Category: Madhya Pradesh
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मध्य प्रदेश की राज्यसभा जंग तेज, कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने; मीनाक्षी नटराजन बोलीं- एकजुट हैं हम
नई दिल्ली। भोपाल में राज्यसभा चुनाव का राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। एक ओर कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन के बाद पार्टी में एकजुटता का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने भी अपने चुनावी समीकरणों को मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है।कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि यह चुनाव विचारधाराओं की लड़ाई है और पार्टी पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरी है। नामांकन के दौरान प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कई विधायक मौजूद रहे। इस दौरान विधायकों ने एकजुटता दिखाते हुए पार्टी नेतृत्व के साथ फोटो सेशन भी करायाहालांकि इसी बीच कांग्रेस को एक झटका भी लगा जब हुजूर सीट से पूर्व प्रत्याशी नरेश ज्ञानचंदानी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। वे मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने से नाराज बताए जा रहे हैं। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस खेमे में हलचल बढ़ा दी है।वहीं बीजेपी खेमे में भी हलचल कम नहीं है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि पार्टी के पास अतिरिक्त वोट हैं और विकास चाहने वाले लोग बीजेपी उम्मीदवारों के साथ खड़े होंगे। उन्होंने दावा किया कि चुनाव परिणाम पार्टी के पक्ष में रहेगा।बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट ने भी अपनी जिम्मेदारी को लेकर भरोसा जताया और कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने जो जिम्मेदारी दी है, उसे वे पूरी निष्ठा से निभाएंगे। इसी बीच उनके परिवार की ओर से धार्मिक माहौल भी देखने को मिला। महेश केवट के भाई और बेटे ने ओरछा में विशेष पूजा-अर्चना कर उनके राजनीतिक भविष्य की सफलता की कामना की।भोपाल में बीजेपी दफ्तर में भी लगातार विधायकों की आवाजाही जारी है। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और कई वरिष्ठ नेता बैठक के लिए पहुंचे। वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सभी विधायकों को भोपाल में ही रहने के निर्देश दिए हैं, जिससे वोटिंग प्रक्रिया में पूरी एकजुटता बनी रहे।राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों दलों ने अपनी रणनीति अंतिम चरण में पहुंचा दी है। कांग्रेस जहां एकजुटता का दावा कर रही है, वहीं बीजेपी अपने संख्याबल और संगठनात्मक ताकत पर भरोसा जता रही है। आने वाले दिनों में यह चुनाव राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है। -

खाकी का खौफ खत्म! मुरैना में चेकिंग टीम पर हमला कर ट्रैक्टर सहित फरार हुए आरोपी, पुलिस ने शुरू की नाकाबंदी
मध्य प्रदेश । मुरैना जिले में चंबल की प्रतिबंधित रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन में लिप्त माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि उन्हें अब कानून और प्रशासन का कोई डर नहीं रह गया है। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के अंतर्गत नेशनल हाईवे-44 पर नहर के समीप अवैध रेत के परिवहन के खिलाफ कार्रवाई करने उतरी परिवहन विभाग (RTO) की संयुक्त चेकिंग टीम पर हमला करने और उन्हें वाहन से कुचलने का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। इस जानलेवा हमले के दौरान मौके पर मौजूद परिवहन अधिकारी और सुरक्षाकर्मी बेहद बाल-बाल बचे।प्राप्त विवरण के अनुसार, परिवहन विभाग की टीम वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले संदिग्ध और ओवरलोड वाहनों की नियमित चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान टीम को अवैध उत्खनन कर लाई जा रही रेत से भरी एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली आती हुई दिखाई दी। आरटीओ के कर्मचारियों ने जब नियमानुसार उस वाहन को रुकने का इशारा किया, तो ट्रैक्टर चालक ने वाहन की रफ्तार धीमी करने के बजाय उसे सीधे चेकिंग कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों की तरफ मोड़ दिया और उन्हें कुचलने का प्रयास किया।
वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों और आरटीओ अमले ने समय रहते मुस्तैदी दिखाई और सड़क किनारे कूदकर अपनी जान बचाई। शासकीय टीम को निशाना बनाने के तुरंत बाद आरोपी चालक बेहद लापरवाही और तेज गति से ट्रैक्टर-ट्रॉली को दौड़ाते हुए मौके से फरार हो गया। इस अप्रत्याशित हमले से हाईवे पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति निर्मित हो गई। घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस तुरंत हरकत में आई और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर क्षेत्र में सघन नाकाबंदी लागू की गई।
परिवहन विभाग के अधिकारियों द्वारा घटना के संबंध में सिविल लाइन थाने में एक औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसके आधार पर पुलिस ने शासकीय कार्य में बाधा डालने, जानलेवा हमला करने और अवैध खनिज परिवहन की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अज्ञात माफियाओं के खिलाफ आपराधिक मामला पंजीकृत कर लिया है। पुलिस प्रशासन द्वारा हाईवे और उसके आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि हमलावर ट्रैक्टर और उसके चालक की सटीक पहचान की जा सके।
मुरैना और चंबल संभाग में कानून प्रवर्तन एजेंसियों और प्रशासनिक टीमों पर खनन माफियाओं द्वारा हमले का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इस क्षेत्र में पुलिस, वन विभाग और राजस्व टीम को निशाना बनाए जाने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। स्थानीय प्रशासन ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है और दावा किया है कि सरकारी अमले पर हमला करने वाले तत्वों को जल्द ही गिरफ्तार कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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मजदूर के बेटे की गुहार पर दौड़े TI, आरक्षक ने किया रक्तदान-उज्जैन पुलिस ने बचाई महिला की जान
मध्य प्रदेश। उज्जैन में पुलिस की संवेदनशीलता और तत्परता ने एक बार फिर इंसानियत की मिसाल पेश की है। चिमनगंज मंडी थाना क्षेत्र में एक गंभीर रूप से बीमार महिला की जान समय रहते रक्त उपलब्ध होने से बच गई। पूरी घटना एक छात्र की भावुक गुहार से शुरू हुई, जिसने पुलिस को तुरंत हरकत में ला दिया।इस्कॉन मंदिर के पीछे रहने वाले कक्षा 7वीं के छात्र सूरज भाटी ने अपनी मां सुनीता भाटी के लिए रक्त की मदद मांगते हुए सीधे चिमनगंज मंडी थाना प्रभारी विवेक कनोड़िया को फोन किया। सूरज ने बताया कि उसकी मां बिरला अस्पताल में भर्ती हैं और पिछले दो दिनों से परिवार रक्त की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है।
परिवार की स्थिति बेहद कमजोर थी, क्योंकि सूरज के पिता का दो साल पहले निधन हो चुका है और उसकी मां घरेलू काम कर तीन बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं। बच्चे की भावुक अपील सुनते ही थाना प्रभारी विवेक कनोड़िया तुरंत अस्पताल पहुंचे।
हालांकि, उन्होंने स्वयं रक्तदान करने का प्रयास किया, लेकिन स्वास्थ्य कारणों और ब्लड ग्रुप मेल न खाने के कारण वे रक्तदान नहीं कर सके। इसके बाद उन्होंने तत्काल अपने थाना स्टाफ के व्हाट्सएप ग्रुप में बी-पॉजिटिव रक्तदाता की आवश्यकता का संदेश साझा किया।
कुछ ही समय में आरक्षक जगदीश गेहलोत ने आगे बढ़कर रक्तदान के लिए सहमति दी और बिना देर किए पुष्पा मिशन अस्पताल पहुंचकर रक्तदान किया। समय पर रक्त मिलने से सुनीता भाटी की हालत में सुधार हुआ और उनकी जान बच गई।
यह घटना न केवल पुलिस की त्वरित कार्रवाई को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि संकट के समय मानवता सबसे बड़ी ताकत होती है। उज्जैन पुलिस की इस पहल की हर ओर सराहना हो रही है।
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सोमवार भस्म आरती में महाकाल का दिव्य श्रृंगार, चंदन-आभूषण से सजा राजा स्वरूप
मध्य प्रदेश। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में सोमवार तड़के भस्म आरती के दौरान आस्था और भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। सुबह 4 बजे जैसे ही मंदिर के पट खुले, पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित सभी देव प्रतिमाओं का विधि-विधान से पूजन शुरू किया।इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से बने पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। जटाधारी भगवान महाकाल को चंदन तिलक, भांग, त्रिपुंड और आभूषण अर्पित कर उन्हें राजा स्वरूप में भव्य रूप से श्रृंगारित किया गया।
भस्म आरती की शुरुआत पारंपरिक प्रथम घंटा बजाकर की गई, जिसके बाद मंत्रोच्चार के बीच हरिओम का जल अर्पित किया गया और कपूर आरती की गई। पूरे वातावरण में “हर हर महादेव” के जयघोष गूंजते रहे।
श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढककर विधिवत भस्म रमाई गई। इसके बाद भगवान महाकाल को रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की मालाएं और सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। मोगरा और गुलाब की खुशबू से पूरा मंदिर परिसर महक उठा।
भक्तों ने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। भस्म आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और पूरी प्रक्रिया आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रही।
महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, जो इस आरती को और भी विशेष बना देता है।
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39 लाख की सप्लाई ठगी का आरोपी जयपुर से गिरफ्तार, भरोसा जीतकर कारोबारी को लगाया चूना
मध्य प्रदेश। शिवपुरी में एक बड़े सप्लाई फ्रॉड मामले का खुलासा करते हुए देहात थाना पुलिस ने करीब एक साल से फरार चल रहे आरोपी राजीव भाटिया को राजस्थान के जयपुर से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर एक कारोबारी से मार्केटिंग सामग्री सप्लाई के नाम पर 39.49 लाख रुपये की ठगी करने का गंभीर आरोप है।पुलिस के अनुसार, शिवपुरी के छोटा लुहारपुरा निवासी राहुल गुप्ता, जो ‘श्री मां इंटरप्राइजेज’ नाम से मार्केटिंग व्यवसाय चलाते हैं, उनकी मुलाकात जयपुर स्थित ‘आरबीएम मार्ट प्राइवेट लिमिटेड’ के संचालक राजीव भाटिया से हुई थी। शुरुआत में आरोपी ने समय पर भुगतान लेकर माल की सप्लाई कर दी, जिससे दोनों के बीच विश्वास बन गया।
यही भरोसा बाद में ठगी का आधार बन गया। अगस्त 2024 से राहुल गुप्ता ने आरोपी की कंपनी के खाते में लगातार आरटीजीएस के जरिए बड़ी रकम भेजनी शुरू कर दी। शुरुआती दौर में सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन धीरे-धीरे आरोपी ने माल भेजना बंद कर दिया और संपर्क से बचने लगा।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी ने कुल 39 लाख 49 हजार रुपये प्राप्त करने के बाद न तो कोई माल सप्लाई किया और न ही रकम वापस लौटाई। जब कारोबारी ने पैसे या सामान की मांग की तो आरोपी लगातार टालमटोल करता रहा।
मामले को लेकर पीड़ित राहुल गुप्ता ने बताया कि जनवरी 2025 में वह अपने भाई के साथ जयपुर पहुंचे थे, जहां उनकी मुलाकात आरोपी से होटल रॉयल ऑर्किड में हुई थी। वहां आरोपी ने पान मसाला ब्रांड लॉन्च करने की बात कही और 20 जनवरी से सप्लाई शुरू करने का आश्वासन दिया, लेकिन यह वादा भी पूरा नहीं हुआ।
बैंक ट्रांजेक्शन, दस्तावेज और अन्य सबूतों की जांच के बाद पुलिस ने पाया कि यह पूरा मामला सुनियोजित धोखाधड़ी का है। इसी आधार पर आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और अमानत में खयानत जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।
देहात थाना प्रभारी विकास यादव ने बताया कि आरोपी लंबे समय से फरार था और उसकी तलाश लगातार की जा रही थी। आखिरकार तकनीकी निगरानी और इनपुट के आधार पर उसे जयपुर से गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी ने इसी तरह अन्य लोगों के साथ भी ठगी की है।
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इंदौर में बीजेपी नेता की बिल्डिंग पर फिर पथराव, दो गुटों में टकराव से तनाव
मध्य प्रदेश। इंदौर के उषा नगर इलाके में रविवार का दिन उस समय तनावपूर्ण बन गया जब बीजेपी नेता वीरेंद्र शेडगे की बिल्डिंग पर दो अलग-अलग बार पथराव की घटनाएं सामने आईं। सुबह जहां कुछ अज्ञात युवकों ने बिल्डिंग पर हमला कर ऑफिस के शीशे तोड़ दिए, वहीं शाम को भी एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें उनके घर पर फिर से पत्थर फेंके जाते दिखाई दिए। लगातार हुई इन घटनाओं से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है।पूरा विवाद एक सामान्य सी बात से शुरू हुआ था, जो बाद में राजनीतिक और सामाजिक तनाव में बदल गया। जानकारी के अनुसार, शनिवार रात डॉग घुमाने को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि बिल्डिंग के बाहर गंदगी को लेकर डॉग मालिक और बीजेपी नेता वीरेंद्र शेडगे के बीच कहासुनी हो गई, जो बाद में मारपीट तक पहुंच गई।
इस विवाद में एक पक्ष ने आरोप लगाया कि उनके साथ मारपीट की गई, जिसके बाद मामला और ज्यादा बिगड़ गया। बताया जा रहा है कि दूसरा पक्ष भी बीजेपी से जुड़ा हुआ है और स्थानीय गुटीय राजनीति से इसका संबंध माना जा रहा है। यही कारण है कि इस पूरे मामले को अब पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है।
मामला विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-4 का बताया जा रहा है, जहां बीजेपी नेता मालिनी गौड़ के पीए वीरेंद्र शेडगे रहते हैं। घटना के बाद क्षेत्र में लगातार तनाव की स्थिति बनी हुई है और सोशल मीडिया पर भी दोनों पक्षों के समर्थक एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं।
इसी बीच पुलिस ने चेतन पाटिल के दोस्त की शिकायत पर वीरेंद्र शेडगे, गिरीश शेडगे, शानू उर्फ सौरभ दिघे, मनीष ईमालिया, प्रशांत सोनी, प्रणय चितोडा, अमित कोकाटे सहित अन्य लोगों पर हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।
हालांकि, विवाद के बाद स्थिति और जटिल हो गई जब एक और वीडियो सामने आया जिसमें फिर से पथराव की घटना दिखाई दी। इसके बाद पार्टी ने वीरेंद्र शेडगे को निष्कासित कर दिया है, जिससे राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है।
सूत्रों के अनुसार, दूसरा पक्ष भी स्थानीय बीजेपी नेताओं से जुड़ा हुआ है, जिसके चलते यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद न रहकर राजनीतिक गुटबाजी का रूप ले चुका है। फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
पुलिस ने कहा है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और सभी वीडियो, बयान और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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MP में कोचिंग सिस्टम पर बड़ा बदलाव, छात्रों और अभिभावकों को मिलेगा राहत का फायदा
मध्य प्रदेश भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार निजी कोचिंग संस्थानों की बढ़ती मनमानी और अनियंत्रित व्यवस्था पर रोक लगाने के लिए ‘कोचिंग संस्थान विनियमन अधिनियम’ लाने की तैयारी कर रही है। इस नए कानून के लागू होने के बाद कोचिंग सेक्टर पूरी तरह एक नियामक ढांचे के दायरे में आ जाएगा।सरकार द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट के अनुसार, हर कोचिंग संस्थान का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। बिना पंजीकरण कोई भी संस्थान संचालित नहीं किया जा सकेगा। साथ ही, पहले से चल रहे सभी कोचिंग सेंटरों को भी तय समय सीमा के भीतर पंजीकरण कराना जरूरी होगा।
नए नियमों के तहत फीस और रिफंड व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। यदि कोई छात्र बीच में कोचिंग छोड़ता है, तो संस्थान को शेष अवधि की फीस ‘प्रो-राटा’ आधार पर 10 दिनों के भीतर वापस करनी होगी। इससे छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा कोचिंग संस्थानों पर भ्रामक विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी है। “100% चयन” या “गारंटीड रैंक” जैसे दावे अब अपराध की श्रेणी में आएंगे। किसी भी सफल छात्र की तस्वीर या नाम का उपयोग उसकी लिखित अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा।
कानून में शिक्षकों की योग्यता को भी स्पष्ट किया गया है। केवल स्नातक (ग्रेजुएट) शिक्षक ही पढ़ा सकेंगे और किसी नैतिक अपराध में दोषी व्यक्ति को नियुक्त नहीं किया जाएगा। साथ ही 16 वर्ष से कम उम्र के छात्रों का नामांकन प्रतिबंधित रहेगा और न्यूनतम योग्यता 10वीं पास निर्धारित की गई है।
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कोचिंग संस्थानों को काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध करानी होगी। साथ ही उन्हें वैकल्पिक करियर विकल्पों की जानकारी भी देनी होगी। कक्षाओं के समय को लेकर भी नियम तय किए गए हैं, जिसके अनुसार एक दिन में अधिकतम 5 घंटे की कोचिंग की सलाह दी गई है।
सरकार ने यह भी अनिवार्य किया है कि सभी संस्थान अपनी वेबसाइट पर फीस, कोर्स विवरण, शिक्षक योग्यता और रिफंड नीति जैसी जानकारी सार्वजनिक करें।
इस कानून की जरूरत को हाल के वर्षों में बढ़ते दबाव और छात्रों की आत्महत्या के मामलों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में मध्यप्रदेश में 900 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या की है, जिससे कोचिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं।
फिलहाल यह ड्राफ्ट अगले विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा, जिसके बाद इसके लागू होने की संभावना है। अगर यह कानून पारित होता है, तो कोचिंग उद्योग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
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मानसून आया नहीं, फिर भी कोटे से 65% ज्यादा बारिश; MP में मौसम का बदला मिजाज
मध्य प्रदेश। मध्यप्रदेश में मानसून ने अभी आधिकारिक तौर पर दस्तक नहीं दी है, लेकिन मौसम ने अपने तेवर पहले ही दिखाने शुरू कर दिए हैं। जून महीने की शुरुआत से ही राज्य के कई हिस्सों में लगातार बारिश और तेज आंधी का दौर जारी है। हालात यह हैं कि अब तक प्रदेश में सामान्य से करीब 65 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है, जिससे मौसम विभाग भी हैरान है।राज्य के कई जिलों में रविवार को भी तेज बारिश देखने को मिली। खंडवा, जबलपुर और सीहोर जैसे जिलों में झमाझम बारिश ने गर्मी से राहत तो दी, लेकिन साथ ही जनजीवन को भी प्रभावित किया। कई जगहों पर तेज हवाओं के कारण यातायात बाधित हुआ और हाईवे पर जाम जैसी स्थिति बन गई।
मौसम विभाग के अनुसार, इस समय प्रदेश में प्री-मानसूनी गतिविधियां सक्रिय हैं। मानसून की आधिकारिक एंट्री अभी नहीं हुई है, लेकिन वातावरण में नमी और बदलते दबाव के कारण लगातार बारिश हो रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि मानसून 15 से 18 जून के बीच मध्यप्रदेश में प्रवेश कर सकता है।
भोपाल, आगर-मालवा, शाजापुर और नीमच जैसे जिलों में इस महीने अब तक 2 से ढाई इंच तक बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो सामान्य औसत से काफी अधिक है। वहीं सतना, सीधी, रायसेन, रतलाम, श्योपुर, हरदा और बुरहानपुर जैसे जिलों में भी एक इंच से अधिक बारिश हो चुकी है।
मौसम विभाग ने सोमवार के लिए ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, सागर, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, बालाघाट, छिंदवाड़ा, बैतूल, खंडवा, खरगोन और बड़वानी सहित कई जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है।
लगातार बदलते मौसम ने किसानों और आम लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है। जहां एक तरफ बारिश से तापमान में गिरावट आई है, वहीं दूसरी ओर खेतों में खड़ी फसलों और शहरों में ट्रैफिक व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति भी बाधित होने की खबरें सामने आई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की प्री-मानसूनी गतिविधियां मानसून के मजबूत संकेत हो सकती हैं, लेकिन इसके साथ ही सावधानी बरतना भी जरूरी है। तेज आंधी और बारिश के दौरान खुले स्थानों से बचने और सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी गई है।
फिलहाल प्रदेश में मौसम का यह बदला हुआ मिजाज अगले कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत तो मिलेगी, लेकिन सावधानी भी जरूरी होगी।
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ट्विशा केस: जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल, सबूत हैंडलिंग और दस्तावेज़ लीक की जांच तेज
मध्य प्रदेश ट्विशा शर्मा डेथ केस में पुलिस जांच की प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल उठे हैं। हाईकोर्ट में पेश दस्तावेजों के अनुसार सबूतों के हैंडलिंग, केस डायरी की पहुंच और मेडिकल रिकॉर्ड को लेकर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। अब सीबीआई पूरे मामले की हर कड़ी को दोबारा जांच रही है।जांच प्रक्रिया में सामने आई खामियां
मामले में सामने आए दस्तावेजों के अनुसार जांच के शुरुआती चरण में कई प्रक्रियागत चूक हुईं। 13 मई 2026 को सब-इंस्पेक्टर द्वारा फंदे की रस्सी जब्त की गई थी, लेकिन रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि उसकी पहचान और सीलिंग किसने की। सबसे बड़ा सवाल यह है कि महत्वपूर्ण सबूत को सीधे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने के बजाय उसे पुलिस वाहन में रखा गया, जिससे उसकी सुरक्षा और प्रमाणिकता पर सवाल उठे हैं।सबूत की हैंडलिंग पर विवाद
दस्तावेजों में दावा किया गया है कि रस्सी और अन्य अहम साक्ष्यों को तुरंत एम्स या फॉरेंसिक लैब भेजने की बजाय देर से प्रोसेस किया गया। इस देरी को जांच की गंभीर चूक माना जा रहा है।इसके अलावा यह भी सामने आया है कि जब्ती से जुड़े दस्तावेजों में फंदे की पहचान करने वाले अधिकारी का स्पष्ट रिकॉर्ड दर्ज नहीं है, जिससे जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
केस डायरी और दस्तावेज लीक का आरोप
हाईकोर्ट में पेश जवाब में यह भी आरोप लगाया गया है कि केस डायरी से जुड़े दस्तावेज समय से पहले संबंधित पक्षों तक पहुंच गए।इससे जांच की गोपनीयता पर गंभीर सवाल उठे हैं। हालांकि पुलिस या जांच एजेंसियों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
सीबीआई की नई जांच दिशा
सीबीआई अब इस मामले में कई स्तरों पर जांच कर रही है:
सबूतों की जब्ती और उनकी सुरक्षा प्रक्रिया
मेडिकल दस्तावेजों की सत्यता
केस डायरी की गोपनीयता
जांच के दौरान की गई प्रशासनिक प्रक्रियाएं
सीबीआई ने उस मनोचिकित्सक से भी पूछताछ की है, जिनका नाम इलाज संबंधी दस्तावेजों में सामने आया था।मेडिकल रिकॉर्ड पर भी सवाल
जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या पीड़िता का वास्तव में इलाज हुआ था या मेडिकल दस्तावेजों का उपयोग कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया गया।डॉक्टर से इलाज, काउंसलिंग और मानसिक स्थिति से जुड़े बिंदुओं पर पूछताछ की गई है, जबकि डॉक्टर ने मरीज की निजी जानकारी साझा करने से इनकार किया है।
अग्रिम जमानत और कोर्ट में दलीलें
दस्तावेजों के आधार पर आरोप है कि कुछ महत्वपूर्ण जानकारी हाईकोर्ट में पहले ही प्रस्तुत की गई, जिसके चलते संबंधित पक्षों को कानूनी लाभ मिला। हाईकोर्ट ने पहले ही इस मामले में अग्रिम जमानत से जुड़ा फैसला सुनाया था, जिसके बाद जांच पर और सवाल उठे।ट्विशा केस अब सिर्फ एक आपराधिक जांच नहीं, बल्कि पुलिस प्रक्रिया, सबूत प्रबंधन और न्यायिक पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मामला बनता जा रहा है। सीबीआई की जांच से यह तय होगा कि चूक लापरवाही थी या किसी बड़े स्तर पर गड़बड़ी।
