Category: Madhya Pradesh

  • मूविंग सीट से लेकर रोलर कोस्टर राइड तक इंदौर जू का 14D थिएटर बना नया आकर्षण पहले दिन सभी शो फुल

    मूविंग सीट से लेकर रोलर कोस्टर राइड तक इंदौर जू का 14D थिएटर बना नया आकर्षण पहले दिन सभी शो फुल


    इंदौर। इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में शुरू हुआ 14D थिएटर आम लोगों के लिए खुलते ही शहरवासियों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गया है। मंगलवार को पहले दिन थिएटर के लगभग सभी शो हाउसफुल रहे और बड़ी संख्या में लोग परिवार तथा बच्चों के साथ यहां पहुंचे। सामान्य सिनेमा हॉल से बिल्कुल अलग अनुभव देने वाले इस थिएटर में दर्शकों को मूविंग सीट्स के साथ विजुअल इफेक्ट्स और अलग अलग राइडिंग इफेक्ट्स का अनुभव कराया जा रहा है। यही वजह रही कि पहले ही दिन थिएटर को देखने और इसमें फिल्म का रोमांच महसूस करने के लिए लोगों में जबरदस्त उत्साह नजर आया।

    14D थिएटर में फिल्म देखने के दौरान दर्शकों को केवल स्क्रीन पर दृश्य देखने तक सीमित नहीं रहना पड़ता बल्कि स्क्रीन पर दिखाई जा रही गतिविधियों के साथ सीटों की मूवमेंट और अलग अलग इफेक्ट्स का अनुभव भी मिलता है। कभी सीट आगे पीछे होती है तो कभी अचानक ऊपर नीचे की हलचल महसूस होती है। कई दृश्यों में ऐसा अनुभव कराया जाता है जैसे दर्शक खुद उसी घटना का हिस्सा हों। बच्चों के लिए यह अनुभव खास तौर पर रोमांचक रहा। पहले दिन थिएटर पहुंचे परिवारों में महिलाओं और बच्चों की संख्या काफी ज्यादा नजर आई।

    शो खत्म होने के बाद बच्चों में थिएटर के अनुभव को लेकर खास उत्साह देखने को मिला। कई बच्चों ने बताया कि उन्होंने इससे पहले ऐसा थिएटर नहीं देखा था। उनके लिए सबसे ज्यादा रोमांचक रोलर कोस्टर जैसी राइड रही। सीटों का अचानक हिलना डुलना और स्क्रीन पर चल रहे दृश्यों के साथ शरीर को मिलने वाला मूवमेंट बच्चों को खूब पसंद आया। कुछ बच्चों के लिए यह अनुभव किसी मनोरंजन पार्क की राइड जैसा रहा और उन्होंने इसे दोबारा देखने की इच्छा भी जताई।

    बच्चों के साथ थिएटर पहुंचे अभिभावकों ने भी इसे सामान्य फिल्म देखने से अलग अनुभव बताया। कई माता पिता का कहना था कि बच्चों के साथ समय बिताने और उन्हें कुछ नया अनुभव कराने के लिहाज से यह जगह काफी अच्छी है। दर्शकों ने सीटों की मूवमेंट विजुअल इफेक्ट्स और अलग अलग राइडिंग इफेक्ट्स को थिएटर की सबसे बड़ी खासियत बताया। कुछ लोगों ने इसे पैसा वसूल अनुभव करार दिया। उनका कहना था कि इंदौर आने वाले रिश्तेदारों और बाहर से आने वाले मेहमानों को भी अब इस थिएटर का अनुभव कराया जा सकता है।

    14D थिएटर को लेकर युवाओं में भी खासा उत्साह दिखाई दिया। युवाओं ने बताया कि शहर में मनोरंजन के कई विकल्प मौजूद हैं लेकिन इस तरह का अनुभव अलग है। खास तौर पर सीटों की मूवमेंट और स्क्रीन पर दिखाई देने वाले दृश्यों के साथ होने वाले इफेक्ट्स ने उन्हें प्रभावित किया। पहले दिन बड़ी संख्या में युवाओं के पहुंचने से यह भी साफ हुआ कि थिएटर सिर्फ बच्चों तक सीमित आकर्षण नहीं है बल्कि अलग तरह के मनोरंजन की तलाश करने वाले लोगों को भी आकर्षित कर रहा है।

    हालांकि वर्चुअल जंगल सफारी को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रिया पूरी तरह एक जैसी नहीं रही। कुछ लोगों को इसका अनुभव अच्छा लगा जबकि कुछ दर्शकों को यह उनकी उम्मीद के मुताबिक प्रभावी नहीं लगा। इसके बावजूद 14D थिएटर के मुख्य अनुभव को लेकर ज्यादातर दर्शकों की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही।

    वहीं कुछ अभिभावकों ने छोटे बच्चों के टिकट की कीमत को लेकर भी सुझाव दिया। एक महिला दर्शक ने कहा कि छोटे बच्चों के लिए टिकट की दर कम होनी चाहिए क्योंकि अचानक होने वाली सीटों की तेज मूवमेंट और इफेक्ट्स से कुछ छोटे बच्चे डर सकते हैं। ऐसी स्थिति में माता पिता को शो बीच में छोड़कर बच्चे को बाहर लाना पड़ सकता है। इसके लिए छोटे बच्चों के टिकट पर अलग दर तय करने की मांग भी सामने आई।

    पहले ही दिन मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स के बाद कमला नेहरू जू का 14D थिएटर इंदौर में मनोरंजन के नए आकर्षण के तौर पर उभरता दिखाई दे रहा है। परिवार बच्चों और युवाओं की मौजूदगी ने इसकी लोकप्रियता की शुरुआत को खास बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि शुरुआती उत्साह के बाद भी दर्शकों की भीड़ इसी तरह बनी रहती है या नहीं।

  • 19 अगस्त को भोपाल में बरसेंगे बादल या मिलेगी राहत? मौसम विभाग के अलर्ट के बीच जानें दिनभर का हाल

    19 अगस्त को भोपाल में बरसेंगे बादल या मिलेगी राहत? मौसम विभाग के अलर्ट के बीच जानें दिनभर का हाल


    भोपाल । भोपाल में 19 अगस्त बुधवार को मौसम का मिजाज एक बार फिर बदलता नजर आ सकता है। राजधानी में पिछले दिनों हुई बारिश के बाद अब भी मानसून सक्रिय बना हुआ है और मध्य प्रदेश समेत मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई जा रही है। मौसम से जुड़े ताजा पूर्वानुमानों में 19 अगस्त को मध्य प्रदेश में भी बारिश की गतिविधियां बने रहने के संकेत हैं। ऐसे में भोपाल के लोगों को बुधवार को बादल छाए रहने के साथ बारिश और गरज चमक का सामना करना पड़ सकता है।

    भोपाल में पिछले दिनों लगातार हुई बारिश ने शहर की रफ्तार पर भी असर डाला था। कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी और लोगों को आने जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम में कुछ समय के लिए राहत जरूर मिली लेकिन बारिश का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। स्थानीय मौसम रिपोर्टों में भी भोपाल में आगे बारिश की संभावना बनी रहने की बात सामने आई है। ऐसे में 19 अगस्त को भी शहर में मौसम पूरी तरह साफ रहने की उम्मीद कम है।

    बुधवार की शुरुआत बादलों के बीच हो सकती है। दिन चढ़ने के साथ कुछ इलाकों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। मानसूनी परिस्थितियों के कारण एक ही समय में पूरे शहर में समान बारिश होना जरूरी नहीं है। राजधानी के किसी हिस्से में तेज बौछारें पड़ सकती हैं तो दूसरे इलाके में केवल बादल छाए रहने या हल्की बारिश होने की स्थिति बन सकती है। इसी वजह से घर से बाहर निकलने वाले लोगों को अचानक बदलने वाले मौसम के लिए तैयार रहना बेहतर होगा।

    बारिश के दौरान तापमान में भी राहत मिलने की उम्मीद रहती है। बादल और बारिश की वजह से दिन में गर्मी का असर कम हो सकता है और मौसम अपेक्षाकृत सुहावना महसूस हो सकता है। हालांकि बारिश रुकने के बाद उमस बढ़ सकती है। अगर बुधवार को तेज बारिश होती है तो शहर की सड़कों पर पानी जमा होने से ट्रैफिक की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है। खासतौर पर निचले इलाकों और उन रास्तों पर लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए जहां बारिश के दौरान जलभराव की समस्या सामने आती है।

    गरज चमक के दौरान सावधानी रखना भी जरूरी होगा। खुले मैदानों में रहने या पेड़ के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए। दोपहिया वाहन से सफर करने वाले लोगों के लिए बारिश के दौरान सड़क पर फिसलन और कम दृश्यता परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में जरूरी होने पर ही तेज बारिश के दौरान यात्रा करना बेहतर रहेगा।

    मौसम विभाग के व्यापक पूर्वानुमानों के मुताबिक 19 अगस्त को देश के कई हिस्सों में बारिश और आंधी की गतिविधियां बनी रह सकती हैं और मध्य प्रदेश भी प्रभावित राज्यों में शामिल है। इसलिए भोपाल में रहने वाले लोगों को मौसम के ताजा अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।

    कुल मिलाकर 19 अगस्त को भोपाल में मौसम का मिजाज मिलाजुला रहने की संभावना है। आसमान में बादलों का डेरा रहने के साथ बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं। हालांकि बारिश कितनी तेज होगी और शहर के किन हिस्सों में ज्यादा असर रहेगा यह स्थानीय मौसम परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसलिए बुधवार को बाहर निकलने से पहले मौसम की ताजा जानकारी देखना और बारिश की स्थिति में जरूरी सावधानी बरतना समझदारी होगी।

  • बर्थडे मनाने निकला परिवार, लौटकर आई मौत! 8 साल के मासूम ने बताया- पापा ने मां को चाकू मारा, बहन को तालाब में डुबोया

    बर्थडे मनाने निकला परिवार, लौटकर आई मौत! 8 साल के मासूम ने बताया- पापा ने मां को चाकू मारा, बहन को तालाब में डुबोया


    इंदौर । इंदौर के कनाड़िया थाना क्षेत्र के झलारिया गांव में हुई एक खौफनाक वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की हत्या करने के बाद अपने ही दो बच्चों को तालाब में फेंक दिया। इस घटना में 10 साल की बेटी माही की मौत हो गई जबकि 8 साल का बेटा अजय किसी तरह पानी से बाहर निकलकर अपनी जान बचाने में कामयाब रहा। इसके बाद बच्चा किसी तरह पुलिस तक पहुंचा और उसने जो घटनाक्रम बताया उससे पुलिस भी हैरान रह गई। पुलिस ने आरोपी पिता सुनील चौहान को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार मृतका की पहचान 32 वर्षीय अनीता बाई के रूप में हुई है। उसका पति सुनील चौहान करीब 37 साल का है और पेशे से ड्राइवर है। बताया जा रहा है कि परिवार कुछ समय पहले ही झलारिया गांव में किराए के मकान में रहने आया था। मकान मालिक विक्रम चौधरी के मुताबिक घटना वाली रात सुनील अपनी पत्नी को जन्मदिन मनाने की बात कहकर रात करीब साढ़े नौ से दस बजे के बीच घर से बाहर लेकर गया था। उस समय दोनों बच्चे घर पर ही थे। कुछ देर बाद सुनील वापस आया और दोनों बच्चों को भी अपने साथ ले गया।

    इसके बाद घटनाक्रम ने बेहद भयावह रूप ले लिया। 8 साल के अजय के मुताबिक उसके माता-पिता के बीच पैसों को लेकर विवाद हुआ था। विवाद बढ़ने के बाद उसके पिता ने उसकी मां के साथ मारपीट की और चाकू से हमला किया। बच्चे ने पुलिस को बताया कि उसकी मां गंभीर रूप से घायल होकर तड़प रही थी और इसके बाद उसके पिता ने कथित तौर पर उसका गला भी दबाया। हालांकि हत्या की वास्तविक परिस्थितियों की पुष्टि पोस्टमॉर्टम और पुलिस जांच के बाद ही होगी।

    अजय के मुताबिक इसके बाद उसका पिता उसे और उसकी बहन माही को हिंगोनिया के पास स्थित तालाब पर ले गया। वहां दोनों बच्चों को पानी में फेंक दिया गया। अजय किसी तरह पानी से बाहर निकलने में सफल रहा। इसके बाद वह अकेला पुलिस तक पहुंचा और पूरी घटना की जानकारी दी। बच्चे की सूचना मिलते ही पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू कर दी और कुछ समय बाद उसे झलारिया गांव से पकड़ लिया।

    पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी की निशानदेही पर अनीता का शव बरामद किया गया। इसके बाद एसडीआरएफ की टीम ने तालाब में सर्च ऑपरेशन चलाया। रातभर चले तलाशी अभियान के बाद 10 साल की माही का शव भी तालाब से बरामद कर लिया गया। शुरुआती जांच में अनीता के शरीर पर चाकू के निशान मिलने की बात सामने आई है। पुलिस को गला घोंटने के भी संकेत मिले हैं। वहीं माही की मौत पानी में डूबने से होने की आशंका है। मौत की सटीक वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद सामने आएगी।

    मृतका के मायके पक्ष ने आरोप लगाया है कि अनीता और सुनील के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। अनीता के पिता सुखराम के मुताबिक सुनील पहले भी उनकी बेटी के साथ मारपीट करता था और कई साल पहले उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत भी की गई थी। परिजनों का कहना है कि विवाद नया नहीं था और घरेलू हिंसा की घटनाएं पहले भी सामने आती रही थीं।

    परिजनों के अनुसार सुनील अनीता पर शक करता था और उसके दूसरे लोगों से बातचीत करने को लेकर विवाद करता था। करीब 20 दिन पहले भी मारपीट के बाद अनीता बच्चों के साथ इंदौर आई थी। परिवार की एक और बेटी अनुष्का भी सुनील के साथ नहीं रहती थी और दादा-दादी के पास रहती थी। परिजनों का आरोप है कि उसके साथ भी मारपीट की जाती थी।

    वहीं सुनील की रिश्तेदार मालती कौशल ने अनीता के चरित्र को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि अनीता का व्यवहार अच्छा था और उन्होंने कभी उसके चरित्र को लेकर ऐसी कोई बात नहीं देखी। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार अलग-अलग रहता था इसलिए उन्हें घटना की पूरी जानकारी नहीं है।

    पुलिस अब इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि हत्या अचानक हुए विवाद के बाद हुई या आरोपी ने पहले से इसकी योजना बनाई थी। पुलिस घटना की पूरी टाइमलाइन के साथ हत्या के कारण और आरोपी के बयानों की भी जांच कर रही है। इस दर्दनाक घटना में एक मां और उसकी 10 साल की बेटी की जान चली गई जबकि 8 साल का बेटा इस भयावह घटना का प्रत्यक्षदर्शी बन गया है।

  • बच्चों के पोषण पर संकट गहराया! प्रदेश के सभी 7 पोषण आहार प्लांट बंद, तय लक्ष्य से 130 दिन कम मिला आहार

    बच्चों के पोषण पर संकट गहराया! प्रदेश के सभी 7 पोषण आहार प्लांट बंद, तय लक्ष्य से 130 दिन कम मिला आहार


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ चल रही योजनाओं के बीच पोषण व्यवस्था को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। मिशन पोषण 2.0 के तहत गर्भवती महिलाओं स्तनपान कराने वाली माताओं और 6 वर्ष तक के बच्चों को साल में कम से कम 300 दिन पोषण आहार दिया जाना चाहिए। लेकिन प्रदेश की करीब 97 हजार आंगनबाड़ियों में जुलाई तक लगभग 170 दिन ही नियमित पोषण आहार पहुंच सका। यानी जिन बच्चों और महिलाओं को सालभर पर्याप्त पोषण मिलना चाहिए था उन्हें तय अवधि के मुकाबले काफी कम दिनों तक आहार मिल पाया।

    स्थिति की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि प्रदेश में पोषण आहार तैयार करने वाले सभी 7 प्लांट बंद हो चुके हैं। रीवा सागर देवास शिवपुरी और होशंगाबाद समेत अलग-अलग जिलों में संचालित इन प्लांटों के बंद होने की वजह भारी आर्थिक घाटा बताया जा रहा है। नई व्यवस्था शुरू करने के लिए अभी तक टेंडर जारी नहीं होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में आंगनबाड़ियों तक नियमित पोषण आहार पहुंचाने की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    पोषण की स्थिति से जुड़े आंकड़े भी चिंता बढ़ा रहे हैं। एनएफएचएस-6 के आंकड़ों के मुताबिक देश के स्तर पर कुपोषण से जुड़े कई संकेतकों में सुधार दिखाई दिया है लेकिन मध्य प्रदेश में कुछ प्रमुख मानकों पर स्थिति कमजोर हुई है। प्रदेश में वेस्टिंग यानी बच्चे की लंबाई के अनुपात में कम वजन की स्थिति करीब 6 प्रतिशत बढ़ी है। अब लगभग हर चौथा बच्चा वेस्टिंग से प्रभावित बताया जा रहा है। स्टंटिंग यानी उम्र के हिसाब से कम लंबाई वाले बच्चों के आंकड़े में करीब 2 प्रतिशत सुधार हुआ है लेकिन अब भी 33.3 प्रतिशत बच्चे इस स्थिति से प्रभावित हैं।

    ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति और ज्यादा चिंताजनक बताई गई है। यहां अंडरवेट यानी उम्र के अनुपात में कम वजन वाले बच्चों का आंकड़ा पिछले सर्वे में करीब 33 प्रतिशत था जो बढ़कर 42 प्रतिशत से अधिक हो गया है। इसका मतलब है कि ग्रामीण इलाकों में हर 10 बच्चों में 4 से ज्यादा बच्चे कम वजन की समस्या से जूझ रहे हैं। यह आंकड़ा पोषण व्यवस्था की प्रभावशीलता और आंगनबाड़ी सेवाओं की पहुंच को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    पोषण से जुड़ी सरकारी योजनाओं के बीच महिलाओं के लाभ को लेकर भी एक अलग मुद्दा सामने आया है। बैगा भारिया और सहरिया जनजातियों की महिला मुखिया को आहार अनुदान योजना के तहत पहले 1000 रुपए और अब 1500 रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं। दूसरी ओर लाड़ली बहना योजना के नियमों के अनुसार दूसरी योजना से 1500 रुपए या उससे अधिक की राशि पाने वाली महिला पात्र नहीं होती। इसी वजह से इन जनजातीय समुदायों की 3 लाख से अधिक पात्र महिलाओं के लाड़ली बहना योजना से बाहर होने की बात कही गई है।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि आहार अनुदान का उद्देश्य पोषण उपलब्ध कराना है जबकि लाड़ली बहना योजना महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता से जुड़ी है। उनका तर्क है कि दोनों योजनाओं का उद्देश्य अलग है इसलिए एक योजना का लाभ मिलने के आधार पर दूसरी योजना से महिलाओं को बाहर नहीं किया जाना चाहिए।

    मध्य प्रदेश में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की आबादी भी काफी बड़ी है। देश में 75 जनजातीय समूहों को विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह के तौर पर चिन्हित किया गया है। मध्य प्रदेश में डिंडोरी मंडला बालाघाट अनूपपुर और उमरिया में बैगा समुदाय श्योपुर में सहरिया और छिंदवाड़ा के पातालकोट क्षेत्र में भारिया समुदाय की बड़ी आबादी रहती है। देश में करीब 45 लाख विशेष रूप से कमजोर जनजातीय आबादी में लगभग 12 लाख लोगों के मध्य प्रदेश में होने का दावा किया गया है।

    कुपोषण की जमीनी स्थिति दतिया से सामने आए एक मामले से भी समझी जा सकती है। सलैया पमार आदिवासी डेरा की 16 महीने की नीलू आदिवासी को उल्टी और दस्त के बाद 10 अगस्त को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसका वजन 5.2 किलो बताया गया जबकि इस उम्र में सामान्य वजन करीब 10 किलो के आसपास होना चाहिए। हालत में सुधार के बाद परिवार उसे घर ले गया लेकिन बाद में तबीयत बिगड़ने से बच्ची की मौत हो गई।

    बताया गया कि गांव में छह अन्य बच्चे भी अतिकुपोषित हैं। बावजूद इसके बच्ची की मौत के बाद स्वास्थ्य टीम के समय पर गांव नहीं पहुंचने को लेकर सवाल उठे हैं। बीएमओ डॉ. राहुल चऊदा ने टीम भेजने की बात कही है जबकि कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने मामले की जांच कराने की बात कही है।

    गांव की स्थिति में स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं की दूसरी कमियां भी सामने आई हैं। स्थानीय स्तर पर उपस्वास्थ्य केंद्र बंद मिला। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के अनुसार गांव में करीब 70 बच्चे हैं लेकिन पोषण ट्रैकर एप पर केवल 20 बच्चों का रिकॉर्ड दर्ज है। समग्र आईडी और आधार से जुड़ी दिक्कतों के कारण बाकी बच्चों को पोषण आहार नहीं मिलने की बात सामने आई है। गर्भवती महिलाओं को मिलने वाला टेक होम राशन भी करीब पांच महीने से नहीं पहुंचने का दावा किया गया है।

    यह स्थिति बताती है कि कुपोषण से लड़ाई सिर्फ योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रह सकती। बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक समय पर पोषण आहार पहुंचना स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना और पात्र हितग्राहियों का सही रिकॉर्ड तैयार करना भी उतना ही जरूरी है। जब पोषण आहार की निर्धारित अवधि 300 दिनों की हो और वितरण करीब 170 दिनों तक सीमित रह जाए तो व्यवस्था की निरंतरता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसे में बंद पड़े प्लांटों को लेकर जल्द निर्णय और आंगनबाड़ी स्तर पर नियमित पोषण व्यवस्था बहाल करना सरकार के सामने बड़ी चुनौती है।

  • ग्रुप-3 भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, MP में बंपर पदों पर मौका; आवेदन शुल्क से लेकर परीक्षा तक जानें पूरी डिटेल

    ग्रुप-3 भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, MP में बंपर पदों पर मौका; आवेदन शुल्क से लेकर परीक्षा तक जानें पूरी डिटेल


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की ओर से ग्रुप-3 के तहत 1040 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। इस भर्ती में सब इंजीनियर ड्राफ्ट्समैन प्रयोगशाला तकनीशियन समेत कई पद शामिल हैं। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार 18 अगस्त से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तारीख 1 सितंबर निर्धारित की गई है। भर्ती के लिए संयुक्त परीक्षा 6 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी। ऐसे में उम्मीदवारों के पास आवेदन करने के साथ परीक्षा की तैयारी के लिए भी सीमित समय है।

    ग्रुप-3 भर्ती में अलग-अलग विभागों और संस्थानों के कई पद शामिल किए गए हैं। इनमें भोपाल विकास प्राधिकरण में सब इंजीनियर के 36 पद और इंदौर विकास प्राधिकरण में सब इंजीनियर के 44 पद बताए गए हैं। इसके अलावा ड्राफ्ट्समैन प्रयोगशाला तकनीशियन और अन्य समकक्ष पदों पर भी नियुक्तियां की जाएंगी। पदों की योग्यता और संबंधित तकनीकी शर्तें अलग-अलग हो सकती हैं इसलिए उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले भर्ती से जुड़ी आधिकारिक जानकारी और अपने पद की पात्रता जरूर जांचनी चाहिए।

    इस भर्ती के लिए आयु सीमा 18 से 40 वर्ष निर्धारित की गई है। पात्र आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष तक की छूट दी जाएगी। आवेदन शुल्क की बात करें तो सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 500 रुपए शुल्क निर्धारित है जबकि OBC EWS दिव्यांगजन SC और ST वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 250 रुपए प्रति प्रश्नपत्र शुल्क रखा गया है। आवेदन करते समय उम्मीदवारों को शुल्क और अन्य प्रक्रिया की जानकारी ध्यान से जांचनी चाहिए।

    ग्रुप-3 की संयुक्त भर्ती परीक्षा 6 अक्टूबर 2026 से आयोजित की जाएगी। परीक्षा की तारीख शिफ्ट और परीक्षा केंद्र से जुड़ी जानकारी उम्मीदवारों को प्रवेश पत्र के माध्यम से मिलेगी। इसलिए आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के बाद अभ्यर्थियों को कर्मचारी चयन मंडल की ओर से जारी होने वाले अपडेट पर लगातार नजर रखनी होगी। परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र जारी होने के बाद उसमें दिए गए केंद्र और समय की जानकारी को ध्यान से देखना जरूरी होगा।

    परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए पहचान और दस्तावेजों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण नियम भी हैं। आधार कार्ड का UIDAI से सत्यापन होना जरूरी बताया गया है। इसके अलावा वोटर आईडी PAN कार्ड आधार ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट में से किसी एक मूल पहचान पत्र को साथ रखना होगा। उम्मीदवार को आधार कार्ड या ई आधार की कॉपी भी अपने साथ रखनी होगी। आधार नंबर या VID की आवश्यकता पड़ सकती है।

    परीक्षा केंद्र पर बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था रहेगी। इसके लिए उम्मीदवारों को आधार का Unlock Status सुनिश्चित रखना होगा। परीक्षा केंद्र पर देर से पहुंचने वाले अभ्यर्थियों को प्रवेश नहीं दिया जा सकता है इसलिए उम्मीदवारों को निर्धारित समय से पहले केंद्र पहुंचना चाहिए। परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन कैलकुलेटर डिजिटल वॉच और अन्य प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाना मान्य नहीं होगा।

    उम्मीदवारों को आवेदन क्रमांक सुरक्षित रखना चाहिए क्योंकि आगे की प्रक्रिया में इसकी जरूरत पड़ सकती है। परीक्षा केंद्र पर प्रवेश पत्र और काला बॉल पेन साथ ले जाना जरूरी होगा। परीक्षा शुरू होने के बाद अभ्यर्थियों को परीक्षा कक्ष से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी। नियुक्ति के समय संबंधित प्रमाण पत्रों और दस्तावेजों की जांच की जाएगी इसलिए आवेदन में दी गई जानकारी और दस्तावेजों में किसी तरह की गलती नहीं होनी चाहिए।

    मध्य प्रदेश के रोजगार कार्यालय में जीवित पंजीयन भी भर्ती से जुड़ी पात्रता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए अभ्यर्थियों को अपने रोजगार पंजीयन की स्थिति पहले ही जांच लेनी चाहिए। बैगा सहरिया और भारिया जनजाति के उम्मीदवारों को इस भर्ती परीक्षा से अलग से छूट नहीं दी गई है। ऐसे अभ्यर्थियों को अनुसूचित जनजाति श्रेणी में आवेदन करने के निर्देश दिए गए हैं।

    सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह भर्ती महत्वपूर्ण अवसर है क्योंकि एक साथ 1040 पदों पर नियुक्ति का मौका मिल रहा है। आवेदन की अंतिम तारीख नजदीक होने के कारण उम्मीदवारों को अंतिम समय का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवेदन पूरा कर लेना चाहिए। साथ ही परीक्षा की तारीख को ध्यान में रखते हुए विषयवार तैयारी शुरू करना भी जरूरी है। आवेदन से पहले उम्मीदवार आधिकारिक भर्ती नियम पात्रता पदवार योग्यता और दस्तावेजों की शर्तों को अच्छी तरह पढ़ लें ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो।

  • मुआवजे पर उठे सवालों के बीच केंद्र ने दिया हिसाब, 5039 प्रभावित परिवारों को 590 करोड़ से ज्यादा का भुगतान

    मुआवजे पर उठे सवालों के बीच केंद्र ने दिया हिसाब, 5039 प्रभावित परिवारों को 590 करोड़ से ज्यादा का भुगतान


    भोपाल । केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने मुआवजे और पुनर्वास को लेकर उठ रहे सवालों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। जल शक्ति मंत्रालय की ओर से जारी पीआईबी प्रेस नोट में कहा गया है कि प्रभावित परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास का लाभ नहीं मिलने से जुड़े आरोप सही नहीं हैं। सरकार के मुताबिक अधिकांश पात्र परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास संबंधी लाभ दिया जा चुका है जबकि कुछ मामलों में केवल जरूरी कागजी औपचारिकताएं पूरी होना बाकी हैं।

    केन-बेतवा परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में जनजातीय परिवारों के बिना मुआवजे विस्थापन के आरोप लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों के विरोध में चिता आंदोलन फांसी प्रदर्शन और जल सत्याग्रह जैसे प्रतीकात्मक प्रदर्शन भी किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन प्रदर्शनों में मुआवजे और पुनर्वास को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं वे उपलब्ध सरकारी आंकड़ों से मेल नहीं खाते।

    सरकार के अनुसार परियोजना से प्रभावित कुल 5039 परिवारों की पहचान की गई है। इन परिवारों के लिए 629.87 करोड़ रुपए का मुआवजा निर्धारित किया गया है। इसमें से 590.74 करोड़ रुपए यानी करीब 93.78 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जा चुका है। शेष राशि का भुगतान आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद किया जाएगा। सरकार का कहना है कि पात्र परिवारों को किसी तरह का लाभ न छूटे इसके लिए भूमि रिकॉर्ड का लगातार सत्यापन किया जा रहा है।

    कृषि भूमि के मुआवजे को लेकर भी सरकार ने आंकड़े जारी किए हैं। जुलाई 2026 तक 10913 प्रभावित लोगों की कृषि भूमि के लिए 360.66 करोड़ रुपए का मुआवजा निर्धारित किया गया था। इसमें से 320.45 करोड़ रुपए यानी 88.85 प्रतिशत राशि वितरित की जा चुकी है। वहीं मकान और दूसरी आवासीय परिसंपत्तियों के लिए 149.63 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं जिसमें से 93.97 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जा चुका है।

    सरकार के मुताबिक भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास की प्रक्रिया 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून और मध्य प्रदेश सरकार की ओर से 13 सितंबर 2023 को स्वीकृत विशेष पुनर्वास पैकेज के तहत की जा रही है। अधिगृहीत जमीन के लिए कानून के अनुसार निर्धारित मुआवजा या 12.50 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर में से जो राशि अधिक होगी वह दी जा रही है। इसके अलावा मकान पेड़ कुएं ट्यूबवेल और अन्य अचल संपत्तियों के लिए भी नियमानुसार मुआवजा निर्धारित किया जा रहा है।

    पुनर्वास पैकेज में पात्र परिवारों के लिए प्लॉट से जुड़ी सहायता का भी प्रावधान है। ग्रामीण क्षेत्र में प्लॉट के लिए 7 लाख रुपए और शहरी क्षेत्र में प्लॉट के लिए 6.50 लाख रुपए दिए जाने की बात कही गई है। जो परिवार प्लॉट का विकल्प नहीं लेते हैं उन्हें एकमुश्त 12.50 लाख रुपए की सहायता देने का प्रावधान है। अनुसूचित क्षेत्रों में पात्र एससी-एसटी परिवारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता का भी प्रावधान बताया गया है।

    प्रभावित परिवारों की समस्याओं को मौके पर सुनने और योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए करौंदिया में विशेष शिविर भी लगाए गए हैं। सरकार के अनुसार इन शिविरों में पशुपालन सामाजिक सुरक्षा गरीबी रेखा लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजनाओं से जुड़े मामलों पर कार्रवाई की गई। स्वास्थ्य सेवाओं के तहत 178 लोगों को उपचार दिया गया और आयुष दवाओं का वितरण भी किया गया। हैंडपंपों की मरम्मत तथा विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति मैपिंग और किताबों के वितरण का काम भी किया गया। सरकार के मुताबिक पिछले दस दिनों में 86 प्रभावित लोगों के लिए 10.42 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है।

    विरोध प्रदर्शनों को लेकर सरकार ने एक गंभीर दावा भी किया है। पीआईबी के प्रेस नोट के मुताबिक हाल के आंदोलनों में शामिल कुछ लोगों के नाम परियोजना से प्रभावित परिवारों की सूची भू-अभिलेखों या मुआवजा रजिस्टर में नहीं पाए गए हैं। सरकार ने दावा किया है कि इन प्रदर्शनों में मुख्य रूप से बाहरी तत्व शामिल हैं जो परियोजना को लेकर भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत सूचनाएं फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि आंदोलनकारी पक्ष की ओर से इस दावे पर क्या प्रतिक्रिया आती है यह भी महत्वपूर्ण होगा।

    सरकार ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के संभावित लाभ भी गिनाए हैं। इसे नेशनल पर्सपेक्टिव प्लान के तहत देश की पहली प्रमुख नदी जोड़ो परियोजना बताया गया है। योजना के तहत केन नदी के अतिरिक्त पानी को बेतवा नदी की ओर पहुंचाने का प्रस्ताव है ताकि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाई जा सके।

    सरकार के मुताबिक परियोजना से करीब 10.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिल सकती है। इसके साथ ही लगभग 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने और 103 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन का लाभ मिलने का दावा किया गया है। परियोजना की अनुमानित लागत 44604.99 करोड़ रुपए बताई गई है।

    केन-बेतवा परियोजना को लेकर एक तरफ सरकार मुआवजे और पुनर्वास प्रक्रिया को नियमों के अनुसार पूरा होने का दावा कर रही है तो दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर विरोध और विस्थापन से जुड़े सवाल लगातार उठ रहे हैं। ऐसे में परियोजना से प्रभावित परिवारों की वास्तविक स्थिति और उनकी मांगों पर आगे होने वाली कार्रवाई इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

  • MP Politics: उज्जैन में VIP कल्चर पर उठे सवाल, गुना में मंच पर भिड़े विधायक; मुरैना सांसद की भी फिसली जुबान

    MP Politics: उज्जैन में VIP कल्चर पर उठे सवाल, गुना में मंच पर भिड़े विधायक; मुरैना सांसद की भी फिसली जुबान


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासन से जुड़ी घटनाओं में बुधवार को कई ऐसे मामले सामने आए जिन्होंने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। कहीं धार्मिक स्थल पर VIP दर्शन को लेकर आम श्रद्धालुओं की परेशानी चर्चा में रही तो कहीं भाजपा के ही मंच पर विधायक आपस में उलझते नजर आए। खंडवा में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर एक अनोखा प्रदर्शन किया गया और मुरैना में भाजपा सांसद की जुबान ऐसी फिसली कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही रेल मंत्री बता दिया। इन घटनाओं ने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक खूब चर्चा बटोरी।

    उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर में नागपंचमी के मौके पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। यह मंदिर साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी के दिन श्रद्धालुओं के लिए खुलता है। ऐसे में लाखों लोगों की आस्था इस मंदिर से जुड़ी होती है। लेकिन भीड़ के बीच VIP दर्शन को लेकर सवाल उठे। आरोप है कि कई VIP लोगों को गर्भगृह में जाकर आराम से पूजा और दर्शन का मौका मिला जबकि आम श्रद्धालु घंटों लाइन में खड़े रहे। बाहर श्रद्धालुओं को सुरक्षा व्यवस्था के तहत तेजी से आगे बढ़ाया जाता रहा और कई लोग ठीक से दर्शन भी नहीं कर सके।

    बताया गया कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भाजपा विधायक गोलू शुक्ला कांग्रेस विधायक महेश परमार और भाजपा सांसद अनिल फिरोजिया की बेटी समेत कई VIP गर्भगृह तक पहुंचे। उन्होंने भगवान नागचंद्रेश्वर का जल और दूध से अभिषेक किया तथा पूजा अर्चना की। VIP दर्शन की तस्वीरों और वीडियो के सामने आने के बाद आम श्रद्धालुओं के बीच नाराजगी देखने को मिली। सवाल यही उठता रहा कि जब भगवान के दरबार में सभी भक्त समान हैं तो दर्शन व्यवस्था में इतना अंतर क्यों दिखाई देता है।

    इधर गुना में भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य के एक बयान को लेकर मंच पर ही विवाद की स्थिति बन गई। रामायण प्रसंग सुनाते हुए शाक्य ने माता सीता के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जिस पर चाचौड़ा से भाजपा विधायक प्रियंका पेंची ने आपत्ति जताई। पन्नालाल शाक्य ने रामायण के युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि युद्ध में पुरुषों की मृत्यु हुई जबकि महिलाओं की नहीं। इसके बाद महाभारत का उदाहरण देते हुए भी उन्होंने इसी तरह की बात कही।

    मंच पर मौजूद प्रियंका पेंची ने उनकी बात को गलत बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई। दोनों के बीच मंच से ही कुछ देर नोकझोंक हुई। प्रियंका पेंची ने कहा कि महिलाओं ने भी बलिदान दिया है और वह खुद भी महिला हैं। इस घटनाक्रम के बाद पन्नालाल शाक्य के बयान को लेकर विपक्ष को भी भाजपा पर हमला करने का मौका मिल गया।

    खंडवा में जनसुनवाई के दौरान विरोध प्रदर्शन का तरीका भी चर्चा में रहा। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष दीपक राठौर एक युवक को कुत्ते का गेटअप पहनाकर कलेक्ट्रेट पहुंच गए। आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर उन्होंने इसी अंदाज में प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। युवक ने कुत्ते की वेशभूषा में कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा।

    नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि आवारा कुत्तों की नसबंदी और नियंत्रण के नाम पर करीब 40 लाख रुपए खर्च किए गए हैं लेकिन इसके बावजूद समस्या कम नहीं हुई। उन्होंने खर्च का हिसाब मांगते हुए कार्रवाई की मांग उठाई। मुद्दा गंभीर था लेकिन प्रदर्शन का तरीका लोगों के बीच चर्चा और मजाक का विषय भी बन गया।

    मुरैना में भाजपा सांसद शिवमंगल सिंह तोमर की जुबान भी फिसल गई। कैलारस से वीरपुर तक मेमो ट्रेन की शुरुआत के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रेल मंत्री कह दिया। उन्होंने ट्रेन शुरू होने पर भारत सरकार के रेल मंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देने की बात कही। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रेल मंत्री नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री हैं। सांसद के बयान का वीडियो सामने आने के बाद लोग सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देने लगे।

    इन घटनाओं के बीच मध्य प्रदेश भाजपा के संगठन को लेकर भी अंदरखाने चर्चाएं तेज हैं। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में प्रदेश के कई नेताओं को जिम्मेदारियां मिली हैं। इन नियुक्तियों के बाद नेताओं के बीच सीनियर और जूनियर को लेकर नई चर्चा शुरू होने की बात कही जा रही है। कुछ नेताओं को मिली जिम्मेदारियों को संगठन में अहम माना जा रहा है जबकि एक नेता की भूमिका को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग अलग कयास लगाए जा रहे हैं।

    कुल मिलाकर उज्जैन से लेकर गुना खंडवा और मुरैना तक सामने आई ये घटनाएं मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासन के अलग अलग रंग दिखाती हैं। कहीं VIP कल्चर को लेकर सवाल हैं तो कहीं नेताओं के बयान और प्रदर्शन के तरीके सुर्खियां बन रहे हैं। आने वाले दिनों में इनमें से कुछ मुद्दे राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकते हैं।

  • MP में फिर बदला मौसम का मिजाज! 12 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, इन 3 जिलों में आफत बन सकती है बारिश

    MP में फिर बदला मौसम का मिजाज! 12 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, इन 3 जिलों में आफत बन सकती है बारिश


    भोपाल । मध्य प्रदेश में एक बार फिर मानसून सक्रिय हो गया है और प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का दौर तेज होने के संकेत हैं। मौसम विभाग के अनुसार टीकमगढ़ पन्ना और नरसिंहपुर में अगले 24 घंटे के दौरान अति भारी बारिश हो सकती है। इन जिलों में 4 से 8 इंच तक पानी गिरने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा जबलपुर समेत 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में ढाई से 4 इंच तक बारिश होने का अनुमान है। बारिश का सबसे ज्यादा असर विंध्य बुंदेलखंड और महाकौशल क्षेत्र में देखने को मिल सकता है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक 18 अगस्त को झारखंड के ऊपर सक्रिय अवदाब ने पूर्वी मध्य प्रदेश को बारिश का मुख्य केंद्र बना दिया है। इसके प्रभाव से 19 अगस्त को प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की स्थिति बन सकती है। मौसम की गतिविधियां आने वाले दिनों में धीरे-धीरे मध्य और पश्चिमी मध्य प्रदेश की तरफ बढ़ सकती हैं। 20 से 24 अगस्त के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दायरा बढ़ने के संकेत हैं।

    आज टीकमगढ़ पन्ना और नरसिंहपुर में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। वहीं रायसेन सागर दमोह जबलपुर कटनी मंडला शहडोल सीधी मऊगंज रीवा सतना और छतरपुर में भारी बारिश हो सकती है। इन क्षेत्रों में ढाई से 4 इंच तक बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा भोपाल सीहोर राजगढ़ विदिशा इंदौर धार अलीराजपुर बुरहानपुर बड़वानी खंडवा खरगोन झाबुआ उज्जैन नीमच आगर-मालवा मंदसौर शाजापुर देवास रतलाम नर्मदापुरम बैतूल हरदा ग्वालियर गुना शिवपुरी दतिया अशोकनगर मुरैना भिंड श्योपुर छिंदवाड़ा सिवनी बालाघाट डिंडौरी पांढुर्णा सिंगरौली मैहर उमरिया अनूपपुर और निवाड़ी में भी मौसम बदला रह सकता है। यहां कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने के आसार हैं।

    लगातार बारिश के बीच जलाशयों में भी पानी की आवक बढ़ी है। जबलपुर के बरगी डैम के 9 गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है। ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। नदी नालों के जलस्तर में बढ़ोतरी और स्थानीय जलभराव की स्थिति भी बन सकती है।

    प्रदेश में इस मानसूनी सीजन में अब तक 573.1 मिलीमीटर यानी करीब 22.6 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है। हालांकि सामान्य बारिश के मुकाबले अभी करीब 3 इंच पानी कम है। मध्य प्रदेश में इस समय तक सामान्य बारिश करीब 25.6 इंच होनी चाहिए थी। आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में कुल मिलाकर करीब 12 प्रतिशत बारिश कम हुई है। पूर्वी हिस्से में बारिश की कमी करीब 16 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में करीब 9 प्रतिशत बताई गई है।

    प्रदेश के करीब 40 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी हिस्से के कई जिलों में बारिश की कमी ज्यादा है। बालाघाट छतरपुर छिंदवाड़ा दमोह डिंडौरी जबलपुर कटनी मैहर मंडला मऊगंज नरसिंहपुर निवाड़ी पांढुर्णा पन्ना रीवा सागर सतना सिवनी और टीकमगढ़ जैसे जिलों में सामान्य से 4 प्रतिशत से लेकर 58 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं पश्चिमी हिस्से में भी कई जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे है।

    इसके बावजूद कुछ जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। अनूपपुर शहडोल सीधी सिंगरौली उमरिया बड़वानी भिंड भोपाल बुरहानपुर देवास ग्वालियर खंडवा खरगोन राजगढ़ और गुना में औसत से ज्यादा बारिश हुई है।

    मौसम विभाग के मुताबिक जून में प्रदेश में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई में बारिश की स्थिति बेहतर हुई और महीने का कोटा पूरा हो गया लेकिन जून की कमी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी। मानसून के बीच दो बार ब्रेक की स्थिति भी बनी जिसके कारण कई दिनों तक बारिश कमजोर रही। अब अगस्त के दूसरे हिस्से में सक्रिय सिस्टम के कारण बारिश की गतिविधियां फिर बढ़ रही हैं।

    मध्य प्रदेश में सामान्य मानसूनी बारिश करीब 37.3 इंच मानी जाती है। भोपाल इंदौर जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में सामान्य बारिश करीब 38 से 39 इंच तक रहती है। अगस्त के महीने में इन शहरों में बारिश का इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है।

    भोपाल में अगस्त महीने में सबसे ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड 2006 में दर्ज हुआ था जब करीब 35 इंच पानी गिरा था। 14 अगस्त 2006 को 24 घंटे में करीब 12 इंच बारिश होने का रिकॉर्ड भी दर्ज है। इंदौर में अगस्त की सर्वाधिक मासिक बारिश करीब 28 इंच रही है जो 1944 में दर्ज हुई थी। 22 अगस्त 2020 को यहां 24 घंटे में करीब साढ़े 10 इंच बारिश हुई थी।

    ग्वालियर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड 10 अगस्त 1927 का है जबकि मासिक सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 1916 में करीब 28 इंच रहा था। जबलपुर में अगस्त की बारिश का रिकॉर्ड और भी बड़ा है। वर्ष 1923 में यहां एक महीने में करीब 44 इंच बारिश हुई थी और 20 अगस्त को 24 घंटे में करीब 13 इंच पानी गिरा था। उज्जैन में भी अगस्त के दौरान तेज बारिश का इतिहास रहा है। वर्ष 2006 में यहां करीब 35 इंच बारिश दर्ज की गई थी।

    फिलहाल मौसम का सबसे ज्यादा असर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में दिखाई दे रहा है। अगले कुछ दिनों में सिस्टम के आगे बढ़ने के साथ मध्य और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में नदी नालों और निचले इलाकों के आसपास रहने वाले लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी जाती है।

  • एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी के खिलाफ टैक्सी चालकों का मोर्चा, मंत्री से बैठक पर टिकी नजर

    एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी के खिलाफ टैक्सी चालकों का मोर्चा, मंत्री से बैठक पर टिकी नजर


    भोपाल । भोपाल में टैक्सी चालकों की हड़ताल के चलते बुधवार को कैब सेवाएं प्रभावित रहीं। मंगलवार रात 12 बजे से टैक्सी संचालन बंद होने के बाद रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पहुंचने वाले यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऑनलाइन कैब बुक करने के बावजूद कई यात्रियों को वाहन उपलब्ध नहीं हो सके। ऐसे में लोगों को ऑटो और दूसरे वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ा। इस बीच टैक्सी यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है। बुधवार को बोर्ड ऑफिस चौराहे पर टैक्सी चालक धरना प्रदर्शन करेंगे और इसके बाद यूनियन पदाधिकारी परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से मुलाकात करेंगे। मंत्री से बातचीत के बाद ही हड़ताल की आगे की दिशा तय की जाएगी।

    दरअसल टैक्सी संचालकों और परिवहन विभाग के अधिकारियों के बीच मंगलवार को हड़ताल को लेकर बैठक हुई थी। बैठक में टैक्सी यूनियन कल्याण समिति संपूर्ण भारत के सचिव नफीस उद्दीन और भोपाल टैक्सी चालक संघ के महामंत्री राजेश कुमार नागले समेत कई पदाधिकारी शामिल हुए। यूनियन और अधिकारियों के बीच ड्राइवरों की समस्याओं तथा टैक्सी संचालन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई लेकिन बैठक में कोई अंतिम समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद यूनियन ने बुधवार को परिवहन मंत्री के सामने अपनी मांगें रखने का निर्णय लिया है।

    टैक्सी संगठनों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में ड्राइवरों के लिए काम करना मुश्किल होता जा रहा है। यूनियन की प्रमुख मांग है कि सरकार टैक्सियों के लिए उचित किराया निर्धारित करे। इसके अलावा एग्रीगेटर कंपनियों की कथित मनमानी पर रोक लगाने की मांग भी की जा रही है। यूनियन का कहना है कि किराया और दूसरे नियमों को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए ताकि टैक्सी चालकों को काम के बदले उचित आमदनी मिल सके। संगठन ने प्राइवेट नंबर वाले वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर भी कार्रवाई की मांग उठाई है।

    बुधवार को बोर्ड ऑफिस चौराहे पर होने वाला धरना इस आंदोलन का अहम हिस्सा माना जा रहा है। यहां टैक्सी चालक और यूनियन पदाधिकारी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से मुलाकात करेगा। इस बैठक में ड्राइवरों की समस्याओं के साथ टैक्सी किराया तय करने और एग्रीगेटर कंपनियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। यूनियन को उम्मीद है कि सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस आश्वासन मिल सकता है।

    हड़ताल का सीधा असर आम यात्रियों पर भी पड़ रहा है। भोपाल रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पर कैब नहीं मिलने के कारण यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। कई लोगों ने ऑनलाइन कैब बुक करने की कोशिश की लेकिन वाहन उपलब्ध नहीं होने से उन्हें परेशानी हुई। कुछ जगहों पर ऑटो चालकों द्वारा सामान्य से अधिक किराया लिए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। यात्रियों का कहना है कि अचानक कैब सेवा बंद होने से खासकर रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जाने वाले लोगों की मुश्किल बढ़ गई है।

    टैक्सी यूनियन का कहना है कि आंदोलन का अगला फैसला सरकार के रुख पर निर्भर करेगा। यदि परिवहन मंत्री के साथ बातचीत में मांगों को लेकर सकारात्मक आश्वासन मिलता है तो हड़ताल समाप्त करने पर विचार किया जा सकता है। वहीं अगर बातचीत बेनतीजा रहती है तो आंदोलन को आगे बढ़ाने का फैसला लिया जा सकता है। ऐसे में बुधवार को होने वाला धरना और परिवहन मंत्री के साथ प्रस्तावित बैठक भोपाल की टैक्सी सेवाओं के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

  • भोपाल में कमर्शियल सीलिंग के खिलाफ सड़क पर उतरे व्यापारी! मास्टर प्लान और मिक्स्ड लैंड यूज की मांग तेज

    भोपाल में कमर्शियल सीलिंग के खिलाफ सड़क पर उतरे व्यापारी! मास्टर प्लान और मिक्स्ड लैंड यूज की मांग तेज


    भोपाल । भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई ने अब बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। शहर में हजारों नोटिस जारी होने के बाद कारोबारियों का गुस्सा सड़क पर दिखाई देने लगा है। मंगलवार को रोशनपुरा चौराहे पर व्यापारियों ने प्रदर्शन और चक्काजाम किया और सरकार के सामने तीन विकल्प रखे। व्यापारियों का कहना है कि या तो भोपाल का मास्टर प्लान लागू किया जाए या गुजरात की तर्ज पर मिक्स्ड लैंड यूज की व्यवस्था की जाए या फिर नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई को तत्काल रोका जाए। इन मांगों पर समाधान नहीं निकला तो व्यापारियों ने अनिश्चितकाल के लिए भोपाल बंद करने की चेतावनी दी है।

    10 नंबर मार्केट व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष आनंद सोनी ने सरकार से कार्रवाई के बीच कारोबारियों को राहत देने की मांग की। उनका कहना है कि लंबे समय से लोग इन इलाकों में कारोबार कर रहे हैं और इसी व्यवसाय से उनके परिवारों की रोजी रोटी चल रही है। व्यापारियों का दावा है कि कार्रवाई का दायरा बढ़ा तो बड़ी संख्या में छोटे दुकानदार और उनसे जुड़े कर्मचारी बेरोजगार हो सकते हैं। व्यापारियों ने सवाल उठाया कि यदि कारोबार बंद हो गया तो बच्चों की पढ़ाई और परिवार का खर्च कैसे चलेगा।

    हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र के कारोबारी राहुल जैन ने भी नोटिस मिलने के बाद चिंता जताई। उनका कहना है कि कई दुकानदार पहले से कर्ज में हैं। व्यापारियों का तर्क है कि उनकी संपत्तियों की रजिस्ट्री हुई है बिजली के कमर्शियल मीटर लगाए गए हैं और नगर निगम को संपत्ति कर सहित दूसरे करों का भुगतान भी किया जाता रहा है। ऐसे में अब कमर्शियल गतिविधियों को लेकर कार्रवाई किए जाने से कारोबारियों में असमंजस और नाराजगी दोनों बढ़ रही है।

    इस पूरे विवाद में मास्टर प्लान का मुद्दा भी केंद्र में आ गया है। व्यापारियों और कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय पर नया मास्टर प्लान लागू होता तो शहर के अलग अलग हिस्सों में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जा सकती थी। व्यापारियों का दावा है कि भोपाल का पिछला मास्टर प्लान 1995 में आया था और इसके बाद प्रस्तावित नया प्लान लंबे समय से लंबित है। इसी बीच शहर का विस्तार लगातार होता गया और कई ऐसे इलाकों में कारोबार शुरू हो गए जहां अब कमर्शियल गतिविधियों को लेकर कार्रवाई की जा रही है।

    सीलिंग कार्रवाई के विरोध में पहली बार बड़ी संख्या में ब्यूटिशियन और महिला कारोबारी भी सड़क पर उतरीं। प्रदर्शन के दौरान एक ब्यूटिशियन ने सड़क पर ही मेकअप करके विरोध जताया। उनका कहना है कि ब्यूटी पार्लर सैलून और छोटे कारोबारों से बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार जुड़ा है। यदि इन्हें बंद कराया गया तो सिर्फ दुकानदार ही नहीं बल्कि वहां काम करने वाले कर्मचारी और उनके परिवार भी प्रभावित होंगे।

    दूसरी ओर नगर निगम ने रहवासी भवनों के कमर्शियल इस्तेमाल को लेकर सर्वे और नोटिस की कार्रवाई तेज कर दी है। निगम के मुताबिक अब तक 7158 नोटिस जारी किए जा चुके हैं। सोमवार तक 6589 नोटिस दिए गए थे जबकि मंगलवार को 569 नए नोटिस जारी किए गए। निगम के सर्वे में संपत्ति कर रिकॉर्ड के आधार पर 62 हजार 500 से ज्यादा ऐसी संपत्तियां चिन्हित की गई हैं जहां रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक सर्वे का दायरा बढ़ने के साथ नोटिस की संख्या और बढ़ सकती है।

    नगर निगम की कार्रवाई केवल दुकानों तक सीमित नहीं रहने वाली है। मुख्य सड़कों के साथ उनसे जुड़ी गलियों में भी सर्वे किया जा रहा है। नदी और तालाब के किनारे ग्रीन बेल्ट बफर जोन और कैचमेंट एरिया में बने भवनों की भी जांच की जा रही है। अवैध मैरिज गार्डन और अनुमति के विपरीत निर्माण से जुड़े मामलों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।

    निगम की ओर से बताया गया है कि कई मामलों में नोटिस के बाद निर्धारित समय पूरा होने पर आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। अधिभोग उल्लंघन के मामलों की जांच के बाद अंतिम आदेश जारी किए जाएंगे और संबंधित लोगों को उल्लंघन समाप्त करने के लिए अंतिम सूचना दी जाएगी। सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमों के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    इधर व्यापारियों ने सरकार को तीन विकल्प देकर साफ कर दिया है कि वे कार्रवाई के खिलाफ पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। व्यापारियों की मांग है कि भोपाल का मास्टर प्लान जल्द लागू किया जाए और मिक्स्ड लैंड यूज की व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए। उनका कहना है कि इससे शहर की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।

    फिलहाल भोपाल में नगर निगम की कार्रवाई और व्यापारियों के विरोध के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद निगम नियमों के पालन को लेकर कार्रवाई आगे बढ़ा रहा है तो दूसरी तरफ व्यापारी अपने कारोबार और रोजगार को लेकर समाधान की मांग कर रहे हैं। अब सरकार के रुख पर नजर रहेगी कि वह व्यापारियों की मांगों पर क्या रास्ता निकालती है। अगर बातचीत से समाधान नहीं निकला तो व्यापारियों की ओर से भोपाल बंद और बड़े आंदोलन की चेतावनी आने वाले दिनों में राजधानी की सियासत और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।