैंपलिंग की लोकेशन पहले से सार्वजनिक नहीं की जा रही है। सड़क का चयन सैंपल लेने से कुछ समय पहले किया जाता है ताकि संबंधित निर्माण एजेंसी को पहले से तैयारी करने का अवसर न मिले। टीम इससे पहले लेजर कैमरों और आधुनिक उपकरणों की मदद से सड़कों की हाईटेक स्कैनिंग भी कर चुकी है। इससे सड़क की सतह समतलीकरण और डामर की स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया।

    अब नेशनल हाईवे से लिए गए सैंपलों की जांच पीडब्ल्यूडी की केंद्रीय परीक्षण प्रयोगशाला ग्वालियर में की जाएगी। रिपोर्ट सामने आने के बाद हाईकोर्ट के समक्ष तथ्य रखे जाएंगे। इसके बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता और यदि कोई तकनीकी अनियमितता सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

  • देश में तेजी से हो रहा धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन का विकास : मोहन यादव

    देश में तेजी से हो रहा धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन का विकास : मोहन यादव

    भोपाल । मध्‍य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मप्र के उज्जैन और गुजरात की द्वारिका नगरी सहित देशभर में लगातार धार्मिक पर्यटन आध्यात्मिक पर्यटन का विकास हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हमारी सरकार भारतीय संस्कृति के गौरवशाली अतीत को पुन: स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को सपत्नीक गुजरात की देवभूमि द्वारका के पावन द्वारकाधीश मंदिर पहुंचकर सपत्नीक भगवान श्री द्वारकाधीश के अलौकिक रूप का दर्शन एवं विधि-विधान से पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान श्री द्वारकाधीश के दर्शन-पूजन के बाद मंदिर परिसर के बाहर स्थानीय मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा की। उन्‍होंने भगवान द्वारकाधीश से सभी प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को मनाई जाने वाली जन्माष्टमी से पहले देश-प्रदेशवासियों को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म पर्व की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं भी दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ उनकी धर्मपत्नी सीमा यादव एवं अन्य परिजनों सहित सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय के डॉ. इलैया राजा टी. भी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में श्री महाकाल लोक के निर्माण के बाद श्रद्धालुओं की संख्या 20 गुना बढ़ गई है। वर्तमान में लगभग 10 करोड़ से अधिक तीर्थ यात्री उज्जैन आ रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी के कर कमलों से उज्जैन में बाबा महाकाल लोक के लोकार्पण के बाद बनारस में भी काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरीडोर का निर्माण हुआ, जिससे बाबा विश्वनाथ की नगरी में धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयां मिली हैं।

    जन्माष्टमी से पहले भगवान श्री द्वारकाधीश के दर्शन का मिला सौभाग्य
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि द्वारकाधीश मंदिर आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित सनातन संस्कृति के चार धामों में से एक प्रमुख तीर्थ है। जन्माष्टमी से ठीक पहले भगवान श्री द्वारकाधीश के भव्य दर्शन का अवसर मिलना हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कुछ समय पहले ही वे सोमनाथ धाम गये थे। इसके बाद आज द्वारका के प्रसिद्ध श्री द्वारकाधीश मंदिर में विधिवत् दर्शन-पूजन-अर्चन कर यहां की सभी व्यवस्थाओं का जायजा लिया है। हम भी अपने देवस्थानों में बेहतर से बेहतर प्रबंधन की सभी व्यवस्थाएं कर रहे हैं।

    म.प्र. में श्रद्धालुओं के लिए विकसित की जा रहीं सुगम व्यवस्थाएं
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया प्रतिनिधियों से कहा कि मध्यप्रदेश सरकार लगातार धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन के विस्तार के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। प्रदेश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों एवं देवस्थानों पर सहज एवं सुगम आवागमन, श्रद्धालुओं के ठहरने, उनकी सुरक्षा और पर्यटकों की वृद्धि को देखते हुए वहां सभी जरूरी अधोसंरचनाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है।

  • बरगी बांध 93% भरा, 5 गेट एक मीटर तक खोले गए, नर्मदा का जलस्तर बढ़ने के आसार

    बरगी बांध 93% भरा, 5 गेट एक मीटर तक खोले गए, नर्मदा का जलस्तर बढ़ने के आसार

    जबलपुर। मंडला, डिंडौरी और अमरकंटक क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश का असर बरगी बांध के जलस्तर पर दिखाई दे रहा है। जबलपुर जिले में औसत से कम बारिश के बावजूद बांध में पानी की आवक लगातार बनी हुई है। बुधवार को बरगी बांध का जलस्तर 421.85 मीटर और जलभराव 93.33 प्रतिशत पहुंच गया। पानी की लगातार आवक को देखते हुए गुरुवार सुबह 11 बजे बांध के पांच गेट करीब एक-एक मीटर तक खोले गए। इनसे करीब 760 क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा है।

    गेट खोले जाने से पहले बरगी बांध प्रबंधन और जिला प्रशासन ने नर्मदा नदी के घाटों और आसपास के निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया है। प्रबंधन के मुताबिक पानी छोड़े जाने के बाद नर्मदा के घाटों पर जलस्तर करीब 3 से 4 फीट तक बढ़ सकता है। लोगों से नदी और घाटों के आसपास सावधानी बरतने की अपील की गई है।

    बांध में 707 क्यूमेक पानी की आवक
    बरगी बांध प्रबंधन के अनुसार 2 सितंबर की सुबह 8 बजे बांध में 707 क्यूमेक पानी की आवक दर्ज की गई थी। बारिश, मौसम के पूर्वानुमान और आगामी दिनों में संभावित जल आवक को देखते हुए पांच जलद्वार करीब एक मीटर तक खोले गए हैं। फिलहाल बांध से करीब 760 क्यूमेक पानी की निकासी की जा रही है।

    आवक के हिसाब से बदलेगी पानी छोड़ने की मात्रा
    प्रबंधन का कहना है कि बांध में वास्तविक जल आवक और जलस्तर की स्थिति के आधार पर पानी की निकासी की मात्रा में बदलाव किया जा सकता है। लगातार पानी की आवक बनी रहने पर आने वाले दिनों में गेटों से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा बढ़ाई या घटाई जा सकती है।

    प्रशासन और बांध प्रबंधन ने नर्मदा के घाटों तथा निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेष रूप से नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लोगों से घाटों के आसपास जाने से बचने की अपील की गई है।

  • पोस्टमार्टम हाउस भी चोरों से नहीं बचा: शिवपुरी में कंप्रेसर और कॉपर केबल चोरी, पुलिस से शिकायत

    पोस्टमार्टम हाउस भी चोरों से नहीं बचा: शिवपुरी में कंप्रेसर और कॉपर केबल चोरी, पुलिस से शिकायत


    शिवपुरी ।
    शिवपुरी जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में चोरी की एक गंभीर घटना सामने आई है। अज्ञात चोरों ने उस जगह को निशाना बनाया जहां शवों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। चोर दो शव रखने वाले फ्रीजरों से कंप्रेसर, कॉपर पाइप और कॉपर केबल निकालकर ले गए। इसके साथ ही स्टेबलाइजर से जुड़ा सामान भी चोरी होने की जानकारी सामने है। घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया और पोस्टमार्टम हाउस की महत्वपूर्ण व्यवस्था प्रभावित होने से चिंता बढ़ गई है।

    अस्पताल प्रबंधन के अनुसार पोस्टमार्टम हाउस में रखे दोनों फ्रीजरों को चोरों ने निशाना बनाया। फ्रीजरों में लगे कंप्रेसर और कॉपर से जुड़े जरूरी उपकरण गायब मिले। चोरी की वजह से शवों को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल होने वाली फ्रीजर व्यवस्था प्रभावित हुई है। जब इस घटना की जानकारी अस्पताल के अधिकारियों तक पहुंची तो मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू कराई गई।

    पोस्टमार्टम हाउस में मौजूद नोडल अधिकारी और को नोडल अधिकारी ने चोरी की घटना की जानकारी अस्पताल प्रबंधन को दी। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस तक पहुंचाई गई। सिविल सर्जन एवं मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. रामप्रताप सिंह चौहान ने सिटी कोतवाली पुलिस को पत्र लिखकर अज्ञात चोरों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। अस्पताल प्रबंधन ने चोरी हुए सामान और फ्रीजरों को हुए नुकसान की जानकारी भी पुलिस को उपलब्ध कराई है।

    मामले में फरियादी आयुष खरे के आवेदन और अस्पताल प्रबंधन की शिकायत के आधार पर सिटी कोतवाली पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 305 ए के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आयुष खरे पोस्टमार्टम हाउस के पास शिवपुरी के रहने वाले बताए गए हैं। पुलिस अब चोरी की पूरी घटना की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि चोर पोस्टमार्टम हाउस तक कैसे पहुंचे और उन्होंने कब इस वारदात को अंजाम दिया।

    पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती आरोपियों की पहचान करना है। इसके लिए पोस्टमार्टम हाउस और जिला अस्पताल परिसर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा सकती है। साथ ही चोरी हुए कॉपर पाइप, कॉपर केबल और अन्य सामान की बरामदगी के लिए भी प्रयास किए जाएंगे। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चोरी की घटना में एक व्यक्ति शामिल था या फिर किसी गिरोह ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया।

    पोस्टमार्टम हाउस जैसी संवेदनशील जगह पर चोरी की घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शवों को सुरक्षित रखने वाले फ्रीजरों से जरूरी उपकरण चोरी होने के कारण अस्पताल की व्यवस्था प्रभावित हुई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • NH-46 पर एक रात में 7 गौवंश की मौत तेज रफ्तार ट्रकों ने 9 को कुचला

    NH-46 पर एक रात में 7 गौवंश की मौत तेज रफ्तार ट्रकों ने 9 को कुचला


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के बदरवास थाना क्षेत्र से होकर गुजरने वाला NH-46 बुधवार रात गौवंश के लिए बेहद दर्दनाक साबित हुआ। हाईवे पर अलग-अलग स्थानों पर हुए दो सड़क हादसों में तेज रफ्तार ट्रकों की चपेट में आने से कुल 9 गौवंश हादसे का शिकार हो गए। इनमें से 7 गौवंश की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दो घायल बताए जा रहे हैं। लगातार हुए इन हादसों के बाद इलाके में गौवंश की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    पहला हादसा सुमेला बायपास के ओवरब्रिज पर हुआ। बताया जा रहा है कि यहां सड़क किनारे चार गौवंश मौजूद थे। इसी दौरान शिवपुरी से गुना की ओर जा रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि तीन गौवंश ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। एक गौवंश गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद हाईवे पर कुछ समय के लिए अफरा तफरी का माहौल बन गया।

    घटना की जानकारी मिलते ही सनातनी गो सेवा समिति की टीम मौके पर पहुंची। टीम के सदस्यों ने घायल गौवंश को संभाला और उसका उपचार कराया। साथ ही सड़क पर पड़े मृत गौवंश को हटाकर सुरक्षित स्थान पर किया गया ताकि हाईवे पर आने जाने वाले दूसरे वाहनों के लिए खतरा न बना रहे।

    इसी रात दूसरा हादसा ईश्वरी ओवरब्रिज पर हुआ। यहां गुना से शिवपुरी की ओर जा रहे एक ट्रक ने सड़क पर मौजूद पांच गौवंश को अपनी चपेट में ले लिया। इस दुर्घटना में चार गौवंश की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक घायल हो गया। एक ही रात में कुछ ही दूरी के अंतर पर हुए दोनों हादसों ने हाईवे पर गौवंश की मौजूदगी और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    ईश्वरी ओवरब्रिज पर हादसे की सूचना मिलने के बाद भी सनातनी गो सेवा समिति की टीम घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने घायल गौवंश को इलाज उपलब्ध कराया और मृत गौवंश को सड़क से हटाकर किनारे किया। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के बीच सबसे बड़ी चिंता यह है कि हाईवे पर आवारा या खुले में घूमने वाले गौवंश रात के समय तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आ जाते हैं।

    NH-46 जैसे व्यस्त हाईवे पर वाहनों की रफ्तार काफी अधिक रहती है। ऐसे में सड़क पर अचानक गौवंश आ जाने से चालक के लिए वाहन नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। इससे न केवल गौवंश की जान को खतरा रहता है बल्कि वाहन सवार लोगों के लिए भी गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

    बुधवार रात हुए दोनों हादसों में कुल 9 गौवंश की चपेट में आने की जानकारी सामने आई है। इनमें 7 की मौत हो चुकी है जबकि दो घायल हैं। घटना के बाद गो सेवा समिति की सक्रियता से घायल पशुओं को समय पर उपचार मिल सका। हालांकि एक ही रात में सात गौवंश की मौत ने हाईवे पर पशुओं की सुरक्षा के इंतजामों और तेज रफ्तार वाहनों की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे हादसों को रोकने के लिए हाईवे के संवेदनशील हिस्सों पर विशेष निगरानी और पशुओं को सड़क से दूर रखने के इंतजाम जरूरी माने जा रहे हैं।

  • भोपाल वालों के लिए मौसम का बड़ा अपडेट! 3 सितंबर को मध्यम बारिश के साथ गरज चमक के आसार

    भोपाल वालों के लिए मौसम का बड़ा अपडेट! 3 सितंबर को मध्यम बारिश के साथ गरज चमक के आसार


    भोपाल । भोपाल में सितंबर की शुरुआत के साथ मौसम का मिजाज लगातार बदला हुआ नजर आ रहा है। बारिश और बादलों का दौर शहर में अभी पूरी तरह थमता दिखाई नहीं दे रहा है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 3 सितंबर को राजधानी भोपाल में आसमान सामान्य तौर पर बादलों से घिरा रहेगा और मध्यम बारिश होने की संभावना है। दिन का अधिकतम तापमान करीब 27 डिग्री सेल्सियस जबकि न्यूनतम तापमान करीब 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। ऐसे में शहरवासियों को गर्मी से राहत मिलने के साथ दिनभर मौसम ठंडा और नम बना रह सकता है।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 3 सितंबर को भोपाल में बारिश के साथ गरज चमक भी देखने को मिल सकती है। इसका असर शहर के अलग अलग इलाकों में अलग तरीके से दिखाई दे सकता है। कहीं हल्की बारिश हो सकती है तो कुछ स्थानों पर मध्यम बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं। सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है और दिन बढ़ने के साथ बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं। ऐसे में खुले आसमान के नीचे काम करने वाले लोगों और दोपहिया वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

    3 सितंबर को तापमान में भी बहुत ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने से सुबह और रात के समय मौसम अपेक्षाकृत ठंडा महसूस हो सकता है। वहीं अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने से दोपहर में भी तेज गर्मी का असर कम रहने की उम्मीद है। लगातार बादल और बारिश के कारण वातावरण में नमी बनी रह सकती है जिससे उमस का अनुभव कुछ समय के लिए बढ़ सकता है।

    बारिश के दौरान शहर की सड़कों पर जलभराव की स्थिति भी कुछ इलाकों में परेशानी बढ़ा सकती है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होगी। बारिश के समय विजिबिलिटी कम होने के कारण वाहन चालकों को गति नियंत्रित रखने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है। बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान या पेड़ के नीचे खड़े होने से भी बचना चाहिए।

    मौसम का यह बदलाव शहर के लिए कई मायनों में राहत देने वाला भी है। बारिश से तापमान नियंत्रित रहने के साथ वातावरण में गर्मी का असर कम हो सकता है। हालांकि लगातार बारिश के कारण कुछ स्थानों पर सड़क यातायात प्रभावित होने और जलभराव जैसी स्थानीय समस्याएं सामने आ सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार 4 सितंबर को भी भोपाल में बादल और मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है। इसके बाद मौसम में कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है।

    कुल मिलाकर 3 सितंबर को भोपाल में मौसम बारिश वाला रहने के आसार हैं। आसमान में बादल छाए रहेंगे और मध्यम बारिश के साथ गरज चमक देखने को मिल सकती है। तापमान सामान्य से नीचे रहने के कारण राजधानी में मौसम अपेक्षाकृत ठंडा बना रह सकता है। ऐसे में बाहर निकलने वाले लोग छाता या रेनकोट साथ रखें और मौसम की ताजा जानकारी पर नजर बनाए रखें।

  • ग्राम रोजगार सहायकों के अनुबंध में बड़ा बदलाव: अब खुद ही सचिव बनकर खुद से नहीं कर सकेंगे एग्रीमेंट, APO संभालेगा जिम्मेदारी

    ग्राम रोजगार सहायकों के अनुबंध में बड़ा बदलाव: अब खुद ही सचिव बनकर खुद से नहीं कर सकेंगे एग्रीमेंट, APO संभालेगा जिम्मेदारी


    भोपाल । मध्य प्रदेश की ग्राम पंचायतों में कार्यरत हजारों ग्राम रोजगार सहायकों के संविदा अनुबंध को लेकर व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। प्रदेश की 23 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में काम कर रहे ग्राम रोजगार सहायकों के एग्रीमेंट की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रशासनिक रूप से व्यवस्थित बनाने के लिए मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद ने नए निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब ऐसी ग्राम पंचायतों में जहां पंचायत सचिव का पद रिक्त है या सचिव पदस्थ नहीं है अथवा ग्राम रोजगार सहायक को ही सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है वहां ग्राम रोजगार सहायक अपना संविदा अनुबंध स्वयं के साथ नहीं कर सकेगा। ऐसी स्थिति में एग्रीमेंट की जिम्मेदारी जनपद पंचायत स्तर पर पदस्थ अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी APO मनरेगा को सौंपी जाएगी।

    दरअसल सामान्य परिस्थितियों में ग्राम रोजगार सहायक का संविदा अनुबंध पंचायत सचिव और ग्राम रोजगार सहायक के बीच किया जाता है। लेकिन प्रदेश की कई ग्राम पंचायतों में पंचायत सचिव के पद रिक्त हैं। कुछ स्थानों पर सचिव उपलब्ध नहीं हैं जबकि कई पंचायतों में ग्राम रोजगार सहायक को ही पंचायत सचिव का प्रभार सौंप दिया गया है। ऐसी स्थिति में एक प्रशासनिक और कानूनी विसंगति सामने आ रही थी क्योंकि जिस कर्मचारी को सचिव का प्रभार मिला हुआ था उसी को ग्राम रोजगार सहायक के रूप में अपना संविदा अनुबंध भी करना पड़ रहा था। यानी एक तरह से कर्मचारी खुद ही एक पद की जिम्मेदारी निभाते हुए स्वयं के साथ अनुबंध की प्रक्रिया पूरी कर रहा था।

    इस तरह की शिकायतें और प्रशासनिक विसंगतियां परिषद के संज्ञान में आने के बाद अब व्यवस्था को बदलने का निर्णय लिया गया है। मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद ने स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी द्वारा स्वयं के साथ संविदा अनुबंध करना प्रशासनिक और विधिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। इसी कारण अब ऐसी परिस्थितियों के लिए अलग व्यवस्था तय की गई है ताकि अनुबंध की प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे और भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

    परिषद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा 1 सितंबर को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। सभी जिलों के कलेक्टरों जिला कार्यक्रम समन्वयकों और संबंधित मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को नए प्रावधान का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के लिए कहा गया है। सचिव उपलब्ध होने की स्थिति में ग्राम रोजगार सहायक का अनुबंध पहले की तरह पंचायत सचिव के साथ ही किया जाएगा। लेकिन जहां सचिव का पद रिक्त है या पंचायत में सचिव पदस्थ नहीं है अथवा ग्राम रोजगार सहायक ही सचिव का प्रभार संभाल रहा है वहां संविदा अनुबंध जनपद पंचायत के अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी APO मनरेगा द्वारा किया जाएगा।

    यदि किसी जनपद पंचायत में APO का पद भी रिक्त है तो वहां प्रभारी अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी को एग्रीमेंट की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। नई व्यवस्था से सचिव विहीन पंचायतों में ग्राम रोजगार सहायकों के नए संविदा अनुबंध और उनके नवीनीकरण की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और सुचारु होने की उम्मीद है। साथ ही सबसे बड़ी बात यह है कि खुद के साथ एग्रीमेंट करने जैसी विवादित स्थिति पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। परिषद के इस फैसले को पंचायत स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और संविदा प्रक्रिया को कानूनी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

  • मध्य प्रदेश की राजनीति में अजब रंग फायरिंग वाला स्वागत मंत्री का अनोखा इशारा और गड्ढों में विकास देखने वाला बयान हुआ वायरल

    मध्य प्रदेश की राजनीति में अजब रंग फायरिंग वाला स्वागत मंत्री का अनोखा इशारा और गड्ढों में विकास देखने वाला बयान हुआ वायरल


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति इन दिनों सिर्फ बड़े फैसलों और चुनावी रणनीतियों को लेकर ही नहीं बल्कि नेताओं के बयानों और उनके आसपास घटने वाले रोचक घटनाक्रमों को लेकर भी चर्चा में है। कहीं एक वरिष्ठ नेता के स्वागत में हवाई फायरिंग कर दी गई तो कहीं मंत्री के हाथ के इशारे ने लोगों को चुटकी लेने का मौका दे दिया। दूसरी ओर गड्ढों से भरी सड़कों को लेकर मंत्री का ऐसा बयान सामने आया जिसने सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी। इन सब घटनाओं ने यह साबित कर दिया कि राजनीति में कभी कभी एक छोटा सा दृश्य भी बड़ी चर्चा का विषय बन जाता है।

    बुरहानपुर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के साथ कुछ ऐसा हुआ जिसने वहां मौजूद लोगों को भी चौंका दिया। अजय सिंह कांग्रेस नेता अजय रघुवंशी के घर पहुंचे थे और उनके स्वागत की तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान अचानक हवाई फायरिंग की गई। माला पहनाने के समय हुई गोली की आवाज से अजय सिंह कुछ देर के लिए सहम गए। बताया गया कि उन्होंने फायरिंग करने वाले व्यक्ति से ऐसा न करने की बात भी कही। इसके बाद जब दोबारा फायरिंग हुई तो वह फिर चौंक गए। अब इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तरह तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि स्वागत के नाम पर इस तरह की गतिविधियां कितनी उचित हैं।

    उधर जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट का एक वीडियो भी चर्चा का विषय बन गया। केन बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापितों से बातचीत के दौरान मंत्री ने एक ग्रामीण से मुख्यमंत्री का नाम पूछा। जब ग्रामीण स्पष्ट जवाब नहीं दे सका तो मंत्री ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का नाम बताया और फिर अपना परिचय भी दिया। उन्होंने खुद को इंदौर से आया बताते हुए अपने विभाग के बारे में जानकारी दी और कहा कि वह जल से जुड़ा विभाग संभालते हैं। लेकिन इस दौरान उनके हाथ के हाव भाव और इशारे को लेकर लोगों ने सोशल मीडिया पर टिप्पणियां शुरू कर दीं। वीडियो के सामने आने के बाद मंत्री का यह अंदाज चर्चा में आ गया।

    दमोह जिले के पथरिया में आनंद विभाग के मंत्री लखन पटेल ने सड़कों के गड्ढों को लेकर ऐसा बयान दिया जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि आज के लोगों को सड़कों के गड्ढे दिखाई देते हैं लेकिन पुराने समय में कई जगह सड़कें ही नहीं थीं। मंत्री ने लोगों को अपने बुजुर्गों से पूछने की सलाह देते हुए कहा कि पहले सड़कें देखना भी बड़ी बात थी। उनके इस बयान पर लोग अलग अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ इसे पुराने और नए दौर के विकास की तुलना बता रहे हैं तो कुछ लोग इसे खराब सड़कों की समस्या से ध्यान हटाने वाला बयान मान रहे हैं।

    इसी बीच खंडवा में एक प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान भाजपा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल का फोन कॉल भी चर्चा में रहा। प्रशासन की टीम एक शराब दुकान के अहाते पर कार्रवाई कर रही थी तभी अधिकारी के पास सांसद का फोन आया। बताया गया कि कार्रवाई रुकवाने को लेकर बातचीत हुई लेकिन अधिकारी ने आदेश का हवाला देते हुए कार्रवाई जारी रखने की बात कही और सांसद को कलेक्टर से संपर्क करने का सुझाव दिया।

    इन घटनाओं ने मध्य प्रदेश की राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। नेताओं के बयान हों या सार्वजनिक कार्यक्रमों में होने वाली घटनाएं हर मामला अब तेजी से सोशल मीडिया तक पहुंच रहा है और जनता भी उस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रही है।

  • अगले चार दिन MP में भारी बारिश का खतरा! रेड-ऑरेंज अलर्ट के बीच नदियां उफान पर, डैमों में बढ़ा पानी

    अगले चार दिन MP में भारी बारिश का खतरा! रेड-ऑरेंज अलर्ट के बीच नदियां उफान पर, डैमों में बढ़ा पानी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मानसून का असर एक बार फिर तेज हो गया है और लगातार हो रही बारिश ने कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित करना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग ने प्रदेश के कई हिस्सों के लिए भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। नर्मदापुरम और छिंदवाड़ा में अति भारी बारिश की संभावना को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया गया है जबकि छतरपुर सागर रायसेन नरसिंहपुर सिवनी और बैतूल समेत कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। इन इलाकों में 24 घंटे के दौरान भारी मात्रा में बारिश होने की आशंका जताई गई है।

    लगातार हो रही बारिश के कारण कई जिलों में नदी नाले उफान पर हैं और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन रही है। छतरपुर जिले में संभावित बाढ़ और लगातार बारिश को देखते हुए प्रशासन ने विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। हालांकि शिक्षकों को विभागीय और शैक्षणिक कार्यों के लिए स्कूल पहुंचना होगा। प्रशासन की ओर से लोगों को नदी नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील भी की जा रही है।

    बारिश के बीच डबरा में एक दर्दनाक हादसा भी सामने आया है। जंगीपुरा इलाके में तेज बारिश के दौरान दो मंजिला कच्चे मकान की छत ढह गई। हादसे के समय परिवार के कई सदस्य घर के अंदर मौजूद थे और मलबे में दब गए। इस दुर्घटना में एक महिला और उसके दो वर्षीय बेटे की मौत हो गई जबकि परिवार के अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना ने बारिश के दौरान जर्जर और कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

    मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में बारिश का यह सिस्टम प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में आगे बढ़ेगा। 4 सितंबर से भोपाल उज्जैन ग्वालियर सागर नर्मदापुरम और चंबल संभाग में इसका असर अधिक दिखाई दे सकता है। कई स्थानों पर भारी बारिश की स्थिति बन सकती है। इसके बाद 5 और 6 सितंबर को प्रदेश के उत्तरी हिस्सों तथा ग्वालियर चंबल संभाग में तेज बारिश की संभावना बनी हुई है।

    लगातार बारिश का असर प्रदेश के बांधों और जलाशयों पर भी दिखाई दे रहा है। अधिकांश बांधों में जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और कुछ बांधों के गेट खोलने की तैयारी की जा रही है। भोपाल के बड़े तालाब का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा है और इसके लगभग भरने की स्थिति बन रही है। ऐसे में प्रशासन निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहा है।

    प्रदेश में अब तक मानसून के दौरान अच्छी बारिश दर्ज की गई है लेकिन कई जिलों में अब भी औसत से कम पानी गिरा है। पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है जबकि कुछ जिलों में औसत से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। मौसम के अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि सक्रिय मानसूनी सिस्टम प्रदेश के बड़े हिस्से को प्रभावित कर सकता है।

    लगातार बारिश के कारण प्रशासन की चुनौती भी बढ़ गई है। नदियों के किनारे रहने वाले लोगों जर्जर मकानों में रहने वाले परिवारों और जलभराव वाले इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है। लोगों को सलाह दी गई है कि तेज बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और नदी नालों या पुल पुलियों को पार करने का जोखिम न उठाएं। अगले चार दिन मध्य प्रदेश के लिए बारिश और सतर्कता दोनों के लिहाज से बेहद अहम रहने वाले हैं।