Category: Madhya Pradesh

  • CBSE 12th Result 2026: क्या फेल हुआ डिजिटल सिस्टम? जानिए रिजल्ट लेट होने की असली वजह

    CBSE 12th Result 2026: क्या फेल हुआ डिजिटल सिस्टम? जानिए रिजल्ट लेट होने की असली वजह


    नई दिल्ली।  CBSE 12वीं रिजल्ट 2026 (CBSE 12th Result 2026) का इंतजार कर रहे लाखों छात्रों की बेचैनी लगातार बढ़ रही है। बोर्ड की ओर से अभी तक रिजल्ट जारी करने की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है। इसी बीच ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम यानी OSM को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि कॉपियों के मूल्यांकन की डिजिटल प्रक्रिया में तकनीकी और संचालन संबंधी दिक्कतों की वजह से रिजल्ट में देरी हो रही है। हालांकि CBSE ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

    क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम?
    CBSE ने पिछले कुछ वर्षों में मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम लागू किया था। इस सिस्टम में उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल फॉर्म में परीक्षकों को भेजा जाता है। इसके बाद शिक्षक ऑनलाइन ही कॉपियां जांचते हैं। माना जाता है कि इससे रिजल्ट जल्दी तैयार होता है और मानवीय गलतियों की संभावना कम होती है। लेकिन इस बार कई शिक्षकों ने तकनीकी समस्याओं, सर्वर स्लो होने और लॉगिन दिक्कतों की शिकायत की है। इसी कारण रिजल्ट में देरी की चर्चा तेज हो गई है।

    कब जारी हो सकता है रिजल्ट?
    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक CBSE 12वीं का रिजल्ट मई के दूसरे या तीसरे सप्ताह में जारी किया जा सकता है। रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र CBSE की आधिकारिक वेबसाइट, DigiLocker और UMANG ऐप के जरिए अपना स्कोर चेक कर सकेंगे। बोर्ड की ओर से छात्रों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट पर जारी अपडेट पर भरोसा करें और अफवाहों से बचें। रिजल्ट जारी होने के बाद डिजिटल मार्कशीट भी उपलब्ध करा दी जाएगी।

  • करोंद में भीषण आग: KFC के पास बिल्डिंग में लगी आग, सामान और AC जलकर नष्ट

    करोंद में भीषण आग: KFC के पास बिल्डिंग में लगी आग, सामान और AC जलकर नष्ट


    नई दिल्ली। भोपाल (करोंद)  राजधानी भोपाल के करोंद इलाके में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक चार मंजिला व्यावसायिक बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर पर अचानक भीषण आग लग गई। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि कुछ ही मिनटों में धुआं पूरे इलाके में फैल गया और आसपास के लोगों में दहशत का माहौल बन गया।
    यह बिल्डिंग पीपुल्स हॉस्पिटल के सामने स्थित है और इसमें इलेक्ट्रॉनिक शोरूम समेत फूड आउटलेट भी संचालित हो रहे हैं। आग क्रोमा के इलेक्ट्रॉनिक शोरूम के पास रखे जनरेटर में शॉर्ट सर्किट के कारण लगी, जो देखते ही देखते फैल गई। इसी फ्लोर पर KFC आउटलेट भी मौजूद है, हालांकि आग सीधे आउटलेट तक नहीं पहुंची और बड़ा नुकसान टल गया।
    आग की चपेट में आने से कई एयर कंडीशनर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और फर्नीचर जलकर खाक हो गए, जिससे लाखों रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि राहत की बात यह रही कि घटना के समय बिल्डिंग में ज्यादा भीड़ मौजूद नहीं थी, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।
    आग लगते ही आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया। लोग अपने घरों और दुकानों से बाहर निकल आए और मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। काले धुएं और ऊंची लपटों को देखकर इलाके में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही पीपुल्स हॉस्पिटल की फायर ब्रिगेड सबसे पहले मौके पर पहुंची और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। इसके बाद नगर निगम की दमकल भी पहुंच गई और दोनों टीमों ने मिलकर करीब 20 मिनट की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया।
    फायर अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह जनरेटर में हुआ शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। आग तेजी से फैलने के बावजूद समय पर कार्रवाई होने से बड़ा हादसा टल गया।
    घटना की जानकारी मिलते ही निशातपुरा थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। फिलहाल प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है और पूरे मामले की जांच जारी है।
  • शाहपुर में सनसनीखेज खुलासा: दोहरे हत्याकांड के आरोपी दबोचे गए, अवैध शराब विवाद में की थी हत्या

    शाहपुर में सनसनीखेज खुलासा: दोहरे हत्याकांड के आरोपी दबोचे गए, अवैध शराब विवाद में की थी हत्या


    नई दिल्ली।सागर (शाहपुर/सानौधा) मध्यप्रदेश के सागर जिले के शाहपुर क्षेत्र में हुए दोहरे हत्याकांड का पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। इस सनसनीखेज वारदात में शामिल दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि तीन अन्य अभी फरार हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पहले दो युवकों पर बेरहमी से लाठी-रॉड से हमला किया और बाद में पूरे मामले को सड़क हादसे का रूप देने की कोशिश की।
    घटना 8 मई की रात की है, जब नीलेश अहिरवार, अंशुल यादव और उनके तीन अन्य साथियों ने सूरज अहिरवार और नीरज प्रजापति पर हमला कर दिया। आरोपियों को शक था कि दोनों युवक अवैध शराब बेचते हैं। इसी शक के चलते पहले विवाद हुआ और फिर बात हिंसक झगड़े में बदल गई। हमले में नीरज प्रजापति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल सूरज ने दो दिन बाद इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
    वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने इसे छिपाने की कोशिश भी की। उन्होंने नीरज के शव को क्षतिग्रस्त बाइक के साथ सड़क किनारे फेंक दिया ताकि यह घटना किसी सड़क दुर्घटना जैसी लगे। इतना ही नहीं, पुलिस को भ्रमित करने के लिए अपनी बोलेरो गाड़ी को भी जानबूझकर खंती में उतार दिया गया। लेकिन पुलिस की गहन जांच और तकनीकी साक्ष्यों ने पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया।
    पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी नीलेश अहिरवार को उसके घर से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के दौरान वह भागने की कोशिश में गिर पड़ा, जिससे उसके पैर में चोट लग गई। वहीं दूसरा आरोपी अंशुल यादव को अमोदा तिराहे के पास उस समय पकड़ा गया जब वह फरार होने की तैयारी में था और परिजनों से मिलने आया था। दोनों आरोपियों से पूछताछ में वारदात में इस्तेमाल लाठी-रॉड भी बरामद कर ली गई है।
    पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी नीलेश का आपराधिक इतिहास काफी लंबा है। उसके खिलाफ पहले से 8 आपराधिक मामले दर्ज हैं और उसे जिला बदर भी किया जा चुका है। वहीं अंशुल यादव के खिलाफ भी मारपीट का मामला दर्ज है।
    इस जघन्य हत्याकांड के बाद इलाके में तनाव फैल गया था। घटना के विरोध में स्थानीय लोगों ने चक्काजाम किया और शराब दुकान में आगजनी की भी घटना सामने आई थी। फिलहाल पुलिस फरार आरोपियों  भगवत पटेल, छोटू उर्फ हर्ष सिंह और अभिषेक पटेल  की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर दिया जाएगा।

  • गूगल मैप की गलती या किस्मत? शराब से भरा ट्रक सीधे थाने पहुंचा, 1500 पेटी जब्त

    गूगल मैप की गलती या किस्मत? शराब से भरा ट्रक सीधे थाने पहुंचा, 1500 पेटी जब्त


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के सागर जिले में एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है, जहां गूगल मैप के चक्कर और ड्राइवर की थकान के कारण शराब से भरा ट्रक सीधे पुलिस थाने के पास पहुंच गया। मकरोनिया थाना पुलिस ने मौके पर कार्रवाई करते हुए ट्रक को रोक लिया और उसमें भरी करीब 1500 पेटी बॉम्बे व्हिस्की को जब्त कर लिया।
    यह ट्रक (MP 09 DF 0620) खरगोन जिले के बड़वाह से लोड होकर जबलपुर होते हुए रीवा जा रहा था, लेकिन रास्ते में ड्राइवर की आंख लग जाने और गलत नेविगेशन के कारण वाहन सागर की ओर मुड़ गया।
     कैसे भटका ट्रक?
    पूछताछ में ड्राइवर रामचंद्र वर्मा ने बताया कि सफर के दौरान वह थकान के कारण सो गया था। इस दौरान हेल्पर ने वाहन संभाला और गूगल मैप की मदद से रास्ता तय करने की कोशिश की। लेकिन गलत रूटिंग के चलते ट्रक सागर पहुंच गया और बहेरिया मार्ग पर मकरोनिया थाना क्षेत्र में पुलिस चेकिंग के दौरान पकड़ लिया गया।
    शराब की खेप और दस्तावेजों की जांच
    पुलिस के अनुसार ट्रक में भारी मात्रा में शराब की खेप मिली है, जिसे फिलहाल सुरक्षित रखवा दिया गया है। ड्राइवर और हेल्पर ने बताया कि यह खेप वैध है और सभी दस्तावेज मौजूद हैं।
    हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि:
    सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है
    सत्यापन के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी
    शराब की खेप की वैधता की पुष्टि जरूरी है

    पुलिस की कार्रवाई
    मकरोनिया थाना पुलिस ने ट्रक को जब्त कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी के अनुसार, बिना सत्यापन किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। दस्तावेजों की जांच के बाद ही तय किया जाएगा कि मामला सामान्य परिवहन का है या इसमें कोई अनियमितता है।

    चर्चा में आया मामला
    इस घटना ने इलाके में चर्चा का विषय बना दिया है, जहां लोग इसे “गूगल मैप का कन्फ्यूजन” और “ड्राइवर की गलती” से जोड़कर देख रहे हैं।
  • चीता प्रोजेक्ट में बड़ा बदलाव: अब कूनो से होंगे ट्रांसफर, विशाल बाड़े में होगी नई शिफ्टिंग

    चीता प्रोजेक्ट में बड़ा बदलाव: अब कूनो से होंगे ट्रांसफर, विशाल बाड़े में होगी नई शिफ्टिंग


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में चीता प्रोजेक्ट अब एक नए चरण में पहुंच गया है। कूनो नेशनल पार्क में सफल पुनर्वास के बाद अब राज्य के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) में चीतों की बसाहट की तैयारी तेजी से चल रही है। खास बात यह है कि इस बार चीतों को विदेश से नहीं, बल्कि कूनो नेशनल पार्क से ही ट्रांसफर किया जाएगा। वन विभाग ने इसके लिए मुहली रेंज में विशाल और आधुनिक बोमा (बाड़े) तैयार करने का काम शुरू कर दिया है। जुलाई तक निर्माण पूरा होने के बाद अगस्त और सितंबर के बीच चीतों की शिफ्टिंग की संभावना जताई जा रही है।
     भोपाल के वन विहार जितना बड़ा बाड़ा
    नौरादेही में बन रहे कुल पांच बाड़ों का क्षेत्रफल लगभग 439 एकड़ है, जो भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान (करीब 451 एकड़) के लगभग बराबर है। इनमें 14 फीट ऊंचे सॉफ्ट रिलीज बाड़े और 10 फीट ऊंचे क्वॉरंटीन बाड़े शामिल हैं। सुरक्षा के लिए 6 लेयर इलेक्ट्रिक फेंसिंग भी लगाई जा रही है। वन विभाग का कहना है कि इन बाड़ों का उद्देश्य चीतों को सुरक्षित वातावरण में धीरे-धीरे प्राकृतिक माहौल के लिए तैयार करना है।
    कूनो का ‘गौरव’ बन सकता है पहला शिफ्टेड चीता
    सूत्रों के अनुसार, कूनो नेशनल पार्क से चार चीतों दो नर और दो मादा को नौरादेही लाया जा सकता है। इनमें प्रसिद्ध चीता ‘गौरव’ का नाम भी चर्चा में है। कूनो अब देश में चीता प्रोजेक्ट का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां चीतों की संख्या 57 से अधिक हो चुकी है।
    बाघ, तेंदुआ और चीता एक साथ रहेंगे
    नौरादेही टाइगर रिजर्व को खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि यह देश का पहला ऐसा क्षेत्र होगा जहां बाघ, तेंदुआ और चीता एक साथ सह-अस्तित्व में रहेंगे। यहां विशाल खुले घास के मैदान और शिकार की पर्याप्त उपलब्धता इसे चीतों के लिए अनुकूल बनाती है। विशेषज्ञों के अनुसार चिंकारा, चीतल और सांभर की मौजूदगी इस प्रोजेक्ट को और मजबूत बनाती है। तीनों बड़े शिकारी जानवरों के अलग-अलग शिकार पैटर्न होने से टकराव की संभावना भी कम मानी जा रही है।
     ग्रामीणों को किया जाएगा जागरूक
    वन विभाग 20 मई से आसपास के गांवों में “चीता चौपाल” शुरू करेगा। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को चीतों के व्यवहार, सुरक्षा और सह-अस्तित्व के बारे में जागरूक करना है। करीब 100 वनकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण के लिए कूनो भी भेजा जाएगा।
     नौरादेही टाइगर रिजर्व: एक नजर में
    स्थापना: 1975
    टाइगर रिजर्व दर्जा: 20 सितंबर 2023
    कुल क्षेत्रफल: 2339 वर्ग किमी (मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व)
    जिलों में फैला: सागर, दमोह, नरसिंहपुर
    कोर एरिया: 1414 वर्ग किमी

  • उज्जैन में नीट विवाद पर सियासी गरमाहट, युवक कांग्रेस का प्रदर्शन-टावर चौक पर फूंका पुतला

    उज्जैन में नीट विवाद पर सियासी गरमाहट, युवक कांग्रेस का प्रदर्शन-टावर चौक पर फूंका पुतला


    नई दिल्ली। उज्जैन में NEET-UG 2026 परीक्षा को रद्द किए जाने के फैसले के बाद छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों में गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में मंगलवार देर शाम युवक कांग्रेस ने शहर के व्यस्त टावर चौक पर जोरदार प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार के साथ-साथ नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के खिलाफ पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया।
    प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और इसे देश की शिक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता बताया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बार-बार होने वाली गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसे मामलों ने लाखों छात्रों के भविष्य को अंधकार में डाल दिया है।
    युवक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अर्पित यादव ने कहा कि यह सिर्फ एक परीक्षा रद्द होने का मामला नहीं है, बल्कि यह देश के 22 लाख से अधिक छात्रों के सपनों और मेहनत पर सीधा प्रहार है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन छात्रों ने वर्षों तक कठिन परिश्रम किया, उन्हें अब अव्यवस्था और भ्रष्ट प्रणाली की कीमत चुकानी पड़ रही है।
    उन्होंने यह भी कहा कि कई परिवारों ने अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने के लिए भारी कर्ज लिया, जबकि कुछ ने अपने गहने तक बेच दिए, लेकिन परिणामस्वरूप उन्हें अनिश्चितता और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। यादव ने इसे शिक्षा व्यवस्था में संगठित भ्रष्टाचार का परिणाम बताया और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
    प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं ने कहा कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पूरी तरह से सवालों के घेरे में आ चुकी है। उनका आरोप था कि बार-बार पेपर लीक और प्रशासनिक लापरवाही के कारण छात्रों का भरोसा टूट रहा है।
    प्रदर्शन के दौरान युवक कांग्रेस ने NTA अधिकारियों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की। कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो देश की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट में आ सकती है।
    टावर चौक पर हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवक कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। इसमें चंद्रभान सिंह चंदेल, अजीत सिंह ठाकुर, रहीम लाल, ललित मीना, पोप सिंह, यश जैन, हिमांशु शुक्ला और योगेश दायमा सहित कई कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
    पुलिस प्रशासन ने मौके पर स्थिति को नियंत्रित रखा, जबकि प्रदर्शन कुछ समय बाद शांतिपूर्वक समाप्त हुआ। हालांकि, छात्रों और संगठनों का आक्रोश अब भी जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े विरोध प्रदर्शन की संभावना जताई जा रही है।
  • उज्जैन में अनोखी पहल: सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण में अधिकारी ट्रैवलर बस से पहुंचे, खर्च में भारी कटौती

    उज्जैन में अनोखी पहल: सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण में अधिकारी ट्रैवलर बस से पहुंचे, खर्च में भारी कटौती


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Ujjain में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच प्रशासन ने ईंधन बचत की दिशा में एक अनोखी और अनुकरणीय पहल शुरू की है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की ईंधन बचत अपील और मुख्यमंत्री Mohan Yadav के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने यह कदम उठाया है।
    अब सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण के लिए अधिकारी अलग-अलग वाहनों की बजाय एक ही ट्रैवलर बस में यात्रा कर रहे हैं। बुधवार को संभागायुक्त, कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त सहित करीब 15 अधिकारी एक साथ बस में बैठकर 29 किलोमीटर लंबे घाट क्षेत्र के निरीक्षण के लिए पहुंचे।
    पहले स्थिति यह थी कि हर दिन विभिन्न विभागों के अधिकारी 15 अलग-अलग इनोवा वाहनों से निरीक्षण के लिए निकलते थे, जिससे भारी मात्रा में ईंधन खर्च होता था। अनुमान के अनुसार, केवल एक दिन के निरीक्षण में लगभग 6750 रुपये तक का ईंधन खर्च हो जाता था।
    नई व्यवस्था के तहत अब सभी अधिकारी एक साथ यात्रा कर रहे हैं, जिससे खर्च में भारी कमी आई है। ट्रैवलर बस के उपयोग से यह पूरा सफर अब लगभग 250 रुपये के डीजल खर्च में पूरा हो रहा है, हालांकि बस का दैनिक किराया करीब 4100 रुपये है।
    प्रशासन का कहना है कि इस पहल से न केवल सरकारी खर्च में कमी आएगी, बल्कि ट्रैफिक व्यवस्था पर भी दबाव घटेगा। पहले कई वाहनों के काफिले से सड़कों पर जाम जैसी स्थिति बन जाती थी, अब एक ही वाहन से यात्रा होने पर यह समस्या कम हो गई है।
    निरीक्षण के दौरान अधिकारी सुबह 6 बजे से घाटों और प्रस्तावित एप्रोच रोड का जायजा लेते हैं और कई किलोमीटर पैदल भी चलते हैं। इस दौरान निर्माण कार्यों की समीक्षा कर संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
    सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने कहा कि यह निर्णय न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे टीम भावना भी मजबूत होगी। सभी अधिकारी एक साथ यात्रा करेंगे तो समन्वय बेहतर होगा और निर्णय लेने की प्रक्रिया भी आसान होगी।
    कलेक्टर ने इसे एक अनुकरणीय पहल बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था आगे चलकर अन्य जिलों के लिए भी मिसाल बन सकती है।

  • जबलपुर में सुसाइड केस: वीडियो रिकॉर्ड कर युवक ने की आत्महत्या, शादी टूटने से था परेशान

    जबलपुर में सुसाइड केस: वीडियो रिकॉर्ड कर युवक ने की आत्महत्या, शादी टूटने से था परेशान


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Jabalpur में एक दर्दनाक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां राजस्थान के झालावाड़ निवासी 25 वर्षीय युवक लोकेश सिंह ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। अब करीब दो महीने बाद सामने आए एक वीडियो ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया है।

    घटना 3 मार्च की बताई जा रही है, जब लोकेश का शव जबलपुर से करीब 15 किलोमीटर दूर नहर किनारे एक पेड़ पर फंदे से लटका मिला था। पुलिस ने उस समय शव का पोस्टमॉर्टम कर परिजनों को सौंप दिया था और मामला सामान्य आत्महत्या मानकर जांच बंद कर दी गई थी।

    लेकिन हाल ही में मृतक के मोबाइल से मिला एक वीडियो सामने आने के बाद मामला फिर से खुल गया है। वीडियो में लोकेश ने आत्महत्या से ठीक पहले अपनी मौत के लिए ससुराल पक्ष को जिम्मेदार ठहराया है। उसने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर उसकी फोटो डालकर उसकी बदनामी की गई, जिससे वह मानसिक रूप से टूट गया।

    मृतक ने वीडियो में कुछ लोगों के नाम लेते हुए गंभीर आरोप लगाए और भावनात्मक रूप से आहत होकर आत्महत्या करने की बात कही। वीडियो सामने आने के बाद परिवार ने इसे पुलिस को सौंप दिया है।

    परिजनों के अनुसार लोकेश की शादी बचपन में तय हुई थी, लेकिन बाद में रिश्ते में तनाव बढ़ता चला गया। पिता का आरोप है कि ससुराल पक्ष की ओर से लगातार दबाव और विवाद के कारण उनका बेटा मानसिक तनाव में था।

    मामले में एक और पहलू यह भी सामने आया है कि घटना से पहले युवक द्वारा सोशल मीडिया पर एक आपत्तिजनक फोटो पोस्ट किए जाने के बाद विवाद और बढ़ गया था, जिसके बाद रिश्ता टूटने की स्थिति बन गई थी।

    अब पुलिस ने वीडियो के आधार पर नए सिरे से जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो में जिन लोगों के नाम लिए गए हैं, उनसे पूछताछ की जाएगी और सभी तथ्यों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

    फिलहाल यह मामला आत्महत्या के पीछे के कारणों और सोशल मीडिया विवाद के प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

  • मंडला में स्वास्थ्य सिस्टम की पोल खुली, हाईकोर्ट में पहुंचा मामला-प्रसूति वार्ड में फर्श पर लेटती महिलाएं

    मंडला में स्वास्थ्य सिस्टम की पोल खुली, हाईकोर्ट में पहुंचा मामला-प्रसूति वार्ड में फर्श पर लेटती महिलाएं


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Jabalpur स्थित हाईकोर्ट में मंडला जिला अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आदिवासी बहुल जिले में चिकित्सा सुविधाएं बेहद कमजोर हैं और मरीजों को बुनियादी इलाज तक नहीं मिल पा रहा है।
    याचिकाकर्ता के अनुसार मंडला जिले की आबादी करीब 10 लाख है, जिसमें अधिकांश लोग ग्रामीण और आदिवासी समुदाय से आते हैं, लेकिन जिला अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है। 42 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 17 डॉक्टर ही वर्तमान में तैनात हैं।
    याचिका में यह भी बताया गया है कि कई अहम विशेषज्ञ पद वर्षों से खाली पड़े हैं। कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट जैसे विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण गंभीर मरीजों को इलाज के लिए जबलपुर या नागपुर रेफर करना पड़ता है। रेडियोलॉजिस्ट न होने से सोनोग्राफी जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं भी बाधित हैं, जिससे मरीजों को निजी केंद्रों पर महंगे परीक्षण कराने पड़ते हैं।
    सबसे चिंताजनक स्थिति प्रसूति वार्ड की बताई गई है, जहां बिस्तरों की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को फर्श पर लेटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसे याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन बताया गया है।
    मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश Sanjeev Sachdeva और न्यायमूर्ति विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग और मंडला सीएमएचओ को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब देने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई जून में होगी।
    याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि स्थिति सुधारने के लिए कई बार प्रदर्शन और ज्ञापन दिए गए, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
    कोर्ट में दायर याचिका में मांग की गई है कि प्रसूति वार्ड में तत्काल अतिरिक्त बिस्तरों की व्यवस्था की जाए, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति समयबद्ध तरीके से हो और स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। फिलहाल यह मामला न सिर्फ मंडला की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है, बल्कि पूरे राज्य की ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को भी उजागर कर रहा है।

  • ग्वालियर मौसम बदला-बदला: रात में ठंडक, सुबह निकलते ही धूप और उमस ने बढ़ाई परेशानी

    ग्वालियर मौसम बदला-बदला: रात में ठंडक, सुबह निकलते ही धूप और उमस ने बढ़ाई परेशानी

    नई दिल्ली।  मध्य प्रदेश के Gwalior में मौसम ने एक बार फिर अचानक करवट ले ली है। कभी तेज बारिश और आंधी तो कभी चिलचिलाती धूप ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बीते कुछ दिनों से शहर में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है, जिसका सीधा असर आम जनजीवन और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।

    मंगलवार शाम अचानक आई आंधी और बारिश के बाद रात के समय लोगों को हल्की राहत जरूर मिली, जब तापमान में गिरावट दर्ज की गई। न्यूनतम तापमान 26.8 डिग्री से घटकर 25.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। लेकिन यह राहत ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी।
    बुधवार सुबह होते ही तेज धूप ने फिर से शहर को गर्मी की चपेट में ले लिया। हवा में लगभग 60 प्रतिशत नमी के कारण उमस और बढ़ गई, जिससे लोगों को भारी असहजता महसूस हुई। मौसम में इस बदलाव के चलते दिनभर बेचैनी का माहौल बना रहा।
    सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सुबह के कुछ ही घंटों में तापमान में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। सुबह 5:30 बजे जहां तापमान 25.6 डिग्री था, वहीं 8:30 बजे तक यह बढ़कर 31.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह लगभग 5.8 डिग्री का उछाल दर्शाता है, जो मौसम में अस्थिरता का संकेत है।
    दिन के समय बढ़ती गर्मी का असर शहर की रफ्तार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। दोपहर होते ही बाजारों और सड़कों पर सन्नाटा पसरने लगा है। लोग तेज धूप से बचने के लिए छाते, गमछे और पानी की बोतलों का सहारा ले रहे हैं। चिकित्सकों ने भी सलाह दी है कि दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच अनावश्यक बाहर निकलने से बचें।
    मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दो दिनों तक मौसम शुष्क बना रह सकता है और तापमान में और वृद्धि होने की संभावना है। साथ ही लू जैसे हालात बनने की आशंका भी जताई गई है, जिससे लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
    फिलहाल मौसम का यह बदलता मिजाज लोगों के लिए राहत और परेशानी दोनों लेकर आ रहा है, जहां रात की ठंडक के बाद दिन की गर्मी चुनौती बनती जा रही है।