Category: Madhya Pradesh

  • MP News: अपनी ही सरकार पर विधायक ने उठाए सवाल, भाजपा कार्यक्रम में महिला सम्मान पर बवाल; भोपाल थाने में TI और हिंदू नेता आमने-सामने

    MP News: अपनी ही सरकार पर विधायक ने उठाए सवाल, भाजपा कार्यक्रम में महिला सम्मान पर बवाल; भोपाल थाने में TI और हिंदू नेता आमने-सामने


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों सड़क से लेकर सरकारी दफ्तर और पार्टी के कार्यक्रम तक कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जो सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गए हैं। कहीं भाजपा विधायक अपनी ही सरकार की सड़क व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए जनता के गुस्से का डर बता रहे हैं तो कहीं भाजपा के कार्यक्रम में महिला जनप्रतिनिधियों को बैठने के लिए कुर्सी तक नहीं मिलने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दूसरी ओर भोपाल के एक थाने में पुलिस अधिकारी और हिंदू संगठन के नेता के बीच तीखी बहस का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस और सामाजिक संगठनों के बीच तालमेल को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

    जबलपुर जिले के पाटन से भाजपा विधायक अजय विश्नोई ने प्रदेश की खराब सड़कों को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़कों की हालत खराब है और इसका सीधा असर जनप्रतिनिधियों पर पड़ता है। उनका कहना है कि जब सड़कें खराब होती हैं तो परेशान जनता सबसे पहले स्थानीय विधायक से सवाल करती है। विधायक ने यह भी कहा कि सड़क चाहे लोक निर्माण विभाग की हो या प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जुड़ी हो कई जगहों पर स्थिति खराब है। उनके बयान को अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के तौर पर देखा जा रहा है।

    विधायक ने सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार और ठेकेदारी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि ठेकेदार काम हासिल करने की प्रतिस्पर्धा में कम दर पर ठेके लेते हैं और निर्माण प्रक्रिया में अनियमितताओं के कारण सड़कों की गुणवत्ता प्रभावित होती है। खराब सड़कें केवल आवागमन की परेशानी नहीं बल्कि आम लोगों की नाराजगी का कारण भी बनती हैं। यही वजह है कि विधायक ने कहा कि जनता की नाराजगी का पहला सामना स्थानीय जनप्रतिनिधियों को करना पड़ता है।

    दूसरी तस्वीर गुना के एक भाजपा कार्यक्रम से सामने आई जहां भाजपा विधायक प्रियंका मीणा और नगर पालिका अध्यक्ष सविता गुप्ता को काफी देर तक खड़े रहना पड़ा। कार्यक्रम में मौजूद पुरुष नेताओं के लिए कुर्सियां और सोफा मौजूद थे लेकिन दोनों महिला जनप्रतिनिधियों के लिए बैठने की व्यवस्था नजर नहीं आई। आखिरकार विधायक ने खुद अपनी कुर्सी लगाई और बैठ गईं। इसके बाद अपने भाषण में उन्होंने महिला जनप्रतिनिधियों को बराबरी का सम्मान दिए जाने की बात कही। उन्होंने महिला आरक्षण और राजनीतिक भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं को भी बराबरी के साथ बैठाने से ही वास्तविक महिला सशक्तीकरण की तस्वीर सामने आएगी।

    इस घटना के बाद भाजपा के कार्यक्रमों में महिला जनप्रतिनिधियों के सम्मान और व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रियंका मीणा इससे पहले भी महिलाओं से जुड़े मुद्दे पर अपनी ही पार्टी के विधायक पन्नालाल शाक्य के साथ सार्वजनिक मंच पर बहस को लेकर चर्चा में रह चुकी हैं।

    इसी बीच भोपाल के जहांगीराबाद थाने का एक वीडियो भी चर्चा में है। यहां हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी और थाना प्रभारी राजन सिंह के बीच एक मामले को लेकर तीखी बहस हो गई। बताया गया कि हिंदू संगठन के कार्यकर्ता शिकायत पर कार्रवाई की मांग को लेकर थाने पहुंचे थे। इसी दौरान पुलिस और संगठन के प्रतिनिधियों के बीच बात बढ़ गई। मौके पर एसीपी उमेश तिवारी भी मौजूद थे और दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास करते नजर आए।

    इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और सामाजिक संगठनों के साथ संवाद को लेकर सवाल उठ रहे हैं। तीनों घटनाओं ने मध्य प्रदेश की सियासत और प्रशासन से जुड़े अलग अलग पहलुओं को एक साथ चर्चा में ला दिया है। सड़क व्यवस्था पर विधायक की नाराजगी हो या महिला जनप्रतिनिधियों को सम्मान देने का सवाल या फिर थाने में पुलिस और संगठन के बीच तीखी बहस ये घटनाएं बताती हैं कि जनता और जनप्रतिनिधियों से जुड़े मुद्दों पर अब सार्वजनिक जवाबदेही की मांग लगातार बढ़ रही है।

  • MP Weather Update: आधा मानसून बीता फिर भी 3 इंच बारिश कम, अगले सप्ताह भारी बारिश के आसार; डैमों का जलस्तर भी बढ़ा

    MP Weather Update: आधा मानसून बीता फिर भी 3 इंच बारिश कम, अगले सप्ताह भारी बारिश के आसार; डैमों का जलस्तर भी बढ़ा


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मानसून का आधे से ज्यादा सीजन गुजर चुका है लेकिन प्रदेश में अब तक सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा नहीं हो पाया है। राज्य में अब तक औसतन 24.4 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है जबकि इस अवधि तक करीब 27.4 इंच पानी गिरना चाहिए था। इस हिसाब से प्रदेश में सामान्य कोटे की लगभग 65 प्रतिशत बारिश ही हुई है और करीब 3 इंच बारिश की कमी बनी हुई है। हालांकि मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाला सप्ताह बारिश के लिहाज से बेहतर रह सकता है। यदि अगले कुछ दिनों तक तेज बारिश का दौर जारी रहता है तो कई जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य स्तर तक पहुंच सकता है।

    अगस्त के तीसरे सप्ताह में मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय रहा। मानसून ट्रफ के साथ डिप्रेशन और निम्न दबाव क्षेत्र बनने से प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में अच्छी बारिश हुई। डिंडौरी और सिवनी समेत कई जिलों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बने। नर्मदा और मंदाकिनी जैसी नदियों का जलस्तर बढ़ा जबकि कई इलाकों में झरने भी तेज बहाव के साथ बहते नजर आए। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।

    प्रदेश के संभागों की स्थिति देखें तो भोपाल शहडोल रीवा और जबलपुर संभाग की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। इसके उलट इंदौर उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में बारिश की कमी चिंता का विषय बनी हुई है। पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं पूर्वी हिस्से के भी कई जिलों में कमी है लेकिन कुछ क्षेत्रों में लगातार हुई बारिश ने स्थिति में सुधार किया है।

    जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो उमरिया और डिंडौरी में अब तक 34 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज हो चुकी है। इसके मुकाबले मुरैना प्रदेश का सबसे कम बारिश वाला जिला बना हुआ है जहां करीब 12 इंच पानी ही गिरा है। भिंड में भी लगभग 22 इंच बारिश दर्ज की गई है। दूसरी ओर अनूपपुर सतना शहडोल सीधी सिंगरौली उमरिया बड़वानी भोपाल गुना ग्वालियर खंडवा खरगोन और राजगढ़ समेत 15 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    मानसून की शुरुआत इस साल कुछ देरी से हुई थी। मध्य प्रदेश में मानसून 24 जून को पहुंचा था और इसके बाद करीब नौ दिनों में पूरे प्रदेश में सक्रिय हो गया। जून में बारिश की कमी करीब 30 प्रतिशत रही थी। हालांकि जुलाई की शुरुआत में बारिश ने जोर पकड़ा और आंकड़ा सामान्य से ऊपर पहुंच गया। इसके बाद कुछ समय मानसून कमजोर रहा लेकिन जुलाई के तीसरे और चौथे सप्ताह तथा अगस्त में कई दौर में अच्छी बारिश हुई।

    बारिश का सीधा असर प्रदेश के बांधों पर भी दिखाई दे रहा है। कई बड़े बांधों में जलस्तर तेजी से बढ़ा है। बरगी और जौहिला समेत कुछ बांधों के गेट खोले गए हैं। बरगी बांध के 13 गेट खुलने से निचले इलाकों में प्रशासन की निगरानी बढ़ी है। हालांकि इंदौर और उज्जैन संभाग के कुछ बांधों में अभी अपेक्षित जलभराव नहीं हुआ है।

    आने वाला सप्ताह मध्य प्रदेश के लिए बारिश के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाला है। यदि मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक अच्छी बारिश होती है तो फिलहाल पीछे चल रहे जिलों के आंकड़े में सुधार हो सकता है। खासकर पश्चिमी मध्य प्रदेश के उन इलाकों को बारिश की जरूरत है जहां सामान्य से काफी कम पानी गिरा है। ऐसे में अगले कुछ दिन प्रदेश के लिए मानसून के लिहाज से राहत देने वाले साबित हो सकते हैं।

  • कोलार से बैरागढ़ और ISBT तक सफर होगा आसान, भोपाल में 30 ई-बसों का बेड़ा तैयार; जानिए रूट और किराया

    कोलार से बैरागढ़ और ISBT तक सफर होगा आसान, भोपाल में 30 ई-बसों का बेड़ा तैयार; जानिए रूट और किराया


    भोपाल । राजधानी भोपाल में सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। शहर में 24 अगस्त से 10 और इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतरने जा रही हैं। इसके साथ ही भोपाल में ई-बसों की कुल संख्या बढ़कर 30 हो जाएगी। फिलहाल शहर में तीन प्रमुख रूट पर 20 ई-बसें संचालित हो रही हैं। नई बसों के शामिल होने के बाद यात्रियों को करीब 10 से 15 मिनट के अंतराल पर बस मिलने की उम्मीद है। इससे रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों छात्रों और आम यात्रियों को बड़ी राहत मिल सकती है।

    नई ई-बसों के संचालन से कोलार रोड बावड़ियाकलां बैरागढ़ एमपी नगर और ISBT जैसे प्रमुख इलाकों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। खास बात यह है कि तीनों प्रमुख रूट एमपी नगर से होकर गुजरते हैं। ऐसे में शहर के अलग अलग हिस्सों से एमपी नगर आने जाने वाले यात्रियों को ज्यादा विकल्प मिल सकेंगे। एमपी नगर शहर का प्रमुख व्यावसायिक और शैक्षणिक क्षेत्र होने के कारण यहां रोजाना बड़ी संख्या में कर्मचारी और विद्यार्थी पहुंचते हैं।

    वर्तमान में संचालित तीन रूट शहर के बड़े हिस्से को जोड़ रहे हैं। B35 रूट चिरायु अस्पताल और बैरागढ़ से आकृति ईको सिटी सलैया तक जाता है। इस रूट में लालघाटी कलेक्ट्रेट हमीदिया अस्पताल रॉयल मार्केट पीर गेट कमला पार्क रोशनपुरा बोर्ड ऑफिस एमपी नगर मेट्रो स्टेशन विट्ठन मार्केट 1100 क्वार्टर रोहित नगर और बावड़िया चौराहा जैसे प्रमुख स्थान शामिल हैं। वहीं B36 रूट कोच फैक्ट्री से कोलार रोड तक संचालित होता है। यह रेलवे स्टेशन अशोका गार्डन सुभाष नगर बोर्ड ऑफिस एमपी नगर मेट्रो स्टेशन बंसल अस्पताल चूनाभट्टी मंदाकिनी चौराहा और गेहूंखेड़ा जैसे इलाकों को जोड़ता है।

    B37 रूट बैरागढ़ ई बस डिपो से ISBT तक जाता है। इस मार्ग में बैरागढ़ मार्केट लालघाटी कलेक्ट्रेट हमीदिया अस्पताल रॉयल मार्केट नादरा बस स्टैंड भोपाल रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म नंबर 6 जहांगीराबाद मिंटो हॉल वल्लभ भवन विंध्याचल जिला न्यायालय DB मॉल और चेतक ब्रिज जैसे प्रमुख स्थान आते हैं। इस तरह तीनों रूट शहर के पश्चिमी हिस्से से लेकर मध्य और पूर्वी इलाकों तक यात्रियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

    ई बसों का न्यूनतम किराया करीब 6 से 7 रुपए है जबकि अधिकतम किराया 40 रुपए तक है। फिलहाल रोजाना करीब 10 से 12 हजार यात्री इन बसों में सफर कर रहे हैं। बसों की संख्या बढ़ने के बाद यात्रियों की संख्या में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है।

    इन ई बसों की खासियत सिर्फ बेहतर कनेक्टिविटी ही नहीं बल्कि यात्री सुविधाएं भी हैं। दिव्यांग यात्रियों के लिए बसों में हाइड्रोलिक डोर की सुविधा दी गई है। इसके जरिए व्हीलचेयर और ट्राइसिकल से आने वाले यात्री आसानी से बस में चढ़ और उतर सकते हैं। बस के अंदर ऐसी जगह भी बनाई गई है जहां एक साथ दो व्हीलचेयर या ट्राइसिकल खड़े किए जा सकते हैं।

    भोपाल के ट्रैफिक को देखते हुए भी इन बसों को उपयोगी माना जा रहा है। इनकी लंबाई करीब 9 मीटर है जबकि सामान्य सिटी बसें 12 मीटर तक लंबी होती हैं। कम लंबाई के कारण ई बसें अपेक्षाकृत तंग सड़कों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में आसानी से चल सकती हैं। सुरक्षा के लिए प्रत्येक बस में छह CCTV कैमरे लगाए गए हैं जिनकी निगरानी डिपो में बने कंट्रोल रूम से की जा रही है। नई बसों के सड़कों पर उतरने के बाद राजधानी के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • 17 वर्षीय किशोर हत्याकांड में पुलिस के सामने नई चुनौती तीन सर्चिंग के बाद मिली सिर्फ पॉलीथिन, 12 लाख के ट्रांजैक्शन की भी जांच

    17 वर्षीय किशोर हत्याकांड में पुलिस के सामने नई चुनौती तीन सर्चिंग के बाद मिली सिर्फ पॉलीथिन, 12 लाख के ट्रांजैक्शन की भी जांच


    भोपाल । भोपाल के श्यामला हिल्स इलाके में 17 वर्षीय किशोर की हत्या के मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। हत्या के बाद किशोर के शरीर के एक हिस्से को काटकर छोटे तालाब में फेंके जाने की बात सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर तीन बार तालाब में सर्चिंग की लेकिन अब तक उस अंग की बरामदगी नहीं हो सकी है। तलाशी के दौरान पुलिस को एक पॉलीथिन जरूर मिली लेकिन उसमें वह अंग नहीं था जिसकी तलाश की जा रही थी। अब पुलिस आरोपियों के बयानों के साथ उनके बैंक खातों मोबाइल फोन कॉल डिटेल और डिजिटल गतिविधियों की भी जांच कर रही है ताकि हत्या के पीछे के पूरे नेटवर्क और कथित आर्थिक लालच की वास्तविकता सामने लाई जा सके।

    पुलिस के अनुसार आरोपियों ने वारदात की साजिश 5 अगस्त को रची थी। इसके अगले दिन 6 अगस्त की रात किशोर को 100 रुपए देने का लालच देकर एक सुनसान स्थान पर ले जाया गया। इसके बाद किलोल पार्क के आसपास उसकी हत्या कर दी गई। जांच में यह भी सामने आया कि शरीर के हिस्से को काटने के लिए नया शेविंग ब्लेड खरीदा गया था जबकि हत्या में इस्तेमाल छुरी एक विधि विवादित बालक अपने साथ लेकर आया था। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी जोहेब खान के साथ आमिर और तीन विधि विवादित बालकों को पकड़ा है।

    हत्या के बाद किशोर के शरीर के काटे गए अंग को छोटे तालाब में फेंकने की बात आरोपियों ने पुलिस को बताई थी। इसी जानकारी के आधार पर पुलिस ने तालाब में तीन अलग अलग बार सर्चिंग की। हर बार उस इलाके के आसपास तलाश की गई जहां आरोपियों ने अंग फेंकने की बात कही थी। तलाशी के दौरान एक पॉलीथिन मिली और आरोपियों ने दावा किया कि इसी पॉलीथिन में अंग को बांधकर तालाब में फेंका गया था। हालांकि जब पुलिस ने इसकी जांच की तो पॉलीथिन के अंदर वह अंग मौजूद नहीं था।

    अब पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि पानी के बहाव के कारण वह दूसरी जगह पहुंच गया हो या कई दिनों तक पानी में रहने के कारण जैविक अपघटन हो गया हो। पानी में मौजूद जीव जंतुओं और अन्य प्राकृतिक कारणों से भी उसके नष्ट होने की संभावना पर जांच की जा रही है। हालांकि पुलिस ने अभी किसी संभावना को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना है। तालाब की गहराई पानी के बहाव और आसपास की भौगोलिक स्थिति को समझकर आगे की सर्चिंग की रणनीति तैयार की जा रही है।

    मामले की जांच में आर्थिक लेन देन भी पुलिस के लिए अहम कड़ी बन गया है। मुख्य आरोपी जोहेब के बैंक खाते में 12 लाख रुपए आने की सूचना सामने आई थी लेकिन पुलिस की तस्दीक में खाते में इतनी रकम जमा होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसके बाद पुलिस ने सभी आरोपियों के बैंक खातों की लेन देन हिस्ट्री खंगालना शुरू कर दिया है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या वारदात से पहले या बाद में किसी बाहरी व्यक्ति की ओर से आरोपियों को कोई रकम मिली थी।

    पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन कॉल डिटेल और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच कर रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपियों के संपर्क में कौन लोग थे और वारदात से पहले तथा बाद में उनकी किस किस व्यक्ति से बातचीत हुई। पुलिस इस पहलू की भी पड़ताल कर रही है कि कथित आर्थिक लालच की जानकारी आरोपियों को कहां से मिली और क्या इसके पीछे किसी बाहरी व्यक्ति की भूमिका थी।

    पूछताछ में आरोपियों के व्यवहार को लेकर भी पुलिस ने जानकारी जुटाई है। पुलिस के मुताबिक पूछताछ के दौरान आरोपियों में घटना को लेकर पछतावे के स्पष्ट संकेत नहीं दिखे और वे कथित तौर पर घटना के बारे में सामान्य तरीके से बात कर रहे थे। अब जांच एजेंसियां उनके आपसी संपर्क और वारदात से पहले तथा बाद की गतिविधियों को जोड़कर मामले की पूरी कड़ी तैयार करने में जुटी हैं।

    फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती किशोर के शरीर के लापता हिस्से की बरामदगी और हत्या के पीछे के वास्तविक मकसद की पूरी पुष्टि करना है। तीन बार तालाब में तलाश के बावजूद सफलता नहीं मिलने के बाद पुलिस वैज्ञानिक साक्ष्यों बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल जांच के आधार पर आगे बढ़ रही है। इस मामले में आने वाले दिनों में बैंक लेन देन और डिजिटल गतिविधियों से जुड़े नए सुराग सामने आने की उम्मीद है।

  • भोपाल की सड़कों पर जानलेवा गड्ढे और जलभराव से लोग परेशान निगम परिषद में कई मुद्दों पर बात लेकिन सड़कों पर खामोशी

    भोपाल की सड़कों पर जानलेवा गड्ढे और जलभराव से लोग परेशान निगम परिषद में कई मुद्दों पर बात लेकिन सड़कों पर खामोशी


    भोपाल राजधानी भोपाल में लगातार हो रही बारिश ने शहर की सड़कों की हालत खराब कर दी है। कई इलाकों में सड़कें उखड़ चुकी हैं और जगह जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं। बारिश का पानी इन गड्ढों में भर जाने के कारण वाहन चालकों के लिए खतरा और बढ़ गया है। कई जगह सड़क और गड्ढे के बीच अंतर करना तक मुश्किल हो जाता है। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों के साथ पैदल चलने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहरवासियों का कहना है कि जर्जर सड़कों की समस्या लगातार बढ़ रही है लेकिन जिम्मेदार स्तर पर इसका स्थायी समाधान दिखाई नहीं दे रहा है।

    इसी बीच बुधवार को भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक ISBT स्थित मीटिंग हॉल में आयोजित हुई। बैठक में नगर निगम से जुड़े कई अहम प्रस्तावों और मुद्दों पर पार्षदों तथा निगम प्रशासन के बीच चर्चा हुई। भवनों को किराए पर देने से लेकर फर्नीचर और स्टेशनरी की खरीद तथा मल्टीलेवल पार्किंग के ठेके जैसे विषय बैठक में उठाए गए। निगम परिषद की बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा और निर्णय की प्रक्रिया आगे बढ़ी लेकिन शहर की बदहाल सड़कों और गड्ढों की समस्या चर्चा का हिस्सा नहीं बन सकी।

    बारिश के बाद भोपाल के कई इलाकों में सड़कों की स्थिति लगातार खराब हुई है। कहीं सड़क की ऊपरी परत उखड़ गई है तो कहीं बड़े गड्ढे वाहन चालकों के लिए परेशानी बन चुके हैं। जिन सड़कों पर पहले से छोटे गड्ढे थे वे लगातार बारिश के कारण और गहरे हो गए हैं। पानी भरने के बाद इनकी वास्तविक गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता। ऐसे में तेज रफ्तार से गुजरने वाले वाहन अचानक गड्ढे में गिरने पर असंतुलित हो सकते हैं। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति ज्यादा जोखिम भरी हो जाती है।

    शहर के लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में सड़कों की स्थिति हर साल खराब होती है और कई स्थानों पर मरम्मत के बाद भी समस्या दोबारा सामने आ जाती है। नागरिक चाहते हैं कि केवल गड्ढों को मिट्टी या मलबे से भरने के बजाय सड़क की स्थायी मरम्मत की जाए ताकि बारिश के बाद दोबारा वही स्थिति पैदा न हो। कई लोगों का यह भी कहना है कि नगर निगम और संबंधित विभागों को बारिश के दौरान क्षतिग्रस्त सड़कों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत करानी चाहिए।

    नागरिकों के लिए सबसे बड़ी चिंता उन सड़कों की है जहां दिनभर भारी यातायात रहता है। इन मार्गों पर गड्ढों के कारण वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाने या रास्ता बदलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इससे यातायात प्रभावित होने के साथ दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है। वहीं पैदल राहगीरों के लिए जलभराव वाली सड़कें और खुले या गहरे गड्ढे अलग परेशानी पैदा कर रहे हैं।

    नगर निगम परिषद की बैठक में जब कई प्रशासनिक और ठेके से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई तो शहर की जर्जर सड़कों का विषय सामने नहीं आने पर नागरिकों के बीच सवाल उठ रहे हैं। लोगों की मांग है कि राजधानी की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को भी परिषद की प्राथमिकता में शामिल किया जाए। भोपालवासियों का कहना है कि सड़कों की समस्या सीधे उनकी रोजमर्रा की आवाजाही और सुरक्षा से जुड़ी है इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

    फिलहाल बारिश का दौर जारी रहने के कारण सड़कों की स्थिति और खराब होने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में शहरवासियों की नजर अब नगर निगम और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर है कि गड्ढों और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कब शुरू होती है और लोगों को इस परेशानी से कब राहत मिलती है।

  • MP: छिंदवाड़ा NICU अग्निकांड में 1 बच्ची की मौत, 2 झुलसे बच्चों के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी सरकार

    MP: छिंदवाड़ा NICU अग्निकांड में 1 बच्ची की मौत, 2 झुलसे बच्चों के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी सरकार


    छिंदवाड़ा।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल (Chhindwara District Hospital) के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (Special Newborn Care Unit) में शनिवार तड़के वार्मर मशीन में अचानक आग लगने से बड़ा हादसा हो गया. इस दुखद घटना में झुलसे तीन नवजात शिशुओं में से एक बच्ची ने जबलपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना जताई है।

    मुख्यमंत्री ने मृतक बच्ची के परिजनों को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है. इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि जबलपुर मेडिकल कॉलेज में उपचाराधीन अन्य दो नवजात बच्चों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी.

    आग लगने के तुरंत बाद ऑन-ड्यूटी स्टाफ ने मुस्तैदी दिखाते हुए अग्निशामक यंत्रों का उपयोग किया और ऑक्सीजन सप्लाई लाइन बंद कर बड़े हादसे को टाल दिया. यूनिट में मौजूद 33 नवजातों में से 30 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    वार्मर में रखे 3 बच्चे झुलस गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत एंबुलेंस और डॉक्टरों की निगरानी में जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया. इनमें से एक नवजात की हालत अत्यंत गंभीर थी, जिसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.

    इस घटना को लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल मरीजों की जान के लिए खतरा बनते जा रहे हैं. उन्होंने प्रदेश के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों का तुरंत फायर सेफ्टी ऑडिट कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    फिलहाल, छिंदवाड़ा जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन ने हादसे के तकनीकी कारणों की जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कर लिए गए हैं।

  • MP में आज 14 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, चंबल-जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग में चेतावनी

    MP में आज 14 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, चंबल-जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग में चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में बारिश का दौर अभी थमा नहीं है। पूर्वी हिस्से में लो प्रेशर एरिया और मानसून ट्रफ के एक्टिव होने से कई जिलों में तेज बारिश हो रही है। शनिवार को बालाघाट, छतरपुर, नरसिंहपुर, सतना, सीधी और पन्ना समेत कई जिलों में नदी-नाले उफान पर रहे। मौसम विभाग ने रविवार को 14 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। जबलपुर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग में बारिश का असर ज्यादा रहने की संभावना है, जबकि भोपाल में हल्की बारिश हो सकती है।

    14 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक अगले 24 घंटे में श्योपुर, मुरैना, भिंड, शिवपुरी, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, डिंडौरी और सीधी में भारी बारिश होने की संभावना है।

    वहीं भोपाल, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, हरदा, ग्वालियर, गुना, दतिया, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, मंडला, रीवा, सतना, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    सीधी में 104 करोड़ की सड़क का हिस्सा बहा

    लगातार बारिश के बीच सीधी में करीब छह महीने पहले बनी 104 करोड़ रुपए की सड़क का बड़ा हिस्सा तेज बहाव में बह गया। सड़क के क्षतिग्रस्त होने से आवागमन प्रभावित हुआ है।

    पन्ना में उफनती नदी में एक डंपर बह गया। धरमपुर थाना क्षेत्र में कालिंजर से अजयगढ़ जा रहा डंपर शहपुरा नदी के तेज बहाव की चपेट में आया। चालक सनी उर्फ रोहित सिंह ने किसी तरह तैरकर अपनी जान बचाई।

    सतना में बाइक समेत तीन लोग नाले में बहे

    सतना के नागौद क्षेत्र में ललचहा-इटमा नाले में शुक्रवार देर रात तेज बहाव के दौरान बाइक समेत तीन लोग बह गए। बालेंद्र सिंह और दीपू पांडेय तैरकर सुरक्षित बाहर निकल आए, जबकि तीसरा व्यक्ति पानी के तेज बहाव में बह गया। उसकी तलाश की जा रही है।

    छतरपुर में नदी पार कर स्कूल जाते हैं बच्चे

    छतरपुर के महाराजपुर क्षेत्र के हरपई पुरवा में कुम्हेड़ नदी का जलस्तर बढ़ने से करीब 250 से 300 लोगों की परेशानी बढ़ गई है। पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों का महाराजपुर से संपर्क प्रभावित हो जाता है। कई बार अभिभावकों को बच्चों को कंधे पर बैठाकर नदी पार करानी पड़ती है। बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को भी इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है।

    नर्मदा का जलस्तर बढ़ा, पुल डूबे

    नरसिंहपुर में लगातार बारिश और बरगी बांध के गेट खुले होने से नर्मदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। बरमान के रेतघाट पर बना पुल पूरी तरह पानी में डूब गया है। वहीं नरसिंहपुर-जबलपुर को जोड़ने वाला झांसीघाट पुल भी जलमग्न होने की स्थिति में पहुंच गया है।

    26 अगस्त तक बारिश का दौर

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 21 और 22 अगस्त को पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का सबसे ज्यादा असर रहा। अब 23 से 26 अगस्त तक भी प्रदेश में बारिश जारी रहने के आसार हैं। इस दौरान पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी तेज बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

    40 जिलों में सामान्य से कम बारिश

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में अब तक 19% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, डिंडौरी, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी और टीकमगढ़ में सामान्य से 1% से 51% तक कम पानी गिरा है।

    पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, अलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 2% से 47% तक कम बारिश दर्ज हुई है।

    15 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    IMD के आंकड़ों के मुताबिक अनूपपुर, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, बड़वानी, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन और राजगढ़ में अब तक सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • जबलपुर की महिला आरक्षक वर्षा पटेल ने माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा फहराकर मध्य प्रदेश पुलिस का गौरव बढ़ाया

    जबलपुर की महिला आरक्षक वर्षा पटेल ने माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा फहराकर मध्य प्रदेश पुलिस का गौरव बढ़ाया

    मध्य प्रदेश पुलिस में आरक्षक के पद पर कार्यरत वर्षा पटेल ने पर्वतारोहण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जबलपुर की रहने वाली वर्षा ने 21 अगस्त 2026 को यूरोप की सर्वोच्च चोटी माउंट एल्ब्रुस के शिखर पर पहुंचकर भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा और मध्य प्रदेश पुलिस का ध्वज फहराया। उनकी इस उपलब्धि से जबलपुर के साथ-साथ मध्य प्रदेश पुलिस का भी गौरव बढ़ा है।

    माउंट एल्ब्रुस अभियान की शुरुआत 11 अगस्त को हुई थी। अभियान के दौरान पर्वतारोहियों को मौसम की चुनौती का सामना करना पड़ा। तेज हवाओं, कड़ाके की ठंड और बदलती मौसम परिस्थितियों के कारण टीम को शिखर अभियान के लिए अनुकूल समय का इंतजार करना पड़ा। मौसम में सुधार आने के बाद अंतिम चढ़ाई शुरू की गई और वर्षा पटेल ने निर्धारित लक्ष्य हासिल करते हुए चोटी पर तिरंगा फहराया।

    वर्षा पटेल का पर्वतारोहण से जुड़ा सफर उनकी खेल पृष्ठभूमि से भी जुड़ा हुआ है। जबलपुर के गढ़ा क्षेत्र से संबंध रखने वाली वर्षा को बचपन से खेल और साहसिक गतिविधियों में रुचि रही है। वह राष्ट्रीय स्तर की बेसबॉल खिलाड़ी भी रह चुकी हैं। विभिन्न प्रतियोगिताओं में उनके नाम 10 से अधिक पदक हासिल करने की जानकारी सामने आई है।

    मध्य प्रदेश पुलिस में जिम्मेदारी निभाने के साथ वर्षा ने पर्वतारोहण के अपने जुनून को भी जारी रखा। पुलिस सेवा की नियमित जिम्मेदारियों के बीच कठिन पर्वतारोहण अभियानों की तैयारी करना उनके अनुशासन और निरंतर प्रयास को दर्शाता है। माउंट एल्ब्रुस की सफलता उनके इसी अभियान का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

    इससे पहले वर्षा पटेल ने अगस्त 2024 में ऑस्ट्रेलिया की सर्वोच्च चोटी माउंट कोजियास्को पर भारत का तिरंगा फहराया था। उस समय भी उन्होंने पर्वतारोहण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की थी। माउंट कोजियास्को की ऊंचाई करीब 2,228 मीटर है और इसे ऑस्ट्रेलिया की सबसे ऊंची चोटी माना जाता है।

    माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा फहराने के बाद वर्षा पटेल का लक्ष्य अब और बड़े पर्वतारोहण अभियानों की ओर बढ़ना है। वह दुनिया के सात महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर पहुंचकर भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराने वाले सात शिखर अभियान को पूरा करना चाहती हैं। माउंट एल्ब्रुस की सफलता के बाद उनकी नजर अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी माउंट किलिमंजारो पर है।

    सात शिखर अभियान को दुनिया के प्रमुख पर्वतारोहण लक्ष्यों में गिना जाता है। इसके तहत सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों को फतह करने का प्रयास किया जाता है। वर्षा पटेल की मौजूदा उपलब्धि इस लंबे अभियान की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

    वर्षा की यात्रा यह भी दिखाती है कि पुलिस सेवा, खेल और साहसिक गतिविधियों को एक साथ आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रशिक्षण, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता जरूरी होती है। माउंट एल्ब्रुस की कठिन परिस्थितियों में हासिल की गई यह सफलता उनके पर्वतारोहण अभियान को नई दिशा देती है और आने वाले अभियानों के लिए उनके अनुभव को मजबूत करती है।

    मध्य प्रदेश के लिए भी यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य पुलिस में कार्यरत एक महिला आरक्षक ने अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियान में अपनी पहचान बनाई है। तिरंगे के साथ मध्य प्रदेश पुलिस का ध्वज फहराकर वर्षा ने अपनी सेवा और अपने राज्य दोनों का प्रतिनिधित्व किया। अब उनकी अगली चुनौती माउंट किलिमंजारो और सात शिखर अभियान के अन्य पर्वतों तक पहुंचने की होगी।

  • रील बनाने का जुनून या ट्रैफिक के लिए खतरा? इंदौर में गाड़ियों के सामने जेब्रा क्रॉसिंग पर लेटी इंफ्लुएंसर, पुलिस ने शुरू की जांच

    रील बनाने का जुनून या ट्रैफिक के लिए खतरा? इंदौर में गाड़ियों के सामने जेब्रा क्रॉसिंग पर लेटी इंफ्लुएंसर, पुलिस ने शुरू की जांच


    इंदौर। सोशल मीडिया पर वायरल होने की होड़ में बनाए जा रहे वीडियो अब कई बार लोगों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। इंदौर में ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां एक महिला इंफ्लुएंसर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में युवती ट्रैफिक सिग्नल के पास वाहनों के सामने जेब्रा क्रॉसिंग पर लेटकर वीडियो शूट कराती नजर आ रही है। वीडियो सामने आने के बाद इंदौर पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल ने मामले को संज्ञान में लिया है और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है।

    प्रारंभिक जांच में पुलिस को वायरल वीडियो इंदौर के लैंटर्न चौराहे का प्रतीत हो रहा है। वीडियो में सिग्नल पर वाहन रुके हुए दिखाई देते हैं और इसी दौरान युवती उनके आगे जेब्रा क्रॉसिंग पर लेटती नजर आती है। बताया जा रहा है कि युवती का नाम प्रकृति गौर है और वह सोशल मीडिया के लिए फोटो और वीडियो शूट करा रही थी। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भी सड़क पर इस तरह शूटिंग करने को लेकर सवाल उठाए और यातायात नियमों के पालन की मांग की।

    मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंचने के बाद सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल ने वायरल वीडियो को आइडेंटिफाई किया। एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया के मुताबिक शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर सामने आए इस वीडियो की पुलिस ने पहचान की है। शुरुआती जांच में वीडियो लैंटर्न चौराहे का होने की संभावना सामने आई है। हालांकि पुलिस अब वीडियो से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि कर रही है।

    पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वीडियो शूट के दौरान वास्तव में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन हुआ था या नहीं। इसके साथ ही यह देखा जा रहा है कि युवती के सड़क पर लेटने से यातायात प्रभावित हुआ या वाहन चालकों और राहगीरों के लिए किसी तरह का खतरा पैदा हुआ। अगर जांच में नियमों का उल्लंघन या लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने की बात सामने आती है तो संबंधित युवती के खिलाफ नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।

    एडिशनल डीसीपी ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाने की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि यातायात नियमों की अनदेखी की जाए। पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह की ओर से सोशल मीडिया कंटेंट को लेकर जारी प्रिवेंटिव ऑर्डर के तहत भी इस मामले की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इंफ्लुएंसर कोई भी हो यदि उसके कंटेंट के कारण यातायात बाधित होता है या खुद अथवा किसी अन्य व्यक्ति की जान को खतरा पैदा होता है तो कार्रवाई की जा सकती है।

    वहीं मामला सामने आने और विवाद बढ़ने के बाद संबंधित इंफ्लुएंसर ने एक अन्य वीडियो जारी कर सफाई दी और खेद जताया। उनका कहना है कि वीडियो को कुछ लोगों ने गलत तरीके से पेश किया है। इंफ्लुएंसर ने दावा किया कि शूटिंग के दौरान जानबूझकर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन नहीं किया गया था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में सार्वजनिक स्थानों पर वीडियो शूट करते समय ज्यादा सावधानी बरती जाएगी।

    फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। वीडियो की वास्तविक लोकेशन शूटिंग के समय ट्रैफिक की स्थिति और नियमों के उल्लंघन से जुड़े तथ्यों की पुष्टि के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। यह मामला एक बार फिर सोशल मीडिया कंटेंट बनाने के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों का ध्यान रखने की जरूरत को सामने लाता है।

  • बाढ़ ने VIP ठिकाने को भी नहीं छोड़ा, दूसरी मंजिल पर गुजरी रात; पानी उतरते ही कीचड़ का कहर

    बाढ़ ने VIP ठिकाने को भी नहीं छोड़ा, दूसरी मंजिल पर गुजरी रात; पानी उतरते ही कीचड़ का कहर


    रीवा।
    मध्य प्रदेश के रीवा में लगातार बारिश के बाद बीहर नदी का जलस्तर बढ़ने से शहर के कई हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। इस बाढ़ का असर आम लोगों के साथ जनप्रतिनिधियों के घरों तक भी पहुंचा। गुढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक नागेंद्र सिंह का निजी निवास भी बाढ़ के पानी की चपेट में आ गया। नदी किनारे स्थित उनके घर के निचले हिस्से में पानी भर जाने के कारण उन्हें करीब 18 घंटे से ज्यादा समय तक घर की दूसरी मंजिल पर रहना पड़ा। बारिश और नदी के बढ़े जलस्तर के कारण स्थिति ऐसी बन गई थी कि घर से नीचे उतरना मुश्किल था।

    बीहर नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ ही विधायक के घर के ग्राउंड फ्लोर और आसपास के हिस्सों में पानी पहुंच गया। हालात को देखते हुए नागेंद्र सिंह ने घर की दूसरी मंजिल पर ही रहकर पानी कम होने का इंतजार किया। लंबे समय तक बाढ़ का पानी घर के आसपास जमा रहने से निचले हिस्से में भारी गंदगी और कीचड़ फैल गया। बारिश का दौर कमजोर पड़ने के बाद जब नदी का जलस्तर नीचे आया तो विधायक घर के निचले हिस्से में पहुंचे। इसके बाद वहां सफाई का काम शुरू कराया गया।

    पानी उतरने के बाद घर के भीतर और आसपास की स्थिति ने बाढ़ की भयावहता को साफ दिखा दिया। कई हिस्सों में कीचड़ और गंदगी जमा हो गई थी। बाढ़ का पानी अपने साथ गाद और दूसरी गंदगी भी लेकर आया जिससे घर के निचले हिस्से को साफ करने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। फिलहाल सफाई का काम जारी है।

    बाढ़ के बाद भाजपा विधायक नागेंद्र सिंह ने शहर में जलभराव और बाढ़ की स्थिति को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने नदी और उसके आसपास बढ़ते अतिक्रमण को बाढ़ की गंभीर वजहों में से एक बताया। विधायक का कहना है कि नदी के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण होने से पानी के निकलने का रास्ता प्रभावित होता है। जब बारिश के दौरान नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता है तो पानी को पर्याप्त जगह नहीं मिलती और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है।

    नागेंद्र सिंह ने रीवा में हाल के वर्षों में बनाए गए कुछ नए पुलों की ऊंचाई और डिजाइन को लेकर भी सवाल खड़े किए। उनके अनुसार नए पुलों की ऊंचाई पुराने पुलों की तुलना में कम दिखाई देती है। उनका दावा है कि पुलों की संरचना और कम ऊंचाई के कारण बीहर नदी के पानी के प्रवाह में रुकावट पैदा हो सकती है। इसका असर बाढ़ के दौरान आसपास के इलाकों में दिखाई देता है।

    विधायक के मुताबिक इस बार नदी का जलस्तर बढ़ने और पानी के बहाव में रुकावट के चलते हालात ज्यादा गंभीर हुए। इसका असर उनके खुद के घर पर भी पड़ा और उन्हें लंबे समय तक दूसरी मंजिल पर रहना पड़ा। हालांकि अब नदी का जलस्तर घटने लगा है और घर में सफाई का काम चल रहा है।

    रीवा में आई इस बाढ़ ने एक बार फिर नदी के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र अतिक्रमण और पुलों के निर्माण की गुणवत्ता व डिजाइन को लेकर चर्चा तेज कर दी है। विधायक ने जिन मुद्दों को उठाया है उन पर प्रशासनिक स्तर पर जांच और तकनीकी समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है ताकि भविष्य में भारी बारिश के दौरान शहर और नदी किनारे रहने वाले लोगों को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।