Category: Madhya Pradesh

  • ट्रांसफर पॉलिसी को मंजूरी की तैयारी: कल कैबिनेट में होगा अहम फैसला

    ट्रांसफर पॉलिसी को मंजूरी की तैयारी: कल कैबिनेट में होगा अहम फैसला


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों को लेकर लंबे समय से प्रतीक्षित नई तबादला नीति 2026 को अब अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में इस नीति को मंजूरी मिलने की पूरी संभावना जताई जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज दिया है, जिसके बाद इसे कैबिनेट के सामने रखा जाएगा।

    प्रस्तावित नीति में सबसे बड़ा बदलाव स्वैच्छिक और प्रशासनिक तबादलों को अलग-अलग श्रेणी में रखने का है। अब तक दोनों प्रकार के तबादले एक ही कोटे के अंतर्गत आते थे, जिसके कारण प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार फेरबदल में बाधा आती थी। नई व्यवस्था में प्रशासनिक तबादलों के लिए अधिक स्वतंत्रता मिलने की संभावना है।

    सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट में इस बात पर भी चर्चा होगी कि तबादलों की सीमा तय की जाए या नहीं। पहले कुल कार्यरत कर्मचारियों के 10 से 15 प्रतिशत तक ही तबादलों की अनुमति दी जाती थी, लेकिन नई नीति में इस सीमा को लेकर लचीलापन अपनाया जा सकता है।

    11 मई की पिछली कैबिनेट बैठक में मंत्री विजय शाह ने स्वैच्छिक तबादलों पर किसी तरह की सीमा न रखने का सुझाव दिया था, जिस पर मुख्यमंत्री ने विचार का आश्वासन दिया था। अब इसी सुझाव के आधार पर नीति में संशोधन की संभावना है।

    नई तबादला नीति में यह भी प्रस्ताव है कि सभी विभाग ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से ट्रांसफर आवेदन स्वीकार करेंगे। इसके साथ ही स्कूल शिक्षा विभाग की नीति हर साल की तरह अलग रहेगी, जबकि राजस्व, ऊर्जा और जनजातीय कार्य जैसे विभाग अपनी अलग नीति जारी कर सकते हैं, लेकिन वे सामान्य प्रशासन विभाग के मूल नियमों से बाहर नहीं जा सकेंगे।

    प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि नई व्यवस्था में जिलों के भीतर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादलों का अधिकार प्रभारी मंत्री और कलेक्टर को दिया जा सकता है। वहीं, उच्च स्तर के अधिकारियों के ट्रांसफर के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी अनिवार्य रहेगी।

    यह भी प्रस्तावित है कि किसी कर्मचारी का एक बार तबादला होने के बाद उसे कम से कम एक वर्ष तक दोबारा ट्रांसफर नहीं किया जाएगा, जिससे स्थिरता बनी रहे।

    कैबिनेट बैठक में तबादला नीति के अलावा राज्यमंत्री स्वेच्छानुदान बढ़ाने के फैसले पर भी औपचारिक आदेश जारी होने की संभावना है। इसे 16 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है।

    कुल मिलाकर, बुधवार की कैबिनेट बैठक मध्य प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। तबादला नीति में बदलाव से न केवल कर्मचारियों की कार्यप्रणाली प्रभावित होगी, बल्कि प्रशासनिक संतुलन पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिलेगा।

  • डेडबॉडी पर मल्टीपल चोटों का दावा: परिवार ने रिपोर्ट पर जताई आपत्ति

    डेडबॉडी पर मल्टीपल चोटों का दावा: परिवार ने रिपोर्ट पर जताई आपत्ति


    मध्य प्रदेश। भोपाल की एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अब AIIMS भोपाल की शॉर्ट पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर कई चोटों के निशान मिलने का उल्लेख सामने आया है, जिसके बाद यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है। परिजन पहले से ही इसे हत्या का मामला बता रहे हैं, जबकि ससुराल पक्ष ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    ट्विशा के ससुराल पक्ष की ओर से पूर्व जज गिरीबाला सिंह और उनके वकील ने आरोप लगाया है कि रिपोर्ट में चोटों का उल्लेख तो है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि चोटें कहां और कितनी गंभीर थीं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट को सनसनी फैलाने के उद्देश्य से पेश किया गया प्रतीत होता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोबारा पोस्टमॉर्टम या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच होती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है और वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे।

    इस मामले में एक और बड़ा विवाद उस समय सामने आया जब यह खुलासा हुआ कि कथित फांसी में इस्तेमाल की गई बेल्ट को पोस्टमॉर्टम के समय जांच के लिए उपलब्ध नहीं कराया गया था। बाद में बेल्ट जांच के लिए दी गई, लेकिन तब तक वैज्ञानिक परीक्षण नहीं हो सका। इसी कारण गर्दन पर मिले निशानों का सही विश्लेषण अधूरा रह गया, जिससे जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।

    परिजनों का आरोप है कि जांच में गंभीर लापरवाही हुई है और उन्होंने मामले को मध्य प्रदेश से बाहर किसी स्वतंत्र एजेंसी या दिल्ली AIIMS में दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग की है। परिजन यह भी दावा कर रहे हैं कि देरी से FIR दर्ज हुई और कई अहम सबूतों को ठीक से सुरक्षित नहीं किया गया।

    वहीं दूसरी ओर ससुराल पक्ष का कहना है कि आरोप पूरी तरह से एकतरफा हैं। उनका दावा है कि ट्विशा मानसिक तनाव में थीं और कई व्यक्तिगत कारणों से परेशान थीं। सास गिरीबाला सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ट्विशा ने स्वयं गर्भपात कराया था, जिसके बाद वह डिप्रेशन में चली गई थीं। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार ने हमेशा उसे संभालने की कोशिश की।

    इस पूरे मामले में पुलिस ने बताया है कि आरोपी समर्थ सिंह की तलाश के लिए 6 टीमें बनाई गई हैं और उस पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

    इस बीच राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी मामला गर्मा गया है। भोपाल में सीएम हाउस के बाहर परिजनों ने प्रदर्शन कर न्याय की मांग की। दूसरी ओर ससुराल पक्ष ने भी खुद को निर्दोष बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

    फिलहाल ट्विशा की मौत का रहस्य और गहराता जा रहा है। एक तरफ परिजन इसे सुनियोजित हत्या बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ ससुराल पक्ष इसे मानसिक तनाव और व्यक्तिगत परिस्थितियों का परिणाम बता रहा है। जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सच को सामने लाने की है।

  • दवा की ऑनलाइन बिक्री के विरोध में हड़ताल: कल बंद रहेंगे मेडिकल स्टोर्स

    दवा की ऑनलाइन बिक्री के विरोध में हड़ताल: कल बंद रहेंगे मेडिकल स्टोर्स


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित पूरे राज्य में मंगलवार, 20 मई को मेडिकल स्टोर्स बंद रहने वाले हैं। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर यह राज्यव्यापी हड़ताल की जा रही है। इस बंद का सीधा असर भोपाल के करीब 3 हजार से अधिक मेडिकल स्टोर्स पर पड़ेगा, जो एक दिन के लिए पूरी तरह से बंद रहेंगे।

    इस हड़ताल का मुख्य कारण ऑनलाइन दवा बिक्री का बढ़ता विस्तार है। केमिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए दवाओं की बिक्री पर पर्याप्त निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था नहीं है, जिससे नकली, एक्सपायरी या गलत दवाओं के मरीजों तक पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। संगठन का आरोप है कि इससे आम लोगों की सेहत सीधे तौर पर जोखिम में पड़ रही है।

    भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र धाकड़ ने बताया कि जिले के सभी रिटेल और थोक दवा व्यवसायी इस बंद का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल व्यापार का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए और एक मजबूत निगरानी तंत्र तैयार किया जाए।

    हालांकि इस बंद से मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो रोजाना दवाओं पर निर्भर हैं। इसे देखते हुए एसोसिएशन ने नागरिकों से अपील की है कि वे 19 मई तक ही अपनी आवश्यक दवाएं खरीद लें ताकि 20 मई को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    विशेष रूप से बुजुर्गों, हृदय रोगियों, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीजों को पहले से दवाओं का स्टॉक रखने की सलाह दी गई है। एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया है कि अस्पतालों के अंदर संचालित मेडिकल स्टोर्स इस हड़ताल से बाहर रहेंगे, ताकि गंभीर मरीजों को जरूरी दवाएं मिलती रहें।

    हड़ताल के दौरान कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा दी जा रही भारी छूट, बिना निगरानी दवा वितरण और ऑनलाइन बिक्री पर नियंत्रण की कमी को लेकर विरोध जताया जाएगा। संगठन का कहना है कि जब तक सरकार ठोस नियम लागू नहीं करती, तब तक विरोध जारी रह सकता है।

    कुल मिलाकर, 20 मई का दिन मध्य प्रदेश में दवा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाला है। जहां एक ओर केमिस्ट संगठन अपने अधिकारों और नियमों की मांग को लेकर एकजुट है, वहीं दूसरी ओर आम जनता को अस्थायी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।

  • जिला अस्पताल पर उठे सवाल: मासूम की मौत के बाद परिजनों का हंगामा

    जिला अस्पताल पर उठे सवाल: मासूम की मौत के बाद परिजनों का हंगामा

    मध्य प्रदेश।  अशोकनगर  जिले के महुअन गांव में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया। पलंग से गिरकर घायल हुए छह माह के मासूम आदर्श चंदेल की मंगलवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। मासूम की मौत के बाद जिला अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई और परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए।

    जानकारी के मुताबिक, महुअन गांव निवासी विकास चंदेल का छह माह का बेटा आदर्श रविवार शाम घर में पलंग पर खेल रहा था। उसी दौरान उसकी मां रवि चंदेल घर से बाहर पानी भरने चली गई थीं। घर लौटने पर उन्होंने देखा कि मासूम पलंग से नीचे फर्श पर गिरा पड़ा है। बच्चे के सिर और शरीर में गंभीर चोटें आई थीं। परिवार के लोग तुरंत उसे इलाज के लिए ईसागढ़ के एक निजी क्लिनिक लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार किया गया।

    परिजनों का कहना है कि सोमवार शाम तक बच्चे की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, बल्कि उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई। इसके बाद उसे तत्काल जिला अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल में भर्ती कराने के बाद परिवार को उम्मीद थी कि मासूम की हालत में सुधार होगा, लेकिन मंगलवार सुबह इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

    बच्चे की मौत के बाद अस्पताल परिसर में मातम का माहौल बन गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने समय पर सही उपचार नहीं किया और बार-बार पूछने के बावजूद बच्चे की हालत के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते बेहतर इलाज मिलता, तो शायद मासूम की जान बचाई जा सकती थी।

    मासूम आदर्श की मौत के बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। घटना के बाद गांव में भी शोक की लहर फैल गई। पड़ोसियों और रिश्तेदारों का कहना है कि परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

    यह हादसा एक बार फिर छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों को कभी भी पलंग या ऊंची जगह पर अकेला नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। वहीं, परिजन जिला अस्पताल के डॉक्टरों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

  • अशोकनगर में बिजली कटौती पर फूटा गुस्सा: विधायक संग पावर हाउस पहुंचे ग्रामीण

    अशोकनगर में बिजली कटौती पर फूटा गुस्सा: विधायक संग पावर हाउस पहुंचे ग्रामीण


    मध्य प्रदेश। भीषण गर्मी के बीच Ashoknagar जिले में अघोषित बिजली कटौती को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। मंगलवार को कई गांवों के लोग कोलवा रोड स्थित पावर हाउस पहुंचे और बिजली विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में स्थानीय विधायक Hari Babu Rai भी शामिल हुए।

    ग्रामीणों ने बताया कि रात के समय अचानक बिजली काट दी जाती है, जिससे गर्मी में छोटे बच्चों और बुजुर्गों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि लगातार बिजली जाने से बच्चों की तबीयत खराब हो रही है।

    विधायक हरी बाबू राय ने कहा कि पूरे क्षेत्र में रात के समय लगातार बिजली कटौती की जा रही है। विभाग से पूछने पर “भोपाल से लोड सेटिंग” का हवाला दिया जाता है। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में बिजली कटौती से लोगों की परेशानी बढ़ गई है और अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है।

    ग्रामीणों ने ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद समय पर बदलाव नहीं होने और बिजली बिलों में अनियमितता की शिकायत भी की। उनका कहना है कि महीनों तक ट्रांसफार्मर नहीं बदले जाते, जबकि बिल एक साथ आने से भुगतान करना मुश्किल हो जाता है।

    विधायक ने कहा कि वे इस मुद्दे को लेकर संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखेंगे और अघोषित बिजली कटौती बंद करने की मांग करेंगे।

  • शादी में जाने के लिए गाड़ी मांगने पर हुआ विवाद, बेटे ने ले ली पिता की जान

    शादी में जाने के लिए गाड़ी मांगने पर हुआ विवाद, बेटे ने ले ली पिता की जान


    गुना। गुना जिले के म्याना थाना क्षेत्र में पिता की हत्या के सनसनीखेज मामले में आरोपी बेटे को कोर्ट से राहत नहीं मिली है। बाइक की चाबी मांगने को लेकर हुए विवाद में अपने ही पिता की गैंती मारकर हत्या करने वाले आरोपी विकास जाटव की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है।

    यह दिल दहला देने वाली घटना 24 अप्रैल को सगोरिया गांव में हुई थी। जानकारी के मुताबिक मृतक रमेश जाटव (40) पेशे से मकान निर्माण का ठेका लेने का काम करते थे। परिवार में उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। घटना वाले दिन शाम करीब 6 बजे रमेश अपने छोटे बेटे विवेक के साथ उमरी गांव में एक शादी समारोह में शामिल होने जाने की तैयारी कर रहे थे।

    घर से निकलने से पहले रमेश ने अपने बड़े बेटे विकास जाटव से बाइक की चाबी मांगी और उसे घर पर रुकने के लिए कहा। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। छोटे बेटे विवेक ने पुलिस को बताया कि विकास ने चाबी देने से इनकार करते हुए कहा कि उसने एक दिन पहले ही बाइक में पेट्रोल भरवाया है और पहले वह पेट्रोल निकाल लेगा, उसके बाद ही चाबी देगा।

    पिता रमेश ने बेटे की बात मानते हुए उससे कहा कि वह पेट्रोल निकाल ले और चाबी दे दे। इसके बाद विकास घर के अंदर गया, लेकिन चाबी लेकर लौटने के बजाय वह गैंती लेकर बाहर आया। आरोप है कि उसने अचानक अपने पिता के सिर पर गैंती से जोरदार हमला कर दिया। वार इतना गंभीर था कि रमेश मौके पर ही गिर पड़े और लहूलुहान हो गए।

    घटना के तुरंत बाद आरोपी बेटा मौके से फरार हो गया। परिजन गंभीर हालत में रमेश को लेकर म्याना अस्पताल के लिए निकले। रास्ते में उन्हें डायल-112 वाहन मिला, जिसके पुलिसकर्मियों की सलाह पर एंबुलेंस के जरिए रमेश को सीधे गुना जिला अस्पताल पहुंचाया गया। यहां इलाज के दौरान रात करीब 3 बजे उनकी मौत हो गई।

    पुलिस ने मामले में हत्या का प्रकरण दर्ज कर उसी दिन आरोपी विकास जाटव को गिरफ्तार कर लिया था। मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष की ओर से जमानत की मांग की गई, लेकिन कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।

    घटना के बाद गांव और परिवार में शोक का माहौल है। स्थानीय लोग भी इस बात से स्तब्ध हैं कि मामूली विवाद ने पिता-पुत्र के रिश्ते को खून से रंग दिया।

  • शिवपुरी में देर रात हमला: भैंस चुराने आए आरोपियों ने सरपंच को बनाया निशाना

    शिवपुरी में देर रात हमला: भैंस चुराने आए आरोपियों ने सरपंच को बनाया निशाना


    शिवपुरी। जिले के नरवर थाना क्षेत्र में सोमवार देर रात भैंस चोरी रोकने की कोशिश करना चार लोगों को भारी पड़ गया। हथियारबंद बदमाशों ने ग्राम बीलौनी के सरपंच सहित चार लोगों पर हमला कर बेरहमी से मारपीट की और मोबाइल, सोने की चेन व अंगूठी लूटकर फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, ग्राम बीलौनी के सरपंच बालकिशन जाटव अपने साथियों मुकेश जाटव, राजकुमार जाटव और कार चालक जगभान बघेल के साथ सोमवार रात एक शादी समारोह से लौट रहे थे। रात करीब 1 बजे जब उनकी कार नरवर गैस गोदाम के पास पहुंची, तब उन्होंने कुछ संदिग्ध लोगों को भैंसों को एक लोडिंग वाहन में चढ़ाते देखा। शक होने पर उन्होंने वाहन रोककर पूछताछ की।

    सरपंच बालकिशन जाटव के मुताबिक, जब उन्होंने भैंसों के बारे में सवाल किया तो वहां मौजूद लोगों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। इसी दौरान चालक जगभान बघेल ने भैंस चोरी की आशंका जताई। आरोप है कि यह सुनते ही एक बदमाश ने अपने साथियों से कहा, “पकड़ लो और गोली मार दो।” इसके बाद करीब 10 हथियारबंद बदमाशों ने चारों को घेर लिया।

    पीड़ितों का कहना है कि बदमाशों के पास लाठी, डंडे, सरिए और अवैध कट्टे थे। उन्होंने चारों लोगों के साथ जमकर मारपीट की। हमले में सरपंच बालकिशन जाटव की पीठ में गंभीर चोट आई, जबकि मुकेश जाटव की आंख, हाथ, पीठ और जांघ में चोटें आई हैं। राजकुमार जाटव और जगभान बघेल को भी शरीर के कई हिस्सों में चोट लगी। घटना के बाद सभी घायलों को नरवर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज किया गया।

    मारपीट के दौरान बदमाशों ने चारों लोगों के मोबाइल फोन, सोने की चेन और अंगूठी भी छीन ली। हालांकि हंगामा बढ़ता देख आरोपी भैंसों को मौके पर छोड़कर वाहन सहित फरार हो गए। पुलिस अब फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।

    इधर, धवा की बावड़ी क्षेत्र निवासी जवाहर रावत की 9 भैंसें चोरी होने का मामला भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि भैंस चोरी की यह पूरी वारदात आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई है। फुटेज में कुछ संदिग्ध लोग भैंसों को वाहन में ले जाते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।

    पुलिस का कहना है कि घटना गंभीर है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है। इलाके में लगातार बढ़ रही पशु चोरी की घटनाओं से ग्रामीणों में भी नाराजगी है। ग्रामीणों ने पुलिस गश्त बढ़ाने और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

  • NTA भंग करने की मांग तेज: शिवपुरी में छात्रों और युवाओं का विरोध प्रदर्शन

    NTA भंग करने की मांग तेज: शिवपुरी में छात्रों और युवाओं का विरोध प्रदर्शन


    शिवपुरी। नीट यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार और बढ़ती बेरोजगारी के विरोध में मंगलवार को शिवपुरी में युवाओं का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया। मूवमेंट अगेंस्ट अनएम्प्लॉयमेंट (एमएयू) की जिला इकाई ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करते हुए केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को भंग करने, पेपर लीक मामलों की न्यायिक जांच कराने और प्रदेश में समाप्त किए जा रहे 1.20 लाख सरकारी पदों को बहाल करने की मांग की।

    प्रदर्शन में शामिल युवाओं और संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि नीट यूजी जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक होना देश की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। उनका आरोप था कि लगातार हो रहे पेपर लीक से मेहनती और मेधावी छात्रों का भविष्य अंधकार में जा रहा है। संगठन का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी के कारण छात्रों और अभिभावकों में अविश्वास और मानसिक तनाव लगातार बढ़ रहा है।

    एमएयू कार्यकर्ताओं ने मांग उठाई कि नीट सहित सभी भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में हुए पेपर लीक मामलों की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए। साथ ही इसमें शामिल अधिकारियों, एजेंसियों और अन्य दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि केवल जांच की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत और स्थायी व्यवस्था बनाना जरूरी है।

    संगठन ने मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में भी बदलाव की मांग करते हुए कहा कि छात्रों को 12वीं कक्षा की मेरिट के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी सरकार के सीधे नियंत्रण में होनी चाहिए और एनटीए जैसी एजेंसी को समाप्त किया जाना चाहिए।

    ज्ञापन में बेरोजगारी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में लाखों सरकारी पद खाली होने के बावजूद स्थायी भर्तियां नहीं की जा रही हैं। उन्होंने प्रदेश में समाप्त किए जा रहे 1.20 लाख सरकारी पदों को बहाल कर सभी विभागों में नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। युवाओं का कहना था कि अस्थायी नियुक्तियों और आउटसोर्स व्यवस्था से रोजगार की स्थिरता खत्म हो रही है।

    प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी की। वहीं स्थानीय छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शिवपुरी जिले में नीट परीक्षा केंद्र स्थापित करने की मांग रखी गई, ताकि विद्यार्थियों को दूसरे शहरों में जाकर परीक्षा देने की परेशानी न उठानी पड़े।

    एमएयू ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द ठोस कदम नहीं उठाती, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

  • पार्सल से 455 ग्राम अफीम बरामद: पूछताछ होते ही भाग निकला युवक

    पार्सल से 455 ग्राम अफीम बरामद: पूछताछ होते ही भाग निकला युवक

    मंदसौर। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी के लिए अब तस्कर नए-नए तरीके अपना रहे हैं। मंदसौर में ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां चॉकलेट और कैंडी के रैपर में अफीम छिपाकर कनाडा भेजने की कोशिश की जा रही थी। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (CBN) ने नई आबादी पोस्ट ऑफिस से 455 ग्राम अवैध अफीम बरामद की है। मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए जांच शुरू कर दी गई है।

    जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम करीब 4 बजे एक युवक नई आबादी स्थित पोस्ट ऑफिस पहुंचा और कनाडा के ओंटारियो में इंटरनेशनल पार्सल भेजने की प्रक्रिया शुरू की। करीब दो किलो वजन के इस पार्सल को लेकर युवक ने दावा किया कि उसमें केवल चॉकलेट और कैंडी आइटम हैं। लेकिन उसकी गतिविधियां पोस्ट ऑफिस कर्मचारियों को संदिग्ध लगीं।

    पोस्टल असिस्टेंट ने जब पार्सल में रखी सामग्री को लेकर युवक से विस्तार से पूछताछ की, तो वह घबराने लगा। कर्मचारियों ने उससे और जानकारी मांगी तो वह अचानक पार्सल काउंटर पर ही छोड़कर मौके से फरार हो गया। युवक के इस व्यवहार से कर्मचारियों का शक और गहरा गया, जिसके बाद तुरंत सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स को सूचना दी गई।

    सूचना मिलते ही सीबीएन मंदसौर सेल की टीम मौके पर पहुंची और पार्सल की जांच शुरू की। करीब दो घंटे तक चली जांच में पार्सल के अंदर ‘लव पैन’ नाम की कैंडी के दो बॉक्स मिले। जब टीम ने कैंडी और चॉकलेट के रैपर खोले तो उनमें छिपाए गए 25 छोटे पाउच बरामद हुए। इन पाउचों में कुल 455 ग्राम अफीम भरी हुई थी। बाकी रैपरों में सामान्य कैंडी रखी गई थी, ताकि जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके।

    सीबीएन अधिकारियों के मुताबिक, तस्करों ने ड्रग्स को छिपाने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह पार्सल नीमच क्षेत्र से कनाडा भेजा जाना था। एजेंसियों को आशंका है कि इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।

    पोस्ट ऑफिस परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में संदिग्ध युवक की तस्वीर कैद हो गई है। अब जांच एजेंसियां फुटेज के आधार पर उसकी पहचान और गिरफ्तारी की कोशिश कर रही हैं। सीबीएन का कहना है कि एंटी ड्रग ऑपरेशन के तहत पहले से विशेष सूचना मिलने के बाद निगरानी बढ़ाई गई थी।

    पोस्टल असिस्टेंट प्रदीप मेहरा ने बताया कि युवक की घबराहट और संदिग्ध गतिविधियों के चलते उन्हें शक हुआ था। पूछताछ बढ़ाने पर वह सामान छोड़कर भाग गया, जिसके बाद तुरंत नारकोटिक्स टीम को बुलाया गया। फिलहाल जब्त अफीम को कब्जे में लेकर मामले की गहन जांच की जा रही है।

  • यौन उत्पीड़न पीड़ित बच्चों के लिए सहायक नियुक्त होंगे, 28 मई तक आवेदन

    यौन उत्पीड़न पीड़ित बच्चों के लिए सहायक नियुक्त होंगे, 28 मई तक आवेदन


    मंदसौर। लैंगिक अपराधों से पीड़ित बच्चों को संवेदनशील माहौल में कानूनी और मानसिक सहयोग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। पॉक्सो एक्ट 2012 के तहत जिले में 7 सहायक व्यक्तियों यानी “सपोर्ट पर्सन” की नियुक्ति के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभाग ने इच्छुक और योग्य व्यक्तियों से 28 मई 2026 तक आवेदन आमंत्रित किए हैं।

    जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं जिला बाल संरक्षण अधिकारी बी.एल. बिश्नोई ने बताया कि पॉक्सो एक्ट की धारा 39 के अंतर्गत इन सहायक व्यक्तियों का चयन किया जाएगा। इनका मुख्य उद्देश्य यौन उत्पीड़न का शिकार हुए बच्चों को सुरक्षित, भरोसेमंद और संवेदनशील वातावरण उपलब्ध कराना होगा, ताकि वे मानसिक दबाव और भय से बाहर निकलकर न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर सकें।

    विभाग के अनुसार, कई मामलों में बच्चे और उनके परिवार कानूनी प्रक्रियाओं, पुलिस कार्रवाई और न्यायालयीन कार्यवाही को लेकर असहज महसूस करते हैं। ऐसे में सपोर्ट पर्सन बच्चों के साथ हर चरण में सहयोग करेंगे। ये सहायक व्यक्ति पीड़ित बच्चों के बयान दर्ज कराने से लेकर कोर्ट में पेशी, मानसिक परामर्श, पुनर्वास और शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने तक की प्रक्रिया में मार्गदर्शन देंगे।

    साथ ही बच्चों और उनके परिजनों को यह भी समझाया जाएगा कि वे किस तरह कानूनी अधिकारों का उपयोग कर सकते हैं और किसी भी प्रकार के सामाजिक दबाव या डर से कैसे बाहर निकल सकते हैं। विभाग का मानना है कि इस पहल से पीड़ित बच्चों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया अधिक आसान और मानवीय बन सकेगी।

    महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि आवेदन स्वयं उपस्थित होकर, पंजीकृत डाक, स्पीड पोस्ट या कोरियर के माध्यम से जिला कार्यालय में जमा किए जा सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 28 मई 2026 निर्धारित की गई है। विभाग ने पात्रता, चयन प्रक्रिया और अन्य दिशा-निर्देशों की विस्तृत जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पॉक्सो जैसे संवेदनशील मामलों में प्रशिक्षित और संवेदनशील सपोर्ट पर्सन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इससे पीड़ित बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे न्यायिक प्रक्रिया में अधिक सहजता से भाग ले पाते हैं। विभाग की यह पहल जिले में बाल संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।