Category: Madhya Pradesh

  • महाकाल मंदिर में अलौकिक भस्म आरती रजत मुकुट त्रिशूल डमरू और रुद्राक्ष माला से निखरा बाबा का श्रृंगार

    महाकाल मंदिर में अलौकिक भस्म आरती रजत मुकुट त्रिशूल डमरू और रुद्राक्ष माला से निखरा बाबा का श्रृंगार


    मध्यप्रदेश । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल के दिव्य और अलौकिक दर्शन हुए। प्रातः चार बजे मंदिर के पट खुलते ही वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद गर्भगृह में विराजित सभी देवी देवताओं का विधि विधान से पूजन संपन्न हुआ। पंडे पुजारियों ने भगवान महाकाल का दूध दही घी शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया। प्रथम घंटा बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया और पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बन गया।

    अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का भव्य राजा स्वरूप श्रृंगार किया गया। उन्हें रजत ॐ बिल्वपत्र युक्त मुकुट धारण कराया गया। रुद्राक्ष की माला रजत मुंडमाल और सुगंधित पुष्पमालाओं से बाबा का दिव्य श्रृंगार किया गया। मस्तक पर त्रिपुंड अंकित किया गया तथा त्रिशूल डमरू और शेषनाग से अलंकृत रजत मुकुट से उनका स्वरूप और भी आकर्षक दिखाई दिया।

    पूजन के दौरान भगवान गणेश माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय की भी विधिवत आराधना की गई। इसके बाद भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का नैवेद्य अर्पित किया गया। कपूर आरती के पश्चात महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी मान्यता के चलते देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।

    भस्म आरती के दौरान पूरा मंदिर महाकाल के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर सुख समृद्धि और मंगल की कामना की। हर दिन की तरह शनिवार की भस्म आरती भी अत्यंत श्रद्धा आस्था और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप संपन्न हुई जिसने भक्तों को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।

  • उज्जैन से दिग्विजय सिंह का केंद्र और राम मंदिर ट्रस्ट पर तीखा प्रहार बोले चंपत राय पर हो केस दर्ज

    उज्जैन से दिग्विजय सिंह का केंद्र और राम मंदिर ट्रस्ट पर तीखा प्रहार बोले चंपत राय पर हो केस दर्ज


    मध्यप्रदेश । उज्जैन दौरे पर पहुंचे मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर में कथित दान चोरी के मामले को लेकर केंद्र सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट पर तीखा हमला बोला। उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की। दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से किया गया था इसलिए ट्रस्ट की जवाबदेही भी केंद्र सरकार की बनती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर में चांदी की ईंटों जेवरात नकदी और विदेशी चंदे के प्रबंधन में गड़बड़ियां हुई हैं जिनकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

    उज्जैन के सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इन संगठनों का धर्म और धार्मिक कार्यों से कोई सरोकार नहीं है बल्कि उनका उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना है। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर के नाम पर सनातन समाज की भावनाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने चंपत राय को संघ का प्रचारक बताते हुए कहा कि उन्हें धार्मिक परंपराओं से कोई संबंध नहीं है और उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

    दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि धार्मिक परंपराओं का पालन नहीं किया गया और पूजा की प्रक्रिया शास्त्रीय नियमों के अनुरूप नहीं थी। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले में ट्रस्ट के सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों की भूमिका की जांच कराई जाए और आवश्यक होने पर उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाए।

    उन्होंने ऐलान किया कि कांग्रेस इस मुद्दे को केवल प्रेस वार्ताओं तक सीमित नहीं रखेगी बल्कि गांव गांव और घर घर तक पहुंचाएगी। उन्होंने बताया कि उज्जैन जिले की 609 पंचायतों में कांग्रेस ने दल और मंडल स्तर पर समितियां गठित की हैं जो लोगों के बीच जाकर राम मंदिर दान चोरी के मामले की जानकारी देंगी और पूरे घटनाक्रम को जनता के सामने रखेंगी।

    प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने महाकाल मंदिर की व्यवस्थाओं और मंदिर की जमीन को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि महाकाल मंदिर की जमीन आरएसएस से जुड़ी संस्थाओं को दी गई और वहां गेस्ट हाउस बनाए गए जबकि साधु संतों की उपेक्षा की गई। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान व्यवस्था में आम श्रद्धालुओं और संत समाज को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    इंदौर उज्जैन मेट्रोपॉलिटन रीजन के नामकरण को लेकर चल रहे विवाद पर भी उन्होंने अपनी राय रखी। उनका कहना था कि इस क्षेत्र के नाम में इंदौर का नाम पहले होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को सलाह देते हुए कहा कि प्रशासनिक स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों की जिम्मेदारी आखिरकार सरकार पर ही आती है इसलिए अधिकारियों पर प्रभावी नियंत्रण रखना जरूरी है।

    प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने कुछ दस्तावेज भी दिखाए और दावा किया कि उनके पास जमीन घोटाले से जुड़े नए साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों की पूरी जांच के बाद संबंधित लोगों के नाम सार्वजनिक किए जाएंगे और पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।

  • सिंहस्थ-2028 होगा दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन, सीएम मोहन यादव ने दिए व्यापक तैयारियों के निर्देश

    सिंहस्थ-2028 होगा दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन, सीएम मोहन यादव ने दिए व्यापक तैयारियों के निर्देश

     
    मध्यप्रदेश । उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर आयोजित कार्यशाला में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आगामी महापर्व को विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन बताते हुए सभी विभागों को अभी से व्यापक तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ में लगभग 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। ऐसे में अधोसंरचना विकास से लेकर यातायात, आवास, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं तक हर व्यवस्था को समय रहते मजबूत करना होगा।

    मुख्यमंत्री शनिवार को एक दिवसीय दौरे पर उज्जैन पहुंचे जहां उन्होंने सिंहस्थ-2016 का संकल्प सिंहस्थ-2028 का संकल्प विषय पर आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में वर्ष 2016 के सिंहस्थ के दौरान जिम्मेदारी संभाल चुके अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए और आगामी आयोजन को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने के लिए सुझाव दिए। उज्जैन संभाग के आयुक्त आशीष सिंह ने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों और विकास कार्यों पर विस्तृत प्रस्तुति भी दी। कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले सिंहस्थ में सबसे बड़ी चुनौती यातायात और भीड़ प्रबंधन रही थी। कई स्थानों पर लंबा जाम लगने से श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा था। इस बार ऐसी स्थिति से बचने के लिए मध्य प्रदेश की सीमाओं से जुड़े राज्यों के साथ पहले से समन्वय स्थापित करना होगा ताकि विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के आवागमन को व्यवस्थित किया जा सके।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 की तुलना में अब उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में सड़क और रेल नेटवर्क काफी बेहतर हो चुका है। फतेहाबाद रेलवे ट्रैक शुरू हो चुका है और अधिकांश प्रमुख सड़कों का चौड़ीकरण भी पूरा हो गया है। इन सुविधाओं का बेहतर उपयोग करते हुए श्रद्धालुओं की आवाजाही को अधिक सुगम बनाया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ केवल क्षिप्रा नदी में स्नान तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि श्रद्धालु पूरे उज्जैन के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन भी करेंगे। इसे ध्यान में रखते हुए शहर के सभी प्रमुख मंदिरों के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का कार्य प्राथमिकता से किया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर धार्मिक अनुभव मिल सके।

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उज्जैन से लगभग 100 किलोमीटर के दायरे में स्थित ढाबों, होटलों और अन्य सुविधाओं का भी विस्तार किया जाए। उनका कहना था कि श्रद्धालुओं को पर्याप्त आवास, भोजन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकारी इंतजामों के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि सरकार का प्रयास रहेगा कि श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाओं के लिए निजी व्यवस्थाओं पर निर्भर न रहना पड़े।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सभी विभागों के समन्वित प्रयास और पड़ोसी राज्यों के सहयोग से सिंहस्थ-2028 को पहले से अधिक भव्य, सुव्यवस्थित और ऐतिहासिक बनाया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर सभी तैयारियां तय समय सीमा में पूरी करने का आह्वान किया।

  • मध्य प्रदेश में डीपफेक का कहर, उज्जैन की छात्रा और भोपाल की मां-बेटी बनीं AI साजिश का शिकार

    मध्य प्रदेश में डीपफेक का कहर, उज्जैन की छात्रा और भोपाल की मां-बेटी बनीं AI साजिश का शिकार


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग के दो चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं जिन्होंने साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को एक बार फिर उजागर कर दिया है। उज्जैन और भोपाल में सामने आई इन घटनाओं में लोगों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए एआई की मदद से अश्लील तस्वीरें और वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल किए गए। दोनों मामलों में पुलिस जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

    पहला मामला उज्जैन के पंवासा थाना क्षेत्र का है जहां एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही एक छात्रा को सुनियोजित साजिश का शिकार बनाया गया। छात्रा की तस्वीर को अश्लील वीडियो के साथ जोड़कर डीपफेक कंटेंट तैयार किया गया और उसे सोशल मीडिया तथा गांव के व्हाट्सएप ग्रुपों में वायरल कर दिया गया। इस घटना के बाद छात्रा के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जिसके आधार पर जांच शुरू हुई।

    पुलिस जांच में सामने आया कि इस पूरी साजिश के पीछे छात्रा का ही एक रिश्तेदार था जिसका उद्देश्य छात्रा के पिता को समाज में बदनाम करना था। जांच में यह भी पता चला कि छात्रा की तस्वीर सरकारी रिकॉर्ड से हासिल की गई थी। आरोप है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान जमा कराई गई फोटो एक महिला बीएलओ के माध्यम से आरोपियों तक पहुंची जिसके बाद उसी तस्वीर का इस्तेमाल कर डीपफेक वीडियो तैयार किया गया।

    इस मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों में से चार को गिरफ्तार कर लिया है जबकि एक आरोपी अब भी फरार है। महिला बीएलओ को अदालत से जमानत मिल चुकी है। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त कर लिए हैं। शुरुआती जांच में पारिवारिक और चुनावी रंजिश को इस घटना की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

    दूसरा मामला भोपाल के करोंद इलाके का है जहां शादी से इनकार करने पर एक युवती ने बदला लेने के उद्देश्य से युवक के परिवार को निशाना बनाया। आरोप है कि युवती ने एआई तकनीक की मदद से युवक की मां और 18 वर्षीय बहन की अश्लील तस्वीरें और वीडियो तैयार किए और फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर उन्हें वायरल कर दिया।

    पीड़ित परिवार का कहना है कि इस घटना के बाद उनकी बेटी मानसिक तनाव से गुजर रही है और पूरा परिवार सामाजिक बदनामी का सामना कर रहा है। परिवार ने पहले स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर पुलिस कमिश्नर कलेक्टर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। परिवार ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    इन दोनों घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक एआई और डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग किसी भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा सामाजिक जीवन और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। साइबर विशेषज्ञ लोगों को सलाह दे रहे हैं कि वे अपनी निजी तस्वीरें और व्यक्तिगत जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करते समय पूरी सावधानी बरतें। यदि किसी व्यक्ति को अपने नाम या तस्वीर का दुरुपयोग होने की जानकारी मिले तो बिना देर किए पुलिस और साइबर सेल में शिकायत दर्ज करानी चाहिए ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

  • इंदौर में जुए के विवाद ने लिया खूनी मोड़, बर्थडे पार्टी में युवक पर चाकू से हमला; पुलिस जांच में नए खुलासे

    इंदौर में जुए के विवाद ने लिया खूनी मोड़, बर्थडे पार्टी में युवक पर चाकू से हमला; पुलिस जांच में नए खुलासे


    इंदौर । इंदौर के भंवरकुआं थाना क्षेत्र में बर्थडे पार्टी के दौरान हुआ विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। शुरुआत में इसे शराब पार्टी में हुई कहासुनी और मारपीट का मामला माना जा रहा था लेकिन अब जांच में इसके तार जुए के अड्डे और लेनदेन से जुड़ते नजर आ रहे हैं। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और सामने आए नए तथ्यों के आधार पर मामले के विभिन्न पहलुओं को खंगाला जा रहा है।

    पुलिस के अनुसार शुभ संप्रदा कॉलोनी निवासी राहुल धामेलिया ने शिकायत दर्ज कराई है कि वह अपने भाई लखन धामेलिया के साथ सीएनजी पंप के पास चोइथराम मंडी क्षेत्र में अपने परिचित शानू और शुभम से मिलने गया था। वहां पहले से सज्जू सिधवानी गिरी महाराज और अन्य लोग मौजूद थे जो एक बर्थडे पार्टी मना रहे थे। पार्टी के दौरान शराब पीने के बाद माहौल बिगड़ गया और मामूली कहासुनी देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई।

    शिकायत के मुताबिक सज्जू सिधवानी ने पहले लखन के साथ गाली गलौज और अभद्रता की। विरोध करने पर उसने अपने साथियों को बुला लिया जिसके बाद सभी ने मिलकर राहुल और लखन के साथ मारपीट शुरू कर दी। इसी दौरान सज्जू ने चाकू निकालकर लखन के चेहरे और गले पर कई वार कर दिए जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। वहीं एक अन्य आरोपी ने राहुल के सिर पर कांच की बोतल मार दी जिससे उसे भी चोटें आईं। दोनों घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

    घटना के बाद मामले को दबाने की कोशिश भी सामने आई। जानकारी के अनुसार घायल लखन को पहले एमवाय अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने चोट का कारण पूछा तो परिजनों ने वाहन से गिरने की बात कही और पुलिस को सूचना देने से इनकार कर दिया। बाद में जब घटना की जानकारी बाहर आने लगी तो घायल को निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया गया।

    इस बीच पुलिस जांच में एक नया एंगल सामने आया है। सूत्रों के अनुसार हाल ही में क्राइम ब्रांच ने महालक्ष्मी नगर स्थित एक इमारत में संचालित जुए के अड्डे पर कार्रवाई की थी। जांच में यह बात भी सामने आई थी कि वहां पराग रघुवंशी शानू उर्फ कौआ और जीतू मिलकर जुए का संचालन करते थे। कार्रवाई के बाद कथित तौर पर भंवरकुआं क्षेत्र में नई बैठकों का सिलसिला शुरू हुआ था।

    पुलिस को आशंका है कि चाकूबाजी की यह घटना जुए के लेनदेन या उससे जुड़े विवाद का नतीजा हो सकती है। हालांकि फिलहाल दर्ज एफआईआर में इसे बर्थडे पार्टी के दौरान हुए विवाद के रूप में शामिल किया गया है। जांच में यह भी सामने आया है कि घायल लखन ताश पहुंचाने का काम करता था और घटना वाले दिन अपने भाई के साथ वहीं पहुंचा था।

    पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों और साक्ष्यों की बारीकी से जांच की जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में जुए के लेनदेन या अन्य आपराधिक गतिविधियों की पुष्टि होती है तो संबंधित धाराओं में भी कार्रवाई की जा सकती है।

  • खजराना में खूनी विवाद, मीडियाकर्मी ने ठेकेदार को चाकू से गोदा; गिरफ्तारी के बाद सड़कों पर घुमाया आरोपी

    खजराना में खूनी विवाद, मीडियाकर्मी ने ठेकेदार को चाकू से गोदा; गिरफ्तारी के बाद सड़कों पर घुमाया आरोपी


    इंदौर । इंदौर के खजराना थाना क्षेत्र में आपसी विवाद ने शुक्रवार को हिंसक रूप ले लिया जब एक मीडियाकर्मी ने ठेकेदार पर चाकू से हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी का इलाके में जुलूस निकाला और फिर उसे न्यायालय में पेश किया जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। वहीं घायल ठेकेदार की हालत गंभीर बनी हुई है और उसका शहर के निजी अस्पताल के आईसीयू में उपचार जारी है।

    पुलिस के अनुसार घटना तंजीम नगर इलाके की है जहां रहने वाले मीडियाकर्मी आरिफ बरकाती और ठेकेदार शानू के बीच एक दिन पहले किसी बात को लेकर कहासुनी हुई थी। उस समय दोनों के बीच विवाद तो हुआ लेकिन मामला शांत हो गया। हालांकि अगले ही दिन यह विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। आरोप है कि शानू आरिफ के घर के बाहर पहुंचा और दोनों के बीच फिर से बहस शुरू हो गई। इसी दौरान माहौल इतना बिगड़ गया कि आरिफ घर के भीतर गया और चाकू लेकर बाहर आया। इसके बाद उसने शानू पर लगातार कई वार कर दिए जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा।

    हमले के बाद आसपास के लोगों में अफरा तफरी मच गई। स्थानीय लोगों की मदद से घायल शानू को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत गंभीर बताते हुए आईसीयू में भर्ती कर लिया। चिकित्सकों के अनुसार उसके पेट में गंभीर चोटें आई हैं और उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    घटना के बाद खजराना पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी आरिफ बरकाती की तलाश शुरू की और कुछ ही समय में उसे गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आरोपी को पहले सीधे जेल भेजने की तैयारी थी लेकिन जैसे ही मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची उन्होंने आरोपी को वापस बुलाने के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस ने इलाके में आरोपी का पैदल जुलूस निकाला ताकि कानून व्यवस्था को लेकर सख्त संदेश दिया जा सके। जुलूस के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

    पुलिस का कहना है कि घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज भी सामने आए हैं जिनकी जांच की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की जाएगी। प्रारंभिक जांच में दोनों पक्षों के बीच पुरानी रंजिश की बात भी सामने आई है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

  • इंदौर से मिले ग्रीन फ्यूचर के संकेत EV कॉन्क्लेव में निवेश नवाचार और क्लीन ट्रांसपोर्ट पर बड़ा मंथन

    इंदौर से मिले ग्रीन फ्यूचर के संकेत EV कॉन्क्लेव में निवेश नवाचार और क्लीन ट्रांसपोर्ट पर बड़ा मंथन


                                                         
    इंदौर । इंदौर एक बार फिर नवाचार और भविष्य की तकनीकों का केंद्र बनकर उभरा है। शहर में आयोजित ईवी और ग्रीन एनर्जी कॉन्क्लेव ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी स्वच्छ ऊर्जा और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के क्षेत्र में नए अवसरों की मजबूत तस्वीर पेश की। शेराटन ग्रैंड पैलेस में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से आए निवेशकों स्टार्टअप संस्थापकों उद्योग विशेषज्ञों कॉरपोरेट प्रतिनिधियों और नीति निर्माताओं ने भाग लेकर हरित विकास की दिशा में नई रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की।

    ह्युन्स ऑफ ईवी द्वारा आयोजित इस कॉन्क्लेव में 200 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी निवेशक और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए। इंदौर नगर निगम ने सिटी होस्ट पार्टनर के रूप में आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि शहर स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

    कार्यक्रम के दौरान इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम बैटरी और ऊर्जा प्रबंधन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लॉजिस्टिक्स टेक्नोलॉजी क्लाइमेट टेक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे अहम विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भविष्य की चुनौतियों निवेश की संभावनाओं और नई तकनीकों के बेहतर उपयोग पर विस्तृत मंथन किया।

    कॉन्क्लेव का सबसे आकर्षक हिस्सा स्टार्टअप्स की लाइव पिच प्रस्तुति रही। देशभर से मिले लगभग 2400 आवेदनों में से बहुस्तरीय चयन प्रक्रिया के बाद केवल नौ स्टार्टअप्स को निवेशकों के सामने अपने इनोवेशन और बिजनेस मॉडल पेश करने का अवसर मिला। इस दौरान निवेशकों और स्टार्टअप्स के बीच कई महत्वपूर्ण व्यावसायिक चर्चाएं हुईं और भविष्य में सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

    कार्यक्रम में कई अग्रणी कंपनियों और उद्योग समूहों की भागीदारी रही। इस मंच ने स्टार्टअप्स उद्योग और निवेशकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ नए निवेश और तकनीकी सहयोग का रास्ता भी खोला। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन भारत में स्वच्छ परिवहन और ग्रीन एनर्जी सेक्टर को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएंगे।

    एचईवी के सीईओ डॉ ललित सिंह ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और क्लीन ट्रांसपोर्ट तेजी से विस्तार कर रहे हैं। ऐसे मंच स्टार्टअप्स को नवाचार के साथ निवेशकों तक पहुंचने का अवसर देते हैं और उद्योग के विकास को गति प्रदान करते हैं। वहीं सलाहकार स्वप्निल बंसल ने कहा कि इंदौर जैसे टियर टू और टियर थ्री शहर अब स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए मजबूत केंद्र बनते जा रहे हैं जहां नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और निवेश दोनों मिल रहे हैं।

    डायरेक्टर आभा सिंह और एडिटर दिव्या ठक्कर ने कहा कि यह आयोजन इस बात का संकेत है कि ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक व्हीकल आधारित नवाचार अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं हैं। मध्य भारत भी तेजी से इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है और आने वाले समय में इस क्षेत्र में नई तकनीकों निवेश और रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है।

  • शादी की शान बनी घोड़ी पर क्रूरता का वार डंडे से पिटाई का VIDEO वायरल पुलिस से कार्रवाई की मांग

    शादी की शान बनी घोड़ी पर क्रूरता का वार डंडे से पिटाई का VIDEO वायरल पुलिस से कार्रवाई की मांग


    इंदौर । इंदौर में एक घोड़ी के साथ कथित क्रूरता का मामला सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी फैल गई है। शहर के नृसिंह बाजार चौराहे के पास एक घोड़ी को डंडों से पीटकर जबरन नचाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पशु प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना को अमानवीय बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मामले की शिकायत पुलिस तक पहुंच चुकी है और वीडियो की जांच शुरू कर दी गई है।

    जानकारी के अनुसार घटना 25 जून की रात करीब 11 बजे की बताई जा रही है। वायरल वीडियो में एक युवक घोड़ी को नियंत्रित करने और उससे जबरन प्रदर्शन कराने के लिए लगातार डंडे मारता दिखाई दे रहा है। इस दौरान आसपास बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे लेकिन किसी ने भी घोड़ी को बचाने या युवक को रोकने का प्रयास नहीं किया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज कर दी।

    पशु कल्याण के क्षेत्र में कार्य करने वाले नीडीटेल फाउंडेशन के प्रियांश जैन ने पंढरीनाथ थाना पुलिस को लिखित शिकायत सौंपी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि घोड़ी को दर्द और भय के जरिए प्रदर्शन करने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने पुलिस से मामले में एफआईआर दर्ज कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

    इस घटना से जुड़ा एक और वीडियो भी सामने आया है जिसमें उसी घोड़ी को सड़क पर नचाते हुए देखा जा सकता है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जानवर को उसकी इच्छा के विरुद्ध प्रताड़ित कर प्रदर्शन कराया गया जिससे उसे शारीरिक और मानसिक पीड़ा पहुंची।

    कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि जांच में यह साबित होता है कि घोड़ी को अनावश्यक पीड़ा पहुंचाई गई या उसे बेरहमी से पीटा गया तो आरोपियों के खिलाफ पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11 के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। इस कानून के तहत किसी भी पशु को मारना पीटना या अनावश्यक कष्ट पहुंचाना दंडनीय अपराध है।

    इसके अलावा यदि जांच में यह सामने आता है कि घोड़ी को गंभीर चोट पहुंची है या उसे स्थायी नुकसान हुआ है तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 325 के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। इस प्रावधान के तहत पशु को घायल करने या अपंग बनाने पर पांच वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

    फिलहाल पुलिस वायरल वीडियो की सत्यता की जांच कर रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर पशुओं के साथ होने वाली क्रूरता और उनके संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • इंदौर में 200 रुपये का नकली नोट चलाने पहुंचा युवक धराया 40 हजार के जाली नोट और प्रिंटिंग मशीन बरामद

    इंदौर में 200 रुपये का नकली नोट चलाने पहुंचा युवक धराया 40 हजार के जाली नोट और प्रिंटिंग मशीन बरामद


    इंदौर । इंदौर में 200 रुपये का नकली नोट चलाने की एक कोशिश ने जाली करेंसी के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया। एक युवक रेस्टोरेंट में नकली नोट देकर भुगतान करने पहुंचा था लेकिन संचालक की सतर्कता के कारण उसकी चालाकी सफल नहीं हो सकी। पूछताछ के बाद पुलिस ने उसके दो साथियों को भी गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से 40 हजार रुपये के नकली नोट और नोट छापने में इस्तेमाल होने वाली प्रिंटिंग मशीन बरामद की गई है। पुलिस का कहना है कि गिरोह लंबे समय से नकली नोट तैयार कर उन्हें बाजार में खपाने की कोशिश कर रहा था।

    गांधी नगर थाना पुलिस के अनुसार 25 जून को राजनगर स्थित सांवरिया रेस्टोरेंट पर संचालक यशवंत यादव मौजूद थे। इसी दौरान दीपक नाम का युवक वहां पहुंचा और भुगतान के लिए 200 रुपये का नोट दिया। नोट को देखते ही संचालक को उस पर शक हुआ। उन्होंने कर्मचारियों की मदद से युवक को वहीं रोक लिया और तत्काल पुलिस को सूचना दी।

    पुलिस पूछताछ में दीपक ने अपने साथी संजय का नाम बताया। इसके बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए संजय और उसके साथी रवि को भी गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से 40 हजार रुपये के नकली नोट और नोट छापने में इस्तेमाल होने वाली प्रिंटिंग मशीन जब्त की गई। पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने नकली नोट बाजार में चलाए हैं और इनके संपर्क में कौन कौन लोग थे।

    जांच में सामने आया कि दीपक और संजय पहले एक शराब दुकान पर सेल्समैन के रूप में साथ काम करते थे। वहीं दोनों की पहचान हुई थी। इसी दौरान संजय ने दीपक को बताया था कि उसका एक परिचित बिल्कुल असली जैसे दिखने वाले नकली नोट तैयार करता है। कुछ समय बाद दीपक ने नौकरी छोड़ दी और ट्रक ड्राइवर बन गया जबकि संजय इंदौर आ गया। बाद में दोनों के बीच फिर संपर्क हुआ और नकली नोटों के कारोबार की योजना बनाई गई।

    पुलिस के अनुसार दोनों के बीच ऐसा सौदा तय हुआ था जिसमें एक हजार रुपये देने पर चार हजार रुपये के नकली नोट उपलब्ध कराए जाते थे। दीपक पहली बार ही नकली नोट लेकर उन्हें बाजार में चलाने निकला था लेकिन रेस्टोरेंट संचालक की सतर्कता के कारण वह पकड़ा गया और पूरा मामला सामने आ गया।

    जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी संजय के खिलाफ पहले से ही एसटीएफ में नकली नोटों से जुड़े दो मामले दर्ज हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि गिरोह के अन्य सदस्य कौन हैं और नकली नोट तैयार करने का सामान कहां से लाया जाता था। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि अब तक कितने लोगों को इस नेटवर्क के जरिए जाली करेंसी उपलब्ध कराई गई। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

  • जिसे पुलिस ने बताया MD ड्रग्स वह निकला यूरिया बर्खास्त पुलिसकर्मी बरी अब अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप

    जिसे पुलिस ने बताया MD ड्रग्स वह निकला यूरिया बर्खास्त पुलिसकर्मी बरी अब अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप


    इंदौर । इंदौर में कथित एमडी ड्रग्स बरामदगी के चर्चित मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जिस पदार्थ को पुलिस ने करोड़ों रुपए की एमडी ड्रग्स बताकर बड़ी कार्रवाई का दावा किया था वह दोनों सरकारी फॉरेंसिक जांच में साधारण यूरिया निकला। इसके बाद अदालत ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए पुलिसकर्मी समेत तीनों आरोपियों को बरी कर दिया। अब बर्खास्त पुलिसकर्मी ने दो आईपीएस अधिकारियों सहित 19 पुलिसकर्मियों पर झूठे मामले में फंसाने का गंभीर आरोप लगाया है।

    करीब 16 महीने पहले इंदौर पुलिस ने विजय पाटीदार और शाहनवाज शेख को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 198 ग्राम एमडी ड्रग्स बरामद होने का दावा किया था। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने पुलिसकर्मी लखन गुप्ता का नाम लिया जिसके बाद उन्हें भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। बाद में विभागीय कार्रवाई करते हुए लखन गुप्ता को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।

    मामले की जांच के दौरान जब्त किए गए पदार्थ के नमूने भोपाल स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजे गए। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि जब्त पदार्थ किसी भी प्रकार का मादक पदार्थ नहीं बल्कि सामान्य यूरिया है। इसके बाद पुलिस ने दोबारा हैदराबाद की केंद्रीय प्रयोगशाला से भी परीक्षण कराया लेकिन वहां भी रिपोर्ट में पदार्थ यूरिया ही पाया गया।

    दोनों प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट अदालत के सामने पेश की गई जिसके आधार पर विशेष अदालत ने लखन गुप्ता सहित तीनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। अदालत के फैसले के बाद लखन गुप्ता ने इंदौर जिला कोर्ट की विशेष अदालत में परिवाद दायर कर दो आईपीएस अधिकारियों सहित 19 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    लखन गुप्ता का आरोप है कि उन्हें सुनियोजित साजिश के तहत इस मामले में फंसाया गया। उनका कहना है कि कुछ पुलिस अधिकारियों ने मुखबिर के जरिए पहले से गिरफ्तार आरोपियों से उनका नाम कहलवाया और फिर उन्हें आजाद नगर क्षेत्र से उठाकर तेजाजी नगर थाने ले जाया गया। वहां पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और बाद में नौकरी से भी बर्खास्त कर दिया गया।

    लखन गुप्ता के अधिवक्ता नितिन पाराशर के अनुसार अदालत में दायर परिवाद में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभिन्न कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। विशेष अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए 27 जून की तारीख तय की है। सुनवाई के दौरान अदालत जांच के आदेश एफआईआर दर्ज कराने या अन्य कानूनी कार्रवाई को लेकर निर्णय ले सकती है।

    यह मामला अब इंदौर पुलिस की जांच प्रक्रिया और कार्रवाई की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मामले में आगे अदालत के आदेश और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।