Category: Madhya Pradesh

  • सागर और सिवनी एयरक्रैश की जांच रिपोर्ट आई सामने, 48 घंटे में हुए दोनों हादसों की वजहों से उठा पर्दा

    सागर और सिवनी एयरक्रैश की जांच रिपोर्ट आई सामने, 48 घंटे में हुए दोनों हादसों की वजहों से उठा पर्दा


    भोपाल। पिछले वर्ष दिसंबर में मध्य प्रदेश में महज 48 घंटे के भीतर हुए दो ट्रेनी विमान हादसों की शुरुआती जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार दोनों दुर्घटनाएं अलग-अलग तकनीकी कारणों से हुईं। एक हादसा सिवनी में इंजन की शक्ति कम होने के कारण हुआ, जबकि दूसरा सागर के ढाना एयरस्ट्रिप पर गो-अराउंड प्रक्रिया के दौरान विमान के अनियंत्रित होने से हुआ। राहत की बात यह रही कि दोनों घटनाओं में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई और प्रशिक्षु पायलट तथा प्रशिक्षक सुरक्षित बच गए।

    रिपोर्ट के मुताबिक पहला हादसा 8 दिसंबर को सिवनी जिले के सुकतारा एयरफील्ड के पास हुआ था। रेडबर्ड एविएशन अकादमी का टेकनम पी-मेंटर प्रशिक्षण विमान लैंडिंग की तैयारी कर रहा था, तभी अचानक इंजन के आरपीएम में गिरावट दर्ज की गई। प्रशिक्षक के निर्देश पर थ्रॉटल बढ़ाने के बावजूद इंजन से अपेक्षित शक्ति नहीं मिली। स्थिति को देखते हुए प्रशिक्षक ने विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर खेत में आपातकालीन लैंडिंग कराने का प्रयास किया, लेकिन इस दौरान विमान बिजली के तारों से टकरा गया और दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

    इसके ठीक दो दिन बाद 10 दिसंबर को सागर के ढाना एयरस्ट्रिप पर चाइम्स एविएशन अकादमी का सेसना-172एस प्रशिक्षण विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार विमान लैंडिंग के दूसरे प्रयास में निर्धारित टचडाउन क्षेत्र से आगे तक हवा में तैरता रहा। जब रनवे समाप्त होने की स्थिति बनी तो एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने पायलट को गो-अराउंड करने का निर्देश दिया। जैसे ही ट्रेनी पायलट ने थ्रॉटल बढ़ाया, विमान अचानक तेजी से ऊपर उठा और बाईं ओर झुकते हुए नियंत्रण खो बैठा। इसके बाद वह रनवे से बाहर कच्चे क्षेत्र में गिर गया।

    AAIB की शुरुआती जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि दोनों विमानों के रखरखाव में कोई गंभीर कमी नहीं मिली। उड़ान से पहले दोनों विमानों की नियमित तकनीकी जांच पूरी की गई थी और किसी प्रकार की खराबी दर्ज नहीं थी। दोनों प्रशिक्षु पायलटों और प्रशिक्षकों का ब्रेथ एनालाइजर परीक्षण भी सामान्य पाया गया, जिससे किसी प्रकार के नशे या स्वास्थ्य संबंधी समस्या की आशंका से इनकार किया गया है।

    हालांकि जांच एजेंसी ने अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए विस्तृत तकनीकी विश्लेषण जारी रखा है। दोनों विमानों के डिजिटल डिस्प्ले से प्राप्त मेमोरी कार्ड, इंजन कंट्रोल यूनिट, सीसीटीवी फुटेज और ईंधन के नमूनों को विशेषज्ञ प्रयोगशालाओं में भेजा गया है। इनकी रिपोर्ट आने के बाद दुर्घटनाओं के अंतिम कारणों की पुष्टि की जाएगी।

    चूंकि दोनों विमान विदेशी निर्माताओं के थे, इसलिए अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के तहत अमेरिका की नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) और जर्मनी की बुंडेसस्टेले फ्यूर फ्लुगउनफालउनटर्सुखुंग (BFU) को भी जांच की जानकारी भेजी गई है। जरूरत पड़ने पर इन एजेंसियों से तकनीकी सहयोग भी लिया जाएगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षण उड़ानों में छोटी तकनीकी गड़बड़ी या प्रक्रिया संबंधी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में इन दोनों मामलों की अंतिम जांच रिपोर्ट देश की फ्लाइंग ट्रेनिंग अकादमियों के लिए महत्वपूर्ण सबक साबित हो सकती है। इससे भविष्य में सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने तथा प्रशिक्षण प्रक्रियाओं में आवश्यक सुधार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर MP में सियासी हलचल, भोपाल में विहिप और बजरंग दल का प्रदर्शन आज

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर MP में सियासी हलचल, भोपाल में विहिप और बजरंग दल का प्रदर्शन आज


    मध्य प्रदेश। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर संसद के मानसून सत्र के दौरान हुए राजनीतिक विवाद की गूंज अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल तक पहुंच गई है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने शनिवार को इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। संगठन का आरोप है कि संसद परिसर में विपक्षी सांसदों द्वारा साधु वेश धारण कर किया गया सांकेतिक प्रदर्शन भगवान श्रीराम, संत समाज और करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक आस्था का अपमान है। इसी के विरोध में भोपाल में बड़ा मार्च निकाला जाएगा।

    विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के अनुसार प्रदर्शन दोपहर में व्यापम चौराहे से शुरू होगा और कांग्रेस कार्यालय तक जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में संगठन के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, साधु-संत और सनातन धर्म से जुड़े लोग शामिल होंगे। प्रदर्शन के बाद संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा जा सकता है। आयोजकों का कहना है कि इस प्रदर्शन का उद्देश्य धार्मिक भावनाओं के सम्मान और आस्था से जुड़े मुद्दों पर विरोध दर्ज कराना है।

    पूरा विवाद संसद के मानसून सत्र के दौरान उस समय शुरू हुआ जब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भगवा वस्त्र और साधु वेश में संसद परिसर पहुंचे। उनके साथ विपक्ष के कुछ अन्य सांसद भी मौजूद थे। विपक्षी नेताओं ने राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर सांकेतिक प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे के उपयोग को लेकर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    हालांकि इस प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने इसे धार्मिक परंपराओं और संत समाज का अपमान बताया। संगठनों का कहना है कि संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर साधु वेश धारण कर इस तरह का प्रदर्शन करना करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने वाला कदम है। उनका आरोप है कि इस प्रकार के प्रदर्शन से धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक उपयोग किया गया है।

    दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि उनका विरोध किसी धार्मिक आस्था के खिलाफ नहीं था, बल्कि राम मंदिर के चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर था। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि सार्वजनिक दान से जुड़े मामलों में पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और इसी मुद्दे को उठाने के लिए सांकेतिक प्रदर्शन किया गया।

    भोपाल में होने वाले विरोध प्रदर्शन को लेकर प्रशासन भी सतर्क है। मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन के लिए आवश्यक इंतजाम किए जाने की संभावना है। बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद को देखते हुए पुलिस और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

    विश्व हिंदू परिषद ने सभी सनातन धर्मावलंबियों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। संगठन का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय है। ऐसे में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया जाएगा। भोपाल में होने वाला यह प्रदर्शन अब प्रदेश की राजनीति और सामाजिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है।

  • मध्य प्रदेश में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम घटे, अब भोपाल में ₹2743 और इंदौर में ₹2846 में मिलेगा सिलेंडर

    मध्य प्रदेश में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम घटे, अब भोपाल में ₹2743 और इंदौर में ₹2846 में मिलेगा सिलेंडर


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार से जुड़े लोगों के लिए राहत भरी खबर आई है। एक अगस्त से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के नए दाम लागू हो गए हैं। प्रदेश में कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 190 से 194 रुपए तक की कमी की गई है। कीमतों में आई इस गिरावट से व्यापारियों की संचालन लागत कम होने की उम्मीद है और आने वाले समय में ग्राहकों को भी खाने-पीने की सेवाओं में राहत मिल सकती है।

    नई दरों के अनुसार राजधानी भोपाल में अब 19 किलोग्राम वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 2743 रुपए में उपलब्ध होगा। वहीं इंदौर में इसकी कीमत घटकर 2846 रुपए रह गई है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में भी नई दरें लागू कर दी गई हैं। सबसे महंगा कमर्शियल सिलेंडर रीवा में 2991.50 रुपए का मिलेगा। इसके अलावा सिंगरौली और नरसिंहपुर में इसकी कीमत 2989.50 रुपए तथा सतना में 2989 रुपए निर्धारित की गई है। दूसरी ओर शाजापुर प्रदेश का सबसे सस्ता शहर बन गया है, जहां यह सिलेंडर 2749.50 रुपए में मिलेगा।

    होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम लगातार बढ़ने से उनकी लागत काफी बढ़ गई थी। गैस महंगी होने के कारण कई प्रतिष्ठानों को अपने मेन्यू की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करनी पड़ी थी। अब गैस सस्ती होने से कारोबारियों को राहत मिलेगी और यदि कीमतें स्थिर रहीं तो आने वाले समय में ग्राहकों को भी इसका फायदा मिल सकता है।

    कैटरिंग व्यवसाय पर भी गैस की बढ़ती कीमतों का सीधा असर पड़ा था। कारोबारियों के अनुसार लगभग 500 लोगों के भोजन वाले एक आयोजन की लागत में 45 से 50 हजार रुपए तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो गई थी। इसके चलते कई कैटरर्स ने प्रति प्लेट चार्ज बढ़ा दिए थे। अब कमर्शियल एलपीजी सस्ती होने के बाद आयोजन की लागत में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

    व्यापारियों का कहना है कि कुछ महीने पहले ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ा था। इसका असर घरेलू बाजार में भी दिखाई दिया और कई शहरों में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 3300 रुपए से अधिक तक पहुंच गई थी। जबकि इससे पहले यही सिलेंडर लगभग 1800 से 2000 रुपए के बीच उपलब्ध था। अब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में कुछ राहत मिलने के बाद कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।

    इस बीच घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए गैस कंपनियों ने महत्वपूर्ण सूचना भी जारी की है। कंपनियां उपभोक्ताओं को एसएमएस भेजकर आधार आधारित बायोमेट्रिक ई-केवाईसी कराने की अपील कर रही हैं। निर्धारित समय सीमा तक ई-केवाईसी पूरी नहीं कराने वाले उपभोक्ताओं को घरेलू दर पर एलपीजी सिलेंडर मिलने में दिक्कत आ सकती है। इसलिए गैस एजेंसियां उपभोक्ताओं से समय रहते यह प्रक्रिया पूरी करने की अपील कर रही हैं।

    कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में आई यह कमी फिलहाल होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग उद्योग के लिए राहत का संकेत मानी जा रही है। यदि आने वाले महीनों में कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका लाभ कारोबारियों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं तक भी पहुंच सकता है।

  • MP में जुलाई का बारिश कोटा पूरा, फिर भी 13% कम, अगले चार दिन भारी बारिश की संभावना नहीं

    MP में जुलाई का बारिश कोटा पूरा, फिर भी 13% कम, अगले चार दिन भारी बारिश की संभावना नहीं


    भोपाल। मध्य प्रदेश में जुलाई माह के दौरान बारिश ने अपना सामान्य लक्ष्य पूरा कर लिया, लेकिन जून में कमजोर मानसून का असर अब भी आंकड़ों में दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि प्रदेश में अब तक सामान्य से 13 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। 55 में से 42 जिलों में औसत से कम बारिश हुई है।

    भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, प्रदेश में सक्रिय मानसूनी सिस्टम कमजोर पड़ रहे हैं। इसके चलते अगले चार दिनों तक कहीं भी भारी बारिश की संभावना नहीं है। हालांकि अगस्त में मानसून फिर सक्रिय होने पर वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।

    पिछले 48 घंटों के दौरान मालवा-निमाड़ क्षेत्र, विशेषकर इंदौर और उज्जैन संभाग में तेज से अति भारी बारिश हुई। खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर, खंडवा, धार और रतलाम सहित कई जिलों में मूसलाधार बारिश दर्ज की गई।

    खंडवा में तेज बारिश और हवाओं से कपास व मक्का की फसलें खेतों में गिर गईं। वहीं बड़वानी जिले के सेंधवा क्षेत्र में नाले का पानी 10 से 15 घरों में घुस गया, जिससे करीब दो फीट तक जलभराव हो गया। कई स्थानों पर मक्का की फसल भी प्रभावित हुई।

    खरगोन जिले में आबना और सुक्ता नदी के उफान के कारण एक टापू पर फंसे चार लोगों को SDRF ने करीब साढ़े दस घंटे के अभियान के बाद सुरक्षित बाहर निकाला। लगातार बारिश से कई जिलों में नदी-नाले उफान पर रहे, जिसके चलते प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सबसे अधिक 7.6 इंच बारिश खरगोन के गोगावां में दर्ज की गई। इसके अलावा बुरहानपुर शहर में 7 इंच और बैतूल के भीमपुर में 6.6 इंच वर्षा रिकॉर्ड हुई। प्रदेश के 33 शहरों और कस्बों में भारी से अति भारी बारिश दर्ज की गई।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पिछले दो दिनों से सक्रिय तीन मजबूत मौसम प्रणालियां अब कमजोर पड़ रही हैं। इसी वजह से भारी बारिश का दौर थमने की संभावना है। हालांकि, यदि कोई नया मौसम सिस्टम सक्रिय होता है तो कुछ क्षेत्रों में फिर से तेज बारिश हो सकती है।

    प्रदेश में अब तक औसतन 15.4 इंच (390.3 मिमी) वर्षा हुई है, जबकि इस अवधि तक 17.6 इंच (448.4 मिमी) बारिश सामान्य मानी जाती है। यानी प्रदेश में फिलहाल 13 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 15 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 11 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

    प्रदेश के 42 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है, जबकि मऊगंज, उमरिया, शहडोल, टीकमगढ़, खंडवा, बड़वानी, खरगोन, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, राजगढ़ और सीहोर सहित 13 जिलों में औसत से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

  • मप्रः मुख्यमंत्री ने जनजातीय परिवार के घर किया भोजन, बहनों से बंधवाई राखी

    मप्रः मुख्यमंत्री ने जनजातीय परिवार के घर किया भोजन, बहनों से बंधवाई राखी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को झाबुआ जिले के थांदला में जनजातीय समुदाय के बसंत सिंह बामनिया के घर पहुंचकर उनके परिवार के साथ समय बिताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परिवार के सदस्यों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने जनजातीय बहनों से सावन मास में रक्षाबंधन से पूर्व राखी बंधवाई तथा बच्चों को स्नेह-दुलार देकर उन्हें अपनेपन का एहसास कराया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव थांदला में आयोजित प्रदेश स्तरीय स्व-सहायता समूहों के क्षमतावर्धन एवं ऋण वितरण कार्यक्रम में होंगे शामिल होने के लिए पहुंचे थे। उनके साथ प्रभारी मंत्री विजय शाह और निर्मला भूरिया तथा सांसद अनिता नागर सिंह चौहान भी उपस्थित रहीं। सभी अतिथियों ने परिवार के बीच बैठकर उनके साथ भोजन ग्रहण किया।

    गोदड़ी पर बैठकर पत्तल में किया भोजन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सामान्य जन की तरह गोदड़ी पर बैठकर पत्तल में भोजन किया। मिट्टी और गारे से बने सादे घर के आंगन में परिवार के बीच बैठकर उन्होंने आत्मीय वातावरण में भोजन ग्रहण किया। परिवार की महिलाओं ने अपने हाथों से पारंपरिक जनजातीय व्यंजन बड़े प्रेम और आत्मीयता के साथ परोसे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष रूप से उड़द की दाल-पानिया का स्वाद लिया तथा भोजन की सराहना करते हुए परिवार द्वारा दिये गये प्रेम और सम्मान का आभार जताया।

    बहनों ने बांधी राखी, मुख्यमंत्री ने दिया स्नेह और सम्मान

    मुख्यमंत्री डॉ.यादव की कलाई पर जनजातीय समुदाय की बहनों ने राखी बांधकर उनके मंगलमय जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बहनों को शुभकामनाएं दीं।


    लाड़ली बहनों और लाड़ली लक्ष्मी बेटियों से मिले

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परिवार की लाड़ली बहनों और लाड़ली लक्ष्मी बेटियों से हालचाल जाना तथा उनसे अपनत्व भरी बातचीत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा हर परिवार की खुशहाली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परिवार के बच्चों से भी बड़े स्नेहपूर्वक मुलाकात की। बच्चों के साथ सहज बातचीत करते हुए उन्होंने उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने नन्हे शिवांश को स्नेहपूर्वक दुलारा।

    जनजातीय परिवार से किया आत्मीय संवाद

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोजन के बाद परिवार के सदस्यों से चर्चा की। उन्होंने जनजातीय समाज की परंपराओं, आजीविका, शिक्षा, बच्चों के भविष्य तथा शासन की योजनाओं से मिलने वाले लाभों के संबंध में जानकारी ली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपराएं और जीवन-मूल्य मध्यप्रदेश की अमूल्य धरोहर हैं। राज्य सरकार उनके सर्वांगीण विकास और सम्मान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री आवास योजना से मिला पक्का घर, फिर भी परंपरा और बुजुर्गों की स्मृतियों से जुड़ा है परिवार
    बसंत सिंह बामनिया ने बताया कि उन्हें पीएम आवास योजना के अंतर्गत सभी मूलभूत सुविधाओं से युक्त पक्का आवास प्राप्त हो चुका है। परिवार आज भी अपने पुराने गारे-मिट्टी के घर में रहना पसंद करता है। उनका कहना है कि यह घर केवल एक मकान नहीं, बल्कि परिवार की कई पीढ़ियों की यादों, परंपराओं और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है। बुजुर्गों की स्मृतियों को संजोए इस घर से उनका विशेष लगाव है। साथ ही, उनका मानना है कि मिट्टी के घर का प्राकृतिक और शुद्ध वातावरण आज भी उन्हें आत्मीय सुकून और अपनापन प्रदान करता है। इसलिए परिवार के साथ यहां भी रहते है। श्री बसंत मप्र शासन की संबल योजना के भी हितग्राही है।

  • बहनों की शक्ति और आशीर्वाद से आगे बढ़ रहा मध्य प्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    बहनों की शक्ति और आशीर्वाद से आगे बढ़ रहा मध्य प्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में महिला सशक्तिकरण का कार्य सरकार और सामाजिक दोनों स्तर पर हो रहा है। बहनों की शक्ति और आशीर्वाद से प्रदेश आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को झाबुआ जिले के थांदला में आयोजित स्व-सहायता समूहों के क्षमतावर्धन एवं ऋण वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बहनें स्व-सहायता समूहों को नई ताकत दे रही हैं। कृषि, पशुपालन, बैंक, उद्यम सखियां भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। बहनों की सार्थक भूमिका से प्रत्येक परिवार में समृद्धि आ रही है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में नगरीय निकायों और पंचायतों में 50 प्रतिशत स्थान बहनों के लिए आरक्षित है। सरकारी सेवाओं में बहनों के लिए 35 प्रतिशत स्थान आरक्षित रखे गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लोकसभा और राज्यसभा में बहनों के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृ्त्व में मध्य प्रदेश तेज गति से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी जब लगातार तीन बार पड़ौसी राज्य गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब झाबुआ के आसपास जनजातीय अंचल में विकास के अद्भुत कार्य हुए। पूरी दुनिया गुजरात की शक्ति से परिचित हुई।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी गरीब, किसान, युवा और नारी कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं। उनके मन में बहनों के लिए विशेष सम्मान है। उनके माध्यम से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी बहनें के सशक्तिकरण के लिए 300 करोड़ रुपये के ऋण दिए गए हैं। स्व-सहायता समूहों से बहनों की समृद्धि का मार्ग खुल रहा है। यह आत्मनिर्भरता और समाजिक सशक्तिकरण का एक बड़ा आंदोलन बन रहा है। सहयोग और सहभागिता से समृद्ध होकर बहनें नए रिकॉर्ड बना रही हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अब हमारी बहनें 10 हजार रुपये प्रति महीना तक आय अर्जित कर रही हैं। प्रदेश की लाड़ली बहनें, उद्यमी बहनें, कृषि सखी सभी आगे बढ़ रही हैं। प्रदेश में स्व-सहायता समूहों के द्वारा 196 दीदी कैफे संचालित किए जा रहे हैं। झाबुआ में भी बहनें चार कैफे चला रही हैं। प्रदेश में 85 आजीविका पुस्तकालयों का संचालन स्व-सहायता समूहों की बहनों के हाथों में है। गैर कृषि आधारित 150 से अधिक कार्य बहनें कर रही हैं। यह आयोजन महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट प्रमाण है। होलकर साम्राज्य की रानी लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर ने भील पल्टन बनाकर जनजातीय समुदाय पर विश्वास जताया था। रानी दुर्गावती, वीरांगना अवंतीबाई, रानी पद्मावती, वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई जैसी बहनों ने सुशासन और त्याग के बल पर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया।

    रोजगार दिलवाना प्राथमिकता

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार दिलवाने के लिये निरन्तर नई पहल कर रही है। मध्य प्रदेश में ग्वालियर अंचल में संचार क्षेत्र में नई इकाई की स्थापना की जाएगी। इससे 14 हजार नये रोजगार के अवसर सृजित होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने गत 17 सितम्बर को धार जिले में देश के पहले पीएम मित्र पार्क का शिलान्यास किया। पीएम मित्र पार्क से 3 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। कपास उत्पादक किसान इस पार्क से बड़ी संख्या में लाभान्वित होंगे।

    उन्होंने कहा कि जनजातीय बहुल क्षेत्र में जो पट्टे दिए गए हैं, उनकी नि:शुल्क रजिस्ट्री भी करवाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई मिशनरी धर्मान्तरण नहीं कर सकेगी। स्थानीय निवासी ज्यादा से ज्यादा गौशाला खोलें, दूध का उत्पादन बढाएं। ऐसे कार्यों के लिए सरकार पूरी सहायता कर रही है।प्रदेश में उद्योग और एमएसएमई के माध्यम से रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। अब झाबुआ, धार, आलीराजपुर के लोगों को रोजगार के लिए पलायन करने की जरूरत नहीं होगी। अपने घर में ही काम मिलेगा। बड़े-बड़े कारखाने यहां आएंगे।

    स्व-सहायता समूहों को राशि वितरित

    मुख्यमंत्री ने राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्व-सहायता समूहों के सशक्तिकरण के लिए 300 करोड़ रुपये के ऋण का वितरण किया। इसमें झाबुआ जिले के 215 स्व-सहायता समूहों के लिए 10.8 करोड़ का ऋण भी शामिल है। मुख्यमंत्री ने झाबुआ जिले को 174.64 करोड़ रुपये के 29 विकास कार्यों के भूमि-पूजन और 109.17 करोड़ रुपये के 28 विकास एवं आधारभूत संरचना कार्यों के लोकार्पण की सौगात दी। उन्होंने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ वितरण किया और मेधावी विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने “आजीविका मेला” प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

    प्राकृतिक खेती के लिए अनुकूल झाबुआ

    मुख्यमंत्री ने कहा कि झाबुआ क्षेत्र प्राकृतिक खेती के लिए वरदान है। उन्होंने प्राकृतिक खेती करने वाले प्रगतिशील किसानों से संवाद किया। उन्होंने प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए शासन की विभिन्न योजनाओं एवं प्रयासों पर चर्चा भी की। महिला कृषक बहनों ने बताया कि प्राकृतिक खेती से पिछले दो-तीन साल में जीवन में बड़ा बदलाव आया है। राज्य सरकार कृषि कल्याण वर्ष मना रही है। इसमें बहनों की बड़ी भूमिका है। हमारी बहनें ट्रैक्टर से लेकर ड्रोन तक चला रही हैं। ड्रोन दीदीयां खेतों में कीटनाशकों क छिड़काव कर रही हैं।

    समान नागरिक संहिता

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने सभी धर्मों के लोगों के सम्मान के लिए एक समान कानून लागू करने का निर्णय लिया है। इसमें जनजातीय समुदाय को मुक्त रखा गया है। यूसीसी बिल विधानसभा से पास हो चुका है।

    दुराचार करने वालों को फांसी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि झाबुआ और धार में धर्मांतरण करने वालों को कानून के अनुसार सजा दिलवाई जाएगी। महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए महिला सुरक्षा डेस्क और प्रत्येक जिले में महिला थाने बनाए जा रहे हैं। महिलाओं के साथ दुराचार करने वालों को फांसी की सजा मिलेगी। केंद्र सरकार के सहयोग और नक्सलवाद को पूरी तरह से समाप्त करने के दृढ़ संकल्प के कारण प्रदेश के बालाघाट, मंडला, डिंडौरी अंचल से नक्सलवाद को पूर्णत: समाप्त कर दिया गया है।

  • सुभालय विहार में गरजा बुलडोजर, अवैध निर्माण पर निगम का एक्शन; नियम तोड़कर बनी दो मंजिला बिल्डिंग ध्वस्त

    सुभालय विहार में गरजा बुलडोजर, अवैध निर्माण पर निगम का एक्शन; नियम तोड़कर बनी दो मंजिला बिल्डिंग ध्वस्त


    भोपाल । भोपाल में अवैध निर्माण और अनधिकृत प्लॉटिंग के खिलाफ नगर निगम ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार को बावड़ियाकलां स्थित सुभालय विहार में अवैध रूप से निर्मित दो मंजिला भवन पर जेसीबी चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया गया। नगर निगम की इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों की मौजूदगी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा न हो।

    नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई गौरव गृह निर्माण सहकारी समिति के अंतर्गत आने वाले सुभालय परिसर में स्थित मकान क्रमांक बी 93 पर की गई। जांच में सामने आया कि जिस भूखंड पर निर्माण किया गया उसका मूल क्षेत्रफल 1312 वर्गमीटर था जबकि लगभग 900 वर्गमीटर क्षेत्र में जी प्लस वन भवन का निर्माण कर लिया गया था। सबसे अहम बात यह रही कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग द्वारा स्वीकृत लेआउट में इस भूखंड को एकल प्लॉट के रूप में स्वीकृति मिली थी लेकिन इसके बावजूद नियमों की अनदेखी करते हुए इसका अवैध विभाजन कर दिया गया।

    नगर निगम की जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित भूखंड को अनधिकृत तरीके से छोटे हिस्सों में बांटकर बेचा गया और बाद में स्वीकृत मानकों के विपरीत भवन निर्माण कर लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह का निर्माण पूरी तरह नियमों के खिलाफ था इसलिए नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। निगम का कहना है कि शहर में अवैध प्लॉटिंग और बिना अनुमति किए जा रहे निर्माण पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जहां भी नियमों का उल्लंघन मिलेगा वहां इसी तरह सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    कार्रवाई के दौरान नगर निगम के इंजीनियर राजस्व विभाग के अधिकारी और पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहे। प्रशासन ने पूरे अभियान को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराया ताकि किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।

    नगर निगम ने शहरवासियों से भी अपील की है कि किसी भी संपत्ति की खरीद या निर्माण कार्य शुरू करने से पहले संबंधित विभागों से उसकी वैधता और स्वीकृत लेआउट की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त करें। बिना अनुमति के निर्माण या अवैध प्लॉटिंग में निवेश करने से लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है।

    नगर निगम का कहना है कि अवैध निर्माण केवल शहर की नियोजित विकास व्यवस्था को प्रभावित नहीं करता बल्कि भविष्य में सड़क जल निकासी पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर भी गंभीर असर डालता है। इसी कारण प्रशासन ऐसे मामलों में लगातार अभियान चलाकर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है।

    प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि शहर में वैध और नियमानुसार विकास सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। इसलिए जो लोग बिना स्वीकृति के निर्माण कर रहे हैं या अवैध प्लॉटिंग में शामिल हैं उनके खिलाफ आने वाले समय में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।

  • नकली पिस्टल के दम पर राहगीरों से वसूली, भोपाल में LLB छात्र सहित दो फर्जी पुलिसकर्मी गिरफ्तार

    नकली पिस्टल के दम पर राहगीरों से वसूली, भोपाल में LLB छात्र सहित दो फर्जी पुलिसकर्मी गिरफ्तार


    भोपाल । भोपाल में फर्जी पुलिस बनकर राहगीरों से वसूली करने वाले दो युवकों का भंडाफोड़ हो गया। राजधानी के शाहपुरा थाना क्षेत्र में दोनों आरोपी सिविल ड्रेस पहनकर चौराहे पर वाहन चालकों को रोकते थे और खुद को पुलिसकर्मी बताकर हेलमेट व अन्य यातायात नियमों के नाम पर लोगों से पैसे वसूलने की कोशिश करते थे। गुरुवार रात लोगों की सतर्कता और सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से एक नकली पिस्टल भी बरामद हुई है जिसके बाद उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

    पुलिस के अनुसार गुरुवार रात करीब साढ़े नौ बजे शाहपुरा चौराहे से सूचना मिली कि दो युवक खुद को पुलिसकर्मी बताकर वाहन चालकों की जांच कर रहे हैं और उनसे रुपए मांग रहे हैं। सूचना मिलते ही शाहपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों युवकों को हिरासत में ले लिया। पूछताछ के दौरान दोनों ने पहले खुद को कोहेफिजा थाने में पदस्थ पुलिसकर्मी बताया लेकिन जब उनसे पहचान संबंधी दस्तावेज मांगे गए और सख्ती से पूछताछ की गई तो उनका झूठ सामने आ गया।

    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमान खान और कार्तिक मिश्रा के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में अमान खान ने बताया कि वह एमपी नगर स्थित एक निजी आईटी कंपनी में एचआर के पद पर कार्यरत है जबकि कार्तिक मिश्रा एलएलबी का छात्र है। तलाशी के दौरान अमान खान की कमर से एक नकली पिस्टल भी बरामद हुई जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया।

    घटना के दौरान मौके पर मौजूद लोगों को दोनों युवकों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। लोगों ने उनसे पूछा कि वे किस थाने से हैं और अपना पहचान पत्र दिखाएं। जब दोनों कोई वैध पहचान नहीं दिखा सके तो लोगों ने उनका वीडियो बनाना शुरू कर दिया। वीडियो में लोग यह भी सवाल करते दिखाई दे रहे हैं कि जब वे खुद बिना हेलमेट वाहन चला रहे हैं तो दूसरों को किस अधिकार से रोक रहे हैं। इसी दौरान पुलिस को सूचना दी गई जिसके बाद दोनों की पोल खुल गई।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी हेलमेट नहीं पहनने या अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन का डर दिखाकर लोगों से मौके पर ही पैसे मांगते थे। हालांकि वे किसी भी वाहन चालक का वैधानिक चालान नहीं काटते थे। पुलिस का मानना है कि दोनों लोगों को पुलिस कार्रवाई का भय दिखाकर अवैध वसूली कर रहे थे।

    गिरफ्तारी के बाद आरोपियों ने सफाई देते हुए कहा कि वे लोगों के साथ केवल प्रैंक कर रहे थे लेकिन पुलिस ने इस दावे को खारिज कर दिया। थाना प्रभारी के मुताबिक मौके पर कोई वीडियो शूट नहीं हो रही थी और ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि दोनों केवल मजाक कर रहे थे। पुलिस इसे सुनियोजित तरीके से लोगों को धोखा देकर पैसे ऐंठने का मामला मान रही है।

    फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने पहले भी इस तरह की वारदातों को अंजाम दिया है या नहीं। अमान खान के खिलाफ पहले से मारपीट का एक मामला दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है जबकि कार्तिक मिश्रा के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि दोनों अब तक कितने लोगों से फर्जी पुलिस बनकर वसूली कर चुके हैं और इस पूरे नेटवर्क में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है या नहीं। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

  • भोपाल में जल गुणवत्ता पर विवाद, यूनियन कार्बाइड क्षेत्र के पानी में फीकल कोलीफॉर्म मिलने का दावा

    भोपाल में जल गुणवत्ता पर विवाद, यूनियन कार्बाइड क्षेत्र के पानी में फीकल कोलीफॉर्म मिलने का दावा


    भोपाल । भोपाल में यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गैस पीड़ितों के चार संगठनों ने दावा किया है कि फैक्ट्री के आसपास की बस्तियों में लोगों को सीवेज से दूषित पानी की आपूर्ति की जा रही है जिससे बड़े स्तर पर स्वास्थ्य संकट पैदा होने का खतरा बढ़ गया है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो हालात किसी बड़े जलजनित रोग के प्रकोप में बदल सकते हैं।

    संगठनों ने बताया कि इस महीने प्रभावित इलाकों की 30 बस्तियों से पेयजल के 63 नमूने एकत्र किए गए थे। जांच रिपोर्ट के अनुसार इनमें से 43 नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के बैक्टीरिया की मौजूदगी इस बात का संकेत होती है कि पेयजल में मल या सीवेज का मिश्रण हो चुका है और ऐसा पानी स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

    भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान ने कहा कि जांच के नतीजे बेहद चिंताजनक हैं। उनका दावा है कि करीब 70 प्रतिशत नमूने दूषित पाए गए हैं और 30 में से 19 बस्तियों में लोगों तक असुरक्षित पानी पहुंच रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बड़ा तालाब से सप्लाई किए गए पानी के अधिकांश नमूने और कोलार डैम से जुड़े कुछ नमूने भी जांच में दूषित मिले हैं।

    गैस पीड़ित संगठनों का आरोप है कि प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोग लंबे समय से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इसके कारण दस्त उल्टी टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उनका कहना है कि कई परिवार एक साथ बीमार पड़ रहे हैं और स्थानीय क्लीनिकों में संक्रमण से जुड़े मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

    संगठनों ने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने यूनियन कार्बाइड परिसर के आसपास भूजल के रासायनिक प्रदूषण को गंभीर मानते हुए प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ पानी पहुंचाने की व्यवस्था करने की बात कही गई थी लेकिन उनका आरोप है कि जमीनी स्तर पर आज भी स्थिति संतोषजनक नहीं है।

    भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने कहा कि वर्ष 2018 में भी सुप्रीम कोर्ट ने सीवर लाइन और ड्रेनेज व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए थे। नगर निगम ने तय समय में काम पूरा करने का भरोसा दिया था लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी अधिकांश क्षेत्रों में समस्या जस की तस बनी हुई है।

    भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना धींगरा ने मांग की कि दूषित पेयजल आपूर्ति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर मामले में लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। साथ ही प्रभावित इलाकों में सीवर और ड्रेनेज परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए और पेयजल की गुणवत्ता की स्वतंत्र एवं नियमित निगरानी की व्यवस्था भी लागू की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

  • हाईकोर्ट में 31 अस्पतालों की सुनवाई ने पकड़ा नया मोड़, गलत जांच रिपोर्ट और अवैध संचालन के आरोपों से बढ़ी मुश्किलें

    हाईकोर्ट में 31 अस्पतालों की सुनवाई ने पकड़ा नया मोड़, गलत जांच रिपोर्ट और अवैध संचालन के आरोपों से बढ़ी मुश्किलें


    इंदौर । इंदौर के 31 अस्पतालों की वैधता और स्वास्थ्य संबंधी नियमों के पालन को लेकर दायर जनहित याचिका में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में गुरुवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट के निर्देश के अनुसार याचिकाकर्ता एडवोकेट चर्चित शास्त्री ने अपना रिजाइंडर यानी प्रत्युत्तर अदालत में पेश किया जिसमें सीएमएचओ डॉ माधव हासानी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई जांच रिपोर्ट वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाती और इससे नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों को बचाने का प्रयास किया गया है।

    रिजाइंडर में कहा गया है कि सीएमएचओ की ओर से कोर्ट में दी गई रिपोर्ट भ्रामक है और उसमें वास्तविक स्थिति को पूरी तरह सामने नहीं रखा गया। याचिकाकर्ता का दावा है कि गलत तथ्यों के आधार पर अदालत को गुमराह करने की कोशिश की गई ताकि बिना नियमों का पालन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई प्रभावित हो सके।

    याचिकाकर्ता ने अपने प्रत्युत्तर के साथ कई ऐसे दस्तावेज भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जिनके बारे में दावा किया गया कि वे कूटरचित हैं। इसके अलावा कुछ अस्पतालों के ऐसे रिकॉर्ड भी पेश किए गए जिनके संबंध में कहा गया कि वे आवश्यक वैधानिक अनुमति और पंजीयन के बिना संचालित हो रहे हैं जबकि आधिकारिक दस्तावेजों में अलग स्थिति दिखाई गई है। याचिका में यह भी कहा गया कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

    इससे पहले हुई सुनवाई में भी कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए थे। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया था कि जिन 31 अस्पतालों के संबंध में मामला लंबित है उनके स्थान पर 34 संस्थानों की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। साथ ही विनायक पैथोलॉजी लैब और लेडी हलीमा हॉस्पिटल को सील किए जाने से जुड़े कथित फर्जी आदेश भी रिकॉर्ड पर रखने का आरोप लगाया गया था। इसके अलावा कुछ अस्पतालों की ओर से नगर निगम के कथित फर्जी शपथ पत्रों के आधार पर भवन अनुमति से जुड़े दस्तावेज पेश किए जाने का दावा भी किया गया।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने यह भी कहा था कि जनहित याचिका दायर करने के बाद उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है और हमले की कोशिशें भी हुई हैं। इस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है और उन्हें आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।

    अब ताजा सुनवाई में पेश किए गए रिजाइंडर और उससे जुड़े दस्तावेजों के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई करेगी। कोर्ट यह जांच करेगी कि प्रस्तुत रिपोर्ट और रिकॉर्ड में कितनी सच्चाई है तथा यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या गलत जानकारी दी गई है तो उसके लिए क्या कार्रवाई की जानी चाहिए। इस मामले का फैसला इंदौर के स्वास्थ्य तंत्र और निजी अस्पतालों की जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे भविष्य में अस्पतालों के संचालन और नियामकीय व्यवस्था पर भी व्यापक असर पड़ सकता है।