Category: Madhya Pradesh

  • सिंगरौली के बसौड़ा गांव में सड़क का अभाव, बीमार आदिवासी को कुर्सी पर बैठाकर अस्पताल पहुंचाने को मजबूर परिजन

    सिंगरौली के बसौड़ा गांव में सड़क का अभाव, बीमार आदिवासी को कुर्सी पर बैठाकर अस्पताल पहुंचाने को मजबूर परिजन

    मध्य प्रदेश: के सिंगरौली जिले में सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव का मामला सामने आया है। देवसर विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत जोगियानी के बसौड़ा गांव में रहने वाले 25 आदिवासी परिवारों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव तक सड़क नहीं होने के कारण बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है। हाल ही में एक ग्रामीण की तबीयत बिगड़ने पर परिजनों को उन्हें कुर्सी पर बैठाकर सड़क तक ले जाना पड़ा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद गांव में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

    जानकारी के मुताबिक, बसौड़ा गांव के निवासी ईश्वर सिंह गोंड की तबीयत रात के समय अचानक बिगड़ गई। उन्हें उल्टी और दस्त की शिकायत हुई, जिसके बाद उनकी हालत गंभीर हो गई। ऐसे में परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन्हें जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की थी। गांव में सड़क नहीं होने के कारण सामान्य वाहन से घर तक पहुंचना संभव नहीं था। मजबूरी में परिजनों ने उन्हें कुर्सी पर बैठाया और उठाकर सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया।

    इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने के लिए सड़क की अहमियत को सामने रखा है। सड़क उपलब्ध नहीं होने पर एंबुलेंस और दूसरे वाहनों का गांव तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति में मरीज को अस्पताल ले जाने में अतिरिक्त समय और मेहनत लगती है। आपातकाल में यह परेशानी और बढ़ जाती है, क्योंकि मरीज को जल्द चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना जरूरी होता है।

    बसौड़ा गांव के ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। इसके लिए विधायक से लेकर जिला प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों तक आवेदन दिए गए हैं। ग्रामीणों ने कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार और पंचायत स्तर पर भी अपनी समस्या पहुंचाने की बात कही है। उनके अनुसार, सड़क निर्माण के लिए प्रस्ताव भी भेजे गए, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

    गांव के 25 आदिवासी परिवारों के लिए सड़क का अभाव केवल आवागमन की परेशानी नहीं है, बल्कि इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पड़ता है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी मांग पर संबंधित अधिकारी ध्यान देंगे और गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

    इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि गांव तक सड़क नहीं होने की समस्या का समाधान कब होगा। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांग अधिकारियों तक पहुंचा रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक राहत नहीं मिली है। बीमार व्यक्ति को कुर्सी पर बैठाकर सड़क तक ले जाने की घटना ने उनकी परेशानी को उजागर किया है।

    ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क बेहतर होने से लोगों को अस्पताल, बाजार और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में मदद मिलती है। बसौड़ा में सामने आई स्थिति बताती है कि सड़क निर्माण की मांग स्थानीय लोगों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सड़क निर्माण की स्वीकृति, बजट या काम शुरू होने की कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है।

    फिलहाल, बसौड़ा के ग्रामीणों को सड़क बनने का इंतजार है। अब देखना होगा कि संबंधित प्रशासन उनकी मांग पर कब कार्रवाई करता है और गांव के परिवारों को इस समस्या से राहत मिल पाती है या नहीं।

  • ग्वालियर में सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर हाईकोर्ट सख्त, चीफ इंजीनियर और सब-इंजीनियर को अवमानना नोटिस

    ग्वालियर में सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर हाईकोर्ट सख्त, चीफ इंजीनियर और सब-इंजीनियर को अवमानना नोटिस

    मध्य प्रदेश। के ग्वालियर में सड़क निर्माण की गुणवत्ता और उससे जुड़े सरकारी रिकॉर्ड को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान सड़क निर्माण की मूल फाइल उपलब्ध नहीं होने और अधिकारियों की ओर से दिए गए जवाबों पर अदालत ने नाराजगी जताई। मामले में चीफ इंजीनियर और सब-इंजीनियर को अवमानना का नोटिस जारी करते हुए दो दिन के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, सड़क निर्माण से संबंधित मूल रिकॉर्ड फाइल को सील कर सरकारी वकील की निगरानी में सौंप दिया गया है।

    यह मामला सड़क निर्माण की गुणवत्ता से संबंधित है, जिसमें अदालत के सामने मूल रिकॉर्ड पेश किया जाना था। सुनवाई के दौरान जब संबंधित फाइल उपलब्ध नहीं कराई जा सकी, तो हाईकोर्ट ने अधिकारियों से इसकी स्थिति स्पष्ट करने को कहा। इस पर चीफ इंजीनियर ने बताया कि मूल फाइल कार्यालय में रखी हुई है। अदालत ने उन्हें निर्देश दिया कि वे तत्काल कार्यालय जाकर फाइल लेकर आएं और उसे कोर्ट में प्रस्तुत करें।

    हालांकि, कार्यालय से लौटने के बाद चीफ इंजीनियर ने अदालत को बताया कि सड़क निर्माण की मूल फाइल सब-इंजीनियर के घर पर रखी हुई है। जवाब में आए इस बदलाव से अदालत की नाराजगी बढ़ गई। सरकारी रिकॉर्ड की उपलब्धता और उसे सुरक्षित रखने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठे। अदालत ने अधिकारियों के बीच समन्वय और उनकी कार्यप्रणाली पर भी गंभीर टिप्पणी की। सुनवाई के दौरान अदालत ने आशंका जताई कि संबंधित अधिकारी आपस में मिले हुए हैं।

    मूल फाइल को लेकर सामने आई इस स्थिति के बाद हाईकोर्ट ने चीफ इंजीनियर और सब-इंजीनियर को अवमानना का नोटिस जारी किया। दोनों अधिकारियों को दो दिन के भीतर अपना जवाब देने के लिए कहा गया है। अब उन्हें अदालत के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि सड़क निर्माण से जुड़ा महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड निर्धारित स्थान पर उपलब्ध क्यों नहीं था और उसे पेश करने में परेशानी क्यों हुई। हालांकि, अधिकारियों के जवाब और मामले में आगे होने वाली सुनवाई के बाद ही स्थिति और स्पष्ट होगी।

    अदालत ने मामले से संबंधित मूल रिकॉर्ड फाइल को सील कराने का निर्देश भी दिया है। इसके बाद फाइल सरकारी वकील की निगरानी में रखी गई है। इस कदम का उद्देश्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना और मामले की सुनवाई के दौरान उससे संबंधित दस्तावेजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। सड़क निर्माण के रिकॉर्ड को लेकर पैदा हुई स्थिति ने सरकारी विभागों में दस्तावेजों के रखरखाव और जवाबदेही के मुद्दे को भी महत्वपूर्ण बना दिया है।

    मामले में सड़क की गुणवत्ता की जांच करने वाली एजेंसी की भूमिका भी सवालों के घेरे में आई है। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष पेश रिपोर्ट में बताया गया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई की सड़कों की जांच की प्रक्रिया करीब डेढ़ साल से जारी है। जांच में लग रहे लंबे समय और रिपोर्ट से संबंधित तथ्यों पर हाईकोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने जांच की प्रक्रिया और रिपोर्ट में सामने आए बिंदुओं पर सवाल उठाए हैं।

    इस मामले में अब दो प्रमुख पहलुओं पर ध्यान रहेगा। पहला, सड़क निर्माण की मूल फाइल उपलब्ध नहीं होने के संबंध में दोनों अधिकारियों की ओर से दिया जाने वाला जवाब और दूसरा, सड़क की गुणवत्ता की जांच तथा उससे संबंधित रिपोर्ट की स्थिति। हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद संबंधित अधिकारियों को तय समय सीमा में अपना पक्ष रखना होगा। सड़क निर्माण की गुणवत्ता, सरकारी रिकॉर्ड का रखरखाव और जांच प्रक्रिया की जवाबदेही इस मामले की सुनवाई के अहम बिंदु बने हुए हैं।

  • MP के DGP कैलाश मकवाणा 30 नवंबर को हो रहे रिटायर, अगले दावेदारों के नाम आए सामने!

    MP के DGP कैलाश मकवाणा 30 नवंबर को हो रहे रिटायर, अगले दावेदारों के नाम आए सामने!


    भोपाल।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा (DGP Kailash Makwana) की सेवानिवृत्ति की तारीख को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि मकवाणा 30 नवंबर 2026 को सेवानिवृत्त (Retired) होंगे। गृह विभाग ने बुधवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया। इससे अब प्रदेश के अगले पुलिस प्रमुख की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिक गई हैं। वरुण कपूर (Varun Kapoor), उपेंद्र जैन (Upendra Jain) और प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव (Pragya Richa Srivastava) के नाम प्रमुख दावेदारों के रूप में चर्चा में हैं।

    1 दिसंबर को प्रदेश के नए डीजीपी ज्वाइंन करेंगे। 1988 बैच के IPS अधिकारी मकवाणा को दिसंबर 2024 में प्रदेश का डीजीपी बनाया गया था। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, वे 30 नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे। आदेश में सुप्रीम कोर्ट के 2006 और 2018 में दिए गए फैसलों का भी उल्लेख किया गया है।


    दो साल के कार्यकाल को लेकर उठा था सवाल

    मकवाणा की सेवानिवृत्ति की तारीख तय होने से पहले पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) और शासन के बीच इस विषय पर चर्चा हुई थी। बताया गया कि पीएचक्यू ने गृह विभाग को प्रस्ताव भेजकर मकवाणा का कार्यकाल दो दिसंबर 2026 तक रखने का सुझाव दिया था। इसके पीछे उनकी जॉइनिंग की तारीख और डीजीपी के लिए निर्धारित दो साल के कार्यकाल का तर्क दिया गया था। इस प्रस्ताव के बाद उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार किया जा रहा था। मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक भी पहुंचा। इसके बाद सरकार ने 30 नवंबर को ही सेवानिवृत्ति तय करते हुए आदेश जारी कर दिया।


    नए डीजीपी की दौड़ में तीन नामों की चर्चा ज्यादा

    मध्यप्रदेश के अगले पुलिस महानिदेशक के चयन के लिए राज्य सरकार 12 आईपीएस अधिकारियों के नाम यूपीएससी को भेज चुकी है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत यूपीएससी तीन अधिकारियों का पैनल राज्य सरकार को भेजेगा। इसके बाद सरकार नए डीजीपी के नाम पर निर्णय लेगी। संभावित दावेदारों में जेल विभाग के महानिदेशक वरुण कपूर, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) के प्रमुख उपेंद्र जैन और होमगार्ड की महानिदेशक प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। हालांकि, अंतिम चयन यूपीएससी से आने वाले पैनल और सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा।


    वरुण कपूर की दावेदारी पर क्यों टिकी नजरें?

    नए डीजीपी के चयन में अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की तारीख भी अहम मानी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, डीजीपी के पद पर नियुक्ति के लिए संबंधित अधिकारी की सेवानिवृत्ति में कम से कम छह महीने का समय शेष होना चाहिए। इसी वजह से वरुण कपूर की दावेदारी को लेकर भी चर्चा चल रही थी। यदि मकवाणा की सेवानिवृत्ति दिसंबर में आगे बढ़ती, तो कपूर के पास बची सेवा अवधि के कारण उनकी पात्रता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी।

  • MP से भाजपा ने हरदीप पुरी को बनाया राज्यसभा उम्मीदवार तो भड़की कांग्रेस…. की आलोचना

    MP से भाजपा ने हरदीप पुरी को बनाया राज्यसभा उम्मीदवार तो भड़की कांग्रेस…. की आलोचना


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में राज्यसभा (Rajya Sabha) की एक सीट पर 12 नवंबर को होने वाले उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने केन्द्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) को उम्मीदवार घोषित किया है। प्रत्याशी के रूप में पुरी के नाम की घोषणा के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर जबरदस्त तरीके से हमला बोला है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी (Jeetu Patwari) से लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार एवं अन्य कांग्रेस नेताओं ने इस फैसले के लिए भाजपा की कड़ी आलोचना की है और पूछा है कि आखिर पुरी ने भाजपा की ऐसी कौन सी नस दबा रखी है, जिसके चलते पार्टी को ब्लैकमेल होना पड़ रहा है।

    इस बारे में मीडिया से बातचीत करते हुए विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने एपस्टीन फाइल्स के संदर्भ में पुरी का नाम सामने आने का उल्लेख किया और भाजपा से पूछा कि नैतिकता की बात करने वाली पार्टी उन्हें राज्यसभा भेजने का निर्णय कैसे ले सकती है। सिंघार ने कहा कि भाजपा महिलाओं की सुरक्षा और लाडली बहना योजना की बात करती है, लेकिन उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसे विवादों के बीच पुरी को उम्मीदवार बनाने का आधार क्या है।


    ‘MP से कोई दलित, आदिवासी, ओबीसी नहीं मिला’

    उन्होंने सवाल किया कि राज्यसभा भेजने के लिए क्या भारतीय जनता पार्टी को मध्यप्रदेश से दलित, आदिवासी तथा अन्य पिछड़ा वर्ग का कोई योग्य नेता नहीं मिला। उन्होंने कहा कि पुरी को उम्मीदवार बनाए जाने से मध्यप्रदेश के साथ भाजपा के कथित भेदभाव का मुद्दा फिर सामने आया है। विपक्ष के नेता ने कहा कि भाजपा की इस राजनीति से स्पष्ट है कि वह मध्यप्रदेश को अपने राजनीतिक प्रयोगों की प्रयोगशाला समझती है।


    ‘आखिर किससे ब्लैकमेल हो रही है भाजपा’

    इस बारे में शेयर की अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में पुरी ने लिखा, ‘आखिर किससे ब्लैकमेल हो रही है भाजपा? ‘एपस्टीन फाइल्स’ में जिसका नाम सामने आया हो, उस हरदीप सिंह पुरी को मध्यप्रदेश से राज्यसभा का टिकट देना भाजपा के खौफ को साफ दर्शाता है। उत्तर प्रदेश से टिकट न देकर मध्यप्रदेश की सीट को अपने निजी स्वार्थों के लिए इस्तेमाल करना यह साबित करता है कि भाजपा ने मध्यप्रदेश को अपनी प्रयोगशाला (लैब) समझ रखा है। हम मध्यप्रदेश को भाजपा की प्रयोगशाला नहीं बनने देंगे। लोकतंत्र के हत्यारों को सत्ता की गद्दी से उखाड़ फेंकने का वक्त आ गया है।’


    पटवारी बोले- कहीं कुछ तो जरूर है…

    उधर कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि हरदीप सिंह पुरी को सत्ता में शामिल रखने के पीछे की विवशता बता रही है कि कहीं कुछ तो ऐसा जरूर है, जिसने भाजपा की नस दबा रखी है। उन्होंने कहा कि भाजपा को यह बताना ही चाहिए, पुरी के नाम से जुड़े एपस्टीन प्रकरण पर उठे सवालों का जवाब, देश को आखिर कब मिलेगा? उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘मध्यप्रदेशवासियो, मत के मद में डूबी भाजपा राज्य के साथ, आपके वोट का भी खुला अपमान कर रही है। कांग्रेस इसका विरोध करती है।’


    दिग्विजय के बेटे बोले- एपस्टीन के दोस्त को राज्यसभा भेजा

    उधर इसी मुद्दे को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के बेटे और कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘एक कहावत है कि “Partners in crime are the best kind of friends!” (जुर्म में साथ देने वाले दोस्त सबसे अच्छे दोस्त होते हैं) भाजपा एक दुराचारी को राज्यपाल बनाती है और नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण एवं तस्करी के अंतरराष्ट्रीय अपराधी जेफरी एप्स्टीन के मित्र हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजती है।’


    ‘एप्स्टीन की दोस्ती- जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी’

    आगे उन्होंने लिखा, ‘क्या भाजपा के पास मध्य प्रदेश में एक भी ऐसा योग्य नेता नहीं था, जिसे राज्यसभा भेजा जा सकता था? और अगर नहीं था, तो हरदीप सिंह पुरी ही क्यों? आखिर ऐसी कौन-सी नस थी, जो हरदीप सिंह पुरी के हाथ में थी? मध्य प्रदेश की जनता जानना चाहती है। एप्स्टीन की मित्रता— जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी।’


    घोषित बाल यौन अपराधी है जेफ्री एप्स्टीन

    बता दें कि जेफ्री एप्स्टीन एक घोषित अमेरिकी बाल यौन अपराधी है, और कांग्रेस इस साल की शुरुआत से ही अमेरिका में जारी ‘एप्स्टीन फाइल्स’ में पुरी का नाम होने का दावा करते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर रही है। कांग्रेस का दावा है कि अमेरिकी न्याय विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध ‘एप्स्टीन फाइल्स’ के अनुसार, 2014 से 2017 के बीच एप्स्टीन और पुरी के बीच कम से कम 62 ईमेल का आदान-प्रदान हुआ था तथा 14 बैठकें हुईं थीं। हालांकि पुरी मुख्य विपक्षी दल के आरोपों को पहले खारिज कर चुके हैं। पुरी ने कहा था कि वह एप्स्टीन से कुछ मौकों पर जरूर मिले थे, लेकिन उसके साथ उनकी बातचीत और उसके अपराधों से कोई वास्ता नहीं है। इसके बाद ये मुद्दा हाल ही में उस वक्त एकबार फिर चर्चा में आ गया, जब अमेरिकी न्याय विभाग ने इस साल 21 अक्टूबर को इसी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज जारी किए थे, जिनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और जेफ्री एपस्टीन की 2014 की तस्वीरों को भी शेयर किया गया था।

    12 नवंबर को होना है राज्यसभा सीट के लिए उपचुनाव
    इससे पहले भाजपा महासचिव तरुण चुग की ओर से बुधवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार पार्टी की केन्द्रीय चुनाव समिति ने श्री पुरी को मध्य प्रदेश से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाने का निर्णय लिया है। पुरी का राज्यसभा का मौजूदा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। वह इस समय उत्तर प्रदेश से उच्च सदन के सदस्य हैं। यह सीट पूर्व केन्द्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई है। इस सीट के लिए नामांकन की प्रक्रिया 26 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है और दो नंवबर तक चलेगी। तीन नवंबर को नामांकन पत्राें की जांच होगी और पांच नवंबर तक नाम वापस लिये जा सकेंगे।

  • MP: कूनो में 19 माह के चीते की गोली लगने से हुई मौत….. जांच के लिए केंद्र ने भेजी उच्च स्तरीय टीम

    MP: कूनो में 19 माह के चीते की गोली लगने से हुई मौत….. जांच के लिए केंद्र ने भेजी उच्च स्तरीय टीम


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के जंगलों में क्या दुनिया के सबसे तेज दौड़ने वाले जानवर भी सुरक्षित नहीं हैं. कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) से जुड़े 19 महीने के नर चीते KNG22 की मौत ने इस सवाल को गंभीर बना दिया है. चीते के शरीर से एक-दो नहीं, बल्कि पांच गोली के छर्रे निकाले गए. उसे बचाने के लिए इलाज किया गया, विशेषज्ञों की मदद ली गई और सर्जरी भी हुई, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद 27 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई. अब इस घटना की जांच के लिए मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने विशेष कार्यबल यानी एसटीएफ गठित की है. वहीं केंद्र सरकार ने भी उच्चस्तरीय टीम को जांच के लिए मध्य प्रदेश भेजा है.

    यह घटना सिर्फ एक चीते की मौत तक सीमित नहीं है. इसने भारत में चीतों को फिर से बसाने के लिए शुरू किए गए प्रोजेक्ट चीता की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. सवाल यह है कि जिस परियोजना के तहत चीतों की निगरानी के लिए टीमें और आधुनिक तकनीक इस्तेमाल की जा रही है, वहां एक चीता गोली के छर्रों से गंभीर रूप से घायल कैसे हो गया. हालांकि, घटना के पीछे किसका हाथ है और चीते को गोली किन परिस्थितियों में लगी, इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।


    25 अक्टूबर को घायल मिला था KNG22

    कूनो नेशनल पार्क की मादा चीता निरवा का 19 महीने का नर शावक KNG22, 25 अक्टूबर को घायल हालत में मिला था. वह कूनो के संरक्षित क्षेत्र से बाहर एमपी के मुरैना इलाके के जंगल में था. उसे रेस्क्यू कर इलाज के लिए कूनो लाया गया. शुरुआती जांच के बाद उसकी हालत को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए जबलपुर स्थित पशु चिकित्सा सुविधा में भेजा गया.

    डॉक्टरों ने चीते की चोटों की गंभीरता का पता लगाने के लिए एक्स-रे और सीटी स्कैन किया. जांच में उसके शरीर के अलग-अलग हिस्सों में बाहरी वस्तुएं दिखाई दीं. इसके बाद इलाज के दौरान सर्जरी की गई. सर्जरी में उसके शरीर से पांच फायरआर्म पेलेट्स यानी गोली के छर्रे निकाले गए. इन छर्रों के कारण उसके आंतरिक अंगों, मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा था.

    डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि 27 अक्टूबर की सुबह KNG22 ने दम तोड़ दिया. इसके बाद साफ हो गया कि यह मामला सामान्य चोट या किसी जानवर के हमले तक सीमित नहीं था. चीते के शरीर से मिले छर्रों ने गोली लगने की आशंका को सामने ला दिया और मामले की गंभीरता बढ़ गई.


    निगरानी के बावजूद कैसे घायल हुआ चीता

    KNG22 की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहा है. प्रोजेक्ट चीता के तहत चीतों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए निगरानी टीमें तैनात हैं. रेडियो या सैटेलाइट कॉलर जैसी तकनीक से उनकी लोकेशन का पता लगाने में मदद मिलती है. इसके बावजूद चीता संरक्षित क्षेत्र से बाहर घायल हालत में मिला और उसकी जान नहीं बचाई जा सकी.

    ऐसे में सवाल उठता है कि क्या चीते की गतिविधियों पर नजर रखने में कोई चूक हुई. क्या उसके घायल होने के बाद समय रहते मदद पहुंच पाई. क्या संरक्षित क्षेत्र के आसपास वन्यजीवों के लिए खतरा बन सकने वाली गतिविधियों पर पर्याप्त निगरानी थी. इन सवालों के जवाब फिलहाल जांच के दायरे में हैं.

    यह भी समझना जरूरी है कि किसी जानवर की लोकेशन का पता चलना और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना दो अलग-अलग बातें हैं. कॉलर या दूसरी तकनीक से जानवर की मौजूदगी का संकेत मिल सकता है, लेकिन खतरे की स्थिति में समय पर मौके पर पहुंचना और उसे सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है. KNG22 की मौत के बाद निगरानी से लेकर मैदानी कार्रवाई तक की व्यवस्था की जांच महत्वपूर्ण हो गई है.


    राज्य सरकार ने बनाई एसटीएफ, केंद्र ने भेजी टीम

    घटना की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने वन और पुलिस अधिकारियों को शामिल करते हुए विशेष कार्यबल यानी एसटीएफ का गठन किया है. यह टीम चीते के घायल होने और उसकी मौत के कारणों की जांच करेगी. जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि चीते को गोली कैसे लगी और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

    केंद्र सरकार ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए 28 अक्टूबर को उच्चस्तरीय टीम मध्य प्रदेश भेजी. इस टीम में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी एनटीसीए के वन महानिरीक्षक, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो यानी डब्ल्यूसीसीबी के अतिरिक्त निदेशक और डब्ल्यूसीसीबी के क्षेत्रीय उपनिदेशक शामिल हैं.

    केंद्रीय टीम घटना से जुड़े सबूतों की जांच करेगी और मध्य प्रदेश वन विभाग के साथ मिलकर काम करेगी. उसे यह भी देखना है कि चीतों की सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों, निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा उपायों को किस तरह लागू किया जा रहा है. जांच के बाद टीम अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी. इसके आधार पर आगे की कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम तय किए जा सकते हैं।

    फिर भी इस घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि जंगलों में वन्यजीवों को गोली लगने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं. अगर संरक्षित क्षेत्र से बाहर जाने वाले चीतों को खतरा है, तो उनकी निगरानी के साथ आसपास के इलाकों में सुरक्षा और वन्यजीव अपराधों पर रोक लगाने की व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी।


    विशेषज्ञों ने उठाए सवाल, कांग्रेस ने सरकार को घेरा

    चीते की मौत के बाद वन्यजीव विशेषज्ञों ने सुरक्षा व्यवस्था और घटना की जांच को लेकर सवाल उठाए हैं. वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे ने इस मामले पर चिंता जताई है. वहीं, मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी चीते की मौत के बाद प्रोजेक्ट चीता और बीजेपी सरकार पर सवाल उठाए हैं।

    इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ जांच के निष्कर्ष भी महत्वपूर्ण होंगे. सबसे जरूरी यह पता लगाना है कि चीते को गोली कैसे लगी, घटना के समय उसकी निगरानी किस तरह की जा रही थी और क्या सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी रही. जांच से यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या बदलाव जरूरी हैं।

    सितंबर 2022 में भारत में चीतों की वापसी के साथ प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत हुई थी. इस परियोजना का उद्देश्य देश में चीतों को फिर से बसाना और उनके लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करना है. अब तक इस परियोजना को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. चीतों की मौतों के अलग-अलग कारण रहे हैं, लेकिन KNG22 की मौत इस वजह से अलग है कि उसके शरीर से पांच गोली के छर्रे निकाले गए।

  • भोपाल के कैफे में पिस्टल लेकर पहुंचे छात्र, युवक को धमकाया, बीच-बचाव करने आए पुलिस जवान पर भी तानी बंदूक

    भोपाल के कैफे में पिस्टल लेकर पहुंचे छात्र, युवक को धमकाया, बीच-बचाव करने आए पुलिस जवान पर भी तानी बंदूक


    भोपाल। राजधानी भोपाल के इंद्रपुरी इलाके में कॉलेज के छात्रों के बीच पुरानी रंजिश के चलते कैफे में हंगामा हो गया। आरोप है कि दो युवक एक छात्र को धमकाने के लिए पिस्टल लेकर पहुंचे और विवाद के दौरान उस पर हथियार तान दिया। बीच-बचाव करने आए सिविल ड्रेस में मौजूद पुलिस जवान को भी पिस्टल दिखाकर धमकाने का आरोप है। घटना कैफे में लगे CCTV कैमरों में रिकॉर्ड होने की बात सामने आई है। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है।

    पुरानी रंजिश में कैफे पहुंचे दोनों युवक
    मामला पिपलानी थाना क्षेत्र के इंद्रपुरी टी चौराहे का है। जानकारी के मुताबिक, करीब एक सप्ताह पहले शिवांशु और पृथ्वीराज सिंह राजपूत के बीच विवाद हुआ था। आरोप है कि उस दौरान पृथ्वीराज के साथियों ने शिवांशु के साथ मारपीट की थी। इसी घटना के बाद से दोनों पक्षों के बीच तनाव बना हुआ था।

    बताया जा रहा है कि इसी रंजिश के चलते पृथ्वीराज सिंह राजपूत अपने साथी राज राजपूत के साथ कैफे पहुंचा। आरोप है कि राज राजपूत अपने साथ पिस्टल लेकर आया था। कैफे में मौजूद शिवांशु को धमकाने के दौरान विवाद बढ़ गया और उसे डराने के लिए पिस्टल तान दी गई।

    बीच-बचाव करने पहुंचे पुलिस जवान पर भी तानी पिस्टल
    कैफे में विवाद बढ़ता देख वहां मौजूद सिविल ड्रेस में एक पुलिस जवान ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराने की कोशिश की। आरोप है कि इस दौरान राज राजपूत ने पुलिस जवान पर भी पिस्टल तान दी। इससे मौके पर तनाव की स्थिति बन गई।

    घटना के बाद कैफे में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग सामने आने की जानकारी मिली है। पुलिस फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि विवाद किस तरह बढ़ा और हथियार दिखाने की घटना किन परिस्थितियों में हुई।

    दोनों आरोपियों के खिलाफ FIR, तलाश जारी
    अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि पिपलानी थाना क्षेत्र में छात्रों के दो गुटों के बीच पहले विवाद हुआ था। इसी रंजिश के चलते दूसरे पक्ष के छात्र कैफे पहुंचे, जहां मारपीट हुई और एक युवक पर पिस्टल ताने जाने की घटना सामने आई। बीच-बचाव करने पहुंचे सिविल ड्रेस में मौजूद पुलिसकर्मी को भी निशाना बनाया गया।

    पुलिस ने मामले में पृथ्वीराज सिंह राजपूत और राज राजपूत के खिलाफ FIR दर्ज की है। घटना के बाद से दोनों आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है और गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

    फिलहाल पुलिस CCTV फुटेज समेत अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। विवाद की वजह, घटना में शामिल लोगों की भूमिका और हथियार से जुड़े पहलुओं की पड़ताल के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • बुरहानपुर में 3 महिलाओं ने उड़ाए 45 लाख के जेवर, ग्राहक बनकर पहुंचीं, साड़ी में छिपाया बॉक्स

    बुरहानपुर में 3 महिलाओं ने उड़ाए 45 लाख के जेवर, ग्राहक बनकर पहुंचीं, साड़ी में छिपाया बॉक्स


    बुरहानपुर। मध्यप्रदेश के बुरहानपुर में सराफा दुकान पर ग्राहक बनकर पहुंचीं तीन महिलाओं ने कथित तौर पर करीब 45 लाख रुपये के सोने के जेवर चोरी कर लिए। गहने देखने के दौरान महिलाओं ने दुकानदार का ध्यान भटकाया और मौका पाकर एक महिला ने जेवरों से भरा बॉक्स अपनी साड़ी में छिपा लिया। वारदात दुकान में लगे CCTV कैमरों में कैद हो गई है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

    गहने देखने के बहाने दुकान में पहुंचीं महिलाएं
    मामला कोतवाली थाना क्षेत्र के फव्वारा चौक स्थित सराफा दुकान का है। सोमवार शाम करीब 6 बजे तीन महिलाएं ग्राहक बनकर दुकान में पहुंचीं। दुकानदार ने उन्हें सोने के गहने दिखाने शुरू किए। इसी दौरान महिलाओं ने कथित तौर पर बातचीत और गहने देखने के बहाने दुकानदार का ध्यान दूसरी ओर लगाया।

    आरोप है कि इसी मौके का फायदा उठाकर उनमें से एक महिला ने जेवरों से भरा बॉक्स अपनी साड़ी में छिपा लिया। इसके बाद तीनों कुछ देर तक दुकान में रहीं और फिर वहां से निकल गईं। शुरुआत में दुकानदार को बॉक्स गायब होने का पता नहीं चला।

    करीब 15 मिनट बाद जब सामान कम होने का संदेह हुआ, तो दुकानदार ने CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग देखी। फुटेज में तीनों महिलाओं की संदिग्ध गतिविधियां दिखाई देने की बात सामने आई। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

    दुकान के बाहर बाइक पर इंतजार कर रहे थे साथी?
    वारदात के बाद महिलाओं के साथियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। बताया जा रहा है कि दुकान के बाहर सड़क किनारे हेलमेट पहने एक व्यक्ति बाइक लेकर खड़ा था। तीन महिलाओं में से एक उसके साथ बाइक पर बैठकर निकल गई, जबकि बाकी दो महिलाएं आगे बढ़ीं और फिर एक अन्य बाइक पर सवार होकर वहां से चली गईं।

    इस घटनाक्रम के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि चोरी की वारदात में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि, महिलाओं के साथ कितने लोग थे और सभी की क्या भूमिका रही, इसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

    CCTV फुटेज के आधार पर तलाश में जुटी पुलिस
    बुरहानपुर के सिटी एसपी विनोद सिंह कुशवाह ने बताया कि चोरी की घटना कोतवाली थाना क्षेत्र के फव्वारा चौक स्थित अनिल अग्रवाल की लक्ष्मण किशोर जुगलकिशोर सराफा दुकान में हुई है। वारदात सोमवार शाम करीब 6 बजे की है।

    पुलिस को मामले से जुड़े कुछ CCTV फुटेज मिले हैं। आरोपियों की पहचान और उनकी गिरफ्तारी के लिए जांच की जा रही है। साथ ही मुखबिरों को सक्रिय किया गया है, ताकि संदिग्ध महिलाओं और उनके साथियों तक पहुंचा जा सके।

    फिलहाल पुलिस चोरी गए जेवरों की बरामदगी और घटना में अन्य लोगों की संभावित भूमिका की जांच कर रही है। आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के संबंध में आगे की जानकारी जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी।

  • MP में चक्रवात ‘अर्नब’ का असर: पूर्वी जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, भोपाल-ग्वालियर में भी बदलेगा मौसम

    MP में चक्रवात ‘अर्नब’ का असर: पूर्वी जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, भोपाल-ग्वालियर में भी बदलेगा मौसम


    भोपाल। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है। गुरुवार को प्रदेश के पूर्वी जिलों में भारी से अति भारी बारिश की आशंका जताई गई है, जबकि भोपाल, ग्वालियर समेत कई शहरों में गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की बारिश की संभावना है। बारिश और बादलों के कारण आज करवा चौथ पर चांद के दीदार में भी परेशानी हो सकती है।

    विंध्य और महाकौशल क्षेत्र में ज्यादा असर
    बुधवार को प्रदेश के कई इलाकों में मौसम बदला रहा। सतना, कटनी और छतरपुर समेत कई जिलों में बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, चक्रवाती सिस्टम का असर गुरुवार को भी पूर्वी मध्यप्रदेश में दिखाई दे सकता है।

    मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट बताए जाने के साथ सतना, रीवा, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में भारी बारिश की आशंका जताई गई है। कुछ इलाकों में 24 घंटे के दौरान चार इंच या उससे अधिक बारिश होने की संभावना है।

    सिंगरौली में सुबह से बारिश, तेज हवाओं के साथ छाए बादल
    सिंगरौली में गुरुवार सुबह से मौसम बदला हुआ है। आसमान में घने बादल छाए हुए हैं और तेज हवाओं के साथ बारिश हो रही है। चक्रवाती सिस्टम के प्रभाव से जिले में मौसम के अस्थिर बने रहने की संभावना है।

    भोपाल-ग्वालियर समेत इन जिलों में गरज-चमक के आसार
    गुरुवार को भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड और श्योपुर में बादल छाने, गरज-चमक और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अलावा जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी मौसम बदल सकता है। कुछ स्थानों पर तेज हवाओं के साथ बारिश होने की आशंका है।

    मालवा के कई जिलों में खिल सकती है धूप
    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, इंदौर, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर में मौसम अपेक्षाकृत साफ रह सकता है। इन जिलों के लिए बारिश और आंधी का अलर्ट नहीं बताया गया है। हालांकि, मौसम की स्थिति में बदलाव संभव है। लोगों को अपने जिले के ताजा मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखने की सलाह दी जाती है।

    शाजापुर के गिरवर में 12.8 डिग्री तापमान
    बारिश और बादलों के बीच प्रदेश में रात के तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। बीती रात शाजापुर जिले के गिरवर में न्यूनतम तापमान 12.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पचमढ़ी में 15.2 डिग्री, धार में 15.4 डिग्री और आगर-मालवा में 15.9 डिग्री तापमान रहा। नीमच के मरुखेड़ा और छतरपुर के नौगांव में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    आंधी और बारिश के प्रभाव से दिन के तापमान में भी करीब एक डिग्री तक की गिरावट आई है। खजुराहो, खंडवा, रतलाम, खरगोन और नर्मदापुरम में अधिकतम तापमान 33.2 से 34.2 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।

    मानसून की विदाई के बाद भी जारी है बारिश
    मध्यप्रदेश से 3 अक्टूबर को मानसून की विदाई हो गई थी। एक ही दिन में पूरे प्रदेश से मानसून लौट गया था, लेकिन अब चक्रवाती सिस्टम के सक्रिय होने से अक्टूबर के आखिरी दिनों में फिर बारिश का दौर बन गया है। इससे तापमान में उतार-चढ़ाव के साथ मौसम में ठंडक बढ़ने के आसार हैं।

  • भोपाल में प्रशासनिक फेरबदल, पीसी पांडे कलेक्टर कार्यालय में अटैच, दीपक पांडे को कोलार का अतिरिक्त प्रभार

    भोपाल में प्रशासनिक फेरबदल, पीसी पांडे कलेक्टर कार्यालय में अटैच, दीपक पांडे को कोलार का अतिरिक्त प्रभार


    भोपाल। भोपाल में प्रशासनिक कामकाज को सुचारू बनाने के लिए राजस्व विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। कलेक्टर कार्यालय से 27 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार कोलार के अनुविभागीय अधिकारी एवं दंडाधिकारी पीसी पांडे को कलेक्टर कार्यालय भोपाल में कार्य करने के लिए आदेशित किया गया है। वहीं टीटी नगर के अनुविभागीय अधिकारी एवं दंडाधिकारी दीपक पांडे को उनके वर्तमान कार्य के साथ कोलार का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

    कलेक्टर कार्यालय की ओर से जारी आदेश में प्रशासनिक कार्यों और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की गई है। आदेश पर जिला कलेक्टर के हस्ताक्षर हैं और इसमें दोनों अधिकारियों की नई जिम्मेदारियों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। इसके तहत पीसी पांडे को कोलार में एसडीएम एवं दंडाधिकारी के दायित्व से हटाकर कलेक्टर कार्यालय में कार्य करने के लिए निर्देशित किया गया है। दूसरी ओर दीपक पांडे टीटी नगर में अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों का निर्वहन करते रहेंगे और इसके साथ ही कोलार क्षेत्र का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे।

    प्रशासनिक व्यवस्था में इस बदलाव के बाद कोलार क्षेत्र में राजस्व संबंधी कामकाज की जिम्मेदारी दीपक पांडे के पास आ जाएगी। उन्हें अपने वर्तमान कार्यों के साथ अतिरिक्त प्रभार की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। ऐसे में क्षेत्र में राजस्व मामलों के निपटारे और प्रशासनिक गतिविधियों के संचालन को लेकर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। हालांकि आदेश में इस बदलाव के पीछे किसी विशेष प्रकरण या शिकायत का उल्लेख नहीं किया गया है। आदेश में प्रशासनिक कार्य सुविधा को ही बदलाव का आधार बताया गया है।

    पीसी पांडे को कलेक्टर कार्यालय में कार्य करने के लिए निर्देशित किए जाने के बाद उनकी नई जिम्मेदारियों को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्था की जाएगी। कलेक्टर कार्यालय में अधिकारियों की तैनाती का उद्देश्य विभिन्न विभागीय कार्यों के समन्वय और प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार जिम्मेदारियों का निर्धारण करना होता है। इस आदेश के जरिए जिला प्रशासन ने अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव करते हुए नई व्यवस्था लागू की है।

    आदेश की प्रतिलिपि मध्य प्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव सहित भोपाल संभाग के आयुक्त और संबंधित राजस्व अधिकारियों को आवश्यक सूचना और कार्रवाई के लिए भेजी गई है। इसके अलावा जिला कोषालय अधिकारी को वेतन संबंधी प्रक्रिया के लिए जानकारी दी गई है। संबंधित अधिकारियों को आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    भोपाल जिला प्रशासन में समय-समय पर प्रशासनिक जरूरतों के मुताबिक अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया जाता है। इस बार किए गए फेरबदल में कोलार और टीटी नगर से जुड़े राजस्व प्रशासन की जिम्मेदारियां प्रभावित हुई हैं। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होने के कारण नई व्यवस्था के तहत संबंधित अधिकारियों को अपने दायित्व संभालने होंगे। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अतिरिक्त प्रभार के साथ कोलार क्षेत्र में राजस्व संबंधी कार्यों का संचालन किस तरह आगे बढ़ता है।

  • हेलीकॉप्टर से लिया अभियान का जायजा, दूसरे चरण में 2,000 कृष्णमृगों के स्थानांतरण का लक्ष्य

    हेलीकॉप्टर से लिया अभियान का जायजा, दूसरे चरण में 2,000 कृष्णमृगों के स्थानांतरण का लक्ष्य


    शाजापुर।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश सरकार किसानों के कल्याण के साथ प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत किसानों की फसलों को जंगली जानवरों, विशेषकर कृष्णमृग और नीलगाय से होने वाले नुकसान से बचाने के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। इसी उद्देश्य से शाजापुर जिले में बोमा पद्धति से वन्यजीवों के रेस्क्यू और स्थानांतरण का अभियान चलाया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को शाजापुर जिले के रंथभंवर पहुंचकर हेलीकॉप्टर से प्रोजेक्ट एंटीलोप ट्रांसलोकेशन के तहत संचालित रेस्क्यू अभियान के दूसरे चरण का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से अभियान की प्रगति तथा व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने कैमोफ्लाज्ड मचान से बोमा पद्धति के जरिए कृष्णमृग और नीलगायों को सुरक्षित पकड़ने की प्रक्रिया का भी निरीक्षण किया।

    31 अक्टूबर तक चलेगा अभियान

    मुख्यमंत्री ने बताया कि शाजापुर जिले में किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए पिछले वर्ष बोमा पद्धति से कृष्णमृग और नीलगायों के रेस्क्यू की शुरुआत की गई थी। दक्षिण अफ्रीका की विशेष टीम की सहायता से वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर निर्धारित वन क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जा रहा है।

    प्रोजेक्ट एंटीलोप ट्रांसलोकेशन के अंतर्गत यह अभियान 9 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलाया जा रहा है। इसके दूसरे चरण में 2,000 कृष्णमृगों के स्थानांतरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, अब तक शाजापुर जिले से लगभग 1,236 से अधिक कृष्णमृगों और नीलगायों का सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है।

    रेस्क्यू किए गए कृष्णमृगों को श्योपुर के जंगलों, गांधी सागर और रानी दुर्गावती रिजर्व फॉरेस्ट सहित निर्धारित वन क्षेत्रों में पहुंचाया जा रहा है। इनके सुरक्षित परिवहन के लिए 11 ट्रकों की व्यवस्था की गई है। साथ ही पशु चिकित्सकों, आवश्यक उपकरणों और अन्य जरूरी सुविधाओं का इंतजाम भी किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि रेस्क्यू अभियान के दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि उन्हें पकड़ने और स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की चोट न पहुंचे।

    दक्षिण एशिया में अपनी तरह का पहला अभियान

    डॉ. यादव ने कहा कि हेलीकॉप्टर की सहायता से बोमा पद्धति पर आधारित वन्यजीव रेस्क्यू का यह अभियान दक्षिण एशिया में अपनी तरह का पहला प्रयास है। इससे वन्यजीवों के संरक्षण के साथ किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान को कम करने में भी मदद मिलेगी।

    उन्होंने अभियान में जुटे वन विभाग और प्रशासन की टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि परियोजना की सफलता से देश के अन्य राज्यों को भी इस तरह की पहल करने की प्रेरणा मिलेगी।

    निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से अभियान के संचालन, वन्यजीवों के सुरक्षित स्थानांतरण और आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में चर्चा की। इस अवसर पर उन्होंने वन विभाग और प्रशासनिक टीम के सदस्यों के साथ समूह छायाचित्र भी खिंचवाया।