Category: Madhya Pradesh

  • सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अब TET पास किए बिना नहीं बन सकेंगे शिक्षक

    सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अब TET पास किए बिना नहीं बन सकेंगे शिक्षक


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में शिक्षक भर्ती और प्रमोशन को लेकर बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। अब शिक्षक बनने या पदोन्नति पाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य होगा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख सामने आया है, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि बिना योग्यता परीक्षा के कोई भी व्यक्ति शिक्षक नहीं बन सकता। यह निर्णय Supreme Court of India के हालिया आदेश के बाद चर्चा में आया है, जिसके तहत शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए TET को न्यूनतम पात्रता मानक माना गया है।

    क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
    सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया है कि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पात्रता परीक्षा जरूरी है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि जिन शिक्षकों को पहले से कुछ छूट या राहत मिल चुकी है, उन्हें अब अतिरिक्त लाभ नहीं दिया जा सकता।

    इस फैसले के बाद अब Madhya Pradesh सहित सभी राज्यों को अपने भर्ती नियमों में बदलाव करना होगा और TET को अनिवार्य रूप से लागू करना होगा।

    किस पर पड़ेगा सीधा असर
    इस फैसले का सीधा असर तीन श्रेणियों पर पड़ेगा-
    पहला, नए उम्मीदवार जो शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हैं।
    दूसरा, पहले से कार्यरत शिक्षक जो प्रमोशन की उम्मीद कर रहे हैं।
    तीसरा, वे शिक्षक जो बिना TET पास किए सेवा में हैं।
    अब इन सभी के लिए TET पास करना अनिवार्य शर्त बन गई है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

    क्यों जरूरी माना गया TET?
    Teacher Eligibility Test (TET) को इसलिए जरूरी माना जाता है ताकि स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक न्यूनतम शैक्षणिक और पेशेवर योग्यता रखते हों। इस परीक्षा में उम्मीदवारों की विषय समझ, शिक्षण क्षमता और बाल मनोविज्ञान की जांच की जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्रों को बेहतर शिक्षण वातावरण मिलेगा।

    शिक्षकों और सिस्टम पर असर
    इस फैसले से शिक्षा विभाग में हलचल बढ़ गई है। कई राज्यों को अपनी भर्ती और प्रमोशन नीतियों को नए सिरे से तैयार करना होगा। हालांकि, लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के लिए यह नियम चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है।

    आगे क्या होगा
    अब राज्य सरकारों को Supreme Court of India के निर्देशों के अनुसार भर्ती नियम अपडेट करने होंगे। आने वाले समय में TET की वैधता, छूट और अन्य नियमों पर भी स्पष्ट गाइडलाइन जारी की जा सकती है।

    Madhya Pradesh में शिक्षा व्यवस्था अब एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद शिक्षक बनने और प्रमोशन की प्रक्रिया अधिक सख्त और योग्यता आधारित हो गई है। इससे जहां शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ने की उम्मीद है, वहीं कई शिक्षकों के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं।

  • देवास में बड़ा हादसा: पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट, मौत और घायलों से मचा हड़कंप

    देवास में बड़ा हादसा: पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट, मौत और घायलों से मचा हड़कंप


    देवास (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के देवास जिले के टोंक कलां इलाके में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया, जब एक पटाखा फैक्ट्री में जोरदार धमाका हुआ। हादसे में अब तक 3 मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 25 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और फैक्ट्री परिसर मलबे में तब्दील हो गया।

    यह हादसा करीब सुबह 11:30 बजे हुआ, जब फैक्ट्री में मजदूर काम कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विस्फोट इतना तेज था कि शवों के टुकड़े 20 से 25 फीट दूर तक जा गिरे। धमाके से फैक्ट्री की दीवारें भी क्षतिग्रस्त हो गईं और आसपास का इलाका दहशत में आ गया।

    हादसे में मृत मजदूरों की पहचान धीरज, सनी और सुमित के रूप में हुई है। घायलों में उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के कई मजदूर शामिल हैं, जिन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।

    कई घायलों का इलाज जारी, कुछ की हालत गंभी
    प्रशासन के अनुसार, घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। देवास जिला अस्पताल में 12 मरीजों का इलाज चल रहा है, जबकि 6 लोग अमलतास अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं 7 गंभीर घायलों को इंदौर रेफर किया गया है, जहां MY अस्पताल और चोइथराम अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।

    केमिकल मिक्सिंग के दौरान हुआ विस्फोट
    मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, फैक्ट्री में दो केमिकल मिलाकर बारूद तैयार किया जा रहा था। इसी दौरान केमिकल की मात्रा में गड़बड़ी होने से अचानक जोरदार धमाका हो गया। उस समय करीब 15 से 20 मजदूर मौके पर मौजूद थे।

    प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे से कुछ मिनट पहले ही मजदूरों का लंच तैयार था, लेकिन उससे पहले ही धमाका हो गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कई मजदूर झुलसी हालत में खुद बाहर निकलते दिखाई दिए।

    अवैध फैक्ट्री और सुरक्षा पर उठे सवा
    हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फैक्ट्री के खिलाफ पहले भी शिकायत की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का दावा है कि यहां 400 से 500 मजदूर काम करते थे और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही थी। इस घटना के बाद फैक्ट्री को प्रशासन ने सील कर दिया है और मालिक अनिल मालवीय को हिरासत में ले लिया गया है।

    सीएम ने दिए जांच के आदेश
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना पर गहरा दुख जताया है और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही सरकार ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है।

    पहले भी हो चुका था हादसा
    स्थानीय लोगों के अनुसार, इसी फैक्ट्री में मार्च 2026 में भी ब्लास्ट हुआ था। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में कोई बड़ा सुधार नहीं किया गया, जिससे एक बार फिर यह बड़ा हादसा हो गया।

    इलाके में दहशत का माहौ
    धमाके के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई है। फैक्ट्री परिसर में अब भी रुक-रुककर छोटे धमाकों जैसी आवाजें आ रही हैं, जिससे रेस्क्यू टीम को भी सावधानी बरतनी पड़ रही है।

  • सागर में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई: अनाज रिकॉर्ड दर्ज करने के बदले ली थी रिश्वत

    सागर में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई: अनाज रिकॉर्ड दर्ज करने के बदले ली थी रिश्वत


    नई दिल्ली। उज्जैन की जीवनरेखा मानी जाने वाली शिप्रा नदी एक बार फिर अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों को लेकर चर्चा में है। करोड़ों रुपए खर्च कर नदी के शुद्धिकरण और सौंदर्यीकरण के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर शिप्रा के दोनों किनारों पर ग्रीन बेल्ट और सिंहस्थ की संरक्षित जमीन पर तेजी से अवैध निर्माण खड़े हो रहे हैं। होटल, रिसॉर्ट, मठ, आश्रम, स्कूल और कॉलोनियों के रूप में फैल रहे इन निर्माणों पर अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपना लिया है।

    मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उज्जैन नगर निगम को तलब किया है और स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिप्रा नदी के 200 मीटर दायरे में हुए सभी अवैध निर्माणों की जानकारी प्रस्तुत की जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि इन्हें हटाने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने नगर निगम को 15 जून तक विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

    यह मामला वर्ष 2023 में उज्जैन निवासी सत्यनारायण सोमानी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि शिप्रा नदी के किनारे बड़े पैमाने पर अवैध व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। नदी तट के आसपास बनाए गए होटल, रिसॉर्ट और अन्य निर्माणों से निकलने वाला सीवरेज सीधे शिप्रा में मिल रहा है, जिससे नदी का पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि जिन क्षेत्रों को पर्यावरणीय और धार्मिक दृष्टि से संरक्षित माना गया है, वहां निर्माण गतिविधियां लगातार जारी हैं। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि नदी तट के समीप किसी भी प्रकार के व्यावसायिक रिसॉर्ट या निर्माण को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता बलदीप सिंह गांधी ने कोर्ट को बताया कि नदी किनारे 100 से 200 मीटर की सीमा के भीतर 200 से अधिक अवैध निर्माण मौजूद हैं। इनमें कई ऐसे निर्माण भी हैं, जो बिना वैध अनुमति के संचालित हो रहे हैं और पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।

    कोर्ट ने नगर निगम को निर्देशित किया है कि 15 जून तक सभी अतिक्रमणों की सूची तैयार कर कार्रवाई शुरू की जाए। साथ ही तब तक इन अवैध निर्माणों में किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं होने देने के निर्देश भी दिए गए हैं। कोर्ट ने नदी निधि विकास योजना से संबंधित रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है।

    अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होगी। माना जा रहा है कि यदि नगर निगम संतोषजनक जवाब पेश नहीं कर पाया तो हाईकोर्ट और सख्त कदम उठा सकता है। शिप्रा नदी को बचाने और सिंहस्थ क्षेत्र की पवित्रता बनाए रखने को लेकर यह मामला अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।

  • भीषण गर्मी में अस्पताल में हंगामा: 30 मरीजों पर सिर्फ 2 कूलर, परिजन आपस में भिड़े

    भीषण गर्मी में अस्पताल में हंगामा: 30 मरीजों पर सिर्फ 2 कूलर, परिजन आपस में भिड़े


    नई दिल्ली। सागर जिला अस्पताल में भीषण गर्मी और अव्यवस्थाओं के बीच मंगलवार देर रात एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। महिला मेडिसिन वार्ड क्रमांक-6 में मरीजों के परिजनों के बीच कूलर की हवा में सोने को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। रात करीब डेढ़ बजे हुए इस विवाद में दोनों पक्षों के बीच जमकर लात-घूंसे और बेल्ट चले, जिससे अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    घटना का वीडियो बुधवार को सामने आया, जिसमें वार्ड के भीतर लोगों को एक-दूसरे पर हमला करते हुए देखा जा सकता है। मारपीट के दौरान वार्ड में भर्ती मरीज भयभीत हो गए और कई लोग अपने बिस्तरों से उठकर बाहर निकलते नजर आए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विवाद कूलर के सामने जगह को लेकर शुरू हुआ था। गर्मी से परेशान परिजन कूलर के पास सोने की कोशिश कर रहे थे, इसी दौरान कहासुनी हुई और मामला हाथापाई तक पहुंच गया।

    वार्ड में मौजूद अन्य लोगों ने बीच-बचाव करने का प्रयास किया, लेकिन कुछ देर तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। हंगामे की सूचना मिलते ही अस्पताल के सुरक्षा गार्ड और ड्यूटी स्टाफ मौके पर पहुंचे। काफी समझाइश के बाद दोनों पक्षों को शांत कराया गया।

    मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल की खराब व्यवस्थाओं के कारण इस तरह के विवाद पैदा हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि महिला वार्ड में 30 से अधिक मरीज भर्ती हैं, लेकिन पूरे वार्ड में सिर्फ दो कूलर लगाए गए हैं। इतना ही नहीं, कई सीलिंग पंखे भी खराब पड़े हैं, जिससे उमस और गर्मी से मरीजों की हालत खराब हो रही है।

    परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। भीषण गर्मी में मरीजों और उनके साथ रहने वाले अटेंडरों को रातभर परेशानी झेलनी पड़ रही है।

    घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। मरीजों और उनके परिजनों ने मांग की है कि वार्डों में कूलर, पंखे और हवा की पर्याप्त व्यवस्था जल्द सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

  • स्कूटी से भागते समय दीवार से टकराया युवक, सड़क पर घंटों खून से लथपथ पड़ा रहा

    स्कूटी से भागते समय दीवार से टकराया युवक, सड़क पर घंटों खून से लथपथ पड़ा रहा


    नई दिल्ली। रीवा शहर में बुधवार देर रात उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के उपरहटी स्थित मछरिया गेट इलाके में दो गुटों के बीच मामूली विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। शराब के नशे में शुरू हुई कहासुनी देखते ही देखते मारपीट और पथराव तक पहुंच गई। देर रात सड़क पर हुए इस हंगामे से पूरे इलाके में दहशत फैल गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद में एक दर्जन से अधिक लोग शामिल थे। दोनों पक्षों के बीच पहले बहस हुई और फिर अचानक लात-घूंसे चलने लगे। कुछ ही देर में लोगों ने एक-दूसरे पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। सड़क पर काफी देर तक हंगामा चलता रहा और आसपास मौजूद लोग डर के कारण इधर-उधर भागते नजर आए।

    इसी दौरान एक युवक स्कूटी से मौके से भागने की कोशिश कर रहा था। बताया जा रहा है कि वह तेज रफ्तार में वाहन चला रहा था, तभी उसका संतुलन बिगड़ गया और स्कूटी सीधे सड़क किनारे दीवार से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके सिर में गहरी चोट आई और वह सड़क पर खून से लथपथ पड़ा रहा।

    स्थानीय लोगों ने तुरंत घायल युवक को संभाला और संजय गांधी अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार युवक की हालत गंभीर बनी हुई है।

    घटना के बाद स्थानीय लोगों में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी नाराजगी देखने को मिली। रहवासियों का आरोप है कि घटना की सूचना कई बार पुलिस को दी गई, लेकिन पुलिस करीब दो घंटे बाद मौके पर पहुंची। लोगों का कहना है कि यदि पुलिस समय पर पहुंच जाती तो स्थिति इतनी बिगड़ती नहीं और हिंसा को रोका जा सकता था।

    इलाके के लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में लगातार असामाजिक गतिविधियां बढ़ रही हैं, लेकिन नियमित पुलिस गश्त नहीं होने से बदमाशों के हौसले बुलंद हैं। देर रात हुई इस घटना के बाद क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

    फिलहाल पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है। सिटी कोतवाली थाना प्रभारी निशा मिश्रा ने बताया कि मारपीट और पथराव में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और जल्द ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

  • रीवा में शादी समारोह बना रणक्षेत्र: बीच सड़क पर दो गुटों में जमकर मारपीट

    रीवा में शादी समारोह बना रणक्षेत्र: बीच सड़क पर दो गुटों में जमकर मारपीट


    नई दिल्ली।  रीवा शहर में बुधवार देर रात एक शादी समारोह उस समय हंगामे में बदल गया, जब दो पक्षों के बीच मामूली कहासुनी देखते ही देखते हिंसक झड़प में तब्दील हो गई। मामला शहर के व्यस्त इलाके स्थित गायत्री हॉल के सामने का है, जहां बीच सड़क पर दोनों पक्षों के लोगों के बीच जमकर लात-घूंसे चले। खास बात यह रही कि यह पूरी घटना सिविल लाइन थाने से महज 100 मीटर की दूरी पर हुई, जिससे इलाके में देर रात अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    जानकारी के अनुसार, घोघर निवासी संतोष सेन और रामरती सेन की बेटी पलक सेन का विवाह समारोह गायत्री हॉल में आयोजित किया गया था। बारात रीवा जिले के मनगवां क्षेत्र से आई थी। दूल्हा पंकज सेन अपने परिजनों और रिश्तेदारों के साथ विवाह समारोह में शामिल होने पहुंचा था। कार्यक्रम के दौरान कुछ युवकों के बीच किसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे बढ़ते हुए मारपीट में बदल गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोनों पक्षों के लोग अचानक सड़क पर आ गए और एक-दूसरे पर हमला करने लगे। काफी देर तक सड़क पर लात-घूंसे चलते रहे। इस दौरान वहां मौजूद लोगों में दहशत फैल गई और कई लोग खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। सड़क पर हंगामे के कारण कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा।

    मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन स्थिति काफी देर तक तनावपूर्ण बनी रही। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया। पुलिस की मौजूदगी के बाद हालात नियंत्रण में आए।

    घटना के दौरान मौजूद कुछ लोगों ने पूरी मारपीट का वीडियो अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया और इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में दोनों पक्षों के लोग सड़क पर एक-दूसरे से भिड़ते दिखाई दे रहे हैं।

    फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों से पूछताछ कर रही है और विवाद की असली वजह जानने की कोशिश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज और बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • महाकाल मंदिर में 5 लाख का ब्रेसलेट गायब, CCTV से खुला राज और 1.5 घंटे में रिकवरी

    महाकाल मंदिर में 5 लाख का ब्रेसलेट गायब, CCTV से खुला राज और 1.5 घंटे में रिकवरी


    नई दिल्ली। उज्जैन जिला अस्पताल में चिकित्सकीय व्यवस्था को लेकर एक बार फिर प्रशासन की सख्ती देखने को मिली है। गुरुवार को जिला पंचायत सीईओ श्रेयांश कुमट ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, जिसमें ओपीडी व्यवस्था, उपस्थिति रजिस्टर और विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली की गहन जांच की गई। निरीक्षण के दौरान कई चिकित्सक निर्धारित समय पर ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए, जिस पर सीईओ ने कड़ी नाराजगी जताई।

    निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि कुछ विभागों में डॉक्टर सुबह 9 बजे से निर्धारित ड्यूटी समय पर मौजूद नहीं थे। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए सीईओ ने अनुपस्थित चिकित्सकों का एक दिन का वेतन काटने और सभी संबंधित डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    सीईओ श्रेयांश कुमट ने यह भी दोहराया कि शासन और स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के अनुसार सभी चिकित्सकों को सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक और शाम 5 बजे से 6 बजे तक नियमित रूप से अस्पताल में उपस्थित रहना अनिवार्य है, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके। इसके बावजूद लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ डॉक्टर ड्यूटी समय का पालन नहीं कर रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि इससे पहले भी कई बार चिकित्सकों को चेतावनी दी जा चुकी है और कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए थे, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसी कारण अब सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया गया है।

    निरीक्षण के दौरान सीईओ ने केवल उपस्थिति व्यवस्था ही नहीं, बल्कि अस्पताल की साफ-सफाई, वार्डों की स्थिति, मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं, रिकॉर्ड प्रबंधन और अन्य चिकित्सकीय सेवाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने अस्पताल की लिफ्ट व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी अधिकारियों से चर्चा की और सुधार के निर्देश दिए।

    अस्पताल की सिविल सर्जन डॉ. संगीता पलसानिया ने बताया कि अस्पताल में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह निरीक्षण किया गया। उन्होंने कहा कि आगामी राष्ट्रीय असेसमेंट को ध्यान में रखते हुए अस्पताल की व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो सके।

    इस कार्रवाई के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप की स्थिति है और अब सभी चिकित्सकों को उपस्थिति व्यवस्था को लेकर सख्त पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • सीईओ की सख्ती: ड्यूटी से गायब मिले डॉक्टर, वेतन कटौती का फैसला

    सीईओ की सख्ती: ड्यूटी से गायब मिले डॉक्टर, वेतन कटौती का फैसला


    नई दिल्ली। उज्जैन जिला अस्पताल में चिकित्सकीय व्यवस्था को लेकर एक बार फिर प्रशासन की सख्ती देखने को मिली है। गुरुवार को जिला पंचायत सीईओ श्रेयांश कुमट ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, जिसमें ओपीडी व्यवस्था, उपस्थिति रजिस्टर और विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली की गहन जांच की गई। निरीक्षण के दौरान कई चिकित्सक निर्धारित समय पर ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए, जिस पर सीईओ ने कड़ी नाराजगी जताई।

    निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि कुछ विभागों में डॉक्टर सुबह 9 बजे से निर्धारित ड्यूटी समय पर मौजूद नहीं थे। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए सीईओ ने अनुपस्थित चिकित्सकों का एक दिन का वेतन काटने और सभी संबंधित डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    सीईओ श्रेयांश कुमट ने यह भी दोहराया कि शासन और स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के अनुसार सभी चिकित्सकों को सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक और शाम 5 बजे से 6 बजे तक नियमित रूप से अस्पताल में उपस्थित रहना अनिवार्य है, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके। इसके बावजूद लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ डॉक्टर ड्यूटी समय का पालन नहीं कर रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि इससे पहले भी कई बार चिकित्सकों को चेतावनी दी जा चुकी है और कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए थे, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसी कारण अब सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया गया है।

    निरीक्षण के दौरान सीईओ ने केवल उपस्थिति व्यवस्था ही नहीं, बल्कि अस्पताल की साफ-सफाई, वार्डों की स्थिति, मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं, रिकॉर्ड प्रबंधन और अन्य चिकित्सकीय सेवाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने अस्पताल की लिफ्ट व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी अधिकारियों से चर्चा की और सुधार के निर्देश दिए।

    अस्पताल की सिविल सर्जन डॉ. संगीता पलसानिया ने बताया कि अस्पताल में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह निरीक्षण किया गया। उन्होंने कहा कि आगामी राष्ट्रीय असेसमेंट को ध्यान में रखते हुए अस्पताल की व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो सके।

    इस कार्रवाई के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप की स्थिति है और अब सभी चिकित्सकों को उपस्थिति व्यवस्था को लेकर सख्त पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • उज्जैन में बड़ा एक्शन मोड: शिप्रा तट पर अवैध होटल-रिसॉर्ट पर हाईकोर्ट की नजर

    उज्जैन में बड़ा एक्शन मोड: शिप्रा तट पर अवैध होटल-रिसॉर्ट पर हाईकोर्ट की नजर


    नई दिल्ली। उज्जैन में पवित्र शिप्रा नदी के किनारे लगातार बढ़ रहे अवैध निर्माणों को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। नदी के शुद्धिकरण और संरक्षण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद ग्रीन बेल्ट और सिंहस्थ के लिए आरक्षित भूमि पर होटल, रिसॉर्ट, मठ, आश्रम, रेस्टोरेंट और कॉलोनियों के रूप में 200 से अधिक अवैध निर्माण खड़े होने का मामला अब न्यायालय की निगरानी में है।

    इस पूरे मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उज्जैन नगर निगम को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह नदी किनारे 100 से 200 मीटर के दायरे में हुए सभी अतिक्रमणों की विस्तृत सूची तैयार करे। साथ ही यह भी बताया जाए कि अब तक इन अवैध निर्माणों पर क्या कार्रवाई की गई है और उन्हें हटाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

    कोर्ट ने नगर निगम को यह रिपोर्ट 15 जून तक हर हाल में पेश करने का आदेश दिया है। इसी तारीख को मामले की अगली सुनवाई भी निर्धारित की गई है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि तब तक किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि इन क्षेत्रों में जारी नहीं रहनी चाहिए।

    यह याचिका वर्ष 2023 में उज्जैन निवासी सत्यनारायण सोमानी द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर नियमों को दरकिनार करते हुए बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किए गए हैं। इनमें होटल, मठ, आश्रम, स्कूल और आवासीय कॉलोनियां तक शामिल हैं। इन निर्माणों से निकलने वाला सीवरेज सीधे नदी में मिल रहा है, जिससे शिप्रा का जल गंभीर रूप से प्रदूषित हो रहा है।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि नदी के किनारे व्यावसायिक निर्माण न केवल पर्यावरण नियमों का उल्लंघन है, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अनुचित है। कोर्ट ने भी टिप्पणी की कि नदी तट पर किसी भी प्रकार के व्यावसायिक रिसॉर्ट या स्थायी निर्माण को अनुमति नहीं दी जा सकती।

    पूर्व सुनवाई में 5 मई को भी कोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिए थे कि सभी अतिक्रमणों की सूची तैयार की जाए और सुनिश्चित किया जाए कि नदी किनारे कोई अवैध गतिविधि संचालित न हो। इसके साथ ही नदी निधि विकास योजना से जुड़ी रिपोर्ट भी पेश करने के निर्देश दिए गए थे।

    अब सभी की नजरें 15 जून की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां नगर निगम की कार्रवाई रिपोर्ट यह तय करेगी कि अवैध निर्माणों पर प्रशासन ने कितनी गंभीरता से कदम उठाए हैं।

  • हाईकोर्ट में बड़ा मोड़: राहुल गांधी के मानहानि केस की अंतिम सुनवाई पर टिकी निगाहें

    हाईकोर्ट में बड़ा मोड़: राहुल गांधी के मानहानि केस की अंतिम सुनवाई पर टिकी निगाहें


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Jabalpur स्थित हाईकोर्ट में आज एक महत्वपूर्ण कानूनी मामले पर सुनवाई होने जा रही है, जिस पर पूरे राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजरें टिकी हुई हैं। यह मामला लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि याचिका से जुड़ा है, जो 2018 के एक चुनावी भाषण पर आधारित है।

    यह मामला झाबुआ में दिए गए एक भाषण से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि राहुल गांधी ने पनामा पेपर लीक का जिक्र करते हुए मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री और उनके परिवार से जुड़े लोगों का नाम लिया था। इसी बयान को लेकर कार्तिकेय सिंह चौहान ने एमपी-एमएलए विशेष अदालत भोपाल में मानहानि का परिवाद दायर किया था।

    बाद में विशेष अदालत ने इस मामले में राहुल गांधी को समन जारी किया, जिसे चुनौती देते हुए उन्होंने Jabalpur हाईकोर्ट का रुख किया। राहुल गांधी की ओर से दायर याचिका में समन और पूरे परिवाद को निरस्त करने की मांग की गई है।

    पिछली सुनवाई में दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत दलीलें पेश की गई थीं। राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि यह परिवाद तथ्यात्मक रूप से कमजोर है और इसमें लगाए गए आरोप ठोस सबूतों पर आधारित नहीं हैं।

    वहीं शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि 2018 में कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए राहुल गांधी ने झाबुआ की चुनावी सभा में अपने भाषण के दौरान पनामा पेपर्स लीक का उल्लेख करते हुए कथित रूप से गलत जानकारी दी थी, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि राहुल गांधी ने अपने भाषण में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ कार्रवाई का उदाहरण देते हुए मध्यप्रदेश में भी ऐसी कार्रवाई न होने की बात कही थी, जिससे शिकायतकर्ता पक्ष को आपत्ति है।

    हालांकि, बाद में राहुल गांधी ने यह स्वीकार किया था कि बयान के दौरान उनसे नाम को लेकर भ्रम हो गया था और उनका आशय किसी अन्य व्यक्ति से था।

    Jabalpur हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई पहले भी हो चुकी है, जिसमें कोर्ट ने दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया था। पिछली सुनवाई में समय मांगने पर अदालत ने उसे स्वीकार कर लिया था।

    आज की सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि संभावना जताई जा रही है कि यह अंतिम चरण हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो कोर्ट इस मामले में आगे की दिशा तय कर सकता है कि ट्रायल जारी रहेगा या नहीं। फिलहाल इस पूरे मामले पर राजनीतिक और कानूनी दोनों ही स्तर पर नजर बनी हुई है।