Category: Madhya Pradesh

  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भोजशाला के समीप तय स्थल पर अदा हुई जुमे की नमाज, सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भोजशाला के समीप तय स्थल पर अदा हुई जुमे की नमाज, सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम


    धार। मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर के पीछे बाउंड्रीवॉल से सटी खसरा नंबर 612 की भूमि पर शुक्रवार को मुस्लिम समाज के लोगों ने जुमे की नमाज अदा की। यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और जिला प्रशासन व मुस्लिम पक्ष के बीच बनी सहमति के बाद की गई।

    नमाज से पहले प्रशासन ने बारिश के कारण गीली जमीन पर तिरपाल बिछवाए और पूरे क्षेत्र की बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की। मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार मौजूद रहे।

    निजी जमीन बताकर हिंदू पक्ष ने जताई आपत्ति
    नमाज शुरू होने से पहले स्थानीय हिंदू समाज के कुछ लोगों ने संबंधित भूमि को निजी बताते हुए वहां नमाज की अनुमति का विरोध किया। उनका कहना था कि वे लंबे समय से इस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं और यदि आवश्यकता पड़ी तो अपने अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय का रुख करेंगे।

    सूचना मिलने पर एसडीएम राजकुमार हलदर मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे लोगों से चर्चा कर आश्वासन दिया कि उनकी आपत्तियों पर नियमानुसार सुनवाई की जाएगी। इसके बाद स्थिति सामान्य हो गई।

    मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट के आदेश का पालन करने की बात कही
    कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी के प्रतिनिधि अब्दुल समद ने बताया कि खसरा नंबर 611 और 612 से कमाल मौला मस्जिद सीधे दिखाई देती है, इसलिए इस स्थान पर नमाज पढ़ने पर सहमति बनी। उन्होंने कहा कि यदि अगले शुक्रवार तक अदालत का कोई नया अंतरिम या अंतिम आदेश आता है, तो उसका पूरी तरह पालन किया जाएगा।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बनी व्यवस्था
    गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद से जुड़े अपने अंतरिम आदेश को स्पष्ट करते हुए मुस्लिम समाज के लिए भोजशाला के समीप दरगाह परिसर की निर्धारित भूमि पर प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश राज्य सरकार को दिए थे।

    आदेश के बाद धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और एसपी सचिन शर्मा ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ स्थल का निरीक्षण किया। देर शाम मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के बीच हुई बैठक में खसरा नंबर 611 और 612 की भूमि पर नमाज अदा कराने को लेकर सहमति बनी।
    आदेश के बाद धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और एसपी सचिन शर्मा ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ स्थल का निरीक्षण किया। देर शाम मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के बीच हुई बैठक में खसरा नंबर 611 और 612 की भूमि पर नमाज अदा कराने को लेकर सहमति बनी।

    100 से अधिक नमाजी पहुंचे
    शुक्रवार दोपहर करीब डेढ़ बजे से निर्धारित स्थल पर नमाजी पहुंचने लगे। शुरुआत में 10 से 15 लोग मौजूद थे, लेकिन धीरे-धीरे संख्या बढ़कर 100 से अधिक हो गई। इस दौरान कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी के पदाधिकारी और याचिकाकर्ता भी उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा।

  • शिवपुरी में थार का हाईवोल्टेज ड्रामा, कार-बाइक को टक्कर मारकर भागे, गड्ढे में फंसने पर पकड़े गए

    शिवपुरी में थार का हाईवोल्टेज ड्रामा, कार-बाइक को टक्कर मारकर भागे, गड्ढे में फंसने पर पकड़े गए


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी में गुरुवार शाम तेज रफ्तार थार सवारों ने शहर की सड़कों पर जमकर हंगामा मचाया। आरोप है कि नशे की हालत में वाहन चला रहे दो युवकों ने पहले एक कार को टक्कर मारी और विरोध होने पर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने पीछा शुरू किया तो भागते समय उन्होंने एक बाइक को भी टक्कर मार दी, जिससे दो युवक घायल हो गए। करीब आधे घंटे तक चले पीछा के बाद फिजिकल थाना पुलिस ने थार को घेरकर दोनों आरोपियों को पकड़ लिया।

    घटना शाम करीब साढ़े सात बजे माधव चौक पर हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लाल रंग की थार ने गौतम शर्मा की कार को टक्कर मार दी। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो वाहन में सवार युवकों ने धमकाते हुए मौके से भागने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई कि थार सवार तेज रफ्तार में शहर से निकल रहे हैं।

    सूचना मिलते ही पुलिस ने वायरलेस के जरिए अलर्ट जारी किया और शहर के विभिन्न स्थानों पर थार को रोकने का प्रयास किया। हालांकि चालक लगातार पुलिस को चकमा देता रहा। थार ग्वालियर नाका, सोनचिरैया होटल, भूत पुलिया, टूरिस्ट विलेज और करबला क्षेत्र से तेज रफ्तार में गुजरती रही। इस दौरान वाहन का एक टायर फटने के बावजूद चालक ने रफ्तार कम नहीं की।

    भागने के दौरान करबला क्षेत्र में थार ने सामने से आ रही एक बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में बड़ी नोहरी निवासी वीरेंद्र शर्मा और नवाब साहब रोड निवासी गौरव शर्मा घायल हो गए। दोनों को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। घायल वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि वह परिवार के साथ बांकड़े मंदिर से दर्शन कर लौट रहे थे, तभी तेज रफ्तार थार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।

    लगातार पीछा कर रही पुलिस ने आखिरकार थार को घेर लिया। भागने के दौरान वाहन अनियंत्रित होकर एक गड्ढे में फंस गया, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने थार को भी जब्त कर लिया।

    पुलिस के मुताबिक थार चला रहे चालक की पहचान सिरसौद निवासी 30 वर्षीय बृजेश विश्वकर्मा के रूप में हुई है। वाहन मालिक चंद्रपाल चौहान भी कार में मौजूद था। दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 281 और 125(ए) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और हादसे में हुए नुकसान सहित अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

  • शिवपुरी में लेब्राडोर की संदिग्ध मौत, शव लेकर थाने पहुंची महिला ने FIR की मांग की

    शिवपुरी में लेब्राडोर की संदिग्ध मौत, शव लेकर थाने पहुंची महिला ने FIR की मांग की


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक पालतू लेब्राडोर कुत्ते की मौत को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शांति नगर क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने अपने पड़ोसियों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उसके आठ माह के पालतू लेब्राडोर को लाठियों से पीट-पीटकर मार डाला। घटना के विरोध में महिला शुक्रवार को कुत्ते का शव लेकर फिजिकल थाना पहुंची और आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    महिला प्रीति परिहार के मुताबिक गुरुवार शाम उनका पालतू लेब्राडोर खाना खाने के बाद घर से बाहर निकल गया था। कुछ देर बाद वह पास स्थित एक आरओ प्लांट संचालक के घर की ओर चला गया। देर रात तक कुत्ता वापस नहीं लौटा तो परिवार ने उसकी तलाश शुरू की। इस दौरान आसपास के लोगों से जानकारी मिली कि कुत्ते के साथ मारपीट की गई है।

    प्रीति परिहार का आरोप है कि आरओ प्लांट संचालक, उसके बेटे और ड्राइवर ने मिलकर लाठियों से उनके पालतू कुत्ते की बेरहमी से पिटाई की, जिससे उसकी मौत हो गई। उनका यह भी आरोप है कि घटना के बाद कुत्ते के शव को दूर फेंक दिया गया ताकि मामला सामने न आए।

    महिला का कहना है कि जब वह घटना की जानकारी लेने आरोपियों के घर पहुंचीं तो उनके साथ गाली-गलौज की गई। विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई और मारपीट करने की कोशिश भी की गई। शुक्रवार सुबह कुत्ते का शव मिलने के बाद वह उसे लेकर सीधे फिजिकल थाना पहुंचीं और पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

    अपनी शिकायत में महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित आरओ प्लांट में रात के समय संदिग्ध और अनैतिक गतिविधियां संचालित होती हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

    फिजिकल थाना पुलिस का कहना है कि शिकायत प्राप्त हो गई है। मामले में लगाए गए सभी आरोपों की जांच की जा रही है। जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

  • 2 अगस्त की प्रोफेसर भर्ती परीक्षा से पहले MPPSC की तेज कार्रवाई, एक दिन में जारी की फाइनल चयन सूची

    2 अगस्त की प्रोफेसर भर्ती परीक्षा से पहले MPPSC की तेज कार्रवाई, एक दिन में जारी की फाइनल चयन सूची


    इंदौर। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) ने भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा-2024 के इकोनॉमिक्स विषय की अंतिम चयन सूची रिकॉर्ड समय में जारी कर दी। आयोग ने 112 पदों के लिए इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी होने के महज 24 घंटे के भीतर चयनित उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी, जबकि सामान्य परिस्थितियों में अंतिम परिणाम घोषित होने में लगभग एक महीने का समय लग जाता है।

    आयोग के इस फैसले का सबसे बड़ा उद्देश्य 2 अगस्त को आयोजित होने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा-2025 को अधिक निष्पक्ष और प्रतिस्पर्धी बनाना है। चयन सूची समय रहते जारी होने से वर्ष 2024 की भर्ती में चयनित अधिकांश अभ्यर्थी नई भर्ती परीक्षा में शामिल नहीं होंगे। इससे उन उम्मीदवारों को अधिक अवसर मिलेगा, जो अभी तक किसी भी भर्ती में चयनित नहीं हो सके हैं।

    एमपीपीएससी के अनुसार इकोनॉमिक्स विषय के कुल 112 पदों पर अंतिम चयन किया गया है। इनमें चयनित 111 अभ्यर्थी अब 2 अगस्त को होने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा-2025 में शामिल नहीं होंगे। इससे परीक्षा में अनावश्यक प्रतिस्पर्धा कम होगी और रिक्त पदों पर नए उम्मीदवारों के चयन की संभावना बढ़ेगी।

    आयोग की यह पहल भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ-साथ अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया कदम माना जा रहा है। इससे उन उम्मीदवारों को भी समय रहते अपनी स्थिति स्पष्ट हो गई है, जिनका चयन हो चुका है। उन्हें अब दोबारा परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी।

    एमपीपीएससी की यह कार्यशैली भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। यदि भविष्य की भर्तियों में भी इसी तरह परिणाम शीघ्र जारी किए जाते हैं, तो न केवल आयोग की कार्यक्षमता बढ़ेगी बल्कि अभ्यर्थियों का समय और संसाधन भी बचेंगे।

    2 अगस्त को होने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा के लिए आयोग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। चयन सूची पहले जारी होने से परीक्षा संचालन भी अधिक सुव्यवस्थित होने की उम्मीद है।

  • इंदौर के रोबोट चौराहे की बदलेगी तस्वीर, 800 पेड़ों का होगा ट्रांसप्लांट, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत

    इंदौर के रोबोट चौराहे की बदलेगी तस्वीर, 800 पेड़ों का होगा ट्रांसप्लांट, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत


    इंदौर । इंदौर के सबसे व्यस्त ट्रैफिक जंक्शनों में शामिल रोबोट चौराहे की तस्वीर जल्द बदलने वाली है। लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव और घंटों लगने वाले जाम से राहत दिलाने के लिए यहां दोनों ओर चार-चार लेन का आधुनिक फ्लायओवर बनाया जाएगा। इस परियोजना के लिए चौराहे के दोनों तरफ मौजूद लगभग 150-150 मीटर लंबे ग्रीन बेल्ट का उपयोग किया जाएगा। हालांकि इस फैसले से इलाके की घनी हरियाली प्रभावित होगी, लेकिन इंदौर विकास प्राधिकरण का कहना है कि एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा और 800 से अधिक पेड़ों को दूसरी जगह ट्रांसप्लांट किया जाएगा।

    रोबोट चौराहे का यह ग्रीन बेल्ट वर्षों की मेहनत से तैयार हुआ है। बारिश के मौसम में यह क्षेत्र मिनी फॉरेस्ट जैसा दिखाई देता है और गर्मियों में राहगीरों को छांव उपलब्ध कराता है। स्थानीय रहवासियों ने स्वयं पौधे लगाकर इस हरित क्षेत्र को विकसित किया था, जो अब बड़े और घने पेड़ों में बदल चुके हैं। फ्लायओवर निर्माण के कारण यह हरियाली अस्थायी रूप से समाप्त होती नजर आएगी, लेकिन अधिकारियों का दावा है कि पेड़ों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर संरक्षित किया जाएगा।

    दरअसल, खजराना चौराहे पर फ्लायओवर बनने के बाद वहां से गुजरने वाले वाहन बिना रुके सीधे रोबोट चौराहे तक पहुंच रहे हैं। इससे इस चौराहे पर ट्रैफिक का दबाव कई गुना बढ़ गया है। पीक आवर्स में लंबी कतारें लग जाती हैं और वाहन चालकों को दो से तीन बार सिग्नल बदलने का इंतजार करना पड़ता है। पहले खजराना चौराहे पर ट्रैफिक रुक जाने से दबाव बंट जाता था, लेकिन अब रोबोट चौराहा शहर का नया ट्रैफिक बॉटलनेक बन गया है।

    इंदौर विकास प्राधिकरण ने फ्लायओवर परियोजना का फिजिबिलिटी सर्वे पूरा कर लिया है और प्रारंभिक डिजाइन भी तैयार कर ली है। प्रस्ताव के अनुसार खजराना फ्लायओवर की तर्ज पर यहां भी दोनों दिशाओं में चार-चार लेन का अलग-अलग स्ट्रक्चर बनाया जाएगा। इसके लिए करीब 150 मीटर लंबी और 30 मीटर से अधिक चौड़ी ग्रीन बेल्ट की जमीन का उपयोग किया जाएगा।

    आईडीए के अधिकारियों का कहना है कि परियोजना शुरू होने से पहले सुपर कॉरिडोर स्थित प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं में पेड़ों के लिए स्थान और गड्ढे तैयार किए जाएंगे। इसके बाद वैज्ञानिक तरीके से सभी पेड़ों का ट्रांसप्लांटेशन किया जाएगा, ताकि पर्यावरणीय नुकसान को न्यूनतम रखा जा सके।

    हालांकि शहर में इससे पहले भी कई बड़े फ्लायओवर निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ प्रभावित हुए हैं। फूटी कोठी, आईटी पार्क, मूसाखेड़ी, पीपल्याहाना, बंगाली और खजराना फ्लायओवर परियोजनाओं के दौरान 10 हजार से अधिक पेड़ हटाए जा चुके हैं। जिन पेड़ों को दूसरी जगह लगाया गया था, उन्हें नए वातावरण में दोबारा विकसित होने में एक से दो वर्ष का समय लगा था।

    अब रोबोट चौराहे का यह फ्लायओवर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुगम बनाने की दिशा में अहम परियोजना माना जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इसके पूरा होने के बाद रिंग रोड पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और रोजाना हजारों वाहन चालकों को जाम से राहत मिलेगी।

  • भोपाल में पानी पर बड़ा विवाद, गैस पीड़ित संगठनों का दावा- 63 में से 43 नमूने दूषित, कार्रवाई की मांग

    भोपाल में पानी पर बड़ा विवाद, गैस पीड़ित संगठनों का दावा- 63 में से 43 नमूने दूषित, कार्रवाई की मांग


    भोपाल । भोपाल में यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी पीड़ितों के चार संगठनों ने शहर में पेयजल आपूर्ति को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठनों का दावा है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास के कई इलाकों में लोगों को सीवेज से दूषित पानी सप्लाई किया जा रहा है। इसके चलते जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। संगठनों ने अपनी ओर से कराई गई पानी की जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करते हुए कहा कि जांचे गए करीब 70 प्रतिशत नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म यानी मल से जुड़े बैक्टीरिया पाए गए हैं।

    भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान के अनुसार इस महीने 30 बस्तियों से 63 पानी के नमूने एकत्र कर उनकी जांच कराई गई। इनमें से 43 नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म की पुष्टि हुई। उनका दावा है कि 30 में से 19 क्षेत्रों में लोगों तक दूषित पेयजल पहुंच रहा है। रिपोर्ट के अनुसार बड़ा तालाब से सप्लाई होने वाले पानी के लगभग 90 प्रतिशत नमूने तथा कोलार डैम से आने वाले पानी के करीब 25 प्रतिशत नमूने भी जांच में प्रभावित पाए गए।

    संगठनों का आरोप है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से सटे इलाकों के निवासी लंबे समय से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि इसके कारण दस्त, उल्टी, टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। कई परिवार एक साथ बीमार पड़ रहे हैं और निजी क्लीनिकों में भी टाइफाइड के मरीजों की संख्या बढ़ने की बात सामने आ रही है।

    भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने कहा कि वर्ष 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि यूनियन कार्बाइड परिसर का भूजल जहरीले रसायनों और भारी धातुओं से प्रदूषित हो चुका है। इसके बाद प्रभावित क्षेत्रों में पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए थे।

    वहीं भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने आरोप लगाया कि वर्ष 2018 में भी पेयजल में मल मिलने की शिकायतों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल नगर निगम को सीवर लाइन और बेहतर ड्रेनेज व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए थे। नगर निगम ने निर्धारित समय में काम पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन उनका दावा है कि वर्षों बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

    भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना धींगरा ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में सीवर और ड्रेनेज परियोजनाओं को प्राथमिकता से पूरा करने तथा पेयजल की गुणवत्ता की स्वतंत्र और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की भी मांग की।

    हालांकि इस मामले में नगर निगम या संबंधित सरकारी विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में संगठनों के दावों की पुष्टि संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा में रिकॉर्ड बारिश, गांवों में जलभराव, SDRF ने 10 घंटे चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन

    खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा में रिकॉर्ड बारिश, गांवों में जलभराव, SDRF ने 10 घंटे चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश दर्ज की गई, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। सबसे ज्यादा बारिश खरगोन जिले के गोगावां में 7.6 इंच रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा बुरहानपुर शहर में 7 इंच और बैतूल के भीमपुर में 6.6 इंच बारिश हुई। लगातार हो रही बारिश से कई नदियां और नाले उफान पर हैं, जबकि घरों, खेतों और सड़कों पर पानी भरने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार बड़वानी के वरला, आलीराजपुर के उदयगढ़ और बुरहानपुर के खकनार में 5.3 इंच, खंडवा शहर में 5.1 इंच तथा खरगोन के बड़वाह में 4.4 इंच बारिश दर्ज की गई। वहीं झाबुआ के रानापुर में 4 इंच, खरगोन के सेगांव में 4.3 इंच और खरगोन शहर में 4.2 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। प्रदेश के 33 शहरों और कस्बों में भारी से अति भारी वर्षा दर्ज होने से कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई।

    बड़वानी जिले के सेंधवा ब्लॉक में 24 घंटे के दौरान साढ़े चार इंच से अधिक बारिश हुई। तेज बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर आ गए और धनोरा गांव में नाले का पानी 10 से 15 घरों में घुस गया। कई मकानों में करीब दो फीट तक पानी भर गया, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। लगातार बारिश के कारण खेतों में खड़ी मक्का की फसल भी गिर गई। सेंधवा ब्लॉक का सबसे बड़ा तालाब ओवरफ्लो हो गया, जबकि वरला और बलवाड़ी क्षेत्र में भी जलभराव की स्थिति बनी रही।

    खंडवा जिले में भी लगातार बारिश से हालात गंभीर बने रहे। यहां 24 घंटे के दौरान 128 मिलीमीटर यानी पांच इंच से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव के साथ कपास और मक्का की फसलों को नुकसान पहुंचा है। आबना और सुक्ता नदी में तेज बहाव के कारण हांड़ी-कुंडी गांव के पास बने टापू पर चार लोग फंस गए। सूचना मिलने पर खंडवा और इंदौर की एसडीआरएफ टीम ने करीब साढ़े दस घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर चारों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू के दौरान ड्रोन के माध्यम से फंसे लोगों तक लाइफ जैकेट भी पहुंचाई गई।

    लगातार बारिश के चलते कई जिलों में निचले इलाकों में जलभराव, ग्रामीण सड़कों पर पानी भरने और खेतों में फसल नुकसान की खबरें सामने आई हैं। प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए हुए है और लोगों से नदी-नालों के आसपास नहीं जाने तथा मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की अपील की गई है।

    मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। ऐसे में प्रशासन ने जिलों को सतर्क रहने और आपदा प्रबंधन दलों को तैयार रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

  • NEET आंदोलन के समर्थन के बाद बढ़ा सियासी विवाद, कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप- पुलिस ने 10 बार बदलवाया बयान

    NEET आंदोलन के समर्थन के बाद बढ़ा सियासी विवाद, कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप- पुलिस ने 10 बार बदलवाया बयान


    इंदौर । इंदौर में NEET परीक्षा से जुड़े छात्र आंदोलन के समर्थन को लेकर कांग्रेस और पुलिस प्रशासन के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे से गुरुवार को पंढरीनाथ थाने में करीब पांच घंटे तक पूछताछ की गई। इस दौरान उन्हें लंबे समय तक थाने में बैठाए रखने की खबर फैलते ही पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा सहित कई कांग्रेस नेता और समर्थक थाने पहुंच गए। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के जमा होने से थाने के बाहर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी भी की। बाद में पुलिस ने चौकसे को जाने की अनुमति दे दी।

    थाने से बाहर आने के बाद चिंटू चौकसे ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि कांग्रेस ने टंट्या भील चौराहे पर NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन किया था और इसी वजह से उन्हें बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि थाने पहुंचने के बाद पुलिस ने कई घंटे तक उन्हें बैठाए रखा और बयान में बार-बार संशोधन कराया। उनके अनुसार वहां मौजूद पुलिसकर्मी केवल वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन कर रहे थे और पूरा घटनाक्रम पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर हुआ।

    चौकसे ने दावा किया कि उनके बयान में लगभग दस बार संशोधन कराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार बयान की भाषा और उसमें लिखी गई बातों को बदलने का दबाव बनाया गया। उनके मुताबिक यह केवल एक व्यक्ति को परेशान करने का मामला नहीं बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि जो भी जनता की आवाज उठाता है या छात्र, किसान और आम लोगों के आंदोलनों का समर्थन करता है, उसे प्रशासनिक दबाव के जरिए चुप कराने का प्रयास किया जा रहा है।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी नेता राहुल गांधी के आह्वान पर कांग्रेस देशभर में छात्रों के समर्थन में खड़ी है और इंदौर में भी पार्टी ने NEET अभ्यर्थियों के आंदोलन को समर्थन दिया था। उनका आरोप है कि जैसे ही प्रशासन को कांग्रेस की सक्रिय भूमिका की जानकारी मिली, छह महीने पुराने मामले में उन्हें नोटिस भेज दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है।

    चौकसे ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पहले कांग्रेस कार्यालय पर हमला हुआ, पत्थरबाजी हुई और कांग्रेस कार्यकर्ता घायल हुए, लेकिन पुलिस ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की जबकि भाजपा से जुड़े लोगों के खिलाफ अज्ञात आरोपियों के रूप में मामला दर्ज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुलिस के माध्यम से विपक्षी नेताओं को परेशान कर रही है और आंदोलनों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

    कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। चिंटू चौकसे ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में आने वाले दिनों में इंदौर पुलिस के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उनका कहना है कि पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी और राजनीतिक विरोध की आवाज को दबाने के किसी भी प्रयास का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दिया जाएगा।

    हालांकि इस मामले में पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में कांग्रेस के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

  • सोनम ने किया सरेंडर, अब छह महीने में ट्रायल पूरा करने की चुनौती, जनवरी तक आ सकता है फैसला

    सोनम ने किया सरेंडर, अब छह महीने में ट्रायल पूरा करने की चुनौती, जनवरी तक आ सकता है फैसला


    इंदौर । इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी के ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने के बाद अब मामले की सुनवाई निर्णायक चरण में पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के पालन में सोनम ने 29 जुलाई को मेघालय के शिलॉन्ग स्थित ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। इसके साथ ही अब कानूनी प्रक्रिया तेज होने की संभावना जताई जा रही है। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत में सुनवाई तय समय-सीमा के भीतर पूरी होती है तो इस बहुचर्चित मामले में जनवरी 2027 तक फैसला आ सकता है।

    सोनम के सरेंडर के बाद सबसे बड़ा सवाल यह सामने आया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रायल छह महीने में पूरा करने की जो समय-सीमा तय की गई है, उसकी गणना किस तारीख से होगी। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह अवधि सरेंडर की तारीख से नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट के 23 जुलाई 2026 के आदेश की तारीख से मानी जाएगी। अदालत ने अपने आदेश में कहीं भी यह उल्लेख नहीं किया कि छह महीने की अवधि सरेंडर के दिन से प्रभावी होगी। इसलिए आदेश जारी होने की तारीख ही कानूनी रूप से समय-सीमा का आधार मानी जाएगी।

    कानूनी विशेषज्ञ एडवोकेट आशीष एस. शर्मा के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई को सोनम को अंतरिम राहत देते हुए दो महत्वपूर्ण शर्तें रखी थीं। पहली, तीन सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करना और दूसरी, यदि छह महीने के भीतर ट्रायल अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ता या पूरा नहीं होता तो आरोपी को दोबारा जमानत याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता होगी।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि छह महीने की शर्त केवल ट्रायल में देरी के आधार पर दोबारा जमानत मांगने से जुड़ी है। यदि इस दौरान कोई नया कानूनी आधार सामने आता है, जैसे गंभीर स्वास्थ्य समस्या, गवाहों की जिरह में कोई महत्वपूर्ण नया तथ्य या ऐसा कोई कानूनी पहलू जो मामले की दिशा बदल सकता हो, तो आरोपी छह महीने पूरे होने का इंतजार किए बिना भी नई जमानत याचिका दायर कर सकती है।

    अभियोजन पक्ष से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में परिस्थितिजन्य साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक सबूत, सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल रिकॉर्ड और फॉरेंसिक रिपोर्ट अदालत में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अभियोजन को यह साबित करना होगा कि सभी साक्ष्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और उनकी पूरी श्रृंखला केवल आरोपियों की संलिप्तता की ओर ही संकेत करती है। यदि यह वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी संदेह से परे सिद्ध हो जाती है, तो इन्हीं के आधार पर दोष सिद्ध होने की संभावना मजबूत होगी।

    विशेषज्ञों के अनुसार सोनम द्वारा तय समय से पहले सरेंडर करना भी कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। इससे यह संदेश जाता है कि उसने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान किया और न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग किया। भविष्य में यदि वह जमानत की मांग करती है तो उसका पक्ष यह तर्क रख सकता है कि उसने अदालत के सभी निर्देशों का समय पर पालन किया और जांच व ट्रायल में पूरा सहयोग दिया। हालांकि केवल समय पर सरेंडर करना जमानत मिलने का स्वतः आधार नहीं बनता।

    अब इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में अदालत की कार्यवाही, आरोप तय होने की प्रक्रिया, गवाहों की गवाही और वैज्ञानिक साक्ष्यों की जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की अपेक्षित समय-सीमा के अनुसार आगे बढ़ती है तो अगले वर्ष जनवरी तक इस बहुचर्चित मामले में फैसला आने की संभावना जताई जा रही है।

  • एमपी सरकार का बड़ा फैसला, बिल्डिंग परमिशन के लिए विभागों के चक्कर खत्म, डिजिटल सिस्टम लागू

    एमपी सरकार का बड़ा फैसला, बिल्डिंग परमिशन के लिए विभागों के चक्कर खत्म, डिजिटल सिस्टम लागू


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों में भवन निर्माण की अनुमति प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब घर, व्यावसायिक भवन या अन्य निर्माण कार्यों के लिए बिल्डिंग परमिशन लेते समय लोगों को कई विभागों से अलग-अलग अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लाने की बाध्यता नहीं रहेगी। सरकार ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित करने का निर्णय लिया है, जिससे आवेदन से लेकर अनुमति जारी होने तक सभी चरण ऑनलाइन पूरे होंगे और केवल डिजिटल दस्तावेज ही स्वीकार किए जाएंगे।

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस संबंध में प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को विस्तृत निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे द्वारा जारी आदेश के अनुसार नई व्यवस्था का उद्देश्य आम नागरिकों, निवेशकों, बिल्डर्स और निर्माण एजेंसियों को अनावश्यक औपचारिकताओं और विभागीय चक्करों से राहत देना है।

    नई व्यवस्था के तहत सहकारिता विभाग, गृह निर्माण सहकारी समितियों, नजूल विभाग और बिजली विभाग से विभिन्न प्रकार की एनओसी लेने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इसके अलावा रक्षा प्रतिष्ठानों, मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल तथा विकास प्राधिकरणों से जुड़े मामलों में भी अब आवेदक को स्वयं एनओसी लाने की जरूरत नहीं होगी।

    यदि किसी मामले में संबंधित विभाग की राय आवश्यक होगी तो भवन अनुमति देने वाला सक्षम प्राधिकारी आवेदन प्राप्त होने के सात दिन के भीतर संबंधित विभाग को प्रकरण भेजेगा। संबंधित विभाग को 21 दिनों के भीतर अपनी आपत्ति या अनापत्ति दर्ज करनी होगी। यदि निर्धारित समय सीमा में कोई जवाब नहीं मिलता है तो भवन अनुमति की प्रक्रिया बिना विलंब आगे बढ़ाई जा सकेगी। इससे फाइलों के लंबित रहने और अनावश्यक देरी पर रोक लगेगी।

    हालांकि सरकार ने कुछ मामलों में एनओसी की अनिवार्यता बरकरार रखी है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण और हेरिटेज क्षेत्रों से जुड़े मामलों में एनओसी केवल तभी आवश्यक होगी जब ऑनलाइन जीआईएस आधारित जांच में संबंधित भूखंड प्रतिबंधित या संवेदनशील क्षेत्र में पाया जाएगा। सामान्य मामलों में इन विभागों से अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

    सरकार ने पर्यावरण और अग्निशमन संबंधी नियमों को भी स्पष्ट किया है। केवल निर्धारित सीमा से बड़े भवनों और परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति आवश्यक होगी। इसी तरह वृक्ष कटाई की अनुमति भी केवल उन्हीं मामलों में ली जाएगी जहां वास्तव में पेड़ों को हटाने की आवश्यकता होगी। अग्निशमन विभाग की अनापत्ति राष्ट्रीय भवन संहिता के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार लागू रहेगी।

    राज्य सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से भवन निर्माण अनुमति प्रक्रिया तेज होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। डिजिटल प्रक्रिया लागू होने से दस्तावेजों की जांच, स्वीकृति और रिकॉर्ड प्रबंधन भी अधिक प्रभावी होगा। इससे निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ शहरी विकास परियोजनाओं में भी तेजी आने की उम्मीद है।