Category: Madhya Pradesh

  • हर जरूरतमंद तक सम्मान के साथ मदद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 33 लाख हितग्राहियों को 200 करोड़ से ज्यादा पेंशन ट्रांसफर की

    हर जरूरतमंद तक सम्मान के साथ मदद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 33 लाख हितग्राहियों को 200 करोड़ से ज्यादा पेंशन ट्रांसफर की


    भोपाल । मध्यप्रदेश में सामाजिक सुरक्षा को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह स्पष्ट किया कि सरकार की पेंशन योजनाएं केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि भरोसे और संवेदनशीलता का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना ही सरकार का मूल उद्देश्य है और इसी सोच के साथ राज्य में विभिन्न पेंशन योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

    बुधवार को मंत्रालय से आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समग्र पेंशन योजना के तहत 33 लाख 45 हजार से अधिक हितग्राहियों के बैंक खातों में 200 करोड़ 71 लाख रुपए की पेंशन राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से अंतरित की। यह राशि मार्च के लिए अप्रैल माह में भुगतान के रूप में दी गई है। इस पहल ने यह संदेश दिया कि सरकार तकनीक और पारदर्शिता के जरिए जरूरतमंदों तक समय पर सहायता पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार निर्धन निराश्रित वृद्धजनों कल्याणी परित्यक्ता अविवाहित महिलाओं और दिव्यांगजनों के जीवन को सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। उनके अनुसार यह पेंशन केवल आर्थिक सहयोग नहीं बल्कि आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने की प्रेरणा भी देती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर रही हैं।

    कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से जुड़े हितग्राहियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि सहायता समय पर सम्मान के साथ और पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचे ताकि कोई भी नागरिक खुद को असहाय महसूस न करे।

    सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार समग्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के अंतर्गत सबसे अधिक 32 लाख 5 हजार से ज्यादा हितग्राहियों को लाभ मिला है। इसके अलावा मुख्यमंत्री कन्या अभिभावक पेंशन योजना के तहत 62 हजार से अधिक और मानसिक रूप से अविकसित तथा बहु दिव्यांग सहायता योजना के तहत 77 हजार से अधिक हितग्राहियों को भी इस राशि का लाभ दिया गया है। सभी को प्रतिमाह 600 रुपए की दर से पेंशन प्रदान की जा रही है जिससे उनके दैनिक जीवन में आर्थिक सहारा मिलता है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वर्ष 2026-27 के बजट में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए 2 हजार 857 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है। यह दर्शाता है कि सरकार इस क्षेत्र को प्राथमिकता दे रही है और आने वाले समय में और अधिक लोगों को इसका लाभ मिलेगा। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा सामाजिक न्याय मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे जबकि प्रदेशभर के कलेक्टर और कमिश्नर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।

    इस पहल के जरिए सरकार ने एक बार फिर यह साबित किया है कि सामाजिक सुरक्षा केवल योजनाओं तक सीमित नहीं बल्कि यह एक संवेदनशील और जवाबदेह शासन की पहचान है जो हर जरूरतमंद के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए लगातार काम कर रहा है।

  • मॉनिटरिंग में ढिलाई नहीं चलेगी ,रीवा की जल और सीवरेज योजनाओं पर ,उप मुख्यमंत्री का बड़ा एक्शन

    मॉनिटरिंग में ढिलाई नहीं चलेगी ,रीवा की जल और सीवरेज योजनाओं पर ,उप मुख्यमंत्री का बड़ा एक्शन


    भोपाल । मध्यप्रदेश सरकार शहरी विकास और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत है और इसी कड़ी में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा शहर में चल रही जल प्रदाय योजना और सीवरेज सिस्टम के कार्यों की गहन समीक्षा करते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्रालय में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने कार्यों की प्रगति गुणवत्ता समय सीमा और वित्तीय प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सभी परियोजनाएं तय समय में हर हाल में पूरी हों।

    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं का सीधा संबंध आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी से है इसलिए कार्यों में देरी या गुणवत्ता में कमी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से जल प्रदाय व्यवस्था से जुड़े लंबित कार्यों पर ध्यान केंद्रित करते हुए निर्देश दिए कि ओवरहेड वाटर टैंक का निर्माण और जल वितरण नेटवर्क का विस्तार आगामी वर्षा ऋतु से पहले हर स्थिति में पूरा किया जाए। उनका स्पष्ट कहना था कि यदि समय पर यह कार्य पूरे नहीं हुए तो नागरिकों को असुविधा होगी और सरकार की मंशा भी प्रभावित होगी।

    बैठक में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया कि कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए ताकि हर चरण पर प्रगति का आकलन किया जा सके और किसी भी समस्या का तत्काल समाधान निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि योजनाओं का क्रियान्वयन केवल कागजों तक सीमित न रहे बल्कि जमीनी स्तर पर उसकी गुणवत्ता और प्रभाव भी नजर आना चाहिए।

    उप मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों के दौरान आमजन को होने वाली असुविधाओं पर भी विशेष चिंता जताई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यों को इस तरह चरणबद्ध और सुनियोजित तरीके से किया जाए जिससे शहरवासियों की दैनिक जीवनचर्या प्रभावित न हो। साथ ही सुरक्षा के सभी मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर भी उन्होंने जोर दिया।

    सीवरेज सिस्टम की समीक्षा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि शहरी स्वच्छता और जन स्वास्थ्य के लिए यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने शेष पाइपलाइन बिछाने और हाउस सर्विस कनेक्शन के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी एसटीपी के निर्माण कार्य को भी समय पर पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया। बैठक में अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास संजय दुबे और आयुक्त संकेत भोंडवे सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे जिन्होंने परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति और प्रगति की जानकारी दी।

    उप मुख्यमंत्री ने अंत में दोहराया कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं शुरू करना नहीं बल्कि उन्हें तय समय में पूरा कर नागरिकों को उनका वास्तविक लाभ पहुंचाना है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि मॉनिटरिंग और जवाबदेही में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं होनी चाहिए।

    यह समीक्षा बैठक स्पष्ट संकेत देती है कि राज्य सरकार अब शहरी विकास परियोजनाओं में गति और गुणवत्ता दोनों पर बराबर ध्यान दे रही है और जनता को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

  • जहां बहता था पानी वहां बस गई कॉलोनियां नहर पर कब्जे ने खड़ा किया बड़ा सवाल

    जहां बहता था पानी वहां बस गई कॉलोनियां नहर पर कब्जे ने खड़ा किया बड़ा सवाल


    विदिशा ।
    मध्य प्रदेश के विदिशा से सामने आया एक मामला इन दिनों प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक तंत्र दोनों पर सवाल खड़े कर रहा है यहां दशकों पुरानी एक सिंचाई नहर का अस्तित्व लगभग खत्म हो चुका है और जहां कभी किसानों के खेतों तक पानी पहुंचता था वहां अब कंक्रीट की कॉलोनियां खड़ी नजर आ रही हैं इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल किसानों की चिंता बढ़ाई है बल्कि सियासत को भी गरमा दिया है

    दरअसल दौलतपुरा और मदनखेड़ा इलाके में वर्षों पहले उद्वहन सिंचाई योजना के तहत एक नहर बनाई गई थी इस योजना का उद्देश्य था कि हर खेत तक पानी पहुंचे और किसानों की फसल सुरक्षित रहे लेकिन समय के साथ इस नहर की जमीन पर धीरे धीरे कब्जे होते चले गए और अब स्थिति यह है कि नहर का नामोनिशान तक मिटता जा रहा है

    स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां कभी पानी बहता था वहां अब पक्के निर्माण हो चुके हैं और आलीशान कॉलोनियां बस गई हैं केवल एक जर्जर ढांचा बचा है जो इस बात की गवाही देता है कि यहां कभी सिंचाई व्यवस्था मौजूद थी बाकी जमीन पूरी तरह कब्जे में जा चुकी है

    यह मामला अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है क्योंकि यह वही क्षेत्र है जहां से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का संबंध है कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है कांग्रेस प्रवक्ता आनंद जाट ने आरोप लगाया कि किसानों के हितों की बात करने वाले नेता के जिले में ही किसानों की नहर गायब हो गई और जिम्मेदारों को इसकी भनक तक नहीं लगी

    उन्होंने यह भी कहा कि भू माफियाओं ने नहर की जमीन पर कब्जा कर लिया है और भाजपा सरकार उन्हें संरक्षण दे रही है कांग्रेस ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल कार्रवाई कर कब्जा हटाया जाए और किसानों को उनका अधिकार वापस दिलाया जाए

    वहीं प्रशासन की ओर से कहा गया है कि यह मामला 40 से 50 साल पुराना है और पुराने दस्तावेजों को खंगालने में समय लग रहा है अधिकारियों के अनुसार जैसे जैसे रिकॉर्ड मिल रहे हैं उन्हें राजस्व विभाग को सौंपा जा रहा है ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके

    इस बीच राजस्व विभाग ने भी सक्रियता दिखाते हुए अब तक 11 लोगों को नोटिस जारी किए हैं जिन पर नहर की जमीन पर कब्जा करने का आरोप है तहसीलदार निधि लोधी ने बताया कि जांच जारी है और जल्द ही अवैध कब्जों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी

    यह मामला केवल जमीन के कब्जे तक सीमित नहीं है बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि सरकारी योजनाओं की निगरानी और संरक्षण कैसे किया जा रहा है यदि दशकों पुरानी एक महत्वपूर्ण सिंचाई व्यवस्था इस तरह खत्म हो सकती है तो अन्य योजनाओं की स्थिति क्या होगी

    अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन इस नहर को कब्जामुक्त कर पाएगा और किसानों को उनका हक वापस मिल पाएगा या यह मामला भी केवल सियासी बयानबाजी और खबरों तक ही सीमित रह जाएगा

  • कुंडी खोलने की कोशिश पड़ी भारी ,जाली में फंसा हाथ ,रात भर तड़पता रहा चोर

    कुंडी खोलने की कोशिश पड़ी भारी ,जाली में फंसा हाथ ,रात भर तड़पता रहा चोर


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक बेहद अनोखी और हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है जहां चोरी करने पहुंचे एक शातिर चोर की किस्मत ने ऐसा पलटा खाया कि वह खुद ही जाल में फंस गया और पूरी रात उसी हालत में खड़ा रहने को मजबूर हो गया यह घटना अब इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इसे बदकिस्मती की मिसाल बता रहे हैं

    यह पूरा मामला शहर के महाराजपुरा थाना क्षेत्र के दीनदयाल नगर का है जहां मनोज कुशवाहा नाम का एक चोर निर्माणाधीन मकान में सरिया चोरी करने की नीयत से घुसा था देर रात जब वह मकान के अंदर पहुंचा तो उसने खिड़की की जाली के जरिए दरवाजा खोलने की कोशिश की लेकिन जैसे ही उसने अपना हाथ अंदर डाला वह जाली में बुरी तरह फंस गया

    शुरुआत में उसे लगा कि वह आसानी से हाथ निकाल लेगा लेकिन उसकी यह सोच जल्द ही गलत साबित हो गई उसने बार बार कोशिश की लेकिन हाथ बाहर नहीं निकल पाया धीरे धीरे उसकी परेशानी बढ़ती गई और हालत ऐसी हो गई कि उसे पूरी रात उसी स्थिति में खड़े रहना पड़ा

    रात भर दर्द और थकान से जूझते हुए चोर वहीं फंसा रहा और सुबह होने का इंतजार करता रहा सुबह जब मकान मालिक निर्माणाधीन घर पर पहुंचा तो सामने का नजारा देखकर वह हैरान रह गया उसने देखा कि एक व्यक्ति खिड़की की जाली में हाथ फंसाए खड़ा है और खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रहा है

    मकान मालिक ने तुरंत पुलिस को सूचना दी जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने किसी तरह चोर का हाथ जाली से बाहर निकाला और उसे हिरासत में ले लिया

    पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले भी इलाके में कई चोरी की वारदातों को अंजाम दे चुका है वह खासतौर पर निर्माणाधीन मकानों को निशाना बनाता था जहां से सरिया और अन्य सामान चोरी करता था पूछताछ के दौरान उसने कई घटनाओं को स्वीकार भी किया है

    फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और उसके द्वारा की गई अन्य चोरियों के बारे में जानकारी जुटाने के साथ साथ चोरी का सामान बरामद करने की कोशिश भी की जा रही है इस अजीब घटना के बाद पूरे इलाके में चर्चा का माहौल है लोग इसे लेकर तरह तरह की बातें कर रहे हैं कई लोग हंसी मजाक में कह रहे हैं कि चोरी करने गया था लेकिन खुद ही जाल में फंस गया

    यह घटना एक तरह से यह भी बताती है कि अपराध का अंत अक्सर बुरा ही होता है और कभी कभी हालात ऐसे बन जाते हैं कि अपराधी अपनी ही चाल में फंस जाता है फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है

  • भोपाल में अतिथि शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन, वादों पर अमल न होने से नाराजगी, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

    भोपाल में अतिथि शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन, वादों पर अमल न होने से नाराजगी, आंदोलन तेज करने की चेतावनी


    भोपाल। अतिथि शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे हजारों अतिथि शिक्षकों ने बुधवार को राजधानी भोपाल में जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने सरकार पर चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया और लंबित मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की। उन्होंने साफ कहा कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

    प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने गुरुजियों की तर्ज पर नीति लागू करने, सीधी भर्ती में बोनस अंक देने और वार्षिक अनुबंध के जरिए भविष्य सुरक्षित करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे शिक्षकों में गहरा असंतोष है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अतिथि शिक्षकों को न्याय दिलाने की बात कही थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई निर्णय सामने नहीं आया है।

    सरकार पर वादों से मुकरने का आरोप

    संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी रामचंद्र नागर और प्रदेश अध्यक्ष के.सी. पवार ने कहा कि सरकार वार्षिक अनुबंध लागू करने के अपने वादे से पीछे हटती नजर आ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 30 अप्रैल के बाद कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो करीब सवा लाख अतिथि शिक्षकों के सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने यह भी मांग रखी कि सीधी भर्ती, प्रमोशन और ट्रांसफर से प्रभावित अनुभवी अतिथि शिक्षकों को रिक्त पदों पर प्राथमिकता के आधार पर समायोजित किया जाए।

    ई-अटेंडेंस और भुगतान में समस्याएं उठाईं

    प्रदेश सचिव रविकांत गुप्ता ने ई-अटेंडेंस प्रणाली में आ रही तकनीकी खामियों पर चिंता जताई। उनका कहना है कि कई बार तकनीकी कारणों से उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती, जिससे मानदेय कट जाता है। साथ ही कुछ मामलों में सितंबर महीने का भुगतान भी अभी तक लंबित है।

    भर्ती प्रक्रिया में अनुभव को लेकर उठे सवाल
    बी.एम. खान ने भर्ती प्रक्रिया में मौजूद विसंगतियों को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 से कार्यरत अतिथि शिक्षकों को उनके अनुभव का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। वर्तमान में स्कोर कार्ड में केवल 5 साल का अनुभव जोड़ा जा रहा है, जबकि इसे बढ़ाकर हर वर्ष 10 अंक (अधिकतम 100 अंक) किया जाना चाहिए। इसके अलावा 2008 और 2011 की पात्रता परीक्षाओं के अंक भी शामिल करने की मांग की गई। प्रांत अध्यक्ष तूफान शर्मा ने कहा कि अतिथि शिक्षक सभी आवश्यक योग्यताओं को पूरा करते हैं, इसलिए उनके अनुभव के आधार पर उन्हें न्याय मिलना चाहिए।

    मुख्य मांगें इस प्रकार हैं
    नियमितीकरण के लिए विशेष विभागीय पात्रता परीक्षा आयोजित कर कम से कम 30% पद अतिथि शिक्षकों के लिए आरक्षित किए जाएं।
    शिक्षक भर्ती में 50% पद अतिथि शिक्षकों के लिए तय हों, हर वर्ष 4 बोनस अंक (अधिकतम 20) दिए जाएं और पात्रता अंकों में 10% की छूट दी जाए।
    स्कोर कार्ड में हर वर्ष 10 अंक (अधिकतम 100) जोड़े जाएं और 50 दिन कार्य पूर्ण होने पर अनुभव अंक मिले, साथ ही 2011 संविदा परीक्षा के अंक भी जोड़े जाएं।
    12 महीने का वार्षिक अनुबंध लागू किया जाए और कार्यमुक्त होने पर समायोजन सुनिश्चित किया जाए।
    बीमा, पीएफ, स्वास्थ्य सुविधाएं और 13 आकस्मिक व 3 ऐच्छिक अवकाश प्रदान किए जाएं।
    ई-अटेंडेंस प्रणाली में सुधार कर काटे गए मानदेय का शीघ्र भुगतान किया जाए।
    तकनीकी समस्या होने पर ऑफलाइन उपस्थिति को मान्यता दी जाए।
    पुराने आश्वासनों को लागू करने की मांग तेज
    प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने कहा कि अतिथि शिक्षकों को लेकर पहले कई घोषणाएं की गई थीं और इस मुद्दे को राजनीतिक समर्थन भी मिला था। लेकिन अब उन वादों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे शिक्षकों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।

  • चंबल में मासूम पर मौत का हमला ,नहाने गई 7 साल की बच्ची को मगरमच्छ खींच ले गया

    चंबल में मासूम पर मौत का हमला ,नहाने गई 7 साल की बच्ची को मगरमच्छ खींच ले गया


    मुरैना । मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जहां चंबल नदी में नहाने गई एक मासूम बच्ची मगरमच्छ का शिकार हो गई इस घटना ने पूरे इलाके में भय और शोक का माहौल पैदा कर दिया है

    घटना चिन्नोनी थाना क्षेत्र के ग्राम वैदपुरा की बताई जा रही है जहां मंगलवार को विजय केवट की दो बेटियां रावी उर्फ सखी और राजकुमारी रोज की तरह नदी में नहाने गई थीं दोनों बहनें नदी किनारे खेलते और नहाते हुए समय बिता रही थीं तभी अचानक पानी में छिपे बैठे मगरमच्छ ने हमला कर दिया

    प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार मगरमच्छ ने सात वर्षीय रावी को अचानक अपने जबड़ों में जकड़ लिया और उसे गहरे पानी की ओर खींच ले गया पूरी घटना इतनी तेजी से हुई कि दूसरी बच्ची कुछ समझ ही नहीं पाई और घबराकर तुरंत घर की ओर भागी वहां पहुंचकर उसने परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी

    बेटी के साथ हुई इस भयावह घटना की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया परिजन और ग्रामीण तुरंत नदी किनारे पहुंचे लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी नदी में मगरमच्छ के हमले के बाद बच्ची का कोई पता नहीं चल पाया घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन भी मौके पर पहुंचा और तलाश अभियान शुरू किया गया

    ग्रामीणों का कहना है कि चंबल नदी में मगरमच्छों की मौजूदगी पहले से ही है लेकिन इसके बावजूद कई गांवों के लोग रोजमर्रा के कामों जैसे नहाने और कपड़े धोने के लिए नदी पर निर्भर हैं ऐसे में इस तरह की घटनाएं लगातार खतरे की घंटी बनकर सामने आ रही हैं

    इस दर्दनाक हादसे के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है हर कोई इस घटना से स्तब्ध है और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नदी किनारे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं और लोगों को जागरूक किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके

    पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और वन विभाग की टीम के साथ मिलकर मगरमच्छ की तलाश और क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है साथ ही प्रशासन द्वारा लोगों को नदी में न जाने की सलाह भी दी जा रही है यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि प्राकृतिक जल स्रोतों के आसपास सुरक्षा इंतजाम कितने जरूरी हैं खासकर उन इलाकों में जहां जंगली जीवों की मौजूदगी लगातार बनी रहती है

  • प्रेमिका की शादी के दिन युवक ने ली आखिरी सांस ,गुना में सुसाइड से मचा हड़कंप

    प्रेमिका की शादी के दिन युवक ने ली आखिरी सांस ,गुना में सुसाइड से मचा हड़कंप


    गुना । मध्य प्रदेश के गुना से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जहां एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है 25 वर्षीय प्रद्युम्न सिंह सहरिया की मौत ने न केवल उसके परिवार को झकझोर कर रख दिया है बल्कि प्रेम संबंधों के जटिल पहलुओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं

    जानकारी के अनुसार प्रद्युम्न ने मंगलवार शाम नेशनल हाईवे के किनारे जहरीला पदार्थ निगल लिया था इसके बाद वह खुद ही बदहवास हालत में पुलिस चौकी पहुंचा और अपनी स्थिति के बारे में जानकारी दी पुलिस ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया लेकिन हालत गंभीर होने के कारण बुधवार तड़के इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई

    प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि इस आत्मघाती कदम के पीछे एक प्रेम संबंध की कहानी जुड़ी हुई है बताया जा रहा है कि प्रद्युम्न पहले से शादीशुदा था लेकिन करीब पांच साल पहले उसका एक युवती के साथ प्रेम संबंध शुरू हुआ था यह रिश्ता धीरे धीरे इतना गहरा हो गया कि उसने अपनी शादीशुदा जिंदगी से दूरी बना ली

    परिजनों के अनुसार प्रद्युम्न ने अपनी प्रेमिका के कहने पर करीब दो साल पहले अपनी पत्नी को छोड़ दिया था उसे उम्मीद थी कि अब वह अपनी प्रेमिका के साथ नई जिंदगी शुरू करेगा लेकिन हालात उसके मुताबिक नहीं रहे दोनों के बीच लगातार तनाव बना रहा और आखिरकार युवती ने उसके साथ रहने से इनकार कर दिया

    घटना ने तब और भी दुखद मोड़ ले लिया जब पता चला कि जिस दिन प्रद्युम्न की हालत अस्पताल में गंभीर बनी हुई थी उसी दिन उसकी प्रेमिका की शादी की रस्में बमोरी क्षेत्र में चल रही थीं इस संयोग ने इस पूरी घटना को और भी मार्मिक बना दिया

    स्थानीय लोगों के अनुसार प्रद्युम्न मानसिक रूप से काफी परेशान था और रिश्ते में आई दूरी को वह सहन नहीं कर पा रहा था हालांकि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घटना के पीछे और कोई कारण तो नहीं है

    यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि भावनात्मक तनाव और रिश्तों में असंतुलन व्यक्ति को किस हद तक प्रभावित कर सकता है जरूरत इस बात की है कि ऐसे मामलों में समय रहते संवाद और समझदारी से स्थिति को संभाला जाए फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और परिजनों के बयान भी लिए जा रहे हैं वहीं पूरे इलाके में इस घटना को लेकर शोक और चर्चा का माहौल बना हुआ है

  • दलित आदिवासी और OBC के मुद्दे पर सरकार घिरी UCC पर नेता प्रतिपक्ष का बड़ा बयान

    दलित आदिवासी और OBC के मुद्दे पर सरकार घिरी UCC पर नेता प्रतिपक्ष का बड़ा बयान

    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर सियासी माहौल गर्माता जा रहा है सरकार जहां इस कानून को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है वहीं विपक्ष ने इस पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार की मंशा और प्रक्रिया दोनों पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है

    उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि UCC को सर्वसम्मति से लागू किया जाएगा या इसे जबरन थोपा जाएगा उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संविधान और लोकतंत्र की भावना के विपरीत काम कर रही है सिंघार ने खास तौर पर दलित और आदिवासी समुदायों को लेकर चिंता जताई और पूछा कि क्या इन वर्गों को UCC के दायरे में शामिल किया जाएगा या नहीं

    उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सात सदस्यों की कमेटी आखिर कैसे तय करेगी कि किन लोगों को इस कानून में शामिल किया जाना चाहिए और किन्हें नहीं उनके अनुसार इतने महत्वपूर्ण विषय पर निर्णय लेने से पहले प्रदेश की जनता से व्यापक राय लेना जरूरी है उन्होंने सरकार से अपील की कि वह इस मुद्दे पर पारदर्शिता बरते और जनता के साथ संवाद स्थापित करे

    इस दौरान सिंघार ने असलम चमड़ा मामले को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा उन्होंने आरोप लगाया कि असलम हो या अन्य आरोपी उन्हें सत्ता पक्ष का संरक्षण मिल रहा है उन्होंने कहा कि इन मामलों में नगर निगम और विभागीय स्तर पर कनेक्शन सामने आ रहे हैं लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है

    नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि विपक्ष ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए मुद्दों को उठाया लेकिन सत्ता पक्ष ने आरोपियों को बचाने का काम किया उन्होंने सरकार से जवाब मांगा कि आखिर इन मामलों में सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही

    इसके अलावा सिंघार ने OBC आरक्षण के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय पर गंभीर नहीं है और केवल राजनीतिक लाभ के लिए OBC वर्ग का इस्तेमाल कर रही है उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बार बार मामले को कोर्ट के पाले में डाल रही है और खुद जिम्मेदारी लेने से बच रही है

    सिंघार ने यह भी कहा कि सरकार अपने लोगों को लाभ पहुंचाने में ज्यादा रुचि दिखा रही है जबकि आम जनता के मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कब तक OBC आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर निर्णय टलता रहेगा

    कुल मिलाकर UCC OBC आरक्षण और अन्य मामलों को लेकर मध्य प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है जहां एक ओर सरकार इसे सुधार की दिशा में कदम बता रही है वहीं विपक्ष इसे जनता के हितों के खिलाफ बताते हुए लगातार हमलावर बना हुआ है आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है और प्रदेश की राजनीति को प्रभावित कर सकता है

  • सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन को नया नेतृत्व उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने दी संजीव कांकर को शुभकामनाएं

    सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन को नया नेतृत्व उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने दी संजीव कांकर को शुभकामनाएं


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रशासनिक गतिविधियों के बीच एक महत्वपूर्ण मुलाकात सामने आई जब उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल से मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन लिमिटेड के नवनियुक्त उपाध्यक्ष संजीव कांकर ने मंत्रालय में सौजन्य भेंट की

    इस दौरान उप मुख्यमंत्री ने संजीव कांकर को उनके नए दायित्व के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल कार्यकाल की कामना की उन्होंने विश्वास जताया कि कांकर अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए जनसेवा को और अधिक प्रभावी बनाएंगे

    राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन राज्य की महत्वपूर्ण संस्था है जो आम जनता तक आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाती है ऐसे में इस संस्था के नेतृत्व की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है उन्होंने उम्मीद जताई कि नए उपाध्यक्ष के रूप में संजीव कांकर अपनी जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ निभाएंगे

    वहीं संजीव कांकर ने उप मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है वह उसे पूरी निष्ठा के साथ निभाने का प्रयास करेंगे उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य आम जनता तक जरूरी वस्तुओं की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करना और व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाना होगा

    मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन लिमिटेड राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुचारू रूप से संचालित करने वाली प्रमुख संस्था है इसके माध्यम से राशन और अन्य आवश्यक वस्तुएं जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाई जाती हैं

    यह मुलाकात न केवल औपचारिक रही बल्कि इसे जनसेवा को मजबूत बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में भी देखा जा रहा है आने वाले समय में इस नई जिम्मेदारी के साथ सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन के कामकाज में और अधिक सुधार की उम्मीद जताई जा रही है

  • रेल सुरक्षा और सिंहस्थ 2028 की तैयारी तेज डीजीपी मकवाणा ने बुलाई हाई लेवल बैठक

    रेल सुरक्षा और सिंहस्थ 2028 की तैयारी तेज डीजीपी मकवाणा ने बुलाई हाई लेवल बैठक


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक में रेलवे सुरक्षा और आगामी सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर व्यापक रणनीति बनाई गई बैठक की अध्यक्षता पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने की जिसमें राज्य और केंद्र की कई प्रमुख सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी शामिल हुए

    इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश से होकर गुजरने वाले विस्तृत रेलवे नेटवर्क की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और बड़े आयोजनों के मद्देनजर समय रहते तैयारी सुनिश्चित करना था मध्य प्रदेश देश के महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर का केंद्र है ऐसे में यहां की सुरक्षा व्यवस्था का मजबूत होना बेहद जरूरी माना जा रहा है

    पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि रेलवे सुरक्षा से जुड़े हर पहलू पर पहले से तैयारी की जाए और लगातार निगरानी रखी जाए उन्होंने कहा कि यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा सुविधा देना सर्वोच्च प्राथमिकता है इसके लिए संबंधित सभी विभागों को आपसी तालमेल के साथ काम करना होगा

    बैठक में विशेष रूप से सिंहस्थ 2028 जैसे विशाल धार्मिक आयोजन को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति तैयार करने पर जोर दिया गया सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आवागमन को देखते हुए रेल यातायात प्रबंधन भीड़ नियंत्रण अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन और स्टेशन प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई

    इसके साथ ही रेलवे परिसरों में कानून व्यवस्था बनाए रखने ट्रैक को अवरोधमुक्त रखने संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने महिला और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा बढ़ाने और अपराधों की रोकथाम जैसे मुद्दों पर भी मंथन किया गया अधिकारियों ने संवेदनशील स्टेशनों पर विशेष सुरक्षा प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर भी विचार रखा

    बैठक में राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ साथ रेलवे और खुफिया एजेंसियों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए जिनमें रेलवे के विभिन्न जोन और सुरक्षा बलों के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े इस दौरान बहु एजेंसी समन्वय को और प्रभावी बनाने पर सहमति बनी ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके

    इस तरह की बैठक को राज्य और केंद्र के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है खासतौर पर ऐसे समय में जब बड़े धार्मिक आयोजनों और बढ़ते रेल यातायात के चलते सुरक्षा चुनौतियां भी बढ़ रही हैं

    कुल मिलाकर यह बैठक रेलवे सुरक्षा को सुदृढ़ करने और सिंहस्थ 2028 जैसे बड़े आयोजन को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने की दिशा में एक ठोस पहल के रूप में देखी जा रही है आने वाले समय में इन योजनाओं के क्रियान्वयन पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी