Category: Madhya Pradesh

  • MP Weather Update: 8 जून को गर्मी और उमस का डबल अटैक, कहीं बादल तो कहीं तेज धूप; मानसून की आहट का इंतजार

    MP Weather Update: 8 जून को गर्मी और उमस का डबल अटैक, कहीं बादल तो कहीं तेज धूप; मानसून की आहट का इंतजार


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून के आगमन का इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है। जून का दूसरा सप्ताह शुरू होने के बावजूद प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी और उमस लोगों को परेशान कर रही है। 8 जून को भी मौसम का मिजाज कुछ ऐसा ही रहने की संभावना है। राजधानी भोपाल समेत कई शहरों में दिनभर तेज धूप और उमस का असर देखने को मिल सकता है, जबकि कुछ क्षेत्रों में बादलों की आवाजाही राहत का अहसास करा सकती है।

    मौसम के ताजा संकेत बताते हैं कि भोपाल में सुबह के समय बादल छाए रहने और कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी या गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। इसके बाद दिन चढ़ने के साथ धूप तेज होगी और तापमान तेजी से बढ़ेगा। दोपहर के समय पारा 39 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच सकता है। हवा में नमी अधिक रहने से गर्मी का एहसास वास्तविक तापमान से ज्यादा हो सकता है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में फिलहाल प्री-मानसून गतिविधियां पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाई हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून देश के कई हिस्सों में आगे बढ़ रहा है, लेकिन मध्य प्रदेश में इसके प्रवेश में कुछ देरी देखने को मिल सकती है। यही कारण है कि लोगों को अभी कुछ और दिनों तक गर्मी और उमस का सामना करना पड़ सकता है।

    राजधानी भोपाल के अलावा इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, रीवा और जबलपुर संभाग के कई जिलों में भी मौसम लगभग इसी तरह बना रह सकता है। दोपहर के समय तेज धूप लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है, जबकि शाम के समय बादलों की हल्की आवाजाही और तेज हवाएं कुछ राहत दे सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार, स्थानीय स्तर पर कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान मौसम किसानों के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है। खरीफ फसलों की तैयारी कर रहे किसान मानसून की प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं। यदि मानसून की रफ्तार सामान्य रहती है तो अगले एक-दो सप्ताह में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर के समय अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और धूप से बचाव के उपाय अपनाने की जरूरत है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    कुल मिलाकर 8 जून का दिन मध्य प्रदेश में गर्मी, उमस और मानसून की प्रतीक्षा के बीच गुजरने वाला है। लोगों को राहत की उम्मीद बादलों और संभावित हल्की बारिश से जरूर रहेगी, लेकिन व्यापक बारिश के लिए अभी कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है।

  • बीड़ी नहीं दी तो युवक पर चाकू से हमला, मंदसौर में मामूली विवाद ने लिया हिंसक रूप

    बीड़ी नहीं दी तो युवक पर चाकू से हमला, मंदसौर में मामूली विवाद ने लिया हिंसक रूप


    मध्य प्रदेश । मंदसौर जिले के दलौदा कस्बे में शनिवार रात एक मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। बीड़ी मांगने और उसे देने से इनकार करने के बाद शुरू हुई कहासुनी चाकूबाजी तक पहुंच गई। घटना में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, कुमारवाड़ा निवासी 23 वर्षीय विजय नाथ शनिवार रात दलौदा कृषि उपज मंडी रोड स्थित एक चाय की दुकान पर चाय पीने गया था। इसी दौरान वहां सिराज नामक युवक भी पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, सिराज ने विजय से बीड़ी मांगी, लेकिन विजय ने उसे बीड़ी देने से मना कर दिया। इसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई।

    शुरुआत में मामूली कहासुनी के रूप में शुरू हुआ विवाद कुछ ही देर में उग्र हो गया। आरोप है कि गुस्से में आकर सिराज ने विजय पर चाकू से हमला कर दिया। हमले के दौरान विजय ने खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन उसके हाथ में गंभीर चोट लग गई। घटना होते ही आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और मौके पर भीड़ एकत्र हो गई।

    स्थानीय लोगों ने तत्काल घायल युवक की मदद की और उसे दलौदा थाने पहुंचाया। इसके बाद पुलिस ने उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी चोटों का इलाज किया। परिजनों के मुताबिक, चाकू का वार काफी गहरा था, जिसके कारण घायल युवक के हाथ में सात से आठ टांके लगाने पड़े। फिलहाल उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है और चिकित्सकीय निगरानी में उपचार जारी है।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस भी सक्रिय हो गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि विवाद की वजह बीड़ी मांगने और उसे देने से इनकार करना था। हालांकि पुलिस पूरे घटनाक्रम की विस्तार से जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विवाद के पीछे कोई अन्य कारण तो नहीं था।

    एडिशनल एसपी टी.एस. बघेल ने बताया कि मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस ने आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद संबंधित धाराओं के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि छोटी-छोटी बातों पर बढ़ती आक्रामकता किस तरह गंभीर अपराधों का रूप ले रही है। सामाजिक स्तर पर भी ऐसे मामलों को लेकर चिंता जताई जा रही है, क्योंकि मामूली विवादों का हिंसा में बदलना कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द दोनों के लिए चुनौती बनता जा रहा है।

    फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों को भी खंगाला जा रहा है। वहीं घायल युवक के परिजन आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

  • नदी में पहुंचे प्लास्टिक कचरे पर चला सफाई अभियान, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

    नदी में पहुंचे प्लास्टिक कचरे पर चला सफाई अभियान, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश


    मध्य प्रदेश । मंदसौर में शिवना नदी के संरक्षण और स्वच्छता को लेकर चल रहा जनअभियान लगातार नई मिसाल कायम कर रहा है। विधायक विपिन जैन के नेतृत्व में संचालित शिवना शुद्धिकरण अभियान रविवार को अपने 128वें दिन में प्रवेश कर गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रमदानियों, समाजसेवियों और पर्यावरण प्रेमियों ने नदी तट पर पहुंचकर सफाई कार्य में हिस्सा लिया और नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के संकल्प को दोहराया।

    हाल ही में हुई बारिश के कारण शहर के विभिन्न नालों से बड़ी मात्रा में प्लास्टिक, पॉलीथिन और अन्य अपशिष्ट पदार्थ बहकर शिवना नदी में पहुंच गए थे। नदी के किनारों और उथले हिस्सों में यह कचरा जमा हो गया था, जिससे नदी की स्वच्छता और प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित होने लगा था। इसी को ध्यान में रखते हुए रविवार को विशेष सफाई अभियान चलाया गया।

    श्रमदानियों ने नदी में उतरकर प्लास्टिक कचरा, गाद और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकाला। कई घंटों तक चले इस अभियान के दौरान लगभग एक ट्रॉली कचरा एकत्र किया गया। इसके बाद एकत्रित अपशिष्ट के उचित निस्तारण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई, ताकि दोबारा यह सामग्री नदी या आसपास के क्षेत्रों को प्रदूषित न कर सके।

    अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि शिवना नदी केवल जलधारा नहीं, बल्कि मंदसौर की सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इसकी स्वच्छता और संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। लगातार हो रहे श्रमदान से न केवल नदी का स्वरूप बदल रहा है, बल्कि लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है।

    अभियान के दौरान मौजूद सोनाली जैन ने बताया कि शिवना शुद्धिकरण अभियान का उद्देश्य केवल नदी की सफाई तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा और स्वच्छता के महत्व के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी किया जा रहा है। उन्होंने शहरवासियों से अपील की कि वे प्रत्येक रविवार को आयोजित होने वाले इस अभियान में शामिल होकर अपने शहर और नदी के प्रति जिम्मेदारी निभाएं।

    रविवार को आयोजित श्रमदान में विभिन्न सामाजिक संगठनों, महिला समूहों और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। अभियान में हेमराज खाबिया, रमेश सोनी, सुरेश सेजपुरिया, रफत पयामी, इष्टा भाचावत, सुनीता बंडी, राखी सत्रावाला, कौशल्या त्रिवेदी, सुनीता माली, राजनारायण लाड़, विकास दशोरा, अंसार मेव, ऋषिराज लाड़ और कनिष्क सोनी सहित कई समाजसेवी उपस्थित रहे।

    लगातार 128 दिनों से बिना रुके चल रहा यह अभियान अब केवल सफाई कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि जनभागीदारी और सामाजिक जिम्मेदारी का एक सफल मॉडल बनता जा रहा है। श्रमदानियों के समर्पण और नागरिकों के सहयोग से शिवना नदी के तटों पर स्वच्छता और सुंदरता लौटती दिखाई दे रही है। स्थानीय लोग भी इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल मान रहे हैं।

    शिवना शुद्धिकरण अभियान यह संदेश दे रहा है कि यदि समाज और प्रशासन मिलकर किसी लक्ष्य के लिए कार्य करें, तो प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण सुधार की दिशा में उल्लेखनीय बदलाव संभव है।

  • जुए के खेल का वीडियो वायरल, महिला पुलिसकर्मी के पति का नाम आने से चर्चा तेज

    जुए के खेल का वीडियो वायरल, महिला पुलिसकर्मी के पति का नाम आने से चर्चा तेज


    मध्य प्रदेश । रीवा शहर में अवैध जुए के कथित संचालन को लेकर एक वीडियो सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल हो रहे इस वीडियो में बड़ी संख्या में लोगों के एक स्थान पर एकत्र होकर दांव लगाते दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के गुढ़ चौराहा इलाके का बताया जा रहा है, जहां एक बस्ती में लंबे समय से अवैध जुए का फड़ संचालित होने की चर्चाएं स्थानीय स्तर पर होती रही हैं।

    जानकारी के अनुसार, वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्र में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि शहर के बीचोंबीच कथित रूप से इतने बड़े स्तर पर जुए का संचालन कैसे हो रहा था। स्थानीय लोगों का दावा है कि यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं और लाखों रुपये तक का दांव लगाया जाता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन वायरल वीडियो ने पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इस तरह की गतिविधियां लंबे समय से संचालित हो रही थीं तो संबंधित एजेंसियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी। लोगों का आरोप है कि अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम दिखाई नहीं देते। यही कारण है कि वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

    मामले को लेकर कुछ व्यक्तियों के नाम भी स्थानीय स्तर पर चर्चा में हैं। बताया जा रहा है कि कथित जुआ फड़ के संचालन में कुछ लोगों की सक्रिय भूमिका होने की बातें कही जा रही हैं। इसके साथ ही एक महिला पुलिसकर्मी के पति का नाम भी चर्चाओं में सामने आया है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी जांच एजेंसी ने इन आरोपों को सत्यापित किया है। इसलिए इन दावों को फिलहाल आरोपों के रूप में ही देखा जा रहा है।

    कानूनी जानकारों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता तभी स्थापित मानी जा सकती है जब जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलें और संबंधित एजेंसियां इसकी पुष्टि करें। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है, ताकि तथ्य और आरोपों के बीच स्पष्ट अंतर सामने आ सके।

    उधर, वीडियो सामने आने के बाद पुलिस हरकत में आई है। सिटी कोतवाली पुलिस का कहना है कि मामले की जानकारी प्राप्त हुई है और वीडियो की जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, वीडियो की सत्यता, स्थान और उसमें दिखाई दे रहे लोगों की पहचान की जाएगी। यदि जांच में जुआ खेले जाने की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ जुआ एक्ट और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस का यह भी कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

    अब शहरवासियों की नजर पुलिस की कार्रवाई पर टिकी है। लोगों का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लग सके और कानून व्यवस्था में आमजन का विश्वास मजबूत हो।

  • चौपाटियों पर घरेलू गैस का इस्तेमाल उजागर, उज्ज्वला योजना के सिलेंडर भी नजर आए

    चौपाटियों पर घरेलू गैस का इस्तेमाल उजागर, उज्ज्वला योजना के सिलेंडर भी नजर आए


    मध्य प्रदेश । रीवा शहर में घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। जहां एक ओर आम उपभोक्ता गैस सिलेंडर की समय पर उपलब्धता और रिफिल में होने वाली देरी को लेकर परेशान दिखाई देते हैं, वहीं दूसरी ओर शहर की चौपाटियों और खानपान की दुकानों पर घरेलू गैस सिलेंडरों का खुलेआम उपयोग होता नजर आ रहा है। हालिया पड़ताल में सामने आए तथ्यों ने गैस वितरण व्यवस्था और निगरानी तंत्र दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    शहर के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित चौपाटियों और फूड स्टॉल्स का निरीक्षण करने पर पाया गया कि बड़ी संख्या में दुकानदार घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, शहर की करीब 90 प्रतिशत चौपाटियों पर घरेलू सिलेंडरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कई स्थानों पर उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले सिलेंडर भी उपयोग में दिखाई दिए, जबकि इनका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को घरेलू ईंधन उपलब्ध कराना है।

    सबसे अधिक चौंकाने वाली स्थिति सिरमौर चौराहे के पीछे स्थित एमपी-17 चौपाटी क्षेत्र में देखने को मिली। यहां संचालित अधिकांश दुकानों में घरेलू गैस सिलेंडर उपयोग में पाए गए। निरीक्षण के दौरान ऐसा कोई प्रतिष्ठान नहीं मिला जहां नियमानुसार कमर्शियल गैस सिलेंडर का उपयोग किया जा रहा हो। इससे यह सवाल उठने लगा है कि नियमों का उल्लंघन इतने बड़े पैमाने पर होने के बावजूद संबंधित विभागों की नजर इस ओर क्यों नहीं गई।

    विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडरों पर सरकार की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं और व्यवस्थाओं का उद्देश्य आम परिवारों की जरूरतों को पूरा करना है। ऐसे सिलेंडरों का व्यावसायिक गतिविधियों में उपयोग न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे गैस आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। यदि बड़ी संख्या में घरेलू सिलेंडर व्यवसायों में खपाए जाएंगे तो वास्तविक उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराने में कठिनाइयां बढ़ सकती हैं।

    शहर के कई उपभोक्ताओं ने समय पर रिफिल नहीं मिलने और बुकिंग के बाद लंबा इंतजार करने की शिकायतें भी की हैं। ऐसे में लोगों का मानना है कि घरेलू सिलेंडरों के दुरुपयोग की जांच की जानी चाहिए। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि समय-समय पर कार्रवाई की घोषणाएं तो होती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम दिखाई नहीं देते। उनका आरोप है कि यदि नियमित और निष्पक्ष निरीक्षण किए जाएं तो घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग का बड़ा नेटवर्क सामने आ सकता है।

    नियमों के अनुसार होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, फास्ट फूड सेंटर, चाय की दुकान और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में केवल कमर्शियल गैस सिलेंडरों का उपयोग किया जाना चाहिए। इसके बावजूद कई स्थानों पर घरेलू सिलेंडरों का उपयोग जारी है, जिससे सुरक्षा और नियामकीय दोनों प्रकार की चिंताएं बढ़ रही हैं।

    मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एसडीएम अनुराग तिवारी ने कहा कि घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग नियमों के विरुद्ध है। यदि ऐसी शिकायतें सामने आई हैं तो संबंधित विभागों से जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां भी घरेलू गैस सिलेंडर का अवैध रूप से व्यावसायिक उपयोग पाया जाएगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    अब निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। शहरवासियों को उम्मीद है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए निर्धारित संसाधनों का दुरुपयोग रोका जा सके और गैस वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

  • मां से विवाद के चलते किया था बच्ची से रेप:आरोपी ताऊ बोला था-बहुत चपड़-चपड़ करती है; 6 साल की पीड़ित ICU में, हालत नाजुक

    मां से विवाद के चलते किया था बच्ची से रेप:आरोपी ताऊ बोला था-बहुत चपड़-चपड़ करती है; 6 साल की पीड़ित ICU में, हालत नाजुक


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के रीवा जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक कलयुगी बड़े पापा (ताऊ) ने अपनी ही 6 साल की मासूम भतीजी को अपनी हवस और दुश्मनी का शिकार बना डाला। इस खौफनाक वारदात के पीछे जो वजह सामने आई है, उसने समाज के क्रूर चेहरे को उजागर कर दिया है। आरोपी ने मासूम के साथ यह दरिंदगी सिर्फ इसलिए की क्योंकि उसका बच्ची की मां से विवाद चल रहा था।

    पीड़ित बच्ची ने खुद अस्पताल में अपनी मां को रोते हुए इस बात की गवाही दी। मां के अनुसार, जब मासूम दर्द से तड़प रही थी और आरोपी से गिड़गिड़ाते हुए कह रही थी- “बड़े अब्बू छोड़ दो”, तब उस हैवान का दिल पसीजने के बजाय उसने बेहद क्रूरता से जवाब दिया- “तेरी मां ज्यादा चपड़-चपड़ करती है।” पुलिस तफ्तीश में सामने आया है कि वारदात से ठीक एक दिन पहले यानी 3 जून को आरोपी ने बच्ची की मां के साथ घरेलू विवाद को लेकर बेरहमी से मारपीट की थी। इसके बाद 4 जून की रात उसने इस घिनौनी साजिश को अंजाम दिया और बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसका गला घोंटकर उसे जान से मारने की कोशिश भी की।

    अस्पताल के बिस्तर पर बेहाल मां; तड़प रही मासूम और डॉक्टरों की 24 घंटे निगरानी
    इस समय 6 साल की वह मासूम रीवा के संजय गांधी अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती है, जहां उसकी हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने बताया कि बच्ची के प्राइवेट पार्ट में बेहद गंभीर चोटें आई हैं और उसे लगातार ब्लीडिंग हो रही है। डॉक्टरों की एक विशेष टीम आईसीयू में चौबीसों घंटे उसकी सेहत और सांसों पर पैनी नजर रखे हुए है।

    अस्पताल के बाहर पीड़ित मां का रो-रोकर बुरा हाल है। अपनी सुध-बुध खो चुकी मां ने सुबकते हुए कहा कि जिस बच्ची के हाथों में आज खिलौने होने चाहिए थे, उसके पूरे शरीर पर इलाज की सुइयां और दवाइयों की पाइपें लगी हुई हैं। मां ने रुंधे गले से कहा- “मेरी मासूम बच्ची ने किसी का क्या बिगाड़ा था? उस दरिंदे ने मेरी बेटी की हंसी और उसका बचपन सब कुछ छीन लिया। जब भी आईसीयू का दरवाजा खुलता है, मेरी धड़कनें थम जाती हैं। मेरी बस एक ही मांग है कि मेरी बेटी को न्याय मिले और दोषी को ऐसी खौफनाक सजा दी जाए जिसे देखकर आगे कोई ऐसा करने की हिम्मत न कर सके।”

    समाज में भारी आक्रोश; 30 मामलों का पुराना अपराधी है फरार आरोपी
    इस जघन्य कृत्य के बाद पूरे इलाके और पड़ोसियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक परिवार का दुख नहीं है, बल्कि पूरे समाज के मुंह पर तमाचा है। मोहल्ले के लोगों ने एकजुट होकर प्रशासन से मांग की है कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ बिना किसी नरमी के फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामला चलाकर ऐसी सजा दी जाए जो समाज के लिए नजीर बने।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस पूरी मुस्तैदी से आरोपी की तलाश में जुटी है। सीएसपी राजीव पाठक ने बताया कि आरोपी का अपने भाई के साथ संपत्ति को लेकर पुराना विवाद चल रहा है। आरोपी कोई आम व्यक्ति नहीं, बल्कि एक आदतन अपराधी है, जिस पर शहर के अलग-अलग थानों में मारपीट, चोरी और लूट जैसे 30 से अधिक गंभीर मामले पहले से दर्ज हैं। घटना के समय बच्ची का पिता भी एक अन्य लूट के मामले में जेल में बंद था, जिसका फायदा उठाकर आरोपी ने इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। पुलिस की कई टीमें जिले और आसपास के इलाकों में लगातार दबिश दे रही हैं और अधिकारियों का दावा है कि फरार आरोपी को जल्द ही सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।

  • “मैं खुद लटक जाऊंगी…” बेटे ने बताए मां के आखिरी शब्द, सामने आई दिल दहला देने वाली घटना

    “मैं खुद लटक जाऊंगी…” बेटे ने बताए मां के आखिरी शब्द, सामने आई दिल दहला देने वाली घटना


    मध्य प्रदेश । जबलपुर के आधारताल क्षेत्र में सामने आए पति-पत्नी की मौत के सनसनीखेज मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। अब इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम गवाह वह 8 वर्षीय मासूम बच्चा बन गया है, जिसने अपनी मां और सौतेले पिता के बीच मौत से पहले हुई पूरी घटना अपनी आंखों से देखी। बच्चे के बयान ने पुलिस जांच को नई दिशा दी है और इस दर्दनाक पारिवारिक त्रासदी की कई परतें खोल दी हैं।

    पुलिस के अनुसार, 3 जून की रात घर में पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ था। विवाद इतना बढ़ गया कि मामला जानलेवा स्थिति तक पहुंच गया। बच्चे ने पुलिस को बताया कि उसके पिता मयंक सिंह ने गुस्से में चाकू उठा लिया था। इसी दौरान उसकी मां नेहा सिंह ने कथित तौर पर कहा कि यदि उसे मारना है तो वह खुद ही फांसी लगाकर जान दे देगी। इसके बाद घर के भीतर जो कुछ हुआ, वह पूरे मामले का सबसे संवेदनशील हिस्सा बन गया है।

    मासूम के बयान के मुताबिक, मयंक ने कमरे में फंदा तैयार किया। जब नेहा फंदे के नीचे रखी टेबल पर खड़ी हुई तो कुछ ही क्षणों में वह फंदे पर लटक गई। पुलिस अब बच्चे के बयान, घटनास्थल के साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई।

    बच्चे ने यह भी बताया कि मां के फंदे पर लटकने के बाद पिता ने कुछ देर बाद उसे नीचे उतारा, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि पूरी रात महिला का शव घर में ही पड़ा रहा। जब बच्चे ने मां के बारे में पूछा तो उसे बताया गया कि वह आराम कर रही है। इसके बाद पिता बेटे को दूसरे कमरे में ले जाकर सो गया।

    अगले दिन मयंक अपने बेटे को स्कूटी से बहन के घर छोड़ आया। इसी बीच पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि नेहा सिंह की पहले पति से शादी हुई थी और उसके निधन के बाद वर्ष 2024 में मयंक से उसकी मुलाकात हुई थी। दोनों ने परिवार की सहमति से विवाह किया था और आधारताल में किराए के मकान में रह रहे थे।

    जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि जनवरी 2025 में विजय नगर स्थित एक स्पा सेंटर पर पुलिस कार्रवाई के दौरान नेहा वहां मिली थी। इसके बाद पति-पत्नी के बीच तनाव बढ़ने लगा था। मयंक कथित तौर पर नहीं चाहता था कि नेहा वहां काम करे, जबकि नेहा रोजगार जारी रखना चाहती थी। बाद में वह इंदौर में काम करने लगी, लेकिन बेटे से मिलने नियमित रूप से जबलपुर आती थी और परिवार की आर्थिक सहायता भी करती थी।

    पुलिस के अनुसार, 5 जून को मयंक बेटे को अपनी बहन के घर छोड़कर निकल गया। इसके बाद वह जीसीएफ क्षेत्र के एक खंडहरनुमा भवन में पहुंचा, जहां उसने कथित रूप से एक सुसाइड नोट लिखा। बाद में शनिवार को उसी स्थान पर उसका शव फंदे से लटका मिला। घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट में उसने पत्नी की हत्या करने की बात स्वीकार करने का दावा किया है और कुछ पारिवारिक सदस्यों पर प्रताड़ना के आरोप भी लगाए हैं।

    रांझी थाना पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। बच्चे के बयान, सुसाइड नोट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक प्रभावित वह मासूम है, जिसने कुछ ही दिनों में अपनी मां और पिता दोनों को खो दिया।

  • घर के बाहर झगड़ा शांत कराने पहुंचीं बीजेपी नेता, पिस्टल से चली गोली बनी मौत की वजह

    घर के बाहर झगड़ा शांत कराने पहुंचीं बीजेपी नेता, पिस्टल से चली गोली बनी मौत की वजह


    मध्य प्रदेश । जबलपुर में भाजपा की सक्रिय महिला नेता और पूर्व पार्षद प्रत्याशी संगीता रजक की गोली लगने से मौत हो गई। घटना शनिवार देर रात न्यू शोभापुर क्षेत्र में हुई, जिसके बाद उन्हें गंभीर हालत में उपचार के लिए हैदराबाद ले जाया गया। वहां ओमेगा अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने क्षेत्र में सनसनी फैला दी है और पुलिस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है।

    प्राथमिक जानकारी के अनुसार घटना शनिवार और रविवार की दरम्यानी रात करीब 1 से 2 बजे के बीच की है। बताया जा रहा है कि संगीता रजक के घर के बाहर कुछ लोग गाली-गलौज और शोर-शराबा कर रहे थे। आवाज सुनकर संगीता रजक अपने पति बंटी रजक के साथ घर से बाहर निकलीं। दोनों ने कथित रूप से वहां मौजूद लोगों को समझाने और शांत रहने के लिए कहा, लेकिन स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

    इसी दौरान संगीता रजक घर के भीतर गईं और अपनी लाइसेंसी पिस्टल लेकर बाहर आ गईं। प्रारंभिक जांच के मुताबिक हड़बड़ाहट और अफरा-तफरी के माहौल में उनके हाथ में मौजूद पिस्टल का ट्रिगर दब गया। गोली सीधे उनके पेट में लगी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ीं।

    घटना के बाद परिजन और आसपास के लोग उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे। बाद में बेहतर उपचार की उम्मीद में उन्हें हैदराबाद के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें बचाने के प्रयासों के बावजूद मृत घोषित कर दिया।

    घटना की सूचना मिलते ही रांझी थाना पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव का पंचनामा तैयार कराया और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की। प्रारंभिक जांच में यह मामला दुर्घटनावश गोली चलने का प्रतीत हो रहा है, लेकिन पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सभी संभावित पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।

    जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि देर रात घर के बाहर विवाद किस कारण से हो रहा था और वहां मौजूद लोग कौन थे। इसके अलावा घटना के समय की परिस्थितियों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को भी जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है।

    पुलिस जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले अज्ञात बदमाशों ने संगीता रजक के घर पर बम फेंकने और वाहन में तोड़फोड़ करने की घटना को अंजाम दिया था। इस संबंध में उनके पति बंटी रजक ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी। ऐसे में पुलिस पुराने घटनाक्रम और हालिया घटना के बीच किसी संभावित संबंध की भी पड़ताल कर रही है।

    संगीता रजक ने पिछले नगरीय निकाय चुनाव में गोकलपुर वार्ड से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर पार्षद का चुनाव लड़ा था। हालांकि वे चुनाव नहीं जीत सकी थीं, लेकिन क्षेत्र में उनकी सक्रिय राजनीतिक पहचान थी। बताया जा रहा है कि वे आगामी स्थानीय निकाय चुनाव की तैयारियों में भी जुटी हुई थीं। उनके पति बंटी रजक भी भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हैं और विभिन्न जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।

    फिलहाल पुलिस परिजनों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक परिस्थितियों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। इस दुखद घटना से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक का माहौल है।

  • 24 हफ्ते का गर्भ होने पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नाबालिग को मां बनने की अनुमति

    24 हफ्ते का गर्भ होने पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नाबालिग को मां बनने की अनुमति


    मध्य प्रदेश । मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले में 16 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता को बच्चे को जन्म देने की अनुमति प्रदान करते हुए राज्य सरकार को नवजात के पालन-पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जिम्मेदारियां उठाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि पीड़िता और उसके परिवार की इच्छा का सम्मान करना आवश्यक है, क्योंकि उन्होंने गर्भपात कराने से स्पष्ट रूप से इनकार किया था।

    मामला खरगोन जिले के बालकवाड़ा थाना क्षेत्र का है, जहां एक नाबालिग किशोरी के साथ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया था। घटना के बाद किशोरी गर्भवती हो गई। जब मामला न्यायालय के समक्ष पहुंचा, तब गर्भावस्था 24 सप्ताह से अधिक हो चुकी थी। चूंकि पीड़िता नाबालिग थी और गर्भावस्था उन्नत अवस्था में थी, इसलिए मंडलेश्वर स्थित पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने उचित दिशा-निर्देश और आदेश के लिए मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को भेज दिया।

    हाईकोर्ट ने मामले को याचिका के रूप में दर्ज कर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान बालकवाड़ा थाना के सब-इंस्पेक्टर मिथुन चौबे की उपस्थिति में पीड़िता और उसके माता-पिता अदालत में पेश हुए। पहचान की पुष्टि के बाद न्यायालय ने पीड़िता और उसके परिजनों की राय जानी। इस दौरान पीड़िता ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह गर्भपात नहीं कराना चाहती और बच्चे को जन्म देना चाहती है। उसके माता-पिता ने भी इस निर्णय का समर्थन किया।

    शनिवार को जस्टिस राजेंद्र कुमार वाणी की वेकेशन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए पीड़िता की इच्छा को महत्व दिया। अदालत ने माना कि ऐसे संवेदनशील मामलों में पीड़िता की राय और उसकी स्वतंत्र इच्छा का सम्मान किया जाना चाहिए। इसी आधार पर न्यायालय ने बच्चे को जन्म देने की अनुमति प्रदान की।

    साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को कई महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए। आदेश के अनुसार गर्भावस्था के दौरान पीड़िता को सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रसव, उपचार, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्त खर्च सरकार वहन करेगी। इसके अलावा नवजात के जन्म के बाद उसकी देखभाल, शिक्षा, भोजन, वस्त्र, चिकित्सा और अन्य आवश्यक जरूरतों की जिम्मेदारी भी राज्य सरकार पर होगी।

    हाईकोर्ट ने संबंधित कलेक्टर को निर्देश दिया है कि नवजात के 16 वर्ष की आयु तक उसके समुचित विकास और आवश्यक सुविधाओं को सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियां बच्चे और उसकी मां के भविष्य में बाधा नहीं बननी चाहिए।

    कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है, जहां दुष्कर्म पीड़िता गर्भपात के बजाय बच्चे को जन्म देने का निर्णय लेती है। न्यायालय ने एक ओर पीड़िता की इच्छा और अधिकारों की रक्षा की है, वहीं दूसरी ओर जन्म लेने वाले बच्चे के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए राज्य की जिम्मेदारी भी तय की है।

    यह निर्णय न्यायिक संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है, जिसमें पीड़िता, उसके परिवार और नवजात के हितों को संतुलित रूप से ध्यान में रखा गया है।

  • 31 हजार रुपए में अघोरी बनाने का ऑफर, तंत्र-मंत्र के नाम पर लोगों को बना रहे शिकार

    31 हजार रुपए में अघोरी बनाने का ऑफर, तंत्र-मंत्र के नाम पर लोगों को बना रहे शिकार


    मध्य प्रदेश । श्मशान, खोपड़ियां, काले वस्त्र और रहस्यमयी अनुष्ठानों के बीच ‘सिद्धि’ और ‘चमत्कार’ का ऐसा मायाजाल बुना जा रहा है, जिसमें लोगों के डर, लालच और अंधविश्वास को निशाना बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में पैसों की बारिश, गड़ा हुआ धन खोज निकालने, दुश्मनों का नाश करने और खोया प्यार वापस दिलाने जैसे दावे किए जा रहे हैं। इन दावों के पीछे कथित तौर पर एक ऐसा नेटवर्क सक्रिय है, जो तंत्र-मंत्र और अघोरी साधना के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूल रहा है।

    पड़ताल में सामने आया कि ‘अघोर गुरुदीक्षा’, ‘श्मशान साधना’ और ‘तंत्र सिद्धि’ जैसे नामों से बाकायदा कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। इन कोर्सों के लिए हजारों से लेकर लाखों रुपए तक की फीस मांगी जाती है। दावा किया जाता है कि कुछ दिनों या महीनों की साधना के बाद व्यक्ति विशेष शक्तियां प्राप्त कर सकता है, जिससे धन प्राप्ति, गड़ा खजाना खोजने या अन्य मनोकामनाएं पूरी करने में सहायता मिलेगी।

    जांच के दौरान सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो मिले, जिनमें कथित तांत्रिक साधना के दौरान नोटों की बारिश या जमीन से धन निकलने जैसे दृश्य दिखा रहे थे। इन्हीं वीडियो के आधार पर संपर्क करने पर एक व्यक्ति ने खुद को अघोरी साधक बताते हुए विभिन्न प्रकार की साधनाएं सिखाने का दावा किया। बातचीत में उसने कहा कि पहले गुरुदीक्षा लेनी होगी, फिर गुरुमंत्र, गणेश साधना और कुलदेव साधना के बाद अन्य सिद्धियां प्राप्त की जा सकती हैं। उसने यह भी दावा किया कि पैसों की बारिश जैसी सिद्धि हासिल करने के लिए लंबे समय तक साधना करनी पड़ती है।

    हालांकि जब इन दावों की गहराई से जांच की गई तो कई बातें संदिग्ध मिलीं। कथित रूप से दिखाए गए कुछ वीडियो ऐसे मामलों से जुड़े पाए गए, जहां संबंधित व्यक्तियों पर पहले से ही धोखाधड़ी और ठगी के आरोप लग चुके थे। इसके बावजूद इन वीडियो का उपयोग नए लोगों को आकर्षित करने और विश्वास दिलाने के लिए किया जा रहा है।

    पड़ताल में यह भी सामने आया कि कथित गुरुदीक्षा और तंत्र साधना के लिए तय शुल्क लिया जाता है। कुछ मामलों में रजिस्ट्रेशन फीस, आधार कार्ड की कॉपी और अग्रिम भुगतान की मांग की गई। यहां तक कि व्यक्तिगत मुलाकात के लिए भी हजारों रुपए मांगे गए। कई संस्थानों और व्यक्तियों द्वारा तंत्र साधना के पैकेज, ऑनलाइन प्रशिक्षण और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से कथित रहस्यमयी ज्ञान देने के ऑफर भी दिए जा रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नेटवर्क लोगों की कमजोरियों का फायदा उठाते हैं। आर्थिक संकट, बीमारी, पारिवारिक समस्याएं या जल्दी सफलता पाने की इच्छा रखने वाले लोगों को चमत्कारिक दावों के जरिए प्रभावित किया जाता है। धीरे-धीरे उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता है कि विशेष अनुष्ठान या साधना उनकी सभी समस्याओं का समाधान कर सकती है।

    ज्योतिषाचार्य पंडित जयदीप दुबे के अनुसार वास्तविक ज्योतिष और तंत्र विद्या का इस प्रकार के चमत्कारिक दावों से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना है कि कुछ लोग धर्म, तंत्र और आध्यात्मिकता की आड़ में लोगों के डर और लालच का फायदा उठाकर आर्थिक शोषण कर रहे हैं। ऐसे दावों का कोई वैज्ञानिक या प्रमाणित आधार नहीं है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले ऐसे वीडियो और दावों से सावधान रहना चाहिए। किसी भी चमत्कारिक दावे पर विश्वास करने से पहले तथ्यों की जांच करना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। जागरूकता ही ऐसे कथित तांत्रिकों और ठगी के जाल से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।