Category: Madhya Pradesh

  • अब टोल पर नहीं लगेगा जाम: फंदा टोल प्लाजा पर हाईटेक सिस्टम एक्टिव, कैमरे-सेंसर पहचानेंगे गाड़ी और खुद कट जाएगा टैक्स

    अब टोल पर नहीं लगेगा जाम: फंदा टोल प्लाजा पर हाईटेक सिस्टम एक्टिव, कैमरे-सेंसर पहचानेंगे गाड़ी और खुद कट जाएगा टैक्स


    भोपाल । मध्यप्रदेश में सड़क परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। भोपाल-देवास रोड पर स्थित फंदा टोल प्लाजा में पहली बार बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम का ट्रायल शुरू कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और गाड़ियां तेज रफ्तार से टोल क्षेत्र पार कर सकेंगी। बताया जा रहा है कि वाहन करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से भी टोल लेन से गुजर सकते हैं और इस दौरान फास्टैग के माध्यम से टोल शुल्क अपने आप कट जाएगा। फिलहाल इस हाईटेक व्यवस्था को एक लेन में परीक्षण के तौर पर शुरू किया गया है। यदि ट्रायल सफल रहता है तो 1 जनवरी 2027 से भोपाल-देवास मार्ग के तीनों टोल प्लाजा की सभी लेनों में इस तकनीक को लागू करने की योजना बनाई गई है।

    नई टोल व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि यहां पारंपरिक बूम बैरियर नहीं होगा। अभी तक टोल प्लाजा पर पहुंचते ही वाहन को धीमा करना पड़ता है और फास्टैग स्कैन होने के बाद बैरियर खुलने का इंतजार करना पड़ता है। लेकिन बैरियर-लेस सिस्टम में यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से होगी। टोल लेन पर लगाए गए आधुनिक फास्टैग रीडर वाहन की पहचान करेंगे जबकि कैमरे और सेंसर वाहन का नंबर और उसकी श्रेणी का पता लगाएंगे। इसके बाद वाहन की कैटेगरी के अनुसार टोल शुल्क तय होगा और फास्टैग खाते से राशि स्वतः कट जाएगी।

    इस तकनीक से सबसे बड़ा फायदा वाहन चालकों को समय की बचत के रूप में मिलेगा। टोल प्लाजा पर लंबी कतारों और बार-बार रुकने की समस्या कम होगी। वाहनों को ब्रेक लगाने और फिर दोबारा गति बढ़ाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी जिससे पेट्रोल और डीजल की खपत में कमी आने की संभावना है। लगातार चलने वाले ट्रैफिक से सड़क पर जाम की स्थिति भी कम होगी और यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुगम बन सकेगी।

    यदि किसी वाहन के फास्टैग में पर्याप्त राशि नहीं है या वाहन नंबर की जानकारी में कोई तकनीकी समस्या सामने आती है तो सिस्टम इसके लिए भी डिजिटल विकल्प देगा। ऐसी स्थिति में वाहन मालिक को ई-चालान भेजा जाएगा और उसे तय समय के भीतर टोल राशि जमा करनी होगी। तीन दिन के अंदर भुगतान नहीं करने पर जुर्माने के साथ राशि वसूली जा सकती है।

    बैरियर-लेस टोलिंग व्यवस्था से टोल संचालन में कर्मचारियों पर निर्भरता भी कम होगी और पूरी प्रक्रिया अधिक डिजिटल और स्वचालित बनेगी। यूरोप और जर्मनी समेत कई देशों में ऐसी तकनीक का उपयोग पहले से किया जा रहा है और अब मध्यप्रदेश भी आधुनिक टोल प्रबंधन की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। फंदा टोल पर शुरू हुआ यह प्रयोग सफल रहा तो आने वाले समय में राज्य के अन्य प्रमुख मार्गों पर भी बिना रुके डिजिटल टोल भुगतान की व्यवस्था देखने को मिल सकती है।

  • ग्राउंड पर विकास और मोबाइल पर उसकी कहानी: भाजपा का मेगा डिजिटल कैंपेन, इन्फ्लूएंसर दिखाएंगे बदलाव की तस्वीर

    ग्राउंड पर विकास और मोबाइल पर उसकी कहानी: भाजपा का मेगा डिजिटल कैंपेन, इन्फ्लूएंसर दिखाएंगे बदलाव की तस्वीर


    भोपाल । जंतर मंतर पर Gen Z प्रोटेस्ट के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने युवाओं तक पहुंचने के लिए अपनी रणनीति को नए डिजिटल अंदाज में तैयार किया है। पार्टी का फोकस अब केवल पारंपरिक जनसंपर्क कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि मोबाइल स्क्रीन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भी युवाओं से सीधा संवाद करने की कोशिश की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से शुरू होने वाले सेवा संकल्प अभियान में भाजपा इन्फ्लूएंसर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को महत्वपूर्ण भूमिका देने की तैयारी में है। अभियान का उद्देश्य सरकार और भाजपा के कार्यों से आए बदलाव को रील्स और वीडियो के जरिए खासकर Gen Z तक पहुंचाना है।

    भाजपा की योजना के अनुसार देशभर में इन्फ्लूएंसर को ऐसे स्थानों तक ले जाया जाएगा जहां पिछले वर्षों में विकास और सरकारी योजनाओं के कारण स्पष्ट बदलाव दिखाई देता है। कंटेंट क्रिएटर्स वहां पहुंचकर स्थानीय लोगों से बातचीत करेंगे और अपने अनुभव के आधार पर वीडियो तैयार करेंगे। राज्यों से ऐसे स्थानों की सूची भी मांगी जाएगी जहां लोगों के जीवन सुरक्षा अर्थव्यवस्था इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार के अवसरों में बड़ा बदलाव आया है। राष्ट्रीय स्तर पर करीब 50 प्रमुख स्थानों को इस अभियान के लिए चुने जाने का प्रस्ताव है।

    अभियान में हर शक्ति केंद्र को कम से कम 10 रील बनाने का लक्ष्य दिया जाएगा। भाजपा कार्यकर्ता केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा नहीं करेंगे बल्कि उन लोगों की वास्तविक कहानियां भी रिकॉर्ड करेंगे जिनके जीवन में किसी योजना से बदलाव आया है। वीडियो में लाभार्थी का नाम स्थान जिला संबंधित योजना और उससे जीवन में आए परिवर्तन की जानकारी शामिल करने की योजना है। कार्यकर्ता स्वयं भी रील बनाकर इस डिजिटल अभियान का हिस्सा बनेंगे और 60 सेकंड तक के वीडियो YouTube और Instagram जैसे प्लेटफॉर्म पर साझा किए जाएंगे।

    कैंपेन का एक बड़ा हिस्सा कहानी बदलाव की नाम से तैयार किया जा रहा है। इसके तहत सरकारी योजनाओं से लाभान्वित करीब 25 लाख नागरिकों की वास्तविक कहानियां सामने लाने का प्रस्ताव है। इनमें से लगभग 25 हजार कहानियों को चयनित किया जाएगा जबकि करीब 250 सबसे प्रभावशाली कहानियों को पेशेवर तरीके से तैयार कर व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जाएगा। जिलों राज्यों और राष्ट्रीय स्तर के सोशल मीडिया अकाउंट से इन वीडियो को साझा करने की तैयारी है।

    अभियान में डिजिटल गतिविधियों के साथ सेवा और जनभागीदारी को भी जोड़ा जाएगा। आशीर्वाद का दीया अभियान के तहत 17 सितंबर की शाम कार्यकर्ता और आम नागरिक अपने घरों में दीप जलाएंगे। इसके फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जाएंगे। सेवा मेरा योगदान कार्यक्रम में लोगों को अलग अलग सेवा गतिविधियों में हिस्सा लेने और अपनी गतिविधि का वीडियो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

    17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक स्कूलों में ड्रॉइंग और भाषण प्रतियोगिताओं की भी योजना है। वहीं नमो सेवा गाथा के माध्यम से नुक्कड़ नाटकों द्वारा गांव गांव तक जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी पहुंचाई जाएगी। 25 सितंबर से आंगनवाड़ी केंद्रों पर आंगन का उत्सव आयोजित कर महिलाओं बच्चों और कार्यकर्ताओं को भी अभियान से जोड़ा जाएगा।

    भाजपा की यह नई रणनीति साफ तौर पर जमीन पर किए गए कार्यों को डिजिटल दुनिया में प्रभावशाली कहानी के रूप में पेश करने पर केंद्रित है। इन्फ्लूएंसर रील्स लाभार्थियों की कहानियां सेवा गतिविधियां और सोशल मीडिया शेयरिंग के जरिए पार्टी युवाओं के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने की तैयारी में है।

  • 190 प्रतिष्ठान बंद कराने का दावा और जमीनी हकीकत कुछ और: भोपाल की सीलिंग कार्रवाई में खुली दुकानों ने खड़े किए कई सवाल

    190 प्रतिष्ठान बंद कराने का दावा और जमीनी हकीकत कुछ और: भोपाल की सीलिंग कार्रवाई में खुली दुकानों ने खड़े किए कई सवाल


    भोपाल । भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई लगातार चर्चा में बनी हुई है। नगर निगम जहां बड़ी संख्या में प्रतिष्ठानों को नोटिस देकर कमर्शियल गतिविधियां बंद कराने का दावा कर रहा है वहीं जमीनी तस्वीर कुछ अलग ही दिखाई दे रही है। शहर के पॉश इलाके अरेरा कॉलोनी समेत कई स्थानों पर ऐसे मामले सामने आए हैं जहां एक ही बिल्डिंग में कुछ दुकानों के बाहर व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने का पोस्टर लगा हुआ है जबकि ठीक बगल की दुकानें खुली मिलीं। इस स्थिति ने नगर निगम की कार्रवाई की निष्पक्षता और प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    नगर निगम का दावा है कि अब तक करीब 190 प्रतिष्ठानों ने स्वेच्छा से अपनी व्यावसायिक गतिविधियां बंद कर दी हैं। बंद किए गए प्रतिष्ठानों के बाहर यह सूचना भी लगाई गई है कि नगर निगम के आदेश के अनुसार भवन में कमर्शियल गतिविधियां बंद कर दी गई हैं। हालांकि कई जगह इस दावे और वास्तविक स्थिति में अंतर दिखाई दिया। अरेरा कॉलोनी में एक तीन मंजिला भवन के ग्राउंड फ्लोर पर दो दुकानों के शटर बंद मिले और उन पर बंदी का पोस्टर लगा था लेकिन उसी के पास एक अन्य दुकान खुली हुई दिखाई दी। इसी तरह एक टेलरिंग शॉप के बाहर कारोबार बंद करने का बैनर लगा था लेकिन भवन का गेट खुला मिला जिससे कार्रवाई को लेकर सवाल उठे।

    एक अन्य मामला पहले होटल के रूप में संचालित भवन का है जिसे कार्रवाई के बाद बंद कराया गया। इसके बाद वहां निज निवास का बोर्ड लगा दिया गया। हालांकि स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि कार्रवाई के बाद संबंधित भवनों की वास्तविक स्थिति की निगरानी कितनी प्रभावी ढंग से की जा रही है। यही वजह है कि नगर निगम की सीलिंग और नोटिस कार्रवाई अब व्यापारियों के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी बहस का विषय बन गई है।

    शहर के 10 नंबर मार्केट में भी कार्रवाई को लेकर भेदभाव के आरोप सामने आए हैं। कुछ प्रतिष्ठानों को नोटिस देकर बंद कराया गया जबकि आसपास कई अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चलती दिखाई दीं। सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाने वाले पक्ष का कहना है कि कार्रवाई छोटे कारोबारियों तक सीमित दिखाई दे रही है जबकि बड़े प्रतिष्ठानों के खिलाफ समान स्तर पर कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी साक्ष्यों के साथ अपनी बात रखने की तैयारी की जा रही है।

    कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों का गुस्सा भी लगातार बढ़ रहा है। बीते दिनों सीलिंग कार्रवाई के विरोध में हजारों व्यापारियों ने प्रदर्शन किया और कई दुकानों को बंद रखा गया। विरोध प्रदर्शन के दौरान शहर के प्रमुख इलाकों में यातायात भी प्रभावित हुआ। इसके बाद कोलार रोड क्षेत्र में भी व्यापारी संगठनों के आह्वान पर बाजार बंद रखा गया। व्यापारियों का कहना है कि अचानक की जा रही कार्रवाई से उनका कारोबार और रोजी रोजगार प्रभावित हो रहा है।

    दरअसल यह पूरा मामला आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण से जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद नगर निगम पर कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का दबाव है। इसी कारण शहर में नोटिस और सीलिंग की प्रक्रिया तेज की गई है। रहवासियों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में बढ़ती कमर्शियल गतिविधियों से ट्रैफिक शोर भीड़ और सुरक्षा संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर निगम की कार्रवाई सभी प्रतिष्ठानों पर समान रूप से होगी या फिर बंदी के पोस्टर और खुली दुकानों का विरोधाभास इस पूरे अभियान पर सवाल खड़े करता रहेगा।

  • भोपाल में स्मार्ट पार्किंग का नया दौर: नंबर प्लेट पहचानते ही कटेगा शुल्क, FASTag और UPI से मिलेगी आसान सुविधा

    भोपाल में स्मार्ट पार्किंग का नया दौर: नंबर प्लेट पहचानते ही कटेगा शुल्क, FASTag और UPI से मिलेगी आसान सुविधा


    भोपाल । भोपाल में स्मार्ट सिटी और डिजिटल सुविधाओं की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। अब शहरवासियों कोBhopal Smart Parking, FASTag Parking, Digital Parking System, UPI Payment, ANPR Technology मल्टीलेवल पार्किंग में पार्किंग शुल्क जमा करने के लिए लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। भोपाल की न्यू मार्केट और एमपी नगर स्थित दो प्रमुख मल्टीलेवल पार्किंग में FASTag आधारित भुगतान सुविधा शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही वाहन चालक UPI और मोबाइल एप के माध्यम से भी पार्किंग शुल्क का भुगतान कर सकेंगे। नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य पार्किंग की पूरी प्रक्रिया को तेज आसान और आधुनिक बनाना है ताकि वाहन चालकों को प्रवेश और निकास के दौरान अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।

    शहर में डिजिटल पार्किंग व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है। इसी दिशा में 9 जुलाई से भोपाल की पांच मल्टीलेवल पार्किंग में कैशलेस पार्किंग व्यवस्था लागू की गई थी। इसके तहत पार्किंग शुल्क के नकद भुगतान को पूरी तरह प्रतिबंधित कर डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता दी गई। अब FASTag सुविधा शुरू होने के बाद पार्किंग व्यवस्था और अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है।

    इस स्मार्ट पार्किंग सिस्टम की सबसे खास बात ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन तकनीक है। पार्किंग स्थल के प्रवेश द्वार पर लगाए गए ANPR कैमरे वाहन की नंबर प्लेट को स्वतः पहचानेंगे। इसके बाद FASTag रीडर वाहन की जानकारी को डिजिटल रूप से दर्ज करेगा और पार्किंग रिकॉर्ड अपने आप तैयार हो जाएगा। वाहन चालक को टिकट लेने या किसी कर्मचारी के पास भुगतान के लिए रुकने की जरूरत कम होगी।

    जब वाहन पार्किंग से बाहर निकलेगा तब भी यही आधुनिक तकनीक काम करेगी। एग्जिट प्वाइंट पर लगे ANPR कैमरे वाहन की पहचान करेंगे और FASTag आधारित सिस्टम के माध्यम से निर्धारित पार्किंग शुल्क की प्रक्रिया पूरी होगी। भुगतान होने के बाद वाहन आसानी से बाहर निकल सकेगा। इससे पार्किंग के प्रवेश और निकास दोनों स्थानों पर होने वाली भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

    नई व्यवस्था से उन वाहन चालकों को सबसे अधिक सुविधा मिलने की उम्मीद है जो रोजाना व्यस्त बाजारों और व्यावसायिक क्षेत्रों में पार्किंग का उपयोग करते हैं। न्यू मार्केट और एमपी नगर जैसे इलाकों में वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है। ऐसे में पार्किंग के लिए समय बचाना लोगों के लिए बड़ी सुविधा साबित हो सकता है। डिजिटल सिस्टम के जरिए प्रवेश और निकास की प्रक्रिया तेज होने से वाहनों की कतार भी कम होने की संभावना है।

    नगर निगम द्वारा FASTag भुगतान को प्राथमिकता दी जा रही है लेकिन वाहन चालकों के लिए वैकल्पिक भुगतान की सुविधा भी रखी गई है। यदि किसी वाहन का FASTag किसी तकनीकी कारण से काम नहीं करता है तो चालक QR कोड और UPI के जरिए पार्किंग शुल्क जमा कर सकेंगे। जरूरत पड़ने पर अन्य परिस्थितियों में नकद भुगतान की सुविधा भी उपलब्ध रखी गई है।

    भोपाल की यह पहल शहर में स्मार्ट और डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। FASTag आधारित पार्किंग व्यवस्था से जहां लोगों का समय बचेगा वहीं भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। आने वाले समय में यदि इस तकनीक का विस्तार शहर की अन्य पार्किंगों तक किया जाता है तो भोपाल की पार्किंग व्यवस्था पहले से कहीं अधिक तेज आधुनिक और सुविधाजनक बन सकती है।

  • MP में बारिश का रेड अलर्ट, नर्मदापुरम-छिंदवाड़ा में अति भारी बारिश की चेतावनी, 6 जिलों में ऑरेंज अलर्ट

    MP में बारिश का रेड अलर्ट, नर्मदापुरम-छिंदवाड़ा में अति भारी बारिश की चेतावनी, 6 जिलों में ऑरेंज अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून का स्ट्रॉन्ग सिस्टम सक्रिय होने से गुरुवार को प्रदेश के आधे हिस्से में भारी बारिश का अलर्ट है। मौसम विभाग ने नर्मदापुरम और छिंदवाड़ा में अति भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं छतरपुर, सागर, रायसेन, नरसिंहपुर, सिवनी और बैतूल में ऑरेंज अलर्ट है। इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान 4 इंच से ज्यादा बारिश होने की संभावना है।

    छतरपुर में बारिश, नदी-नालों के उफान और संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए कलेक्टर मृणाल मीणा ने गुरुवार को सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया है। छुट्टी केवल विद्यार्थियों के लिए रहेगी, जबकि शिक्षक स्कूल पहुंचकर शैक्षणिक और विभागीय काम पूरे करेंगे।

    डबरा में कच्चे मकान की छत गिरी, मां-बेटे की मौत
    बारिश के बीच बुधवार रात डबरा के जंगीपुरा में बड़ा हादसा हो गया। दो मंजिला कच्चे मकान की छत ढहने से एक ही परिवार के पांच सदस्य मलबे में दब गए। हादसे में सीमा (33) और उनके दो साल के बेटे आदित्य उर्फ गुन्नू की मौत हो गई। सीमा के पति जागेंद्र (38) और उनकी दो बेटियां वैशाली (5) व रागनी (8) गंभीर रूप से घायल हुई हैं। हादसे के बाद घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

    इन जिलों में भारी बारिश की चेतावनी
    मौसम विभाग के अनुसार सीहोर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, विदिशा, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, दमोह, पन्ना, सतना, मैहर, कटनी, जबलपुर, डिंडौरी, मंडला, पांढुर्णा और बालाघाट में भारी बारिश हो सकती है।

    वहीं भोपाल, रायसेन, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, सिवनी, नरसिंहपुर, रीवा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर और छतरपुर में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने का अनुमान है।

    4 सितंबर से पश्चिमी हिस्से में बढ़ेगा सिस्टम का असर
    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 4 सितंबर को बारिश का सिस्टम आगे बढ़ेगा। इसका ज्यादा असर भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, नर्मदापुरम और चंबल संभाग में देखने को मिल सकता है। भोपाल, उज्जैन और ग्वालियर में भारी बारिश होने की संभावना है, जबकि इंदौर में तेज बारिश के आसार नहीं हैं। 5 सितंबर को प्रदेश के उत्तरी हिस्से में तेज बारिश हो सकती है। इसके बाद 6 सितंबर को ग्वालियर-चंबल संभाग में सिस्टम का असर देखने को मिलेगा।

    प्रदेश में अब तक 28.1 इंच बारिश
    मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में अब तक 714.2 मिमी यानी 28.1 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 799.9 मिमी यानी 31.5 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में अब तक सामान्य से 3.4 इंच कम पानी गिरा है और ओवरऑल बारिश 11% कम है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश सामान्य से 4% और पश्चिमी हिस्से में 17% कम हुई है।

    40 जिलों में 2% से 51% तक कम बारिश
    पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में सामान्य से 17% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी और टीकमगढ़ सहित कई जिलों में 2% से 51% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    पश्चिमी हिस्से में आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 2% से 53% तक कम पानी गिरा है।

    16 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    प्रदेश के 16 जिलों में अब तक सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इनमें अनूपपुर, मऊगंज, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़ और शिवपुरी शामिल हैं।

  • रीवा में बेकाबू बल्कर ने बस को मारी जोरदार टक्कर, पांच की मौत और 20 से अधिक घायल

    रीवा में बेकाबू बल्कर ने बस को मारी जोरदार टक्कर, पांच की मौत और 20 से अधिक घायल

    रीवा । मध्य प्रदेश के रीवा जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 39 पर बुधवार शाम तेज रफ्तार बल्कर ने यात्रियों से भरी बस को जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई है, जबकि 20 से अधिक यात्री घायल हो गए, जिनमें तीन की हालत गंभीर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हादसे पर दुख व्यक्त कर मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता का ऐलान किया है।

    पुलिस के अनुसार, हादसा गुढ़ थाना क्षेत्र में बदवार बस स्टैंड के पास बुधवार शाम करीब 5 बजे हुआ। रीवा से सीधी जा रही पवन ट्रेवल्स की बस क्रमांक एमपी 19-पी 1501 को सीधी से रीवा की ओर आ रहे बल्कर (क्रमांक एनएल 01 एआई 9213) ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बल्कर पलट गया, जबकि बस सड़क किनारे गड्ढे में जा गिरी। हादसे के वक्त बस में करीब 30 यात्री सवार थे। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर बस में फंसे यात्रियों और अन्य घायलों को बाहर निकाला गया।

    जानकारी मिलते ही रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी एवं पुलिस अधीक्षक गुरु करण सिंह मौके पर पहुंचे, साथ ही रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा एवं सीधी सांसद राजेश मिश्रा मौके पर मौजूद रहे। प्रशासन ने खबर लिखे जाने तक हादसे में पांच लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि 20 से अधिक यात्रियों के घायल होने की जानकारी दी है। गंभीर घायलों को उपचार के लिए रीवा के संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि कुछ घायलों का इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुढ़ में जारी है। घायलों में तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है। इनमें एक 6 साल का मासूम बच्चा भी शामिल है।अस्पताल में चिकित्सकों की टीम घायलों के उपचार में जुटी हुई है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के समय बारिश हो रही थी। सड़क पर काफी फिसलन थी। बल्कर तेज रफ्तार में था। फिसलन के कारण ड्राइवर वाहन को कंट्रोल नहीं कर पाया और बस को टक्कर मार दी। घायल यात्री पुनीत शुक्ला (30) निवासी ग्राम बघोर (जिला सीधी) ने बताया कि बस में करीब 25 से 30 यात्री सवार थे। बल्कर अचानक अपनी साइड छोड़कर विपरीत दिशा में आ गया और बस को सामने से टक्कर मार दी। हादसे के बाद मौके पर पहुंचे प्रशासन और पुलिस की टीम ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घटना के बाद रीवा-सीधी मार्ग पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा। प्रशासन की टीमें मौके पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटी रहीं।

    रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने बताया कि हादसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। हादसे के बाद एक तीन साल की एक बच्ची लापता है। उसकी मां हादसे में घायल हुई है और फिलहाल वह कुछ बताने की स्थिति में नहीं है। कलेक्टर के अनुसार, आशंका है कि बच्ची गड्ढे में दबी हो सकती है। गड्ढा ज्यादा गहरा नहीं है, लेकिन उसमें दलदल है। रेस्क्यू टीम बच्ची की तलाश में जुटी है। फिलहाल बच्ची के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के लापता होने की जानकारी नहीं है।

    इधर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हादसे पर दुख जताया है और दिवंगतों की आत्मा को शांति एवं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स के माध्यम से मृतकों के परिजन को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। इसके अलावा घायलों को 1-1 लाख रुपये देने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से घायलों के इलाज और राहत-बचाव कार्य की निगरानी की जा रही है।

    वहीं, पुलिस प्रशासन ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर बल्कर के विपरीत दिशा में आने की बात सामने आई है। हालांकि हादसे की पूरी परिस्थितियों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। बस के परमिट सहित वाहन से जुड़े अन्य दस्तावेज और बिंदुओं की भी प्रशासन द्वारा जांच की जा रही है। 
  • माइक न मिलने पर जनपद अध्यक्ष का छलका दर्द, सिंधिया के कार्यक्रम में सियासी तकरार ने पकड़ा जोर

    माइक न मिलने पर जनपद अध्यक्ष का छलका दर्द, सिंधिया के कार्यक्रम में सियासी तकरार ने पकड़ा जोर


    शिवपुरी । शिवपुरी के बदरवास में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कार्यक्रम के दौरान माइक को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सोमवार शाम बिजरौनी बायपास और दौलतपुर से खाइखेड़ा मार्ग निर्माण के भूमि पूजन कार्यक्रम में बदरवास जनपद अध्यक्ष मीरा बाई परिहार को मंच से बोलने का अवसर नहीं मिला। कार्यक्रम के बाद जनपद अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि वह अपनी बात रखने वाली थीं लेकिन उनका माइक हटा दिया गया। इसके बाद स्थानीय राजनीति में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    कार्यक्रम के दौरान जनपद अध्यक्ष मीरा बाई परिहार केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने क्षेत्र से जुड़ी अपनी बात रखना चाहती थीं। उनका कहना है कि उन्होंने कोलारस विधायक महेंद्र यादव से भी उन्हें बोलने का अवसर देने की बात कही थी। जनपद अध्यक्ष के मुताबिक विधायक ने उन्हें अपनी बात वहीं से कहने के लिए कहा था लेकिन वह माइक के जरिए मंच से अपनी बात रखना चाहती थीं। उनका आरोप है कि उन्हें ऐसा करने का मौका नहीं दिया गया।

    कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मीरा बाई परिहार ने विधायक महेंद्र यादव पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले करीब एक साल से जनपद क्षेत्र के विकास कार्यों में अड़चनें आ रही हैं। जनपद अध्यक्ष ने दावा किया कि विकास कार्यों से जुड़े मामलों को लेकर वह चार बार दिल्ली तक जा चुकी हैं लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।

    मीरा बाई ने कहा कि जनपद अध्यक्ष के तौर पर जनता के लिए विकास कार्य कराना उनकी जिम्मेदारी है। लेकिन यदि विकास कार्यों के लिए जरूरी प्रक्रिया और फंड से जुड़े काम ही आगे नहीं बढ़ेंगे तो सरपंचों की मांगों को पूरा करना मुश्किल होगा। उन्होंने अधिकारियों और बिचौलियों पर भी काम में बाधा डालने के आरोप लगाए। उनका कहना है कि कई मामलों में ऑनलाइन एंट्री तक नहीं होने दी जा रही है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से विकास फंड जल्द जारी करने की मांग की और संकेत दिया कि सुनवाई नहीं होने पर वह इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठा सकती हैं।

    वहीं कोलारस विधायक महेंद्र यादव ने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मीरा बाई परिहार ने उनसे केंद्रीय मंत्री से कुछ कहने की इच्छा जताई थी। विधायक के मुताबिक उन्होंने जनपद अध्यक्ष से अपनी बात कागज पर लिखकर देने के लिए कहा था ताकि उनकी बात केंद्रीय मंत्री तक स्पष्ट रूप से पहुंचाई जा सके।

    विधायक ने कहा कि यदि जनपद अध्यक्ष ने माइक के जरिए केंद्रीय मंत्री और जनता के सामने अपनी बात रखने की इच्छा जताई होती तो उन्हें बोलने का अवसर जरूर दिया जाता। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री कोलारस रेलवे स्टेशन पर उज्जैनी एक्सप्रेस के नियमित ठहराव को हरी झंडी दिखाने वाले थे। इसी कारण मंच से बोलने का समय सीमित था और मंडल अध्यक्ष विधायक तथा सांसद को ही वक्तव्य का अवसर दिया गया।

    महेंद्र यादव ने मीरा बाई परिहार को पार्टी की वरिष्ठ नेता बताते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री अभी शिवपुरी में ही हैं और जनपद अध्यक्ष उनसे मुलाकात कर अपनी बात सीधे रख सकती हैं। विधायक ने यह भी कहा कि वह स्वयं मीरा बाई से इस मामले में चर्चा करेंगे।

    इस कार्यक्रम में क्षेत्र को रेल सुविधा की सौगात भी मिली। ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रयासों से कोलारस रेलवे स्टेशन पर उज्जैनी एक्सप्रेस के नियमित ठहराव को मंजूरी मिली है। इसके अलावा अशोकनगर रेलवे स्टेशन पर सोगरिया दानापुर एक्सप्रेस के ठहराव को भी स्वीकृति दी गई है। विकास कार्यों और रेल सुविधाओं के बीच मंच पर बोलने को लेकर उठा यह विवाद अब स्थानीय सियासत में चर्चा का विषय बन गया है।

  • माधव टाइगर रिजर्व मार्ग पर मचा हड़कंप बाइक सवार ने समझा टाइगर वन विभाग बोला पगमार्क बाघ के नहीं

    माधव टाइगर रिजर्व मार्ग पर मचा हड़कंप बाइक सवार ने समझा टाइगर वन विभाग बोला पगमार्क बाघ के नहीं


    नई दिल्ली। शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व क्षेत्र से गुजरने वाले नरवर सतनवाड़ा मार्ग पर मंगलवार रात एक जंगली जानवर को देखकर बाइक सवार घबरा गया और सड़क पर गिरकर घायल हो गया। घटना टपकेश्वर मंदिर और एरावन गांव के बीच रात करीब आठ बजे हुई। बाइक सवार का कहना है कि अचानक सड़क पर टाइगर जैसा जानवर दिखाई देने से वह घबरा गया और बाइक का संतुलन बिगड़ गया। हादसे के बाद राहगीरों ने घायल युवक को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचाया।

    घायल बाइक सवार की पहचान नरवर तहसील के चकरमपुर गांव निवासी विकास कुशवाहा के रूप में हुई है। बताया गया कि विकास नरवर से मणिखेड़ा डैम की ओर जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में उन्हें सड़क पर एक जंगली जानवर दिखाई दिया। अंधेरा होने के कारण उन्होंने उसे टाइगर समझ लिया। जानवर को देखकर अचानक घबराने के चलते बाइक अनियंत्रित हो गई और वह सड़क पर गिर पड़े। हादसे में उन्हें चोट आई जिसके बाद आसपास से गुजर रहे लोगों ने मदद की और अस्पताल पहुंचाया।

    घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची। भाजपा नेता बशर अली ने सतनवाड़ा रेंज के रेंजर माधव सिंह सिकरवार को मामले की सूचना दी थी। इसके बाद वन विभाग की टीम ने घटनास्थल और आसपास के इलाके का निरीक्षण किया। टीम ने यह पता लगाने की कोशिश की कि आखिर बाइक सवार के सामने कौन सा जंगली जानवर आया था। इसके लिए मौके पर मिले पगमार्क की भी जांच की गई।

    वन विभाग की जांच में सामने आया कि घटनास्थल पर पगमार्क जरूर मिले हैं लेकिन वे टाइगर के नहीं हैं। रेंजर माधव सिंह सिकरवार के मुताबिक मौके पर मिले निशान बाघ के पगमार्क नहीं हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि कोई दूसरा जंगली जानवर सड़क पार कर रहा था। उसी को देखकर बाइक सवार घबरा गया होगा। माधव टाइगर रिजर्व की टीम ने भी फिलहाल इस स्थान पर टाइगर की मौजूदगी की पुष्टि नहीं की है। वन विभाग की टीम आगे भी इलाके का निरीक्षण करेगी।

    हालांकि इस पूरे इलाके में जंगली जानवरों की आवाजाही को लेकर लोगों की चिंता बनी हुई है। वन विभाग के अनुसार नरवर सतनवाड़ा मार्ग के आसपास तेंदुए की आवाजाही रहती है। कई बार राहगीरों को सड़क के आसपास तेंदुआ दिखाई देने की जानकारी भी सामने आती रही है। हालांकि अब तक तेंदुए द्वारा किसी राहगीर पर हमला किए जाने की सूचना नहीं मिली है। ऐसे में यह संभावना भी जताई जा रही है कि बाइक सवार के सामने तेंदुआ या कोई अन्य जंगली जानवर आया हो।

    माधव टाइगर रिजर्व से जुड़े इस इलाके में पहले भी वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर चिंता सामने आती रही है। सिंध नदी किनारे 25 अप्रैल को 50 वर्षीय सरवन आदिवासी का शव टुकड़ों में मिलने के बाद इलाके में दहशत बढ़ गई थी। उस समय मादा टाइगर MT-6 की लोकेशन भी आसपास मिली थी और उसकी कॉलर आईडी सक्रिय पाई गई थी। एरावन गांव माधव टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में स्थित है। ऐसे में रात के समय इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

  • विंध्य में बाढ़ से बिगड़े हालात, कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर; सतना-रीवा में स्कूल बंद

    विंध्य में बाढ़ से बिगड़े हालात, कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर; सतना-रीवा में स्कूल बंद


    रीवा।
    मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सक्रिय मानसूनी सिस्टम के चलते लगातार हो रही बारिश ने विंध्य क्षेत्र में हालात बिगाड़ दिए हैं। रीवा, सतना, मैहर, मऊगंज, सिंगरौली और शहडोल संभाग के कई इलाकों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। कई नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर पहुंच गया है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

    सबसे ज्यादा असर सतना और चित्रकूट में दिखाई दे रहा है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। रामघाट इलाके में करीब 400 दुकानें और 20 से 25 होटल पानी की चपेट में आ गए हैं। वहीं, रीवा जिले में बिहार और टमस नदियों के बढ़े जलस्तर के साथ तराई क्षेत्र में बेलन नदी भी उफान पर है।

    बांधों के गेट खुलने से बढ़ा पानी का बहाव

    लगातार बारिश के बीच बांधों से छोड़े जा रहे पानी ने भी स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। बाणसागर बांध के आठ गेट खोले जाने के बाद सोन नदी के बहाव में तेजी आई है। इससे नदी के आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

    बेलन नदी पर बने बांध के गेट भी खोल दिए गए हैं। इसके अलावा टमस नदी पर स्थित बकिया बैराज डैम के गेट खोले जाने से तराई क्षेत्र के गांवों में पानी का दबाव बढ़ गया है। लगातार बारिश और बांधों से छोड़े जा रहे पानी के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है।

    चित्रकूट में रामघाट की दुकानें और होटल डूबे

    चित्रकूट में लगातार बारिश के कारण मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। रामघाट क्षेत्र में पानी भरने से करीब 400 दुकानें और 20 से 25 होटल प्रभावित हुए हैं।

    जलस्तर बढ़ने के कारण नदी किनारे रहने वाले लोगों और कारोबारियों के सामने भी परेशानी खड़ी हो गई है। प्रशासन की ओर से लोगों को नदी और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।

    सतना, रीवा और मैहर में स्कूल-कॉलेज बंद

    लगातार बारिश और बिगड़ते हालात को देखते हुए सतना, रीवा और मैहर जिलों में स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ियों को 2 और 3 सितंबर को बंद रखने का फैसला लिया गया है। अगले दो दिनों में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना को देखते हुए प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।

    अगले दो दिन भारी बारिश का अलर्ट

    मौसम विभाग के मुताबिक मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सक्रिय मानसूनी सिस्टम का प्रभाव अभी बना हुआ है। इसके चलते रीवा सहित पूरे विंध्य और आसपास के क्षेत्रों में अगले दो दिनों तक भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की गई है।

    छतरपुर, सतना, रीवा, मैहर, मऊगंज और सिंगरौली में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सिस्टम का प्रभाव ज्यादा रहने के कारण सतना, रीवा और शहडोल संभाग के जिलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

    निचले इलाकों में बढ़ सकता है खतरा

    मौसम विभाग के अलर्ट के बीच लगातार बारिश होने पर नदियों और नालों का जलस्तर और बढ़ सकता है। इससे निचले इलाकों में जलभराव की समस्या गंभीर होने की आशंका है। चित्रकूट में मंदाकिनी का बढ़ा जलस्तर पहले ही हालात को चुनौतीपूर्ण बना चुका है।

    अगले 24 से 48 घंटे विंध्य और मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से के लिए अहम माने जा रहे हैं। यदि बारिश का जोर बरकरार रहता है तो बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे और जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की अपील की है।

  • MP सरकार को बड़ा झटका…. दिल्ली HC ने दिया वकील को 78 लाख का भुगतान करने का आदेश

    MP सरकार को बड़ा झटका…. दिल्ली HC ने दिया वकील को 78 लाख का भुगतान करने का आदेश


    नई दिल्ली।
    दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) को आदेश दिया कि वह वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप जॉर्ज चौधरी (Anoop George Chaudhari) को एक मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में पेश होने के बदले 78 लाख 65 हजार रुपए और उस पर 9% सालाना की दर से ब्याज का भुगतान भी करे। उच्च न्यायालय ने राज्य के इस दावे को खारिज कर दिया कि वरिष्ठ अधिवक्ता असल में सिर्फ दो बार पेश हुए थे।

    जस्टिस सचिन दत्ता की पीठ ने इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाम मनोहरलाल व अन्य (2020) मामले में उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ के आदेश का हवाला दिया और वरिष्ठ अधिवक्ता की मौजूदगी को नोट किया। पीठ ने कहा कि कार्यवाही के रिकॉर्ड में दिख रही पेशी को देखने से पता चलता है कि याचिकाकर्ता मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से पेश हुए थे। ऐसे में ना ही इसमें कोई शक रह जाता है और इस रिकॉर्ड के महत्व को कम करके भी नहीं आंका जा सकता।

    अदालत ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में पेशी दर्ज करना कोई अनौपचारिक या सामान्य काम नहीं है। उच्चतम न्यायालय नियम, 2013 के आदेश IV नियम 1(बी) के तहत किसी पार्टी के ‘एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड’ के अलावा कोई अन्य वकील किसी मामले में अदालत के सामने पेश नहीं हो सकता, बहस नहीं कर सकता। अदालत को संबोधित नहीं कर सकता, जब तक कि उसे ‘एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड’ ने निर्देश न दिया हो या अदालत ने अनुमति न दी हो।

    पीठ ने कहा कि एक वरिष्ठ अधिवक्ता उच्चतम न्यायालय में किसी पक्षकार पर अपनी पेशी थोप नहीं सकता। उसकी पेशी केवल उस पार्टी के ‘एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड’ के माध्यम से और उनके निर्देशों पर ही दर्ज की जा सकती है। पीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता की पेशी राज्य के स्थाई वकील व राज्य के ‘एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड’ के साथ चौदह तारीखों पर दर्ज की गई, इसलिए यह निष्कर्ष निकला कि ऐसी हर तारीख पर उनकी पेशी राज्य के ही अधिकृत प्रतिनिधियों द्वारा कराई गई।