Category: Madhya Pradesh

  • घर लौटने से पहले छिन गई जिंदगी, फ्लाइट का इंतजार कर रहे उज्जैन के मंजूर अहमद हमले का शिकार

    घर लौटने से पहले छिन गई जिंदगी, फ्लाइट का इंतजार कर रहे उज्जैन के मंजूर अहमद हमले का शिकार


    मध्य प्रदेश । उज्जैन के राज रॉयल कॉलोनी निवासी मंजूर अहमद (50) की मौत की खबर ने पूरे परिवार और इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-1 पर हुए ड्रोन और मिसाइल हमले में उनकी जान चली गई। घटना में 63 अन्य लोग घायल हुए हैं और एयरपोर्ट के यात्री टर्मिनल को भारी नुकसान पहुंचा है।

    परिजनों के अनुसार मंजूर अहमद अपने भांजे की शादी में शामिल होने भारत आने वाले थे। उनकी 3 जून को कुवैत से मुंबई की फ्लाइट थी और 4 जून की सुबह उन्हें उज्जैन पहुंचना था। परिवार के सदस्य उनकी अगवानी के लिए तैयारियां कर रहे थे, लेकिन इसी बीच यह दुखद खबर आ गई।

    मंजूर अहमद के बेटे मोहम्मद अनस ने बताया कि मंगलवार शाम उनकी पिता से आखिरी बार बातचीत हुई थी। उन्होंने बताया था कि वे कुवैत से मुंबई पहुंचेंगे और वहां से ट्रेन के जरिए नागदा आएंगे। परिवार के लोग उन्हें लेने जाने वाले थे। किसी ने नहीं सोचा था कि यह उनकी आखिरी बातचीत साबित होगी।

    बताया जाता है कि मंजूर अहमद फ्लाइट पकड़ने के लिए कुवैत एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 पर मौजूद थे। इसी दौरान एयरपोर्ट पर ड्रोन और मिसाइल हमला हुआ। हमले में टर्मिनल को गंभीर नुकसान पहुंचा और मंजूर अहमद की मौके पर ही मौत हो गई।

    परिवार के इकलौते कमाने वाले थे
    मंजूर अहमद पिछले करीब 30 वर्षों से खाड़ी देश में रहकर काम कर रहे थे। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी पूरी तरह उन्हीं के कंधों पर थी। उनके परिवार में पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा हैं, जो अभी पढ़ाई कर रहे हैं। बेहतर भविष्य और बच्चों की शिक्षा के लिए उन्होंने वर्षों तक घर से दूर रहकर मेहनत की।

    परिजनों के मुताबिक वे आखिरी बार अक्टूबर 2025 में उज्जैन आए थे। उस समय उन्होंने परिवार से कहा था कि अब वे पहले की तुलना में अधिक बार घर आया करेंगे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

    शव भारत लाने की प्रक्रिया शुरू
    परिवार के सदस्य मोहम्मद सलीम ने बताया कि मंजूर अहमद का पार्थिव शरीर भारत लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उम्मीद है कि शव कुवैत से अहमदाबाद पहुंचेगा, जहां से सड़क मार्ग के जरिए उज्जैन लाया जाएगा। सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी होने पर अंतिम संस्कार शुक्रवार को किया जा सकता है।

    भारत ने हमले की निंदा की
    भारत सरकार और भारतीय दूतावास ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि नागरिकों और नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाना अस्वीकार्य है तथा सभी पक्षों से ऐसे हमले रोकने की अपील की है। भारतीय दूतावास भी पीड़ित परिवार के संपर्क में है और आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रहा है।

  • पानी की समस्या पहुंची कोर्ट, प्री-मानसून तैयारियों को लेकर नगर निगम को फटकार

    पानी की समस्या पहुंची कोर्ट, प्री-मानसून तैयारियों को लेकर नगर निगम को फटकार


    मध्य प्रदेश । इंदौर में लगातार गहराते जल संकट को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। जबलपुर स्थित Madhya Pradesh High Court की अवकाशकालीन पीठ ने नगर निगम को मानसून पूर्व जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण से जुड़े जरूरी कार्य तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति Pranay Verma और Jai Kumar Pillai की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि वर्षा जल के अधिकतम उपयोग और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए त्वरित कदम उठाए जाना आवश्यक है।

    यह जनहित याचिका Rajlakshmi Foundation की ओर से दायर की गई है। याचिका में इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से गिरते भूजल स्तर, सूखते तालाबों, झीलों, कुओं और बावड़ियों की स्थिति पर चिंता जताई गई है। साथ ही यह भी बताया गया कि कई पारंपरिक जल स्रोतों से जुड़े फीडर चैनल और मोहरियां अवरुद्ध हो चुकी हैं, जिससे वर्षा जल का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है।

    याचिका में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की कमी, शहर में बढ़ते कंक्रीटीकरण, जलाशयों में सीवेज प्रदूषण, पाइपलाइन लीकेज, परित्यक्त बोरवेल और उपचारित अपशिष्ट जल के सीमित उपयोग जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। इसके अलावा ग्रामीण और पेरी-अर्बन क्षेत्रों के वाटरशेड संरक्षण और पुनर्स्थापन की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

    विशेष रूप से असराबाद खुर्द, मिर्जापुर, रालामंडल, लिम्बोदी, बिलावली, छोटी बिलावली और पिपल्यापाला जैसे जलाशयों के वैज्ञानिक पुनर्जीवन की मांग याचिका में की गई है। इन जल स्रोतों को इंदौर की पारंपरिक जल-श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है, जो भूजल स्तर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इंदौर नगर निगम को निर्देश दिया कि अगले सात दिनों के भीतर सार्वजनिक सूचना जारी कर सभी सरकारी भवनों, अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, अपार्टमेंट्स, मॉल, होटल, व्यावसायिक परिसरों और अन्य संस्थानों को अपने रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की सफाई, डी-सिल्टिंग और उन्हें पूरी तरह क्रियाशील बनाने के लिए निर्देशित किया जाए।

    अदालत ने यह भी कहा कि पहली भारी मानसूनी बारिश से पहले प्राथमिकता वाले जलाशयों से जुड़े स्टॉर्म वॉटर ड्रेन्स, फीडर चैनलों, झीलों के इनलेट और आउटलेट, मोहरियों तथा रिचार्ज चैनलों की आपात सफाई कराई जाए। कोर्ट का मानना है कि यदि इन मार्गों को समय रहते साफ कर दिया जाए तो बारिश का पानी बहकर नष्ट होने के बजाय भूजल रिचार्ज और जलाशयों के पुनर्भरण में उपयोग हो सकेगा।

    जल संकट जैसे गंभीर मुद्दे पर हाईकोर्ट के हस्तक्षेप को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजरें 8 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें नगर निगम द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी अदालत के समक्ष रखी जाएगी।

  • खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह में बदलाव की तैयारी, चौड़ा होगा प्रवेश द्वार; निकली 150 किलो चांदी

    खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह में बदलाव की तैयारी, चौड़ा होगा प्रवेश द्वार; निकली 150 किलो चांदी


    मध्य प्रदेश । इंदौर के विश्वप्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा बदलाव किया जाने वाला है। आगामी सिंहस्थ और भविष्य में बढ़ने वाली भक्तों की संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने गर्भगृह के मुख्य द्वार को चौड़ा करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत वर्तमान प्रवेश द्वार को लगभग 10 फीट चौड़ा बनाया जाएगा, जिससे दर्शन व्यवस्था अधिक सुगम और व्यवस्थित हो सकेगी।

    मंदिर प्रशासन के अनुसार हाल ही में आयोजित मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बैठक में समिति अध्यक्ष एवं इंदौर कलेक्टर Shivam Verma तथा नगर निगम आयुक्त Kshitij Singhal सहित अन्य अधिकारियों ने श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया।

    निर्णय के बाद विकास कार्यों की तैयारी शुरू कर दी गई है। सबसे पहले गर्भगृह के मुख्य द्वार पर लगी लगभग 150 किलो चांदी को सावधानीपूर्वक हटाया गया है। यह चांदी वर्षों से मंदिर के प्रवेश द्वार की शोभा बढ़ा रही थी। अब निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसके पुनः उपयोग या स्थापना को लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा।

    मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अशोक भट्ट के अनुसार, गर्भगृह का द्वार चौड़ा होने से श्रद्धालुओं को भगवान गणेश के दर्शन करने में अधिक सुविधा मिलेगी। वर्तमान में विशेष अवसरों और त्योहारों पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है, जिससे दर्शन व्यवस्था प्रभावित होती है। सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भवन की संरचनात्मक मजबूती का परीक्षण भी कराया जा रहा है। इसके लिए Shri Govindram Seksaria Institute of Technology and Science (एसजीएसआईटीएस) की विशेषज्ञ टीम ने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया है। इंजीनियरों ने दीवारों, द्वार और आसपास की संरचना की तकनीकी जांच की है, ताकि विस्तार कार्य के दौरान मंदिर की मूल संरचना सुरक्षित रहे।

    मंदिर प्रशासन का कहना है कि परीक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद ही निर्माण कार्य की अंतिम रूपरेखा तय की जाएगी। यदि रिपोर्ट अनुकूल रहती है तो आगामी दिनों में गर्भगृह के द्वार को चौड़ा करने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

    खजराना गणेश मंदिर न केवल इंदौर बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में यह विकास कार्य मंदिर की धार्मिक गरिमा बनाए रखते हुए श्रद्धालुओं को बेहतर और सुविधाजनक दर्शन व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • क्लीनचिट के बदले 3 लाख की डील! लोकायुक्त के भीतर भ्रष्टाचार का कथित नेटवर्क उजागर

    क्लीनचिट के बदले 3 लाख की डील! लोकायुक्त के भीतर भ्रष्टाचार का कथित नेटवर्क उजागर


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली लोकायुक्त संस्था खुद गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। एक कथित स्टिंग ऑपरेशन में लोकायुक्त के अधिकारियों और कर्मचारियों पर जांच प्रभावित करने, क्लीनचिट दिलाने और मामलों को कमजोर करने के बदले लाखों रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप लगाए गए हैं। इस खुलासे ने प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण जांच एजेंसियों में से एक की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है।

    रिपोर्ट के अनुसार, लोकायुक्त कार्यालय के एक टेक्नीशियन ने कथित तौर पर दावा किया कि डीएसपी स्तर के अधिकारियों के माध्यम से जांच में राहत दिलाई जा सकती है। आरोप है कि एक मामले में क्लीनचिट दिलाने के लिए 3 लाख रुपये और अन्य स्तरों पर अलग-अलग रकम की मांग की गई। स्टिंग में शामिल बातचीत में एक महिला डीएसपी द्वारा कथित तौर पर यह कहते हुए सुना गया कि “चोरी सब करते हैं, जो पकड़ाया वही चोर होता है”, जिसके बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया।

    कथित बातचीत के दौरान अधिकारियों ने जांच प्रक्रिया, नोटिस, वॉयस सैंपल और दस्तावेजों को लेकर भी चर्चा की। आरोप है कि जांच से जुड़ी गोपनीय जानकारी और ट्रांसक्रिप्ट तक उपलब्ध कराने की पेशकश की गई। इतना ही नहीं, कथित तौर पर पैसे नहीं मिलने पर संबंधित पक्ष पर दबाव बनाने और जांच प्रभावित करने जैसी बातें भी सामने आईं।

    मामले का एक और गंभीर पहलू यह है कि लोकायुक्त द्वारा प्रस्तुत खात्मा रिपोर्टों को लेकर भी सवाल उठे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जनवरी से अप्रैल के बीच विशेष अदालत ने लोकायुक्त की ओर से पेश की गई कई खात्मा रिपोर्टों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने जांच में कमियां, अधूरे साक्ष्य और आवश्यक गवाहों के बयान दर्ज न किए जाने जैसी खामियों की ओर संकेत किया।

    आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन वर्षों में ट्रैप कार्रवाई की संख्या बढ़ी है, लेकिन दोषसिद्धि के मामलों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। इससे जांच की गुणवत्ता और अभियोजन की प्रभावशीलता पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। विपक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि भ्रष्टाचार की जांच करने वाली संस्था पर ही ऐसे आरोप लगते हैं, तो आम नागरिकों का भरोसा प्रभावित होना स्वाभाविक है।

    हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों या लोकायुक्त संगठन की ओर से अंतिम और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है। ऐसे मामलों में जांच पूरी होने और सक्षम एजेंसियों द्वारा तथ्यों की पुष्टि होने तक आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। फिलहाल यह मामला प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।

  • भोपाल में बड़ा हादसा टला, निगम भवन की लिफ्ट में फंसी महिला; बैकअप सिस्टम नहीं होने से बढ़ी चिंता

    भोपाल में बड़ा हादसा टला, निगम भवन की लिफ्ट में फंसी महिला; बैकअप सिस्टम नहीं होने से बढ़ी चिंता


    भोपाल । भोपाल नगर निगम की नई मुख्यालय बिल्डिंग में बुधवार शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक महिला कर्मचारी लिफ्ट के अंदर फंस गईं। लिंक रोड नंबर-2 स्थित 73 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित इस अत्याधुनिक भवन में बिजली गुल होते ही लिफ्ट बीच रास्ते में रुक गई और महिला करीब 20 मिनट तक उसमें कैद रहीं। घटना ने भवन की सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार महिला कर्मचारी ग्राउंड फ्लोर से तीसरी मंजिल पर जाने के लिए लिफ्ट में सवार हुई थीं। जैसे ही लिफ्ट ऊपर बढ़ी, अचानक बिजली चली गई और लिफ्ट सेकंड फ्लोर के पास अटक गई। अंदर फंसी महिला घबरा गईं, जबकि घटना की जानकारी मिलते ही भवन में मौजूद कर्मचारियों और नागरिकों की भीड़ मौके पर जमा हो गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तकनीकी टीम के पहुंचने से पहले कुछ लोगों ने चाबी और पेचकस की मदद से लिफ्ट का दरवाजा खोलने की कोशिश भी की। हालांकि बाद में पहुंचे तकनीकी कर्मचारियों ने लोगों को ऐसा करने से रोका और लिफ्ट सिस्टम को रीसेट करने की प्रक्रिया शुरू की। करीब 10 मिनट की मशक्कत के बाद महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बाहर निकलते समय वह काफी घबराई हुई नजर आईं।

    नगर निगम की बिजली शाखा के कार्यपालन यंत्री आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि लिफ्ट में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी, बल्कि बिजली बाधित होने के कारण यह बीच में रुक गई थी। हालांकि घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया कि करोड़ों रुपए की लागत से बने नए भवन में ऑटो रेस्क्यू सिस्टम और पावर बैकअप जैसी जरूरी सुविधाएं क्यों नहीं हैं।

    कर्मचारियों और आम नागरिकों का कहना है कि रोजाना बड़ी संख्या में लोग इस भवन में आते हैं। ऐसे में लिफ्ट में ऑटोमैटिक रेस्क्यू डिवाइस और बैकअप पावर सिस्टम होना अनिवार्य है, ताकि बिजली जाने की स्थिति में यात्री सुरक्षित बाहर निकल सकें।

    विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक लिफ्टों में सुरक्षा के लिए कई स्वचालित सिस्टम लगे होते हैं। बिजली जाने पर लिफ्ट निकटतम फ्लोर तक पहुंचने का प्रयास करती है। ऐसे समय में दरवाजा जबरन खोलने या छेड़छाड़ करने से सुरक्षा तंत्र प्रभावित हो सकता है और राहत कार्य में देरी हो सकती है।

    उल्लेखनीय है कि इस नई निगम बिल्डिंग का लोकार्पण 6 मई को मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने किया था। भवन में निगम के अधिकांश विभागों को एक छत के नीचे लाने की योजना बनाई गई है। हालांकि उद्घाटन के एक महीने के भीतर सामने आई इस घटना ने भवन की तकनीकी तैयारियों और सुरक्षा मानकों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

  • भोपाल में रिश्ते का खौफनाक अंत, गर्दन-चेहरे पर किए वार; बहन की बहादुरी के बावजूद भाग निकला हमलावर

    भोपाल में रिश्ते का खौफनाक अंत, गर्दन-चेहरे पर किए वार; बहन की बहादुरी के बावजूद भाग निकला हमलावर


    भोपाल  भोपाल में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक युवक ने अपनी पूर्व प्रेमिका पर बीच सड़क चाकू से हमला कर दिया। हमले में युवती गंभीर रूप से घायल हो गई, जबकि उसे बचाने आई उसकी बड़ी बहन भी आरोपी के हमले का शिकार हो गई। घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।

    जानकारी के अनुसार, घटना छोला मंदिर थाना क्षेत्र के शंकर नगर इलाके में मंगलवार शाम करीब चार बजे हुई। 23 वर्षीय युवती अपनी बड़ी बहन के साथ घर के पास जा रही थी, तभी आरोपी अक्षय चंदेल ने उनका रास्ता रोक लिया। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच पहले प्रेम संबंध थे और कुछ समय तक वे लिव-इन रिलेशनशिप में भी रह चुके थे। बाद में दोनों के बीच विवाद होने पर युवती ने उससे दूरी बना ली थी।

    पुलिस के मुताबिक, रास्ता रोकने के बाद आरोपी ने पुरानी बातों को लेकर बहस शुरू कर दी। कुछ देर कहासुनी के बाद उसने जेब से चाकू निकाला और युवती पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। आरोपी ने उसकी गर्दन, चेहरे, पीठ और हाथों पर कई वार किए। अचानक हुए हमले से युवती गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ी।

    इस दौरान युवती की बड़ी बहन उसे बचाने के लिए आगे आई, लेकिन आरोपी ने उस पर भी हमला कर दिया। चाकू का वार उसके बाएं गाल पर लगा, जिससे उसे गंभीर चोट आई। दोनों बहनों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके की ओर दौड़े।

    प्रत्यक्षदर्शियों के जुटने पर आरोपी मौके से फरार हो गया। बताया जा रहा है कि भागने से पहले उसने युवती को जान से मारने की धमकी भी दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को अस्पताल पहुंचाया। घायल युवती की हालत गंभीर बताई जा रही है, जबकि उसकी बहन का भी इलाज जारी है।

    पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी और पीड़िता के बीच पहले प्रेम संबंध थे। संबंध खत्म होने के बाद दोनों के बीच तनाव बना हुआ था। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि इसी रंजिश के चलते आरोपी ने इस वारदात को अंजाम दिया।

    छोला मंदिर थाना पुलिस ने आरोपी अक्षय चंदेल के खिलाफ हत्या के प्रयास, मारपीट, धमकी और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल आरोपी फरार है और उसकी तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

    यह घटना एक बार फिर रिश्तों में बढ़ती हिंसा और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा और मामले की विस्तृत जांच जारी है।

  • MP: मऊगंज में छात्रा ने फांसी लगाकर दी फांसी… NEET परीक्षा रद्द होने से डिप्रेशन में थी…

    MP: मऊगंज में छात्रा ने फांसी लगाकर दी फांसी… NEET परीक्षा रद्द होने से डिप्रेशन में थी…


    मऊगंज।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के नवगठित जिले मऊगंज (Mauganj District ) मगनिया गांव (Maganiya Village) की रहने वाली एक छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी ने घर में लगें पंखे पर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली परिजनों का आरोप है बेटी NEET की तैयारी कर रही थी. उसे हाल में दी परीक्षा में 650 अंक भी आने की उम्मीद थी लेकिन पेपर लीक होने और रद्द के बाद से वह डिप्रेशन में थी और उसने इस तरह का कदम उठा लिया जिसके बाद पूरा परिवार सदमे में हैं।


    कुक की नौकरी की, पिता ने लोन लेकर कराई तैयारी

    आकांक्षा के घर की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं होने के बाद भी आकांशा के किसान क्रेडिट कार्ड से 3 लाख रुपए लोन लिए थे. परिवार वाले उसे नागपुर के एक निजी कोचिंग में तैयारी करा रहे थे। पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी किसानी करते थे लेकिन बेटी को पढ़ाने के लिए नागपुर में कुक की नौकरी करने लगे थे और वहीं बेटी को पढ़ा रहे थे. नीट का पेपर भी जब हुआ तो पूरे परिवार को भरोसा था कि इस बार चयन हो जाएगा और उनकी बेटी डाक्टर बन जाएगी लेकिन पेपर लीक होने के बाद वह ड्रिपेशन में चली गई और पूरे परिवार खुशियां चली गईं।

    ‘सॉरी, मम्मी पापा.. अब हिम्मत नहीं है’
    मौके पर एक सुसाइड नोट भी मिला है जिसमें उसने लिखा था कि सॉरी, मम्मी पापा आपको भरोसा था कि मेरी बेटी पढ़ लेगी और डाक्टर बनेगी पर दोबारा नीट का पेपर देने की हिम्मत नहीं है. मैंने आप दोनों को बर्बाद कर दिया दोबारा पेपर अच्छा जाए, इसकी कोई गारंटी नहीं है।


    नीट पेपर लीक मामला

    NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने से देशभर के लाखों अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है. 3 मई को आयोजित परीक्षा के बाद पेपर लीक की आशंका सामने आई थी. NTA के मुताबिक 7 मई की शाम परीक्षा में अनियमितताओं की जानकारी मिली, जिसके बाद मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दी गई. 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई और दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया. इसके बाद 15 मई को शिक्षा मंत्रालय और NTA ने 21 मई को री-एग्जाम आयोजित करने की घोषणा की. पूरे मामले की जांच CBI कर रही है और अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

    एक ओर सुप्रीम कोर्ट में लगातार नई याचिकाएं दायर की जा रही हैं और परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव, जैसे पेन-पेपर मोड के स्थान पर कंप्यूटर आधारित परीक्षा लागू करने की मांग उठ रही है. वहीं दूसरी ओर, लीक मामले से जुड़े नेटवर्क के सदस्यों पर जांच एजेंसियां और कानून लगातार शिकंजा कस रहे हैं तथा उनके खिलाफ कार्रवाई तेज होती जा रही है।

  • आखिरी मैसेज, CCTV और 3 घंटे की मौजूदगी… ख्याति की मौत ने खड़े किए कई सवाल

    आखिरी मैसेज, CCTV और 3 घंटे की मौजूदगी… ख्याति की मौत ने खड़े किए कई सवाल


    नई दिल्ली । भोपाल में 18 वर्षीय छात्रा ख्याति जैन की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही ख्याति 11 मई 2026 को अपने घर में मृत पाई गई थी। घटना के 24 दिन बाद भी मामला चर्चा में बना हुआ है, क्योंकि परिजनों ने इसे आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई है।

    ख्याति की मां वर्षा जैन का आरोप है कि उनकी बेटी की मौत सामान्य आत्महत्या का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी साजिश हो सकती है। उन्होंने पुलिस की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं और दावा किया है कि कई महत्वपूर्ण तथ्यों की अब तक गंभीरता से जांच नहीं की गई है।

    मां के अनुसार घटना वाले दिन वह एक स्कूल में इंटरव्यू देने के लिए घर से बाहर गई थीं। इसी दौरान उनकी बेटी के बॉयफ्रेंड तनीष चंद्रवंशी का घर आना-जाना हुआ। परिवार का दावा है कि तनीष करीब तीन घंटे तक घर में मौजूद रहा था। CCTV फुटेज में उसके घर में प्रवेश करने की बात भी सामने आई है। इतना ही नहीं, ख्याति की मौत की सूचना सबसे पहले तनीष ने ही पुलिस और परिवार को दी थी।

    मामले को और रहस्यमय बनाता है वह आखिरी इंस्टाग्राम मैसेज, जो ख्याति के अकाउंट से उसके बॉयफ्रेंड को भेजा गया था। इस संदेश में पारिवारिक तनाव, मानसिक परेशानी और जीवन समाप्त करने जैसी बातें लिखी गई थीं। हालांकि मां का कहना है कि यह भाषा उनकी बेटी की सामान्य लेखन शैली से मेल नहीं खाती। उनका आरोप है कि तनीष के पास ख्याति के इंस्टाग्राम अकाउंट का एक्सेस था और संभव है कि संदेश किसी और ने भेजा हो।

    पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने सवालों को और बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार ख्याति ने मौत से लगभग 24 घंटे पहले तक भोजन नहीं किया था। उसकी बाईं कलाई पर कट के दो निशान भी पाए गए। हालांकि मौत के वास्तविक कारण को लेकर अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है और विसरा रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

    ख्याति मूल रूप से औबेदुल्लागंज की रहने वाली थी और पिछले दो वर्षों से भोपाल में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी। इसी दौरान उसकी दोस्ती और फिर प्रेम संबंध तनीष चंद्रवंशी से हुआ था। परिवार का कहना है कि वे इस रिश्ते के पक्ष में नहीं थे और इसी वजह से दोनों के बीच तनाव की स्थिति बनी रहती थी।

    फिलहाल पुलिस मामले की जांच आत्महत्या के एंगल से कर रही है, जबकि परिजन हत्या की आशंका जताते हुए निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग कर रहे हैं। मामले की सच्चाई जांच पूरी होने और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • देश के कई हिस्सों में तापमान ऊंचा, कुछ इलाकों में बारिश की हल्की फुहारों से मिली राहत

    देश के कई हिस्सों में तापमान ऊंचा, कुछ इलाकों में बारिश की हल्की फुहारों से मिली राहत

    4 जून 2026 का मौसम देश के कई हिस्सों में गर्मी और आंशिक राहत के मिले-जुले असर के साथ देखा जा रहा है। सुबह से ही तेज धूप और उमस ने लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया है, जबकि कुछ क्षेत्रों में बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश की संभावना से मौसम थोड़ा राहत भरा भी बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, जून के पहले सप्ताह में तापमान अपने चरम पर पहुंचने लगता है और इसी कारण कई राज्यों में गर्म हवाओं का असर भी महसूस किया जा रहा है।

    सुबह के समय कई शहरों में आसमान साफ रहा और सूरज निकलते ही तापमान में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई। दोपहर होते-होते गर्म हवाओं ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। हालांकि कुछ क्षेत्रों में बादलों की हल्की परत ने धूप की तीव्रता को कुछ हद तक कम किया, जिससे मौसम थोड़ा सहनीय बना रहा।

    मध्य भारत में गर्मी का असर ज्यादा, उमस ने बढ़ाई परेशानी
    मध्य प्रदेश सहित मध्य भारत के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर जैसे शहरों में सुबह से ही गर्मी का असर साफ दिखाई दिया। दोपहर के समय लू जैसे हालात बनते नजर आए, जिससे सड़कें सुनसान हो गईं और लोग घरों में रहने को मजबूर हुए।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय वायुमंडल में नमी की मात्रा बढ़ने के कारण उमस ज्यादा महसूस की जा रही है। इससे पसीना और थकान जैसी समस्याएं लोगों को अधिक परेशान कर रही हैं।

    उत्तर भारत में गर्म हवाओं का प्रकोप जारी
    उत्तर भारत के राज्यों में भी मौसम गर्म बना हुआ है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में तापमान लगातार ऊंचा बना हुआ है। राजस्थान के कुछ हिस्सों में लू का असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। वहीं दिल्ली-एनसीआर में भी दोपहर के समय गर्म हवाएं लोगों को परेशान कर रही हैं। हालांकि शाम के समय हल्की हवाओं से थोड़ी राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।

    दक्षिण और पूर्वी भारत में बारिश की संभावना
    दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों और पूर्वी राज्यों में बादलों की सक्रियता देखने को मिल रही है। केरल, कर्नाटक और ओडिशा के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। इन क्षेत्रों में मानसून पूर्व गतिविधियां तेज होती दिख रही हैं, जिससे मौसम में अचानक बदलाव संभव है। बारिश की वजह से इन इलाकों में तापमान थोड़ा नीचे आ सकता है और लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है।

    मौसम विभाग की चेतावनी और सलाह
    मौसम विभाग ने सलाह दी है कि दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच धूप में बाहर निकलने से बचें, क्योंकि इस दौरान हीटवेव का प्रभाव सबसे अधिक होता है। साथ ही लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और हल्के कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। किसानों और बाहर काम करने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है, ताकि गर्मी के दुष्प्रभाव से बचा जा सके।

    आगे कैसा रहेगा मौसम?
    आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है, हालांकि कुछ क्षेत्रों में प्री-मानसून बारिश से आंशिक राहत मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जून के दूसरे सप्ताह के बाद मौसम में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिलेगा और मानसून की गतिविधियां तेज हो सकती हैं।

  • सार्वजनिक परिवहन को मिलेगा नया विस्तार, मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत प्रदेशभर में बस नेटवर्क मजबूत करने की तैयारी

    सार्वजनिक परिवहन को मिलेगा नया विस्तार, मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत प्रदेशभर में बस नेटवर्क मजबूत करने की तैयारी

     मध्य प्रदेश : सरकार प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक सुलभ, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। रक्षाबंधन के अवसर पर राज्य सरकार ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ की शुरुआत करने की तैयारी में है। इस योजना का उद्देश्य विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें नियमित, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का विकल्प मिल सके। सरकार का मानना है कि इस पहल से प्रदेश की संपर्क व्यवस्था मजबूत होगी और आम नागरिकों के साथ-साथ महिलाओं को भी यात्रा के दौरान अधिक सुरक्षा और सुविधा प्राप्त होगी।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस महत्वाकांक्षी योजना की जानकारी देते हुए बताया कि इसका प्रतीकात्मक शुभारंभ रक्षाबंधन के अवसर पर किया जाएगा। योजना के तहत बसों का संचालन चरणबद्ध तरीके से शुरू होगा और पहले चरण में इंदौर संभाग को शामिल किया गया है। जुलाई माह से इस क्षेत्र में बसों के संचालन की शुरुआत होने की संभावना है। इसके बाद योजना का विस्तार प्रदेश के अन्य संभागों और जिलों तक किया जाएगा।

    राज्य सरकार के अनुसार मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का मुख्य लक्ष्य उन क्षेत्रों को बेहतर परिवहन नेटवर्क से जोड़ना है जहां सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता सीमित है। वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों के कई यात्रियों को नियमित बस सेवा के अभाव में आवागमन संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। नई व्यवस्था के माध्यम से इन चुनौतियों को कम करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही महिलाओं की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की जाएंगी।

    योजना के पहले चरण में इंदौर संभाग में बस संचालन की जिम्मेदारी एक विशेष परिवहन संस्था को सौंपी गई है। प्रारंभिक स्तर पर अंतरजिला, शहरी और अंतरराज्यीय मार्गों पर बसों का संचालन किया जाएगा। सरकार ने प्रदेश के विभिन्न जिलों को जोड़ने वाले अनेक प्रमुख मार्गों की पहचान की है, जहां नियमित बस सेवाएं शुरू की जाएंगी। इसके अलावा इंदौर शहर और आसपास के क्षेत्रों के लिए भी अलग परिवहन नेटवर्क विकसित किया जा रहा है ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सके।

    नई योजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश को पड़ोसी राज्यों से जोड़ने वाले मार्गों पर भी बस सेवाएं शुरू करने की तैयारी है। इससे न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी बल्कि व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय संपर्क को भी प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार का मानना है कि बेहतर परिवहन व्यवस्था आर्थिक गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक स्वरूप देने के लिए इलेक्ट्रिक बसों के संचालन पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में जुलाई से इंदौर शहर में बड़ी संख्या में ई-बसों को सड़क पर उतारने की तैयारी की गई है। इससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और शहरी परिवहन व्यवस्था अधिक स्वच्छ तथा टिकाऊ बन सकेगी। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से ईंधन लागत में कमी आने के साथ प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।

    राज्य सरकार ने प्रदेशभर में परिवहन नेटवर्क के विस्तार के लिए व्यापक योजना तैयार की है। विभिन्न संभागीय और जिला मुख्यालयों को जोड़ने वाले सैकड़ों मार्गों की पहचान की गई है, जहां भविष्य में हजारों बसों के संचालन का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का विश्वास है कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा प्रदेश के सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित होगी और इससे लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।

    यह पहल केवल यात्रा सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण विकास, सामाजिक संपर्क, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को भी बेहतर बनाने में सहायक हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत परिवहन नेटवर्क किसी भी राज्य के समग्र विकास की आधारशिला होता है और यह योजना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।