Category: Madhya Pradesh

  • ग्वालियर लॉ कॉलेज अपहरण केस में बड़ा मोड़, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

    ग्वालियर लॉ कॉलेज अपहरण केस में बड़ा मोड़, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप


    नई दिल्ली। ग्वालियर में लॉ कॉलेज गेट के बाहर से 17 वर्षीय छात्रा के कथित अपहरण मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। घटना के 24 घंटे बाद भी पुलिस न तो मुख्य आरोपी तक पहुंच सकी है और न ही छात्रा की स्पष्ट लोकेशन का पता चल पाया है। इसी बीच मामले में एक वीडियो सामने आने से स्थिति और उलझ गई है।

    वायरल वीडियो में आरोपी जीतू तोमर छात्रा के साथ नजर आ रहा है और दावा कर रहा है कि यह मामला अपहरण का नहीं बल्कि आपसी सहमति का है। वीडियो में उसने खुद को ग्वालियर निवासी बताया और कहा कि वह और छात्रा पिछले ढाई साल से रिश्ते में हैं।

    वीडियो में जीतू तोमर यह भी कहता दिखाई देता है कि पिछले एक महीने से दोनों के बीच कुछ गलतफहमी चल रही थी, जिसे दूर करने के लिए वह छात्रा से मिलने आया था। उसके अनुसार, दोनों अपनी मर्जी से साथ गए हैं और जल्द ही घर लौट आएंगे। उसने यह भी अपील की कि उसके परिवार को परेशान न किया जाए।

    यह पूरा मामला बुधवार दोपहर करीब 2:30 बजे कंपू थाना क्षेत्र के कैंसर पहाड़िया इलाके का है। जानकारी के अनुसार, लॉ छात्रा अपनी सहेली के साथ कॉलेज गेट के बाहर खड़ी थी, तभी बिना नंबर की बलेनो कार में सवार होकर जीतू तोमर अपने एक साथी के साथ वहां पहुंचा।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोनों आरोपियों ने अचानक छात्रा को जबरन कार में खींच लिया। जब उसकी सहेली ने विरोध किया तो उसे धक्का देकर गिरा दिया गया। इसके बाद आरोपी छात्रा को लेकर मौके से फरार हो गए। भागते समय उन्होंने छात्रा का मोबाइल फोन भी छीनकर सड़क पर फेंक दिया, ताकि किसी तरह का संपर्क न हो सके।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे शहर में नाकाबंदी कर दी गई। हाईवे, टोल प्लाजा और प्रमुख प्रवेश मार्गों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया, लेकिन अब तक आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।

    इस मामले में पुलिस का कहना है कि वीडियो की सत्यता और परिस्थितियों की जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि छात्रा नाबालिग है या नहीं और उसका बयान क्या है, इसके आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

    फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है और सर्विलांस टीम की मदद भी ली जा रही है। वहीं वीडियो सामने आने के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है, जिससे जांच एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है।

    पूरा मामला अब प्रेम संबंध और अपहरण के दावों के बीच उलझ गया है, और पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सच्चाई को जल्द से जल्द सामने लाया जाए।

  • मंदिर के बाहर वारदात की साजिश नाकाम, अवैध पिस्टल के साथ 19 वर्षीय युवक गिरफ्तार

    मंदिर के बाहर वारदात की साजिश नाकाम, अवैध पिस्टल के साथ 19 वर्षीय युवक गिरफ्तार


    नई दिल्ली। ग्वालियर में एक संभावित आपराधिक वारदात को समय रहते टालते हुए थाटीपुर थाना पुलिस ने बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने एक 19 वर्षीय युवक को अवैध पिस्टल और जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर मंदिर के बाहर किसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में बैठा हुआ था।
    गिरफ्तार आरोपी की पहचान नमन सोलंकी के रूप में हुई है, जो शिंदे की छावनी क्षेत्र के भारत टॉकीज के पास का रहने वाला है। पुलिस ने उसके पास से 32 बोर की देसी पिस्टल, एक जिंदा राउंड और उसकी एक्टिवा गाड़ी भी जब्त कर ली है।
    थाना प्रभारी विपेन्द्र सिंह चौहान को मुखबिर से सूचना मिली थी कि भूतेश्वर मंदिर के पास रपट क्षेत्र में एक युवक संदिग्ध स्थिति में एक्टिवा पर बैठा हुआ है और उसके पास अवैध हथियार व जिंदा राउंड मौजूद हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर इलाके की घेराबंदी की और कार्रवाई शुरू की।
    जैसे ही पुलिस ने मौके पर दबिश दी, आरोपी को बिना किसी मौके के पकड़ लिया गया। तलाशी के दौरान उसकी एक्टिवा की डिग्गी से पिस्टल और कारतूस बरामद हुए, जिससे उसके इरादे संदिग्ध पाए गए। पुलिस ने तुरंत उसे हिरासत में लेकर वाहन और हथियार जब्त कर लिया।
    पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। उसे गुरुवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से आगे की पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड पर लेने की तैयारी की जा रही है।
    थाना प्रभारी विपेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि समय रहते मिली सूचना और त्वरित कार्रवाई के कारण एक संभावित बड़ी घटना को टाल दिया गया। यदि पुलिस समय पर नहीं पहुंचती तो आरोपी किसी गंभीर वारदात को अंजाम दे सकता था।
    फिलहाल पुलिस यह जांच कर रही है कि आरोपी किस उद्देश्य से हथियार लेकर वहां पहुंचा था और उसके पीछे कोई बड़ा आपराधिक नेटवर्क या साजिश तो नहीं है। इस बात की भी जांच की जा रही है कि उसे अवैध हथियार कहां से मिला और क्या वह पहले भी किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल रहा है।
    यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि छोटे स्तर पर मिलने वाली सूचना भी बड़ी घटनाओं को रोकने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। पुलिस की सतर्कता से एक संभावित अपराध टल गया और इलाके में बड़ी अनहोनी होने से बचाव हो सका।
  • घूरकर देखने के विवाद में हत्या: ग्वालियर में फायरिंग कर पड़ोसी को मारा, 2 आरोपी गिरफ्तार

    घूरकर देखने के विवाद में हत्या: ग्वालियर में फायरिंग कर पड़ोसी को मारा, 2 आरोपी गिरफ्तार


    नई दिल्ली। ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र के बड़ागांव खुरैरी में एक मामूली से दिखने वाले विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और अंततः हत्या तक पहुंच गया। घूरकर देखने जैसी बात को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।

    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अनार सिंह और राजपाल के रूप में हुई है। दोनों से पूछताछ जारी है। घटना के बाद आरोपी अपने घरों पर ताले लगाकर फरार हो गए थे, जिसके चलते पुलिस ने उनके घरों के बाहर सुरक्षा गार्ड भी तैनात कर दिए हैं। एएसपी अनु बेनीवाल ने बताया कि मामले में अन्य आरोपियों की पहचान हो चुकी है और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

    पुलिस जांच में सामने आया है कि विवाद की शुरुआत घूरकर देखने की बात से हुई थी। इसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी बढ़ी और देखते ही देखते मामला पथराव में बदल गया। इस दौरान एक पक्ष के राजपाल के सिर में पत्थर लगने से उसे गंभीर चोट आई और उसे 12 टांके लगाने पड़े। इसी घटना ने विवाद को और उग्र बना दिया।

    इसके बाद आरोपी पक्ष ने हिंसक प्रतिक्रिया देते हुए फायरिंग शुरू कर दी। आरोप है कि मकान की छत पर चढ़कर कई राउंड गोलियां चलाई गईं। इसी दौरान रमेश पाल को गोली लग गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग दहशत में आ गए।

    घटना में मृतक रमेश पाल की पत्नी और बेटा भी घायल हुए हैं। उन्हें छर्रे लगने से चोट आई है, जबकि दूसरे बेटे को लाठी से चोट पहुंचाई गई। परिवार के लोगों का कहना है कि यह विवाद लंबे समय से चला आ रहा था, लेकिन किसी को उम्मीद नहीं थी कि मामला इतना गंभीर रूप ले लेगा।

    पुलिस के अनुसार, मृतक रमेश पाल का पड़ोसियों अनार सिंह, सुखवीर, रामू और राजपाल से पुराना विवाद था। मंगलवार रात वह अपनी बहन के यहां भात देने के लिए जा रहा था, तभी रास्ते में अनार सिंह से उसकी मुलाकात हुई और कहासुनी शुरू हो गई। कुछ ही देर में विवाद ने हिंसक रूप ले लिया।

    फायरिंग के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इलाके की घेराबंदी की और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। बाकी आरोपियों की तलाश में क्राइम ब्रांच और मुरार थाना पुलिस लगातार दबिश दे रही है।

    इस घटना ने पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। पुलिस ने एहतियात के तौर पर आरोपियों के घरों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

    फिलहाल पुलिस इस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है और जल्द ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की उम्मीद जताई जा रही है। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि मामूली विवाद किस तरह जानलेवा रूप ले सकता है।

  • परिषद मीटिंग हॉल न बनने पर विवाद, भोपाल में कैम्पस निर्माण को लेकर मंथन तेज

    परिषद मीटिंग हॉल न बनने पर विवाद, भोपाल में कैम्पस निर्माण को लेकर मंथन तेज


    नई दिल्ली। भोपाल में नगर निगम की नई प्रशासनिक बिल्डिंग के लोकार्पण के साथ ही एक बड़ी चूक सामने आई है। करीब ₹73 करोड़ की लागत से तैयार इस भव्य भवन में परिषद का मीटिंग हॉल ही नहीं बनाया गया, जिसे अब गंभीर डिजाइन भूल माना जा रहा है। इस कमी के सामने आने के बाद अब प्रशासन परिसर के भीतर ही मीटिंग हॉल बनाने पर मंथन कर रहा है।
    इस मुद्दे ने तब तूल पकड़ा जब लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान महापौर मालती राय ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से 5 एकड़ जमीन की मांग रखी। हालांकि, चर्चा के बाद संकेत मिले कि अलग जमीन लेने की बजाय मौजूदा परिसर में ही नया परिषद हॉल तैयार किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, यह हॉल बिल्डिंग के सामने स्थित पार्किंग क्षेत्र में विकसित किया जा सकता है, ताकि भविष्य में परिषद की बैठकें यहीं आयोजित की जा सकें।
    गौरतलब है कि इस नई बिल्डिंग की लागत पहले ₹43 करोड़ बताई गई थी, लेकिन लोकार्पण के समय यह आंकड़ा बढ़कर ₹73 करोड़ तक पहुंच गया। इसमें सिविल वर्क के अलावा इंटीरियर, तकनीकी और अन्य सुविधाओं पर खर्च शामिल है। यह भवन प्रदेश का पहला ऐसा नगरीय निकाय मुख्यालय बताया जा रहा है जो ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट और जियोथर्मल तकनीक से लैस है।
    ‘अटल भवन’ नाम से पहचानी जाने वाली इस आठ मंजिला इमारत में आधुनिक सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा गया है। पार्किंग क्षेत्र में लगे सोलर पैनलों से लगभग 300 किलोवाट बिजली उत्पादन की क्षमता है। इसके साथ ही, भोपाल निगम द्वारा नीमच जिले में विकसित 10.5 मेगावॉट सोलर प्रोजेक्ट का भी लोकार्पण किया गया।
    भवन के विभिन्न फ्लोर को विभागवार विभाजित किया गया है। ग्राउंड फ्लोर पर जनसंपर्क, टैक्स काउंटर और विवाह पंजीकरण जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं, साथ ही बच्चों के लिए गेम जोन और मेडिकल इमरजेंसी रूम भी बनाया गया है। पहली से चौथी मंजिल तक महापौर कार्यालय, एमआईसी सदस्य, जलकार्य, राजस्व और अन्य विभाग हैं। पांचवीं से सातवीं मंजिल तक स्मार्ट सिटी, आईटी, स्वास्थ्य और योजना से जुड़े विभागों को रखा गया है, जबकि आठवीं मंजिल पर कमिश्नर कार्यालय और स्मार्ट सिटी मुख्यालय स्थित है।
    पूरे भवन में ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ लागू किया गया है, जिससे नागरिकों को एक ही स्थान पर सभी विभागीय सेवाएं मिल सकें। पहले निगम के विभिन्न विभाग शहर के अलग-अलग हिस्सों में संचालित होते थे, लेकिन अब सभी सेवाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी।
    हालांकि, इस आधुनिक भवन को लेकर कई तकनीकी और डिजाइन खामियां भी सामने आई हैं। सबसे बड़ी चूक परिषद मीटिंग हॉल का न होना माना जा रहा है, जिसे अब प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है। इसके लावा सोलर पैनलों की दिशा और ऊर्जा उत्पादन क्षमता को लेकर भी विशेषज्ञों ने कुछ सवाल उठाए हैं।
    बिल्डिंग की डिजाइनिंग तीन अलग-अलग कमिश्नरों के कार्यकाल में पूरी हुई, जिसके चलते परियोजना में कई बदलाव और संशोधन हुए। अब यह भवन न केवल प्रशासनिक केंद्र के रूप में कार्य करेगा, बल्कि शहर की आधुनिक शहरी संरचना का प्रतीक भी माना जा रहा है।
    फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि परिषद मीटिंग हॉल का समाधान किस रूप में किया जाता है और यह भव्य लेकिन विवादों में घिरी इमारत आने वाले समय में कितना प्रभावी साबित होती है।

  • DAVV छात्रों के लिए बड़ी सौगात, तक्षशिला कैंपस में मिलेगा हाई-टेक लेक्चर थिएटर

    DAVV छात्रों के लिए बड़ी सौगात, तक्षशिला कैंपस में मिलेगा हाई-टेक लेक्चर थिएटर


    नई दिल्ली।  इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) के तक्षशिला परिसर में जल्द ही एक आधुनिक G+4 लेक्चर थिएटर का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य विश्वविद्यालय में बढ़ती छात्र संख्या और नए शैक्षणिक पाठ्यक्रमों के कारण उत्पन्न हो रही क्लासरूम की कमी को दूर करना है। यह भवन आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा और इसे तैयार होने में लगभग दो साल का समय लगने की संभावना है।

    विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस नए लेक्चर थिएटर में बड़े लेक्चर हॉल, सेमिनार रूम और स्टूडेंट एक्टिविटी स्पेस शामिल होंगे। इसके साथ ही यहां आधुनिक डिजिटल उपकरणों की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि शिक्षण प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी और तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जा सके।

    कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई ने बताया कि विश्वविद्यालय में लगातार नए कोर्स शुरू किए जा रहे हैं और छात्रों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में मौजूदा क्लासरूम क्षमता भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए तक्षशिला कैंपस में यह नई बिल्डिंग तैयार करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल शैक्षणिक विस्तार ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी संस्थान को मजबूत बनाना है।

    यह नया भवन एजुकेशन डिपार्टमेंट के उस हिस्से में बनाया जाएगा, जहां पहले EMRC संचालित होता था। भवन की संरचना G+4 होगी और इसकी शुरुआती लागत लगभग 2 से 3 करोड़ रुपये अनुमानित की गई है। हालांकि, जैसे-जैसे फ्लोर और सुविधाओं का विस्तार होगा, लागत में वृद्धि संभव है।

    इस परियोजना को हाल ही में विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद बैठक में मंजूरी दी गई थी, जिसमें 590 करोड़ रुपये का बजट भी पास किया गया था। इसी बजट में इस लेक्चर थिएटर के निर्माण को हरी झंडी दी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह कदम न केवल शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि नए कोर्स और सीटों की वृद्धि से विश्वविद्यालय की आय में भी सुधार होगा।

    पिछले कुछ समय में DAVV ने कई विभागों में सीटों की संख्या बढ़ाई है और नए शैक्षणिक कार्यक्रम भी शुरू किए हैं। इससे विश्वविद्यालय में छात्रों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। इसी बढ़ती मांग को देखते हुए आधुनिक शैक्षणिक ढांचे की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

    तक्षशिला कैंपस में बनने वाला यह लेक्चर थिएटर छात्रों के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। यहां मिलने वाली आधुनिक सुविधाएं न केवल पढ़ाई को आसान बनाएंगी, बल्कि रिसर्च और प्रेजेंटेशन आधारित शिक्षा को भी बढ़ावा देंगी।

    कुल मिलाकर, यह परियोजना DAVV के शैक्षणिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालय को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी संस्थानों की श्रेणी में और मजबूती से स्थापित करेगी।

  • राजा रघुवंशी केस: न्यायिक कार्रवाई तेज, चार आरोपियों को नहीं मिली राहत

    राजा रघुवंशी केस: न्यायिक कार्रवाई तेज, चार आरोपियों को नहीं मिली राहत


    नई दिल्ली। इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है और मामले में आरोपियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। शिलांग सेशन कोर्ट ने इस केस के मुख्य आरोपी राज कुशवाह समेत चार आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी याचिकाओं को अस्वीकार किया, हालांकि विस्तृत आदेश की कॉपी अभी उपलब्ध नहीं हुई है।

    राज कुशवाह के साथ-साथ आरोपी विशाल, आनंद और आकाश की जमानत याचिकाएं भी कोर्ट ने नामंजूर कर दीं। इस फैसले के बाद सभी आरोपियों को फिलहाल राहत नहीं मिली है और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा। अदालत का यह रुख मामले की गंभीरता और जांच की दिशा को और स्पष्ट करता है।

    इधर, मामले की एक अन्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत अब कानूनी विवाद का विषय बन गई है। मेघालय सरकार ने इस जमानत के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है और उसे रद्द करने की मांग की है। सरकार का तर्क है कि जांच और ट्रायल की प्रक्रिया को देखते हुए आरोपी को जमानत देना उचित नहीं है और इससे केस की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। इस याचिका पर 12 मई को सुनवाई निर्धारित की गई है।

    राज्य सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि जांच एजेंसियों ने पूरी गंभीरता और निष्पक्षता के साथ काम किया है। मेघालय के उपमुख्यमंत्री प्रेस्टन तिनसोंग ने कहा कि पुलिस और एसआईटी ने अपने स्तर पर सर्वोत्तम प्रयास किए हैं और जांच में किसी प्रकार की कमी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जमानत संबंधी फैसले न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, लेकिन इससे जांच की गुणवत्ता पर सवाल नहीं उठाए जा सकते।

    इस बीच, मामले में नए खुलासों और आरोप-प्रत्यारोपों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि आरोपी एक-दूसरे पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा रहे हैं। इससे केस की दिशा लगातार बदलती नजर आ रही है।

    गौरतलब है कि राजा रघुवंशी हत्याकांड ने इंदौर से लेकर मेघालय तक काफी सुर्खियां बटोरी थीं। हनीमून ट्रिप के दौरान हुई इस कथित हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था। पुलिस जांच में कई परतें खुलने के बाद यह मामला और भी पेचीदा होता गया।

    फिलहाल सभी की नजरें अब हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि सोनम रघुवंशी को मिली जमानत बरकरार रहती है या नहीं। वहीं अन्य आरोपियों की जमानत खारिज होने से जांच एजेंसियों को मामले में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर मिला है।

    यह केस अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया और जांच की पारदर्शिता की एक बड़ी परीक्षा बन गया है, जिस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।

  • इंदौर को बड़ी राहत, सरवटे–गंगवाल रोड प्रोजेक्ट फिर शुरू, अब 80 नहीं बल्कि 60 फीट चौड़ी बनेगी सड़क

    इंदौर को बड़ी राहत, सरवटे–गंगवाल रोड प्रोजेक्ट फिर शुरू, अब 80 नहीं बल्कि 60 फीट चौड़ी बनेगी सड़क


    इंदौर
    शहर में लंबे समय से अटकी पड़ी एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना अब फिर से शुरू होने जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सरवटे से गंगवाल बस स्टैंड के बीच बनने वाली यह सड़क पिछले कई महीनों से विवाद और तकनीकी कारणों के चलते अधूरी पड़ी थी, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाने पर सहमति बन गई है।

    शुरुआत में इस सड़क को 80 फीट चौड़ा करने की योजना तैयार की गई थी, लेकिन स्थानीय निवासियों की आपत्तियों और लगातार चल रहे विरोध के बाद इसमें बदलाव किया गया है। अब यह सड़क 60 फीट चौड़ाई के साथ विकसित की जाएगी। इस निर्णय के बाद परियोजना को मंजूरी मिल गई है और निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की संभावना है।

    यह सड़क निर्माण कार्य स्मार्ट सिटी योजना के तहत शुरू किया गया था, लेकिन बीच में फंडिंग और तकनीकी अड़चनों के कारण काम रुक गया। इसके अलावा बाधक निर्माणों को हटाने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई थी, जिससे परियोजना लंबे समय तक अधर में लटकी रही।

    स्थानीय स्तर पर इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए गए और बजट की व्यवस्था भी की गई, लेकिन निर्माण कार्य फिर भी शुरू नहीं हो सका। अब नए वर्क ऑर्डर और संशोधित चौड़ाई के साथ इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।

    चौड़ाई कम करने के फैसले के बाद स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच सहमति बन गई है, जिससे अब विवाद की स्थिति समाप्त हो गई है। माना जा रहा है कि इस सड़क के बनने से क्षेत्र में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और रोजमर्रा की आवाजाही आसान हो जाएगी।

    यह परियोजना पूरी होने के बाद सरवटे से गंगवाल बस स्टैंड के बीच का इलाका अधिक व्यवस्थित और सुगम बन सकेगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सालभर से रुकी यह योजना कितनी तेजी से पूरी होती है और लोगों को इसका वास्तविक लाभ कब तक मिलता है।

  • भोजशाला मामले में अब जैन समाज की एंट्री…. मांगी पूजा की इजाजत… ASI पर लगाया ये आरोप

    भोजशाला मामले में अब जैन समाज की एंट्री…. मांगी पूजा की इजाजत… ASI पर लगाया ये आरोप


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में धार (Dhar ) की ऐतिहासिक भोजशाला (Historic Bhojshala) को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर खंडपीठ (Indore Bench) में चल रही सुनवाई अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। अब इस बहुचर्चित विवाद में जैन समाज की एंट्री ने कानूनी और धार्मिक बहस को और तेज कर दिया है। जैन समाज की ओर से दायर जनहित याचिका में दावा किया गया है कि भोजशाला मूल रूप से जैन धरोहर रही है, जहां प्राचीन काल में जैन गुरुकुल और मंदिर संचालित होते थे।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जैन समाज की जनहित याचिका को मुख्य याचिका के साथ टैग कर लिया। इसके बाद अब भोजशाला विवाद में जैन पक्ष की कानूनी मौजूदगी भी मजबूत से दर्ज हो गई है। इस मामले में बुधवार को इंदौर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान जैन समाज की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश प्रसाद राजभर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पक्ष रखा।

    राजभर ने ऐतिहासिक दस्तावेजों और प्राचीन संदर्भों का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि राजा भोज ने यह भूमि जैन आचार्य मानतुंग को दान में दी थी। मानतुंग वही आचार्य हैं जिन्होंने जैन धर्म के प्रसिद्ध धार्मिक सूत्र ‘भक्तामर स्तोत्र’ की रचना की थी। उन्होंने दावा किया कि भोजशाला परिसर में कभी जैन मंदिर और गुरुकुल हुआ करता था, साथ ही उन्होंने भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप पर जोर देते हुए कहा, ‘देश के संविधान के तहत जैन धर्म के अनुयायियों को भोजशाला परिसर में पूजा का अधिकार है।’


    भोजशाला की संरचना में जैन वास्तुकला का स्पष्ट उल्लेख

    राजभर ने तर्क दिया कि धार के राजा भोज हिंदू और जैन, दोनों धर्मों के विद्वानों के संरक्षक थे। उनके अनुसार भोजशाला में संचालित शिक्षण केंद्र में जैन विद्वान भी मौजूद थे। राजभर ने ऐतिहासिक लेखों और पुरातात्विक सामग्री के हवाले से दावा किया कि भोजशाला की संरचना के कुछ हिस्सों में जैन वास्तुकला का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है।


    कुछ-कुछ देलवाड़ा के जैन मंदिरों जैसी है स्थापत्य कला

    उन्होंने शिमला की ‘गवर्नमेंट सेंट्रल प्रेस’ द्वारा 1882 में प्रकाशित रिपोर्ट और अन्य प्रकाशनों का जिक्र भी किया जिसमें विवादित परिसर की मस्जिद के कुछ हिस्सों को जैन समुदाय से जुड़ी इमारतों के अवशेषों से निर्मित बताया गया था और इसके कुछ गुंबदों तथा खंभों की तुलना माउंट आबू स्थित प्रसिद्ध देलवाड़ा जैन मंदिरों से की गई थी।


    ‘लंदन में रखी मूर्ति जैन यक्षिणी अम्बिका देवी की’

    राजभर ने कुछ चित्रों और संग्रहालय के विवरणों का हवाला देते हुए कहा कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी जिस मूर्ति को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) की प्रतिमा बता रहा है, वह असल में जैन यक्षिणी अम्बिका की मूर्ति है। उन्होंने तर्क दिया कि इस मूर्ति में जैन तीर्थंकरों के प्रतीक चिन्ह हैं और यह विशिष्ट खूबी इसे देवी सरस्वती की हिंदू शैली की प्रतिमाओं से अलग करती है।


    राजभर बोले- सरकार का रवैया संदेह पैदा कर रहा

    राजभर ने यह भी कहा कि एएसआई ने भोजशाला के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में इस स्मारक से जैन समुदाय के ऐतिहासिक संबंधों को नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार विवादित स्मारक को लेकर एक वर्ग के दावों का सीधे तौर पर समर्थन कर रही है और उसका यह रवैया संदेह उत्पन्न करता है।


    ASI पर लगाया जैन सबूतों को अनदेखा करने का आरोप

    उधर जैन समाज की तरफ से अधिवक्ता प्रिया जैन ने मीडिया से बातचीत करते हुए इस मामले की जानकारी दी और दावा किया कि ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) की हालिया सर्वे रिपोर्ट में भोजशाला में मिले जैन सबूतों को अनदेखा किया गया। प्रिया के अनुसार ASI की खुदाई व सर्वे में भोजशाला से जैन तीर्थंकरों और यक्ष-यक्षणियों की कई खंडित मूर्तियां मिली हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में इन अवशेषों को स्पष्ट रूप से जैन धर्म से जुड़ा नहीं बताया।


    जैन तीर्थकरों और यक्ष-यक्षणियों की खंडित मूर्तियां मिलीं

    प्रिया जैन के मुताबिक सर्वे के दौरान सात फणों वाली ‘सप्त फणी कैनोपी’ संरचना भी सामने आई है, जो जैन प्रतीकों से मेल खाती है। उन्होंने कहा कि जैन समाज की यह लड़ाई किसी धर्म के विरोध में नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सच्चाई और संवैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर है। जैन समाज ने यह भी दावा किया कि लंदन में संरक्षित वाग्देवी प्रतिमा और उससे जुड़े शिलालेख भोजशाला के जैन इतिहास की पुष्टि करते हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर समाज ने भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना के समान अधिकार की मांग हाईकोर्ट से की है।

    हिंदू समाज जिसे देवी सरस्वती की मूर्ति बताता है, वह असल में जैन धर्म की यक्षिणी अम्बिका देवी की मूर्ति है। फोटो में लंदन म्यूजियम में रखी मूर्ति व उसके साथ लिखा उसका परिचय दिख रहा है।


    खुर्शीद ने लंदन में रखी मूर्ति को लेकर भी किया था अलग दावा

    इससे पहले कुछ दिनों पहले हुई मामले की सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा था कि धार में स्थित भोजशाला पर पहला हमला मुस्लिमों ने नहीं, बल्कि गुजरात के सोलंकी शासकों ने किया था, साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि लंदन के म्यूजियम में रखी जिस प्रतिमा को हिंदू समाज वाग्देवी की बता रहा है वह असल में जैन समुदाय की देवी अम्बिका की मूर्ति है। अपने दावे के समर्थन में खुर्शीद ने लेखक रामसेवक गर्ग की लिखी पुस्तक और 2003 में लिखे गए ब्रिटिश म्यूजियम के पत्र का हवाला भी दिया था। उन्होंने कोर्ट को बताया था कि ‘धार को पहले गुजरात के सोलंकी शासकों ने तहस-नहस किया था, जबकि मुस्लिम शासकों ने उजड़े ढांचे को फिर से व्यवस्थित किया था।’

    इसके साथ ही खुर्शीद ने साल 2003 में ब्रिटिश उच्चायोग की ओर से मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भेजे पत्र का हवाला दिया था और यह दावा भी किया कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी जिस मूर्ति को हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता भोजशाला की वाग्देवी (देवी सरस्वती) की प्रतिमा बता रहे हैं, वह असल में जैन समुदाय की देवी अम्बिका की मूर्ति है। बता दें कि भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है।

  • मालवा उत्सव 2026 की धूम: इंदौर में 21 राज्यों की लोक परंपराओं का शानदार प्रदर्शन

    मालवा उत्सव 2026 की धूम: इंदौर में 21 राज्यों की लोक परंपराओं का शानदार प्रदर्शन


    नई दिल्ली।  इंदौर के दशहरा मैदान में मालवा उत्सव 2026 का रंगारंग शुभारंभ हुआ। देशभर के 21 राज्यों के 400 कलाकारों और 450 शिल्पकारों ने अपनी लोक संस्कृति, नृत्य और कला से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सात दिवसीय यह सांस्कृतिक महाकुंभ 12 मई तक चलेगा।

    दीप प्रज्वलन के साथ हुआ उत्सव का आगाज

    इंदौर के दशहरा मैदान में आयोजित इस भव्य आयोजन का उद्घाटन सांसद शंकर लालवानी ने दीप प्रज्वलित कर किया। सात दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं का अनोखा संगम देखने को मिलेगा।

    मालवी मटकी नृत्य ने जीता दिल

    कार्यक्रम की शुरुआत मालवा की पहचान मानी जाने वाली पारंपरिक मालवी मटकी नृत्य से हुई। रंग-बिरंगी पोशाकों में कलाकारों ने सिर पर मटकी और हाथों में छतरियां लेकर ऐसी प्रस्तुति दी कि दर्शक तालियां बजाने पर मजबूर हो गए।

    21 राज्यों की लोक संस्कृति का अद्भुत संगम

    इस उत्सव में गुजरात, गोवा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र सहित 21 राज्यों के कलाकार शामिल हैं। हर राज्य ने अपनी अनूठी परंपरा और लोक कला से मंच को जीवंत कर दिया।

    सिद्धि धमाल और गरबा ने बांधा समां

    गुजरात के सिद्धि धमाल कलाकारों ने सिर से नारियल फोड़कर साहसिक प्रस्तुति दी, जिसने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। वहीं पारंपरिक गरबा रास और झाला वारी रास में भगवान कृष्ण की भक्ति और संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिला।

    आदिवासी और लोक नृत्यों की झलक
    भील समुदाय का भगोरिया नृत्य आदिवासी जीवन की झलक दिखा गया
    तेलंगाना का गुस्साडी नृत्य मोरपंखों से सजे कलाकारों के साथ आकर्षण का केंद्र बना
    गोवा का कुनबी नृत्य मछुआरा समुदाय की जीवनशैली को दर्शाता नजर आया
    छत्तीसगढ़ के कलाकारों ने गेडी नृत्य से संतुलन और कौशल का प्रदर्शन किया
    महाराष्ट्र के धनगरी गाजा नृत्य ने धार्मिक परंपरा को मंच पर जीवंत किया
    शास्त्रीय और धार्मिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

    स्थानीय कलाकारों ने राम स्तुति, कालिया मर्दन और हनुमान चालीसा पर आधारित प्रस्तुतियों से वातावरण को भक्ति भाव से भर दिया। वहीं ओडिसी नृत्य ने शास्त्रीय कला की गरिमा को खूबसूरती से दर्शाया।

    शिल्प बाजार बना आकर्षण का केंद्र

    उत्सव परिसर में सजे शिल्प बाजार में देशभर के हस्तशिल्प और पारंपरिक कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं। यह बाजार प्रतिदिन शाम 4 बजे से आम जनता के लिए खुला रहेगा।

    जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी

    उद्घाटन समारोह में विधायक महेंद्र हार्डिया सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। पूरे आयोजन में सांस्कृतिक एकता और भारतीय परंपराओं की झलक स्पष्ट दिखाई दी।

  • मेटा का हाईकोर्ट में बयान: इंस्टाग्राम डेटा केवल सरकार के साथ साझा, यूजर्स की निजता पर जोर

    मेटा का हाईकोर्ट में बयान: इंस्टाग्राम डेटा केवल सरकार के साथ साझा, यूजर्स की निजता पर जोर


    नई दिल्ली। Meta Platforms ने अदालत को बताया कि इंस्टाग्राम की एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवा जारी रहेगी। कंपनी ने स्पष्ट किया कि पॉलिसी में बदलाव केवल इतना है कि यदि किसी आपराधिक जांच या कानूनी प्रक्रिया के तहत सरकार जानकारी मांगेगी, तभी डेटा उपलब्ध कराया जाएगा। कंपनी ने यह भी कहा कि किसी भी तीसरे पक्ष को यूजर्स का डेटा नहीं दिया जाएगा, जिससे निजता का संरक्षण सुनिश्चित रहेगा।

    इंस्टाग्राम की नई नीति पर विवाद
    Instagram की ओर से 8 मई से एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवा में बदलाव की सूचना दी गई थी, जिसके बाद इसे लेकर याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह बदलाव यूजर्स की प्राइवेसी के अधिकार का उल्लंघन कर सकता है।

    कपिल सिब्बल ने दी नीति की कानूनी व्याख्या
    वरिष्ठ अधिवक्ता Kapil Sibal ने अदालत में कहा कि कंपनी पूरी तरह कानून के दायरे में काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल गैरकानूनी गतिविधियों की रोकथाम या आपराधिक मामलों की जांच के तहत ही सरकार को डेटा उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी तरह की निजी जानकारी सार्वजनिक या तीसरे पक्ष को साझा नहीं की जाएगी।

    डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड पर उठे सवाल
    सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम के तहत बनाए गए डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड ऑफ इंडिया में अभी तक नियुक्तियां नहीं हुई हैं। इसी वजह से शिकायत सीधे अदालत में दायर करनी पड़ी।

    कोर्ट का रुख और आगे की प्रक्रिया
    अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए Meta Platforms से छह सप्ताह के भीतर विस्तृत लिखित जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई में कंपनी की नीति और स्पष्ट हो सकती है।