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  • जबलपुर के जस्टिस रूसिया को नई भूमिका, न्यायपालिका में अहम नियुक्ति

    जबलपुर के जस्टिस रूसिया को नई भूमिका, न्यायपालिका में अहम नियुक्ति


    जबलपुर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। न्यायाधीश विवेक रूसिया को हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए गए हैं।

    यह नियुक्ति उस समय हुई जब मौजूदा मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा का प्रमोशन सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में हो गया। उनके स्थान पर अब जस्टिस विवेक रूसिया ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी संभाली है।

    जस्टिस विवेक रूसिया का जन्म 2 अगस्त 1969 को जबलपुर में हुआ था। उन्होंने बीएससी और एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 1992 में मध्यप्रदेश राज्य बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीयन कराया था। उनके पिता स्वर्गीय प्रभाकर रूसिया भी जबलपुर हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता रहे हैं, जिससे उनका कानूनी क्षेत्र से जुड़ाव शुरू से ही रहा।

    उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ सहयोगी के रूप में की और बाद में 1998 में स्वतंत्र प्रैक्टिस शुरू की। इसके बाद वे कोल इंडिया, विभिन्न पावर कंपनियों और सरकारी संस्थानों के पैनल वकील बने।

    जस्टिस रूसिया ने भारत सरकार के स्थायी वकील के रूप में भी सेवाएं दीं और हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन, जबलपुर में संयुक्त सचिव के पद पर भी रहे।

    7 अप्रैल 2016 को उन्हें मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था और 17 मार्च 2018 को वे स्थायी न्यायाधीश बने।

    अब उनकी नियुक्ति कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में हुई है, जिससे न्यायपालिका में प्रशासनिक जिम्मेदारियों का नया अध्याय शुरू हुआ है।

  • जबलपुर में महिला जेल प्रहरी का गंभीर आरोप, नौकरी छोड़ने को हुई मजबूर

    जबलपुर में महिला जेल प्रहरी का गंभीर आरोप, नौकरी छोड़ने को हुई मजबूर


    जबलपुर। पाटन सब जेल में पदस्थ एक महिला जेल प्रहरी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसे लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, जिसके कारण वह नौकरी छोड़ने को मजबूर हो गई है। महिला प्रहरी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर शिकायत की है कि ड्यूटी खत्म होने के बाद भी उसका पीछा किया जाता है और उसे मानसिक दबाव में रखा जा रहा है।

    पूरा विवाद वर्ष 2024 में जेल परिसर में हुई एक घटना से शुरू हुआ बताया जा रहा है, जब एक व्यक्ति बिना अनुमति मुलाकात कक्ष की ओर जाने लगा था। महिला प्रहरी द्वारा नियमों के अनुसार रोके जाने के बाद विवाद उत्पन्न हुआ, जिसके बाद से लगातार तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।

    महिला प्रहरी का आरोप है कि इसके बाद से उसे लगातार परेशान किया जा रहा है और धमकियां भी दी जा रही हैं। शिकायत में कहा गया है कि आरोपी द्वारा उसे कहा जाता है कि “तुम्हारी वर्दी उतरवा दूंगा।” साथ ही यह भी आरोप है कि उसके खिलाफ दबाव बनाने और समझौते के लिए मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है।

    जेल प्रशासन के अनुसार, महिला कर्मचारी 2018 से पदस्थ है और पहले स्थिति सामान्य थी, लेकिन 2024 के बाद से विवाद बढ़ा है। प्रशासन का कहना है कि मामले की जानकारी पुलिस और उच्च अधिकारियों सहित मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक पहुंचाई गई है। इस संबंध में 17 जनवरी 2026 को एफआईआर भी दर्ज की गई, हालांकि पुलिस ने आरोपी को जमानत दे दी थी।

    सब जेलर का कहना है कि महिला प्रहरी अकेले सरकारी आवास में रहती है और लगातार तनाव व दबाव से गुजर रही है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी ठीक से नहीं कर पा रही है।

    वहीं, आरोपित पक्ष का कहना है कि उन पर लगाए गए सभी आरोप गलत हैं और वे स्वयं जेल में कथित अनियमितताओं की शिकायत कर चुके हैं। उनका दावा है कि उनके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई है और यदि किसी प्रकार के आरोप हैं तो उसके सबूत पेश किए जाएं।

    जेल प्रशासन ने एक अन्य घटना का भी उल्लेख किया है, जिसमें एक बंदी द्वारा खुद को चोट पहुंचाने की घटना सामने आई थी। प्रशासन के अनुसार, जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बंदी ने स्वयं को घायल किया था और बाद में इस मामले को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।

    फिलहाल, मामला पुलिस जांच और विभागीय स्तर पर समीक्षा में है। महिला प्रहरी ने सुरक्षा और मानसिक तनाव के चलते नौकरी छोड़ने तक का संकेत दिया है।

  • चीता प्रोजेक्ट के बाद कूनो नेशनल पार्क में बड़ा बदलाव: सूखे इलाके हुए आबाद, बढ़ी वन्यजीवों की हलचल

    चीता प्रोजेक्ट के बाद कूनो नेशनल पार्क में बड़ा बदलाव: सूखे इलाके हुए आबाद, बढ़ी वन्यजीवों की हलचल


    भोपाल। चीता प्रोजेक्ट के बाद कूनो नेशनल पार्क अब तेजी से बदलते इकोसिस्टम की मिसाल बनता जा रहा है। जिन पहाड़ी और सूखे क्षेत्रों में पहले पानी की भारी कमी रहती थी और गर्मियों में वन्यजीव पलायन कर जाते थे, वहां अब हालात बदल गए हैं। सौर ऊर्जा आधारित सोलर लिफ्ट पंप सिस्टम की मदद से कूनो नदी का पानी अब दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे कई तालाब सालभर भरे रहने लगे हैं।

    वन विभाग ने इस दिशा में दो बड़े सोलर पंप सिस्टम स्थापित किए हैं। ओछापुरा रेंज में 42.5 हॉर्स पावर क्षमता वाला पंप कूनो नदी से पानी उठाकर करीब 15 किलोमीटर दूर और 200 मीटर ऊंचाई पर स्थित तालाबों तक पहुंचा रहा है। वहीं वेस्ट पालपुर रेंज में 22.5 हॉर्स पावर का दूसरा सिस्टम 8 किलोमीटर दूर जलाशयों को भर रहा है। इन प्रयासों के कारण पहले जो तालाब गर्मियों में सूख जाते थे, वे अब लगातार जल से भरे रहते हैं।

    वन विभाग के अनुसार यह बदलाव केवल जल प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर वन्यजीवों के आवास और व्यवहार पर भी दिख रहा है। जिन क्षेत्रों से भेड़िया गर्मियों में पलायन कर जाते थे, वे अब पूरे साल स्थायी रूप से देखे जा रहे हैं। चीतल, सांभर और नीलगाय जैसे शाकाहारी वन्यजीवों को अब पानी की तलाश में भटकना नहीं पड़ता।

    कूनो से एक और बड़ी उपलब्धि सामने आई है। लंबे समय से विलुप्त माने जा रहे दुर्लभ फॉरेस्ट आउलेट (वन उल्लू) की 113 साल बाद वापसी दर्ज की गई है। यह 2025 से यहां देखा जा रहा है, जिसे विशेषज्ञ पारिस्थितिकी तंत्र के मजबूत होने का संकेत मान रहे हैं।

    इतना ही नहीं, कूनो के इतिहास में पहली बार जंगली कुत्तों (ढोल) की मौजूदगी भी दर्ज की गई है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव क्षेत्र में बढ़ते जैव विविधता संतुलन को दर्शाता है।

    पर्यटन के क्षेत्र में भी सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। कूनो में बढ़ती वन्यजीव गतिविधियों के चलते पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है, जिससे स्थानीय स्तर पर नेचर गाइड, पर्यटन सेवाओं और छोटे व्यवसायों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।

    वन विभाग का मानना है कि कूनो अब केवल चीता पुनर्वास परियोजना का केंद्र नहीं, बल्कि एक विकसित होते समृद्ध इकोसिस्टम का उदाहरण बन चुका है, जहां संरक्षण और विकास साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं।

  • गांधीनगर के बाद मुबारकपुर में भी मिली भारी खेप, डेढ़ करोड़ से ज्यादा का माल बरामद

    गांधीनगर के बाद मुबारकपुर में भी मिली भारी खेप, डेढ़ करोड़ से ज्यादा का माल बरामद


    मध्य प्रदेश । भोपाल में नशे के लिए कफ सिरप के अवैध कारोबार का बड़ा और संगठित नेटवर्क सामने आया है। यह मामला सिर्फ एक फैक्ट्री तक सीमित नहीं था, बल्कि कई ठिकानों पर फैला हुआ पूरा सप्लाई और स्टोरेज सिस्टम सक्रिय था। एसटीएफ की लगातार कार्रवाई के बाद इस नेटवर्क की परतें खुलती जा रही हैं।

    ताजा कार्रवाई में मुबारकपुर के एक मकान से 23,125 कफ सिरप की शीशियां बरामद की गईं। इससे दो दिन पहले गांधीनगर में एक अवैध री-पैकिंग फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ था, जहां से बड़ी मात्रा में कफ सिरप जब्त किया गया था। दोनों मामलों को जोड़कर देखने पर यह स्पष्ट हो गया है कि यह एक संगठित रैकेट के रूप में काम कर रहा था।

    एसटीएफ ने यह कार्रवाई गांधीनगर से पकड़े गए मुख्य आरोपी अकील खान और आकाश भाटी से पूछताछ के आधार पर की। पूछताछ के दौरान मिले सुरागों के बाद टीम ने मुबारकपुर स्थित ठिकाने पर दबिश दी, जहां से 22,155 ऑफ-कफ और 970 ऑनरेक्स कफ सिरप की शीशियां बरामद हुईं। जब्त माल की अनुमानित कीमत करीब 50 लाख रुपये बताई जा रही है।

    गांधीनगर और मुबारकपुर से कुल मिलाकर अब तक 73,045 शीशियां जब्त की जा चुकी हैं, जिनमें प्रत्येक शीशी 100-100 मिलीलीटर की है। यानी अब तक लगभग 7,305 लीटर कफ सिरप बरामद हुआ है, जिसकी कुल बाजार कीमत डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।

    जांच में सामने आया है कि गांधीनगर स्थित फैक्ट्री में बैच नंबर और एक्सपायरी डेट हटाकर कफ सिरप की री-पैकिंग की जा रही थी, जबकि मुबारकपुर में इन्हीं तैयार शीशियों का भंडारण और सप्लाई किया जा रहा था। इससे यह स्पष्ट संकेत मिला है कि पूरा नेटवर्क दो हिस्सों में बंटकर काम कर रहा था—एक जगह उत्पादन और पैकिंग, और दूसरी जगह स्टोरेज व वितरण।

    एसटीएफ के अनुसार यह नेटवर्क करीब एक साल से सक्रिय था और अभी तक जो स्टॉक पकड़ा गया है, वह केवल एक सप्ताह की सप्लाई का हिस्सा बताया जा रहा है। डीआईजी राहुल लोढ़ा ने बताया कि अब जांच सिर्फ भंडारण या पैकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सप्लाई नेटवर्क को ट्रेस किया जा रहा है।

    जांच में यह भी सामने आया है कि जब्त सिरप पर हरिद्वार स्थित एक दवा निर्माता कंपनी का नाम दर्ज है। एसटीएफ यह जांच कर रही है कि क्या वास्तव में इतनी बड़ी मात्रा में सिरप की वैध सप्लाई हुई थी या इसके नाम का दुरुपयोग किया गया।

    मुबारकपुर से करीब 4 हजार खाली बोतलें भी बरामद हुई हैं, जिससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि नेटवर्क के अन्य ठिकानों पर भी री-पैकिंग या फिलिंग का काम किया जाता था। इस कार्रवाई के बाद पूरे प्रदेश में नशीले कफ सिरप के अवैध कारोबार को लेकर सतर्कता और जांच तेज कर दी गई है।

  • समय पर रिन्यूअल न कराने से दस्तावेज बेकार, बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक प्रभावित

    समय पर रिन्यूअल न कराने से दस्तावेज बेकार, बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक प्रभावित


    मध्य प्रदेश । ग्वालियर में पासपोर्ट रिन्यूअल को लेकर बरती गई लापरवाही अब हजारों लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गई है। शहर में करीब 6500 लोगों के पासपोर्ट की वैधता समाप्त हो चुकी है, लेकिन उन्होंने अब तक उसे रिन्यू नहीं कराया है। इसके चलते ये सभी लोग विदेश यात्रा या उससे जुड़े किसी भी काम के लिए अब इन दस्तावेजों का उपयोग नहीं कर पाएंगे।

    पासपोर्ट सेवा केंद्र के आंकड़ों के अनुसार एक्सपायर पासपोर्ट धारकों में लगभग 2500 बच्चे, 2500 युवा और मध्यम आयु वर्ग के लोग तथा करीब 1500 बुजुर्ग शामिल हैं। यानी समाज के हर वर्ग के लोग इस समस्या से प्रभावित हैं। पासपोर्ट, जो विदेश यात्रा के लिए सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है, अब इनके लिए बेकार साबित हो रहा है।

    जानकारी के अनुसार जनवरी 2024 से अप्रैल 2026 के बीच ग्वालियर पासपोर्ट सेवा केंद्र में कुल 23,144 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 6787 आवेदन रिन्यूअल से जुड़े थे। वहीं वर्ष 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही 4571 नए आवेदन दर्ज किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग अपने पुराने पासपोर्ट का नवीनीकरण कराने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

    पासपोर्ट सेवा केंद्र के अधिकारियों का कहना है कि 18 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों का पासपोर्ट 10 साल तक और बच्चों का 5 साल तक वैध रहता है। इसके समाप्त होने से पहले ही रिन्यूअल कराना जरूरी होता है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की असुविधा से बचा जा सके।

    अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि एक्सपायर पासपोर्ट अब किसी भी प्रकार की अंतरराष्ट्रीय यात्रा या पहचान दस्तावेज के रूप में मान्य नहीं होता, इसलिए समय रहते इसका नवीनीकरण कराना बेहद जरूरी है।

    इस पूरे मामले में लोगों की लापरवाही सामने आने के बाद पासपोर्ट विभाग ने अपील की है कि नागरिक समय रहते अपने दस्तावेजों को अपडेट कराएं, ताकि अचानक विदेश यात्रा या आपात स्थिति में किसी भी तरह की परेशानी न हो।

  • ISBT से बसें चलाने का प्लान फिर फंसा, ऑपरेटरों की शर्तों पर बनी नई व्यवस्था

    ISBT से बसें चलाने का प्लान फिर फंसा, ऑपरेटरों की शर्तों पर बनी नई व्यवस्था


    मध्य प्रदेश । ग्वालियर के बहुप्रतीक्षित इंटर स्टेट बस टर्मिनल (ISBT) से भिंड और मुरैना रूट की बसों का नियमित संचालन शुरू करने को लेकर एक बार फिर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। रविवार को बुलाई गई हाईलेवल बैठक में उम्मीद थी कि अंतिम तारीख तय हो जाएगी, लेकिन बस ऑपरेटरों की जिद के आगे प्रशासनिक निर्णय प्रभावित होते नजर आए और बैठक किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी।

    बैठक में यह तय किया गया कि 15 जून से भिंड और मुरैना रूट की बसें फिलहाल पुराने बस स्टैंड से ही संचालित होंगी, जबकि नए ISBT को केवल ट्रायल स्टॉपेज के रूप में उपयोग किया जाएगा। इस ट्रायल अवधि में बसों को ISBT पर 10 मिनट रुकना अनिवार्य होगा, ताकि व्यवस्था का परीक्षण किया जा सके।

    इसके साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि शहरभर में चलने वाली सभी वीडियो कोच और ई-बसों का संचालन भविष्य में ISBT से किया जाएगा, लेकिन इसे लेकर भी कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है। बैठक में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, सांसद भारत सिंह कुशवाह, कलेक्टर रुचिका चौहान, पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

    हालांकि बैठक के दौरान प्रशासन ने कई विकल्प सुझाए। ऊर्जा मंत्री और सांसद ने सुझाव दिया कि रात 9 बजे से सुबह 9 बजे तक बसें पुराने बस स्टैंड से और दिन के समय ISBT से संचालित की जाएं, ताकि धीरे-धीरे नई व्यवस्था लागू हो सके। लेकिन बस ऑपरेटरों ने सवारी मिलने की समस्या का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं दी।

    कलेक्टर रुचिका चौहान ने स्पष्ट किया कि करोड़ों की लागत से बना ISBT शहर की बस व्यवस्था का केंद्र बनेगा और बसों को वहीं से चलाना अनिवार्य होगा। वहीं पुलिस अधीक्षक ने यात्रियों की सुविधा के लिए नए स्टॉपेज बनाने का सुझाव दिया, लेकिन यह भी ऑपरेटरों को स्वीकार नहीं हुआ।

    बस ऑपरेटर यूनियन ने दावा किया कि ISBT पर यात्रियों की उपलब्धता कम है, इसलिए फिलहाल वहां से संचालन संभव नहीं है। उनका कहना है कि ट्रायल के दौरान स्थिति का आकलन किया जाएगा, जिसके बाद ही स्थायी निर्णय लिया जा सकेगा।

    यह पहला मामला नहीं है जब ISBT से बस संचालन को लेकर समयसीमा तय होने के बावजूद व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है। पहले भी कई बार तारीखें घोषित की गईं, लेकिन धरातल पर बदलाव नहीं हो सका। इससे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था और बस संचालन नीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल नई व्यवस्था 15 दिन के ट्रायल पर टिकी है और इसके परिणामों के आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा।

  • झांसी मंडल के 9 स्टेशनों पर चला सघन टिकट चेकिंग अभियान, जीआरपी-आरपीएफ भी शामिल

    झांसी मंडल के 9 स्टेशनों पर चला सघन टिकट चेकिंग अभियान, जीआरपी-आरपीएफ भी शामिल


    मध्य प्रदेश । झांसी रेल मंडल में बिना टिकट और अनियमित यात्रा करने वालों के खिलाफ रेलवे ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए एक दिन में रिकॉर्ड जुर्माना वसूला है। मंडल रेल प्रबंधक अनिरुद्ध कुमार के आदेश और सीनियर डीसीएम अमन वर्मा के निर्देशन में ग्वालियर सहित मंडल के 9 प्रमुख स्टेशनों पर एक साथ सघन टिकट जांच अभियान चलाया गया।

    इस विशेष अभियान में रेलवे, आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त टीमों ने मिलकर कार्रवाई की। अभियान के दौरान कुल 2,334 यात्रियों को बिना टिकट या अनियमित यात्रा करते हुए पकड़ा गया। इन यात्रियों से रेलवे ने कुल 19.72 लाख रुपए का जुर्माना वसूला, जो सामान्य दिनों की तुलना में बेहद अधिक है।

    रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह वसूली एक रिकॉर्ड मानी जा रही है, क्योंकि सामान्य परिस्थितियों में इतनी राशि की वसूली करीब एक महीने के भीतर होती है। इस अभियान का उद्देश्य बिना टिकट यात्रा पर रोक लगाना और यात्रियों में अनुशासन सुनिश्चित करना है।

    सहायक वाणिज्य प्रबंधक वीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में पूरे अभियान को अंजाम दिया गया। टीमों ने सुबह से लेकर देर शाम तक विभिन्न ट्रेनों और स्टेशनों पर सघन जांच की, जिससे बड़ी संख्या में बिना टिकट यात्री पकड़े गए।

    रेलवे अधिकारियों का कहना है कि आगे भी इस तरह के अभियान नियमित रूप से चलाए जाएंगे ताकि राजस्व की हानि को रोका जा सके और यात्रियों को नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित किया जा सके।

    इस कार्रवाई के बाद झांसी मंडल में यात्रियों के बीच हड़कंप की स्थिति बनी हुई है और रेलवे ने साफ संकेत दिए हैं कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

  • ग्वालियर में विकास कार्यों की बौछार, 4.14 करोड़ की परियोजनाओं का शुभारंभ

    ग्वालियर में विकास कार्यों की बौछार, 4.14 करोड़ की परियोजनाओं का शुभारंभ


    मध्य प्रदेश । ग्वालियर में उपनगर क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर सोमवार को विभिन्न स्थानों पर करीब 4.14 करोड़ रुपए की लागत से होने वाले विकास कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। इस दौरान वे कई परियोजनाओं की शुरुआत के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों से सीधे संवाद भी करेंगे।

    कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10 बजे बिरला नगर स्थित 50 क्वार्टर, जेसी मिल में होगी, जहां जेसी मिल गेट से चार शहर का नाका तक 2 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली नई सीवर लाइन परियोजना का भूमिपूजन किया जाएगा। इस परियोजना को क्षेत्र की सीवरेज व्यवस्था सुधारने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इसके बाद सुबह 11 बजे ऊर्जा मंत्री वार्ड क्रमांक-8 के रामेश्वरी नगर पहुंचेंगे, जहां 30 लाख रुपए की लागत से बनने वाली सीमेंट कांक्रीट सड़क निर्माण कार्य का शुभारंभ करेंगे। यह सड़क स्थानीय लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को पूरा करेगी।

    दोपहर 12 बजे लक्ष्मण तलैया क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री शामिल होंगे, जहां डोंगरपुर उपाध्याय सदन से हनुमान मंदिर तक विभिन्न गलियों में 24 लाख रुपए की लागत से सीसी रोड और नाली निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया जाएगा।

    शाम 5 बजे बहोड़ापुर क्षेत्र में संत कृपाल सिंह आश्रम तिराहे पर 1.60 करोड़ रुपए की लागत से सीवर लाइन और डिवाइडर के दोनों ओर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया जाएगा। यह परियोजना क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

    दिनभर के कार्यक्रमों के बाद ऊर्जा मंत्री शाम 7:30 बजे वार्ड क्रमांक-1 का दौरा करेंगे। इस दौरान वे बजरंग कॉलोनी, गुप्तेश्वर कॉलोनी और होतम सिंह का पुरा क्षेत्र में पहुंचकर चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण करेंगे और जनता से संवाद करेंगे।

    मंत्री स्थानीय नागरिकों की समस्याएं सुनेंगे और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति का भी जायजा लेंगे। उनके दौरे को लेकर संबंधित क्षेत्रों में प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस दौरे को ग्वालियर उपनगर के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे बुनियादी ढांचे को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • हाईवे पर दौड़ती बस में लगी आग, ग्वालियर-इंदौर रूट पर मचा हड़कंप

    हाईवे पर दौड़ती बस में लगी आग, ग्वालियर-इंदौर रूट पर मचा हड़कंप


    मध्य प्रदेश । ग्वालियर से इंदौर जा रही एक स्लीपर वीडियो कोच बस रविवार रात उस समय बड़े हादसे का शिकार होते-होते बच गई, जब आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे पर पनिहार रेलवे स्टेशन के पास उसमें अचानक भीषण आग लग गई। बस में करीब 45 यात्री सवार थे, जो उस समय नींद या सफर की स्थिति में थे। अचानक उठी आग की लपटों ने कुछ ही पलों में पूरे वाहन को अपनी चपेट में ले लिया।

    जानकारी के अनुसार, बस रात करीब 10 बजे ग्वालियर से इंदौर के लिए रवाना हुई थी। रात लगभग 11 बजे जैसे ही बस पनिहार क्षेत्र में हाईवे पर पहुंची, उसके इंजन और पिछले हिस्से से धुआं निकलने लगा। कुछ ही सेकंड में धुआं तेज आग की लपटों में बदल गया, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई।

    स्थिति बिगड़ते देख ड्राइवर और क्लीनर ने तुरंत सूझबूझ दिखाई और बस को सड़क किनारे रोक दिया। इसके बाद यात्रियों को तेजी से बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया गया। आग तेजी से फैल रही थी, जिससे मुख्य दरवाजे के पास भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। कई यात्रियों ने जान बचाने के लिए बस की खिड़कियों के शीशे तोड़कर बाहर छलांग लगा दी।

    स्थानीय राहगीरों और बस स्टाफ की मदद से कुछ ही मिनटों में सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। राहत की बात यह रही कि इस पूरी घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

    घटना की सूचना मिलते ही पनिहार थाना पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। सुरक्षा के मद्देनजर कुछ समय के लिए हाईवे पर यातायात भी रोक दिया गया। दमकलकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक बस का बड़ा हिस्सा जलकर खाक हो चुका था।

    प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है, हालांकि पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मामले की विस्तृत जांच कर रही है। यह भी देखा जा रहा है कि बस में तकनीकी खराबी या किसी अन्य कारण से आग लगी थी या नहीं।

    इस हादसे ने एक बार फिर लंबी दूरी की बसों की सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी जांच को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सभी यात्री सुरक्षित हैं, लेकिन उनका सामान जलकर नष्ट होने की आशंका जताई जा रही है।

  • ग्वालियर से दक्षिण भारत की राह होगी आसान, हबीबगंज-त्रिवेंद्रम एक्सप्रेस अब नियमित ट्रेन

    ग्वालियर से दक्षिण भारत की राह होगी आसान, हबीबगंज-त्रिवेंद्रम एक्सप्रेस अब नियमित ट्रेन


    मध्य प्रदेश । भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लंबे समय से विशेष ट्रेन के रूप में संचालित हो रही हबीबगंज-त्रिवेंद्रम एक्सप्रेस को अब नियमित ट्रेन का दर्जा दे दिया है। इस निर्णय के बाद मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत के बीच रेल संपर्क और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।

    अभी तक यह ट्रेन 07363/07364 नंबर के साथ विशेष सेवा के रूप में संचालित हो रही थी, लेकिन जुलाई से इसका संचालन 17363/17364 नंबर के साथ नियमित ट्रेन के रूप में किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह फैसला यात्रियों की बढ़ती मांग, ट्रेन की उपयोगिता और लगातार मिल रही मांगों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

    नई व्यवस्था के तहत हबीबगंज से इस ट्रेन का नियमित संचालन 6 जुलाई से शुरू होगा, जबकि त्रिवेंद्रम से यह सेवा 9 जुलाई से नियमित रूप से उपलब्ध होगी। इस बदलाव से ग्वालियर-झांसी रूट के यात्रियों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि यह मार्ग दक्षिण भारत से सीधी कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

    रेलवे का मानना है कि ट्रेन के नियमित हो जाने से यात्रियों को अब अधिक स्थिर और भरोसेमंद सेवा मिलेगी। पहले विशेष ट्रेन होने के कारण इसके संचालन में अनिश्चितता रहती थी, जिससे यात्रियों को परेशानी होती थी।

    इसके अलावा नियमित दर्जा मिलने से अग्रिम आरक्षण की सुविधा भी बेहतर हो जाएगी। यात्रियों को अब टिकट बुकिंग में आसानी होगी और लंबी दूरी की यात्रा की योजना पहले से अधिक सुचारु रूप से बनाई जा सकेगी।

    ग्वालियर, झांसी और आसपास के क्षेत्रों से दक्षिण भारत की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह फैसला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल यात्रा आसान होगी, बल्कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी।

    रेलवे अधिकारियों के अनुसार आने वाले समय में इस रूट पर यात्री संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है, जिसे देखते हुए यह कदम बेहद उपयोगी साबित होगा।