Category: Madhya Pradesh

  • कोबरा से सामना, वोट का खुलासा और भ्रष्टाचार पर हमला, मध्य प्रदेश की राजनीति में दिनभर रही हलचल

    कोबरा से सामना, वोट का खुलासा और भ्रष्टाचार पर हमला, मध्य प्रदेश की राजनीति में दिनभर रही हलचल


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार को कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए, जिन्होंने राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक महकमे तक चर्चा का माहौल बना दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छात्र जीवन का एक रोमांचक अनुभव साझा किया, जिसमें उनके हाथ पर जहरीला कोबरा लिपट गया था। दूसरी ओर दतिया उपचुनाव में मतदान करने के बाद पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने खुले तौर पर बताया कि उन्होंने भाजपा और पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया। वहीं गुना से भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने सार्वजनिक मंच से खनिज विभाग पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोप लगाकर अपनी ही सरकार के अधिकारियों पर सवाल खड़े कर दिए।

    उज्जैन में बन रहे स्नेक पार्क के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने कॉलेज जीवन का एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि विज्ञान महाविद्यालय में पढ़ाई के दौरान उन्होंने जादू की कुछ ट्रिक्स सीखी थीं। गणेश उत्सव के एक कार्यक्रम में प्रदर्शन के लिए वे एक सांप लेकर पहुंचे और उससे जादू का खेल दिखाया। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद दोस्तों के कहने पर जब उन्होंने सांप को बाहर निकाला तो वह अचानक सक्रिय हो गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने सांप को मजबूती से पकड़ लिया, लेकिन वह उनके हाथ पर लिपट गया और दूसरे हाथ पर काटने की कोशिश करने लगा। बाद में जब वे सांप को वापस छोड़ने पहुंचे तो पता चला कि वह साधारण सांप नहीं बल्कि जहरीला कोबरा था और उसके विषैले दांत भी सुरक्षित थे। यह सुनकर वे भी हैरान रह गए। मुख्यमंत्री का यह अनुभव सुनकर कार्यक्रम में मौजूद लोग भी आश्चर्यचकित रह गए।

    उधर दतिया विधानसभा उपचुनाव में मतदान के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने कमल के फूल के निशान पर वोट दिया है और भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के पक्ष में मतदान किया है। उनके इस बयान की राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा रही। नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा की जीत का दावा भी किया। दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी अपनी पार्टी की जीत का भरोसा जताते हुए कहा कि कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह बड़ी बढ़त से चुनाव जीतेंगे। अब सभी की निगाहें मतगणना पर टिकी हैं।

    गुना में उद्योग विभाग के एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वैध रसीद होने के बावजूद रेत लेकर जा रहे व्यक्ति पर जुर्माना लगाने का प्रयास किया गया। विधायक ने कहा कि कार्रवाई असली दोषियों पर होने के बजाय आम लोगों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने मंच से ही विभागीय अधिकारियों पर अवैध वसूली के आरोप लगाए और कहा कि इस संबंध में अधिकारियों से बात करने की कोशिश भी की, लेकिन उनकी बात तक नहीं सुनी गई। भाजपा विधायक के इन आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इसी बीच दतिया उपचुनाव से जुड़ा एक दिलचस्प घटनाक्रम भी सामने आया। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं की एक टीम वोट मांगने के लिए ऐसे गांव पहुंच गई, जो दतिया विधानसभा क्षेत्र में आता ही नहीं था। जब कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों से भाजपा के पक्ष में मतदान की अपील की तो लोगों ने बताया कि वे इस उपचुनाव के मतदाता ही नहीं हैं क्योंकि उनका गांव भांडेर विधानसभा क्षेत्र में आता है। यह सुनकर कार्यकर्ता असहज हो गए और उन्हें वहां से लौटना पड़ा।

    एक ही दिन में सामने आए इन घटनाक्रमों ने मध्य प्रदेश की राजनीति में अलग-अलग कारणों से हलचल पैदा कर दी। मुख्यमंत्री का रोचक अनुभव, चुनावी बयानबाजी, सरकारी विभागों पर भ्रष्टाचार के आरोप और चुनाव प्रचार की चूक—इन सभी ने राजनीतिक चर्चा को नया विषय दे दिया।

  • बारिश का नया दौर शुरू 31 जुलाई को कैसा रहेगा मौसम जानिए किन राज्यों में बरसेंगे बादल और कहां रहेगा बाढ़ जैसा खतरा

    बारिश का नया दौर शुरू 31 जुलाई को कैसा रहेगा मौसम जानिए किन राज्यों में बरसेंगे बादल और कहां रहेगा बाढ़ जैसा खतरा


    मध्य प्रदेश । 31 जुलाई को देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार कई राज्यों में भारी से अति भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। मध्य प्रदेश राजस्थान गुजरात महाराष्ट्र छत्तीसगढ़ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित कई इलाकों में तेज बारिश के साथ गरज चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी है।

    मध्य प्रदेश में लगातार सक्रिय मानसून के कारण बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। प्रदेश में मानसून ट्रफ साइक्लोनिक सर्कुलेशन और शियर जोन जैसे तीन मजबूत मौसम तंत्र सक्रिय हैं जिनके प्रभाव से भोपाल इंदौर उज्जैन नर्मदापुरम हरदा धार देवास बैतूल सीहोर रायसेन सागर छिंदवाड़ा और आसपास के जिलों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। कई स्थानों पर जलभराव और नदी नालों के उफान पर आने की आशंका भी जताई गई है।

    राजस्थान के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में भी तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। कोटा उदयपुर झालावाड़ और बारां जैसे क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। गुजरात के दक्षिणी हिस्सों और सौराष्ट्र क्षेत्र में भी तेज बारिश के आसार हैं जबकि महाराष्ट्र के कोंकण विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र में भी बादल जमकर बरस सकते हैं।

    उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में लगातार हो रही बारिश के कारण भूस्खलन और सड़क बाधित होने का खतरा बना हुआ है। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। वहीं जम्मू कश्मीर के कुछ हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं।

    उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में भी मध्यम से भारी बारिश की संभावना है। दिल्ली एनसीआर में दिनभर बादल छाए रहने के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है जिससे लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।

    मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है क्योंकि पश्चिमी तट पर तेज हवाओं के साथ समुद्र में ऊंची लहरें उठ सकती हैं। इसके अलावा निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति से सतर्क रहने को कहा गया है। बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए खुले मैदानों पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचने की सलाह भी दी गई है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक मानसून सक्रिय रहेगा और कई राज्यों में अच्छी बारिश दर्ज की जा सकती है। किसानों के लिए यह बारिश खरीफ फसलों के लिहाज से लाभदायक मानी जा रही है लेकिन अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी होगा। प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रहने और आपदा प्रबंधन टीमों को तैयार रखने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत कार्य शुरू किया जा सके।

  • लोक सेवा गारंटी से बाहर हुई मिट्टी और बीज जांच, देरी होने पर किसान नहीं कर सकेंगे अपील

    लोक सेवा गारंटी से बाहर हुई मिट्टी और बीज जांच, देरी होने पर किसान नहीं कर सकेंगे अपील


    भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों से जुड़ी दो महत्वपूर्ण सेवाओं को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य सरकार ने खेतों की मिट्टी परीक्षण और प्रमाणित बीज नमूना परीक्षण को मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम के दायरे से बाहर कर दिया है। इस फैसले के बाद किसानों को इन सेवाओं के लिए समयबद्ध रिपोर्ट मिलने की कानूनी गारंटी समाप्त हो गई है। साथ ही यदि रिपोर्ट मिलने में देरी होती है तो अब किसान लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत अपील भी नहीं कर सकेंगे। ऐसे समय में यह निर्णय सामने आया है जब प्रदेश में किसानों से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में बने हुए हैं।

    लोक सेवा प्रबंधन विभाग ने 29 जुलाई को अधिसूचना जारी कर वर्ष 2017 में अधिसूचित दोनों सेवाओं को डी नोटिफाई कर दिया। इसके साथ ही मिट्टी नमूना परीक्षण और प्रमाणित बीज नमूना परीक्षण अब लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2010 के तहत मिलने वाली सेवाओं की सूची से बाहर हो गए हैं। इसका सीधा असर उन किसानों पर पड़ेगा जो खेती से पहले मिट्टी की गुणवत्ता और बीज की प्रमाणिकता की जांच के लिए सरकारी प्रयोगशालाओं पर निर्भर रहते हैं।

    वर्ष 2017 में राज्य सरकार ने किसानों को समयबद्ध और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इन दोनों सेवाओं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम में शामिल किया था। इसके तहत मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट 30 कार्य दिवस के भीतर उपलब्ध कराने का प्रावधान था। इसके लिए सहायक मिट्टी परीक्षण अधिकारी सहायक मृदा सर्वेक्षण अधिकारी और संबंधित प्रयोगशाला प्रभारी को जिम्मेदार बनाया गया था। वहीं प्रमाणित बीज नमूना परीक्षण की रिपोर्ट 60 कार्य दिवस के भीतर देने की व्यवस्था थी जिसकी जिम्मेदारी संभागीय राज्य बीज परीक्षण प्रयोगशाला के बीज परीक्षण अधिकारी पर निर्धारित की गई थी।

    यदि निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई जाती थी तो किसानों को कानूनी रूप से अपील करने का अधिकार प्राप्त था। मिट्टी परीक्षण के मामलों में किसान पहले जिले के उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास के समक्ष प्रथम अपील कर सकते थे। यदि वहां भी समाधान नहीं मिलता था तो संभागीय संयुक्त संचालक के पास द्वितीय अपील का विकल्प मौजूद था। इसी तरह बीज परीक्षण के मामलों में भी दो स्तर की अपील व्यवस्था लागू थी जिससे किसानों को समय पर सेवा सुनिश्चित कराने का अधिकार मिलता था।

    नई अधिसूचना लागू होने के बाद अब यह पूरी व्यवस्था समाप्त हो गई है। यानी अब मिट्टी और बीज परीक्षण की रिपोर्ट देने के लिए कोई वैधानिक समय सीमा लागू नहीं होगी। यदि रिपोर्ट में देरी होती है तो किसान लोक सेवा गारंटी कानून के तहत जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ शिकायत या अपील भी नहीं कर पाएंगे। इससे समयबद्ध सेवा की कानूनी बाध्यता खत्म हो गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मिट्टी परीक्षण खेती की उत्पादकता बढ़ाने और सही उर्वरक प्रबंधन के लिए बेहद जरूरी प्रक्रिया है जबकि प्रमाणित बीज परीक्षण किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में इन सेवाओं के लिए समयबद्ध व्यवस्था समाप्त होने से किसानों को रिपोर्ट मिलने में देरी का सामना करना पड़ सकता है जिसका असर बुवाई और फसल प्रबंधन पर भी पड़ सकता है।

    सरकार की ओर से इस बदलाव के पीछे प्रशासनिक कारण बताए जा सकते हैं लेकिन किसानों के लिए यह फैसला कई सवाल भी खड़े करता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लोक सेवा गारंटी से बाहर होने के बावजूद कृषि विभाग इन सेवाओं को कितनी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध करा पाता है।

  • बैतूल हादसे के बाद बढ़ी चिंता, तीन मानसूनी सिस्टम सक्रिय; मध्य प्रदेश के 12 जिलों में रेड अलर्ट जैसे हालात

    बैतूल हादसे के बाद बढ़ी चिंता, तीन मानसूनी सिस्टम सक्रिय; मध्य प्रदेश के 12 जिलों में रेड अलर्ट जैसे हालात


    मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। प्रदेश में एक साथ तीन मजबूत मौसम प्रणालियों के प्रभाव से अगले 48 घंटे तक भारी से अति भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने खास तौर पर मालवा और निमाड़ क्षेत्र के साथ इंदौर और उज्जैन संभाग के कई जिलों के लिए हाई अलर्ट जारी किया है। लगातार हो रही बारिश के कारण नदी नाले उफान पर हैं और कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित होने लगा है।

    मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को रतलाम झाबुआ अलीराजपुर और धार जिलों में अति भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा नीमच आगर मालवा उज्जैन देवास बड़वानी खरगोन बुरहानपुर और छिंदवाड़ा में भी भारी बारिश का पूर्वानुमान है। राजधानी भोपाल सहित इंदौर जबलपुर ग्वालियर रायसेन सीहोर विदिशा नर्मदापुरम बैतूल हरदा शाजापुर मंदसौर खंडवा शिवपुरी गुना दतिया मुरैना भिंड सागर रीवा सतना सीधी शहडोल और अन्य जिलों में भी रुक रुक कर बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई गई है।

    गुरुवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में जोरदार बारिश हुई। भोपाल उज्जैन रतलाम हरदा और खरगोन सहित कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सबसे दर्दनाक घटना बैतूल जिले में हुई जहां मूसलाधार बारिश के दौरान रेलवे की बाउंड्री वॉल पास की झोपड़ी पर गिर गई। इस हादसे में 27 वर्षीय मजदूर राहुल उइके की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उसका साथी गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना ने लगातार हो रही बारिश के बीच कमजोर निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    बारिश के बढ़ते दबाव को देखते हुए बैतूल के सारणी स्थित सतपुड़ा बांध के सात गेट इस मानसून में पहली बार खोल दिए गए हैं ताकि अतिरिक्त पानी की निकासी की जा सके। प्रशासन ने निचले इलाकों के लोगों को सतर्क रहने और नदी नालों के पास नहीं जाने की सलाह दी है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 14 दशमलव 7 इंच वर्षा दर्ज की गई है जबकि इस समय तक 17 दशमलव 2 इंच बारिश हो जानी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अभी भी लगभग 15 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है। हालांकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बारिश से यह अंतर आने वाले दिनों में कम होने की संभावना है।

    प्रदेश के 47 जिलों में अब भी सामान्य से कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इनमें उज्जैन रतलाम धार झाबुआ बैतूल हरदा छिंदवाड़ा जबलपुर सागर रीवा सतना ग्वालियर शिवपुरी और विदिशा जैसे जिले शामिल हैं। दूसरी ओर भोपाल इंदौर देवास सीहोर राजगढ़ भिंड मंदसौर और बुरहानपुर ऐसे जिले हैं जहां सामान्य से अधिक वर्षा हो चुकी है। देवास में सामान्य से लगभग 29 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई मानसून का सबसे महत्वपूर्ण महीना माना जाता है और इसी दौरान प्रदेश में कुल वर्षा का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा दर्ज होता है। यदि अगले दो दिनों तक मौसम विभाग का अनुमान सही साबित होता है तो वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

  • धरती आबा योजना में एमपी का विरोधाभासी प्रदर्शन, बुनियादी सुविधाओं में आगे लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में फिसड्डी

    धरती आबा योजना में एमपी का विरोधाभासी प्रदर्शन, बुनियादी सुविधाओं में आगे लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में फिसड्डी


    भोपाल। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत आदिवासी क्षेत्रों के समग्र विकास को लेकर संसद में पेश हुई रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश की तस्वीर को दो अलग-अलग पहलुओं में सामने ला दिया है। एक ओर राज्य को देश में सबसे अधिक 308 करोड़ 65 लाख रुपए का आवंटन मिला है और कई योजनाओं में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज हुई हैं वहीं दूसरी ओर सड़क निर्माण और जनजातीय छात्रावास जैसे बुनियादी विकास कार्यों में शून्य प्रगति ने गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

    राज्यसभा में जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके द्वारा पेश आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश को चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में सबसे अधिक वित्तीय सहायता मिली। इस राशि का उद्देश्य आदिवासी बहुल गांवों में पेयजल आवास सड़क बिजली मोबाइल नेटवर्क शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं का विस्तार करना है। हालांकि जमीनी स्तर पर सभी योजनाओं का प्रदर्शन एक समान नहीं रहा।

    नल जल योजना के तहत मध्य प्रदेश ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है। राज्य के 11309 लक्षित गांवों में से 6112 गांवों तक नल से जल पहुंच चुका है जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर माना गया है। इसी तरह ग्रामीण आवास योजना में भी राज्य को सबसे अधिक 368395 मकानों की स्वीकृति मिली जिनमें से 152309 मकान बनकर तैयार हो चुके हैं। बिजली कनेक्शन के मामले में भी राज्य का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से बेहतर दर्ज किया गया है और हजारों आदिवासी परिवारों तक बिजली पहुंचाई गई है।

    मोबाइल नेटवर्क विस्तार के क्षेत्र में भी प्रगति देखने को मिली है। नेटवर्क विहीन 776 आदिवासी गांवों में से 571 गांवों तक मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंच चुकी है जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में संचार व्यवस्था मजबूत हुई है। हालांकि इस क्षेत्र में भी अभी काफी काम बाकी है।

    सबसे बड़ी चिंता सड़क निर्माण और छात्रावास परियोजनाओं को लेकर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में 913 किलोमीटर लंबाई की 345 सड़कें स्वीकृत की गई थीं लेकिन अब तक एक भी सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो सका। इसी तरह आदिवासी विद्यार्थियों के लिए 104 छात्रावासों की स्वीकृति और करोड़ों रुपए जारी होने के बावजूद एक भी छात्रावास का निर्माण पूरा नहीं हुआ। यह स्थिति दर्शाती है कि शिक्षा और आधारभूत ढांचे से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में अपेक्षित गति नहीं मिल सकी है।

    इन कमियों के बावजूद राज्य ने एलपीजी गैस कनेक्शन वितरण में पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है। स्वीकृत दो लाख से अधिक कनेक्शनों में से लगभग चालीस हजार गैस कनेक्शन आदिवासी परिवारों तक पहुंचाए जा चुके हैं। इसके अलावा मत्स्य पालन पशुधन विकास और अन्य आजीविका से जुड़ी योजनाओं में भी सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बजट आवंटित करना पर्याप्त नहीं होता बल्कि योजनाओं का समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही आवश्यक है। यदि सड़क और छात्रावास जैसी बुनियादी परियोजनाओं में तेजी लाई जाए तो आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है। आने वाले समय में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि जिन योजनाओं में काम पूरी तरह रुका हुआ है उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए ताकि धरती आबा अभियान का वास्तविक लाभ आदिवासी समाज तक पहुंच सके।

  • सावन में शिवभक्ति का महासंगम: 31 जुलाई से निकलेगी भव्य कांवड़ यात्रा भोपाल से नर्मदापुरम तक गूंजेगा हर हर महादेव

    सावन में शिवभक्ति का महासंगम: 31 जुलाई से निकलेगी भव्य कांवड़ यात्रा भोपाल से नर्मदापुरम तक गूंजेगा हर हर महादेव


    भोपाल। सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही राजधानी भोपाल शिवभक्ति के रंग में रंगने जा रही है। भगवान भोलेनाथ की आराधना को समर्पित चार दिवसीय विशाल कांवड़ यात्रा 31 जुलाई से प्रारंभ होगी। ॐ शिव सेवा भक्त मंडल के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक यात्रा में बड़ी संख्या में शिवभक्त भोपाल से नर्मदापुरम पहुंचकर मां नर्मदा का पवित्र जल लेकर पदयात्रा के माध्यम से वापस राजधानी आएंगे और भगवान शिव का विधिवत जलाभिषेक करेंगे। पूरे आयोजन के दौरान हर हर महादेव और बोल बम के जयघोष से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहेगा।

    मंडल के पदाधिकारियों के अनुसार श्रद्धालुओं का जत्था 31 जुलाई शुक्रवार को दोपहर दो बजे भोपाल से नर्मदापुरम के लिए रवाना होगा। वहां मां नर्मदा के पावन तट से जल भरने के बाद श्रद्धालु कांवड़ लेकर पैदल यात्रा करते हुए भोपाल लौटेंगे। यह यात्रा केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन नहीं बल्कि आस्था अनुशासन और सेवा भावना का भी प्रतीक मानी जाती है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होकर भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

    चार दिनों तक चलने वाली इस यात्रा में श्रद्धालु भजन कीर्तन मंत्रोच्चार और शिव नाम के संकीर्तन के साथ आगे बढ़ेंगे। पूरे मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारियां भी की गई हैं। जगह जगह पेयजल चिकित्सा और विश्राम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि कांवड़ियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। सामाजिक और धार्मिक संगठनों द्वारा भी यात्रा के दौरान सेवा कार्य किए जाएंगे।

    यात्रा का सबसे प्रमुख आयोजन 3 अगस्त सोमवार को होगा। इस दिन प्राचीन श्री पिपलेश्वर महादेव मंदिर पात्रा पुल से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए परम पूज्य बाबा बटेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेगी जहां मां नर्मदा के पवित्र जल से भगवान शिव का महाजलाभिषेक किया जाएगा। इसके बाद यात्रा का समापन बड़े वाले महादेव मंदिर कायस्थपुरा में धार्मिक अनुष्ठानों और आरती के साथ होगा।

    आयोजकों ने बताया कि पूरे आयोजन के दौरान महाआरती शिव भजन रुद्राभिषेक और ॐ नमः शिवाय के मंत्रों की गूंज श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देगी। सावन में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि इस दौरान भगवान शिव को नर्मदा और गंगा जैसे पवित्र जल से अभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होने की धार्मिक मान्यता है।

    मंडल ने राजधानी और आसपास के क्षेत्रों के सभी शिवभक्तों से इस पावन यात्रा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक एकता सेवा और भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा का भी प्रतीक है। सावन के इस पावन अवसर पर निकलेगी यह विशाल कांवड़ यात्रा निश्चित रूप से भोपाल को शिवमय बना देगी और हर ओर हर हर महादेव के जयघोष से भक्तिमय वातावरण देखने को मिलेगा।

  • MP: पन्ना के जिला अस्पताल में एक माह में 22 बच्चों की मौत! स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

    MP: पन्ना के जिला अस्पताल में एक माह में 22 बच्चों की मौत! स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप


    पन्ना।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पन्ना जिला अस्पताल (Panna District Hospital) एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। यहां नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई यानी एसएनसीयू (Special Newborn Care Unit – SNCU) में पिछले एक महीने के दौरान जन्म से लेकर एक वर्ष तक की उम्र के 22 मासूम बच्चों की मौत ने हड़कंप मचा दिया है। लगातार हो रही इन मौतों के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं, इलाज की गुणवत्ता और जिम्मेदारी को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी स्वयं जिला अस्पताल पहुंचे और एसएनसीयू वार्ड का निरीक्षण किया।

    पन्ना जिला चिकित्सालय की एसएनसीयू यूनिट, जहां गंभीर रूप से बीमार नवजात और छोटे बच्चों का इलाज किया जाता है, इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक माह में यहां 22 बच्चों की मौत हुई है। यह संख्या सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। लगातार हो रही मौतों ने परिजनों की चिंता भी बढ़ा दी है।


    सीएमएचओ खुद पहुंचे

    स्थिति का जायजा लेने के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी राजेश प्रसाद तिवारी जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने एसएनसीयू वार्ड का निरीक्षण किया और डॉक्टरों व स्टाफ से उपचार व्यवस्था, उपलब्ध संसाधनों, दवाइयों, उपकरणों तथा स्टाफ की स्थिति की जानकारी ली। साथ ही सभी मामलों की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश भी दिए।


    स्वास्थ्य विभाग की अलग दलील

    सीएमएचओ राजेश प्रसाद तिवारी का कहना है कि एसएनसीयू में भर्ती होने वाले अधिकांश बच्चे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के साथ रेफर होकर आते हैं। सभी मामलों की जांच की जा रही है और प्रत्येक मौत के कारणों की विस्तृत समीक्षा के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरी ओर परिजनों का कहना है कि अस्पताल में बेहतर इलाज और पर्याप्त सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।


    वो सवाल जिनके जवाब का हर किसी को इंतजार

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक महीने में 22 मासूमों की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं? क्या सभी मौतें केवल गंभीर चिकित्सकीय स्थितियों के कारण हुईं या फिर अस्पताल की व्यवस्थाओं में भी कहीं कोई कमी रही? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की समीक्षा शुरू कर दी है और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

  • MP: धार में भोजशाला परिसर के सटी जमीन पर आज होगी जुमे की नमाज…. SC ने तय की जगह

    MP: धार में भोजशाला परिसर के सटी जमीन पर आज होगी जुमे की नमाज…. SC ने तय की जगह


    धार।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के धार स्थित भोजशाला (Bhojshala)-कमाल मौला मस्जिद (Kamal Maula Mosque) विवाद में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार की नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है।


    भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिया?

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले दिए गए अंतरिम आदेश को स्पष्ट करते हुए मुस्लिम समाज के लोगों के लिए नमाज अदा करने का स्थान तय कर दिया। अब शुक्रवार को जुमे की नमाज भोजशाला परिसर से सटी दरगाह की जमीन पर अदा की जाएगी। यहां हर शुक्रवार दोपहर के समय दो घंटे तक नमाज पढ़ी जा सकेगी।


    मुस्लिम पक्ष की शिकायत पर कोर्ट ने क्या कहा?

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने यह निर्देश मुस्लिम पक्ष की उस शिकायत पर दिया, जिसमें कहा गया था कि प्रशासन भोजशाला के निकट स्थित वैकल्पिक स्थलों पर नमाज की अनुमति नहीं दे रहा है। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने कहा कि राज्य किसी भी पक्ष के अधिकारों की प्रतिस्पर्धा में नहीं पड़ना चाहता और उसकी प्राथमिकता केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। इस पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि धार्मिक अधिकारों की रक्षा करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना, दोनों राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी हैं।


    प्रशासन ने क्या तैयारियां की हैं?

    जिला प्रशासन ने तय स्थान पर सफाई और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। शुक्रवार को एएसपी, सीएसपी, डीएसपी और एसडीओपी स्तर के अधिकारियों सहित करीब 350 पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। नगर के संवेदनशील इलाकों में पुलिस की मोबाइल बाइक टीमें लगातार गश्त करेंगी।

  • एमपी में 3 मानसूनी सिस्टम का असर, इंदौर-उज्जैन संभाग में 48 घंटे भारी बारिश की चेतावनी, आज 12 जिलों में अलर्ट

    एमपी में 3 मानसूनी सिस्टम का असर, इंदौर-उज्जैन संभाग में 48 घंटे भारी बारिश की चेतावनी, आज 12 जिलों में अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में तीन मजबूत मानसूनी सिस्टम सक्रिय होने से मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। मौसम विभाग ने प्रदेश के पश्चिमी हिस्से, खासकर मालवा-निमाड़ क्षेत्र में अगले 48 घंटे तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। शुक्रवार को 12 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट है, जबकि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर समेत कई शहरों में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

    इन जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट
    मौसम केंद्र के अनुसार, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर और धार में अति भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं नीमच, आगर-मालवा, उज्जैन, देवास, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर और छिंदवाड़ा में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, खंडवा, मंदसौर, शाजापुर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी गरज-चमक के साथ बारिश होने का अनुमान है।

    कई जिलों में गुरुवार को भी झमाझम बारिश
    गुरुवार को भोपाल, उज्जैन, रतलाम, हरदा और खरगोन सहित कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। लगातार हो रही वर्षा के चलते सारणी स्थित सतपुड़ा बांध के सात गेट इस मानसून सीजन में पहली बार खोले गए।

    अब भी सामान्य से 15% कम बारिश
    मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अब तक औसतन 14.7 इंच (373.3 मिमी) वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि तक 17.2 इंच (438.3 मिमी) बारिश होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अब भी करीब 15 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है।

    राज्य के 47 जिलों में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि भोपाल, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, मंदसौर, राजगढ़ और सीहोर ऐसे जिले हैं, जहां औसत से अधिक वर्षा हो चुकी है। इनमें देवास सबसे आगे है, जहां अब तक 29 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है।

  • दतिया विधानसभा उपचुनाव में 71.44% मतदान, लोकतंत्र के पर्व में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर निभाई भागीदारी

    दतिया विधानसभा उपचुनाव में 71.44% मतदान, लोकतंत्र के पर्व में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर निभाई भागीदारी


    दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के लिए गुरुवार को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित माहौल में मतदान संपन्न हो गया। लोकतंत्र के इस महापर्व में मतदाताओं ने उत्साह के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग किया। जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, पूरे विधानसभा क्षेत्र में 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

    सुबह मतदान शुरू होते ही विभिन्न मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं ने भी बड़ी संख्या में मतदान कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।

    निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखड़े तथा पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल के नेतृत्व में सभी मतदान केंद्रों पर सुरक्षा और आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गई थी। मतदाताओं के लिए पेयजल, छाया, चिकित्सा सहायता और दिव्यांगजनों के लिए व्हीलचेयर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। प्रशासन और पुलिस ने पूरे दिन मतदान प्रक्रिया पर लगातार निगरानी रखी, जिससे मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

    निर्वाचन कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, विधानसभा क्षेत्र के 2,20,410 मतदाताओं ने मतदान किया। इनमें 1,16,116 पुरुष मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 74.09, जबकि 1,04,284 महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 68.48 रहा। वहीं 10 अन्य मतदाताओं में से 40 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का उपयोग किया।

    मतदान समाप्त होने के बाद सभी मतदान दल कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ईवीएम और निर्वाचन सामग्री लेकर सुरक्षित रूप से संग्रहण केंद्र पहुंचे, जहां सामग्री जमा कराने की प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से पूरी कराई गई।

    जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखड़े ने मतदान प्रक्रिया को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी मतदाताओं, निर्वाचन ड्यूटी में लगे अधिकारियों-कर्मचारियों, पुलिस एवं केंद्रीय सुरक्षा बल, मीडिया प्रतिनिधियों और अन्य सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।