Category: Madhya Pradesh

  • बड़ा खुलासा: CBSE 12th में प्राइवेट स्कूल पीछे, लड़कियों ने हर सेक्टर में दिखाया दम

    बड़ा खुलासा: CBSE 12th में प्राइवेट स्कूल पीछे, लड़कियों ने हर सेक्टर में दिखाया दम


    नई दिल्ली। इस बार के Central Board of Secondary Education (CBSE) 12वीं रिजल्ट 2026 ने देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था की एक स्पष्ट तस्वीर सामने रख दी है। परिणामों में जहां सरकारी मॉडल पर आधारित स्कूलों ने शानदार प्रदर्शन किया, वहीं निजी स्कूलों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।

    सबसे बेहतर प्रदर्शन जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) और केंद्रीय विद्यालय (KV) ने किया। इन संस्थानों ने लगातार उच्च पास प्रतिशत के साथ यह साबित किया कि अनुशासन, नियमित मूल्यांकन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था का सीधा असर छात्रों के परिणामों पर पड़ता है। JNV का पास प्रतिशत 98.16% और KV का 97.90% दर्ज किया गया, जो राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर है।

    दूसरी ओर, आदिवासी क्षेत्रों में संचालित एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (EMRS) ने भी बेहतर प्रदर्शन किया और सीमित संसाधनों के बावजूद 85.47% का पास प्रतिशत हासिल किया। यह संकेत देता है कि सही दिशा और प्रयासों से परिणाम बेहतर किए जा सकते हैं।

    सबसे चिंताजनक स्थिति निजी या इंडिपेंडेंट स्कूलों की रही, जहां सबसे ज्यादा छात्र पंजीकृत होने के बावजूद पास प्रतिशत केवल 76.85% रहा। यह सभी श्रेणियों में सबसे कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रदर्शन के पीछे कई कारण हो सकते हैं बढ़ता शैक्षणिक दबाव, परीक्षा की तैयारी में कमी और छात्रों पर मानसिक तनाव।

    पूरे देश में एक और महत्वपूर्ण ट्रेंड सामने आया हर श्रेणी में छात्राओं ने छात्रों से बेहतर प्रदर्शन किया। भोपाल रीजन में भी लड़कियों का पास प्रतिशत 82.19% रहा, जबकि लड़कों का 76.87% रहा। यह अंतर लगभग 5% का है, जो शिक्षा में बढ़ती महिला भागीदारी और उनकी निरंतरता को दर्शाता है।

    भोपाल रीजन, जो देश के सबसे बड़े रीजन में से एक है, इस बार राष्ट्रीय स्तर पर 19वें स्थान पर रहा। कुल 1291 स्कूलों वाले इस रीजन का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से पीछे रहा, जिससे शिक्षा विशेषज्ञों ने गुणवत्ता सुधार की जरूरत पर जोर दिया है।

    आंकड़ों के अनुसार, कुल छात्रों में से 12.14% विद्यार्थी ऐसे रहे जो सभी विषयों में असफल हो गए। यह एक गंभीर संकेत है, जो पढ़ाई के स्तर, डिजिटल डिस्ट्रैक्शन और पोस्ट-कोविड सीखने की गिरावट की ओर इशारा करता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी स्कूलों की सफलता का मुख्य कारण नियमित मॉनिटरिंग, प्रशिक्षित शिक्षक और संरचित शिक्षा प्रणाली है। वहीं निजी स्कूलों में व्यावसायिक दबाव और असमान शिक्षण गुणवत्ता इसके कमजोर प्रदर्शन की वजह हो सकती है।

    कुल मिलाकर यह रिजल्ट बताता है कि शिक्षा में सिर्फ फीस या संसाधन ही नहीं, बल्कि अनुशासन, गुणवत्ता और लगातार निगरानी ही असली सफलता की कुंजी है।

  • एमपी में गर्मी का कहर तेज, इंदौर-उज्जैन में लू का ऑरेंज अलर्ट, भोपाल-जबलपुर भी होंगे प्रभावित

    एमपी में गर्मी का कहर तेज, इंदौर-उज्जैन में लू का ऑरेंज अलर्ट, भोपाल-जबलपुर भी होंगे प्रभावित

    भोपाल । मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को मालवा-निमाड़ क्षेत्र समेत इंदौर और उज्जैन संभाग के कई शहर तेज गर्मी और लू की चपेट में रहे। छतरपुर के खजुराहो में सबसे अधिक 45.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार दिनों तक प्रदेश के लगभग आधे हिस्से में हीट वेव का असर बना रहेगा।

    गुरुवार को इंदौर, उज्जैन, धार और रतलाम में तेज लू को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में दिन के साथ रात का तापमान भी सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जिससे वॉर्म नाइट की स्थिति बनेगी। गर्म हवाओं का असर झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, देवास, सीहोर, शाजापुर, आगर-मालवा और राजगढ़ में भी देखने को मिलेगा।

    भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी गुरुवार को तेज गर्मी पड़ने के आसार हैं। शाजापुर, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर, निवाड़ी, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, टीकमगढ़ और छतरपुर जैसे जिलों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है।

    बुधवार को प्रदेश के 12 शहरों में तापमान 44 डिग्री से अधिक दर्ज किया गया। खजुराहो सबसे गर्म रहा, जबकि रतलाम में 45.2 डिग्री और धार में 45 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। शाजापुर में 44.7 डिग्री, गुना में 44.6 डिग्री, श्योपुर और सागर में 44.4 डिग्री, खरगोन और रायसेन में 44.2 डिग्री, खंडवा में 44.1 डिग्री तथा दमोह में 44 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ।

    प्रदेश के प्रमुख शहरों में उज्जैन सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 44.7 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं, भोपाल में 43.2 डिग्री, इंदौर में 43.6 डिग्री, ग्वालियर में 42 डिग्री और जबलपुर में 42.7 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले चार दिनों तक प्रदेश में भीषण गर्मी का दौर जारी रहेगा। खासतौर पर इंदौर और उज्जैन संभाग में गर्मी का असर अधिक रहेगा, इसलिए यहां ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में भी लू चलने की चेतावनी दी गई है। 17 मई तक प्रदेश के कई जिलों में हीट वेव का असर बना रह सकता है।

    हालांकि, मई की शुरुआत में प्रदेश में लगातार मौसम बदला हुआ रहा। 30 अप्रैल से शुरू हुआ आंधी-बारिश का सिलसिला 10 मई तक जारी रहा। पश्चिमी विक्षोभ, चक्रवात और ट्रफ सिस्टम के कारण मई के पहले सप्ताह में कई जिलों में बारिश, आंधी और ओलावृष्टि देखने को मिली। 11 मई को मौसम साफ हुआ, लेकिन 12 और 13 मई को फिर बदलाव देखने को मिला। इस तरह मई के 13 दिनों में से 11 दिन प्रदेश में कहीं न कहीं बारिश, आंधी या ओलावृष्टि का असर रहा। गुरुवार के लिए फिलहाल बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

  • नरसिंहपुर मर्डर केस: हाथ-पैर बांधकर युवक की हत्या, शव को गहरी खाई में फेंका

    नरसिंहपुर मर्डर केस: हाथ-पैर बांधकर युवक की हत्या, शव को गहरी खाई में फेंका


    नई दिल्ली। राजस्थान के भीलवाड़ा निवासी वीरू उर्फ पप्पू जाट हत्याकांड में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, नरसिंहपुर के साईंखेड़ा में रहने वाली रीना किरार ने अपने बचपन के प्रेमी अरुण पटेल और उसके साथी हरनाम किरार के साथ मिलकर वीरू की हत्या की साजिश रची। वीरू को सोशल मीडिया के जरिए करीब 900 किलोमीटर दूर मध्यप्रदेश बुलाया गया था।
    जांच में सामने आया कि 29 अप्रैल को वीरू जैसे ही रीना के घर पहुंचा, वहां पहले से मौजूद आरोपियों ने बेसबॉल बैट से हमला कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद घर में फैला खून साफ किया गया, शव के हाथ-पैर बांधकर मुंह पर टेप लगाया गया और बोरी में पैक कर XUV 700 से रायसेन जिले के नागिन मोड़ सिरवारा ब्रिज के पास ले जाकर करीब 40 फीट गहरी खाई में फेंक दिया गया।
    7 मई को रायसेन के बाड़ी थाना क्षेत्र में सड़ी-गली लाश मिलने के बाद पुलिस जांच शुरू हुई। मौके से मिले बैग और बच्चे की कॉपी ने केस सुलझाने में अहम भूमिका निभाई। कॉपी में लिखावट के आधार पर पुलिस साईंखेड़ा पहुंची और फिर उज्जैन से रीना किरार, अरुण पटेल और हरनाम किरार को गिरफ्तार किया गया।
    पुलिस का कहना है कि हत्या की वजह प्रेम संबंधों में जलन और विवाद था। जांच में यह भी सामने आया कि अरुण पटेल रीना के परिवार पर काफी पैसा खर्च करता था और उसने उसे SUV व जेवर भी दिलाए थे। वीरू का रीना से लगातार बढ़ता संपर्क अरुण को पसंद नहीं था, जिसके बाद साजिश रचकर हत्या कर दी गई।
  • प्रेम प्रसंग से शुरू हुआ मर्डर केस अब पहुंचा राजनीति तक, आरोपी की तस्वीरों पर बवाल

    प्रेम प्रसंग से शुरू हुआ मर्डर केस अब पहुंचा राजनीति तक, आरोपी की तस्वीरों पर बवाल


    नरसिंहपुर —मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के चर्चित साईंखेड़ा हत्याकांड में अब राजनीतिक एंगल भी जुड़ गया है। हत्या के आरोपी अरुण पटेल की भाजपा नेताओं के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। तस्वीरों के सामने आने के बाद क्षेत्र में आरोपी की राजनीतिक पहुंच और रसूख को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
    वायरल  तस्वीरों में आरोपी अरुण पटेल, Darshan Singh Choudhary, Narendra Shivaji Patel और पूर्व मुख्यमंत्री Shivraj Singh Chouhan के साथ नजर आ रहा है। कुछ तस्वीरों में वह नेताओं को माला और गुलदस्ता भेंट करता दिखाई दे रहा है, जबकि एक फोटो सांसद के केबिन की बताई जा रही है। इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद विपक्षी दलों और स्थानीय लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। हालांकि, अब तक किसी भी भाजपा नेता की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
     प्रेम प्रसंग बना हत्या की वजह
    पूरा मामला साईंखेड़ा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। यहां राजस्थान निवासी पप्पू उर्फ वीर जाट की हत्या कर शव को बोरी में पैक कर रायसेन जिले की सीमा में नागन मोड़ सिरवारा ब्रिज के नीचे फेंक दिया गया था। बाड़ी पुलिस ने शव बरामद कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान मौके से मिले थैले, नोटबुक और हस्ताक्षरों के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी रीना किरार का पहले अरुण पटेल से प्रेम संबंध था और अरुण ही उसका खर्च उठाता था। इसी बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के जरिए रीना की दोस्ती राजस्थान निवासी वीर जाट से हो गई और दोनों करीब आ गए। पुलिस के अनुसार अरुण पटेल को यह रिश्ता पसंद नहीं था। इसी रंजिश के चलते 29 अप्रैल को रीना किरार, अरुण पटेल और उनके साथियों ने मिलकर वीर जाट की हत्या कर दी।
    चार आरोपी गिरफ्तार, हथियार और वाहन जब्त
    पुलिस ने मामले में रीना किरार, अरुण पटेल, हरनाम सिंह और कन्हैया उर्फ अजय को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से हत्या में इस्तेमाल बेसबॉल डंडा और एक चारपहिया वाहन भी बरामद किया गया है। इसके अलावा साईंखेड़ा स्थित आरोपी के घर को भी सील कर दिया गया है।
    सोशल मीडिया पर गरमाया मामला
    गिरफ्तारी के बाद जैसे ही आरोपी की नेताओं के साथ तस्वीरें सामने आईं, सोशल मीडिया पर मामला तेजी से वायरल हो गया। लोग आरोपी की राजनीतिक पहचान और प्रभाव को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। इस मामले में कांग्रेस नेता और तेंदूखेड़ा के पूर्व विधायक Sanjay Sharma ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है और सरकार को संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए।

  • . वीआईपी कल्चर में बदलाव! सीमित काफिले के साथ निकले मुख्यमंत्री, सादगी की नई मिसाल

    . वीआईपी कल्चर में बदलाव! सीमित काफिले के साथ निकले मुख्यमंत्री, सादगी की नई मिसाल


    नई दिल्ली। भोपाल प्रधानमंत्री Narendra Modi की पेट्रोल-डीजल के संयमित उपयोग की अपील का असर अब मध्यप्रदेश सरकार में साफ दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने अपने वीवीआईपी काफिले में चलने वाले वाहनों की संख्या घटाकर बड़ा संदेश दिया है। अब मुख्यमंत्री के काफिले में पहले की तरह 13 गाड़ियां नहीं, बल्कि सिर्फ 7 वाहन ही नजर आए।
    बुधवार को जब मुख्यमंत्री भोपाल से नरसिंहपुर के लिए रवाना हुए, तब वीआईपी रोड और एयरपोर्ट रोड पर उनका छोटा काफिला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। सरकार ने इसे ईंधन संरक्षण और सादगी की दिशा में अहम कदम बताया है।
    सीएम के इस फैसले के बाद प्रदेश सरकार के अन्य मंत्री और अधिकारी भी सक्रिय हो गए हैं। डिप्टी सीएम Rajendra Shukla ने भी अपने काफिले में न्यूनतम वाहनों के उपयोग का ऐलान किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि राष्ट्रहित में ईंधन बचत हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और विभागीय गतिविधियों में अनावश्यक वाहन उपयोग से बचा जाएगा।
    डिप्टी सीएम ने अधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे कार पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन और साझा वाहन व्यवस्था को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि ईंधन संरक्षण के साथ पर्यावरण सुरक्षा और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना भी जरूरी है, क्योंकि इससे आयातित रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और स्वास्थ्य के लिए बेहतर वातावरण तैयार होगा।
    इधर, खेल एवं सहकारिता मंत्री Vishvas Sarang ने भी अपने सुरक्षा काफिले में बदलाव किया। वे केवल एक कार में स्टाफ के साथ मंत्रालय पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का यह आह्वान केवल ईंधन बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा प्रयास है।
    मंत्री सारंग ने कहा कि हर नागरिक का दायित्व है कि वह पेट्रोल-डीजल की खपत कम करे। उन्होंने कार्यकर्ताओं और आम लोगों से भी अपील की कि अनावश्यक वाहन उपयोग से बचें और ईंधन बचत को जनआंदोलन बनाएं।
    प्रदेश सरकार के इस कदम को प्रशासनिक सादगी और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में भी इसे पीएम मोदी की अपील पर तेज और प्रतीकात्मक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

  • रतलाम सड़क हादसा: ओवरलोड ऑटो पलटने से किशोरी की दबकर मौत, दो दिन पहले ही कटा था चालान

    रतलाम सड़क हादसा: ओवरलोड ऑटो पलटने से किशोरी की दबकर मौत, दो दिन पहले ही कटा था चालान


    नई दिल्ली। रतलाम मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में ओवरलोड वाहन एक बार फिर दर्दनाक हादसे की वजह बन गया। सैलाना क्षेत्र के सकरावदा गांव में बुधवार सुबह मजदूरों से भरा एक ऑटो अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे में 15 वर्षीय किशोरी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 6 लोग घायल हो गए। इनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।
    जानकारी के अनुसार, ऑटो रिक्शा (MP 43 K 2267) फूफीरुंडी गांव से करीब 25 से 30 मजदूरों को बैठाकर सैलाना की ओर जा रहा था। सुबह करीब 7:30 बजे सकरावदा के इमली चौक के पास मोड़ पर तेज रफ्तार और अत्यधिक भार के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। देखते ही देखते ऑटो सड़क पर पलट गया और उसमें सवार लोग उसके नीचे दब गए।
    हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। आसपास के ग्रामीण तुरंत दौड़कर पहुंचे और ऑटो के नीचे दबे लोगों को बाहर निकाला। इस हादसे में फूफीरुंडी निवासी 15 वर्षीय कविता खराड़ी की ऑटो के नीचे दबने से मौके पर ही मौत हो गई।
    घटना की सूचना मिलते ही एंबुलेंस और पुलिस मौके पर पहुंची। घायलों को तत्काल सैलाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। हादसे में घायल कालीबाई मईड़ा और रेखा खराड़ी का अस्पताल में इलाज जारी है, जबकि अन्य को मामूली चोटें आई हैं।
    सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दुर्घटनाग्रस्त ऑटो पर दो दिन पहले ही ओवरलोडिंग के मामले में 15 हजार रुपए का चालान किया गया था। इसके बावजूद चालक ने नियमों की अनदेखी करते हुए फिर क्षमता से अधिक मजदूरों को वाहन में बैठा लिया।
    सैलाना थाना प्रभारी पिंकी आकाश ने बताया कि चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि हादसे के समय वाहन में कितने लोग सवार थे और सुरक्षा नियमों का कितना उल्लंघन किया गया।
    क्षेत्र में ओवरलोड वाहनों के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं। इससे पहले 2 मई को भी करीब 50 मजदूरों से भरी बोलेरो खाई में गिर गई थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन कुछ दिन कार्रवाई करता है, लेकिन बाद में ओवरलोड वाहनों पर नियंत्रण नहीं रह पाता। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और ओवरलोडिंग पर प्रशासनिक सख्ती की जरूरत को उजागर करता है।

  • बीएफआई के नए नियमों पर भड़के कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडलिस्ट मनोज कुमार

    बीएफआई के नए नियमों पर भड़के कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडलिस्ट मनोज कुमार


    नई दिल्ली।  कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीत चुके मुक्केबाज मनोज कुमार ने बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) के नए एथलीट मूल्यांकन नियम की पारदर्शिता पर सवाल उठाया है। इस नए सिस्टम के तहत 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2026 एशियन गेम्स के लिए मुक्केबाजों का चयन होना है।

    बॉक्सर मूल्यांकन के बारे में फेडरेशन के नए नोटिफिकेशन पर प्रतिक्रिया देते हुए मनोज ने मॉनिटरिंग प्रोसेस से पुराने खिलाड़ियों, अर्जुन अवॉर्डी, द्रोणाचार्य अवॉर्डी और ओलंपियन के न होने पर सवाल उठाए।

    मनोज कुमार ने एक्स पर लिखा, “पूरी चयन प्रक्रिया सिर्फ हेड कोच, जज और फेडरेशन तक ही सीमित है। पुराने अर्जुन अवॉर्डी, द्रोणाचार्य अवॉर्डी, ओलंपियन और सीनियर खिलाड़ियों को ऑब्जर्वर या चयन मॉनिटर के तौर पर क्यों शामिल नहीं किया गया?”

    ओलंपिक कांस्य पदक विजेता विजेंदर सिंह और कॉमनवेल्थ गेम्स स्वर्ण पदक विजेता अखिल कुमार जैसे अनुभवी नामों की मौजूदगी से यह प्रक्रिया और बेहतर हो सकती थी।

    उन्होंने कहा कि जब चयन प्रक्रिया में खिलाड़ियों के लिए पारदर्शिता और भरोसे की बात आती है, तो विजेंदर सिंह और अखिल कुमार जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी जरूर पक्की होनी चाहिए थी।

    बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) ने पहले 13 से 15 मई तक एनएस एनआईएस पटियाला में होने वाले एलीट नेशनल कैंपर्स के लिए एक बदले हुए मूल्यांकन नियम की घोषणा की थी।

    नए सिस्टम के तहत, मूल्यांकन ‘5-जज स्कोरिंग सिस्टम’ के आधार पर किया जाएगा। ऐसा बेहतर परिणाम के लिए किया गया है।

    मुक्केबाजी प्रतियोगिता के दौरान अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के हिसाब से हर स्पैरिंग बाउट के खत्म होने के तुरंत बाद स्कोर की घोषणा की जाएगी।

    बीएफआई ने यह भी कहा कि पहले अपनाया गया मार्किंग सिस्टम मौजूदा मूल्यांकन में लागू नहीं होगा।

    बीएफआई ने रविवार को मुक्केबाजों पर स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग टेस्ट किए थे, जिन्हें अब रद्द कर दिया जाएगा। स्पोर्ट्स साइंस टेस्ट, भार प्रबंधन, स्वास्थ्य प्रबंधन और अटेंडेंस में पहले मिले स्कोर वापस ले लिए जाएंगे और उन्हें रद्द माना जाएगा।

    बीएफआई के सचिव प्रमोद कुमार ने कहा, “कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और दूसरी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए मुक्केबाजों का चयन एनएस एनआईएस में चल रहे एलीट नेशनल कैंपर्स का 13 मई से 15 मई तक किया जाएगा। इसमें मूल्यांकन नए नियम के आधार पर होगा।”

  • भोपाल में तनाव: ताजुल मस्जिद के बाहर प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले

    भोपाल में तनाव: ताजुल मस्जिद के बाहर प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले


    नई दिल्ली। भोपाल राजधानी भोपाल के गौतम नगर इलाके में हिंदू युवती के साथ होटल में मिले एक मुस्लिम युवक से मारपीट और धार्मिक टिप्पणी के मामले ने मंगलवार रात बड़ा तनाव पैदा कर दिया। वायरल वीडियो के विरोध में हजारों लोग Taj-ul-Masajid, पीरगेट और इमामीगेट इलाके में जमा हो गए। देर रात तक प्रदर्शन, नारेबाजी और पुलिस के साथ झड़प का माहौल बना रहा।
    स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। वहीं पुराने शहर के संवेदनशील इलाकों में धारा 144 लागू कर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
    जानकारी के अनुसार, 9 मई को गौतम नगर स्थित एक होटल में हिंदू संगठन से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं ने एक मुस्लिम युवक और हिंदू युवती को पकड़ लिया था। आरोप है कि युवक के साथ मारपीट की गई, उसके चेहरे पर स्याही और गोबर पोता गया तथा अर्धनग्न अवस्था में पुलिस के हवाले किया गया। इस दौरान धार्मिक भावनाएं आहत करने वाली कथित टिप्पणियां भी की गईं, जिनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।
    घटना के विरोध में मंगलवार दोपहर मुस्लिम समाज के लोग Taj-ul-Masajid के बाहर जुटे। बाद में शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी, विधायक Arif Masood और विधायक Atif Arif Aqueel ने पुलिस कमिश्नर संजय सिंह से मुलाकात कर आरोपियों की गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की।
    रात करीब साढ़े आठ बजे प्रदर्शन और उग्र हो गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई में देरी का आरोप लगाते हुए आरोपियों पर एनएसए लगाने और बुल्डोजर कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने कई जगह बैरिकेडिंग कर रास्ते बंद किए और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया।
    मोती मस्जिद क्षेत्र में कुछ युवकों द्वारा पुलिस पर पथराव किए जाने की भी सूचना सामने आई। पथराव में थाना तलैया का एक वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद पुलिस ने हालात संभालने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े।
    इधर, पूछताछ के दौरान युवती ने पुलिस को बताया कि वह पिछले करीब पांच वर्षों से युवक आरिफ खान के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही है और उसके साथ किसी प्रकार की जबरदस्ती नहीं हुई। युवती ने कहा कि वह युवक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहती।
    पुलिस के अनुसार, धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने और आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में थाना गोविंदपुरा में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने दो आरोपियों को हिरासत में लिया है जबकि अन्य आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मामले में एक नाबालिग भी शामिल बताया गया है। शाहजहांनाबाद संभाग के एसीपी अनिल वाजपेयी ने कहा कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और संवेदनशील इलाकों में लगातार पुलिस गश्त की जा रही है।
    वहीं हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच ने भी बयान जारी कर कहा कि शहर का माहौल खराब नहीं किया जाना चाहिए और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना जरूरी है।

  • बिजली उत्पादन को झटका: बॉयलर लीकेज के चलते 500 मेगावाट यूनिट ठप, 72 घंटे बाद शुरू होने की उम्मीद

    बिजली उत्पादन को झटका: बॉयलर लीकेज के चलते 500 मेगावाट यूनिट ठप, 72 घंटे बाद शुरू होने की उम्मीद


    नई दिल्ली। उमरिया (बिरसिंहपुर) उमरिया जिले के बिरसिंहपुर स्थित संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र की 500 मेगावाट क्षमता वाली एक यूनिट तकनीकी खराबी के कारण बंद कर दी गई है। बॉयलर ट्यूब में लीकेज सामने आने के बाद सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यूनिट का संचालन रोक दिया गया, जिससे बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है।
    ताप विद्युत केंद्र के मुख्य अभियंता एच.के. त्रिपाठी ने बताया कि नियमित निरीक्षण के दौरान बॉयलर ट्यूब में लीकेज की समस्या पाई गई। तकनीकी टीम ने स्थिति का आकलन करने के बाद तत्काल यूनिट को शटडाउन करने का निर्णय लिया, ताकि किसी बड़े तकनीकी हादसे से बचा जा सके।
    यूनिट बंद होने के बाद मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम लगातार सुधार कार्य में जुटी हुई है। अधिकारियों के अनुसार, तकनीकी खराबी को पूरी तरह दूर कर यूनिट को दोबारा शुरू करने में लगभग 70 से 72 घंटे का समय लग सकता है।
    भीषण गर्मी के मौसम में बिजली की मांग पहले से ही काफी बढ़ी हुई है। ऐसे समय में 500 मेगावाट यूनिट बंद होने से बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि बिजली विभाग वैकल्पिक स्रोतों से सप्लाई संतुलित रखने की कोशिश कर रहा है।
    ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी उत्पादन क्षमता वाली यूनिट बंद होने से ग्रिड प्रबंधन और सप्लाई सिस्टम पर असर पड़ सकता है, खासकर पीक आवर्स में बिजली कटौती की स्थिति भी बन सकती है।
    फिलहाल बिजली उत्पादन को जल्द बहाल करने के लिए तकनीकी टीम लगातार निगरानी और मरम्मत कार्य में लगी हुई है।

  • झुरही जंगल में भीषण आग से हड़कंप, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

    झुरही जंगल में भीषण आग से हड़कंप, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल


    नई दिल्ली। सिंगरौली जिले के झुरही क्षेत्र स्थित सजहर जंगल में बुधवार को भीषण आग लगने से वन क्षेत्र में हड़कंप मच गया। आग इतनी भयावह थी कि घंटों तक जंगल धधकता रहा और कई इमारती व हरे-भरे पेड़ जलकर राख हो गए। घटना का वीडियो सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
    स्थानीय लोगों के अनुसार, जंगल में सुबह से ही आग लगी हुई थी, लेकिन शुरुआती समय में उस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं पाया जा सका। दोपहर बाद तेज हवाओं के चलते आग तेजी से फैल गई और देखते ही देखते बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। दूर-दूर तक उठती आग की लपटें और काले धुएं का गुबार साफ दिखाई दे रहा था।
    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें जंगल के कई पेड़ों को जलते हुए देखा जा सकता है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम किए जाते तो इतना बड़ा नुकसान टाला जा सकता था।
    यह जंगल बरगवां, जियावन और सरई वन क्षेत्रों के बीच स्थित है, जहां बड़ी संख्या में वन संपदा और वन्य जीव मौजूद हैं। आग के कारण पेड़ों के साथ-साथ वन्य जीवों और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
    स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए वन विभाग की लापरवाही पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों में आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन रोकथाम के लिए प्रभावी इंतजाम नजर नहीं आते।
    उधर, उपवन मंडल अधिकारी ने बताया कि आग की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई थी और आग पर नियंत्रण पाने के लिए लगातार प्रयास किए गए। विभाग की ओर से नुकसान का आकलन किया जा रहा है और आग लगने के कारणों की जांच भी शुरू कर दी गई है। अधिकारी ने कहा कि जांच में यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।