Category: Madhya Pradesh

  • इंदौर में H1N1 से महिला की मौत, भोपाल में 6 केस के बावजूद जांच शुरू नहीं: अस्पतालों में बढ़े खांसी-बुखार के मरीज

    इंदौर में H1N1 से महिला की मौत, भोपाल में 6 केस के बावजूद जांच शुरू नहीं: अस्पतालों में बढ़े खांसी-बुखार के मरीज


    इंदौर । इंदौर में स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 संक्रमण से उज्जैन की 60 वर्षीय महिला की मौत के बाद मध्य प्रदेश में मौसमी वायरल संक्रमण और फ्लू को लेकर चिंता बढ़ गई है। राजधानी भोपाल में भी अब तक छह मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद यहां सरकारी स्तर पर एच1एन1 की नियमित जांच शुरू नहीं हो सकी है। गांधी मेडिकल कॉलेज में जांच किट उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों के सैंपल की जांच की व्यवस्था शुरू होने का इंतजार किया जा रहा है। ऐसे समय में जब मौसम में बदलाव के साथ खांसी, बुखार, गले में खराश और सांस संबंधी परेशानियों वाले मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं, जांच व्यवस्था को लेकर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

    भोपाल के बड़े अस्पतालों की ओपीडी में रोज करीब 10 हजार मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिन्हें गले में खराश, खांसी, बुखार, नाक बहने और कमजोरी जैसी शिकायतें हैं। डॉक्टरों के अनुसार इन लक्षणों के पीछे सामान्य वायरल संक्रमण के अलावा इंफ्लूएंजा ए, एच1एन1, इंफ्लूएंजा बी, एडिनोवायरस और अन्य रेस्पिरेटरी वायरस भी कारण हो सकते हैं। शुरुआती लक्षण काफी हद तक एक जैसे होने के कारण केवल सामान्य लक्षणों को देखकर संक्रमण की सही पहचान करना मुश्किल हो जाता है।

    इंदौर में इलाज के दौरान एक महिला की मौत और भोपाल में पॉजिटिव मामले सामने आने के बाद भी जांच किट का उपलब्ध नहीं होना चिंता का विषय है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यक्ति की एच1एन1 जांच कराना जरूरी नहीं होता। मरीज की स्थिति, लक्षणों की गंभीरता और संक्रमण के जोखिम को देखते हुए डॉक्टर जांच की सलाह देते हैं। एम्स भोपाल में भी सामान्य तौर पर हर मरीज का टेस्ट नहीं किया जा रहा है, बल्कि संदिग्ध लक्षणों वाले मरीजों के सैंपल उनकी स्थिति के आधार पर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं।

    पल्मोनोलॉजिस्ट के अनुसार मौसम में अचानक बदलाव, नमी और तापमान में उतार चढ़ाव के कारण वायरल और सांस से जुड़ी बीमारियां बढ़ सकती हैं। राहत की बात यह है कि इंफ्लूएंजा के अधिकांश मरीज सामान्य इलाज, आराम और डॉक्टर की सलाह से ठीक हो सकते हैं। लेकिन कुछ मरीजों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है और फेफड़ों तक पहुंचने पर निमोनिया जैसी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। सांस लेने में परेशानी, शरीर में ऑक्सीजन की कमी, लगातार तेज बुखार या स्थिति तेजी से बिगड़ने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में अस्पताल में भर्ती करने और जरूरत पड़ने पर आईसीयू सपोर्ट की आवश्यकता हो सकती है।

    डॉक्टरों ने यह भी बताया है कि कई परिवारों में एक सदस्य के बीमार होने के दो या तीन दिन बाद दूसरे सदस्यों में भी खांसी, बुखार और गले में खराश जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इसलिए संक्रमण के दौरान सावधानी बेहद जरूरी है। बीमार व्यक्ति को संभव हो तो घर पर आराम करना चाहिए, दूसरों के संपर्क में कम आना चाहिए और मास्क का उपयोग करना चाहिए। हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से धोना तथा आंख, नाक और मुंह को बार बार छूने से बचना भी संक्रमण के खतरे को कम कर सकता है।

    विशेषज्ञों ने बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीवायरल दवा लेने से भी सावधान किया है। हर मरीज की स्थिति अलग होती है और गलत दवा या अधूरा इलाज नुकसान पहुंचा सकता है। डॉक्टर यदि एंटीवायरल दवा लिखते हैं तो उसका पूरा कोर्स करना जरूरी है। पर्याप्त आराम, गुनगुना पानी और तरल पदार्थों का सेवन भी मददगार हो सकता है।

    एच1एन1 से बचाव के लिए इंफ्लूएंजा वैक्सीन भी उपलब्ध है। खासतौर पर उन लोगों को डॉक्टर की सलाह के बाद टीकाकरण पर विचार करना चाहिए जिनमें संक्रमण के गंभीर होने का खतरा अधिक है। फिलहाल सबसे जरूरी है कि खांसी, बुखार और सांस संबंधी लक्षणों को हल्के में न लिया जाए और हालत बिगड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह ली जाए।

  • सीलिंग कार्रवाई से भड़के भोपाल के व्यापारी, 170 प्रतिष्ठानों पर एक्शन के बाद कोलार रोड पर आंदोलन की तैयारी

    सीलिंग कार्रवाई से भड़के भोपाल के व्यापारी, 170 प्रतिष्ठानों पर एक्शन के बाद कोलार रोड पर आंदोलन की तैयारी


    भोपाल । भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण को लेकर चल रही सीलिंग कार्रवाई अब बड़ा विवाद बनती जा रही है। नगर निगम की लगातार कार्रवाई से नाराज व्यापारियों ने विरोध तेज कर दिया है। इसी क्रम में कोलार व्यापारी महासंघ ने बुधवार को कोलार रोड बंद रखने का आह्वान किया है। व्यापारी अपनी दुकानें बंद रखकर नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई का विरोध करेंगे और सड़क पर उतरकर प्रदर्शन भी करेंगे। महासंघ की ओर से कोलार तिराहे से गोल जोड़ तक सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील की गई है। हालांकि मेडिकल और पेट्रोल पंप जैसी आवश्यक सेवाओं को बंद से अलग रखा गया है।

    व्यापारियों का कहना है कि जिस तरह से नगर निगम प्रतिष्ठानों को बंद करने की कार्रवाई कर रहा है उससे छोटे कारोबारियों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। कोलार व्यापारी महासंघ के पदाधिकारियों का आरोप है कि कार्रवाई के कारण बड़ी संख्या में व्यापारी परेशान हैं और अब उनके सामने विरोध प्रदर्शन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। मंगलवार को भी सीलिंग कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों ने अलग तरीके से प्रदर्शन किया था। कई व्यापारियों ने थाली और मंजीरा बजाकर अपनी नाराजगी जताई और प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद की।

    दूसरी ओर नगर निगम ने साफ कर दिया है कि कार्रवाई रुकने वाली नहीं है। निगम लगातार तीसरे दिन भी प्रतिष्ठानों को बंद कराने की कार्रवाई करने की तैयारी में है। अब तक करीब 170 प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की जा चुकी है। नगर निगम की कार्रवाई के साथ ही व्यापारी संगठनों का विरोध भी लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को व्यापारियों ने रोशनपुरा चौराहे पर करीब चार घंटे तक प्रदर्शन किया और सीलिंग की कार्रवाई पर सवाल उठाए।

    मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने वाले याचिकाकर्ताओं की ओर से भी नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि कार्रवाई सभी पर समान रूप से नहीं हो रही है और छोटे कारोबारियों को अधिक परेशान किया जा रहा है जबकि प्रभावशाली और बड़े लोगों के प्रतिष्ठानों को लेकर भी जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। इस संबंध में पूरी स्थिति की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाने की बात कही गई है।

    भोपाल में यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से भी जुड़ी हुई है। आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण के मामले में अगस्त के पहले सप्ताह में सुनवाई हुई थी। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से गठित जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगाई गई और मामले में पहले दिए गए राहत आदेशों को भी लेकर स्थिति बदली। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके निर्देशों के तहत चल रही जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होनी है और इससे पहले नगर निगम को कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट पेश करनी है।

    इसी कारण शहर में नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई को तेज किया गया है। नगर निगम मुख्य मार्गों के दोनों ओर और उनसे जुड़ी गलियों में भी सर्वे कर रहा है। नदी और तालाब किनारे बने भवन ग्रीन बेल्ट बफर जोन और कैचमेंट क्षेत्र में स्थित निर्माण प्राथमिक जांच के दायरे में रखे गए हैं। अवैध मैरिज गार्डन और नियमों के विरुद्ध संचालित अन्य प्रतिष्ठानों की भी जांच की जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में भोपाल में सीलिंग कार्रवाई और व्यापारियों के विरोध के बीच टकराव और तेज होने की संभावना बनी हुई है।

  • MP में फर्जी IAS बनकर रुतबा दिखाने वाली तृप्ति राजपूत का नया वीडियो वायरल, बोलीं-हमारी हरकतें देखकर…

    MP में फर्जी IAS बनकर रुतबा दिखाने वाली तृप्ति राजपूत का नया वीडियो वायरल, बोलीं-हमारी हरकतें देखकर…


    भोपाल। मध्य प्रदेश में फर्जी IAS बनकर रुतबा दिखाने के आरोपों में गिरफ्तार तृप्ति सिंह राजपूत से जुड़ा एक और वीडियो सामने आने के बाद मामला फिर चर्चा में है। वायरल वीडियो में तृप्ति अपनी दो सहेलियों के साथ नजर आ रही है। तीनों खुद को IAS अफसर बताते हुए बातचीत और मस्ती करती दिखाई दे रही हैं। हालांकि वीडियो को विधानसभा परिसर के बाहर का बताया जा रहा था, लेकिन अब इसकी लोकेशन को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

    वीडियो में बोली- हमारी हरकतें देखकर कोई नहीं कह सकता कि हम IAS हैं
    वीडियो में तृप्ति सिंह राजपूत कहती सुनाई दे रही है- “हमारी हरकतों को देखकर कोई कल्पना नहीं कर सकता कि हम तीनों IAS अफसर हैं… हां, हम थोड़े बेवकूफ हैं, मगर धीरे-धीरे प्रोग्रेस हो रही है।” इसके बाद उसकी एक सहेली कहती है- “हम दोनों प्रोग्रेस पर हैं, लेकिन यह हमारी सीनियर हैं।” इस पर तृप्ति जवाब देती है- “मैं भी प्रोग्रेस पर हूं, लेकिन मैं इन्हीं की उम्र की हूं।”

    विधानसभा PRO ने परिसर का वीडियो होने से किया इनकार
    वीडियो सामने आने के बाद इसे मध्यप्रदेश विधानसभा परिसर के बाहर का बताया गया। हालांकि, विधानसभा के PRO महावीर जैन ने वीडियो को मध्यप्रदेश विधानसभा का होने से इनकार किया है। उनका कहना है कि विधानसभा भवन में इस तरह के लाल पत्थर नहीं लगे हैं। ऐसे में वीडियो विधानसभा परिसर का नहीं माना जा सकता। अब पुलिस वायरल वीडियो में दिखाई दे रही जगह और उसकी वास्तविकता की जांच कर रही है।

    फर्जी IAS बन नौकरी लगवाने का झांसा देने का आरोप
    तृप्ति सिंह राजपूत पर फर्जी IAS बनकर लोगों को नौकरी लगवाने का झांसा देने और कथित तौर पर पैसे लेने के आरोप हैं। चंदेरी पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए तृप्ति सिंह और उसके भाई को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान भोपाल स्थित उसके घर से ‘भारत सरकार’ लिखी इनोवा कार, फर्जी दस्तावेज और कथित फर्जी CBI कार्ड सहित कई सामान मिलने की बात सामने आई थी।

    भोपाल में भी धोखाधड़ी की FIR
    तृप्ति सिंह के खिलाफ भोपाल में भी नौकरी लगवाने के नाम पर धोखाधड़ी की FIR दर्ज है। चंदेरी पुलिस भोपाल पहुंची थी और आरोपियों से जुड़े ठिकानों पर जांच की गई थी। वहीं, वायरल वीडियो के संबंध में एडिशनल DCP अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि फर्जी IAS को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। नौकरी लगवाने के नाम पर लोगों से पैसे लेने और धोखाधड़ी के आरोपों की जांच चल रही है। वायरल वीडियो को भी जांच के दायरे में रखा गया है। पुलिस यह पता लगा रही है कि वीडियो कहां का है और उसमें दिखाई दे रही जगह की वास्तविकता क्या है। जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • जबलपुर समेत MP के 22 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, सतना में स्कूल-कॉलेज बंद

    जबलपुर समेत MP के 22 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, सतना में स्कूल-कॉलेज बंद


    भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में स्ट्रॉन्ग मानसूनी सिस्टम सक्रिय है। जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के कई जिलों में इसका असर दिखाई दे रहा है। भारी बारिश से कई इलाकों में बाढ़ के हालात हैं। सतना में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। मंगलवार को रामघाट की करीब 400 दुकानें और 20-25 होटल पानी में डूब गए। हालात को देखते हुए सतना में 2 और 3 सितंबर को सभी स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ियां बंद रहेंगी।

    आज 22 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    IMD (मौसम केंद्र) भोपाल के अनुसार, अगले 24 घंटे में सीधी, पन्ना, कटनी, उमरिया, डिंडौरी, मंडला और सिवनी में 4 इंच से ज्यादा बारिश हो सकती है। इन जिलों के लिए अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, सागर, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, जबलपुर, छतरपुर, सतना, रीवा, मऊगंज, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर और बालाघाट में भारी बारिश की चेतावनी है। इसके अलावा भोपाल, सीहोर, राजगढ़, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, पांढुर्णा, मैहर, दमोह, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    बंगाल की खाड़ी का लो प्रेशर बना वजह

    मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर एरिया सक्रिय है। दक्षिणी हिस्से से ट्रफ गुजर रही है, जबकि ऊपरी हिस्से में मानसून ट्रफ भी सक्रिय है। इन सिस्टम के प्रभाव से प्रदेश में लगातार बारिश हो रही है। अगले तीन दिनों में सिस्टम के और मजबूत होने की संभावना है।

    कल से भोपाल, ग्वालियर-उज्जैन में बढ़ेगा असर

    2 सितंबर: पूर्वी मध्य प्रदेश में तेज बारिश का दौर जारी रहेगा। भोपाल और नर्मदापुरम संभाग के कुछ जिलों में भी तेज बारिश हो सकती है।

    3 सितंबर: सिस्टम आगे बढ़ेगा और भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, नर्मदापुरम, रीवा और जबलपुर संभाग में इसका असर रहेगा।

    4 सितंबर: पश्चिमी हिस्से में सिस्टम का ज्यादा प्रभाव रहेगा। भोपाल, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग में तेज बारिश होगी।

    5 सितंबर: इन संभागों में भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    डैमों में 70% से ज्यादा पानी

    लगातार बारिश से प्रदेश के अधिकांश डैमों में पानी की स्थिति सुधरी है। कई डैम 70% तक भर चुके हैं और कुछ के गेट भी खोले गए हैं। हालांकि इंदौर और उज्जैन संभाग के डैमों में अभी स्थिति बेहतर नहीं है।

    भोपाल के बड़े तालाब का जलस्तर 1666.50 फीट पहुंच गया है। अब यह सिर्फ 0.30 फीट खाली है। तालाब फुल होने के बाद भदभदा डैम के गेट खोले जाएंगे। यहां से छोड़ा गया पानी कलियासोत डैम में पहुंचेगा, जिससे उसका जलस्तर भी बढ़ेगा।

    अब तक 27.8 इंच बारिश, सामान्य से 11% कम

    IMD के मुताबिक, मध्य प्रदेश में अब तक 707.1 मिमी यानी 27.8 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य बारिश 31.2 इंच (791.7 मिमी) के मुकाबले यह करीब 3.1 इंच कम है। प्रदेश में अब तक कुल 11% कम बारिश हुई है। पूर्वी हिस्से में सामान्य से 5% और पश्चिमी हिस्से में 16% बारिश कम हुई है।

    40 जिलों में 2 से 55% तक कम बारिश

    पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में सामान्य से करीब 5% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी और टीकमगढ़ समेत जिलों में 2% से 55% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 1% से 53% तक कम बारिश हुई है।

    15 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    अनूपपुर, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़ और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • MP में कोई भी डीलर 4 हजार क्विंटल से अधिक चीनी का नहीं रखेगा स्टॉक, आदेश जारी

    MP में कोई भी डीलर 4 हजार क्विंटल से अधिक चीनी का नहीं रखेगा स्टॉक, आदेश जारी


    भोपाल।मध्यप्रदेश में कोई भी डीलर 4 हजार क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रखेगा। साथ ही स्टॉक को 30 दिन से अधिक समय तक भंडारित भी नहीं करेगा। सभी डीलरों द्वारा भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के पोर्टल पर स्टॉक की घोषणा को नियमित अद्यतन करना अनिवार्य होगा। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने यह जानकारी देते हुए बताया है कि इस संबंध में जरूरी कार्यवाही के निर्देश सभी कलेक्टर को दिये गये हैं।

    सरकारी खाते पर या राज्य सरकार या उसके द्वारा प्राधिकृत किसी प्राधिकारी द्वारा विशेष रूप से किसी डीलर के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से वितरण के लिये स्टॉक के भंडारण पर यह सीमा लागू नहीं होगी।

    थोक उपभोक्ताओं के लिये स्टॉक रखने की सीमा

    कोई भी थोक उपभोक्ता, जो उत्पादन, उपभोग या उपयोग के लिये कच्चे माल के रूप में किसी भी प्रकार से प्रतिमाह 10 मीट्रिक टन चीनी का उपयोग या उपभोग करता है, वह 15 दिनों से अधिक की अवधि के लिये चीनी का स्टॉक नहीं करेगा। थोक उपभोक्ता से अभिप्राय है हलवाई, मिठाई विक्रेता, शीतल पेय निर्माता, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग आदि, जिसने चालू माह को छोड़कर पिछले एक वर्ष के दौरान औसत मासिक खपत के रूप में न्यूनतम 100 मीट्रिक टन का उपयोग किया है।

    राज्य सरकार द्वारा इस आदेश का कड़ाई से पालन करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये गये हैं।

  • विजय शाह मामले में राजभवन पहुंची कांग्रेस, राज्यपाल से मंत्री पर केस चलाने की मंजूरी देने की मांग

    विजय शाह मामले में राजभवन पहुंची कांग्रेस, राज्यपाल से मंत्री पर केस चलाने की मंजूरी देने की मांग

    भोपाल। जनजातीय कार्य विभाग मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी न देने के सरकार के फैसले को लेकर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल मंगुभाई पटेल को ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस ने कैबिनेट के फैसले पर पुनर्विचार कर मंत्री के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी देने की मांग की। राज्यपाल ने मामले पर पुनर्विचार करने और सरकार से चर्चा के बाद उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया है।

    मंत्री के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर कांग्रेस का विरोध
    कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान को लेकर विजय शाह पहले से ही राजनीतिक विवादों में घिरे हैं। इसी मामले में राज्य कैबिनेट द्वारा उनके खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति नहीं देने के फैसले का कांग्रेस ने विरोध किया है। उमंग सिंघार के साथ विधायक आरिफ मसूद और सुरेश राजे भी राजभवन पहुंचे।

    राज्यपाल से मुलाकात के बाद सिंघार ने कहा कि सरकार अपनी बदनामी से बचने के लिए राज्यपाल को बीच में ला रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री और सरकार के पास मंत्री को हटाने और केस चलाने की मंजूरी देने का अधिकार है, तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

    ‘देश की बेटी के अपमान पर सरकार चुप’
    उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और ‘लाड़ली बहना’ जैसे अभियानों की बात करने वाली सरकार सेना की महिला अधिकारी के अपमान के मामले में चुप है। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए सरकार की नीयत पर भी सवाल उठाए।

    सिंघार के मुताबिक, राज्यपाल ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया है कि वे मामले पर पुनर्विचार करेंगे और सरकार से चर्चा कर उचित कदम उठाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मंत्री पर कार्रवाई करने के बजाय जिम्मेदारी राज्यपाल के पाले में डाल दी है।

    केके मिश्रा ने भी सरकार पर साधा निशाना
    पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के मीडिया सलाहकार केके मिश्रा ने भी मामले में सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गैर-जमानती धाराओं में दर्ज संज्ञेय अपराध में सरकार का यह फैसला उचित नहीं है। उनका कहना था कि यह मामला देश की संप्रभुता और भारतीय सेना के सम्मान से जुड़ा है।

    मिश्रा ने 2015 के व्यापमं मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय तत्कालीन राज्यपाल के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हुई थी। उन्होंने कहा कि राजभवन को संविधान और न्यायपालिका के सामने चुनौती खड़ा करने वाला संस्थान नहीं बनना चाहिए।

    यूसीसी को लेकर भी सरकार पर हमला
    राज्यपाल से मुलाकात के बाद उमंग सिंघार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने इसे ‘काला कानून’ बताते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर इसे खत्म किया जाएगा। सिंघार ने आरोप लगाया कि बहुमत के आधार पर विधानसभा में यह कानून पारित कराया गया है।

    विधायक आरिफ मसूद ने भी यूसीसी पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इसके लागू होने से मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित होगी और इसे संविधान के अनुच्छेद 29 से जोड़ते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।

  • आईपीएस निरंजन वायंगणकर को मिली पदोन्नति, बने साइबर पुलिस के नए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक

    आईपीएस निरंजन वायंगणकर को मिली पदोन्नति, बने साइबर पुलिस के नए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक

    भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के गृह विभाग ने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के वर्ष 1999 बैच के अधिकारी निरंजन वी. वायंगणकर को पदोन्नति देते हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) के पद पर पदस्थ किया है।

    गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, वायंगणकर वर्तमान में पुलिस महानिरीक्षक (IG), साइबर, पुलिस मुख्यालय, भोपाल के पद पर कार्यरत हैं। पदोन्नति के बाद उन्हें अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक/साइबर, पुलिस मुख्यालय, भोपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    आदेश में कहा गया है कि अधिकारी द्वारा नवीन पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वेतन) नियम, 2016 के नियम-11 के अंतर्गत उनके द्वारा धारित पद की प्रतिष्ठा एवं जिम्मेदारी के अनुरूप अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के पद पर वेतनमान एवं अन्य सुविधाएं देय होंगी। गृह विभाग ने यह आदेश मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा उनके आदेशानुसार जारी किया है।
  • फर्जी IAS मामले में नया VIDEO वायरल: विधानसभा में प्रोबेशनर होने का दावा, कथित ठगी के बाद अब सहेलियों की भूमिका पर सवाल

    फर्जी IAS मामले में नया VIDEO वायरल: विधानसभा में प्रोबेशनर होने का दावा, कथित ठगी के बाद अब सहेलियों की भूमिका पर सवाल


    भोपाल । मध्य प्रदेश में फर्जी IAS बनकर कथित तौर पर लोगों को ठगने के आरोप में गिरफ्तार तृप्ति सिंह राजपूत से जुड़े नए VIDEO सामने आने के बाद पुलिस जांच ने नया मोड़ ले लिया है। अशोकनगर के चंदेरी से शुरू हुए इस मामले की कड़ियां अब भोपाल तक पहुंच चुकी हैं और विधानसभा परिसर में बनाए गए एक VIDEO ने तृप्ति की कथित फर्जी अफसर वाली पहचान पर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। VIDEO में तृप्ति अपनी दो सहेलियों के साथ विधानसभा परिसर के बाहर घूमती और ब्लॉग बनाती नजर आ रही है। लाल साड़ी में दिखाई दे रही तृप्ति को उसकी एक सहेली सीनियर अधिकारी बताती है जबकि तृप्ति खुद को प्रोबेशनर बताते हुए मजाक में कहती नजर आती है कि उनकी हरकतों को देखकर कोई उन्हें अधिकारी नहीं मानेगा।

    विधानसभा परिसर के बाहर शूट किए गए VIDEO में तृप्ति की सहेली कहती है कि वे विधानसभा अटेंड करने आई हैं और उन्होंने अपना पहला ब्लॉग बनाने का फैसला किया है। बातचीत के दौरान तृप्ति और उसकी सहेलियों के बीच हंसी मजाक भी होता है। एक सहेली कहती है कि वे दोनों प्रोबेशनर्स हैं जबकि तृप्ति पहले से उनकी सीनियर हैं। तृप्ति भी इस बातचीत में खुद को सीनियर बताते हुए अपनी सहेलियों के साथ दोस्ताना व्यवहार करने की बात कहती है। यह VIDEO सामने आने के बाद पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या ऐसे वीडियो और सोशल मीडिया गतिविधियों का इस्तेमाल लोगों के बीच खुद को असली सरकारी अधिकारी साबित करने के लिए किया जाता था।

    तृप्ति पर आरोप है कि वह अलग अलग जगहों पर खुद को IAS अधिकारी और मध्य प्रदेश पर्यटन निगम की बड़ी अधिकारी बताकर लोगों का भरोसा जीतती थी। चंदेरी में उसके खिलाफ चार युवकों को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 9 लाख 80 हजार रुपए लेने का आरोप है। इस मामले में पुलिस ने तृप्ति और उसके भाई सुधांशु सिंह को गिरफ्तार किया था। इसके बाद जांच के दौरान भोपाल में भी उसके खिलाफ 39 लाख 17 हजार रुपए की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया। शिकायत के अनुसार एक व्यक्ति से होटल और रिसॉर्ट की संपत्ति लीज पर दिलाने के नाम पर 35 लाख 30 हजार रुपए और नौकरी लगवाने के नाम पर 3 लाख 87 हजार रुपए लिए गए।

    जांच में यह भी सामने आया है कि तृप्ति के पास कथित तौर पर सरकारी पहचान से जुड़े दस्तावेज और अन्य सामग्री मौजूद थी। पुलिस को CBI लिखा पहचान पत्र और सरकारी लेटरहेड जैसे दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा भारत सरकार लिखा एक इनोवा वाहन भी पुलिस जांच के दायरे में है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन चीजों का इस्तेमाल लोगों पर सरकारी अधिकारी होने का प्रभाव डालने के लिए किया जाता था या नहीं।

    पुलिस जांच में मंत्रालय और IAS अधिकारियों के नामों की सूची मिलने की बात भी सामने आई है। आरोप है कि तृप्ति जरूरत पड़ने पर अधिकारियों के नाम लेकर खुद को उनके करीब बताती थी जिससे लोगों का भरोसा आसानी से जीता जा सके। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि इस कथित फर्जी पहचान का इस्तेमाल कितने समय से किया जा रहा था और कितने लोग इसके प्रभाव में आए।

    भोपाल के मामले में शिकायतकर्ता का आरोप है कि रकम लेने के बाद न तो होटल रिसॉर्ट की लीज दिलाई गई और न ही नौकरी लग सकी। पैसे वापस मांगने पर कथित तौर पर केवल 1 लाख रुपए लौटाए गए जबकि बाकी रकम को लेकर विवाद बढ़ने पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। मामले में तृप्ति के भाई और अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

    विधानसभा परिसर के VIDEO सामने आने के बाद अब पुलिस की नजर तृप्ति के पूरे नेटवर्क पर है। जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि उसकी सहेलियों और अन्य सहयोगियों को कथित फर्जी पहचान के बारे में कितनी जानकारी थी। चंदेरी से भोपाल तक फैले मामलों और विधानसभा परिसर के VIDEO ने इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है। आने वाले दिनों में पुलिस पूछताछ और जांच से इस कथित फर्जी IAS नेटवर्क से जुड़े कई और अहम खुलासे सामने आ सकते हैं।

  • 1.21 लाख मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए 25-25 हजार रुपए, सीएम मोहन यादव बोले- सफलता को सिर पर न चढ़ाएं और असफलता से सीखकर आगे बढ़ें

    1.21 लाख मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए 25-25 हजार रुपए, सीएम मोहन यादव बोले- सफलता को सिर पर न चढ़ाएं और असफलता से सीखकर आगे बढ़ें


    भोपाल । भोपाल में आयोजित लैपटॉप वितरण कार्यक्रम मेधावी विद्यार्थियों के लिए यादगार बन गया जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक साथ 1 लाख 21 हजार से अधिक विद्यार्थियों के भविष्य को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने की बड़ी पहल की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 10 विद्यार्थियों को प्रतीकात्मक रूप से लैपटॉप सौंपे जबकि 1 लाख 21 हजार 804 पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में लैपटॉप खरीदने के लिए 25-25 हजार रुपए की राशि ट्रांसफर की गई। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को केवल अच्छे अंक हासिल करने तक सीमित नहीं रहने बल्कि जीवन की हर चुनौती से सीखते हुए आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सफलता मिलने पर उसे सिर पर नहीं चढ़ाना चाहिए और असफलता आने पर निराश होकर रुकने के बजाय अपनी गलतियों से सीखकर नई शुरुआत करनी चाहिए। विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य तय करने और चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ नॉलेज और स्किल्स को मजबूत करना भी आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए विद्यार्थियों के सामने जीवन के बदलते दौर का उदाहरण रखा। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मिलने वाले लड्डू के लिए भी तरसना पड़ता था लेकिन आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं और सरकार विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के संसाधन उपलब्ध करा रही है। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि आज सीखोगे तो कल कमाओगे। उनके अनुसार लैपटॉप केवल एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं बल्कि डिजिटल लर्निंग ई-लाइब्रेरी और उच्च शिक्षा के नए अवसरों तक पहुंचने का माध्यम है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पत्थर और मूर्तिकार का उदाहरण देकर विद्यार्थियों को संघर्ष का महत्व भी समझाया। उन्होंने कहा कि जिस पत्थर में छेनी और हथौड़ी की चोट सहने की क्षमता होती है वही आगे चलकर सुंदर मूर्ति बनता है और सम्मान पाता है। जीवन की कठिनाइयां भी इंसान को इसी तरह मजबूत बनाती हैं। उन्होंने कहा कि मैदान में उतरने वाला खिलाड़ी ही हार सकता है लेकिन जीत का सपना भी वही देखता है जो मुकाबला करने का साहस रखता है।

    लैपटॉप योजना के विस्तार पर मुख्यमंत्री ने बताया कि इसकी शुरुआत कभी केवल 473 विद्यार्थियों से हुई थी लेकिन आज इसका दायरा बढ़कर 1 लाख 21 हजार से अधिक मेधावी विद्यार्थियों तक पहुंच चुका है। इस दौरान कई विद्यार्थियों ने अपने भविष्य के सपने भी साझा किए। 12वीं में 97.2 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले धीरेंद्र सिंह मुंडेला ने बताया कि वह पहले यूपीएससी की तैयारी करना चाहते हैं और आगे चलकर राजनीति में आकर देश के विकास में योगदान देना चाहते हैं। वहीं 95 प्रतिशत अंक हासिल करने वाली हिमांशी पाठक ने नौकरी करने के साथ भविष्य में अपना व्यवसाय शुरू करने और नौकरी देने वाली बनने की इच्छा जताई।

    मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि केवल डॉक्टर इंजीनियर और वकील बनने का सपना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि अच्छे किसान और योग्य राजनेता भी समाज और देश की जरूरत हैं। उन्होंने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और प्राचार्यों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि बेहतर मार्गदर्शन से कमजोर शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थी भी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं।

    स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने बताया कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों का भरोसा बढ़ा है और ड्रॉपआउट दर में लगातार कमी आई है। वर्ष 2025-26 में करीब 1.21 लाख विद्यार्थियों ने 12वीं में 75 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं जबकि पिछले वर्ष यह संख्या लगभग 92 हजार थी। उन्होंने कहा कि लैपटॉप योजना से अब तक करीब 6 लाख विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं और सरकार इस योजना पर लगभग 1620 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। साथ ही करीब 18 हजार रिक्त शिक्षक पदों पर भर्ती की तैयारी भी आगे बढ़ाई जा रही है ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का बेहतर माहौल मिल सके।

  • भोपाल में सीलिंग ने बढ़ाया सियासी और कारोबारी पारा: सड़क पर व्यापारी, पुलिस से भिड़ंत, शहरव्यापी आंदोलन की चेतावनी

    भोपाल में सीलिंग ने बढ़ाया सियासी और कारोबारी पारा: सड़क पर व्यापारी, पुलिस से भिड़ंत, शहरव्यापी आंदोलन की चेतावनी


    भोपाल । भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई ने मंगलवार को एक बार फिर व्यापारियों के गुस्से को भड़का दिया। शहर में सुबह से शुरू हुई कार्रवाई के बाद भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के बैनर तले बड़ी संख्या में व्यापारी सड़कों पर उतर आए और सीलिंग अभियान को तुरंत बंद करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए जब व्यापारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने के लिए सीएम हाउस की ओर बढ़ने लगे और पुलिस ने उन्हें रोशनपुरा चौराहे के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।

    नगर निगम की टीम ने मंगलवार सुबह करीब 9 बजे से रहवासी क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। कोहेफिजा क्षेत्र में चाय लीला कैफे सहित होटल बुक शॉप और बेकरी जैसे प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। कार्रवाई की सूचना मिलते ही कई व्यापारियों और प्रतिष्ठान संचालकों में नाराजगी फैल गई। कुछ संचालकों ने निगम की कार्रवाई से पहले ही अपने प्रतिष्ठान स्वेच्छा से बंद कर दिए लेकिन व्यापारिक संगठनों ने इसे कारोबारियों के लिए बड़ी परेशानी बताते हुए विरोध का फैसला किया।

    सुबह करीब 11 बजे बड़ी संख्या में व्यापारी न्यू मार्केट स्थित नानके पेट्रोल पंप के पास एकत्र हुए और वहां से मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च शुरू किया। व्यापारियों का कहना था कि वे सरकार तक अपनी मांग पहुंचाना चाहते हैं और सीलिंग की कार्रवाई बंद करने के साथ शहर में मास्टर प्लान लागू करने की मांग कर रहे हैं। जैसे ही प्रदर्शनकारी रोशनपुरा चौराहे के पास पहुंचे पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उनका रास्ता रोक दिया। इसके बाद कुछ व्यापारियों ने बैरिकेड्स हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्कामुक्की की स्थिति बन गई। इस दौरान कुछ व्यापारी नीचे गिर गए हालांकि किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली।

    प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने तानाशाही बंद करो के नारे लगाकर सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। कई व्यापारी सशक्त आवाज व्यापारियों की आवाज लिखे बैनर पहनकर प्रदर्शन में पहुंचे। विरोध को अलग तरीके से दर्ज कराने के लिए व्यापारियों ने सरकार की सद्बुद्धि के लिए थाली शंख और डमरू भी बजाए। मौके पर मौजूद ACP अखिल पटेल ई रिक्शा पर चढ़कर व्यापारियों को समझाने और स्थिति को शांत करने की कोशिश करते नजर आए लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।

    भोपाल व्यापारी महासंघ संघर्ष समिति के अध्यक्ष नवीन सोनी ने कहा कि व्यापारी सरकार तक अपना ज्ञापन पहुंचाने आए हैं और उनकी सबसे बड़ी मांग सीलिंग की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों को राहत देते हुए शहर में मास्टर प्लान लागू किया जाना चाहिए ताकि वर्षों से संचालित कारोबारियों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा न हो। व्यापारियों ने चेतावनी दी कि अभी प्रदर्शन में भोपाल के केवल 10 प्रतिशत व्यापारी ही शामिल हुए हैं। यदि सीलिंग की कार्रवाई जारी रही तो शहर के सभी व्यापारी एकजुट होकर बड़ा आंदोलन करेंगे और पूरे भोपाल में विरोध तेज किया जाएगा।

    सीलिंग कार्रवाई को लेकर बढ़ता विरोध अब नगर निगम और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। एक ओर निगम नियमों के तहत कार्रवाई जारी रखे हुए है तो दूसरी ओर व्यापारी इसे अपने कारोबार और भविष्य पर संकट बता रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार और प्रशासन इस विवाद का क्या समाधान निकालते हैं इस पर अब पूरे शहर की नजर बनी हुई है।