Category: Madhya Pradesh

  • काशवी और डॉ. अमन केस में जांच पर उठे सवाल, रिपोर्ट और बयानों के बाद भी कार्रवाई नहीं

    काशवी और डॉ. अमन केस में जांच पर उठे सवाल, रिपोर्ट और बयानों के बाद भी कार्रवाई नहीं


    मध्यप्रदेश । इंदौर में हाल ही में सामने आए दो संवेदनशील मामलों ने पुलिस और संबंधित विभागों की जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर दो वर्षीय काशवी यादव की संदिग्ध मौत का मामला है, तो दूसरी ओर मेडिकल छात्र Aman Patel की आत्महत्या का प्रकरण। दोनों मामलों में परिजनों और संबंधित पक्षों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के बावजूद अब तक कोई स्पष्ट निष्कर्ष या कार्रवाई सामने नहीं आई है।

    दो वर्षीय काशवी यादव की मौत के मामले में उसके माता-पिता निशा और नितिन यादव ने पुलिस को दिए बयानों में आरोप लगाया है कि भोलाराम उस्ताद मार्ग स्थित एक निजी क्लिनिक में उपचार के दौरान लापरवाही हुई, जिसके कारण उनकी बेटी की हालत बिगड़ी। परिजनों के अनुसार, बच्ची को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद क्लिनिक ले जाया गया था, जहां उपचार के बाद उसकी तबीयत लगातार खराब होती गई। बाद में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अनुमति के बाद बच्ची के शव को कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम कराया गया था। परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस को सौंपे जाने और प्रमुख बयानों के दर्ज होने के बाद भी जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। उनका सवाल है कि यदि जांच में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही नहीं मिली है तो इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही, और यदि लापरवाही के संकेत हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।

    इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। परिजनों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि संबंधित क्लिनिक की कार्यप्रणाली, उपचार प्रक्रिया और चिकित्सा मानकों के पालन की जांच के संबंध में अब तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि उनकी बेटी वापस नहीं आ सकती, लेकिन यदि किसी स्तर पर गलती हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

    इसी तरह मेडिकल छात्र Aman Patel की आत्महत्या का मामला भी चर्चा में बना हुआ है। 17 मई को उनका शव एमजीएम मेडिकल कॉलेज हॉस्टल परिसर में मिला था। जांच के दौरान पुलिस ने परिजनों, दोस्तों और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए हैं। परिजनों ने पुलिस को बताया है कि छात्र हाल के दिनों में मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। उन्होंने कुछ व्यक्तिगत और सामाजिक परिस्थितियों को भी जांच का हिस्सा बनाने की मांग की है।

    परिवार का कहना है कि घटना से पहले की बातचीत, मोबाइल डेटा और अन्य डिजिटल साक्ष्य जांच के महत्वपूर्ण बिंदु हैं। हालांकि पुलिस द्वारा जांच जारी होने की बात कही जा रही है, लेकिन अब तक किसी निष्कर्ष या आगे की कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे परिवार और परिचितों में असंतोष बढ़ रहा है।

    दोनों मामलों में पुलिस का कहना है कि जांच प्रक्रिया जारी है और सभी उपलब्ध साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा बयानों का परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद ही किसी प्रकार के निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।

    फिलहाल दोनों परिवार न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि समयबद्ध और पारदर्शी जांच ही इन मामलों की सच्चाई सामने ला सकती है तथा समाज में विश्वास कायम रख सकती है।

  • बेटे का शव देखते ही थम गई मां की सांसें, इंदौर में कुछ ही मिनटों के अंतराल में मां-बेटे की मौत

    बेटे का शव देखते ही थम गई मां की सांसें, इंदौर में कुछ ही मिनटों के अंतराल में मां-बेटे की मौत


    मध्यप्रदेश । इंदौर के भंडारी मिल मार्ग स्थित श्रीनाथ विहार अपार्टमेंट में घटित एक मार्मिक घटना ने पूरे शहर को भावुक कर दिया। 55 वर्षीय राजुल शर्मा के निधन के कुछ ही मिनट बाद उनकी 75 वर्षीय मां किरण शर्मा ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। सोमवार को जब मां और बेटे की अर्थियां एक साथ घर से निकलीं तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। परिवार, रिश्तेदार और पड़ोसी इस दर्दनाक दृश्य को देखकर खुद को संभाल नहीं सके।

    परिजनों के अनुसार, राजुल शर्मा पेशे से कंप्यूटर डिजाइनर थे। रविवार को उनकी अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद मृत्यु हो गई। परिवार इस दुखद घटना से उबर भी नहीं पाया था कि कुछ ही देर बाद एक और बड़ा सदमा सामने आ गया।

    परिवार के सदस्य राजेश शर्मा ने बताया कि राजुल और उनकी मां किरण शर्मा दोनों की पहले बायपास सर्जरी हो चुकी थी। परिवार के कई सदस्यों का भी हृदय संबंधी उपचार हो चुका है। उन्होंने कहा कि परिवार पर एक साथ आए इस दुख को शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

    जानकारी के अनुसार, राजुल शर्मा के निधन के समय उनकी मां किरण शर्मा अपनी बेटी के घर एरोड्रम रोड क्षेत्र में थीं। परिजन उन्हें अचानक सदमा न लगे, इसलिए उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। बाद में उन्हें धीरे-धीरे घर लाया गया। लेकिन जैसे ही वे फ्लैट में पहुंचीं और बेटे का पार्थिव शरीर देखा, उनका धैर्य टूट गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, किरण शर्मा बेटे के शव के पास पहुंचीं, उसके सिर पर हाथ फेरा और फूट-फूटकर रोने लगीं। इसी दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे अचानक बेसुध होकर गिर पड़ीं। परिजन तुरंत उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    कुछ ही घंटों के भीतर मां और बेटे के निधन की खबर पूरे परिवार और परिचितों के लिए गहरे सदमे का कारण बन गई। सोमवार सुबह से ही रिश्तेदार और परिचित अंतिम दर्शन के लिए घर पहुंचने लगे। जब दोनों की अर्थियां एक साथ सजाई गईं और अंतिम यात्रा निकली तो माहौल बेहद भावुक हो गया। हर किसी की जुबान पर यही सवाल था कि मां और बेटे का रिश्ता कितना गहरा रहा होगा कि बेटे के जाने का दुख मां सहन ही नहीं कर सकीं।

    गहरे शोक के इस माहौल के बीच परिवार ने एक ऐसा निर्णय लिया, जिसने इस दुखद घटना को मानवता के संदेश में बदल दिया। परिजनों ने मां और बेटे दोनों का नेत्रदान करने का फैसला किया। सामाजिक संस्था मुस्कान ग्रुप के सहयोग से नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की गई। परिवार का मानना है कि भले ही दोनों अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी आंखों की रोशनी चार जरूरतमंद लोगों के जीवन को नया उजाला देगी।

    इसी क्रम में शहर में अन्य परिवारों ने भी नेत्रदान की प्रेरणादायक पहल की है। धनवंती देवी लालवानी, सरदारनी नरेंद्र कौर और नंदलाल पुरणानी के निधन के बाद उनके परिजनों ने भी नेत्रदान कर समाज के सामने एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

    राजुल और किरण शर्मा की यह कहानी जहां एक ओर मां-बेटे के अटूट प्रेम को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर नेत्रदान के माध्यम से मानवता और सेवा का संदेश भी देती है।

  • क्रिप्टो और फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों की ठगी, इंदौर से चला नेटवर्क चंडीगढ़, बेंगलुरु और दिल्ली तक फैला

    क्रिप्टो और फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों की ठगी, इंदौर से चला नेटवर्क चंडीगढ़, बेंगलुरु और दिल्ली तक फैला


    मध्यप्रदेश । इंदौर में क्रिप्टो करेंसी और फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को निवेश का झांसा देकर करोड़ों रुपए की कथित ठगी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क केवल इंदौर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका संचालन चंडीगढ़, बेंगलुरु, दिल्ली और अन्य शहरों तक फैला हुआ था। आरोप है कि गिरोह लोगों को कम समय में भारी मुनाफे और रकम दोगुनी होने का लालच देकर निवेश करवाता था, लेकिन बाद में न तो मुनाफा देता था और न ही मूल राशि लौटाता था।

    पुलिस के अनुसार, मामले में हरप्रीत कौर उर्फ मोना, जसवंत सिंह उर्फ जस्सी, अनिरुद्ध दलवी, मुकेश तायडे और जोसेफ सहित अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया गया है। फिलहाल हरप्रीत कौर को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।

    क्राइम ब्रांच को जिया वाधवानी, गुरजीत, अभिषेक, जसरथ, अमरजीत, हन्नी, साहिल, रोहित, पंकज, गुरमीत कौर समेत कई लोगों ने शिकायत दी थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि आरोपियों ने उन्हें क्रिप्टो करेंसी और फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश करने पर शुरुआत में 2 प्रतिशत तक रिटर्न और 100 दिनों में रकम दोगुनी होने का दावा किया था। इसी भरोसे में लोगों ने लाखों रुपए निवेश किए।

    जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपियों ने मिलकर “ए स्क्वेयर वर्ल्ड ग्लोबल कंसल्टेंसी” नाम से एक कथित यूएस बेस्ड कंपनी का प्रचार किया था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कंपनी के नाम और विदेशी कारोबार के दावों का इस्तेमाल निवेशकों का विश्वास जीतने के लिए किया गया। पुलिस के अनुसार, निवेशकों से प्राप्त राशि हरप्रीत कौर और कंपनी से जुड़े बैंक खातों में जमा करवाई गई थी। प्रारंभिक जांच में करीब ढाई करोड़ रुपए के लेन-देन की जानकारी सामने आई है।

    पीड़िता जिया वाधवानी ने पुलिस को बताया कि उसकी पहचान हरप्रीत कौर से एक किटी पार्टी के दौरान हुई थी। वहीं से उसे निवेश योजना की जानकारी दी गई। बाद में उसे भंवरकुआ क्षेत्र स्थित एक होटल में आयोजित बैठक में ले जाया गया, जहां अन्य आरोपियों ने कथित निवेश योजना प्रस्तुत की। इसके बाद शहर के एक बड़े होटल में सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों को बुलाया गया। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, सेमिनार में महंगे उपहार, आकर्षक प्रस्तुतियां और बड़े मुनाफे के वादों के जरिए लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया गया।

    पीड़ितों का आरोप है कि मार्च 2025 के बाद किसी भी निवेशक को भुगतान नहीं किया गया। जब लोगों ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए तो आरोपियों ने वेबसाइट अपडेट, तकनीकी समस्या और भुगतान प्रक्रिया में देरी जैसे कारण बताकर समय टालना शुरू कर दिया। बाद में ऑनलाइन बैठकों के माध्यम से भी निवेशकों को आश्वासन दिया गया, लेकिन भुगतान नहीं हुआ।

    शिकायतकर्ताओं के अनुसार, लगातार दबाव बढ़ने पर आरोपियों ने कथित तौर पर यह कह दिया कि कंपनी का कारोबार बंद हो चुका है और अब किसी को कोई पैसा नहीं मिलेगा। इसके बाद कई आरोपियों ने फोन उठाना और संपर्क करना भी बंद कर दिया।

    क्राइम ब्रांच का कहना है कि मामले की जांच जारी है। बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन, निवेश रिकॉर्ड और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित निवेश योजना से कुल कितने लोग प्रभावित हुए और ठगी की वास्तविक राशि कितनी है।

  • इंस्टाग्राम से बोतल मंगाना पड़ा भारी, रिफंड के झांसे में फंसी छात्रा से 2.99 लाख की साइबर ठगी

    इंस्टाग्राम से बोतल मंगाना पड़ा भारी, रिफंड के झांसे में फंसी छात्रा से 2.99 लाख की साइबर ठगी


    मध्यप्रदेश । इंदौर के खजराना क्षेत्र में रहने वाली एक कॉलेज छात्रा ऑनलाइन ठगी और साइबर ब्लैकमेलिंग का शिकार हो गई। आरोप है कि इंस्टाग्राम के माध्यम से किए गए एक ऑनलाइन ऑर्डर के बाद ठगों ने पहले रिफंड का झांसा देकर छात्रा को अपने जाल में फंसाया और फिर कथित अश्लील तस्वीरें वायरल करने की धमकी देकर उससे पैसे वसूले। इसके बाद उसके बैंक खाते से करीब 2 लाख 99 हजार रुपए की राशि भी निकाल ली गई।

    पुलिस के अनुसार, छात्रा वरीदा ने इस मामले की शिकायत खजराना थाने और साइबर क्राइम शाखा में दर्ज कराई है। शिकायत में बताया गया है कि उसकी बहन अलीना ने 11 मई को इंस्टाग्राम पर संचालित एक पेज “सॉफ क्यूक इंडिया” से पानी की दो बोतलें ऑर्डर की थीं। इसके लिए ऑनलाइन भुगतान भी किया गया था।

    शिकायत के मुताबिक, ऑर्डर करने के कुछ समय बाद एक व्यक्ति का फोन आया। उसने स्वयं को कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि ऑर्डर किसी कारणवश रद्द हो गया है और भुगतान की गई राशि वापस की जाएगी। इसके लिए उसने एक लिंक भेजी और रिफंड प्रक्रिया पूरी करने के लिए उस पर क्लिक करने को कहा। पुलिस को आशंका है कि इसी दौरान ठगों ने छात्रा की बैंकिंग और व्यक्तिगत जानकारी हासिल कर ली।

    मामला यहीं नहीं रुका। छात्रा का आरोप है कि 20 मई को उसे एक अन्य कॉल प्राप्त हुआ। कॉल करने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि उसके पास छात्रा की अश्लील तस्वीरें हैं और यदि उसने पैसे नहीं दिए तो वे तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल कर दी जाएंगी। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने 30 हजार रुपए की मांग की। बदनामी के डर से छात्रा ने बताए गए यूपीआई खाते में राशि ट्रांसफर कर दी।

    घटना का खुलासा तब हुआ जब 9 जून को छात्रा कॉलेज फीस जमा करने पहुंची। फीस भुगतान के दौरान उसे पता चला कि उसके बैंक खाते में पर्याप्त राशि नहीं बची है। इसके बाद जब उसने बैंक से संपर्क कर खाते की जानकारी ली तो सामने आया कि खाते से अलग-अलग ट्रांजेक्शन के माध्यम से करीब 2.99 लाख रुपए निकाले जा चुके हैं।

    पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह मामला साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। जिन बैंक खातों और यूपीआई आईडी में पैसे ट्रांसफर किए गए हैं, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। साइबर विशेषज्ञ भी ट्रांजेक्शन की तकनीकी जांच में जुटे हैं।

    पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान विक्रेता से खरीदारी करते समय सावधानी बरतें। किसी भी रिफंड लिंक, संदिग्ध कॉल या ओटीपी साझा करने से बचें। यदि कोई व्यक्ति फोटो या वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैसे मांगता है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या निकटतम पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं।

  • इंदौर में सड़क चौड़ीकरण के लिए 80 से ज्यादा मकान ध्वस्त, प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास और मुआवजे की उठाई मांग

    इंदौर में सड़क चौड़ीकरण के लिए 80 से ज्यादा मकान ध्वस्त, प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास और मुआवजे की उठाई मांग


    मध्यप्रदेश । इंदौर में गुटकेश्वर मंदिर से सदर बाजार रोड तक प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत सोमवार को नगर निगम ने बड़े पैमाने पर रिमूवल अभियान चलाया। सुबह करीब 8 बजे शुरू हुई कार्रवाई में भारी पुलिस बल, पोकलेन और जेसीबी मशीनों की मदद से सड़क निर्माण में बाधक बताए जा रहे मकानों और अन्य निर्माणों को हटाया गया। निगम अधिकारियों के अनुसार अब तक 80 से अधिक मकानों को तोड़ा जा चुका है, जबकि कुल करीब 85 मकानों को नोटिस जारी किए गए थे।

    नगर निगम के रिमूवल विभाग की ओर से की जा रही इस कार्रवाई में 9 पोकलेन मशीनें, 5 जेसीबी और 100 से अधिक कर्मचारी तैनात किए गए। निगम अधिकारियों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए यह कार्रवाई आवश्यक है तथा प्रभावित लोगों को पहले ही नोटिस जारी कर दिए गए थे।

    हालांकि कार्रवाई के दौरान कई प्रभावित परिवारों ने विरोध जताया और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि वर्षों पुराने उनके मकानों को बिना उचित पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था के ध्वस्त किया जा रहा है। प्रभावित लोगों का दावा है कि उन्हें न तो रहने के लिए कोई प्लॉट या फ्लैट दिया गया और न ही पर्याप्त मुआवजे की जानकारी दी गई।

    65 वर्षीय कृष्णा पाठक ने दावा किया कि उनका परिवार चार पीढ़ियों से इसी क्षेत्र में रह रहा था। उनका कहना है कि उनका जन्म भी इसी मकान में हुआ और अब जीवन के इस पड़ाव पर उनका आशियाना टूट गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके परिवार के कई सदस्य एक ही मकान में रहते थे और अब उनके पास रहने के लिए कोई दूसरा ठिकाना नहीं बचा है।

    कुछ अन्य प्रभावित लोगों ने भी प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई। 47 वर्षीय राजकुमारी मिश्रा ने दावा किया कि वह और उनके पति निराश्रित हैं तथा उनके कोई संतान भी नहीं है। उनका कहना है कि नोटिस दिए जाने के बावजूद प्रशासन को पहले वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके घर का बड़ा हिस्सा तोड़ दिया गया और अब बची हुई जगह में रहना भी मुश्किल हो गया है।

    रहवासियों का यह भी आरोप है कि कुछ स्थानों पर सरकारी जमीन खाली होने के बावजूद केवल आवासीय मकानों को निशाना बनाया गया। हालांकि इन आरोपों पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    दूसरी ओर नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक प्रभावित लोगों को पहले नोटिस जारी किए गए थे और कई स्थानों पर मुनादी भी कराई गई थी। इसी कारण कुछ लोगों ने अपने निर्माणों के हिस्से स्वयं भी हटा लिए थे। निगम का दावा है कि सड़क चौड़ीकरण परियोजना शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर लागू की जा रही है।

    कार्रवाई के दौरान कई परिवार अपने मकानों को टूटते हुए देखते रहे। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि निर्धारित सीमा से अधिक हिस्से को तोड़ा गया है, जबकि कुछ रहवासियों का कहना था कि उनके मकान के सामने पहले से पर्याप्त चौड़ाई वाली सड़क मौजूद थी, फिर भी उनका निर्माण हटाया गया।

    फिलहाल सड़क चौड़ीकरण को लेकर प्रशासन और प्रभावित परिवारों के बीच मतभेद बने हुए हैं। प्रभावित लोगों ने पुनर्वास, वैकल्पिक आवास और मुआवजे की मांग उठाते हुए प्रशासन से राहत देने की अपील की है।

  • एमपी पुलिसकर्मियों के सैलरी पैकेज पर संकट, HDFC, Axis और Canara Bank के एग्रीमेंट खत्म; PHQ ने जारी किया अलर्ट

    एमपी पुलिसकर्मियों के सैलरी पैकेज पर संकट, HDFC, Axis और Canara Bank के एग्रीमेंट खत्म; PHQ ने जारी किया अलर्ट


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सूचना सामने आई है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने प्रदेश की सभी पुलिस इकाइयों, पुलिस अधीक्षकों और यूनिट प्रभारी अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वे उन पुलिसकर्मियों को तत्काल जानकारी दें, जिनके वेतन खाते एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और केनरा बैंक में संचालित हैं। कारण यह है कि इन बैंकों के साथ पुलिस विभाग के सैलरी पैकेज संबंधी अनुबंध समाप्त हो चुके हैं।

    पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार इन बैंकों के साथ हुए समझौतों के तहत पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को कई विशेष सुविधाएं प्रदान की जाती थीं। इनमें दुर्घटना बीमा, सामान्य मृत्यु पर आर्थिक सहायता, विशेष बैंकिंग लाभ, प्रीमियम सेवाएं और अन्य वित्तीय सुरक्षा सुविधाएं शामिल थीं। अनुबंध समाप्त होने के बाद इन सुविधाओं की निरंतरता प्रभावित हो सकती है।

    पुलिस मुख्यालय के कल्याण प्रकोष्ठ द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित बैंक अब पूर्व अनुबंध के आधार पर सुविधाएं प्रदान करने के लिए बाध्य नहीं हैं। इसलिए कर्मचारियों को इस स्थिति से अवगत कराना जरूरी है ताकि वे भविष्य में किसी भी भ्रम या वित्तीय नुकसान से बच सकें।

    दस्तावेजों के अनुसार एक्सिस बैंक के साथ 23 अप्रैल 2021 को किया गया अनुबंध 22 अप्रैल 2023 को समाप्त हो गया था। इसी प्रकार एचडीएफसी बैंक के साथ 23 अप्रैल 2021 को हुआ समझौता 22 अप्रैल 2024 तक प्रभावी रहा और उसके बाद समाप्त हो गया। वहीं केनरा बैंक के साथ 19 फरवरी 2024 को हुआ अनुबंध 18 फरवरी 2025 को समाप्त हो चुका है।

    हालांकि पुलिस मुख्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन बैंकों के साथ समझौतों के नवीनीकरण के प्रयास लगातार जारी हैं। कल्याण शाखा की ओर से बैंक प्रबंधन के साथ संपर्क बनाए रखा गया है और अनुबंधों को दोबारा लागू कराने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। जब तक नए समझौते नहीं हो जाते, तब तक कर्मचारियों को सैलरी पैकेज के अंतर्गत मिलने वाले अतिरिक्त लाभों की उपलब्धता को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    पुलिस मुख्यालय का मानना है कि बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और कर्मचारी इन बैंकों की सैलरी पैकेज योजनाओं से जुड़े हुए हैं। ऐसे में अनुबंध समाप्त होने की जानकारी समय पर उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि कर्मचारी अपनी बैंकिंग और बीमा संबंधी योजनाओं की समीक्षा कर सकें।

    सूत्रों के अनुसार यदि भविष्य में नए सिरे से समझौते होते हैं तो कर्मचारियों को फिर से विशेष बैंकिंग सुविधाओं का लाभ मिल सकता है। फिलहाल पुलिस विभाग की सभी इकाइयों को निर्देशित किया गया है कि वे इस सूचना को संबंधित कर्मचारियों तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंचाएं।

    यह आदेश पुलिस मुख्यालय भोपाल के कल्याण प्रकोष्ठ की ओर से जारी किया गया है और इसे पूरे प्रदेश की पुलिस इकाइयों में लागू किया जा रहा है।

  • भोपाल में लोकार्पित हुई सुरेश पटवा की 34वीं कृति ‘व्यंग्य-पच्चीसी’, साहित्यकारों ने बताया समकालीन विसंगतियों पर तीखा प्रहार

    भोपाल में लोकार्पित हुई सुरेश पटवा की 34वीं कृति ‘व्यंग्य-पच्चीसी’, साहित्यकारों ने बताया समकालीन विसंगतियों पर तीखा प्रहार


    मध्यप्रदेश । राजधानी भोपाल के दुष्यंत संग्रहालय में वरिष्ठ साहित्यकार Suresh Patwa के नवीन व्यंग्य संग्रह ‘व्यंग्य-पच्चीसी’ का गरिमामय लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। यह कृति लेखक की 34वीं प्रकाशित पुस्तक है, जिसे साहित्य जगत में विशेष महत्व के साथ देखा जा रहा है। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और व्यंग्य लेखन से जुड़े अनेक विद्वानों, लेखकों और साहित्य प्रेमियों ने सहभागिता की।

    समारोह की अध्यक्षता साहित्यकार मुकेश वर्मा ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. संजय सक्सेना उपस्थित रहे। सारस्वत अतिथि के रूप में डॉ. मोहन तिवारी आनंद और विवेक रंजन श्रीवास्तव ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सुरेश पटवा के साहित्यिक योगदान और उनकी नई कृति पर विस्तार से चर्चा की।

    अध्यक्षीय उद्बोधन में मुकेश वर्मा ने कहा कि सुरेश पटवा के व्यक्तित्व में खुलापन, निर्भीकता और प्रतिरोध की स्वाभाविक चेतना दिखाई देती है। यही विशेषताएं उनकी लेखनी को धार देती हैं और उन्हें एक सशक्त व्यंग्यकार के रूप में स्थापित करती हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक विसंगतियों के प्रति उनकी सजग दृष्टि उनकी रचनाओं को विशिष्ट बनाती है।

    मुख्य अतिथि डॉ. संजय सक्सेना ने कहा कि सुरेश पटवा की लेखनी मौलिकता, गहरी सामाजिक समझ और मानवीय संवेदनाओं से समृद्ध है। उनके अनुसार ‘व्यंग्य-पच्चीसी’ केवल व्यंग्य रचनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि समकालीन समाज की विडंबनाओं का सजीव दस्तावेज है। उन्होंने इसे लेखक की रचनात्मक क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

    अपने संबोधन में सुरेश पटवा ने प्रसिद्ध व्यंग्यकार Harishankar Parsai को अपना प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि परसाई का साहित्य और उनकी अध्ययनशीलता ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। पटवा ने कहा कि बुंदेलखंड की व्यंग्यात्मक जीवन शैली, लोकभाषा और सामाजिक अनुभवों ने उनके लेखन को समृद्ध बनाया है। उन्होंने बताया कि उनकी रचनाओं में व्यंग्य किसी कृत्रिम प्रयास से नहीं, बल्कि स्वाभाविक रूप से अभिव्यक्ति का हिस्सा बनकर उभरता है।

    डॉ. मोहन तिवारी आनंद ने कहा कि सुरेश पटवा एक बहुआयामी रचनाकार हैं, जो विषय की पूरी तैयारी और अध्ययन के साथ लेखन करते हैं। उनकी बेलौस शैली और निर्भीक अभिव्यक्ति पाठकों को सोचने पर मजबूर करती है। वहीं विवेक रंजन श्रीवास्तव ने कहा कि बैंक सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी पटवा साहित्य के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं और 74 वर्ष की आयु में 34 पुस्तकों का लेखन उनकी रचनात्मक ऊर्जा का प्रमाण है।

    उन्होंने कहा कि पटवा का साहित्य केवल कल्पना पर आधारित नहीं है, बल्कि जीवन के वास्तविक अनुभवों से उपजा है। लद्दाख और भूटान जैसी यात्राओं के अनुभव भी उनकी रचनाओं में यथार्थ और संवेदनशीलता का विस्तार करते हैं।

    कार्यक्रम में प्रस्तुत व्यंग्य पाठ विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। विभिन्न रचनाकारों ने अपनी व्यंग्य रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को हंसने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर किया। व्यंग्यकारों की प्रस्तुतियों को दर्शकों ने खूब सराहा और सभागार देर तक तालियों की गूंज से भरता रहा।

    कार्यक्रम का संचालन डॉ. आदित्य हरि गुप्ता ने किया, जबकि शारदा दयाल श्रीवास्तव ने ‘व्यंग्य-पच्चीसी’ की समीक्षात्मक विवेचना प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह कृति समकालीन सामाजिक और राजनीतिक विद्रूपताओं पर प्रभावशाली प्रहार करती है। उन्होंने इसे नई पीढ़ी के व्यंग्यकारों के लिए प्रेरणादायी पुस्तक बताया।

  • राज्यसभा सांसद महेश केवट का दावा- मतदान होता तो कांग्रेस में टूट तय थी, हाईकोर्ट में भी नहीं टिकेगी चुनौती

    राज्यसभा सांसद महेश केवट का दावा- मतदान होता तो कांग्रेस में टूट तय थी, हाईकोर्ट में भी नहीं टिकेगी चुनौती


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट पर निर्विरोध निर्वाचित हुए भाजपा के नेता और नवनिर्वाचित सांसद Mahesh Kewat ने अपनी जीत को पार्टी नेतृत्व और संगठन के भरोसे की जीत बताया है। दैनिक भास्कर को दिए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि भाजपा के पास पहले से ही पर्याप्त समर्थन मौजूद था और यदि मतदान की स्थिति बनती, तब भी पार्टी तीसरी सीट जीतने में सफल रहती।

    राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और तेलंगाना प्रभारी Meenakshi Natarajan का नामांकन खारिज होने के बाद महेश केवट निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने गए। कांग्रेस ने इस फैसले को चुनौती देते हुए चुनाव आयोग और बाद में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन राहत नहीं मिली। अब कांग्रेस की ओर से हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करने की तैयारी की जा रही है।

    इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए महेश केवट ने दावा किया कि कांग्रेस की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों और शपथ पत्र को लेकर जो विवाद सामने आया, उसमें जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान भाजपा का पक्ष मजबूत साबित हुआ। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी कांग्रेस परिणाम स्वीकार करने को तैयार नहीं है, जबकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायालयों के निर्णयों का सम्मान किया जाना चाहिए।

    महेश केवट ने कहा कि यदि चुनाव मतदान तक पहुंचता तो भाजपा को और अधिक समर्थन मिलता। उनका दावा था कि कई विधायक विकास और प्रदेश हित के मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं तथा मुख्यमंत्री Mohan Yadav के नेतृत्व में चल रहे विकास कार्यों के कारण भाजपा को अतिरिक्त समर्थन हासिल होता। हालांकि यह उनका राजनीतिक दावा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    साक्षात्कार के दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक सफर पर भी बात की। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की विचारधारा से जुड़े रहे हैं तथा पार्टी द्वारा दिए गए विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा संगठन कार्यकर्ताओं की क्षमता और योगदान को ध्यान में रखकर जिम्मेदारियां देता है। हाल ही में उन्हें मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था और उसके बाद राज्यसभा के लिए उम्मीदवार घोषित किया गया।

    महेश केवट ने यह भी कहा कि निषाद और केवट समाज से राज्यसभा पहुंचने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने इसे भाजपा नेतृत्व द्वारा समाज के विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की नीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि इससे समाज के लोगों में उत्साह का माहौल है और वे इसे सम्मान के रूप में देख रहे हैं।

    बुंदेलखंड क्षेत्र से आने वाले महेश केवट ने कहा कि राज्यसभा में पहुंचने के बाद उनकी प्राथमिकता क्षेत्रीय विकास, जल, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की रहेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi के विकसित भारत 2047 के विजन और राज्य सरकार के विकसित मध्य प्रदेश के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई।

    दूसरी ओर, कांग्रेस लगातार यह आरोप लगाती रही है कि राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और वह कानूनी लड़ाई जारी रखेगी। अब इस मामले पर सभी की नजरें संभावित हाईकोर्ट याचिका और उसके परिणाम पर टिकी हैं।

  • एमपी में मानसून से पहले मौसम का यू-टर्न, भोपाल-जबलपुर समेत 28 जिलों में बारिश; सीहोर में 61 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी

    एमपी में मानसून से पहले मौसम का यू-टर्न, भोपाल-जबलपुर समेत 28 जिलों में बारिश; सीहोर में 61 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून पूर्व गतिविधियां तेज हो गई हैं और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में आंधी-बारिश का दौर जारी है। सोमवार को राजधानी भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर सहित 28 जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश दर्ज की गई। मौसम के इस बदले मिजाज ने लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी है, वहीं कई इलाकों में तेज हवाओं के कारण जनजीवन प्रभावित भी हुआ।

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के कई जिलों में बादल छाए रहे और बारिश के साथ तेज हवाएं चलीं। सीहोर में दोपहर बाद अचानक मौसम बदला और तेज आंधी के साथ बारिश हुई। यहां हवा की अधिकतम रफ्तार 61 किलोमीटर प्रतिघंटा रिकॉर्ड की गई, जो प्रदेश में सबसे अधिक रही। मौसम विभाग ने भोपाल और ग्वालियर संभाग के जिलों में अगले दो दिनों तक बारिश की संभावना जताई है। वहीं आगर-मालवा और राजगढ़ जिलों के लिए तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    बीते 24 घंटों के दौरान भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, श्योपुर, नीमच, मंदसौर, खरगोन, देवास, हरदा, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, डिंडौरी, जबलपुर, सागर, दमोह, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और आगर-मालवा सहित कुल 28 जिलों में बारिश दर्ज की गई। कई स्थानों पर बादलों की गरज और तेज हवाओं के साथ मौसम ने अचानक करवट ली।

    तेज हवाओं की बात करें तो सीहोर के अलावा सागर और गुना में 59 किमी प्रतिघंटा, भोपाल में 57 किमी प्रतिघंटा, जबलपुर में 50 किमी प्रतिघंटा तथा नर्मदापुरम में 48 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं। इंदौर और अशोकनगर में 44 किमी, ग्वालियर में 43 किमी, राजगढ़ में 39 किमी तथा आगर-मालवा, रीवा, खंडवा और बड़वानी में 37 किमी प्रतिघंटा की गति से तेज आंधी दर्ज की गई।

    रविवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम खराब रहा। भोपाल में दिनभर रुक-रुक कर बारिश होती रही, जबकि सीहोर, इंदौर, रायसेन और खरगोन में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई। रायसेन में तेज हवाओं के कारण कुछ मकानों के छप्पर उड़ गए, जबकि कई जिलों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। खरगोन और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को निंदाई और बुआई के कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ा।

    बारिश और बादलों के कारण तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। भोपाल में अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री, इंदौर में 36.3 डिग्री, ग्वालियर में 39.2 डिग्री, उज्जैन में 36.5 डिग्री और जबलपुर में 38.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    प्रदेश में केवल खजुराहो, दतिया, नौगांव और मंडला ऐसे स्थान रहे जहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहा। वहीं शिवपुरी सबसे ठंडा शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 33.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पचमढ़ी में 35 डिग्री, सिवनी में 36 डिग्री, राजगढ़ में 36.4 डिग्री तथा नर्मदापुरम और श्योपुर में 36.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

    मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक आंधी-बारिश का दौर जारी रह सकता है। इससे तापमान में और गिरावट आने की संभावना है तथा मानसून की प्रगति को भी बल मिल सकता है।

  • एमपी में 2440 बसों का नियम विरुद्ध पंजीयन! बस ऑपरेटर्स ने अधिकारियों पर साधा निशाना, बर्खास्तगी और एफआईआर की मांग

    एमपी में 2440 बसों का नियम विरुद्ध पंजीयन! बस ऑपरेटर्स ने अधिकारियों पर साधा निशाना, बर्खास्तगी और एफआईआर की मांग


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में परिवहन विभाग के कामकाज को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। राज्य में 1 सितंबर 2025 से लागू नए नियमों के बावजूद कथित रूप से 2440 बसों का पंजीयन बिना अनिवार्य टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट के किए जाने का मामला अब गंभीर प्रशासनिक और कानूनी बहस का विषय बन गया है। इस पूरे प्रकरण में मध्यप्रदेश बस ऑनर्स एसोसिएशन ने सीधे परिवहन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।

    परिवहन आयुक्त उमेश जोगा द्वारा जारी पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि 1 सितंबर 2025 से 5 जून 2026 के बीच प्रदेश के विभिन्न आरटीओ, डीटीओ और एआरटीओ कार्यालयों में कुल 2440 बसों का पंजीयन ऐसे दस्तावेजों के आधार पर किया गया जो नए नियमों के अनुरूप नहीं थे। इनमें 1487 यात्री बसें, 745 शैक्षणिक संस्थानों की बसें, 141 स्कूल बसें और 67 प्राइवेट सर्विस व्हीकल शामिल हैं।

    मध्यप्रदेश बस ऑनर्स एसोसिएशन के महामंत्री जय कुमार जैन ने मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि बस मालिक वाहन खरीदते हैं और पंजीयन के लिए विभाग के समक्ष प्रस्तुत करते हैं। यदि वाहन नियमों के अनुरूप नहीं था तो उसका पंजीयन होना ही नहीं चाहिए था। ऐसे में जिम्मेदारी परिवहन अधिकारियों की बनती है, जिन्होंने नियमों के विपरीत पंजीयन की अनुमति दी।

    एसोसिएशन का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने नए नियमों की जानकारी होने के बावजूद पुराने और निरस्त किए जा चुके दस्तावेजों के आधार पर बसों का पंजीयन किया। संगठन ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए दोषी अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने, सेवा से बर्खास्त करने तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की मांग की है।

    दरअसल, केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 6 मार्च 2024 को अधिसूचना जारी कर 1 सितंबर 2025 से बस बॉडी निर्माण से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए थे। इसके तहत फॉर्म 22B की व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी और 13 या उससे अधिक यात्री क्षमता वाली बसों के लिए मान्यता प्राप्त एजेंसी से टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य कर दिया गया था। इसके बिना किसी बस का पंजीयन नहीं किया जाना था।

    परिवहन आयुक्त के पत्र के अनुसार नए नियम लागू होने के बाद भी कई कार्यालयों में पुराने फॉर्म 22B के आधार पर पंजीयन किए गए। इसी कारण अब इन पंजीयनों की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    मामले का एक चिंताजनक पहलू स्कूल बसों का पंजीयन भी है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार 141 स्कूल बसों का भी कथित रूप से नियम विरुद्ध पंजीयन हुआ। इनमें सबसे अधिक 51 बसें भोपाल और 48 बसें इंदौर में दर्ज की गईं। बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में इस प्रकार की अनियमितता को गंभीर माना जा रहा है।

    यदि जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे अधिक 387 बसों का पंजीयन इंदौर आरटीओ में हुआ। इसके बाद नीमच में 247, देवास में 220, उज्जैन में 192, आगर मालवा में 168 और भोपाल में 166 बसों का पंजीयन दर्ज किया गया। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि मामला केवल किसी एक जिले तक सीमित नहीं बल्कि प्रदेशव्यापी है।

    उधर परिवहन विभाग का कहना है कि परिवहन आयुक्त के निर्देशानुसार पूरे मामले की जांच जारी है। जिन वाहनों का पंजीयन नियमों के विपरीत पाया जाएगा, उनका पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यदि जांच में किसी अधिकारी की भूमिका या लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    अब सभी की नजर विभागीय जांच रिपोर्ट पर टिकी है, क्योंकि इस मामले का असर हजारों बस संचालकों, यात्रियों और शैक्षणिक संस्थानों पर पड़ सकता है।